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What Exactly is AGI? Is AGI here?

इस वीडियो में एजीआई की परिभाषा, इतिहास और वर्तमान स्थिति को विस्तार से समझाया गया है।

Key Takeaways

  • एजीआई की कोई सार्वभौमिक परिभाषा नहीं है और इसे मापना भी चुनौतीपूर्ण है।
  • एजीआई का सपना 70 वर्षों से वैज्ञानिकों के बीच बना हुआ है।
  • एलन ट्यूरिंग टेस्ट ने मशीन की सोचने की क्षमता को मापने का पहला प्रयास किया।
  • विभिन्न समयों पर एजीआई के लिए अलग-अलग मापन और परिभाषाएँ प्रस्तावित हुई हैं।
  • ओपन एआई ने एजीआई को आर्थिक मूल्य के आधार पर मापने की नई दिशा दी है।

What the video covers

  • 2023 में ओपन एआई और माइक्रोसॉफ्ट के एग्रीमेंट में एजीआई की अनोखी परिभाषा दी गई।
  • एजीआई की परिभाषा में भिन्नता और भ्रम की स्थिति को स्पष्ट किया गया।
  • 1950 में एलन ट्यूरिंग द्वारा मशीनों के सोचने की संभावना पर पहला सवाल उठाया गया।
  • 1956 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टर्म की शुरुआत और इसके शुरुआती लक्ष्य बताए गए।
  • एआई विंटर के कारण रिसर्च में आई बाधाओं का वर्णन।
  • 1997 में मार्क गबरर्ड द्वारा एडवांस्ड आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस का परिचय।
  • 2002 में एजीआई नामकरण की प्रक्रिया और इसके पीछे की कहानी।
  • एलेन ट्यूरिंग टेस्ट और उसकी सीमाओं पर चर्चा।
  • विभिन्न वैज्ञानिकों और कंपनियों द्वारा दी गई एजीआई की परिभाषाएँ।
  • ओपन एआई की एजीआई की आर्थिक दृष्टिकोण से मापन की परिभाषा।

Answers

Questions about this video

एजीआई की सबसे पहली परिभाषा कब और किसने दी थी?

एजीआई का टर्म पहली बार 1997 में मार्क गबरर्ड ने इस्तेमाल किया था, जिसमें उन्होंने एक ऐसी मशीन की कल्पना की जो इंसानी दिमाग जितनी तेज और जटिल हो।

एलन ट्यूरिंग टेस्ट क्या है और इसका एजीआई से क्या संबंध है?

एलन ट्यूरिंग टेस्ट एक ऐसा परीक्षण है जिसमें मशीन से बातचीत करके यह निर्धारित किया जाता है कि क्या मशीन इंसान की तरह सोच सकती है। इसे एजीआई की सोचने की क्षमता मापने के लिए पहला प्रयास माना जाता है।

ओपन एआई ने एजीआई को कैसे परिभाषित किया है?

ओपन एआई ने एजीआई को एक अत्यधिक स्वायत्त प्रणाली के रूप में परिभाषित किया है जो अधिकांश आर्थिक रूप से मूल्यवान कार्यों में मनुष्यों से बेहतर प्रदर्शन करती है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
इस माइक में डीजीआई लिखा है। मुझे एजीआई दिख रहा है। तुम्हें पता है 2023 में ओपन एआई ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ एक एग्रीमेंट साइन किया था। और ये एग्रीमेंट इतना कंट्रोवर्शियल था क्योंकि इस एग्रीमेंट में इन दोनों कंपनियों ने एजीआई को डिफाइन किया था। एक बार गेस करना चाहते हो कि अकॉर्डिंग टू दीज़ टू कंपनियां एजीआई की डेफिनेशन क्या होगी इस एग्रीमेंट में? ह्यूमन लाइक थिंकिंग या फिर एक थिंकिंग मशीन या फिर एक कॉन्शियस मशीन। अकॉर्डिंग टू दिस एग्रीमेंट एजीआई इज एक सिस्टम दैट जनरेट्स एट लीस्ट 100 बिलियन डॉलर इन प्रॉफिट। देखो अगर तुम एआई में काफी एक्टिव हो तो मैं श्योर तुमने कभी ना कभी एजीआई का नाम तो सुना ही होगा। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस। और मैं बेट अगर तुम आज भी अपने दोस्त या किसी कलीग से एजीआई की डेफिनेशन पूछोगे तो सबकी एजीआई की डेफिनेशन अलग-अलग है। कोई कहेगा हमने अचीव कर लिया। कोई कहेगा हम कभी अचीव ही नहीं कर सकते। कोई एक वियर्ड सी डेफिनेशन देगा एजीआई की। और यह सब कम नहीं था तो लोगों ने आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस, एजीआई और सुपर इंटेलिजेंस इन दोनों को ही मिक्स अप कर दिया। मैं बेट इस वीडियो से तुम एक्सजेक्टली समझ जाओगे कि एजीआई एक्चुअली में क्या है? और एजीआई एक्चुअली में क्या है? इससे ज्यादा इंटरेस्टिंग तो ये है कि हम एजीआई की असली डेफिनेशन तक पहुंचे कैसे? और फिर सुपर इंटेलिजेंस का मतलब ही समझेंगे। क्या हमने एजीआई अचीव कर लिया या फिर हम करने वाले हैं? अगर करने वाले हैं तो कब तक करने वाले हैं? या फिर ये सब बकवास है और हम कभी एजीआई अचीव ही नहीं करेंगे। लेकिन आज भी हमारे पास एजीआई को मेजर करने के लिए एक यूनिवर्सली एक्सेप्टेड तरीका नहीं है। सो टुडे वी आर गोइंग टू आंसर अ मच बिगर क्वेश्चन कि एजीआई है क्या? और यह एजीआई की स्टोरी शुरू ही क्यों हुई? और मोरेंटली अगर हमने एजीआई अचीव कर लिया तो सबसे बड़ा सवाल क्या बनता है? उसको भी डिस्कस करेंगे। मैं होप एन्जॉय दिस वीडियो। अगर मैं तुमसे पूछूं कि इंसान कितना इंटेलिजेंट है? तो तुम उसका आंसर क्या दोगे और किस बेसिस पे दोगे? आईक्यू के बेसिस पे। मेमोरी, मैथ्स, क्रिएटिविटी या फिर प्रॉब्लम सॉल्विंग। अब सेम क्वेश्चन मैं फिर से पूछता हूं। लेकिन फॉर एआई। एआई कितना स्मार्ट है? देखो आज का एआई तो जैक्ड है। मतलब इस माउंटेन की तरह जैक्ड और जैक्ड इंटेलिजेंस को तुम मेजर कैसे करोगे? जब ये इंटेलिजेंस कभी तो पीएचडी लेवल क्वेश्चन डिस्कस कर रहा है। लेकिन एक अनफेमिलियर सिचुएशन में एक एम्बैरेसिंगली स्टूपिड मिस्टेक भी कर देगा। तो फिर मैं क्या समझूं कि ये इंटेलिजेंस है कि और अगर है भी तो कितना है। क्योंकि समवेयर इनसाइड दिस वियर्ड जैवड इंटेलिजेंस लाइ द बिगेस्ट क्वेश्चन इन टेक्नोलॉजी। कि क्या हम एक्चुअली में एजीआई बना रहे हैं या फिर हम रियली रियली गुड एट मेकिंग मशीनें लुक इंटेलिजेंट। देखो आज एजीआई पे बहुत सारी प्रेडिक्शंस होती हैं। और टू बी ऑनेस्ट अगर आज एक साइंटिस्ट या एआई रिसर्चर एक प्रेडिक्शन करता है कि हम एजीआई अचीव कर लेंगे बाय 2027-28 जब भी तो मैं इन टाइमलाइंस को बिल्कुल सीरियस नहीं लेता और क्यों नहीं लेता ये तुम जल्दी समझ जाओगे इस वीडियो से। तुम मानोगे नहीं हम 70 इयर्स से एजीआई के सपने देख रहे हैं। 70 इयर्स। लेकिन ये सब शुरू कहां से हुआ ये समझने के लिए तुम मेरे साथ इंग्लैंड चलो 1950 में। एक ब्रिटिश मैथमेटिशियन और लॉजिशियन ऐलेन ट्यूरिंग, वही आदमी जिसने वर्ल्ड वॉर टू में जर्मनी का सीक्रेट एनग्मा कोड तोड़ने में मदद करी थी। वॉर खत्म होने के बाद एलेन एक पेपर लिखता है और उस पेपर में पहली ही लाइन एक क्वेश्चन होती है कि कैन मशीनें थिंक? क्या मशीन सोच सकती हैं? यार ये क्वेश्चन आज कोई पूछता तो मुझे समझ भी आता। मतलब तुम समझ रहे हो 1950 में सिर्फ यह पूछना कि कैन मशीनें थिंक? ये वो टाइम था जब कंप्यूटर रूम के साइज के होते थे। पावर्ड बाय थाउजेंड्स ऑफ फ्रेजाइल वैक्यूम ट्यूब्स। और ऐलेन उस टाइम पे पूछ रहा था कि कैन मशीनें थिंक? और एलेन ने इसका जवाब देने के लिए एक टेस्ट भी बना दिया। द इमिटेशन गेम। ऐलेन का कहना था कि अगर तुम एक मशीन से बात कर रहे हो इन द फॉर्म ऑफ टेक्स्ट और तुम बता ही ना पाओ कि सामने वाला जो बात कर रहा है वो एक्चुअली मशीन है या ह्यूमन। तब हम कह सकते हैं कि मशीनें थिंक कर रही हैं। अब इस टेस्ट पे हम वापस आएंगे। लेकिन अब आ जाओ तुम मेरे साथ छ साल बाद 1956 में जब अमेरिका में कुछ साइंटिस्ट एक समर प्रोजेक्ट के लिए इकट्ठे होते हैं। वहां पहली बार एक नया टर्म ऑफिशियली यूज़ होता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। लेकिन इनका एक्चुअल गोल क्या था? इनका गोल था एक मशीन बनाना, एक ऐसी मशीन जो लैंग्वेज को समझे, कुछ एब्स्ट्रैक्ट सोच पाए, प्रॉब्लम्स को सॉल्व करे और अपने आप को खुद इंप्रूव कर सके। मतलब ऑलमोस्ट लाइक अ ह्यूमन ब्रेन। मतलब तुम समझ रहे हो 1956 में जब एआई वर्ड ऑलमोस्ट डिस्कवर ही हुआ था तब से ये ड्रीम वही है जो आज एजीआई का ड्रीम है। स्टार्टिंग में सबको लगता था कि एजीआई अचीव करना आसान होगा। और ऐसा मैं क्यों बोल रहा हूं? क्योंकि एजीआई 5 साल में आ जाएगा, 10 साल में आ जाएगा। ये प्रेडिक्शंस आज से नहीं हो रही। फिर 1965 में नोबेल प्राइज विनर हरबर्ट साइमन ने लिखा कि 20 साल में मशीनें वो हर काम कर पाएंगी जो एक इंसान कर सकता है। फिर 1970 में एआई के फाउंडिंग फादर में से एक मारविन विंसकी ने लाइफ मैगजीन को बोला कि 3 से 8 साल में हमारे पास एक ऐसी मशीन होगी जिसके इंटेलिजेंस एक एवरेज पर्सन जितना होगा। यह तो हो गई कुछ अर्ली प्रेडिक्शंस। लेकिन इस बात को समझो कि इन अर्ली रिसर्चर्स ने इतने ग्रैंड प्रॉमिसेस कर दिए थे जो उस टाइम के डाटा, हार्डवेयर और एल्गोरिदम सपोर्ट ही नहीं करते थे। और इवेंचुअली हुआ क्या? फंडिंग बंद हो गई। इनफैक्ट 1974 से 1980 तक एआई रिसर्च ऑलमोस्ट रुक चुकी थी। और इसलिए हम एक फेमस टर्म भी यूज़ करते हैं एआई विंटर। और 1987 में दूसरा एआई विंटर आया और वो ऑलमोस्ट 1993 तक चला। लेकिन एजीआई नाम आया ही कहां से? यह टर्म एक ऐसे आदमी से आया जिसको शायद ही आज कोई जानता हो। 1997 में कैलिफोर्निया में एक नैनो टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस में एक ग्रेजुएट स्टूडेंट मार्क गबरर्ड एक पेपर प्रेजेंट करते हैं जिसका टॉपिक एआई होता ही नहीं है। लेकिन इस पेपर में वो एक नया टर्म यूज करते हैं एडवांस्ड आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस। मतलब एक ऐसा एआई जो ह्यूमंस के दिमाग जितना फास्ट और कॉम्प्लेक्स हो और किसी भी इंडस्ट्रियल या मिलिट्री वर्क के लिए ह्यूमंस को रिप्लेस कर सके। और उस टाइम पे किसी ने इतना ध्यान नहीं दिया। लेकिन अब आ जाओ 2002 में जब बेन गडजेल ने एआई पे एक बुक लिखी थी। और उनको उस बुक के लिए एक टाइटल नहीं मिल रहा था। और इस बुक के टाइटल के आइडियाज के लिए उन्होंने अपनी कलीग्स को ईमेल किया। और उन्हीं के कलीग्स में से एक शेन लेग जो कि खुद एक एआई रिसर्चर थे। उन्होंने सजेस्ट किया कि इस बुक का नाम रखो आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस। शॉर्ट में एजीआई। और अब सुनो इंटरेस्टिंग पार्ट। एक रिसर्चर ने यह भी सजेस्ट किया था कि इस बुक का नाम जनरल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रखो। लेकिन उसका शॉर्ट फॉर्म बन रहा था जीएआई। जो कि काफी बार गे साउंड करता था। इसलिए फाइनली इस बुक का नाम एजीआई ही रखा गया। और वो शेन लेग जिन्होंने इस बुक के नाम को सजेस्ट किया था वो आगे चलके Google डीप माइंड के को-फाउंडर बन गए। लेकिन नाम मिलने से असली प्रॉब्लम सॉल्व नहीं हुई। इनफैक्ट नाम मिलने के बाद तो असली प्रॉब्लम स्टार्ट हुई है। प्रॉब्लम यह थी कि इस इंटेलिजेंस को मेजर करना बहुत मुश्किल था। याद है वो एलेन ट्यूरिंग का टेस्ट। जब एलेन ने एक टेस्ट बनाया था जिसमें तुम एक मशीन से बात कर रहे हो इन द फॉर्म ऑफ टेक्स्ट। और अगर तुम नहीं बता पाए कि जिससे तुम बात कर रहे हो वो ह्यूमन है या मशीन। तब एलेन ने कहा था कि हम मान लेंगे कि मशीनें कैन थिंक और वह इंटेलिजेंट है। लेकिन 1960 में एमआईटी के एक चैटबॉट एलिजा ने लोगों को यह ट्रस्ट दिला दिया कि वो उन्हें समझ रहा है। और 2014 में एक चैटबॉट ने ऑफिशियली इस ऐलेन ट्यूरिंग टेस्ट को पास कर दिया। लेकिन इस बात को समझो कि हम एक ऐसी चीज को टेस्ट कर रहे थे जिसकी डेफिनेशन हम खुद अच्छे से डिफाइन नहीं कर पा रहे थे। क्योंकि तब भी एजीआई की डेफिनेशन हर किसी की अलग थी और इसमें थोड़ा और डीप चलते हैं। अब याद है बेन गडजेल जिनकी हमने बात करी थी जिन्होंने एजीआई बुक लिखी थी। 2007 में अकॉर्डिंग टू गडजेल एजीआई का मतलब था एक ऐसा एआई जो नए प्रॉब्लम्स को खुद सॉल्व करना सीख ले। इवन वो प्रॉब्लम जिस पे उसको ट्रेन ना किया गया हो। इन 2005 में एक अमेरिकन कंप्यूटर साइंटिस्ट नेल्स नेल्सन ने बोला कि एजीआई वो है जो वो सारे काम कर दे जिसके लिए आज ह्यूमंस को सैलरी मिलती है और इसी को हम एंप्लॉयमेंट टेस्ट भी बोलते हैं। फिर आ जाओ 2010 में। Apple के फाउंडर स्टीव वॉजनिय ने बोला कि एजीआई का मतलब है एआई जिस दिन किसी स्ट्रेंजर के घर में घुस जाएगा, अपने आप किचन को ढूंढ लेगा और कॉफी बना देगा। इसको हम एजीआई बोलेंगे। और इसको इन्होंने बोला था द कॉफी टेस्ट। और अब पिक्चर में आती है एआई कंपनियां, इनके फाउंडर्स और इनकी एजीआई की डेफिनेशंस। 2018 और अब आता है ओपन एआई अपनी एजीआई की डेफिनेशन के साथ। अकॉर्डिंग टू ओपन एआई एजीआई इज अ हाइली ऑटोनॉमस सिस्टम दैट आउटपरफॉर्म्स ह्यूमन एट मोस्ट इकोनॉमिकली वैल्यूएबल वर्क। पहली बार एजीआई को किसी ने इकोनॉमिक्स से मेजर किया था। इकोनॉमिक्स से। ओपन एआ...
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Speaker A
को डिफाइन किया था। एक बार गेस करना चाहते हो कि अकॉर्डिंग टू दीज़ टू कंपनीज़ [संगीत] एजीआई की डेफिनेशन क्या होगी इस एग्रीमेंट में? ह्यूमन लाइक थिंकिंग या फिर एक थिंकिंग मशीन या फिर एक कॉन्शियस मशीन। अकॉर्डिंग टू दिस एग्रीमेंट एजीआई इज अ
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Speaker A
सिस्टम दैट जनरेट्स एट लीस्ट 100 बिलियन डॉल इन प्रॉफिट। देखो अगर तुम एआई में ना काफी एक्टिव हो तो आई एम श्योर तुमने कभी ना कभी एजीआई का नाम तो सुना ही होगा। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस। एंड आई बेट अगर तुम आज भी
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Speaker A
अपने दोस्त या किसी कलीग से एजीआई की डेफिनेशन पूछोगे ना तो सबकी एजीआई की डेफिनेशन अलग-अलग है। कोई कहेगा हमने अचीव कर लिया। कोई कहेगा हम कभी अचीव ही नहीं कर सकते। कोई एक वियर्ड सी डेफिनेशन देगा एजीआई की। और यह सब कम नहीं था तो लोगों
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Speaker A
ने आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस, एजीआई और सुपर इंटेलिजेंस इन दोनों को ही मिक्स अप कर दिया। आई बेट इस वीडियो से तुम एक्सजेक्टली समझ जाओगे कि एजीआई एक्चुअली में क्या है? एंड एजीआई एक्चुअली में क्या है? इससे ज्यादा इंटरेस्टिंग तो ये है कि
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Speaker A
हम एजीआई की असली डेफिनेशन तक पहुंचे कैसे? और फिर सुपर इंटेलिजेंस का मतलब ही समझेंगे। क्या हमने एजीआई अचीव कर लिया या फिर हम करने वाले हैं? अगर करने वाले हैं तो कब तक करने वाले हैं? या फिर ये सब
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Speaker A
बकवास है और हम कभी एजीआई अचीव ही नहीं करेंगे। बट आज भी हमारे पास एजीआई को मेजर करने के लिए एक यूनिवर्सली एक्सेप्टेड तरीका नहीं है। सो टुडे वी आर गोइंग टू आंसर अ मच बिगर क्वेश्चन कि एजीआई है
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Speaker A
क्या? और यह एजीआई की स्टोरी शुरू ही क्यों हुई? और मोरेंटली अगर हमने एजीआई अचीव कर लिया तो सबसे बड़ा सवाल क्या बनता है? उसको भी डिस्कस करेंगे। आई होप एन्जॉय दिस वीडियो। अगर मैं तुमसे पूछूं कि इंसान
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Speaker A
कितना इंटेलिजेंट है? तो तुम उसका आंसर क्या दोगे और किस बेसिस पे दोगे? आईक्यू के बेसिस पे। मेमोरी, मैथ्स, क्रिएटिविटी या फिर प्रॉब्लम सॉल्विंग। अब सेम क्वेश्चन मैं फिर से पूछता हूं। बट फॉर एआई। एआई कितना स्मार्ट है? देखो आज का
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Speaker A
एआई तो जैक्ड है। मतलब इस माउंटेन की तरह जैक्ड एंड जैक्ड इंटेलिजेंस को तुम मेजर कैसे करोगे? जब ये इंटेलिजेंस कभी तो पीएचडी लेवल क्वेश्चन डिस्कस कर रहा है। बट एक अनफेमिलियर सिचुएशन में एक एम्बैरेसिंगली स्टूपिड मिस्टेक भी कर
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Speaker A
देगा। तो फिर मैं क्या समझूं कि ये इंटेलिजेंस है कि और अगर है भी तो कितना है। बिकॉज़ समवेयर इनसाइड दिस वियर्ड जैवड इंटेलिजेंस लाइ द बिगेस्ट क्वेश्चन इन टेक्नोलॉजी। कि क्या हम एक्चुअली में एजीआई बना रहे हैं या फिर
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Speaker A
वी आर रियली रियली गुड एट मेकिंग मशीनंस लुक इंटेलिजेंट। देखो आज एजीआई पे ना बहुत सारी प्रेडिक्शनंस होती है। एंड टू बी ऑनेस्ट अगर आज एक साइंटिस्ट या एआई रिसर्चर एक प्रेडिक्शन करता है कि हम एजीआई अचीव कर लेंगे बाय 2027 28 जब भी तो
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Speaker A
मैं इन टाइमलाइंस को बिल्कुल सीरियस नहीं लेता और क्यों नहीं लेता ये तुम जल्दी समझ जाओगे इस वीडियो से। तुम मानोगे नहीं हम 70 इयर्स से एजीआई के सपने देख रहे हैं। 70 इयर्स। बट ये सब शुरू कहां से हुआ ये
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Speaker A
समझने के लिए तुम मेरे साथ इंग्लैंड चलो 1950 में। एक ब्रिटिश मैथमेटिशियन और लॉजिशियन ऐलेन ट्यूरिंग वही आदमी जिसने वर्ल्ड वॉर टू में जर्मनी का सीक्रेट एनग्मा कोड तोड़ने में मदद करी थी। वॉर खत्म होने के बाद एलेन एक पेपर लिखता है
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Speaker A
और उस पेपर में पहली ही लाइन एक क्वेश्चन होती है कि कैन मशीनंस थिंक क्या मशीन सोच सकती हैं? यार ये क्वेश्चन आज कोई पूछता ना तो मुझे समझ भी आता। मतलब तुम समझ रहे हो 1950 में सिर्फ यह पूछना कि कैन मशीनंस
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Speaker A
थिंक ये वो टाइम था जब कंप्यूटरटर्स रूम के साइज के होते थे। पावर्ड बाय थाउजेंड्स ऑफ फ्रेजाइल वैक्यूम ट्यूब्स। और ऐलेन उस टाइम पे पूछ रहा था कि कैन मशीनंस थिंक और एलेन ने इसका जवाब देने के लिए एक टेस्ट
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Speaker A
भी बना दिया। द इमिटेशन गेम। ऐलेन का कहना था कि अगर तुम एक मशीन से बात कर रहे हो इन द फॉर्म ऑफ टेक्स्ट और तुम बता ही ना पाओ कि सामने वाला जो बात कर रहा है वो
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Speaker A
एक्चुअली मशीन है या ह्यूमन। तब हम कह सकते हैं कि मशीनंस आर थिंकिंग। अब इस टेस्ट पे हम वापस आएंगे। बट अब आ जाओ तुम मेरे साथ छ साल बाद 1956 में जब अमेरिका में कुछ साइंटिस्ट एक समर प्रोजेक्ट के
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Speaker A
लिए इकट्ठे होते हैं वहां पहली बार एक नया टर्म ऑफिशियली यूज़ होता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बट इनका एक्चुअल गोल क्या था इनका गोल था एक मशीन बनाना एक ऐसी मशीन जो लैंग्वेज को समझे कुछ एब्स्ट्रैक्ट सोच पाए प्रॉब्लम्स को सॉल्व करे और अपने आप
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Speaker A
को खुद इंप्रूव कर सके मतलब ऑलमोस्ट लाइक अ ह्यूमन ब्रेन मतलब तुम समझ रहे हो 1956 में जब एआई वर्ड ऑलमोस्ट डिस्कवर ही हुआ था तब से ये ड्रीम वही है जो आज एजीआई का ड्रीम है स्टार्टिंग में सबको लगता था कि
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Speaker A
एजीआई अचीव करना आसान होगा। और ऐसा मैं क्यों बोल रहा हूं? क्योंकि एजीआई 5 साल में आ जाएगा, 10 साल में आ जाएगा। ये प्रेडिक्शनंस आज से नहीं हो रही। फिर 1965 में नोबेल प्राइज विनर हरबर्ट साइमन ने
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Speaker A
लिखा कि 20 साल में मशीनंस वो हर काम कर पाएगी जो एक इंसान कर सकता है। फिर 1970 में एआई के फाउंडिंग फादर में से एक मारविन विंसकी ने लाइफ मैगजीन को बोला कि 3 से 8 साल में हमारे पास एक ऐसी मशीन
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Speaker A
होगी जिसके इंटेलिजेंस एक एवरेज पर्सन जितना होगा। यह तो हो गई कुछ अर्ली प्रेडिकशंस। बट इस बात को समझो कि इन अर्ली रिसर्चर्स ने इतने ग्रैंड प्रॉमिससेस कर दिए थे जो उस टाइम के डाटा, हार्डवेयर और एल्गोरिदम सपोर्ट ही नहीं
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Speaker A
करते थे। एंड इवेंचुअली हुआ क्या? फंडिंग बंद हो गई। इनफैक्ट 1974 से 1980 तक एआई रिसर्च ऑलमोस्ट रुक चुकी थी। एंड इसलिए हम एक फेमस टर्म भी यूज़ करते हैं एआई विंटर। एंड 1987 में दूसरा एआई विंटर आया एंड वो
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Speaker A
ऑलमोस्ट 1993 तक चला। बट एजीआई नाम आया ही कहां से? यह टर्म एक ऐसे आदमी से आया जिसको शायद ही आज कोई जानता हो। 1997 में कैलिफोर्निया में एक नैनो टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस में एक ग्रेजुएट स्टूडेंट मार्क गबरर्ड एक पेपर प्रेजेंट करते हैं
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Speaker A
जिसका टॉपिक एआई होता ही नहीं है। बट इस पेपर में वो एक नया टर्म यूज करते हैं एडवांस्ड आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस। मतलब एक ऐसा एआई जो ह्यूमंस के दिमाग जितना फास्ट और कॉम्प्लेक्स हो एंड किसी भी इंडस्ट्रियल या मिलिट्री वर्क के लिए
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Speaker A
ह्यूमंस को रिप्लेस कर सके। एंड उस टाइम पे किसी ने इतना ध्यान नहीं दिया। बट अब आ जाओ 2002 में जब बेन गडजेल ने एआई पे एक बुक लिखी थी। एंड उनको उस बुक के लिए एक टाइटल नहीं मिल रहा था। एंड इस बुक के
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Speaker A
टाइटल के आइडियाज के लिए उन्होंने अपनी कलीग्स को ईमेल किया। एंड उन्हीं के कलीग्स में से एक शेन लेग जो कि खुद एक एआई रिस्चर थे। उन्होंने सजेस्ट किया कि इस बुक का नाम रखो आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस। शॉर्ट में एजीआई। और अब सुनो
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Speaker A
इंटरेस्टिंग पार्ट। एक रिसर्चर ने यह भी सजेस्ट किया था कि इस बुक का नाम जनरल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रखो। लेकिन उसका शॉर्ट फॉर्म बन रहा था जीएआई। जो कि काफी बार गे साउंड करता था। इसलिए फाइनली इस बुक का नाम एजीआई ही रखा गया। एंड वो शेन
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Speaker A
लेग जिन्होंने इस बुक के नाम को सजेस्ट किया था वो आगे चलके Google डीप माइंड के को-फाउंडर बन गए। लेकिन नाम मिलने से असली प्रॉब्लम सॉल्व नहीं हुई। इनफैक्ट नाम मिलने के बाद तो असली प्रॉब्लम स्टार्ट हुई है। प्रॉब्लम यह थी कि इस इंटेलिजेंस
05:59
Speaker A
को मेजर करना बहुत मुश्किल था। याद है वो एलेन ट्यूरिंग का टेस्ट। जब एलेन ने एक टेस्ट बनाया था जिसमें तुम एक मशीन से बात कर रहे हो इन द फॉर्म ऑफ टेक्स्ट। और अगर तुम नहीं बता पाए कि जिससे तुम बात कर रहे
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Speaker A
हो वो ह्यूमन है या मशीन। तब एलेन ने कहा था कि हम मान लेंगे कि मशीनंस कैन थिंक एंड वह इंटेलिजेंट है। लेकिन 1960 [संगीत] में एमआईटी के एक चैट बॉट एलिजा ने लोगों को यह ट्रस्ट दिला दिया कि वो उन्हें समझ
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Speaker A
रहा है। एंड 2014 में एक चैटबॉट ने ऑफिशियली इस एललेन ट्यूरिंग टेस्ट को पास [संगीत] कर दिया। बट इस बात को समझो कि हम एक ऐसी चीज को टेस्ट कर रहे थे जिसकी डेफिनेशन हम खुद अच्छे से डिफाइन नहीं कर
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Speaker A
पा रहे थे। क्योंकि तब भी एजीआई की डेफिनेशन हर किसी की अलग थी और इसमें थोड़ा और डीप चलते हैं। अब याद है बन गॉडज़ेल जिनकी हमने बात करी थी जिन्होंने एजीआई बुक लिखी थी। 2007 में अकॉर्डिंग टू
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Speaker A
गॉडजल एजीआई का मतलब था एक ऐसा एआई जो नए प्रॉब्लम्स को खुद सॉल्व करना सीख ले। इवन वो प्रॉब्लम जिस पे उसको ट्रेन ना किया गया हो। इन 2005 में एक अमेरिकन कंप्यूटर साइंटिस्ट नेल्स नेल्सन ने बोला कि एजीआई
06:54
Speaker A
वो है जो वो सारे काम कर दे जिसके लिए आज ह्यूमंस को सैलरी मिलती है और इसी को हम एंप्लॉयमेंट टेस्ट भी बोलते हैं। फिर आ जाओ 2010 में। Apple के फाउंडर स्टीव वॉजनिय ने बोला कि एजीआई का मतलब है एआई
07:06
Speaker A
जिस दिन किसी स्ट्रेंजर के घर में घुस जाएगा अपने आप किचन को ढूंढ लेगा और कॉफी बना देगा। इसको हम एजीआई बोलेंगे। और इसको इन्होंने बोला था द कॉफी टेस्ट। और अब पिक्चर में आती है एआई कंपनीज़, इनके
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Speaker A
फाउंडर्स और इनकी एजीआई की डेफिनेशंस। 2018 और अब आता है ओपन एआई अपनी एजीआई की डेफिनेशन के साथ। अकॉर्डिंग टू ओपन एआई एजीआई इज़ अ हाइली ऑटोनॉमस सिस्टम दैट आउटपरफॉर्म्स ह्यूमन एट मोस्ट इकोनॉमिकली वैल्यूुएबल वर्क। पहली बार एजीआई को किसी
07:30
Speaker A
ने इकोनॉमिक्स से मेजर किया था इकोनॉमिक्स से। ओपन एआई ने। अब आता है 2019 एंड Google के एक फेमस एआई रिसर्चर एंड लिटरली एआई में एक बहुत बड़ा नाम फ्रांसुआ शूले। फ्रांसुआ कहता है तुम सब गलत चीज को मेजर
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Speaker A
कर रहे हो। इंटेलिजेंस यह है ही नहीं कि तुम कितना जानते हो। इंटेलिजेंस यह है कि तुम नई चीजों को कितनी जल्दी सीख सकते हो। एंड फ्रांसो ही वो पर्सनालिटी थी। हां वही आरकेजीआई जिस पे जीपीटी6 एस्ट्रा ने 99% स्कोर किया था
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Speaker A
अपने हारनेस के साथ और मार्च 2026 में यन लूकन जिनको एआई का गॉड फादर भी बोला जाता है। उन्होंने एक पेपर पब्लिश किया और इस पेपर का क्वेश्चन ये था कि अगर एजीआई का मतलब यह है कि एक ऐसा एआई जो ह्यूमंस
08:11
Speaker A
जितना जनरल हो तो यन लूकन का सवाल ये था कि क्या ह्यूमंस खुद जनरल है? इसको ऐसे समझो कि एक डॉक्टर सर्जरी कर सकता है लेकिन कार का इंजन नहीं खोल सकता और एक मैकेनिक इंजन खोल सकता है लेकिन सर्जरी
08:22
Speaker A
नहीं कर सकता। बट एक चीज कॉमन है कि ह्यूमंस कुछ भी सीख सकते हैं लेकिन सबको सब कुछ नहीं आता। एंड इसलिए यन लूकन ने इसके लिए एक नया टर्म यूज़ किया सुपर ह्यूमन अप्टेबल इंटेलिजेंस। मतलब एआई को
08:34
Speaker A
सब कुछ एक साथ आने की जरूरत नहीं है। जरूरी ये है कि वो कितनी जल्दी नई चीजों को सीखता है। बट द क्वेश्चन इज़ एजीआई की अगर डेफिनेशन ही क्लियर नहीं है तो इसको मेजर कैसे करना है? मार्च 2026 में Google
08:44
Speaker A
डीप माइंड ने एक फ्रेमवर्क पब्लिश किया। उसमें इंटेलिजेंस को इन्होंने 10 पार्ट्स में डिवाइड किया। परसेप्शन, रीजनिंग, मेमोरी, लर्निंग, [संगीत] अटेंशन और सोशल अंडरस्टैंडिंग। और ऐसे ही कुछ और। एंड इनका कहना था कि एजीआई तब आएगा जब एआई इन
08:59
Speaker A
सारे 10 पैरामीटर्स में एक एवरेज ह्यूमन के बराबर हो। और अब सुनते हैं उस इंसान से जो शायद एजीआई के आज सबसे क्लोज है। Google डीप माइंड का सीईओ डेमिस हसाबिस। Google डीप माइंड वर्ल्ड की लीडिंग एi लैब्स में से एक है। मतलब जो भी तुम आज
09:12
Speaker A
Google के एi प्रोडक्ट्स यूज़ करते हो फॉर एग्जांपल जेमिनाई इन सबके पीछे Google डीप माइंड ही है। आज जो Google डीप माइंड तुम सुनते हो वो एक्चुअली में पहले सिर्फ एक इंडिपेंडेंट एi स्टार्टअप था डीप माइंड जिसका प्राइमरी कोफाउंडर था डेमिस हसाविस।
09:25
Speaker A
वो तो 2014 में Google ने डीप माइंड को एक्वायर कर लिया। एंड आज हम उसको Google डीप माइंड बोलते हैं। डेमिस वो पर्सनालिटी है जिसने अपनी कंपनी डीप माइंड को Google को बेचने से पहले कुछ कंडीशंस रखी कंडीशंस
09:35
Speaker A
ये थी डीप माइंड की टेक्नोलॉजी कभी भी मिलिट्री या वेपंस के लिए यूज़ नहीं होगी। और मैं 2014 की बात कर रहा हूं। यह सब तब हो रहा था। इन सबको लिटरली तब पता था कि ये टेक्नोलॉजी बहुत बड़ी होने वाली है। और
09:46
Speaker A
सेकंड कंडीशन थी कि Google को एक एथिक्स बोर्ड बनाना पड़ेगा जो कंट्रोल करेगा कि Google डीप माइंड की टेक्नोलॉजी कैसे और कहां यूज़ होगी। और सबसेेंट पॉइंट कि अगर डीप माइंड आगे जाके एजीआई अचीव कर लेता है तो उसका कंट्रोल इस एथिक्स बोर्ड के हाथ
10:00
Speaker A
में होगा ना कि Google के हाथ में। बट इस एथिक्स बोर्ड में कौन था? कितने मेंबर्स थे? ये आज तक डिस्क्लोज नहीं हुआ। इनफैक्ट ये मिलिट्री वाला प्रॉमिस भी Google ने आगे जाके तोड़ दिया। बट ये मैं तुम्हें
10:09
Speaker A
इसलिए बता रहा हूं ताकि तुम यह समझ जाओ कि डेमिस वो पर्सनालिटी थी जो हमेशा से चाहती थी कि एक डीप माइंड एक इंडिपेंडेंट रिसर्च लैब रहे विदाउट एनी पॉलिटिकल और कॉर्पोरेट प्रेशर। अब सुन लो डेमिस की एजीआई की
10:20
Speaker A
डेफिनेशन। डेमिस के हिसाब से एजीआई इज अ सिस्टम जिसमें वह सारी कॉग्निटिव एबिलिटीज होंगी जो एक नॉर्मल ह्यूमन ब्रेन में होती है और वह लिटरली सारी जॉब्स कर पाएगा जो ह्यूमंस कर पाते हैं। पर डेमिस तो इस एआई
10:31
Speaker A
के रेवोल्यूशन को इंटरनेट या स्मार्टफोन के रेवोल्यूशन से कंपेयर ही नहीं करता। अकॉर्डिंग टू डेमिस ये फायर और इलेक्ट्रिसिटी की डिस्कवरी जैसा मूवमेंट है जिसका इंपैक्ट इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन से 10 टाइम्स ज्यादा होगा एंड 10 टाइम्स तेजी से होगा। बट यहां एक ट्विस्ट है
10:44
Speaker A
डेमिस यह भी लिखते हैं कि हम ऐसे कमर्शियल और जियोपॉलिटिकल रेस में फंसे हैं जहां टेक्नोलॉजी हमारी समझ से ज्यादा तेज बढ़ रही है। एंड नोबडी इन दिस वर्ल्ड नोज़ फॉर श्योर व्हाट इज गोइंग टू हैपन नेक्स्ट। इसलिए डेमिस का सजेशन था कि एआई में एक
10:57
Speaker A
रेफरी होना चाहिए। एक इंडिपेंडेंट स्टैंडर्ड बॉडी जो हर फ्रंटियर मॉडल को रिलीज से 30 डेज पहले टेस्ट करे और अगर जरूरत पड़े तो सारी लैब्स को स्लो डाउन कर सके। बट ये एजीआई आएगा कब या फिर एजीआई आ
11:08
Speaker A
गया इसको समझते हैं। देखो डेमिस के साथ एक रिस्चर और थे शेन लेग। याद है वही शेन लेग जिनकी अभी हमने कुछ देर पहले बात करी थी। शेन का कहना है कि जो यह क्वेश्चन है ना कि डिड वी अचीव्ड एजीआई? इसका आंसर एक
11:18
Speaker A
सिंगल वर्ड यस और नो में होगा ही नहीं। शेन इसको एक स्पेक्ट्रम की तरह देखते हैं ऑफ डिफरेंट एबिलिटीज। एंड शेन ने एजीआई को तीन लेवल्स में डिवाइड कर दिया। लेवल वन मिनिमल एजीआई। एक ऐसा एआई जो सारे
11:29
Speaker A
कॉग्निटिव काम कर सकता है जो एक टिपिकल नॉर्मल ह्यूमन बीइंग कर लेता है। बट ये जीनियस नहीं होगा। जस्ट अ नॉर्मल कंपटेंट ह्यूमन। एंड ये मिनि एजीआई कब तक आएगा?
11:39
Speaker A
इसके लिए शेन ने 2009 में अपने ब्लॉग में एक प्रेडिक्शन लिखी थी कि मिनिमल एजीआई के आने के 50% चांसेस है बाय 2028 एंड 17 इयर्स बाद भी वो इस प्रेडिक्शन पे टिके हुए हैं। अब आ जाओ लेवल टू में फुल एजीआई।
11:51
Speaker A
फुल एजीआई का एक नॉर्मल ह्यूमन जैसा होना इनफ नहीं होगा। फुल एजीआई वो होगा जो ह्यूमन इंटेलिजेंस को पूरे स्पेक्ट्रम में कवर करे। इंक्लूडिंग जीनियस लेवल काम। फॉर एग्जांपल आइंस्टाइन जैसी नई फिजिक्स थ्योरी बना देना। मोज़ार्ड जैसे सिमफोनी
12:03
Speaker A
बनाना। क्योंकि एक नॉर्मल ह्यूमन जैसा सोचना और आइंस्टाइन जैसे सोचने में फर्क है। एंड फुल एजीआई कब आएगा? अकॉर्डिंग टू शेन यह मिनि एजीआई के कुछ साल बाद आ सकता है। ऑलमोस्ट विद इन अ डेकेड। अब आ जाओ
12:13
Speaker A
लेवल थ्री आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस। [संगीत] यहां एआई ह्यूमन इंटेलिजेंस की लिमिट ही क्रॉस कर देगा। मतलब ये वो लेवल होगा इंटेलिजेंस का जहां तक पहुंचने की ह्यूमंस सोच भी नहीं सकता। ये एआई हर फील्ड में ह्यूमन से आगे होगा। अब इलिया
12:26
Speaker A
चुस्केवर जो कि ओपन एआई का कोफाउंडर भी रह चुका है। इलिया का कहना है कि हम सुपर सेफ इंटेलिजेंस के रिसर्च में इस पार्ट पे पहुंच गए हैं कि अब हम इसे स्केल करना चाहते हैं। बट ये एक्सजेक्टली कौन सी
12:34
Speaker A
इंटेलिजेंस है वो तो टाइम बताएगा। अब बात कर लेते हैं आज की एआई लैब्स के फाउंडर्स की। इनको क्या लगता है कि कब तक एजीआई अचीव हो जाएगा? सबसे पहले सैम ऑल्टमैन। सैम ऑल्टमैन ने टाइम को बोला कि दे होप कि
12:45
Speaker A
बाय द एंड ऑफ़ 2026 वो इंटरनल एजीआई अचीव कर लेंगे। एंड एंथ्रोपिक के दायरियों का भी कुछ यही मानना है। बट Google डीप के सीईओ डेमिस हसाबिस के अकॉर्डिंग एजीआई आएगा 2030 तक। बट इस सबके बीच सबसे इंपॉर्टेंट और बोल्ड टेक मुझे लगा यन लूकन
12:59
Speaker A
का। यन लूकन जिनको हम गॉड फादर ऑफ़ एआई भी बोलते हैं उनका एक बहुत बड़ा बोल्टेक है कि आज के एलएलएम्स को स्केल करके तो एजीआई तक नहीं पहुंचा जा सकता है। इट्स इंपॉसिबल। तो अब समझे एजीआई क्या है?
13:11
Speaker A
एजीआई एक टेक्नोलॉजी भी है, एक सपना भी है और एक मार्केटिंग स्लोगन भी है। बट एक्चुअली में क्या है वो डिपेंड करता है कि कौन बोल रहा है और वो तुम्हें भेजना क्या चाहता है। बट एक चीज जो एजीआई अचीव
13:21
Speaker A
करने के बाद भी मुश्किल होगा। एंड आज तो बहुत ज्यादा मुश्किल है वो है एआई के फिजिकल वर्ल्ड परफॉर्मेंस। बेसिकली फिजिकल वर्ल्ड को मिमिक करना। क्योंकि रोबोटिक रिसर्चरर्स का मानना है कि कि जो काम ह्यूमंस बिल्कुल एफर्टलेसली कर लेते हैं।
13:33
Speaker A
दी कैन एक्चुअली बी इनक्रेडिबली डिफिकल्ट फॉर मशीनंस टू मिमिक। फॉर एग्जांपल वॉकिंग या किसी ऑब्जेक्ट को गैब करना, किसी क्लटर को अंडरस्टैंड करना, नोइंग व्हाट इज सेफ एंड व्हाट इज अनसेफ? शेन का खुद कहना है कि रोबोट्स आर नॉट रेडी एंड इवन इफ दे आर
13:46
Speaker A
दे वोंट बी प्राइस कंपेटिटिव विद ह्यूमन लेबर। बट सवाल यह आता है कि कब तक है? ये पूरी बात कब तक सच रहेगी? अब आ जाओ एजीआई पे वापस। देखो मैंने Fबel Astra OPS 5.5 GLM KMI KK K3 डीप सीक इन सारे मॉडल्स को
13:59
Speaker A
इंटेंसिवली यूज किया है। एंड नो डाउट आज ये मॉडल्स काफी ज्यादा अच्छे हो गए हैं। एंड आई हेट टू से दिस बट मोस्ट ऑफ द ह्यूमंस के लिए शायद इन मॉडल्स को इससे ज्यादा इंटेलिजेंट होने की जरूरत भी ना
14:09
Speaker A
पड़े। अब इस वीडियो का सोल पर्पस सिर्फ तुम्हें एजीआई का मतलब समझाना था। बट एक चीज ऐसी है जो स्टिल मैं अनसॉल्वड ही देखता हूं। एंड मे बी ये सॉल्व हो जाए फ्यूचर में। बट एटलीस्ट आज के मॉडल तो
14:17
Speaker A
मुझे एक डायरेक्ट आउटकम नहीं दे पा रहे। क्योंकि रियल वर्ल्ड में कोई बेंचमार्क नहीं होता। कोई तुम्हें नीटली डिफाइन टास्क नहीं देता। इमेजिन मैं एआई को बोलूं कि मेरी कंपनी की सेल्स 30% गिर गई। पता करो क्यों गिरी? सॉल्यूशन निकालो और सेल्स
14:27
Speaker A
वापस बढ़ाओ। अब ध्यान देना उसे सिर्फ इंटेलिजेंस नहीं चाहिए। अब उसे खुद डिसाइड करना पड़ेगा कि क्या डेटा देखना है, क्या हिपोथेसिस बनानी है, क्या एक्सपेरिमेंट रन करना है, कब अपनी एजम्पशन गलत माननी है और फेलियर के बाद नेक्स्ट मूव क्या होना
14:38
Speaker A
चाहिए? आज के एजेंट्स क्लियरली इसी डायरेक्शन में मूव कर रहे हैं। मीटर के लेटेस्ट मेज़मेंट में फ्रंटियर एजेंट भले ही मल्टीडे ह्यूमन इक्विवेलेंट डिफिकल्ट टास्क तक हैंडल कर रहे हैं। लेकिन उनकी इवैल्यूएशंस आज भी मोस्टली क्लीन वेल डिफाइंड सॉफ्टवेयर एनवायरमेंट में है। एंड
14:52
Speaker A
स्टिल आज भी इस लूप में ह्यूमन तो है। हां वो बात अलग है कि जहां पहले 10 ह्यूमंस थे वहां शायद पांच ही हो। एंड एजीआई इसी ह्यूमन को लूप से हटाने की एक कोशिश है। बट एक सबसे बड़ा क्वेश्चन ये आता है और
15:01
Speaker A
डेमिस का भी क्वेश्चन कुछ यही है कि व्हाट सॉर्ट्स ऑफ न्यू इकोनमिक मॉडल्स विल बी नीडेड टू हेल्प एवरीवन थ्राइव इन अ पोस्ट स्क्स सिटी वर्ल्ड? और लाइफ का मीनिंग और पर्पस कहां शिफ्ट होगा अब? एंड टू बी
15:10
Speaker A
ऑनेस्ट ये बहुत टफ क्वेश्चन है। बट आई थिंक बेस्ड ऑन ऑल द अजम्पशंस टिल डेट एंड माय ऑनेस्ट टेक्स एक वीडियो इस पे बन सकती है। बट आई नीड यू टू इमेजिन दिस वर्ल्ड एंड कमेंट में बताना मुझे कि तुम्हें क्या
15:20
Speaker A
लगता है। बट एक चीज ध्यान रखना कि इफ यू आर ब्रेन स्टार्मिंग वि मी कि एजीआई कहां जाएगा तो यू आर स्टिल अर्ली। तुम्हें आईडिया भी नहीं है कि नॉर्मल लोगों को पता ही नहीं है कि ऐसी कोई चीज आने भी वाली
15:29
Speaker A
है। [संगीत]
Topics:एजीआईआर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंसएलन ट्यूरिंगएआई विंटरओपन एआईमशीन इंटेलिजेंसट्यूरिंग टेस्टएआई इतिहाससुपर इंटेलिजेंसएआई परिभाषा

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