भारत के 7 सबसे खतरनाक जासूसों की वीरता और उनके अद्भुत कारनामों की कहानी, जो देश के लिए गर्व की बात हैं।
Key Takeaways
- भारतीय जासूसों ने देश की सुरक्षा और खुफिया जानकारी के लिए अद्भुत जोखिम उठाए।
- कई जासूसों ने दुश्मन के बीच रहकर महत्वपूर्ण मिशन सफल किए।
- देश के लिए शहीद हुए जासूसों की कहानियां अक्सर छुपी रहती हैं।
- इन जासूसों की वीरता और समर्पण से भारत को कई बार महत्वपूर्ण जीत मिली।
- जासूसी का काम बेहद जोखिम भरा होता है, लेकिन देशभक्ति के लिए ये लोग हर चुनौती स्वीकार करते हैं।
What the video covers
- वीडियो में भारत के सात महान और खतरनाक जासूसों के जीवन और उनके मिशनों का वर्णन किया गया है।
- सहमत खान ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पाकिस्तान में जाकर महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी भारत तक पहुंचाई।
- रविंद्र कौशिक को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 'ब्लैक टाइगर' का नाम दिया था, और उन्होंने पाकिस्तान आर्मी में शामिल होकर जासूसी की।
- मोहनलाल भास्कर ने पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम का पर्दाफाश किया, लेकिन धोखेबाज साथी की वजह से पकड़े गए।
- सरस्वती राजमणि भारत की पहली महिला इंटेलिजेंस एजेंट थीं, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों की खुफिया जानकारी हासिल की।
- अजीत डोभाल, जो वर्तमान में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर हैं, ने पाकिस्तान में कई सालों तक अंडरकवर जासूसी की।
- कश्मीर सिंह ने पाकिस्तान में कई सालों तक जासूसी की और 35 साल जेल में रहने के बाद भारत लौटे।
- प्रमेश्वर नाथ काव्य को दुनिया के सबसे अमीर इंटेलिजेंस ऑफिसर में गिना जाता है।
- वीडियो में बताया गया है कि जासूसों का काम कितना जोखिम भरा होता है और वे देश के लिए किस तरह समर्पित रहते हैं।
- इन जासूसों की कहानियां देशभक्ति और साहस की मिसाल हैं, जिनसे हर भारतीय को गर्व महसूस होता है।
Chapters
- 00:00परिचय और जासूसों का महत्व
- 00:54सरस्वती राजमणि: स्वतंत्रता संग्राम की पहली महिला जासूस
- 01:56सहमत खान का 1971 युद्ध में योगदान
- 02:49रविंद्र कौशिक का पाकिस्तान में मिशन
- 03:51मोहनलाल भास्कर और न्यूक्लियर प्रोग्राम का पर्दाफाश
- 04:51अजीत डोभाल: भारत के जेम्स बॉन्ड
- 05:43कश्मीर सिंह की बहादुरी और जेल में संघर्ष
- 08:21प्रमेश्वर नाथ काव्य: दुनिया के सबसे अमीर जासूस
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Speaker A
हेलो दोस्तों, हम सभी को जेम्स बॉन्ड, मिशन इंपॉसिबल और बेबी जासूस जैसी फिल्में देखना बहुत पसंद होता है। लेकिन असल जिंदगी में जासूसों का काम इतना आसान नहीं होता क्योंकि अपनी पहचान बदलकर दुश्मनों के बीच जाकर रहना और उनके इन्फॉर्मेशन अपने देश तक पहुंचाना बेहद जोखिम भरा काम होता है। और यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि देश के लिए शहीद होने वाले जासूसों के बारे में हम लोगों को पता तक नहीं चल पाता। यहां तक कि सरकारें भी इन्हें अपने देश का नागरिक होने से इंकार कर देती हैं। लेकिन फिर भी यह देशभक्त किसी भी बात की परवाह किए बिना अपने देश के लिए यह काम करते रहते हैं। और आज के हमारे इंट्रेस्टिंग वीडियो में भी हम आपको भारत के ही कुछ ऐसे जासूसों से मिलवाएंगे जिनके कारनामे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे और आपका हाथ अपने आप ही इन जासूसों को सैल्यूट करने के लिए ऊपर उठ जाएगा। और दोस्तों, आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं किसी भी जासूस के सीक्रेट इंफॉर्मेशन को शेयर नहीं कर रहा और सुनी बातों को ही आपके सामने रख रहा हूं जो कि इंटरनेट पर काफी समय से उपलब्ध है।
Speaker A
नंबर सेवन सहमत खान। दोस्तों, अहमद खान जो किसी लड़की का बदला हुआ नाम है, वह भारतीय अंडरकवर एजेंट थीं जिन्होंने साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पाकिस्तान में जाकर जासूसी की थी। असल में सहमत कश्मीर के एक अमीर मुस्लिम परिवार की बेटी थीं, लेकिन देश की खातिर उन्होंने अपने लिए जासूसी का यह जोखिम भरा काम चुना था। इस मिशन के लिए सहमत ने पाकिस्तान के एक बड़े आर्मी ऑफिसर से शादी की थी ताकि वह आसानी से पाकिस्तान में घुस सकें। अब यह तो इस मिशन के दौरान सहमत ने पाकिस्तान आर्मी की बहुत सी खुफिया और अहम जानकारी भारत तक पहुंचाई थी, लेकिन उनके द्वारा पहुंचाई गई सबसे अहम इन्फॉर्मेशन पाकिस्तानी आर्मी का प्लान था जो कि उन्होंने आईएनएस विराट कोहली के लिए बनाया था। सहमत के इंफॉर्मेशन की वजह से भारत में पाकिस्तान के उस प्लान को नाकाम कर दिया गया था और इससे हजारों लोगों की जान बच गई थी। इस मिशन को पूरा करके सहमत भारत लौटीं। तब वह गर्भवती हो चुकी थीं और आगे चलकर उन्होंने एक बेटे को भी जन्म दिया था जो कि बाद में जाकर भारतीय सेना में शामिल हो गया। और दोस्तों, सहमत खान के इस अद्भुत मिशन पर ही साल 2018 में राजी नाम की एक बॉलीवुड फ़िल्म रिलीज़ की गई थी जिसमें कि आलिया भट्ट ने सहमत खान का किरदार निभाया था। हालांकि दुर्भाग्य से साल 2018 में इस जांबाज सिपाही का देहांत हो गया था।
Speaker A
नंबर इटर रविंद्र कौशिक। दोस्तों, रविंद्र कौशिक जी को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ब्लैक टाइगर का नाम दिया था। आज भी उन्हें भारत के सबसे महान जासूसों में शुमार किया जाता है। राजस्थान के श्रीगंगानगर में जन्मे रविंद्र शुरुआत से एक थियेटर आर्टिस्ट हुआ करते थे और लखनऊ की एक थियेटर में एक्टिंग के दौरान ही रॉ के अफसरों की नजर उन पर पड़ी थी। वह रविंद्र की एक्टिंग से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उसी समय रविंद्र को जासूस बनने का ऑफर दे दिया। रविंद्र ने भी तुरंत इसे स्वीकार कर लिया जिसके बाद रॉ में उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई। यह ट्रेनिंग अगले दो साल तक चली जिसमें उन्होंने उर्दू, इस्लामिक धार्मिक ग्रंथ और पाकिस्तान के तौर-तरीकों के बारे में सीखा। साल 1975 में रविंद्र अपने मिशन के लिए पाकिस्तान चले गए थे और भारत के आंदोलन की सभी पुरानी पहचान नष्ट कर दी गई थी। पाकिस्तान में उन्होंने नबी अहमद शाकिर के नाम से प्रवेश किया था। रविंद्र ने पाकिस्तान जाने के बाद कराची यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया पर एक पाकिस्तानी लड़की अमानत से शादी कर ली। पढ़ाई पूरी होने के बाद वह पाकिस्तान आर्मी में शामिल हो गए और फिर धीरे-धीरे मेजर की रैंक तक पहुंच गए। इस दौरान वह लगातार पाकिस्तानी आर्मी की खुफिया जानकारी भारत तक पहुंचाते रहे थे जो कि भारत के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हुई। हालांकि 1985 में रॉ के एक-दूसरे पेंट की गलती की वजह से रविंद्र का भेद खुल गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पाकिस्तानी कोर्ट में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई जिसके बाद साल 2001 में टीबी की बीमारी पीड़ित होकर जेल के अंदर ही उनका देहांत हो गया। इस जांबाज सिपाही ने जेल में रहने के दौरान कभी भी अपना मुंह नहीं खोला और पाकिस्तान को भारत की कोई भी गुप्त जानकारी नहीं मिली।
Speaker A
नंबर फाइव मोहनलाल भास्कर। दोस्तों, मोहनलाल भास्कर इंडियन इंटेलिजेंस एजेंसी रॉ के वह जासूस थे जिन्होंने पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम का पर्दाफाश करने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी। इस मुश्किल मिशन को अंजाम देने के लिए उन्होंने इस्लाम धर्म को कबूल करके अपना नाम मोहम्मद असलम रख लिया था ताकि पाकिस्तान में उन पर किसी को शक न हो। और फिर पूरी तैयारी होने के बाद साल 1967 में वह अपने पहले मिशन पर निकले थे। इस मिशन के दौरान इन्फॉर्मेशन पास करने के लिए भास्कर ने एक साल के अंदर ही 15 से ज्यादा बार भारत-पाकिस्तान बॉर्डर को क्रॉस किया था। लेकिन साल 1968 में उनके एक साथी अमरीक सिंह के धोखा देने की वजह से उनका भेद खुल गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल अमरीक सिंह एक डबल इन था जो कि भारत के साथ ही पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा था। हालांकि पकड़े जाने पर 14 साल जेल में बिताने के बाद भास्कर को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए कैदी एक्सचेंज के दौरान साल 1974 में रिहा कर दिया गया था।
Speaker A
नंबर वह सरस्वती राजमणि। दोस्तों, सरस्वती राजमणि वह महिला थीं जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के साथ इंडियन इंटेलिजेंस यूनिट में भी बहुत अहम भूमिका निभाई थी। सरस्वती जी सुभाष चंद्र बोस से बहुत ही ज्यादा प्रभावित थीं और इसी के चलते ही सिर्फ 16 साल की उम्र में उन्होंने नेताजी की आज़ाद हिंद फ़ौज को जॉइन कर लिया था। और इस फौज के बेहतरीन काम को देखते हुए उन्हें इंडियन इंटेलिजेंस यूनिट में भी शामिल कर लिया गया था। वह हमारे देश की इंटेलिजेंस यूनिट का हिस्सा बनने वाली पहली महिला थीं। सरस्वती जी लड़के का वेश धारण करके अंग्रेजों की खुफिया जानकारी हासिल करने का काम करती थीं। एक बार सरस्वती जी की ही एक साथी को अंग्रेजों ने पकड़ लिया था और फिर उसको छुड़ाने के लिए सुपरहिट डांसर का रूप धारण करके अंग्रेज सिपाहियों के बीच में घुस गई थीं। और दोस्तों, उन्होंने अकेले के दम पर ही बड़ी चालाकी से सभी अंग्रेज सिपाहियों को नशे में धूत करके अपनी साथी को बचा लिया था। इस मिशन के दौरान भाग्य समय उन्हें टांग पर एक गोली भी लग गई थी लेकिन फिर भी वह इस मिशन में कामयाब रहीं। हालांकि दुर्भाग्य से 13 जनवरी 2018 के दिन हार्ट अटैक के चलते उनकी मौत हो गई थी।
Speaker A
नंबर थ्री अजीत डोभाल। दोस्तों, इस समय हमारे देश के लिए नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर के रूप में काम कर रहे अजीत डोभाल अपने समय के बेहतरीन जासूसों में शुमार किए जाते थे। उनकी जासूसी के किस्से इतने जबरदस्त हैं कि उन्हें भारत का जेम्स बॉन्ड कहा जाता है। आपको जानकर काफी हैरानी होगी कि वह दो बार असल में जासूस होने से पहले एक आईपीएस ऑफिसर थे और उनके पास ही ऑप्शन था कि अगर वह चाहते तो एक आईपीएस के रूप में ही भारत की सेवा कर सकते थे। लेकिन उन्होंने देश की खातिर जासूस बनने का निर्णय लिया और अपनी जान जोखिम में डालकर भारत की सेवा की थी। अजीत डोभाल सालों तक पाकिस्तान के अंदर एक पाकिस्तानी मुस्लिम बनकर रहे और वहां से पाकिस्तान इंटेलिजेंस की खुफिया जानकारी भारत में भेजते रहे। एक अंडरकवर एजेंट के रूप में अपना काम पूरा करने के बाद वह पाकिस्तान में ही इंडियन हाई कमिश्नर बना दिए गए और फिर छह साल तक इसी पोस्ट पर काम करने के बाद वह भारत वापस लौट आए। और उनके इन्हीं वीरता भरे कार्यों और कारनामों के लिए उन्हें भारत के दूसरे सबसे बड़े शहर या वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से भी सम्मानित किया गया है।
Speaker A
नंबर टू कश्मीर सिंह। दोस्तों, पंजाब के होशियारपुर से ताल्लुक रखने वाले कश्मीर सिंह एक जासूस बनने से पहले इंडियन मिलिट्री का हिस्सा हुआ करते थे। और सिंह के फोटोग्राफी के शौक के चलते ही उन्हें जासूसी की जॉब ऑफर की गई थी। उन्होंने जासूसी को एक पार्ट टाइम जॉब की तरह करना शुरू किया था जिसके लिए उन्हें ₹400 महीने का वेतन दिया जाता था। दरअसल, फिल्म में वह पाकिस्तान बॉर्डर पर पाकिस्तान सेना की यूनिट की संख्या के बारे में जानकारी इकट्ठा करने और उनकी सैन्य टुकड़ियों के रणनीतिक स्थानों की तस्वीरें लीक करने का काम सौंपा गया था। वह साल 1969 में पहली बार मोहम्मद इब्राहिम के नाम से पाकिस्तान में घुसे थे और इसके बाद वह अगले कई सालों तक भारत को पाकिस्तानी सेना के महत्वपूर्ण जानकारियां देते रहे। उनके द्वारा भेजे गए इन्फॉर्मेशन 1971 के युद्ध में भारत के बहुत काम आई थी। लेकिन 1973 में एक-दूसरे इंडियन एजेंट के मुंह खोलने की वजह से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। और आपको जानकर काफी हैरानी होगी कि वह 35 साल तक पाकिस्तान की जेल में कैद रहे थे जहां पर उन्हें थर्ड डिग्री टॉर्चर किया जाता था। लेकिन इतने लंबे समय तक टॉर्चर झेलने के बावजूद भी उन्होंने कभी भी अपना मुंह नहीं खोला और साल 2008 में पाकिस्तान के मानवीय आधारों पर उन्हें आजाद करके भारत भेज दिया गया।
Speaker A
नंबर वन प्रमेश्वर नाथ का। दोस्तों, रामेश्वरनाथ काव्य एक इंटेलिजेंस ऑफिसर और जासूस थे जिन्हें आप सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सबसे अमीर इंटेलिजेंस ऑफिसर में शुमार किया जाता है। यूपी के वाराणसी से ताल्लुक रखने वाले कौर ने अपने करियर की शुरुआत एक आईपीएस अफसर के रूप में की थी लेकिन हमेशा से जासूसी में दिलचस्पी रखने...
Speaker A
जान बच गई थी इस मिशन को पूरा करके वजह भारत लौटी तब वह घर स्थिति हो चुकी थी और आगे चलकर उन्होंने एक बेटे को भी जन्म दिया था जो कि बाद में जाकर भारतीय सेना में शामिल हो गया और
Speaker A
दोस्तों सहमत खान के इस अद्भुत मिशन पर ही साल 2018 में राजी नाम की एक बॉलीवुड फ़िल्म रिलीज़ की गई थी जिसमें कि आलिया भट्ट ने सहमत खान का किरदार निभाया था हलाकि दुर्भाग्य से साल 2018 में इस
Speaker A
जांबाज सिपाही का देहांत हो गया था नंबर से इतर रविंद्र कौशिक दोस्तों रविंद्र कौशिक जी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के द्वारा ब्लैक टाइगर का नाम दिया गया था आज भी भारत के सबसे महान जासूसों में शुमार किए जाते हैं राजस्थान के
Speaker A
श्रीगंगानगर में जन्म में रविंद्र शुरुआत से एक थियेटर आर्टिस्ट हुआ करते थे और लखनऊ की एक थियेटर में एक्टिंग के दौरान ही रोक के अफसरों की नजर उन पर पड़ी थी वह रविंद्र की एक्टिंग से इतने प्रभावित हुए
Speaker A
कि उन्होंने उसी समय रविंद्र को जासूस बनने का ऑफर दे दिया रविंद्र ने भी तुरंत थी यह स्वीकार कर लिया जिसके बाद रो में उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई और यह ट्रेन अगले दो साल तक चली जिसमें कि उन्होंने
Speaker A
उर्दू इस्लामिक धार्मिक ग्रंथ और पाकिस्तान के तौर-तरीकों के बारे में सीखा साल 1975 में मातृत्व इस साल के रविंद्र अपने मिशन के लिए पाकिस्तान चले गए थे और भारत के आंदोलन के सभी पुरानी पहचान नष्ट कर दी गई थी और पाकिस्तान में उन्होंने
Speaker A
नबी अहमद शाकिर के नाम से प्रवेश किया था रविंद्र ने पाकिस्तान जाने के बाद से कराची यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया पर एक पाकिस्तानी लड़की अमानत से शादी कर ली पढ़ाई पूरी होने के बाद वह पाकिस्तान आर्मी में शामिल हो गए और फिर धीरे-धीरे
Speaker A
मेजर की रैंक तक पहुंच गए और इस दौरान वह लगातार पाकिस्तानी आर्मी की खुफिया जानकारी भारत तक पहुंचाते रहे थे जो कि भारत के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हुई हालांकि 1985 में रॉकी ही एक-दूसरे पेंट की गलती की वजह से रविंद्र
Speaker A
का भेद खुल गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया पाकिस्तानी कोर्ट में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई जिसके बाद साल 2001 में टीबी की बीमारी पीड़ित होकर जेल के अंदर ही उनका देहांत हो गया इस जांबाज सिपाही ने जेल में रहने
Speaker A
के दौरान कभी भी अपना मुंह नहीं खोला और पाकिस्तान को भारत की कोई भी गुप्त जानकारी नहीं थी नंबर फाइव मोहनलाल भास्कर दोस्तों मोहनलाल भास्कर इंडियन इंटेलिजेंस एजेंसी रॉ के वह जासूस से जिन्होंने पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम का
Speaker A
पर्दाफाश करने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी इस मुश्किल मिशन को अंजाम देने के लिए उन्होंने इस्लाम धर्म को कबूल करके अपना नाम मोहम्मद असलम रख लिया था कि पाकिस्तान में उन पर किसी को शक ना हो और फिर पूरी
Speaker A
तैयारी होने के बाद साल 1967 में वह अपने पहले मिशन पर निकले थे और इस मिशन के दौरान इन्फॉर्मेशन पास करने के लिए भास्कर ने एक साल के अंदर ही 15 से ज्यादा बाद भारत-पाकिस्तान बॉर्डर को क्रॉस किया था
Speaker A
लेकिन साल 1968 में उनके एक साथी अमरीक सिंह के धोखा देने की वजह से उनका भेद खुल गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया दरअसल अमरीक सिंह एक डबल इन था जो कि भारत के साथ ही पाकिस्तान के
Speaker A
लिए जासूसी कर रहा था हलाकि पकड़े जाने पर 14 साल जेल में बिताने के बाद भास्कर को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए कैदी एक्सचेंज के दौरान सर 1974 में रिहा कर दिया गया था नंबर वह सरस्वती राजमणि
Speaker A
दोस्तों सरस्वती राजमणि वह महिला थी जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के साथ इंडियन इंटेलिजेंस यूनिट में भी बहुत अहम भूमिका निभाई थी सरस्वती जी सुभाष चंद्र बोस से बहुत ही ज्यादा प्रभावित थी और इसी के चलते ही सिर्फ 16 साल की उम्र
Speaker A
में उन्होंने नेताजी की आज़ाद हिंद फ़ौज को जॉइंट कर लिया था और इस फौजियों के बेहतरीन काम को देखते हुए उन्हें इंडियन इंटेलिजेंस यूनिट में भी शामिल कर लिया गया था और वह हमारे देश की इंटेलिजेंस यूनिट का हिस्सा बनने वाली पहली महिला थी
Speaker A
सरस्वती जी लड़के का वेश धारण करके अंग्रेजों की खुफिया जानकारी हासिल करने का काम करती थी एक बार सरस्वती जी की ही एक साथी को अंग्रेजों ने पकड़ लिया था और फिर उसको छुड़ाने के लिए सुपरहिट डांसर का रूप धारण करके अंग्रेज
Speaker A
सिपाहियों के बीच में घुस गई थी और दोस्तों उन्होंने अकेले के दम पर ही बड़ी चालाकी से सभी अंग्रेज सिपाहियों को नशे में धूत करके अपनी साथी को बचा लिया था इस मिशन के दौरान भाग्य समय उन्हें टांग पर
Speaker A
एक गोली भी लग गई थी लेकिन फिर भी वह इस मिशन में कामयाब रही थी हलाकि दुर्भाग्य से 13 जनवरी 2018 के दिन हार्ट अटैक के चलते उनकी मौत हो गई थी नंबर थ्री अजीत डोभाल दोस्तों इस समय हमारे देश के लिए
Speaker A
नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर के रूप में काम कर रहे अजीत डोभाल अपने समय के बेहतरीन जासूसों में शुमार किए जाते थे उनकी जासूसी के किस्से इतने जबरदस्त है कि उन्हें भारत का जेम्स बॉन्ड कहा जाता है आपको जानकर काफी हैरानी होगी यह दो बार
Speaker A
असल में जासूस होने से पहले एक आईपीएस ऑफिसर थे और उनके पास ही ऑप्शन था कि अगर वह चाहते तो एक आईपीएस के रूप में ही भारत की सेवा कर सकते थे लेकिन उन्होंने देश की खातिर जासूस बनने का निर्णय लिया और अपनी
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जान जोखिम में डालकर भारत की सेवा की थी अजीत डोभाल साल तक पाकिस्तान के अंदर एक पाकिस्तानी मुस्लिम बन कर रहे और वहां से पाकिस्तान इंटेलिजेंस की खुफिया जानकारी भारत में भेजते रहे एक अंडरकवर एजेंट के रूप में अपना काम पूरा करने के बाद वह
Speaker A
पाकिस्तान में ही इंडियन हाई कमिश्नर बना दिए गए और फिर छह साल तक इसी पोस्ट पर काम करने के बाद वह भारत वापस लौट आए और उनके इन्हीं वीरता भरे कार्यों और कारनामों के लिए उन्हें भारत के दूसरे सबसे बड़े शहर
Speaker A
या वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से भी सम्मानित किया गया है नंबर टो कश्मीर सिंह दोस्तों पंजाब के होशियारपुर से ताल्लुक रखने वाले कश्मीर से एक जासूस बनने से पहले इंडियन मिलट्री का हिस्सा हुआ करते थे और सिंह के फोटोग्राफी के शौक के चलते
Speaker A
ही उन्हें जासूस की जॉब ऑफर की गई थी और उन्होंने जासूसी को एक पार्ट टाइम जॉब की तरह करना शुरू किया था जिसके लिए उन्हें ₹400 महीने का वेतन दिया जाता था दरअसल फिल्म में वह पाकिस्तान बॉर्डर पर
Speaker A
पाकिस्तान सेना की यूनिट की संख्या के बारे में जानकारी इकट्ठा कर है अरुण की सैन्य टुकड़ियों के रणनीतिक स्थानों की तस्वीरें लीक करने का काम सौंपा गया था वह साल 1969 में पहली बात मोहम्मद इब्राहिम के नाम से पाकिस्तान में
Speaker A
घुसे थे और इसके बाद वह अगले कई सालों तक पर भारत को पाकिस्तानी सेना के महत्वपूर्ण जानकारियां देते रहे उनके द्वारा भेजे गए इन्फॉर्मेशन 1971 के युद्ध में भारत के बहुत काम आई थी लेकिन 1973 में एक-दूसरे इंडियन एजेंट के मुंह खोलने की वजह से
Speaker A
उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और आपको जानकर काफी हैरानी होगी कि वह 35 साल तक पाकिस्तान की जेल में कैद रहते थे जहां पर उन्हें थर्ड डिग्री टॉर्चर किया जाता था लेकिन इतने लंबे समय तक टार्चर झेलने के
Speaker A
बावजूद भी उन्होंने कभी भी अपना मुंह नहीं खोला और साल 2008 में पाकिस्तान के मानवीय आधारों पर उन्हें आजाद करके भारत भेज दिया गया नंबर वन प्रमेश्वर नाथ का दोस्तों रामेश्वरनाथ काव्य कैसे इंटेलिजेंस ऑफिसर और जासूस थे जिन्हें आप सिर्फ भारत ही
Speaker A
नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सबसे अमीर थे इंटेलिजेंस ऑफिसर में शुमार किया जाता है यूपी के वाराणसी से ताल्लुक रखने वाले कौर ने अपने करियर की शुरुआत एक आईपीएस अफसर के रूप में की थी लेकिन हमेशा से जासूसी में दिलचस्पी रखने वाले का वृक्ष
Speaker A
और 1969 में खुफिया एजेंसी की स्थापना की जिसको कि आज हमरो के नाम से जानते हैं और यही वजह है कि भारत में रोज जैसी बेहतरीन खुफिया एजेंसी के होने का सबसे बड़ा श्री रामेश्वर नाथ का कोई दिया जाता है वह एक
Speaker A
ऐसे खुफिया इंसान थे इनके निजी जिंदगी के बारे में आज भी लोगों को कोई खास जानकारी नहीं है अलग यह दुर्भाग्य साल 2002 में 83 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया है हैं तो दोस्तों यह थे कुछ ऐसे जांबाज आंसू
Speaker A
सचिन पर हम सभी भारतीय को गर्व है अ से आप इनके वीरता के बारे में क्या कहना चाहेंगे हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा और वीडियो को शेयर करना बिलकुल ना भूलिएगा आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत बहुत
Speaker A
धन्यवाद [संगीत]
Topics:भारतीय जासूससहमत खानरविंद्र कौशिकमोहनलाल भास्करसरस्वती राजमणिअजीत डोभालकश्मीर सिंहप्रमेश्वर नाथ काव्यभारत-पाकिस्तान युद्धइंटेलिजेंस एजेंट











