मुफ्ती तारिक जमील कन्नौजवी की नातिया शायरी और इस्लामी कलामों का संगम, जिसमें मुहब्बत और इबादत की बातें हैं।
Key Takeaways
- नातिया शायरी इस्लामी संस्कृति और मुहब्बत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- मुहब्बत और इबादत के माध्यम से दिलों को जोड़ने का प्रयास किया गया है।
- शायरी में पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सूरत और सीरत की महत्ता को दर्शाया गया।
- दरबार और इश्क को जीवन में सर्वोच्च स्थान देने की प्रेरणा।
- मुफ्ती तारिक जमील कन्नौजवी की आवाज़ में नातों का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण।
What the video covers
- मुफ्ती तारिक जमील कन्नौजवी की नातिया शायरी का प्रस्तुतीकरण।
- शहे अबरार और मुस्तफा के इश्क में बीमार होने की बात।
- इस्लामी विद्वानों, मुफ्तियानों और काजी की मौजूदगी में कलामों का पाठ।
- नातिया शायरी के माध्यम से मुहब्बत और इबादत का संदेश।
- शायरी में जंग ओहद की महिला की कहानी और उसकी मजबूती का वर्णन।
- मोहब्बत, जन्नत की चाह और मां के कदमों में घर बार होने की बात।
- मीडिया सहयोगियों और टीम का योगदान और उनकी प्रशंसा।
- दरबार और इश्क के महत्व पर जोर।
- नातों के माध्यम से पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सूरत और सीरत का वर्णन।
- अंत में शहर मदीना जाने की इच्छा और दिल की बातों का इजहार।
Chapters
- 00:00परिचय और मुफ्ती तारिक जमील का स्वागत
- 00:23शहे अबरार और मुस्तफा के इश्क की महत्ता
- 01:43नातिया शायरी का प्रारंभ और शायरी के शेर
- 03:08मुफ्ती तारिक जमील की नातिया प्रस्तुति
- 05:08मीडिया टीम का परिचय और प्रार्थना
- 05:43मतला और नात के शेर
- 10:13नबी की सूरत और सीरत का वर्णन
- 14:14प्यार और सीरत मुस्तफा पर चर्चा
- 18:24नया कलाम और दरबार की महत्ता
- 20:36मनकबत और जंग ओहद की महिला की कहानी
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Speaker A
मैं मुफ्ती तारिक जमील साहब कन्नौजवी को आपके हवाले करना चाहता हूं। तैयार हैं आप?
Speaker A
हाथ उठा के बताइए। इंशा अल्लाह चंद सदर साहब। हां, बस एक मिनट। सदर साहब आपकी भी दुआएं चाहता हुआ नाते पाक के एक शेर पेश कर रहा हूं और शायर को इंशा अल्लाह आप लोगों की समातों की दहलीज तक पहुंचाऊंगा। शेर देखें।
Speaker A
मेरे दोस्तों के हर जगह जिक्र [हंसी] शहे अबरार होना चाहिए। थोड़ा सा हां में हां मिलाए तो अच्छा लगेगा। बड़े असाताजा बैठे हैं। ओलमा बैठे हैं, औदबा बैठे हैं। मुफ्तियाने हजरात बैठे हैं, काजी बैठे हैं। खुदा की कसम मैं
Speaker A
एक बात बता दूं। दुनिया के किसी दारुल इफ्ता ने आज तक [हंसी] सुभान अल्लाह अल्हम्दुलिल्लाह पे पाबंदी नहीं लगाई है। जी तो आप मुंह क्या देख रहे हैं? बोलिए सुभान अल्लाह। जी देखिए मेरे दोस्तों हर जगह जिक्र शहे अबरार होना चाहिए। अरे
Speaker A
मुस्तफा के इश्क में बीमार होना चाहिए। और ये मौका मिले तो सिर्फ मेरठ और हिंदुस्तान, उत्तर प्रदेश बंगाल और बिहार नहीं बल्कि अमेरिका के व्हाइट हाउस के सामने भी जाकर यही कहूंगा। क्या हर जगह जिक्र शहे अबरार होना चाहिए? हर जगह जिक्र शहे
Speaker A
अबरार होना चाहिए। अरे मुस्तफा के इश्क में बीमार होना चाहिए। और चाहिए जन्नत तो सुन लो बात मेरी नौजवान। अरे मां के कदमों में तेरा घर बार होना चाहिए। चाहिए जन्नत तो सुन लो बात मेरी नौजवान। अरे मां के कदमों में तेरा घर बार
Speaker A
होना चाहिए। और मिजाज एक कारी तैयब जमाल साहब अच्छे दोस्त माशा अल्लाह तशरीफ रखते हैं। उनके मिजाज की शायरी अशफाक बहराइची के मिजाज की शायरी इस तरह से मैं पेश करना चाहता हूं। हर जगह जिक्रे शहे अबरार होना चाहिए। अरे मुस्तफा के इश्क में बीमार
Speaker A
होना चाहिए। चाहिए जन्नत तो सुन लो बात मेरी नौजवान। अरे मां के कदमों में तेरा घर बार होना चाहिए। फतहो नुसरत चूम लेगी दौड़ के मेरे कदम आए हाए। फतहो नुसरत चूम लेगी दौड़ के मेरे कदम। हजरत फारूक सा किरदार होना चाहिए। फतहो नुसरत
Speaker A
चूम लेगी दौड़ के मेरे कदम। हजरत फारूक सा किरदार होना चाहिए। माइक पर मैं बड़े अदब के साथ अली जनाब मुफ्ती तारिक जमील कन्नौजवी से गुजारिश कर रहा हूं कि वो तशरीफ लाएं और अपनी नातिया शायरी से हम सामईन को
Speaker A
नवाजे। इस शेर के साथ हर लफ्ज़ उज़ू कर लेता है। हर शेर तिलावत करता है। पढ़ता है कोई जब नाते नबी समझो के इबादत करता है। अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातहू वाजबतराम। हजरत काबिल उलमा इकराम शराम कुर्रम माशा अल्लाह बहुत खूबसूरत हमारा ये
Speaker A
प्रोग्राम चल रहा है। मुबारकबादी पेश करता हूं। हजरत मौलाना मुफ्ती खालिद साहब दामत बरकात आलिया, कारी अब्दुल समद साहब और उनकी पूरी टीम को जिन्होंने ये खूबसूरत बज सजाई है। अल्लाह रब्बुल इज्जत आपकी इस काविश को अपनी बारगाह में कबूल फरमाए। हजरत सदरे
Speaker A
मोहतरम यादगार असलाफ हजरत मौलाना खालिद साहब दामत बरकातिया जलवाज़ हैं। हजरत की दुआएं लेते हुए नाते पाक का मतला हाजिर करूंगा। एक मर्तबा सभी हजरात पूरी मोहब्बत के साथ दद शरीफ पढ़े। अल्लाह सल्ली अला मोहम्मद नबी वसल्लम। थोड़ी सी आवाज उठा दो।
Speaker A
जी बिस्मिल्लाह। हेलो आवाज बढ़ाओ। मतला हाजिर करता हूं। समत फरमाए। सुने सुने के जुल्म की जब्र की बदलियां छट गई। जुल्म की जब्र की बदलियां छट गई। कुफर बाततिल पे एकदम ज़वा गया। कुफर बाततिल पे एकदम ज़वा गया। आवा
Speaker A
गया आवा गया। जुल्म की जब्र की बदलियां झट गई। कुफरोल पे यदम जवाला गया। ताज रहमत का सर पे सजाए हुए। ताज रहमत का सर पे सजाए हुए। जिस घड़ी [संगीत] आमीना का लाल आ गया।
Speaker A
सुभान अल्लाह। सुभान अल्लाह भी का लाल आ गया। आ लाल आ गया। आ लाल आ गया। अब यहां से एक शेर पढ़ता हूं। देखिएगा कि चांद को नाज था। चांद को नाज था। चांद को नाज था। मैं हूं सबसे हसीन। चांद को
Speaker A
नाज था मैं हूं सबसे हसीन। कोई भी हुस्न में मेरा सानी नहीं। चांद को नाजता मैं हूं सबसे हसीन। कोई भी हुस्न मेरा सा नहीं। मेरा सानी नहीं। चांद को नाजता। चांद को नाजता मैं हूं सबसे हसीन। कोई भी हुस्न
Speaker A
मेरा सानी नहीं। उस घड़ी शर्म से मुंह छुपाने लगा। उस घड़ी शर्म से वो छुपाने लगा। सामने जब नबी का जमा आ गया। सामने जब नबी का जमा आ गया। आ जमाल आ गया। आ जमाल आ गया। ताज रहमत का सर पे सजाए
Speaker A
हुए। जिस घड़ी आमीना का लाल आ गया। आ गया। सुभान अल्लाह। शेर पढ़ता हूं इस कलाम का। देखिएगा ये आता हो के जर्रे उनसे जुड़े आ [हंसी] तो सितारे बने। अल्लाह अल्लाह। निस्बत मुस्तफा की अता। देखिए जर्रे उनसे जुड़े तो सितारे
Speaker A
बने। निस्बत मुस्तफा की अता। देखिए जर्रेसे जुड़े तो सितारे बने। निस्बत मुस्तफा की अता। देखिए हुस्न वाले खड़े देखते रह गए। हुस्न वाले खड़े देखते रह गए। हश्र में जब नबी का बिलाल आ गया। हश्र में जब नबी का बिलाल आ गया।
Speaker A
हमारे इस प्रोग्राम की खूबसूरत सदारत फरमा रहे हजरत अकदस हजरत मौलाना खाली साहब दामत बरकात आलिया। हजरत के हवाले से आपकी अदालत में एक शेर और इस कलाम का रखता हूं। देखिएगा सुभान अल्लाह के प्यार क्या चीज है।
Speaker A
आ प्यार होता है क्या जान लोगे। पढ़ो सीरत मुस्तफा। प्यार क्या चीज है। प्यार होता है क्या जान लोगे। पढ़ो सीरत मुस्तफा। सीरत मुस्तफा प्यार क्या चीज है। प्यार होता है क्या। अरे जान लोगे। पढ़ो सीरते मुस्तफा। रात भर गम में रोते
Speaker A
रहे मुस्तफा। रात भर गम में रोते रहे मुस्तफा। हश्र में उम्मती का ख्याल आ गया। हश्र में का ख्याल आ गया। हां ख्याल आ गया। हां ख्याल आ गया। ताज रहमत कस पे सजाए हुए। जिस घड़ी आमना बे का लाल आ गया।
Speaker A
लाल आ गया। जल्दी जल्दी से एक मतला दो तीन। एक नया कलाम है उसके पेश करके जगह ले लेता हूं। हमारे बहुत सारे मीडिया वाले साथी, आलीशान मीडिया, हक की आवाज मीडिया, एमएस मीडिया और बहुत सारे आबाब हैं। इनके चैनल का भी फायदा
Speaker A
हो जाएगा और आपकी अदालत में जल्दी से दो तीन बंद पढ़ के जगह ले लेता हूं। बतला हाजिर करता हूं। सुनिएगा तवज्जो रखिएगा। सुनिए सुनिए [हंसी] कि बंगला गाड़ी ना तो मोटर कार चाहिए। क्या बात। सुने कि बंगला गाड़ी बंगला गाड़ी
Speaker A
बंगला गाड़ी ना तो मोटर कार चाहिए। मुझको मुझको मुझको मेरे आका का दरबार चाहिए। मुझको मेरे आका का दरबार चाहिए। दरबार चाहिए दरबार चाहिए। बंगला गाड़ी ना तो मोटर कार चाहिए। मुझको मेरे आका का दरबार चाहिए। पहला बंद पेश करता हूं। देखिएगा तवज्जो
Speaker A
रखिएगा कि गुंबद खजरा अल्लाह का वो मंजर क्या बात है। दिल में बसाने की खातिर क्या बात है। दरबार महबूब खुदा में। दरबार महबूब खुदा में आने जाने की खातिर। गुंबद खजरा गुंबद खजरा गुंबद खजरा का वो मंजर। दिल में बसाने की खातिर। गुंबद खजरा
Speaker A
का वो मंजर दिल में बसाने की खातिर। दरबार महबूब खुदा में। दरबार महबूब खुदा में आने जाने की खातिर। दरबार महबूब खुदा में आने जाने की खातिर। माल नहीं। हां माल नहीं। माल नहीं। इश्क शहे अबरार चाहे। मुझको मुझको मेरे आका का दरबार चाहिए।
Speaker A
मुझको मेरे आका का दरबार चाहिए। दरबार चाहिए दरबार चाहिए। मनकबत का एक बंद है। देखिएगा के गार में है सिद्दीक अकबर। गोद में सर सरकार का है। सांप अंगूठे में। उनको ये कह के बराबर डसता है। गार में सिद्दीक अकबर गोद में
Speaker A
सरसल सरकार का है। सांप अंगूठे में उनके ये कह के बराबर डसता है। सांप अंगूठे में उनको ये कह के बराबर डसता है। अरे मुझको भी। हां मुझको भी। मुझको भी मेरे आका का दीदार चाहिए। मुझको भी मेरे आका का दीदार चाहिए।
Speaker A
मुझको मुझको मेरे आका का दरबार चाहिए। मुझको मेरे आका का दरबार चाहिए। दरबार चाहिए दरबार चाहिए। एक और पढ़ता हूं। फिर मतला पढ़ के जगह ले लेता हूं। कम है और बहुत बड़ी फहरिस्त है। तवज्जो रखिएगा। कि जंग ओहद में
Speaker A
आ जंग ओहद में एक औरत का सारा ही संसार लुटा। क्या बात है कि जंग ओहद में एक औरत का सारा ही संसार लुटा। फिर भी उसको गम नहीं कोई। फिर भी उसको गम नहीं कोई। लब पर है बस एक सदा।
Speaker A
जंग ओहद में। जंग ओहद में। जंग ओहद में एक औरत का सारा ही संसार लुटा। जंग ओहद में एक औरत का सारा ही संसार लुटा। फिर भी उसको गम नहीं कोई। लब पर है बस एक सदा। फिर भी उसको
Speaker A
गम नहीं कोई। लब पर है बस एक सदा। आका का मेरे आका का। आका का मेरे आका का। जंग ओहद में एक औरत का सारा ही संसार लुटा। फिर भी उसको गम नहीं कोई। रब पर है बस एक सदा। आका
Speaker A
का दीदार बस एक बार चाहिए। मुझको मेरे आका का दरबार चाहिए। मुझको मेरे आका का दरबार चाहिए। दरबार चाहिए दरबार चाहिए। आखिरी बंद मतला की शक्ल में पढ़ के जगह अता करें कि मुद्दत से अलमान तारिक। मुद्दत से
Speaker A
शहर मदीना जाऊं मैं। फख दुआ आलम शाहहे उमम को दिल का हाल सुना। मैं मुद्दत से अरमान है तारिक। शहर मदीना जाऊं मैं। मुद्दस से अरमान है तारिक। शहर मदीना जाऊं मैं। फख दो आलम शाह उम को दिल का हाल
Speaker A
सुनाऊं मैं। तारिक के दिल को भी तो करा चाहिए। मुझको मेरे आका का दरबार चाहिए।
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