BYD की सफलता की कहानी, जो Tata और Mahindra को चुनौती दे रही है, और चीन की EV दिग्गज कंपनी की टेक्नोलॉजी और इतिहास।
Key Takeaways
- BYD की बैटरी और EV टेक्नोलॉजी विश्व स्तर पर अग्रणी है।
- BYD ने कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली बैटरियां और कारें बनाकर बाज़ार में सफलता पाई।
- भारत में BYD की एंट्री से स्थानीय EV निर्माता कंपनियों को कड़ी टक्कर मिल सकती है।
- वांग चुआनफू की दूरदर्शिता और मेहनत ने BYD को विश्व की सबसे बड़ी EV कंपनी बनाया।
- Tesla और BYD के बीच प्रतिस्पर्धा वैश्विक EV मार्केट के लिए महत्वपूर्ण है।
What the video covers
- भारत में Tata, Mahindra और Hyundai की EVs तो हैं, लेकिन BYD जो दुनिया की सबसे बड़ी EV निर्माता है, भारत में क्यों नहीं दिखती।
- BYD की बैटरी टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस है कि Tesla भी उसके सामने टिक नहीं पाया।
- BYD के संस्थापक वांग चुआनफू की गरीबी से उठकर सफलता की प्रेरणादायक कहानी।
- 1995 में BYD की स्थापना एक छोटी बैटरी कंपनी के रूप में हुई, जिसने जापानी कंपनियों को टक्कर दी।
- 2003 में BYD ने एक struggling कार कंपनी खरीदी और 2005 में BYD F3 लॉन्च की, जो चीन की टॉप सेलिंग सेडान बनी।
- 2008 में BYD ने दुनिया की पहली मास मार्केट प्लग-इन हाइब्रिड कार F3DM लॉन्च की।
- वारेन बफे ने BYD में निवेश किया और इसे एक भविष्य की बड़ी कंपनी माना।
- Tesla ने शुरू में BYD को गंभीर प्रतियोगी नहीं माना, लेकिन BYD ने अपनी तकनीक और किफायती कारों से बाज़ार में जगह बनाई।
- BYD की ब्लेड बैटरी सेफ्टी में अग्रणी है और इसकी कारें कई देशों में लोकप्रिय हैं।
- भारत में BYD के आने से Tata और Mahindra जैसी कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
Chapters
- 00:00भारत में EV मार्केट और BYD की अनुपस्थिति
- 01:00वांग चुआनफू की प्रारंभिक जीवन कहानी
- 02:03BYD की स्थापना और बैटरी उद्योग में प्रवेश
- 03:58BYD की कार निर्माण की शुरुआत और F3 की सफलता
- 05:562008 में BYD F3DM और EV के प्रति दृष्टिकोण
- 07:45वारेन बफे का निवेश और Tesla के साथ तुलना
- 09:50BYD की तकनीकी प्रगति और वैश्विक विस्तार
- 12:29भारत में BYD की संभावित चुनौती और भविष्य
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Speaker A
दोस्तों, आपने Tata, Mahindra और Hyundai की इलेक्ट्रिक कार्स को इंडिया की सड़कों पर चलते हुए जरूर देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है वो कंपनी इंडिया में क्यों नहीं दिखती जो दुनिया में सबसे ज्यादा ईवीज बेचती है? मैं बात कर रहा हूं
Speaker A
बीवाईडी की, जिसकी इलेक्ट्रिक कार्स आज यूरोप से लेकर ब्राजील तक, थाईलैंड से लेकर साउथ अफ्रीका तक हर सड़कों पर दौड़ रही हैं। सिर्फ इंडिया को छोड़कर। अब एक प्राउड इंडियन होने के नाते यह कहना थोड़ा अजीब सा लगता है। लेकिन सच्चाई यह है कि
Speaker A
अगर बीवाईडी इंडिया में फुल फोर्स के साथ में आ गई ना तो फिर Tata और Mahindra जैसे बड़े-बड़े इंडियन कार मेकर्स का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। क्योंकि बीवाईडी की टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस है कि Tesla तक
Speaker A
उसके सामने नहीं टिक पाया। क्योंकि 2024 में बीवाईडी ने वर्ल्ड लेवल पर 42,70,000 व्हीकल्स बेचे थे। जबकि Tesla की बिक्री थी 17,90,000 यूनिट्स। और दोस्तों शॉकिंग बात तो यह है कि Mahindra ने अपनी कुछ इलेक्ट्रिक एसयूवीस में सीक्रेटली बीवाईडी
Speaker A
की बैटरी टेक्नोलॉजी का यूज किया है। वो भी बिना ज्यादा शोरगोल किए। तो चलिए जानते हैं उस अनाथ बच्चे की कहानी जिसने गरीबी से उठकर दुनिया की सबसे बड़ी ईवी कंपनी खड़ी कर दी और साबित किया कि सपने सिर्फ
Speaker A
देखे नहीं जाते, बिल्ड किए जाते हैं। तो दोस्तों इस कहानी की शुरुआत होती है 1966 से जब चाइना के अनोई प्रोविंस में जन्म हुआ वांगचुआफू का। सिर्फ 13 साल की उम्र में उनकी मां की डेथ हो गई और कुछ
Speaker A
सालों बाद उनके पिता भी चल बसे। जिसकी वजह से अब वैसे तो फाइनेंशियल कंडीशन काफी खराब हो गई थी लेकिन उनके बड़े भाई ने उन्हें पढ़ाई नहीं छोड़ने दी। वांगचुआफू स्कूल जाते और फिर वापस आकर खेतों में काम
Speaker A
किया करते थे। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स में इंटरेस्ट होने की वजह से जब भी उन्हें मौका मिलता वह इसी से रिलेटेड ही किताबें पढ़ने लगते थे। आगे चलकर उन्होंने सेंट्रल साउथ यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन कंप्लीट की और फिर स्कॉलरशिप के दम पर
Speaker A
उन्होंने चाइना के टॉप टेक्निकल इंस्टिट्यूट में पढ़ाई शुरू की जिसका नाम था बीजिंग नॉन फेरस रिसर्च इंस्टिट्यूट। यहां उन्होंने बैटरी टेक्नोलॉजी पर डीप रिसर्च किया और इस तरह वांग बहुत अच्छे से जान चुके थे कि आखिर रिचार्जेबल बैटरीज
Speaker A
बनती कैसे हैं? किस तरह से काम करती हैं और इसके ड्रॉबैक्स क्या हैं? और फिर यहीं से उन्हें एक बड़ा रियलाइजेशन हुआ कि रिचार्जेबल बैटरीज का फ्यूचर बहुत बड़ा है। चाहे वो मोबाइल हो, कैमरा ऑर्डर हो या फिर
Speaker A
फ्यूचर में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स। सब में ही बैटरी की डिमांड एक्सप्लोड होने वाली है। लेकिन उस टाइम इस मार्केट पर पूरी मोनोपोली थी। Sony, Sanyo, Panasonic और Hitachi जैसे कुछ जापानी टेक जंट्स की। इन कंपनियों की बैटरीज ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स
Speaker A
मार्केट में काफी हाई क्वालिटी की मानी जाती थी। लेकिन थी बहुत एक्सपेंसिव। और क्योंकि इन कंपनियों के पास में अथाह पैसा था। इसीलिए कोई भी नई कंपनी इनके मोनोपोली को तोड़ने की भी नहीं सोच सकती थी। इसीलिए वांग चानफू ने सोचा कि हम बनाएंगे एक
Speaker A
अच्छी लेकिन सस्ती बैटरी। साल था 1995 का। वांग ने अपनी सारी सेविंग्स इकट्ठी की। कुछ रिश्तेदारों से उधार लिया और कुछ छोटे इन्वेस्टर से पैसे जुटाकर शुरू की एक छोटी सी बैटरी कंपनी। नाम रखा गया बीवाईडी यानी बिल्ड योर ड्रीम्स। उस टाइम उनकी टीम में
Speaker A
सिर्फ 20 लोग थे। मशीनें नहीं थीं, ऑटोमेशन नहीं था। सब कुछ मैनुअली हाथों से ही होता था। लेकिन वांग ने यहां पर भी एक बोल्ड डिसीजन लिया कि हमारे पास लोग हैं, मशीनें नहीं। पर अगर लोगों को एफिशिएंटली ट्रेन
Speaker A
किया जाए तो वो मशीन से भी बेहतर काम कर सकते हैं। और इसी जुगाड़ू माइंडसेट से ही उन्होंने कम कॉस्ट में हाई क्वालिटी बैटरी बनानी शुरू कर दी। सिर्फ 3 साल में बीवाईडी ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि वह जापानी
Speaker A
कंपनियों को भी चाइना के मार्केट में टक्कर देने लगी। मतलब जिस कंपनी को एक दशक पहले तक कोई भी नहीं जानता था, वह अब टेक जंट्स के रडार पर आ चुकी थी। बीवाईडी उस टाइम तक एक स्ट्रांग बैटरी
Speaker A
मैन्युफैक्चरर बन चुका था। Nokia, Motorola और कई दूसरे इलेक्ट्रॉनिक जॉइंट्स भी अपने मोबाइल डिवाइसेस के लिए बीवाईडी से ही बैटरी लेने लगे। अब दोस्तों, बीवाईडी की फैक्ट्री फुल कैपेसिटी पर चल रही थी। पैसा भी आ रहा था और नाम भी बन चुका था। लेकिन वांगचुआफू अब
Speaker A
भी संतुष्ट नहीं थे। क्योंकि वह कुछ ऐसा करना चाहते थे जो दुनिया बदल सके। तभी उनके मन में एक ऐसा ख्याल आया जो सुनने में तो पागलपन जैसा लगता है लेकिन विजनरी माइंडसेट वाले लोग अक्सर ऐसी बातें सोच ही
Speaker A
लेते हैं। उन्होंने कहा अगर हम दुनिया की सबसे सस्ती और टिकाऊ बैटरी बना सकते हैं तो क्यों ना उस बैटरी से चलने वाली गाड़ी को भी बनाएं। अब यह सुनते ही उनके आसपास के लोग चौंक गए। लोगों ने कहा, पागल-वागल
Speaker A
हो गए हो क्या? कार बनाना कोई बैटरी बनाने जैसा सिंपल काम थोड़ी ना है। डिजाइन, एरोडायनेमिक्स, इंजन इंटीग्रेशन और व्हीकल सेफ्टी सब कुछ देखना पड़ता है। और बीवाईडी के पास इससे रिलेटेड किसी भी चीज का एक्सपीरियंस नहीं था। लेकिन वांग का लॉजिक
Speaker A
सिंपल था। उन्होंने कहा फ्यूचर में कार की सबसे महंगी पार्ट होगी बैटरी और वो हमारे पास है। बाकी पार्ट हम सीख लेंगे बना लेंगे भाई। और इसी सोच के साथ साल 2003 में बीवाईडी ने एक स्ट्रगलिंग और लगभग बंद
Speaker A
हो चुकी चाइनीज कार कंपनी खरीदी सिर्फ 30 मिलियन में। नाम था कि ऑन ऑटो। इंडस्ट्री के लोग हंसने लगे कि बैटरी बनाने वाली कंपनी अब गाड़ियां भी बनाएगी भाई। ना एक्सपीरियंस है ना ही कोई जानकारी। यह तो पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। लेकिन
Speaker A
बीवाईडी को किसी के भी हंसी से फर्क नहीं पड़ा। वांग ने अपनी टीम के साथ आरएडी स्टार्ट की। डिजाइन से लेकर ब्रेक सिस्टम तक हर चीज उन्होंने इन हाउस बनाना शुरू किया और फिर 2 सालों की मेहनत के बाद 2005
Speaker A
में बीवाईडी ने लॉन्च की अपनी पहली प्रॉपर सेडान BYD F3। यह दिखने में थोड़ी बहुत Toyota Corolla के जैसी थी। पेट्रोल इंजन पर चलती थी। लेकिन इसकी कीमत इतनी कम थी कि चाइना का मिडिल क्लास उसे खरीदने के
Speaker A
लिए टूट पड़ा। जिसके चलते कुछ ही महीनों में बीवाईडी F3 बन गई चाइना की टॉप सेलिंग सेडान। अब पूरे ऑटो इंडस्ट्री के होश उड़ गए थे। Volkswagen, Honda और Geely जैसे बड़े-बड़े ब्रांड्स हैरान रह गए कि BYD को
Speaker A
तो इस फील्ड का कोई एक्सपीरियंस था नहीं। फिर भी इनकी गाड़ियां इतनी ज्यादा कैसे बिक रही हैं। असल में वांगचुआफू ने चाइनीज कस्टमर्स की फिलॉसफी को बहुत पहले ही समझ लिया था। वो जानते थे कि चाइना के
Speaker A
लोगों को लग्जरी या फैंसी ब्रांडिंग नहीं चाहिए। उन्हें चाहिए वैल्यू और ड्यूरेबिलिटी। उन्होंने सेम प्राइस में लोगों को ज्यादा फीचर्स दी और ब्रांड खुद ब खुद ग्रो होता चला गया। इस तरह से एक बैटरी मेकर कंपनी बन गई थी चाइना की सबसे
Speaker A
भरोसेमंद कार ब्रांड वो भी सिर्फ 2 सालों के अंदर। कुछ इसी तरह से साल बीता और आ गया 2008 का टाइम। लेमन ब्रदर्स का कोलैप्स हो चुका था। अमेरिका और यूरोप की इकॉनमी डगमगाने लगी थी। हर दिन ही न्यूज़
Speaker A
आती थी कि यह कंपनी बंद हो गई। इस कंपनी से इतने लोगों को काम से निकाल दिया एटसेट्रा। यह वह टाइम था जब लोगों का भरोसा बिजनेस से उठ रहा था। लेकिन ठीक उसी वक्त जब हर कोई पीछे हट रहा था तब एक आदमी
Speaker A
आगे बढ़ रहा था वांगचुआफू। अब वैसे तो वांग का नाम उस टाइम पर वर्ल्ड लेवल पर नहीं जाना जाता था। लेकिन वो चुपचाप दुनिया की पहली मास मार्केट प्लग-इन हाइब्रिड कार बना रहा था। नाम था बीवाईडी F3DM। एक्चुअली उस टाइम ईवीज को लोग
Speaker A
सीरियसली नहीं लेते थे। पूरी दुनिया इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को एक फैंसी टॉय समझती थी। टेस्ला खुद एक स्ट्रगलिंग स्टार्टअप था और लोगों को लगता था कि इलेक्ट्रिक कार सिर्फ लैब के लिए है। रोड्स के लिए नहीं। लेकिन वांगचुआफू ने उस
Speaker A
भीड़ से अलग सोचा। उन्हें बहुत पहले समझ आ गया था कि कंबशन इंजन का टाइम अब खत्म होने वाला है और आने वाला दौर होगा इलेक्ट्रिक का। और फिर यही सोचकर बीवाईडी ने कोई शॉर्टकट नहीं लिया। बैटरी खुद
Speaker A
बनाई, मोटर और कंट्रोलर खुद डिजाइन किया। और यहां तक कि सॉफ्टवेयर भी बीवाईडी ने ही डेवलप किया था। और फिर 15 दिसंबर 2008 को लॉन्च की गई बीवाईडी F3DM जो कि ड्यूल मॉडल थी। यानी बैटरी से भी चलती थी और पेट्रोल
Speaker A
से भी। बीवाईडी की ईवी स्ट्रेटजी से इंप्रेस्ड होकर दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर्स में से एक वारेन बफे ने भी अपनी इन्वेस्टमेंट फर्म बर्कशायर हैथवे के जरिए बीवाईडी में स्टेक खरीदा। उन्होंने इन्वेस्ट किए करीब 230 मिलियन और लिया 10%
Speaker A
स्टेक। वह भी तब जब दुनिया बीवाईडी का नाम तक ठीक से नहीं जानती थी। वारेन बफे ने कहा वांग चानफू के पास थॉमस एडिसन जैसी इन्वेंशन और जैक वेल्च जैसी बिजनेस ब्रेन का कॉम्बिनेशन है। इस इन्वेस्टमेंट ने
Speaker A
बीवाईडी को एक ग्लोबल स्पॉटलाइट में ला दिया था। और दोस्तों जब वारेन बफे ने बीवाईडी में इन्वेस्ट किया था तो उस टाइम पर ईलॉन मस्क से पूछा गया क्या वो बीवाईडी को खतरा मानते हैं? तब उन्होंने हल्की सी
Speaker A
मुस्कान में जवाब दिया। हैव यू सीन कार? असल में Tesla जैसी फ्यूचरिस्टिक कंपनी बीवाईडी जैसी प्लेन और सिंपल गाड़ियों को अपना कॉम्पिटिटर मानने को तैयार ही नहीं थी। इंटरनेट पर लोग हंसे, मीम्स बने। कईयों को लगा कि ईलॉन मस्क बिल्कुल सही है
Speaker A
क्योंकि बीवाईडी की कार्स सच में उस टाइम पर थोड़ी आउटडेटेड लगती थीं लेकिन फिर भी वांग चानफू ने सिर्फ एक सिंपल लाइन बोली, "लेट आवर कार्स।" अब दोस्तों Tesla और बीवाईडी का सपना भले ही एक जैसा था पर रास्ता बिल्कुल
Speaker A
अलग था।
Speaker A
अलग। उसे पता था कि EV सिर्फ अमीरों का शोपीस नहीं होना चाहिए। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हर इंसान का हक है। इसीलिए बीवाईडी ने बनाई सस्ती, टिकाऊ और प्रैक्टिकल गाड़ियां। जो कि आम आदमी भी खरीद सके। दूसरी तरफ Tesla ने पैनासोनिक
Speaker A
और सीएटीएल से बैटरी खरीदी। लेकिन वीवाईडी ने खुद बैटरी बनाना शुरू किया ब्लेड बैटरी जो इतनी सेफ थी कि फटने या जलने का भी कोई खतरा नहीं। जहां Tesla की गाड़ियां 40 से ₹50 लाख की स्टार्ट होती थी। बीवाईडी ने
Speaker A
सिर्फ 10 से ₹15 लाख में वीज निकाल दिए। जिसकी वजह से चाइना की सड़कों पर जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बाढ़ सी आ गई। कुछ ही सालों में यह फ्लड पूरे एशिया, साउथ अफ्रीका और यूरोप तक पहुंच गया। जिसके बाद
Speaker A
2023 तक पूरी दुनिया को पता लग गया था कि Tesla अब नंबर वन की पोजीशन से हट चुकी है क्योंकि बी वाईडी बन चुका था दुनिया का सबसे बड़ा ईवीए सेलर। वारेन बफे का भरोसा, ब्लेड बैटरी की पावर और हजारों इंजीनियर्स
Speaker A
की मेहनत सभी ने मिलकर बी वाईडी को अनस्टॉपेबल बना दिया था। आज ईलॉन मस्क भले ही ओपन माइक पर कुछ ना बोले, पर बंद दरवाजे के पीछे जरूर सोचते होंगे। शायद उस चाइनीस कंपनी को अंडरएस्टिमेट करना मेरी सबसे बड़ी गलती थी। क्योंकि जिस कंपनी को
Speaker A
वह एक मजाक समझते थे आज वही उनकी सबसे बड़ी कॉम्पिटिट बन चुकी है। लेकिन दोस्तों यह सफलता बीवाईडी के लिए एक दिन या फिर रातोंरात नहीं आई। बल्कि इसके लिए कंपनी ने बहुत सारे स्ट्रेटजीस पर काम किया। जैसे सबसे पहले बीवाईडी ने एंट्री ली साउथ
Speaker A
ईस्ट एशिया मतलब थाईलैंड, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों में जहां लोगों को अफोर्डेबल ईवीज चाहिए थी और बीवाईडी ने भी एग्जैक्टली वही दिया सस्ती, टिकाऊ और कम मेंटेनेंस वाली इलेक्ट्रिक कार्स। फिर नजर पड़ी साउथ अमेरिका पर यानी ब्राजील,
Speaker A
कोलंबिया और चिली जैसे देशों में जहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट का बड़ा हिस्सा अब भी फॉसिल फ्यूल पर डिपेंडेंट था। और यहां बीवाईडी ने सिर्फ कार्स नहीं बेची बल्कि उन्होंने शुरू की इलेक्ट्रिक बसेस की भी डिलीवरी। और फिर लास्ट में जब बीवाईडी ने
Speaker A
यूरोप में एंट्री ली तो फिर जर्मनी जैसे देश में जहां Foxwagen, BMW और Mercedes जैसे ब्रांड्स पहले से ही कब्जा जमाए हुए थे, वहां BYD ने अपनी एसयूवीज उतारनी शुरू की। यहां पर भी लोग इंप्रेस्ड होने लगे क्योंकि यूरोपियन रेगुलेशंस के हिसाब से
Speaker A
भी बीवाईडी की सेफ्टी, रेंज और क्वालिटी शानदार निकली। जिससे हैं एईवी और टंग एवी जैसी गाड़ियां नॉर्वे और यूके जैसे देशों में तेजी से सेल होने लगी। और दोस्तों बात तो इतनी आगे अब बढ़ चुकी है कि बीवाईडी ने
Speaker A
हंगरी में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी सेटअप कर लिया है। यानी अब वह मेड इन चाइना से मेड इन यूरो पर भी जा चुके हैं। वहीं अगर हम बात करें इंडिया की तो आपको जानकर हैरानी होगी कि बीवाईडी इंडिया में
Speaker A
ऑफिशियली मौजूद है और वह भी पिछले 15 सालों से। जी हां, साल था 2007 जब BYD ने पहली बार इंडिया में कदम रखा। लेकिन कार्स बेचने के लिए नहीं बल्कि अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी बिजनेस को एक्सपेंड करने के लिए। उन्होंने चेन्नई
Speaker A
में एक छोटी सी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई जहां वो मोबाइल बैटरीज, फोन कंपोनेंट्स और कुछ ईवी पार्ट्स का प्रोडक्शन करते थे। उस समय Nokia, Motorola और Micromax जैसे ब्रांड्स के लिए बैटरी सप्लाई करने वाले वेंडर्स में वीवाईडी भी शामिल था। हालांकि इंडिया एक
Speaker A
ग्रोइंग इलेक्ट्रॉनिक मार्केट बन रहा था और बीवाईडी को यह समझ आ गया कि अगर फ्यूचर इलेक्ट्रिक है तो उसकी नीव बैटरी ही होगी। कई सालों तक उन्होंने यह ऑपरेशन चलाया और इंडियन इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में खुद को एक ओईएम सप्लायर के तौर पर इस्टैब्लिश
Speaker A
किया। लेकिन फिर बी वाईडी को समझ आ गया कि मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सेगमेंट में मार्जिन बहुत कम है और असली फ्यूचर है इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में। इसीलिए 2013-14 के आसपास जब इंडियन गवर्नमेंट ने इलेक्ट्रिक बसेस पर फोकस करना शुरू किया
Speaker A
तो फिर बीवाईडी ने इस मौके का फायदा उठाने के लिए हैदराबाद की मेगा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड यानी एमईआईएल के साथ में एक जॉइंट वेंचर बना दिया। नाम रखा गया ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक। अब टेक्निकली गाड़ियां बना रहा था बीवाईडी लेकिन उस पर
Speaker A
लोगो लगा हुआ था ओलेra का। इस तरह से बीवाईडी की इलेक्ट्रिक बसेस इंडिया की सड़कों पर दौड़ने लगी और किसी को पता भी नहीं चला कि असली इंजन और बैटरी सिस्टम बीवाईडी का है। आज दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों में
Speaker A
हजारों इलेक्ट्रिक बसेस बीवाईडी की टेक्नोलॉजी पर चल रही हैं और डेली लाखों लोग उसमें ट्रैवल कर रहे हैं। और फिर कुछ सालों बाद जब BYD को लगा कि अब इंडिया EV अडॉप अप्शन के लिए भी रेडी है तो उन्होंने
Speaker A
2021 में अपनी पैसेंजर EV को भी ऑफिशियली लॉन्च कर दी। पहला मॉडल था BYD E6 जो लॉन्च हुआ था 2021 में। फिर आया 2022 में BYD Ato3 और 2024 में ल्च हो चुकी है BYD सील। लेकिन सवाल यह है कि BYD की गाड़ियां
Speaker A
आखिर इंडिया में ज्यादा दिखती क्यों नहीं है? असल में इसका सबसे बड़ा रीजन है टैक्स। जब कोई फॉरेन कार ब्रांड इंडिया में अपनी गाड़ी बेचना चाहता है और वह कंप्लीटली बिल्ड यूनिट यानी पूरी बनी हुई गाड़ी इंपोर्ट करता है तो उस पर 110% तक
Speaker A
का इंपोर्ट ड्यूटी लगाई जाती है। जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना। 25 लाख की अगर गाड़ी है तो उस पर करीब 27-28 लाख तक तो टैक्स ही लग जाता है। अब बीवाईडी की ज्यादातर ईवीज जैसे एटो या फिर सील इंडिया
Speaker A
में फिलहाल सीबीओ के तौर पर ही आती है। मतलब गाड़ी चीन में बनती है और पूरी की पूरी इंडिया लाकर बेची जाती है। अब आप ही सोचिए कि जो गाड़ी चाइना में ₹20 लाख की है वह इंडिया में पहुंचते-पहुंचते 40 से
Speaker A
₹50 लाख की हो जाती है। इतने में लोग बोलते हैं भाई हम तो Tata Nexon EV ले लेंगे। वह भी आधे दाम में। इसीलिए BYD इंडिया के मास मार्केट में एग्रेसिवली कंपटीट नहीं कर पाता है क्योंकि उनकी गाड़ियां टैक्स की वजह से लग्जरी सेगमेंट
Speaker A
में पहुंच जाती है। अब शायद आप सोच रहे होंगे तो फिर बीवाईडी लोकल मैन्युफैक्चरिंग क्यों नहीं करता? असल में बीवाईडी ने इंडिया में असेंबली और लोकल प्रोडक्शन के लिए इंटरेस्ट भी दिखाया है। लेकिन गवर्नमेंट ने अभी तक एवी फॉरेन
Speaker A
प्लेयर्स को वो परमिशन और सपोर्ट नहीं दिया है जो Tata और Mahindra जैसी डोमेस्टिक कंपनियों को मिल रहा है। लेकिन क्यों? क्योंकि अगर BYD फुल लोकल मैन्युफैक्चरिंग कर ले तो उसके ईवीज इतने सस्ते हो जाएंगे कि Tata की Nexon EV और
Speaker A
Mahindra XUV 400 जैसे मॉडल्स पूरी तरह से क्रश्ड हो सकते हैं। और दोस्तों यही वो बैलेंस है जो कि इंडियन गवर्नमेंट मेंटेन करना चाहती है कि इनोवेशन भी आए लेकिन लोकल कंपनियां खत्म ना हो। पर हां Mahindra ने अपनी नई इलेक्ट्रिक एसयूवीस
Speaker A
XV9 और Be6C में BYD की ही ब्लेड बैटरी टेक्नोलॉजी का यूज किया है। यह बैटरी फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है जिसमें 20% से 80% तक की चार्जिंग सिर्फ 20 मिनट में ही पॉसिबल है। आज की अगर बात करें तो
Speaker A
2024 में BYD ने करीब 42,70,000 इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड व्हीकल्स बेचे जबकि Tesla 18 लाख पर ही रह गई। और दोस्तों यह सिर्फ बिक्री की बात नहीं है। रेवेन्यू में भी बीवाईडी आगे निकल गया है क्योंकि Tesla का सालाना
Speaker A
टर्नओवर है 97 बिलियन तो वहीं बीवाईडी का है $17 बिलियन। और दोस्तों यही आंकड़े हैं जिसको देखते हुए पूरी दुनिया ने मान लिया है कि अब इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की दुनिया का नया राजा है बीवाईडी। तो दोस्तों एक ऐसा लड़का जो बचपन में अनाथ हो गया था
Speaker A
जिसके पास ना पैसा था ना पावर और ना ही कोई पहचान वो आज दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी का मालिक है। उम्मीद है कि आपको बीवाईडी की यह सक्सेस स्टोरी जरूर पसंद आई होगी।
Topics:BYDवांग चुआनफूइलेक्ट्रिक वाहनबैटरी टेक्नोलॉजीTata EVMahindra EVTeslaचीन की EV कंपनीइलेक्ट्रिक कारभारत EV मार्केट











