Skip to content
Get App

सोने का गोबर | Story Of A Clever farmer | Hindi Kahani | Hindi Fairy Tales

सोने का गोबर कहानी में तीन किसान जमींदार और महाजन के अत्याचार से लड़ते हैं और चालाकी से अपनी गाय वापस पाते हैं।

Key Takeaways

  • किसानों को जमींदार और महाजन के अत्याचार से बचने के लिए चालाकी अपनानी पड़ती है।
  • सामाजिक अन्याय के खिलाफ साहस और बुद्धिमानी जरूरी है।
  • एकता और समझदारी से मुश्किल हालातों का सामना किया जा सकता है।
  • धोखा देकर भी न्याय और अपनी संपत्ति वापस पाई जा सकती है।

What the video covers

  • कहानी शीतलपुर गांव के तीन किसानों भोला, कान्हा और जीवन की है जो जमींदार की जमीन पर खेती करते हैं।
  • महाजन किसानों पर अत्याचार करता है और भोला की गाय भी ले लेता है।
  • जीवन जमींदार के घर जाकर शर्त लगाता है कि वह उनकी जमीन पर खेती करेगा।
  • जीवन जमींदार को धोखा देकर अपनी गाय वापस लाने की योजना बनाता है।
  • जीवन जमींदार को सोने की बात कहकर उसकी मेहमान नवाजी कराता है।
  • किसान चालाकी से महाजन और जमींदार के दबाव से निकलते हैं।
  • कहानी में हास्य और सामाजिक संदेश दोनों हैं।
  • अंत में जीवन अपनी चालाकी से अपनी गाय वापस पाता है और जमींदार को चकमा देता है।

Answers

Questions about this video

कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

कहानी यह सिखाती है कि कठिनाइयों और अन्याय के खिलाफ बुद्धिमानी और साहस से लड़ना चाहिए। चालाकी से समस्याओं का समाधान संभव है।

जीवन ने जमींदार को कैसे चकमा दिया?

जीवन ने जमींदार को सोने की बात कहकर उसकी मेहमान नवाजी कराई और अपनी गाय वापस लाने की योजना बनाई।

महाजन का किरदार कहानी में क्या दर्शाता है?

महाजन किसानों पर अत्याचार करने वाला व्यक्ति है जो पैसे के लिए लालची है, जो कहानी में सामाजिक अन्याय को दर्शाता है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01
Speaker A
[संगीत] ओ हुजूर, ऐसा मत कीजिए। मेरे पास एक ही गाय है। ये जो दूध देती है, उसी को बेचकर जो भी पैसे मिलते हैं, उसी से मेरा घर चलता है। क्यों? जमीनें हैं ना, खेती तो करता है ना।
00:26
Speaker A
घर में बच्चे हैं। इससे खर्चा पूरा नहीं होता, हुजूर। और फिर जमींदार का किराया भी। देख, तेरे बारे में सोचने लगा तो मेरा घर नहीं चलेगा। हां, बहुत वक्त दे दिया, अब नहीं। ओए चलो। इसी तरह शीतलपुर गांव के
00:42
Speaker A
लोग एक तरफ जमींदार और दूसरी तरफ महाजन के अत्याचार से बेहाल होते रहते हैं। [संगीत] ऐसे ही तीन किसान भोला, कान्हा और जीवन, तीनों ही जमींदार की जमीन में खेती करते हैं। मैं तो उनके पांव भी पड़ा। पर महाजन ने
00:58
Speaker A
मेरी एक नहीं सुनी। क्यों सुनेगा भला? उसके जैसे पैसे का प्यासा इस गांव में कोई और है नहीं। कब ₹100 उधार लिए थे। आज भी चुकता नहीं हुआ क्या? मेरी गाय भी ले गया। उस गाय को बाजार में बेच देता तो ₹500 मिल जाते।
01:12
Speaker A
उसके पास से मैं तेरी गाय जरूर छुड़वा कर लाऊंगा। क्या? क्या [हंसी] बोला तुमने?
01:18
Speaker A
सच में तुमने ऐसी बात की कि इस दुख की हालत में हंसी आ गई। मेरी बात पर यकीन नहीं हो रहा ना तुझे?
01:25
Speaker A
मैं अगर भोला की गाय नहीं लेकर आया ना तो देखना। असंभव। और फिर मेरी गाय लाने के चक्कर में कहीं तुम अपनी जान ना गवा दो। मैं वादा करता हूं। सिर्फ गाय ही नहीं लाऊंगा, बल्कि साथ ही मैं शाही भोज भी खाकर
01:39
Speaker A
आऊंगा। शर्त लगाना है? हां, ठीक है। लगा लो शर्त। तो ठीक है। अगर तू यह वादा करता है तो फिर मैं भी वादा करता हूं। आज से तुझे अपनी जमीन में हाथ लगाने की जरूरत नहीं। मैं तेरी जमीन पर खेती करूंगा, फसल उगाऊंगा,
01:53
Speaker A
तू पैर पर पैर रखकर बैठेगा और देखेगा। सोच ले, ऐसा ही करेगा ना। वो देख, महाजन आ रहे हैं। जीवन तुरंत उठ खड़ा होता है। फिर आगे बढ़ता है। यहां वहां देखता है। हर किसी के मुंह के पास जाता है और अच्छे से देखता
02:11
Speaker A
है। तुमसे नहीं हो पाएगा। नहीं नहीं, तुमसे भी नहीं हो पाएगा। अरे तुम इस तरह मेरी शक्ल क्यों देख रहे हो जीवन? कहा ना मैंने। तुमसे नहीं हो पाएगा। अरे धत, आखिर क्या नहीं हो पाएगा? ये तो बता। ये जीवन आखिर कर क्या रहा है?
02:28
Speaker A
पता नहीं, मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा है। जीवन कोई जवाब दिए बिना ही सीधे महाजन की तरफ बढ़ जाता है। नहीं नहीं नहीं, आपसे भी नहीं होगा। ओए ओए, क्या नहीं हो पाएगा, खोल कर बोल।
02:42
Speaker A
नहीं नहीं, कुछ नहीं। कान्हा, तू जल्दी से जा। महाजन नाराज हो गए तो हमारा घर-द्वार सब दिख जाएगा। हुजूर, हुजूर, इसकी बातों पर ध्यान मत दीजिए। आप कहां जा रहे हैं? मैं कहां जा रहा हूं, यह जानकर तुम लोग क्या करोगे?
02:55
Speaker A
अगर आप चाहे, तो आपको थोड़ी दूर छोड़ दूं। मैं जहां जा रहा हूं, वहां तुम में से कोई नहीं जा सकता। क्यों नहीं जा सकते?
03:02
Speaker A
जरूर जा सकते हैं। मैं जा रहा हूं जमींदार के घर। [हंसी] जमींदार तो तुझे पूछेंगे भी नहीं। जरूर पूछेंगे और साथ में खाना भी खिलाएंगे। [हंसी] खाना खिलाएंगे तुझे, वो भी जमींदार। [हंसी] हां, खिलाएंगे। क्या तू मेरे साथ शर्त लगा रहा है? हां।
03:25
Speaker A
हां, अगर मैं जीत गया तो क्या करेंगे आप? मुझे क्या चाहिए, बता? आप भोला को गाय वापस कर देना। ठीक है। मैं राजी हूं। देखता हूं कितना दम है तुझ में। अरे क्या हुआ? कुछ कहा महाजन ने?
03:40
Speaker A
सुन ले। तैयार हो जा कान्हा। मेरी जमीन पर खेती करने के लिए तैयार हो जा। मैं चला जमींदार के घर खाना खाने। ये आज कोई ना कोई [संगीत] काम करने वाला है। भोला, तेरी गाय भी तुझे वापस मिल जाएगी।
03:53
Speaker A
आखिर ये क्या करना चाहता है? पता नहीं। तो कितने वसूल हुए? वो जमींदार साहब आपके आशीर्वाद से वसूली अच्छी हुई है। अरे तू यहां क्या कर रहा है? क्या चाहिए तुझे, बता?
04:07
Speaker A
जी प्रणाम हुजूर। आपके साथ जरूरी बात करनी है। मुझे लगता है कि आप जरूर कर पाएंगे। मैं क्या कर पाऊंगा?
04:14
Speaker A
वही एक बात। आखिर क्या चाहिए इसे? हुजूर, यह बहुत ही खास बात है। अकेले मैं बोलना चाहता हूं। इसका मतलब कोई राज की बात है। अच्छा चल उधर। जीवन जमींदार को फुसफुसा कर कुछ बोलता है। फिर हाथ दिखाकर बोलता है।
04:32
Speaker A
अ हुजूर, इतना बड़ा। नहीं नहीं नहीं। इससे और थोड़ा सा बड़ा। ये, ये इतना बड़ा। इस माप के एक हथेली सोने की कीमत कितनी होगी?
04:45
Speaker A
एक हथेली, इतना बड़ा सोना। हां, इससे ज्यादा भी हो सकता है। इस किसान को बुद्धू बनाकर इसका सोना ले लूं तो? सबके सामने बात न करके इसने अच्छा ही किया है। अब ब सुनो, कोई है? जरा यहां आओ। सुनो, इसे लेकर जाओ। और सुनो, इसके
05:04
Speaker A
मेहमान नवाजी में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। अच्छा-अच्छा खाना खिलाओ। जाओ जाओ। जमींदार का यह रूप देखकर महाजन चौंक जाते हैं और मन ही मन सोचते हैं आखिर इसने ऐसा क्या कहा कि एक किसान की ऐसी मेहमान नवाजी कर रहे हैं। जमींदार
05:20
Speaker A
हुजूर तो फिर हिसाब ले लीजिए। आप नहीं नहीं, आज तुम सब लोग जाओ, तुम्हारे साथ अगले हफ्ते बात करता हूं। ठीक है। महाजन सर झुका कर निकल आते हैं और मन ही मन सोचते हैं, अरे कल ही उस गाय को लेकर आया और आज ही
05:36
Speaker A
उसे वापस करना पड़ेगा। लेकिन उसने ऐसा क्या कहा होगा? कितना बड़ा कहा उसने? इतना बड़ा, इतना बड़ा भाग्यवान, इतना बड़ा। पर ये तो बहुत बड़ा है जी। हां, यही तो बात है। अच्छा भाग्यवान सोने के सिक्के अब कितने में मिल रहे हैं?
05:56
Speaker A
वही मतलब 1 लाख? 1 लाख? नहीं, नहीं। उसे इतना नहीं कह सकते। अच्छा सुनो, अब 50,000 बोल दो क्या?
06:03
Speaker A
नहीं, नहीं और कम कर दो। उसे नहीं पता, तभी तो पता करने आया है। उसे कह दो कि ₹10,000 तोला है। सुनो, वो सोना मिल जाए तो मुझे एक सोने का कमरबंद बनवा कर देना होगा। समझे?
06:20
Speaker A
अरे दूंगा दूंगा। अब मैं चलती हूं। खाने का इंतजाम करती हूं। और एक मछली दूं क्या? और चावल क्यों नहीं?
06:43
Speaker A
[संगीत] अरे कहां गए तुम सब? खीर और राजभोग लेकर आओ जल्दी। [संगीत] खाओ बेटा, खाओ आराम से, पेट भर के खाओ। खाओ बेटा, खाओ, बिल्कुल भी शर्माना मत। ये लो पान। खाओ अच्छे से। खाना खाया ना बेटा? अरे हां, हुजूर, जिंदगी में ऐसा खाना
07:18
Speaker A
[संगीत] कभी नहीं खाया। अब चलो सो जाओ। सुनो बेटा, बेटा इस पलंग पर सो जाओ। ठीक है। हां, लेकिन उस सोने के बारे में। अरे इतनी जल्दी किस बात की है? खाना-पीना हो गया। अब जरा आराम तो करना ही होगा।
07:34
Speaker A
उसके बाद हम उस बारे में बात करेंगे। जी अच्छा। आ, बहुत नरम है। बिल्कुल रुई की तरह नरम। आ हा हा। सुनो तुम लोग, हवा करो। हम सो जाओ बेटा। उबासी लेकर उठता है जीवन और देखता है कि
07:59
Speaker A
सामने जमींदार और उनकी पत्नी [संगीत] उम्मीद भरी आंखों से देख रहे हैं। क्यों बेटा, नींद तो अच्छी आई ना?
08:06
Speaker A
जी जी, बहुत अच्छी नींद आई। इतना नरम बिस्तर। ओ हो हो हो, बताओ बेटा, तुम कितना सोना बोल रहे थे? सुना? ओ हां, अरे ये इतना, इतना मतलब इतना ही है ना? हां, हर दिन शायद एक जैसा ना हो।
08:25
Speaker A
हर दिन? हां, हर दिन। मुझे कितना मिलेगा हुजूर? देखो, अगर ₹10,000 होगा तो तुम जितना बोल रहे हो उसमें ₹1 लाख तक हो जाएगा। हां। हर दिन ₹1 लाख मिलेगा। तो कहां है तुम्हारा बस सोना? बताओ। सोना नहीं, सोना तो नहीं है।
08:44
Speaker A
मतलब कल से जो कहे जा रहे हो, हथेली भर। बोलो नहीं, मेरी गाय जो गोबर करती है ना, तब ऐसे ही एक हथेली भर करती है। हां, मैं सोच रहा था कि अगर वो गाय गोबर न करके सोना
09:00
Speaker A
देती तो फिर मुझे कितनी कीमत मिल जाती। बदतमीज, मेरे साथ मस्ती करने आया है क्या?
09:08
Speaker A
अरे मैं तो पता करने आया था। मेरी क्या गलती है? निकम्मा कहीं का, मेरे पैसों का खाना खाया। मेरे पलंग पर सोया। गोबर को सोना दिखाकर निकल निकल जा यहां से, अभी के अभी निकल जा यहां से। मैं कह रहा हूं ना
09:32
Speaker A
[संगीत] या [हंसी]
Topics:सोने का गोबरकिसान कहानीजमींदार अत्याचारमहाजनहिंदी कहानीसॉफ्टून एनिमेशनहिंदी परी कथाएंचालाक किसानकिसान और जमींदारहिंदी लोककथा

Get More with the SozAI App

Transcribe recordings, audio files, and YouTube videos — with AI summaries and speaker detection. 30 minutes free.

Or transcribe another YouTube video here →