निर्मा ब्रांड की शुरुआत, सफलता, और गिरावट की कहानी, जिसमें मार्केटिंग, प्राइसिंग और कॉम्पटीशन की भूमिका बताई गई है।
Key Takeaways
- सही प्राइसिंग और मार्केटिंग से ब्रांड तेजी से बढ़ सकता है।
- डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रेटेजी ब्रांड की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- ब्रांड की क्वालिटी और कंज्यूमर की उम्मीदों को पूरा करना जरूरी है।
- प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए निरंतर इनोवेशन आवश्यक है।
- ब्रांड इमेज और कंज्यूमर ट्रस्ट बनाए रखना जरूरी होता है।
What the video covers
- 1969 में कर्सन भाई पटेल ने गुजरात में निर्मा डिटर्जेंट पाउडर की शुरुआत की।
- निर्मा ने सस्ता प्राइस और डायरेक्ट डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल अपनाकर जल्दी लोकप्रियता हासिल की।
- निर्मा गर्ल मैस्कॉट और यादगार जिंगल ने ब्रांड की पहचान मजबूत की।
- निर्मा ने मिडिल और लोअर क्लास सेगमेंट में मार्केट शेयर हासिल किया।
- एचएलएल ने निर्मा को टक्कर देने के लिए लो कॉस्ट डिटर्जेंट लॉन्च किया।
- एचएलएल ने निर्मा की कमजोरियों जैसे खुशबू और पानी में घुलने की समस्या को समझा।
- निर्मा ने प्रोडक्ट लाइन एक्सपैंड की लेकिन ब्रांड की छवि कमजोर रही।
- निर्मा की मार्केट शेयर में गिरावट और कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण ब्रांड डिक्लाइन हुआ।
- ब्रांड मैनेजमेंट, प्राइसिंग और इनोवेशन की कमी निर्मा के पतन का कारण बनी।
- किसी भी फील्ड में नंबर वन बने रहना और नंबर वन बनना दो अलग चीजें हैं।
Chapters
- 00:00निर्मा की शुरुआत और प्रारंभिक सफलता
- 00:58निर्मा का ब्रांडिंग और मार्केटिंग स्ट्रेटेजी
- 01:54निर्मा का प्रोडक्शन विस्तार और डिस्ट्रीब्यूशन
- 02:46निर्मा की कीमत और उत्पादन रणनीति
- 04:36ओपी जिंदल एमबीए प्रोग्राम का परिचय
- 06:02निर्मा का विज्ञापन और ब्रांड इमेज
- 07:01निर्मा की प्रतिस्पर्धा और बाजार की चुनौतियाँ
- 08:01एचएलएल की रणनीति और निर्मा की कमजोरी
- 09:08निर्मा का पतन और बाजार में बदलाव
- 10:07निर्मा ब्रांड से सीख और निष्कर्ष
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Speaker A
साल 1969 गुजरात में एक 24 साल का लड़का साइकिल से घर-घर जाकर अपना येलो डिटर्जेंट पाउडर बेचना शुरू करता है। आगे चलकर यही पाउडर निर्मा के नाम से इंडिया का नंबर वन डिटर्जेंट ब्रांड बन जाता है, लेकिन फिर
Speaker A
आखिर ऐसा क्या हुआ कि इसी निर्मा की सेल्स अचानक गिरने लगती हैं और अल्टीमेटली इसका कंप्लीट डाउनफॉल हो जाता है। इन सब की शुरुआत हुई करीब 55 साल पहले गुजरात में रहने वाले कर्सन भाई पटेल एक गवर्नमेंट डिपार्टमेंट में केमिस्ट की नौकरी करते थे।
Speaker A
लेकिन उनकी सैलरी घर चलाने के लिए सफिशिएंट नहीं थी। इसीलिए उन्होंने साइड इनकम कमाने के लिए एक छोटा सा बिजनेस स्टार्ट करने का फैसला लिया। बीएससी की डिग्री और केमिस्ट की नौकरी होने के कारण उन्हें केमिकल्स की अच्छी समझ थी। इसीलिए
Speaker A
उन्होंने अपने घर में ही सोडा ऐश और बाकी कुछ केमिकल्स के साथ एक्सपेरिमेंट करना चालू किया। कई बार फेल होने के बाद उन्होंने फाइनली एक अफोर्डेबल और इफेक्टिव डिटर्जेंट पाउडर बना लिया और अपनी इस इन्वेंशन का नाम अपनी 1 साल की बेटी
Speaker A
निरूपमा के नाम पर निर्म रख दिया। उन्होंने सिंपल प्लास्टिक पैकेट्स में पाउडर को पैक किया और अगले ही दिन से साइकिल पे घर-घर जाकर उसे बेचने लगे। उस समय ज्यादातर मिडिल और लोअर क्लास में आने वाले लोग कपड़े
Speaker A
धोने के लिए लॉन्ड्री सोप यूज किया करते थे। येलो कलर का ये लॉन्ड्री सोप काफी सस्ता तो पड़ता था, लेकिन हार्ड स्टेंस यानी जिद्दी दागों को क्लीन नहीं कर पाता था। वहीं दूसरी तरफ अपर क्लास लोग डिटर्जेंट पाउडर का इस्तेमाल करते थे जो
Speaker A
इंडिया के हार्ड वाटर में भी अच्छे से काम करता था और हर तरह के दाग हटाने के लिए इफेक्टिव था। डिटर्जेंट पाउडर के मार्केट को हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड यानी एचएलएल का सर्फ डोमिनेट करता था, लेकिन इसका प्राइस था ₹1 पर केजी, जिस कारण मिडिल
Speaker A
क्लास और लोअर क्लास इसे अफोर्ड नहीं कर सकते थे। इसीलिए यहां एक अपॉर्चुनिटी देखते हुए कर्सन भाई ने निर्मा को केवल ₹ पर किलो में बेचना चालू किया। मतलब लोगों को पहली बार लॉन्ड्री सोप के प्राइस पे डिटर्जेंट पाउडर मिलने वाला था, जिस कारण
Speaker A
कुछ ही टाइम में निर्मा बहुत पॉपुलर हो गया और कर्सन भाई दिन का 200 किलो डिटर्जेंट पाउडर बेचने लगे। जब डिमांड और भी ज्यादा बढ़ने लगी तो कर्सन भाई ने अहमदाबाद के पास सरसपुर में एक छोटा सा शेड लगवा लिया और प्रोडक्शन के लिए लेबर
Speaker A
हायर करने लगे। साथ में उन्होंने अपनी पैकेजिंग को भी इंप्रूव किया और इसमें निर्मा गर्ल को ऐड किया, जो आगे चलकर इंडिया की वन ऑफ द मोस्ट रिकॉग्नाइज्ड ब्रांड मैस्कॉट बन गई। कर्सन भाई का अगला टारगेट था डिस्ट्रीब्यूशन को इंप्रूव करना।
Speaker A
उस समय केवल अहमदाबाद में 2000 से ज्यादा रिटेलर्स थे और ग्रो करने के लिए उन्हें इन दुकानों में निर्मा को अवेलेबल करवाना था, लेकिन एक नया ब्रांड होने के कारण कई रिटेलर्स निर्मा को अपने शॉप में जगह नहीं
Speaker A
देना चाहते थे। इससे डील करने के लिए कर्सन भाई ने एक कमाल की स्ट्रेटेजी अपनाई। उन्होंने कुछ फीमेल्स को हायर किया और उन्हें एक-एक करके रिटेलर्स के यहां जाकर निर्मा खरीदने को कहा। इससे रिटेलर्स को लगने लगा कि निर्मा वॉशिंग पाउडर की
Speaker A
डिमांड बहुत अच्छी है और डिमांड ना पूरी करने के कारण उन्हें लॉस हो रहा है। इसीलिए उन्होंने खुद ही कर्सन भाई को कांटेक्ट करके निर्मा को अपनी शॉप में रखना चालू कर दिया। देखते ही देखते निर्मा अहमदाबाद और
Speaker A
आसपास के सभी गांव में नंबर वन डिटर्जेंट पाउडर बन गया और अब टाइम आ चुका था पूरे गुजरात में एक्सपेंड करने का। कर्सन भाई को पता था कि अगर उन्हें गुजरात में और इवन पूरे इंडिया में सर्फ जैसे ब्रांड्स को
Speaker A
बीट करना है तो उनका केवल एक मेन एडवांटेज था, निर्मा का सस्ता प्राइस और वो अपने प्राइस को किसी भी हाल में बढ़ने नहीं देना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने एक्सपेंशन के दौरान भी निर्मा के फार्मूला को शुरुआत की ही तरह सिंपल रखा। निर्मा में 65 पर तो
Speaker A
केवल सोडा ऐश रहता था, जो गुजरात में लोकली सस्ते में मिल जाता था। सर्फ के मुकाबले इसमें केवल आधा एक्टिव डिटर्जेंट होता था और फाइनली ना कोई वाइटनर होता था और ना ही कोई परफ्यूम्स। इसके अलावा प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कर्सन भाई ने शुरुआत में
Speaker A
बड़ी-बड़ी फैक्ट्रीज नहीं डाली, बल्कि अलग-अलग गांव में शेड्स लगवाने लगे। जहां सर्फ की मैन्युफैक्चरिंग में महंगी मशीनें और इलेक्ट्रिसिटी का यूज होता था, वहीं निर्मा का प्रोडक्शन पूरी तरह मैनुअल लेबर्स करते थे, जो काफी कॉस्ट इफेक्टिव था और गवर्नमेंट की स्कीम के चलते बिना
Speaker A
इलेक्ट्रिसिटी के ऑपरेट करने के कारण उन्हें 15 पर का एक्साइज ड्यूटी पे रिबेट भी मिलती थी। फाइनली सर्फ को कस्टमर तक पहुंचने के लिए चार स्टेजेस से गुजरना पड़ता था, वहीं निर्मा केवल तीन स्टेजेस में ही कस्टमर तक पहुंच जाता था। इस
Speaker A
डायरेक्ट सिस्टम से ना केवल कॉस्ट कम होता था बल्कि स्पीड भी बढ़ती थी। इन सब के चलते निर्मा का प्राइस हमेशा कंट्रोल में रहा और इसीलिए 1975 तक वो पूरे गुजरात में एक्सपेंड कर चुके थे। निर्मा की सक्सेस के
Speaker A
पीछे परफेक्ट प्राइसिंग, मार्केट अंडरस्टैंडिंग और डिस्ट्रीब्यूशन इनोवेशन का बहुत इंपॉर्टेंट रोल था। इन सभी बिजनेस एस्पेक्ट्स को डीप समझना ही आज की मॉडर्न ए एमबीए एजुकेशन का कोर है। इसीलिए आज मैं आपको इंडिया की नंबर वन प्राइवेट यूनिवर्सिटी ओपी जिंदल के वन ईयर ऑनलाइन
Speaker A
एमबीए प्रोग्राम के बारे में बताना चाहता हूं। गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने ओपी जिंदल को इंस्टिट्यूट ऑफ एमिनेंट का स्टेटस दिया है। पूरे इंडिया में यह स्टेटस केवल चार प्राइवेट यूनिवर्सिटीज और आठ पब्लिक इंस्टीट्यूट्स के पास है, इंक्लूडिंग आईआईटी एंड इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस।
Speaker A
प्रोग्राम की खास बात यह है कि ये ट्रेडिशनल टू ईयर एमबीए की जगह सिर्फ एक साल का है। इस प्रोग्राम में सात इंडस्ट्री रिलेवेंट स्पेशलाइजेशंस भी हैं और फैकल्टी का एक्सपीरियंस वर्ल्ड क्लास है। आईएएम एलर आई और पीएचडी क्वालिफाइड प्रोफेसर्स
Speaker A
जिन्होंने मैकेंजी बैंक ऑफ अमेरिका जैसी ग्लोबल कंपनीज में काम किया है और आईआईएम बी और आईआईएमआर जैसे प्रेस्टीजियस इंस्टीट्यूशंस में पढ़ाया भी है। और क्योंकि अपग्रेड इनका टेक्नोलॉजी पार्टनर है, आप इस प्रोग्राम को अपग्रेड के थ्रू कहीं से भी कर सकते हैं, वो भी बिना किसी
Speaker A
ब्रेक के और वो भी केवल 6790 की अफोर्डेबल ईएमआई पे करके। प्लस आप 12 मंथ्स के इस प्रोग्राम की ईएमआई 24 मंथ्स में पे कर सकते हो और आल्सो इस चैनल के व्यूवर्स के लिए ₹5000000 मानते हैं। इसीलिए इस ऐड में थोड़ा सा
Speaker A
पाउडर और झाग, ढेर सारा इस लाइन को ऐड किया गया। साथ में कम कीमत में अधिक सफेदी इस प्रॉमिस ने भी कंज्यूमर्स को अट्रैक्ट किया। फाइनली इस जिंगल की लिरिक्स और ट्यून काफी मेमोरेबल थी, जिस कारण बहुत जल्द
Speaker A
निर्मा के ब्रांड ने कंज्यूमर्स के माइंड शेयर को कैप्चर कर लिया। 1982 में निर्मा ने इसी जंगल के साथ अपना पहला टीवी ऐड भी लॉन्च किया, जिसमें उन्होंने अपनी आइकॉनिक डांसिंग गर्ल मैस्कट को फीचर किया। रेडियो ऐड की तरह यह ऐड भी काफी सक्सेसफुल रहा।
Speaker A
वाशिंग पाउडर निर्मा, वाशिंग पाउडर निर्मा, निर्मा। इसीलिए 1977 तक 12 पर और फिर 1985 तक करीब 60 पर मार्केट शेयर के साथ निर्मा इंडिया का सबसे बड़ा डिटर्जेंट ब्रांड बन गया। जिस निर्मा को कर्स भाई ने साइड इनकम
Speaker A
कमाने के लिए शुरू किया था, आज उसी निर्मा ने कर्सन भाई को पूरे भारत का डिटर्जेंट किंग बना दिया था। लेकिन अनफॉर्चूनेटली ये सक्सेस ज्यादा देर तक नहीं टिकने वाली थी क्योंकि बहुत जल्द मार्केट का पुराना खिलाड़ी पलटवार करने वाला था। शुरुआत में
Speaker A
तो निर्मा ने केवल मिडिल और लोअर इनकम सेगमेंट्स को कैप्चर किया था, लेकिन इवेंचर क्लास कस्टमर्स भी निर्मा में शिफ्ट होने लगे थे क्योंकि उन्हें यह क्लेरिटी ही नहीं थी कि सर्फ की क्वालिटी किन मायनों में निर्मा से बेटर है। ऊपर से 1986 में
Speaker A
निर्मा ने एक डिटर्जेंट बार लॉन्च करके एचएलएल के रिन बार को डायरेक्ट चैलेंज कर दिया, जिससे रिन के भी कई कस्टमर्स निर्मा बार में शिफ्ट होने लगे। लेकिन अब एचएलएल को समझ आ चुका था कि निर्मा उनके पूरे ही
Speaker A
बिजनेस के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन चुका है। इसीलिए हिंदुस्तान लिवर लिमिटेड ने इंटरनली एक सीक्रेट मिशन लॉन्च किया, जिसका कोड नेम था स्टिंग यानी स्ट्रेटजी टू इन्हिबिटिंग। को डीप स्टडी किया गया और फिर एचएलएल की काउंटर स्ट्रेटेजी डेवलप की गई।
Speaker A
कई हफ्तों बाद यह कंक्लूजन निकला कि निर्मा से कंपीट करने के लिए एचएलएल को भी अपना डिटर्जेंट पाउडर लो कॉस्ट में ही बेचना पड़ेगा। लेकिन अगर वह सर्फ को निर्मा की प्राइस पे बेचते तो उन्हें प्रॉफिट्स की जगह लॉस हो जाता। साथ में सालों से बनाई
Speaker A
हुई सर्फ की प्रीमियम ब्रांड इमेज भी डिस्ट्रॉय हो जाती। इसीलिए एचएलएल ने फाइनली अपना खुद का लो कॉस्ट डिटर्जेंट पाउडर लॉन्च करने का फैसला किया। लेकिन उससे पहले उन्होंने एक मार्केट रिसर्च की, जिससे उन्हें निर्मा की वीकनेसेस पता चल
Speaker A
गई जैसे कि निर्मा से कपड़े धोने पर उनमें खुशबू नहीं बल्कि एक इंडस्ट्रियल स्मेल रह जाती थी और निर्मा पूरी तरह पानी में डिजॉल्वेशन और ब्लिस्टर्स हो जाते थे। इन सब को ध्यान में रखते हुए एचएलएल ने सबसे
Speaker A
पहले अपने डिटर्जेंट पाउडर में एक प्लेजट फ्रेगरेंस ऐड कर दी। सेकेंड इसे हाथों के लिए जेंटल बनाया और इंश्योर किया कि यह पाउडर पानी में कंप्लीट डिजॉल्ड्रिंग में। सॉल्ट एक बहुत इंपॉर्टेंट रॉ मटेरियल था। इसीलिए एचएलएल ने अपनी नई फैक्ट्री को
Speaker A
गुजरात में सॉल्ट माइंस के बगल में एस्टेब्लिश किया और सॉल्ट माइन से एक डायरेक्ट पाइपलाइन कनेक्ट कर ली। आल्सो इन्होंने आरन में मैसिव इन्वेस्टमेंट्स करके डिटर्जेंट में डलने वाले फ्र...
Speaker A
डिटर्जेंट पाउडर बना लिया जिसका प्राइस तो निर्मा के बराबर था लेकिन क्वालिटी बहुत बेटर थी और इसी तरह लॉन्च हुआ व्हील डिटर्जेंट पाउडर निर्मा को डायरेक्टली टारगेट करने के लिए व्हील के एड्स में कहा गया कि मैंने मांगी थी सफाई और तूने दी
Speaker A
हाथों की जलन यह मैसेज निर्मा के कस्टमर्स को काफी रिलेटेबल लगा और वो व्हील पे तेजी से शिफ्ट होने लगे एज अ रिजल्ट 1990 तक व्हील निर्मा के बाद इंडिया का सेकंड बिगेस्ट डिटर्जेंट ब्रांड बन गया था साथ में
Speaker A
एचएलएल ने निर्मा को टारगेट करते हुए सर्फ के भी नए ऐड कैंपेन लॉन्च किए जिसमें उन्होंने ललिता जी नाम की एक समझदार हाउसवाइफ के कैरेक्टर को दिखाया जिनका कहना था कि सस्ती चीज खरीदने में और अच्छी चीज खरीदने में फर्क होता है ऐड में
Speaker A
निर्मा को रिप्रेजेंट करने वाले येलो पाउडर और सर्फ के ब्लू पाउडर का कंपैरिजन भी दिखा के यह कहा गया आधा किलो सर्फ पूरे एक किलो सस्ते पाउडर के बराबर होता है एचएलएल की ये सभी स्ट्रेटजी काफी इफेक्टिव साबित हुई जिस कारण एचएलएल का
Speaker A
मार्केट शेयर 11 पर से बढ़कर 24 पर हो गया और निर्मा का मार्केट शेयर 60 पर से गिर के 50 पर पे आ गया लेकिन निर्मा के बुरे दिनों की यह तो केवल शुरुआत थी क्योंकि इसी दौरान यूपी की गलियों से एक ऐसा
Speaker A
कंपीटीटर निकल के आ रहा था जो निर्मा को पूरी तरह से खत्म कर देने वाला था और वह कंपट था घड़ी डिटर्जेंट पाउडर 19 80 में डिटर्जेंट मार्केट के बूम को देखते हुए कानपुर के दो भाई मुरलीधर और विमल कुमार
Speaker A
ने अपना खुद का डिटर्जेंट पाउडर लॉन्च किया उन्होंने देखा कि सस्ते डिटर्जेंट की कैटेगरी में ऑलरेडी निर्मा और व्हील डोमिनेट कर रहे हैं और साथ ही साथ इंडिया की पर कैपिटा इनकम लगातार बढ़ रही है मतलब हर साल करोड़ों लोग लोअर क्लास से मिडिल
Speaker A
क्लास में प्रमोट हो रहे थे और इन मिडिल क्लास लोगों को केवल सस्ता पाउडर नहीं चाहिए था बल्कि इन्हे अफोर्डेबल प्राइस में हाई वैल्यू प्रोडक्ट चाहिए था इसी के साथ इन्होंने लॉन्च किया घड़ी डिटर्जेंट पाउडर जिसकी क्वालिटी ना केवल निर्मा से
Speaker A
बेटर थी बल्कि इसका प्राइस भी निर्मा से 10 पर ज्यादा था जिस कारण कस्टमर्स ऑटोमेटिक घड़ी को बेटर क्वालिटी वाला डिटर्जेंट मानने लगे और इस 10 पर एक्स्ट्रा प्राइस के चलते घड़ी ने अपने डीलर्स और रिटेलर्स को कंपटीशन से ज्यादा
Speaker A
कमीशन दिया जिस कारण ये रिटेलर्स कस्टमर्स को सबसे पहले घड़ी डिटर्जेंट रिकमेंड करने लगे और सेल्स ऑर्गेनिकली बढ़ने लगी डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट को कम रखने के लिए घड़ी ने 200 किमी मैन्युफैक्चरिंग मॉडल अपनाया जिसमें वह हर इंपॉर्टेंट मार्केट के 200 किमी के रेडियस में अपना स्मॉल
Speaker A
मैन्युफैक्चरिंग प्लांट या डिपो सेटअप करने लगे इससे घड़ी का स्टॉक हमेशा हर एक दुकान में अवेलेबल रहता था और शिपिंग में भी पैसे बचते थे फाइनली घड़ी ने अपने ऐड कैंपस में एक ऐसा जिंगल यूज किया जिसने कस्टमर्स को मैग्नेट की तरह खींच लिया और
Speaker A
वो जिंगल था इ इस्तेमाल करें र विश्वास करें इन्हीं स्ट्रेटेजी के चलते घड़ी आगे चलके इंडिया का नंबर वन डिटर्जेंट ब्रांड बनने वाला था दूसरी तरफ निर्मा 1990 में लगातार मार्केट शेयर लूज कर रहा था और सरवाइव करने के लिए उन्हें मेजर चेंजेज की
Speaker A
जरूरत थी सबसे पहले तो उन्हें अपने प्रोडक्ट में सोडा ऐश की क्वांटिटी कम करने की जरूरत थी क्योंकि इसी से हाथों में इरिटेशन होता था और लॉन्ग टर्म में कपड़े भी डैमेज होते थे साथ ही फ्रेगरेंस और एक्टिव डिटर्जेंट की क्वांटिटी भी
Speaker A
इंक्रीज करना इंपॉर्टेंट था उस दौरान निर्मा ने समसिका मार्केटिंग कंसल्टेंट्स नाम की एजेंसी से एक मार्केट सर्वे भी करवाया था जिससे पता चला था कि ज्यादातर कस्टमर्स एंबैरेस्ड फील करते थे कि वो निर्मा यूज करते हैं मतलब निर्मा की इमेज
Speaker A
एक इनफीरियर ब्रांड की बन चुकी थी और उसे सीरियस मेकओवर की जरूरत थी इसीलिए निर्मा को अपनी पुरानी हो चुकी पैकेजिंग को बेटर बनाना चाहिए था ताकि वो इनफीरियर ना लगे और फाइनली नए एडवरटाइजिंग कैंपस लॉन्च करके व्हील और सर्फ के ऐड कैंपस को काउंटर
Speaker A
भी करना चाहिए था और अपने प्रोडक्ट को केवल एक चीप डिटर्जेंट की जगह एक वैल्यू फॉर मनी डिटर्जेंट की तरह पोजीशन करना चाहिए था लेकिन निर्मा ने इनमें से कुछ भी नहीं किया अपने कोर प्रोडक्ट पे फोकस करने
Speaker A
की जगह उन्होंने सर्फ को बीट करने के लिए प्रीमियम डिटर्जेंट मार्केट में एंट्री ले ली जिससे सिचुएशन और बिगड़ गई मिड 1990 में उन्होंने अपना निर्मा ब्लू पाउडर लॉन्च किया लेकिन इस समय तक प्रीमियम डिटर्जेंट मार्केट में केवल सर्फ नहीं
Speaker A
बल्कि एरियल भी अपने पैर जमा चुका था और इन दोनों के कंपैरिजन में निर्मा ब्लू ने कुछ भी नया और बेटर ऑफर नहीं किया था लेकिन प्रोडक्ट से भी ज्यादा निर्मा ब्लू का परसेप्शन खराब था जहां एचएलएल ने
Speaker A
जानबूझ के अपने प्रीमियम डिटर्जेंट और अफोर्डेबल डिटर्जेंट का नाम बिल्कुल अलग रखा था वहीं निर्मा के प्रीमियम डिटर्जेंट के नाम में भी निर्मा इंक्लूडेड था जिस कारण कस्टमर्स इसे भी एक इनफीरियर प्रोडक्ट की तरह ही पर्सीव करने लगे और
Speaker A
निर्मा ब्लू भी कुछ ही सालों में फेल हो गया सिमिलरली निर्मा ने और भी प्रोडक्ट्स लॉन्च किए जैसे निर्मा बाथिंग सोप निर्मा हेयर ऑयल निर्मा शैंपू और निर्मा टूथपेस्ट उन्हें लगा कि इन सभी प्रोडक्ट्स को निर्मा की पॉपुलर ब्रांडिंग का फायदा
Speaker A
मिलेगा लेकिन हुआ इसका बिल्कुल उल्टा पहले तो जो लोग निर्मा के ब्रांड को पसंद करते भी थे वो से केवल डिटर्जेंट प्रोडक्ट से ही रिलेट कर पाते थे इसीलिए निर्मा का साबुन तेल और शैंपू उन्हें अट्रैक्टिव नहीं लगता था और दूसरा निर्मा के एक
Speaker A
इनफीरियर ब्रांड के परसेप्शन के कारण भी किसी ने उनके यह दूसरे प्रोडक्ट्स नहीं खरीदे 2017 आते-आते निर्मा का मार्केट शेयर केवल 4 पर पे रह गया ब्रांड को रिवाइव करने के लिए इन्होंने निर्मा एडवांस लॉन्च किया और ऋतिक रोशन से इसका
Speaker A
ऐड भी करवाया जिसकी मैसेजिंग थी नए जमाने के जिद्दी दागों के लिए निर्माण मास लेकिन कंज्यूमर्स ने डिटर्जेंट के ऐड में ऋतिक रोशन से कनेक्ट ही नहीं किया और नए जमाने के जिद्दी दागों से निर्मा क्या कहना चाहता था यह भी क्लियर नहीं था
Speaker A
फॉर्चूनेटली निर्मा ने टाइम रहते सोडा एश मैन्युफैक्चरिंग सीमेंट और एजुकेशन जैसे सेक्टर्स में डायवर्सिफाई कर लिया था जिससे एज अ कंपनी वो आज भी काफी पैसे कमाते हैं लेकिन वो डिटर्जेंट बिजनेस जिससे इन सब की शुरुआत हुई वो आज काफी हद
Speaker A
तक डिक्लाइन हो चुका है निर्मा की कहानी यह प्रूफ करती है कि किसी भी फील्ड में नंबर वन बनना और नंबर वन बने रहना दो अलग-अलग चीजें हैं और चाहे आप कितने भी बड़े बन जाओ इफ यू आर नॉट चेंजिंग यू आर
Speaker A
लूजिंग अगर आपको यह वीडियो अच्छी लगी तो मैं रिकमेंड करूंगा कि आप नेक्स्ट इस वीडियो को देखें
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