यह भाषण पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति, गरीबी, भ्रष्टाचार और जनता के संघर्ष पर केंद्रित है।
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Key Takeaways
- देश की जनता को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए।
- भ्रष्टाचार और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष आवश्यक है।
- नौजवानों को अपने देश के लिए समर्पित रहना चाहिए।
- गरीबी और महंगाई से लड़ने के लिए सामाजिक जागरूकता जरूरी है।
- देशभक्ति और वतन के प्रति जिम्मेदारी सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए।
What the video covers
- भाषण 20वीं सदी के हिंदुस्तान की आजादी की लड़ाई और उसके जज्बे को याद करता है।
- यह 21वीं सदी के पाकिस्तान की गरीबी, भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानताओं पर प्रकाश डालता है।
- नौजवानों की स्थिति और उनकी मेहनत की कीमत के बारे में चिंता व्यक्त की गई है।
- भाषण में भ्रष्ट और अत्याचारी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत बताई गई है।
- देश की जनता को जागरूक होकर अपने हक के लिए लड़ने का आह्वान किया गया है।
- देश के भविष्य के लिए बदलाव और सोच में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
- भाषण में पाकिस्तान की वर्तमान समस्याओं को गंभीरता से उठाया गया है।
- देश के नौजवानों को अपने देश के लिए समर्पित रहने और संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया गया है।
- भाषण में देशभक्ति और अपने वतन के प्रति जिम्मेदारी की भावना को उजागर किया गया है।
- यह संदेश देता है कि अगर जनता खुद को जालिम हुकूमत से आजाद नहीं कराएगी तो देश हमेशा के लिए गुलाम रहेगा।
Chapters
- 00:0020वीं सदी का हिंदुस्तान और आजादी का जज्बा
- 00:58आजादी के लिए संघर्ष और जज्बा
- 02:2421वीं सदी के पाकिस्तान की दास्तान
- 02:54गरीबी और नौजवानों की स्थिति
- 03:41महंगाई और सामाजिक समस्याएं
- 04:01देश छोड़ने की मजबूरी और हुकूमत की आलोचना
- 04:37जनता का जागरूक होना और बदलाव की जरूरत
- 05:20देशभक्ति और वतन के लिए समर्पण
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Speaker A
[संगीत] यह 20वीं सदी का हिंदुस्तान है, जहां गुलामी की जंजीरें तोड़ने वाले, आजादी का जज्बा रखने वाले, जुल्म के निजाम को तस्लीम न करने वाले, अपने हक के लिए आवाज उठाने वाले कुछ दूर बसे हैं, जो सोच रहे हैं।
Speaker A
शहर के बड़े में कि जहां वो गुलामी के जंगल से निकालकर आजादी की जिंदगी गुजार सकें। ये तो ऐसे शहर के बड़े में सोच रहे हैं कि जहां वो बगैर किसी खौफ के अपनी इबादत गांव में जा सकें। हर ताकत उनके इस
Speaker A
आजादी के जज्बे को खत्म करने में नाकाम रही। यह तो यूं लूटने गए, काट गए, मरते गए, लेकिन आने वाली नसलों के लिए एक ऐसा घर बना दिया कि जहां वो सिर्फ अल्लाह के आगे झुकीं, ना कि किसी अंग्रेज के आगे।
Speaker A
अजीज आने मां। इन्होंने अपनी जान के नज़राने देकर कयामत तक के लिए इस घर, स्कूल के एक-एक दुश्मन को यह पैगाम दे दिया कि सबूत देंगे वफा का, इस्तीफा है गलत मिला के खाक में रख देंगे। हर सिपाही गलत बर्बाद कब हम आंखें निकाल
Speaker A
छोड़ेंगे। उठी जो मुल्क की जान कोई जनाबे वाला। इन लोगों ने अपने जज्बात, खयालात, अपनी सोच को सिर्फ बटन की हद तक महदूद नहीं रखा, बल्कि इनकी जो सोच थी कि हमें अपना एक आजाद मुल्क चाहिए, इस सोच पर
Speaker A
इन्होंने सब कुछ लुटा कर नक्सल पाकिस्तान को दुनिया के नक्शे पर उभराया। लेकिन रुकिए जरा, सब्र कीजिए कि ये जो कहानी थी, यह तो जीतो जिहाद से लेकर आजादी तक के सफर की कहानी थी। कि ये तो थी 20वीं सदी के
Speaker A
हिंदुस्तान की दास्तान। लेकिन ये है 21वीं सदी के पाकिस्तान की दास्तान। जी हां, यह है 21वीं सदी के लूटे हुए, बिखरे हुए, चले हुए, सुखे हुए, गिरते हुए उस शहर की दास्तान, जिसकी अपने ही बने वालों ने
Speaker A
इसे जलाकर रख दिया। कि उसे चादर की दास्तान है, जिसकी अहमियत डूब चुकी है, पेट सूख चुके हैं, कोई रसीला फल इस पर बाकी नहीं। और अगर बात की जाए यहां पर बेसन वाले लोगों की तो गरीबी इस मुल्क में आसमान की
Speaker A
बुलंदियों को छू रही है। कि जब मैं अपने घर से निकलता हूं और हमारे मुल्क के नौजवानों को गली-गली पकोड़े, गोलगप्पे या दही बड़े बेचते हुए देखा हूं, तो मेरी आंखें नम और दिल पास-पास हो जाता है कि हमारे मुल्क के
Speaker A
नौजवान जिन्हें आज इस काबिल होना था कि पूरी दुनिया में अपने मुल्क का नाम रोशन कर सकें, लेकिन सितम यह कि बाद हालात इस कदर बाढ़ चुके हैं कि इनकी पूरे दिन की मेहनत मजदूरी की कीमत सिर्फ 5 किलो आटे का ठेला
Speaker A
है। तो फिर जानेमन, मैं आपसे सवाल करता हूं कि ऐसे में शहर पर बजाने वाले तू यूं भला कैसे सोचें कि बड़े में कि इन्हें तो बुडबक महंगाई, आटा, चीनी, तेल, घी में इस तरह उलझा रखा है कि लोग इस मुल्क को तबाही
Speaker A
बर्बाद करने वालों की तरफ मूतवाचे न हों। कि लोगों के वे में गुमान में इस मुल्क के लिए कोई सोच भी हो तो मां भी हो, और फक्त यही हो कि वो सोच इस बात पर जमीन कुछ कर
Speaker A
जान के बड़े में। ऐसे हालात में अपने टोयुर ही सोचते हैं, अपने शहर को छोड़ जान के बड़े में वो अपने ही देश से भागकर ये खाने पर मजबूर हो जाते हैं कि इस देश में हमें दिया ही क्या है। और ऐसे में वो
Speaker A
तुइयुर कहानी और हजरत करने का सोचते हैं तो उनका घर, उनका शहर उन्हें ये सदा देता है कि तक गए हो तो ढकन छोड़ कर जा सकते हो, तुम मुझे वाक्याटन छोड़कर जा सकते हो। हम दरस्तों को कहां आता है हजरत करना तुम
Speaker A
परिंदे हो, वतन छोड़ कर जा सकते हो। लेकिन जनाबे वाला हमें मूतवाचे होना होगा कि अगर किसी मुल्क पर कई दहाइयों से दो-तीन खानदान हुकूमत के मजे ले रहे हों, वो हुकूमत अय्याश क्लब, जालिम और इनका हाय
Speaker A
गियर हुए साबित हो चुके हों। अब हम पर जुल्मी सितम के पहाड़ तोड़ते हों, अपने मुल्क का पैसा चुराकर फिर उन्हें मुल्क मुंतकील करके मुल्क को खोखला कर चुके हों। अब आम को टैक्स के बोझ तले दबा कर, तालीम,
Speaker A
शहर, इंसान, रोजगार छिन कर, चश्मा, कुर्सी की जिंदगी जीने पर मजबूर कर चुके हों। और फिर आवाम पर अपना खौफ मुसल्लत किया हो तो उसे मुल्क की आवाम पर फर्ज हो चुका है कि वो अपने ऊपर मुसल्लत रोज से निचत
Speaker A
हासिल करने के लिए खुद को बदले, अपनी सोच बदले, अपने ख्याल बदले। अगर इस मुल्क की आवाज खुद को जालिम हुकूमत से आजाद नहीं करवा लेती तो ऐसे मुल्क और ऐसी वाम हमेशा के लिए गुलाम बनकर तवा हो जाते हैं। तो फिर
Speaker A
निकालो पाकिस्तानियों, निकालो अपने घरों से, हुसैन ही बनकर वक्त के यजीदियों के खिलाफ चलो चलो। अब हम इसलिए हैं, हैदर मित दो हाथ में चलो, यजीदियों का इख्तियार के ये वतन तुम्हारा है, तुम हो इसके, तुम हो दिल पर कुर्बान। साद है ये पाकिस्तान सबसे
Speaker A
ऊंचा इसका नशा है। यह पाकिस्तान तेरी मेरी है।
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