कानपुर मस्जिद त्रासदी का इतिहास, ब्रिटिश सरकार की सड़कों चौड़ीकरण योजना और मुसलमानों के संघर्ष की कहानी।
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Key Takeaways
- ब्रिटिश सरकार की सड़कों चौड़ीकरण योजना ने धार्मिक स्थलों के बीच तनाव पैदा किया।
- मस्जिद मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र है और वे इसे बचाने के लिए संघर्ष करते हैं।
- सरकारी अधिकारियों द्वारा मुसलमानों की भावनाओं की अनदेखी से हिंसक संघर्ष हुआ।
- आखिरकार समझौते के माध्यम से विवाद का समाधान निकाला गया।
- यह घटना मुसलमानों की राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने वाली थी।
What the video covers
- 1908 में ब्रिटिश सरकार ने कानपुर की सड़कों को चौड़ा करने के लिए 2.5 लाख रुपये मंजूर किए।
- सड़क चौड़ीकरण के दौरान मस्जिद के सामने स्थित मंदिर को ध्वस्त करने का प्रस्ताव था, जिसे हिंदुओं ने विरोध किया।
- मस्जिद और मंदिर के बीच सीमित जगह के कारण सड़क को सीमित करने का निर्णय लिया गया।
- मुसलमानों ने मस्जिद की सुरक्षा के लिए कड़ा विरोध किया क्योंकि मस्जिद उनके लिए बहुत पवित्र है।
- 1913 में लेफ्टिनेंट गवर्नर सर जेम्स ने मस्जिद का निरीक्षण किया और मुसलमानों की भावनाओं को नजरअंदाज करते हुए पुलिस कार्रवाई की।
- 3 अगस्त 1913 को कानपुर के मुसलमानों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके दौरान पुलिस ने फायरिंग की।
- फायरिंग से मुसलमानों को भारी नुकसान हुआ और तनाव गहरा गया।
- बाद में इंग्लैंड से आए प्रतिनिधियों ने मुसलमानों के साथ समझौता किया और मस्जिद के पुनर्निर्माण व सड़क विस्तार की अनुमति दी।
- मुकदमों को वापस लिया गया और मस्जिद की आज़ादी सुनिश्चित की गई।
- यह घटना हिंदुस्तान के मुसलमानों में राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Chapters
- 00:00ब्रिटिश सरकार की सड़क चौड़ीकरण योजना और विवाद की शुरुआत
- 00:45मंदिर ध्वस्त करने का प्रस्ताव और हिंदुओं का विरोध
- 02:06मस्जिद की सुरक्षा और मुसलमानों का संघर्ष
- 03:26सरकारी अधिकारियों का मस्जिद निरीक्षण और विवाद बढ़ना
- 04:263 अगस्त 1913 की पुलिस फायरिंग और मुसलमानों को नुकसान
- 05:19समझौता, मस्जिद की पुनर्स्थापना और राजनीतिक जागरूकता
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Speaker A
अस्सलाम वालेकुम दोस्तों, हम पढ़ने जा रहे हैं कानपुर मास्टर गढ़ के बारे में। यह ब्रिटिश गवर्नमेंट की एक बहुत बड़ी बटरी मिसाल थी इंडिया में। 1908 में अप की हुकूमत ने कानपुर की सड़कों को चौड़ा करने और दिग्ज जो फलाही कम थे, उनको और पूरा करने के लिए कुल 2.5 लाख की रकम मंजूर की। इस स्कीम को वशी करना एक सिंगिंग मसाला बन गया था। अगर इस सीधा चौड़ा किया जा रहा तो इसके रास्ते में मछली बाजार में मस्जिद के बिल्कुल सामने एक मंदिर पड़ा था, जिसको डिमोलिश करने का प्लान बनाया गया। जब हिंदुओं को इस तस्वीर का इल हुआ तो उन्होंने हुकूमत को इस स्कीम को तारक करने पर मजबूर कर दिया। मंदिर की हिफाजत के लिए एक ही रास्ता बचा था कि सड़कों को किसी और सीमित माना जाए क्योंकि मस्जिद और मंदिर के दरमियान सड़क के शुरू होने के लिए ज्यादा जगह नहीं था। इसलिए मुसलमान को इस खतरे का अकेले का सामना था कि मस्जिद का जो मछली हिस्सा है, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट जो कमेटी थी और जो हुकूमत, उन्होंने अपना जो कम था वह पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जान का इरादा कर लिया। जैसा कि आप लोग जानते हैं कि मुसलमान की नजर में मस्जिद बहुत मुकद्दस है और मुसलमान इस पर कभी भी समझौता नहीं करेंगे। अप्रैल 1912 में, 1913 में अप के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर को कानपुर के मुसलमान के ग्रुप की जैब से शायद करने के खिलाफ 12 अप्रैल 1913 को रजिस्ट्रेशन 6 मैं 6 मैं 1913 को जेम्स मिस्टर ने जो हद बेचे वाले थे, यानी कि मेमोरियलिस्ट है, उनको खत भेजा जिसमें यह नतीजा खास किया गया कि मस्जिद के हम से कहा जाएगा कि वो दूसरी तरफ का इत्तेफाक करें। जी पर जो म्युनिसिपल बोर्ड है, उनके लिए धोने की जगह बनाएगी। इसी तरह 20 जुलाई 1913 को लेफ्टिनेंट गवर्नर सर जेम्स ने खुद मस्जिद का जायजा लिया। उन्होंने अगले हीरोज मुसलमान के जज्बात को रेड करते हुए मस्जिद के आधा पुलिस साईनाथ की। कानपुर के मुसलमान तीन अगस्त को इतिहास में जमा हुए। तो क्या किया? एक पुलिस फोर्स जिसे हम को मुंतशिर करने के लिए भेजा गया था, जिन्होंने और टेलर के हम पर फायरिंग की, जिसकी वजह से मुसलमान को क्या हुआ? काफी नुकसान हुआ। ने मुसलमान के जख्म को क्या किया? माजिद गहरा कर दिया। इसके साथ कुछ दोनों बाद इसने कानपुर का दौरा किया। और इन पुलीम पुलिस वालों में जो मेरिट सर्टिफिकेट है, जिन्होंने क्या किया थे? जिन्होंने फायरिंग में हिस्सा लिया। पता चला है कि वेस्टर्न के साथ इसकी जो पॉलिशिंग के बड़े में मोहम्मद क्या हो गए इंग्लैंड गए ताकि जो आवाम है उसको सानिया से आकर करें। इमाम के साथ कानपुर का दौरा किया। इसने मुसलमान के साथ एक समझौता किया जिसके जारी उन्हें आवामी सड़क पर एक नए और के तमीज करने की इजाजत दी गई ताकि वो कोई हुई रिहाइश को पूरा कर सके। उन्होंने मस्जिद का दौरा किया और तेजियों के रिहाई का हुकुम दिया और जो मुकदमा पर बनाए गए थे वह सारे वापस खत्म कर दिया। इसी तरह इस सानिया ने क्या किया? इसने हिंदुस्तान के जो मुसलमान थे, उसमें सियासी शोर बेदारी करने में एक हम किरदार अदा किया। दोस्तों, यह था आज का हमारा लेक्चर। इंशाल्लाह अगले टॉपिक में टॉपिक के बारे में बात करेंगे।
Speaker A
कम थे उनको और पूरा करने के लिए कल 2.5 लाख की रकम मंजूर की इस स्कीम को वशी करना एक सिंगिंग मसाला बन गया था अगर इस सीधा चौड़ा किया जा रहे तो इसके रास्ते में मछली बाजार में मस्जिद के
Speaker A
बिल्कुल सामने एक मंदिर पढ़ा था जिसको डिमोलिश करने का प्लेन बनाया गया जब हिंदुओं को इस तस्वीर का इल हुआ तो उन्होंने हुकूमत को इस स्कीम को तारक करने पर मजबूर कर दिया मंदिर की हिफाजत के लिए एक ही रास्ता बच्चा था के सड़कों किसी
Speaker A
और सीमित माना जाए क्योंकि मस्जिद और मंदिर के दरमियां सड़क के शुरू होने के लिए ज्यादा जगह नहीं था इसलिए मुसलमान को इस खतरत का एकांत का सामना था की मस्जिद का जो मछली हिस्सा है इंप्रूवमेंट ट्रस्ट जो कमेटी थी
Speaker A
और जो हुकूमत उन्होंने अपना जो कम था वह पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जान का इरादा कर लिया जैसा की आप लोग जानते हैं की मुसलमान की नजर में मस्जिद बहुत मुकद्दस है और मुसलमान मुसलमान इस पर कभी भी समझौता
Speaker A
नहीं करेंगे अप्रैल 1912 में 1913 में अप के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर को कानपुर के मुसलमान के ग्रुप की जैब से शायद करने के खिलाफ 12 अप्रैल 1913 को रजिस्ट्रेशन 6 मैं 6 मैं 1913 को जेम्स मिस्टर ने जो हद बेचे वाले थे यानी की मेमोरियलिस्ट
Speaker A
है उनको खाट भेजो जिसमें यह नतीजा खास किया गया के मस्जिद के हम से कहा जाएगा की वो दूसरी तरफ का इत्तेफाक करें जी पर जो म्युनिसिपल बोर्ड है उनके लिए धोने की जगह बनाएगी इसी तरह 20 जुलाई 1913 को
Speaker A
लेफ्टिनेंट गवर्नर सर जेम्स ने खुद मस्जिद का जायजा लिया उन्होंने अगले हीरोज मुसलमान के जज्बात को रेड करते हुए मस्जिद के आधा पुलिस साईनाथ करती है कानपुर के मुसलमान तीन अगस्त को इतिहास में जमा हुए तो क्या किया एक पुलिस फोर्स जिसे हम को मुंतशिर
Speaker A
करने के लिए भेजो गया था जिन्होंने और टेलर के हम पर फायरिंग की जिसकी वजह से मुसलमान को क्या हुआ काफी नुकसान हुआ ने मुसलमान के जख्म को क्या किया माजिद गहरा कर दिया इसके साथ कुछ दोनों बाद इसने कानपुर का दौरा किया
Speaker A
और इन पुलीम पुलिस वालों में जो मेरिट सर्टिफिकेट है जिन्होंने क्या किया थे जिन्होंने फायरिंग में हिस्सा लिए पता चला है की वेस्टर्न के साथ इसकी जो पॉलिशिंग के बड़े में मोहम्मद क्या हो गए इंग्लैंड गए ताकि जो आवाम है
Speaker A
उसको सानिया से आकर करें इमाम के साथ कानपुर का दौरा किया इसने मुसलमान के साथ एक समझौता किया जिसके जारी उन्हें आवामी सड़क पर एक नए और के तमीज करने की इजाजत दी गई ताकि वो कोई हुई रिहाइश को रिहाइश को पूरा कर सके उन्होंने
Speaker A
मस्जिद के मस्जिद का दौरा किया और तेजियों के रिहाई का हुकुम दिया और जो मुकदमा पर बनाए गए थे वह सारे वापस खत्म कर दिया इसी तरह इस सानिया ने क्या किया इसने हिंदुस्तान के जो मुसलमान थे उसमें सियासी शोर बेदारी करने में एक हम
Speaker A
किरदार अदा किया दोस्तों यह था आज का हमारा लेक्चर इंशाल्लाह अगले टॉपिक में टॉपिक के बड़े में बात करेंगे
Topics:कानपुर मस्जिद त्रासदीब्रिटिश भारतसड़क चौड़ीकरणमस्जिद और मंदिर विवादमुसलमान विरोध1913 कानपुर घटनालेफ्टिनेंट गवर्नर सर जेम्सपुलिस फायरिंगधार्मिक संघर्षसामाजिक जागरूकता











