केपीके प्रांत का विस्तृत परिचय, इतिहास, भूगोल, महत्वपूर्ण शख्सियतें और प्रशासनिक जानकारी।
Key Takeaways
- केपीके का भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व समझना आवश्यक है।
- प्रमुख राजनीतिक शख्सियतों की जानकारी परीक्षा में महत्वपूर्ण प्रश्न बन सकती है।
- केपीके के प्रशासनिक आंकड़े जैसे जनसंख्या, जिले और साक्षरता दर याद रखना जरूरी है।
- डूरंड लाइन और पड़ोसी देशों के साथ सीमा संबंधी जानकारी महत्वपूर्ण है।
- केपीके के ऐतिहासिक नाम और राजनीतिक विकास को जानना आवश्यक है।
Summary
- केपीके (खैबर पख्तूनख्वा) का भौगोलिक स्थान, सीमाएं और पड़ोसी क्षेत्र जैसे अफगानिस्तान, पंजाब, बलूचिस्तान, एजेके आदि का वर्णन।
- केपीके का नक्शा, दिशा-निर्देश और डूरंड लाइन की जानकारी।
- पिशावर को 'सिटी ऑफ फ्लावर' कहा जाता है और इसका इतिहास, पुराना नाम पुरुषपुरा और कुशल साम्राज्य के दौरान इसका महत्व।
- केपीके के प्रशासनिक आंकड़े जैसे जनसंख्या, क्षेत्रफल, जिले, आईजी, चीफ जस्टिस और साक्षरता दर।
- केपीके का पुराना नाम एनडब्ल्यूएफपी था और इसे 1901 में सूबे का दर्जा मिला।
- 1937 के पहले चुनाव और खान अब्दुल कयूम खान की भूमिका, जिन्हें 'सर सय्यद ऑफ एनडब्ल्यूएफपी' कहा जाता है।
- डॉक्टर खान साहब (खान अब्दुल जब्बार खान) और बाचा खान (खान अब्दुल गफ्फार खान) की राजनीतिक और सामाजिक भूमिका।
- खुदाई खिदमतगार पार्टी और बाचा खान की गांधीवादी विचारधारा।
- केपीके के प्रमुख नदियाँ, डैम और भौगोलिक विशेषताएं जैसे सवात नदी, टडा डैम, खानपुर डैम आदि।
- केपीके के राजनीतिक बदलाव, जैसे 2018 में फेडरल से प्रांत बनने की प्रक्रिया।
Chapters
- 00:00परिचय और केपीके का नक्शा
- 01:42केपीके के भौगोलिक सीमाएं और पड़ोसी क्षेत्र
- 03:18पिशावर का इतिहास और महत्व
- 04:46प्रशासनिक आंकड़े और वर्तमान अधिकारी
- 06:06केपीके का इतिहास और एनडब्ल्यूएफपी
- 07:24प्रमुख राजनीतिक शख्सियतें: खान अब्दुल कयूम खान, डॉक्टर खान साहब, बाचा खान
- 10:59भौगोलिक विशेषताएं: नदियाँ, डैम और पर्वत
- 15:48राजनीतिक बदलाव और वर्तमान स्थिति











