ओशो की क्वांटम जंपिंग पर गहरी व्याख्या, जो जीवन को बदलने और नई वास्तविकता में प्रवेश करने का मार्ग दिखाती है।
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Key Takeaways
- जीवन की वास्तविकता हमारी चेतना और फ्रीक्वेंसी पर निर्भर करती है।
- भविष्य में सुख की तलाश छोड़कर वर्तमान में अपनी फ्रीक्वेंसी बदलें।
- दुख और अभाव से जुड़ाव ही हमारी असली बाधा है।
- मांगना नहीं, अपनी ऊर्जा और भावना को बदलना आवश्यक है।
- क्वांटम जंपिंग के माध्यम से हम अपनी चेतना की नई अवस्था में प्रवेश कर सकते हैं।
What the video covers
- संकोच और डर छोड़कर जीवन के भ्रम को समझना आवश्यक है।
- हमारी वर्तमान स्थिति एक भ्रम है जिसे हम स्वयं ने बनाया है और इसे बदला जा सकता है।
- जीवन एक फ्रीक्वेंसी की तरह है, जिसे हम अपने विचारों और भावनाओं से नियंत्रित करते हैं।
- भविष्य में जाकर खुश होने की सोच गलत है; वास्तविकता वर्तमान में ही बदलनी होती है।
- क्वांटम जंपिंग का मतलब है अपनी चेतना की फ्रीक्वेंसी बदलकर नई वास्तविकता में प्रवेश करना।
- हम अपने दुखों और पुरानी आदतों से इतने जुड़े हैं कि बदलाव मुश्किल लगता है।
- अस्तित्व हमें वह देता है जो हम हैं, न कि जो हम चाहते हैं।
- मांगना अभाव को बढ़ाता है, जबकि अपनी फ्रीक्वेंसी बदलना जीवन को बदलता है।
- समानांतर वास्तविकता हमारी चेतना की एक अवस्था है, जिसे महसूस करके हम उसमें प्रवेश कर सकते हैं।
- नियमित अभ्यास और गहरी कल्पना शक्ति से हम अपनी ऊर्जा और जीवन की दिशा बदल सकते हैं।
Chapters
- 00:00संकोच और भ्रम से मुक्ति
- 01:41दुख और पीड़ा का कारण समझना
- 03:18जीवन की फ्रीक्वेंसी और वास्तविकता
- 05:04पुरानी आदतों और दुखों से बंधन
- 06:46माया और चेतना की गहराई
- 08:27भावना और ऊर्जा का प्रभाव
- 10:24समानांतर दुनिया और चेतना की अवस्था
- 12:04फ्रीक्वेंसी बदलने का विज्ञान
- 15:31अंतिम संदेश: बदलाव भीतर से शुरू होता है
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Speaker A
मेरे प्रिय, संकोच छोड़ दो। संकोच की कोई जरूरत नहीं है और ना ही डरने की कोई जरूरत है। क्योंकि आज मैं तुमसे वह बात करने जा रहा हूं जिसे सुनने के लिए तुमने ना जाने कितने जन्मों का इंतजार किया है। तुम जिस
Speaker A
जीवन [संगीत] को जी रहे हो, जिसे तुम अपना नसीब कहते हो, अपनी किस्मत कहते हो। मैं तुमसे कहता हूं वह सिर्फ एक भ्रम है। एक बहुत बड़ा भ्रम। क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हारी गरीबी, तुम्हारी बीमारी, तुम्हारे रिश्तों [संगीत] की कड़वाहट,
Speaker A
तुम्हारी यह बेचैनी, क्या यही तुम्हारा अंतिम सत्य है? अगर तुम ऐसा सोचते हो तो तुम बहुत बड़ी भूल में हो। तुम उस राजा की तरह हो जो अपने ही महल में भिखारी बनकर बैठा है और जिसके हाथ में हीरे की खान की
Speaker A
चाबी है। लेकिन वह भीख मांग रहा है क्योंकि वह भूल गया है [संगीत] कि वह कौन है। जरा रुको। और अपने चारों तरफ देखो। [संगीत] यह जो दुनिया तुम्हें दिखाई देती है, ठोस पत्थर जैसी मजबूत जिसे तुम हिला [संगीत]
Speaker A
नहीं सकते, यह वैसी है नहीं। यह सिर्फ एक सपना है जिसे तुम खुली आंखों से देख रहे हो। और विडंबना यह है कि यह सपना किसी और ने नहीं, तुमने ही बुना है। और क्योंकि तुमने इसे बुना है, इसलिए तुम ही इसे तोड़
Speaker A
भी सकते हो। तुम ही इसे बदल भी सकते हो। लोग इसे चमत्कार कहते हैं। लोग इसे जादू कहते हैं। पश्चिम [संगीत] के वैज्ञानिक अब इसे क्वांटम जंपिंग कहते हैं। लेकिन मैं इसे कहता हूं जागना। नींद से जागना। तुम्हारे मन में एक सवाल उठता होगा कि अगर
Speaker A
मैं ही अपनी दुनिया का रचयिता हूं तो मैंने अपने लिए यह दुख क्यों चुना? मैंने यह पीड़ा क्यों चुनी? कोई भी जानबूझकर आग में हाथ क्यों डालेगा? बात गहरी है। इसे समझने [संगीत] के लिए तुम्हें थोड़ा गहरा उतरना होगा। सतह पर तैरने से काम नहीं
Speaker A
चलेगा। गोता लगाना होगा। समझो यह अस्तित्व, यह ब्रह्मांड, ये कोई एक सीधी रेखा नहीं है। ऐसा नहीं है कि कल जो हुआ था, वो बीत गया और कल जो होगा, वो अभी आया नहीं। यह समय की जो समझ तुमने बना रखी है, भूत,
Speaker A
भविष्य और वर्तमान की यह झूठी है। सत्य यह है कि सब कुछ अभी घट रहा है। इसी क्षण [संगीत] में। तुम्हें यह बात अजीब लग सकती है। लेकिन यही सत्य है। कल्पना करो कि तुम्हारे कमरे में एक रेडियो रखा है। उस
Speaker A
रेडियो के आसपास हवा में हजारों गाने गूंज रहे हैं। एक ही वक्त पर दिल्ली का स्टेशन भी चल रहा है। मुंबई का स्टेशन भी चल रहा है। पुराने गाने भी बज रहे हैं। खबरें भी चल रही हैं। सब कुछ अभी है, इसी कमरे में
Speaker A
है। लेकिन तुम्हारे रेडियो पर सिर्फ एक ही गाना बज रहा है। क्यों? क्योंकि तुमने अपने रेडियो की सुई को उसके कांटा को एक खास जगह पर रोक रखा है। जिस स्टेशन पर तुम ट्यून हो, बस [संगीत] वही तुम्हें सुनाई
Speaker A
देता है। बाकी सब कुछ होते हुए भी तुम्हारे लिए नहीं है। तुम उन्हें सुन नहीं सकते, देख नहीं सकते, अनुभव नहीं कर सकते। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे गाने [संगीत] बज नहीं रहे। वे बज रहे हैं। पूरी
Speaker A
ताकत से बज रहे हैं। ठीक इसी तरह तुम्हारा जीवन भी एक फ्रीक्वेंसी है। एक तरंग है। तुम अभी जिस गरीबी में हो, जिस लाचारी में हो, वह सिर्फ एक स्टेशन है। जिसे तुमने जाने या अनजाने में ट्यून कर रखा है। और
Speaker A
मजे की बात यह है कि ठीक इसी वक्त, इसी क्षण एक दूसरी वास्तविकता भी मौजूद है। एक दूसरा तुम भी मौजूद है। वह तुम जो पूरी तरह स्वस्थ है, वह तुम जिसके पास अपार धन है, वह तुम जो प्रेम से भरा है, वह
Speaker A
तुम जो परम आनंद में नाच रहा है, वह भविष्य में नहीं है। वह किसी और जन्म में नहीं है। वह यही है। इसी हवा में, इसी [संगीत] कमरे में, बस एक अलग आयाम में, एक अलग आवृत्ति पर तुमसे बस [संगीत] एक ही चूक हो
Speaker A
रही है। तुम उस नए तुमको भविष्य में खोज रहे हो। तुम सोचते हो कि जब मैं मेहनत करूंगा, जब मैं संघर्ष करूंगा, तब 10 साल बाद मैं वह बनूंगा और यही तुम्हारी सबसे बड़ी बाधा है। क्योंकि जो [संगीत] चीज
Speaker A
भविष्य में है, वह हमेशा भविष्य में ही रहेगी। वह कभी वर्तमान नहीं बनती। वह हमेशा क्षितिज की तरह दूर भागती रहेगी। क्वांटम छला या जिसे मैं समानांतर वास्तविकता कहता [संगीत] हूं, उसका विज्ञान यही है कि तुम्हें वहां पहुंचना
Speaker A
नहीं है। तुम्हें बस अपना रेडियो स्टेशन बदलना है। तुम्हें अपनी सुई घुमानी है। और जैसे ही तुम सुई घुमाते हो, आवाज बदल जाती है। दृश्य बदल जाता है। दुनिया बदल जाती है। लेकिन सुई घूमेगी कैसे? यह सबसे बड़ा
Speaker A
सवाल है। हम सब अपनी पुरानी पहचान से, अपनी पुरानी आदतों से, अपने पुराने रोने धोने से [संगीत] इतने चिपके हुए हैं कि हम सुई को हिलने ही नहीं देते। हमें अपने दुखों से भी प्रेम हो गया है। गौर से
Speaker A
देखना अपने भीतर। जब तुम कहते हो मैं बहुत परेशान हूं, तो क्या तुम्हें उस परेशानी में एक अजीब सा रस नहीं आता? तुम्हें लोगों की सहानुभूति मिलती है। तुम्हें खुद को बेचारा महसूस करने में एक सुरक्षा लगती है। यही वह जंजीर है जिसने तुम्हें इस
Speaker A
दरिद्र वास्तविकता से बांध रखा है। क्वांटम दुनिया का नियम बहुत सीधा है। बहुत क्रूर भी है और बहुत दयालु भी। नियम यह है। यह अस्तित्व तुम्हें वह नहीं देता जो तुम चाहते हो। यह अस्तित्व तुम्हें वह देता है जो तुम हो। फर्क समझ रहे हो? अगर
Speaker A
तुम भिखारी की तरह हाथ फैला कर मांग रहे हो कि हे परमात्मा, मुझे अमीर बना दे, तो तुम अस्तित्व को क्या संदेश भेज रहे हो? तुम यह संदेश भेज रहे हो कि मैं गरीब हूं। तुम्हारी हर मांग, तुम्हारी हर प्रार्थना
Speaker A
यह चिल्ला चिल्ला कर कह रही है कि [संगीत] मेरे पास नहीं है। और क्योंकि ब्रह्मांड एक दर्पण है, एक आईना है, तो वह वही प्रतिबिंबित करता है जो तुम हो। वह कहता है, तथास्तु, तुम गरीब हो तो तुम गरीब ही रहोगे। इसलिए
Speaker A
जो लोग बहुत शिद्दत से मांगते हैं, उन्हें कभी नहीं मिलता क्योंकि मांगना ही इस बात का सबूत है कि तुम्हारे पास नहीं है। और अभाव की भावना केवल और अधिक अभाव पैदा करती है। तुम्हें छलांग लगानी होगी, मांगने
Speaker A
से होने की तरफ, चाहने से जीने की तरफ। तुम्हें इस भ्रम को तोड़ना होगा कि तुम एक शरीर हो जो दुनिया में भटक [संगीत] रहा है। नहीं, तुम एक चेतना हो जिसके भीतर पूरी दुनिया है। पुराने ऋषियों ने इसे माया
Speaker A
कहा। माया का मतलब यह नहीं कि दुनिया झूठी है। माया का मतलब है कि दुनिया वैसी नहीं है जैसी तुम्हें दिख रही है। यह मिट्टी की नहीं बनी है। यह विचारों की बनी है। ये ऊर्जा की बनी है। आज का विज्ञान कहता है
Speaker A
कि अगर तुम किसी परमाणु को, किसी एटम को तोड़ते जाओ, तोड़ते जाओ तो अंत में तुम्हें क्या मिलेगा? [संगीत] कुछ नहीं। सिर्फ ऊर्जा, सिर्फ तरंगे, सिर्फ खाली आकाश। तो यह जो तुम्हारा शरीर है, यह जो दीवारें हैं, यह जो पैसा है, यह
Speaker A
सब ठोस नहीं है। यह सब कंपन कर रहा है। यह सब थरथरा रहा है। और यह कंपन, यह थरथराहट, यह फ्रीक्वेंसी यह तुम्हारे इशारे पर नाचती है। लेकिन तुम्हारा इशारा क्या है? तुम्हारा इशारा है तुम्हारी भावना, तुम्हारी फीलिंग। तुम
Speaker A
दिन भर क्या महसूस करते हो? अगर तुम दिन भर चिंता में हो, डर में हो तो तुम ब्रह्मांड को बता रहे हो कि मुझे और डराओ, मुझे और चिंता दो। तुम अनजाने में उसी स्टेशन को पकड़े बैठे हो। तुम बटन दबाए जा
Speaker A
रहे हो दुख का और इंतजार कर रहे हो कि गाना सुख का बजेगा। ऐसा कभी हुआ है? ऐसा कभी हो सकता है? रेडियो पर कांटा दुख का लगा है और तुम उम्मीद कर रहे हो कि [संगीत] आनंद का संगीत सुनाई देगा। तुम
Speaker A
पागल हो। तुम व्यर्थ ही दीवार से सिर टकरा रहे हो। [संगीत] तुम्हें बदलना होगा। बाहर नहीं, भीतर। समानांतर दुनिया या जिसे तुम पैरेलल रियलिटी कहते हो, वह कोई दूसरी जगह नहीं है। वह तुम्हारी चेतना की ही एक अवस्था है। अभी इसी वक्त एक ऐसी दुनिया चल
Speaker A
रही है जहां तुम सफल हो चुके हो। उस दुनिया का तुम अभी सांस ले रहा है। वह उसी हवा में सांस ले रहा है जिसमें तुम ले रहे हो। सोचो, उस सफल तुम की आंखों से दुनिया कैसी दिखती होगी? उस स्वस्थ तुम के शरीर
Speaker A
में कैसा महसूस होता होगा? क्या वह सुबह [संगीत] उठकर चिंता करता होगा कि आज का खर्चा कैसे चलेगा? नहीं, वह निश्चिंत होगा। उसके चलने में एक मस्ती होगी। उसकी आंखों में एक चमक होगी। उसकी सांसों में एक ठहराव होगा। तो राज्य की बात यह है कि अगर
Speaker A
तुम्हें उस दुनिया में जाना है तो तुम्हें अभी इसी वक्त उस तुम की तरह महसूस करना शुरू करना होगा। इसे नाटक मत समझना। इसे अभिनय मत समझना। यह अस्तित्व के साथ एक गहरा संवाद है। जब तुम अपनी आंखें बंद
Speaker A
करके उस वास्तविकता को महसूस करते हो, सिर्फ सोचते नहीं, महसूस करते हो तो तुम्हारे भीतर की रसायन बदलने लगते हैं। तुम्हारे शरीर का एक-एक अणु, एक-एक सेल उस नई फ्रीक्वेंसी पर कंपन करने लगता है। और जैसे ही तुम्हारी फ्रीक्वेंसी बदलती है,
Speaker A
बाहर की दुनिया को बदलना ही पड़ता है। उसके पास कोई और चारा नहीं है। यह नियम है। जैसे पानी को अगर 100 डिग्री तक गर्म करोगे तो उसे भाप बनना ही पड़ेगा। वो यह नहीं कह सकता कि नहीं, मेरा मन नहीं है।
Speaker A
उसे बदलना ही होगा। वैसे ही अगर तुम अपनी ऊर्जा को, अपनी चेतना को उस ऊंचाई पर ले जाओ जहां तुम्हारी इच्छा पहले ही पूरी हो चुकी है, तो इस भौतिक जगत को, इस ठोस दिखने वाली दुनिया को पिघलना पड़ेगा और उसे नए
Speaker A
सांचे में ढलना पड़ेगा। लेकिन समस्या यहां आती है और यह समस्या बहुत गहरी है। इसे ध्यान से समझना। समस्या यह है कि तुम 5 मिनट के लिए तो आंख बंद करके अमीर बन जाते हो। खुश हो जाते हो। लेकिन जैसे ही आंख
Speaker A
खोलते हो, तुम वापस अपनी पुरानी दुनिया को देखते हो और कहते हो, अरे कुछ बदला तो नहीं। सब वैसा ही है। बस यही तुम चूक जाते हो। तुमने बीज बोया और 5 मिनट बाद ही मिट्टी [संगीत] खोदकर देखने लगे कि पौधा
Speaker A
निकला या नहीं। तुम उस बीज को मार डालोगे। तुम्ह
Speaker A
धोखा है। जो भीतर महसूस होता है वही सत्य है। इस बात को अपनी रूह में उतार लो। जो बाहर दिखता है वह अतीत है। जो भीतर महसूस होता है वह भविष्य है। जब तुम शीशे में अपना चेहरा देखते हो तो तुम्हें क्या
Speaker A
दिखता [संगीत] है? तुम्हें वह दिखता है जो तुम अब तक थे। वह तुम्हारे पुराने कर्मों, पुराने विचारों और पुरानी भावनाओं का परिणाम है। वह एक राख है। और तुम उस राख को देखकर रोते हो और रोकर तुम और नई राख
Speaker A
पैदा करते हो। यह एक चक्र है। एक दुचक्र, एक कुत्ता है जो अपनी ही पूंछ का पीछा कर रहा है। वह जितना तेज दौड़ता है, पूंछ उतनी ही तेज भागती है। वह कभी उसे पकड़ नहीं पाएगा। तुम्हें रुकना होगा। तुम्हें
Speaker A
अपनी वर्तमान वास्तविकता को पूरी तरह से नकारना होगा। नकारने का मतलब यह नहीं कि तुम भाग जाओ। नकारने का मतलब है कि तुम उस पर भरोसा करना [संगीत] छोड़ दो। तुम यह मानना शुरू करो कि यह जो गरीबी दिख रही है
Speaker A
यह सिर्फ एक पुराना सपना है जो अब [संगीत] टूटने वाला है। जैसे सांप अपनी पुरानी कचुली छोड़ता है। जब वो कचुली छोड़ रहा होता है तो वह उसे पलट कर नहीं देखता। वो उसे अपने साथ लेकर नहीं चलता। वो बस उससे बाहर निकल जाता है।
Speaker A
तुम्हें भी अपनी पुरानी पहचान से बाहर निकलना है। तुम पूछोगे कैसे? यही तो कला है। पूछ उतनी ही तेज भागती है। वह कभी उसे पकड़ नहीं [संगीत] पाएगा। तुम्हें रुकना होगा। तुम्हें अपनी वर्तमान वास्तविकता को पूरी तरह से नकारना होगा। नकारने का मतलब
Speaker A
यह नहीं कि तुम भाग जाओ। नकारने का मतलब है कि तुम उस पर भरोसा करना छोड़ [संगीत] दो। तुम यह मानना शुरू करो कि यह जो गरीबी दिख रही है, यह सिर्फ एक पुराना सपना है जो अब टूटने वाला है। जैसे सांप अपनी
Speaker A
पुरानी कचुली छोड़ता है। जब वह कचुली छोड़ रहा होता है तो वह उसे पलट कर नहीं देखता। वो उसे अपने साथ लेकर नहीं चलता। वो बस उससे बाहर निकल जाता है। तुम्हें भी अपनी पुरानी पहचान से बाहर निकलना है। तुम
Speaker A
पूछोगे कैसे? यही तो कला है। यही तो साधना है। तुम्हें अपनी कल्पना शक्ति का उपयोग करना होगा। बचपन में तुम्हारे पास यह शक्ति थी। तुम एक टूटी हुई गुड़िया में भी जान डाल देते थे। तुम खाली कमरे में भी
Speaker A
राजा बन [संगीत] जाते थे। तब तुम खुश थे। तब तुम जादूगर थे। फिर समाज ने [संगीत] स्कूल ने दुनिया ने तुम्हें सयाना बना दिया। उन्होंने कहा सपनों की दुनिया से बाहर निकलो। हकीकत का सामना करो। और हकीकत का सामना करते-करते तुम हकीकत के गुलाम बन
Speaker A
गए। मैं तुमसे कहता हूं [संगीत] वापस बच्चे बन जाओ। वापस उस कल्पना की शक्ति को जगाओ। क्योंकि क्वांटम फील्ड ये जो अनंत संभावनाओं का सागर है यह तर्क की भाषा नहीं समझता। यह बुद्धि की भाषा नहीं समझता। यह चित्रों की भाषा समझता है। यह
Speaker A
चित्रों की ओर भावनाओं की भाषा समझता है। जब तुम अपने भीतर एक चित्र बनाते हो और उस चित्र में रंग भरते हो और उस चित्र को अपनी भावनाओं से सींचते हो तो तुम ब्रह्मांड को एक ब्लूप्रिंट दे रहे होते
Speaker A
हो। तुम आर्किटेक्ट बन जाते हो। [संगीत] लेकिन याद रखना यह काम आधे अधूरे मन से नहीं होगा। तुम ऐसा नहीं कर सकते कि एक पैर पुरानी नाव में रखो और एक पैर नई नाव में डूब जाओगे। तुम्हें पूरी तरह से
Speaker A
सर्वांग रूप से नई वास्तविकता में कूदना होगा। इसी को जंप कहते हैं। जंप का मतलब है अतीत से पूरा नाता तोड़ लेना। तुम्हारे मन में आएगा। लेकिन मेरे परिवार का क्या?
Speaker A
मेरी नौकरी का क्या? मेरे कर्ज का क्या? सब बदल जाएगा। जब तुम बदलोगे तो तुम्हारे आसपास का पूरा ताना-बाना बदल जाएगा। [संगीत] तुम केंद्र हो बाकी सब परिधि है। जब केंद्र खिसकता है तो परिधि को खिसकना ही पड़ता है। लोग उल्टा करते हैं। वे परिधि
Speaker A
को बदलने की कोशिश करते हैं। वे पत्नी को बदलने की कोशिश करते हैं। पति को बदलने की कोशिश करते हैं। नौकरी बदलने की कोशिश करते हैं। शहर बदलने की कोशिश करते हैं। लेकिन वे खुद को नहीं बदलते। वे अपने उसी
Speaker A
पुराने सड़े गले नए को लेकर नई जगह चले जाते हैं। और फिर वही पुरानी कहानी दोहराई जाती है। वही दुख वही लड़ाई वही बेचैनी। क्योंकि तुम वही हो। तुम जहां भी जाओगे अपनी बदबू [संगीत] साथ ले जाओगे। यह अपनी
Speaker A
खुशबू साथ ले जाओगे। क्वांटम जंपिंग कोई बाहरी यात्रा नहीं है। [संगीत] यह कहीं जाने का नाम नहीं है। यह यही इसी जगह एक नया इंसान बन जाने का नाम है। और यह संभव है। यह उतना ही संभव है जितना तुम्हारा
Speaker A
सांस लेना। [संगीत] बस एक बार। सिर्फ एक बार के लिए तुम्हें अपनी तर्क बुद्धि को अपनी उस चालाक बुद्धि को किनारे रखना होगा जो हर बात पर सवाल उठाती है। [संगीत] जो कहती है यह कैसे हो सकता है? यह तो पागलपन
Speaker A
है। हां, यह पागलपन [संगीत] है। प्रेम भी पागलपन है, ध्यान भी पागलपन है और परमात्मा को [संगीत] पाना भी पागलपन है। समझदार लोग तो सिर्फ दुकान चलाते हैं। वे जीवन नहीं जीते। तुम्हें थोड़ा पागल होना पड़ेगा। तुम्हें उस अनजानी दुनिया पर
Speaker A
भरोसा करना पड़ेगा जो अभी दिखाई नहीं दे रही। एक बीज को देखो। जब वह मिट्टी में दबता है तो उसे क्या पता कि उसके भीतर एक विशाल पेड़ छिपा है। उसे क्या पता कि एक दिन उसमें हजारों फूल खिलेंगे। अगर वह बीज
Speaker A
तर्क करने लगे। अगर वह सोचने लगे कि मैं तो इतना छोटा हूं। इतना कठोर हूं। मुझ में से कोमल फूल कैसे निकल सकते हैं? तो वो कभी फूटेगा नहीं। वो कभी उगेगा नहीं। वो सड़ जाएगा। [संगीत] उसे भरोसा करना पड़ता
Speaker A
है। उसे टूटना पड़ता है। तुम्हें भी टूटना पड़ेगा। तुम्हारी जो यह अहंकार की खोल है, तुम्हारी जो यह मैं ऐसा हूं, मैं वैसा हूं कि जो जििद है, इसे तोड़ना पड़ेगा। जब तुम टूटते हो, तभी तुम जुड़ते हो उस विराट
Speaker A
[संगीत] से, उस अनंत ऊर्जा के स्रोत से जहां सब कुछ संभव है। तो क्या तुम तैयार हो टूटने के लिए? क्या तुम तैयार हो अपनी उस पुरानी बासी और दुख से भरी हुई पहचान को छोड़ने के लिए? क्योंकि अब हम उस रहस्य
Speaker A
की ओर करीब जा रहे हैं। अब तक मैंने तुम्हें बताया कि क्यों तुम फंसे हो? और यह भी बताया कि [संगीत] निकलना संभव है। लेकिन अब सवाल है कि यह होगा कैसे? वह विधि क्या है? वह तरीका क्या है? जिससे हम
Speaker A
जानबूझकर होश पूर्वक उस समानांतर दुनिया में छलांग लगा सके। यह कोई ख्याली पुलाव नहीं है। यह एक सटीक विज्ञान है। जैसे बिजली का स्विच दबाने से रोशनी होती है, वैसे ही अगर तुम सही विधि का प्रयोग करोगे, सही [संगीत] भाव दशा में जाओगे तो
Speaker A
परिणाम आएगा। अनिवार्य रूप से आएगा। लेकिन उससे पहले तुम्हें एक और छोटी सी मगर बहुत गहरी बात समझनी होगी। समय का धोखा तुम सोचते हो समय नदी की तरह बह रहा है। ओशो की दृष्टि से देखो या क्वांटम भौतिकी की
Speaker A
दृष्टि से देखो। समय बह नहीं रहा है। समय एक [संगीत] विशाल महासागर की तरह ठहरा हुआ है। उसमें सब कुछ मौजूद है। जैसे एक फिल्म की रील होती है। फिल्म की रील में शुरुआत भी है, मध्य भी है और अंत भी है। सब एक
Speaker A
साथ लपेटा हुआ है। जब वो प्रोजेक्टर के सामने से गुजरती है तो तुम्हें लगता है कि कहानी आगे बढ़ रही है। लेकिन पूरी कहानी टेबल पर रखी रील में पहले से मौजूद है। तुम्हारा जीवन भी उस फिल्म की रील जैसा
Speaker A
है। तुम्हारे अमीर होने का दृश्य तुम्हारे सफल होने का दृश्य वह रील में आगे कहीं है नहीं। वह रील में मौजूद है। तुम्हें बस प्रोजेक्टर की रोशनी को यानी अपनी चेतना को उस हिस्से पर डालना है। हम अक्सर अपनी
Speaker A
चेतना को दुख वाले सीन पर अटका देते हैं। हम बार-बार वही सीन रिवाइंड करके देखते हैं। उसने [संगीत] मुझे गाली दी। मेरा नुकसान हो गया। मैं बीमार हूं। तुम बार-बार उसी सीन को अपनी चेतना की रोशनी देते हो। और इसीलिए वही सीन बार-बार पर्दे
Speaker A
पर चलता रहता है। तुम्हें रिमोट कंट्रोल अपने हाथ में लेना होगा। तुम्हें यह हक है। यह तुम्हारा जन्म सिद्ध अधिकार [संगीत] है कि तुम किस सीन को देखना चाहते हो। लेकिन हम इतने बेहोश हैं कि हमें पता ही नहीं कि रिमोट हमारे हाथ में है। हम
Speaker A
चिल्ला रहे हैं, रो रहे हैं कि यह क्या चल रहा है पर्दे पर? मुझे यह पसंद नहीं है। अरे तो बदलो ना चैनल बदलो। पर तुम चैनल नहीं बदलते। तुम पर्दे से लड़ने लगते हो। तुम जाकर पर्दे को फाड़ने की कोशिश करते
Speaker A
हो। तुम लोगों को परिस्थितियों को बदलने में अपनी पूरी जिंदगी खपा देते हो और अंत में थक कर हार कर गिर जाते हो। मौत आ जाती है लेकिन जीवन नहीं बदलता। आज मैं तुम्हें वह रिमोट थमाने आया हूं। आज मैं तुम्हें
Speaker A
याद दिलाने आया हूं कि तुम दर्शक नहीं हो। तुम प्रोजेक्शनिस्ट हो। तुम ही वह रोशनी हो जो इन चित्रों को जीवित कर रही है। अपनी शक्ति को पहचानो। तुम्हारे भीतर वह आग दबी हुई है जो अगर भड़क जाए तो पुराने
Speaker A
सारे जंगल को जलाकर खाख कर सकती है और नई जमीन तैयार कर सकती है। लेकिन इसके लिए [संगीत] साहस चाहिए बहुत साहस चाहिए। क्योंकि पुरानी जंजीरें चाहे वे लोहे की हो या सोने की बहुत प्यारी लगती हैं। हम
Speaker A
अपने दुखों के साथ भी बहुत आरामदायक हो जाते हैं। हमें आदत पड़ जाती है। अगर कल सुबह तुम उठो और तुम्हारी सारी समस्याएं गायब हो जाए तो तुम घबरा जाओगे। तुम सोचोगे अब मैं क्या करूं? अब मैं रोऊंगा
Speaker A
किस बात पर? अब मैं लोगों को क्या शिकायत करूंगा? तुम्हारा व्यक्तित्व ही तुम्हारी समस्याओं [संगीत] पर टिका है। इसलिए क्वांटम जंपिंग करने से पहले खुद से एक सवाल पूछना क्या मैं सच में बदलने को तैयार हूं? ऊपर [संगीत]
Speaker A
ऊपर से मत कहना। हां गहराई में झांकना। क्या तुम उस पुराने रोते हुए शिकायत करते हुए मैं की हत्या करने को तैयार हो?
Speaker A
क्योंकि नई दुनिया में प्रवेश करने की कीमत है पुराने की मौत। [संगीत] तुम दोनों को साथ नहीं रख सकते। तुम्हें चुनना होगा। या तो तुम अपने अतीत को अपनी छाती से लगाकर बैठे रहो और उसी सड़ांत में मर जाओ।
Speaker A
या फिर तुम एक गहरी सांस लो। अपनी मुट्ठी खोलो। उस अतीत को राख की तरह हवा में उड़ा दो। और एक नए अनजान लेकिन अद्भुत भविष्य में कदम रखो। चुनाव तुम्हारा है। हमेशा तुम्हारा ही था। लेकिन याद रखना यह चुनाव
Speaker A
सिर्फ एक विचार नहीं हो सकता। इसे तुम्हारे रोए रोए की पुकार बनना होगा। तो बात समझो। बात को इसकी जड़ तक पकड़ो। हमने अब तक यह जाना कि तुम एक कैद में हो और वह कैद किसी और ने नहीं। तुमने खुद बनाई है
Speaker A
और हमने यह भी जाना कि उस कैद से बाहर निकलना संभव है। लेकिन अब प्रश्न उठता है विधि क्या है? वह कीमिया क्या है? वह रसायन क्या है? जिससे लोहा सोना बन जाए। जिससे एक साधारण आदमी जो दुखों से घिरा है
Speaker A
वह अचानक उस दुनिया में प्रवेश कर जाए जहां वह सम्राट है। लोग मेरे पास आते हैं। [संगीत] वे पूछते हैं हम रोज प्रार्थना करते हैं। हम रोज मंदिर जाते हैं। हम रोज मांगते हैं। फिर भी हमारी झोली खाली [संगीत]
Speaker A
क्यों है? मैं उनसे कहता हूं तुम्हारी झोली इसलिए खाली है क्योंकि तुम मांग रहे हो। इस सूत्र को अपनी गांठ में बांध लो। बहुत गहरा सूत्र है। मांगना दरिद्रता का लक्षण है और अस्तित्व का एक नियम है। बहुत
Speaker A
ही कठोर नियम है जो जैसा है उसे वैसा ही और दिया जाता है। अगर तुम भीतर से दरिद्र हो। अगर तुम भीतर से खाली हो और तुम चिल्ला रहे हो मुझे दो मुझे दो तो यह पूरा ब्रह्मांड यह पूरा आकाश तुम्हारी उस आवाज
Speaker A
को सुनता है और कहता है [संगीत] तथास्तु तुम खाली हो तो तुम खाली ही रहोगे क्योंकि तुम अपनी कमी की घोषणा कर रहे हो। क्वांटम जगत में [संगीत] या जिसे मैं अध्यात्म का विज्ञान कहता हूं वहां शब्दों की कोई कीमत
Speaker A
नहीं है। तुम मुंह से क्या बोल रहे हो इससे अस्तित्व को कोई फर्क नहीं पड़ता। तुम दिन भर रटते रहो। मैं अमीर हूं। मैं अमीर हूं। और भीतर तुम्हारे घबराहट हो कि कल का किराया कैसे दूंगा। तो अस्तित्व
Speaker A
तुम्हारी रटंत को नहीं सुनेगा। वह तुम्हारी घबराहट को सुनेगा। क्योंकि घबराहट तुम्हारी सच्चाई है। शब्द तुम्हारा झूठ है। तो पहली विधि पहला कदम जो तुम्हें उठाना है वह है मांगना बंद करो। अब तुम कहोगे अगर मांगेंगे नहीं तो मिलेगा कैसे?
Speaker A
यही तो गणित उल्टा है। यहां बिन मांगे मोती मिलते हैं और मांगे मिले ना भीख। तुम्हें उस वास्तविकता को आकर्षित नहीं करना है। तुम्हें उस वास्तविकता को जीना है। तुम्हें ऐसा हो जाना है जैसे वह घट चुका है। इसे थोड़ा गहराई से समझो। मान लो
Speaker A
तुम्हें एक बहुत बड़ी गाड़ी चाहिए या तुम्हें एक बहुत सुंदर प्रेम करने वाला साथी चाहिए। अब एक तरीका तो यह है कि तुम बैठकर रोते रहो कि मेरे पास यह नहीं है। कब मिलेगा? कब मिलेगा। यह तरीका तुम्हें
Speaker A
और दूर ले जाएगा। दूसरा तरीका है विधि, प्रयोग। आंखें बंद करो और सिर्फ कल्पना मत करो। महसूस करो। अगर वह गाड़ी तुम्हें मिल गई तो तुम्हारे हाथ उसके स्टीयरिंग व्हील पर कैसा महसूस करेंगे? उसकी गंध कैसी होगी? जब तुम उसे चलाओगे तो तुम्हारे
Speaker A
चेहरे पर कैसी हवा लगेगी? तुम्हारे भीतर कैसी तृप्ति होगी? क्या वहां कोई बेचैनी होगी? नहीं। वहां एक ठहराव होगा। वहां एक कृतज्ञता होगी। वहां एक धन्यवाद का भाव होगा। तो तुम्हें उस धन्यवाद के भाव को अभी इसी वक्त अपने भीतर जगाना है। जब
Speaker A
वस्तु मौजूद नहीं है तब भी अगर तुम उसके होने का एहसास पैदा कर सको तो तुम जादू कर रहे हो। तुम समय को धोखा दे रहे हो। समय सोचता है कि यह घटना तो भविष्य में होने वाली थी लेकिन यह आदमी अभी क्यों खुश हो
Speaker A
रहा है? और जब तुम अपनी खुशी को अपनी कृतज्ञता को बिना किसी कारण के बिना किसी बाहरी सबूत के अपने भीतर जलाए रखते हो। तो समय को झुकना पड़ता है। घटना को तुम्हारी तरफ खींच कर आना ही पड़ता है। यह चुंबक का
Speaker A
सिद्धांत [संगीत] है। अब मैं तुम्हें एक बहुत ही शक्तिशाली प्रयोग बताता [संगीत] हूं। इसे ध्यान से सुनना और इसे करना। सिर्फ सुनने से कुछ नहीं होगा। भोजन की बातें करने से पेट नहीं भरता। भोजन खाना पड़ता है। रात को जब तुम सोने जाते हो। वह
Speaker A
समय बहुत कीमती है। तुम उसे ऐसे ही गंगवा देते हो। तुम मोबाइल देखते हुए दुनिया भर का कचरा दिमाग में भरते हुए सो जाते हो। और फिर तुम पूछते हो कि जीवन में सुख क्यों नहीं है? जब तुम सोने वाले होते हो।
Speaker A
जब नींद आ रही होती है और जागना छूट रहा होता है। वह जो बीच का समय है, वह संधि काल है। उसे [संगीत] तंद्रा कहते हैं। उस समय तुम्हारा चेतन मन तुम्हारा वह तर्क करने वाला दिमाग सो रहा होता है और
Speaker A
तुम्हारा अवचेतन मन, वह खजाना, वह जिन जाग रहा होता है। उस वक्त जो भी बीज तुम अपने भीतर डाल दोगे, वह पूरी रात तुम्हारे भीतर बड़ा होगा। तो आज रात से यह प्रयोग करो। बिस्तर पर लेट जाओ। शरीर को ढीला छोड़ दो।
Speaker A
इतना ढीला कि जैसे वो है ही नहीं। जैसे कोई सूखा पत्ता जमीन पर पड़ा हो। और जब नींद आने लगे तो अपने मन में उस दृश्य को लाओ जो तुम बनना चाहते हो। अगर तुम स्वस्थ होना चाहते हो तो देखो कि तुम दौड़ रहे
Speaker A
हो, तुम हंस रहे हो। तुम्हारा शरीर ऊर्जा से भरा है। और सबसे बड़ी बात महसूस करो। [संगीत] उस आनंद को महसूस करो। उस राहत को महसूस करो कि आ मैं ठीक हो गया। और उसी भाव में उसी एहसास में लिपटे हुए नींद में
Speaker A
उतर जाओ। तुम्हें पता भी नहीं चलेगा कि तुम कब सो गए। लेकिन वह विचार वह भावना पूरी रात तुम्हारे अवचेतन में काम करेगी। वह तुम्हारी फ्रीक्वेंसी बदल देगी। सुबह जब तुम उठोगे तो तुम वही पुराने आदमी नहीं होगे। कुछ बदल गया होगा। तुम्हारे चलने का
Speaker A
ढंग बदल जाएगा। तुम्हारी आंखों की चमक बदल
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