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1970 Experiment When Healthy People Entered Mental Hospital Shocking Thing Happened #shorts

1960 में डॉक्टर डेविड ने मानसिक अस्पतालों की सच्चाई जांचने के लिए एक प्रयोग किया जिसमें स्वस्थ लोगों को पागलखाने में भर्ती कराया गया।

Key Takeaways

  • मानसिक स्वास्थ्य निदान में गंभीर गलतियां हो सकती हैं।
  • स्वस्थ लोगों को भी मानसिक रोगी समझा जा सकता है।
  • अस्पताल के स्टाफ की बातों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता।
  • मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।
  • डॉक्टर डेविड का प्रयोग मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चेतावनी है।

What the video covers

  • 1960 में डॉक्टर डेविड ने यह जांचने के लिए प्रयोग किया कि क्या मानसिक अस्पताल में डॉक्टर सही तरीके से मानसिक बीमारी पहचान पाते हैं।
  • उन्होंने सात स्वस्थ लोगों को चुना और उन्हें अलग-अलग मानसिक अस्पतालों में भेजा।
  • स्वस्थ लोग अस्पताल में जाकर कहते हैं कि उन्हें अजीब आवाजें सुनाई देती हैं, जिससे उन्हें भर्ती कर लिया गया।
  • अस्पताल में वे कहते हैं कि वे ठीक हैं और कोई आवाजें नहीं सुनते, लेकिन उनकी बातों पर विश्वास नहीं किया गया।
  • डॉक्टर और नर्स उनकी बातों को मानसिक बीमारी के लक्षण मानते रहे।
  • 52 दिनों तक वे लोग अपने आप को स्वस्थ बताते रहे, लेकिन अस्पताल ने उन्हें मानसिक रूप से बीमार माना।
  • अंत में वे लोग खुद स्वीकार करते हैं कि वे मानसिक रूप से बीमार हैं ताकि उन्हें छुट्टी मिल सके।
  • बाद में अस्पताल ने डॉक्टर डेविड को चुनौती दी कि वे फेक मरीज भेजें, लेकिन उन्होंने कोई फेक मरीज नहीं भेजा था।
  • अस्पताल ने 41 असली मानसिक मरीजों को फेक मरीज बता दिया, जिससे अस्पताल की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
  • यह प्रयोग मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली की कमियों और गलत निदान को उजागर करता है।

Answers

Questions about this video

डॉक्टर डेविड ने यह प्रयोग क्यों किया?

डॉक्टर डेविड ने यह जानने के लिए प्रयोग किया कि क्या मानसिक अस्पताल के डॉक्टर सही तरीके से मानसिक बीमारी पहचान पाते हैं या नहीं।

स्वस्थ लोगों को मानसिक अस्पताल में क्यों भर्ती किया गया?

स्वस्थ लोगों ने कहा कि उन्हें अजीब आवाजें सुनाई देती हैं, जिससे अस्पताल ने उन्हें मानसिक रोगी समझकर भर्ती कर लिया।

अस्पताल ने फेक मरीजों को कैसे पहचाना?

अस्पताल ने 41 लोगों को फेक मरीज बताया लेकिन बाद में पता चला कि डॉक्टर डेविड ने कोई फेक मरीज भेजा ही नहीं था, जिससे अस्पताल की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
1960 में डॉक्टर डेविड, साइकोलॉजिस्ट, के पास एक सीरियस क्वेश्चन था कि पागलखाने के अंदर क्या डॉक्टर रियल में बताते हैं कि कौन पागल है और कौन हेल्दी है? अब अपने इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए उन्होंने एक सीक्रेट प्लान बनाया। उन्होंने सात
00:16
Speaker A
हेल्दी लोगों को रेडी किया। उनको खुद को मिला के टोटल आठ। अब वो लोग अलग-अलग मेंटल हॉस्पिटल में जाते हैं और जाकर कहते हैं हमें अजीब-अजीब आवाज सुनाई में आती है। बस उन्हें पागलखाने में एडमिट कर लिया गया।
00:29
Speaker A
डॉक्टर ने डायग्नोस किया किसे स्किट्सोफ्रेनिया है तो किसे बाइपोलर डिसऑर्डर है। अब जैसे इन लोगों को हॉस्पिटल में एडमिट किया गया, इन लोगों ने हॉस्पिटल स्टाफ को कहा हमें कोई आवाज ऐसी नहीं आती, हम लोग नॉर्मल हैं। अब यहां से
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Speaker A
कहानी खतरनाक टर्न मारती है। उनकी बातों पर कोई विश्वास नहीं कर रहा था। नर्स आती, ये लोग नर्स को कहते हम लोग पागल नहीं हैं। हम लोग नॉर्मल हैं। तो नर्स उन लोगों को इग्नोर करके निकल जाती। अब यह लोग नोट्स
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Speaker A
लिखते तो डॉक्टर कहता था यह तुम्हारे मेंटल इलनेस का सिम्टम है। मतलब वो लोग पूरी तरीके से ट्रैप हो गए थे। वो लोग गए थे यह प्रूफ करने के लिए कि डॉक्टर मेंटल को मेंटल कहता है। क्या हेल्दी को भी
01:04
Speaker A
मेंटल कहता है? और ये लोग फंस गए अंदर। इनकी बात पर कोई यकीन ही नहीं कर रहा था कि ये लोग पागल नहीं हैं। अब ये लोग लंच के समय लाइन में आगे आकर खड़े हो जाते थे। तो
01:14
Speaker A
डॉक्टर कहता था यह भी एक सिम्टम है मेंटल इलनेस का। ये लोग कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि ये लोग बाहर कैसे निकले। यह लोग सबसे अच्छी तरीके से बिहेव कर रहे हैं। अच्छी तरीके से खाना खा रहे हैं। तो भी
01:24
Speaker A
ऐसे ही समझा जा रहा है कि ये लोग पागल हैं। 52 डेज तक वो लोग ने यही कहा कि हम लोग ठीक हैं। हम लोग पागल नहीं हैं। हम लोग नॉर्मल हैं। अब 52 डेज के बाद वो लोग
01:34
Speaker A
कहते हैं कि हां हम लोग मेंटली इल हैं और हम लोग इंप्रूव करने की ट्राई करेंगे। तब जाकर उन्हें डिस्चार्ज किया गया। अब ये लोग बाहर निकलते हैं और उसके बाद सब बातें बाहर आती हैं। कैसे यह लोग मेंटली फिट थे,
01:45
Speaker A
हेल्दी थे। बट फिर भी डॉक्टर ने इन्हें मेंटली इल कहा, पागल कहा और यह बात बहुत फैलती है। इसके बाद एक हॉस्पिटल वाले भड़क जाते हैं और हॉस्पिटल वाले इन लोगों को चैलेंज करते हैं। डॉक्टर डेविड को कहते
01:56
Speaker A
हैं अब तुम फेक पेशेंट को भेजो हमारे पास और हम यह बता देंगे कि यह फेक पेशेंट है या रियल मेंटली इल है। डॉक्टर डेविड ने कहा ठीक है। 3 महीने के अंदर जो हॉस्पिटल ने चैलेंज किया था कि हम फेक पेशेंट को
02:08
Speaker A
पकड़ लेंगे। उन लोगों ने 41 फेक पेशेंट को पकड़ा और कहा कि यह लोग मेंटली इल नहीं हैं। यह लोग पागल नहीं हैं। यह लोग फेक पेशेंट हैं। 41 लोग यह लोग ठीक हैं। डॉक्टर डेविड सामने आए। डॉक्टर डेविड ने कहा इस
02:22
Speaker A
बार भी तुम लोग फेल हो गए हो क्योंकि मैंने किसी को भेजा ही नहीं था। मैंने कोई भी फेक पेशेंट को तुम्हारे हॉस्पिटल में भेजा ही नहीं था। तुमने जो रियल मेंटली इल था उन लोगों को कहा फेक पेशेंट। मतलब जो
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Speaker A
रियल में पागल थे उनको फिट बताया।
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