मौत के बाद क्या होता है? पैम रेनाल्ड्स के अनुभव और वैज्ञानिक शोधों के आधार पर आत्मा और आफ्टर लाइफ की सच्चाई।
Key Takeaways
- मौत के बाद की जिंदगी को लेकर वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोणों में मतभेद हैं।
- नियर डेथ एक्सपीरियंस एक वास्तविक और समान अनुभव है, लेकिन इसे आफ्टर डेथ एक्सपीरियंस नहीं माना जाता।
- आत्मा के अस्तित्व को साबित करने के लिए वैज्ञानिक प्रयास हुए हैं, लेकिन पूर्ण प्रमाण अभी तक नहीं मिले।
- मरते वक्त लोगों को अपने न जीए गए सपनों का सबसे ज्यादा अफसोस होता है।
- जिंदगी को पूरी तरह जीना और अपने सपनों को पूरा करना महत्वपूर्ण है।
What the video covers
- पैम रेनाल्ड्स का ऑपरेशन जिसमें उनका दिल और ब्रेन पूरी तरह बंद हो गया, लेकिन उन्होंने ऑपरेशन थिएटर को ऊपर से देखा।
- 1901 में डॉक्टर डंकन मैकडॉगर ने आत्मा के वजन को मापने का प्रयास किया, जिसमें 21 ग्राम वजन घटने का दावा किया गया।
- नियर डेथ एक्सपीरियंस (NDE) की खोज और रेमोनड मूडी की 1975 की किताब ने इस विषय को वैज्ञानिक चर्चा में लाया।
- NDE में आमतौर पर अंधेरी टनल, अपने शरीर के बाहर खड़े होने, मृत रिश्तेदारों से मिलने और रोशनी की अनुभूति शामिल होती है।
- साइंटिफिक आलोचनाओं और प्रयोगों के बावजूद आत्मा और आफ्टर लाइफ की अवधारणा पर विवाद जारी है।
- ऑस्ट्रेलिया की नर्स ब्राउनी वेयर के अनुसार, मरते वक्त लोगों को अपने जीवन के न जीए गए सपनों का पछतावा होता है।
- वीडियो में जीवन को पूरी तरह जीने और अपने सपनों को पूरा करने का संदेश दिया गया है।
- ध्रुव राठी ने YouTube ब्लूप्रिंट कोर्स के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए हैं।
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Speaker A
अगस्त 1991, अमेरिका के फिनिक्स शहर का बैरो न्यूरोलॉजिकल इंस्टिट्यूट। इस अस्पताल के ऑपरेटिंग रूम में एक 35 साल की औरत, पम रेनाल्ड्स, लेटी हुई है। पैम के ब्रेन में एक नस गुब्बारे की तरह फूल चुकी है और कभी भी फट सकती है।
Speaker A
[संगीत] डॉक्टर्स पैम से कह चुके हैं कि उनके पास अब बहुत कम समय बचा है। उनके बचने का सिर्फ एक ही रास्ता है। एक बेहद रिस्की ऑपरेशन। एक ऐसा ऑपरेशन जिसमें मशीनों के जरिए उनकी दिल की धड़कन पूरी तरीके से रोक दी जाएगी और फिर उनके सर को खोलकर ब्रेन से सारा खून बाहर निकाला जाएगा।
Speaker A
सुनने में काफी डरावना लगता है, लेकिन डॉक्टर्स के पास अब कोई ऑप्शन नहीं बचा था। वो तुरंत इस ऑपरेशन को शुरू करते हैं। पैम की आंखों पर टेप लगाई जाती है और दोनों कानों में छोटे-छोटे स्पीकर्स फिट होते हैं जो लगातार क्लिकिंग साउंड्स के जरिए ब्रेन का रिस्पांस नाप रहे हैं।
Speaker A
एक क्लिक से मशीन ऑन होती है और पम के दिल की धड़कन रुक जाती है। उनके ब्रेन से कोई रिस्पांस नहीं मिलता। कोई एक्टिविटी नहीं, कोई ब्रेन वेव्स नहीं। कुछ भी ऐसा नहीं जिसे डिटेक्ट करके कहा जा सके कि पम अभी भी जिंदा है। क्योंकि मेडिकल साइंस की हर डेफिनेशन के हिसाब से इस पॉइंट ऑफ टाइम तक पैम मर चुकी थी।
Speaker A
लेकिन दोस्तों, यह ऑपरेशन सक्सेसफुल होता है। पम वापस होश में आ जाती है और होश में आने के बाद पम कुछ ऐसा कहती है जिसे सुनकर वहां मौजूद सारे डॉक्टर्स दंग रह जाते हैं। पम कहती है कि वो यह पूरा ऑपरेशन ऊपर से देख रही थी।
Speaker A
[संगीत] वाय बॉडी बट आई डिड केयर। उन्होंने ऑपरेशन थिएटर में हुई हर एक चीज को बिल्कुल वैसे ही डिस्क्राइब किया जैसे वो असल में थी। उन्होंने उस हड्डी काटने वाली आरी की भी एग्जैक्ट शेप बताई जिससे उनके सिर का ऑपरेशन किया गया था।
Speaker A
आई रिमेंबर [संगीत] हैंड। इसके साथ ही उन्होंने सर्जरी के दौरान ऑपरेशन थिएटर में हुई बातचीत को भी दोहराया। वो जानती थी कि डॉक्टर्स आपस में क्या बोल रहे थे। ऑपरेशन के दौरान पैम ने कहा कि उस वक्त उन्हें कोई दर्द, कोई सफरिंग, डर या एंजायटी कुछ भी महसूस नहीं हुआ।
Speaker A
लेकिन यह सब उन्होंने ऊपर से होता हुआ देखा। यह सब होना एकदम इंपॉसिबल था क्योंकि उस वक्त उनका ब्रेन बंद था। आंखें सील्ड थीं और कान ब्लॉक्ड थे। तो फिर उन्होंने ऑपरेशन थिएटर में यह सब एक्चुअली में कैसे देखा और सुना?
Speaker A
यह बात पता चलते ही दुनिया भर में सनसनी फैल गई। अंडरगोइंग ब्रेन सर्जरी शी शी लेफ्ट हर बॉडी एक्चुअली हर ओन ऑपरेशन क्या वो पम की आत्मा थी जिसने यह सब होते हुए देखा था? क्या फाइनली हमें पता चल गया था मौत के बाद क्या होता है? आफ्टर लाइफ, यानी मौत के बाद की जिंदगी।
Speaker A
ये दुनिया के सबसे फैसनेटिंग और रहस्यमई सवालों में से एक है। इंडोनेशिया में 85%, अमेरिका में 70%, ब्राजील में 66% और इंडिया में भी 43% हम लोग मानते हैं कि मौत के बाद भी एक जिंदगी होती है।
Speaker A
दुनिया के हर मेजर रिलीजन में आत्मा की बात की गई है। स्वर्ग और नर्क की बात की गई है। तो सवाल यह है दोस्तों कि आखिर इसमें कितनी सच्चाई है? क्या साइंस को यहां पर आफ्टर लाइफ का कोई सबूत मिला है?
Speaker A
आइए समझने की कोशिश करते हैं आज के इस वीडियो में। तुम मर चुके हो। मजाक अच्छा करते हो। [हंसी] देखना चाहोगे? नीचे देखो।
Speaker A
नमस्कार दोस्तों, शुरुआत करते हैं साल 1901 से जब एक डॉक्टर ने आत्मा को तराजू पर तोलने की कोशिश की। अमेरिका के हैवर हिल शहर में जानेमाने सर्जन डॉक्टर डंकन मैकडॉगर चार साल से यह साबित करने की कोशिश कर रहे थे कि आत्मा असल में एक्जिस्ट करती है।
Speaker A
उनका लॉजिक सिंपल था कि अगर आत्मा सच में होती है तो उसे स्पेस ऑक्यूपाई करना चाहिए और जो चीज स्पेस ऑक्यूपाई करती है उसका वजन भी होगा। उन्होंने सोचा कि क्यों ना एक इंसान का ठीक मौत के वक्त वजन तोला जाए और जब आत्मा उसका शरीर छोड़ रही होगी, अगर जरा सा भी वजन गिरता है तो यह वजन आत्मा का होगा।
Speaker A
मैकडॉगल ने यह पूरा एक्सपेरिमेंट तैयार किया। उन्होंने एक बड़े तराजू पर पूरी चारपाई फिट कराई और उस पर टीबी के एक मरते हुए मरीज को लेटा दिया। और जैसे ही उस मरीज की मौत हुई, तराजू की सुई नीचे गिरी और शरीर का वजन अचानक से लगभग 21 ग्राम कम हो गया।
Speaker A
इस 21 ग्राम को आत्मा का वजन बताया गया और यह खबर दुनिया भर में फैल गई। यह बात आज तक भी पॉप कल्चर में जिंदा है। बॉलीवुड ने तो 21 ग्राम नाम से एक पूरी मूवी भी बना डाली। से 21 ग्राम मोमेंट।
Speaker A
मैकडगल ने कुल छह मरीजों पर यह सेम एक्सपेरिमेंट किया था और 1907 में उन्होंने अपनी फाइंडिंग्स अमेरिकन मेडिसिन जर्नल में पब्लिश करी। लेकिन स्टडी पब्लिश होते ही इस पर सवाल उठने लगे।
Speaker A
क्रिटिक्स ने कहा कि वजन में यह गिरावट पसीने और सांस में मौजूद वाटर वेपर के इवापोरेट होने की वजह से थी। क्रिटिक्स कहने लगे कि पक्का यही कारण होगा एक्चुअली।
Speaker A
तो क्रिटिक्स को शांत करने के लिए मैकडॉगल ने अपने बार में तराजू निकाला और 15 कुत्तों पर यही एक्सपेरिमेंट रिपीट किया। पता है क्या रिजल्ट निकला? एक भी कुत्ते की मौत के बाद उसका वजन नहीं गिरा।
Speaker A
और यहां पर मैकडॉगल ने वो किया जो किसी भी साइंटिस्ट को कभी नहीं करना चाहिए। आत्मा के वजन की अपनी थ्योरी पर रिथिंक करने की जगह, दोबारा सोचने की जगह, मैकडॉगल ने कहा कि बाइबल के हिसाब से जानवरों में आत्मा नहीं होती है।
Speaker A
इसीलिए कुत्तों का मौत के वक्त वजन नहीं गिरता। कुछ क्रिश्चियन लोगों ने कहा वाह, बढ़िया थ्योरी है। बिल्कुल लॉजिकल सेंस की बात कही है और इस बात को दोस्तों यहीं पर छोड़ दिया गया।
Speaker A
लगभग 70 साल तक साइंस इस सवाल से दूर रही। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने इसे फिर से चर्चा में ला दिया। साल 1965, यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के एक स्टूडेंट रेमोनड मूडी की मुलाकात एक प्रोफेसर से होती है।
Speaker A
यह प्रोफेसर उनको बताते हैं कि उनकी दो बार मौत हो चुकी है और साथ ही यह बताते हैं कि मरने के बाद उनके साथ क्या हुआ था।
Speaker A
फिर कुछ साल बाद जब मूडी खुद जाकर प्रोफेसर बन गए तो उनको एक स्टूडेंट ने अपनी दादी के बारे में लगभग सिमिलर सी कहानी सुनाई। दो अलग लोगों की एक जैसी सी कहानी थी।
Speaker A
उन्होंने एक जैसी सी चीज एक्सपीरियंस करी थी। मूडी के कान खड़े हो गए यह देखकर। पेशेंट्स ऑलमोस्टली ड्रामेटिक एक्सपीरियंसेस देनी साइकट्रिक लिटरेचर साइट्रिक टेक्स्ट बुक्स द मेडिकल लिटरेचर गिव मी एनी गोइंग पेशेंट।
Speaker A
उन्होंने और जांच करनी शुरू करी। मूडी ऐसे केस ढूंढने लगे और उन्हें इकट्ठा करने लगे। कई सालों की मेहनत के बाद जाकर उन्होंने लगभग ऐसे 150 केस इकट्ठे कर लिए और अपनी रिसर्च पर बाद में 1975 में जाकर उन्होंने एक किताब लिखी, लाइफ आफ्टर [संगीत] लाइफ, जिसमें ऐसे एक्सपीरियंसेस को उन्होंने एक नाम दिया, नियर डेथ एक्सपीरियंस, शॉर्ट फॉर्म एनडीई।
Speaker A
अब साइंटिस्ट का मानना है कि कोई भी मरकर वापस लौट नहीं सकता। इसलिए जो भी लोग दावा कर रहे थे कि उनकी मौत हो गई और वह फिर वापस आ गए, उसे नियर डेथ एक्सपीरियंस कहा जाने लगा, ना कि आफ्टर डेथ एक्सपीरियंस।
Speaker A
यह फ्रेज उनकी किताब के बाद काफी पॉपुलर हुआ और आज की डेट तक इसे इस्तेमाल किया जाता है। सबसे शॉकिंग बात यह है दोस्तों कि इन सभी नियर डेथ एक्सपीरियंसेस की कहानी लगभग एक जैसी थी।
Speaker A
पहले मरीज डॉक्टर को यह कहते हुए सुनता है कि यह मर चुका है। फिर उसे एक लंबी अंधेरी टनल से गुजरने का एहसास होता है। इसके बाद इंसान अपने ही शरीर के बाहर खड़ा होता है और ऊपर से डॉक्टर्स को अपने शरीर पर सीपीआर करते हुए देखता है।
Speaker A
थोड़ी देर बाद उसे अपने मरे हुए रिश्तेदार और दोस्त दिखने लगते हैं जो उससे मिलने और उसकी मदद करने आए [संगीत] हैं। और फिर एक रोशनी आती है। एक बीम ऑफ लाइट। मानो कि कोई दूसरे यूनिवर्स का जीव हो जो सिर्फ रोशनी से बना हो।
Speaker A
इसके बाद इंसान की पूरी जिंदगी एक पल में उसके सामने से गुजरती है। सोच कर देखो अगर आपकी पूरी जिंदगी एक पल में आपकी आंखों के सामने से गुजर जाए तो आपको क्या दिखाई देगा?
Speaker A
ऑस्ट्रेलिया की एक पालीटिव केयर नर्स ब्राउनी वेयर ने सालों तक मरते हुए लोगों से उनका सबसे बड़ा रिग्रेट पूछा। कौन सी ऐसी चीज थी जो उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में सबसे ज्यादा रिग्रेट करी? और जानते हो दोस्तों, सबसे कॉमन जवाब क्या था? कि काश मैंने वो जिंदगी जी होती जो मैं जीना चाहता था, ना कि वो जो दूसरे मुझसे एक्सपेक्ट करते थे।
Speaker A
[संगीत] एक्सपेक्टेड एंड आई विश टू बी हैप्पी। मरते वक्त लोगों को अपनी गलतियां याद नहीं आती। याद आती हैं वो चीजें जो उन्होंने कभी ट्राई ही नहीं करी थीं।
Speaker A
इसलिए एक छोटा सा एडवाइस है दोस्तों। जिंदगी में जितनी अच्छी चीजें ट्राई कर सको, करो। नई स्किल्स सीखो। एक्सपेरिमेंट करो। अपने सपनों को सीरियसली लो।
Speaker A
और यहां अगर आपने कभी सपना सोचा है YouTube बनने का तो मैं आपको बता सकता हूं अपने एक्सपीरियंस से दोस्तों कि YouTube एक ऐसा प्लेटफार्म है जो आपका एक सपना पूरा करके आपके बाकी सपने भी पूरे कर सकता है। फाइनेंसियल फ्रीडम, अपनी पसंद का काम और लाखों लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का इन्फ्लुएंस।
Speaker A
इसलिए यही चीज आपको सिखाने के लिए है। मैंने इस पर पूरा एक 7 घंटे का कोर्स बनाया है। द YouTube ब्लूप्रिंट। यह कोई जेनेरिक सा कोर्स नहीं है। इसमें मैं आपको स्टेप बाय स्टेप सिखाता हूं कि एक लॉन्ग टर्म में सक्सेसफुल YouTube चैनल कैसे बनाया जाए।
Speaker A
वीडियो आइडियाज कहां से लाएं, अपनी स्टोरी को स्क्रिप्ट में कैसे बदलना है, कैमरा के सामने कॉन्फिडेंटली कैसे बोलना है और YouTube के एल्गोरिथम को कैसे क्रैक किया जाए? मैंने अपने 12 साल के एक्सपीरियंस में जो भी कुछ सीखा है, सब कुछ इसमें सिखाया है।
Speaker A
और जिन लोगों ने इस कोर्स [संगीत] को लिया है, उनकी एवरेज रेटिंग 4.9 आउ।
Speaker A
कैसे क्रैक किया जाए? मैंने अपने 12 साल के एक्सपीरियंस में जो भी कुछ सीखा है, सब कुछ इसमें सिखाया है। और जिन लोगों ने इस कोर्स [संगीत] को लिया है, उनकी एवरेज रेटिंग 4.9 आउट ऑफ फाइव रही है। उनके कुछ
Speaker A
रिव्यूज आप देख सकते हो। मैंने आज ही अपना आपका यह कोर्स फिनिश किया है। बहुत अच्छा लगा। इसमें मैंने काफी चीजें सीखी हैं। जैसे आइडियाज फॉर नीच टॉपिक। ऑल द एस्पेक्ट्स व्हिच कैन बी देयर फॉर अ YouTube आर देयर इन टर्म्स ऑफ़ हाउ टू
Speaker A
ग्रो, हाउ टू अर्न, व्हाट आर द स्ट्रेसेस, व्हाट आर द चैलेंजेस। एंड द बेस्ट पार्ट वाज़ कि इस कोर्स में पूरी तरह से आपने अपनी लाइफ जर्नी को कनेक्ट किया है। मतलब जितने भी एग्जांपल्स आपने दिए हैं वो आपके खुद के एग्जांपल्स
Speaker A
थे। यू आर अमंग द बेस्ट इन द बिज़नेस। व्हिच इज व्हाई आई डिसाइडेड टू लर्न फ्रॉम अ यंग टीचर लाइक यू। मुझे नहीं लगता इस कोर्स को खरीदने के बाद मुझे कोई और कोर्स खरीदने की जरूरत पड़ेगी। इस कोर्स से एक चीज मेरे को सीखने को मिला
Speaker A
जो मैं काफी सालों से कंफ्यूज था यह सब चीज लेके। फर्स्ट एंड ऑल मेरा नीश, सेकंड कैसे क्या करना, कैसा टाइमिंग स्पेशली आपका KineMaster हैक जो है उसका वो मुझे बहुत अच्छा लगा। सबसे बढ़िया बात यह है कि आपको कोई महंगी
Speaker A
इक्विपमेंट नहीं चाहिए शुरू करने के लिए। शुरुआत के लिए सिर्फ आपका स्मार्टफोन काफी है और उसी पर्सपेक्टिव से इस कोर्स को बनाया गया है। आप में से पहले हजार लोगों को एक स्पेशल डिस्काउंट भी देना चाहूंगा मैं। कूपन कोड इस्तेमाल कीजिए लाइव 42
Speaker A
Lifie42 42% ऑफ पाने के लिए। जॉइ करने का लिंक नीचे डिस्क्रिप्शन में या फिर इस क्यूआर कोड में मिल जाएगा। अंत में इंसान एक तरह के बैरियर या बॉर्डर पर पहुंचता है जिसे क्रॉस करते ही वह दूसरी दुनिया में चला जाएगा लेकिन उसे
Speaker A
वापस आना पड़ता है क्योंकि उसकी मौत का समय नहीं आया होता। कमाल की बात यह है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग रिलीजंस को फॉलो करने वाले लोग सब यही एक जैसी सी कहानी सुनाते हैं जिन्होंने यह
Speaker A
नियर डेथ एक्सपीरियंस का अनुभव किया हो। इंडिया में भी आफ्टर लाइफ और नियर डेथ एक्सपीरियंसेस के केसेस सामने आ चुके हैं। इनमें से एक बड़ा इंटरेस्टिंग केस है छज्जू बनिया का। छज्जू की 1990 के दशक में बुखार से मौत हो गई थी और उसके रिश्तेदार
Speaker A
उसके अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगे थे कि तभी छज्जू जिंदा हो जाता है और जिंदा होकर उसने जो कहानी सुनाई वह हैरान करने वाली थी। छज्जू ने दावा किया कि मौत के बाद चार काले दूत उसके पास आए और उसे
Speaker A
यमराज के पास बैठा दिया। वहां पर एक बूढ़ी औरत भी थी जिसके हाथ में पेन था और बहुत सारे क्लर्क्स थे जिनके सामने बहुत सारी किताबें रखी हुई थी। इनमें से एक क्लर्क ने कहा कि हमें छज्जू बनिया नहीं चाहिए।
Speaker A
हमें छज्जू कुम्हार चाहिए। इसे वापस धकेल दो और दूसरे को ले आओ। इसकी अभी कुछ जिंदगी बाकी है। छज्जू ने उन जीवों से गिड़गिड़ाकर कहा कि उसे वहीं कोई काम दे दो पर वापस ना भेजो। पास ही एक ऊंची
Speaker A
कुर्सी पर सफेद दाढ़ी में यमराज बैठे थे। पर छज्जू की एक ना सुनी गई। उसे वापस धकेल दिया गया और वो जिंदा हो उठा। ऐसी ही एक और कहानी दुर्गा जाटव की है। दुर्गा जाटव को टाइफाइड हुआ था। हफ्तों की बीमारी के
Speaker A
बाद एक दिन उनका शरीर ठंडा पड़ गया और उनके घर वालों ने मान लिया कि दुर्गा अब नहीं रहे। लेकिन कुछ देर बाद दुर्गा को वापस सांस आती है। उन्होंने अपने घर वालों को बताया कि 10 लोग उन्हें पकड़ कर किसी
Speaker A
और ही दुनिया में ले गए। उन्होंने भागने की कोशिश की तो उन लोगों ने घुटनों के नीचे उनकी टांगे काट डाली ताकि वह भाग ना सके और फिर उन्हें एक ऐसी जगह लाया गया जहां मेज और कुर्सियां लगी थी और 40-50
Speaker A
लोग बैठे [संगीत] थे। उन्होंने दुर्गा के कागज देखे और चौंक कर कहा इनका नाम तो हमारी लिस्ट में है ही नहीं। इसे यहां क्यों लाए हो? वापस ले जाओ। इस पर दुर्गा ने कहा कि वापस कैसे जाऊं? मेरे तो पैर ही
Speaker A
नहीं है। तब उसके सामने कई जोड़ी टांगे रखी गई और दुर्गा ने अपनी टांगे पहचानी और उन्हें वापस जोड़ दिया गया। जाते-जाते उन्हें हिदायत दी गई कि अपने घुटनों को मोड़ना मत वरना वह वापस जुड़ेंगे नहीं। इस कहानी की सबसे शौकिंग बात यह है कि दुर्गा
Speaker A
के होश में आने के कुछ ही दिन बाद उनकी बहन और एक पड़ोसी ने देखा कि दुर्गा के घुटनों पर गहरे निशान उभर आए हैं। ठीक वहीं पर जहां उनके मुताबिक उनकी टांगे काटी गई थी। पहले वहां ऐसे कोई निशान नहीं
Speaker A
थे। [हंसी] इंडिया में आफ्टर लाइफ की ऐसी कई कहानियां सामने आई हैं। इनमें यमदूत किसी इंसान को पकड़ कर ले जाते हैं। फिर उनको किसी एक किताब वाले आदमी के सामने पेश किया जाता है जो हर इंसान का हिसाब किताब रखता है।
Speaker A
फिर पता चलता है कि कोई गलती हो गई और गलत आदमी को उठा लाया गया। इसलिए फिर उसे वापस धकेल दिया जाता है। अब सुनने में दोस्तों यह रिलीजियस बुक से उठाई गई किसी कहानी जैसी लगती है। हिंदू धर्म में मौत के बाद
Speaker A
की यात्रा का गरुड़ पुराण में जिक्र है। इसके मुताबिक यमलोक पहुंचने पर चित्रगुप्त मिलता है जो पूरी जिंदगी का लेखाजोखा रखता है। इसी खाते को देखकर यमराज तय करते हैं कि आगे किसी के साथ क्या होगा? अब सवाल यह
Speaker A
है कि इन लोगों की कहानियों में आखिर कितनी सच्चाई है? इनकी बातों पर कितना यकीन किया जा सकता है। साइंस धार्मिक किताबों को तो नहीं मानता और ना ही इन एनेक्टिकोडल केसेस को मानता है। साइंस के लिए यह सारी कहानियां सिर्फ एक कलेक्शन है
Speaker A
जिसे वेरीफाई नहीं किया जा सकता। लेकिन फिर दोस्तों एक स्टडी सामने आती है। दिसंबर 2001 में नियर डेथ एक्सपीरियंसेस को लेकर एक स्टडी द लैंडसेट जर्नल में पब्लिश हुई। ये साइंस की सबसे रेपुटेड जर्नल्स में से एक है। इस स्टडी में 1988
Speaker A
से 1992 के बीच नेदरलैंड्स के हॉस्पिटल्स में उन 344 मरीजों का इंटरव्यू किया गया जो कार्डियाक अरेस्ट के बाद क्लीनिकली मर चुके थे और उन्हें सीपीआर देकर दोबारा जिंदा किया गया। हर एक मरीज का यहां पूरा मेडिकल रिकॉर्ड था और इंटरव्यू भी वापस
Speaker A
जिंदा होने के सिर्फ 5 दिनों के अंदर-अंदर लिया गया। इन 344 में से 62 मरीजों ने यानी 18% ने क्लीनिकली डेड होने के दौरान आफ्टर लाइफ देखने का दावा किया। लेकिन आफ्टर लाइफ पर यकीन करने का मतलब है कि यह
Speaker A
मानना कि मौत के बाद भी कॉन्शियसनेस हमारी जिंदा रहती है। और यह बात मेडिकल साइंस के बहुत बेसिक एजम्पशन को चैलेंज करती है। यहीं पर एक कांसेप्ट आता है जिसे डिपेंडेंस थीसिस कहते हैं। इसके मुताबिक जिंदगी भर हमारा हर मेंटल एक्सपीरियंस
Speaker A
ब्रेन पर डिपेंड करता है। कॉन्शियसनेस, हमारी मेमोरीज, हमारी यादें, हमारे थॉट्स, हमारी फीलिंग्स सब ब्रेन एक्टिविटी के साथ घटते बढ़ते हैं। तो यह मानने की कोई वजह नहीं है कि ठीक मौत के बाद ब्रेन पर ये डिपेंडेंस अचानक से खत्म हो जाती है। यानी
Speaker A
कि बिना ब्रेन के कोई एक्सपीरियंस हो, [संगीत] कोई कॉन्शियसनेस हो, ऐसा हो नहीं सकता। लेकिन अगर ऐसा है तो ये टनल खुद की ही बॉडी को ऊपर से देखना यह सब कैसे पॉसिबल है? साइकोलॉजिस्ट सूजन ब्लैक मोर इस पूरी बहस को एक लाइन में फ्रेम करती
Speaker A
है। क्या नियर डेथ एक्सपीरियंसेस मौत के बाद की जिंदगी की झलक है या फिर मरते हुए ब्रेनेंस के विजंस हैं? सोच कर देखिए जो भी लोग नियर डेथ एक्सपीरियंसेस बताते हैं उनमें कुछ चीजें लगभग कॉमन होती हैं। एक
Speaker A
टनल गहरी शांति खुद के ही शरीर को बाहर से देखना और उनकी पूरी जिंदगी का एक रिवु। [संगीत] जो लोग इसमें यकीन करते हैं, वह लोग इसे आफ्टर लाइफ का सबसे बड़ा सबूत बताते हैं। उनका लॉजिक सिंपल है। सारे
Speaker A
लोगों के बीच में सिमिलर एक्सपीरियंसेस हो रहे हैं। इसका मतलब यह सब असली में है। [संगीत] [संगीत] [संगीत] लेकिन डॉक्टर सूजन ब्लैकमोर के मुताबिक यही कंसिस्टेंसी प्रूफ करती है कि ये सब एक मरते हुए इंसानी ब्रेन के विज़ंस हैं।
Speaker A
वो टनल जो मरते हुए लोगों को दिखती है वो हमारे ब्रेन सेल्स का कमाल है। हमारे ब्रेन में देखने का काम विजुअल कॉर्टेक्स करता है और उसकी वायरिंग की एक खास बात है। उसमें सेंटर विज़न के लिए बहुत ज्यादा
Speaker A
सेल्स होते हैं और एजेस पे जो हमारा विज़न होता है उसके लिए कम सेल्स होते हैं। ऐसे में जब नियर डेथ एक्सपीरियंसेस के केस में ऑक्सीजन की कमी होती है तो ये सेल्स रैंडमली फायर करने लगते हैं। और बीच में
Speaker A
जहां ज्यादा सेल्स मौजूद है वहां ज्यादा रोशनी दिखती है और किनारों की तरफ जहां सेल्स कम है वहां रोशनी फेड हो जाती है। डॉक्टर ब्लैकमोर के अनुसार यही चीज टनल जैसी दिखती है। टिपिकली यू हैव अ डार्क टनल मूविंग थ्रू अ
Speaker A
डार्क टनल टुवर्ड्स अ ब्राइट लाइट टू बी लुकिंग एट द वर्ल्ड फ्रॉम अ पोजीशन आउटसाइड योर बॉडी एंड मेन वाचिंग थिंग्स हैपनिंग टू द बॉडी। उन्होंने कंप्यूटर पर इस रैंडम फायरिंग की एक सिमुलेशन भी बनाई। जिसके बाद स्क्रीन
Speaker A
पर टनल जैसी शेप दिखने लगी। इसी तरह जो गहरी शांति और खुशी महसूस होती है उसके लिए जिम्मेदार हैं एंडोरफिंस और मॉर्फिन जो एक्सट्रीम स्ट्रेस में रिलीज होते हैं और पीस और वेल बीइंग की फीलिंग्स देते हैं। जो पूरी जिंदगी एक पल में दिख जाती
Speaker A
है वो इसलिए होता है क्योंकि एंडोरफिनस टेंपोरल लोब और लिंबिक सिस्टम में सीजर्स और रैंडम एक्टिवेशन कॉज करते हैं। यह ब्रेन का वो हिस्सा है जहां पर मेमोरी स्टोर होती है। इसके अलावा आउट ऑफ बॉडी एक्सपीरियंस जिसमें ऐसा लगता है कि आप
Speaker A
अपने शरीर से बाहर आ गए हो और दूर से ही अपने शरीर को देख रहे हो। कुछ साइंटिस्ट बताते हैं कि ये ब्रेन का ब्रेकडाउन से डील करने का तरीका होता है और इसका सबूत भी मिला एक ऐसे एक्सपेरिमेंट में जिसका
Speaker A
आफ्टर लाइफ और नियर डेथ एक्सपीरियंसेस से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था। फाइटर जेट्स असल में जब फाइटर पायलट्स बहुत तेजी से मैनुअर्स करते हैं तो ग्रेविटेशनल फोर्स की वजह से उनका हार्ट खून और ऑक्सीजन ब्रेन तक नहीं पहुंचा पाता
Speaker A
और पायलट्स बेहोश हो जाते हैं। इस कंडीशन को जीएलओसी कहा जाता है। फुल फॉर्म जी फोर्स इंड्यूस्ड लॉस ऑफ कॉन्शियसनेस। इसे समझने के लिए यूएस नेवी के जेम्स विनरी ने वॉलंटियर्स को एक ह्यूमन सेंट्रीफ्यूज में घुमा घुमा कर घुमा घुमाकर बार-बार
Speaker A
कंट्रोलोल्ड तरीके से बेहोश किया। सेंट्रीफ्यूगल मशीन तो पता ही होगी आपको क्या होती है। तो ह्यूमन सेंट्रीफ्यूगल एक तरीके की बड़ी सेंट्रीफ्यूगल मशीन टाइप बनाई गई जिसमें एक रोटेटिंग डिवाइस था और लोगों को घुमाया जाता था। तो जब ये लोग
Speaker A
बेहोश हुए इन वॉलंटियर्स ने अपना एक्सपीरियंस बताया और इनका एक्सपीरियंस बिल्कुल वैसा ही था जैसा नियर डेथ एक्सपीरियंसेस में होता है। तो इंटरेस्टिंग चीज यह थी कि यहां पर कोई मर नहीं रहा था। ना ही कोई दूसरी दुनिया का
Speaker A
दरवाजा खुल रहा था। बस एक घूमती हुई मशीन थी जिसके कारण दिमाग तक खून और ऑक्सीजन [संगीत] पहुंचना बंद हो गया। वही चीज जो मरते हुए लोगों के साथ अक्सर होती है। आज के दिन दोस्तों नियर डेथ एक्सपीरियंसेस
Speaker A
में जो होता है उसे डाइंग ब्रेन हाइपोथेसिस से ज्यादा अच्छे से एक्सप्लेन किया जा सकता है। अब जो इंडिया वाले केसेस हैं उनको लेकर स्केप्टिक्स का जवाब है कि यह साबित करता है कि पूरा नियर डेथ एक्सपीरियंस हमारे कल्चर और हमारी
Speaker A
एक्सपेक्टेशंस का गुना हुआ है। अब्सोलुटली हैव अ बुक द नेम इज नॉट इन इट दे गॉट द नेम रोंग दे ऑल ऑफ़ दैट इज कल्चरली डिपेंडेंट अगर बचपन से आप यमराज और चित्रगुप्त की कहानियां सुन रहे हो तो आपको मरते वक्त भी
Speaker A
यमदूत ही दिखेंगे। इस पूरी मिस्ट्री में दोस्तों आज के दिन साइंस नियर डेथ एक्सपीरियंस की लगभग हर चीज को एक्सप्लेन कर सकती है। लेकिन कुछ ऐसी चीजें हैं जिनका साइंस के पास भी कोई जवाब नहीं है। और यह समझने के लिए हमें पैम रेन्ड्स की
Speaker A
कहानी पर वापस जाना होगा। याद कीजिए पम रेनाults की सर्जरी के दौरान कंडीशंस आंखों पर टेप बंधी थी। कान स्पीकर से ब्लॉक्ड थे। बॉडी टेंपरेचर 16 डिग्रीज था। दिल काम ही नहीं कर रहा था और ब्रेन में सारी एक्टिविटीज बंद हो चुकी थी।
Speaker A
[संगीत] पैम ने बताया कि एक गूंजती हुई सी आवाज उन्हें खींच कर शरीर से बाहर ले आई और वो सर्जन के कंधे के पास से ऑपरेशन देखने लगी। उन्हें वो हड्डी काटने वाली आरी साफ दिखाई दी जो उनके हिसाब से एक इलेक्ट्रिक
Speaker A
टूथब्रश जैसी दिख रही थी। [संगीत] उन्हें किसी महिला की भी आवाज सुनाई दी जो कह रही थी कि वेंस और आर्टरीज बहुत छोटी [संगीत] है और फिर उन्हें रोशनी का एक छोटा सा पॉइंट दिखा जो उन्हें अपनी तरफ खींचने
Speaker A
लगा। उस रोशनी [संगीत] में उन्हें अपनी मरी हुई दादी, अंकल और बहुत से ऐसे लोग दिखे जो रोशनी के बने हुए थे। आखिर में उनके अंकल ने [संगीत] उन्हें धक्का देकर जबरदस्ती उनके शरीर में वापस भेज दिया और
Speaker A
वो दूसरे इलेक्ट्रिक शॉक पर शरीर में वापस गिर गई। अब इसमें से रोशनी का वो छोटा सा पॉइंट दिखना, दादी और अंकल दिखना, आउट ऑफ बॉडी एक्सपीरियंस महसूस करना यानी खुद की ही बॉडी को ऊपर से देखना। इन सब चीजों का
Speaker A
साइंस के पास जवाब है। लेकिन वो जो बोन सॉ की एग्जैक्ट शेप बताई गई है, जो आरी बाहर रखी थी और वो जो महिला की आवाज थी, जो कार्डियोवस्कुलर टीम के हेड की आवाज थी और सबसे बड़ी चीज उन्हें कैसे पता लगा कि
Speaker A
उन्हें दूसरी बार इलेक्ट्रिक शॉक दिया गया तब जाकर वो जिंदा हुई। खुद ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर स्पेटसलर को भी याद नहीं था कि पैम को जिंदा करने के लिए दो बार इलेक्ट्रिक शॉक्स दिए गए थे। लेकिन यह चीज
Speaker A
पैम को पता थी। बीइंग ट्वाइस गिव [संगीत] मी डिटेल्स नो। इसका एक एक्सप्लेनेशन दिया गया कि पम को ऑपरेशन के बीच में हल्का सा होश आया और उन्होंने आसपास की चीजों को देखकर और आवाजों को सुनकर एक पिक्चर बना ली। लेकिन
Speaker A
उनकी आंखों पर तो टेप लगी थी। दोनों कानों में स्पीकर लगे हुए थे जो हर सेकंड में 11 से 33 बार उतनी ही तेज आवाज कर रहे थे जितनी एक सबवे ट्रेन करती है। इतनी तेज आवाज में ऑपरेशन के दौरान हुई बातचीत
Speaker A
सुनना वो भी एक मरीज के लिए लगभग नामुमकिन है। इसके अलावा ऑपरेशन शुरू होने तक सारे इंस्ट्रूमेंट्स पैकेट्स में रखे हुए थे। तो पम के ऑपरेशन के लिए आते वक्त इन्हें देखने की कोई संभावना भी नहीं थी। खुद पैम
Speaker A
का ऑपरेशन करने वाले डॉ. रॉबर्ट स्पेसलर ने 2007 में एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें नहीं समझ आता कि पम ने ऑपरेशन के दौरान की बातें कैसे बताई। साइंटिफिक नजरिए से उनके पास इसका कोई एक्सप्लेनेशन नहीं है। यहां सही में कुछ ऐसी मिस्ट्रीज
Speaker A
हैं दोस्तों जिनका जवाब हमारे पास नहीं है। साइंटिस्ट ने आफ्टर लाइफ को कंक्लूसिवली प्रूफ करने के लिए एक और स्टडी करी थी। डॉक्टर सैम पार्निया ने अवेयर नाम की ये स्टडी करी। इसका डिजाइन सिंपल था। हॉस्पिटल्स के उन इलाकों में
Speaker A
जहां कार्डियक अरेस्ट सबसे ज्यादा होते हैं। छत के पास ऊंची शेलफ्स लगाई गई और हर शेलफ के ऊपर एक इमेज रखी गई जो सिर्फ ऊपर से यानी छत की तरफ से नीचे देखने [संगीत] पर ही दिख सकती थी। कई हॉस्पिटल्स में ऐसे
Speaker A
लगभग 1000 शेलफ्स लगाई गई। लॉजिक साफ था अगर नियर डेथ एक्सपीरियंस के दौरान लोग सच में छत के पास अपना शरीर देखते हैं तो किसी ना किसी को कोई यह इमेज भी दिखेगी। लेकिन अगर यह विज़ सिर्फ दिमाग में ही आ
Speaker A
रहे हैं तो वो इस इमेज के बारे में नहीं बता पाएंगे। 4 सालों में अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रिया के 15 हॉस्पिटल्स में कार्डियाक अरेस्ट से जुड़े 2000 से ज्यादा लोगों पर यह स्टडी की गई। जिनमें से 101 मरीजों ने
Speaker A
इंटरव्यूज के सारे स्टेजेस पूरे किए। इन 101 में से नौ ने नियर डेथ एक्सपीरियंस होने का दावा किया और दो के पास अपने कमरे के माहौल की डिटेल्ड यादें थी। लेकिन इस स्टडी का भी कोई कंक्लूसिव एविडेंस नहीं
Speaker A
निकल पाया। इन दो में से एक इंसान इतना बीमार था कि उसका इंटरव्यू ही नहीं किया जा सकता। और दूसरे मरीज को जब कार्डियक अरेस्ट आया तो वहां पर कोई शेलफ नहीं लगाई गई थी उस वाले कमरे में। सच बात यह है
Speaker A
दोस्तों कि कुछ मिस्ट्रीज आज के दिन भी मिस्ट्रीज है। साइंस के पास लाइट टनल्स का एक्सप्लेनेशन है। अपने मरे हुए रिश्तेदारों को देखने का एक्सप्लेनेशन है। खुद की ही बॉडी से बाहर देखने का भी एक्सप्लेनेशन है। लेकिन एक्सप्लेन कर देना
Speaker A
और जवाब मिल जाना ये दो अलग चीजें हैं। पैम रेन्ट्स जैसे केसेस आज भी इस पूरी थ्योरी की दीवार में एक क्रैक की तरह मौजूद है। जिनका जवाब ना बिलीवर्स के पास है ना स्केप्टिक्स के पास। हालांकि मैं
Speaker A
हमेशा की तरह कहूंगा एक्स्ट्राऑर्डिनरी क्लेम्स रिक्वायर एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी एविडेंस और आफ्टर लाइफ से ज्यादा एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी चीज कोई हो नहीं सकती। इसलिए किसी चीज का अनएक्सप्लेंड होना आफ्टर लाइफ का सबूत नहीं होता। एक जमाने में बिजली गिरना भी अनएक्सप्लेंड था। उसका
Speaker A
जवाब भगवान के गुस्से से नहीं फिजिक्स से निकला। मरने के बाद एक्चुअली में क्या होता है? यह दुनिया का अकेला ऐसा सवाल है जिसका जवाब हर एक इंसान को एक दिन खुद मिल जाएगा। बस बात यह है कि उसको बताने के लिए
Speaker A
आज तक कोई वापस आ नहीं पाया है। दुनिया की भलाई शायद इसी में है कि हम स्वर्ग या नर्क का इंतजार करने की जगह अपनी जिंदगी को एक इकलौते मौके के तौर पर देखें कि इसके बाद शायद कुछ नहीं। ऐसा करने से हम
Speaker A
शायद फोकस कर पाएंगे अपनी ही धरती को स्वर्ग बनाने पर क्योंकि यही एक चीज है जो हमें पता है कि फॉर शोर एकिस्ट करती है। आपकी यह जिंदगी, यह जमीन, यह मिट्टी, हमारा प्लनेट अर्थ। अब अगर आप यह जानना चाहते हो कि जिंदगी की
Speaker A
शुरुआत कैसे हुई? आखिर लाइफ कहां से निकल कर आई? [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्या इसके पीछे कोई एलियंस थे या भगवान ने ऊपर से टपका दी धरती पर लाइफ? यह एक ऐसा सवाल है दोस्तों जिसका जवाब आज के दिन काफी हद
Speaker A
तक हम जानते हैं। इस पूरे टॉपिक पर मैंने यह वीडियो बनाया है जो कि इस चैनल पर मेरे वन ऑफ द मोस्ट फेवरेट वीडियोस में से है। यहां क्लिक करके देख सकते हो। और YouTube कोर्स को ज्वाइन करना मत भूलना। कूपन कोड
Speaker A
है लाइफ 42। यहां क्लिक करके कर सकते हो। बहुत-बहुत धन्यवाद। [संगीत] [संगीत] [संगीत]
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