Skip to content
Get App

The Prince (Hindi/हिंदी में)

निकोलो मेकियावेली की द प्रिंस किताब का हिंदी में सार, सत्ता के खेल और राजशाही के नियमों की गहराई से व्याख्या।

Key Takeaways

  • सत्ता में सफलता के लिए चालाकी और ताकत दोनों जरूरी हैं।
  • राजा को जनता का भरोसा जीतना चाहिए, लेकिन खौफ भी बनाए रखना चाहिए।
  • राजनीतिक वादे तभी निभाने चाहिए जब वे राजा के हित में हों।
  • मजबूत फौज और सही कानून ही किसी राज्य की नींव होते हैं।
  • सत्ता के खेल में कड़वा सच समझना जरूरी है, न कि केवल सपने देखना।

What the video covers

  • निकोलो मेकियावेली की किताब द प्रिंस सत्ता के असली खेल को समझाती है, जो 500 सालों से राजाओं के लिए मार्गदर्शक रही है।
  • मेकियावेली ने सत्ता में चालाकी और ताकत के महत्व को बताया, जैसे भेड़ियों के बीच लोमड़ी और शेर की जरूरत।
  • उनका जीवन फ्लोरेंस के राजनीतिक उतार-चढ़ाव से जुड़ा था, जहां उन्होंने राजाओं और फौजों को करीब से देखा।
  • मेकियावेली ने बताया कि नए और खानदानी राजों को कैसे संभालना चाहिए और किस्मत के नियम क्या हैं।
  • उन्होंने कई राजाओं जैसे लुई 12, सजारे बोझिया, फर्डिनेंड आदि के उदाहरण दिए और उनकी गलतियों से सीखा।
  • राजा के लिए प्यार और खौफ के बीच संतुलन, वादों का महत्व और टूटने के समय की समझ पर चर्चा की गई।
  • मेकियावेली ने बताया कि सच्चा राजा वही है जो अपनी फौज और कानून को मजबूत बनाए रखे।
  • उनकी किताबें सत्ता के नियमों को सरल भाषा में समझाती हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं।
  • मेकियावेली की जिंदगी में जेल, निर्वासन और राजनीतिक संघर्ष भी शामिल थे, जिससे उनकी सोच और भी गहरी हुई।
  • द प्रिंस किताब को लोरेंजो डी मेडिची को समर्पित किया गया था, जो सत्ता के खेल में मास्टरपीस मानी जाती है।

Answers

Questions about this video

द प्रिंस किताब किस विषय पर आधारित है?

द प्रिंस किताब सत्ता के खेल, राजनीतिक रणनीति और राजा के लिए जरूरी गुणों पर आधारित है। यह बताती है कि सत्ता कैसे हासिल और बचाई जाती है।

मेकियावेली ने राजा के लिए प्यार और खौफ में क्या अंतर बताया?

मेकियावेली के अनुसार राजा के लिए प्यार पाना अच्छा है लेकिन खौफ पैदा करना ज्यादा जरूरी है क्योंकि खौफ से लोग ज्यादा नियंत्रित रहते हैं।

मेकियावेली की जिंदगी में कौन-कौन से राजनीतिक बदलाव आए?

मेकियावेली ने फ्लोरेंस में लोरेंजो डे मेडिची के राज से लेकर मेडिची खानदान के सत्ता से बाहर होने, आम लोगों के राज और फिर मेडिची के पुनः सत्ता में आने तक के बदलाव देखे।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:04
Speaker A
आज हम एक ऐसी किताब की बात करेंगे जिसने 500 सालों से दुनिया के बड़े-बड़े राजाओं और दिग्गजों की नींद उड़ा रखी है। निकोलो मेकियावेली की मशहूर किताब द प्रिंस किताबें हमें यह सिखाती हैं कि दुनिया को कैसा होना चाहिए।
00:27
Speaker A
वह हमें अच्छाई और ईमानदारी के सपने दिखाती हैं। पर मेकियावेली कोई सपने दिखाने वाले शायर नहीं थे। वह सत्ता के एक मझे हुए खिलाड़ी थे, जिन्होंने राजाओं को बनते और बिगड़ते देखा था। यह किताब आपको बहुत ज्ञान नहीं देती बल्कि
00:46
Speaker A
यह बताती है कि दुनिया असल में कैसे चलती है। मेकियावेली कहते हैं कि अगर आप भेड़ियों के बीच रह रहे हैं तो आपको लोमड़ी जैसी चालाकी और शेर जैसी ताकत चाहिए। क्या एक राजा के लिए प्यार पाना बेहतर है
01:04
Speaker A
या लोगों के मन में अपना खौफ पैदा करना? इसका जवाब आपको इस किताब में मिलेगा। किस्मत कब सांस देती है और कब दगा दे जाती है। मेकियावेली ने इसके पक्के नियम बताए हैं। निकोलो मेकियावेली का जन्म 3 मई 1469 को
01:26
Speaker A
फ्लोरेंस में हुआ। 1494 से 1512 तक उन्होंने फ्लोरेंस में बड़ी नौकरी की। वे दूसरे देशों के राजाओं से मिलने जाते थे। 1512 में उन्हें जेल में डाल दिया गया। बाद में उन्हें शहर से बाहर निकाल दिया गया। 22 जून 1527 को [संगीत]
01:49
Speaker A
फ्लोरेंस में उनकी मौत हुई। निकोलो मेकियावेली एक नामी वकील के बेटे थे। उनके माता-पिता फ्लोरेंस के पुराने और ऊंचे खानदान से थे। उनकी जिंदगी के तीन बड़े हिस्से थे। हर हिस्से में फ्लोरेंस का इतिहास बदल गया। जब वे जवान थे तब फ्लोरेंस पर लोरेंजो डे
02:14
Speaker A
मेडिची का राज था। 1494 में मेडिची का खानदान सत्ता से बाहर हो गया। तब मेकियावेली ने अपनी सरकारी नौकरी शुरू की। 1512 तक फ्लोरेंस में आम लोगों का राज रहा। फिर पुराना राज वापस आ गया। मेकियावेली की नौकरी छूट गई।
02:36
Speaker A
इसी खाली वक्त में उन्होंने अपनी किताबें लिखीं। वे दोबारा नौकरी पाना चाहते थे पर पा नहीं सके। 1527 में 58 साल की उम्र में वे चल बसे। मेकियावेली के बचपन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। उस वक्त फ्लोरेंस में दो
02:54
Speaker A
तरह के लोग थे। एक वे जो धर्म को मानते थे। दूसरे वे जो शानो-शौकत पसंद करते थे। साऊ नारुला एक धर्म गुरु थे, जिसके पास बहुत ताकत थी। पर मेकियावेली ने उनका मजाक उड़ाया। उन्होंने उसे बिना फौज वाला
03:13
Speaker A
पैगंबर कहा। अनआर्म्ड प्रॉफिट। ऐसे लोगों का अंत हमेशा बुरा होता है। मेकियावेली को लोरेंजो का काम करने का अंदाज पसंद आया। उन्होंने अपनी किताब द प्रिंस लोरेंजो के पोते को ही भेजी। वे अपने बेटे को कहते थे कि खूब पढ़ाई
03:33
Speaker A
करो। उन्होंने लिखा अगर तुम खुद की मदद करोगे तो दुनिया तुम्हारी मदद करेगी। वे जानते थे कि हुनर ही इंसान को बड़ा बनाता है। 1494 से 1512 तक मेकियावेली ने आजाद फ्लोरेंस की सेवा की। वे फौज और शांति के
03:51
Speaker A
मामलों के सचिव थे। सेक्रेटरी। उन्होंने राजाओं और फौजियों को करीब से देखा। यहीं से उन्होंने सत्ता का खेल सीखा। स्टेट क्राफ्ट। उनकी पहली बड़ी मुलाकात कैथरीना सोजा से हुई। उनसे उन्होंने एक बड़ा सबक सीखा। बड़े किले बनाने से बेहतर है कि जनता का
04:12
Speaker A
भरोसा जीतो। 1500 में वे फ्रांस के राजा लुई 12 से मिले। लुई ने सत्ता के खेल में पांच बड़ी गलतियां की थीं। इसी वजह से उसे इटली से भागना पड़ा। मेकियावेली ने इन गलतियों को अपनी किताब में समझाया है। मेकियावेली ने
04:32
Speaker A
सजारे बोझिया को बहुत गौर से देखा। बोझिया ने दूसरों की किस्मत के दम पर सत्ता पाई थी। मेकियावेली उसे एक चतुर खिलाड़ी मानते थे। बोझिया हर मुसीबत के लिए तैयार रहता था। पर अंत में वह एक ऐसी अनहोनी से हार
04:49
Speaker A
गया जिसकी उम्मीद नहीं थी। मेकियावेली ने एक और बात सिखाई। अगर आप किसी को नुकसान पहुंचाते हैं तो वह उसे कभी नहीं भूलता। नए वादे पुराने जख्मों को नहीं भर सकते। पोप जूलियस सेकंड के बारे में उन्होंने खास बात कही। किस्मत एक औरत की तरह होती
05:11
Speaker A
है। जो मर्द निडर और बेबाक होता है, वही उसे जीत सकता है। डरपोक आदमी किस्मत के खेल में हार जाता है। उन्होंने स्पेन के राजा फर्डिनेंड को भी देखा। फर्डिनेंड धर्म का चोला पहनकर चालाकी करता था। उसमें दया या सच्चाई जरा भी नहीं थी। अगर वह
05:31
Speaker A
सच्चा बनता तो उसका राज डूब जाता। मैक्सिमिलियन जैसे राजा भी थे जो बहुत चुप रहते थे। उनमें अपनी बात मनवाने का दम नहीं था। इसलिए वे हमेशा नाकाम रहे। 1512 में जब दुश्मनों ने फ्लोरेंस को घेरा तो पासा पलट गया। पुराना राज वापस आ गया।
05:52
Speaker A
मेकियावेली की नौकरी चली गई और उनका करियर खत्म हो गया। जब मेडिची खानदान वापस आया तो मेकियावेली की नौकरी छीन ली गई। उन पर साजिश का शक हुआ। उन्हें जेल में डाला और टॉर्चर किया गया। नए पोप लियोटेन ने उन्हें आजाद
06:10
Speaker A
करवाया। इसके बाद वे फ्लोरेंस के पास अपने छोटे घर चले गए। वहां वे सिर्फ किताबें लिखते थे। शाम को वे अपने गंदे कपड़े उतारकर अच्छे कपड़े पहनते थे। वे पुराने किताबों के बड़े लोगों के साथ दिमागी वक्त बिताते थे।
06:28
Speaker A
उन्होंने सत्ता का खेल यानी स्टेट क्राफ्ट सीखने में 15 साल लगा दिए। इसी दौरान उन्होंने द प्रिंस नाम की छोटी किताब लिखी। इसमें बताया कि इलाका क्या होता है। राजा इसे कैसे हासिल करें और कैसे बचाए। उन्होंने यह किताब लोरेंजो डी मेडिची को
06:48
Speaker A
भेंट की। मेकियावेली गरीब थे पर उन्होंने कभी अपनी वफादारी नहीं छोड़ी। मेकियावेली ने जंग का हुनर आर्ट ऑफ वॉर नाम की किताब भी लिखी। 1520 में उन्हें फ्लोरेंस का इतिहास लिखने का काम मिला। वे एक ऐसे एक्सपर्ट थे
07:07
Speaker A
जिन्हें काम ना मिले तो वे बेचैन हो जाते थे। 1525 में उन्होंने अपनी लिखी तारीख पोप क्लेमेंट से को दे दी। पर किस्मत का खेल देखिए। उसी वक्त मेडिसी खानदान की सत्ता फिर से गिर गई। मेकियावेली अपनी पुरानी नौकरी वापस पाना चाहते थे। पर
07:29
Speaker A
वे बीमार पड़ गए और 22 जून 1527 को उनकी मौत हो गई। मेकियावेली बहुत बारीक नजर रखने वाले और मेहनती इंसान थे। वे जमीन पर शायद उतने कामयाब नहीं हुए। पर कलम की दुनिया में वे सबसे बड़े मास्टर साबित हुए।
07:48
Speaker A
उनकी किताब द प्रिंस आज भी बहुत जरूरी मानी जाती है। यह राजा और जनता के बीच के असली रिश्तों को बताती है। वे दुनिया को वैसे ही देखते थे जैसी वह असल में थी। लोग आज भी उतने ही लालची और भोले हैं। लोग
08:06
Speaker A
सच को नहीं बल्कि अपनी पसंद को सच मानते हैं। समझदारी इसमें है कि सबसे कम खतरे वाला रास्ता चुनो। जुर्म में राज मिल सकता है पर इज्जत नहीं। जब कोई और रास्ता ना बचे तो जंग ही सही है। मेकियावेली ने
08:23
Speaker A
राजाओं को वह दिखाया जो कोई और नहीं देख सका। उन्होंने सत्ता के, उन्होंने पावर के उन नियमों को लिखा जो हमेशा सच रहेंगे। आइए इस किताब को लाइन बाय लाइन समझने की कोशिश करते हैं। मेरा नाम है रोहित और आप
08:39
Speaker A
सुन रहे हैं सिलेबस विद रोहित। डेडिकेशन शानदार लोरेंजो के नाम। लोग जब राजा को खुश करना चाहते हैं तो कीमती तोहफे लाते हैं। कोई बढ़िया घोड़े लाता है तो कोई हथियार या कीमती [संगीत] पत्थर। राजा की शान बढ़ाने के लिए लोग सोने के
09:03
Speaker A
कपड़े भी लाते हैं। मैं भी आपके सामने अपनी वफादारी का कोई सबूत पेश करना चाहता था। मेरे पास देने के लिए कोई गहना या दौलत नहीं है। मेरे पास सबसे कीमती चीज मेरा एक्सपीरियंस है। मैंने बड़े लोगों के कारनामों को सालों तक
09:21
Speaker A
बहुत करीब से देखा है। पुराने किताबों को पढ़कर मैंने सत्ता का खेल समझा है। मैंने अपनी पूरी अकल इस छोटी सी किताब में भर दी है। हो सकता है कि यह किताब आपकी शान के लायक ना हो। पर इससे बढ़िया तोहफा
09:36
Speaker A
मैं आपको नहीं दे सकता। जो बातें मैंने बरसों की मुश्किलों और खतरों से सीखी वह आप झटपट पढ़ लेंगे। मैंने इसे सजाने के लिए कोई भारी भरकम शब्द नहीं लिखे हैं। मैं चाहता हूं कि मेरी बात अपने वजन और सच की वजह से जानी
09:54
Speaker A
जाए। कुछ लोग कहेंगे कि एक मामूली आदमी राजा को क्या सिखाएगा। पर याद रखिए ऊंचे पहाड़ देखने के लिए मैदान में खड़ा होना पड़ता है और नीचे का मैदान देखने के लिए [संगीत] पहाड़ की चोटी पर जाना पड़ता है।
10:10
Speaker A
जनता को समझने के लिए राजा बनना पड़ता है। पर राजा को समझने के लिए आम आदमी होना जरूरी है। इस तोहफे को उसी सोच के साथ कुबूल करें जैसे मैं भेज रहा हूं। इसे ध्यान से पढ़ेंगे तो आप वह ऊंचाई पाएंगे
10:27
Speaker A
जो किस्मत ने आपके लिए सोची है। जब आप अपने उस ऊंचाई से नीचे देखेंगे तो आपको मेरा बुरा हाल दिखेगा। आप देखेंगे कि कैसे मेरी फूटी किस्मत मुझ पर जुल्म कर रही है। द प्रिंस चैप्टर वन। दुनिया में जितने भी इलाके हैं जहां
10:54
Speaker A
हुकूमत चलती है वह या तो लोगों का राज है या फिर किसी एक राजा का राज है। राजा का राज भी दो तरह का होता है। एक है खानदानी राज, जहां उसका खानदान बहुत पुराने वक्त से राज कर रहा हो। दूसरा है
11:11
Speaker A
बिल्कुल नया राज। नया राज पूरी तरह नया हो सकता है। जैसे [संगीत] फ्रांसिस्को फुर्जा के लिए मिलन का इलाका नया था। या फिर राजा इसे अपने पुराने इलाके से जोड़ ले। जैसे स्पेन ने राजा ने नेप्लस के इलाके को जोड़ा था।
11:29
Speaker A
यह नए इलाके पहले से किसी राजा के नीचे होते हैं या फिर वह आजाद रहने के आदि होते हैं। राजा इन्हें अपनी फौज के दम पर जीतता है या फिर वह दूसरों की फौज का सहारा लेता है। यह सब किस्मत का हुनर या ताकत का खेल
11:45
Speaker A
है। चैप्टर टू मैं यहां लोगों के राज की बात नहीं करूंगा। उनके बारे में मैंने दूसरी जगह बहुत कुछ लिखा है। यहां मेरा पूरा ध्यान सिर्फ राजा के राज पर होगा। मैं बताऊंगा कि इन इलाकों को कैसे चलाया जाए और इन्हें
12:05
Speaker A
अपने पास कैसे संभाल कर रखा जाए। खानदानी राज को बचाना बहुत आसान काम है। यह नए इलाकों के मुकाबले कम मुश्किल होते हैं। बस अपने बाप-दादा के पुराने तौर-तरीके मत बदलिए। जैसा वक्त हो बस वैसे ही
12:22
Speaker A
चलते रहिए। एक आम राजा भी अपनी गद्दी बचा लेगा। जब तक कि कोई बहुत बड़ी ताकत उसे ना हटा दे। अगर आज छीन भी गया तो वह
12:37
Speaker A
राजा वापस आएगा। इटली में फेरारा के ड्यूक की एग्जांपल लीजिए। वेनिस और पोप जूलियस के हमलों से बच गए। उनका राज बहुत पुराना था इसलिए वे टिके रहे। खानदानी राजा को लोगों को दुखी करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए लोग उसे
12:57
Speaker A
ज्यादा प्यार करते हैं। जब तक राजा में कोई गंदी आदत ना हो, लोग खुश रहते हैं। पुराना राज होने से लोग बदलाव की बात भूल जाते हैं। एक बदलाव हमेशा दूसरे बदलाव का दरवाजा खोल देता है। चैप्टर तीन
13:18
Speaker A
असली मुसीबत नए इलाके में आती है। अगर नया इलाका पुराने राज के साथ जोड़ा गया हो तो मुश्किलें बढ़ती हैं। लोग सोचते हैं नया राजा सब ठीक कर देगा। इसी उम्मीद में वह पुराना राजा के खिलाफ हथियार उठा लेते हैं। पर बाद में उन्हें
13:36
Speaker A
पता चलता है कि वे फंस गए। नया राजा आते ही अपनी फौज का बोझ जनता पर डाल देता है। नए इलाके को कब्जे में रखने के लिए सख्ती करनी पड़ती है। इस खेल में आपके दो तरह के दुश्मन बन जाते हैं। पहले वे जिनकी जमीन
13:54
Speaker A
या हक आपने छीन लिया। दूसरे वे दोस्त जिन्होंने आपको गद्दी पर बैठने में मदद की। आप उन दोस्तों को वह सब नहीं दे सकते जिसकी उन्हें उम्मीद थी। आप उन पर सख्ती भी नहीं कर सकते क्योंकि आप उनके एहसानमंद
14:09
Speaker A
हैं। याद रहे कितनी भी बड़ी फौज आपके पास हो किसी नए इलाके में घुसने के लिए वहां के लोगों का साथ जरूरी है। फ्रांस के राजा लुई 12 ने मिलान को फटाफट जीता। पर उसने उतनी ही जल्दी उसे खो भी दिया।
14:29
Speaker A
लोडोविको ने अपनी छोटी सी फौज से उसे बाहर निकाल दिया। क्योंकि जिन लोगों ने शहर के दरवाजे खोले थे, वे मायूस हो गए। उन्हें नए राजा से जो सुख चाहिए था, वह नहीं मिला। हां, अगर आप किसी बागी इलाके को
14:46
Speaker A
दोबारा जीतते हैं तो उसे रखना आसान है। तब राजा को बागियों को कुचलने का बहाना मिल जाता है। वह अपनी कमजोर कड़ियों को ठीक कर लेता है और दुश्मनों को साफ कर देता है। मिलान को दोबारा जीतने के बाद लुई 12 को
15:02
Speaker A
हराना मुश्किल हो गया था। तब पूरी दुनिया को उसके खिलाफ खड़ा होना पड़ा। अगर जीता हुआ इलाका आपके पुराने राज जैसा ही है तो उसे रखना आसान है। वहां के लोग अगर वही भाषा बोलते हैं तो बस दो काम
15:19
Speaker A
करें। पहला वहां के पुराने राजा के खानदान को खत्म कर दें। दूसरा उनके पुराने कायदे कानून और टैक्स को ना छुएं। इससे नए लोग जल्दी ही आपके साथ घुलमिल जाएंगे। पर अगर भाषा और तौर तरीके अलग हो तो बड़ी ताकत
15:36
Speaker A
चाहिए। सबसे अच्छा तरीका यह है कि राजा खुद वहां जाकर रहे। जैसे टर्की के सुल्तान ने ग्रीस में किया। अगर आप वहां रहेंगे तो गड़बड़ शुरू होते ही उसे रोक लेंगे। दूर रहेंगे तो खबर तब मिलेगी जब सब हाथ से
15:52
Speaker A
निकल चुका होगा। वहां रहने से आपके अफसर इलाके को लूट नहीं पाएंगे। जनता को लगेगा कि उनका राजा उनके पास है। दूसरा तरीका है वहां अपनी बस्तियां बसाना। यह तरीका फौज रखने से कहीं बेहतर है और [संगीत] सस्ता भी। बस्तियां बसाने में
16:11
Speaker A
सिर्फ उन थोड़े से लोगों का नुकसान होता है जिनके घर छीने जाते हैं। वे लोग गरीब और तितर-बितर हो जाते हैं इसलिए बदला नहीं ले सकते। बाकी लोग डर के मारे चुप रहते हैं कि कहीं उनके साथ भी ऐसा ना हो।
16:26
Speaker A
इंसान को या तो प्यार करिए या फिर उसे पूरी तरह कुचल दीजिए। छोटी चोट का वह बदला ले सकता है। पर बड़ी चोट के बाद वह बदला लेने लायक नहीं बचता। इसलिए दुश्मन को ऐसी चोट दीजिए कि बदले का डर ही ना रहे।
16:44
Speaker A
अगर आप बस्तियों की जगह वहां फौज रखेंगे तो बहुत पैसा खर्च होगा। इलाके से जो कमाई होगी, वह फौज पर ही उड़ जाएगी। फौज के इधर-उधर घूमने से पूरी जनता परेशान हो जाती है। सब आपके दुश्मन बन जाते हैं और
16:59
Speaker A
अपने ही घर में आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए फौज रखना बेकार है। बस्तियां बसाना ही सही है। राजा को अपने कमजोर पड़ोसियों का मददगार बनना चाहिए। साथ ही वहां के ताकतवर पड़ोसियों को कमजोर करना चाहिए। ध्यान रहे कि कोई बाहरी ताकत वहां पैर ना
17:21
Speaker A
जमा सके। बाहरी दुश्मन को हमेशा वही लोग बुलाते हैं जो आपसे दुखी या जलते हैं। जैसे रोमस को ग्रीस के लोगों ने ही अंदर बुलाया था। जैसे ही कोई बाहरी ताकत आती है, कमजोर लोग उससे जुड़ जाते हैं। वे अपने पुराने राजा
17:39
Speaker A
से नफरत के चक्कर में दुश्मन का साथ देते हैं। राजा को बस यह देखना है कि वे कमजोर लोग ज्यादा ताकत ना पाले। अपनी फौज और उनकी मदद से आप बड़े खिलाड़ियों को आसानी से दबा सकते हैं। जो राजा यह खेल नहीं समझता, वह अपना राज
18:00
Speaker A
जल्दी खो देगा। रोमस बहुत चालाक थे। उन्होंने जीते हुए इलाकों में एक खास चाल चली। वे वहां अपनी बस्तियां बसाते थे। वे छोटे राजाओं से दोस्ती रखते थे। पर उन्हें ताकत नहीं देते थे। वे बड़े खिलाड़ियों को दबाकर रखते थे।
18:19
Speaker A
उन्होंने किसी भी बाहरी ताकत को वहां पैर नहीं जमाने दिया। ग्रीस का एग्जांपल लीजिए। रोमस ने वहां के छोटे राजाओं को दोस्त रखा पर उन्हें कभी भी हद से ज्यादा बढ़ने नहीं दिया। उन्होंने मेसडोनिया को झुका दिया। उन्होंने एंटिकोयस को बाहर
18:37
Speaker A
खदेड़ दिया। रोम्स ने वह किया जो हर समझदार राजा को करना चाहिए। वे सिर्फ आज की मुसीबत नहीं कल का खतरा भी देखते थे। खतरे का इलाज वक्त रहते करना जरूरी है। यह बीमारी की तरह है। उस्ताद हकीम कहते हैं
18:54
Speaker A
कि शुरुआत में बीमारी को पकड़ना मुश्किल है। पर इलाज आसान है। पर अगर वक्त निकल जाए तो बीमारी सबको दिखती है। पर इलाज नामुमकिन हो जाता है। सत्ता का खेल भी ऐसा ही है। समझदार आदमी आने वाली बुराई को दूर
19:10
Speaker A
से भांप लेता है। पर जब बुराई इतनी बढ़ जाए कि सबको दिखने लगे तो फिर कोई दवा काम नहीं आती। रोमस खतरे को पहले ही भांप लेते थे। वे जंग से कभी डरे नहीं। वे जानते थे कि जंग
19:25
Speaker A
टाली नहीं जा सकती। जंग टालने से सिर्फ दुश्मन का फायदा होता है। उन्होंने ग्रीस में ही लड़ना ठीक समझा [संगीत] ताकि इटली बची रहे। वे वक्त का मजा लो। ऐसी बातों पर भरोसा नहीं करते थे। वे सिर्फ अपने हुनर
19:41
Speaker A
और ताकत और अकल पर भरोसा करते थे। अब फ्रांस के राजा लुई 12 की बात करते हैं। उसने वह सब किया जो उसे नहीं करना चाहिए था। लुई को वेनिस के लोग इटली लेकर आए। वे लोबडी का आधा हिस्सा चाहते थे। लुई को
20:01
Speaker A
इटली में घुसना था इसलिए उसने यह सौदा कर लिया। उसने लोमबाड़ी जीतते ही वह रुतबा पा लिया जो पहले खो चुका था। सब उसके दोस्त बनना चाहते थे। वेनिस के लोगों को तब अपनी गलती समझ आई। दो शहरों के लालच में
20:17
Speaker A
उन्होंने लुई को आधी इटली का मालिक बना दिया। लुई अपना राज आसानी से बचा सकता था। उसे बस अपने कमजोर दोस्तों की रक्षा करनी थी। वे दोस्त पोप और वेनिस से डरे हुए थे। उन्हें लुई का साथ चाहिए था। उनकी मदद से
20:36
Speaker A
लुई बड़े खिलाड़ियों को आसानी से दबा सकता था। पर मिलान हथ में आते ही उसने बड़ी गलती कर दी। उसने पोप एलेग्जेंडर की मदद की ताकि पोप एक इलाके पर कब्जा कर सके। उसे समझ नहीं आया कि वह खुद को कमजोर कर
20:52
Speaker A
रहा है। उसने अपने उन दोस्तों को खो दिया जो उसकी गोद में आकर गिरे थे। उसने धर्म की ताकत के साथ सत्ता का दम भी जोड़ दिया। एक गलती के बाद उसे दूसरी गलती करनी पड़ी। पोप की बढ़ती ताकत को रोकने के लिए उसे
21:09
Speaker A
खुद इटली आना पड़ा। इतना ही काफी नहीं था। उसने नेपल्स के लिए स्पेन के राजा से हाथ मिला लिया। जहां वह खुद अकेला मालिक बन सकता था। वहां उसने एक जोड़ीदार बुला लिया। उसने एक ऐसे राजा को वहां बैठा दिया जो
21:27
Speaker A
खुद लुई को बाहर निकाल सके। नया इलाका जीतने की चाहत रखना बहुत आम बात है। जो ऐसा कर सकते हैं उनकी तारीफ होती है। पर जो लोग कर नहीं सकते और फिर भी हाथपांव मारते हैं वे बेवकूफ कहलाते हैं।
21:43
Speaker A
लुई ने पांच बड़ी गलतियां की। उसने छोटे राजाओं को खत्म कर दिया। उसने एक ताकतवर पोप की ताकत को और बढ़ा दी। वह एक बहुत बड़ी विदेशी ताकत यानी स्पेन को अंदर ले आया। वह खुद वहां रहने नहीं
22:02
Speaker A
गया और उसने वहां अपनी बस्तियां नहीं बसाई। आखिर में उसने छठी गलती भी कर दी। उसने वेनिस को बर्बाद कर दिया। अगर उसने पोप और स्पेन को ताकतवर ना बनाया होता तो वेनिस को दबाना सही था। पर पहले सबको ताकतवर
22:20
Speaker A
बनाकर फिर वेनिस को छेड़ना खुदकुशी थी। वेनिस ही दूसरों को लोमबडी पर हमला करने से रोक सकता था। अगर कोई कहे कि लुई ने जंग टालने के लिए यह सब किया तो वह गलत है। जंग कभी टाली नहीं जाती। बस आपके नुकसान के लिए आगे बढ़
22:40
Speaker A
जाती है। लुई ने अपना राज खो [संगीत] दिया क्योंकि उसने सत्ता का खेल सही से नहीं खेला। एक पक्का नियम याद रखिए जो कभी फेल नहीं होता। जो दूसरे को ताकतवर बनाता है वह खुद बर्बाद होता है क्योंकि ताकत या तो चालाकी
22:59
Speaker A
से मिलती है या जोर से और जिसके पास अब ताकत आ गई है वह इन दोनों चीजों से डरेगा और आप पर कभी भरोसा नहीं करेगा। चैप्टर चार सिकंदर ने एलेक्जेंडर द ग्रेट ने कुछ ही सालों में एशिया जीत लिया। जीतने के तुरंत
23:21
Speaker A
बाद वह मर गया। सबको लगा कि अब वहां बगावत होगी। पर सिकंदर के साथियों ने मजे से राज किया। उन्हें सिर्फ आपस के झगड़ों से दिक्कत हुई। जनता से नहीं। सत्ता का खेल समझने के लिए यह जानना जरूरी
23:36
Speaker A
है। इलाके दो तरह से चलाए जाते हैं। पहला तरीका जहां एक राजा और उसके वजीर होते हैं। वजीर सिर्फ राजा की मेहरबानी और नौकरी पर टिके होते हैं। दूसरा तरीका जहां राजा और पुराने खानदानी सरदार होते हैं। इन सरदारों का अपना रुतबा होता है। लोग या
23:58
Speaker A
जनता उन्हें बरसों से जानती और प्यार करती है। तुर्की के राजा की एग्जांपल लीजिए। वहां एक ही मालिक है। बाकी सब उसके नौकर हैं। राजा अपने अफसरों को जब चाहे बदल देता है। ऐसे इलाके को जीतना बहुत मुश्किल है। वहां
24:15
Speaker A
के वजीर राजा के वफादार गुलाम होते हैं। उन्हें लालच देकर तोड़ना आसान नहीं है। वे जनता को भी अपने साथ नहीं ला सकते। इसलिए ऐसे राजा पर बाहर से हमला करने के लिए बहुत ताकत चाहिए। पर एक बार उसे मैदान में हरा दिया तो राज
24:33
Speaker A
संभालना आसान है। बस राजा के खानदान को खत्म कर दो। फिर वहां कोई ऐसा सरदार नहीं बचता जिसे जनता जानती हो। अब फ्रांस जैसे राज को देखिए। वहां बहुत से पुराने खानदानी सरदार होते हैं। उनका अपना इलाका और अपनी जनता होती है। वहां
24:54
Speaker A
किसी दुखित सरदार को अपनी तरफ मिलाना आसान है। वह आपके लिए जीत का रास्ता खोल देगा। पर ऐसे इलाके को कब्जे में रखना बहुत मुश्किल है। मदद करने वाले सरदार आपसे उम्मीद रखेंगे। जिन्हें आपने कुचला है, वे आपसे नफरत करेंगे। आप ना तो सबको खुश कर
25:13
Speaker A
सकते हैं, ना सबको मार सकते हैं। जैसे ही मौका मिलेगा वह आपका तख्ता पलट कर देंगे। दारा का राज भी तुर्की जैसा ही था। सिकंदर को बस उसे एक बार मैदान में धूल चटानी थी। दारा के मरते ही पूरा इलाका सिकंदर का हो
25:31
Speaker A
गया। अगर सिकंदर के वारिस आपस में ना लड़ते [संगीत] तो कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता। रोमंस को स्पेन और फ्रांस में बहुत दिक्कत हुई। वहां बहुत सारे छोटे-छोटे खानदानी राज थे। जब तक उन पुराने सरदारों की याद जिंदा
25:50
Speaker A
रही, बगावत होती रही। पर जब रोम का राज पुराना हो गया तो लोग सब भूल गए। तो याद रखिए यह सब जीतने वाले के हुनर और ताकत पर नहीं है। यह उस इलाके के पुराने ढंग पर टिका है। जहां एक ही मालिक हो उसे जीतना कठिन
26:09
Speaker A
परखना आसान है। जहां बहुत से सरदार हो वहां घुसना आसान है पर टिकना कठिन है। चैप्टर पांच। जो इलाके अपनी आजादी और अपने कायदों के आदि हैं, उन्हें दबाने के सिर्फ तीन रास्ते हैं। पहला रास्ता उस इलाके को जड़
26:30
Speaker A
से मिटा दो। दूसरा रास्ता राजा खुद वहां जाकर अपना डेरा डाले। तीसरा रास्ता उन्हें उनके पुराने कायदों में रहने दो। बस उनसे पैसा वसूलते रहो। वहां अपनी एक छोटी टोली बिठा दो जो तुम्हारे लिए काम करें। वह टोली जानती है कि वे राजा की दोस्ती के
26:51
Speaker A
बिना नहीं टिक सकते। वे तुम्हारी सत्ता को बचाने के लिए जी जान लगा देंगे। किसी आजाद शहर को काबू में रखने के लिए वहां के नागरिकों का इस्तेमाल करना ही सबसे आसान तरीका है। स्पार्टंस और रोमंस की एग्जांपल
27:07
Speaker A
को देखिए। स्पार्टंस ने एथेंस में अपनी एक टोली बिठाई पर वे उसे बचा नहीं पाए। रोमंस ने कार्थेज को पूरी तरह उजाड़ दिया और उसे कभी नहीं खोया। रोमंस ग्रीस को भी स्पार्टंस की तरह आजाद छोड़कर राज करना
27:24
Speaker A
चाहते थे पर वे नाकाम रहे। आखिर में उन्हें वहां के शहरों को बर्बाद करना ही पड़ा। सच तो यह है कि बर्बादी के सिवा कब्जा बनाए रखने का कोई और पक्का रास्ता नहीं है। जो राजा आजाद रहने वाले शहर को जीतकर
27:40
Speaker A
उसे तबाह नहीं करता वह खुद तबाह होने के लिए तैयार रहे। वहां के लोग अपनी पुरानी आजादी को कभी नहीं भूलते। 100 साल की गुलामी और राजा के ढेरों एहसानों के बाद भी मौका मिलते ही वे आजादी के नाम पर खड़े हो जाएंगे। अगर तुम उन्हें
27:59
Speaker A
तितर-बितर नहीं करोगे तो वे हर मौके पर अपनी पुरानी आजादी की तरफ लौटेंगे। जैसे पीसा ने 100 साल बाद फ्लोरेंस के खिलाफ किया। पर जहां पहले से किसी राजा का राज था, वहां कहानी अलग है। पुराने खानदान के खत्म
28:17
Speaker A
होते ही वहां के लोग रास्ता भटक जाते हैं। उन्हें हुक्म मानने की आदत होती है, पर आजादी की नहीं। वे आपस में किसी एक को राजा नहीं चुन पाते [संगीत] और ना ही खुद राज करना जानते हैं। ऐसे लोगों को जीतना और अपना वफादार बनाना
28:34
Speaker A
बहुत आसान है। लेकिन लोगों के राज में नफरत बहुत गहरी होती है। वहां बदला लेने की आग कभी नहीं बुझती। अपनी पुरानी आजादी की याद उन्हें एक पल चैन से बैठने नहीं देती। इसलिए सबसे सुरक्षित रास्ता यही है कि या तो उन्हें
28:54
Speaker A
जड़ से मिटा दो या फिर वहां खुद जाकर रहो। चैप्टर सिक्स अगर मैं इस किताब में बड़े राजाओं का एग्जांपल दूं तो हैरान मत होना। इंसान अक्सर दूसरों के बनाए रास्तों पर ही चलता है। वह दूसरों की नकल करके ही आगे
29:15
Speaker A
बढ़ता है। पर वह कभी भी असल आदमी जैसी ताकत नहीं पा सकता। एक समझदार राजा को हमेशा बड़े एक्सपर्ट के रास्ते पर चलना चाहिए। ताकि अगर तुम उनके बराबर ना भी पहुंचो तो कम से कम उन जैसा बनो। एक होशियार तीरंदाज की तरह बनो। जब
29:36
Speaker A
निशाना बहुत दूर हो तो वह ऊपर की तरफ तीर चलाता है। वह जानता है कि उसके धनुष में कितना दम है। वह ऊंचा निशाना इसलिए लगाता है ताकि तीर सही जगह जाकर लगे। बिल्कुल नए इलाके को बचाना राजा के हुनर
29:53
Speaker A
पर है। एक मामूली आदमी से राजा बनने के लिए दो चीजें चाहिए। या तो हुनर, ताकत या फिर अच्छी किस्मत। इन दोनों में से एक चीज आपकी मुश्किलें कम कर देगी। पर जो किस्मत पर कम भरोसा करता है, वह ज्यादा टिकता है।
30:12
Speaker A
राजा अगर उस नए इलाके में खुद जाकर रहे तो काम आसान हो सकता है। उन लोगों को देखिए जो किस्मत से नहीं अपने दम पर राजा बने। मोजेस, सारस, रोमुलस और थीसियस इसके बड़े मास्टर्स हैं। मोजेस ने तो भगवान
30:32
Speaker A
के हुक्म पर काम किया। पर सारस और बाकियों ने जो भी किया वह कमाल था। उनकी जिंदगी को देखेंगे तो पता चलेगा कि किस्मत ने उन्हें बस एक मौका दिया। वह मौका एक मिट्टी की तरह था जिसे उन्होंने अपने हुनर से मूरत
30:48
Speaker A
बना दिया। बिना मौके के उनका हुनर बेकार चला जाता और बिना हुनर के वह मौका हाथ से निकल जाता। मोजिस को इजराइल के लोग मिस्र में गुलाम मिले। वे लोग जुल्म से दुखी थे। इसलिए वे मोजिस के पीछे चल पड़े। रोमूलस को बचपन
31:09
Speaker A
में घर से निकाल दिया गया था। तभी वह रोम का राजा बन पाया। सारस को ऐसे लोग मिले जो पुराने राज से तंग आ चुके थे। थीसियस को तब मौका मिला जब एथेंस के लोग बिखरे हुए थे। इन मौकों ने ही उन्हें बड़ा
31:26
Speaker A
बनाया। उनके हुनर ने उस मौके को पहचाना और अपने इलाके का नाम रोशन किया। जो अपनी ताकत से राजा बनते हैं उन्हें इलाका पाने में मेहनत लगती है। पर उसे बचाना उनके लिए बहुत आसान होता है। मुश्किल इसलिए आती है क्योंकि उन्हें नए
31:45
Speaker A
कायदे और तरीके शुरू करने पड़ते हैं। दुनिया में नया काम शुरू करने से ज्यादा मुश्किल और खतरनाक कुछ नहीं है। पुराने राज में मजे करने वाले लोग आपके पक्के दुश्मन बन जाएंगे। और जिन्हें नए राज से फायदा होना है वे डरपोक और कमजोर दोस्त
32:04
Speaker A
होंगे। वे दुश्मन से डरते हैं क्योंकि कानून उनके साथ है। और लोगों को नई चीजों पर तब तक यकीन नहीं आता जब तक वे उसे आजमा ना ले। जब भी मौका मिलेगा दुश्मन आप पर शेर की तरह टूट पड़ेंगे और आपके दोस्त
32:22
Speaker A
ठंडे पड़े रहेंगे जिससे राजा खतरे में पड़ जाएगा। यहां एक बड़ा सवाल आता है। क्या यह नया काम शुरू करने वाले खुद के दम पर खड़े हैं या वे दूसरों से मदद की भीख मांगते हैं?
32:38
Speaker A
अगर वे सिर्फ वादे करते हैं और दूसरों पर टिके हैं तो वे डूब जाएंगे। पर अगर वे अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सकते हैं तो वे बच जाएंगे। यही वजह है कि हथियार वाले पैगंबर आर्म्ड प्रॉफिट्स ही जीतते हैं। बिना हथियार वाले
32:57
Speaker A
हमेशा तबाह हो जाते हैं। लोग या जनता का मिजाज बदलता रहता है। उन्हें बातों से मनाना आसान है। पर उस बात पर टिकाए रखना मुश्किल। इसलिए इंतजाम ऐसा रखो कि जब उनका यकीन खत्म हो जाए तो तुम ताकत यानी फोर्स से उन्हें यकीन दिला सको।
33:20
Speaker A
मोजिस, साइरस और रोमुलस के पास हथियार ना होते तो वे टिक नहीं पाते। हमारे वक्त में सवा नरोला की एग्जांपल को देखिए। जैसे ही जनता का भरोसा टूटा, उसका नया राज भी टूट गया। उसके पास उन लोगों को
33:38
Speaker A
रोकने का कोई दम नहीं था जो उस पर यकीन नहीं करते थे। ऐसे राजाओं के लिए चढ़ाई बहुत मुश्किल होती है। पर एक बार वे इन मुश्किलों को कुशल दें तो लोग उनकी इज्जत करने लगते हैं। फिर वे हमेशा के लिए
33:53
Speaker A
ताकतवर, सुरक्षित और खुश रहते हैं। मैं एक छोटी पर जरूरी मिसाल और दूंगा। सिराक्यूस का हीरो एक मामूली आदमी था। किस्मत ने उसे बस एक मौका दिया। वहां के लोग परेशान थे तो उन्होंने उसे अपना कप्तान चुन लिया। बाद में वह अपनी ताकत से
34:13
Speaker A
वहां का राजा बन गया। उसने पुरानी फौज हटाकर अपनी नई फौज खड़ी की। पुराने वादे तोड़कर नए और पक्के दोस्त बनाए। उसने अपनी नींव इतनी मजबूत रखी कि वह उस पर कोई भी इमारत खड़ी कर सकता था। उसे इलाका पाने
34:30
Speaker A
में बहुत पसीना बहाना पड़ा। पर उसे बचाना उसके लिए बच्चों का खेल था। चैप्टर से जो लोग सिर्फ किस्मत के दम पर मामूली आदमी से राजा बनते हैं। उन्हें ऊपर पहुंचने में मेहनत नहीं लगती। वे उड़कर चोटी पर पहुंच
34:52
Speaker A
जाते हैं। पर असली मुसीबत तब शुरू होती है जब वे वहां टिकने की कोशिश करते [संगीत] हैं। उनके रास्ते में कोई रुकावट नहीं आती क्योंकि वे मेहनत करके नहीं आए होते। ऐसे राजा या तो पैसों के दम पर बनते हैं
35:07
Speaker A
या किसी बड़े राजा की मेहरबानी पर। जैसे यूनान के शहरों में दारा ने लोगों को राजा बनाया था। यह लोग सिर्फ दूसरों की मर्जी और किस्मत पर टिके होते हैं। यह दोनों ही चीजें बहुत चंचल हैं और कभी भी बदल सकती हैं। इन
35:26
Speaker A
राजाओं के पास ना तो तजुर्बा होता है ना ही अपनी कोई ताकत। वे हुक्म देना नहीं जानते क्योंकि उन्होंने हमेशा दूसरों की गुलामी की होती है। उनके पास ऐसी कोई वफादार फौज नहीं होती जो मुसीबत में उनका साथ दे।
35:45
Speaker A
अचानक खड़ा हुआ इलाका कुदरत की उन चीजों जैसा है जो बहुत जल्दी पैदा होती हैं। उनमें मजबूत जड़े नहीं होती। वक्त का पहला तूफान उन्हें उखाड़ फेंकता है। जो राजा अचानक गद्दी पा लेता है, उसे बाद में बहुत
36:01
Speaker A
पसीना बहाना पड़ता है। उसे वे जड़े बाद में लगानी पड़ती हैं जो दूसरों ने राजा बनने से पहले लगाई होती हैं। दो एग्जांपल्स लेते हैं सोजा और बोर्िया का। सत्ता का खेल समझने के लिए दो लोगों को देखना जरूरी है। फ्रांसिस्को सोजा और से
36:23
Speaker A
जारे बोर्िया फ्रांसिस्को सोजा इसने अपने हुनर से मिलान का इलाका जीता। उसे जीतने में हजारों मुसीबतें आई पर बचाने में कोई दिक्कत नहीं हुई। उसकी जड़े मजबूत थी। सजारे बोर्िया इसे लोग ड्यूक वैलेंटिनो कहते थे। इसने अपना इलाका अपने बाप की
36:46
Speaker A
किस्मत से पाया। जैसे ही बाप की ताकत कम हुई, इसका राज भी चला गया। जबकि उसने वह सब चाले चली जो एक समझदार राजा को चलनी चाहिए थी। सजारे ने अपनी ताकत की नींव बहुत मजबूत रखी थी। अगर वह फिर भी हार गया
37:03
Speaker A
तो यह उसकी गलती नहीं थी। यह उसकी बहुत बुरी किस्मत थी। पॉप एलेक्जेंडर सिक्स अपने बेटे को बड़ा राजा बनाना चाहते थे। पर उनके रास्ते में बहुत से रोड़े थे। वे सिर्फ चर्च के इलाके दे सकते थे। पर मिलान और वेनिस इसके खिलाफ
37:23
Speaker A
थे। पोप ने एक चाल चली। उन्होंने इटली के खिलाड़ियों को आपस में दिया। उन्होंने फ्रांस के राजा को इटली आने में मदद की। फ्रांस की मदद से ने रोमानिया जीत लिया। पर सेजारे को दो बातों का डर था। ओसनी खानदान की फौज कभी भी उसे
37:44
Speaker A
धोखा दे सकती थी। फ्रांस का राजा उसे और आगे बढ़ने से रोक सकता था। शेजारी ने तय किया कि वह अब दूसरों के भरोसे नहीं रहेगा। उसने सबसे पहले ओरसिनी और कोलोनेसी के गुटों को कमजोर किया। उसने उनके आदमियों को लालच दिया। उन्हें अच्छा
38:05
Speaker A
पैसा और बड़ी नौकरियां दी। कुछ ही महीनों में वे अपने पुराने मालिकों को भूलकर सिजारे के वफादार बन गए। इसके बाद उसने ओरससी ने खानदान को खत्म करने की योजना बनाई। जब ओसीनी के लोगों को पता चला कि
38:21
Speaker A
सेजारे बहुत ताकतवर हो रहा है तो उन्होंने बगावत की। पर सेजारे ने फ्रांस की मदद से सबको दबा दिया। फिर उसने अपनी सबसे बड़ी चाल चली। उसने दिखाया कि वह अब किसी से नहीं लड़ना चाहता। उसने पागोलो नाम के
38:38
Speaker A
शख्स को पैसे, कपड़े और घोड़े देकर अपना दोस्त बनाया। इस दोस्ती के झांसे में आकर और सिनी के बड़े नेता सनी गालिया में उससे मिलने आए। सजारे ने वहां उन सबको मार दिया। जब बड़े दुश्मन खत्म हो गए तो उनके पीछे
38:56
Speaker A
चलने वाले लोग सिजारे के दोस्त बन गए। अब उसके पास पूरा रोमानिया और अर्बिनो था। यहां के लोग अब खुश थे और सेजारे को अपना सच्चा राजा मानने लगे थे। जब ड्यूक ने रोमानिया कब्जा किया वहां सब बिखरा था। वहां के पुराने छोटे राजा जनता
39:18
Speaker A
को सिर्फ लूटते थे। हर तरफ चोरी, झगड़े और मारकाट मची थी। सजारे ने वहां शांति लाने के लिए एक सख्त आदमी चुना। उसका नाम रामरोडी ओरको था। वह आदमी बहुत तेज और बेरहम था। उसने थोड़े ही वक्त में सबको सीधा कर
39:38
Speaker A
दिया। अब सेजारी ने एक लोमड़ी वाली चाल चली। उसे डर था कि रामीरों की सख्ती से लोग उससे नफरत करेंगे। उसने जनता को दिखाया कि जुल्म उसने नहीं उसके मंत्री ने किया। एक सुबह उसने रामीरों को सरेआम बीच बाजार में
39:55
Speaker A
मार दिया। लाश के पास एक खून से सना चाकू रख दिया। यह मंजर देखकर लोग खुश भी हुए और सहम भी गए। अब सजारी काफी ताकतवर हो चुका था। उसने अपने आसपास के दुश्मनों को कुशल दिया था। अब उसे फ्रांस के राजा से खतरा था। वह नए
40:16
Speaker A
दोस्त ढूंढने लगा और फ्रांस से भी चालाकी करने लगा। उसका प्लान पक्का था पर एक डर भी था। उसे डर था कि नया पोप उसका दुश्मन बन सकता है। उसने आने वाले वक्त के लिए चार पक्की चाले चली। पुराने राजाओं के
40:34
Speaker A
खानदान को जड़ से खत्म करना। रोम के बड़े लोगों को लालच देकर अपना बनाना, बड़े पादरियों को अपनी मुट्ठी में करना, पोप के मरने से पहले इतनी ताकत जुटाना कि कोई उसे हिला ना सके। पोप एलेक्जेंडर के मरने तक उसने तीन काम
40:53
Speaker A
पूरे कर लिए थे। उसने लगभग सभी पुराने राजाओं को मार दिया था। रोम के बड़े लोग उसके साथ थे। पादरियों की टोली में उसका पूरा दम था। वह पीसा और सना जैसे इलाकों को जीतने ही वाला था। अगर वह कामयाब हो
41:11
Speaker A
जाता तो वह किसी के भरोसे नहीं रहता। पर किस्मत ने उसे बड़ा धोखा दिया। अभी 5 साल ही हुए थे कि उसके पिता की मौत हो गई। उस वक्त सिजारे खुद मौत के करीब और बहुत बीमार था। सिर्फ रोमानिया का इलाका ही उसके हाथ में
41:30
Speaker A
पक्का था। बाकी सब हवा में था और दो बड़ी फौजे उसे घेरे खड़ी थी। फिर भी उसने अपनी नींव इतनी मजबूत रखी थी कि वह हार नहीं मानता। शेजारी ने मुझसे एक बार बहुत पते की बात कही थी। उसने कहा मैंने सब सोचा था पर
41:50
Speaker A
अपनी बीमारी नहीं सोची थी। उसने हर मुसीबत का तोड़ निकाल रखा था। वह जानता था कि लोगों का दिल कैसे जीतना है और कैसे उन्हें डराना है। सेजारी ने जो भी किया वह सीखने लायक है। उसे वे लोग अपना मास्टर मान सकते हैं जो
42:08
Speaker A
किस्मत से राजा बनते हैं। उसने दुश्मन खत्म किए, नए दोस्त बनाए और पुरानी फौज बदल दी। वह सख्त भी था और मेहरबान भी। उसकी सिर्फ एक गलती थी। जूलियस सेकंड को पोप बनने देना। यही वह जगह है जहां उसने लोमड़ी जैसी
42:29
Speaker A
चालाकी नहीं दिखाई। उसने एक ऐसे आदमी को चुना जिसे उसने पहले चोट पहुंचाई थी। याद रखो कोई भी नया वादा पुरानी दुश्मनी को नहीं मिटा सकता। बड़े लोग पुराने जख्म कभी नहीं भूलते। सजारे की यही एक चूक उसे ले
42:46
Speaker A
डूबी और उसका राज खत्म हो गया। चैप्टर एट मामूली आदमी दो और तरीकों से राजा बन सकता है। यहां किस्मत या हुनर का ज्यादा हाथ नहीं होता। पहला गलत या बुरे काम करके। दूसरा अपने ही लोगों या जनता की पसंद से।
43:12
Speaker A
अभी हम पहले तरीके की बात करेंगे। इसमें मैं दो मिसाले दूंगा। एक पुरानी और एक नई। अगाथोकलीस यह कुम्हार का बेटा था जो राजा बना। अगाथोकलीज एक मामूली कुम्हार का बेटा था। वह बहुत घटिया इंसान था। पर उसका शरीर और
43:32
Speaker A
दिमाग बहुत ताकतवर था। वह फौज में भर्ती हुआ और अपनी मेहनत से बड़ा अफसर बन गया। फिर उसने तय किया कि वह किसी के नीचे काम नहीं करेगा। उसने अपनी फौज के साथ मिलकर एक चाल चली। एक सुबह
43:48
Speaker A
उसने शहर के बड़े लोगों और नेताओं की सभा बुलाई। इशारा मिलते ही उसके सिपाहियों ने सबको मार डाला। वह अकेला राजा बन गया। दुश्मनों ने उसे दो बार हराया और घेर लिया। फिर भी उसने हार नहीं मानी। उसने
44:04
Speaker A
अपनी आधी फौज शहर बचाने के लिए छोड़ी। बाकी आधी लेकर दुश्मन के घर यानी अफ्रीका पर हमला कर दिया। दुश्मन डर गया और उसे पूरा इलाका छोड़ना पड़ा। अगाथोकलीश की कामयाबी में किस्मत का हाथ नहीं था। उसने अपनी ताकत से हर कदम
44:24
Speaker A
बढ़ाया। पर अपने ही लोगों को मारना और दोस्तों को ठगना बहादुरी नहीं है। इससे आप इलाका तो जीत सकते हैं पर इज्जत नहीं कमा सकते। वह एक बेरहम राजा था इसलिए उसे नेक नहीं कहा जा सकता। दूसरी मिसाल है ओलिवरटो
44:43
Speaker A
की। अपनों को ठगने वाला राजा। हमारे वक्त में ओलवरोट की मिसाल है। वह अनाद था और उसके चाचा ने उसे पाला था। वह एक बड़ा फौजी खिलाड़ी बन गया। पर उसे दूसरों की गुलामी पसंद नहीं थी। उसने अपने
45:01
Speaker A
शहर फेरमों पर कब्जा करने की सोची। उसने अपने चाचा को चिट्ठी लिखी कि वह घर आना चाहता है। उसने कहा कि वह अपनी शान दिखाने के लिए 100 घुड़सवारों के साथ आएगा। चाचा ने उसका खूब स्वागत किया। ओलबररोटो ने एक बड़ी दावत दी। दावत के बाद
45:23
Speaker A
वह सबको एक कमरे में ले गया। एक अकेले कमरे में। जैसे ही सब बैठे, उसके छिपे हुए सिपाहियों ने सबको काट डाला। उसने अपने चाचा को भी नहीं छोड़ा। वह शहर का राजा बन गया। उसने नए नियम बनाए और फौज को मजबूत
45:40
Speaker A
किया। पर एक साल बाद सजारे बोरिया ने उसे भी धोखे से मार डाला। अब सवाल यह है कि इतने जुल्म के बाद भी यह लोग कैसे टिके? जबकि बाकी राजा छोटे से जुल्म के बाद भी गद्दी खो देते हैं। इसका
45:57
Speaker A
राज जुल्म के सही या गलत इस्तेमाल में है। सही तरीका है कि सारा जुल्म एक ही बार में कर दो। अपनी गद्दी पक्की करने के लिए जो भी बुरा करना है एक ही झटके में कर डालो। इसके बाद बार-बार लोगों को मत सताओ। फिर
46:16
Speaker A
जनता को फायदे पहुंचाना शुरू करो। गलत तरीका है कि शुरू में कम जुल्म करो पर धीरे-धीरे उसे बढ़ाते जाओ। ऐसे राजा के हाथ में हमेशा चाकू रहता है। जनता उसे कभी प्यार नहीं करती और वह खुद कभी चैन से
46:33
Speaker A
नहीं सो पाता। नया राजा बनने का पक्का नुस्खा यह है कि जब तुम कोई नया इलाका जीतो तो अपनी सारी मार एक ही बार में मारो ताकि लोगों को बार-बार चोट ना लगे। वे धीरे-धीरे उस दर्द को भूल जाएंगे। पर फायदे और अच्छी बातें
46:52
Speaker A
लोगों को धीरे-धीरे दो। जैसे कोई मीठी चीज धीरे-धीरे चखी जाती है। इससे उसका स्वाद जनता के मुंह में देर तक रहेगा। राजा को हमेशा अपने लोगों के साथ ऐसे रहना चाहिए कि वक्त कैसा भी हो वह बदले नहीं। अगर
47:09
Speaker A
मुसीबत आने पर तुम अच्छे बनोगे तो लोग उसे मजबूरी समझेंगे और तुम्हारी इज्जत नहीं करेंगे। चैप्टर नाइन जब कोई आम आदमी अपने ही लोगों के प्यार से राजा बनता है। इसे हम जनता का राज कहते हैं। इसके लिए ना बहुत बड़े हुनर की जरूरत
47:33
Speaker A
है ना किस्मत की। बस थोड़ी बहुत चालाकी और सही वक्त का साथ चाहिए। हर शहर में दो तरह के गुट होते हैं। एक तरफ आम लोग हैं, दूसरी तरफ ऊंचे लोग हैं। लोग चाहते हैं कि उन पर कोई हुकूमत या
47:50
Speaker A
जुल्म ना हो, पर ऊंचे लोग जनता पर हुकूमत करना और उन्हें दबाना चाहते हैं। इन दोनों की जििद से ही राजा पैदा होता है। जब ऊंचे लोग जनता को दबा नहीं पाते तो वह अपनी पसंद का राजा चुन लेते हैं। वे उसके
48:07
Speaker A
पीछे छिपकर अपना लालच पूरा करना चाहते हैं। इसी तरह जब जनता उनसे लोगों को रोक नहीं पाती तो वे अपना राजा चुनती है। वे चाहती हैं कि राजा का दम, उसकी पावर, उनकी रक्षा करें। जो राजा ऊंचे लोगों की मदद से गद्दी पाता
48:27
Speaker A
है उसे बड़ी दिक्कत होती है। उसके आसपास ऐसे लोग होते हैं जो खुद को उसके बराबर समझते हैं। राजा उन्हें अपनी मर्जी से चला नहीं सकता। पर जो जनता के प्यार से राजा बनता है वह अकेला मालिक होता है। वहां कोई
48:44
Speaker A
ऐसा नहीं होता जो उसका हुक्म मानने को तैयार ना हो। आप ऊंचे लोगों को बिना दूसरों का नुकसान किए खुश नहीं कर सकते। पर जनता को खुश करना बहुत आसान है। जनता का मकसद सही गलत के हिसाब से बेहतर है। वे बस यह चाहते हैं
49:03
Speaker A
कि उन पर जुल्म ना हो। राजा दुश्मन जनता से कभी खुद को बचा नहीं सकता क्योंकि वे बहुत ज्यादा हैं। पर वह दुश्मन ऊंचे लोगों को काबू कर सकता है क्योंकि वे थोड़े से हैं। दुश्मन जनता बस आपका साथ छोड़ [संगीत]
49:21
Speaker A
देगी पर दुश्मन उसे लोग आप पर हमला भी कर सकते हैं। वे चालाक होते हैं और डूबते जहाज से पहले ही कूद जाते हैं। राजा को हमेशा उन्हीं लोगों के साथ रहना पड़ता है। पर वह ऊंचे लोगों को जब चाहे
49:38
Speaker A
बदल सकता है। वह जब चाहे उनकी ताकत छीन सकता है या उन्हें रुतबा दे सकता है। मुझे लोगों को दो तरह से देखना चाहिए। पहले वे जो पूरी तरह आपके वादे और आपकी किस्मत से जुड़े हैं। अगर वे लालची नहीं
49:56
Speaker A
है तो उन्हें प्यार दें और उनकी इज्जत करें। दूसरे वे जो आपसे नहीं जुड़ना चाहते वे या तो डरपोक हो सकते हैं या फिर बहुत ही शातिर। जो डरपोक हैं उनसे मशवरा लें। वे अच्छे वक्त में आपके काम आएंगे। पर जो
50:14
Speaker A
जानबूझकर दूर रहते हैं वे आपके दुश्मन है। मुसीबत आने पर वही आपको बर्बाद करने में सबसे आगे होंगे। जो जनता के भरोसे राजा बना है, उसे उनसे दोस्ती रखनी चाहिए। वे बस यह चाहते हैं कि राजा उन पर जुल्म
50:33
Speaker A
ना करें। लेकिन जो ऊंचे लोगों की मदद से राजा बना है, उसे सबसे पहले जनता का दिल जीतना चाहिए। अगर आप उन्हें सहारा देंगे तो वे आपके वफादार बन जाएंगे। जब लोगों को वहां से प्यार मिलता है जहां
50:49
Speaker A
से उन्हें जुल्म की उम्मीद थी तो वे राजा पर जान छिड़कते हैं। नाबिस की मिसाल लीजिए। उसने पूरे ग्रीस और रोम की फौज का सामना किया। उसने अपने इलाके को बचा लिया। उसे बस कुछ ही ऊंचे लोगों को काबू करना
51:05
Speaker A
पड़ा। अगर जनता उसके खिलाफ होती तो वह कभी नहीं बच पाता। पुरानी कहावत है कि जनता पर भरोसा करना कीचड़ पर घर बनाना है। यह बात एक आम आदमी के लिए सच हो सकती है। पर एक हिम्मत वाले
51:22
Speaker A
राजा के लिए यह गलत है। अगर राजा निडर है और हुक्म देना जानता है तो जनता उसे कभी धोखा नहीं देगी। ऐसे राज को तब खतरा होता है जब राजा खुद हुकूमत करने के बजाय अफसरों के भरोसे बैठ
51:39
Speaker A
जाता है। मुसीबत के वक्त यह अफसर राजा का साथ छोड़ देते हैं या बगावत कर देते हैं। शांति के वक्त सब राजा के लिए मरने की बातें करते हैं। पर जब सच में मौत सामने आती है तो बहुत कम लोग साथ खड़े मिलते हैं। एक
51:58
Speaker A
समझदार राजा को ऐसा इंतजाम करना चाहिए कि जनता को हमेशा उसकी जरूरत रहे। अगर उन्हें राजा की जरूरत होगी तो वे हमेशा वफादार रहेंगे। चैप्टर 10 राजा के बारे में एक और बात जाननी जरूरी है। क्या राजा अपने पावर पर खड़ा हो सकता
52:24
Speaker A
है या उसे हमेशा दूसरों की मदद की जरूरत पड़ती है? अपने पावर पर खड़ा होना क्या है? अपने दम पर खड़ा होना क्या है?
52:35
Speaker A
जिसके पास ढेर सारा पैसा और लोग हो जो इतनी बड़ी फौज खड़ी कर सके कि मैदान में लड़ सके। लेकिन कुछ राजा मैदान में नहीं निकल पाते। उन्हें दीवारों के पीछे छिपकर अपना बचाव करना पड़ता है। ऐसे राजाओं को बस एक ही सलाह है। अपने शहर
52:56
Speaker A
की किलेबंदी मजबूत करो और खाना जमा रखो। पूरे इलाके को बचाने की फिक्र छोड़ दो। अगर आपका शहर मजबूत है और लोग आपसे प्यार करते हैं तो कोई भी दुश्मन आप पर हमला करने से पहले 100 बार सोचेगा।
53:14
Speaker A
लोग ऐसी लड़ाई से बचते हैं जिसमें खतरा और मुश्किल ज्यादा हो। जर्मनी के शहर बिल्कुल आजाद हैं। वे बड़े राजाओं की बात तभी मानते हैं जब उनका मन हो। वे किसी से नहीं डरते क्योंकि उनकी किलाबंदी बहुत पक्की है। उनके पास गहरी
53:33
Speaker A
खाइयां है और मजबूत दीवारें हैं। वहां साल भर का खाना पीना और ईंधन जमा रहता है। वे जनता को खाली नहीं बैठने देते और काम देते रहते हैं। वहां फौज की ट्रेनिंग को बहुत इज्जत दी जाती है। अगर शहर मजबूत है तो दुश्मन बेइज्जत होकर
53:55
Speaker A
ही लौटेगा। दुनिया में जैसा वक्त हो वैसी चाल चलनी पड़ती है। कोई भी फौज साल भर तक एक जगह घेरा नहीं डाल सकती। कुछ लोग कहेंगे कि बाहर की फसल जलते देख जनता राजा को छोड़ देगी। पर एक चालाक राजा उन्हें संभाल
54:14
Speaker A
लेगा। वह जनता को उम्मीद देगा कि यह बुरा वक्त छोटा है। वह उन्हें दुश्मन के लालच और बेरहमी से डराएगा। वह शोर मचाने वाले बागियों को होशियारी से चुप करा देगा। दुश्मन आते ही बाहर के खेत और घर जला देता
54:32
Speaker A
है। उस वक्त जनता गुस्से में होती है और राजा के लिए लड़ती है। कुछ दिनों बाद जब गुस्सा ठंडा पड़ता है, नुकसान हो चुका होता है, अब कोई चारा नहीं बचता। [संगीत] इसलिए लोग राजा के और करीब आते हैं।
54:48
Speaker A
उन्हें लगता है कि राजा अब उनका एहसानमंद है क्योंकि उनके घर और खेत राजा को बचाने में ही जले हैं। इंसान का नेचर है कि वे दूसरों की मदद करके वफादार बन जाते हैं। अगर राजा समझदार है तो वह शुरू से अंत तक
55:07
Speaker A
जनता का भरोसा जीत लेगा। चैप्टर 11 अब सिर्फ धर्म वाले इलाकों की बात बची है। इन्हें पाना ही सबसे बड़ी सरदर्दी है। इन्हें पाने के लिए या तो हुनर या ताकत चाहिए या अच्छी किस्मत। पर एक बार यह मिल
55:31
Speaker A
जाए तो इन्हें संभालना नहीं पड़ता। यह पुराने धर्म के नियमों पर टिके होते हैं। यह नियम इतने दमदार होते हैं कि राजा चाहे जैसा भी रहे गद्दी नहीं जाती। यह दुनिया के अनोखे राजा हैं। इनके पास इलाका है पर यह उसकी रक्षा नहीं करते। इनके पास
55:51
Speaker A
जनता है पर यह उन पर हुक्म नहीं चलाते। इनका इलाका कोई छीनता नहीं क्योंकि वहां कोई फौज नहीं होती। जनता को भी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वे ना तो राजा को छोड़ना चाहते हैं ना ही छोड़ सकते हैं। सिर्फ ऐसे ही राज सुरक्षित
56:10
Speaker A
और सुखी होते हैं। पर यह सब ऊपर वाले के हाथ में है। इसलिए इस पर ज्यादा बात करना बेवकूफी होगी। मगर कोई पूछ सकता है कि चर्च इतनी ताकतवर कैसे हो गई?
56:26
Speaker A
पहले इटली के छोटे राजा भी पोप को घास नहीं डालते थे। पर आज फ्रांस जैसा राजा भी चर्च से थर रहता है। चर्च ने ही फ्रांस को इटली से खदेड़ा और वेनिस [संगीत] को बर्बाद किया। फ्रांस के राजा चार्ल्स
56:42
Speaker A
के आने से पहले इटली में पांच बड़े खिलाड़ी थे। पोप, वेनिस, निपल्स, मिलान और फ्लोरेंस। इनका दो ही मकसद था। पहला कोई विदेशी फौज इटली में ना घुसने पाए। दूसरा कोई एक खिलाड़ी हद से ज्यादा ताकतवर ना हो जाए।
57:04
Speaker A
पोप को दबाने के लिए रोम के खानदानी सरदारों का इस्तेमाल होता था। और सिने और कोलोनी सी गुट हमेशा आपस में लड़ते थे। वे पोप की आंखों के सामने हथियार लेकर खड़े रहते थे। इससे पोप हमेशा कमजोर और लाचार
57:23
Speaker A
बना रहता था। पोप की उम्र भी कम होती थी। इसलिए वे कुछ बड़ा नहीं कर पाते थे। 10 साल के राज में कोई भी गुट पूरी तरह खत्म नहीं होता था। फिर पोप एलेक्जेंडर सिक्स आए। उन्होंने दुनिया को दिखाया कि पैसा और
57:41
Speaker A
फौज क्या कर सकते हैं। उन्होंने अपने बेटे से बोर्िया का इस्तेमाल किया। उनका मकसद अपने बेटे को बड़ा बनाना था। पर अंत में फायदा चर्च का ही हुआ। उनके बाद पोप जूलियस सेकंड गद्दी पर बैठे। उन्हें एक मजबूत चर्च और रोमानिया का
58:02
Speaker A
इलाका मिला। उन्होंने पैसा जमा करने के ऐसे तरीके निकाले जो पहले कभी नहीं देखे गए। उन्होंने ना केवल पुराने काम जारी रखे बल्कि उन्हें और आगे बढ़ाया। उन्होंने वेनिस को हराया और फ्रांस को बाहर खदेड़ दिया। उन्होंने रोम के गुटों को भी अपनी
58:22
Speaker A
हद में रखा। उन्होंने उन गुटों को अपने कार्डिनल्स नहीं बनाने दिए क्योंकि कार्डिनल्स ही झगड़ों की जड़ होते थे। वे अपनी सत्ता का खेल खेलने के लिए सरदारों को उकसाते हैं। अब पोप लियो टेन के हाथ में यह ताकत है।
58:40
Speaker A
उम्मीद है कि वे अपनी अच्छाई से चर्च को और भी महान बनाएंगे। मैंने आपको इलाकों के बारे में सब समझा दिया है। उनका नीव सही गलत कैसे होती है यह भी बता दिया। अब हमले और बचाव के तरीकों पर बात करेंगे।
59:02
Speaker A
किसी भी राज की नीव दो ही चीजें हैं। सही कानून और पक्की फौज। जहां फौज अच्छी नहीं, वहां कानून भी नहीं टिकता। जहां फौज मजबूत है, वहां कानून भी सही रहता है। अभी हम सिर्फ फौज की बात करेंगे।
59:21
Speaker A
राजा अपनी गद्दी चार तरह की फौज से बचाता है। अपनी खुद की फौज, भाड़े के सैनिक, मदद वाली फौज, मिलीजुली फौज। भाड़े के सैनिक और बाहरी मदद बेकार है। वे बहुत खतरनाक होते हैं। जो राजा इनके दम पर
59:41
Speaker A
टिका है, वह कभी सुरक्षित नहीं है। यह लोग आपस में लड़ते हैं और बहुत लालची होते हैं। वे दोस्तों के सामने शेर बनते हैं और दुश्मन के सामने गीदड़। वे ना भगवान से डरते हैं ना इंसान के वफादार होते हैं।
59:58
Speaker A
शांति के वक्त वे आपको लूटते हैं। जंग के वक्त दुश्मन आपको लूटता है। वे आपके लिए मरने को तैयार नहीं होते। उन्हें सिर्फ चंद रुपयों का लालच होता है। जब तक जंग नहीं होती, वे आपके सिपाही बने रहते हैं। जैसे ही लड़ाई शुरू होती है, वे
60:18
Speaker A
मैदान छोड़कर भाग जाते हैं। इटली की बर्बादी का यही सबसे बड़ा कारण है। यहां के राजाओं ने सालों तक भाड़े के सैनिकों पर भरोसा किया। फ्रांस का राजा चार्ल्स इटली को बड़ी आसानी से जीत ले गया। उसने बस चौक से निशान लगाए और घरों
60:40
Speaker A
पर कब्जा कर लिया। हमारे पापों की सजा हमें मिल गई। राजाओं की गलती की सजा राजाओं ने ही भुगती। भाड़े के सरदार दो तरह के होते हैं। या तो वे बहुत काबिल होंगे या फिर बिल्कुल नालायक। अगर वे काबिल है तो उन पर कभी
60:58
Speaker A
भरोसा मत करो। वे खुद राजा बनने का सपना देखेंगे। वे या तो आपको कुचलेंगे या आपके दुश्मनों से मिल जाएंगे। और अगर वे नालायक हुए तो वे आपको वैसे ही ले डूबेंगे। अगर आप पूछे कि क्या अपनी फौज वाला राजा
61:16
Speaker A
भी ऐसा ही करेगा तो मेरा जवाब है राजा को खुद मैदान में उतरना चाहिए। उसे खुद अपनी फौज का सेनापति बनना चाहिए। रोमो और स्पार्ट अपने खुद की फौज की वजह से आजाद रहे। स्विस लोग आज इसलिए आजाद हैं क्योंकि
61:33
Speaker A
वे खुद हथियार उठाते हैं। इतिहास गवाह है कि भाड़े के सैनिकों ने हमेशा धोखा दिया। फ्रांसिस्को सोजा ने अपने ही मालिकों को धोखा दिया। उसने मिलान की जनता को ही कुशल दिया। उसका बाप भी ऐसा ही था। उसने नेप्लुस की रानी को ऐन वक्त
61:53
Speaker A
पर अकेला छोड़ दिया। ऐसी फौज से जीत बहुत धीरे-धीरे और कम मिलती है। पर हार अचानक और बहुत भयानक आती है। इटली में भाड़े के सैनिकों का चलन बहुत बढ़ गया था। चर्च और छोटे इलाकों ने विदेशियों को काम पर रखना शुरू किया।
62:14
Speaker A
उन्होंने पैदल फौज का दम, उसका पावर कम कर दिया। वह सिर्फ घड़ सवारों को रखते थे क्योंकि उसमें पैसा और रुतबा ज्यादा था। 20,000 की फौज में 2000 पैदल सैनिक भी नहीं होते थे। उन्होंने जंग को एक मजाक बना दिया। वे आपस
62:33
Speaker A
में एक दूसरे को जान से नहीं मारते थे। वे बस सिपाही को पकड़ते थे और बिना पैसे लिए छोड़ देते थे। वे रात में हमला नहीं करते थे। वे ठंड में जंग नहीं लड़ते थे। उन्होंने खुद को बचाने के लिए यह नियम
62:47
Speaker A
बनाए थे। यही वजह है कि आज इटली गुलाम और बेइज्जत है। चैप्टर 13 मदद वाली फौज भी बेकार और सर दर्द होती है। यह वह फौज है जिसे आप किसी दूसरे राजा से उधार मांगते हैं। पोप जूलियस ने यही गलती की थी। फेरारा को
63:15
Speaker A
जिताने के लिए उन्होंने स्पेन से फौज मांगी। ऐसी फौज खुद के लिए अच्छी हो सकती है। पर बुलाने वाले के लिए यह हमेशा घाटे का सौदा है। इस फौज के साथ एक बड़ा खतरा जुड़ा है। अगर यह हार गए तो आप पूरी तरह खत्म। और
63:33
Speaker A
अगर यह जीत गए तो आप इनके कैदी बन जाएंगे। पोप जूलियस खुशकिस्मत थे कि वे बच गए। उनकी उधार की फौज हार गई। पर तभी स्विस लोग आ गए और उन्होंने दुश्मनों को खदेड़ दिया। जूलियस ना तो दुश्मनों के कैदी बने
63:51
Speaker A
ना ही अपनी मदद वाली फौज के। फ्लोरेंस के पास अपनी फौज नहीं थी। उन्होंने पीसा जीतने के लिए 10,000 फ्रेंच सिपाही बुलाए। यह उनकी सबसे बड़ी भूल थी। वे तब सबसे ज्यादा खतरे में थे। इसलिए जो राजा जीतना
64:08
Speaker A
नहीं चाहता वही ऐसी फौज बुलाए। यह भाड़े के सैनिकों से भी ज्यादा खतरनाक है। भाड़े के सैनिक लालची और डरपोक होते हैं। पर उधार वाली फौज एक साथ रहती है। वह किसी और का हुक्म मानती है। भाड़े के सैनिकों में
64:26
Speaker A
बुजदिली का खतरा है। मदद वाली फौज में उनकी बहादुरी ही आपके लिए आफत है। एक समझदार राजा हमेशा ऐसी फौज से बचता है। वह अपनी खुद की फौज खड़ी करता है। वह दूसरों की मदद से जीतने के बजाय अपनी फौज
64:44
Speaker A
के साथ हारना पसंद करेगा। दूसरों की ताकत से मिली जीत सच्ची जीत नहीं होती। सेजारी बोर्जिया की मिसाल लीजिए। उन्होंने पहले फ्रेंच सिपाही इस्तेमाल किए। फिर उन्हें डर लगा तो उन्होंने भाड़े के सैनिक रखे। जब उन्होंने देखा कि यह भी वफादार
65:03
Speaker A
नहीं है तो उन्होंने सबको खत्म कर दिया। फिर उन्होंने अपने खुद की फौज बनाई। उनका रुतबा तब बढ़ा जब सब ने देखा कि वे अपने फौज के अकेले मालिक हैं। सिराक्यूस के हीरो ने भी यही किया। उन्होंने देखा कि भाड़े के सैनिक किसी काम
65:22
Speaker A
के नहीं है। उन्होंने उन सबके टुकड़े-टुकड़े करवा दिए। फिर उन्होंने सिर्फ अपनी फौज के दम पर जंग लड़ी। दाऊद और गोलियत की कहानी याद कीजिए। जब दाऊद लड़ने चला तो राजा ने उसे अपने भारी हथियार दिए। दाऊद ने उन्हें उतार फेंका।
65:40
Speaker A
उसने कहा कि वह अपने गुलेल और चाकू से ही लड़ेगा। दूसरों के हथियार या तो गिर जाते हैं या बोझ बन जाते हैं या फिर आपको जकड़ लेते हैं। फ्रांस के राजा चार्ल्स सेवेन ने यह बात समझी थी। उन्होंने अपने खुद की पैदल फौज
65:59
Speaker A
बनाई। पर उसके बेटे लुई लेवन ने उसे खत्म कर दिया। लुई ने स्विस लोगों को काम पर रखना शुरू किया। आज फ्रांस की फौज बिना स्विस सैनिकों के कुछ नहीं कर पाती। उन्होंने अपनी ताकत कम कर ली और दूसरों पर निर्भर हो गए। कम अकल
66:18
Speaker A
वाले राजा को शुरू में सब अच्छा लगता है। वे इसके पीछे छिपा हुआ जहर नहीं देख पाते। यह वैसी ही बीमारी है जो शुरू में पता नहीं चलती। अगर राजा मुसीबत आने से पहले उसे ना भांप सके तो वह समझदार नहीं है।
66:36
Speaker A
रोम का राज तब गिरना शुरू हुआ जब उन्होंने गोथ लोगों को अपनी फौज में भर्ती करना शुरू किया। रोम की सारी ताकत धीरे-धीरे दूसरों के पास चली गई। मेरा यही कहना है कि अपनी फौज के बिना कोई राजा सुरक्षित नहीं है। वह पूरी तरह अपनी
66:56
Speaker A
किस्मत पर टिका होता है। उसके पास अपनी रक्षा करने का दम नहीं होता। समझदार लोग कहते हैं कि दूसरों की ताकत पर टिकी इज्जत सबसे कमजोर होती है। अपनी फौज वही है जिसमें आपके अपने लोग नागरिक और गुलाम हो। बाकी सब तो भाड़े का बोझ है।
67:23
Speaker A
चैप्टर 14 राजा का सिर्फ एक ही मकसद और काम होना चाहिए। उसे दिन रात बस जंग और उसके कायदे सीखने चाहिए। यही वह अकेला हुनर है जो राजा को शोभा देता है। इस हुनर में इतना दम है, इतनी
67:42
Speaker A
[संगीत] पावर है कि यह खानदानी राज को बचाए रखता है। इतना ही नहीं एक मामूली आदमी भी इस हुनर से राजा बन सकता है। [संगीत] इसके उलट जब राजा जंग से ज्यादा ऐशो आराम की सोचता है तो उसका राज छीन
68:00
Speaker A
जाता है। सत्ता का खेल हारने की पहली वजह जंग को भूल जाना है और इसे जीतने का इकलौता रास्ता इस हुनर का मास्टर बनना है। फ्रांसिस्को सोजा फौजी जज्बे की वजह से मिलान का मालिक बना। उसके बेटों ने जंग की
68:20
Speaker A
मुश्किलों से जी चुराया। नतीजा यह हुआ कि वे राजा से मामूली आदमी बन गए। बिना हथियार वाले राजा की दुनिया में कोई इज्जत नहीं करता। यह एक ऐसी बेइज्जती है जिससे राजा को हमेशा बचना चाहिए। हथियार वाले और बिना हथियार वाले आदमी में
68:40
Speaker A
कोई बराबरी नहीं होती। यह नामुमकिन है कि हथियार वाला आदमी बिना हथियार वाले की बात माने। या फिर बिना हथियार वाला राजा अपने हथियार बंद नौकरों के बीच सुरक्षित रहे। एक से नफरत होगी और दूसरे में शक। ऐसे में
68:59
Speaker A
वे साथ काम नहीं कर सकते। जिस राजा को जंग की समझ नहीं, उसे उसकी फौज भाव नहीं देगी। वह कभी अपने सिपाहियों पर भरोसा नहीं कर पाएगा। राजा को शांति के वक्त भी जंग का ख्याल दिल से नहीं निकालना चाहिए। शांति में उसे
69:19
Speaker A
जंग से भी ज्यादा तैयारी करनी चाहिए। यह दो तरह से होता है। दम और पढ़ाई। एक्शन और स्टडी से। दम यानी एक्शन। राजा को अपनी फौज को हमेशा तैयार और मुस्तैद रखना चाहिए। उसे लगातार शिकार पर जाना चाहिए।
69:40
Speaker A
इससे उसका शरीर मुश्किलों का आदि बनेगा। उसे अपने इलाके की जमीन की पूरी परख हो जाएगी। कहां पहाड़ हैं, कहां घाटियां खुलती हैं और मैदान कहां है। उसे सब पता होना चाहिए। उसे नदियों और दलदलों के मिजाज को गहराई से समझना चाहिए।
70:02
Speaker A
यह जानकारी दो तरह से काम आती है। पहला वह अपने इलाके की हिफाजत बेहतर कर पाएगा। दूसरा एक इलाके की समझ से वह दूसरे नए इलाके को भी जल्दी समझ लेगा। टस्कनी की नदियां और पहाड़ दूसरे देशों जैसे ही होते हैं। जिस राजा में यह हुनर
70:23
Speaker A
नहीं, वह एक अच्छा सेनापति कभी नहीं बन सकता। यही हुनर उसे दुश्मन पर अचानक हमला करना और सही जगह डेरा डालना सिखाता है। फिलोपामिन शांति के वक्त भी सिर्फ जंग की बातें करता था। दोस्तों के साथ टहलते हुए वह अचानक रुक कर
70:45
Speaker A
पूछता था अगर दुश्मन उस पहाड़ी पर हो और हम यहां हो तो फायदा किसका होगा?
70:53
Speaker A
हमें हमला करना हो तो हमारी फौज की चाल क्या होगी? वह चलते फिरते जंग के हर खतरे पर बहस करता था। वह दूसरों की राय सुनता और अपनी बात दलीलों के साथ रखता था। इस लगातार दिमागी कसरत की वजह से जंग में
71:12
Speaker A
कोई भी मुसीबत उसे चौंका नहीं पाती थी। दूसरा है पढ़ाई यानी स्टडी। दिमाग तेज करने के लिए राजा को इतिहास पढ़ना चाहिए। उसे देखना चाहिए कि पुराने बड़े मास्टर्स जंग में कैसे चले। उनकी जीत और हार के कारणों को गौर से समझना चाहिए।
71:35
Speaker A
हार से बचना और जीत की नकल करना ही अकलमंदी है। बड़े लोग हमेशा अपने से बड़े किसी नामी मास्टर्स की नकल करते थे। सिकंदर एलेक्जेंडर ने अकेलीस के कारनामों को मन में रखा। सीजर ने एलेक्जेंडर की चाले सीखी। सीपीओ ने सारस के नक्शे कदम पर
71:58
Speaker A
चलकर इज्जत पाई। जेनोफोन की लिखी सारस की कहानी पढ़कर ही सीपीओ महान बना। उसने सास की तरह ही दरियादिली और इंसानियत अपनाई। एक समझदार राजा को ऐसे ही नियमों पर चलना चाहिए। उसे शांति के वक्त सुस्त नहीं बैठना चाहिए। उसे अपनी ताकत और हुनर को
72:21
Speaker A
बढ़ाते रहना चाहिए। ताकि जब वक्त खराब हो तो वह तैयार मिले। अगर किस्मत पलटे तो वह उसके हर वॉर को रोकने का दम रखता हो। चैप्टर 15 अब देखो कि राजा को अपने लोग या जनता और दोस्तों से कैसे पेश आना चाहिए।
72:48
Speaker A
कई लोगों ने सत्ता के बारे में बड़ी-बड़ी और बनावटी बातें लिखी हैं। पर मैं तुम्हें कोरा ज्ञान नहीं बल्कि कड़वा सच बताऊंगा। लोग इलाकों के बारे में ऐसे सपने देखते हैं जो कभी सच नहीं होते। लोग असल में कैसे जीते हैं और उन्हें कैसे
73:07
Speaker A
जीना चाहिए इसमें बड़ा फर्क है। जो राजा हकीकत को छोड़कर ख्यालों के पीछे भागता है वह खुद को बर्बाद कर लेता है। अगर तुम हर हाल में सिर्फ अच्छा बनना चाहोगे तो तुम मारे जाओगे। क्योंकि यह दुनिया बहुत बुरी है और यहां
73:27
Speaker A
बुरे लोगों की भीड़ है। इसलिए अपना राज बचाने के लिए राजा को बुरा बनना भी आना चाहिए। उसे पता होना चाहिए कि कब अच्छाई का नकाब पहनना है और कब चालाकी दिखानी है। राजा जब ऊंची गद्दी पर बैठता है तो लोग
73:47
Speaker A
उसकी आदतों पर नजर रखते हैं। कोई उसे बहुत दानी कहता है तो कोई उसे लालची समझता है। कोई उसे दयालु मानता है तो कोई उसे बहुत बेरहम कहता है। कोई उसे सच्चा कहता है तो कोई उसे धोखेबाज कहता है। कोई उसे बहादुर
74:06
Speaker A
कहता है तो कोई उसे डरपोक समझता है। यह सुनने में बहुत अच्छा लगता है कि राजा में सिर्फ अच्छी बातें हो पर कोई भी इंसान पूरी तरह नेक नहीं हो सकता क्योंकि वक्त और हालात ऐसे नहीं होते। राजा को इतना समझदार होना चाहिए कि वह उन
74:26
Speaker A
बुराइयों से बचे जिनसे उसका राज छीन सकता है। पर अगर कोई ऐसी बुराई है जिससे उसका इलाका सुरक्षित रहता है तो उसे करने में शर्म नहीं करनी चाहिए। बहुत सी बातें जो बाहर से अच्छाई लगती हैं वे राजा को डुबो देती हैं। और बहुत सी
74:47
Speaker A
बातें जो बुराई लगती हैं, वही राजा को ताकत और सुख देती हैं। सत्ता का खेल दिल से नहीं दिमागी दाव पेच से खेला जाता है। चैप्टर 16 अगर तुम दानवीर कहलाना चाहते हो लिबरल तो यह महंगा पड़ेगा। शुरुआत में लोग तुम्हारी बहुत तारीफ
75:14
Speaker A
करेंगे। पर शान दिखाने के चक्कर में तुम्हारा खजाना खाली हो जाएगा। अपना रुतबा बचाने के लिए तुम्हें और पैसा चाहिए होगा। फिर तुम जनता पर भारी टैक्स लगाओगे। इससे लोग तुमसे नफरत करने लगेंगे। गरीब राजा की दुनिया में कोई इज्जत नहीं
75:34
Speaker A
करता। तुमने दान देकर थोड़े लोगों को खुश किया। पर तुमने बहुत सारे लोगों को दुखी कर दिया। अब मुसीबत आते ही तुम खतरे में पड़ जाओगे। जब तुम अपना हाथ रोकोगे तो लोग तुम्हें कंजूस कहेंगे। इसलिए समझदार राजा को कंजूस
75:53
Speaker A
कहलाने से नहीं डरना चाहिए। वक्त बीतने पर लोग देखेंगे कि तुम अपना काम बखूबी चलाते हो। तुम बिना नया टैक्स लगाए अपनी फौज का खर्चा उठाते हो। तुमने जनता को लूटे बिना अपना इलाका बचाया। तब लोग तुम्हें असली दानवीर मानेंगे। क्योंकि
76:14
Speaker A
तुमने उन हजारों का पैसा बचाया जिन्हें तुमने लूटा नहीं। तुमने सिर्फ उन चंद लोगों को नहीं दिया जो तुम्हारे पीछे घूमते थे। हमारे वक्त में पोप जूलियस ने यही किया। वे दानवीर बनकर ही गद्दी तक पहुंचे थे। पर
76:32
Speaker A
जंग लड़ने के लिए उन्होंने कंजूस कहलाना पसंद किया। फ्रांस के राजा ने बहुत सी लड़ाईयां लड़ी। पर उन्होंने अपनी जनता पर कभी फालतू बोझ नहीं डाला। उन्होंने अपनी कंजूसी से ही फौज का खर्च निकाला। अगर तुम अभी राजा बनने की राह पर हो तो
76:51
Speaker A
हाथ खोलना ठीक है। पर अगर तुम राजा बन चुके हो तो दान देना बहुत खतरनाक है। सारस और सीजर ने खूब दौलत लुटाई थी। पर याद रहे वह दौलत उनकी अपनी नहीं बल्कि दुश्मनों से लूटी हुई थी। दूसरों का माल
77:10
Speaker A
लुटाने से तुम्हारी इज्जत बढ़ती है। पर अपना खजाना खाली करने से तुम खुद को खत्म करते हो। दान देना एक ऐसी आदत है जो खुद को ही खा जाती है। तुम जितना दोगे उतना ही देने के काबिल नहीं रहोगे। या तो तुम गरीब होकर
77:28
Speaker A
बेइज्जत हो जाओगे या फिर लुटेरे बनकर लोगों की नफरत पाओगे। राजा को नफरत और बेइज्जती से हर हाल में बचना चाहिए। कंजूस कहलाना बेहतर है क्योंकि इसमें सिर्फ थोड़ी बेइज्जती है। वरदान के चक्कर में तुम लुटेरे बनोगे तो
77:47
Speaker A
नफरत और बेइज्जती दोनों मिलेगी। दानी कहलाना अच्छी बात है। पर अगर आप दिखावा नहीं करेंगे तो नाम नहीं होगा। और नाम बनाने के चक्कर में सारा माल खत्म हो [संगीत] जाएगा। आखिर में आपको लोगों पर भारी टैक्स लगाना पड़ेगा। इससे लोग आपसे
78:08
Speaker A
नफरत करने लगेंगे। राजा गरीब हो जाएगा और उसकी कोई इज्जत नहीं रहेगी। दानी बनने के चक्कर में आप थोड़े लोगों को खुश करेंगे। पर आप बहुत से लोगों का दिल दुखाएंगे। जैसे ही कोई खतरा आएगा आप डूब जाएंगे।
78:25
Speaker A
इसलिए समझदार राजा को कंजूस कहलाने से नहीं डरना चाहिए। वक्त के साथ लोग आपकी इज्जत करेंगे। वे देखेंगे कि आपके पास अपना काम चलाने का दम है। आप बिना जनता को लूटे अपनी फौज पाल सकते हैं। आप उन हजारों के
78:44
Speaker A
लिए दानी हैं जिन्हें आपने लूटा नहीं। आप सिर्फ उन चंद लोगों के लिए कंजूस हैं जिन्हें आपने कुछ दिया नहीं। हमारे वक्त में सिर्फ कंजूस कहलाने वाले राजा ही टिक पाए। बाकी सब बर्बाद हो गए। पोप जूलियस सेकंड ने गद्दी पाने के लिए
79:05
Speaker A
दानी होने का नाटक किया। पर जंग लड़ने के लिए उन्होंने खूब पैसा बचाया। उन्होंने जनता पर बोझ डाले बिना कई लड़ाईयां लड़ी। स्पेन के राजा ने भी कंजूसी की वजह से बड़े इलाके जीते। अगर राजा को लुटेरा नहीं
79:22
Speaker A
बनना तो उसे कंजूस कहलाने की परवाह नहीं करनी चाहिए। यही वह बुराई है जो उसे सत्ता का खेल जीतने में मदद करती है। अगर आप राजा बनना चाहते हैं तो खूब दान दें। सीजर ने ऊपर पहुंचने के लिए यही
79:40
Speaker A
किया। पर एक बार गद्दी मिल जाए तो हाथ रोक लेना चाहिए। अगर सीजर राजा बनने के बाद भी लुटाता रहता तो उसका राज डूब जाता। राजा तीन तरह का पैसा खर्च करता है। उसका अपना पैसा उसकी जनता का पैसा और दूसरों या
80:00
Speaker A
दुश्मनों का लूटा हुआ माल। पहले दो मामलों में उसे बहुत सोच समझकर चलना चाहिए। पर तीसरे मामले में यानी दुश्मन से लूटे माल को लुटाने में कभी पीछे ना हटे। साइरस और अलेक्जेंडर ने दूसरों का माल ही लुटाया था। इससे आपकी
80:20
Speaker A
इज्जत बढ़ती है। कम नहीं होती। सिर्फ अपना खजाना लुटाने से राजा कमजोर होता है। दान देना खुद को खत्म करने जैसा है। आप जितना देंगे उतना ही देने के काबिल नहीं रहेंगे। आप या तो गरीब होकर बेइज्जत होंगे या
80:38
Speaker A
लुटेरे बनकर नफरत पाएंगे। राजा को नफरत और बेइज्जती से हर हाल में बचना चाहिए। कंजूस कहलाना बेहतर है क्योंकि इसमें सिर्फ शर्म है। नफरत [संगीत] नहीं। लुटेरा बनने से शर्म और नफरत दोनों मिलती है। चैप्टर 17 हर राजा चाहता है कि लोग उसे रहम दिल कहे।
81:11
Speaker A
कोई भी बेरहम कहलाना पसंद नहीं करता। पर रहम का इस्तेमाल बहुत सोच समझकर करना चाहिए। सिजारे बोर्िया को लोग बेरहम कहते थे। पर उसी बेरहमी ने रोमानिया में शांति ला दी। उसने पूरे इलाके को वफादार बना दिया। फ्लोरेंस के लोग रहम दिल बनना चाहते थे।
81:35
Speaker A
उन्होंने पिस्तोया शहर को दंगों में बर्बाद होने दिया। राजा को बेरहम कहलाने से डरना नहीं चाहिए। बस उसके लोग एक रहे और वफादार बने रहे। चंद गुनहगारों को सजा देना असल में रहम है। वरना ढील देने से लूट और कत्ल मचते
81:55
Speaker A
हैं। इससे पूरी जनता का नुकसान होता है। राजा की सजा सिर्फ एक इंसान को लगती है। एक नए राजा के लिए बेरहम होना मजबूरी है। नया इलाका हमेशा खतरों से भरा होता है। वर्जिल ने भी अपनी किताब में यही लिखा है।
82:14
Speaker A
नया राज बचाने के लिए सख्ती दिखानी ही पड़ती है। फिर भी राजा को हर बात पर यकीन नहीं करना चाहिए। उसे बिना सोचे समझे हमला नहीं करना चाहिए। राजा को बहुत ज्यादा भरोसा भी नहीं करना चाहिए और उसे बहुत ज्यादा शक भी नहीं करना
82:33
Speaker A
चाहिए। यहां एक बड़ा सवाल आता है। राजा के लिए प्यार पाना बेहतर है या डर? वैसे तो दोनों होना सबसे अच्छा है। पर दोनों एक साथ मिलना बहुत मुश्किल है। इसलिए अगर एक को चुनना हो तो डर ज्यादा सुरक्षित है। इंसान
82:54
Speaker A
की नेचर बहुत खराब होती है। वे मतलबी, डरपोक, झूठे और लालची होते हैं। जब तक आपका वक्त अच्छा है, वे आपके सगे हैं। वे अपनी जान और माल देने के वादे करेंगे। पर जैसे ही सच में जरूरत पड़ती
83:12
Speaker A
है, वे भाग जाते हैं। जो राजा सिर्फ वादों पर भरोसा करता है, वह बर्बाद हो जाता है। पैसे से खरीदी गई दोस्ती कभी काम नहीं आती। लोग प्यार करने वाले राजा को धोखा देने से नहीं डरते। पर वे डर वाले राजा को चोट
83:31
Speaker A
नहीं पहुंचाते। प्यार एक कमजोर धागा है। जिसे इंसान अपने लालच के लिए तोड़ देता है। पर सजा का डर हमेशा बना रहता है। राजा को ऐसा डर पैदा करना चाहिए कि लोग नफरत ना करें। नफरत से बचना बहुत आसान है।
83:51
Speaker A
बस लोगों की धन दौलत पर हाथ मत डालो। उनकी औरतों से दूर रहो। अगर किसी की जान लेनी हो तो उसका पक्का कारण होना चाहिए। इंसान अपने बाप की मौत भूल सकता है। पर वह अपनी छीनी गई जायदाद कभी नहीं भूलता। लूट
84:09
Speaker A
के बहाने तो हमेशा मिल जाते हैं पर जान लेने का कारण जल्दी नहीं मिलता। जब राजा फौज के साथ हो तो उसे बेरहम कहलाने की परवाह नहीं करनी चाहिए। बिना बेरहमी के फौज कभी एक होकर नहीं लड़ती। हेनबल की मिसाल लीजिए। उसकी फौज
84:30
Speaker A
में अलग-अलग तरह के हजारों लोग थे। फिर भी उसकी फौज में कभी आपस में झगड़ा नहीं हुआ। इसकी वजह उसकी भयानक बेरहमी थी। इसी वजह से सिपाही उससे डरते थे और उसकी इज्जत करते थे। दूसरी तरफ सीपीओ बहुत ही नेक
84:47
Speaker A
इंसान था। पर स्पेन में उसकी फौज ने बगावत कर दी। वह बहुत ज्यादा नरम राजा था। उसने सिपाहियों को बहुत ढील दे दी थी। इसी वजह से उसे फौज बिगाड़ने वाला कहा गया। अगर वह अपनी नरमी नहीं छोड़ता तो उसकी इज्जत खत्म
85:04
Speaker A
हो जाती। नतीजा यह है कि प्यार करना लोगों की मर्जी है। पर डरना राजा के हाथ में है। एक समझदार राजा वही करता है जो उसके अपने काबू में हो। बस उसे लोगों की नफरत से बचकर रहना चाहिए।
85:25
Speaker A
चैप्टर 18 सब मानते हैं कि राजा को सच्चा और ईमानदार होना चाहिए। पर असलियत में बड़े राजाओं ने हमेशा चालाकी से काम लिया है। उन्होंने लोगों को अपनी बातों में उलझाया और जीत हासिल की। अंत में वही जीता जिसने
85:44
Speaker A
वादों की परवाह नहीं की। लड़ने के दो तरीके होते हैं। एक है कानून जो इंसानों का तरीका है। दूसरा है ताकत फोर्स जो जानवरों का तरीका है। अक्सर कानून से काम नहीं बनता। तब राजा को जानवरों वाला तरीका अपनाना पड़ता है।
86:05
Speaker A
पुराने मास्टर्स राजाओं को एक आधे जानवर के पास भेजते थे। इसका मतलब है कि राजा को इंसान और जानवर दोनों बनना होगा। अगर आप सिर्फ एक बनेंगे तो राज ज्यादा दिन नहीं टिकेगा। जब जानवर बनने की बारी आए तो शेर और
86:26
Speaker A
लोमड़ी को चुनो। शेर खुद को जाल से नहीं बचा सकता। लोमड़ी खुद को भेड़ियों से नहीं बचा सकती। जाल पहचानने के लिए लोमड़ी बनो। भेड़ियों को डराने के लिए शेर बनो। जो राजा सिर्फ शेर की तरह लड़ते हैं, वे
86:43
Speaker A
नासमझ हैं। एक चतुर राजा को अपना वादा तब तोड़ देना चाहिए जब वह उसके खिलाफ जाए। अगर वह वादा करने की वजह ही खत्म हो गई हो तो उसे क्यों निभाना?
86:58
Speaker A
अगर सब लोग अच्छे होते तो यह बात गलत होती। पर लोग बुरे हैं और वे अपना वादा तुमसे नहीं निभाएंगे। तो तुम्हें भी उनके साथ सच्चा बनने की जरूरत नहीं है। राजा के पास वादा तोड़ने के 100 बहाने
87:15
Speaker A
हमेशा तैयार रहते हैं। लोमड़ी बनने के लिए आपको बड़ा कलाकार होना पड़ता है। दुनिया के लोग बहुत भोले होते हैं। जो धोखा देना चाहता है उसे कोई ना कोई उल्लू बनने वाला मिल ही जाता है। एलेक्जेंडर सिक्स ने सारी जिंदगी सिर्फ
87:35
Speaker A
लोगों को धोखा दिया। वे बड़ी-बड़ी कसमें खाते थे पर निभाते कभी नहीं थे। फिर भी वे हमेशा कामयाब रहे क्योंकि वे लोगों की कमजोरी जानते थे। राजा के लिए हर बात में सचमुच अच्छा होना जरूरी नहीं है। पर उसे अच्छा दिखने का
87:54
Speaker A
हुनर आना चाहिए। हमेशा दयालु, सच्चा और धार्मिक होना नुकसानदेह हो सकता है। पर ऐसा दिखना बहुत काम आता है। राजा का दिमाग ऐसा हो कि वह जैसा वक्त हो वैसा बदल जाए। जब तक हो सके सही रहे पर जरूरत पड़े तो बुरा बनना सीखे।
88:18
Speaker A
राजा के मुंह से कभी कोई गलत बात नहीं निकलनी चाहिए। उसे देखने वाले को लगना चाहिए कि वह रहम दिल और धार्मिक है। धार्मिक दिखना सबसे ज्यादा जरूरी है। लोग अक्सर आंखों देखी पर यकीन करते हैं। सच को
88:36
Speaker A
कम ही लोग जान पाते हैं। सब देखते हैं कि आप क्या दिख रहे हैं। पर आप क्या हैं यह कोई नहीं जानता। अंत में दुनिया सिर्फ नतीजे देखती है। रिजल्ट अगर राजा अपना इलाका जीत ले और बचा ले तो सब उसकी तारीफ
88:53
Speaker A
करेंगे। लोग हमेशा कामयाबी के पीछे भागते हैं और इस दुनिया में आम लोगों की ही भीड़ है। एक राजा ऐसा भी है जो हमेशा शांति और वादों की बात करता है। पर असल में वह इन दोनों का दुश्मन है। अगर वह अपने वादे निभाता है
89:12
Speaker A
तो उसका राज कब का चला गया होता। चैप्टर 19 राजा को दो चीजों से सबसे ज्यादा बचना चाहिए। नफरत और बेइज्जती, हेट्रिड और कंटेंप्ट। अगर आप इनसे बच गए तो बाकी खतरों की फिक्र मत करिए। राजा के लिए नफरत लालच से पैदा
89:40
Speaker A
होती है। लोगों की धन दौलत और उनकी औरतों पर हाथ मत डालो। जब आप लोगों की चीजें नहीं छीनते तो लोग खुश रहते हैं। फिर आपको बस कुछ मुट्ठी भर लालची लोगों को काबू करना होगा। इरादा बदलते रहना बेइज्जती की सबसे बड़ी
90:00
Speaker A
जड़ है। बुजदिली और ढीलापन राजा को लोगों की नजर में हल्का बनाता है। राजा को शेर की तरह मजबूत और निडर दिखना चाहिए। आपके फैसले पत्थर की लकीर होने चाहिए। ऐसी इज्जत बनाइए कि कोई आपको ठगने की ना सोचे।
90:20
Speaker A
जिस राजा की इज्जत बड़ी हो उसके खिलाफ साजिश नहीं होती। दुश्मन उस पर हमला करने से पहले 100 बार सोचेगा। राजा को दो तरफ से डर होना चाहिए। एक बाहर के दुश्मनों से दूसरा अपने ही लोगों से। बाहर से बचने के लिए अच्छी फौज और पक्के
90:42
Speaker A
दोस्त रखें। अगर बाहर शांति है तो अंदर भी सब ठीक [संगीत] रहेगा। साजिश से बचने का, कास्परेसी से बचने का सबसे बड़ा इलाज क्या है?
90:55
Speaker A
लोग आपसे नफरत ना करें। साजिश करने वाला सोचता है कि राजा को मारकर लोग खुश होंगे। पर अगर उसे लगे कि लोग भड़क जाएंगे तो उसकी हिम्मत टूट जाएगी। साजिश करना बहुत ही मुश्किल काम है। गद्दार को राजा से
91:12
Speaker A
इनाम मिलने का पूरा यकीन होता है। पर साजिश करने वाले के पास सिर्फ डर होता है। अगर जनता का साथ है तो साजिश नामुमकिन है। बोलोनिया के अनबाले की मिसाल लीजिए। दुश्मनों ने उन्हें धोखे से मार डाला। पर
91:32
Speaker A
लोग उनसे बहुत प्यार करते थे। जनता ने उठकर उन सभी हत्यारों को जान से मार दिया। जनता का प्यार ही राजा की असली और मजबूत ढाल है। फ्रांस का राज बहुत चालाकी से बनाया गया है। वहां की संसद एक बीच का रास्ता है।
91:52
Speaker A
ऊंचे लोग बहुत लालची और बदतमीज होते हैं। लोग उनसे नफरत करते हैं। राजा ने बीच में एक फैसला करने वाला बिठा दिया। संसद बड़े लोगों को दबाती है और छोटे लोगों को बचाती है। इससे राजा पर कोई इल्जाम नहीं आता।
92:12
Speaker A
बुरे काम दूसरों से करवाइए। अच्छे काम खुद करिए। ऊंचे लोगों की इज्जत करिए पर जनता को मत सताइए। कुछ लोग कहेंगे कि रोम के अच्छे राजा भी मारे गए। अगली बार मैं बताऊंगा कि वे क्यों नाकाम हुए। हम यहां मार्कस से लेकर मैक्सिमिनस तक के
92:33
Speaker A
राजाओं की बात करेंगे। रोम के राजाओं के सामने एक तीसरी बड़ी मुश्किल थी। उन्हें अपनी फौज की बेरहमी और लालच को झेलना पड़ता था। इस चक्कर में कई राजा बर्बाद हो गए। लोग शांति चाहती थी इसलिए उन्हें सीधा राजा पसंद था। पर फौज को ऐसा
92:54
Speaker A
राजा चाहिए था जो जंगबाज और लालची हो। फौज चाहती थी कि राजा जनता पर जुल्म करें ताकि फौजियों को दोगुनी तनख्वाह मिले और वे अपनी मर्जी कर सके। जो राजा फौज पर अपना दम नहीं दिखा सके वे मारे गए। नए राजाओं को अक्सर जनता के
93:16
Speaker A
मुकाबले फौज को खुश करना पड़ा। राजा को किसी ना किसी की नफरत तो झेलनी ही पड़ती है। पर उसे सबसे ताकतवर गुट की नफरत से हर हाल में बचना चाहिए। इसलिए नए राजा फौज का साथ देना बेहतर समझते थे।
93:35
Speaker A
मार्कस परनेक्स और अलेक्जेंडर नेक दिल राजा थे। मार्कस को छोड़कर इन सबका बुरा अंत हुआ। मार्कस का खानदानी राज था इसलिए उसकी इज्जत थी। उसने अपने हुनर से फौज और जनता दोनों को उनकी औकात में रखा। पोर्टनेक्स को फौज की मर्जी के खिलाफ राजा
93:58
Speaker A
बनाया गया था। फौज को पुराने राजा के वक्त ऐश करने की आदत थी। पिनेक्स उन्हें ईमानदारी से चलाना चाहता था जो उन्हें पसंद नहीं आया। फौज उससे नफरत करने लगी और उसे बूढ़ा समझकर उसकी बेइज्जती की। याद रहे अच्छे काम करने से भी नफरत मिल सकती
94:18
Speaker A
है। सत्ता का खेल बचाने के लिए राजा को अक्सर बुरा बनना पड़ता है। एलेक्जेंडर इतना नेक था कि उसने 14 साल में किसी को बिना जांच के नहीं मारा। पर लोगों ने उसे अपनी मां के पल्लू से बंधा
94:34
Speaker A
हुआ और डरपोक समझा। उसकी बेइज्जती हुई और फौज ने उसे मार डाला। अब सेवरस की बात करते हैं। वह बहुत बेरहम और लालची था। उसने फौज को खुश रखने के लिए जनता पर बहुत जुल्म किए। पर उसमें इतना दम
94:51
Speaker A
था कि सब उससे डरते थे। वह एक निडर शेर और चालाक लोमड़ी बनना जानता था। सेवरिस ने बदला लेने के बहाने अपनी फौज को रोम पहुंचाया। रोम पहुंचते ही वह खुद राजा बन गया। उसके सामने दो बड़े दुश्मन थे। नाइजर और
95:14
Speaker A
अल्बिनस। उसने दोनों से एक साथ लड़ना ठीक नहीं समझा। उसने अल्बिनस को दोस्ती के वादे में फंसाया। उसे सीजर का खिताब देकर अपना साथी बना लिया। जब अल्बिनस बेफिक्र हो गया तब सेवरस ने नाइजर को जंग में मार दिया। काम
95:34
Speaker A
खत्म होते ही उसने अल्बिनस पर अपनी जान लेने की साजिश का इल्जाम लगाया। उसने अल्बिनस को भी मौत के घाट उतार दिया। सेवरस एक ताकतवर शेर और शातिर लोमड़ी था। उसकी इज्जत इतनी थी कि फौज ने उसे कभी
95:51
Speaker A
धोखा नहीं दिया। एंटोनिस बहुत बड़ा फौजी था। वह मेहनत से नहीं डरता था। वह सादा खाना खाता था। इसलिए फौज उसे प्यार करती थी। पर वह बहुत ही बेरहम था। उसने रोम और एलेक्जेंड्रिया में कत्लेआम मचाया। पूरी दुनिया उससे नफरत करने लगी। उसके
96:14
Speaker A
अपने सिपाही भी उससे डरने लगे। आखिर में एक सिपाही ने उसे मार डाला। राजा को एक बात याद रखनी चाहिए। जो आदमी मरने से नहीं डरता, वह राजा को मार सकता है। पर ऐसे वाक्य बहुत कम होते हैं। राजा को बस अपने
96:32
Speaker A
करीबियों की इज्जत करनी चाहिए। एंटोनियस ने एक सिपाही के भाई को मार दिया था। फिर भी उस सिपाही को अपनी फौज में रखा। यह उसकी बड़ी गलती थी। यही उसकी बर्बादी का कारण बनी। कोमोडस के लिए राज करना बहुत आसान था। वह
96:50
Speaker A
मार्कस का बेटा था। उसे गद्दी खानदानी राज में मिली थी। उसे बस अपने बाप के रास्ते पर चलना था। पर वह बहुत ही घटिया और बेरहम इंसान था। उसने फौज को बिगाड़ दिया। वह जनता को लूटने लगा। वह अपनी इज्जत भूलकर
97:06
Speaker A
तमाशा दिखाने लगा। वह अखाड़े में पहलवानों के साथ लड़ने चला जाता था। इस वजह से फौज उसकी बेइज्जती करने लगी। वह नफरत और बेइज्जती का शिकार होकर मारा गया। मैक्सिमिनस एक मजबूत फौजी था। फौज ने उसे राजा चुना पर लोग उससे नफरत करते थे।
97:27
Speaker A
लोग उसकी बेइज्जती भी करते थे क्योंकि वह पहले भेड़े चुराता था। वह राजा बनकर भी रोम नहीं गया। उसने अपने अफसरों से बहुत जुल्म करवाए। पूरी दुनिया उसके खिलाफ हो गई। उसकी अपनी फौज ने ही उसे मार डाला।
97:42
Speaker A
आज के राजाओं को फौज को उतना खुश नहीं करना पड़ता। पहले फौज बहुत ताकतवर होती थी। अब जनता के पास ज्यादा पावर है। इसलिए राजा को जनता को खुश रखना चाहिए। सिर्फ तुर्क और सुल्तान की बात अलग है।
98:00
Speaker A
उनकी गद्दी सिर्फ फौज पर टिकी है। सुल्तान का राज ईसाई पोप जैसा है। यह ना तो खानदानी राज है ना ही बिल्कुल नया। यहां पुराने राजा का बेटा वारिस नहीं बनता बल्कि नया राजा चुना जाता है। नियम पुराने
98:16
Speaker A
हैं। इसलिए इसे नया राज नहीं कह सकते। नफरत और बेइज्जती ने इन राजाओं को डुबो दिया। नया राजा मार्कस की नकल नहीं कर सकता। वह पूरी तरह सेवरेस जैसा भी नहीं बन सकता। उसे सेवरेस से सत्ता छीनने के दाव
98:35
Speaker A
पेच सीखने चाहिए और उसे मारकस से राज को संभाल कर रखने का हुनर लेना चाहिए। चैप्टर 20 इलाकों को कब्जे में रखने के लिए राजा कई चाले चलते हैं। कोई अपनी जनता से हथियार छीन लेता है। कोई शहरों में आपस में फूट
98:59
Speaker A
डलवाता है। कोई जानबूझकर अपने दुश्मन पैदा करता है। कोई पुराने दुश्मनों को अपना दोस्त बनाता है। कुछ राजा बड़े किले बनवाते हैं तो कुछ उन्हें तुड़वा देते हैं। जैसा वक्त हो राजा को वैसा ही फैसला लेना पड़ता है।
99:18
Speaker A
एक नया राजा कभी अपनी जनता से हथियार नहीं छीनता बल्कि अगर जनता निह तो वह उन्हें हथियार देता है। जब आप उन्हें हथियार देते हैं तो वे हथियार आपके हो जाते हैं। जिन पर आपको शक था वे वफादार बन [संगीत] जाते
99:35
Speaker A
हैं। जो पहले से वफादार थे वे आपके पक्के साथी बन जाते हैं। जब आप सबको हथियार नहीं दे सकते तो कुछ कुछ चुनिए। जिन्हें हथियार मिले वे आपके शुक्रगुजार रहेंगे। बाकी लोग समझेंगे कि जान जोखिम में डालने वालों को
99:53
Speaker A
[संगीत] इनाम मिलना सही है। लेकिन अगर आप हथियार छीनते तो आप उन्हें दुखी करते हैं। इसका मतलब है कि आप उन पर भरोसा नहीं करते। वे आपको डरपोक या शक करने वाला समझेंगे। इससे आपके खिलाफ नफरत पैदा होगी। तब आपको भाड़े के सैनिकों पर
100:13
Speaker A
निर्भर रहना पड़ेगा। भाड़े के सैनिक आपको बड़े दुश्मन से नहीं बचा सकते। पुराने मास्टर्स कहते थे कि गुटबाजी से शहरों पर कब्जा रहता है। वे शहरों के लोगों को आपस में लड़ा कर रखते थे। उस वक्त शायद यह सही था। पर आज यह तरीका
100:34
Speaker A
बेकार है। बटा हुआ शहर दुश्मन का मुकाबला नहीं कर सकता। दुश्मन के आते ही कमजोर गुट उससे हाथ मिला लेगा। वेनिस ने भी यही चाल चली थी। पर हार मिलते ही उनके पालतू गुटों ने ही उनके खिलाफ बगावत कर दी। ऐसी चाले
100:54
Speaker A
वही राजा चलते हैं जो खुद कमजोर होते हैं। राजा तभी बड़ा बनता है जब वह बड़ी मुश्किलों को हराता है। किस्मत अक्सर नए राजा के सामने दुश्मन खड़े करती है ताकि राजा उन्हें कुचल कर ऊपर चढ़ सके। जैसे
101:13
Speaker A
दुश्मन ने ही उसके लिए कामयाबी की सीढ़ी लगाई हो। इसलिए चालाक राजा खुद अपने खिलाफ थोड़ी नफरत पैदा करता है। फिर उसे खत्म करके वह अपनी इज्जत और बढ़ा लेता है। राजाओं ने अक्सर देखा है कि पुराने दुश्मन
101:33
Speaker A
ज्यादा काम आते हैं। शुरुआत में जिन पर शक था, वह बाद में पक्के दोस्त निकले। पुराने दुश्मन को खुद को सही साबित करने की आग होती है। वे आपके काम में ज्यादा जी जान लगाते हैं। पर उन लोगों से सावधान रहे जो
101:50
Speaker A
पुराने राज से दुखी होकर आपके साथ [संगीत] आए। अगर वे सिर्फ लालच की वजह से आए हैं तो उन्हें खुश करना नामुमकिन होगा। राजा पुराने वक्त से किले बनाते आए हैं। किले दुश्मनों के लिए लगाम और राजा के लिए
102:08
Speaker A
पनाह होते हैं। पर हमारे वक्त में कई राजाओं ने अपने ही किले तुड़वा दिए। किले अच्छे हैं या बुरे यह जैसा वक्त हो उस पर है। अगर राजा को बाहर के दुश्मन से ज्यादा अपनी जनता से डर है तो किला जरूर बनाएं।
102:26
Speaker A
पर अगर उसे बाहर वालों से डर है तो किले की फिक्र छोड़ दे। सोजा के किले ने उसके लिए फायदे से ज्यादा मुसीबत खड़ी की। सबसे मजबूत किला यह है कि जनता आपसे नफरत ना करें। अगर लोग आपसे नफरत करते हैं तो
102:44
Speaker A
कोई भी दीवार आपको नहीं बचाएगी। जब जनता हथियार उठाती है तो उनकी मदद के लिए बाहर वाले आ ही जाते हैं। किले सिर्फ थोड़े वक्त के लिए बचा सकते हैं जैसा काउंटस ऑफ फोरली के साथ हुआ। पर बाद में सेजारे बोर्िया के सामने उसका
103:04
Speaker A
किला भी फेल हो गया। क्योंकि तब जनता दुश्मन के साथ मिल गई थी। मैं उस राजा की तारीफ करूंगा जो किला बनाता है। पर मैं उस राजा को बेवकूफ कहूंगा जो सिर्फ किले के दम पर जीता है और
103:21
Speaker A
जनता की नफरत की परवाह नहीं करता। चैप्टर 21 बड़े काम और अनोखी मिसालें राजा की इज्जत बढ़ाती हैं। स्पेन का राजा फर्डिनेंड आज की एक बड़ी मिसाल है। वह एक छोटा राजा था। पर आज ईसाई दुनिया का सबसे बड़ा राजा है।
103:48
Speaker A
उसने जो भी किया वह बहुत बड़ा और हैरान करने वाला था। उसने राज संभालते ही ग्रेनाडा पर हमला किया। यह उसके इलाके की पहली ईंट थी। उसने कास्टाइल के सरदारों को जंग की सोच में उलझाए रखा। वे जंग की तैयारी देखते
104:08
Speaker A
रहे और फर्डिनेंट को ताकतवर होते नहीं देख पाए। उसने चर्च जनता के पैसे से अपनी फौज खड़ी की। उसने धर्म का चोला पहनकर एक नेक बेरहमी दिखाई। उसने मुर्रों को देश से बाहर निकाल दिया। यह एक बहुत बड़ी और अनोखी चाल थी। उसने
104:30
Speaker A
धर्म के नाम पर अफ्रीका, इटली [संगीत] और फ्रांस को भी नहीं छोड़ा। वह हमेशा लोगों को अपनी चालों से हैरान रखता था। लोग सिर्फ यही सोचते रहे कि अब आगे क्या होगा। उसने अपने दुश्मनों को कभी संभलने का मौका नहीं दिया।
104:48
Speaker A
राजा को अपने इलाके में भी अनोखी मिसालें देनी चाहिए। मिलान के बरनाबों की तरह बनिए। जब कोई नागरिक बहुत अच्छा या बुरा काम करें तो उसे ऐसी सजा या इनाम दें जिसकी चर्चा हो। राजा को हर काम ऐसा करना
105:05
Speaker A
चाहिए जिससे उसकी इज्जत बढ़े। लोग उसे एक महान और असरदार इंसान माने। राजा की इज्जत तब होती है जब वह या तो पक्का दोस्त बने या खुला दुश्मन। किसी एक गुट का साथ देना बीच में रहने से कहीं बेहतर है।
105:25
Speaker A
अगर तुम्हारे दो ताकतवर पड़ोसी आपस में लड़ रहे हो तो तुम्हें फैसला लेना ही पड़ेगा। जीतने वाला राजा कल तुम्हारे लिए खतरा बन सकता है। ऐसे में साफ तौर पर किसी एक का साथ देना और जी जान से लड़ना ही अकलमंदी
105:42
Speaker A
है। अगर तुम बीच में रहे तो जीतने वाला तुम्हें कच्चा चबा जाएगा। हारने वाला भी तुम्हारी मदद नहीं करेगा क्योंकि आपने उसका साथ नहीं दिया। जीतने वाले को ऐसे दोस्त नहीं चाहिए जो मुसीबत में साथ ना दें। जब एंटोकस ग्रीस गया तो उसने लोगों को बीच
106:04
Speaker A
में रहने को कहा। पर रोमस ने लोगों को फौज उठाने को कहा। रोमस ने कहा कि जंग से दूर रहना सबसे बड़ी [संगीत] गलती है। इससे आपको ना इज्जत मिलेगी? नहीं ना। जो आपका दोस्त नहीं है, वही आपको चुप रहने को
106:20
Speaker A
कहेगा। पर दोस्त हमेशा आपसे हथियार उठाने को कहेगा। कमजोर राजा अक्सर बीच का रास्ता चुनते हैं और बर्बाद हो जाते हैं। पर अगर आप बहादुरी से किसी एक का साथ देते हैं और वह जीत जाता है तो वह आपका
106:38
Speaker A
शुक्रगुजार रहेगा। इंसान इतने बुरे नहीं होते कि जीतने के बाद अपने मददगार को ही कुचल दें। पर एक बात का ध्यान रखें। राजा को कभी अपने से ज्यादा ताकतवर के साथ मिलकर हमला नहीं करना चाहिए। अगर जीत गए
106:56
Speaker A
तो आप उसके कब्जे में आ जाएंगे। राजा को हमेशा आजाद रहना चाहिए। वेनिस ने फ्रांस का साथ दिया और अपनी बर्बादी लिख ली। पर अगर मजबूरी हो जैसे फ्लोरेंस के साथ हुआ तो किसी एक का साथ देना ही पड़ता
107:12
Speaker A
है। कभी मत सोचिए कि कोई भी फैसला पूरी तरह सुरक्षित है। सत्ता का खेल हमेशा खतरों से भरा होता है। एक मुसीबत से बचेंगे तो दूसरी आएगी। समझदारी इसी में है कि खतरों को पहचानो और छोटे खतरों को चुनो।
107:33
Speaker A
राजा को हुनरमंद लोगों की इज्जत करनी चाहिए। उसे हर कला के उस्ताद को बढ़ावा देना चाहिए। उसे अपनी जनता को भरोसा देना चाहिए। लोग बिना डरे अपना कारोबार और खेती करें। उन्हें इस बात का डर ना हो कि उनकी
107:50
Speaker A
कमाई छीन ली जाएगी। अच्छा काम करने वालों को इनाम दें। साल के सही वक्त पर लोगों के लिए मेले और तमाशे लगाएं। हर बिरादरी और गुट की इज्जत करें। कभी-कभी उनके बीच जाएं और अपनी दरियादिली दिखाएं। पर अपनी शान और रुतबा
108:09
Speaker A
कभी मत कम होने दें। राजा की गद्दी की धमक हमेशा बनी रहनी चाहिए। चैप्टर 22 राजा के लिए उसके खास नौकरों को चुनना बहुत बड़ा काम है। राजा कितना अकलमंद है यह उसके साथ रहने वाले लोगों से पता चलता
108:34
Speaker A
है। अगर उसके आदमी काबिल और वफादार है तो राजा को समझदार माना जाएगा। इसका मतलब है कि राजा हुनर पहचानना और वफादारी ठिकाना जानता है। पर अगर नौकर निकम में है तो राजा की अकल पर सवाल उठेंगे। उसकी पहली ही
108:54
Speaker A
चाल यानी लोगों को चुनना बिल्कुल गलत साबित हुई। पंडोल्फो पे ट्रुशी ने जब एंटोनियो को अपना आदमी बनाया तो दुनिया ने मान लिया कि पंडोल्फो एक बहुत ही चालाक राजा है। दिमाग तीन तरह के होते हैं। पहला जो हर बात खुद
109:13
Speaker A
समझ जाए। दूसरा जो दूसरों के समझाने पर बात समझ ले। तीसरा जो ना खुद समझे और ना समझाने पर समझे। पहला सबसे अच्छा है। दूसरा भी अच्छा है पर तीसरा बेकार है। अगर राजा पहले दर्जे का नहीं तो उसे कम से कम
109:32
Speaker A
दूसरे दर्जे का होना चाहिए। तभी वह अपने नौकर के सही गलत काम पहचान पाएगा। तब नौकर उससे ठग नहीं पाएगा और ईमानदारी से काम करेगा। नौकर को परखने का एक ही पक्का तरीका है। अगर नौकर आपके काम से ज्यादा अपने फायदे
109:51
Speaker A
की सोचे और हर बात में सिर्फ अपना लालच ढूंढे तो ऐसा आदमी कभी अच्छा नौकर नहीं बनेगा। आप उस पर कभी भरोसा नहीं कर सकते। जिसके हाथ में दूसरे का इलाका हो उसे कभी खुद की नहीं सोचनी चाहिए। उसे सिर्फ अपने
110:09
Speaker A
राजा और उसके काम की फिक्र होनी चाहिए। नौकर को वफादार रखने के लिए राजा को भी कुछ करना होगा। राजा उसे इज्जत दे। उसे अमीर बनाए और उस पर मेहरबानी करें। उसे सत्ता के खेल में बराबर का हिस्सा दे। पर
110:27
Speaker A
उसे यह भी एहसास दिलाए कि वह आपके बिना कुछ नहीं है। ज्यादा रुतबा पाकर वह और बड़े रुतबे का लालच ना करें। ज्यादा पैसा पाकर वह और ज्यादा की हवस ना पा ले। जब राजा और नौकर एक दूसरे के लिए ऐसे
110:44
Speaker A
होंगे तभी रिश्ता टिकेगा। वरना इसका अंत हमेशा बुरा ही होगा। चैप्टर 23 दरबार चापलूसों से भरे रहते हैं। यह लोग एक जहरीली बीमारी की तरह हैं। इंसान अपनी तारीफ सुनकर बहुत जल्दी खुश हो जाता है। इससे बचना बहुत मुश्किल है। अगर तुम सबसे
111:13
Speaker A
सच बोलने को कहोगे तो तुम्हारी इज्जत कम होगी। पर अगर चापलूसो की सुनोगे तो तुम बर्बाद हो जाओगे। एक समझदार राजा को बीच का रास्ता चुनना चाहिए। अपने इलाके के कुछ बहुत समझदार लोग चुनो। सिर्फ उन्हें ही सच बोलने की आजादी
111:31
Speaker A
दो। वे भी तभी बोले जब तुम उनसे सवाल पूछो। पर तुम्हें उनसे हर बात पूछनी चाहिए। [संगीत] सबकी राय सुनो। पर आखिरी फैसला तुम्हारा अपना हो। उन सलाहकारों को जता दो कि वे जितना सच बोलेंगे, तुम उन्हें उतना ही पसंद करोगे।
111:49
Speaker A
उनके अलावा किसी और की बात मत सुनो। एक बार फैसला कर लिया तो उस पर टिके रहो। जो राजा बार-बार अपनी बात बदलता है, लोग उसकी बेइज्जती करते हैं। मैक्सिमिलियन की मिसाल देखिए। वह किसी से सलाह नहीं लेता था। वह अपने इरादे किसी को
112:08
Speaker A
नहीं बताता था। पर जब वह काम शुरू करता तो लोग उसे रोकने लगते। वह कमजोर था। इसलिए दूसरों की बातों में आकर अपना फैसला बदल देता था। उसने जो आज किया वह कल उसे ही काट देता था। ऐसे राजा पर कोई भरोसा नहीं
112:26
Speaker A
कर सकता। राजा को सलाह तभी लेनी चाहिए जब वह खुद चाहे। जब दूसरे चाहे तब उन्हें सलाह देने का मौका मत दो। बल्कि बिना मांगे सलाह देने वालों की पावर तोड़ दो। राजा को खुद बहुत सवाल पूछने चाहिए। सच सुनने के लिए
112:44
Speaker A
सब्र रखिए। अगर कोई सच छुपाए तो उसे अपना गुस्सा महसूस कराइए। कुछ लोग कहते हैं कि राजा सलाहकार की वजह से अकलमंद दिखता है। यह बात बिल्कुल गलत है। जो राजा खुद समझदार नहीं, वह अच्छी सलाह नहीं पहचान सकता। अगर वह अपनी डोर
113:04
Speaker A
किसी एक चतुर आदमी को दे दे, तो थोड़े दिन तक तो ठीक चलेगा। पर जल्द ही वह चतुर आदमी राजा का इलाका छीन लेगा। अगर राजा कई लोगों से सलाह ले और वह खुद अकलमंद ना हो तो वह उलझ जाएगा। हर सलाहकार
113:23
Speaker A
सिर्फ अपना फायदा सोचेगा। राजा उन्हें कभी काबू नहीं कर पाएगा। इंसान तब तक वफादार नहीं बनते जब तक उन्हें मजबूर ना किया जाए। इसलिए याद रखिए अच्छी सलाह राजा की अकल से पैदा होती है। राजा की अकल अच्छी
113:40
Speaker A
सलाह से पैदा नहीं होती। चैप्टर 24 मेरी इन बातों पर गौर करोगे तो नया राजा भी पुराना मास्टर लगेगा। वह अपनी गद्दी पर खानदानी राजा से ज्यादा मजबूत होकर बैठेगा। लोग नए राजा की हर चाल को बहुत गौर से
114:06
Speaker A
देखते हैं। अगर राजा में हुनर हो तो लोग पुराना खानदानी राज भूल जाते हैं। इंसान को कल की यादों से ज्यादा आज के फायदे से मतलब होता है। अगर आज राजा उन्हें सुख दे तो वे कहीं और नहीं देखते। अगर राजा सही
114:24
Speaker A
चले तो जनता उसे बचाने के लिए जान लड़ा देगी। नया इलाका बनाना और उसे अच्छी फौज से सजाना बड़ी इज्जत [संगीत] है। पर राजा होकर अपनी सत्ता खो देना सबसे बड़ी बेइज्जती है। इटली के राजाओं ने अपनी गद्दी आखिर क्यों खोई? नेप्लस के राजा और
114:45
Speaker A
मिलान के ड्यूक की मिसाल लीजिए। पहली बड़ी गलती यह थी कि उनकी फौज कमजोर थी। दूसरी गलती यह कि या तो जनता उनके खिलाफ थी या फिर वे बड़े लोगों को अपनी मुट्ठी में नहीं रख पाए। अगर फौज मैदान में डटी रहे
115:02
Speaker A
तो राज कभी नहीं जाता। मेडोन के फिलिप को देखो। वह सिकंदर यानी अलेक्जेंडर का बाप नहीं था। उसके पास रोमस जितनी ताकत और बड़ा इलाका नहीं था। पर वह लड़ना जानता था और उसने जनता का दिल जीता। उसने बड़े लोगों को भी बखूबी अपने साथ
115:22
Speaker A
जोड़े रखा था। उसने सालों तक जंग लड़ी और अपना राज बचा लिया। इसलिए गद्दी जाने पर अपनी किस्मत को कभी मत कोसो। अपने सुस्ती और निकम्मेपन पर शर्म करना सीखो। तुमने शांति के दिनों में कभी बुरे वक्त की
115:40
Speaker A
तैयारी नहीं की। इंसान की आदत है कि वह शांत समंदर देख तूफान भूल जाता है। जब बुरा वक्त आया तो तुम लड़ने के बजाय भाग खड़े हुए। तुम सोचते रहे कि जनता तुम्हें खुद वापस बुला लेगी। यह बहुत ही गिरी हुई
115:57
Speaker A
और कमजोर राजा की सोच है। दूसरों के भरोसे खुद को गिराना अकलमंदी नहीं है। वही बचाव पक्का है जो तुम्हारे अपने दम पर खड़ा हो। चैप्टर 25 बहुत लोग मानते हैं कि सब कुछ भगवान और किस्मत तय करते हैं। वे सोचते हैं कि
116:25
Speaker A
इंसान की अकल कुछ नहीं कर सकती। इसलिए वे मेहनत करने के बजाय सब कुछ नसीब पर छोड़ देते हैं। आजकल दुनिया में इतने बदलाव हो रहे हैं कि लोग इस पर और यकीन करने लगे हैं। पर मेरा मानना है कि किस्मत सिर्फ
116:41
Speaker A
आधी बाजी तय करती है। बाकी आधी बाजी हमारे अपने हुनर और दम पर टिकी है। किस्मत एक उफनती हुई नदी की तरह है। जब इसमें बाढ़ आती है तो यह सब कुछ बहा ले जाती है। मकान और पेड़ इसके सामने टिक
116:59
Speaker A
नहीं पाते। सब इसके आगे हार मान लेते हैं। पर समझदार राजा वह है जो सूखे के वक्त ही मजबूत बांध बना ले। [संगीत] ताकि जब दोबारा बाढ़ आए तो पानी नहरों से निकल जाए। नदी का जोर बेकाबू होकर तबाही ना मचा
117:16
Speaker A
पाए। किस्मत भी अपनी ताकत वहीं दिखाती है जहां कोई रुकावट ना हो। वह अपना रुख वहीं मोड़ती है जहां उसे पता हो कि कोई बांध नहीं बना है। इटली की हालत देखो। यहां कोई बांध नहीं है। अगर यहां जर्मनी या फ्रांस
117:34
Speaker A
जैसा दम होता तो यह बर्बाद ही नहीं होती। अक्सर राजा आज खुश होता है और कल बर्बाद। उसने अपना मिजाज नहीं बदला। फिर भी वह डूब गया। इसकी पहली वजह यह है कि वह सिर्फ अपनी किस्मत पर टिका था। जैसे ही किस्मत
117:54
Speaker A
पलटी वक्त खत्म हो गया। असली खिलाड़ी वही है जो जैसा वक्त हो वैसी चाल चले। इंसान दौलत और इज्जत पाने के लिए अलग-अलग रास्ते चुनता है। कोई बहुत सोच समझकर चलता है तो कोई बहुत तेजी से। कोई ताकत आजमाता
118:13
Speaker A
है तो कोई अपनी चालाकी। अक्सर दो अलग चाल चलने वाले लोग भी कामयाब हो जाते हैं। वजह सिर्फ यह है कि उनकी [संगीत] चाल उस वक्त के हिसाब से सही थी। मुसीबत तब आती है जब वक्त बदल जाता है पर
118:29
Speaker A
इंसान नहीं बदलता। अगर कोई राजा हमेशा तसल्ली से काम लेता है और वक्त बदल जाए। उसे अब शेर की तरह झपटना चाहिए। पर वह नहीं बदल पाता। वह अपने पुराने नेचर के हाथ मजबूर होता है। वह उसी रास्ते पर चलता है जहां उसे पहले कामयाबी
118:49
Speaker A
मिली थी। नतीजा यह होता है कि वह बदल रहे वक्त के साथ डूब जाता है। पोप जूलियस सेकंड हमेशा तेजी और जोश से काम लेते थे। उनके वक्त के हालात उनके इस जोश के साथ बिल्कुल फिट बैठे। उन्होंने बोलोगना पर हमला करने का फैसला
119:11
Speaker A
किया। वेनेशियंस और स्पेन के राजा बस देखते रह गए। वे डर और लालच में उलझे हुए थे। जूलियस ने वह कर दिखाया जो कोई और नहीं कर सकता था। अगर वे रूम में बैठकर सब कुछ पक्का होने का इंतजार करते तो हार जाते। दुश्मन बहाने
119:32
Speaker A
बनाता और दोस्त उन्हें डरा देते। मेरा मानना है कि बहुत सोच समझकर चलने से बेहतर निडर होना है क्योंकि किस्मत एक औरत जैसी है। उसे काबू में रखने के लिए जोश और जोर दिखाना पड़ता है। वह ठंडे लोगों के
119:50
Speaker A
बजाय हिम्मत वालों के हाथ जल्दी आती है। औरत की तरह ही वह जवान मर्दों को पसंद करती है क्योंकि जवान लोग कम सोचते हैं और बुरे दम से उसे हासिल कर लेते हैं। चैप्टर 26 मैंने बहुत सोचा कि क्या नया राजा बनाने
120:15
Speaker A
का यह सही वक्त है। मुझे लगता है कि अभी जैसा वक्त पहले कभी नहीं था। मोजिस के लिए इजराइल का गुलाम होना जरूरी था। सारस के लिए पर्शियंस का दबा होना जरूरी था। थीसियस के लिए एथेंस का बिखरा होना जरूरी
120:33
Speaker A
था। वैसे ही इटली की बुरी हालत अब हुनर दिखाने का मौका है। आज इटली गुलाम है और पूरी तरह बेहाल है। इसके पास ना कोई नेता है ना कोई कायदा। इसे बुरी तरह लूटा और रौंदा गया है। इटली उस मसीहा का इंतजार कर
120:52
Speaker A
रहा है जो उसके घाव भरे। यहां की लूट और भारी टैक्स खत्म करने वाला चाहिए। लोग किसी भी झंडे के पीछे चलने को तैयार बैठे हैं। अब सारी उम्मीद आपके खानदान से ही है। आपके पास हुनर और अच्छी किस्मत दोनों है।
121:11
Speaker A
चर्च और भगवान भी आपके साथ खड़े हैं। अगर आप पुराने मास्टर्स की तरह चले तो यह काम आसान है। भगवान ने समंदर बांटा और मन ना बरसाया ताकि रास्ता खुले। बाकी काम आपको करना है। भगवान सब कुछ खुद नहीं करता। वह
121:29
Speaker A
चाहता है कि हमारी हिम्मत और इज्जत बनी रहे। इटली के पुराने राजा इसलिए फेल हुए क्योंकि उनके कायदे बेकार थे। नया राजा जब एक नियम बनाता है तो उसकी इज्जत बढ़ती है। इटली के लोगों में बहुत दम और चालाकी है।
121:46
Speaker A
वे अकेले लड़ने में बड़े-बड़ों को धूल छटा देते हैं। पर फौज के मामले में वे पीछे रह जाते हैं क्योंकि उनके पास कोई मजबूत और काबिल नेता नहीं है। सब खुद को बड़ा मास्टर समझते हैं और किसी की नहीं सुनते। अगर आपको जीतना है तो अपनी
122:05
Speaker A
फौज खड़ी करें। अपने ही लोग सबसे वफादार और बेहतरीन सिपाही होते हैं। जब राजा खुद फौज के सामने खड़ा हो तो उनका दम, उनका पावर बढ़ जाता है। विदेशी फौजों को हराने के लिए इटली का अपना जज्बा चाहिए। स्पेनिश
122:24
Speaker A
और स्विस फौज में भी कुछ कमियां हैं। एक घुड़सवारों से डरता है दूसरा पैदल फौज से। आपको एक ऐसी नई फौज बनानी होगी जो सबको पछाड़ दे। यही वह हुनर है जो नए राजा की इज्जत बढ़ाती है। यह मौका अपने हाथ से मत जाने दीजिए। इटली
122:46
Speaker A
अपने आजाद करने वाले का बेसब्री से इंतजार कर रही है। लोग आपको प्यार, बदले की आग और वफादारी से गले लगाएंगे। किसके दिल में आपके लिए इबादत और सम्मान नहीं होगा। विदेशी गुलामी की गंध अब सबको सताने लगी
123:04
Speaker A
है। अब शेर जैसा कलेजा और हिम्मत दिखाइए। पुराना जज्बा अब इटली वालों के दिलों में मरा नहीं है। [गला साफ़ करने की आवाज़] यह बुक यहीं पूरी खत्म होती है। हम फिर मिलेंगे आपसे एक नए एपिसोड में एक नई
123:28
Speaker A
किताब के साथ। मेरा नाम है रोहित और आप सुन रहे थे सिलेबस वि रोहित। धन्यवाद। ओम
Topics:निकोलो मेकियावेलीद प्रिंसराजनीतिसत्ता का खेलफ्लोरेंस इतिहासराजशाहीराजा और जनताराजनीतिक रणनीतिहुनर और ताकतमेकियावेली किताब

Get More with the SozAI App

Transcribe recordings, audio files, and YouTube videos — with AI summaries and speaker detection. 30 minutes free.

Or transcribe another YouTube video here →