दिल्ली के एक होमलेस ढाबा वेटर से ₹1,000 करोड़ की रेस्टोरेंट चेन बनाने वाले राघवेंद्र राव की प्रेरणादायक कहानी।
Key Takeaways
- संघर्ष और हार न मानने की भावना से बड़ी सफलता मिलती है।
- व्यापार में विजन और पार्टनर्स के साथ सामंजस्य जरूरी है।
- ग्राहक सेवा और गुणवत्ता से ब्रांड की पहचान बनती है।
- सपनों को पूरा करने के लिए सही समय पर सही निर्णय लेना आवश्यक है।
- व्यापार को सामाजिक सेवा के रूप में देखने से दीर्घकालिक सफलता मिलती है।
What the video covers
- राघवेंद्र राव का बचपन संघर्षपूर्ण था, उन्होंने कई पार्ट टाइम जॉब्स किए और एक्टिंग का सपना देखा।
- फिल्म इंडस्ट्री में सफलता न मिलने पर उन्होंने फूड बिजनेस में कदम रखा।
- 2012 में इडली, डोसा और कॉफी पर आधारित IDC ब्रांड की शुरुआत की।
- IDC ब्रांड को विस्तार देने के लिए उन्होंने अपने लॉयल कस्टमर्स को पार्टनर बनाया।
- पार्टनर्स के बिजनेस माइंडसेट और राघव के विजन में टकराव हुआ, जिससे उन्होंने IDC छोड़ दिया।
- दिव्या के साथ मिलकर उन्होंने रामेश्वरम कैफे नामक एक नया ब्रांड बनाया, जो ऑथेंटिक साउथ इंडियन फूड को ग्लोबल स्तर पर ले जाना चाहता है।
- रामेश्वरम कैफे का डिजाइन और संचालन मंदिरों से प्रेरित है, और यह सेवा को व्यापार से ऊपर मानता है।
- राघव और दिव्या की जोड़ी ने बिजनेस को नई दिशा दी और फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए विस्तार किया।
- फूड बिजनेस में गुणवत्ता, सेवा और ग्राहक अनुभव को प्राथमिकता दी गई।
- रामेश्वरम कैफे अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की योजना बना रहा है।
Chapters
- 00:00राघवेंद्र राव का संघर्ष और बचपन
- 01:15फिल्म इंडस्ट्री में असफल प्रयास और संघर्ष
- 03:15फूड बिजनेस में शुरुआत और IDC ब्रांड
- 04:26IDC ब्रांड का विस्तार और पार्टनरशिप की चुनौतियां
- 05:30दिव्या से मुलाकात और नया बिजनेस विजन
- 06:38रामेश्वरम कैफे की स्थापना और डिजाइन प्रेरणा
- 10:06रामेश्वरम कैफे का संचालन और फ्रेंचाइजी मॉडल
- 11:08ब्रांड की सफलता और भविष्य की योजनाएं
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Speaker A
साल 2005, एक 22 साल का लड़का दिल्ली के एक रोडसाइड ढाबा में नौकरी करता था। वो होमलेस था, इसीलिए इस टेंपल से लगे हुए पार्क में सोता। और खाने के लिए डेली मंदिर की फ्री प्रसाद लाइन में लगा करता।
Speaker A
लेकिन उस वक्त उसने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वो खुद एक ऐसी रेस्टोरेंट चेन बिल्ड कर देगा जहां लोग उसका खाना खाने के लिए लाइन लगाएंगे। और इसी चैन के अंदर वो एक ऐसा रेस्टोरेंट बनाएगा जो पूरी
Speaker A
दुनिया का सबसे बड़ा रेस्टोरेंट कहलाएगा। यह है कहानी द रामेश्वरम कैफे की। आज से करीब 40 साल पहले इंडिया की गार्डन सिटी बेंगलुरु में जन्म होता है राघवेंद्र राव का। फैमिली की फाइनेंशियल कंडीशन नाजुक थी। जिस कारण राघव को बचपन में ही
Speaker A
न्यूज़पेपर डिलीवरी का काम करना पड़ा। स्कूल के बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग कॉलेज ज्वाइन किया और अपनी एजुकेशन को फंड करने के लिए ले मेरीडियन होटल में पार्ट टाइम जॉब करने लगे। जहां अगले कुछ सालों में उन्होंने क्लीनर, रिसेप्शनिस्ट, कैशियर और मैनेजर्स
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असिस्टेंट जैसे कई रोल्स निभाए। राघव को हमेशा से ही फिल्म इंडस्ट्री काफी पसंद थी और एक दिन कॉलेज के दौरान उनसे किसी ने कहा कि वो काफी कुछ रितिक रोशन जैसे दिखते हैं। उस वक्त कहो ना प्यार है जस्ट रिलीज
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हुई थी और रितिक रोशन रातों-रात एक सुपरस्टार बन गए थे। ऐसे में इस कंपैरिजन ने राघव को चार्ज्ड अप कर दिया। कुछ दिन बाद उन्होंने अपने फादर से कहा कि वह एक्टर बनना चाहते हैं। जिसके रिस्पांस में उनके फादर ने उन्हें एक जोर का थप्पड़
Speaker A
लगाया और साफ इंकार कर दिया। 19 साल के राघव खुद अपनी आंखों के सामने अपने सपने को मरते हुए देख रहे थे। ऐसे में उन्होंने अपनी लाइफ का सबसे मुश्किल फैसला लिया और एक दिन वो बिना किसी को बताए घर छोड़कर
Speaker A
निकल पड़े। अगले 2 सालों में उन्होंने कर्नाटका के अलग-अलग थिएटर्स को ज्वॉइ किया और वहां से एक्टिंग की ट्रेनिंग ली। थिएटर ने उन्हें क्राफ्ट तो दिया लेकिन पैसे नहीं दिए। इसीलिए वह पार्ट टाइम जॉब्स करके सर्वाइव करते रहे। 2 साल
Speaker A
ट्रेनिंग के बाद वह मुंबई आए। जहां उन्होंने अनुपम खेर फिल्म इंस्टिट्यूट में एडमिशन लेने की कोशिश की। लेकिन बहुत जल्द समझ आ गया कि यहां की फी पे करना उनके बस की बात नहीं है। मुंबई में वो रेगुलरली
Speaker A
शाहरुख खान के घर मन्नत के बाहर उनका पोस्टर लेकर घंटों खड़े रहते थे। केवल एसआरके की एक झलक के लिए। लेकिन उस वक्त उन्हें कोई अंदाजा नहीं था कि फ्यूचर में वह खुद एसआरके को अपने रेस्टोरेंट का फूड
Speaker A
सर्व करेंगे। मुंबई के बाद उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन लेने का ट्राई किया। लेकिन यहां भी उनका एप्लीकेशन रिजेक्ट हो जाता है क्योंकि वह एक ग्रेजुएट नहीं थे। इस वक्त पैसों की इतनी तंगी थी कि वह बिना ज्यादा
Speaker A
सोचे नेहरू प्लेस के एक ढाबे में नौकरी करने लगते हैं। वेटर, डिशवाशर और क्लीनर उन्होंने हर तरह का काम किया। इस दौरान इस्कॉन टेंपल के बगल का पार्क ही उनका घर था और इस्कॉन का फ्री प्रसाद उनका खाना।
Speaker A
इसके बाद फिल्म इंडस्ट्री में एक आखिरी कोशिश के लिए वह चेन्नई आ जाते हैं और वहां डांस, जिम्नास्टिक्स और स्टंट्स की ट्रेनिंग लेते हैं। उनका आईडिया था एक बैकग्राउंड डांसर या स्टंट डबल के तौर पर फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री लेना। इस
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दौरान वो एक स्लम में रहते थे। सत्यम सिनेमा के टिकट काउंटर में जॉब करते थे और मायलापुर के अलग-अलग मंदिरों में फ्री प्रसादम से गुजारा करते थे। लेकिन अब 6 साल के वनवास के बाद राघव का रियलिटी से
Speaker A
सामना हो ही जाता है। उन्होंने अपना सब कुछ दे दिया था। लेकिन फिल्म इंडस्ट्री से उन्हें रिटर्न में कुछ नहीं मिला था। उन्हें पता था कि अब अपनी लाइफ को रिसेट करने का टाइम आ चुका है। इसीलिए 2009 में
Speaker A
25 साल के राघव अचानक घर लौट आते हैं और सबसे पहले अपनी इंजीनियरिंग कंप्लीट करने का फैसला लेते हैं। पिछले कुछ सालों में उन्होंने होटल्स, रेस्टोरेंट्स और ढाबों में काम किया था और उन्हें फूड बिजनेस का ठीक-ठाक आईडिया लग गया था। इसीलिए
Speaker A
उन्होंने डिसाइड किया कि वह इंजीनियरिंग के बाद फूड बिजनेस में ही एंट्री लेंगे। 2012 में राघव ने अपने दोस्तों से करीब ₹ लाख बोरो किए और एक ट्राईकल पुश कार्ड से एक छोटा सा फूड बिजनेस स्टार्ट किया। उनके
Speaker A
एक दोस्त ने मिक्सर कंट्रीब्यूट कर दिया तो किसी ने कंटेनर्स और किसी ने यूटेंसिल्स। उनका मेन्यू काफी सिंपल था। इडली, डोसा और कॉफी। लेकिन डे वन से उनकी फिलॉसफी क्लियर थी। वो जो भी सर्व करेंगे उसे केवल प्योर घी में ही बनाएंगे। उनके
Speaker A
वेलकमिंग नेचर, हाइजीन और क्वालिटी फूड के चलते यह स्टॉल काफी सक्सेसफुल हो गया। 2 साल बाद उन्होंने इसी को एक ब्रांडेड रेस्टोरेंट में बदल दिया और इसका नाम रखा आईडीसी। आईडीसी मतलब इडली, डोसा कॉफी। लेकिन उनका पहला आउटलेट जो गांधीनगर में
Speaker A
था उसे फोर्सफुली बंद करवा दिया गया। क्योंकि आउटलेट के ऊपर ही एक लॉन्च था जिसका बिजनेस आईडीसी के कारण इफेक्ट हो रहा था। लेकिन नागरपेट में 450 स्क्वायर फीट का उनका अगला आउटलेट चल पड़ा। राघव का करिश्मा ही कुछ ऐसा था कि उनके लॉयल
Speaker A
कस्टमर्स बनते चले गए और इवेंचुअली यही लॉयल कस्टमर्स आईडीसी के बिजनेस में इन्वेस्टर्स बनना चाहते थे। राघव को भी एक्सपेंशन के लिए फंड्स और पार्टनर्स की जरूरत थी। इसीलिए उन्होंने इनमें से कई कस्टमर्स को अपना पार्टनर बना लिया और नए
Speaker A
आउटलेट्स खोलते चले गए। 202 तक आईडीसी की सात ब्रांचेस खुल चुकी थी। दुनिया के लिए राघव सक्सेसफुल थे। लेकिन अंदर ही अंदर वह घुटन महसूस कर रहे थे। क्योंकि राघव के लिए लोगों को खाना खिलाना केवल एक बिजनेस
Speaker A
नहीं था। वह एक सेवा थी। वहीं राघव के पार्टनर्स बिजनेस माइंडेड थे। राघव केवल प्योर घी यूज करना चाहते थे। लेकिन पार्टनर्स के लिए वो एक अननेसेसरी एक्सपेंस था। जिस कारण राघव अपनी खुद की बनाई कंपनी में ट्रैप्ड फील कर रहे थे।
Speaker A
लेकिन तभी कहानी में एंट्री होती है एक ऐसे इंसान की जिसने राघव की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। वैसे अगर आप खुद बिजनेस के हर एक एस्पेक्ट जैसे सेल्स, मार्केटिंग और टीम बिल्डिंग सीखना चाहते हो तो आप
Speaker A
बिल्कुल फ्री में ज्वॉइ कर सकते हो। इंडिया का सबसे बड़ा टेक एंड बिजनेस इवेंट ओडू एक्सपीरियंस 2026 जहां आपको 6 महीने की नॉलेज 2 दिन में मिलेगी जो 11th और 12th सप्टेंबर को होने वाला है महात्मा मंदिर गांधीनगर गुजरात में। यहां 200 से
Speaker A
ज्यादा सेशंस होंगे जहां ऑलमोस्ट हर टाइप के बिजनेस को कवर किया जाएगा। जैसे रेस्टोरेंट में सेल्फ ऑर्डरिंग कैसे लगाना है? होटल्स अपने ऑपरेशंस को डिजिटली कैसे मैनेज करते हैं या अपना ऑनलाइन क्लोथिंग स्टोर कैसे लॉन्च करना है? बिजनेस सेशंस के
Speaker A
अलावा यहां इन्फ्लुएंसर सेशंस भी होंगे। जैसे लास्ट ईयर अमन गुप्ता और थिंग स्कूल ने सेशंस लिए और मैंने खुद भी यहां कंटेंट क्रिएशन पे सेशन लिया था। इवेंट में पूरे इंडिया से हजारों अटेंडस और बिजनेस ओनर्स होंगे जिनसे आप नेटवर्किंग कर सकते हो और
Speaker A
फाइनली कॉन्सर्ट, डिलीशियस फूड और आफ्टर पार्टी भी एंजॉय कर सकते हो और आप बिल्कुल फ्री में इस इवेंट के लिए रजिस्टर कर सकते हो। लेकिन याद रखिए पाससेस लिमिटेड है। लिंक नीचे डिस्क्रिप्शन और पिन कमेंट में है। और वो इंसान थी दिव्या। दिव्या खुद एक
Speaker A
मिडिल क्लास फैमिली से आती थी और एक्सट्रीम वर्क एथिक फॉलो करके चार्टर्ड अकाउंटेंट बनी थी। आईडीसी के फाइनेंससेस और कंप्लायंसेस मैनेज करने के लिए राघव ने दिव्या को अप्रोच किया था। पूरे बिजनेस का डिटेल्ड एनालिसिस और हर एक पार्टनर से
Speaker A
इंडिविजुअली मिलने के बाद दिव्या का एनालिसिस क्लियर था। राघव और उनके बाकी डायरेक्टर्स का विजन बिल्कुल अलग था। लेकिन राघव ने इंपल्सिवली डिसीजन लेकर बिजनेस का काफी कंट्रोल उन पार्टनर्स को दे दिया था। जिसके चलते अब राघव के लिए
Speaker A
अपना विजन अचीव करना इंपॉसिबल था। यह पूरी प्रोसेस करीब 4 महीने चली। जिस दौरान राघव और दिव्या पहले फ्रेंड्स बने और फिर एक दूसरे को चाहने लगे। राघव को दिव्या के एनालिसिस पे इतना कन्विक्शन था कि उन्होंने उसके बेसिस पे अपनी लाइफ का सबसे
Speaker A
बड़ा डिसीजन लिया। बिना एक भी रुपए लिए उन्होंने आईडीसी को छोड़ दिया। सभी को लगा कि राघव की कहानी खत्म हो चुकी है। लेकिन उनके लिए तो असली शुरुआत ही अब होने वाली थी। राघव ने देखा कि बेंगलुरु में अच्छे
Speaker A
ऑथेंटिक साउथ इंडियन फूड की कोई कमी नहीं थी। यहां एमटीआर जैसा लेजेंड्री आउटलेट था जो पिछले 100 साल से ऑपरेट कर रहा था और लिटरली हजारों दर्शनी स्टाइल आउटलेट्स थे जैसे कैफे दर्शनी और ताजा ठिंडी। लेकिन एक प्रॉब्लम थी इनमें से ज्यादातर केवल
Speaker A
बेंगलुरु तक ही लिमिटेड रह गए थे। कोई भी रेस्टोरेंट इंटरनेशनल तो दूर नेशनल ब्रांड भी नहीं बन पाया था। इसीलिए राघव ने ठान लिया कि वह एक ऐसा ब्रांड बनाएंगे जिसमें ऑथेंटिक साउथ इंडियन फूड को ग्लोबल लेवल पर ले जाने का दम हो। उन्होंने यह आईडिया
Speaker A
दिव्या को पिच किया और उन्हें साथ जुड़ने को कहा। लेकिन दिव्या के लिए यह बिजनेस ज्वाइन करना आसान नहीं था। उनकी खुद की सीए प्रैक्टिस से वह एनुअली करीब ₹3 करोड़ कमा रही थी। और आईसीआई के रूल्स के अकॉर्डिंग
Speaker A
खुद का बिजनेस स्टार्ट करने के लिए उन्हें पहले अपना सीए सर्टिफिकेट सरेंडर करना पड़ता। लेकिन इसके बावजूद राघव पर उनका भरोसा इतना स्ट्रांग था कि उन्होंने करोड़ों की सीए प्रैक्टिस को रातोंरात छोड़ दिया। अपने स्ट्रगल डेज में राघव ने
Speaker A
दिल्ली और चेन्नई के मंदिरों में प्रसादम ग्रहण किया था और उस दौरान मंदिरों के एंबियंस, आर्किटेक्चर, फूड का अरोमा और प्योरिटी ने उन्हें डीपली इंस्पायर कर दिया था। अपने नए रेस्टोरेंट से।
Speaker A
चाहते थे। उनके लिए उनका नया रेस्टोरेंट एक टेंपल था। रेस्टोरेंट का किचन गर्भ गृह था। उनके कुक्स टेंपल के पुजारी थे। कस्टमर्स डिवोटीज थे और फूड प्रसादम था। इसी विज़ के साथ 202 में बेंगलुरु के इंदिरा नगर में ओपन हुआ द रामेश्वरम कैफे।
Speaker A
रामेश्वरम नाम इसीलिए क्योंकि दोनों राघव और दिव्या रामेश्वरम टेंपल से डीपली कनेक्टेड फील करते थे। और राघव के लिए डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम एक बहुत बड़ी इंस्पिरेशन थे। जिनका होमटाउन था रामेश्वरम। कैफे के लोगो के पीछे भी एक
Speaker A
कहानी है। साउथ इंडियन टेंपल्स के बाहर कोलम एक टाइप की रंगोली बनाई जाती है। मान्यता है कि इससे नेगेटिव एनर्जी अंदर नहीं आती। रामेश्वरम कैफे का लोगो इसी कोलम से इंस्पायर्ड है। इन्होंने यह भी देखा कि इंडिया के सभी हिस्टोरिक टेंपल्स
Speaker A
स्टोन से बने हैं। इसीलिए इन्होंने भी अपने कैफे को ब्लैक बसाल्ट स्टोन से बना हुआ लुक दिया जो कैलाश टेंपल से काफी इंस्पायर्ड फील होता है। कई इंटीरियर डिजाइन एलिमेंट्स भी टेंपल से इंस्पायर्ड हैं। और इवन टेंपल की ही तरह आउटलेट को
Speaker A
फ्लावर्स और गार्लैंड से सजाने का सोचा। यहां डे वन से कभी भी किचन में रेफ्रिजरेटर नहीं रखी गई। केवल बटर और कर्ड के लिए स्मॉल चिलर्स होते हैं। मतलब कोई भी चीज पहले से प्रिपेयर करके फ्रिज में नहीं रखी जाती ताकि सभी फूड आइटम्स
Speaker A
फ्रेश रहें। डोसा और इडली बैटर को स्टैगर्ड इंटरवल्स में दिन में चार से पांच बार बनाया जाता है। चटनी को हर आधे घंटे में फ्रेश ग्राइंड किया जाता है। यहां ऑलमोस्ट हर आइटम को बनाने में नंदिनी प्योर घी यूज करते हैं और बेकिंग सोडा
Speaker A
कंप्लीटली प्रोहिबिटेड है। केवल ऑथेंटिक साउथ इंडियन मेथड से ही कुकिंग होती है। इन्हीं स्ट्रेटजीस के चलते इनका पहला आउटलेट ही एक मैसिव सक्सेस बन गया। और इसी रिस्पांस को देखते हुए फाउंडर्स ने उसी साल जेपी नगर में अपना दूसरा आउटलेट खोलने
Speaker A
का डिसीजन लिया। लेकिन एक्सपेंड करने से पहले राघव को इंश्योर करना था कि उनका हर एक आउटलेट कंसिस्टेंट क्वालिटी और टेस्ट प्रोवाइड कर सके। जिसके लिए सबसे इंपॉर्टेंट थी स्टाफ की ट्रेनिंग। उन्होंने डिसाइड किया कि वो किसी भी नए
Speaker A
आउटलेट को खोलने से पहले स्टाफ को एडवांस में हायर कर लेंगे और उन्हें 6 से 8 महीने तक एक ऑलरेडी इस्टैब्लिश्ड आउटलेट में ट्रेनिंग दी जाएगी। रामेश्वरम कैफे में डोसा बनाने वाले को डोसा मास्टर कहा जाता है। सिमिलरली कॉफी बनाने वाले को कॉफी
Speaker A
मास्टर। तो अगर किसी को नए आउटलेट का डोसा मास्टर बनना है तो उसे पहले पुराने आउटलेट में ट्रेनिंग में 10 से 15,000 डोसास बनाने होंगे। वहीं कॉफी मास्टर को ट्रेनिंग में एक से 2 लाख कॉफी सर्व करनी होगी। आल्सो फाउंडर्स को पता है कि उनके
Speaker A
बिजनेस का सबसे इंपॉर्टेंट एसेट स्टाफ ही है। उनका मानना है कि उनका स्टाफ जैसा फील करेगा वो वैसी ही एनर्जी फूड में ट्रांसफर कर देगा। इसीलिए जो काम छह लोगों से हो सकता है वहां 10 लोग हायर किए जाते हैं
Speaker A
ताकि स्टाफ बर्न आउट ना हो। सैलरी के अलावा हर स्टाफ का फूड, अकोमोडेशन, मेडिकल केयर कंपनी कवर्ड होता है। इन्हीं स्ट्रेटजीस के बदौलत इनका सेकंड आउटलेट भी एक मैसिव सक्सेस रहा। और इसी के बाद राघव ने कुछ अनएक्सेक्टेड किया। उन्होंने
Speaker A
फिल्मी स्टाइल में दिव्या को प्रपोज किया। कहा कि यू आर ऑलरेडी माय बिजनेस पार्टनर। व्हाई कांट यू बी माय लाइफ पार्टनर?
Speaker A
दिव्या ने हां कर दी और दोनों की शादी हो गई। इसी दौरान कुछ वियर्ड हुआ। रामेश्वरम कैफे की सक्सेस ही उनके लिए एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम बन गई। कैफे के कैश काउंटर में हमेशा लंबी लाइन लगी रहती थी और क्राउड
Speaker A
इतना ज्यादा होता था कि स्टाफ के लिए ऑर्डर प्रिपेयर हो जाने पर कस्टमर को बुलाना डिफिकल्ट हो गया था। ऐसे में फाउंडर्स ने इस प्रॉब्लम को टेक्नोलॉजी से सॉल्व किया। सबसे पहले सेल्फ ऑर्डरिंग लगाए ताकि कैश काउंटर का क्राउड कम हो और
Speaker A
लोग खुद ही इन किओस से ऑर्डर कर सकें। साथ ही इन्होंने बीपिंग टोकंस भी रोल आउट किए। अब ऑर्डर रिसीप्ट देने पर कस्टमर को यह टोकन मिलता है और जब उनका ऑर्डर रेडी होता है तो यह टोकन बीप करने लगता है। मतलब अब
Speaker A
शाउटिंग की कोई जरूरत नहीं थी। 2023 तक रामेश्वरम कैफे एक इतना पॉपुलर ब्रांड बन चुका था कि पूरे इंडिया से हजारों लोग इन्हें फ्रेंचाइजीज के लिए अप्रोच कर रहे थे। मतलब अगर फाउंडर्स चाहते तो पूरे इंडिया में आउटलेट्स खोल सकते थे। लेकिन
Speaker A
इन्होंने इसका ऑोजिट किया। इन्होंने डिसाइड किया कि वह एक साल में केवल दो फ्रेंचाइजीज देंगे और किसी को भी एक फ्रेंचाइजी पार्टनर चूज़ करने से पहले एक से दो साल उसे केवल ऑब्जर्व करेंगे। इनका सिलेक्शन क्राइटेरिया सिंपल था। अगर वो
Speaker A
इंसान साउथ इंडियन फूड के लिए सेम पैशन रखता है। कस्टमर की प्लेट उठा सके और टेबल वाइप कर सके तो वह रामेश्वरम कैफे की फ्रेंचाइजी लेने के लिए एलिजिबल है। इसी दौरान दिव्या ने फ्रेंचाइज पार्टनर्स, कस्टमर्स और एंप्लाइजस को रामेश्वरम कैफे
Speaker A
की ब्रांड वैल्यू समझाने के लिए एक कमाल की चीज की। उन्होंने रामेश्वरम नाम को ही एक एक्रोनिम में कन्वर्ट कर दिया। जिससे अब हर लेटर एक ब्रांड वैल्यू को सिंबोलाइज करने लगा। आर से रिलायबल ब्रांड एक्सपीरियंस, अटेंशन टू डिटेल, माइंडफुल
Speaker A
वर्क एथिक्स, एफिशिएंट मैनेजमेंट सिस्टम, सस्टेनेबल प्रैक्टिस, हार्ट वार्मिंग मील्स, होलसमनेस एडेड, ऑथेंटिसिटी एट एव्री स्टेप रूटेड इन आवर फ्लेवर्स, एस्पायरिंग पीपल एवरीडे मैटिकुलस टेक्निक। जनवरी 2024 तक रामेश्वरम कैफे के पांच आउटलेट्स खुल चुके थे। जैसा सोचा था सब
Speaker A
कुछ उससे भी बेहतर चल रहा था। लेकिन तभी आया राघव और दिव्या की जर्नी का सबसे मुश्किल दिन। 1 मार्च 2024 दोपहर के करीब 1:00 बजे जब रामेश्वरम कैफे के ब्रुकफील्ड आउटलेट में भीड़ अपनी पीक पर थी। तभी एक
Speaker A
आदमी एक बैग के साथ वहां आता है। रवा इडली का आर्डर देता है लेकिन उसे खाता नहीं और चुपचाप अपने बैग को वॉश बेसिन के पास रखकर निकल जाता है। लेकिन वहां लंच करते हुए लोगों को कोई अंदाजा नहीं था कि उनके बीच
Speaker A
एक टाइम बम प्लांट हो चुका है। करीब 1 घंटे बाद वो बॉम्ब डेटोनेट होता है। जिसमें नौ लोग इंजर्ड हो जाते हैं। लेकिन फॉर्चूनेटली किसी की जान नहीं जाती। मार्च 3 को यह केस एनआईए को सौंप दिया जाता है।
Speaker A
जिन्होंने ना केवल पता लगाया कि यह एक टेररिस्ट एक्ट है बल्कि बाद में चार एक्यूज़्ड को गिरफ्तार भी कर लिया। पुलिस ने फाउंडर्स को बताया कि बम के साथ नेल्स भी पैक किए गए थे। लेकिन उनकी प्लेसमेंट ऐसी थी कि डेटोनेशन के बाद वो सीलिंग की
Speaker A
ओर चले गए। अगर उनकी प्लेसमेंट ऐसी ना होती तो 20 से 30 लोगों की जान जा सकती थी। यह इंसिडेंट राघव और दिव्या के लिए बेहद शॉकिंग था। लेकिन उन्होंने बहुत जल्द खुद को संभाला और केवल आठ दिनों बाद ही
Speaker A
ब्रुकफील्ड आउटलेट को रीओपन कर दिया। दिव्या ने इंसिडेंट के बाद मीडिया को कहा आफ्टर दी वॉर देयर इज पीस रिवोल्यूशन एंड चेंज। द इंसिडेंट हैज़ मेड अस स्ट्रांग। इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और शायद इसी का रिवॉर्ड इन्हें ठीक 4 महीनों बाद मिला।
Speaker A
अनंत अंबानी की पूरी वेडिंग के लिए रामेश्वरम कैफे को सोल साउथ इंडियन केटरर के तौर पे चुना गया। लेकिन इस बात की खुशी ज्यादा लंबी नहीं टिकी। प्रीवेडिंग सेलिब्रेशंस के लिए अंबानीज ने इटली में क्रूज ट्रिप प्लान की थी और रामेश्वरम
Speaker A
कैफे को वहां भी फूड सर्व करना था। ऐसे में राघव ने अपनी टीम से टोटल 30 लोगों के लिए वीजा अप्लाई किया। लेकिन लास्ट मोमेंट में पता चला कि केवल तीन ही लोगों का वीजा अप्रूव हुआ है। खुद राघव, एक फ्रेंचाइज
Speaker A
ओनर नागराज और हेड कुक का। लेकिन राघव ने इस क्राइसिस को एक चैलेंज में कन्वर्ट कर दिया। पूरी क्रूज में इन तीनों ने बैटर को ग्राइंड करना, वेजिटेबल्स को चॉप करना, प्लेटिंग करना और सर्व करना यह सब कुछ
Speaker A
किया। लकीली उसी क्रूज में शाहरुख खान भी मौजूद थे और राघव ने खुद अपने हाथों से एसआरके को सर्व किया। मतलब दो डेकेड्स पहले जो होमलेस लड़का एसआरके के घर के बाहर उनका पोस्टर ले खड़ा था, आज वही
Speaker A
लड़का ना केवल एसआरके के साथ एक ही क्रूज पर था बल्कि अपने हाथों से उन्हें सर्व भी कर रहा था। मौका मिलते ही खुद राघव ने पोस्टर वाली कहानी एसआरके को बताई। आज के दिन बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और पुणे को
Speaker A
मिलाकर रामेश्वरम कैफे के टोटल नाइन आउटलेट्स हैं। जिसमें रिसेंटली ओपन बेंगलुरु का होजूर रोड का 9ाउज स्क्वायर फीट आउटलेट भी इंक्लूडेड है। और फाउंडर्स के अकॉर्डिंग यह वर्ल्ड का बिगेस्ट रेस्टोरेंट है। इस आउटलेट के अंदर ही एक फुल वर्किंग टेंपल और इवन रेयर पुंगनूर
Speaker A
कााउस की गौशाला है। फ्यूचर में इनका दुबई में अपना पहला इंटरनेशनल आउटलेट खोलने का भी प्लान है। लेकिन जहां पूरी दुनिया केवल रामेश्वरम पे फोकस थी, वहीं दिव्या और राघव ने क्वाइटली 2025 में एक नॉर्थ इंडियन ब्रांड भी लॉन्च कर दिया है। तीथा
Speaker A
नाम से जो बेसिकली रामेश्वरम कैफे का ही नॉर्थ इंडियन फूड वर्जन लगता है। आज रामेश्वरम कैफे कई 100 करोड़ का ब्रांड है। हर आउटलेट करोड़ों की सेल्स करता है और लाखों लोग इनका फूड एंजॉय करते हैं। लेकिन सबसे इंस्पायरिंग बात यह है कि इन
Speaker A
सब की शुरुआत उस राघव ने की जिसके पास कभी खुद खाने तक के पैसे नहीं थे और शायद इसीलिए वो खाने की वैल्यू को इतना डीपली समझते हैं। लेकिन यह सफर उनके अकेले का नहीं था। सबसे मुश्किल वक्त में उन्हें
Speaker A
गाइड करने के लिए उन पर बिलीव करने के लिए उन्हें कोई चाहिए था। ऐसे में उनकी लाइफ में दिव्या आई जिन्होंने ब्लाइंड ट्रस्ट और लव के भरोसे अपना करियर दांव पर लगा दिया। जहां राघव ने रामेश्वरम कैफे को सोल
Speaker A
दी तो वहीं दिव्या ने इसे स्पाइन दी। यह थी कहानी द रामेश्वरम कैफे की। अगर वीडियो अच्छी लगी तो मैं रिकमेंड करूंगा कि आप नेक्स्ट इस वीडियो को देखें।
Topics:राघवेंद्र रावफूड बिजनेसरेस्टोरेंट चेनरामेश्वरम कैफेइडली डोसा कॉफीफ्रेंचाइजीहिंदी प्रेरणादायक कहानीबिजनेस स्ट्रगलहोटल इंडस्ट्रीसाउथ इंडियन फूड











