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Sunita JImp4

सुनीता सिंह ग्राम पंचायत विकास योजना की पांच चरणों में प्रक्रिया और सहभागिता पर विस्तार से चर्चा करती हैं।

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Key Takeaways

  • ग्राम पंचायत विकास योजना की सफलता के लिए समुदाय की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।
  • सही आकलन और संसाधनों के अनुसार प्राथमिकता निर्धारित करना जरूरी है।
  • कार्य योजना की स्वीकृति में ग्राम सभा की भूमिका महत्वपूर्ण है।
  • कार्य योजना पारदर्शी और सहभागी प्रक्रिया से बननी चाहिए।
  • जन योजना अभियान के दौरान समयबद्ध तरीके से योजना बनाना आवश्यक है।

What the video covers

  • सुनीता सिंह ग्राम पंचायत विकास योजना की प्रक्रिया को पांच चरणों में समझाती हैं।
  • पहला चरण वातावरण निर्माण है, जिसमें गांव में योजना की जानकारी और सहभागिता बढ़ाई जाती है।
  • दूसरा चरण परिस्थिति का विश्लेषण है, जिसमें गांव की आवश्यकताओं और संसाधनों का आकलन किया जाता है।
  • तीसरा चरण आवश्यकताओं को आर्थिक संसाधनों से मिलाना है, जिसे रिसोर्स एनवेलप कहा जाता है।
  • चौथा चरण ड्राफ्ट कार्य योजना का निर्माण है, जिसमें गतिविधियों और बजट का निर्धारण होता है।
  • पांचवां चरण प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति का है, जिसमें ग्राम सभा की स्वीकृति अनिवार्य है।
  • कार्य योजना पूरी तरह से सहभागी, पारदर्शी और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप होनी चाहिए।
  • जन योजना अभियान के तहत 2 अक्टूबर से 31 मार्च तक कार्य योजना तैयार की जाती है।
  • पंचायतों को क्रिटिकल गैप पर काम करते हुए अपनी योजना बनानी चाहिए।
  • कम लागत या बिना लागत की गतिविधियों को भी योजना में शामिल किया जाना चाहिए।

Answers

Questions about this video

ग्राम पंचायत विकास योजना के कितने चरण होते हैं?

ग्राम पंचायत विकास योजना की प्रक्रिया पांच चरणों में होती है: वातावरण निर्माण, परिस्थिति का विश्लेषण, आवश्यकताओं और संसाधनों का मेल, ड्राफ्ट कार्य योजना का निर्माण, और प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति।

परिस्थिति का विश्लेषण कैसे किया जाता है?

परिस्थिति का विश्लेषण ग्रामीण सहभागी आकलन के माध्यम से किया जाता है, जिसमें गांव का भ्रमण, सामाजिक मानचित्रण, संसाधन मानचित्रण और समूह आधारित चर्चा शामिल हैं।

कार्य योजना की स्वीकृति कौन प्रदान करता है?

कार्य योजना की प्रशासनिक स्वीकृति ग्राम सभा देती है। वित्तीय स्वीकृति विभिन्न स्तरों पर होती है जैसे ग्राम पंचायत, सहायक विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी और जिलाधिकारी के पास। तकनीकी स्वीकृति कंसल्टिंग इंजीनियर की सहायता से प्राप्त की जाती है।

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00:05
Speaker A
आप सभी को मेरा नमस्कार। मैं सुनीता सिंह, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजना अंतर्गत पंचायती राज विभाग में राज सलाहकार की पोजीशन पर कार्यरत हूं। आज इस मंच पर हम लोग जो बात करने आए हैं, वह है ग्राम पंचायत विकास योजना। योजना योजना
00:24
Speaker A
किसी सरकारी निर्माण प्रक्रिया की बात नहीं हो रही है। यह उस व्यवस्था की बात हो रही है जिसके माध्यम से पंचायतें अपनी विकास की रूपरेखा तैयार करती हैं। एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें गांव के सभी लोग, बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग बैठकर एक साथ अपने
00:45
Speaker A
विकास की दिशा तैयार करते हैं। कार्य योजना ऐसी हो जो सामाजिक आर्थिक मुद्दों को संबोधित कर सके। कार्य योजना ऐसी हो जो कि पंचायतों को दिए गए अधिकारों को संपादित करने में आवश्यक हो। कार्य योजना ऐसी हो जो कि 2047 के भारत के विजन को
01:07
Speaker A
पूर्ति करने में सहायक हो। जब कार्य योजना की बात करें तो प्रत्येक चरण का सुनियोजित होना बहुत आवश्यक है। इसीलिए ग्राम पंचायत विकास योजना की पूरी प्रक्रिया को पांच चरणों में बांटा गया है। पहला है वातावरण निर्माण। दूसरा है परिस्थिति का विश्लेषण।
01:27
Speaker A
तीसरा है समुदाय की आवश्यकताओं के आधार पर उपलब्ध संसाधनों को देखते हुए प्राथमिकता की कार्यवाही। चौथा है ड्राफ्ट प्लान का निर्माण और पांचवा है पूरी कार्य योजना की प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति। सबसे पहले हम पहले चरण की बात करेंगे तो इस चरण का नाम जैसे कि
01:51
Speaker A
से ही स्पष्ट है, वातावरण निर्माण यानी कि ऐसा माहौल तैयार करना कि सभी को पता चल जाए कि हमारे गांव में क्या होने वाला है। हमारी ग्राम पंचायत विकास योजना बनेगी तो हमें क्या लाभ होंगे। हमारी सहभागिता कितनी आवश्यक है। इसके लिए नारा लेखन,
02:09
Speaker A
डुग्गी पिटवाना, नुक्कड़ नाटक, पेंटिंग करवाना, गांव की स्वयं सहायता समूह की दीदियों की सहायता से, वार्ड मेंबर की सहायता से लोगों को यह सूचित करना कि ग्राम पंचायत विकास योजना में उनकी भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है जितनी
02:27
Speaker A
पंचायत की कार्यकारिणी की। दूसरे चरण पर बात करते हैं तो वह है परिस्थिति का विश्लेषण। यानी हम अपने गांव की स्थिति को देख लें कि हमारे गांव में किन चीजों की आवश्यकता है। परिस्थिति का विश्लेषण करने के लिए मुख्यता जिन टूल का इस्तेमाल होता
02:47
Speaker A
है, उसको कहते हैं ग्रामीण सहभागी आकलन। ग्रामीण सहभागी आकलन कोई विशेष टूल नहीं है। यह हमारे आप जैसे ही लोगों ने मिलकर गांव के लोगों की सहभागिता लेने के लिए तैयार की गई एक तकनीक है। इसमें वैसे तो
03:02
Speaker A
बहुत सारी तकनीक होते हैं, लेकिन मुख्यता जिनको आपको और हमको अपने दैनिक जीवन में समझ में आता है, वह है गांव का भ्रमण, सामाजिक मानचित्रण, संसाधनों का मानचित्रण और समूह आधारित चर्चा। समूह आधारित चर्चा हम लोग ज्यादातर बच्चों और गांव की परिवेश
03:21
Speaker A
के अनुसार महिलाओं के साथ उपयोग करते हैं या कोई ऐसा वर्ग जो सामने अपनी बातें नहीं रख पा रहा है तो उनके लिए हम लोग समूह आधारित चर्चा करते हैं। सबसे पहले हम गांव का भ्रमण करते हैं। प्रधान, आंगनबाड़ी,
03:36
Speaker A
आशा, वार्ड मेंबर्स, स्वयं सहायता समूह सभी के साथ मिलकर गांव की आवश्यकताओं को सामने से देखते हैं। इसके बाद सभी के साथ मिलकर हम सामाजिक मानचित्र पर कार्य करते हैं। गांव में नजदीकी रूप से दिखने वाली सभी चीजें नाला, नदी, तालाब, आंगनबाड़ी, स्कूल
03:58
Speaker A
सभी को उस मानचित्र पर रखते हैं और इस बीच लोगों से उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं पर भी बात करते रहते हैं। एक बार समस्याएं चिन्हित हो गईं तो हमारी आवश्यकताएं भी हमें मालूम चलने लगती हैं। इसके पश्चात हम लोग संसाधन मानचित्र पर
04:16
Speaker A
काम करते हैं जिससे कि हमें यह पता चल पाए कि हमारे पास संसाधन क्या-क्या हैं। जल, जंगल, जमीन, जानवर, जन ये सब पंचायत की ताकत हैं। जब हमारे पास हमारे संसाधनों का चिन्हीकरण होगा, तो हम बेहतर रूप से
04:35
Speaker A
अपनी कार्य योजना तैयार कर पाएंगे। एक और तरीका है जिससे पंचायतें अपनी विकास की स्थिति या आवश्यकताओं का सही आकलन कर सकती हैं। वह है पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स। पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स में प्रत्येक ग्राम पंचायत की रैंकिंग और क्रिटिकल गैप
04:53
Speaker A
को आइडेंटिफाई किया गया है, जिसकी आख्या या प्रगति पंचायतों ने खुद भरी है। तो आज आवश्यकता है कि पंचायतें उन क्रिटिकल गैप पर काम करें और उसके हिसाब से पंचायतें अपनी कार्य योजना तैयार करें। अब आते हैं हम उस चरण में जिसमें समस्याओं के बाद
05:12
Speaker A
हमें आवश्यकताओं पर काम करना है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में कुछ सीमित संख्या में आर्थिक संसाधन होते हैं। हमें अपनी आवश्यकताओं को उससे मैच करवाना है। इस आर्थिक संसाधन को रिसोर्स एनवेलप का नाम दिया गया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत का जो
05:31
Speaker A
वित्तीय संसाधन होते हैं, जिसको रिसोर्स एनवेलप कहा जाता है, वह बहुत सीमित होते हैं। तो जरूरी है कि हम अपनी आवश्यकताओं को इस रिसोर्स एनवेलप से मैच करा के ही अपनी कार्य योजना तैयार करें। रिसोर्स एनवेलप मतलब वित्तीय और मानव संसाधन।
05:49
Speaker A
वित्तीय संसाधन जैसे ग्राम पंचायतों को वित्त आयोग के अंतर्गत हस्तांतरित धनराशि, मनरेगा और अन्य भारत सरकार की फ्लैगशिप स्कीमों के तहत मिलने वाली धनराशि और सबसे बड़ी रिसोर्स एनवेलप का साधन है पंचायतों के स्वयं के स्रोतों से मिलने वाली आय। एक
06:10
Speaker A
बार हमारे पास आवश्यकताएं आ गईं, हमने रिसोर्स एनवेलप से उनकी मैच मेकिंग कर ली। तो हम पूरी सूची को दो भागों में बांटेंगे। यह देखने के लिए कि कौन सी ऐसी आवश्यकताएं हैं जिनको हम बजट से पूरा कर
06:23
Speaker A
सकते हैं और कौन सी ऐसी आवश्यकताएं हैं जिनके लिए बजट की आवश्यकता नहीं होती है। हमारे और आपके सहयोग की आवश्यकता होती है। आप देखेंगे पंचायत कर्मी और प्रतिनिधि होने के नाते हम 24*7 ऐसी गतिविधियों पर
06:39
Speaker A
कार्य करते हैं जो समुदाय के उत्थान से जुड़ी हों। लोगों से मिलना, बातचीत करना, उनकी समस्याओं को सुनना और उनको शासन तक पहुंचाना यह भी बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। अक्सर महत्वपूर्ण दिवसों में हम लोग प्रदेश सरकार के साथ कदम मिलाकर चलते हैं
06:58
Speaker A
और ऐसे मुद्दों पर काम करते हैं जो शासन की प्राथमिकताओं से जुड़े रहते हैं। और आप देखेंगे उसके लिए धन की आवश्यकता नहीं होती पर मनोबल की आवश्यकता होती है। ऐसी सारी गतिविधियां हमारी वार्षिक कार्य योजना का भाग होनी चाहिए। इस प्रकार से
07:13
Speaker A
रिसोर्स एनवेलप और आवश्यकताओं की सूची की मैच मेकिंग को हम लोग चौथे चरण में ले जाते हैं। जिसे कहते हैं ड्राफ्ट कार्य योजना का निर्माण। चौथे चरण में हम लोग थोड़ा फोकस होते हैं। अपनी गतिविधियों को बांटने की कोशिश करते हैं कि हम लोग को
07:30
Speaker A
किस क्षेत्र में काम करना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और उनसे संबंधित कौन सी गतिविधियां हम ले रहे हैं। उन गतिविधियों के लिए कितनी धनराशि की आवश्यकता पड़ेगी और वह धनराशि कहां से प्राप्त होगी। इस प्रकार से इस ड्राफ्ट प्लान या चौथे
07:53
Speaker A
चरण के अंत में एक पूरा खाका हमारे पास आ जाता है कि हम कौन सी गतिविधियों के लिए कितनी धनराशि कहां से खर्च करें। इसी चरण में हम उन गतिविधियों को भी सम्मिलित कर लेंगे जो कि कम लागत या बिना लागत की
08:09
Speaker A
गतिविधियां हैं। जैसे किसी विशेषज्ञ की सहायता लेना, पशुओं के लिए कैंप लगवाना या साफ-सफाई, स्वच्छता के समानांतर अभियान चलाना, पौधारोपण, वृक्षारोपण या किशोरियों को काउंसलिंग कराने के लिए किसी डॉक्टर की परामर्श कराना, अपने ग्राम पंचायत में निशुल्क कोचिंग खुलवाना। यह सब आपकी कम
08:35
Speaker A
लागत या बिना लागत की गतिविधियां हैं। अब आते हैं हम पांचवें चरण में जिसमें ड्राफ्ट प्लान की वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति की बात होती है। इस चरण में हम ग्राम सभा का आयोजन करेंगे। लोगों को ड्राफ्ट कार्य योजना पढ़कर सुनाएंगे और
08:53
Speaker A
पूरे समुदाय की स्वीकृति प्राप्त करेंगे। यहां पर यह महत्वपूर्ण तथ्य है कि पूरी कार्य योजना की प्रशासनिक स्वीकृति ग्राम सभा देती है। इसके बाद इसके पश्चात वित्तीय स्वीकृति आती है जिसमें 2 लाख तक के कार्य ग्राम पंचायत स्वयं के स्तर से
09:11
Speaker A
स्वीकृति प्रदान कर सकती है। दो से ढाई लाख तक के कार्यों को सहायक विकास अधिकारी पंचायत स्वीकृति प्रदान करता है। ढाई से 5 लाख तक के कार्य जिला पंचायत राज अधिकारी के पास जाते हैं और उससे ऊपर के कार्य
09:26
Speaker A
जिलाधिकारी महोदय के पास स्वीकृति के लिए जाते हैं। जब बात तकनीकी स्वीकृति की आती है तो हम लोग कार्यभार तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करते हैं। तकनीकी आंकलन तैयार करने के लिए विभाग ने बहुत अच्छी पहल की है कि कंसल्टिंग इंजीनियर की तैनाती की
09:45
Speaker A
है। उनकी सहायता से पंचायतें अपना तकनीकी प्राकलन तैयार कर सकती हैं। यह हमारी आपकी जिम्मेदारी है कि हम अपनी ग्राम पंचायत विकास योजना सहभागी तरीके से तैयार करें। यह प्रक्रिया पूर्णतया पारदर्शी होनी चाहिए। जिसमें वार्ड मेंबर्स, समिति सदस्यों और विभिन्न
10:06
Speaker A
विभागों के कर्मियों का योगदान होना चाहिए। तभी हम लोग सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में पंचायतें अपना योगदान दे सकेंगी। पंचायतों की कार्य योजनाएं सहभागी रूप से तैयार हों, इसके लिए पांच चरणों में इस पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का
10:22
Speaker A
प्रयास किया गया है। अब बात आती है पंचायतें सही समय पर कार्य योजना तैयार कर लें। इसके लिए 2 अक्टूबर से लेकर 31 मार्च तक प्रत्येक वर्ष जन योजना अभियान चलाया जाता है। जन योजना अभियान की अवधि में
10:37
Speaker A
पंचायतें मिनिमम दो ग्राम सभा का आयोजन करके पूरे समुदाय की आवश्यकता को लेते हुए इस कार्य योजना को तैयार करती हैं। जैसे कि अगले वर्ष की कार्य योजना तैयार करनी है तो इसी वर्ष ग्राम पंचायतें 2 अक्टूबर से 31 जनवरी के मध्य ग्राम सभाओं की बैठक
10:57
Speaker A
करके कार्य योजना तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को संपादित करती हैं। और अंत में एक बहुत महत्वपूर्ण बात इस बात का अव...
11:11
Speaker A
वर्ष मिलने वाले बजट में 20% से अधिक की बढ़ोतरी ना करें। यानी कि हम लोग को यदि ₹1 लाख की कार्य योजना तैयार की है तो अगले वर्ष की कार्य योजना ₹1200 से अधिक की ना बनाएं। इन्हीं शब्दों के साथ आपका
11:29
Speaker A
बहुत-बहुत धन्यवाद।
Topics:ग्राम पंचायत विकास योजनापंचायती राजसहभागी योजनापरिस्थिति विश्लेषणरिसोर्स एनवेलपड्राफ्ट कार्य योजनाप्रशासनिक स्वीकृतिजन योजना अभियानसामाजिक मानचित्रणसतत विकास लक्ष्य

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