दुआ करते समय पूरी यकीन और भरोसे के साथ अल्लाह से मांगें, यह समझकर कि वही बेहतर फैसला करेगा।
Key Takeaways
- दुआ में पूरी conviction और भरोसा जरूरी है।
- अल्लाह से सीधे अपनी जरूरतें मांगें, बिना शर्त के।
- अल्लाह ही बेहतर निर्णय करता है कि क्या आपके लिए अच्छा है।
- दुआ करने से पहले यह याद रखें कि आप किससे मांग रहे हैं।
- भरोसा रखें कि आपकी दुआ सुनी और कबूल की जाएगी।
What the video covers
- दुआ करते समय यह न सोचें कि अल्लाह से केवल वही चीज मांगें जो आपके लिए बेहतर हो।
- दुआ पूरी conviction और यकीन के साथ करनी चाहिए कि अल्लाह आपकी दुआ को सुनता और कबूल करता है।
- अगर मांगी गई चीज आपके लिए बेहतर नहीं है तो अल्लाह उसे आपके लिए बेहतर बना देगा या बदल देगा।
- हमें यह समझना चाहिए कि हम नहीं जानते कि हमारे लिए क्या बेहतर है, यह निर्णय अल्लाह का है।
- हजरत जिक्रिया अल सलाम की दुआ का उदाहरण दिया गया, जिन्होंने सीधे अल्लाह से मांगा।
- दुआ में सीधे और स्पष्ट रूप से अपनी जरूरतें अल्लाह के सामने रखनी चाहिए।
- अल्लाह हर चीज पर कुदरत रखता है और हमारी दुआओं को सुनने वाला है।
- दुआ करने से पहले यह याद रखना जरूरी है कि आप किससे मांग रहे हैं।
- दुआ का तरीका और मनोभाव बहुत महत्वपूर्ण है, सिर्फ शर्तों के साथ नहीं।
- भरोसा और यकीन के साथ दुआ करना इंसान की आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाता है।
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Speaker A
जब भी आप दुआ करो तो ये मत बोलना कि अल्लाह ये चीज मुझे दे दे। अगर ये मेरे हक पे बेहतर है तो। आपने हमेशा दुआ इतने यकीन और कन्विक्शन के साथ करनी है कि अगर वो चीज आपके हक में बेहतर ना भी हो तो भी।
Speaker A
अल्लाह ताला उसको आपके हक में बेहतर करने की कुदरत रखता है। ये चीज अपने ज़हन में रख के दुआ करनी है। दुआ करने से पहले इस बात को ज़हन में रखो कि आप मांग किससे रहे हो। वो अल्लाह है। वो आपका रब है। वो हर चीज
Speaker A
पे कुदरत रखता है। आप अपने छोटे से दिमाग से सोचते हो। आपको लगता है ये पॉसिबल नहीं है। वो पॉसिबल नहीं है। ये आपके हक में बेहतर नहीं हो सकता। वो चीज आपके हक में बेहतर नहीं होगी। मैंने जब कुरान पाक में
Speaker A
हजरत जिक्रिया अल सलाम का वाकया पढ़ा जब उन्होंने अल्लाह ताला से दुआ की औलाद के लिए तो आप ये देखो उन्होंने कितना डायरेक्टली दुआ की। उन्होंने ये नहीं कहा कि या अल्लाह मेरे हक में बेहतर है तो मुझे अता कर दे। ये वो नहीं क्योंकि
Speaker A
अल्लाह ताला से मांगने का तरीका ही ये है। आपको जो चाहिए आप उसको डायरेक्टली अल्लाह ताला के सामने रखो कि या अल्लाह ये चीज मुझे चाहिए। आपके हक में बेहतर करना ना करना उसका काम है। आप नहीं जानते हो क्या
Speaker A
चीज आपके हक में बेहतर हो सकती है क्या नहीं हो सकती। भरोसा रख के दुआ करो। उस पे यकीन रख के दुआ करो कि वो दुआ को सुनने वाला है, कबूल करने वाला है। [संगीत] ओ
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