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पाकिस्तान में बिजली महंगी होने के कारणों का विश्लेषण, जिसमें जनरेशन, ट्रांसमिशन, टैक्स और मुद्रा गिरावट शामिल हैं।

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Key Takeaways

  • पाकिस्तान में बिजली महंगी होने के पीछे मुख्य कारण आयातित ईंधन की लागत, मुद्रा गिरावट और उच्च ब्याज दरें हैं।
  • ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की कमी और ऊर्जा चोरी बिजली की लागत बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • सरकार द्वारा लगाए गए टैक्स और अतिरिक्त शुल्क उपभोक्ताओं के बिजली बिलों को भारी बनाते हैं।
  • अतिरिक्त जनरेशन क्षमता के लिए भुगतान करना भी बिजली की कीमतों को बढ़ाता है।
  • बिजली की महंगाई को कम करने के लिए संरचनात्मक सुधार और बेहतर प्रबंधन आवश्यक हैं।

What the video covers

  • पाकिस्तान में 2021 से 2024 के बीच बिजली की कीमतें दोगुनी से अधिक बढ़ी हैं, जबकि दुनिया में बिजली सस्ती हो रही है।
  • बिजली की लागत के पांच मुख्य घटक हैं: जनरेशन, ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन, टैक्सेस और अतिरिक्त शुल्क।
  • जनरेशन लागत बढ़ने के मुख्य कारणों में आयातित ईंधन पर निर्भरता, वैश्विक ईंधन कीमतों में वृद्धि, और मुद्रा की कमजोरी शामिल हैं।
  • ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर पुराना और अधूरा है, जिससे बिजली की ट्रांसमिशन लॉस और लागत बढ़ती है।
  • डिस्ट्रीब्यूशन में ऊर्जा चोरी, बिलों की अदायगी में कमी और पुरानी तारों की वजह से नुकसान होता है।
  • मुद्रा की कमजोरी से बिजली की कीमतों में लगभग 14% की वृद्धि हुई है।
  • ब्याज दरों में वृद्धि ने बिजली की लागत पर भारी प्रभाव डाला है, जिससे बिलों में 45% तक का इजाफा हुआ है।
  • पाकिस्तान को उपयोग न होने वाली अतिरिक्त जनरेशन क्षमता के लिए भी भारी भुगतान करना पड़ता है।
  • बिजली बिलों में कई तरह के टैक्स और सरचार्ज शामिल हैं, जो उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं।
  • अगले वीडियो में जनरेशन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

Answers

Questions about this video

पाकिस्तान में बिजली की कीमतें इतनी तेजी से क्यों बढ़ी हैं?

पाकिस्तान में बिजली की कीमतें मुख्य रूप से आयातित ईंधन की बढ़ती कीमतें, मुद्रा की कमजोरी, उच्च ब्याज दरें, ऊर्जा चोरी और पुरानी ट्रांसमिशन एवं डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की वजह से बढ़ी हैं।

बिजली की लागत के मुख्य घटक कौन-कौन से हैं?

बिजली की लागत के पांच मुख्य घटक हैं: जनरेशन (बिजली उत्पादन), ट्रांसमिशन (पावर हाउस से डिस्ट्रीब्यूशन तक), डिस्ट्रीब्यूशन (घर तक बिजली पहुंचाना), टैक्सेस और अतिरिक्त शुल्क।

सरकार बिजली बिलों में टैक्स क्यों लगाती है?

सरकार बिजली बिलों के जरिए विभिन्न टैक्स और सरचार्ज वसूलती है ताकि ऊर्जा क्षेत्र की वित्तीय जरूरतों को पूरा किया जा सके, लेकिन इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

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00:00
Speaker A
दुनिया भर में बिजली सस्ती हो रही है, लेकिन पाकिस्तान में बिजली महंगी कैसे हो गई? 2021 और 24 के दरमियान हमारी पर यूनिट टैरिफ ₹2500000। [संगीत] वेलकम टू पाकिस्तान एंड काउंटिंग। मेरा नाम जुनेद इकबाल है और थैंक यू फॉर वाचिंग।
00:41
Speaker A
आवर एनर्जी सीरीज इंडिया के मुकाबले में पाकिस्तान की बिजली ढाई गुना और बांग्लादेश के मुकाबले में 35 गुना महंगी है जिस हरसे में इंडिया की बिजली 12 सेंट से कम होकर आठ और बांग्लादेश की बिजली 9 सेंट से कम होकर छ पर आई उसी अरसे में
00:58
Speaker A
आवर एनर्जी सीरीज। इंडिया के मुकाबले में पाकिस्तान की बिजली ढाई गुना और बांग्लादेश के मुकाबले में 35 गुना महंगी है, जिस हरसे में इंडिया की बिजली 12 सेंट से कम होकर आठ और बांग्लादेश की बिजली 9 सेंट से कम होकर छ पर आई। उसी अरसे में
01:12
Speaker A
हैं उनको ब्रेक डाउन करना जरूरी है बिजली की कॉस्ट में पांच मेजर कंपोनेंट्स होते हैं पहला जनरेशन बिजली बनाने की कॉस्ट सेकंड ट्रांसमिशन बिजली बिजली घर से डिस्ट्रीब्यूशन कंपनीज तक बिजली पहुंचाने की कॉस्ट तीसरी डिस्ट्रीब्यूशन के इलेक्ट्रिक लाहौर इलेक्ट्रिक से आपके घर
01:30
Speaker A
हमारी बिजली 12 सेंट पर किलोवाट आवर से बढ़कर 21 सेंट पर पहुंच गई। दुनिया भर में बिजली सस्ती हो रही है, लेकिन पाकिस्तान में बिजली महंगी कैसे हो गई? इसको समझने के लिए बिजली के कॉस्ट के जो बजर फैक्टर्स
01:49
Speaker A
इन सबके ऊपर 26 पर एडिशनल चार्जेस लगकर आते हैं इनको वन बाय वन ब्रेक करते हैं सबसे पहले जनरेशन की कॉस्ट ऊपर क्यों चली गई इसके चार मेजर रीजंस हैं सबसे पहला है रिलायंस ऑन इंपोर्टेड फ्यूल 2021 में
02:04
Speaker A
हैं, उनको ब्रेक डाउन करना जरूरी है। बिजली की कॉस्ट में पांच मेजर कंपोनेंट्स होते हैं। पहला जनरेशन, बिजली बनाने की कॉस्ट। सेकंड ट्रांसमिशन, बिजली घर से डिस्ट्रीब्यूशन कंपनीज तक बिजली पहुंचाने की कॉस्ट। तीसरी डिस्ट्रीब्यूशन, के इलेक्ट्रिक लाहौर इलेक्ट्रिक से आपके घर
02:20
Speaker A
फ का इजाफा हुआ था कोल की कीमत में 200 फ का और नेचुरल गैस की कीमत में 300 फ का इजाफा हुआ था अब कीमतें कुछ स्टेबलाइज हो गई हैं लेकिन पूरी तरह रिकव अभी भी नहीं हुई अगर नेचुरल गैस की कीमत में 10 फ का
02:34
Speaker A
तक या कारखानों तक बिजली पहुंचाने की कॉस्ट। चौथी हुकूमत के लागू करता टैक्सेस और पांचवा एडिशनल चार्जेस। अगर हम इसको ब्रेक डाउन करें तो आपके बिल में 48 फ कॉस्ट जनरेशन की है, 3 पर ट्रांसमिशन की, 8 पर डिस्ट्रीब्यूशन की, 15 पर टैक्सेस की और
03:07
Speaker A
6 फी से महंगी हो जाती है यानी 20221 से 24 के दरमियान जो यूनिट प्राइस में 25 से 54 तक का जंप हुआ है इसमें से 14 सिर्फ रुपए की कमजोर होने की वजह से ऐड हुए हैं तीसरा फैक्टर्स इंटरेस्ट रेट का है जब
03:22
Speaker A
इन सबके ऊपर 26 पर एडिशनल चार्जेस लगकर आते हैं। इनको वन बाय वन ब्रेक करते हैं। सबसे पहले जनरेशन की कॉस्ट ऊपर क्यों चली गई? इसके चार मेजर रीजंस हैं। सबसे पहला है रिलायंस ऑन इंपोर्टेड फ्यूल। 2021 में
03:36
Speaker A
मार्च 2022 में फेड का रेट 1/2 पर पे था जो जुलाई 2023 में 5.5 पर चला गया इससे हमारी कॉस्ट ऑफ सर्विसिंग डेट आसमान पर चढ़ गई तो जब भी फेट का रेट 1 फ से बढ़ता है हमारी एनर्जी की कॉस्ट 3 फ से बढ़ जाती
03:53
Speaker A
हमारी 47 फ जनरेशन इंपोर्टेड फ्यूल से हुई थी। यह गिरकर 2024 में 22 पर पर आ गई, लेकिन हम ओवरऑल देखें तो 2018 ऑनवर्ड ग्लोबल फ्यूल प्राइसेस काफी ऊपर चले गई थी। सिर्फ 2021 और 22 के दरमियान ऑयल की कीमत में 85
04:10
Speaker A
मेगावाट है चाहे हम इसे इस्तेमाल करें या ना करें हमें हर साल 2.1 ट्रिलियन र की कैपेसिटी पेमेंट देनी पड़ती है टू गिव यू कॉन्टेक्स्ट हमारा पूरा जो एजुकेशन बजट है वो 1.1 ट्रिलियन है सो 2.1 ट्रिलियन आप
04:24
Speaker A
फ का इजाफा हुआ था, कोल की कीमत में 200 फ का और नेचुरल गैस की कीमत में 300 फ का इजाफा हुआ था। अब कीमतें कुछ स्टेबलाइज हो गई हैं, लेकिन पूरी तरह रिकवरी अभी भी नहीं हुई। अगर नेचुरल गैस की कीमत में 10 फ का
04:39
Speaker A
हम इस्तेमाल नहीं कर रहे होते अब इस एक्सेस कैपेसिटी पे हमें 50 अरब की पेमेंट देनी पड़ती है जो और पर यूनिट बेसिस तकरीबन 55 बनती है एंड टू सम अप जनरेशन कॉस्ट इंपोर्टेड फ्यूल गिरता हुआ रुपया और
04:56
Speaker A
इजाफा होता है तो बिजली 2 फ से महंगी हो जाती है। 2021 और 24 के दरमियान हमारी पर यूनिट टैरिफ ₹2500000 09 का था, जो आज ₹ का हो गया। जब रुपया 10 फीस से गिरता है तो हमारी बिजली
05:10
Speaker A
होता है जिसकी वजह से आपके बिल में तकरीबन 30 पैसे ऐड होते हैं सेकंड ट्रांसमिशन का इंफ्रास्ट्रक्चर इनकंप्लीट है हमारी साउथ में बिजली बनाने की जो पर यूनिट कॉस्ट है वो ₹1 की है और नॉर्थ में ₹5000000 हम साउथ की बिजली पूरी तरह नॉर्थ पहुंचा
05:33
Speaker A
6 फी से महंगी हो जाती है। यानी 2021 से 24 के दरमियान जो यूनिट प्राइस में 25 से 54 तक का जंप हुआ है, इसमें से 14 सिर्फ रुपए की कमजोर होने की वजह से ऐड हुए हैं। तीसरा फैक्टर्स इंटरेस्ट रेट का है। जब
05:45
Speaker A
हम इसकी कैपेसिटी पेमेंट तो पूरी कर रहे हैं लेकिन ट्रांसमिशन कंप्लीट ना होने की वजह से हम इसकी मुश्किल से 75 फ बिजली नेशनल ग्रिड में पहुंचा पा रहे हैं अगर साउथ से नॉर्थ पूरी बिजली पहुंचे तो हमारे
05:58
Speaker A
पावर प्लांट्स लगाए जाते हैं तो उनकी 80 फ फाइनेंसिंग लोन से होती है और ये लोन मेनली इंटरनेशनल मार्केट से लिए जाते हैं। तो मार्च 2022 में फेड का रेट जो बताता है कि यूएस का डॉलर का बॉरिंग गेट क्या है, तो
06:12
Speaker A
तो कैपेसिटी पेमेंट्स भी डिवाइड होकर पर यूनिट बेसिस पर कम हो जाएगी अब आते हैं डिस्ट्रीब्यूशन की तरफ पाकिस्तान के टोटल डिस्ट्रीब्यूशन लॉसेस 509 अरब के हैं इसकी वजह पुरानी तारों की वजह से एनर्जी लॉस बिजली की चोरी और बिलों की अदम अदायगी है
06:30
Speaker A
मार्च 2022 में फेड का रेट 1/2 पर पे था, जो जुलाई 2023 में 5.5 पर चला गया। इससे हमारी कॉस्ट ऑफ सर्विसिंग डेट आसमान पर चढ़ गई। तो जब भी फेड का रेट 1 फ से बढ़ता है, हमारी एनर्जी की कॉस्ट 3 फ से बढ़ जाती
06:46
Speaker A
समझने की बात यह है कि पूरे मुल्क में जितनी भी बिजली चोरी होती है या बिल अदा नहीं होते और उसका जो टोटल मिला के नुकसान होता है 509 अरब का ये सबके बिल्स में डिवाइड होता है तो अगर आप अपना बिल अदा
06:59
Speaker A
है। तो 25 से 44 के इजाफे में तकरीबन 45 का इजाफा सिर्फ इंटरेस्ट ट्रेट्स बढ़ने की वजह से है। तो जनरेशन कॉस्ट बढ़ने की चौथी वजह जो है, वो है एक्सेस कैपेसिटी। नाउ पाकिस्तान की टोटल जनरेशन कैपेसिटी 46000
07:16
Speaker A
₹ पर यूनिट का इजाफा अब आते हैं टैक्सेस पर जहां बिजली के बिल के जरिए हुकूमत सात अलग किस्म के टैक्सेस कलेक्ट कर रही है पिछे साल हुकूमत ने 860 बिलियन बिजली के बिल्स के थ्रू कलेक्ट किया हुकूमत अपने
07:28
Speaker A
मेगावाट है। चाहे हम इसे इस्तेमाल करें या ना करें, हमें हर साल 2.1 ट्रिलियन र की कैपेसिटी पेमेंट देनी पड़ती है। टू गिव यू कॉन्टेक्स्ट, हमारा पूरा जो एजुकेशन बजट है, वो 1.1 ट्रिलियन है। सो 2.1 ट्रिलियन आप
07:45
Speaker A
मजीद टैक्सेस ऐड होते हैं अब सवाल ये बनता है कि बिजली के बिल में इनकम टैक्स क्यों लग के आ रहा है आपको हमारी टैक्स वाली सेकंड एपिसोड याद होगी जिसमें हमने डिस्कस किया था कि सिर्फ 1.4 पर ऑफ पॉपुलेशन अपने
07:58
Speaker A
समझ ले इसका डबल हो गया। तो अब हमारी पीक समर डिमांड है, वो 34000 मे मेगावाट की है और विंटर डिमांड 177000 मेगावाट की है। तो ऑन एवरेज पूरे साल हमारे पास कम से कम 23000 मेगावाट की कैपेसिटी होती है, जिसको
08:12
Speaker A
पर पिछले साल पूरे रिटेल सेक्टर ने सिर्फ ₹ अरब के करीब टैक्स दिया और पूरे एग्रीकल्चर सेक्टर ने 4 बिलियन के करीब टैक्स दिया तो हुकूमत यह टैक्स का बोझ अमीर और गरीब सब पर बिल्स के जरिए डिवाइड
08:25
Speaker A
हम इस्तेमाल नहीं कर रहे होते। अब इस एक्सेस कैपेसिटी पे हमें 50 अरब की पेमेंट देनी पड़ती है, जो और पर यूनिट बेसिस तकरीबन 55 बनती है। एंड टू सम अप जनरेशन कॉस्ट इंपोर्टेड फ्यूल गिरता हुआ रुपया और
08:40
Speaker A
इजाफे के जरिए कलेक्ट किया जा रहा है अब आते हैं इजाफा चार्जेस पर जो आपके बिल का 26 पर हिस्सा है पहले तो 8 पर सरचार्ज लगाया जाता है जब बिल अदा नहीं होते या बिल की चोरी होती है तो हुकूमत को फिर भी
08:54
Speaker A
बढ़ते हुए इंटरेस्ट रेट्स और एक्सेस कैपेसिटी की विधा से हमारी जनरेशन कॉस्ट ऊपर चली गई। अब आते हैं ट्रांसमिशन की तरफ, जिसमें तीन मेजर फैक्टर्स हैं। पहले तो ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर पुराना है, जिसकी वजह से तकरीबन 10 फस ट्रांसमिशन लॉस
09:05
Speaker A
हैं अब ये उधार या सर्कुलर डेट जो है बढ़ते बढ़ते 2.6 ट्रिलियन का हो गया और इसका जो सालाना सूद जाता है वही तकरीबन 150 बिलियन का हो गया है और उसकी वजह से 1 पर यूनिट आपके बिल में इजाफे सरचार्ज लगकर
09:19
Speaker A
होता है, जिसकी वजह से आपके बिल में तकरीबन 30 पैसे ऐड होते हैं। सेकंड ट्रांसमिशन का इंफ्रास्ट्रक्चर इनकंप्लीट है। हमारी साउथ में बिजली बनाने की जो पर यूनिट कॉस्ट है, वो ₹1 की है और नॉर्थ में ₹5000000। हम साउथ की बिजली पूरी तरह नॉर्थ पहुंचा
09:35
Speaker A
इंडस्ट्री अपने खुद के लगाए हुए प्लांट से बिजली बना रही है और घरेलू सारफ जो अफोर्ड कर सकते हैं वो सोलर की तरफ मूव करें और जूजू ये अच्छे कस्टमर्स जो पे भी करते हैं और ज्यादा कंज्यूम भी करते हैं ग्रिड से
09:48
Speaker A
ही नहीं पा रहे। मिसाल के तौर पे हमारे जो मोस्ट एफिशिएंट प्लांट्स हैं, थर कोल्ड का 2400 मेगावाट का प्लांट है या फिर आरो और झंपर में जो हमारा विन कॉरिडोर है, जिसमें हमारे तकरीबन 1850 मेगावाटस लगे हुए हैं।
10:02
Speaker A
तरफ बिजली महंगी होती जा रही है और कंजमेट गिरती जा रही है कोई भी मुल्क सस्ती बिजली के बगैर तरक्की नहीं कर सकता आने वाली वीडियोस में हम जनरेशन ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन के चैलेंजेबल डाउन करेंगे थैंक यू एंड खुदा
10:19
Speaker A
हम इसकी कैपेसिटी पेमेंट तो पूरी कर रहे हैं, लेकिन ट्रांसमिशन कंप्लीट ना होने की वजह से हम इसकी मुश्किल से 75 फ बिजली नेशनल ग्रिड में पहुंचा पा रहे हैं। अगर साउथ से नॉर्थ पूरी बिजली पहुंचे तो हमारे
Topics:पाकिस्तान बिजली महंगाईबिजली लागत विश्लेषणजनरेशन कॉस्टट्रांसमिशन लॉसडिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्कमुद्रा गिरावटब्याज दरेंटैक्स और सरचार्जऊर्जा चोरीविद्युत बिल

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