पाकिस्तान में ऊर्जा संकट के कारण, नवीनीकरणीय और गैर-नवीनीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विश्लेषण।
Key Takeaways
- पाकिस्तान में ऊर्जा संकट का मुख्य कारण योजना और राजनीतिक स्थिरता की कमी है।
- नवीनीकरणीय ऊर्जा स्रोत जैसे सौर, पवन, और जल ऊर्जा के बड़े संसाधन मौजूद हैं लेकिन उनका सही उपयोग नहीं हो रहा।
- फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता और अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात महंगा पड़ता है।
- ऊर्जा संकट का प्रभाव घरेलू और व्यावसायिक जीवन दोनों पर गंभीर है।
- भविष्य में ऊर्जा की मांग बढ़ेगी, इसलिए दीर्घकालिक योजना आवश्यक है।
What the video covers
- वीडियो में पाकिस्तान में ऊर्जा संकट के कारणों और समाधान पर चर्चा की गई है।
- नवीनीकरणीय और गैर-नवीनीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की परिभाषा और महत्व समझाया गया है।
- पाकिस्तान के हाइड्रोल, सोलर, विंड, जियोथर्मल और न्यूक्लियर ऊर्जा स्रोतों की संभावनाओं का वर्णन।
- पाकिस्तान में ऊर्जा संकट का मुख्य कारण योजना की कमी और राजनीतिक अस्थिरता है।
- फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता और अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात की चुनौतियां बताई गई हैं।
- ऊर्जा संकट के कारण घरेलू और व्यावसायिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा।
- ऊर्जा उत्पादन और वितरण में तकनीकी और प्रबंधन संबंधी समस्याएं मौजूद हैं।
- भविष्य में बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के कारण ऊर्जा की मांग और बढ़ेगी।
- वीडियो में आगामी वीडियो में वैश्विक ऊर्जा राजनीति और संकट पर भी चर्चा का आश्वासन दिया गया है।
Chapters
- 00:00परिचय और वीडियो का उद्देश्य
- 01:38नवीनीकरणीय और गैर-नवीनीकरणीय ऊर्जा की परिभाषा
- 03:05फॉसिल फ्यूल की प्रकृति और नवीनीकरणीय ऊर्जा के उदाहरण
- 04:21पाकिस्तान के ऊर्जा संसाधन और संभावनाएं
- 06:55ऊर्जा संकट के कारण: योजना और राजनीतिक अस्थिरता
- 08:17फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता और अंतरराष्ट्रीय बाजार
- 09:28ऊर्जा संकट का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
- 11:36ऊर्जा उत्पादन, वितरण और भविष्य की चुनौतियां
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Speaker A
बिस्मिल्लाह रहमान रहीम। अस्सलाम अलैकुम, मैं हूं मोहम्मद फरहान खान अब्बासी और आप देख रहे हैं रीड राइट इंस्टीट्यूट यूट्यूब चैनल। रीडर इंस्टिट्यूट की वेलोसिटी करंट अफेयर रिवॉल्यूशनरीज स्टूडेंट्स वीडियो में कुछ एनालिसिस कर चुके हैं इकोनॉमी का, एनर्जी का, इंडस्ट्री का और
Speaker A
उससे रिलेटेड की कुछ बेसिक टर्मिनोलॉजी का। आज हम आपके साथ डिस्कस करेंगे एनर्जी क्राइसिस के ऊपर। यह वाली वीडियो लॉग जो है यह स्पेसिफिकली एनर्जी क्राइसिस ऑफ पाकिस्तान को डील करेगी और हमारी आने वाली वीडियो लॉग ग्लोबल एनर्जी पॉलिटिक्स और ग्लोबल एनर्जी
Speaker A
क्राइसिस को डिस्कस करेगी जिसमें रशिया भी है, अमेरिका भी है, यूरोप भी है, रूस भी है, चीन भी है, इंडो पैसिफिक भी है और उसके साथ-साथ रीजन है। अब मलका का जिक्र भी हम करेंगे, फास्फोरस का जिक्र करेंगे, मेडिटरेनियन का
Speaker A
जिक्र करेंगे। तो बहुत डिटेल में एनालिसिस करेंगे और कोशिश करेंगे दो-तीन वीडियो लॉग्स उसके ऊपर सीरीज में हम आपको बहुत जल्दी प्रोवाइड करें। लेकिन आज हम बात करेंगे वक्त ने अज़ीज़ मूल के खुदादाद इस्लामी झुमरिया पाकिस्तान में एनर्जी
Speaker A
क्राइसिस की। जैसा कि पहले वीडियो में स्टूडेंट्स हमने आपसे डिटेल में डिस्कस किया कि एनर्जी जो है अब ये नॉन रिन्यूएबल भी है और रिन्यूएबल भी है। अक्सर स्टूडेंट्स के हमें कमेंट्स आते हैं और स्टूडेंट्स ने पूछा कि सर, हो एनर्जी इस
Speaker A
रिन्यूएबल एंड नॉनरिन्यूएबल? तो पहले इस मुद्दे को हल करते हैं। स्टूडेंट्स देखें, इंसान की जो जिंदगी है, उसे टाइम स्पेंड को इंसान अपने आने वाली जेनरेशन के टाइम स्पेंड को कैलकुलेट करता है, असम करता है, सपोज करता है, हाइपोथेटिकल एक आइडिया इंसान
Speaker A
लगता है और उसको इंसान अपनी जेनरेशन एक लाइफ टाइम कहता है। फॉर एग्जांपल, हमने कॉन्सेप्ट सुना हुआ कॉन्सेप्ट है कि जमीन में फॉसिल फ्यूल जो पैदा होता है, वो कई हजार और साल बाद जो ड्राफ्ट होंगे, ऑर्गेनिक कंपाउंड्स होंगे, इंसान होंगे, एन
Speaker A
बता थशरत जानवर सब ये जब मार जाते हैं तो डी कंपोजर्स डायरेक्टली वोट्स उसके बाद जमीन की डिफरेंट टॉप पर और फिर जाहिर सी बात है इन वायरमैन प्रेशर कंडीशन हिट ये सारे फेनोमेना नेचर में एक्जिस्ट करते हैं।
Speaker A
तो डिफरेंट साइकिल से गुजरते गुजरते गुजरते गुजरते जमीन की टोहों में यह तमाम और ज्ञानी कंपाउंड फॉसिल्स बन जाते हैं। उन फॉसिल से इंसान जो फ्यूल हासिल करता है चाहे वो कोयला हो, चाहे वो ऑयल हो, चाहे वो
Speaker A
गैस हो, वह हजारों साल के प्रक्रिया से बनती है। तो जब हम उसको कंज्यूम कर लेते हैं, इस्तेमाल कर लेते हैं तो फिर कई हजार साल वेट करने के बाद वो सोशलिज्म प्रक्रिया पूरा होगा तो तब हमें वो चीज
Speaker A
मिलेगी। तो इसलिए इंसानों ने अपनी अंडरस्टैंडिंग के लिए साइंटिस्ट ने इसको नॉन रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स डिक्लेयर कर दिया। इसका मतलब ये नहीं कि ये रिन्यूएबल होता है, लेकिन इसके नॉन रिन्यूएबिलिटी जो टाइम फ्रेम है, जो पीरियड है, वो हजारों साल
Speaker A
पे हुई थी। तो दूसरी तरफ शैसानो ने यस कॉलर ने वो एनर्जी सोर्सेस जो जमीन पर मौजूद इंसान को, इंसान से जमीन पे मौजूद है, जल्दी अवेलेबल हो जाते हैं। यानी एक एनर्जी मैंने आज कंज्यूम की और वो कल दोबारा फिर
Speaker A
मुझे अवेलेबल होगी तो उसको इंसान अपनी अंडरस्टैंडिंग के लिए रिन्यूएबल कहता है। फॉर एग्जांपल सूरज, उससे सोलर हिट मिलती है, हमें फोटॉन्स मिलते हैं, अल्ट्रावायलेट रेज़िज्म तक आती है जो हमें हरारत यानी एनर्जी देती हैं। अब वो
Speaker A
हरारत और वो एनर्जी जो हमें मिलती है, ठीक 10-12 घंटे की रात के बाद फिर मिल जाती है। और पाकिस्तान दुनिया की एक ऐसी ज्योग्राफी का लोकेशन पे वाकई जहां आठ से 10 माह तो डायरेक्ट सनलाइट हमें मिलती है
Speaker A
एवं सर्दियों में भी। तो इसका मतलब क्या हुआ? सोलर हिट तो रिन्यूएबल है। इसी तरह हवा है, इसी तरह टाइडल एनर्जी है, इसी तरह जियोथर्मल एनर्जी जमीन के नीचे से जो एनर्जी प्रोड्यूस की जाती है, डिफरेंट पाइप्स को वहां डालकर और उसमें पानी डालकर
Speaker A
दूसरी तरफ से वो आप भी बुखार आठ हमें मिलते हैं और उससे हम टरबाइन चलते हैं। इसी तरह हाइड्रोल एनर्जी है, पानी के फ्लो के ऊपर रन ऑन वाटर प्रोजेक्ट्स होते हैं, उसके साथ-साथ डांस की प्रोजेक्ट्स
Speaker A
होते हैं। तो ये इंसान की अपनी लाइफ स्पैन, अपनी लाइफ टाइम के अंदर भी कई हजार बार ये एनर्जी सोर्सेस रिन्यू होते चले जाते हैं। न्यूक्लियर एनर्जी जो इंसान ने खुद इन्वेंट की तो इसको इंसान नॉन रिन्यूएबल के रिन्यूएबल कहता है। अगर इन होल
Speaker A
पर्सपेक्टिव देखा जाए तो एनर्जी दोनों तरह की रिन्यूएबल है, लेकिन एक फॉर्मेट ऑफ एनर्जी जो है फॉसिल फ्यूल की एनर्जी, वो हजारों साल बाद रिन्यूएबल होगी और वह भी नेचर देता है। और दूसरी टाइप ऑफ एनर्जी वो हमें घंटे या दिनों के बाद
Speaker A
दोबारा मिल सकती है तो उसको नॉन रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स कहते हैं। तो ये तो वो सवाल का जवाब था जो हमसे कमेंट्स में लास्ट वीडियो पर पूछते हैं। अब हम बात करते हैं कि पाकिस्तान में एनर्जी क्राइसिस क्यों
Speaker A
है। तो सबसे पहले तो हम देखते हैं कि पाकिस्तान में सोर्सेस ऑफ एनर्जी क्या हैं। स्टूडेंट्स, एक सर्वे 1970 में किया गया, भूतकाल का दौर चला चुका था और अयूब खान का दौर जा चुका था। उस सर्वे के मुताबिक
Speaker A
पाकिस्तान के अंदर जो हाइड्रल सोर्सेस मौजूद हैं, पानी के सोर्सेस मौजूद हैं, अगर उससे इलेक्ट्रिसिटी यानी पावर जेनरेट की जाए तो लगभग 50 हजार मेगावॉट के करीब पानी से इलेक्ट्रिसिटी यानी पावर जेनरेट की जा सकती है। यानी हाइड्रो
Speaker A
एनर्जी इतनी इंपॉर्टेंट सोर्स है पाकिस्तान के लिए। उसके अलावा अगर देखा जाए तो 1990 में एक इंटरनेशनल सर्वे किया गया पाकिस्तान इंडिया के बारे में और बताया पाकिस्तान में ही ₹1 लाख मेगावॉट इलेक्ट्रिसिटी पैदा की जा सके सोर्स है।
Speaker A
बेसिकली सनलाइटर, अगर सोलर पैनल आपके पास हो। इसी तरह पाकिस्तान का जो कोस्टल एरिया है, पाकिस्तान की जो समुद्री पट्टी है, जो भिन्न कासिम पोर्ट यानी कराची से स्टार्ट करती है और तौस्तान के बॉर्डर यानी कि ग्वादर के साथ तक चलती है,
Speaker A
बलूचिस्तान तक। तो ये जो फ्रंट कोस्टल एरिया पाकिस्तान का 1060 किमी का है, इस पर कितने बड़े विंड प्रोजेक्ट्स लग सकते हैं, टाइड एनर्जी बनाई जा सके। इसी तरह पूरे पाकिस्तान में अगर आप देखें तो जियोथर्मल एनर्जी है,
Speaker A
न्यूक्लियर एनर्जी, बहुत से रिन्यूएबल सोर्सेस हैं। तो फिर पाकिस्तान में एनर्जी का प्रॉब्लम क्यों है? सवाल ये पैदा होता है। तो यहां पर प्लानिंग की कमी है। आप समझ लीजिए इन प्लानिंग और पाकिस्तान में प्लानिंग कमीशन को काफी
Speaker A
ज्यादा क्रिटिसाइज किया गया। आर्टिकल्स आपको इस पर मिल जाएंगे। उसके साथ-साथ लॉन्ग टर्म प्लानिंग ना होना और जब लॉन्ग टर्म प्लानिंग नहीं है तो पाकिस्तान में पॉलिटिकल ट्रांजिशन बड़े अजीबोगरीब चलते हैं। ना हम प्रॉपर्ली डेमोक्रेट्स हो पाए हैं, ना हम कोई
Speaker A
मिलिट्री जिम वाला मुल्क रह पाए हैं। हमारे यहां बस चीज आती हैं कुछ अर्से के लिए और एडहॉक्रिज्म की पॉलिसीज चलती हैं। अगर आप देखें इसके साथ-साथ पाकिस्तान बनने के फौरन बाद से 1948, 1965, 1971 और ऑन वर्ल्ड वॉर ऑन टेरर से लेकर आज
Speaker A
तक चारों तरफ से वल्नरेबल बनाया गया बाय डिज़ाइन। रीजन को भी कासकते हैं इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में कासकते हैं और हमारी कुछ खुद की खामियां भी रही इसके अंदर। तो इन तमाम चीजों को अगर इन नटशाल देखा जाए तो
Speaker A
पाकिस्तान के अंदर उसे तरह से फोकस ही नहीं किया गया। आगे आने वाले वक्त में, आगे आने वाले टाइम में हमारी पापुलेशन इंक्रीज है, रिटायरमेंट बढ़ेगी, अर्बनाइजेशन ऑफ और प्रयास करनी पड़ेगी मेट्रोपोलिटन सिटीज। अब बात करने पड़ेंगे तो कहां से हम इतनी पावर
Speaker A
जेनरेट करेंगे। अगर हमारे पास एनर्जी सोर्सेस सस्ते यानी रॉ नॉन रिन्यूएबल ना हो और जो अवेलेबल नहीं कर रहे, उनको हम अपग्रेड नहीं कर रहे तो फिर अल्टीमेटली क्या करना पड़ेगा? आपको फॉसिल फ्यूल पे डिपेंडेंट होना पड़ेगा। तो फॉसिल फ्यूल तो
Speaker A
पाकिस्तान में गैस के खटक प्रोड्यूस होती है, बाकी तो हम इंटरनेशनल मार्केट से उठाते हैं और जो इंटरनेशनल मार्केट से फॉसिल फ्यूल उठाते हैं वो डॉलर में है। डॉलर पहले कमाएंगे, फिर डॉलर किसी को देंगे। यानी इंटरनेशनल मार्केट में देंगे और उसके बाद
Speaker A
आप इंपोर्ट कर सकते हैं। तो सबसे बड़ा खर्चा तो पाकिस्तान में ऑयल इंपोर्ट कहा जाता है क्योंकि हम अल्टरनेटिव एनर्जी से तो अपनी पावर जेनरेशन कर नहीं रहे, अल्टरनेटिव एनर्जी से तो हम अपनी इंडस्ट्री चला नहीं रहे। तो फिर जब वो पावर शॉर्टेज होगा तो
Speaker A
मुल्क के अंदर कमर्शियल बिजनेस भी नहीं चल सकता, मुल्क के अंदर डोमेस्टिक लाइफ भी नहीं चल सकती। मुल्क के अंदर मैं और आप भी अप्स और जेनरेटर पर डिपेंडेंट हो जाएंगे। तो फिर हमारी कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन और जो
Speaker A
कमर्शियल बिजनेस कर रहे हैं, बड़े-बड़े हॉल्स हैं, बाजार मार्केट, शाहनवाज हॉस्पिटल, जो भी प्राइवेट एक्टिविटी भी कर रहे हैं, उनके गवर्नमेंट सेक्टर की भी एक्टिविटी है, उसकी कॉस्ट बढ़ जाएगी। चीज महंगी हो जाएंगी, महंगी चीज होंगी तो महंगी चीज खरीदनी
Speaker A
पड़ेगी। और जब महंगाई होगी तो ऑब्वियस सी बात है उसका डायरेक्ट इंपैक्ट आएगा। और फिर जो रियासत है, जब ये एक एस्पेक्ट में कहीं बैकवर्ड हो जाती है तो ये पूरे का पूरा साइकिल है जिसमें फैंस जाती है। फॉर
Speaker A
एग्जांपल अब जब हम बाहर कहीं से फ्यूल मंगवाते हैं, इंपोर्ट करते हैं तो उनको पेमेंट करनी पड़ती है। पेमेंट रियासत को करनी पड़ती है। रियासत के धरे हैं, रियासत के डरे आगे वो जो फ्यूल है आपका वो देते हैं डिफरेंट फरदार
Speaker A
इंस्टीट्यूशंस को। उनकी कैपेसिटी ही नहीं है उससे इलेक्ट्रिसिटी यानी पावर जेनरेट करने की। तो आपको फिर रेंटल पावर प्रोजेक्ट्स लगाने पड़ते हैं, आपको इंडिपेंडेंट पावर प्लांट्स लगाने पड़ते हैं। यह रेंटल पावर।
Speaker A
कमर्शियल कंपनी के हैं इंटरनेशनल कंपनी के हैं कुछ पाकिस्तानी इन्वेस्टर भी बीच में शामिल है तो वो तो आपके मुल्क में बिजनेस करने आए हैं उन्हें तो प्रॉफिट कामना है तो फिर आप महंगे फ्यूल से कॉन्ट्रैक्ट पे जब इलेक्ट्रिसिटी banvaenge कॉन्ट्रैक्ट
Speaker A
पे जब पावर जेनरेट करेंगे तो अल्टीमेटली वो महंगी बनेगी जब उसे महंगी को मैं और आप इस्तेमाल करेंगे और उसके दौरान कोई कमर्शियल एक्टिविटी करेंगे तो वो एक्टिविटी महंगी हो जाएगी और ये पूरे का पूरा एक इंपैक्ट जो है वो चलता जाएगा और
Speaker A
एक अजीबो गरीब से साइकिल में हम फस जाएंगे इसके पैरेलल एक और साइकिल क्रिएट हो जाता है जिसको डेट साइकिल कहते हैं डेट क्राइसिस कहते हैं अब डट क्राइसिस और डट साइकिल क्या होता है फॉर एग्जांपल इंटरनेशनल मार्केट से हमने ऑयल परचेज किया
Speaker A
पीएसयू के थ्रू वो राइटर पावर प्रोजेक्ट्स में चला गया उन्होंने आपकी इलेक्ट्रिसिटी बनाई और अभी भी आप अगर देखने के 14 से 15000 मेगा वॉट जो पावर या इलेक्ट्रिसिटी आज भी पाकिस्तान में जेनरेट हो रही है वह थर्मल की है यानी फॉसिल
Speaker A
फ्यूल से है इंपोर्टेड फ्यूल्स है और जो पानी से यानी हाइड्रल हम पावर जेनरेट कर रहे हैं वो मैक्सिमम 7000 मेगावाट हजार मेगावाट के करीब हम सोलर पावर प्लांट से बना रहे हैं 206 207 हम मेगा बोट न्यूक्लियर पावर प्लांट से बना रहे हैं और
Speaker A
रही सही का सर आप देख लें जो आपके पास कुछ और अल्टरनेटिव सोर्सेस है उससे बनाई जा रही है तो ज्यादातर पाकिस्तान में जो पावर ही जेनरेट हो रही है इलेक्ट्रिसिटी ही बनाई जा रही है स्टूडेंट्स वो हम सारी के
Speaker A
सारे 70% तक तो इंपोर्टेड ऑयल पर डिपेंडेंट है जिससे 1970 में अगर आज के दौर का कंपैरिजन किया जाए तो 1970 1980 में पाकिस्तान में उसे वक्त की रिटायरमेंट के मुताबिक जो पावर या जो इलेक्ट्रिसिटी प्रोड्यूस की जाती थी उसका 70% जो था वो
Speaker A
हाइड्रा यानी पानी और अपने ही पानी से बनाई जाती थी अपने ही दम से बनाई जाती थी तो सवाल ये पैदा होता है ना दम ना हमने खुद एनर्जी प्रोड्यूस यानी पावर सॉरी प्रोड्यूस करने के लिए खुद अपने आप को
Speaker A
अपग्रेड किया और इंडिपेंडेंट पावर प्रोजेक्ट्स को जो रेंटल पावर प्रोजेक्ट था उनको बिजली बनाने पर लगा दिया उसके बाद फिर डिस्ट्रीब्यूशन का क्राइसिस है ट्रांसमिशन लाइंस है पावर की जितनी भी है वो अब greatni की गई उसके बाद आबादी
Speaker A
बढ़ाना शुरू होगी मेट्रोपोलिटन सिटीज बन गया अर्बनाइजेशन ऑफ रूलर एरियाज होगी कमर्शियल एक्टिविटी और ज्यादा हो गई तो और ज्यादा रिटायरमेंट भारती चली गई पाकिस्तान वॉरेन कंट्री बन गया कभी जहाज हो रहा है कभी करप्शन के इश्यूज है कभी मिलिट्री जिम
Speaker A
कभी डेमोक्रेटाइजेशन और कभी वॉर ऑन टेरर सुसाइड बोम्बिंग इतना सब कुछ और इसमें वक्त ने अज़ीज़ और हम और आप घेरे पड़े हैं एक बहुत बड़े इकोनॉमिक्स क्राइसिस के अंदर अब सवाल ये पैदा होता है की यह तो सिर्फ
Speaker A
पावर जेनरेशन से रिलेटेड मैंने आपसे बात की एनर्जी का एक और सेगमेंट है यह तो एक एनर्जी इस्तेमाल होती है पावर जेनरेट करने के लिए एक एनर्जी कमर्शियल पर्पस के लिए भी तो कंज्यूम हो रही है फ्यूल कंज्यूम हो
Speaker A
रहा है आपका गैस कंज्यूम हो रही है आपकी और आप देखें की गो ग्रीन पॉलिसीज या परवेज मुशर्रफ ने बनाई तो गो ग्रीन पॉलिसी के लिए उसने तमाम की तमाम जो आपकी वही गर्ल्स है फोर्स ऑफ मोटरसाइकिल उसके अलावा सीएनजी बस से सीएनजी कीटन
Speaker A
गाड़ियां सब कुछ तो वो सीएनजी हमें खुद को कंज्यूम नहीं करनी थी बल्कि इंडस्ट्री को देनी थी ताकि इंडस्ट्री उसे गैस से उसे लिक्विफाइड गैस से उसे एनर्जी सोर्सेस सस्ती प्रोडक्ट्स बनाएं फिनिश प्रोडक्ट्स बना के एक्सपोर्ट करें और इंडस्ट्रीज जब
Speaker A
ऊपर जाती थी तो एक्सपोर्ट करती और डॉलर्स में हम revenuesan वेट करते करंट अकाउंट ऊपर जाए लेकिन ऐसा हुआ की फोकस नहीं था कोई प्लानिंग नहीं थी ऑल टुगेदर वो भी रोलबैक करना पड़ा अब जो हमारी लोकल इंडीजीनस इंडिया इंडस्ट्री है उसके ऊपर
Speaker A
बहुत से प्रॉब्लम्स है फॉर एग्जांपल इंडस्ट्री को गवर्नमेंट सपोर्ट करें इंडस्ट्री के लिए कोई इंडस्ट्रियल पॉलिसी दे इंडस्ट्रियल पॉलिसी में उनको सब्सिडी उसके साथ-साथ उनको बैंक लोन इंटरेस्ट की छूट मिनिस्ट्री स्कीम्स और बहुत कुछ था के फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टर इन हमारे
Speaker A
मुल्क में अट्रैक्ट हो और उसके साथ-साथ मुल्क के अंदर अमन भी तो चाहिए अगर अमन होगा तो इन्वेस्टर यहां का लोकल यानी इंडीजीनस इन्वेस्टर भी इन्वेस्ट करेगा बाहर का इन्वेस्टर भी यहां पर आकर के इन्वेस्ट करेगा और 20 साल तो मुल्क बड़ी
Speaker A
मुश्किल से रद्दुल फसाद जरब अजब हमारी आम फोर्सेस पैरामिलिट्री फोर्सेस पुलिस इंटेलिजेंस एजेंसी आवाम इन सब की राब्ता महीन और एफर्ट और मीडिया के रोल के बाद वीक दी मिया के रोल के बाद भी लोगों का अवेयरनेस करने के रोल के बाद भी कुछ हद तक
Speaker A
बेहतर होने लगता है फिर एक टेररिज्म ए जाती है उसकी वजह क्या है की हम एक ऐसे वल्नरेबल रीजन में है जिस रीजन जिस टेरिटरी में ग्रेट barrivel भी चल रही है आज का ही दिन देख लीजिए एक तरफ रूस है एक
Speaker A
तरफ अमेरिका है एक तरफ वही पुराना कोल्ड वॉर का सोवियत ब्लॉक बन गया और एक तरफ वही पुराना कोल्ड वॉर का जो कैपिटल अमेरिकन ब्लॉक बन गया तो ये तमाम चीज डायरेक्टली और इनडायरेक्टली इंपैक्ट करती है पाकिस्तान को अब जब एनर्जी का जब पावर
Speaker A
जेनरेशन का ये हाल होगा तो कॉप्स कहां से निकलेंगे इंडस्ट्री चलेगी नहीं तो अनइंप्लॉयमेंट होगी और गवर्नमेंट जॉब्स नहीं हुआ करती चांदनी सदी ई में आलम इब्ने खाल डन जिनको फादर ऑफ पॉलिटिकल इकोनॉमी कहा जाता है उन्होंने अपनी किताब मुकदमा में जब
Speaker A
इकोनॉमी के बारे में लिखा जिस कॉन्सेप्ट्स को फिर वेल्थ ऑफ नेशंस में एडम स्मिथ ने 1774 में केपीटलाइज्म के नाम से कॉपी किया तो बेसिकली इलमा इब्न क्या कहते द इलावा इब्न कहते द की स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज छोटी dastkariyan छोटे
Speaker A
बिजनेस छोटी इंडस्ट्रीज छोटी फैक्ट्री या गवर्नमेंट इनको लगाए टैक्स कम करें क्योंकि यही छोटे-छोटे बिज़नेस ज्यादा से ज्यादा एंप्लॉयमेंट जेनरेट करते हैं और रियासत अपनी सिविल सर्विसेज और उसके साथ साथ अपनी फौज का साइज छोटा रखे क्योंकि वो
Speaker A
उसके ऊपर बर्डन होता है और ज्यादा से ज्यादा इनकम जेनरेशन से रिलेटेड आता है तो छोटा बिजनेसमैन कैसे सब्सक्राइब करेगा बिजनेस को मिलने रिजोनेटर पर वह सारे प्रोडक्टिविटी कर रहा है ये अपनी आइटम्स को सेल कर रहा है अपनी दुकान चला
Speaker A
रहा है ऊपर से उसने टैक्स भी देना है तनक है भी देनी है प्रॉब्लम्स भी हैं जो कॉस्ट उसको किसी प्रोडक्ट की पढ़ रही है वो कोस मल्टीप्लाई कर रही है मार्केट वो कंप्लीट नहीं कर सकता इंटरनेशनल जो सेलर और बार है
Speaker A
उससे वो कंप्लीट नहीं कर सकता तो प्रॉब्लम है वेट होते चले जाते हैं और इसका फिर जब फल आउट आता है वो हमारी इकोनॉमिक्स पे आता है उसका फल जब आता है हमारी पॉलिटिक्स पे आता है और जो पॉलिटिकल इकोनॉमी है वैसे ही
Speaker A
पाकिस्तान में से 10 डरने हैं जिम चेंज ऑपरेशन पता नहीं क्या-क्या कुछ पाकिस्तान के अंदर आते डी से टाइम सिमुल्टेनियसली चलता है और जब ये चीज चल रही होती हैं तो यूथ का मोरल डाउन हो जाता है इन्वेस्टर का
Speaker A
मोबाइल डाउन हो जाता है तो इस एनर्जी क्राइसिस से इस पावर क्राइसिस से पावर से इस तमाम चीजों को इन टोटलिटी अगर ए जाए तो मुल्क की mashht डायरेक्टली इफेक्ट होती है और रिजल्टैंटली क्या होता है हाई इन्फ्लेशन होती है रोजमर्रा की जो एशिया
Speaker A
khurdonation की कीमतें भर जाती हैं उनके ऊपर ज्यादा से ज्यादा रैली करना होता हर बंदे को वो डेली सब्जी गोश्त अंडा चाय दाहिन पट्टी तमाम चीज चाहिए हर बंदे को ये चीज चाहिए फ्यूल हर बंदे को चाहिए तो जब
Speaker A
ये चीज महंगी हो जाएंगी और बहुत से लोगों की रेंज में नहीं होगी तो खाते हरबा में जफ़ा होगा यानी ज्यादा से ज्यादा लोग पावर्टी लाइन से नीचे जाएंगे जब ज्यादा से ज्यादा लोग पावर्टी लाइन से नीचे जाएंगे
Speaker A
तो कौन तालीम हासिल कर पाएगा और जो तालीम आफ्टर उनके लिए तो जॉब्स भी अवेलेबल नहीं होंगे तो सोसाइटी के अंदर पाने का आएगा क्राइम आएगा स्ट्रीट क्राइम बढ़ जाएगा कुछ यह तमाम चीज जो हैं वो सोशल डिलेमा
Speaker A
क्रिएट कर देंगे लोग मुल्क से जाना शुरू कर देंगे ब्रेन ब्रेन हो जाएगा काबिल लोग मुल्क छोड़ना शुरू कर देंगे और जो इन्वेस्टर इस मुल्क में मौजूद हैं वो अपना कैपिटल लेकर फ्लाइट ऑफ कैपिटल कर जाएंगे किसी और हमने देखा पिछले 20 साल में बहुत
Speaker A
इंडस्ट्रीज श्रीलंका चलेगी बांग्लादेश चलेगी इंडिया चलेगी दुबई चलेगी और बहुत से यूरोप एंड कंट्रीज में चलेगी तो बहुत से प्रॉब्लम्स होंगे और जब ऐसी सिचुएशन आती है पॉलिटिकल वॉलेट होती है रिलिजियस डिवीज़न होती है asectarian क्राइसिस होता है तो फिर उसे दौर में उसे हालत में सिविल
Speaker A
ब्लॉक रिसीव भी परफॉर्म नहीं कर सकती आय दिन धरने हो आए दिन राइड्स हो तो सिविल ब्रो कहां कहां एक वक्त में कम करेगी ऊपर से नेचुरल क्लाइमेट इस आप देख रहे हैं पिछले 20 सालों में 3 बड़ी नेचुरल
Speaker A
कैलेमिटीज पाकिस्तान ने कॉन्फ्रेंस की 2004 में जल्द ए गया 2010 में से लाभ ए गया 22 में फिर से इलाहाबाद तो ये ही नेशनल camatis मोर दें इसका डैमेज कर के साथ वॉर 123 डैमेज हुआ 80 हजार से जाने चली की जिसमें
Speaker A
सिविलियन भी है मिलिट्री ऑफिसर्स भी हैं मिलिट्री सिपाही भी हैं पैरामिलिट्री फोर्सेस एंड इंटेलिजेंस एजेंसी है पुलिस बहुत सही दरें हैं तो ये क्राइसिस जो है वो बढ़ता चला जाता है होप आपके लिए आज की हमारे डिस्क्रिप्शन होगी इंशाल्लाह
Speaker A
नेक्स्ट सीरीज में इसी से लिंक बाकी टॉपिक्स पर डिटेल में डिस्कशन करेंगे [संगीत]
Topics:पाकिस्तान ऊर्जा संकटनवीनीकरणीय ऊर्जागैर-नवीनीकरणीय ऊर्जाफॉसिल फ्यूलहाइड्रो पावरसौर ऊर्जापवन ऊर्जाऊर्जा योजनाऊर्जा आयातपाकिस्तान राजनीति











