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2 Am at Night | Part 1 | Horror Story Hindi | Dark Night Horror Story

अर्जुन की रात 2 बजे ट्रेन यात्रा और भानपुर गांव की रहस्यमयी घटनाओं की डरावनी कहानी।

Key Takeaways

  • रात के समय अकेले यात्रा करना खतरनाक और रहस्यमयी हो सकता है।
  • पुराने गांव और अंधेरे में छुपे रहस्य कई बार डरावने होते हैं।
  • अर्जुन की मजबूरी और परिवार की चिंता उसकी हिम्मत का कारण है।
  • रहस्यमयी पात्र और घटनाएं कहानी में भय और तनाव पैदा करती हैं।
  • कहानी का माहौल और संवाद हिंदी हॉरर शैली के अनुरूप हैं।

What the video covers

  • अर्जुन ट्रेन में रात के अंधेरे में अपने दादाजी के गांव भानपुर जा रहा है।
  • स्टेशन पर उतरने के बाद उसे कोई ऑटो नहीं मिलता और वह पैदल चलने का फैसला करता है।
  • रास्ते में एक रहस्यमयी बूढ़ा आदमी अर्जुन के साथ चलता है और अजीब बातें करता है।
  • अर्जुन एक सुनसान चाय की दुकान पर रुकता है जहां कुछ अजीब लोग मौजूद होते हैं।
  • रात के अंधेरे में अजीब आवाजें और घटनाएं अर्जुन को डराती हैं।
  • अर्जुन का मन बेचैन रहता है लेकिन वह दादाजी से मिलने की मजबूरी में आगे बढ़ता है।
  • गांव पहुंचने पर अर्जुन को पुराने दिनों की यादें और रहस्यमयी माहौल महसूस होता है।
  • मुकेश नाम के एक पुराने दोस्त से मुलाकात होती है जो गांव में रहता है।
  • अर्जुन गांव के घर में अजीब गंध और खामोशी महसूस करता है।
  • कहानी में धीरे-धीरे डर और रहस्य गहराता जाता है, जो आगे के भागों में खुलेंगे।

Answers

Questions about this video

अर्जुन किस वजह से भानपुर गांव जा रहा है?

अर्जुन अपने दादाजी की तबीयत खराब होने के कारण भानपुर गांव जा रहा है।

रात के 2 बजे स्टेशन पर अर्जुन को क्या समस्या हुई?

स्टेशन पर कोई ऑटो नहीं था और आसपास का माहौल सुनसान और डरावना था, जिससे अर्जुन को पैदल चलना पड़ा।

चाय की दुकान पर अर्जुन को कौन-कौन से लोग मिले?

अर्जुन को चाय की दुकान पर एक बूढ़ी औरत, एक गंभीर आदमी और चाय वाला मिले, जो सब रहस्यमयी और डरावने थे।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:05
Speaker A
अर्जुन खिड़की के पास बैठा, ट्रेन के अंधेरे डिब्बे में चुपचाप बाहर देख रहा था। रात काफी गहरी हो चुकी थी। ट्रेन की खिड़की से बाहर सिर्फ काला अंधेरा दिखाई दे रहा था और बीच-बीच में दूर किसी गांव की हल्की पीली रोशनी चमक कर गायब हो जाती थी।
00:23
Speaker A
डिब्बे में बैठे ज्यादातर लोग सो चुके थे। किसी की हल्की खर्राटों की आवाज आ रही थी तो कहीं चाय वाले की आवाज कानों में गूंज रही थी। अर्जुन ने अपनी मोबाइल देखी। रात के 1:45 बज चुके थे। उसने एक गहरी सांस ली।
00:42
Speaker A
कितने साल बाद दादाजी के गांव जा रहा हूं? अरे बेटा, तुम कहां जा रहे हो?
00:47
Speaker A
चाचा, मैं अपने गांव भानपुर जा रहा हूं। बचपन में वह हर गर्मियों की छुट्टियों में वहां जाया करता था। लेकिन पढ़ाई, काम और शहर की भागदौड़ में वह गांव जैसे कहीं पीछे छूट गया था। इस बार दादाजी की तबीयत
01:02
Speaker A
ठीक नहीं है। इसलिए पिताजी ने मुझे तुरंत गांव जाने को कहा था। ट्रेन धीरे-धीरे अपनी रफ्तार कम करने लगी। बेटा, अगला स्टेशन तुम्हारा ही है शायद। अर्जुन ने सिर हिलाया। जी काका। मुझे यहीं अगले स्टेशन में उतरना है।
01:18
Speaker A
बेटा, रात बहुत हो गई है। संभल कर जाना। जी काका। शुक्रिया। ट्रेन ने लंबी सीटी मारी और धीरे-धीरे छोटे से स्टेशन पर रुक गई। अर्जुन अपना बैग लेकर नीचे उतरा। प्लेटफार्म लगभग सुनसान था। कुछ टिमटिमाती लाइटें, दूर बैठे दो-तीन कुत्ते और स्टेशन
01:41
Speaker A
मास्टर के कमरे से आती हल्की रोशनी। बस इतना ही। उसने पीछे घूम के ऊपर लगी घड़ी की ओर देखा। ठीक रात के 2:00 बजे थे। हवा में अजीब सी ठंडक थी। स्टेशन शहर जैसा नहीं था। यहां सन्नाटा भी जैसे आवाज करता था। अर्जुन
02:00
Speaker A
प्लेटफार्म से बाहर की ओर बढ़ा। उसे उम्मीद थी कि बाहर कोई ऑटो मिल जाएगा और वह सीधे दादाजी के गांव पहुंच जाएगा। लेकिन बाहर आकर उसका चेहरा उतर गया। पूरा स्टेशन रोड खाली पड़ा था। दूर-दूर तक बस अंधेरा ही छाया हुआ था। और दूर कहीं
02:20
Speaker A
पेड़ों की सरसराहट और सड़क पर फैली पीली रोशनी दिखाई दे रही थी। अर्जुन ने इधर-उधर देखा। स्टेशन के बाहर फैली सुनसान सड़क को देखकर उसके मन में हल्की बेचैनी होने लगी। इतनी रात हो गई पर स्टेशन पर एक भी ऑटो
02:37
Speaker A
नहीं। अब गांव तक कैसे जाऊंगा? अर्जुन ने एक गहरी सांस ली और सड़क के किनारे खड़े होकर चारों तरफ देखने लगा। कितनी देर और इंतजार करूंगा?
02:50
Speaker A
अंधेरे में रास्ता साफ दिखाई नहीं दे रही। जितनी देर यहां इंतजार करूंगा, उतनी लेट होगी। इससे अच्छा मैं पैदल ही चला जाऊं। समय धीरे-धीरे बीतने के साथ थकान और बढ़ रही थी। हर गुजरते मिनट के साथ सन्नाटा और
03:06
Speaker A
गहरा होता जा रहा था। तभी थोड़ी दूर अंधेरे में उसे एक आदमी खड़ा हुआ दिखाई देता है। अंधेरा ज्यादा होने के कारण उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था। वह आदमी लाल धोती कुर्ता पहने था। उसकी लंबी सफेद
03:24
Speaker A
मूछें थी और आंखें अंधेरे में भी अजीब तरह से चमकती सी लग रही थीं।
03:40
Speaker A
वो बिल्कुल शांत खड़ा अर्जुन को देख रहा था। अर्जुन कुछ पल रुका। फिर धीरे-धीरे उसके पास गया। वह जितना उसका करीब जा रहा था, धीरे-धीरे उसका चेहरा और साफ दिखाई दे रहा था। जब वह पास पहुंचा, सामने एक बूढ़ा आदमी खड़ा हुआ था। उसकी उम्र लगभग 60 या 65 साल की होगी।
03:57
Speaker A
बाबा, यहां से भानपुर जाने के लिए कोई ऑटो मिलेगा क्या?
04:16
Speaker A
बूढ़ा आदमी कुछ सेकंड तक उसे बिना पलक झपकाए देखता रहा। फिर धीमी आवाज में बोला, बेटा रात के 2:00 बजे यहां कोई ऑटो नहीं मिलता। अर्जुन थोड़ा असहज हो गया। लेकिन मुझे गांव पहुंचना बहुत जरूरी है। दादाजी अकेले हैं। उन्होंने ही बुलाया है।
04:36
Speaker A
बूढ़ा आदमी ने हल्की मुस्कान दी। लेकिन उस मुस्कान में कुछ अजीब था। जरूरी काम अक्सर रात में ही बुलाते हैं। दिन में तो लोग सिर्फ बहाने बनाते हैं। अर्जुन उसकी बात सुनकर थोड़ा चौका लेकिन चुप रहा। तो अब क्या करूं चाचा? गांव यहां से कितना
04:53
Speaker A
दूर है? ज्यादा दूर नहीं। अगर हिम्मत हो तो पैदल चला जा सकता है। अर्जुन ने पीछे मुड़कर सुनसान सड़क की तरफ देखा। चारों ओर सिर्फ अंधेरा था। कुछ पल के लिए उसके मन में वापस स्टेशन पर रुक जाने का
05:12
Speaker A
विचार आया। लेकिन दादाजी की घबराई हुई आवाज उसे बार-बार याद आ रही थी। बेटा जाना है तो जल्दी चलो। देर मत करो। उसने बैग को थोड़ा कसकर पकड़ा और बूढ़े आदमी की तरफ देखा। अगर पैदल जाना ही पड़े तो मुझे रास्ता बता
05:28
Speaker A
दीजिए चाचा। बूढ़ा आदमी ने हल्का सा मुस्कान दी। जैसे वह पहले से यही जवाब सुनने का इंतजार कर रहा हो। रास्ता बताने से बेहतर है मैं खुद साथ चल देता हूं। रात गहरी है और इस रास्ते को हर
05:45
Speaker A
कोई नहीं समझ पाता। नहीं चाचा, आप क्यों तकलीफ करेंगे? बेहतर होगा आप मुझे रास्ता बता दीजिए। कुछ रास्ते ऐसे होते हैं बेटा जहां अकेले चलना ठीक नहीं होता। उसकी आवाज में ऐसी गंभीरता थी कि अर्जुन ने आगे कुछ
06:06
Speaker A
नहीं कहा। दोनों धीरे-धीरे सुनसान सड़क पर चलने लगे। स्टेशन की हल्की रोशनी अब पीछे छूट चुकी थी। सामने सिर्फ लंबी खाली सड़क थी। अर्जुन ने कई बार पीछे मुड़कर देखा। लेकिन हर बार सिर्फ अंधेरा ही दिखाई देता। कुछ देर तक दोनों चुपचाप चलते रहे। सिर्फ
06:26
Speaker A
कदमों की आवाज थी। चाचा, आप यहीं रहते हैं क्या? हां, बहुत साल पहले मैं यहीं रहता हूं। लेकिन चाचा, मैंने आपको पहले कभी नहीं देखा। जो लोग देर से लौटते हैं वही मुझे देख पाते हैं। अर्जुन उसके जवाब को समझ नहीं पाया। उसने
06:45
Speaker A
बात बदलने की कोशिश की। चाचा, मेरा गांव भानपुर है। दादाजी का नाम राम प्रसाद है। शायद आप जानते होंगे। बूढ़ा आदमी अचानक रुक गया। उसके कदम रुकते ही अर्जुन भी ठिठक गया। बूढ़ा आदमी ने धीरे से उसकी तरफ देखा।
07:05
Speaker A
राम प्रसाद जी, चाचा आप जानते हैं उन्हें? कुछ पल तक बूढ़ा आदमी चुप रहा। हवा और ठंडी लगने लगी। बहुत पुराने आदमी हैं। बहुत कुछ देखा है उन्होंने और बहुत कुछ छुपाया भी है।
07:29
Speaker A
छुपाया क्या मतलब? बूढ़ा आदमी फिर चलने लगा। कुछ बातें रात खुद बता देती हैं। इंसानों को बोलने की जरूरत नहीं पड़ती। अब अर्जुन के मन में बेचैनी बढ़ने लगी थी। दादाजी ने अचानक बुलाया। यह अजीब बूढ़ा आदमी और उसकी रहस्यमई बातें सब कुछ किसी अनजाने डर की तरफ इशारा कर रही थीं। रास्ता
07:49
Speaker A
अब और सुनसान हो गया था। दूर-दूर तक कोई घर नहीं, कोई आवाज नहीं। सिर्फ हवा और कभी-कभी किसी उल्लू की आवाज। चलते-चलते अचानक दूर एक हल्की रोशनी दिखाई दी। अंधेरे के बीच वो पीली रोशनी किसी उम्मीद जैसी लग रही थी।
08:08
Speaker A
चाचा, वहां वो क्या है? बूढ़ा आदमी ने बिना देखे जवाब दिया। चाय की एक पुरानी दुकान है। रात में भटके हुए लोग वहीं रुकते हैं। तुम भी चलो चाय पीकर जाना। जैसे-जैसे वह आगे बढ़े, वह जगह साफ दिखाई
08:28
Speaker A
देने लगी। एक सुनसान मोड़ पर सड़क के किनारे टीन की छत वाली एक छोटी सी चाय की टपरी थी। बाहर एक पुरानी लालटेन टंगी हुई थी। जिसकी लौ हवा में कांप रही थी। सामने एक पुरानी लकड़ी की बेंच पर एक बूढ़ी औरत
08:46
Speaker A
बैठी थी। उसके सफेद बाल बंधे हुए थे। चेहरे पर गहरी झुर्रियां थीं और हाथ में मिट्टी का कुल्हड़ था जिससे वह धीरे-धीरे चाय पी रही थी। बगल में एक पुरानी बेंच पर एक आदमी चुपचाप बैठा था। सिर थोड़ा झुका
09:01
Speaker A
हुआ। हाथ आपस में जुड़े हुए और चेहरे पर अजीब सी गंभीरता। वो बिना हिले अर्जुन को देख रहा था। आओ बेटा, यही जगह है। बैठ जाओ। चाचा, यह लोग इतनी रात में यहां क्यों हैं?
09:17
Speaker A
कुछ लोग रात के लिए जागते नहीं। रात उनका इंतजार करती है। अर्जुन बहुत थका हुआ था और आकर बेंच पर बैठ गया। अरे अर्जुन, देर हो गई। रास्ता ढूंढने में परेशानी हुई क्या?
09:37
Speaker A
अर्जुन एक पल के लिए ठिठक गया। आप, आप मुझे जानते हैं? इस रास्ते से जो भी आता है उसकी खबर पहले ही मिल जाती है। अर्जुन अब चुप था। वह बस उस आदमी को देख रहा था। तभी चाय वाले ने कहा जो कब से चुप
10:00
Speaker A
था, उसकी आवाज गहरी थी। शहर से आए हो शायद। चेहरा बता रहा है। जी, मैं भानपुर जा रहा हूं। दादाजी ने बुलाया है। भानपुर जी, मुझे भानपुर जाना है। चाय वाले का चेहरा लालटेन की आधी रोशनी में था। आंखें गहरी और चेहरा ऐसा
10:16
Speaker A
जैसे बहुत कुछ जानता हो। वहां तक पहुंचने वाले लोग अक्सर रास्ते से ज्यादा अपने अतीत से डरते हैं। आप लोग आखिर ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं? मैं सिर्फ अपने दादाजी के पास जा रहा हूं। बेंच पर बैठा आदमी
10:33
Speaker A
हल्का सा मुस्कुराया। हर कोई यही सोच कर आता है कि वो सिर्फ किसी से मिलने जा रहा है। लेकिन कुछ जगहों पर लोग नहीं। किस्मत इंतजार करती है। अर्जुन ने गहरी सांस ली। अब वो खुद को रोक नहीं पाया।
10:41
Speaker A
एक बात बताइए। रात के 2:00 बजे इस घने जंगल के बीच यह चाय की दुकान क्यों खुली है? यहां कौन आता है?
11:02
Speaker A
उसके सवाल के बाद अचानक सब चुप हो गए। लालटेन की लौ एक बार तेज हुई फिर धीमी पड़ गई। बेटा, यहां वो लोग आते हैं जो रास्ता भटक जाते हैं और वो भी जिन्हें रात खुद बुलाती है। मुझे कोई रात ने नहीं बुलाया। मुझे मेरे
11:25
Speaker A
दादाजी ने बुलाया है। बेंच पर बैठा आदमी हल्का सा मुस्कुराया। अर्जुन को अब अजीब सा महसूस होने लगा था। एक अनजानी डर उसके मन में घर कर चुकी थी। बाहर अचानक तेज हवा चली। लालटेन जोर से हिली और उसी पल टपरी के पीछे किसी औरत के
11:43
Speaker A
रोने की धीमी आवाज सुनाई दी।
12:01
Speaker A
अर्जुन के हाथ से लगभग कुल्हड़ छूट ही गया। उसने घबराकर पीछे अंधेरे जंगल की तरफ देखा। यह आवाज कैसी थी? वहां कौन है? कोई औरत रो रही है क्या?
12:25
Speaker A
कुछ पल के लिए टपरी में फिर से सन्नाटा छा गया। बेटा, रात के अंधेरे में बहुत सी आवाजें सुनाई देती हैं। हर आवाज सच नहीं होती। लेकिन चाचा, मैंने साफ सुना। कोई रो रहा था। कभी-कभी थका हुआ मन भी आवाजें बना
12:41
Speaker A
लेता है। शायद तुम्हारा वहम होगा। अर्जुन ने फिर पीछे देखा। अब वहां सिर्फ अंधेरा था। गहरा, चुप और डरावना अंधेरा। हवा फिर चलने लगी। पेड़ों की शाखाएं ऐसे हिल रही थीं जैसे को...
12:47
Speaker A
क्योंकि कुछ चीजें सिर्फ पीछे से ही दिखाई देती है। अर्जुन का गला सूख गया। [संगीत] उसने कुछ नहीं कहा। बस तेज कदमों से टपरी से बाहर निकल गया। रात और गहरी हो चुकी थी। अर्जुन तेज-तेज कदमों से चलने लगा। उसके कानों
13:07
Speaker A
में अब भी वही रोने की आवाज गूंज रही थी। उसने कई बार महसूस किया जैसे कोई उसके पीछे चल रहा हो। लेकिन चाय वाले की बात याद आते ही उसने पीछे मुड़ने की हिम्मत नहीं की। अर्जुन सिर्फ चलता रहा। ठंडी हवा
13:25
Speaker A
और दिल की तेज धड़कन। कुछ देर बाद दूर उसे अपने गांव भानपुर की पहली हल्की रोशनी दिखाई दी। वह राहत की सांस लेते हुए लगभग दौड़ पड़ा। थोड़ी ही देर में वह अपने दादाजी के पुराने घर के सामने खड़ा था। पुराना लकड़ी का दरवाजा,
13:47
Speaker A
आंगन में तुलसी चौरा और बरामदे में जलता हुआ एक छोटा सा दीपक। अर्जुन ने जल्दी जाकर दरवाजा खटखटाया। अंदर से दादा जी की आवाज आई। [संगीत] कौन? इतनी रात को कौन आया है? दादा जी दरवाजा खोलिए। मैं आया हूं अर्जुन।
14:10
Speaker A
दरवाजा तुरंत खुला। सामने दादाजी खड़े थे। चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी। अर्जुन इतनी देर? तुम ठीक तो हो ना बेटा। जी दादा जी मैं ठीक [संगीत] हूं लेकिन लेकिन बाद में तुम पहले अंदर आओ। अर्जुन अंदर आया। उसके चेहरे पर थकान और
14:32
Speaker A
डर दोनों साफ थे। दादाजी रास्ते में मेरे साथ बहुत अजीब चीज हुई। दादाजी का चेहरा गंभीर हो गया। दोनों अंदर कमरे में बैठे थे। [संगीत] बाहर ठंडी हवा चल रही थी। दादाजी अर्जुन के सामने खट पर बैठे थे। उनके चेहरे पर
14:50
Speaker A
अर्जुन को लेकर चिंता साफ [संगीत] दिखाई दे रही थी। अर्जुन अब साफ-साफ बताओ रास्ते में क्या हुआ? तुम्हारी आवाज सुनकर ही लग रहा है कुछ ठीक नहीं है। अर्जुन ने गहरी सांस ली। उसके हाथ अब भी हल्के कांप रहे थे।
15:10
Speaker A
दादा जी जब ट्रेन रात के ठीक 2:00 बजे स्टेशन पर रुकी तब पूरा स्टेशन लगभग सुनसान था। मैं बाहर निकला तो सोचा कोई ऑटो मिल जाएगा लेकिन बाहर एक भी ऑटो नहीं था। सिर्फ अंधेरा और ठंडी हवा। दादाजी
15:27
Speaker A
चुपचाप उसकी बात सुनते रहे। अर्जुन ने पूरी बात साफ-साफ दादाजी को बताया। पूरा किस्सा सुनते-सुनते दादाजी के चेहरे का रंग बदल गया। [संगीत] उनकी आंखों में साफ डर दिखाई देने लगा। कुछ देर तक वे बिल्कुल चुप बैठे रहे।
15:45
Speaker A
दादा जी आप कुछ बोल क्यों नहीं रहे? क्या आप उन लोगों को जानते हैं?
15:50
Speaker A
दादाजी ने धीरे-धीरे सिर उठाया। [संगीत] उनकी आवाज भारी हो चुकी थी। अर्जुन उस रास्ते पर रात के बाद कोई नहीं जाता। [संगीत] लेकिन दादाजी मैं तो उसी रास्ते से आया था। दादाजी ने तुरंत उसकी बात काट दी और सीधा
16:07
Speaker A
खिड़की के पास चले गए। [संगीत] कुछ देर वो खिड़की के बाहर घने अंधेरे की तरफ देखते रहे। फिर उन्होंने धीरे से अर्जुन की तरफ देखा। अर्जुन अभी रात बहुत हो चुकी है बेटा [संगीत] और तुम काफी थक गए हो।
16:23
Speaker A
अर्जुन चुपचाप उन्हें देखता रहा। इतनी लंबी यात्रा फिर वो सुनसान रास्ता जो भी हुआ उसके बारे में सुबह आराम से बात करेंगे। अभी तुम थोड़ा आराम कर लो। अर्जुन ने धीरे से सिर हिलाया [संगीत] लेकिन उसके चेहरे पर अब भी डर साफ दिखाई दे रहा था।
16:46
Speaker A
दादा जी पता नहीं क्यों मुझे अब भी ऐसा लग रहा है जैसे कोई मेरा पीछा करते हुए यहां तक आया हो। अर्जुन डर की वजह से ऐसा महसूस होता है। तुम ज्यादा मत सोचो। तुम अब जाकर सो जाओ।
17:01
Speaker A
ठीक है दादा जी। अर्जुन ने अपना बैग नीचे रखा और बिस्तर पर लेट गया। लेकिन जैसे ही उसने आंखें बंद की उसके दिमाग में फिर वही दृश्य आने लगे। सुनसान रास्ता टिमाटिमाती लालटेन और बेंच पर बैठा वो आदमी जो बिना पलक झपकाए उसे घूर
17:23
Speaker A
[संगीत] रहा था। अर्जुन जल्दी ही बिस्तर से उठ गया। उसकी चेहरा देखकर लगता मानो उसका दिमाग किसी अनजानी डर से घिरा हुआ हो। उसने गहरी सांस [संगीत] ली और खुद को समझाने की कोशिश की। शायद मैं जरूरत से ज्यादा सोच रहा हूं।
17:40
Speaker A
बाहर हवा की आवाज और तेज हो गई थी। थकान इतनी ज्यादा थी कि कुछ ही देर बाद उसकी आंखें भारी होने लगी। धीरे-धीरे वो बिस्तर पर लेट गया और कुछ ही मिनटों में अर्जुन गहरी नींद में सो गया।
18:00
Speaker A
दिन भर वह दादाजी के साथ घर के छोटे-मोटे कामों में लगा रहा। कभी आंगन में बैठकर बातें करता, कभी पुराने दिनों को याद करता। लेकिन उसके मन में एक और बात बार-बार आ रही थी। मुकेश काका के घर जा रहा हूं कहकर अर्जुन मुकेश
18:20
Speaker A
के घर के ओर निकल पड़ा। क्योंकि उसे पता था अगर दादाजी जानेंगे कि वह मुकेश के घर जा रहा है। तो उसे जाने के लिए मना करेंगे। क्योंकि कुछ साल पहले मुकेश की घर और अर्जुन के घर में कुछ कारण की वजह से
18:36
Speaker A
बातचीत नहीं होती थी। [संगीत] मुकेश उसका बचपन का सबसे अच्छा दोस्त था। दोनों ने साथ खेलते हुए साथ स्कूल जाते हुए और गांव की गलियों में घूमते हुए अपना बचपन बिताया था। कई साल हो चुके थे उन्हें आमने-सामने
18:55
Speaker A
मिले हुए। अर्जुन ने सोचा था कि वह दोपहर में ही मुकेश से मिलने चला जाएगा। लेकिन दिन भर कुछ जरूरी कामों में समय निकल गया। देखतेदेखते शाम होने लगी। आसमान में सूरज धीरे-धीरे ढल चुका था। चारों तरफ शाम की
19:15
Speaker A
अंधेरा छाई हुई थी। चलते-चलते अर्जुन को पुराने दिन याद आने लगे। उसे याद आया कैसे वह और मुकेश बरसात में खेतों में दौड़ा करते थे। कैसे दोनों नदी के किनारे घंटों बैठे रहते थे। कितनी बार दोनों ने मिलकर
19:35
Speaker A
गांव वालों की डांट भी खाई थी और फिर हंसते हुए भाग गए थे। उन यादों को सोचकर अर्जुन के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। मुकेश बचपन से ही भानपुर में पला बड़ा था। मुकेश जब छोटा था उसके दादा-दादी का
19:53
Speaker A
देहांत हो चुका था। अब वह अपने पुश्तैनी घर में उसकी पत्नी के साथ रहता था। कई सालों से उसके माता-पिता शहर में काम करते थे। गांव के लोग मुकेश को शांत स्वभाव का मानते थे। सोचते-सचते अर्जुन गांव की
20:12
Speaker A
आखिरी गली तक पहुंच गया। शाम अब रात में बदल चुकी थी और हवा में हल्की ठंडक घुल चुकी थी। कुछ ही देर बाद उसे सामने मुकेश का घर दिखाई दिया। पुराना दो मंजिला मकान, ऊंची दीवारें, लकड़ी का बड़ा दरवाजा और
20:31
Speaker A
बरामदे में जलता हुआ पीला बल्ब। अर्जुन कुछ पल वहीं खड़ा रहा। इतने वर्षों बाद वह अपने पुराने दोस्त से मिलने जा रहा था। फिर उसने जाकर दरवाजा खटखटाया। और तभी अंदर से कदमों की आवाज आई। कुछ सेकंड बाद दरवाजा खुला। सामने मुकेश
20:56
Speaker A
खड़ा था। दोनों कुछ पल तक एक दूसरे को देखते रहे। फिर मुकेश के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गई। अरे अर्जुन सच में तू है या यह मेरा बहम है। क्यों? भूत समझ लिया था क्या?
21:12
Speaker A
नहीं यार, बस यकीन नहीं हो रहा। इतने साल बाद अचानक सामने खड़ा है। कई सालों की दूरी जैसे एक पल में खत्म हो गई। मुकेश उसे अंदर ले गया। घर अंदर से काफी बड़ा था लेकिन अजीब तरह से शांत भी।
21:28
Speaker A
कमरों में पुराना फर्नीचर रखा था। दीवारों पर समय की छाप साफ दिखाई देती थी। मुकेश अर्जुन को अपने कमरे के अंदर ले गया। भाई मैंने सुना था तू शादीशुदा है। लेकिन घर में तो लगता है कोई नहीं है।
21:44
Speaker A
हां भाई तूने सही सुना है। मेरी पत्नी और बच्चे उनके गांव गए हुए हैं। इतनी बड़ी सुनसान घर में तू अकेला रहता है?
21:53
Speaker A
नहीं भाई, अकेला नहीं। बीवी बच्चे कल आ जाएंगे। और मेरा गांव में कुछ काम था इसलिए मैं जा नहीं पाया। जो हुआ अच्छा हुआ तुझसे बहुत दिनों बाद मुलाकात हो गई। अर्जुन को अब थोड़ा अजीब सा महसूस हो रहा
22:12
Speaker A
था। लेकिन इतने सालों बाद मिले थे इसलिए बातों का सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। मेरा गला जैसे सूख रहा है क्या मुझे एक गिलास पानी मिलेगा?
22:24
Speaker A
अरे यह कोई पूछने की बात है? तू यहीं रुक मैं पानी लेकर आता हूं। यह कहकर मुकेश अर्जुन के लिए पानी लाने चला गया। रात के करीब एक या 2:00 बज चुके थे। कमरे में एक अजीब सा गंध महसूस हो रहा
22:39
Speaker A
था और तभी खिड़की से किसी औरत की रोने की धीमी आवाज सुनाई दी। ये ये कैसी आवाज थी? अर्जुन धीरे-धीरे खिड़की के पास गया। उसने चारों तरफ नजरें घुमाया लेकिन उसे घना अंधेरा के सिवा कुछ नहीं दिखा। तभी
23:02
Speaker A
उसे पीछे से आवाज आती है। अर्जुन उसके पीछे मुकेश खड़ा हुआ था। अरे भाई तेरे चेहरे पर यह 12 क्यों बजे हुए? कुछ नहीं ऐसे ही। बस थोड़ा घुटन सा हो रहा है। तो फिर ठीक है तू थोड़ी देर आराम कर ले।
23:19
Speaker A
यह कहकर मुकेश कमरे से बाहर चला गया। वो अब कमरे में अकेला था। कमरे के अंदर सन्नाटा जैसे उसकी कानों को चीर रही थी। यह मेरे साथ हो क्या रहा है? उस दिन वो अजीब घटनाएं और आज वो औरत की रोने की आवाज
23:37
Speaker A
वो बार-बार उस खिड़की की तरफ देख रहा था। उसे लग रहा था कि जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसके पीछे पड़ी हो। अर्जुन कमरे में बैठा हुआ था कि उसकी नजर एक दरवाजे के ऊपर जाकर पड़ी। वह कमरा पता नहीं कब से बंद पड़ी
23:55
Speaker A
हुई थी। [संगीत] ऐसा लग रहा था जैसे सालों से कोई उस कमरे के अंदर नहीं गया हो। बाहर हवा की आवाज लगातार सुनाई दे रही थी। घर के अंदर अजीब सी खामोशी पसरी हुई थी। अर्जुन धीरे-धीरे अपनी जगह से उठा। [संगीत]
24:13
Speaker A
उसकी नजर अब भी उसी दरवाजे पर टिकी हुई थी। यह कमरा मैंने पहले नहीं देखा। वह कुछ कदम आगे बढ़ा। जैसे-जैसे वह दरवाजे के करीब पहुंच रहा था, उसके मन में अजीब सी बेचैनी भी बढ़ रही थी। दरवाजे के हैंडल पर धूल
24:31
Speaker A
जमी हुई थी। [संगीत] ऐसा लग रहा था जैसे सालों से किसी ने उसे छुआ तक ना हो। अर्जुन का दिल थोड़ा तेज धड़कने [संगीत] लगा। उसने पीछे मुड़कर देखा। मुकेश अभी तक वापस नहीं आया था। [संगीत] पूरे घर में सन्नाटा पसरा हुआ था।
24:50
Speaker A
अर्जुन कुछ सेकंड [संगीत] तक सोचता रहा। फिर आखिरकार उसने धीरे से दरवाजे को खोला। जैसे ही उसने अंदर कदम रखा, [संगीत] वह कुछ पल के लिए हैरान रह गया। कमरे की दीवारों पर दर्जनों पेंटिंग्स टंगी हुई थी। अर्जुन ने थोड़ी राहत की सांस ली।
25:11
Speaker A
[संगीत] उसे अच्छी तरह पता था कि यह पेंटिंग्स मुकेश ने ही बनाया है [संगीत] क्योंकि मुकेश को बचपन से पेंटिंग बनाने का बहुत शौक था। स्कूल के दिनों में भी वह हर समय कागज और रंग लेकर बैठा रहता था। शायद यह
25:29
Speaker A
मुकेश का निजी कमरा था। अर्जुन धीरे-धीरे कमरे के अंदर आगे बढ़ा। जमे हुए धूल को साफ करके अर्जुन बार-बार से पेंटिंग्स को देख रहा था। तभी उसकी नजर दीवार पर टंगी हुई तीन फोटो पर पड़ती है। [चीखने की आवाज़]
25:50
Speaker A
कमरे से अर्जुन की भयानक चिख की आवाज आती है। उसकी आंखें डर से फैल गई। चेहरा बिल्कुल सफेद पड़ गया। डर के मारे वह पीछे हट गया। उसकी सांसे बेकाबू हो चुकी थी। दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था जैसे सीने
26:10
Speaker A
से बाहर निकल आएगा और फिर बिना एक पल भी रुके कमरे से बाहर भाग पड़ा। उसकी दिल की धड़कन इतनी ज्यादा थी कि जोर-जोर से सुनाई दे रहा था। अर्जुन तेजी से गलियारे से दौड़ा। मुख्य दरवाजा खोला था। वो घर से बाहर [संगीत]
26:29
Speaker A
निकल गया। पीछे से मुकेश की आवाज सुनाई दी। लेकिन अर्जुन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह बस भागता रहा। गांव की गलियों में अंधेरा फैल चुका था। भागते समय रास्ता साफ दिखाई नहीं दे रहा था। कई बार उसका
26:46
Speaker A
पैर पत्थरों से टकराया। कई बार वह गिरते-गिरते बचा। लेकिन उसके मन में सिर्फ वही तीसरी तस्वीर घूम रही थी। वह लगातार भागता रहा। उसकी सांसे तेज हो चुकी थी। सीना बुरी तरह ऊपर नीचे हो रहा था। ऐसा लग
27:06
Speaker A
रहा था जैसे उसका दिल किसी भी पल जवाब दे देगा। लेकिन डर उससे भी तेज था। किसी तरह भाग के अर्जुन अपने दादाजी के घर पहुंच जाता है। दादा जी दरवाजा खोलिए। दादा जी दादाजी दरवाजा खोलिए। दादाजी दादाजी दरवाजा खोल के बाहर आए। वो अर्जुन
27:28
Speaker A
को देखकर हैरान हो गए। अर्जुन इतनी देर बेटा तुम कहां थे? इतनी रात [संगीत] हो गई। मैं परेशान हो गया था। दादा जी वह मैं ठीक है। तुम पहले अंदर चलो। बैठ के बात करते हैं। रात बहुत [संगीत] हो गई।
27:47
Speaker A
दादाजी और अर्जुन दोनों अंदर आए। [संगीत] अर्जुन अब बोलो तुम इतने घबराए हुए क्यों हो? अर्जुन की हालत खराब थी। उसका चेहरा पीला पड़ चुका था। सांसे अब भी तेज चल रही थी। वो कुछ सेकंड तक बोल ही नहीं पाया।
28:10
Speaker A
फिर कांपती [संगीत] आवाज में उसने कहा। दादा जी मैं आज आपको बिना बताए मुकेश के घर गया था। यह सुनते ही दादाजी का चेहरे का रंग उड़ गया। फिर क्या हुआ?
28:20
Speaker A
अर्जुन ने पूरी बात दादाजी को बताई। [संगीत] दादाजी ध्यान से सब सुनते रहे। उनके चेहरे का रंग धीरे-धीरे बदलने लगा। कुछ पल बाद उन्होंने धीमी आवाज में पूछा। लेकिन तुमने तो बताया नहीं। वो तस्वीरें किसकी थी। दादा जी और मैंने जब ऊपर की दीवार को देखा
28:46
Speaker A
[चीखने की आवाज़] और दादा जी मैं वहां से जल्दी भाग आया। यह बात सुनते ही दादाजी के रोंगटे खड़े हो गए। लेकिन अर्जुन तुमने तो तीन तस्वीरें बोले थे। वह तीसरी तस्वीर किसकी थी?
29:05
Speaker A
अर्जुन के होंठ कांपने लगे। उसने कुछ बोलने की कोशिश की। लेकिन उसके मुंह से आवाज ही नहीं निकली। उसकी आंखों में वही डर फिर लौट आया। वो बस खाली निगाहों से दादाजी को देखता रह गया। जैसे तीसरी तस्वीर को याद करते ही उसकी बोलने [संगीत]
29:27
Speaker A
की ताकत खत्म हो गई हो। दोस्तों, यहां तक वीडियो देखने के लिए धन्यवाद। अगर आप आगे की कहानी जानना चाहते हो कि अर्जुन वह तीसरी तस्वीर में क्या देखा या वह तीसरी तस्वीर किसकी थी तो चैनल को जरूर सब्सक्राइब करके रखना और वीडियो
29:46
Speaker A
पसंद आए तो एक लाइक कर देना। हां।
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