नींद न आने की चिंता को कैसे तोड़ें? डॉ. रविंदर पुरी बताते हैं दो आसान तकनीकें: 4-2-6 बेली ब्रीथिंग और सीबीटी की कॉग्निटिव शफल, जो 5 मिनट में नींद लाने में मदद करती हैं।
Key Takeaways
- नींद न आने की घबराहट ही नींद को सबसे ज़्यादा बाधित करती है।
- बेली ब्रीथिंग से शरीर को आराम और सुरक्षा का संकेत मिलता है।
- कॉग्निटिव शफल चिंता भरे विचारों से दिमाग को हटाकर नींद के लिए तैयार करता है।
What the video covers
- नींद न आने पर घबराहट से कॉर्टिसोल बढ़ता है, जो मेलाटोनिन को कम करता है और नींद और गायब हो जाती है — इसे विशियस सर्कल कहा गया है।
- सीबीटी में इस स्थिति को स्लीप एंग्जायटी कहते हैं।
- पहली तकनीक: 4-2-6 बेली ब्रीथिंग — नाक से 4 सेकंड सांस लेना, 2 सेकंड रोकना, मुंह से 6 सेकंड छोड़ना, 10-15 बार दोहराना।
- बेली ब्रीथिंग वेगस नर्व को एक्टिवेट कर पैरासिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करती है।
- इससे GABA बढ़ता है, जो चिंता कम करता है, और दिमाग को सोने का सुरक्षा संकेत मिलता है।
- दूसरी तकनीक: कॉग्निटिव शफल — एक रैंडम शब्द (जैसे 'मैंगो') चुनकर उससे इमेज बनाना और हर अक्षर से जुड़े शब्दों पर सोचना।
- कॉग्निटिव शफल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को व्यस्त रखता है, जिससे चिंता के विचारों की जगह नहीं बचती।
- यह तकनीक पैनिक अटैक वाले वीडियो में बताई गई ब्रीथिंग का ही विस्तार है, थोड़े अलग तरीके से समझाई गई है।
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Speaker A
नींद नहीं आई तो आप घबरा जाते हैं। घबरा गए तो कॉर्टिसोल बढ़ जाता है। कॉर्टिसोल बढ़ गया तो मेलोटोनिन कम हो गया। मेलोटोनिन कम हो गया तो नींद गायब हो गई। यह एक विषयीस सर्कल है। सीबीटी में इसे
Speaker A
स्लीप एंग्जायटी कहते हैं। इसे तोड़ने का तरीका मैं अभी आपको बताता हूं। पहली टेक्निक यह है कि 4 2 6 1 की आपने बेली ब्रीथिंग करनी है। यह आप पैनिकिक अटैक वाली वीडियो में सीख चुके हैं। लेकिन यहां
Speaker A
मैं इसे थोड़े अलग तरीके से आपको समझा रहा हूं। आपने करना क्या है? सोने से पहले बिस्तर पे लेट जाइएगा। दोनों हाथों को पेट के ऊपर रख लीजिएगा। पहले नाक से 4 सेकंड सांस लीजिएगा और पेट को थोड़ा सा फूलने
Speaker A
दीजिए। फिर 2 सेकंड के लिए रोकिएगा और फिर मुंह से 6 सेकंड से धीरे-धीरे सांस को बाहर निकालिएगा ताकि आपका पेट अंदर हो जाए। यही दोहराइए 10 से 15 बार। अब समझिए यह कैसे काम करती है? क्योंकि लंबी एग्जल
Speaker A
जो है वो वेगस नर्व को एक्टिवेट करती है। वेगस नर्व पैरासिंैथिक नर्वस सिस्टम को ऑन करती है और पैरासिंैथेटिक नर्वस सिस्टम का पैटर्न है कि वह हमें पेट से सांस लेने के लिए बढ़ावा देता है। तो इससे गाबा भी
Speaker A
बढ़ता है चिंता दूर करने वाला। ब्रेन को सेफ्टी का सिग्नल मिलता है कि अब सोने का वक्त है और मेलाटोनिन का रास्ता अपने आप खुल जाता है। दूसरी टेक्निक है जो सीबीटी से आती है। इसे आप कॉग्निटिव शफल भी कहते
Speaker A
हैं। यह स्लीप एंजायटी की विशियस सर्कल को तोड़ने के लिए सबसे शानदार है। जब बिस्तर पर लेटे विचार आए तो आपने करना क्या है?
Speaker A
आंखें बंद कीजिएगा। कोई एक रैंडम शब्द सोच लीजिएगा। जैसे मैंगो सोच लिया। फिर उस शब्द से एक रैंडम इमेज बनाइए। मन के अंदर एक पीला आम जो पेट से नीचे गिर रहा है। फिर मैंगो शब्द का पहला लेटर लीजिए एम। अब
Speaker A
एम से जुड़े हुए जितने भी शब्द या चीजें आपके दिमाग में आती हैं उसके बारे में सोचना शुरू कर दीजिए। जैसे एम से मोंकी बनता है। कुछ सेकंड के लिए मोंकी के बारे में सोचिए। एम से मैप बनता है। नक्शे के
Speaker A
बारे में सोचिए। जब आपकी यह लिस्ट एग्जॉस्ट हो जाए तो मैंगो का अगला लेटर है उसको भी आपने सोचना शुरू कर देना है। अब आपने समझना है कि यह कैसे काम करते हैं। यह ब्रेन के प्लानिंग और वरिंग सेंटर यानी
Speaker A
कि प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को डिस्ट्रैक्ट करता है। जब ब्रेन रैंडम इमेजेस में बिजी हो जाता है तो ए्जायटी के विचारों की जगह ही नहीं बचती है। और ये वो स्टेट होती है जब आपको नींद आनी शुरू हो जाती
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