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How a Poor Marwari Boy Built Haldiram's

हल्दीराम की गरीबी से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी, जिसने भारतीय स्नैक्स इंडस्ट्री में क्रांति ला दी।

Key Takeaways

  • संकट के समय हार न मानकर नए अवसरों की खोज सफलता की कुंजी है।
  • उत्पाद में निरंतर नवाचार और ग्राहक की पसंद को समझना जरूरी है।
  • ब्रांडिंग से उत्पाद की वैल्यू बढ़ती है और ग्राहक जुड़ाव मजबूत होता है।
  • व्यवसाय का विस्तार सही रणनीति और स्थानीय स्वाद के अनुसार करना चाहिए।
  • कठिनाइयों के बावजूद मेहनत और लगन से बड़े बिजनेस इम्पायर की नींव रखी जा सकती है।

What the video covers

  • हल्दीराम का जन्म 1908 में बीकानेर के गरीब परिवार में हुआ और 12 साल की उम्र में भुजिया बनाना सीखा।
  • उन्होंने भुजिया में मोठ की दाल मिलाकर और उसे पतला व क्रिस्पी बनाकर नया इनोवेशन किया।
  • हल्दीराम ने महाराजा दंग सिंह के नाम पर भुजिया का ब्रांडिंग किया और प्राइस बढ़ाकर सफल हुए।
  • 1944 में पारिवारिक विवाद के कारण बिजनेस से अलग हो गए, लेकिन फिर मूंग दाल और भुजिया बेचकर पुनः शुरुआत की।
  • 1950 के दशक में कोलकाता में विस्तार किया और बंगाली स्वाद के अनुसार मिक्सचर लॉन्च किया।
  • 1968 में नागपुर में स्वीट्स जैसे काजू कतली, मलाई लड्डू आदि बेचकर भारतीय स्वीट इंडस्ट्री में बड़ा नाम बनाया।
  • शिव किशन ने हल्दीराम को रेस्टोरेंट में बदलने का आइडिया दिया और डोसा-इडली से शुरुआत की।
  • हल्दीराम्स ने धीरे-धीरे भारत के बड़े शहरों में विस्तार किया और लाखों ग्राहकों का भरोसा जीता।
  • ब्रांडिंग, क्वालिटी, और कस्टमर फोकस के कारण हल्दीराम्स भारत का सबसे बड़ा स्नैकिंग ब्रांड बना।
  • लिबरलाइजेशन के बाद पैकेजिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मजबूत कर वैश्विक स्तर पर भी पहचान बनाई।

Answers

Questions about this video

हल्दीराम ने भुजिया में क्या खास नवाचार किया?

हल्दीराम ने भुजिया में बेसन के साथ मोठ की दाल मिलाई और उसे पतला व क्रिस्पी बनाया, जिससे उसकी लोकप्रियता और बिक्री बढ़ी।

हल्दीराम्स का व्यवसाय कैसे शुरू हुआ और बढ़ा?

हल्दीराम ने 12 साल की उम्र में भुजिया बनाना सीखा, पारिवारिक संघर्ष के बाद मूंग दाल और भुजिया बेचकर पुनः शुरुआत की, फिर कोलकाता और नागपुर में विस्तार किया।

हल्दीराम्स ने भारतीय स्नैक्स इंडस्ट्री में कैसे सफलता पाई?

नवाचार, ब्रांडिंग, स्थानीय स्वाद के अनुसार उत्पादों का विकास, और कस्टमर फोकस के कारण हल्दीराम्स भारत का सबसे बड़ा स्नैकिंग ब्रांड बना।

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Speaker A
साल 1919 बीकानेर की गलियों में एक 12 साल का बच्चा अपनी बुआ से भुजिया बनाना सीखता है और केवल दो पैसे में उसे बेचना चालू करता है। इस बात से बिल्कुल अनजान कि यही भुजिया एक दिन हजारों करोड़ों के बिजनेस एंपायर की नीव बनेगी और एक दिन पूरी दुनिया में बिकने वाले लाखों भुजिया पैकेट्स में उसका नाम हल्दीराम प्रिंटेड होगा। यह कहानी है इंडिया के सबसे बड़े स्नैकिंग ब्रांड हल्दीराम्स की। हल्दीराम का जन्म 1908 में बीकानेर में एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके
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Speaker A
ग्रैंडफादर भुजिया बाजार में अपनी छोटी सी शॉप में भुजिया बेचते थे और बचपन से ही हल्दीराम को भुजिया में बहुत इंटरेस्ट था। इसीलिए सिर्फ 12 साल की उम्र में उन्होंने हर दिन घंटों मेहनत करके भुजिया मेकिंग प्रोसेस को मास्टर कर लिया और बहुत जल्द
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Speaker A
अपने ग्रैंडफादर की शॉप में रेगुलरली बैठने लगे। लेकिन वह अपने ग्रैंडफादर की तरह भुजिया से केवल कुछ एक्स्ट्रा पैसे कमाकर सेटिस्फाइड नहीं थे। वो अपने बिजनेस को बढ़ाना चाहते थे। हल्दीराम जो भुजिया बेच रहे थे वो बेसन से बनती थी, लेकिन
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Speaker A
उन्होंने देखा कि राजस्थान के लोगों को मोठ की दाल बहुत पसंद है। वहां के लोग कई डिशेस में मोठ की दाल यूज करते थे। इसीलिए हल्दीराम ने भी अपनी भुजिया को बेसन के साथ मोठ की दाल मिला के बनाना चालू कर
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Speaker A
दिया। उनकी ये नई भुजिया लोगों को काफी डिलीशियस लगी और एक इंस्टेंट हिट बन गई। लेकिन वो यहां नहीं रुके। उन्होंने रियलाइफ किया कि उनकी अभी की भुजिया काफी मोटी और सॉफ्ट है, लेकिन अगर वो इसे थिन और
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Speaker A
क्रिस्पी बना दें तो कस्टमर्स का ईटिंग एक्सपीरियंस काफी सेटिस्फाइंग बन जाएगा। इसे अंजाम देने के लिए उन्हें सबसे पहले अपने बैटर को पतला बनाना था और साथ में एक ऐसा मेश चाहिए था जिसके होल्स एक स्टैंडर्ड मेश से छोटे हो ताकि उसमें से
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Speaker A
पतली भुजिया बन सके। उन्होंने मार्केट में कई मेश मेकर्स के साथ लगकर एक परफेक्ट मेश बनवाया और अपने बैटर के कई आइट शंस भी ट्राई किए। फाइनली कई महीनों की एक्सपेरिमेंटेशन के बाद उन्होंने एक परफेक्टली थिन और क्रिस्पी भुजिया बना ली।
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Speaker A
इस नई भुजिया ने सेल्स को एक्सपोनेन्शियली बढ़ा दिया। लेकिन हल्दीराम का इनोवेशन केवल भुजिया की रेसिपी तक लिमिटेड नहीं था। टर्न्स आउट कि हल्दीराम सीक्रेट एक ब्रांडिंग जीनियस भी थे। मार्केट में ऐसी कई और दुकानें थीं जो भुजिया बेचती थीं,
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Speaker A
लेकिन हल्दीराम चाहते थे कि कस्टमर्स के दिमाग में उनकी भुजिया की इंपॉर्टेंस एक नॉर्मल भुजिया से कई गुना ज्यादा हो। हल्दीराम को पता था कि महाराजा दंग सिंह बीकानेर के सबसे पॉपुलर महाराजा रहे थे और लोग उन्हें बहुत रिस्पेक्ट करते थे। इसीलिए
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Speaker A
हल्दीराम ने अपनी भुजिया का नाम महाराजा दंग सिंह के नाम पे दंग सेव रख दिया। महाराजा के नाम से उनकी भुजिया बाकी सब भी नॉर्मल भुजिया से डिफरेंशिएबल गई। इस नई ब्रांडिंग के साथ उन्होंने प्राइसेस भी बढ़ा दिए और
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Speaker A
कस्टमर्स ने उस प्राइस को खुशी-खुशी एक्सेप्ट भी कर लिया। अगले कुछ सालों में हल्दीराम ने अपने दो भाइयों के साथ मिलके बिजनेस को अच्छा खासा एस्टेब्लिश कर लिया था और अब 36 साल की ऐज में उनकी एक वाइफ
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Speaker A
और तीन बेटे भी थे। बेहद गरीबी से उठकर आए हल्दीराम के लिए सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था कि तभी 1944 में उनकी लाइफ में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट आया। घर की लेडीज के बीच में रिलेशंस बिगड़ने लगे। बात इतनी बिगड़ गई कि
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Speaker A
फाइनली हल्दीराम को घर छोड़कर अलग होना पड़ा। लेकिन प्रॉब्लम यह थी कि घर के साथ-साथ हल्दीराम को बिजनेस से भी अलग कर दिया गया था। जिस बिजनेस को हल्दीराम ने अपनी जी जान लगा के बनाया था, आज उसी बिजनेस से
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Speaker A
उन्हें एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिली और वह रातों-रात अपनी फैमिली के साथ सड़क पे आ गए। लेकिन जिम्मेदारियों के चलते उनके पास इमोशनल होने का कोई टाइम नहीं था। हल्दीराम ने जल्द से जल्द अपने आप को संभाला और काम
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Speaker A
ढूंढने लगे। एक दिन मार्केट में काम ढूंढते वक्त किसी ने उनका नाम पुकारा। जब हल्दीराम ने मुड़कर देखा तो पीछे उनका एक बचपन का दोस्त खड़ा था। उनका यह दोस्त कई सालों बाद बीकानेर लौटा था। हल्दीराम ने
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Speaker A
उसे अपनी सिचुएशन के बारे में सब कुछ बता दिया। सालों पहले हल्दीराम ने ₹20,00,000 लौटा दिए और यही ₹1 हल्दीराम के लिए लाइफलाइन साबित हुए। सबसे पहले तो उन्होंने अपनी फैमिली के लिए एक छोटा सा घर रेंट पे लिया और फिर बिजनेस आइडियाज
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Speaker A
सोचने लगे। उनकी वाइफ चंपा देवी काफी डिलीशियस मूंग दाल बनाती थी और बिकानेर के लोगों के लिए भी मूंग दाल एक स्टेपल डिश थी। फिर क्या, उन्होंने मूंग दाल का बिजनेस करने का फैसला लिया। उन्होंने बचे हुए पैसों से मूंग दाल, स्पाइसेज और बाकी
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Speaker A
आइटम्स खरीदे और एक काम चलाओ किचन भी सेटअप कर लिया। वो दोनों अर्ली मॉर्निंग उठकर मूंग दाल प्रिपेयर करते और फिर हल्दीराम पूरे दिन मार्केट में घूम-घूम कर लोकल वर्कर्स और ऑफिस गोयर्ड बेचने लगे। कुछ ही टाइम में उन्होंने मूंग दाल के साथ
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Speaker A
अपने ओरिजिनल पैशन यानी भुजिया को भी बेचना शुरू कर दिया। हार्ड वर्क, टेस्ट और क्वालिटी के चलते उनका एक लॉयल कस्टमर बेस बन गया और कुछ ही टाइम में उन्होंने एक छोटी सी शॉप को रेंट पे लेने के पैसे जमा
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Speaker A
कर लिए। शॉप खुलने के कुछ ही समय में मार्केट में बात फैल गई कि हल्दीराम और उनकी दंग सेव अब वापस आ चुके हैं। उनकी दुकान में लोगों की लाइन लगने लगी और देखते ही देखते हल्दीराम फिर से लोकल
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Speaker A
भुजिया किंग बन गए। अगले कुछ सालों में हल्दीराम ने केवल इसी दुकान को ग्रो करने में पूरा फोकस किया। लेकिन फिर 1950 के दशक में कुछ ऐसा हुआ जो उनके लिए एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। हल्दीराम अपने एक
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Speaker A
दोस्त की बेटी की शादी में कोलकाता गए थे। वहां उन्होंने सभी मेहमानों के लिए भुजिया बनाई थी और जब उन्होंने भुजिया खाने के बाद मेहमानों का रिएक्शन देखा तो वो काफी सरप्राइज थे। उन लोगों को भुजिया इतनी पसंद
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Speaker A
आ रही थी कि वो तारीफ तो कर ही रहे थे, साथ में हल्दीराम को बल्क ऑर्डर्स भी दे रहे थे। हल्दीराम को समझ आ गया था कि कोलकाता में अपने बिजनेस को एक्सपेंड करना एक बहुत बड़ी अपॉर्चुनिटी है, स्पेशली इसलिए
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Speaker A
क्योंकि वहां ऐसा कोई बड़ा कंपटीशन था ही नहीं जो भुजिया बेचता हो। 1955 में हल्दीराम ने अपने छोटे बेटे रामेश्वर लाल और अपने सबसे बड़े पोते शिव किशन को कोलकाता में बिजनेस सेटअप करने को भेजा। यहां भी उनकी शुरुआत एक छोटे से घर और
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Speaker A
केवल 8 स्क्वायर फीट की दुकान से हुई। शुरुआत तो स्लो थी, लेकिन इवेंचर काता में भी उनका बिजनेस वर्ल्ड ऑफ माउथ के कारण ग्रो करने लगा और देखते ही देखते वो दिन की 150 से 200 किलो भुजिया बेचने लगे।
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Speaker A
आल्सो बंगाली को अट्रैक्ट करने के लिए इन्होंने वहां के टेस्ट के हिसाब से बंगाली मिक्सचर नाम की नमकीन लॉन्च की जो काफी सक्सेसफुल हो गई। अगले 12 सालों में उनकी शॉप 8 स्क्वायर फीट से बढ़कर 25 स्क्वायर फीट की हो गई और बिजनेस भी हर साल
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Speaker A
डबल हो रहा था। एक बड़ा शहर होने के कारण कोलकाता ब्रांच का बिजनेस अब बिकानेर ब्रांच से भी बड़ा हो चुका था। 1968 तक हल्दीराम के तीनों बेटे सेटल्ड थे। उनके बड़े बेटे मूलचंद बिकानेर का बिजनेस संभालते थे। सती दस ने फैमिली से अलग होकर
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Speaker A
इंडिपेंडेंट शॉप्स खोल ली थी और रामेश्वर लाल कोलकाता बिजनेस चला रहे थे। इसे देखते हुए हल्दीराम ने बिजनेस से सेमी रिटायरमेंट ले ली और वो केवल कभी-कभी बिजनेस को सुपरवाइज करने के लिए विजिट्स करते थे। बिजनेस ऑलरेडी अच्छा खासा चल रहा
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Speaker A
था, लेकिन इसके बाद जो हुआ वह हल्दीराम्स की बिजनेस जर्नी में एक सुनहरा चैप्टर साबित होने वाला था। हल्दीराम के सबसे बड़े पोते शिव किशन जो अभी तक कोलकाता बिजनेस में अपने चाचा के साथ काम कर रहे थे, वह
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Speaker A
1968 में नागपुर में हल्दीराम की ब्रांच खोलने का फैसला लेते हैं। नागपुर आके शिव किशन ने देखा कि वहां के लोग बालू शज, गुजराती पेड़ा, मैसूर पाक और लड्डू जैसे स्वीट्स को बहुत पसंद करते थे। मतलब वहां के लोगों को स्वीट्स तो बहुत पसंद थे,
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Speaker A
लेकिन अभी तक इन्हें इंडिया के बाकी हिस्सों के स्वीट्स का ज्यादा एक्सपोजर नहीं मिला था। इस अपॉर्चुनिटी को देखते हुए शिव किशन ने नागपुर में भुजिया के साथ-साथ अपनी फेवरेट काजू कतली भी बेचना चालू किया। स्टार्टिंग में कस्टमर उसे खरीदने में
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Speaker A
हेजिटेंट थे, इसलिए शिव किशन अपने कस्टमर्स को फ्री सैंपल्स ऑफर करने लगे। एक बार टेस्ट करते ही लोग काजू कतली के दीवाने होने लगे और डिमांड स्काई रॉकेट कर गई। इस सक्सेस को देखते हुए शिव किशन ने मलाई लड्डू,
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Speaker A
रसगुल्ला और रस मलाई जैसे स्वीट्स भी ऑफर करना चालू कर दिए। और जाने-अनजाने यहीं से शुरुआत हुई थी हल्दीराम्स की इंडियन स्वीट इंडस्ट्री में सबसे बड़े प्लेयर बनने की। 1971 तक नागपुर में हल्दीराम के दो आउटलेट्स खुल गए थे, लेकिन शिव किशन
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Speaker A
यहां रुकना नहीं चाहते थे। एक दिन शिव किशन कीर्ति नाम के रेस्टोरेंट में गए जिसने उनकी आंखें खोल दी। वो रेस्टोरेंट केवल डोसा और लस्सी ऑफर करता था और वहां हमेशा कस्टमर्स की भीड़ लगी रहती थी। यहीं से शिव
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Speaker A
किशन को आईडिया आया हल्दीराम्स को एक शॉप से एक रेस्टोरेंट में बदलने का। मार्केट को समझने पे उन्हें पता चला कि महाराष्ट्र में लोगों को साउथ इंडियन डिशेस जैसे डोसा और इडली बहुत पसंद हैं। अब वो तो अपने
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Speaker A
रेस्टोरेंट में बिकानेर के पॉपुलर स्नैक्स जैसे समोसा और कचौड़ी ऑफर करना चाहते थे, लेकिन उससे पहले उन्हें कस्टमर्स को अपने रेस्टोरेंट तक लाना था। इसीलिए उन्होंने शुरुआत उन्हीं डिशेस से करी जिनकी डिमांड थी, यानी डोसा और इडली। शिव किशन ने एक 30
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Speaker A
सीटर रेस्टोरेंट खोला और बहुत जल्द उनके रेस्टोरेंट की सारी सीट्स ऑक्यूपाइड रहने लगी। इसे देखते हुए उन्होंने अपनी सीटिंग कैपेसिटी डबल कर दी और मेन्यू में समोसा और कचौड़ी भी ऐड क...
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Speaker A
सीटर रेस्टोरेंट खोला और बहुत जल्द उनके रेस्टोरेंट की सारी सीट्स ऑक्यूपाइड रहने लगी इसे देखते हुए उन्होंने अपनी सीटिंग कैपेसिटी डबल कर दी और मेन्यू में समोसा और कचौड़ी भी ऐड कर दिया जो कस्टमर्स डोसा और इडली खाने आते थे शिवकिशन उन्हें समोसा
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Speaker A
और कचौड़ी ट्राई करने को कहते थे और जैसा काजू कतली के समय हुआ था सेम वैसा ही अब हुआ एक बार कस्टमर ने समोसा कचौड़ी टेस्ट कर ली तो उनमें से ज्यादातर लोग उनके रेगुलर कंज्यूमर्स बन गए अगले कुछ सालों
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Speaker A
में नागपुर में हल्दी राम्स के मल्टीपल आउटलेट्स खुल चुके थे और इसी के चलते हल्दीराम्स नागपुर में केवल एक भुजिया बिजनेस से बढ़कर एक इंडियन स्नैक्स स्वीट्स और रेस्टोरेंट बिजनेस में बदल चुका था 1975 में कोलकाता ब्रांच के
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Speaker A
रामेश्वर लाल फैमिली बिजनेस स्ट्रक्चर से अलग होक इंडिपेंडेंट हो जाते हैं एक एग्रीमेंट होता है जिसके अकॉर्डिंग रामेश्वर लाल वेस्ट बंगाल से बाहर बिजनेस नहीं करेंगे और मूलचंद और उनके बेटे वेस्ट बंगाल में एंट्री नहीं लेंगे इस समय तक
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Speaker A
हल्दीराम्स की नागपुर ब्रांच बहुत अच्छी चल रही थी लेकिन शिव केशन के दिमाग में इससे भी बड़े प्लांस थे वो एक ऐसे शहर में एक्सपेंड करना चाहते थे जो हल्दीराम्स को एक नेशनल लेवल ब्रांड बना देने वाला था और
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Speaker A
वह शहर था भारत की राजधानी दिल्ली दिल्ली में एक्सपेंड करने के लिए शिव किशन ने अपने छोटे भाई मनोहर लाल को चुना मनोहर लाल तब तक बिकानेर बिजनेस में काम कर रहे थे और शिव किशन को उनमें बहुत पोटेंशियल
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Speaker A
दिख रहा था 1982 में मनोहर लाल अपने छोटे भाई मधुसूदन के साथ दिल्ली आए और वहां देखा कि चांदनी चौक फेमस स्नैक्स वेंडर से भरा हुआ था उन्होंने अपनी लाइफ में इतना कंपटीशन कभी नहीं देखा था लेकिन अच्छी बात
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Speaker A
यह थी कि कंपटीशन के साथ-साथ वहां डिमांड भी बहुत ज्यादा थी मनोहर लाल ने शिव किशन की हेल्प से अपनी शॉप के लिए जगह खरीदी और 1983 में बिजनेस स्टार्ट कर दिया अगले एक साल तक दिन रात एक करके उन्होंने मार्केट
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Speaker A
में अपनी रेपुटेशन बिल्ड की और ब्रेक इवन करने लगे कि तभी उनके साथ एक बहुत बड़ी ट्रेजेडी हो गई 1984 के भयानक एंटी सिख राइट्स ने दिल्ली को झुलसा दिया था और इसी दौरान मनोहर लाल की वर्कशॉप और घर भी जल
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Speaker A
गया अगले दो महीने तक हल्दीराम्स का दिल्ली का बिजनेस जीरो पे आ चुका था लेकिन मनोहर लाल ने हार नहीं मानी उन्होंने नागपुर और बीकानेर से फाइनेंशियल हेल्प ली और दिल्ली में एक नई 300 स्क्वा फीट की वर्कशॉप एक्वायर की और बिजनेस को
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Speaker A
रीस्टार्ट किया उन्होंने जो रेपुटेशन बिल्ड की थी वो बहुत काम आई और बिजनेस वापस पिकअप करने लगा अगले कुछ सालों में उन्होंने ना केवल अपनी करंट वर्कशॉप को एक्सपेंड किया बल्कि एक 2000 स् फीट की नई फैक्ट्री भी इस्टैब्लिशमेंट
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Speaker A
[संगीत] क्लास कंज्यूमर ब्रांड बने इंडिया के हर घर के लोग उनके प्रोडक्ट्स कंज्यूम करें उन्होंने देखा कि लिबरलाइजेशन के बाद pso2 करोड़ों लगा रहे थे लेकिन उस समय कोई भी ब्रांड इंडियन स्नैक्स को लॉन्ग सेल्फ लाइफ वाली पैकेजिंग में नहीं बेच रहा था
11:28
Speaker A
इसी अपॉर्चुनिटी को देखते हुए हल्दी राम्स ने सबसे पहले अपनी बिकानेरी भुजिया और आलू भुजिया जैसे प्रोडक्ट्स को नाइट्रोजन पैकेजिंग में बेचना चालू किया जिससे इनके शेल्फ लाइफ कुछ दिनों से बढ़कर कुछ महीनों तक पहुंच गई इस नई पैकेजिंग के कारण
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Speaker A
हल्दीराम्स का बिजनेस अब नागपुर या दिल्ली तक लिमिटेड नहीं था अब लोग इंडिया के छोटे से छोटे शहर में हल्दी राम्स की भुजिया खरीद सकते थे लॉन्च के बाद कस्टमर्स ने इन प्रोडक्ट्स को बहुत अच्छा रिस्पांस दिया और इसीलिए हल्दीराम्स ने अपने पैकेज्ड फूड
11:55
Speaker A
सेगमेंट में रसगुल्ला सोनपापड़ी पिकल्स कचौड़ी और इवन भे तेल पूड़ी में डायवर्सिफाई किया देखते ही देखते हल्दीराम्स ने 400 से ज्यादा पैकेज फूड आइटम्स बेचना चालू कर दिए अलग-अलग परचेसिंग पावर वाले कंज्यूमर्स को टारगेट करने के लिए इन्होंने अलग-अलग पैक साइजेस
12:11
Speaker A
में अपने प्रोडक्ट्स ऑफर किए जैसे इनके कई प्रोडक्ट्स का छोटा पैक केवल 5च में मिल जाता है और बड़े पैक्स ₹2000000 के लिए हल्दीराम्स ने 100 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स और लाखों रिटेलर्स को ऑन बोर्ड किया इन्हीं स्ट्रेटजी के चलते आज इंडिया के ऑलमोस्ट
12:37
Speaker A
हर घर में लोग हल्दीराम के स्नैक्स खाते हैं और इवन यूएस सिंगापुर और यूके जैसे 80 से ज्यादा देशों में हल्दीराम्स वन ऑफ द मोस्ट पॉपुलर इंडियन स्नैक्स ब्रांड है करीब 100 साल पहले हल्दीराम्स की शुरुआत भुजिया को दो पैसों में बेच के हुई थी और
12:52
Speaker A
आज उसी हल्दी राम्स ने 9 हज करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया है हल्दीराम्स की कहानी यह प्रूफ करती है कि कस्टमर्स को डिलाइट करके लगातार प्रोडक्ट्स को इनोवेट करके और समय के साथ खुद को बदल के कितना
13:03
Speaker A
भी बड़ा बिजनेस बनाया जा सकता है चाहे शुरुआत कितनी ही छोटी क्यों ना हो अगर आपको यह वीडियो अच्छी लगी तो मैं रिकमेंड करूंगा कि आप नेक्स्ट इस वीडियो को देखें
Topics:हल्दीरामभुजियाभारतीय स्नैक्सबिजनेस स्टोरीमार्केटिंगब्रांडिंगकोलकातानागपुरसफलता की कहानीशिवांशु अग्रवाल

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