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60 Days. 1,100 Raids. How FSSAI is SCARED of Tukaram Mundhe?

तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में महाराष्ट्र में एफडीए ने 60 दिनों में 1,100 से अधिक छापे मारे, नकली दूध और मिलावट पर कड़ी कार्रवाई की।

Key Takeaways

  • महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा के लिए एफडीए की कार्रवाई प्रभावशाली और व्यापक रही।
  • नकली दूध और मिलावट को संगठित अपराध माना जाना चाहिए।
  • ट्रेसेबिलिटी और डिजिटल रजिस्टरिंग से खाद्य सुरक्षा में सुधार संभव है।
  • सरकारी और निजी दोनों स्तरों पर खाद्य नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है।
  • जनता की जागरूकता और दबाव से ही भ्रष्टाचार और मिलावट पर नियंत्रण संभव है।

What the video covers

  • तुकाराम मुंडे ने महाराष्ट्र के एफडीए कमिश्नर के रूप में 25 मई 2026 को पद संभाला।
  • मुंबई हाईकोर्ट की कैंटीनों की जांच के बाद सरकारी संस्थानों में भी नियमों का उल्लंघन उजागर हुआ।
  • मुंडे ने 60 दिनों में 10,100 से अधिक छापे मारे और 274 जगहें सील करवाईं।
  • महाराष्ट्र में नकली और केमिकल मिलावट वाला दूध एक बड़े पैमाने पर पाया गया, जिसमें कॉस्टिक सोडा और शैंपू जैसे खतरनाक पदार्थ शामिल थे।
  • पूरी दूध आपूर्ति श्रृंखला की जांच की गई, जिसमें किसान से लेकर डेरी तक मिलावट की पुष्टि हुई।
  • मुंडे ने ट्रेसेबिलिटी को मिलावट रोकने की मुख्य चाबी बताया और डिजिटल रजिस्टरिंग लागू की।
  • सिंथेटिक दूध बनाने वालों पर संगठित अपराध के तहत मुकदमा चलाने की मांग की गई।
  • मुंबई के बड़े क्लबों और प्रतिष्ठित डेयरी फार्मों की भी जांच हुई, जहां कई नियमों का उल्लंघन मिला।
  • एफएसएसएआई के आंकड़ों के अनुसार, देश में खाद्य सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक है, खासकर दूध में मिलावट।
  • मुंडे ने कहा कि कानून का पालन करने वालों को डरने की जरूरत नहीं, लेकिन जो नहीं करते उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

Answers

Questions about this video

तुकाराम मुंडे ने एफडीए कमिश्नर के रूप में क्या मुख्य बदलाव किए?

तुकाराम मुंडे ने एफडीए में व्यापक छापेमारी कर नकली दूध और मिलावट पर कड़ी कार्रवाई की, ट्रेसेबिलिटी लागू की और संगठित अपराध के तहत मुकदमा चलाने की मांग की।

मिलावटी दूध में कौन-कौन से खतरनाक पदार्थ पाए गए?

मिलावटी दूध में कॉस्टिक सोडा, स्किम्ड मिल्क पाउडर, इमल्सिफायर और कुछ सैंपल में शैंपू जैसे खतरनाक केमिकल पाए गए।

एफएसएसएआई के आंकड़ों के अनुसार भारत में खाद्य सुरक्षा की स्थिति कैसी है?

एफएसएसएआई के अनुसार, देश के कई हिस्सों में खाद्य सुरक्षा चिंताजनक है, जहां दूध के 7% सैंपल पीने लायक नहीं थे और कई सैंपलों में कैंसर पैदा करने वाले तत्व और एंटीबायोटिक के अंश मिले।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
बुधवार की बात है। बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही थी। मुंबई के बड़े होटल और रेस्टोरेंट मालिक अपने वकीलों के साथ खड़े थे। शिकायत यह कि हमें ना नोटिस मिला, ना सुधारने का मौका। सीधे दुकान बंद कर दी गई।
00:16
Speaker A
बीच सुनवाई में जज साहब ने एक सवाल पूछा। बहुत सीधा सवाल। आप हर बार प्राइवेट रेस्टोरेंट को ही क्यों पकड़ते हैं? कभी सरकारी कैंटीनों की तरफ देखा? कभी खुद इस हाई कोर्ट की कैंटीन देखी है? कोर्ट में हल्की हंसी हुई। बात आई गई, हो गई। अगले
00:34
Speaker A
दिन 24 घंटे के अंदर फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की टीम दनदनाती हुई बॉम्बे हाईकोर्ट की इमारत में घुसती है और सीधे कैंटीन में जाती है। हाई कोर्ट में तीन कैंटीन हैं। एक-एक करके तीनों चेक हुईं। खाना, सफाई, रजिस्टर, लाइसेंस सब। दो में
00:53
Speaker A
सुधार की गुंजाइश थी। वार्निंग दी गई और तीसरी के पास फूड लाइसेंस ही नहीं था। बोर्ड लगा, बिजनेस क्लोज्ड। टीम निकल गई। थोड़ी देर बाद वही वकील साहब लोग चाय पीने पहुंचे तो देखा कैंटीन बंद पड़ी है। एक
01:09
Speaker A
दिन पहले कोर्ट ने पूछा था, कभी अपने घर में झांका है? और अगले ही दिन शुरुआत उसी कोर्ट की कैंटीन से हुई। यह करने के लिए जिगरा चाहिए और वह जिगरा एक आदमी के पास है। तुकाराम मुंडे 21 साल की नौकरी, 25
01:24
Speaker A
तबादले और आज तक भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं। और अब इसी आदमी को कुर्सी से हटाने के लिए महाराष्ट्र विधानसभा में एक विधायक के मुताबिक ₹50 करोड़ का इंतजाम किया जा रहा है। ₹50 करोड़। एक सरकारी अफसर को
01:40
Speaker A
हटाने के लिए उसकी पूरी जिंदगी की तनख्वाह जोड़ दीजिए तो भी इस रकम का छोटा सा हिस्सा नहीं बनेगा। तो सवाल यह है वह धंधा कितना बड़ा होगा जिसे बचाने के लिए 250 करोड़ खर्च करना सस्ता सौदा लग रहा है और
01:55
Speaker A
उससे बड़ा सवाल उस धंधे से निकल कर रोज आपकी थाली में, आपके बच्चे के गिलास में जो पहुंच रहा है वह आखिर है क्या? तुकाराम मुंडे 25 मई 2026 को महाराष्ट्र के एफडीए कमिश्नर बने। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन
02:11
Speaker A
वह विभाग जिसका नाम तक ज्यादातर लोगों ने पहले सुना नहीं था। जिसके दफ्तर में सन्नाटा पसरा रहता था। 2 महीने बाद हालत यह है कि पूरे राज्य में 10,100 से ज्यादा छापे पड़ चुके हैं। 274 जगहें सील हो चुकी
02:26
Speaker A
हैं। करीब 50 करोड़ का माल जब्त हो चुका है। और मुंबई से नागपुर तक रेस्टोरेंट वाले अपने किचन खुद साफ करवा रहे हैं। स्टाफ को ग्लव्स और हेड कैप पहना रहे हैं। कर्मचारियों की मेडिकल फाइलें ढूंढ रहे हैं। यानी अब पकड़े जाने के बाद नहीं
02:42
Speaker A
पकड़े जाने के डर से पहले। जब एक पॉडकास्ट में उनसे पूछा गया कि इतने बड़े लोगों से लड़ते हुए धमकियां नहीं आती, डर नहीं लगता तो जवाब था डर लगने की कोई बात ही नहीं है। यह मेरा काम है और अपने काम से क्यों
02:55
Speaker A
डरना। और फिर उन्होंने एक लाइन कही जो शायद इस पूरी कहानी की सबसे साफ लाइन है। जो लोग कानून का पालन कर रहे हैं उन्हें मुझसे डरने की कोई जरूरत नहीं और जो नहीं कर रहे उन्हें मुझसे हर चीज का डर होना
03:09
Speaker A
चाहिए। अब आते हैं दूध पर क्योंकि यहीं से सबसे डरावनी बात निकलती है। बाकी अफसर एक दुकान पर छापा मारते हैं। थोड़ा माल जब्त करते हैं और मान लेते हैं काम हो गया। वह दुकान अगले हफ्ते फिर खुल जाती है। मुंडे
03:24
Speaker A
ने दुकान नहीं उठाई। उन्होंने पूरी चैन उठाई। दूध बेचने वाला, थोक विक्रेता, डिस्ट्रीब्यूटर, ट्रांसपोर्टर और उसके पीछे की डेरी। और जब यह चैन खुली तो अंदर से जो निकला वह सुनकर रूह कांप जाती है। पता चला कि महाराष्ट्र में दूध की एक पूरी
03:41
Speaker A
समानांतर लाइन चल रही थी। सिंथेटिक और केमिकल दूध की। मुंडे खुद बताते हैं कि इसमें दो अलग-अलग गिरोह साथ काम कर रहे थे। एक तरफ लोग स्किम्ड मिल्क पाउडर सप्लाई कर रहे थे। दूसरी तरफ वो केमिकल और इमल्सिफायर जो उस पाउडर को बांधकर दूध
03:57
Speaker A
जैसा बना दें। इसमें कॉस्टिक सोडा इस्तेमाल हो रहा था और कुछ सैंपल में शैंपू। अब यह सब क्यों हो रहा था? क्योंकि गणित सीधा है। इस केमिकल दूध की लागत आती थी करीब ₹15 लीटर। भैंस के दूध के
04:09
Speaker A
स्टैंडर्ड तक ले जाना हो तो करीब ₹30। जबकि बाजार में असली गाय का दूध बिकता है 40 से 50 में। यानी यह बनाना फायदे का सौदा है। असली दूध में मिलाइए। मात्रा बढ़ाइए, बेच दीजिए। और यह कहीं एक जगह नहीं
04:24
Speaker A
हो रहा था। किसान के लेवल पर भी, मिल्क कलेक्शन सेंटर पर भी, चिलिंग सेंटर पर भी। और वहां से यह दूध सीधे डेरियों तक जा रहा था। यानी पनीर, खोया, मिठाई, घी इस पूरी चेन में। मुंडे ने इस पर सिर्फ एक शब्द
04:38
Speaker A
इस्तेमाल किया। जहर। और 2 महीने के अंदर 1.5 लाख लीटर नकली दूध और 35 टन मिलावटी पनीर पकड़ा गया। रोका कैसे जाए? और यहां मुंडे का जवाब सबसे दिलचस्प है क्योंकि वह छापे की बात नहीं करते। वह सिस्टम की बात
04:54
Speaker A
करते हैं। उनका कहना है कि असली चाबी है ट्रेसेबिलिटी। जब तक हम दूध की एक-एक बूंद को ट्रेस नहीं कर सकते कि यह कहां से आई है, तब तक मिलावट पूरी तरह खत्म नहीं होगी। और वह यह भी बताते हैं कि यह मुमकिन
05:09
Speaker A
कैसे है। देखिए हर किसान के पास कितनी गाय या भैंस हैं और एक जानवर औसतन कितना दूध देता है यह पता है। कानूनन हर कलेक्शन सेंटर के लिए रजिस्टर रखना अनिवार्य है। किससे लिया, कितना लिया, कितना रिजेक्ट किया। महाराष्ट्र में मुंडे ने इसे लागू
05:26
Speaker A
करवाना शुरू किया और उनका कहना है कि असर क्वालिटी पर दिखने भी लगा है। अब अगर यह सब डिजिटल हो जाए तो पता चल जाएगा कि फलां गांव से रोज कितना दूध आना चाहिए। उससे ज्यादा आ रहा है तो कुछ तो गड़बड़ है और
05:40
Speaker A
जानवरों की पहचान भी मुमकिन है। एनिमल हस्बेंड्री विभाग में टैगिंग होती है और भारत सरकार का नेशनल डिजिटल लाइफस्टॉक मिशन पोर्टल पहले से मौजूद है। मुंडे खुद उस विभाग में सचिव रह चुके हैं और उन्होंने ही इसे लागू किया था। उनका कहना
05:56
Speaker A
है जानवर की टैगिंग को दूध की खरीद से जोड़ दीजिए। आंकड़ा मैच नहीं करेगा तो गड़बड़ी पकड़ में आ जाएगी। लेकिन इसके साथ एक दूसरी बात भी है और यह और भी जरूरी है सजा क्योंकि इस देश में मिलावट की सजा
06:11
Speaker A
मजाक है। बड़ी से बड़ी कंपनी पर भी ज्यादा से ज्यादा 10 लाख का जुर्माना लगता है। जो कंपनी 100 करोड़ करोड़ का कारोबार कर रही है। उसके लिए 10 लाख कुछ भी नहीं। वह इसे बिजनेस की लागत मानकर चुका देती है।
06:27
Speaker A
इसीलिए मुंडे कहते हैं कि सिंथेटिक दूध बनाने वालों पर जुर्माने का नहीं संगठित अपराध और आर्थिक अपराध का मुकदमा चलना चाहिए। क्योंकि उसी धारा में उम्र कैद तक का प्रावधान मौजूद है और यह बात उन्होंने सिर्फ कही नहीं गुटके के बड़े ग्रुप्स पर
06:44
Speaker A
उन्होंने मकोका लगाने की तैयारी शुरू की। यानी वह कानून जो आमतौर पर अंडरवर पर लगता है। इस आदमी ने मिलावट को छोटी-मोटी बात नहीं, संगठित अपराध माना। गुटखे के खिलाफ अभियान के पहले सात दिन में ही 203 जगहों
07:00
Speaker A
पर कार्रवाई हुई। 86 जगह सील, 102 गिरफ्तार और पहले महीने में सिर्फ गुटखा और पान मसाला 34 करोड़ 66 लाख का पकड़ा गया। अब बात करते हैं उस हिस्से की जिसने पूरी इंडस्ट्री की नींद उड़ा दी। इस देश में
07:17
Speaker A
मिलावट पर कार्रवाई हमेशा सबसे निचले तबके पर होती आई है। ठेले, छोटी दुकानें, गली के होटल क्योंकि वहां ना वकील है, ना नेता, ना पैसा। मुंडे ने ठीक इसका उल्टा किया। जुलाई के आखिरी हफ्ते में एफडीए ने मुंबई
07:33
Speaker A
के सबसे बड़े क्लबों की जांच शुरू की और वहां जो मिला कॉकरोच की बीट, सब्जियों पर फफूंदी, एक्सपायर्ड सामान और गंदे किचन। नतीजा पांच बड़े क्लबों के लाइसेंस सस्पेंड। सबसे बड़ा नाम क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया। 1933 में बना वो क्लब जिसके अंदर
07:50
Speaker A
ब्रेबोन स्टेडियम है और जहां शहर के सबसे रसूखदार लोग बैठते हैं। साथ में एमआईजी क्रिकेट क्लब, जूहू के जिमखाने, वेलिंगटन कैथोलिक जिमखाना, और मलाड वेस्ट का गोरेगांव स्पोर्ट्स क्लब तो बिना किसी फूड लाइसेंस के ही चल रहा था। इसके साथ वो नाम
08:08
Speaker A
भी गिरे जिन पर पूरा शहर पीढ़ियों से भरोसा करता आया था। 1916 से चल रहा पारसी डेयरी फार्म बंद। चर्च गेट का सात दशक पुराना के रुस्तम बंद। और के रुस्तम के अंदर जो मिला वह मुंडे ने खुद बताया। वहां
08:23
Speaker A
काम करने वाले फूड हैंडलरों के धुले हुए कपड़े वहीं सुखाए जा रहे थे। उसी जगह जहां आपका खाना बन रहा है और चूहे इधर-उधर घूम रहे थे। मुंडे के शब्दों में अफसरों के पैरों के नीचे से एक नहीं कई चूहे निकले।
08:38
Speaker A
बहस छिड़ी कि इतनी आइकॉनिक जगह को क्यों छेड़ रहे हो? लोग पीढ़ियों से वहां खा रहे हैं। मुंडे का जवाब था कि सवाल यह नहीं है कि आप कितने साल से वहां खा रहे हैं? सवाल यह है कि क्या आपने कभी पूछा कि खाना
08:52
Speaker A
किससे बन रहा है? कैसे बन रहा है? लोग सिर्फ स्वाद के आधार पर जज कर रहे हैं। यही असली दिक्कत है। और फिर उन्होंने वह बात कही जो एक अफसर के मुंह से कम ही सुनने को मिलती है। इसका मतलब तीनों फेल
09:05
Speaker A
हुए। रेगुलेशन ठीक से लागू नहीं हुआ यानी हम फेल हुए। दुकानदार ने नियम नहीं माने यानी वह फेल हुआ और नागरिक सवाल ही नहीं पूछते थे। यानी वह भी फेल हुए। अब आपको यह लग रहा होगा कि यह सिर्फ मुंबई की बात है।
09:20
Speaker A
नहीं है। पिछले हफ्ते संसद में रखे आंकड़े बताते हैं कि 2025 से 26 में देश भर में 2,23,000 से ज्यादा फूड सैंपल जांचे गए और 400 से ज्यादा फेल हुए। हर पांच में से एक और आपराधिक सजा मिली पूरे साल में सिर्फ
09:39
Speaker A
1918 लोगों को। पिछले 5 साल में मिलावट के सवा लाख से ज्यादा मामले साबित हुए जिनमें से 75% सिर्फ जुर्माना लगाकर बंद कर दिए गए। एफएसएसएआई ने देश भर के 10,103 शहरों से दूध के जो सैंपल उठाए थे, उनमें करीब
09:58
Speaker A
7% पीने लायक ही नहीं थे। और सिर्फ मिलावट नहीं मिली। कुछ सैंपल में एफलाटॉक्सिन एम एक तय सीमा से ज्यादा मिला जो कैंसर पैदा करने वाला तत्व है। कुछ में एंटीबायोटिक के अंश मिले। यानी वह दवाइयां जो सिर्फ
10:14
Speaker A
जानवरों को दी जाती हैं।
10:28
Speaker A
हुई थी। नियम इस देश में सब लिखे हैं। किचन में चूहे नहीं होने चाहिए। कच्चा और पका खाना अलग रखा जाए। खाना बनाने वाले का मेडिकल टेस्ट हो। सब लिखा है। बस देखने कोई नहीं आता। आज भी महाराष्ट्र में सिर्फ
10:45
Speaker A
350 फूड इंस्पेक्टर हैं और 60 ड्रग ऑफिसर। जबकि मुंडे खुद कहते हैं कि इस विभाग को करीब 2100 अफसर चाहिए। यानी जिस विभाग पर 12 करोड़ लोगों के खाने की जिम्मेदारी है, वह जरूरत के छठे हिस्से से भी कम स्टाफ पर
11:03
Speaker A
चल रहा है। और उसी अधूरे विभाग ने 2 महीने में वह कर दिखाया जो सालों में नहीं हुआ। तो स्टाफ की कमी कभी असली दिक्कत थी ही नहीं। असली दिक्कत यह है कि उस कुर्सी पर बैठा आदमी सवाल पूछता है या नहीं। अब आपको
11:19
Speaker A
यह जानना चाहिए कि यह आदमी आया कहां से है। तुकाराम मुंडे का जन्म 1975 में बीड़ जिले के एक छोटे से गांव तारसोना में हुआ। किसान परिवार बीड़ मराठवाड़ा में आता है। वह इलाका जो साल दर साल सूखे के साथ जीता
11:36
Speaker A
है। उन्होंने खुद खेती की है। दसवीं तक गांव के सरकारी स्कूल में पढ़े और साथ-साथ खेतों में काम भी किया। और यहां जो बात है वह गौर करने लायक है। जब उनसे पूछा गया कि बचपन में आपका सपना क्या था? तो उनका जवाब
11:52
Speaker A
था कि कोई सपना नहीं था। उनके शब्दों में हमें यह पता ही नहीं था कि आईएएस नाम की कोई चीज होती है। माता-पिता ने स्कूल में डाल दिया था इसलिए जा रहे थे। बस लेकिन एक चीज घर से जरूर मिली। मुंडे कहते हैं कि
12:07
Speaker A
परिवार ने उन्हें यही सिखाया। ईमानदार रहो। सच बोलो। नैतिक रूप से सही रहो और आखिरकार आप जो प्रैक्टिस करते हैं वही आपकी असली वैल्यू है। फिर एमपीएससी आया और यहां जो हुआ वो हर उस बच्चे को सुनना चाहिए जो एक बार फेल होकर टूट जाता है।
12:26
Speaker A
मुंडे एमपीएससी में तीन बार फेल हुए। चौथी बार 2001 में पास हुए और फिर 2004 में यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक आई 20 20 तीन बार राज्य की परीक्षा में फेल होने वाला लड़का देश की सबसे कठिन परीक्षा में
12:44
Speaker A
20वें नंबर पर और उसके बाद 21 साल में 25 तबादले औसत निकालिए तो हर 10 महीने में एक बार बैक पैक। सोलापुर में ट्रेनिंग के दौरान एक ताकतवर नेता का अवैध बार बंद करवा दिया। नांदेड़ के देगलूर में रेत
13:00
Speaker A
माफिया पर हाथ डाला। नतीजा जान से मारने की धमकी और सरकार को अलग से पुलिस सुरक्षा देनी पड़ी। नागपुर जिला परिषद में उन टीचरों और डॉक्टरों को सस्पेंड किया जो सालों से सैलरी ले रहे थे लेकिन काम पर
13:14
Speaker A
आते नहीं थे। 2012 में मुंबई सेल्स टैक्स में जॉइंट कमिश्नर बने। यह उनकी सबसे लंबी पोस्टिंग रही 26 महीने और इस दौरान उनके विभाग ने 310 करोड़ वसूले। सालाना टारगेट से दोगने से भी ज्यादा 2015 में सोलापुर के कलेक्टर बने और सूखे जिले के सैकड़ों
13:34
Speaker A
गांव को पानी के टैंकर से आजाद करवा दिया। जिस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने उन्हें राज्य के सर्वश्रेष्ठ कलेक्टर का अवार्ड दिया। 2016 में नवी मुंबई महानगर पालिका चार्ज लेते ही प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के डिप्टी कमिश्नर को सस्पेंड कर दिया। फिर इतने अवैध धंधे
13:52
Speaker A
बंद करवाए कि पूरा निगम उनके खिलाफ एकजुट हो गया और अविश्वास प्रस्ताव तक पास हुआ। जो नेता आपस में एक कप चाय पर सहमत नहीं हो पाते वह सब एक ईमानदार अफसर को हटाने के लिए एक हो गए। 10 महीने बाद नासिक
14:08
Speaker A
महानगर पालिका वहां भी अविश्वास प्रस्ताव। नासिक का एक किस्सा उनके पूरे तरीके को एक लाइन में समझा देता है। नवरात्रि का दिन था। मुंडे खुद मंदिर में आरती करने गए थे। आरती के बाद शॉल और नारियल स्वीकार किया।
14:24
Speaker A
लेकिन बाहर निकलते ही नजर प्रसाद के स्टॉल पर पड़ी जहां प्रसाद खुले में प्लास्टिक में रखा जा रहा था। और वहीं मौके पर इंस्पेक्शन शुरू। नासिक से तबादला हुआ तो पत्रकारों ने पूछा सर इस पर क्या कहेंगे?
14:39
Speaker A
उनका जवाब था। मुझे हर साल अपने बच्चे का एडमिशन नए स्कूल में करवाना पड़ता है। इसमें नया क्या है?
14:46
Speaker A
लेकिन इन 25 तबादलों में एक चीज कभी नहीं हुई। इस आदमी पर आज तक भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा क्योंकि वह अपने हर मुश्किल फैसले को तीन सवालों पर तौलते हैं और यह तीन सवाल उन्होंने खुद बताए हैं।
15:01
Speaker A
पहला क्या यह कानूनी रूप से सही है? क्योंकि अगर यह कानूनी नहीं है तो एक पब्लिक अथॉरिटी होने के नाते वह आगे बढ़ ही नहीं सकते। दूसरा क्या यह नैतिक रूप से सही है? तीसरा यह जनहित में है या किसी एक
15:17
Speaker A
व्यक्ति के हित में? और फिर वह खुद से एक चौथा सवाल भी पूछते हैं। अगर मैं यह नहीं कर सकता तो और कौन करेगा? अगर एक फूड सेफ्टी कमिश्नर होकर भी मैं मिलावटी और असुरक्षित खाना नहीं रोक सकता तो कौन
15:31
Speaker A
रोकेगा? उन्हें अक्सर फिल्म नायक से जोड़ा जाता है। एक इंटरव्यू में पूछा गया कि अगर आप एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बन जाए तो क्या बदलेंगे? उनका जवाब था कि वह एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनना ही नहीं चाहेंगे।
15:45
Speaker A
किसी भी पद पर एक दिन के लिए नहीं। क्योंकि रील और रियल अलग चीजें हैं। सवाल यह नहीं कि एक दिन में क्या करेंगे? सवाल यह है कि आप जिस भी भूमिका में हैं, उसके साथ न्याय कर रहे हैं या नहीं। वह अपने
15:59
Speaker A
काम को नौकरी की तरह नहीं एक रोल की तरह देखते हैं। अब आखिरी हिस्सा और यह सबसे जरूरी है क्योंकि यह आपके बारे में है। मुन्रे कहते हैं कि सिर्फ रेगुलेटर से काम नहीं चलेगा। जब तक ग्राहक सवाल नहीं
16:13
Speaker A
पूछेगा कुछ नहीं बदलेगा। और सवाल पूछना मुश्किल भी नहीं है। आप पूछ सकते हैं कि कच्चा माल कहां से आता है? आपके फूड हैंडलर ट्रेंड है या नहीं? उनका हेल्थ चेकअप हुआ है या नहीं? दस्ताने और हेड कैप
16:27
Speaker A
है या नहीं? छोटी-छोटी बातें हैं। लेकिन उनका कहना है कि जो सामने दिखता है, वह ग्राहक पूछे। जो नहीं दिखता वह रेगुलेटर देख लेगा और पैकेट वाले खाने पर उनकी एक बात सीधे चुबती है। कपड़ा खरीदने जाते हैं
16:42
Speaker A
तो लोग एक घंटा लगाते हैं। ट्रायल रूम का साइज, फिट, रंग और वह कपड़ा साल में मुश्किल से 20 बार पहनते हैं। लेकिन अगर आप रोज दो बिस्किट खाते हैं, तो साल में करीब 750 बिस्किट खा रहे हैं और उनके लिए
16:55
Speaker A
2 मिनट पैकेट पढ़ने में नहीं लगाते। कपड़े के लिए हर बार ट्रायल करना पड़ता है। खाने का लेबल तो एक बार पढ़ लीजिए काम बन जाएगा। उनके शब्दों में यह अपने ही खिलाफ किया गया अपराध है। एनर्जी ड्रिंक्स पर वह
17:08
Speaker A
सीधे कहते हैं कि पैकेट पर साफ लिखा होता है बच्चों के लिए अनुशंसित नहीं और सबसे ज्यादा वही पी रहे हैं बच्चे। कंपनियां अपने विज्ञापन में इसे कूल दिखाती हैं ताकि बच्चे उसकी तरफ खींचे। और यहां वह एक
17:21
Speaker A
ऐसी बात कहते हैं जो मशहूर चेहरों को असहज कर देगी। भ्रामक विज्ञापन गैरकानूनी है और सिर्फ बनाने वाली कंपनी के लिए नहीं जो एक्टर जो क्रिकेटर उसे प्रमोट कर रहा है चाहे बोलकर चाहे लिखकर चाहे इशारे से वह
17:35
Speaker A
भी गैरकानूनी काम कर रहा है और एफएसएसएआई एक्ट के तहत वह भी सजा के दायरे में आता है। पान मसाला बेचने वाले वह चेहरे खुद वह चीज नहीं खाते लेकिन बेच रहे हैं। स्कूलों को लेकर उन्होंने आदेश जारी किया है।
17:48
Speaker A
परिसर में डीप फ्राइड चीजें नहीं बिकेंगी और ज्यादा फैट, ट्रांस फैट और शुगर वाला खाना स्कूल के 50 मीटर के दायरे में नहीं चलेगा। लेकिन वह साफ कहते हैं कि यह तभी काम करेगा जब मां-बाप साथ दें। सप्लाई मत
18:03
Speaker A
कीजिए, डिमांड मत कीजिए। और घर की बात पर उनकी सबसे सीधी बात यही है। बच्चे आपकी नकल करते हैं। अगर मां-बाप खुद कोल्ड ड्रिंक पी रहे हैं और बच्चे से कह रहे हैं तुम मत पियो। तो बच्चा वही करेगा जो आप कर
18:18
Speaker A
रहे हैं। वह नहीं जो आप कह रहे हैं। अब आप सोचिए ऐसा आदमी किन-किन लोगों को असहज कर रहा होगा। इसीलिए उन्हें कुर्सी से हटाने की तैयारी तीन अलग-अलग मोर्चों से शुरू हुई। पहला पैसा। 24 जून को महाराष्ट्र
18:34
Speaker A
विधानसभा में विधायक जितेंद्र आभाड़ ने आरोप लगाया कि एक अंतरराष्ट्रीय लॉबी इस अफसर का तबादला करवाने के लिए ₹250 करोड़ इकट्ठा कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मंत्री ने इस अफसर को बचाया तो मंत्री का अपना विभाग भी जा सकता है। दूसरा
18:51
Speaker A
इंडस्ट्री लॉबी। देश के तीन सबसे बड़े होटल और रेस्टोरेंट संगठनों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और एफएसएसएआई को चिट्ठी भेजी। उनकी मांग थी कि लाइसेंस सस्पेंड मत कीजिए। पहले सुधार का नोटिस दीजिए और दूसरी मांग किसी दुकान का नाम सार्वजनिक मत कीजिए। इसे आसान भाषा में
19:11
Speaker A
समझिए। दुकान में जिंदा चूहे मिले, एक्सपायर्ड माल मिला, कॉकरोच मिले। और मांग यह है कि लोगों को मत बताइए कि इस दुकान में यह सब मिला। यानी उन्हें सबसे ज्यादा डर अपराध का नहीं है। डर इस बात का
19:25
Speaker A
है कि ग्राहक को पता चल जाएगा। तीसरा अदालत। जुलाई में एफडीए ने नवी मुंबई के एक बड़े होटल का लाइसेंस सस्पेंड किया। होटल हाई कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने सस्पेंशन रद्द कर दिया। कोर्ट का कहना था कि होटल का कंप्लायंस स्कोर 95% था और
19:43
Speaker A
सिर्फ एक डिश में दो कीड़े मिले थे। जज ने कहा हम भारत में रहते हैं। हमें थोड़ा व्यावहारिक रुख अपनाना पड़ेगा। दूसरी तरफ सरकारी वकील की दलील थी। एक कीड़ा हो, 10 हो या 100 फूक सेफ्टी पर कोई समझौता नहीं
19:57
Speaker A
हो सकता और यही असली बहस है। सवाल यह नहीं कि दो कीड़े कम है या ज्यादा। सवाल यह है कि लकीर कहां खींचनी है। जिस दिन तय हो गया कि दो कीड़े चलेंगे उसी दिन कोई कहेगा कि अगर दो चल सकते हैं तो चार भी चल सकते
20:11
Speaker A
हैं। लेकिन इस बार कुछ ऐसा हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ। इस बार जनता और विधायक दोनों इस अवसर के पीछे खड़े हो गए। विधानसभा में अलग-अलग पार्टियों के सदस्यों ने एक सुर में कहा कि इसे और ताकत
20:24
Speaker A
दीजिए। एक विधायक ने मांग रख दी कि रिटायरमेंट तक इनका तबादला ही ना किया जाए। पुणे में उपभोक्ता संगठन ने हस्ताक्षर अभियान शुरू किया और मंगलवे में लोगों ने उनकी तस्वीर पर दूध चढ़ाया। आखिरकार एफडीए मंत्री को विधानसभा में
20:39
Speaker A
खड़े होकर भरोसा दिलाना पड़ा कि मुंडे का तबादला नहीं होगा। यानी 250 करोड़ के सामने जो चीज खड़ी हुई वह कानून नहीं था। वह सिर्फ जनता का दबाव था और यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सबक छिपा है क्योंकि
20:53
Speaker A
इस देश में आपके खाने की सुरक्षा किसी कानून पर टिकी नहीं है। वह इस बात पर टिकी है कि उस कुर्सी पर कौन बैठा है और वह आदमी डरने वाला है या नहीं। जब मुंढे से आखिरी सवाल पूछा गया कि आप हर भारतीय को
21:08
Speaker A
एक बात कहना चाहें तो क्या कहेंगे? तो उनका जवाब था याद रखिए कि आप खुद अपने लिए जिम्मेदार हैं। अपनी जिम्मेदारी किसी और पर मत डालिए। तो आखिरी बात आपसे अगर इस आदमी को पूरा स्टाफ मिल जाए इसकी लैब भर
21:22
Speaker A
दी जाए और इसे 3 साल एक ही कुर्सी पर रहने दिया जाए तो कितना बड़ा बदलाव आ सकता है आप सोच भी नहीं सकते। और अगर इतना भी नहीं कर सकते तो कम से कम इसके रास्ते से हट
21:33
Speaker A
जाइए। बाकी काम यह खुद कर लेगा। अब आप बताइए क्या मुंडे जैसे अफसरों को खुली छूट मिलनी चाहिए कि वह बिना नोटिस किसी की भी दुकान बंद कर दें या कोर्ट सही कह रहा है कि थोड़ा व्यवहारिक होना पड़ेगा। नीचे
21:47
Speaker A
कमेंट में जरूर लिखिए और अगली बार जब आप कोई पैकेट उठाएं तो 2 मिनट पीछे पलट कर देख लीजिएगा। इतना तो हम सब कर ही सकते हैं मिलते हैं अगली कहानी
Topics:तुकाराम मुंडेमहाराष्ट्र एफडीएनकली दूधखाद्य सुरक्षामिलावटएफएसएसएआईबॉम्बे हाईकोर्टखाद्य निरीक्षणसिंथेटिक दूधसंगठित अपराध

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