अब्राहम लिंकन के संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायक जीवनी, जिन्होंने अमेरिका में दास प्रथा खत्म की।
Key Takeaways
- संघर्ष और हार के बावजूद कभी हार न मानने की प्रेरणा।
- गरीबी और कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा और मेहनत से सफलता संभव है।
- दास प्रथा के खिलाफ दृढ़ संकल्प और नेतृत्व।
- ईमानदारी और नैतिकता के साथ जीवन यापन।
- सकारात्मक सोच और मित्रों का समर्थन जीवन में बदलाव ला सकता है।
What the video covers
- अब्राहम लिंकन का जन्म 12 फरवरी 1809 को केंटकी में हुआ था और उनका बचपन गरीबी में बीता।
- उनके पिता के पास पैसे नहीं थे कि वे उन्हें स्कूल भेज सकें, इसलिए लिंकन ने खुद किताबें मांगकर पढ़ाई की।
- 9 साल की उम्र में उनकी मां की मृत्यु हो गई और परिवार को कई बार जमीनी विवादों के कारण स्थान बदलना पड़ा।
- लिंकन ने बचपन में मजदूरी की और नौका वाहक का काम किया, साथ ही बिना कॉलेज के लॉ की पढ़ाई की।
- उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और दास प्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ी, कई बार चुनाव में हार का सामना किया।
- उनकी प्रेमिका रुटलेज की मृत्यु से उन्हें गहरा सदमा लगा, और वे डिप्रेशन में चले गए थे।
- मित्रों की मदद से वे फिर से उठे और विधायक चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई।
- लिंकन ने वकालत में ईमानदारी से गरीबों के केस लड़े और झूठे मुकदमे नहीं लड़े।
- 1842 में उन्होंने मैरी से शादी की और चार बेटे हुए, जिनमें से केवल रॉबर्ट जीवित रहे।
- 1860 में वे अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति बने और अमेरिकी गृह युद्ध से देश को बचाया तथा दास प्रथा समाप्त की।
Chapters
- 00:00परिचय और प्रेरणादायक उद्धरण
- 01:05लिंकन का बचपन और परिवार
- 02:01शिक्षा और प्रारंभिक संघर्ष
- 02:57परिवार की आर्थिक स्थिति और स्थानांतरण
- 03:46मां की मृत्यु और सौतेली मां का योगदान
- 04:48शिक्षा के लिए संघर्ष और नौका वाहक का काम
- 06:15रिटायर्ड जज से पुस्तकें प्राप्त करना
- 07:03राजनीति में प्रवेश और पहली हार
- 08:45डिप्रेशन और मित्रों का समर्थन
- 09:35विधायक चुनाव में जीत और राजनीतिक सफलता
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Speaker A
हार मानो नहीं तो कोशिश बेकार नहीं होती। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। दोस्तों, आज मैं बात करने जा रहा हूं अमेरिका के अब तक के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की, जिन्होंने अमेरिका सहित पूरे विश्व में दास प्रथा को
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खत्म करने में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन उन्होंने जिन संघर्षों के बाद यह मुकाम हासिल किया था, मुझे नहीं लगता कि उनके अलावा यह किसी और के बस की बात होगी। अब्राहम लिंकन का बचपन इतनी गरीबी में बीता कि उनके पूरे परिवार को एक घर के
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लिए दरदर ठोकरे खानी पड़ी। उनके पिता के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वे अब्राहम को स्कूल भेज सके। लोगों से मांगे हुए किताबों से अब्राहम ने पढ़ाई की। अपना पेट पालने के लिए उन्होंने बचपन से ही मजदूरी करना
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स्टार्ट कर दिया। 9 साल की उम्र में उन्होंने अपनी मां को खो दिया। जिस लड़की से प्रेम किया और शादी करना चाहते थे, उसकी भी मृत्यु हो गई। दास प्रथा के खिलाफ लड़ने के लिए चुनाव की तरफ रुख किया तो उसमें भी उन्हें कई बार
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हार का सामना करना पड़ा। उनकी जिंदगी में एक समय ऐसा भी था जब छुरी और चाकू से वह दूर रहते थे क्योंकि वह अपने आप से इतने हार गए थे कि उन्हें डर था वह कहीं खुद को ना मार ले।
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लेकिन दोस्तों, अगर हार मानो नहीं तो कोशिश बेकार नहीं होती। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। अपने संघर्षों के दम पर उन्होंने अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति का चुनाव जीता और अमेरिका को उसके सबसे बड़े संकट अमेरिकन सिविल वॉर या अमेरिकी गृह
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युद्ध से पार लगाया और दास प्रथा को जड़ से खत्म कर दिया। तो दोस्तों, आइए गरीबी से लेकर व्हाइट हाउस तक का सफर तय करने वाले अब्राहम लिंकन के बारे में हम डिटेल में जानते हैं। अब्राहम लिंकन का जन्म 12 फरवरी 1809
Speaker A
को अमेरिका के केंटकी राज्य में हार्डिंग काउंटी नाम के एक जगह पर हुआ था। उनके पिता का नाम थॉमस लिंकन और मां का नाम नैंसी लिंकन था। उनका पूरा परिवार बहुत ही गरीब था और खुद के बनाए हुए एक लकड़ी के मकान में रहता था।
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अब्राहम लिंकन के अलावा उनकी एक बड़ी बहन भी थी जिसका नाम सारा था। थॉमस और नैंसी को अब्राहम के बाद एक और पुत्र हुआ लेकिन बचपन में ही उसकी मृत्यु हो गई। लिंकन के पिता थॉमस एक किसान थे और साथ ही साथ वह
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बढ़ई का भी काम करते थे। अब्राहम के जन्म के दो सालों के बाद ही जमीन के विवाद की वजह से लिंकन परिवार को वह जगह छोड़ना पड़ा, जिसके बाद 1811 में वे वहां से 13 किलोमीटर उत्तर की तरफ नव
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क्रिक फार्म रहने आ गए और वहां पर उन्होंने जमीन को खेती के लायक बनाकर काम करना शुरू किया। लेकिन कुछ समय के बाद यहां पर भी उन्हें जमीनी विवाद झेलना पड़ा और फिर से उस जगह को भी छोड़कर जाना
Speaker A
पड़ा। इसके बाद 1816 में लिंकन परिवार इंडियाना की ओहियो नदी के किनारे आकर बस गया, जहां पर उन्होंने घने जंगल में खेती करना शुरू कर दिया। दोस्तों, बता दूं कि यहां पर आज भी उनके घर और खेतों को एक
Speaker A
स्मारक के रूप में सुरक्षित रखा गया है। अब्राहम लिंकन जब 6 साल के हुए तब उन्हें एक स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा गया, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें खेतों में काम करके अपने पिता
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का हाथ बटाना पड़ता था और उनके पिता भी कभी नहीं चाहते थे कि वह पढ़ाई-लिखाई करें। इसी वजह से न चाहते हुए भी कुछ ही दिनों में अब्राहम को पढ़ाई छोड़नी पड़ी। हालांकि उन्हें पढ़ाई-लिखाई का बहुत शौक था और वह
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दूसरों से किताबें लेकर जब भी वक्त मिलता पढ़ने लगते थे। उसी बीच उनके जीवन में एक बहुत ही दुखद मोड़ तब आया जब 5 अक्टूबर 1818 को अब्राहम की मां की मृत्यु हो गई। उस समय अब्राहम केवल 9 साल के थे। मां की मृत्यु के बाद घर की
Speaker A
पूरी जिम्मेदारी अब्राहम की बहन सारा पर आ गई। उस समय सारा भी केवल 11 साल की थी। एक साल बाद घर की परेशानियों को देखते हुए थॉमस ने एक विधवा महिला से शादी कर ली जिसका नाम सारा बुस जॉनसन था। उस महिला के
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तीन बच्चे पहले से थे। अब्राहम को सौतेली मां ने उसकी सगी मां से भी ज्यादा प्यार दिया और कभी भी मां की कमी महसूस नहीं होने दी। साथ ही साथ सारा बुस ने उनकी पढ़ाई-लिखाई में भी पूरी सहायता
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की। अब्राहम भी अपनी सौतेली मां को बहुत मानते थे। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि मैं आज जो भी हूं उसका पूरा श्रेय मेरी मां को जाता है। अब्राहम के पिता उसे बहुत ही क्रूर
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व्यवहार रखते थे और वह बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि वह पढ़ाई-लिखाई करें। इसीलिए अब्राहम खुद का खर्च चलाने के लिए बचपन में सीखे हुए बढ़ई के काम का इस्तेमाल करके एक नाव बनाई और नौका वाहक बनकर माल
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ढोने का काम शुरू कर दिया। साथ ही साथ वह लोगों के खेतों में जाकर काम भी करते थे। कुछ समय बाद उनकी एक दुकान में नौकरी लग गई और वहां उन्हें पढ़ाई का भी थोड़ा समय मिलने लगा। यहीं पर रहते हुए उन्होंने अपने
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खुद के दम पर बिना किसी कॉलेज के लॉ की पढ़ाई शुरू कर दी। लॉ की पढ़ाई के समय ही एक बार उन्हें पता चला कि नदी के दूसरी तरफ के गांव में एक रिटायर्ड जज रहते हैं, जिसके पास लॉ की बहुत सारी किताबें हैं।
Speaker A
लिंकन ने यह तय किया कि वे उस जज के पास जाएंगे और उनसे रिक्वेस्ट करेंगे कि वे अपनी किताबों की कलेक्शंस को उन्हें भी पढ़ने दे। उन दिनों बहुत ही जोरदार कड़ाके की ठंड पड़ रही थी, लेकिन लिंकन ने किसी
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परवाह के बर्फीली नदी में अपनी नाव उतार दी। थोड़ी दूर जाने पर उनका नाव बर्फ से टकरा गया और वहीं पर टूट गया। फिर भी लिंकन ने हार नहीं मानी और तैरते हुए नदी को पार कर उस जज के घर पहुंच गए और उनसे किताबों
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को पढ़ने की रिक्वेस्ट की। रिटायर्ड जज ने उनकी लगन को देखते हुए उन्हें अपनी सारी किताबों को पढ़ने की अनुमति दे दी। लेकिन उस समय उनके घर पर काम करने वाला छुट्टी पर था, इसीलिए उन्होंने लिंकन को अपने घर
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के कामों को करने के लिए कहा, जिसे लिंकन ने भी खुशी-खुशी स्वीकार कर ली। वे उस रिटायर्ड जज के घर के लिए जंगल से लकड़ियां बीन कर लाते, उनकी जरूरत का पानी भरते, साथ ही साथ घर का हर काम करते थे और
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पारिश्रमिक के नाम पर उन्हें मात्र पुस्तक पढ़ने की छूट थी। लेकिन लिंकन इससे भी बहुत खुश थे। कुछ समय के बाद वह एक गांव में पोस्टमास्टर बन गए, जिसकी वजह से लोग उन्हें जानने लग गए थे और उनका सम्मान करने लगे।
Speaker A
अब अब्राहम लिंकन ने स्थानीय लोगों की परेशानी को देखते हुए राजनीति में घुसने का सोचा क्योंकि उस समय दास प्रथा चरम पर थी। लिंकन को शुरू से गुलामों पर हो रहे अत्याचारों से सख्त नफरत थी और वह दास प्रथा को खत्म करना चाहते थे। इसी विचार के
Speaker A
साथ उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और विधायक का चुनाव लड़ा, लेकिन उस चुनाव में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। उधर चुनाव लड़ते समय उन्होंने पोस्टमास्टर की नौकरी भी छोड़ दी थी, जिससे उनके पास पैसों की बहुत कमी हो
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गई। अब्राहम लिंकन वैसे तो महिलाओं से दूर ही रहते थे, लेकिन 24 साल की उम्र में उन्हें रुटलेज नाम की एक लड़की से बेपनाह मोहब्बत हो गई। लेकिन दुर्भाग्य से कुछ दिनों के बाद ही रुटलेज की एक गंभीर
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बीमारी से मृत्यु हो गई। रुटलेज की मृत्यु से अब्राहम को गहरा सदमा पहुंचा था और वह घंटों घंटों तक अपनी प्रेमिका की कब्र के पास बैठकर आंसू बहाया करते थे। अब्राहम लिंकन के जीवन में सब कुछ उनके खिलाफ चल रहा
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था। लिंकन का एक समय ऐसा भी था कि वह अपनी जिंदगी से इतना निराश हो चुके थे कि वह चाकू-छुर से दूर रहते थे क्योंकि उन्हें डर था कि वह खुद को न मार ले। उस समय उनके एक मित्र बोलिंग ग्रीन ने उनका मनोबल
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बढ़ाया और उनको डिप्रेशन से बाहर निकाला। अपने दोस्त की मदद से लिंकन फिर से विधायक का चुनाव लड़े और इस बार वह चुनाव जीत गए। उस जीत के बाद उनकी गिनती सबसे युवा विधायकों में की जाने लगी और फिर
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धीरे-धीरे उन्होंने युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया। अब विधानसभा में वह खुलकर बोलते थे, जिसकी वजह से वहां भी उनकी बातों को महत्व दिया जाने लगा था। उनके द्वारा स्प्रिंगफील्ड को नई राजधानी बनाने के मुद्दे पर सरकार को उनकी बात भी
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माननी पड़ी थी। अब्राहम लिंकन को अब वकील बनने के लिए लाइसेंस मिल गया था और फिर उनकी मुलाकात एक मशहूर वकील स्टुअर्ट से हुई। वे एक दूसरे के साथ मिलकर काम करने लगे, लेकिन कुछ दिनों तक काम करने के बाद स्टुअर्ट ने
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उनका साथ छोड़ दिया और अब्राहम वकालत में भी असफल हो गए क्योंकि वह गरीबों के केस लड़ने के लिए फी नहीं लेते थे और पूरा जीवन कभी भी झूठा मुकदमा नहीं लड़ा। लेकिन उन्होंने असफल ही सही 20 सालों तक वकालत
Speaker A
की क्योंकि उस काम को करने पर उन्हें मानसिक शांति मिलती थी। दोस्तों, उनके वकालत के दिनों की बहुत सारी कहानियां उनकी ईमानदारी और सज्जनता की गवाही देती हैं। लिंकन और उनके एक सहयोगी वकील ने एक बार किसी मानसिक रोगी महिला की जमीन पर
Speaker A
कब्जा करने वाले एक दबंग आदमी को अदालत से सजा दिलवाई। मामला अदालत में केवल 15 मिनट तक ही चला, जिसके बाद सहयोगी वकील ने महिला के भाई से पूरी फी ले ली। उसके बाद उस वकील ने अब्राहम से खुशी-खुशी बताया कि उस
Speaker A
महिला ने पूरी फी चुका दी है और वह अदालत के निर्णय से बहुत खुश है। लेकिन लिंकन ने तुरंत कहा कि मैं खुश नहीं हूं। वह पैसा एक बेचारी रोगी महिला का है और मैं ऐसा पैसा लेने के बजाय भूखे मरना पसंद कर
Speaker A
अगर तुम्हें अपनी फी चाहिए तो तुम ले लो, लेकिन मेरे हिस्से के पैसे उसे तुरंत वापस कर दो। 1842 में लिंकन ने मैरी नाम की एक लड़की से शादी कर ली। मैरी ने एक के बाद एक चार बेटों को जन्म दिया, लेकिन उनमें से
Speaker A
1843 में जन्मा केवल रॉबर्ट ही जीवित रह सका और बाकी सभी बच्चों की बचपन में ही मृत्यु हो गई। 1860 में लिंकन संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़े और आखिरकार अमेरिका के 16वें राष्...
Speaker A
उन्होंने अपने जीवन की सबसे बड़ी सफलता हासिल की 6 नवंबर 1860 को अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति बनने के बाद लिंकन ने ऐसे महत्त्वपूर्ण कार्य किए जिनका राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व भी है लिंकन की सबसे बड़ी उपलब्धि
Speaker A
अमेरिका को गृह युद्ध से उभारना था अमेरिका के संविधान में संशोधन द्वारा दास प्रथा के अंत का श्रेय भी लिंकन को ही जाता है 14 अप्रैल [संगीत] 18651 65 को अब्राहम की मौत हो गई दोस्तों अब्राहम लिंकन ने जिन संघर्षों के बाद
Speaker A
इतनी बड़ी सफलता हासिल की उससे हमें यही सीख मिलती है कि जिंदगी में अगर कुछ पाना है तो हमें कभी हार ना मानने वाली सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद इस वीडियो को लाइक करके
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