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The Journey of Modesty and Allah's Mercy | Hablullah Podcast

इस वीडियो में हिजाब और इस्लामिक जीवनशैली की यात्रा और अल्लाह की रहमत पर चर्चा की गई है।

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Key Takeaways

  • धार्मिक जीवनशैली अपनाने में निरंतरता और समर्पण जरूरी है।
  • परिवार का समर्थन धार्मिक बदलावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • हिजाब पहनना केवल एक बाहरी परिवर्तन नहीं बल्कि आंतरिक विश्वास का प्रतीक है।
  • शैतान के फुसलाने से बचने के लिए अल्लाह की रहमत और मार्गदर्शन पर भरोसा रखें।
  • युवा वर्ग के लिए प्रेरणा स्रोत बनना और सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करना आवश्यक है।

What the video covers

  • वीडियो में शादी और सोशल मीडिया पर पिक्चर्स शेयर करने की संस्कृति पर चर्चा की गई है।
  • निमरा अहमद की कहानी के माध्यम से इस्लामिक जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा दी गई है।
  • हिजाब पहनने की शुरुआत और उसमें आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से बात की गई।
  • इस्लाम में रहमत और शैतान के प्रभाव से बचाव के बारे में समझाया गया।
  • धार्मिक विश्वासों को मजबूत करने के लिए कुरान और हदीस का अध्ययन करने की सलाह दी गई।
  • युवा वर्ग को प्रेरित करने के लिए वास्तविक जीवन के उदाहरण प्रस्तुत किए गए।
  • धार्मिक और सांस्कृतिक संघर्षों को समझने और उनसे निपटने के तरीके बताए गए।
  • नमाज, कुरान पढ़ने और निरंतरता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया गया।
  • धार्मिक बदलावों में परिवार के समर्थन की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
  • आध्यात्मिक यात्रा में धैर्य और समर्पण की आवश्यकता को समझाया गया।

Answers

Questions about this video

इस वीडियो में हिजाब पहनने की यात्रा कैसे बताई गई है?

वीडियो में निमरा अहमद की कहानी के माध्यम से हिजाब पहनने की शुरुआत, उसमें आने वाली चुनौतियां और आंतरिक विश्वास की मजबूती को विस्तार से बताया गया है।

परिवार का इस्लामिक जीवनशैली अपनाने में क्या योगदान है?

परिवार का समर्थन धार्मिक बदलावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे व्यक्ति को चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलती है।

इस वीडियो का मुख्य संदेश क्या है?

वीडियो का मुख्य संदेश है कि धार्मिक जीवनशैली अपनाने में निरंतरता, समर्पण और अल्लाह की रहमत पर भरोसा जरूरी है, साथ ही युवा वर्ग को प्रेरित करना आवश्यक है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
वो जो एक कल्चर है ना कि किसी की शादी हुई है और किसी की बेटी की पिक्चर्स हर WhatsApp ग्रुप में जा रही हैं। दिस वास समथिंग जो मैं अपनी शादी पे नहीं चाहती थी। जब आप जनवरी में यूनिवर्सिटी में एंटर
00:13
Speaker A
हुए हो और विद ऑल योर फैशन और सारा कुछ आपकी चलते-चलते हर दोस्त तारीफ कर रहा है। हम अब आप फरवरी में गए हो हिजाब के साथ तो हाउ कम्स आपकी उस तरह तारीफ होगी। रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि अगर शैतान
00:30
Speaker A
को अ वो जो अल्लाह ताला का रहमान या रहम वाला कांसेप्ट है वो पता चल जाए जो रियल कांसेप्ट है जो एसेंस में कांसेप्ट है तो वो भी जन्नत की उम्मीदें लगाना शुरू कर देते हैं। इस्लाम की तरफ आते हो आपके फेसेस होते
00:45
Speaker A
हैं। इनिशियल फेस में हमेशा आपको अकेले होना होता है। हम फिर आप जब उस पे पर्सिस्टेंट हो जाते हो फिर आप दावा की तरफ आते हो। हमारे जो बाप दादा गुजरे हैं ना उनसे वो सवाल नहीं होना जो हमसे होना है क्योंकि उनके टाइम पे
01:00
Speaker A
हदीस एक क्लिक पे कंफर्म नहीं होती। अब यह होता है कि अगर कोई इंसान हराम वाली जिंदगी भी गुजार रहा है और वो नॉन प्रैक्टिसिंग भी है उसकी भी फीड पे कुछ ना कुछ खैर आती है। हम बिस्मिल्लाह सलातो सलाम अला रसूल्लाह
01:19
Speaker A
अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातहू वेरी वार्म वेलकम एवरीबॉडी इन आवर सेगमेंट यूथ फर्स्ट वेरी इंस्पायरिंग एंड वेरी मोटिवेशनल पर्सनालिटी वी हैव विद अस टुडे इन फ्रंट ऑफ यू माशा्लाह हमारी कोशिश पूरी ये होती है कि हम ऐसी पर्सनालिटीज यूथ में
01:35
Speaker A
से भी अब आपके लिए इंशा्लाह लेकर आए जो आपके लिए एक इंस्पिरेशन बनेगी और आपको वो बताएंगे कि जो कुछ आपके आपके अंदर कोई फियर्स हैं, कोई डाउट्स हैं, कुछ ऐसा लगता है कि नहीं आज के वक्त के अंदर बहुत सारी
01:46
Speaker A
चीजें हैं। हम नहीं कर सकते। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। वी शैल शो यू इंशाल्लाह प्रैक्टिकल एग्जांपल ऑफ़ सम ऑफ़ रियली गुड यू नो पीपल अमोंग यूथ। दोज़ हु आर नॉट ओनली हाइली एजुकेटेड, दोज़ हु आर नॉट ओनली
01:58
Speaker A
पर्सुइंग द अ वेरीेंट प्रोफेशंस इन द सोसाइटी टू बट स्टिल दे आर वेरी क्लोज टू देयर लॉर्ड। दे आर वेरी क्लोज टू देयर, दे आर वेरी डेडिकेटेड टू देयर सोसाइटी टू। एंड इंशा्लाह रियली नोबल एंड गुड पर्सनालिटीज इन फ्रंट ऑफ अस वी हैव
02:13
Speaker A
माशा्लाह मिस निम्रा अहमद विद अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह एंड आवर फ्यूचर डॉक्टर इंशा्लाह मिस निम्रा कैसी हैं आप वालेकुम अस्सलाम रहमतुल्लाह बरकातहू अल्हम्दुलिल्लाह आई एम डूइंग फाइनल अल्हम्दुलिल्लाह परफेक्ट माशाल्लाह थैंक यू सो वैरी मच फॉर जॉइनिंग अस फॉर एक्सेप्टिंग आवर इनविटेशन टू इट्स रियली
02:32
Speaker A
एन ऑनर फॉर अस यू पीपल जॉइन अस वी आर वेलकमिंग यू नो द पीपल लाइक हर वी आर रियली वेरी इगर टू लुक फॉरवर्ड टू ऑल दोज़ पीपल दोज़ हु वांट टू जॉइन अस एंड दे हैव अ जर्नी लाइक हर शी हैज़ इनके बारे
02:46
Speaker A
में आपको थोड़ा सा मैं बता दूं माशा्लाह शी इज़ पर्सुइंग हर मेडिकल डिग्री शी इस डूइंग हर एमबीबीएस माशा्लाह शी इज़ इन हर थर्ड ईयर और उसके साथ-साथ आप ये माशा्लाह इनको देख रहे हैं और आप ये पहचान रहे हैं कि ये
02:59
Speaker A
यूनिवर्सिटी में भी पढ़ रही हैं वेरी रिसेंटली शी गॉट मैरिड टू बहुत इंस्पायरिंग इनकी स्टोरीज इनका जर्नी इनकी चीजें हैं इनसे हम इंस्पिरेशन लेंगे और सीखेंगे बड़ा कुछ और आपको सीखने के लिए मौका मिलेगा। मुझे आप सबसे पहले निमरा एक
03:12
Speaker A
छोटा सा क्वेश्चन मैं इससे स्टार्ट करूंगी। माशा्लाह आपको देख के भी बहुत अच्छा लग रहा है। आप मुझे ये बताइए कि आपकी माशा्लाह ये सारा एक इस वजह से आप ऐसी हैं माशा्लाह जितनी अच्छी लग रही है कि क्या आपकी फैमिली का सारा बैकग्राउंड
03:26
Speaker A
ही ऐसा है या आपको कोई जर्नी है आपका जो थोड़ा सा चैलेंजिंग रहा है उसके बारे में कुछ हमें एक्सप्लेन करेंगी आप। अ सबसे पहले तो मेरी फैमिली बेसिक जिस तरह हर फैमिली पाकिस्तानी रिलीजियस होती है उस तरह मेरी फैमिली थी। अल्हम्दुलिल्लाह अ
03:42
Speaker A
मेरे फादर की तरफ से और मेरी मामा की तरफ से भी जो बेसिक प्रिंसिपल्स होते हैं ना वो हम लोगों को हम सब बहन भाइयों को मिले। लेकिन वो जो होता है प्रॉपर्ली एक बैकग्राउंड से इस्लाम फॉलो करना, कुरान और
03:55
Speaker A
हदीस से इस्लाम फॉलो करना वो नहीं था। और वही सो हु एवर जो भी मैं हूं आज और जैसा भी मैं दिख रही हूं अल्लाह ताला की तरफ से ही है और ये है कि लेकिन यस माय फैमिली
04:11
Speaker A
ऑलवेज सपोर्टेड एव्री चेंज ऑफ़ माइंड दे नेवर रेजिस्टेड अपार्ट फ्रॉम फ्यू कल्चरल थिंग्स अच्छा तो क्लशेस आते हैं कोई नहीं इंशा्लाह वो तो होते हैं लेकिन लेकिन बहुत सी फैमिली जो कि अगेंस्ट चली जाती है ना पर्दे के भी और उस तरह तो
04:27
Speaker A
वो अलम्दुलिल्लाह मेरी फैमिली ने नहीं किया। हमेशा दे सपोर्टेड मी और सारा तो बाकी चेंज मेरा अराउंड आया है 2020 एंड बिफोर दैट आई वास अ कंप्लीटली डिफरेंट ह्यूमन बीइंग और बस 2020 कोविड से पहले एक चेंज आया
04:47
Speaker A
जिसके अंदर शुरू में इट्स नॉट लाइक तबतब ऐसा होता था कि मैं जैसे ना नमाज पढ़ रही हूं लेकिन मेरी अपीयरेंस से बिल्कुल भी नहीं लग रहा कि मैं नमाजी भी हूं। तो वो एक मेरा फेस था शुरू में।
04:59
Speaker A
तो अल्लाह की तरफ से ही जर्नी कुछ ऐसी रही अल्लाह ताला ने पहले अपने साथ एक बॉन्डिंग करवाई। टू द पॉइंट के जब वो बॉन्ड इतना स्ट्रांग इनफ था कि बाहर की जितनी हवाएं हैं और बाहर की जितनी चेंजेस हैं या इन्फ्लुएंस
05:16
Speaker A
है वो मेरे अंदर कोई इन्फ्लुएंस नहीं कर रहा था। और फिर मतलब मुझे पता था कि मैंने पर्दा करना है लेकिन वही एक होता है ना अच्छा कल कर लूंगी अच्छा आगे कर लूंगी तो वो वाला फैक्टर था
05:31
Speaker A
लेकिन एक चीज थी जिसने मुझे पर्दे पे बिल्कुल पुश कर दिया और मैंने कहा कि नहीं अब मैंने करना ही करना है वो ये था कि मैंने इनिशियली यासमीन मुजाहिद है उनको बहुत ज्यादा सुना है तो शी सेड वन थिंग और वो ये थी के
05:49
Speaker A
कयामत के दिन ना दो तरह के लोग होंगे। यानी दो ग्रो होंगे। एक ग्रो होगा जिसके पास लाइट होगी और एक ग्रो होगा जिसके पास लाइट नहीं होगी। अब जिनके पास लाइट नहीं है ना वो कहेंगे हमने भी अच्छे काम किए थे लेकिन तुम लोगों
06:02
Speaker A
ने ऐसा क्या किया जो कि हम ने नहीं किया। हमने भी थोड़े बहुत अच्छे काम किए तो थे। याद तो आ रहे होंगे उनको। तो वो जिनके पास लाइट होगी वो कहेंगे कि हम वो लोग हैं कि जिनको नेकी की सोच आती
06:15
Speaker A
थी और वो फौरन कर गुजरते थे। एंड इस चीज ने मुझे बहुत क्लिक किया। मैं वॉक करते हुए पडकास्ट सुनती होती थी। तो मैंने कहा निमरा तुम्हें भी सोच आ रही है कि तुम रिलीजियस हो रही हो लेकिन तुम
06:28
Speaker A
हिजाब नहीं ले रही। तो कहीं तुम भी अभी ना मर जाओ और फिर आगे ऐसा हो कि अल्लाह से ऐसी हालत में मिलो कि तुम्हारे पास लाइट ना हो। हालांकि तुमने अच्छे काम थोड़े बहुत कर लिए हैं अब तौबा
06:38
Speaker A
के बाद। तो इसी बात से मुझे सुभान अल्लाह एक कुरान करीम की एक आयत भी एक एक आ गया याद कि उसमें अल्लाह ताला कहते हैं कि जो एक ये जो इस तरह के दिलों के वाले मुसलमान होते हैं ना कि जिनके अंदर कोई बात आती है
06:50
Speaker A
या जो सहाबा थे माशा्लाह तो उनकी एक क्वालिटी क्या थी एक अल्फाज़ आते हैं सम रब हमने सुना और हमने अतात की और एक एक्चुअली एक अच्छे मुसलमान की और एक दरअसल मुसलमान की मुसलमान अच्छा ही होता है उसकी
07:05
Speaker A
क्वालिटी यही होनी चाहिए कि जैसे आपने बयान किया है माशा्लाह जबरदस्त उसके बाद उसके बाद बस फिर मेरा तकरीबन साल मैंने सिर्फ शायद नमाजों वाला ही किया और साल बाद मैं जाके मुझे रियलाइज हुआ मैंने हिजाब लेना है।
07:21
Speaker A
बस वो रात थी वो रात वाली वक थी और फिर अगले दिन से ही मैंने हिजाब लिया क्योंकि ना मेरी पहले भी मैं बहुत दफा रिलीजियस हुई हूं लेकिन मैंने आई टूक ऑफ द हिजाब। एंड दैट्स व्हाई दिस टाइम आई वांटेड कि अब
07:33
Speaker A
जो मैं हिजाब लूं ना वो मेरा पक्का वाला हो। हम तो इसलिए मेरे अंदर खौफ था कि कहीं मैं लेके दोबारा ना छोड़ दूं। इसलिए भी मेरी थोड़ी सी रेजिस्टेंस वगैरह या मैं रिलक्टेंट हो रही थी। बस फिर उसके बाद आई स्टार्टेड हिजाब एंड
07:51
Speaker A
फिर मेरी जर्नी थोड़ी और ज्यादा स्पीड अप हो गई। वाज इट एट दैट टाइम आई थिंक यू हैड स्टार्टेड योर नो। बिकॉज़ यू आर इन थर्ड ईयर। सो प्रॉबब्ली आपने एट दैट टाइम यू हैड बीन इन योर प्रॉबब्ली एफएससी समथिंग
08:02
Speaker A
लाइक दैट। नो। नो। माय माय अ लाइक एजुकेशनल स्टडीज हैज़ आल्सो लाइक अ लॉन्ग स्टोरी। आई आई आई हैव डन डीपीटी अ सिक्स सेमेस्टर्स डीबीटी के एंड देन नाउ अब मैं एमबीबीएस में हूं। अच्छा अच्छा। तो मेरी डिग्री का भी एक शिफ्ट आया।
08:20
Speaker A
अच्छा अच्छा डिग्री का भी शिफ्ट। तो सही। दैट्स व्हाई मतलब तब मैं डीपीटी बेसिकली कर रही थी। अच्छा अच्छा। अच्छा। बस फिर उसके बाद ये हुआ के वही हिजाब आ गया और फिर थोड़ी और स्पीड अप हुई। और साथ
08:38
Speaker A
मैंने वादा किया था इसने मतलब गिव अप नहीं करना और बस कंसिस्टेंट रहना इसमें और एक था कि नमाज कि नमाज नहीं छोड़नी और दूसरा था कुरान माशा्लाह तो कुरान को मैंने वही जो मेरा कोविड वाला ही टाइम था ना मैंने अरबी में पहली दफा
08:54
Speaker A
मतलब आफ्टर वो जो पारे हम पढ़ते हैं कारी साहब से उसके बाद मैंने पढ़ना शुरू किया तो जब मैं उस वाली एक दोहराई में मैं एंड कर रही थी ना तो मुझे रियलाइज हुआ कि इसके नीचे तो तर्जमा भी लिखा हुआ है। मैं जरा
09:07
Speaker A
देख लूं ये क्या है? वो जब किया फिर वो खत्म होने लगा तो मैंने कहा इसके नीचे तो तफसीर भी लिखी हुई है। मैंने कहा यार ये क्या होता है? फिर मैंने वो पढ़ा टू द पॉइंट फिर मेरा एक्सपोज़र हुआ
09:20
Speaker A
अल खुदा वगैरह उनसे उनके प्रिंसिपल से फिर उन्होंने मुझे ऑनलाइन लिंक्स वगैरह दिए। फिर मैंने उनकी तफसीर वगैरह स्टार्ट की। तो यानी कुरान के साथ एक मेरा था के ये अब देखिए माशा्लाह इसका मतलब ये हुआ कि निम्रा आप ये देखिए कि अगर हम लोग समय
09:38
Speaker A
हमें लगता है कि अच्छा हम रिलीजियस अपनी रिलीजन अपनी रियलिटी
09:51
Speaker A
चीजें जरूरी है वो है हमारी नमाज और हमारा कुरान से ताल्लुक और ये आपकी बात 100% सही है वी टू इन आवर लाइफ्स आज हम भी जो मतलब ये है कि हम पैदाइशी ऐसे नहीं नहीं थे या जवानी में भी जब एक यूथ भी हम लोग बहुत
10:03
Speaker A
इग्नोरेंस में भी रहे हैं। लेकिन ये जो बात है जब आपका रिश्ता कुरान के साथ जुड़ता है। आपका रिश्ता आपके क्योंकि आपकी नमाज एक सिर्फ एक रिचुअल नहीं है कि आपने दो चार सजदे किए और आप उठ के आ गए। नमाज
10:15
Speaker A
इज अ मीटिंग विद योर लॉर्ड। और जब आप अपने रब से मिलते हैं और दूसरी तरफ अपने रब की किताब जो उसके अपने मुंह के अल्फाज हैं उनको पढ़ते हैं तो आपकी एक बॉन्डिंग अपने रब से बड़ी स्ट्रांग हो जाती है और फिर
10:28
Speaker A
उसके बाद माशा्लाह मेरे ख्याल से आप उस चीज से फिर हटी नहीं है। माशा्लाह अब अगर मैं अब नहीं बात करूं या इस तरह देखूं तो डेफिनेटली ऐसा ही है। आई जस्ट स्टार्टेड यू नो गेटिंग इंटू द बिकॉज़ वी हैड बीन
10:41
Speaker A
अब्रड इन मिडिल ईस्ट। तो हम लोगों ने इसलिए किया था। तो मैंने कहा चल मैंने देखा कि मेनी लेडीज आर देयर दे यू नो कनेक्टेड विथ द कुरान। बड़ा अच्छा लगता था। अपने ऊपर थोड़ी एम्बरेसमेंट हो रही थी
10:56
Speaker A
कि देखो माशा्लाह कितना अच्छा पढ़ती हैं। हमें तो बस कुरान इतना ही पढ़ना आता है। द मोमेंट वी स्टार्टेड यू नो गेटिंग इन टच विथ द कुरान। वो जो आपके दिल के अंदर एक एक सुकून, एक इत्मीनान और एक अल्लाह के
11:09
Speaker A
पास देखने से आता है वो मेरे ख्याल से किसी चीज से भी नहीं आ सकता। फिर आपकी बॉन्डिंग जो अल्लाह से मजबूत होती है वो बहुत मजबूत होती है। इंशा्लाह अल्लाह ताला हमें इस पे रखे जजाक अल्लाह। बहुत ही
11:19
Speaker A
अच्छी लगी आपकी ये बात सुनकर। सबके लिए इंस्पिरेशन है। अब इस चीज को पकड़ लें तो फिर देखें इंशा्लाह चीजें रॉल्व होंगी। हम देखते हैं यहां पर पाकिस्तान में भी स्पेसिफिकली हमने बहुत चेंज देखा यहां पे आके। हमारे जो कल्चर की जो एक कल्चरल
11:33
Speaker A
चीजें हैं वो हमारे लिए बहुत ज्यादा मैटर करती हैं। फिर हमारा दीन हमारे कल्चर के साथ बहुत ज्यादा मिक्स अप हो चुका है। ठीक है? कि हमने अपने दीन को भी एक कल्चर का पार्ट ही समझ लिया। मैं आपसे सिर्फ ये
11:44
Speaker A
पूछना चाहूंगी माशा्लाह निम्रा आप ये बताइए आप एक स्टूडेंट भी हैं। आप एक बहुत अच्छी डिग्री पर्सू कर रही हैं। आप अपने इस कैरब के अंदर अपनी यूनिवर्सिटी में भी होती हैं। आप और आप ही की तरह के साथ और
11:56
Speaker A
माशा्लाह हमारी बच्चियां और यू नो और यंगस्टर्स और मुस्लिमा वो जब इस तरह के अपनी एक पर्सनालिटी के साथ आगे बढ़ती हैं। डू दे फेस एनी चैलेंजेस? और डूड यू फेस सम चैलेंजेस? उसके बारे में थोड़ा बताइए। अ मेरे अगर मैं पर्सनली अपने लिहाज से
12:13
Speaker A
देखूं तो शायद मुझे चैलेंज जो सबसे बड़ा आया है वो मेरी दोस्ती में आया था फ्रेंडशिप्स में लेकिन बाकी भी चैलेंजेस हैं जो कि मैं अब डील करती हूं केसेस तो उन लड़कियों को आते हैं। अगर हम कॉलेज के एनवायरमेंट में या
12:30
Speaker A
आप कह लो के यूनिवर्सिटी के एनवायरमेंट में वो चैलेंजेस बेसिकली मैं समझती हूं जितना अभी तक का मेरा कुरान का भी मुतालिया है और जितना एक्सपीरियंस भी है वो मैं ये समझती हूं कि जब एक लड़की बचपन से ही बगैर
12:45
Speaker A
वैल्यूस के बड़ी हो रही है ना हम तो फिर ये होगा कि उसके ऊपर इर्द-गिर्द की चीजें इन्फ्लुएंस करेंगी। हम अब अगर वो अब बेशक वो हिजाब ले ले बेशक वो पर्दा कर ले बेशक वो जो भी कर ले लेकिन
12:59
Speaker A
अगर उसकी बेस स्ट्रांग नहीं है तो जरूर उसके ऊपर इर्द-गिर्द की चीजें अफेक्ट करेंगी। अगर आप हिस्ट्री देख लो सबाई रसूल सल्लल्लाह वसल्लम और जितने भी हमारे अंबिया गुजरे हैं किसके ऊपर मुश्किलात नहीं आई सब सब पे आई हैं सबने चैलेंजेस फेस किए हैं
13:17
Speaker A
तो जब भी कोई इस्लाम की तरफ आता है हमारा ना ये एक डलेमा बिल्ट हुआ हुआ था अब नहीं है था के आप इस्लाम की तरफ आओगे तो एवरीथिंग विल बी कलरफुल सब कुछ अच्छा हो जाएगा बट व्हेन यू कम लाइक आप सही इस्लाम में आते
13:34
Speaker A
हो तो आपको अल्लाह ताला ने कभी भी ये वादा नहीं किया कि तुम्हें चैलेंजेस नहीं आएंगे। उल्टा अल्लाह ताला ने कुरान में सूर बकरा में फरमाया है कि क्या तुम्हें लगता है यानी मफूम बता रही हूं कि क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हें जन्नत
13:47
Speaker A
में ऐसे ही दाखिल कर दिया जाएगा कि अभी तो तुम्हारे ऊपर वो मुश्किलात ही नहीं आई जो हिला ही नहीं गए वो तो हिला दिए गए हां तो ये ये एक चीज है कि मैं कहती हूं वो लड़कियों के चाहे वो लड़के हैं चाहे वो
14:00
Speaker A
लड़कियां हैं उनके साथ मुश्किलात इसलिए आती है क्योंकि वो होनी है। मुश्किलात आनी है। तो जब मैं अल्लाह ताला को कह रही हूं अल्लाह ताला मैं आपसे प्यार करती हूं तो अल्लाह ताला तो आजमाएगा ना चाहे वो दोस्ती
14:12
Speaker A
के थ्रू है, चाहे वो मां-बाप के थ्रू है, चाहे वो इन सारी चीजों के थ्रू है। तो जो हर्डल्स हैं वो मेनली हर्डल्स लड़कियों को आ रही होती हैं कि क्योंकि सोसाइटी ने उनकी उनका उनकी जो साइकी है वो ये बना दी
14:28
Speaker A
होती है कि तुम प्यारी हो। हम तुम तुम खूबसूरत हो। हम अब जब वो कर्ल बाल आपको हिजाब में कवर करने हैं। जब आप जनवरी में यूनिवर्सिटी में एंटर हुए हो और विद ऑल योर फैशन और सारा कुछ आपकी
14:46
Speaker A
चलते-चलते हर दोस्त तारीफ कर रहा है। हम अब आप फरवरी में गए हो हिजाब के साथ तो हाउ कम्स आपकी उस तरह तारीफ होगी। बिल्कुल। उल्टा मुझे अपने ऊपर एक कमेंट याद है। मैंने जब हिजाब स्टार्ट किया यूनिवर्सिटी
14:59
Speaker A
में तो मुझे ना एक दोस्त ने कहा तुम्हारी शादी तो नहीं हो गई? दे लाइक कि अच्छा शादी के साथ हिजाब का कनेक्शन है। तो ये कि यानी मेरा एक तो ये हर्डल आती है कि क्योंकि उनकी जो परसेप्शन है अपनी वर्थ
15:19
Speaker A
की वो ब्यूटी के ऊपर होती है। एक तो ये हर्डल आती है। दूसरी हर्डल आती है उसकी दोस्तों की। ठीक है? क्योंकि आप पहले एक ऐसी कंपनी में थे जो कि हर जगह जा रही है और मतलब यह
15:35
Speaker A
सारे मामलात हो रहे हैं। व्हेन यू टूक ऑन द हिजाब तो थोड़ी रिलक्टेंस आती है दोस्तों में। ठीक है? अब फिर ये होता है कि जैसे मुझे अपना याद है मैंने क्योंकि नमाज़ें पक्की की हुई थी। चाहे मैं हिजाब नहीं भी ले रही
15:49
Speaker A
लेकिन मैं नमाजों की पक्की हुई हूं। अब जब हम लोग मुझे याद है हम एक कैफे बैठे हुए थे। यूनिवर्सिटी का ही टाइम था। तो मैंने ना दोस्तों को कहा हम लोगों ने आर्डर दे दिया हुआ था। मैंने कहा यार जोहर
16:01
Speaker A
का टाइम हो गया है। अभी हम जाके ना नमाज पढ़ते हैं। क्योंकि नमाज का वही एक फुल कांसेप्ट था। जो कर रहे हो उठ के जाके नमाज पढ़ो। ये कांसेप्ट था। तो मैंने कहा यार उठो हम ना नमाज पढ़ने
16:13
Speaker A
चलते हैं। तो उन्होंने कहा यार अच्छा खाना खा लेते हैं। फिर हम चले जाएंगे। तो मैं अपनी फुल हाइप में थी उस टाइम पे। तो मैंने कहा नहीं मैं उठी वहां से और मैं अकेली जाके मैंने नमाज पढ़ ली। तो मतलब ये कुछ चीजें
16:26
Speaker A
थी जो कि मैंने तो वही मैंने आपको बताया ना कि शुरू में अल्लाह ताला ने मेरा एक बॉन्ड बनाया टू द पॉइंट वो बॉन्ड इतना स्ट्रेंथफुल था कि मुझे बाहर से इतना इफेक्ट नहीं पड़ा। ऑलदो वो चीजें मैंने
16:36
Speaker A
फेस जरूर की थी। तो दोस्ती और मुझे लगता है ये ब्यूटी वाला फैक्टर एक काफी मेन है कि दोस्ती आपको खोनी पड़ती है। बहुत से दोस्त आपकी यानी जो रिलीजियस जर्नी है ना उसमें निकल जाएंगे। नहीं नहीं मतलब वो स्टॉप कर रहे होते हैं
16:53
Speaker A
आपको। अच्छा अच्छा वह रोक रहे होते हैं आप अब जैसे मैं हूं ना तो अल्हम्दुलिल्लाह अल्लाह ताला ने मुझे बहुत सिंसियर दोस्त दिए हैं हमेशा बहुत कम ऐसा होगा कि किसी दोस्त ने धोखा दिया हो तो लेकिन ना वो दोस्त ऐसे थे कि दुनियावी
17:09
Speaker A
तौर पे बहुत सिंसियर है लेकिन दीनी तौर पे मुझे पुश नहीं कर रहे खैर की तरफ तो मेरा जब ये इनिशियली अल्लाह के साथ बॉन्डिंग भी हो गई नमाज भी हो गई अब मैंने स्टेप अप करना था तो अल्लाह ताला ने मुझे मेरी दोस्तों से
17:23
Speaker A
पीछे किया। अब वो किस तरह किया वो एक लंबी स्टोरी है। लेकिन खैर अब वो जब दोस्त मेरी लाइफ से साइड पे हुए हैं ना हालांकि हालांकि वही दोस्त थी जिसने मुझे दीन की तरफ का पुश दिया। यानी उसने कहा कि मेरा एक
17:37
Speaker A
काफी वर्स्ट फेस था। उसमें उसने मुझे एक बात कही कि निम्रा तुमने सब ट्राई कर लिया है। व्हाई डोंट यू ट्राई अल्लाह दिस टाइम? एंड एंड इफ यू सी दिस गर्ल आज भी तो आप प्रेडिक्ट नहीं कर सकते कि यह अल्लाह वाली
17:53
Speaker A
कोई बात कर भी सकती है। तो उस तरह का सीन था। मैंने कहा यार बुरी ऑप्शन तो तुम नहीं दे रही। फिर मैंने स्टार्ट किया और फिर आज मैं यहां पे हूं। लेकिन फिर लेटर ऑन ये हुआ कि
18:04
Speaker A
वही जो दोस्तियां थी ना मेरी वो मुझे दीन की तरफ बहुत ज्यादा पुश नहीं कर रही थी। फिर जब मैंने ये ऑब्जर्व किया तो आई हैड टू गिव अप ऑन द फ्रेंडशिप्स। हम मतलब फिर मैंने उस चीज से यह सीखा कि हर
18:17
Speaker A
रिश्ता आपके साथ एक टाइम तक है जब तक उसने आपकी जिंदगी में कोई किरदार अदा करना है। बस फिर ये दोस्तियां खत्म हुई और फिर अल्लाह ताला ने दीन की नॉलेज में यू नो वो एक इंक्रीस दिया। आपकी दोस्ती वाला
18:31
Speaker A
माशा्लाह देखिए एक सैक्रिफाइस से मुझे सुभान अल्लाह लाइक कितना एक बात है ना कि ऐसी खुदा की जात है के ल त्रा हत्त तफ्मा तो कि तुम नेकी के उस लेवल तक पहुंच ही नहीं सकते हो जब तक तुम वो खर्च ना करो जो
18:45
Speaker A
तुम्हारे अल्लाह की राह में तुम्हारे लिए सबसे महबूब है यूथ के लिए दोस्तियां बहुत ज्यादा महबूब होती है और अब अल्लाह की खातिर के लिए अगर आपने उस चीज को कुर्बान किया तो फिर अल्लाह ताला भी आपको इंशा्लाह
18:56
Speaker A
मायूस नहीं होने देते जबरदस्त अब आप मुझे ये बताइए चाहिए कि ये सारी चीजें जो आपको लगता है कि एक अगर हमारा ईमान स्ट्रांग नहीं है तो फिर साइकोलॉजिकली तो इफेक्ट्स आते होंगे अगर किसी मतलब अगर आपने देखा हो
19:10
Speaker A
अपने इर्द-गिर्द की एग्जांपल्स देखी हो चले माशा्लाह आपका तो एक एक इसीलिए समय समझ ये बात आ रही है कि अल्लाह से बॉन्डिंग एक स्ट्रांग बॉन्डिंग और सबसे पहली प्रायोरिटी पे रब की जात फिर बाकी सारी चीजें तो चीजें हल होती हैं। आप अपने
19:23
Speaker A
इर्द-गिर्द देखती हैं कि अगर कोई बच्चियां या हमारी कोई इस तरह से यूथ कोई ट्राई करती है इस तरफ आने की फिर उसको ऐसे कोई चैलेंजेस जब फेस करने पड़ते हैं तो साइकोलॉजिकली उनके लिए कोई डिस्टरबेंसेस वगैरह डू यू फाइंड अराउंड सच थिंग्स?
19:36
Speaker A
आई थिंक साइकोलॉजिकली यही होता है कि उनको इनफीरियर महसूस होता है। हां। हम सबसे मेन चीज यह है। चाहे वो दोस्तों की तरफ से यह चीज आ रही है या फैमिली की तरफ से आ रही है। उनको यह महसूस होता है कि यार अगर मैंने
19:50
Speaker A
हिजाब ले लिया या मैंने दाढ़ी रख ली। वैसे हिजाब और दाढ़ी इज नॉट द मेन थिंग। वो तो आपकी उस तरह है। प्रैक्टिकिटी में आ ही जाती है। लेकिन यानी आप अगर अल्लाह को अपनी प्रायोरिटी बनाना शुरू कर दोगे तो आप
20:02
Speaker A
बोर हो बोर्डम में चले जाओगे। आप एक बोर इंसान बन जाओगे। आप कूल नहीं रहोगे। कूल नहीं रहोगे। कॉन्फिडेंस लूज़ करते हैं ऐसे बच्चे। अ मेरा ख्याल है अगर उनको एक पॉजिटिव पुश मिले तो फिर वो कॉन्फिडेंस लूज नहीं करते लेकिन हां कुछ लूज कर भी
20:19
Speaker A
सही हम तो ठीक है तो आपकी आप अपनी एग्जांपल्स के साथ आप मुझे ये बताएं कि जो बच्चियां माशा्लाह करना चाहती हैं तो दीन और दुनिया को कैसे बैलेंस कर सकती हैं अपनी यूनिवर्सिटी लाइफ के अंदर अ देखिए इसमें दो फैक्टर्स हैं।
20:34
Speaker A
एक तो आपका माइंडसेट का फैक्टर है और दूसरा प्रैक्टिकल चीजें हैं। अगर आप माइंडसेट को देखते हो तो वही माइंडसेट है जो मैंने आपको बताया के अल्लाह को सामने रखें और आखिरत को सामने रखें के अल्लाह मेरा सब कुछ है ही इज द सेंटर ऑफ़ माय लाइफ
20:57
Speaker A
एंड जो अल्लाह ताला डिसाइड करेंगे मेरे लिए समय ना वाता आना ठीक है और फिर आखिरत को सामने रखना है के जब आखिरत मेरे सामने होगी तो फिर ही ऐसा होगा कि मैं यूनिवर्सिटी में एंटर होंगी और मुझे अगर टॉप्स में भी लड़कियां दिख
21:15
Speaker A
रही हैं तो मुझे अफेक्ट नहीं होगा क्योंकि मेरा फोकल पॉइंट चेंज हो चुका है। सो व्हेन माय फोकल पॉइंट इज आखिरा दुनिया के चेंजेस विल नॉट अफेक्ट मी। सो सबसे पहले बेशक आप प्रैक्टिकल चीजें भी कर लो। आप चेंज हो जाओगे। वापस चले जाओगे
21:31
Speaker A
अगर माइंड सेट नहीं चेंज। सो फर्स्ट ऑफ ऑल वी हैव टू चेंज द माइंड सेट और हमारा फोकल पॉइंट आखिरत होना चाहिए। रसूल और सबका फोकल पॉइंट आखिरा तो जब आखिर फोकल पॉइंट होगा सारा मामला वैसे ही सेट हो जाएगा
21:52
Speaker A
प्रैक्टिकल चीजों पे अगर हम आएंगे उसमें हमारा डिसिप्लिन बहुत मेन चीज है। तो प्रैक्टिकली अगर हम लोग देखें कि हम लोग किस तरह बैलेंस कर सकते हैं। उसमें सबसे पहली चीज होती है कि आपने डिसिप्लिन क्रिएट करना है।
22:08
Speaker A
माइंडसेट सेट हो यानी हो गया आपका। नाउ यू हैव टू मूव टुवर्ड्स बिकमिंग अ लाइक एक डिसिप्लिन वाला शख्स। अब जब डिसिप्लिन होगा वही है कि उसमें कंसिस्टेंसी भी इंपॉर्टेंट है। ऐसा नहीं है कि मैं मंडे को अपना फुल शेड्यूल बना लूंगी और फिर मैं
22:26
Speaker A
ट्यूसडे को ठप हुई हुई होंगी। ऐसा नहीं होगा। आपने प्रैक्टिकली देखना है मैं कितना कर सकती हूं। जैसे मैंने जिस तरह बताया कि आपकी दो मेन चीजें हैं नमाज और कुरान तो नमाज तो आपने करनी ही करनी है। जिस भी
22:39
Speaker A
तरह आपने मैनेज करनी है आप करोगे। फजर आपके घर पे होती है। जोहर आपकी हद यूनिवर्सिटी में हो सकती है। जैसे आप अल्हम्दुलिल्लाह मेजॉरिटी यूनिवर्सिटी के अंदर नमाज की जगह होती है लड़कियों की। बस आप ढूंढो कि वो कहां पे है। होती है। जैसे
22:54
Speaker A
लड़कियों का कॉमन रूम होता है। अगर नहीं है नमाज की जगह। मस्जिद नहीं है तो यू कैन गो टू कॉमन रूम। वहां पे आपने और उसके बाद आपकी अगली जो नमाज़ें होती हैं जैसे फिर कुछ यूनिवर्सिटीज होती है जो
23:08
Speaker A
5:00 बजे तक रहती हैं तो आप असर भी वहां पे पढ़ सकते हो। बाकी नमाज़ें आपने घर पे मैनेज करनी है। फिर कुरान का आता है। तो ये कुरान को आप कैसे मैनेज कर सकते हो?
23:18
Speaker A
जिस तरह मैं करती होती थी वो ये था कि बेशक आप आधा घंटा दो। हम लेकिन वो वो दो जिसमें आपका माइंड फ्रेश है और और उस टाइम पे आपके अलावा कोई और वहां पे प्रेजेंट नहीं है। आप इस बात पे निमब्रा मैं कहूंगी कि थोड़ा
23:33
Speaker A
सा ऐड करना चाहूंगी कि आधा घंटा भी कोई नहीं दे सकता। कोई 15 मिनट दे दे हम लेकिन दे आपकी वो वाली बात कंसिस्टेंसी के साथ कंसिस्टेंसी के साथ बिल्कुल चाहे जितना भी थोड़ा टाइम दे लेकिन वही बात है बहुत अच्छी बात फ्रेश
23:46
Speaker A
माइंड से दो और रेगुलर दो जी बिल्कुल बताइए और वो और वो होता है फजर के बाद हम तो वो बहुत मतलब रसूल सल्ल वसल्लम के अकॉर्डिंगली भी बहुत आइडियल टाइम है अपनी प्रोडक्टिव चीजें करने का तो जैसे बहुत से लोग होते हैं जो मैनेज कर
24:01
Speaker A
पाते हैं फजर के बाद और यूनिवर्सिटी से पहले ये टाइम बड़ा आइडियल होता है आपका कुरान के लिए क्योंकि शुरू में जब दिन के आगाज में मैंने कुरान ऐड कर लिया ना तो वो मेरी थ्रू आउट उसमें रिफ्लेक्ट करेगा और
24:13
Speaker A
फिर एक-एक करके ना अपनी बुरी हैबिट्स को छोड़ना रिकॉग्नाइज करना लिस्ट डाउन करना ये ये चीजें हैं जो मुझे छोड़नी है फिर उन पे प्रैक्टिकली काम करना इस महीने ये माइनस हो रहा है इस महीने ये माइनस हो रहा है और फिर क्योंकि ये सब
24:30
Speaker A
मिक्स अप चल रहा है मैं कहती हूं कुरान आपकी सबसे मतलब एक ऐसी किताब है जिसने 110% आपकी पर्सनालिटी चेंज करनी है। तो जब आप आराम आराम से गुनाह हटा रहे हो, आप खैर की तरफ जा रहे हो, आप तौबा कर रहे
24:45
Speaker A
हो। एंड यू आर लेटिंग कुरान वर्क ऑन यू। कुरान ऐसा नहीं है कि आप गुनाह भी करते रहो और कुरान भी पढ़ते रहो। ऐसे फिर कुरान आपके ऊपर इफेक्ट नहीं करता। क्योंकि बहुत से लोग आके कहते हैं कि यार
24:56
Speaker A
कुरान पढ़ अफेक्ट नहीं हो रहा। वो इसलिए नहीं होता क्योंकि मैंने कोई सात आठ घंटे स्क्रॉलिंग करनी है। आधा घंटा कुरान को देना है। तो वो उसी तरह हो गया कि मैं हेल्दी डाइट लेना चाह रही हूं लेकिन मैं
25:07
Speaker A
बर्गर्स और पिज़्ज़ा भी खा रही हूं। सही सही। तो ये एक प्रैक्टिकल चीज है जिससे आप बैलेंस कर सकते हो। हम आप किस बात से मैं स्क्रोलिंग वाला ये जो आपने अभी बात की है इसी से क्या आपको क्या लगता है जो सोशल
25:21
Speaker A
मीडिया ट्रेंड्स और इन्फ्लुएंसर्स और ये जो इतनी ज्यादा एक एडिक्शन है ये आजकल की जो हिंडरेंस है हमारी प्रैक्टिक इस्लाम की प्रैक्टिसिंग प्रैक्टिस के लिए कि आपको लगता है कि दिस इज द प्रॉब्लम एंड अदर वन बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा
25:39
Speaker A
मेरे दो साल गुजरे हैं हॉस्टल में पिछले दो साल मैं रिसेंटली लाहौर और वापस मूव हुई हूं। हम तो हॉस्टल में मेरी एक दोस्त होती थी। तो वो इस्लाम की तरफ आई। अल्हम्दुलिल्लाह उसका चेंज आया। मतलब शी इज़ फ्रॉम बिकन
25:53
Speaker A
हाउस और यू कैन इमेजिन दैट काइंड ऑफ़ पर्सन। अब वो इस्लाम की तरफ आई। रिलीजियस हुई ले और उसके अंदर यू कैन नॉट इमेजिन उसके अंदर कितना पोटेंशियल मैंने देखा। नॉलेज का और इन सब चीजों का। हम्म। तो लेकिन वो बहुत प्रोग्रेस नहीं कर पाती
26:11
Speaker A
थी। जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ द स्क्रोलिंग। हां शी यूज टू स्लीप सो मच एंड स्क्रोलिंग बहुत करती थी और मैं उसको कहती थी यार ये दो चीजें तुम छोड़ दो तुम प्रोडक्टिव मुस्लिम हो जाओगी वो ट्राई करती थी अल्लाह ताला उसके लिए
26:24
Speaker A
आसानियां करे लेकिन ये कि बहुत ज्यादा इफेक्ट है और खासकर ना अब नेगेटिव इफेक्ट जो मैं देख रही हूं हम यू कैन डिसए्री विद मी लेकिन अ जिस तरह अब हमने ना हिजाब को भी फैशन बना दिया हम
26:41
Speaker A
मतलब एक औरत का जो वे ऑफ़ कैरिंग हरसेल्फ वह जो है वह अब एक फैशन बन गया है। तो जब आपने हिजाब भी फैशन बना दिया तो हिजाब का तो मकसद ही खत्म हो गया। तो इन्फ्लुएंसिंग मतलब इस एक पॉजिटिव
26:58
Speaker A
इंपैक्ट ये है कि मैं इवन एक स्टडी पढ़ रही थी रिसेंटली और वो स्टडी ये थी कि जब से निकाबीज इन्फ्लुएंसर्स आई है ना तब से लड़कियों ने निकाब लेने में कॉन्फिडेंस फील किया। ठीक है? एक पॉजिटिव है।
27:12
Speaker A
लेकिन नेगेटिव इंपैक्ट है कि जब आप निकाब के साथ बहुत सी और चीज़ हो रही है जो कि फिर वो भी इन्फ्लुएंस हो रहा है। अच्छा यार ये नकाब के साथ हिजाब के साथ ये कर रही है तो मैं भी वो कर सकती हूं।
27:25
Speaker A
जिस तरह रिसेंटली गजा वाला जितना मामला हुआ अभी भी जो चल रहा है। तो अब मेरा जो पब्लिक पेज है मेरा बहुत दफा दिल करता था कि अगर कोई इस्लामिक फनी चीज होती है ना आप वो शेयर कर दो। हम
27:39
Speaker A
मेरा बहुत दिल करता था कभी-कभी अच्छा यह शेयर कर देती हूं। लेकिन मैं वो करने से रुक जाती थी या अपनी अगर मेरी लाइफ में कुछ फन हो रहा है वो मैं पोस्ट करने से रुक जाती थी इस बेस पर
27:50
Speaker A
कि मेरा इन्फ्लुएंस क्या जाएगा बल्कि उम्मत के एक हिस्से में इतना पेन है और मैं कुछ कैजुअल पोस्ट कर रही हूं तो लोग समझेंगे कि ये दोनों चीजें नॉर्मल है। तो यानी एक ये चीज ना मैंने थोड़ी सी फील
28:04
Speaker A
की कि हम लोग अगर सोशल मीडिया पे आते हैं ये एक बहुत बड़ी रिस्पांसिबिलिटी है कि हम क्या इन्फ्लुएंस लोगों में डाल रहे हैं। तो यस इसका बहुत ज्यादा इफेक्ट है। बहुत ज्यादा इफेक्ट है। अब वही बात है कि
28:15
Speaker A
अगर आप सोशल मीडिया पे आ रहे हैं अगर आप कोई पॉजिटिविटी नहीं फैला रहे तो इसके बहुत ड्रास्टिक जो है ना बैड रिजल्ट्स हम अपने मुशरे में आजकल यूथ में देख भी रहे हैं। जिनकी रिसेंटली एग्जांपल अभी एक
28:28
Speaker A
हमारा एक जो एक टिकटटॉकर थी सना यूसुफ शायद उनका जिनका नाम था उनके मर्डर के इस्लामाबाद में बिल्कुल और ये कोई छोटी सी बात नहीं है। अब आप ये देखिए कि ये बहुत सोचने का मामला है और बहुत सारा लेसन है हमारी यूथ के लिए
28:42
Speaker A
कि यू नो टू थिंक अबाउट इट। अब आप अगर आपको मैं थोड़ी सारी ये बातें चंद एक इसको मैं बहुत जरूरी भी बातें मैंने आपसे पूछनी है मैं वेट ही कर रही हूं कि हम थोड़ा सा ये मैटर डिस्कस कर लें। आप मुझे ये बताइए
28:55
Speaker A
एक जो है कि कुछ हम हम कहते हैं जी चाहते हैं हम कि हम लोग आई वांट टू रिग्रेट रियली समबडी हु फील्स कि नहीं चल रहा है गलत है मानते भी हैं होता भी चला जा रहा है लेकिन बहुत रिलक्टेंट होते हैं नहीं कर
29:12
Speaker A
पाते रिग्रेट नहीं कर पाते अपने आप को चाहते हैं एक स्टेप लेकर आना नहीं कर पाते सबसे पहली और इंपॉर्टेंट और कोई इजी क्या स्टेप एक यूथ ले सकती है कि वो बस कर कर ले तो फिर देखेगा इंशा्लाह उसके लिए
29:24
Speaker A
आसानियां होंगी। मतलब एक यूथफुल इंसान है जिसको रियलाइज हो रहा है कि यह गलत है लेकिन गलत है लेकिन चेंज की तरफ स्टेप नहीं ले रहा आ नहीं पा रहा बिल्कुल हम उसमें सबसे पहले वही मेरा ख्याल है हर चीज का ये
29:39
Speaker A
आंसर माइंडसेट है कि आप इसमें भी अपने माइंड को जब ये बताओगे कि ये सोच इंसान को तब आती है कि इंसान जब ये फील करता है कि अल्लाह ताला मुझे जज करेंगे। यह एक बहुत बड़ा फैक्टर है
29:55
Speaker A
क्योंकि मैं भी अपनी फीलिंग्स को अपने साथ वाले शख्स को नहीं बताऊंगी तब तक जब तक मुझे उसे कंफर्ट जोन नहीं मिलेगा। तो द वेरी फर्स्ट थिंग दैट यू नीड टू अंडरस्टैंड एंड यू हैव टू टेल योरसेल्फ इज
30:06
Speaker A
के मैं चाहे सुबह से लेके रात तक गुनाह भी कर रही हूं उससे अगले लम्हे भी आऊंगी अल्लाह ताला के पास तो अल्लाह तालाब करेगा यू नो वो जिस तरह हदीस है कि खुले हुए हैं अल्लाह ताला के आर्म्स एंड इसमें ना
30:24
Speaker A
अ जैसे आप कह लो के एक बड़ी खूबसूरत हदीस है के अ मफूम उसका ये है कि रसूल सल्लल्ला वसल्लम फरमाते हैं के अगर शैतान को अ वो जो अल्लाह ताला का रहमान या रहम वाला कांसेप्ट है वो पता चल जाए जो रियल
30:46
Speaker A
कांसेप्ट है जो एसेंस में कांसेप्ट है तो वो भी जन्नत की उम्मीदें लगाना शुरू कर दे तो मैं इतना मैं हैरान हुई। मैंने कहा शैतान का ये हाल है तो हम कहां पे लाई करते हैं?
30:58
Speaker A
सही बात है। तो उसमें यही है कि एक मां ने अगर नौ माह अपने पेट में बच्चे को रखा है तो बच्चा चाहे जो भी गलत काम करे ना वो मां उसको एक्सेप्ट करेगी ही करेगी। तो अल्लाह ताला तो है ही बिय्ड मां का
31:11
Speaker A
प्यार। वो जो 70 वाला फैक्टर आता है वो असल में 70 नहीं है। सिर्फ हमें बताने के लिए तुम्हारी इमेजिनेशन से भी ऊपर मेरी मोहब्बत है। और इसमें बस एक चीज जो मैं इस तरह के लोगों को कहूंगी वो ये है कि देखें
31:28
Speaker A
आज अगर आपके अंदर हिम्मत है कि आप ये पॉडकास्ट भी देख रहे हो या अगर आपकी वो सांस चल रही है। अगर आपका दिल धड़क रहा है और अगर आपके मसल मूव कर रहे हैं, आपकी मूवमेंट करवा रहे
31:41
Speaker A
हैं तो ट्रस्ट मी इट इज बिकॉज़ अल्लाह ताला हैज़ नॉट गिवन अप ऑन यू। एंड जब आप अपने आप को बैठ के अकेले ये बात कहोगे ना अल्लाह ताला ने मुझ पे गिव अप नहीं किया तो दिल से खुद आवाज आएगी कि तुम
31:53
Speaker A
अल्लाह के ऊपर क्यों गिव अप कर रहे हो? तो दिस इज व्हाट यू हैव टू टेल योरसेल्फ कि डोंट गिव अप ऑन अल्लाह। एंड रिमेंबर वन थिंग कि व्हाई इट हैज़ ऑलवेज बीन टोल्ड कि अपनी मौत को कसरत से
32:06
Speaker A
याद करो। ठीक है ना? तो ये मौत को कसरत से याद करने का मैं कहती हूं अच्छा चलिए हम मौत को कसरत से याद नहीं करना चाहते। हमें डर लगता है हम ना करें। हम अपने रब से मुलाकात को तो याद कर सकते
32:17
Speaker A
हैं ना कि हमें अपने रब से मिलना है। ठीक है? तो अगर रब से मिलने की उम्मीद और एक लगन और एक जुस्तजू और उसको फील करें कि हम अपने रब से मिलेंगे तो हमें किस हालत में मिलना चाहिए।
32:28
Speaker A
ठीक है? क्या हम एक शर्मिंदगीगी की हालत में एक बेबसी की हालत में या कुरान में उन लोगों का जिक्र आया हुआ है कि उन लोगों की हालत में मिलना पसंद करेंगे जो अल्लाह के सामने खड़े होकर गिड़गिड़ाएंगे या अल्लाह
32:39
Speaker A
एक मौका दे दे बस एक मौका दे दे अब मुझे समझ आ गई है मुझे बस वापस भेज दे मैं अब ऐसा नहीं करूंगा तो अल्लाह सुना ताला फरमाएंगे कि डेफिनेटली हमें जिंदगी में बहुत सारे मौके मिलते हैं निमरा हमें मिलते हैं हम देखते
32:51
Speaker A
हैं लेकिन हम अपनी आंखों को बंद कर लेते हैं उस मौकों के बाद तो वो फिर तो वो तो उस वक्त तो मुमकिन नहीं बड़ी अच्छी आपने बात की है आप मुझे यह बताइए कि अच्छा हम ठीक है एक किसी ने भी
33:03
Speaker A
एक कर लिया सोच लिया आ भी गए माशा्लाह आप भी हैं हम सब हैं हमने अब अपनी कंसिस्टेंसी इसके ऊपर कैसे रखनी है उसको कहते हैं ना छोड़ने के लिए क्या रेमेडीज है कुछ थोड़ी सारी वो भी बता दें
33:17
Speaker A
एक तो आपने पहला स्टेप ले लिया उसके बाद आपने ये करना है कि आपने या किसी तरह के आई एम सॉरी टू इंटरप्ट कि वो दोबारा उन गलतियों गुनाहों में पड़े ना जो पहले वो कर चुकी हम इसमें बहुत मेन
33:29
Speaker A
फैक्टर आता है आपकी कंपनी का ठीक है कि आपने देखना है कि अगर आपकी कंपनी क्योंकि बहुत दफा बहुत लड़कियां वही जैसा हम लोगों ने पहले हर्डल्स की बात की है ना तो वो दोस्तें ही होती हैं जो आपको
33:40
Speaker A
आगे नहीं जाने दे रही होती या दोस्त ही होती हैं जो आपको आगे पुश कर देती हैं। तो अगर तो आपकी कंपनी ऐसी है जो कि आपके इस्लाम को फायदा नहीं दे रही तो शुरू के दिनों में मैं कहूंगी गिव अप कर
33:52
Speaker A
दो। ठीक है? मतलब बहुत ये थॉट्स आएंगी कि अच्छा इस्लाम फिर वो लोग कहते हैं कि तुम तो इस्लाम में आके पत्थर दिल हो गई हो। आपने एक बात याद रखनी है कि इस्लाम में ना आप इस्लाम की तरफ आते हो आपके फेसेस होते
34:05
Speaker A
हैं। इनिशियल फज़ में हमेशा आपको अकेले होना होता है। हम फिर आप जब उस पे पर्सिस्टेंट हो जाते हो फिर आप दावा की तरफ आते हो। तो वो बाद वाला फज़ है। वो शुरू वाला फज़ नहीं है। शुरू में यू हैव टू वर्क ऑन योर
34:20
Speaker A
हार्ट। अब जिस दिल को खराब कर लिया है उस पे उसको ठीक भी तो करना है। तो उसमें सबसे पहले आपने देखना है कि क्या-क्या चीजें हैं, क्या-क्या फैक्टर्स हैं जो रियलिटी में आपको अल्लाह से दूर कर रहे हैं।
34:34
Speaker A
उसमें हो सकता है आपकी एडिक्शनंस हो। हो सकता है आपकी ड्रामा एडिक्शन हो, मूवी एडिक्शन हो, Netflix एडिक्शन हो, म्यूजिक एडिक्शन हो, दोस्तों की एडिक्शन हो। बॉयफ्रेंड वगैरह हो या कोई भी और हो या हो सकता है एक्स्ट्रा स्क्रॉलिंग हो। हम
34:49
Speaker A
वो भी एडिक्शन है। तो आपने इन एडिक्शन को देखना है कि ये है मेरे अंदर। अगर है तो आपको वन बाय वन स्टेप बैक करना है। और उसमें आपको शैतान ने ट्रस्ट मी यही वसवसा देना है। तुम पत्थर
35:04
Speaker A
दिल हो रही हो। अल्लाह तुम्हें रहम अल्लाह रहमान है। अल्लाह तुम्हें रहम सिखाता है। तुम क्यों इतनी पत्थर दिल हो रही हो? ये आपको सब वसवसे आएंगे। औरस्ट जिस दिन इंसान शैतान की साइकोलॉजी को समझता है ना इंसान को पता चलता है कि ये चीज क्या है
35:21
Speaker A
और फिर पता है इस्लाम पे चलना भी आसान होता है अगर आप शैतान को समझना शुरू कर शैतान को समझे तो समझे को समझे विस्प्रिंग को समझे माशा्लाह तो इसमें एक चीज ये है कि आपने लेस डाउन करके आपने वन बाय वन गिव अप करना है उन
35:35
Speaker A
चीजों के ऊपर और मेनली कंपनी है और आपकी एडिकशंस हैं उस और जब ये चीजें जाती है ना तो आपके पास इतना फ्री फ्री टाइम होता है। आप कहते हो यार इस फ्री टाइम में मैं करूं क्या? फिर
35:46
Speaker A
उसमें आपने पहले अल्लाह से और इन सब चीजों से पहले आपने अल्लाह से कन्वर्सेशन करनी है। दिस इज वन रूल जो मैं हमेशा बताती हूं। कोई चीज आपकी अल्लाह के साथ कन्वर्सेशन के बगैर नहीं हो सकती। सो वो
35:58
Speaker A
कन्वर्सेशन आपकी एज अ दोस्त चलनी ही चाहिए ऑल द टाइम। एंड कन्वर्सेट विद हिम एज इफ यू आर रियली लुकिंग दैट अल्लाह इस देयर समवेयर अराउंड यू। जैसे आपकी बड़ी मज़ की बात इसलिए क्योंकि दिस प्रैक्टिस करनी चाहिए और हम करते हैं
36:18
Speaker A
माशा्लाह और बड़ा मजा आता है इसमें आप अल्लाह से जब बात करते हो ना बड़े कैजुअल वे की अंदर मोहब्बत के साथ तो वो आपको अल्लाह के साथ एक रिश्ते को एक जाहिर करती है। तो इसमें ये है कि वो उस्ताद नुमान अली
36:31
Speaker A
खान जो है वो ये बताते हैं एक उसमें लेक्चर में वो बता रहे थे कि जो आपका रियल अल्लाह के साथ मोहब्बत है ना उसका उसकी मैनिफेस्टेशन ये है कि आप रैंडमली एक बंदा बैठा हुआ है और वो बेशक पब्लिक में
36:47
Speaker A
है और वो ऐसे ही बात कर रहा है जैसे वो एक इंसान से बात कर रहा है और उसको परवाह नहीं हो रही मेरे बारे में क्या सोचा जा रहा है। वो रियल प्यार है। हम लोगों को तो
36:56
Speaker A
हमारा कॉन्फिडेंस नहीं होता ना कि हम पब्लिक में उस तरह बात कर लें। तो यह चीज होना जरूरी है। तो अल्लाह ताला से मदद मांगने के बाद ये प्रैक्टिकल स्टेप्स लेना। वही के यानी अल्लाह ताला इज अ प्रायोरिटी एंड देन कम्स
37:10
Speaker A
योर प्रैक्टिकल एफर्ट। माशा्लाह। और जब आप इन सब चीजों को छोड़ते हैं अपनी एन एडिकशंस को एडिकशंस इन एनी फॉर्म तो यह बहुत ही एक जबरदस्त बात है। यू गेट टाइम टू गेट टू नो अबाउट द विस्परिंग ऑफ शैतान और रियलिटी ऑफ़ शैतान
37:25
Speaker A
देन यू कम टू नो अबाउट द वर्थ ऑफ द लव ऑफ़ अल्लाह। और जब आपको टाइम मिलता है और आप उसकी तरफ जाते हो तो फिर इंशा्लाह बहुत अच्छी बात है। आप मुझे यह बताइए आजकल हमारा माशा्लाह हम एक बहुत एक होपफुल भी
37:37
Speaker A
हैं। हमारे लिए एक हमारी जितनी यूथ आज इंटेलिजेंट है। हमारी यूथ आज जितनी माशा्लाह एक एनर्जेटिक है और एक मैं कहती हूं कि मतलब हर क्वालिटी आज के वक्त पे यूथ में मौजूद है। हर फैसिलिटी हमारे पास मौजूद है। हर चीज और बहुत कहते हैं ना
37:54
Speaker A
ऑप्टिमिस्टिक अप्रोच है हमारी। एक पॉजिटिव अप्रोच है उनके बारे में। आप यह बताइए कि क्या आप अपनी इर्दगिर्द, अपनी एजुकेशनल लाइफ में, अपनी इंस्टीटशंस, अपने कॉलेजेस, यूनिवर्सिटीज में व्हाट डू यू फाइंड? व्हाट इज द ट्रेंड ऑफ़ यूथ टुडे?
38:09
Speaker A
अगर आप परसेंटेज में जाएं तो कोई कंपैरिजन करना चाहे तो क्या बढ़ रहा है, कम हो रहा है, कैसा है?
38:17
Speaker A
आपने एक बात की जिस पे मैं समझती हूं कि यह बात करना बहुत जरूरी है। वो ये थी कि आज जितनी एक्सेसिबिलिटी हो चुकी है दीन को लेके तो हमें ना यह बात एज अ यूथ भी रियलाइज करनी चाहिए के कयामत के जो वो
38:35
Speaker A
सवाल हैं उनमें एक प्रॉपर अलग सवाल यानी उम्र के बाद एक प्रॉपर सेपरेट अल्लाह ताला ने क्वाड्रेंट दिया है जवानी को। सो जवानी है समथिंग जो आपकी बाकी लाइफ में नहीं है। ठीक है? तो जवानी का एक-ए मिनट
38:54
Speaker A
बाकी पूरी लाइफ में यानी आपका कंपनसेट नहीं हो सकता। एक तो ये बात। दूसरी बात ये कि आज के जमाने में जितना दीन आसान हुआ हुआ है हम उतना आज से 10 साल पहले या कह लें 30 साल
39:12
Speaker A
पहले उतना नहीं था। हम तो जब एक चीज जितनी आसान हो जाती है उसका सवाल उतना मुश्किल हो जाता है कि तुम्हारे पास इतनी एक्सेसिबिलिटी थी तुमने क्या किया क्या किया तो हमारे हमारे जो बाप दादा गुजरे हैं ना
39:28
Speaker A
उनसे वो सवाल नहीं होना जो हमसे होना है क्योंकि उनके टाइम पे हदीस एक क्लिक पे कंफर्म नहीं होती कुरान की आयत एक क्लिक पे नहीं आती थी तफासीर मतलब मैं तो हैरान होती हूं जिस तरह अब मैं उस्ताद नुमान से कह रही हूं तो
39:43
Speaker A
मैं तो हैरान हो जाती हूं कि द काइंड ऑफ़ नॉलेज जो आपके ऊपर आपको दिया जा रहा है आपको एक प्लेटफार्म से या मतलब जहां से भी जो ले एक्सक्यूज नहीं है बिल्कुल भी नहीं है। अच्छा जब इतनी एक्सेसिबिलिटी आ गई है और
39:58
Speaker A
फिर नौजवान चूज़ करता है कि मैंने अय्याशी करनी है। तो फिर अल्लाह ताला के हां उसका कोई वो जवाब नहीं दे सकता। बिल्कुल। दूसरी अब फिर आपने जो क्वेश्चन किया था कि क्या चेंज आ रहा है? देखिए इसमें
40:13
Speaker A
जैसे-जैसे वही वक्त गुजर रहा है ना तो फितना उतना ज्यादा हो रहा है। हराम उतना ज्यादा नॉर्मलाइज हो रहा है। और मां-बाप ने गिव अप कर दिया। जिस तरह अच्छाई ये क्लिक पे है ना बुराई भी एक क्लिक पे है।
40:27
Speaker A
हां। बुराई भी एक क्लिक पे है। बुराई भी उतनी एक्सेसिबल हो चुकी है जितनी आज से 10 साल पहले नहीं थी। थी। ठीक है? तो इसमें ये बात है कि पॉजिटिव चेंज लेकिन वो आ रहा है जो कि आज से 5 साल
40:42
Speaker A
पहले जिस तरह हमने पहले डिस्कस किया कि नहीं था। यानी मुझे याद है मैं जब बैक देन डीपीटी से भी पहले मैं एफएससी में होती थी तो अगर मेरा Instagram कोई अकाउंट था और मैं स्क्रॉल कर रही थी तो इतनी ज्यादा ये
40:54
Speaker A
लेक्चर्स नहीं आते थे कि कोई एक ही हिट कर जाए मुझे और मैं ठीक हो जाऊं। नहीं होता था। हम अब ये होता है कि अगर कोई इंसान हराम वाली जिंदगी भी गुजार रहा है और वो नॉन प्रैक्टिसिंग भी है उसकी भी फीड पे कुछ ना
41:07
Speaker A
कुछ खैर आती है। तो ये के यानी अब के टाइम में जो यूथ है उसमें वो सेंस ऑफ अवेयरनेस आ रही है जो कि बड़ों में भी नहीं है। हम और ये जो फिक्र है ये बहुत इंपॉर्टेंट है।
41:23
Speaker A
और ये जो आज के नौजवान की फिक्र पता है प्रैक्टिसिंग होने के बाद उनकी अपनी बाकी लाइफ नहीं है। उनकी औलाद है। ये कभी हमारे मां-बाप में कभी उनकी जवानियों के टाइम पे मेरा नहीं ख्याल कि ऐसा हुआ होगा कि उनको फौरन फिक्र लगी होगी
41:38
Speaker A
यार हमारी औलाद का क्या होगा। सही बात है। तो यह हम लोगों में एक सेंस आई है कि अच्छा क्योंकि हम ना फितनों से और गुनाहों से एक्सट्रीमली एक्सपोज हुए हैं। हमें पता चले यार इस इस तरह के भी गुनाह
41:50
Speaker A
होते हैं। फिर हम सोचते हैं कि जो अगली जनरेशन आएगी उस पे तो डबल ट्रिपल होगा। उसका क्या होगा? उसका क्या होगा? तो ये है कि खैर वाली अ जो एक जनरेशन है वो भी डेवलप हो रही है
42:04
Speaker A
और अल्हम्दुलिल्लाह वो इसी वजह से है कि हम लोगों ने वो जो एक सोर्स था ना शर का जो कि मोबाइल था जो कि ये सोशल मीडिया था वहां पे अब खैर भी उतनी क्वांटिटी की आ गई है
42:17
Speaker A
और थ्रू ऑल दीज़ प्लेटफॉर्म्स एंड यू नो इन सब चीजों के थ्रू तो अल्हम्दुलिल्लाह इन चीजों के थ्रू बहुत इफेक्ट पड़ा है और लेकिन वही है कि फिर गुनाह भी उतना ही आगे जा रहा है। अब ये आपकी चॉइस है।
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Speaker A
तो ये आपकी ही चॉइस है। बिल्कुल कि आप अपनी चॉइस को किस तरफ लेके जाते हैं। अल्लाह ने आपको जो हिकमत और एक अल्लाह ने आपको जो एक अब देखिए ना हम लोग अक्सर तो ये भी होते हैं ना कि जी किस्मत
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Speaker A
पे डाल देते हैं। अच्छा जी शायद मेरी ना लिखा ही ये हुआ था। ये नहीं पता ये किस्मत भी हमने खुद ही अपनी लिखवाई हुई है कि हमने ये काम करने हैं। बहुत एक मैंने आपसे एक अच्छी बात भी आपने बताई। मैंने आपसे
42:51
Speaker A
बड़ा एक इंटरेस्टिंग बड़ी मोटिवेशनल बात एक पूछनी है। आजकल हमारे यहां हम वैसे जैसे डिस्कस कर रहे थे कि हमारे जो दीन की सबसे बड़ी पामाली होती है वो दो औकात में होती है। वो एक है कि जब वफात हो जाती है
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Speaker A
किसी फैमिली में या शादी हो जाती है। तो हम दीन को रख के उसमें जो है ना उसकी मैं कहता कहती हूं मजाक भी हम उड़ा रहे होते हैं। हम सभी इसमें शामिल हैं। आपकी शादी मैंने सुना है। माशा्लाह बहुत खूबसूरत
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Speaker A
तरीके से आपने बहुत एक अच्छे तरीके से की है और आपने उसको एक एग्जांपलरी शादी बनाया है। एक तो ये कि माशा्लाह हमारा जो हमारा फिलस्तीन के लिए आपने उनके साथ एक यकजहती का इजहार करते हुए उसको उसको थीम बनाया।
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Speaker A
आप अपनी जो रिसेंटली माशा्लाह आपकी शादी हुई है उसकी थोड़ी सारी एक्सप्लेनेशन हमें दें। आपने क्या-क्या किया और देखिए ना मैं कहती हूं कितना आसान है। आप हमारे सामने बैठी हैं। यू डड इट। वंस यू डड इट। माशा्लाह व्हाई कांट यू नो एवरीवन ऑफ़ अस
43:44
Speaker A
डू दैट। थोड़ी शादी की तफसील बताइए। अ पहला तो क्रेडिट मैं अपने हस्बैंड को दूंगी क्योंकि ही वास द वन टू इनिशिएट ऑल ऑफ दी थिंग्स। तो हम दोनों को ना ऑलरेडी पता था कि हम दोनों पैलेस्टाइन को लेके बहुत ज्यादा
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Speaker A
एक्टिव हैं। तो ये था कि हमारी जब डेट फिक्स हो गई। फिर यह फिक्र आ गई कि अच्छा अब शादी किस तरह करनी है। क्योंकि अब मैं और जो मेरे हस्बैंड हैं हम लोग आप समझ लें एक तरफ थे। हमारी सोच एक तरफ थी।
44:16
Speaker A
हमारे प्लांस एक तरफ थे और बाकी पूरी फैमिली एक तरफ थी। अच्छा तो इट वाज़ सम एवरीबॉडी वांटेड टू हैव इट इन अ यूजुअल वे दैट यू वेडिंग। एक्सक्ट्ली एक्सक्टली सबका क्योंकि कहीं ना कहीं नोफिल वाज़ द लास्ट ब्रदर इन ह फैमिली और
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Speaker A
मैं अपनी फैमिली की सबसे छोटी आखरी बच्ची थी तो मेरे ऊपर भी सब ने अपने पूरे वो करने हां नोफिल की तरफ भी इस तरह का सीन था। अब फिर ये था कि विद इन द हलाल बाउंड्रीज जो अल्लाह ताला ने सेट की हुई है उनमें
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Speaker A
मैंने और नोफिल ने कन्वर्सेशन की के हमारे क्या प्लांस हैं शादी को लेके बहुत प्रैक्टिकली तो उसमें फिर ये हुआ कि यानी हम लोगों ने इवेंट्स को डिस्कस किया। ये तो हम लोगों को पता था कि मेहंदी वगैरह
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Speaker A
वाले सीन तो होने ही नहीं है और म्यूजिक तो होना ही नहीं है। ये तो हम लोगों का बिल्कुल फुल एंड फाइनल उस तरह था। हम देन हम लोगों का ये था कि हमने मेनली द फर्स्ट कॉल वी हैड शादी की डिस्कशन में
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Speaker A
उसमें उनके और मेरे पॉइंट्स हमेशा सेम होते थे कि अच्छा वो भी वही डिस्कस करें और मैं भी वही डिस्कस कर रही हूं। वो ये था एक तो फोटोग्राफी हमारा मेन था कि हमने फोटोग्राफी नहीं करानी। हम हम
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Speaker A
क्योंकि वही है मैंने ये चीज बैक देन मेरा ख्याल है दो साल पहले मुझे थोड़ा ज्यादा सीखने को मिली कि एक दफा मेरी एक बेस्ट फ्रेंड की शूट पे मैं थी और वो जो मेल फोटोग्राफर था वो आराम से
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Speaker A
उसकी तस्वीरें खींच रहा है और उसके ऊपर कमेंट्स कर रहा है और मतलब ये मैंने ये माहौल देखा और उस पे मुझे रियलाइज हुआ ये हम क्या कर रहे हैं हम मतलब एक लड़का अपनी बीवी के साथ है और एक
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Speaker A
लड़का ही फोटोग्राफी कर रहा है और लड़की पूरी जिंदगी में इतनी प्यारी नहीं लगी जिस दिन उस दिन प्यारी लग रही है और एक लड़के को पूरी अलाउंस मिल रही है एक मेहरम के प्रेजेंस में कि एंजॉय हर इन लाइक अपने वे
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Speaker A
में तो ये मेरा फुल कांसेप्ट था कि भ फोटोग्राफी तो नहीं होनी और नोफिल का भी यही था कि हमने फोटोग्राफी नहीं करवानी देन हमारा ये था कि आइडियली हमने जो सोचा था बहुत चीजें थी जो हमने आइडियल सोची थी
46:24
Speaker A
लेकिन फिर फैमिली और मतलब म्यानार वी का एक रास्ता निकल हम लोगों का हम लोगों का आइडियल यह था कि मस्जिद में निकाह हो और उसके बाद बस वलीमा हो। ठीक है? मस्जिद में निकाह रुखसती वहीं से और वलीमा
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Speaker A
फिर लेकिन कुछ चीजें वही फैमिली की फैमिली की मतलब क्योंकि मेहमान वगैरह भी थे तो मेरे बाबा का ये पॉइंट ऑफ व्यू था कि नहीं खाना एटलीस्ट मुझे खिलाना है मेहमानों को। हम तो शुरू में वही नोफिल ने थोड़ी सी
46:54
Speaker A
रेजिस्टेंस दी के नहीं मैं नहीं चाहता कि यह उसी तरह हो और ये वो सारा लेकिन खैर एंड पे ये हुआ कि सिर्फ यानी जो खाने वाला सीन होता है ना वो हुआ यानी वही हमारा मस्जिद में ही निकाह हुआ
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Speaker A
और वहां से उसके बाद एक खाने की जगह पे हम लोगों ने यानी वो सारा खाना बगाया हुआ और मुझे रुखसती भी बाकी मेल्स के सामने नहीं करनी थी। मेरा एक था कि मैंने जिस तरह बारात कासेप्ट होता है ना कि और लड़की जा
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Speaker A
रही है सारे से मर्द आ रहे हैं फैमिली आ रही है वो भी मैंने नहीं करना था तो ये भी मैंने कहा हुआ था कि मैंने घर से अपने मेहरमों के अंदर रुखसत होना है फिर हम लोग घर पे आए और घर पे जो है वो
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Speaker A
अपनी जो मेरे मेहरम है उनके ही अंडर मैं रुखसत हुई चुप करके और मतलब ऐसा था कि किसी को भी मेरे नेबर्स में भी आईडिया नहीं था कि यहां पे शादी हो रही है और नोफल की तरफ भी इसी तरह था कि उनकी भी
47:53
Speaker A
इतनी सिंपलीसिटी में सारा कुछ हुआ था। उनकी भी फैमिली में इस तरह हुआ था कि किसी को इर्द-गिर्द अंदाजा ही नहीं था कि यहां शादी हो रही है। वो ढोल ढमक्का लाइक कुछ भी नहीं था। फिर वलीमे का दिन था। अच्छा
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Speaker A
इस सब में मेन जो चीज एक और थी जो मैंने करनी थी मेरा था कि मेरी फोटोग्राफर तो मैं नहीं बुलवा रही। लेकिन मैं चाहती हूं कि किसी के मोबाइल में मेरी पिक्चर ना हो। ये मेरा ना सर का
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Speaker A
दर्द था और इसकी वजह से मैंने अपनी मामा की इतनी वो किया ना मतलब मामा एक टाइम पे शी वास डन वि मी शी वास डन विद मी कि मैं थक गई हूं और फिर इस तरह ना तो उसमें फिर ये था कि उसके लिए मैंने
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Speaker A
अपनी मम्मा को कहा था कि अपने हर रिश्तेदार को ये बता दें कि निम्रा की पिक्चर कोई भी नहीं लेगा। तो स्टिल आई डोंट ट्रस्ट द रिश्तेदार। तो मैंने एतियातन एक व्हेल कैरी किया और उस व्हेल में मतलब बहुत ज्यादा मेरा
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Speaker A
फेस रिवील नहीं हो रहा था। मेरा पर्दा मेंटेन हो रहा था। तो ये कि व्हेल था जो मैंने एक और हालांकि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अपनी शादी पे व्हेल भी लूंगी। तो ये था और वो भी सिर्फ मैंने एहतियातन
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Speaker A
ही लिया था पिक्चर से बचने के लिए। तो वो जो एक कल्चर है ना कि किसी की शादी हुई है और किसी की बेटी की पिक्चर्स हर WhatsApp ग्रुप में जा रही हैं। दिस वास समथिंग जो मैं अपनी शादी पे नहीं चाहती थी।
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Speaker A
तो ये था कि मेरे हर रिश्तेदार को बहुत सख्ती से मना था कि मेरी पिक्चर नहीं होगी जिस तरह मैं और फिर एक और चीज के मैंने स्टेज सेटिंग नहीं कराई थी। के स्टेज पे ना मैं बैठूंगी क्योंकि स्टेज
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Speaker A
पे क्या होता है? यू आर डिस्प्लेइंग द वुमेन। एंड फिर यू आर अलाउविंग एव्री मोबाइल कि वो पिक्चर ले हम हम कोई स्टेज सेट नहीं था और फिर मैंने ब्राइडल रूम में बैठी हुई थी अगर किसी ने मिलना है वह वहां पे आके मुझसे मिले
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Speaker A
एंड खलास ब्राइडल रूम में भी कुछ मेरे रिश्तेदार आए थे जिन्होंने कहा कि निम्रा पिक्चर ले लें फिर मैंने उनको वहां पे भी मना किया और यानी ये वाले सारे सिचुएशंस हुए और वही फिर वलीमे का दिन आया और वलीमे के दिन भी
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Speaker A
मतलब नोफल ने हमेशा मुझे बहुत कंफर्ट ज़ोन दिया कि यानी जस्ट डू इट योर वे द वे यू वांट इट टू बी और सारा कुछ ना तो ही हैज़ ऑलवेज बीन वेरी सपोर्टिव मेरी मेरी हर चॉइस में मतलब शादी के मुझे याद है के
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Speaker A
मेरी मेरे बहुत उस तरह के ना छोटी-छोटी चीजें थी जो मैं चाहती थी कि ऐसी हो तो हमेशा ही वास लाइक कि अच्छा आप जैसे कह रही हैं वैसे ही होगा और उस तरह ना मतलब एक सपोर्टिव बहुत ज्यादा सपोर्टिव
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Speaker A
तो वलीमे के दिन एक थोड़ी सी चीज हुई कि जिसमें ना एंड बिल्कुल एंड टाइम पे अ थोड़ा सा प्लान उस तरफ जा रहा था कि स्टेज पे शायद मैं बैठूं। हम मुझे वहीं पे परेशानी लग गई कि मैं एंड
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Speaker A
टाइम पे कैसे वो कैरी करूंगी। लेकिन फिर अल्हम्दुलिल्लाह ये हुआ कि बस यही था क्योंकि मेहमानों से मिलना था जो मेरे इन लॉस में थे उनका था। लेकिन वो भी अल्लाह ताला ने मैनेज करवाया के नहीं हुआ। मतलब मैंने फिर भी उसमें वलीमे
50:52
Speaker A
के दिन भी मैंने पूरा व्हेल कैरी किया और उसी में ही मैं मेहमानों से मिली। तो यह मेरी एक बहुत बड़ी मैं अपने लिए अचीवमेंट है कोई किसी WhatsApp ग्रुप में मेरी पिक्चर नहीं दिस वास माय गोल मेरी शादी का
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Speaker A
और बाकी इसमें इसमें मैंने जो वलीमे के दिन भी मैं अपने आपको कह रही थी वो ये था कि हर चीज जो एक ख्वाब लग रही थी ना कि कैसे होगा हो गया वो अल्लाह ताला ने जगहजगह पे सिचुएशन ही
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Speaker A
ऐसे क्रिएट कर दी कि वो चीज वैसे होगी वैसे हो गया अल्लाह बनाते हैं ना बहुत ज्यादा और आपकी प्रॉपर सेग्रगेशन थी मेल्स फीमेल्स प्रॉपर सेग्रगेशन ठीक है और मतलब माशा्लाह उसमें ये था कि जैसे आपने थीम भी रखा हुआ था कोई
51:37
Speaker A
फिलिस्तीन के लिए थीम ये था कि ना प्रॉपर नोफिल की तरफ से ही अगेन एवरीथिंग वास फ्रॉम नोफिल साइड अल्हम्दुलिल्लाह नोफिल ने प्रॉपर हमारी जो बिद भी थी ना वो बिद के भी बॉक्सेस थे और उस बॉक्स के अराउंड पैलेस्टीनियन फ्लैग था
51:53
Speaker A
और उसके ऊपर नोफिल एंड निम्रा माशा्लाह तो एक नोफिल ने यह चीज की फिर बैजेस थे प्रॉपर जो वहां पे सब में डिस्ट्रीब्यूट किए गए फिर वो जो टूलकिट है मिशन पैलेस्टाइन की वो भी वहां पे डिस्ट्रीब्यूट की गई फिर ये कि खुफिया थीम
52:08
Speaker A
था हमारा वलीमे का और वो था और फिर उसके बाद हम लोग निकाह के दिन जब वापस आए ना मैं जब रुखसत हो गई और उनके घर आई तो वहां पे भी उस उस दिन ना उन्होंने ये किया हुआ था कि हमारे लिए जो
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Speaker A
वेलकमिंग बुकेस थे ना वो भी नोफिल ने पेलेस्टीनियन कुफिए के अंदर किए हुए थे। तो ये छोटी-छोटी चीजें थी जो मुझे उनकी भी बहुत अच्छी लगी और मतलब ये ये चीजें थी जिनमें मैंने हम लोगों ने थोड़ा उस तरह
52:37
Speaker A
किया। माशा्लाह बहुत देखिए बात फिर वही आ गई कि व्हेन देयर इज अ विल देयर इज अ वे और दूसरी बात ये है कि जब खास तौर पे हम अल्लाह की खातिर कोई ना कुछ सोच लेते हैं तो रस्ते भी अल्लाह ताला निकाल देते हैं
52:50
Speaker A
लोगों को भी अल्लाह ताला राजी कर देते हैं दिल भी अल्लाह ताला बदल देते हैं सामान साजो सामान भी वैसा हो जाता है और ये सिर्फ एक इंटेंशन है और अल्लाह ताला हम सबको तौफीक अता फरमाए कि हम इस चीज की
53:02
Speaker A
तरफ चल सकें हमारी यूथ के अंदर माशा्लाह बहुत ज्यादा एक रेवोलशनरी चेंजिंग जो आ रही है वो भी इस चीज को माने हमारे बड़े भी माने हम भी माने और इसमें ना बस एक चीज जो मैं उस टाइम पे
53:14
Speaker A
हाईलाइट करना भूल गई कि शुरू में थोड़ी सी हमने रेजिस्टेंस फैमिली को लेके देखी थी लेकिन फिर हमारी फैमिली ने हमें बहुत सपोर्ट किया सपोर्ट भी किया ठीक है यानी मेरी फैमिली में मुझे अभी भी एक एक वाक्या छोटा सा है याद आया के मेरी
53:29
Speaker A
शादी के बाद ना हमारी अपनी बहुत पर्सनल जो सिर्फ मेरा इमीडिएट ग्रुप है ना फैमिली का उसमें भी पिक्चर भेज लेके तो मेरे बाबा मुझसे पूछ रहे थे निमरा ये पिक्चर भेज हालांकि वो सिर्फ मेरे बहन भाइयों का है
53:41
Speaker A
तो मैंने कहा बाबा भेज दे तो यानी हमारी फिर ना मतलब दे डिड अंडरस्टैंड एवरीथिंग दे डिड अंडरस्टैंड इट एट द एंड ऑफ़ द डे और नोफिल की फैमिली ने भी बहुत ज्यादा जो सपोर्ट किया इस बारे में
53:54
Speaker A
देखिए वही बात है ना अल्लाह ताला रस्ते बनाते हैं और अल्लाह ने बना दिए माशा्लाह आपके लिए जजाक अल्लाह खैर इमरा इट वास वै प्रोडक्टिव वै नाइस मीटिंग यू और अल्लाह ताला हम सबको तौफीक दे आपकी इन बातों से
54:04
Speaker A
बहुत कुछ सीखने की और हमारे बच्चों को भी इंशा्लाह सो वै नाइस ऑफ यूप होप टू मीट यू अगेन इंशा्लाह अस्सलाम वालेकुम [संगीत]
Topics:हिजाबइस्लामिक जीवनशैलीधार्मिक यात्राअल्लाह की रहमतयुवा प्रेरणाकुरान और हदीसनमाजधार्मिक संघर्षपरिवार का समर्थनमुस्लिम संस्कृति

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