डायनासोरों के उदय और विनाश के पीछे विज्ञान और क़ुरान की दृष्टि से मास एक्सटिंशन की कहानी।
Key Takeaways
- मास एक्सटिंशन जीवन के अंत नहीं बल्कि नए जीवन के लिए रास्ता खोलते हैं।
- परमिन और केपीजी एक्सटिंशन पृथ्वी के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं।
- एस्ट्रोइड के प्रभाव ने पृथ्वी के वातावरण और जीवन को पूरी तरह बदल दिया।
- वैज्ञानिक प्रमाण जैसे इरीडियम की मौजूदगी से इतिहास की घटनाओं की पुष्टि होती है।
- क़ुरान की आयतें विज्ञान के साथ मेल खाती हैं, जो जीवन के चक्र को दर्शाती हैं।
What the video covers
- पृथ्वी पर पांच बार जीवन लगभग समाप्त होने के करीब आया, लेकिन हर बार जीवन ने पुनः जन्म लिया।
- मास एक्सटिंशन तब होती है जब पृथ्वी के इकोसिस्टम अचानक ढह जाते हैं, जैसे वोल्केनो, आइस एज या एस्टेरॉइड के कारण।
- पाँच प्रमुख मास एक्सटिंशन हैं: अडोविशियन, डिवोनियन, परमिन, ट्रायजिक और केपीजी।
- परमिन एक्सटिंशन सबसे भयंकर था, जिसमें 96% प्रजातियाँ खत्म हो गईं, और यह जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा था।
- केपीजी एक्सटिंशन में डायनासोर विलुप्त हुए, जिसकी वजह एक विशाल एस्ट्रोइड का पृथ्वी से टकराना था।
- एस्ट्रोइड का प्रभाव इतना शक्तिशाली था कि उसने ग्लोबल फायर, शॉक वेव और 15 साल तक सूरज की रोशनी को रोक दिया।
- इस घटना ने पृथ्वी पर एक लंबी न्यूक्लियर सर्दी और बाद में अत्यधिक गर्मी का दौर शुरू किया।
- एस्ट्रोइड गिरने की जगह हाइड्रोकार्बंस और सल्फर से भरी थी, जिससे तबाही और भी बढ़ गई।
- साइंस इरीडियम की उपस्थिति के माध्यम से इस घटना की पुष्टि करती है, जो पृथ्वी की मिट्टी में मिली।
- क़ुरान की आयतें जीवन के निर्माण और पुनः निर्माण की प्रक्रिया से इस वैज्ञानिक घटना को जोड़ती हैं।
Chapters
- 00:00पृथ्वी पर जीवन के पांच बड़े संकट और पुनरुत्थान
- 02:06पाँच प्रमुख मास एक्सटिंशन का परिचय
- 04:18चिकशल क्रेटर और एस्ट्रोइड का प्रभाव
- 06:28एस्ट्रोइड के बाद की तबाही और पर्यावरणीय प्रभाव
- 08:43लंबे समय तक चली जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया
- 10:46इरीडियम की खोज और वैज्ञानिक पुष्टि
- 12:55डायनासोरों की जीवनशैली और विलुप्ति के कारण
- 15:14क़ुरान की आयतें और विज्ञान का मेल
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Speaker A
दोस्तों, जमीन पर पांच बार ऐसा वक्त आया जब जिंदगी तकरीबन पूरी तरह खत्म होने के करीब थी। एक के बाद एक स्पीशीज मिटती गई और ऐसा लगने लगा कि अब कुछ नहीं बचेगा। लेकिन पांचों बार जिंदगी वापस आई। साइंस कहती है
Speaker A
कि एक्सटिंशन कोई ऐसा अंधा हादसा नहीं है कि जिसके बाद सब खत्म हो जाए। बल्कि यह तो अगले चैप्टर के लिए रास्ता खोलती है। जो एक तरफ तबाही लिखती है, वह असल में दूसरी तरफ एक नई तैयारी होती है। और यह पैटर्न
Speaker A
कुरान की एक बात से गहरी गूंज रखता है। अल्लाह ताला सूर अनकबूत की आयत नंबर 19 में फरमाता है, क्या उन्होंने नहीं देखा कि अल्लाह कैसे तखलीक शुरू करता है और फिर उसे दोबारा करता है। यह पांच एक्सटिंशंस
Speaker A
कब हुई और कितनी बड़ी थी? यह देखने से पहले यह समझ लेते हैं कि मैस एक्सटिंशन कोई आम चीज नहीं है। रोजाना स्पीशीज मरती हैं। यह नॉर्मल है। लेकिन मैस एक्सटिंशन यह तब होती है जब जमीन के इकोसिस्टम्स
Speaker A
अचानक से कोलैप्स हो जाएं। कभी वोल्केनो, कभी आइस एज, कभी एस्टेरॉइड्स, हर दफा वजह अलग थी। लेकिन नतीजा हमेशा एक ही था और वह यह कि जिंदगी बड़े पैमाने पर खत्म होने के बिल्कुल करीब थी। तो चलिए एक-एक करके
Speaker A
इन्हें देखते हैं। पहली अडोविशियन एक्सटिंशन यह थी तकरीबन 44 करोड़ साल पहले और दोस्तों इसमें तकरीबन 86% स्पीशीज खत्म हो गई। उस वक्त ज्यादातर जिंदगी समुंदर में थी। इसीलिए सबसे ज्यादा असर समुद्री जिंदगी पर ही हुआ। दोस्तों, दूसरी थी
Speaker A
डिवोनियन एक्सटिंशन। यह थी तकरीबन 37 करोड़ साल पहले। इसमें तकरीबन 75% स्पीशीज खत्म हो गई। यह भी ज्यादातर समुद्री जिंदगी के लिए बहुत बड़ा झटका था। अब आते हैं तीसरी की तरफ। तीसरी एक्सटिंशन का नाम है परमिन एक्सटिंशन। यह सबसे बड़ी थी।
Speaker A
इसमें दोस्तों तकरीबन 96% स्पीशीज खत्म हो गई। इसे द ग्रेट डाइंग भी कहते हैं। इस पर अब हम थोड़ी डिटेल से बात करेंगे। लेकिन उससे पहले चौथी और पांचवी को भी जल्दी से देख लेते हैं। चौथी है ट्रायजिक
Speaker A
एक्सटिंशन। यह थी दोस्तों तकरीबन 20 करोड़ साल पहले और इसमें तकरीबन 70 से 75% स्पीशीज खत्म हो गई। इसने जिंदगी का अगला बायोलॉजिकल चैप्टर खोल दिया। अब आते हैं पांचवी की तरफ। पांचवी है केपीजी एक्सटिंशन। दोस्तों, यह वही है जिसमें
Speaker A
डायनासोर्स खत्म हो गए। इस पर भी हम आगे डिटेल से बात करेंगे। दोस्तों, यह लोकल डिस्टरबेंसेस नहीं थे। यह पूरी दुनिया के बायोलॉजिकल कोलैप्स थे और इनमें से दो एक्सटिंशंस हमारी कहानी के लिए सबसे ज्यादा अहम हैं। वो हैं परमियन और केपीजी
Speaker A
एक्सटिंशन। परमन एक्सटिंशन इसलिए क्योंकि यह जिंदगी के पूरी तरह खत्म होने के सबसे करीब थी और केपीजी एक्सटिंशन हमारी वीडियो का आज का टॉपिक है। द ग्रेट डाइंग या फिर परमिन एक्सटिंशन यह सबसे बुरी थी। दोस्तों 25 करोड़ 20 लाख साल पहले साइबेरिया में
Speaker A
वोल्केनिक इरप्शनंस शुरू हुई। यह इतने बड़े थे कि उनका लावा यूरोप जैसी बड़ी जगह को ढक सकता था। इन वोल्केनिक इरप्शनंस ने एटमॉस्फेयर में जहरीली गैसें छोड़ी। समुंदर जहरीले हो गए, ऑक्सीजन से खाली हो गए और अनस्टेबल हो गए। पूरी दुनिया में
Speaker A
दोस्तों इकोसिस्टम्स कोलैप्स हो गए। दोस्तों उस वक्त जिंदगी पूरी तरह खत्म होने के इतने करीब आई थी कि आज भी साइंटिस्ट्स यह सोचकर हैरत करते हैं कि कुछ बचा कैसे? लेकिन दोस्तों कुछ बच गया और वही बचने वाला अगले सबके लिए बुनियाद
Speaker A
बनेगा। अब आते हैं उस हादसे पर जो सबसे ज्यादा मशहूर है और जो इस कहानी में सबसे ज्यादा अहम भी है। दोस्तों इमेजिन करें माउंट एवरेस्ट के साइज का एक बड़ा पत्थर जो किसी राइफल की गोली से भी 20 गुना
Speaker A
ज्यादा तेजी से स्पेस के वैक्यूम में जमीन की तरफ आ रहा है। 6 करोड़ 60 लाख साल पहले यह पत्थर आसमान से आया। तकरीबन 10 से 15 कि.मी. चौड़ा और तकरीबन 20 से 30 कि.मी.
Speaker A
पर सेकंड की तेज रफ्तार से। दोस्तों, इसे आसमान को चीर कर जमीन तक पहुंचने में सिर्फ 5 सेकंड्स लगे। यह आसमानी आफत आज के मेक्सिको के यूकारन पेनिनसुला पर गिरी। वही जगह जहां सदियों बाद मायन सिविलाइजेशन ने जन्म लिया। इस धमाके ने जमीन पर 180
Speaker A
कि.मी. चौड़ा एक गहरा घड़ा छोड़ दिया। जिसे आज चिकशल क्रेटर के नाम से जाना जाता है। और इस इंपैक्ट से निकलने वाली एनर्जी दोस्तों यह तकरीबन 100 मिलियन मेगा टन्स थी। यानी दुनिया के सारे न्यूक्लियर वेपंस एक तरफ और यह अकेला धमाका हजारों गुना
Speaker A
ज्यादा ताकतवर। दिखने में तो यह सब एक सेकंड में हो गया। लेकिन इस एक लम्हे के पीछे तबाही का एक पूरा सिलसिला चल पड़ा जो रूह को कांपने पर मजबूर कर दे। दोस्तों, धमाके के सबसे पहले लम्हे में एक बेहिसब
Speaker A
गर्म शॉक वेव फैली। जिसने ग्राउंड जीरो के करीब हजारों किलोमीटर के दायरे में हर एक जानवर को एक ही झटके में वेपराइज कर दिया। हड्डी, गोश्त और जिस्म सब कुछ एक ही लम्हे में खत्म हो गया। जहां ना किसी को चीखने
Speaker A
का मौका मिला ना भागने का वक्त। बस सब कुछ पलक झपकते ही हवा में मिट्टी बन गया। और दोस्तों जो इस जमीन से 500 मील्स दूर खड़े थे उनके लिए आसमान में ऐसी अंधी कर देने वाली रोशनी चमकी कि उनका जिस्म
Speaker A
ट्रांसपेरेंट दिखने लगा। आंखें जल गईं और दोस्तों उनके साए हमेशा के लिए पत्थरों पर छप गए। बिल्कुल वैसे ही जैसे सदियों बाद हिरशिमा में एटम बम के धमाके से हुआ था। दोस्तों हवा का टेंपरेचर 600 डिग्री सेल्सियस तक चला गया। जिसने डायनासोर्स की
Speaker A
खाल के अंदर के पानी को इस कदर उबाला कि वो भाप यानी स्टीम बनकर उनके जिस्मों को फाड़ गया। लेकिन दोस्तों तबाही यहां नहीं रुकी क्योंकि इस जोरदार इंपैक्ट ने जमीन के अरबों टन वजनी पत्थरों को फिजा से बाहर
Speaker A
स्पेस की तरफ उछाल दिया था। और जब यह पत्थर जमीन की ग्रेविटी की वजह से वापस गिरे तो रास्ते की फ्रिक्शन से जलकर उन्होंने पूरी दुनिया पर आग की बारिश शुरू कर दी। एक ऐसी मौत की बारिश जिससे ऐसा
Speaker A
लगता था कि आसमान खुद जलकर पिघल रहा हो। इसके साथ ही पूरी दुनिया में ऐसी वाइल्ड फायर्स, शॉक वेव्स और सुनामीज़ उठी कि जो इलाके इंपैक्ट से बचे थे, वह भी दफन हो गए। और अंदाजा है दोस्तों कि इस सुनामीज़
Speaker A
की वेव तकरीबन 2 कि.मी. ऊंची थी। यानी एक ऐसी दीवार जो माउंट एवरेस्ट की आधी ऊंचाई के बराबर थी। लेकिन दोस्तों साइंसदान कहते हैं कि दुनिया के खात्मे की असल वजह यह धमाका नहीं बल्कि वो असर है जो इस इंपैक्ट ने
Speaker A
हमारे एटमॉस्फेयर पर छोड़ा। कंप्यूटर सिमुलेशन से पता चलता है कि यह एस्ट्रोइट ठीक 60 डिग्री एक स्टीप एंगल पर गिरा था। और फिजिक्स के मुताबिक यह वही वाहिद एंगल था जो जमीन के अंदर से सबसे ज्यादा धूल, मिट्टी और जहरीली गैसेस को आसमान की
Speaker A
ऊंचाइयों की तरफ फेंक सकता था। क्योंकि अगर एंगल थोड़ा सा भी अलग होता तो तबाही इतनी ज्यादा ना होती। तबाही इससे कम होती। और दोस्तों इससे भी ज्यादा हैरतंगेज बात यह है कि यह पत्थर किसी आम चट्टान पर नहीं
Speaker A
गिरा। बल्कि यूकांटन पेनिनसुला जियोलॉजिकली जमीन का एक ऐसा हिस्सा या बारूद का ढेर था जो हाइड्रोकार्बंस, क्रूड ऑयल और सल्फर से भरा पड़ा था। यानी जैसे किसी ने डायनामाइट से लिपटी हुई मैच बॉक्स पर आग लगा दी हो। दोस्तों इस धमाके ने उन
Speaker A
सारे मटेरियल्स को एकदम वेपराइज करके स्ट्रेटोस्फियर में फेंक दिया। दोस्तों 2023 की एक नई स्टडी के मुताबिक इस खाली राख और धूल ने अगले 15 साल तक सूरज की धूप को जमीन तक पहुंचने से मुकम्मल रोक दिया। इस अंधेरे में फोटोसिंथेसिस रुक गई। पौधे
Speaker A
मरने लगे। समुंदर के फाइटोप्लंकटन खत्म हो गए और जब खाना ना रहा तो प्लांट ईटर्स भूख से मरने लगे। जिनके पीछे-पीछे उनका शिकार करने वाले कार्निवर्स भी हमेशा के लिए मिट गए। यानी पूरी फूड चेन एक के बाद एक टूटती
Speaker A
चली गई और ग्लोबल टेंपरेचर दोस्तों 15 डिग्रीज गिर गया। जिससे एक लंबी और जानलेवा न्यूक्लियर सर्दी आई। और दोस्तों इस 15 साल की ठंड के बाद एक और झटका आया जिसे साइंस में विप्लश इफेक्ट कहते हैं। 2018 में साइंटिस्ट्स ने फॉसिलाइट फिश टीथ
Speaker A
के केमिकल आइसोटोप्स टेस्ट किए। जिससे पता चला कि जब 15 साल बाद धूल बैठ गई थी तो ट्रैप्ड ग्रीन हाउस गैसेस ने जमीन को अचानक आग की तरह गर्म कर दिया जिससे टेंपरेचर मजीद 5 डिग्रीज ऊपर चला गया और
Speaker A
दोस्तों यह तपती हुई गर्मी अगले 1 लाख साल तक जारी रही। पहले 15 साल का बर्फीला अंधेरा और फिर 1 लाख साल का तपता हुआ जहन्नुम। दोस्तों इस एक एस्ट्रोइड ने इस जमीन का हमेशा के लिए हुलिया बदल दिया और
Speaker A
दोस्तों इस पूरी तबाही का आखिरी नतीजा यह निकला कि 15 किलो से बड़ा कोई भी जमीनी जानवर जिंदा नहीं बचा। सिर्फ गिनती के कुछ छोड़कर बाकी सब मर गए। उस कयामत के लम्हे में ना ताकत काम आई ना दिमाग और ना ही
Speaker A
रफ्तार। फैसला सिर्फ एक ही चीज ने किया और वह था साइज। अब दोस्तों एक ऐसा पॉइंट जो आपको सोचने पर मजबूर कर दे। जियोलॉजिस्ट्स ने कैलकुलेट किया है कि जमीन का सिर्फ 13% हिस्सा ऐसा था जहां हाइड्रोकार्बंस और
Speaker A
सल्फर की इतनी बड़ी मिकदार मौजूद थी कि इंपैक्ट के बाद ऐसी ग्लोबल तबाही हो सके। जिसका मतलब है कि बाकी का 87% हिस्सा जमीन का एक तरह से बिल्कुल सेफ ज़ोन था। अगर यह आफत गहरे पेसिफिक ओशन में या किसी और जगह
Speaker A
गिरती तो तबाही जरूर आती। मगर सूरज 15 साल के लिए ब्लैक आउट ना होता। ना पौधे मरते, ना फूड चेन टूटती और शायद डायनासोर आज भी जमीन पर घूम रहे होते। लेकिन दोस्तों सवाल यह उठता है कि हम यह सब इतने यकीन से कैसे
Speaker A
जानते हैं? यह हादसा 6 करोड़ 60 लाख साल पहले हुआ। जब देखने के लिए कोई इंसान मौजूद नहीं था। तो साइंस आज इतने कॉन्फिडेंस से कैसे यह दावा कर सकती है कि वहां एक एस्ट्रॉइड ही गिरा था और ठीक उसी
Speaker A
वक्त गिरा था। इसका जवाब जमीन की मिट्टी में छुपा है और उस जवाब का नाम है इरीडियम। इरेडियम एक ऐसा रेयर मिनरल है जो जमी
Speaker A
अफ्रीका या अमेरिका। जमीन की एक खास गहराई पर हमें इस इरेडियम की एक बहुत ही वाज़ह लेयर मिलती है। दोस्तों, पूरी दुनिया पर एक ही लेयर का मिलना सिर्फ तभी मुमकिन हो सकता था जब कोई चीज अचानक स्पेस से आई हो
Speaker A
और पूरी दुनिया पर धूल बनकर छा गई हो। क्योंकि एस्ट्रॉइड्स में इरीडियम कुदरती तौर पर बहुत ज्यादा होता है। और जब साइंसदानों ने इस पूरी दुनिया में फैली हुई लेयर की डेटिंग की तो पता चला कि यह ठीक 66 मिलियन साल पुरानी है। यानी
Speaker A
बिल्कुल वही वक्त जब फॉसिल रिकॉर्ड में डायनासोर अचानक से गायब हो गए। और रही बात उस धमाके के निशान यानी क्रिएटर की तो वह आज भी यूकारन पेनसुला के नीचे आधा जमीन और आधा समुंदर के अंदर डूबा मौजूद है। जिसके
Speaker A
किनारों पर कुदरत ने एक और निशानी छोड़ी है जिसे हम सिनोटिस कहते हैं। दोस्तों मेक्सिको के यह खूबसूरत सिंह होल्स जहां आज लोग दूर-दूर से स्विमिंग और टूरिज्म के लिए आते हैं। अगर उनका पैटर्न ऊपर से देखा जाए तो वह एक परफेक्ट रिंग में है। जो ठीक
Speaker A
उस क्रिएटर के आखिरी एच के साथ-साथ बने हैं। इस तरह दोस्तों पूरी दुनिया का सबसे बड़ा अंडरग्राउंड केव सिस्टम दर हकीकत उसी आसमानी पत्थर के असर से बना था। यानी उस तबाही ने जमीन पर हमेशा के लिए कुछ छोड़ा
Speaker A
भी और जो छोड़ा वो आज भी हमारे दरमियान मौजूद है। लेकिन दोस्तों अब आप सोचें कि अगर यह मैमल की दास्तान है तो इसमें डायनासोर का क्या ताल्लुक? दर हकीकत दोस्तों डायनासोर तकरीबन 16 करोड़ 50 लाख साल तक इस जमीन के हाकिम रहे। एक ऐसा
Speaker A
बेपनाह लंबा अरसा जिसके सामने इंसान की पूरी हिस्ट्री एक पल के बराबर भी नहीं लगती। मगर उन जॉइंट्स के इस लगातार प्रेशर ने उन छोटे मैमल्स को छुपके-चुपके वो सलाहियतें दे दी जो आगे चलकर सब कुछ बदलने वाली थी। उनकी सुनने और सूंघने की ताकत
Speaker A
तेज होती गई। अंधेरे में देखने की एबिलिटी बेहतर हुई। ठंड से बचने के लिए जिस्म पर बाल आए और सबसे अहम बात इन खतरों से बचने के लिए उनका दिमाग धीरे-धीरे बड़ा और तेज होता गया। लेकिन दोस्तों याद रखें यह सब
Speaker A
एडप्टेशंस इसलिए नहीं हो रही थी कि मैमल्स ने किसी दिन दुनिया पर राज करना था। बल्कि यह तो उनकी रोजमर्रा जिंदा रहने की आम स्ट्रगल थी। मगर इन मैमल्स के मुकाबले में वो डायनासोर खुद कौन थे। क्योंकि दोस्तों
Speaker A
हमारे दिमाग में जो उनकी तस्वीर है रियलिटी उससे बिल्कुल अलग है। मिसाल के तौर पर स्पाइनोसोरस जो इस जमीन पर चलने वाला अब तक का सबसे बड़ा प्रिडेटर था। यह दोस्तों खुले मैदान में दौड़ने के बजाय दरियाओं के अंदर शिकार करता था। जिसके लिए
Speaker A
कुदरत ने उसके मुंह पर क्रोकोडाइल की तरह प्रेशर सेंसर्स दिए थे ताकि वह पानी के अंदर बिना देखे भी शिकार की हरकत को डिटेक्ट कर सके और उसके नस्ट्रिल भी सर के ऊपर थे ताकि वह अपना मुंह पानी में डालकर
Speaker A
अंधेरे में आसानी से स्ट्राइक कर सके। लेकिन दोस्तों फिर 94 मिलियन साल पहले जब क्लाइमेट बदली, दरियाओं और दलदल का पानी सूख गया तो यह जमीन का सबसे बड़ा शिकारी किसी दुश्मन से हारे बिना सिर्फ बदलती हुई दुनिया के हाथों हमेशा के लिए खत्म हो
Speaker A
गया। इसी तरह दोस्तों एनक्लिसोर की दास्तान भी कुछ ऐसी ही अजीब है। जिसकी पीठ पर हड्डी का एक बहुत मजबूत आर्मर था जिसे कोई शिकारी तोड़ नहीं सकता था। और यही आर्मर दोस्तों उसकी सबसे बड़ी ताकत थी। लेकिन पेेंटोलजिस्ट एक ऐसा मंजर बयान करते
Speaker A
हैं जो इस ताकत का दूसरा रुख दिखाती है कि अगर कोई एनक्लिसोर किसी बर्फीली जमीन पर फिसल कर अपनी पीठ के बल गिर जाता तो वह कभी सीधा नहीं हो सकता था क्योंकि उसकी टांगे दोस्तों छोटी थी वजन बहुत ज्यादा था
Speaker A
और इस आर्मर की वजह से सेंटर ऑफ ग्रेविटी ऊपर चला जाता और वह वहीं फंसा रह जाता। ऐसे में शिकारी को कुछ करने की जरूरत नहीं थी। वह बेबस जानवर वहीं पड़े-पड़े दम तोड़ देता था। दोस्तों, यह निशानी हमें दिखाती
Speaker A
हैं कि जो चीज आपको डोमिनेंट बनाती है, जरूरी नहीं कि वह हमेशा आपको बचाएं भी। क्योंकि जब हालात बदलते हैं तो वही ताकत आपकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है। अलग क्रिएचर्स, अलग दस्ताने लेकिन सबसे सीखने को एक ही सबक मिलता है। और फिर दोस्तों जब
Speaker A
आखिरकार एस्ट्रोइड गिरा और जमीन के बड़े जानवर खत्म हुए तो यही छोटा साइज और कमजोरी मैमल्स के बचने की सबसे बड़ी वजह बनी। क्योंकि वह जमीन के नीचे गुफाओं में, पानी के अंदर और दरख्तों के खोखले तनों में छुप सकते थे। जहां उनका छोटा साइज
Speaker A
उनकी जान बचा गया। और इससे भी दिलचस्प बात यह है दोस्तों कि जो जॉइंट्स इस तबाही में मरे उनके जिस्म जब सड़ने लगे तो वही डीकंपोजर्स फन जाए और इन बचे हुए छोटे मैमल्स का रिस्क बन गए। यानी जो तबाही उन
Speaker A
डोमिनेंट स्पीशीज को हमेशा के लिए मिटा गई वही इन बचे हुए छोटे जानवरों को गुजारे और नई शुरुआत की बुनियाद बनी। तो दोस्तों, डायनासोर्स का दौर कोई एक छोटा सा जमाना नहीं था बल्कि यह एक पूरी अनोखी और
Speaker A
बेमिसाल दुनिया थी। जहां हर तरह के अजीबोगरीब क्रिएचर्स मौजूद थे। जिनकी जिंदगी का सिर्फ एक ही मकसद था और वह था किसी तरह इस जमीन पर जिंदा रहना। मगर दोस्तों इस दस्तान में आगे बढ़ने से पहले वक्त का एक दिलचस्प और हैरतंगेज सच समझने
Speaker A
की कोशिश करते हैं। हम अक्सर सोचते हैं कि एक जलता हुआ वोल्केनो है। फंड्स के बड़े-बड़े दरख्त हैं और टिरेक्स और स्टचोसोरस एक साथ खड़े हैं। लेकिन दोस्तों साइंस बताती है कि हमारे दिमाग में बनी यह तस्वीर सही नहीं है। क्योंकि ऐसी कोई एक
Speaker A
दोपहर जमीन पर आई ही नहीं कि जब यह दोनों एक साथ खड़े हो। इसे जरा समझने की कोशिश करते हैं। दोस्तों टीरेक्स वक्त के हिसाब से आज के इंसान यानी हमारे ज्यादा करीब है। बल्कि स्टजोसोरस के मुकाबले में जहां
Speaker A
हमारे और टरेक्स के दरमियान तकरीबन 6 करोड़ 60 लाख साल का फासला है। वहीं स्टजोसोरस टरेक्स के इस दुनिया में आने से भी 80 मिलियन साल पहले मरकर दफन होकर और पत्थरों में बदल चुके थे। यानी जब पहला
Speaker A
टीरेक्स पैदा हुआ तब तक स्टजोसोरस का वजूद मिट्टी बन चुका था। अगर दोस्तों कोई टरेक्स जमीन खोदकर किसी स्टजोसोरस का फसल निकालता तो वह अपने माजी में उससे भी कहीं ज्यादा दूर देख रहा होता जितना दूर आज हम
Speaker A
टरेक्स को देखने के लिए देखते हैं। और दोस्तों, यह कोई हवाई अंदाजा नहीं है। क्योंकि जमीन की लेयर्स के अंदर कुदरत की एक ऐसी रेडियोएक्टिव घड़ी चल रही है जहां यूरेनियम धीरे-धीरे लेड में बदलता है। एक ऐसी कुदरती सुई जो हमेशा एक ही स्पीड से
Speaker A
चलती है। ना तेज ना धीमी। और दोस्तों इसी जादुई घड़ी को पढ़कर साइंस इन चट्टानों और फॉसिल्स की बिल्कुल ठीक तारीख और उम्र लाखों साल की एक्यूरेसी के साथ बता सकती है। यानी यही लेयर्स हमें बताती हैं कि
Speaker A
डायनासोर्स का सफर कोई छोटा सा चैप्टर नहीं था। बल्कि यह तीन बड़े-बड़े चैप्टर्स पर फैला हुआ था। ट्रायजिक, जुराजिक और क्रिटशियस। इनका राज इस जमीन पर इतने लंबे अरसे तक था कि जब से डायनासोर खत्म हुए हैं तब से लेकर आज तक का पूरा अरसा मिला
Speaker A
लें तब भी उनका दौर इससे तीन गुना ज्यादा लंबा था। दोस्तों इंसानी तारीख हर व्हेल हर प्राइमेट और सारी आइस एजेस इस बेहिसाब लंबे अरसे में जमीन का पूरा कास्ट कई बार बदला। और जब दोस्तों टीरेक्स का दौर आया
Speaker A
तो स्टजोसोरस की दुनिया कोई जिंदा याद नहीं बल्कि जमीन के नीचे दबी चट्टान बन चुकी थी। अगर इस दुनिया का हम स्केल समझना चाह तो अर्जेंटीनोसोरस की मिसाल देखते हैं। जो एक ऐसा प्लांट ईटर डायनासोर था जिसका जिस्म 35 मीटर लंबा और वजन 75 टन के
Speaker A
बराबर था। लेकिन दोस्तों हैरत की बात यह है कि जब यह पैदा होता तो सिर्फ 5 किलग्र का होता और फिर अपने पीक पर पहुंचकर रोजाना 40 किग्र का वजन बढ़ाता था। सोचे दोस्तों एक दिन में 40 किलो वजन बढ़ाना।
Speaker A
दोस्तों पेटागोनिया में इनका एक नेस्टिंग साइट मिला जो 15 किमी तक फैला हुआ था जहां 10 हजार अंडे मिले और यह जगह दोस्तों लाखों साल तक लगातार नस्ल आगे बढ़ाने के लिए यूज़ होती रही थी क्योंकि दोस्तों जमीन पर इतने बड़े और अजीम क्रिएचर्स को
Speaker A
बचाना और उनकी नस्ल चलाना कोई आसान काम नहीं था। दोस्तों इन्हीं अजीमोशान अर्जेंटिनोसोरस को ढेर करने के लिए मेपोसोरस टोलियों की शक्ल में शिकार करते थे और इसका सबूत तब मिला जब सात अलग-अलग उम्र के स्केलिटेंस एक साथ दरियाफ्त हुए
Speaker A
जो साइंस के मुताबिक उनके कोऑर्डिनेटेड पैक बिहेवियर की गवाही देते थे। दोस्तों, यह खौफनाक शिकारी मिलकर एक बड़े अर्जेंटिनसोरस पर हमला करते, उसे काटते और पीछे हट जाते। और दोस्तों, कभी-कभी तो उसे जान से मारते भी नहीं थे। बल्कि जिंदा
Speaker A
शिकार के जिस्म से ही बार-बार गोश्त नोचनोच कर खाते थे। लेकिन बात सिर्फ दूसरे जानवरों के शिकार तक महदूद नहीं थी। बल्कि सर्वाइवल का यह खेल कभी-कभी और भी खौफनाक शक्ल इख्तियार कर लेता था। जैसे कि माजंगसोरस के केस में देखा गया। दोस्तों,
Speaker A
इस डायनासोर की हड्डियों पर जब दांतों के निशान मिले और उन निशानात को चेक किया गया तो पता चला कि यह किसी दुश्मन के नहीं बल्कि बिल्कुल उसी की अपनी ही नस्ल के दांत थे। दोस्तों, डायनास में अपनी ही
Speaker A
जाति को खाने का यह सबसे पहला पक्का सबूत था। यानी डायनासोर कैनबलिज्म। यह दोस्तों सुनने में जितना शॉकिंग लगता है, दर हकीकत हमें वहां का एक ही असूल दिखाता है। यानी हर कीमत पर जिंदा बचना। मगर दोस्तों इस
Speaker A
दर्दनाक माहौल से बिल्कुल अलग कुदरत ने सर्वाइवल के लिए एक और ही अलग रास्ता निकाल रखा था। जिसकी मिसाल हमें माइक्रो रैप्टर में मिलती है। चार विंग्स वाला यह अनोखा डायनासोर जिसके हाथों और टांगों दोनों पर लंबे फेदर्स यानी पर मौजूद थे।
Speaker A
अपनी कमजोर मसल्स की वजह से दोस्तों यह परिंदों की तरह उड़ तो नहीं सकता था। लेकिन ग्लाइडिंग में यह किसी से कम नहीं था। दोस्तों, यह जंगल के बीच एक दरख्त से दूसरे दरख्त तक लंबी-लंबी छिलांगे मारता। जहां उसके चार पर हवा में उसे बेहतरीन
Speaker A
बैलेंस देते थे। लेकिन दोस्तों, अफसोस की बात है कि जो एक ही खूबी हवा में उसकी सबसे बड़ी ताकत थी, वही जमीन पर उसके चलने में सबसे बड़ी कमजोरी और बोझ बन जाती थी। क्योंकि दोस्तों, वह ठीक से जमीन पर चल भी
Speaker A
नहीं पाते थे। लेकिन दोस्तों, जहां एक तरफ ऐसी बेहिसी और शिकार का खेल चल रहा था, वहीं इसी दुनिया में ममता और पैरेंटिंग का एक निहायत ही खूबसूरत और जज्बाती पहलू भी छुपा हुआ था। दोस्तों, ओविरेप्टरी डायनासोर्स के ऐसे फॉसिल्स दरियाफ्त हुए
Speaker A
हैं, जो अपने अंडों के घोंसले पर बिल्कुल आज के परिंदों की तरह बैठे हुए थे। जो आसमान से आते तूफान और मिट्टी के ढेर के नीचे दब कर मर गए। लेकिन अपने घोंसले और अंडों को प्रोटेक्ट करते-करते आखिरी दम तक
Speaker A
वहां से एक कदम ना हिले। बच्चों की हिफाजत का यह जज्बा और इंस्टिंक्ट जो आज हमें हर छोटे परिंदे और चिड़िया में दिखता है। दर हकीकत 16 करोड़ साल पहले इन्हीं डायनासोर्स के दिलों में धड़कता था। क्योंकि साइंस के मुताबिक दोस्तों आज के
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परिंदे दर हकीकत उसी लीनियज का हिस्सा हैं। अब आते हैं उस डिस्कवरी पर जो जमीन की इवोल्यूशनरी हिस्ट्री में सबसे ज्यादा हैरतंगेज मानी जाती है। यानी डायनासोर का आर्कटिक में बसना। आज से 70 मिलियन साल पहले नॉर्थ पोल पर वहां दोस्तों जहां आज
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सिर्फ बर्फ ही बर्फ है। मौसम आज के मुकाबले में गर्म जरूर था लेकिन सर्दी आने पर वहां 4 महीने का मुकम्मल काली रात का अंधेरा छा जाता था। इसी सर्दी और अंधेरे में पौधे सूख जाते थे। लेकिन फिर भी
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हजारों डायनासोर्स गर्मियों में वहां का रुख करते थे। क्योंकि दोस्तों तब 24 घंटे सूरज चमकता था और खाना बेहिसब होता था। मगर जैसे ही सर्दी का मौसम आता उन्हें जिंदा रहने के लिए 1000 माइल का लंबा माइग्रेशन का सफर करना पड़ता। जहां वह
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रोजाना 15 घंटे लगातार चलते और 3 महीने तक बर्फीली हवाओं, आसमानों से गिरती राख, बहके हुए दरियाओं और शिकारियों के हमलों से बचते हुए वह आगे बढ़ते रहते। ऐसी मुश्किल हालत में एडमंटोसोरस और पैचनासोरस जैसी दो मुखालिफ दुश्मन स्पीशीज भी कदम
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मिलाकर एक साथ चलती थी। क्योंकि दोस्तों उनका वजूद अलग था मगर जिंदा बचने की मजबूरी एक थी। और इन्हीं पहाड़ी रास्ते पर अल्बर्टा सोरेस जैसे शिकारी घाट लगाए उनका इंतजार करते थे। जो महीनों से भूखे होते और उनके लिए यह माइग्रेशन हर साल आने वाली
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एक अजीम दावत होती थी। लेकिन दोस्तों इस बर्फीली और अंधेरी दुनिया में कुछ ऐसे चालाक डायनासोर्स भी थे जो माइग्रेशन के इस थका देने वाले सफर पर नहीं निकलते थे। जैसे कि ट्रोडन जो इस दुनिया का सबसे इंटेलिजेंट डायनासोर्स में से एक था। वो
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इसी आर्कटिक की 4 महीने लंबी रात और सर्दी में यहीं रुकते और उनका तेज दिमाग ही उनकी सर्वाइविंग स्ट्रेटजी बन जाता। दोस्तों, उनकी सुनने की ताकत इतनी कमाल की थी कि वह 2 फीट बर्फ के नीचे मूव करते शिकार को भी
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डिटेक्ट कर पाते थे और उनकी आंखें भी अंधेरे और उजाले दोनों में शिकार कर सकती थी। जहां ना बड़े साइज की जरूरत थी ना ताकत की बल्कि सिर्फ और सिर्फ बेपनाह जहानत की और उन माइग्रेट करते हुए रेवड़
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के ऊपर आसमान में मंडराता था। कैडज़ल कॉर्टलस जो इस जमीन की तारीख में उड़ने वाला अब तक का सबसे बड़ा जानवर था। इस जॉइंट का विंग स्पैन एक स्कूल बस की लंबाई जितना लंबा था जो उन रेवड़ के पीछेछे
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फिजाओं में उड़ता रहता क्योंकि उसके लिए हजारों मील के इस लंबे सफर पर निकलने वाले यह लाखों जानवर रास्ते की एक चलती फिरती दावत थी। मगर दोस्तों एक ऐसी बात जो बहुत कम लोग जानते हैं वो यह कि डायनासोर सिर्फ
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अमेरिका के डेजर्ट्स या अफ्रीका के जंगलों तक महदूद नहीं थे। बल्कि उनके फॉसिल्स आज दुनिया के हर सिंगल कॉन्टिनेंट पर दरियाफ्त हो चुके हैं। इसका मतलब यह है कि एक ही कॉमन खानदान से निकलकर उन्होंने हर तरह के एनवायरमेंट और इकोसिस्टम पर फतह
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हासिल की और खुद को हर क्लाइमेट के मुताबिक ढालकर पूरी जमीन पर अपना राज कायम किया। दोस्तों साल 2000 के शुरू में पाकिस्तानी पेटोलॉजिस्ट डॉक्टर मोहम्मद सादिक मलकानी ने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ पाकिस्तान के साथ मिलकर बलचिस्तान के पहाड़ों से लेट क्रिटेशियस दौर के
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डायनासोर की हड्डियां दरियाफ्त की जो तकरीबन 68 से 66 मिलियन साल पुरानी है। सोचे यह बिल्कुल वही दौर था जब टरेक्स अमेरिका के मैदानों में घूम रहा था और ठीक उसी वक्त हमारे बलूचिस्तान में भी जॉइंट क्रिएचर्स मौजूद थे। अब दोस्तों उनके
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दरियाफ्त होने वाले नामों को सुनिए। पहला है पाकिसोरस बलचिस्तानी जो बलचिस्तान का एक जॉइंट लंबी गर्दन वाला सोरो बोट था। दूसरा है सराइकी मासूम विटकारी जिसके नाम में लोकल सराइव की जबान का लफ्ज मासूम आता है जो एक रिलेटिवली छोटा और शरीफ डायनासोर
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था और पैेंटोलॉजी की तारीख का दोस्तों इसका सबसे अनोखा और प्यारा नाम है। तीसरा है वितकरी दरिंदा सुलेमान यानी सुलेमान रेंज का दरिंदा जो दो टांगों पर चलने वाला छोटा लेकिन इंतहाई खतरनाक शिकारी था और इनके साथ एक और दरियाफ्त थी इमरान खान
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नकूब जिसे ओकाब यानी ईगल कहा गया जिसका प्रोपोज्ड नाम पाकिस्तान के फॉर्मर प्राइम मिनिस्टर और क्रिकेटर इमरान खान के नाम पर रखा गया। अगरचे साइंटिफिक ईमानदारी का तकाजा है कि हम यह जरूर बताएं कि यह फॉसिल्स मुकम्मल ढांचे नहीं बल्कि
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हड्डियों के टुकड़े हैं। और इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स के दरमियान इनके नामों पर थोड़ी बहस मौजूद जरूर है। लेकिन इस बात पर कोई शक नहीं कि 66 मिलियन साल पहले जब आसमान से आफत गिरने वाली थी तो हमारे बलचिस्तान के पहाड़ों और मिट्टी पर यह
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जॉइंट क्रिएचर्स और दर्दनाक शिकारी सच में दौड़ रहे थे। यह था डायनासोर का वो अजीम दौर जो 16 करोड़ 50 लाख साल पहले इस जमीन पर चला और फिर एक आखिरी दोपहर आसमान से मौत का वो पत्थर आया और यह पूरा सिलसिला
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हमेशा के लिए मिट्टी में दफन हो गया। जब जमीन से बड़े जॉइंट्स खत्म हुए तो पूरी दुनिया अचानक खाली हो गई। बिल्कुल ऐसे जैसे एक बहुत बड़ा जंगल खाली हो जाए जहां ना कोई शिकारी बचा हो ना कोई कंपैटिट और
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हर तरफ सिर्फ खाना और जगह मौजूद हो। मैमल्स ने इस खाली दुनिया का भरपूर फायदा उठाया और अगले 1 करोड़ साल में चूहों जैसी शक्लों से निकलकर हिप्पो जैसी बड़ी और ताकतवर शक्लों में बदल गए। और यहीं से
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मैमल्स के राज का आगाज हुआ। लेकिन इस दास्तान का सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि सारे डायनासोर्स हमेशा के लिए खत्म नहीं हुए थे। उनकी एक ब्रांच जिंदा बच गई थी और वह थी परिंदे यानी एवियन डायनासोर्स। और
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यहीं पर उस मशहूर पहेली का जवाब भी छुपा है कि पहले अंडा आया या मुर्गी? साइंस के मुताबिक दोस्तों जवाब बहुत सीधा है। अंडा पहले आया क्योंकि मछलियां, रेप्टाइल्स और डायनासोर मुर्गी के वजूद में आने से करोड़ों साल पहले से अंडे दे रहे थे। यानी
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अंडा डायनासोर्स की ही एक पुरानी लेगसी है। लेकिन सवाल यह है कि जब 15 साल तक मुकम्मल अंधेरा छा गया तो बाकी सबके मरने के बावजूद यह परिंदे आखिर कैसे बचे?
Speaker A
दोस्तों, इसका जवाब दो चीजों में छुपा है। चोंच और बीच। बीच यानी सीड्स। जब धूप बंद हो गई और पौधे मर गए, तो जिन शिकारियों के पास दांत थे, वो खाना ना मिलने की वजह से भूख से मर गए। लेकिन दोस्तों जिन परिंदों
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के पास मजबूत चोंच थी उन्होंने मिट्टी के अंदर दबे हुए बीज ढूंढकर खाना शुरू कर दिए जो सालों तक खराब नहीं होते थे उनकी चोंच ने उनकी जान बचा ली। तो दोस्तों कल सुबह जब आप ब्रेकफास्ट में अंडा या खाना खा रहे
Speaker A
होंगे तो याद रखिएगा कि आप दर हकीकत उसी टीरेक्स के एक दूर के रिश्तेदार को प्लेट में देख रहे हैं और जब आप आसमान में किसी चिड़िया को उड़ता देखें तो दरअसल आप एक डायनासोर को उड़ता हुआ देख रहे हैं एक ऐसा
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सच जो इस पूरी तारीख को देखने का नजरिया ही बदल देता है। दोस्तों, डायनासोर्स की छोड़ी हुई इस पूरी दुनिया को मैमल्स ने इन्हहेरिट किया और इसी सिलसिले से आगे चलकर प्राइमेट्स और आखिरकार हम इंसानों का सफर साइंसदानों के मुताबिक शुरू हुआ।
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लेकिन दोस्तों, मैमल्स का यह सफर सिर्फ जमीन तक महदूद नहीं रहा। बल्कि इनमें से कुछ मैमल्स ने आगे चलकर एक बहुत ही अजीब काम किया। वो जमीन को छोड़कर वापस समंदर के गहरे पानियों में चले गए। और उनका पानी
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में लौटने का यह सफर एवोल्यूशनरी हिस्ट्री की सबसे हैरतंगेज कहानियों में से एक है। आज इन्हें दोस्तों समुंदर की गहराइयों में तैरता देखकर कोई यह गुमान भी नहीं कर सकता कि इनकी पिछली जनरेशंस कभी जमीन पर चार टांगों से चला करते थे। हां दोस्तों,
Speaker A
साइंस के मुताबिक हकीकत यही है। फॉसिल रिकॉर्ड में इसका एक बहुत ही दिलचस्प सिलसिला मिलता है। जहां सबसे पहले हमें पैकीसिटस मिलता है। एक भेड़िए जैसी शक्ल वाला चार टांगों का जानवर जो दरियाओं के किनारे रहता था और जिसके फॉसिल्स हमारे
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पाकिस्तान से दरियाफ्त हुए। फिर एंबुलोसिटस आया जो जमीन पर चलने के साथ-साथ पानी में तैर भी सकता था। उसके बाद रोडोसिटस जो अपना ज्यादातर वक्त पानी में गुजारता था और आगे चलकर दोस्तों बज़लोसोरस जो पूरी तरह एक समुद्री जॉइंट बन
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चुका था लेकिन उसके जिस्म पर अभी भी पिछली टांगों के छोटे-छोटे निशानात बाकी थे और आखिरकार मॉडर्न वेल्स जिनमें वो टांगे हमेशा के लिए गायब हो गई। यह हैरतंगेज ट्रांसफॉर्मेशन तकरीबन 1 करोड़ 50 लाख सालों के अरसे में मुकम्मल हुआ और जब
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जेनेटिक्स ने इस पर मजीद तहकीक की तो एक और ऐसी बात सामने आई जिसका जाहरी शक्ल देखकर अंदाजा लगाना नामुमकिन था और वो यह थी कि व्हेल का सबसे करीब तरीन जिंदा रिश्तेदार कोई मछली नहीं बल्कि हिपोपोटमस है। लेकिन दोस्तों यहां साइंटिफिक
Speaker A
ईमानदारी का तकाजा यह है कि हम दोनों पहलू सामने रखें। डॉक्टर इयत कुनेबी जिन्होंने इस मौजू पर गहरी रिसर्च की है। एक बहुत अहम नुक्ता उठाते हैं कि सालों तक व्हेल की पेल्विक बोनस को बेकार बची हुई हड्डियां कहकर पेश किया जाता रहा था। जबकि
Speaker A
हकीकत में रिप्रोडक्शन यानी नस्ल आगे बढ़ाने के लिए उनका एक जरूरी मकसद पहले से मालूम था। यानी फॉसिल्स अपनी जगह बिल्कुल असली और सच हैं। लेकिन बाज औकात उन पर बनाई गई कहानी अपनी हद से आगे निकल जाती
Speaker A
है। क्योंकि हड्डियां सबके पास है। मगर उन पर चढ़ाया हुआ नैरेटिव पहले से तयशुदा नहीं आता। लेकिन जहां व्हेल का सफर फॉसिल रिकॉर्ड में इतना वाज़ मिलता है। वहीं अब एक ऐसी मखलूक की बात करते हैं जिसके बारे
Speaker A
में अक्सर डॉक्यूमेंट्रीज खामोश रहती हैं। यानी चमगादड़, बैट्स। आज से तकरीबन 5 करोड़ 20 लाख साल पहले जब बात पहली बार फॉसिल रिकॉर्ड में नजर आती है जैसे बायोमिंग में मिलने वाला ओनिकोनिक टेरेस या इकारोनिक टेरेस तो हैरत की बात यह है
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कि वह पहले दिन से ही एक मुकम्मल चमगादड़ की शक्ल में मिलती है पूरी तरह डिवेप हुए पंख और अंधेरे में रास्ता ढूंढने के लिए इको लोकेशन का स्कल स्ट्रक्चर यानी वह पहले लम्हे से ही उड़ती हुई और रात में
Speaker A
शिकार करती हुई नजर आती है। लेकिन दोस्तों जमीन पर चलने वाले मैमल से उड़ने वाली बेड बनने के दरमियान का सफर फॉसिल रिकॉर्ड में पूरी तरह से गायब है। ऐसा कोई भी एक फॉसिल नहीं मिला जो यह दिखाए कि पहले उंगलियां
Speaker A
थोड़ी लंबी हुई फिर थोड़ी और और आहिस्ता-आहिस्ता पर बने। यानी वो हाफ विंग स्टेज जो लॉजिकली होना चाहिए था। वो रिकॉर्ड में बिल्कुल मिसिंग है। एंड पॉइंट तो मौजूद है लेकिन उस तक पहुंचने का रास्ता नहीं मिलता। इससे पता चलता है कि
Speaker A
हर मखलूक के बदलने का सफर एक जैसा साफ रिकॉर्ड नहीं रखता। व्हेल और घोड़ों का सफर स्टेप बाय स्टेप फॉसिल्स के साथ डॉक्यूमेंटेड है। लेकिन चमगादड़ के केस में ऐसा कोई बीच का सबूत नहीं मिलता। साइंस इस गैप की कई वजूहात बताती हैं।
Speaker A
जैसे इनकी हड्डियों का बहुत नाजुक होना या इनके एववोल्यूशन का बहुत तेजी से होना। जो कि एक मुमकिन एक्सप्लेनेशन तो जरूर है लेकिन एक अंदाजा और ठोस सबूत दो बिल्कुल अलग चीजें होती हैं। लेकिन यह सच्चाई जरूर वाज़ करती है कि फॉसिल रिकॉर्ड में रियल
Speaker A
गैप्स मौजूद हैं जिन्हें साइंस खुद तस्लीम करती है। अब दोस्तों एक लम्हा रुक कर इस पूरी दस्तान को कुरान और इस्लामिक पर्सपेक्टिव की रोशनी में देखते हैं। जो कुछ अभी हमने देखा पांच अजीम तबाहियां और हर तबाही के बाद जिंदगी का पहले से बेहतर
Speaker A
होकर वापस आना। यह एक बहुत गहरी हकीकत खोलता है कि तबाही और तैयारी हमेशा एक दूसरे की मुखालिफ नहीं होती। दोस्तों एस्ट्रोइड ने डोमिनेंट जॉइंट्स को तो खत्म कर दिया लेकिन एस्ट्रोइड के इसी धमाके की वजह से उन छोटे मैमल्स के लिए दरवाजा
Speaker A
खुला। वो छोटे मैमल्स जो 16 करोड़ 50 लाख साल तक उन रेप्टीलियन साइों के नीचे डर डर कर रहा करते थे। उनका वो लंबा छुपाव अंधेरे में देखना, जमीन के नीचे बसना, कम खुराक पर गुजारा करना और खतरों की वजह से
Speaker A
बड़ा दिमाग डेवप करना। दोस्तों, यह दरअसल कोई कमजोरी नहीं थी। बल्कि उस आने वाले तूफान के लिए उनकी सदियों लंबी तैयारी थी। हर चीज पहले से इस तरह तैयार थी कि जब आसमानी फैसला आया, तो वही कमजोर बचकर अगले
Speaker A
दौर के वारिस बन सकें। और गौर कीजिए दोस्तों कि जब एस्टेरॉइड गिरा और बड़े जॉइंट्स मरे तो उनकी मुर्दा जिस्म फंजाई डीकंपोजर्स और बचे हुए छोटे जानवरों का रिस्क बन गई। यानी जो चीज एक मखलूक के लिए मौत थी वही दूसरे के जीने का सहारा बन गई।
Speaker A
दोस्तों अल्लाह ताला सूर दरियाद की आयत नंबर 22 में फरमाता है और आसमान में तुम्हारा रिज़्क है और वह भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है। रिज़्क सिर्फ इंसान के लिए नहीं बल्कि इस कायनात की हर मखलूक
Speaker A
के लिए पहले से मुकर्रर है। चाहे वह रिज़्क किसी दूसरी मखलूक के खात्मे से ही क्यों ना हो। और फिर उस एस्ट्रोइड के अंदाजे और टाइमिंग पर गौर करें। दोस्तों एक 10 से 15 कि.मी. चौड़ा पत्थर 20 से 30 कि.मी. पर
Speaker A
सेकंड की रफ्तार से मेक्सिको के ठीक उस यूकार्टन पेनिसला पर गिरता है जहां जमीन हाइड्रोकार्बंस और सल्फर के बारूद बनी बैठी थी। सोचिए दोस्तों जमीन का 87% हिस्सा सेफ जोोन था। सिर्फ 13% हिस्सा ऐसा था जो ऐसी ग्लोबल तबाही मचा सकता था। अगर
Speaker A
यह पत्थर पेसिफिक ओशन के गहरे पानियों में गिरता या जमीन की गर्दिश की वजह से सिर्फ 30 मिनट्स पहले या बाद में आता तो जमीन पर यह कयामत ना आती। और डायनासोर्स कभी ना मिटते। लेकिन ठीक 60 डिग्री का एंगल, ठीक
Speaker A
वही 13% का बारूदी टारगेट, ठीक वही लम्हा और ठीक वही मैस जो बड़े जॉइंट्स को मिटा दे। मगर जमीन के नीचे छुपे हुए मैमल्स और बीज खाने वाले परिंदों को बचा ले। अल्लाह ताला सूर अल फुरकान की आयत नंबर दो में
Speaker A
फरमाता है। उसने हर चीज को पैदा किया और उसका अंदाजा बिल्कुल ठीक मुकर्रर किया। अंदाजा प्रसीजन टाइमिंग यह कोई अंधा इत्तेफाक नहीं लगता। यह एक कामिल जात का तयशुदा निजाम लगता है। और जरा सोचिए जब यह जानवर मरकर जमीन की गहराइयों में दफन हुए
Speaker A
तो ऑक्सीजन ना मिलने की वजह से उनके गल सड़ने का अमल रुक गया। लाखों सालों में जमीन के मिनरल्स उनके जिस्मों में दाखिल हुए और उनकी हड्डियों को धीरे-धीरे पत्थर और आयरन मिनरल्स में बदल दिया। और इसी तरह
Speaker A
यह फॉसिल्स बने जो आज हमें मिलते हैं। अब दोस्तों यहां कुरान का एक अजीम मौजजा सामने आता है। सूर इसरा की आयत नंबर 49 और 50 में जब मुमकिरीन ने पूछा जब हम मरकर सिर्फ हड्डियां और मिट्टी बन जाएंगे तो
Speaker A
क्या हमें दोबारा जिंदा किया जाएगा? तो दोस्तों अल्लाह ने अपने नबी को फरमाया कहो चाहे तुम पत्थर बन जाओ या लोहा। लोहा आयरन दोस्तों सुभान अल्लाह जिस दौर में लोग फसिलाइजेशन का साइंस नहीं जानते थे कुरान ने तभी वाज़ कर दिया था कि हड्डियां सदियों
Speaker A
में दफन होकर पत्थर और लोहे के मिनरल्स बन जाती हैं। लेकिन जो जात पत्थर बन चुकी हड्डियों को देख रही है उसके लिए इंसान को दोबारा जिंदा करना कितना आसान होगा। तो यह थी इस जमीन की कहानी इंसान से पहले की
Speaker A
पांच बार जिंदगी तकरीबन खत्म हुई। पांच बार वापस आई। हर बार पहले से ज्यादा कॉम्प्लेक्स हर बार पहले से ज्यादा रिमारकेबल। डायनासोर 16 करोड़ 50 लाख साल तक इस जमीन के हाकिम। जॉइंट्स जो रोजाना 40 किलोग्राम बढ़ते थे। शिकारी जो बिना
Speaker A
देखे शिकार करते थे और इस पूरे सफर में एक ब्रांच धीरे-धीरे उठ रही थी और वो थी प्राइमेट्स की। वो ब्रांच जो साइंस के मुताबिक आखिर में इंसान तक पहुंचती है। लेकिन यह साइंस की कहानी थी। अभी तक हमने
Speaker A
इंसान की बात नहीं की। अगले एपिसोड में हम उस सवाल पर आएंगे जो इस पूरी सीरीज का असली मरकज है कि इंसान कहां से आया। 32 लाख साल पुराना एक स्केलेटन लसी जो इथियोपिया की मिट्टी से निकला नियंडरथल्स
Speaker A
जिनका डीएनए आज भी हमारे खून में है। इसी तरह होमोइरेक्टस जो आग जलाता था और अफ्रीका से निकलकर पूरी दुनिया में फैल गया। इन सब की कहानी हम अगले एपिसोड में देखेंगे। वीडियो को लाइक और सब्सक्राइब करें। मिलते हैं अगले एपिसोड में। अल्लाह
Speaker A
हाफिज।
Topics:डायनासोरमास एक्सटिंशनएस्ट्रोइडपरमिन एक्सटिंशनकेपीजी एक्सटिंशनवोल्केनो इरप्शनफॉसिलक़ुरान और विज्ञानजीवन का पुनर्जन्मचिकशल क्रेटर











