2026 में YouTube का नया एल्गोरिदम समझें और वायरल होने के लिए जरूरी रणनीतियाँ जानें।
Key Takeaways
- 2026 में YouTube का एल्गोरिदम AI आधारित जेमिनाई सिस्टम पर काम करता है जो कंटेंट के कॉन्टेक्स्ट को समझता है।
- सेशन टाइम वॉच टाइम से ज्यादा महत्वपूर्ण है, इसलिए यूजर को YouTube पर ज्यादा समय बिताना चाहिए।
- इमोशनल रिटेंशन वीडियो की सफलता के लिए जरूरी है, केवल ऑडियंस रिटेंशन पर्याप्त नहीं है।
- सब्सक्राइबर्स की संख्या अब कंटेंट की रीच तय नहीं करती, बल्कि टारगेट ऑडियंस की खोज और एंगेजमेंट मायने रखती है।
- कंटेंट की कंसिस्टेंसी और स्पेसिफिक टॉपिक पर फोकस करना जरूरी है ताकि AI आपकी ऑडियंस को पहचान सके।
What the video covers
- 2026 में YouTube ने अपना एल्गोरिदम पूरी तरह से बदल दिया है, जिसमें सब्सक्राइबर्स, व्यूज और वॉच टाइम की अहमियत कम हो गई है।
- नया एल्गोरिदम जेमिनाई AI पर आधारित है जो वीडियो के कॉन्टेक्स्ट, टॉपिक और इंटेंट को समझता है।
- कीवर्ड्स, टैग्स और डिस्क्रिप्शन भरने से अब कोई फायदा नहीं होता, बल्कि कॉन्टेक्स्ट बेस्ड कंटेंट बनाना जरूरी है।
- वॉच टाइम की जगह सेशन टाइम को ज्यादा महत्व दिया जाता है, यानी यूजर YouTube पर कुल कितना समय बिताता है।
- ऑडियंस रिटेंशन की जगह अब इमोशनल रिटेंशन को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे वीडियो में स्पाइक्स और इमोशनल एंगेजमेंट जरूरी हैं।
- पुराने एल्गोरिदम में वीडियो को सब्सक्राइबर्स को दिखाया जाता था, लेकिन नए में कंटेंट को उस ऑडियंस को दिखाया जाता है जो उस टॉपिक में इंटरेस्टेड है।
- नए एल्गोरिदम में कंटेंट की सफलता के लिए CTR, व्यूअर सेटिस्फेक्शन, वॉच टाइम, रिटर्न व्यूअर्स, इमोशनल रिटेंशन और सेशन टाइम को ध्यान में रखा जाता है।
- कंटेंट की कंसिस्टेंसी जरूरी है, खासकर नए चैनल के लिए, ताकि AI को समझ आए कि आपकी ऑडियंस कौन है।
- वीडियो के वायरल होने के लिए नए एल्गोरिदम के लेवल्स को समझना और हर लेवल पर सही रणनीति अपनाना जरूरी है।
- यह वीडियो नए एल्गोरिदम के अपडेट्स और उनसे निपटने के तरीकों पर विस्तार से मार्गदर्शन देता है।
Chapters
- 00:00परिचय और 2026 के नए एल्गोरिदम का अवलोकन
- 00:52कंटेंट की नई आवश्यकताएँ और AI आधारित रैंकिंग
- 03:00सेशन टाइम बनाम वॉच टाइम और उनकी प्राथमिकता
- 05:00इमोशनल रिटेंशन का महत्व और वीडियो ग्राफ विश्लेषण
- 07:00पुराने और नए एल्गोरिदम की तुलना
- 10:00नए एल्गोरिदम के लेवल्स और वायरल होने की रणनीतियाँ
- 13:00कंटेंट कंसिस्टेंसी और चैनल ग्रोथ के टिप्स
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Speaker A
आपके सब्सक्राइबर्स मैटर नहीं करते। आपके व्यूज भी मैटर नहीं करते। इवन अब आपका वॉच टाइम भी मैटर नहीं करता है। YouTube ने अपना पूरा एल्गोरिदम चेंज कर दिया है 2026 में। एंड अगर आप यूटबर बनने की सोच रहे हो, तो गलती से भी इस वीडियो को स्किप मत करना। इस वीडियो के अंदर पहले मैं आपको 2026 के नए एल्गोरिदम अपडेट समझाऊंगा। एंड देन कैसे उन अपडेट्स को टैकल करके वायरल होना है यह भी बताऊंगा। सो, लेट्स स्टार्ट।
Speaker A
तो गलती से भी इस वीडियो को स्किप मत करना। इस वीडियो के अंदर पहले मैं आपको 2026 के नए एल्गोरिदम अपडेट समझाऊंगा। एंड देन कैसे उन अपडेट्स को टैकल करके वायरल होना है यह भी बताऊंगा। सो, लेट्स स्टार्ट
Speaker A
दी वीडियो। सर्च एडप्टेबिलिटी। प्रीवियस वीडियो में मैंने यह बता ही दिया था कि YouTube ने अपने सिस्टम में जेमिनाई को इंटीग्रेट कर दिया है। लेकिन इससे एल्गोरिदम को क्या फर्क पड़ा है यह समझो। पहले आपको टाइटल में कीवर्ड्स, डिस्क्रिप्शन में कीवर्ड्स एंड टैग्स में भी भर-भर के कीवर्ड्स लिखने पड़ते थे कंटेंट को रैंक करवाने के लिए। लेकिन अब आपको यह सब करने से कुछ नहीं मिलेगा। क्योंकि अब आपका कंटेंट रैंक होगा या नहीं यह टोटली जेमिनाई के हाथों में है।
Speaker A
डिस्क्रिप्शन में कीवर्ड्स एंड टैग्स में भी भर-भर के कीवर्ड्स लिखने पड़ते थे कंटेंट को रैंक करवाने के लिए। लेकिन अब आपको यह सब करने से कुछ नहीं मिलेगा। क्योंकि अब आपका कंटेंट रैंक होगा या नहीं यह टोटली जेमिनाई के हाथों में है।
Speaker A
जेमिनाई आपके वीडियो के कॉन्टेक्स्ट को समझ सकता है एंड आप अपनी वीडियो में किस चीज के बारे में बात कर रहे हो इसे भी अच्छे से जानता है। इसलिए YouTube पे रैंक करने के लिए अब आपको कॉन्टेक्स्ट बेस्ड कंटेंट बनाना पड़ेगा। यानी कि ऐसा कंटेंट जो कि एआई को समझ आए। बेसिकली टाइटल आप क्लिकबेट वाला भी बना दो। लेकिन अगर कंटेंट किसी और चीज के बारे में है और ऑडियंस उस चीज को सर्च नहीं कर रही है तो आपका कंटेंट सजेस्ट नहीं होगा। अब आपको अपनी वीडियोस को रैंक करवाने के लिए वीडियोस को बहुत ही स्पेसिफिक एंड टू द पॉइंट बनाना पड़ेगा। अगर आपकी मैक्सिमम ऑडियंस सर्च बेस है तो क्योंकि अगर एआई नहीं समझ पाया कि आपकी टारगेट ऑडियंस कौन है तो वीडियो किसी काम की नहीं है। वो सजेस्ट ही नहीं होगी।
Speaker A
कंटेंट बनाना पड़ेगा। यानी कि ऐसा कंटेंट जो कि एआई को समझ आए। बेसिकली टाइटल आप क्लिकबेट वाला भी बना दो। लेकिन अगर कंटेंट किसी और चीज के बारे में है और ऑडियंस उस चीज को सर्च नहीं कर रही है तो
Speaker A
नंबर टू सेशन टाइम। अगर 2026 में भी आप वॉच टाइम के पीछे भाग रहे हो यह सोच के कि YouTube वॉच टाइम को सबसे ज्यादा प्रायोरिटी देता है तो अगेन आप गलती कर रहे हो। YouTube अब वॉच टाइम को नहीं बल्कि सेशन टाइम को सबसे ज्यादाेंस देता है। अगर आपको नहीं पता है तो बता दूं कि कोई बंदा वीडियो कितनी देर तक देख रहा है उसे वॉच टाइम बोलते हैं।
Speaker A
है तो वीडियो किसी काम की नहीं है। वो सजेस्ट ही नहीं होगी। नंबर टू सेशन टाइम। अगर 2026 में भी आप वॉच टाइम के पीछे भाग रहे हो यह सोच के कि YouTube वॉच टाइम को सबसे ज्यादा प्रायोरिटी देता है तो अगेन
Speaker A
एंड कोई बंदा YouTube पे कितना टाइम स्पेंड कर रहा है उसे टाइम बोलते हैं। एंड एक चीज YouTube ने बहुत ही क्लियर कर दिया है कि सेशन टाइम इज ग्रेटर दैन वॉच टाइम। सो डजंट मैटर आपके 1 लाख व्यूज आपकी वीडियो पूरी देख ले। अगर कोई आपसे छोटा क्रिएटर जो हर हफ्ते ऑडियंस को अपने चैनल पर ला के अपनी वीडियो दिखा पा रहा है। भले ही 10,000 व्यूज क्यों ना हो YouTube उस छोटे क्रिएटर को ज्यादा सपोर्ट करेगा।
Speaker A
एंड कोई बंदा YouTube पे कितना टाइम स्पेंड कर रहा है उसे टाइम बोलते हैं। एंड एक चीज YouTube ने बहुत ही क्लियर कर दिया है कि सेशन टाइम इज ग्रेटर दैन वॉच टाइम। सो डजंट मैटर आपके 1 लाख व्यूज आपकी
Speaker A
ज्यादा सजेस्ट करेगा क्योंकि वह सेशन टाइम ला रहा है। लोग उसकी वीडियोस देखने के लिए हर हफ्ते YouTube खोल रहे हैं। अपडेट थ्री इमोशनल वेलोसिटी। 2026 में ऑडियंस रिटेंशन की कोई वैल्यू नहीं है। ऐसा मैं नहीं बोल रहा ऐसा बल्कि YouTube ने इनडायरेक्टली बोल दिया है। क्योंकि अब YouTube ऑडियंस रिटेंशन से ज्यादा इमोशनल रिटेंशन को एनालाइज कर रहा है। यानी कि अगर आपकी वीडियो लोग पूरी देख लेते हैं। लेकिन किसी भी मोमेंट पे वह एक्साइटेड नहीं होते। किसी भी मोमेंट को वह रिपीट करके नहीं देखते हैं। वह कुछ इमोशन नहीं फील करते आपकी वीडियोस के अंदर तो आपका कंटेंट टेक्निकली डेड है। क्योंकि YouTube उस कंटेंट के इंप्रेशन को कम कर देगा। एंड यह चीज आप अपनी वीडियोस के अंदर इज़ली देख भी सकते हो। YouTube वीडियोस देखते टाइम आपको जो टाइमलाइन के पास यह ग्राफ दिखाई देता है। अगर इस ग्राफ पे हर कुछ देर के बाद स्पाइक्स नहीं है। यह पूरा फ्लैट है तो समझ लो कि कंटेंट ज्यादा नहीं चलने वाला है। क्योंकि भले ही आपने ऑडियंस का रिटेंशन जीत लिया लेकिन आपने इमोशनल रिटेंशन नहीं जीता। एंड YouTube उस क्रिएटर के कंटेंट को प्रमोट करेगा जो कि इमोशनल रिटेंशन जीतेगा। नाउ ये थे वो तीन मेजर अपडेट्स जो कि YouTube ने अपने एल्गोरििदम में लेके आए हैं। बट अब क्वेश्चन आता है कि इस नए एल्गोरििदम के साथ हम कैसे ग्रो हो सकते हैं? उससे पहले आपको YouTube के पुराने एल्गोरिदम को समझना पड़ेगा। सिर्फ तभी आप बिना गलती किए अपने चैनल को ग्रो कर पाओगे। पहले YouTube का एल्गोरिदम कुछ इस तरह से वर्क करता था। जब भी आप कोई वीडियो डालते थे तो YouTube उस वीडियो के मेड डाटा के बेसिस पे उस वीडियो को एक सीड ऑडियंस को दिखाता था। जिसके बाद आपकी वीडियो की पैकेजिंग के हिसाब से कुछ लोग उस पे क्लिक करते थे। जिससे YouTube को यह पता चल जाता था कौन से लोग वीडियो में इंटरेस्टेड हैं एंड कौन से नहीं। जिसके बाद YouTube आपके कंटेंट को एक सेम इंटरेस्ट वाली ऑडियंस को पुश करता था। एंड देन YouTube इस चीज पे फोकस करता था कि लोगों ने वीडियो कब तक देखी और कितना एंगेज करा। अगर मैट्रिक्स अच्छे होते तो कंटेंट और ज्यादा लोगों को पुश किया जाता। लेकिन अगर खराब होता तो कंटेंट डेड कर दिया जाता। एंड ठीक इसी तरह हर वीडियो के साथ होता था। जिससे आपका चैनल ग्रो होता था। बहुत ही सिंपल एंड बहुत ही प्यारा सा एल्गोरिदम था। लेकिन अब नया एल्गोरिदम कुछ ऐसा है। आप जब भी नया कंटेंट डालोगे, पहले जेमिनाई उस कंटेंट को स्टडी करेगा ऑन द बेसिस ऑफ कॉन्टेक्स्ट, टॉपिक, इंटेंट, लैंग्वेज एंड व्यू योर बिहेवियर सिस्टम। जिसके बाद आपका कंटेंट आपके सब्सक्राइबर्स को नहीं भेजा जाएगा बल्कि उन लोगों को भेजा जाएगा जो कि यह सर्च कर रहे हैं या जिनको इस टॉपिक में एक्चुअल में इंटरेस्ट है। बेसिकली सब्सक्राइबर्स का कोई लेना देना नहीं है। वह किसी काम के नहीं है। जब कंटेंट उन लोगों को भेजा जाएगा, फिर एक टेस्टिंग साइकिल स्टार्ट होगी। जहां पे सबसे पहले तीन मैट्रिक्स को देखा जाएगा। सीटीआर, व्यूअर सेटिस्फेक्शन, वॉच टाइम। अगर लोगों को वीडियो में वो नहीं मिला जो उन्होंने सोचा था तो व्यूअर सेटिस्फेक्शन खराब है। और लोगों ने अगर वीडियो ज्यादा टाइम तक नहीं देखी तो वॉच टाइम खराब है। तीनों में से कुछ भी खराब होता है तो आपके कंटेंट की रीच को कम करना स्टार्ट कर दिया जाएगा एंड आपका कंटेंट धीरे-धीरे डेड हो जाएगा। लेकिन अगर आप इस टेस्ट साइकिल से निकल जाते हो, फिर आप अगले टेस्ट साइकिल में पहुंचोगे जहां पे रिटर्न व्यूअर रेट, इमोशनल रिटेंशन एंड सेशन टाइम को देखा जाएगा। अगर आपके रिटर्निंग व्यूअर्स कम है या आप लोगों को स्पाइक मोमेंट्स नहीं दे पा रहे हो या फिर आपके कंटेंट के लिए स्पेशली लोग YouTube पे नहीं आ रहे हैं तो अगेन आपके कंटेंट को धीरे-धीरे डेड कर दिया जाएगा। एंड इस बार YouTube को पता चल जाएगा कि यह क्रिएटर मास ऑडियंस को पुल नहीं कर सकता है। इसलिए अगली बार जब आप कोई वीडियो डालोगे तो आपको शुरू से इंप्रेशन कम मिलेंगे एंड चैनल की ग्रोथ स्टैगेंट हो जाएगी। जबकि अगर यह सारे मैट्रिक्स अच्छे होते हैं तो आपके कंटेंट को और ज्यादा पुश किया जाएगा। आपके कंटेंट को नई ऑडियंस को दिखाया जाएगा। एंड ऐसे ही चैनल ग्रो होगा। आपको नया एल्गोरिदम ज्यादा अच्छे से समझाने के लिए मैंने एक चार्ट भी बनाया है जिसमें आपको ये समझ आ जाएगा कि किन पुरानी चीजों पर ध्यान नहीं देना है एंड किन नए मैट्रिक्स पे ध्यान देना है। एक बार आप टाइम निकाल के या फिर स्क्रीन को पॉज करके चार्ट को अच्छे से देखिए। लेकिन अभी भी एक मैन क्वेश्चन बाकी है कि ये करना कैसे है? इस नए एल्गोरिदम के साथ वायरल होना कैसे है? यह समझने के लिए मैंने नए एल्गोरिदम को लेवल्स में बांट दिया है। एंड अब मैं एक-एक करके बताऊंगा कि कैसे आप हर लेवल से बाहर निकल सकते हैं। तो इसलिए कान खोल के सुनना क्योंकि वीडियो का सबसे इंपॉर्टेंट पार्ट यही है। लेवल वन है इनिशियल इंप्रेशन गेन। तो इसके लिए जो चीज आपको मेक श्योर करनी है वो है कंसिस्टेंसी। अब मेरा यहां पे कंसिस्टेंसी से मतलब यह नहीं है कि वीडियो को फ्रीकेंटली अपलोड करना है बल्कि कंटेंट की कंसिस्टेंसी की बात कर रहा हूं मैं। यानी कि आपका कंटेंट किसी एक सब टॉपिक के अराउंड ही रिवॉल्व करना चाहिए अगर आपका न्यू चैनल है तो। क्योंकि अगर आपकी सारी वीडियोस अलग-अलग टॉपिक्स पे जा रही है तो जेमिनाई को समझ ही नहीं आएगा कि आपकी ऑडियंस है कौन। एंड बजाय वो आपकी वीडियो के साथ एक्सपेरिमेंट करे। वो किसी और क्रिएटर की वीडियो सजेस्ट करेगा जहां पे पता होगा कि वीडियो किसके लिए है एंड किस बारे में है। कंटेंट कंसिस्टेंसी को मेंटेन करके आप जेमिनाई को एक क्लियर इंस्ट्रक्शन दे पाओगे कि आपकी टारगेटेड व्यूअर्स कौन है एंड आपका कंटेंट किस बारे में है। इसके बाद है लेवल टू। इनिशियल व्यूज गेन करना। अब इसके लिए जो चीजें आपको मेक श्योर करनी है वो यह है कि गलती से भी क्लिकबिट टाइटल्स मत बनाना। अगर 2026 में भी क्लिकबेट करने की कोशिश करोगे तो चैनल डेड हो जाएगा। कोई फायदा नहीं है। जिसने पैकेजिंग पे क्लिक किया है उसे वीडियो में एक्सजेक्टली वही मिलना चाहिए जो उसने सोचा होगा। अगर ऐसा करते हो तो व्यूअर्स सेटिस्फेक्शन को आप इजीली अचीव कर लोगे। एंड यह चीज जेमिनाई समझ जाएगा। इसके सिवाय आपको अपनी स्क्रिप्ट पे काम करना होगा। बजाय लंबी-लंबी स्क्रिप्ट्स लिखने के आपको एक चीज पे ध्यान देना है कि आप अपनी स्क्रिप्ट से कैसे ज्यादा से ज्यादा चीजें निकाल सकते हो। टेक्निकली आप ऑडियंस को बोर होने का मौका नहीं दे सकते। ऐसा हुआ तो कंटेंट डेड हो जाएगा। अब स्क्रिप्टिंग को कैसे इंप्रूव करना है इसके ऊपर एक अलग डिटेल वीडियो बना के ही मैं आपको समझा पाऊंगा। तो अगर आपको वो वीडियो चाहिए तो कमेंट सेक्शन में लिख दीजिए। 5000 कमेंट होते ही मैं इस टॉपिक क...
Speaker A
ज्यादा सजेस्ट करेगा क्योंकि वह सेशन टाइम ला रहा है। लोग उसकी वीडियोस देखने के लिए हर हफ्ते YouTube खोल रहे हैं। अपडेट थ्री इमोशनल वेलोसिटी। 2026 में ऑडियंस रिटेंशन की कोई वैल्यू नहीं है। ऐसा मैं नहीं बोल रहा ऐसा बल्कि
Speaker A
YouTube ने इनडायरेक्टली बोल दिया है। क्योंकि अब YouTube ऑडियंस रिटेंशन से ज्यादा इमोशनल रिटेंशन को एनालाइज कर रहा है। यानी कि अगर आपकी वीडियो लोग पूरी देख लेते हैं। लेकिन किसी भी मोमेंट पे वह एक्साइटेड नहीं होते। किसी भी मोमेंट को
Speaker A
वह रिपीट करके नहीं देखते हैं। वह कुछ इमोशन नहीं फील करते आपकी वीडियोस के अंदर तो आपका कंटेंट टेक्निकली डेड है। क्योंकि YouTube उस कंटेंट के इंप्रेशन को कम कर देगा। एंड यह चीज आप अपनी वीडियोस के अंदर
Speaker A
इज़ली देख भी सकते हो। YouTube वीडियोस देखते टाइम आपको जो टाइमलाइन के पास यह ग्राफ दिखाई देता है। अगर इस ग्राफ पे हर कुछ देर के बाद स्पाइक्स नहीं है। यह पूरा फ्लैट है तो समझ लो कि कंटेंट ज्यादा नहीं
Speaker A
चलने वाला है। क्योंकि भले ही आपने ऑडियंस का रिटेंशन जीत लिया लेकिन आपने इमोशनल रिटेंशन नहीं जीता। एंड YouTube उस क्रिएटर के कंटेंट को प्रमोट करेगा जो कि इमोशनल रिटेंशन जीतेगा। नाउ ये थे वो तीन मेजर अपडेट्स जो कि YouTube ने अपने
Speaker A
एल्गोरििदम में लेके आए हैं। बट अब क्वेश्चन आता है कि इस नए एल्गोरििदम के साथ हम कैसे ग्रो हो सकते हैं? उससे पहले आपको YouTube के पुराने एल्गोरििदम को समझना पड़ेगा। सिर्फ तभी आप बिना गलती किए अपने चैनल को ग्रो कर पाओगे। पहले YouTube
Speaker A
का एल्गोरििदम कुछ इस तरह से वर्क करता था। जब भी आप कोई वीडियो डालते थे तो YouTube उस वीडियो के मेड डाटा के बेसिस पे उस वीडियो को एक सीड ऑडियंस को दिखाता था। जिसके बाद आपकी वीडियो की पैकेजिंग के
Speaker A
हिसाब से कुछ लोग उस पे क्लिक करते थे। जिससे YouTube को यह पता चल जाता था कौन से लोग वीडियो में इंटरेस्टेड हैं एंड कौन से नहीं। जिसके बाद YouTube आपके कंटेंट को एक सेम इंटरेस्ट वाली ऑडियंस को पुश
Speaker A
करता था। एंड देन YouTube इस चीज पे फोकस करता था कि लोगों ने वीडियो कब तक देखी और कितना एंगेज करा। अगर मैट्रिक्स अच्छे होते तो कंटेंट और ज्यादा लोगों को पुश किया जाता। लेकिन अगर खराब होता तो कंटेंट
Speaker A
डेड कर दिया जाता। एंड ठीक इसी तरह हर वीडियो के साथ होता था। जिससे आपका चैनल ग्रो होता था। बहुत ही सिंपल एंड बहुत ही प्यारा सा एल्गोरििदम था। लेकिन अब नया एल्गोरििदम कुछ ऐसा है। आप जब भी नया
Speaker A
कंटेंट डालोगे, पहले जेमिनाई उस कंटेंट को स्टडी करेगा ऑन द बेसिस ऑफ कॉन्टेक्स्ट, टॉपिक, इंटेंट, लैंग्वेज एंड व्यू योर बिहेवियर सिस्टम। जिसके बाद आपका कंटेंट आपके सब्सक्राइबर्स को नहीं भेजा जाएगा बल्कि उन लोगों को भेजा जाएगा जो कि यह
Speaker A
सर्च कर रहे हैं या जिनको इस टॉपिक में एक्चुअल में इंटरेस्ट है। बेसिकली सब्सक्राइबर्स का कोई लेना देना नहीं है। वह किसी काम के नहीं है। जब कंटेंट उन लोगों को भेजा जाएगा, फिर एक टेस्टिंग साइकिल स्टार्ट होगी। जहां पे सबसे पहले
Speaker A
तीन मैट्रिक्स को देखा जाएगा। सीटीआर, व्यूअर सेटिस्फेक्शन, वॉच टाइम। अगर लोगों को वीडियो में वो नहीं मिला जो उन्होंने सोचा था तो व्यूअर सेटिस्फेक्शन खराब है। और लोगों ने अगर वीडियो ज्यादा टाइम तक नहीं देखी तो वॉच टाइम खराब है। तीनों में
Speaker A
से कुछ भी खराब होता है तो आपके कंटेंट की रीच को कम करना स्टार्ट कर दिया जाएगा एंड आपका कंटेंट धीरे-धीरे डेड हो जाएगा। लेकिन अगर आप इस टेस्ट साइकिल से निकल जाते हो, फिर आप अगले टेस्ट साइकिल में
Speaker A
पहुंचोगे जहां पे रिटर्न व्यूअर रेट, इमोशनल रिटेंशन एंड सेशन टाइम को देखा जाएगा। अगर आपके रिटर्निंग व्यूअर्स कम है या आप लोगों को स्पाइक मोमेंट्स नहीं दे पा रहे हो या फिर आपके कंटेंट के लिए स्पेशली लोग YouTube पे नहीं आ रहे हैं तो
Speaker A
अगेन आपके कंटेंट को धीरे-धीरे डेड कर दिया जाएगा। एंड इस बार YouTube को पता चल जाएगा कि यह क्रिएटर मास ऑडियंस को पुल नहीं कर सकता है। इसलिए अगली बार जब आप कोई वीडियो डालोगे तो आपको शुरू से
Speaker A
इंप्रेशन कम मिलेंगे एंड चैनल की ग्रोथ स्टैगेंट हो जाएगी। जबकि अगर यह सारे मैट्रिक्स अच्छे होते हैं तो आपके कंटेंट को और ज्यादा पुश किया जाएगा। आपके कंटेंट को नई ऑडियंस को दिखाया जाएगा। एंड ऐसे ही चैनल ग्रो होगा। आपको नया एल्गोरिदम
Speaker A
ज्यादा अच्छे से समझाने के लिए मैंने एक चार्ट भी बनाया है जिसमें आपको ये समझ आ जाएगा कि किन पुरानी चीजों पर ध्यान नहीं देना है एंड किन नए मैट्रिक्स पे ध्यान देना है। एक बार आप टाइम निकाल के या फिर
Speaker A
स्क्रीन को पॉज करके चार्ट को अच्छे से देखिए। लेकिन अभी भी एक मैन क्वेश्चन बाकी है कि ये करना कैसे है? इस नए एल्गोरिदम के साथ वायरल होना कैसे है? यह समझने के लिए मैंने नए एल्गोरिदम को लेवल्स में
Speaker A
बांट दिया है। एंड अब मैं एक-एक करके बताऊंगा कि कैसे आप हर लेवल से बाहर निकल सकते हैं। तो इसलिए कान खोल के सुनना क्योंकि वीडियो का सबसे इंपॉर्टेंट पार्ट यही है। लेवल वन है इनिशियल इंप्रेशन गेन। तो इसके लिए जो चीज आपको मेक श्योर करनी
Speaker A
है वो है कंसिस्टेंसी। अब मेरा यहां पे कंसिस्टेंसी से मतलब यह नहीं है कि वीडियो को फ्रीक्वेंटली अपलोड करना है बल्कि कंटेंट की कंसिस्टेंसी की बात कर रहा हूं मैं। यानी कि आपका कंटेंट किसी एक सब टॉपिक के अराउंड ही रिवॉल्व करना चाहिए
Speaker A
अगर आपका न्यू चैनल है तो। क्योंकि अगर आपकी सारी वीडियोस अलग-अलग टॉपिक्स पे जा रही है तो जेमिनाई को समझ ही नहीं आएगा कि आपकी ऑडियंस है कौन। एंड बजाय वो आपकी वीडियो के साथ एक्सपेरिमेंट करे। वो किसी
Speaker A
और क्रिएटर की वीडियो सजेस्ट करेगा जहां पे पता होगा कि वीडियो किसके लिए है एंड किस बारे में है। कंटेंट कंसिस्टेंसी को मेंटेन करके आप जेमिनाई को एक क्लियर इंस्ट्रक्शन दे पाओगे कि आपकी टारगेटेड व्यूअर्स कौन है एंड आपका कंटेंट किस बारे
Speaker A
में है। इसके बाद है लेवल टू। इनिशियल व्यूज गेन करना। अब इसके लिए जो चीजें आपको मेक श्योर करनी है वो यह है कि गलती से भी क्लिकबिट टाइटल्स मत बनाना। अगर 2026 में भी क्लिकबेट करने की कोशिश करोगे
Speaker A
तो चैनल डेड हो जाएगा। कोई फायदा नहीं है। जिसने पैकेजिंग पे क्लिक किया है उसे वीडियो में एक्सजेक्टली वही मिलना चाहिए जो उसने सोचा होगा। अगर ऐसा करते हो तो व्यूअर्स सेटिस्फेक्शन को आप इजीली अचीव कर लोगे। एंड यह चीज जेमिनाई समझ जाएगा।
Speaker A
इसके सिवाय आपको अपनी स्क्रिप्ट पे काम करना होगा। बजाय लंबी-लंबी स्क्रिप्ट्स लिखने के आपको एक चीज पे ध्यान देना है कि आप अपनी स्क्रिप्ट से कैसे ज्यादा से ज्यादा चीजें निकाल सकते हो। टेक्निकली आप ऑडियंस को बोर होने का मौका नहीं दे सकते।
Speaker A
ऐसा हुआ तो कंटेंट डेड हो जाएगा। अब स्क्रिप्टिंग को कैसे इंप्रूव करना है इसके ऊपर एक अलग डिटेल वीडियो बना के ही मैं आपको समझा पाऊंगा। तो अगर आपको वो वीडियो चाहिए तो कमेंट सेक्शन में लिख दीजिए। 5000 कमेंट होते ही मैं इस टॉपिक
Speaker A
को कवर कर लूंगा। जब आप इन सभी चीजों का ध्यान रखोगे तो आप लेवल टू को पार कर लोगे एंड आपकी वीडियोस पे व्यूज आना भी स्टार्ट हो जाएंगे। इसके बाद आता है लेवल थ्री गेटिंग वायरल। इस स्टेज पे 90% क्रिएटर्स
Speaker A
फेल होने वाले हैं। जिसकी वजह से वह कभी वायरल नहीं हो पाएंगे। क्योंकि इस स्टेज को पार करने के लिए आपको तीन चीजें चाहिए। सबसे पहला सीरीज ऑफ कंटेंट। आपको ऐसा कंटेंट बनाना है जिसके लिए ऑडियंस बार-बार आपके चैनल पे आए या फिर आपकी वीडियोस पे
Speaker A
आए एंड उसे देखे। फॉर एग्जांपल इस तरह की वन शॉप ट्यूटोरियल वीडियोस। ऑडियंस एक बार में इसे कभी भी कंप्लीट नहीं कर सकती है। इसलिए वो बार-बार इस कंटेंट पे आते हैं। या तो आप प्लेलिस्ट भी बना सकते हो जिससे
Speaker A
कि ऑडियंस आपकी ही वीडियोस देखते रहेंगे एक के बाद एक। दूसरी चीज है स्क्रिप्टिंग अगेन। इमोशनल रिटेंशन के लिए आप नॉर्मल स्क्रिप्ट नहीं लिख सकते। उसके लिए आपको पैटर्न ब्रेक्स सीखने होंगे, लूपिंग टेक्निक सीखनी होगी और एंड साथ ही अपने
Speaker A
वीडियोस के अंदर ऐसे एलिमेंट्स रखने होंगे जिसकी वजह से वह रिवाइंड करके आपकी वीडियो को देखे या फिर एटलीस्ट पॉज करके आपकी वीडियो को देखें। इसके लिए आप एडिटिंग का सहारा भी ले सकते हो बट प्रेफरेबल है कि
Speaker A
वीडियो के कंटेंट में ही कुछ ऐसा हो जो कि एक बार में ग्रेस्प ना किया जा सके। बेसिकली आपको स्पाइक्स इंक्रीस करने हैं अपनी वीडियो के अंदर। एंड तीसरीेंट चीज है कंसिस्टेंसी। सेशन टाइम आप सिर्फ तभी इंक्रीज कर सकते हो जब वो ऑडियंस को पता
Speaker A
हो कि यह बंदा एक सर्टेन दिन एक सर्टेन टाइम पे वीडियो डालता है। तभी ऑडियंस उस दिन उस टाइम पे आपके कंटेंट को खोलेगी एंड इससे आपको सेशन टाइम मिलेगा जो कि YouTube के एल्गोरिदम डिटेक्ट करेगा और आपको और
Speaker A
ज्यादा व्यूज देगा। आई नो आप लोग सोच रहे होंगे कि बेसिक तो समझ आ गया है लेकिन इन चीजों को अपने नीश में कैसे अप्लाई करूं?
Speaker A
तो सिंपल सा आंसर देता हूं। स्टार्ट मेकिंग शोज़। YouTube ने यह जो पूरा एल्गोरिदम शिफ्ट करा है वो इसलिए करा है क्योंकि YouTube पे अब टीवी वाली ऑडियंस ज्यादा हो गई है कंपेयर टू फोन वाली ऑडियंस। इसलिए YouTube अपने प्लेटफार्म को
Speaker A
अब टीवी का रिप्लेसमेंट बनाना चाहता है। एंड जैसे टीवी पे आपको पता होता था कि किस दिन किस चैनल पे किस टाइम पे कौन सा शो आएगा एंड कितनी देर के लिए आएगा। YouTube यही सर्टेनिटी अपने व्यूअर्स को देना
Speaker A
चाहता है YouTube के ऊपर। तो अगर आपको 2026 का एल्गोरिदम जीतना है तो वो करो जो टीवी ने किया था। वो करो जो बड़े-बड़े क्रिएटर्स राइट नाउ कर रहे हैं। आपने देखा ही होगा कि आशीष चंचलानी ने अपनी सीरीज
Speaker A
स्टार्ट करी है। ठगेश अपना शो रन करता है। राजमानी हर हफ्ते दो से तीन पॉडकास्ट डालता ही डालता है। फुकरा भी अपना शो स्टार्ट कर चुका है। कॉमेडियंस ने मिलके एक शो बना लिया है। एंड सो ऑन। टेक्निकली
Speaker A
हर एक क्रिएटर अब खुद को ऑप्टिमाइज कर रहा है टीवी वाली ऑडियंस के लिए। तो आपको भी बस वही करना है। एंड आप इज़ली एल्गोरिदम को बिल्ड कर लोगे। और यह चीज को करना कैसे है, उसका पूरा एक स्टेप बाय स्टेप रोड मैप
Speaker A
मैंने इस वीडियो के अंदर दे रखा है।
Topics:YouTube एल्गोरिदम 2026जेमिनाई AIसेशन टाइमइमोशनल रिटेंशनकंटेंट कंसिस्टेंसीवायरल वीडियोYouTube ग्रोथऑडियंस रिटेंशनCTRव्यूअर सेटिस्फेक्शन











