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Meditations by Marcus Aurelius

मार्कस ऑरेलियस की मेडिटेशंस और उनके जीवन, शिक्षा, और फिलॉसफी पर हिंदी में विस्तृत चर्चा।

Key Takeaways

  • मार्कस ऑरेलियस ने प्लेटो के फिलॉसफर किंग के आदर्श को जीवंत किया।
  • उनकी शिक्षा और अनुभवों ने उन्हें एक दार्शनिक और न्यायप्रिय शासक बनाया।
  • उन्होंने ग्रीक भाषा और संस्कृति को अपनाया और अपनी रचनाएँ उसी में लिखीं।
  • उनका शासनकाल सीमित शक्तियों के बावजूद प्रभावशाली था।
  • उनका जीवन और विचार आज भी प्रेरणा स्रोत हैं।

What the video covers

  • प्लेटो के 'फिलॉसफर किंग' सिद्धांत को मार्कस ऑरेलियस के जीवन से जोड़ा गया है।
  • मार्कस ने खुद को फिलॉसफर नहीं माना, बल्कि एक ईमानदार छात्र और अधूरा अनुयायी बताया।
  • उनका जन्म एक सम्मानित परिवार में हुआ और उनके पालन-पोषण में दादा की भूमिका थी।
  • उनकी शिक्षा में ग्रीक और लैटिन साहित्य, रेटोरिक, और फिलॉसफी शामिल थी।
  • मार्कस ने ग्रीक में मेडिटेशंस लिखा, जो उस समय की प्रमुख फिलॉसफी भाषा थी।
  • उनका राजनीतिक और कानूनी प्रशिक्षण उच्च स्तरीय था, जिसमें कई प्रसिद्ध शिक्षक शामिल थे।
  • मार्कस का कोर्ट और फिलॉसफी दोनों में गहरा प्रभाव था, जो उनकी बाद की जिंदगी को परिभाषित करता था।
  • उनका शासनकाल सीमित पावर के साथ भी प्रभावशाली था, और उन्होंने अपने अडॉप्टिव भाई लुसियस वेरस को सह-शासक बनाया।
  • उनकी शिक्षा और अनुभवों ने उन्हें एक आदर्श 'फिलॉसफर किंग' के रूप में स्थापित किया।
  • इतिहासकारों ने उनके शासन और व्यक्तित्व पर विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं।

Answers

Questions about this video

मार्कस ऑरेलियस ने खुद को कैसे देखा?

मार्कस ने खुद को फिलॉसफर नहीं माना बल्कि एक ईमानदार छात्र और अधूरा अनुयायी बताया जो दूसरों की फिलॉसफी का पालन करता था।

मार्कस की शिक्षा में क्या खास था?

उनकी शिक्षा में ग्रीक और लैटिन साहित्य, रेटोरिक, और फिलॉसफी शामिल थी, और उन्होंने ग्रीक में मेडिटेशंस लिखा।

मार्कस ऑरेलियस का शासनकाल कैसा था?

उनका शासनकाल सीमित शक्तियों के बावजूद प्रभावशाली था, और उन्होंने अपने अडॉप्टिव भाई लुसियस वेरस को सह-शासक बनाया।

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00:04
Speaker A
प्लेटो ने अपनी किताब द रिपब्लिक में कहा कि जब तक राजा फिलॉसफर नहीं बन जाते या फिलॉसफर राजा नहीं बन जाते, तब तक देश कभी खुश नहीं हो सकते। कहा जाता है कि मार्कस और एलियस को प्लेटो की इस बात को कोट करना बहुत पसंद था। और जिन लोगों ने उनके बारे में लिखा है, वह भी अक्सर इस बात को मार्कस पर लागू करने से खुद को रोक नहीं पाए। और सच कहें तो अगर हमें प्लेटो का फिलॉसफर किंग असली रूप में देखना हो तो मार्कस से बेहतर कोई नहीं हो सकता। जो लगभग 20 साल तक रोमन एंपायर का राजा थे और इमोर्टल मेडिटेशंस इस बुक के लेखक। लेकिन यह टाइटल मार्कस खुद कभी एक्सेप्ट नहीं करते। उन्होंने कभी खुद को फिलॉसफर नहीं माना। उनके हिसाब से वह सिर्फ एक ईमानदार स्टूडेंट थे और एक अधूरे से फॉलोअर जो दूसरों के बनाए गए फिलॉसफी को फॉलो करने की कोशिश करते थे। और राजा बनना भी उनके लिए एक तरह का एक्सीडेंट ही था। जब मार्कस एनियस वेरस का जन्म हुआ एडी 121 में तो लोग शायद यह सोच सकते थे कि यह सेनेट या इंपीरियल एडमिनिस्ट्रेशन में अच्छी पोजीशन तक जाएंगे। लेकिन कोई यह नहीं सोच सकता था कि यह फ्यूचर में एपरर बनेंगे। या फिर उस ब्रोंज वाले घोड़े पर बैठे अकेले आदमी होंगे। जिनके हाथ आज भी रोम के कैपिटोलियन हिल पर 2000 साल बाद भी लोगों को ग्रीट करता है। मार्कस एक अच्छी और रिस्पेक्टेड फैमिली से थे। उनके जन्म के साल उनके दादा दूसरी बार कंसोल बने थे। जो कि थ्योरेटिकली रोम का सबसे बड़ा पद था। लेकिन उस वक्त तक ज्यादा सेरेमोनियल बन चुका था। और उनका पालन पोषण भी उनके दादा ने ही किया क्योंकि उनके पापा उनके बचपन में ही गुजर गए थे। मेडिटेशंस में मार्कस ने अपने पापा के कैरेक्टर का जिक्र किया है या तो जितना उन्हें याद था या दूसरों से सुना था। लेकिन उनका ज्ञान ज्यादा कहानियों के जरिए ही आया होगा ना कि अपनी यादों से। उनके बचपन और अर्ली टीनएज के बारे में हमें ज्यादा कुछ नहीं पता। जो थोड़ा बहुत मिला है वह मेडिटेशन से ही मिला है। हिस्टोरिया अगस्ता में लिखी उनकी बायोग्राफी जो कि एक अजीब सी और अनरिलायबल किताब है। शायद मेरियस मैक्स के लिखे कुछ खोए हुए जीवन रुतों पर बेस्ड है। यह हिस्टोरिया अगस्ता कहती है कि मार्कस एक सीरियस बच्चे थे। लेकिन उन्हें बॉक्सिंग, रेसलिंग, रनिंग और फेल्कनरी भी पसंद थी और वो अच्छे बॉल प्लेयर भी थे और हंटिंग के भी शौकीन थे। यह सब काफी आम चीजें हैं एक अपर क्लास लड़के के लिए। मेडिटेशंस के पहले चैप्टर में मार्कस के स्कूल लाइफ की कुछ झलकियां मिलती हैं। और बाकी इमेज हमें उस समय के अपर मिडिल क्लास एजुकेशन के बारे में जनरल नॉलेज से। उनके पहले टीचर्स जैसे कि मेडिटेशंस बुक वन सेक्शन फाइव में अननेम टीचर का जिक्र है। शायद स्लेव्स ही थे। जिनके थ्रू उन्होंने रीडिंग और राइटिंग की बेसिक चीजें सीखी होंगी। उनके बाद उन्हें प्राइवेट टटर्स के पास भेजा गया होगा। जहां उन्होंने लिटरेचर पढ़ा होगा। खासकर वर्जिल की एपिक एनीड। लेकिन लिटरेचर सिर्फ एक प्रिपरेशन था। असली गोल था रेटोरिक। यह एक जरूरी स्किल एक एक्टिव पॉलिटिकल करियर के लिए एंपायर के नीचे जैसे रिपब्लिक के टाइम में भी थी। एक ट्रेंड रेटर के अंडर मार्कस ने पहले छोटी एक्सरसाइज से शुरू किया होगा और फिर फुल स्केल प्रैक्टिस डिक्लेमिनेशन किए होंगे जिसमें उन्हें किसी इमेजिनरी लॉ केस का एक साइड डिफेंड करना पड़ता। या किसी हिस्टोरिकल फिगर को एक इंपॉर्टेंट मोमेंट पर एडवाइस देनी पड़ती। क्या सीजर को रूबिकॉन पार करना चाहिए? क्या अलेग्जेंडर को इंदस पर रुक जाना चाहिए? क्यों या क्यों नहीं? यह ट्रेनिंग लैटिन के साथ-साथ ग्रीक में भी होती थी। पहले सेंचुरी बीसी से ही रोमन अपर क्लास बाइलिंगुअल बन चुकी थी। और मार्कस का ग्रीक बोलना और लिखना उतना ही फ्लुएंट था जितना किसी 19th सेंचुरी रशियन एरिस्टोक्रेट का फ्रेंच। यह एक हन जापानीज कोर्टियर का चाइनीस। मार्कस ने होमर की इलियड और ओसी यूरिप डिस्कस के ट्रेजडीज को एनीड के साथ-साथ पढ़ा होगा और डेमोस्टेंस जैसे बड़े एथेनियन ओरेटर के स्पीचेस को वैसे ही सीरियसली पढ़ा होगा जैसे सिरो के स्पीचेस को कैपिटल में। इंटेलेक्चुअल एलट मोस्टली ग्रीक राइटर्स और आर्टिस्ट ही थे। और जब मार्कस अपने कोर्ट फिजिशियन गैलेलिन से बात करते थे तो वह भी ग्रीक में ही होती थी। सबसे ज्यादा फिलॉसफी की लैंग्वेज ग्रीक ही थी। लेट रिपब्लिक और अर्ली एंपायर के टाइम पे ल्यूकिटियस, सीसेरो और सेनेका जैसे राइटर्स ने लैटिन में फिलॉसफी लिखने की कोशिश की। और काफी हद तक सक्सेसफुल भी हुए। लेकिन प्लेटो, एरिस्टोटल, थियोफ्रेस, जेनो, सिरिसपस, एपिक्यूरस यह सब ग्रीक थे। सीरियस फिलॉसफी पढ़ने के लिए उनकी लैंग्वेज और उनका बनाया हुआ वोकैबलरी समझना जरूरी था। इसलिए मार्कस का अपने मेडिटेशंस को ग्रीक में लिखना बिल्कुल नेचुरल था। 137 में, ईयर 137 में जब मार्कस 16 साल के थे, एक बहुत इंपॉर्टेंट बात हुई। उस टाइम के एपरर हेड्रियन की कोई बच्चे नहीं थे। पिछले साल एक बीमारी की वजह से वह लगभग मरने के करीब आ गया था। और सबको लग गया था कि वह ज्यादा दिन नहीं जिएगा। हेड्रियन को राजा बनने का मौका मिला था क्योंकि उनके पहले वाले एपरर ट्रेजन जो उनके दूर के रिश्तेदार थे, उन्होंने उन्हें अडॉप किया। ट्रेजन के एग्जांपल को फॉलो करते हुए हेड्रियन ने एक मशहूर एरिस्टोक्रेट लुसियस सीनियस कोमोडस को अपना सक्सेसर बनाया था। लेकिन 137 में सीनियस अचानक मर गए और हेड्रियन को किसी नए सक्सेसर को चुनना पड़ा। उन्होंने सेनेटर एंटोनिनस को चुना जिसके अपने भी कोई बच्चे नहीं थे। लेकिन एक कंडीशन के साथ। कंडीशन यह थी कि एंटोनिनस मार्कस जो उनके रिश्तेदार थे और सनियस के बेटे लुसियस वेरस जो उस वक्त सिर्फ सात साल के थे, दोनों को अडॉप करें। फिर मार्कस ने अपने अडॉप्टिव फादर का सरनेम ले लिया और बन गए मार्कस और एलियस एंटोनिनस। अगले साल हेड्रियन की मौत हो गई। मार्कस थ्रोन का पहला कैंडिडेट बन गए। अब उनकी एजुकेशन और छोटे वेरस की एजुकेशन और भी इंपॉर्टेंट हो गई। और लगता है कि कोई कसर नहीं छोड़ी गई। ग्रीक रेटोरी का ट्रेनिंग उन्हें मिला हेरोडेस एटिकस से, एक बहुत अमीर एथेनियन रेटोरिशियन जिसके अपने परिवार, लोगों और कोर्ट के साथ काफी ड्रामा भरे रिश्ते थे। जैसे कोई सोपोरा हो। लेटिन ओरेटरी उन्होंने सीखा मार्कस कॉर्नरियस फ्रंटो से जो कि नॉर्थ अफ्रीका के सिरटा के एक फेमस रेटोरिशियन थे। किस्मत का खेल था कि फ्रंटो के काफी लेटर्स मार्कस के नाम के अभी तक बचे हुए हैं और उनसे स्टूडेंट और टीचर्स के बीच का क्लोज बॉन्ड दिखाई देता है। वो लेटर्स यह भी दिखाते हैं कि फ्रंटो थोड़ा दुखी थे कि मार्कस रेटोरिक से दूर हो रहे थे और फिलॉसफी में और गहरा जा रहे थे। मेडिटेशंस की पहली बुक में मार्कस ने उन फिलॉसफर्स का जिक्र किया है जिनके साथ उन्होंने फॉर्मली या इनफॉर्मली सीखा और लगता है कि उन्होंने कई और लोगों से भी पढ़ा या सुना होगा। मार्कस ने क्लासरूम के बाहर भी काफी कुछ सीखा होगा। लीगल और पॉलिटिकल ट्रेनिंग के लिए एक इनफॉर्मल अप्रेंटिसशिप होता था, जिसमें यंग एरिस्टोक्रेट्स को बड़े पब्लिक फिगर्स के साथ काम करना पड़ता था। जैसे जूनियस रस्टिकस जिसका इन्फ्लुएंस मार्कस ने 1.7 में लिखा है, यानी बुक वन सेक्शन से। लेकिन सबसे बड़े इन्फ्लुएंस उनके अडॉप्टिव फादर एंटोनस पयस का था। मार्कस ने देखा होगा कि कैसे एंटोनस एंबेसी से मिलते थे, लीगल केसेस सुनते थे, और अपने ऑफिसर्स को लेटर्स डिक्टेट करते थे। साथ ही मार्कस का वारिस बनने का स्टेटस भी अलग-अलग तरीकों से दिखाया जा रहा था। 140 में वो कंसुल बने, सिर्फ 19 साल की उम्र में, और 145 में फिर बने। उसी साल उन्होंने एंटोनस की बेटी फस्तनाना से शादी की जिसका जिक्र उन्होंने मेडिटेशंस 1.17 में किया है। एडवर्ड गिबन की हिस्ट्री ऑफ द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ द रोमन एंपायर में एंटोनस के रूल को ऐसे डिस्क्राइब किया गया है। इसमें हिस्ट्री के लिए बहुत कम मटेरियल मिलता है क्योंकि हिस्ट्री ज्यादातर इंसानों के क्राइम्स, बेवकूफी और दुख भरे कामों का रिकॉर्ड होती है। मार्कस की बायोग्राफी के लिए भी उस पीरियड में कुछ खास नहीं मिला। 145 से 161 के बीच के डेढ़ दशक में हमें मार्कस की एक्टिविटीज के बारे में बहुत कम पता चलता है। और उनके अंदर क्या चल रहा था वो सिर्फ फ्रंटो के साथ की गई उनकी चिट्ठियों से ही समझ में आता है। लेकिन दो चीजें जो उनकी जिंदगी को आगे चल के डिफाइन करने वाली थी, वो था कोर्ट और फिलॉसफी। 31 अगस्त 161 को एंटोनस मर गए और मार्कस अकेले सक्सेसर बन गए। मार्कस ने तुरंत एक्शन लिया और शायद हेड्रियन के ओरिजिनल प्लान को पूरा भी किया जो एंटोनिनस ने इग्नोर किया था और अपने अडॉप्टिव भाई लुसियस वेरस को को रूलर बनवा दिया। वेरस का कैरेक्टर मार्कस के मुकाबले में हमेशा कमजोर दिखाया गया है। पुरानी सोर्सेस, स्पेशली गसिप भरी हिस्टोरिया अगस्ता, उसे एक ऐश प्रिय और गिरता हुआ इंसान दिखाती है। लगभग एक और नेरो जैसे। शायद यह सही नहीं है। मेडिटेशंस में मार्कस ने उनके बारे में ऐसा कुछ नहीं कहा। लेकिन इतना तो पक्का है कि मार्कस ही सीनियर एपरर थे। चाहे नाम से ना हो। और यह सरप्राइजिंग भी नहीं है। मार्कस वेरस से लगभग 10 साल बड़े थे और एंटोनियस ने खुद उसे इस रोल के लिए ट्रेन किया था। यह फिलॉसफर किंग किस तरह का राजा निकला? शायद उतना अलग नहीं जितना लोग सोच रहे थे। एपरर के पास थ्योरेटिकली तो पूरा पावर होता था। लेकिन असल में उसके पास पॉलिसीज कंट्रोल करने की एबिलिटी काफी लिमिटेड थी। उनका ज्यादा टाइम उन प्रॉब्लम्स को हैंडल करने में चला जाता जो लोअर लेवल से ऊ
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Speaker A
था। और जिन लोगों ने उनके बारे में लिखा है, वह भी अक्सर इस बात को मार्कस पर लागू करने से खुद को रोक नहीं पाए। और सच कहें तो अगर हमें प्लेटो का फिलॉसफर किंग असली रूप में देखना हो तो
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Speaker A
मार्कस से बेहतर कोई नहीं हो सकता। जो लगभग 20 साल तक रोमन एंपायर का राजा थे और इमोर्टल मेडिटेशंस इस बुक के लेखक। लेकिन यह टाइटल मार्कस खुद कभी एक्सेप्ट नहीं करते। उन्होंने कभी खुद को फिलॉसफर नहीं माना। उनके हिसाब से वह सिर्फ एक ईमानदार
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Speaker A
स्टूडेंट थे और एक अधूरे से फॉलोअर जो दूसरों के बनाए गए फिलॉसफी को फॉलो करने की कोशिश करते थे। और राजा बनना भी उनके लिए एक तरह का एक्सीडेंट ही था। जब मार्कस एनियस वेरस का जन्म हुआ एडी 121
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Speaker A
में तो लोग शायद यह सोच सकते थे कि यह सेनेट या इंपीरियल एडमिनिस्ट्रेशन में अच्छी पोजीशन तक जाएंगे। लेकिन कोई यह नहीं सोच सकता था कि यह फ्यूचर में एपरर बनेंगे। या फिर उस ब्रोंज वाले घोड़े पर बैठे अकेले आदमी होंगे। जिनके हाथ आज भी
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Speaker A
रोम के कैपिटोलियन हिल पर 2000 साल बाद भी लोगों को ग्रीट करता है। मार्कस एक अच्छी और रिस्पेक्टेड फैमिली से थे। उनके जन्म के साल उनके दादा दूसरी बार कंसोल बने थे। जो कि थ्योरेटिकली रोम का सबसे बड़ा पद था।
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Speaker A
लेकिन उस वक्त तक ज्यादा सेरेमोनियल बन चुका था। और उनका पालन पोषण भी उनके दादा ने ही किया क्योंकि उनके पापा उनके बचपन में ही गुजर गए थे। मेडिटेशंस में मार्कस ने अपने पापा के कैरेक्टर का जिक्र किया है या तो जितना
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Speaker A
उन्हें याद था या दूसरों से सुना था। लेकिन उनका ज्ञान ज्यादा कहानियों के जरिए ही आया होगा ना कि अपनी यादों से। उनके बचपन और अर्ली टीनएज के बारे में हमें ज्यादा कुछ नहीं पता। जो थोड़ा बहुत मिला है वह मेडिटेशन से ही मिला
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Speaker A
है। हिस्टोरिया अगस्ता में लिखी उनकी बायोग्राफी जो कि एक अजीब सी और अनरिलायबल किताब है। शायद मेरियस मैक्स के लिखे कुछ खोए हुए जीवन रुतों पर बेस्ड है। यह हिस्टोरिया अगस्ता कहती है कि मार्कस एक सीरियस बच्चे थे।
03:11
Speaker A
लेकिन उन्हें बॉक्सिंग रेसलिंग, रनिंग और फेल्कनरी भी पसंद थी और वो अच्छे बॉल प्लेयर भी थे और हंटिंग के भी शौकीन थे। यह सब काफी आम चीजें हैं एक अपर क्लास लड़के के लिए। मेडिटेशंस के पहले चैप्टर में मार्गस
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Speaker A
के स्कूल लाइफ की कुछ झलकियां मिलती हैं। और बाकी इमेज हमें उस समय के अपर मिडिल क्लास एजुकेशन के बारे में जनरल नॉलेज से। उनके पहले टीचर्स जैसे कि मेडिटेशंस बुक वन सेक्शन फाइव में अननेम टीचर का जिक्र है। शायद स्लेव्स ही थे। जिनके थ्रू
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Speaker A
उन्होंने रीडिंग और राइटिंग की बेसिक चीजें सीखी होंगी। उनके बाद उन्हें प्राइवेट टटर्स के पास भेजा गया होगा। जहां उन्होंने लिटरेचर पढ़ा होगा। खासकर वर्जिल की एपिक एनीड। लेकिन लिटरेचर सिर्फ एक प्रिपरेशन था। असली गोल था रेटोरिक। यह एक जरूरी स्किल एक एक्टिव
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Speaker A
पॉलिटिकल करियर के लिए एंपायर के नीचे जैसे रिपब्लिक के टाइम में भी थी। एक ट्रेंड रेटर के अंडर मार्कस ने पहले छोटी एक्सरसाइज से शुरू किया होगा और फिर फुल स्केल प्रैक्टिस डिक्लेमिनेशन किए होंगे जिसमें उन्हें किसी इमेजिनरी लॉ केस
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Speaker A
का एक साइड डिफेंड करना पड़ता। या किसी हिस्टोरिकल फिगर को एक इंपॉर्टेंट मोमेंट पर एडवाइस देनी पड़ती। क्या सीजर को रूबिकॉन पार करना चाहिए?
04:42
Speaker A
क्या अलेग्जेंडर को इंदस पर रुक जाना चाहिए? क्यों या क्यों नहीं? यह ट्रेनिंग लैटिन के साथ-साथ ग्रीक में भी होती थी। पहले सेंचुरी बीसी से ही रोमन अपर क्लास बाइलिंगुअल बन चुकी थी। और मार्गस का ग्रीक बोलना और लिखना उतना ही
05:02
Speaker A
फ्लुएंट था जितना किसी 19th सेंचुरी रशियन एरिस्टोक्रेट का फ्रेंच यह एक हन जापानीज कोर्टियर का चाइनीस मार्कस ने होमर की इलियड और ओसी यूरिप डिस्कस के ट्रेजडीज को एनीड के साथ-साथ पढ़ा होगा और डेमोस्टेंस जैसे बड़े एथेनियन ओरेटर के स्पीचेस को वैसे ही सीरियसली
05:29
Speaker A
पढ़ा होगा जैसे सिरो के स्पीचेस को कैपिटल में इंटेलेक्चुअल एलट मोस्टली ग्रीक राइटर्स और आर्टिस्ट ही थे। और जब मार्कस अपने कोर्ट फिजिशियन गैलेलिन से बात करते थे तो वह भी ग्रीक में ही होती थी। सबसे ज्यादा फिलॉसफी की लैंग्वेज
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Speaker A
ग्रीक ही थी। लेट रिपब्लिक और अर्ली एंपायर के टाइम पे ल्यूकिटियस, सीसेरो और सेनेका जैसे राइटर्स ने लैटिन में फिलॉसफी लिखने की कोशिश की। और काफी हद तक सक्सेसफुल भी हुए। लेकिन प्लेटो एरिस्टोटलल थियोफ्रेस जेनो सिरिसपस एपिक्यूरस यह सब ग्रीक थे।
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Speaker A
सीरियस फिलॉसफी पढ़ने के लिए उनकी लैंग्वेज और उनका बनाया हुआ वोकैबलरी समझना जरूरी था। इसलिए मार्कस का अपने मेडिटेशंस को ग्रीक में लिखना बिल्कुल नेचुरल था। 137 में ईयर 137 में जब मार्कस 16 साल के थे। एक बहुत इंपॉर्टेंट बात हुई। उस टाइम
06:39
Speaker A
के एपरर हेड्रियन की कोई बच्चे नहीं थे। पिछले साल एक बीमारी की वजह से वह लगभग मरने के करीब आ गया था। और सबको लग गया था कि वह ज्यादा दिन नहीं जिएगा। हेड्रियन को राजा बनने का मौका
06:54
Speaker A
मिला था क्योंकि उनके पहले वाले एपरर ट्रेजन जो उनके दूर के रिश्तेदार थे। उन्होंने उन्हें अडॉप किया। ट्रेजन के एग्जांपल को फॉलो करते हुए हेड्रियन ने एक मशहूर एरिस्टोक्रेट लुसियस सीनियस कोमोडस को अपना सक्सेसर बनाया था। लेकिन 137
07:14
Speaker A
में सियोनियस अचानक मर गए और हेड्रियन को किसी नए सक्सेसर को चुनना पड़ा। उन्होंने सेनेटर एंटोनिनस को चुना जिसके अपने भी कोई बच्चे नहीं थे। लेकिन एक कंडीशन के साथ कंडीशन यह थी कि एंटोनिनस मार्कस जो उनके रिश्तेदार थे और सनियस के बेटे
07:39
Speaker A
लुसियस वेरस जो उस वक्त सिर्फ सात साल के थे दोनों को अडॉप करें। फिर मार्कस ने अपने अडॉप्टिव फादर का सरनेम ले लिया और बन गए मार्कस और एलियस एंटोनिनस। अगले साल हेडन की मौत हो गई। मार्कस थ्रोन का पहला कैंडिडेट बन
08:00
Speaker A
गए। अब उनकी एजुकेशन और छोटे वीरस की एजुकेशन और भी इंपॉर्टेंट हो गई। और लगता है कि कोई कसर नहीं छोड़ी गई। ग्रीक रेटोरी का ट्रेनिंग उन्हें मिला हेरोडेस एटिकस से एक बहुत अमीर एथेनियन रेट्रोशियन जिसके अपने परिवार लोगों और
08:21
Speaker A
कोर्ट के साथ काफी ड्रामा भरे रिश्ते थे जैसे कोई सोपोरा हो लेटिन ओरेटरी उन्होंने सीखा मार्कस कॉर्नरियस फ्रंटो से जो कि नॉर्थ अफ्रीका के सिरटा के एक फेमस रेट्रोशियन थे। किस्मत का खेल था कि फ्रंटो के काफी लेटर्स मार्कस के नाम के अभी तक बचे हुए
08:43
Speaker A
हैं और उनसे स्टूडेंट और टीचर्स के बीच का क्लोज बॉन्ड दिखाई देता है। वो लेटर्स यह भी दिखाते हैं कि फ्रोंटो थोड़ा दुखी थे कि मार्कस रेटोरिक से दूर हो रहे थे और फिलॉसफी में और गहरा जा रहे थे।
09:00
Speaker A
मेडिटेशंस का पहली बुक में मार्कस ने उन फिलॉसफर्स का जिक्र किया है जिनके साथ उन्होंने फॉर्मली या इनफॉर्मली सीखा और लगता है कि उन्होंने कई और लोगों से भी पढ़ा या सुना होगा। मार्कस ने क्लासरूम के बाहर भी काफी
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Speaker A
कुछ सीखा होगा। लीगल और पॉलिटिकल ट्रेनिंग के लिए एक इनफॉर्मल अप्रेंटिसशिप होता था। जिसमें यंग एरिस्टोक्रेट्स को बड़े पब्लिक फिगर्स के साथ काम करना पड़ता था। जैसे जूनियस रस्टिकस जिसका इन्फ्लुएंस मार्कर ने 1.7 में लिखा है। यानी बुक वन सेक्शन से।
09:43
Speaker A
लेकिन सबसे बड़े इन्फ्लुएंस उनके अडॉप्टिव फादर एंटोनस पयस का था। मार्कस ने देखा होगा कि कैसे एंटोनस एंबेसी से मिलते थे। लीगल केसेस सुनते थे। और अपने ऑफिसर्स को लेटर्स डिक्टेट करते थे। साथ ही मार्कस का वारिस बनने का
10:01
Speaker A
स्टेटस भी अलग-अलग तरीकों से दिखाया जा रहा था। 140 में वो कंसुल बने सिर्फ 19 साल की उम्र में और 145 में फिर बने। उसी साल उन्होंने एंटोनस की बेटी फस्तनाना से शादी की जिसका जिक्र उन्होंने मेडिटेशंस 1.17
10:22
Speaker A
में किया है। एडवर्ड गिबन की हिस्ट्री ऑफ द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ द रोमन एंपायर में एंटोरिनस के रूल को ऐसे डिस्क्राइब किया गया है। इसमें हिस्ट्री के लिए बहुत कम मटेरियल मिलता है। क्योंकि हिस्ट्री ज्यादातर इंसानों के क्राइम्स, बेवकूफी और
10:39
Speaker A
दुख भरे कामों का रिकॉर्ड होती है। मार्कस की बायोग्राफी के लिए भी उस पीरियड में कुछ खास नहीं मिला। 145 से 161 के बीच के डेढ़ दशक में हमें मार्कस की एक्टिविटीज के बारे में बहुत कम पता चलता
10:58
Speaker A
है। और उनके अंदर क्या चल रहा था वो सिर्फ फ्रोंटो के साथ की गई उनकी चिट्ठियों से ही समझ में आता है। लेकिन दो चीजें जो उनकी जिंदगी को आगे चल के डिफाइन करने वाली थी वो था कोर्ट और फिलॉसफी।
11:14
Speaker A
31 अगस्त 161 को एंटोनस मर गए और मार्कस अकेले सक्सेसर बन गए। मार्कस ने तुरंत एक्शन लिया और शायद हेड्रियन के ओरिजिनल प्लान को पूरा भी किया जो एंटोनिनस ने इग्नोर किया था और अपने अडॉप्टिव भाई लुसियस वेरस को को रूलर बनवा दिया।
11:37
Speaker A
वीरस का कैरेक्टर मार्कस के मुकाबले में हमेशा कमजोर दिखाया गया है। पुरानी सोर्सेस स्पेशली गसिप भरी हिस्टोरिया अगस्ता उसे एक ऐश प्रिय और गिरता हुआ इंसान दिखाती है। लगभग एक और नेरो जैसे शायद यह सही नहीं है। मेडिटेशंस में
11:59
Speaker A
मार्कस ने उनके बारे में ऐसा कुछ नहीं कहा। लेकिन इतना तो पक्का है कि मार्कस ही सीनियर एपरर थे। चाहे नाम से ना हो। और यह सरप्राइजिंग भी नहीं है। मार्कस वेरस से लगभग 10 साल बड़े थे और एंटोनियस
12:18
Speaker A
ने खुद उसे इस रोल के लिए ट्रेन किया था। यह फिलॉसफर किंग किस तरह का राजा निकला? शायद उतना अलग नहीं जितना लोग सोच रहे थे। एपरर के पास थ्योरेटिकली तो पूरा पावर होता था। लेकिन असल में उसके पास
12:35
Speaker A
पॉलिसीज कंट्रोल करने की एबिलिटी काफी लिमिटेड थी। उनका ज्यादा टाइम उन प्रॉब्लम्स को हैंडल करने में चला जाता जो लोअर लेवल से ऊपर तक पहुंच जाती थी। जैसे एंपायर के बड़े सिटी से आई एम्बेसी को रिसीव करना, क्रिमिनल केसेस के अपील्स
12:54
Speaker A
सुनना, प्रोविंशियल गवर्नर्स के सवालों का जवाब देना और इंडिविजुअल लोगों की पिटीशंस को देखना। इंपीरियल कूरियर्स का सिस्टम ठीक-ठाक था। लेकिन न्यूज़ एंपायर के कोने से सेंटर तक पहुंचने में हफ्तों लग जाते थे। और एपरर के ऑर्डर्स भी नीचे तक
13:13
Speaker A
पहुंचने में टाइम लगते थे। एपरर के डिसीजन को लॉ का स्टेटस मिलता था। लेकिन उसको इनफोर्स करना मोस्टली प्रोविंशियल गवर्नर्स के हाथ में होता था। और उनकी मेहनत कभी उनकी ही इनकंपटेंस करप्शन या लोकल एलट्स को नाराज ना करने की इच्छा से इफेक्ट हो सकती थी।
13:36
Speaker A
कभी-कभी हमें मार्कस के डेली काम दिख जाते हैं। इंपीरियल डिसीजंस के थ्रू जो लेटर्स, इं्रिप्शंस और लीगल कोर्ट्स में बचे हुए हैं। जो लॉस बचे हैं उनसे यह दिखता है कि उसे स्लेव्स को फ्री करने में इंटरेस्ट था। और ऑर्फंस के गार्डियनशिप रूल्स में
13:56
Speaker A
भी कुछ लोग कहते हैं कि स्लेव्स वाले रूल मार्कस की फिलॉसफी से इंस्पायर्ड थे। और ऑर्फंस वाले उनके खुद के बिना फादर के बड़े होने के एक्सपीरियंस से। लेकिन यह अब तक क्लियर नहीं है कि यह पॉलिसीज मार्कस के खुद के आइडियाज थे या
14:13
Speaker A
उनके पहले के एपरर एंटोनिनस जैसे ही थे। शायद सबसे इंटरेस्टिंग बात यह है कि मार्कस के डॉक्यूमेंट्स के शब्दों में उनकी पर्सनालिटी दिख जाती है जिसमें हर डिटेल का ध्यान और वर्ड्स के इस्तेमाल को ले एक कॉन्शियस एफर्ट दिखाई देता है जो
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Speaker A
उनके पहले के एपरर से अलग लगता है। यह चीजें मेडिटेशंस के राइटर और फ्रंटो के स्टूडेंट से एक्सपेक्ट भी की जा सकती हैं। जिनके लेटर्स में परफेक्ट वर्ड ढूंढने पर बहुतेंस दिया गया है। मार्कस की एक प्रायोरिटी थी सेनेट के साथ
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Speaker A
अच्छे रिलेशंस बनाना। गोल यह था कि एपरर के एब्सोल्यूट पावर को थोड़ा डिसगाइस किया जाए। एक इमेज बनाई जाए और कभी-कभी सच में भी जिसमें कॉन्सेंस और कोऑपरेशन दिखाई दे। 100 साल पहले तक एरिस्टोक्रेट सोचते थे कि रिपब्लिक वापस आएगा और कुछ तो सच
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Speaker A
में चाहते भी थे। लेकिन सेकंड सेंचुरी तक सबको क्लियर हो गया था कि प्रिंसिपेट के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है। सेनेट चाहते थे कि उनकी पब्लिक में रिस्पेक्ट हो और पीछे से उनका इन्फ्लुएंस भी बना रहे। अच्छे एपरर्स इस गेम को खुशी से
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Speaker A
खेलते थे। मार्कस ने जब अपर क्लासेस के साथ रिलेशंस स्ट्रांग किए तो वह एंटोनिनस और ट्रेजन के फुटस्ट्स फॉलो कर रहे थे ना कि हेड्रियन के। जिसके सेनेट के साथ रिलेशंस काफी टेंस थे और इसी वजह से उतनी
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Speaker A
ही जितनी किसी और बात की वजह से मार्कस की इमेज के एक काइंड और समझदार रूलर की बनी। जब तक एपरर जिंदा होता है, वह अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकता है। लेकिन लास्ट वर्ड उन्हीं हिस्टोरियंस का होता है जो
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Speaker A
सेनेट से होते थे। जैसे कॉर्निलियस, टेसिटस या मार्कस के बाद की जनरेशन के कैसियस्ट। एक और एरिया जहां मार्कस की पॉलिसी उनके पहले वालों जैसे ही थी। वो थी एक छोटी और अजीब सी से के खिलाफ जिसे क्रिश्चियंस कहा जाता
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Speaker A
था। अगली सेंचुरी में यह लोग एंपायर के लिए और भी बड़ी प्रॉब्लम बनने वाले थे। लेकिन मार्कस के टाइम में भी यह इतने नोटिसेबल हो गए थे कि एक इंसान सेल्सस ने इनके खिलाफ एक लंबी राइटिंग लिखी जिसका
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Speaker A
कुछ हिस्सा अगेंस्ट द क्रिश्चियंस अब भी बचा है। इंटेलेक्चुअल लोग जो इन पर ध्यान देते भी थे। उन्हें इन लोगों से नफरत थी। मार्कस के टीचर फ्रंटो भी शायद ऐसे ही सोचते थे। और आम लोग और एडमिनिस्ट्रेटर्स इनसे या तो
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Speaker A
डरते थे या इनको पसंद नहीं करते थे। लोग इन क्रिश्चियंस से इसलिए भी नफरत करते थे क्योंकि यह उन गॉड्स को नहीं मानते थे जिनके नाम पर सोसाइटी चलती थी। उनका एथिज्म यानी अपने गॉड के अलावा किसी और को
17:13
Speaker A
ना मानना उनके आसपास के लोगों और खुद उनके लिए डेंजर बन गया था। और जब यह एपरर को डिवाइन नहीं मानते थे तो वह सोशल ऑर्डर और स्टेट की स्टेबिलिटी के लिए भी एक थ्रेड बन जाते थे। क्रिश्चियनिटी इललीगल थी अर्ली सेकंड
17:30
Speaker A
सेंचुरी से जब प्लेनी द यंगर जो उस टाइम भथनिया के गवर्नर थे एशिया माइनर में उन्होंने एपरर ट्रेजन से एक सवाल पूछा जिसके बाद ट्रेजन ने एक ऑफिशियल रूल बनाया। क्रिश्चियंस को ढूंढने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर कोई
17:49
Speaker A
अपने आप क्रिश्चियन होने की बात मान ले तो उसे मार दिया जाए। लेकिन पूरे एंपायर में क्रिश्चियंस के अगेंस्ट प्रोसक्यूशन काफी बाद में स्टार्ट हुआ। सेकंड सेंचुरी में उनके लिए सबसे बड़ा थ्रेट लोकल प्रोविंशियल गवर्नर्स थे। जो या तो अपनी मर्जी से या लोकल पब्लिक के
18:08
Speaker A
प्रेशर में एक्शन लेते थे। लेट 170 में जैसे लन सिटी में दंगे हुए जिसमें ग्रीक बोलने वाले क्रिश्चियंस को ऑलमोस्ट खत्म ही कर दिए गए। मार्कस के टीचर जूनियस रुस्टिकस ने भी क्रिश्चियंस को कोर्ट में ट्राई किया और
18:28
Speaker A
फिर एग्जीक्यूट किया। जस्टिन मार्टिन भी इनमें थे। जब वो सिटी परफेक्ट था। मार्कस को भी क्रिश्चियनिटी के बारे में पता था। लेकिन लगता नहीं कि यह टॉपिक उनके दिमाग में ज्यादा जगह लेता था। मेडिटेशंस के एक सेक्शन 11.3 में जो क्रिश्चियनिटी
18:50
Speaker A
का डायरेक्ट मेंशन मिलता है, वह शायद बाद में ऐड किया गया हिस्सा है। और जो इनडायरेक्ट हिंट्स कुछ स्कॉलर्स को लगते हैं, वह भी शायद फेक है। मार्कस के पास वैसे भी और ज्यादा सीरियस प्रॉब्लम्स थे। इस छोटी सी ट्रबलसम
19:06
Speaker A
कल्ट से जैसे ही वह एपरर बने रोम और उनके इकलौते राइवल ईस्ट का पार्थियन एंपायर के बीच रिलेशन सडनली बिगड़ गए। ट्रेजन के टाइम से ही दोनों एंपायर्स एक कोल्ड वॉर में लॉक थे। जो हर कुछ जनरेशंस में
19:22
Speaker A
मिलिट्री वॉर बन जाता था। जब एंटोनिनस मरे और नए इन एक्सपीरियंस्ड रूलर्स गद्दी पर आए तो पार्थियन किंग वोगेसियस थ्री ने शायद इस चांस का फायदा उठाना चाहा। 162 में उनके सोल्जर्स ने अर्मेनिया ऑक्यूुपाई कर लिया और एक रोमन आर्मी जो
19:44
Speaker A
हेल्प के लिए गई थी उसको डिस्ट्रॉय कर दिया। सीरिया भी डेंजर में आ गया। रोम को कुछ करना ही था। वेरस जो छोटे एपरर थे उनको ईस्ट भेजा गया जहां वह अगले चार साल तक रहे। ना उनके पास ना मार्गस के पास कोई
20:02
Speaker A
मिलिट्री एक्सपीरियंस था क्योंकि एंटोनिनस का रोल पीसफुल था। इसलिए वॉर का एक्चुअल काम प्रोफेशनल जनरल्स ने ही संभाला। स्टार्टिंग में प्रॉब्लम्स आई लेकिन बाद में रोमंस ने कमबैक किया और यंग कमांडर एविडियस केसियस जैसे लोगों के लीड में
20:21
Speaker A
पार्थियंस को शांति के लिए मजबूर कर दिया। पार्थिया अभी भी थ्रेट था लेकिन कुछ टाइम के लिए उसे डिप्लोमेसी से हैंडल किया जा सकता था। लेकिन वेरस और मार्कस को अपनी जीत एंजॉय करने का समय नहीं मिला। एक साल के अंदर
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Speaker A
एंपायर एक टेरेबल प्लेग के चक्कर में आ गया जो शायद लुसियस के सोल्जर्स ईस्ट से ले आए थे। शायद उनका इफेक्ट इतना अपोक्लिप्टिक नहीं था जितना बाद के राइटर्स ने लिखा। लेकिन लोग तो बहुत मरे और इसकी वजह से
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Speaker A
दूसरी बड़ी प्रॉब्लम का रिस्पांस डिले हो गया। यह प्रॉब्लम थी एंपायर के दूसरे साइड नॉर्थ बॉर्डर पर बढ़ती इनस्टेबिलिटी। जहां रोम का सामना हो रहा था जर्मनी, ईस्टर्न यूरोप और स्केंडेविया के बरबेरियन लोगों से। इस टाइम कई ट्राइब्स नॉर्थ से प्रेशर में
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Speaker A
थी और इसलिए वह रोम के बॉर्डर क्रॉस कर रही थी। कॉनक्वेस्ट के लिए नहीं बल्कि रहने की जगह ढूंढने के लिए। रोम कभी इनका रेजिस्टेंस करता कभी समझौता। लेकिन एक प्रॉपर प्लान की कमी ने आखिर में तीन सेंचुरीज बाद वेस्टर्न एंपायर को
21:34
Speaker A
गिरने तक ले गया। कुछ जगह पर तो बॉर्डर को लाइन से मार्क किया गया था। एड्रियन की बनाई हुई वॉल जो ब्रिटेन में बनी थी। एंपायर के सबसे दूर के फ्रंटियर को सिक्योर करने के लिए थी। एंटोनस के टाइम एक और वॉल थोड़ी और नॉर्थ
21:53
Speaker A
में बनाई गई थी। लेकिन मेनलैंड यूरोप में ऐसी वॉल्स बनानी मुश्किल थी और वहीं पर सबसे ज्यादा डेंजर भी था। रोम को अभी भी एडी9 की ट्रेजडी याद थी। जब जनरल वेरस और उसकी टीम लीजंस जर्मनी के जंगल्स में घुस
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Speaker A
गए थे और कभी वापस नहीं आए। सेकंड सेंचुरी में सबसे ज्यादा टेंशन का एरिया था थोड़ा साउथ जो आज के रोमेनिया और हंगरी के आसपास का हिस्सा था। डेसिया का एरिया ट्रेजर ने दो जनरेशन पहले जीता था। जिसने थोड़ी देर के लिए प्रॉब्लम दूर
22:31
Speaker A
की थी लेकिन रिस्क अभी भी था। मार्कस के टाइम में तीन ट्राइब सबसे बड़ी दिक्कत बन गए थे। क्वदी मार्कोमेनी और जेजगस या सेमेटियंस। तीन रोमन रिलीजंस को पार्थिया भेजने की वजह से नॉर्थ बॉर्डर कमजोर हो गया था। और
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Speaker A
बार्बेरियंस ने इस चांस का फायदा उठाया। 168 में मार्कस और वेरस ने नॉर्थ मार्च किया इनका सामना करने के लिए। बाकी काफी हिस्सा मार्कस के रूल का चला गया छोटी-छोटी लड़ाईयों में। पहले अर्ली 170 क्या मार्कोमेनिक वॉर्स में और फिर उसी
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Speaker A
डिकेड के एंड में एक और कैंपेन में और इस बार ऑलमोस्ट पूरा बोझ मार्कस के ऊपर था क्योंकि वेरस 169 के स्टार्टिंग में अचानक मर गए शायद स्ट्रोक से। यह वॉर पहले वाली वेरस की कैंपेन से बिल्कुल अलग थी। जो मिलिट्री और
23:31
Speaker A
डिप्लोमेटिक ट्रिक्स पार्थियंस के खिलाफ काम करती थी। वो यहां ज्यादा यूज़फुल नहीं थी। इस बार रोमंस को हर एक छोटे ट्राइबल लीडर से अलग-अलग नेगोशिएट करना पड़ता था। जिनके पास खुद अपने लिमिटेड पावर होती थी और जिन पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता
23:49
Speaker A
था। जब बातचीत फेल होती थी तब एक-एक करके छोटी-छोटी ब्लडी फाइट्स लड़नी पड़ती थी। कोई बड़ा ओपन वॉर नहीं होता था। इस पूरे कैंपेन का रिकॉर्ड रोम में बनाई गई एक कॉलम पर है जो मैकोमेनिक वॉर्स के एंड को याद करता है। विक्ट्री दिखाने
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Speaker A
के लिए बनाई गई इस मोनुममेंट पर बनी सींस में सिर्फ ब्रूटल फाइटिंग, बर्बादी और एग्जीकशंस दिखते हैं। मार्कस ने लिखा मकड़ी फ्लाइस को पकड़ कर घमंड करती है। आदमी रैबिट्स, मछली, सूअर, भालू, सरेंटियंस को। मेडिटेशंस 8.34 का स्टार्टिंग सीन कि
24:34
Speaker A
कटी हुई हाथ या पैर या सर का कटा हुआ हिस्सा हो सकता है मार्कस के खुद के एक्सपीरियंस से इंस्पायर्ड हो। 175 तक लग रहा था रोमंस जीत रहे हैं। लेकिन तब एक शॉकिंग न्यूज़ आई। एवेडियस कैसियस जो पार्थियन वॉर में जनरल के रूप
24:51
Speaker A
में चमक रहे थे और अब सीरिया का गवर्नर के बनके ईस्ट एंपायर के ऑलमोस्ट र बन गए थे। उन्होंने बगावत कर दी और खुद को एपरर डिक्लेअ कर दिया। ईस्ट के कुछ प्रोविंसेस जैसे कैपेडोसिया मार्कस के साथ लॉयल रहे। लेकिन बाकी पूरा
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Speaker A
ईस्ट स्पेशली इजिप्ट कैसियस को एपरर मान रहा था। इजिप्ट का ग्रेन सप्लाई कैपिटल के लिए बहुत इंपॉर्टेंट थी। सिविल वॉर ऑलमोस्ट तय था। लेकिन कैसियस को उनके ही एक आदमी ने मार दिया। इसलिए वॉर टल गई। फिर भी मार्कस
25:27
Speaker A
को ईस्ट जाना पड़ा अपना कंट्रोल दिखाने के लिए। उनके साथ फस्तना भी गई जो इस जर्नी के दौरान मर गई। मार्कस ने ईस्ट के मेजर सिटीज जैसे एंटियोच और एलेक्जेंड्रिया को विजिट किया और फाइनली एथेंस पहुंचे। जहां वो इल्यूजियन मिस्टीरियस के हिस्सा
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Speaker A
बने। यह एक सीक्रेट रिलीजियस सेरेमनी थी जो डिमीटर एग्रीकल्चर की गॉडेस को डेडिकेटेड थी। अब मार्कस 50 के ऊपर हो गए थे और उनकी हेल्थ डाउन हो रही थी। कैसियस की बगावत ने दिखाया कि सक्सेशन प्लान बनाना जरूरी है।
26:05
Speaker A
फस्टीना ने कम से कम 13 बच्चे पैदा किए थे। जिनमें से ज्यादातर छोटी उम्र में मर गए। 170 के मिडिल तक मार्कस का सिर्फ एक बेटा बचा था। कोमोडस जो तभी अपनी टीम्स में एंटर कर रहा था। मार्कस के पहले के एपररर्स जैसे
26:24
Speaker A
अडॉप्शन का रूल फॉलो करने का कोई रीजन नहीं था और लगता भी नहीं कि उसने ऐसा कुछ सोचा। अगले कुछ सालों में कॉमोडोस को फास्ट ट्रैक प्रमोशन मिला और वह एपरर के ऑलमोस्ट इक्वल बन गया। 177 में सिर्फ 15 साल की उम्र में वह
26:42
Speaker A
कंसोल बना। उसी साल उसको एंपायर के ऑलमोस्ट सभी बड़े पावर्स मिल गए। बस पोंफेक्स मैक्सिममस का पोस्ट छोड़ा गया जो सिर्फ रूलिंग एपरर के पास होता था और लाइफ टाइम के लिए रहता था। मैकोमेनिक वॉर से जो जीत मिली थी वह
27:01
Speaker A
ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई और 178 में मार्कस और कोमोडस दोनों फिर से नॉर्थ मार्च किए। 2 साल बाद मार्कस मर गए 58 साल की उम्र में 58 वेसियन के बाद मार्कस पहले एपरर थे जिसने अपने बेटे को गद्दी दी। दुख की बात
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Speaker A
यह है कि कॉमोडिस ने वह उम्मीदें पूरी नहीं की जो मार्कस ने उसमें देखी होंगी। कॉमोडिस का नाम एक बिगड़े हुए टेंट के रूप में याद रखा गया। एक दूसरा केलीगुला या नेरो जिसके फ्लॉज़ उसके फादर के नोबेल इमेज
27:34
Speaker A
के कंट्रास्ट में और ज्यादा हाईलाइट हो गए। कमोडस के 12 साल के रूल के बाद उनकी हत्या हुई जिसके बाद एंपायर में एक पावर स्ट्रगल का सिलसिला शुरू हो गया जो अगले 100 सालों तक एंपायर को परेशान करता रहा।
27:52
Speaker A
मेडिटेशंस लिखने का समय यूजुअली 170 में माना जाता है। यानी मार्कस के लाइफ का लास्ट डिकेड। इस बात में कोई डाउट नहीं कि यह टाइम उनके लिए डार्क और स्ट्रेसफुल था। 169 से 179 के बीच के 10 साल में उन्होंने
28:11
Speaker A
लगातार बॉर्डर पर लड़ाईयां झेली। कैसियस की फेल हुई बगावत देखी और वेरस अपनी बीवी फस्तना और कई और नजदीकी लोगों की डेथ देखी। शायद उन्होंने यह एक्सपेक्ट नहीं किया होगा कि उनकी डेथ के बाद पूरा सेंचुरी टर्मल से भरा होगा।
28:30
Speaker A
लेकिन उन्होंने इतना तो समझ में आ गया होगा कि उनका बेटा कॉमोडोस वो इंसान नहीं है जैसा उन्होंने सोचा था। ऐसे टाइम में मार्कस का फिलॉसफी में सुकून ढूंढना बिल्कुल नेचुरल था। लेकिन मार्कस ने अपनी फिलॉसोफिकल स्टडीज से क्या चाहा यह समझने
28:47
Speaker A
के लिए थोड़ा बैकग्राउंड में जाना जरूरी है। मेडिटेशंस को सही कॉन्टेक्स्ट में समझने के लिए हमें सिर्फ स्टोइसिज्म जिस पर यह पूरा काम बेस्ड है। सिर्फ यह नहीं बल्कि पुराने जमाने में फिलॉसोफी का रोल क्या था वो भी समझना
29:04
Speaker A
पड़ेगा। आज के टाइम में फिलॉसफी एक एकेडमिक सब्जेक्ट है जो सिर्फ प्रोफेशनल फिलॉसोफर्स ही सीरियसली लेते हैं। हम लोग अपनी लाइफ की एक फिलॉसफी रखते हैं शायद लेकिन उनका यूनिवर्सिटी के फिलॉसफी डिपार्टमेंट से ज्यादा लेना देना नहीं होता।
29:24
Speaker A
20th सेंचुरी की एनालिटिक फिलॉसफी काफी दूर लगती है उन प्रॉब्लम से जो अमेरिकन फिलॉसफर थॉमस नेगल मोटल क्वेश्चंस कहते हैं। जैसे एथिकल डिसीजंस लेना, एक फेयर सोसाइटी बनाना, दुख और लॉस को समझना और मौत का सामना कैसे करें यह
29:44
Speaker A
समझना। एक्चुअली आज हम में से ज्यादा लोग इन प्रॉब्लम्स को रिलीजन के एरिया से समझते हैं। फिलॉसफी की नहीं। लेकिन मार्कस और उनके टाइम के लोगों के लिए सिचुएशन बिल्कुल अलग थी। पुरानी फिलॉसफी में भी एकेडमिक साइट थी। एथेंस और
30:02
Speaker A
और भी बड़े शहरों में पब्लिक फंडिंग से फिलॉसफी के टीचर्स होते थे। और प्रोफेशनल फिलॉसोफर्स उसी तरह पढ़ते, आर्ग्यू करते और लिखते थे जैसे आज करते हैं। पर फिलॉसोफी का एक और साइड भी था। एक प्रैक्टिकल साइड। यह सिर्फ पढ़ने और डिबेट करने की चीज नहीं
30:21
Speaker A
थी बल्कि एक लाइफ का डिजाइन था। एक ऐसा सिस्टम जो बताता था कि जिंदगी कैसे जीनी चाहिए। यह नीड एंशिएंट रिलीजन से पूरी नहीं होती थी क्योंकि रिलीजन सिर्फ रिचुअल्स पर फोकस करता था। और मोरल या एथिकल रूल्स देता ही नहीं था। और किसी को
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Speaker A
उससे उम्मीद भी नहीं होती थी। यह काम फिलॉसफी का था। आज जैसी फिलॉसफी का आईडिया मोस्टली एक ही आदमी ने शुरू किया था। फिफ्थ सेंचुरी बीसी के एथेंस के थिंकर सोक्रेटीस ने यानी सुकरात। लेकिन हेलिनिस्टिक पीरियड में फिलॉसफी एक
30:56
Speaker A
और लेवल पर गई। जहां फिलॉसोफिकल सेट्स बने जिन्होंने प्रॉपर बिलीफ सिस्टम दिए। पूरे के पूरे लाइफ के रूल्स जो कोई आदमी पूरी तरह से अपना सकता था। इन हेलिनिस्टिक सिस्टम्स में सबसे इंपॉर्टेंट रोमस के लिए और मार्कस के लिए
31:14
Speaker A
भी स्टोइक स्कूल था। यह मूवमेंट का नाम आया स्टो से यानी एक पोर्टिको जहां एथेंस में इसके फाउंडर जेनो 332 या 33 से 262 बीसी जेनो अपना ज्ञान देते थे। जेनो के आईडियाज को उनके सक्सेसर क्लथिस 331 से 232 बीसी और क्रिसिपस 280 से 26
31:44
Speaker A
बीसी ने आगे बढ़ाया। क्रिसिपस ने तो बहुत लिखा और उन्होंने सिस्टमिक स्टोइससिज्म का बेस रेडी किया। यह अर्ली एकेडमिक स्टोसिज्म ही वह सोर्स है जहां से मेडिटेशंस में बार-बार आने वाले कुछ कीवर्ड्स और कांसेप्ट्स आए हैं। और मार्कस का व्यू समझने के लिए इस पूरे
32:06
Speaker A
सिस्टम का बेसिक आईडिया समझना जरूरी है। हिस्टोइक सोच के जो मेन आइडियाज हैं उनमें सबसे इंपॉर्टेंट है यह स्ट्रांग बिलीफ कि दुनिया एक रैशन और प्रॉपर्ली अरेंज्ड तरीके से बनी है। सिंपल वर्ड्स में बोले तो पूरी दुनिया एक ऐसी फोर्स के कंट्रोल में है जिसे
32:32
Speaker A
स्टइक्स लोगस कहते थे। लोगस से ही इंग्लिश के वर्ड्स लॉजिक और लॉगी आते हैं। इस वर्ड का मीनिंग इतना बड़ा है कि एग्जैक्ट ट्रांसलेट करना मुश्किल है। संस्कृत में इसके आसपास का एक शब्द है रित। शायद वो यूज कर सकते
32:54
Speaker A
हैं। बेसिक लेवल पर इसका मतलब होता है कनेक्टेड रशनल थॉट। या तो एक एबिलिटी के रूप में यानी सोचने की पावर या उस एबिलिटी का रिजल्ट सेंस बनाता हुआ डायलॉग या आईडिया लोगस काम करता है इंडिविजुअल लोगों में भी
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Speaker A
और पूरे यूनिवर्स में भी इंसान के अंदर यह होता है रीजन के फॉर्म में और कॉस्मिक लेवल पर यह एक रैशन प्रिंसिपल होता है जो यूनिवर्स के सिस्टम को चलाता है इस सेंस में लोगस को नेचर प्रोविडेंस या गॉड भी
33:28
Speaker A
कहा जाता आ सकता है। जब बाइबल के जॉन के गोस्पल में लिखा गया था कि वर्ड यानी लोगस गॉड के साथ था और गॉड था। तो यह स्टोइक आईडिया से ही लिया गया है। हर इवेंट लोगस के थ्रू डिसाइड होता है। एल ओ जी ओ
33:49
Speaker A
एस और एक ऐसे चैन में होता है जिसमें कॉज और इफेक्ट का ब्रेक नहीं होता। स्टोसिज्म स्टार्ट से ही एक डिटरमिनिस्टिक सिस्टम है। यानी सब कुछ ऑलरेडी डिसाइडेड होता है। कोई फ्री विल नहीं है। और ऐसा लगता है कि इंसान के पास ना फ्री विल होती
34:06
Speaker A
है और नो मोरल रिस्पांसिबिलिटी। लेकिन स्टइक्स इस बात को फुल्ली एक्सेप्ट नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने फ्री विल को ऐसे डिफाइन किया कि इंसान खुद से वही चूज़ करें जो वैसे भी होने ही वाला है। उनकी एक फेमस एग्जांपल था। इंसान एक
34:24
Speaker A
कुत्ते की तरह है जो एक चलती गाड़ी से बंधा हुआ है। अगर कुत्ता भाग के साथ चले तो ठीक नहीं तो गाड़ी उसे घसीट के ले जाएगी। लेकिन चॉइस उसकी है भागना या घसीटना। इसी तरह इंसान अपनी चॉइससेस और एकशंस का
34:42
Speaker A
जिम्मेदार है। चाहे लोगस ने ऑलरेडी उन्हें डिसाइड किया हो। इवन अगर कोई एक्शन गलत या इमोरल लगता है तो वह भी पूरे सिस्टम का हिस्सा होता है। जिसका फाइनल रिजल्ट हार्मोनी और गुड ही होता है। वह भी लोगस के कंट्रोल में होता
34:59
Speaker A
है। लेकिन लोगस सिर्फ एक इनविज़िबल पावर नहीं है जो दुनिया को चलाता है। यह एक रियल सब्सटेंस भी है जो हर जगह प्रेजेंट है। मेटाफर नहीं एक्चुअल चीज की तरह जैसे ऑक्सीजन या कार्बन। इसका फिजिकल फॉर्म न्यूमना है। एक
35:17
Speaker A
ऐसी चीज जो पुराने स्टइक्स ने प्योर फायर के रूप में सोचा और क्रिसिपस ने इसे फायर और एयर का मिक्स कहा। न्यूमना एक पावर है एक लिविंग ब्रेथ जो इंसान और जानवरों को जिंदा बनाती है। जैसे डायलन थॉमस ने कहा द फोर्स दैट
35:38
Speaker A
थ्रू द ग्रीन फ्यूज ड्राइव्स द फ्लावर। यह नुमिना पत्थर और मेटल जैसे लाइफलेस चीजों में भी होता है। उन्हें शेप और यूनिटी देता है। वह इंटरनल एनर्जी जो स्टोन को स्टोन बनाती है। हर ऑब्जेक्ट एक लाइफलेस मैटर और एक लिविंग फोर्स का मिक्स
35:57
Speaker A
होता है। जब मार्कस कॉज एंड मटेरियल बोलते हैं तो उनका मतलब होता है यह दोनों एलिमेंट्स। एक इनर्ट मैटर और एक एेट करने वाला नोमना। जो तब तक साथ रहते हैं जब तक वह ऑब्जेक्ट एक्सिस्ट करता है। जब ऑब्जेक्ट डिस्ट्रॉय
36:16
Speaker A
हो जाता है तो नुमिना वापस लोगस में अब्सॉर्ब हो जाता है। यह डिस्ट्रक्शन और रीइीग्रेशन का प्रोसेस हर ऑब्जेक्ट के साथ हर मोमेंट हो रहा है। और बड़े स्केल पर पूरी यूनिवर्स के साथ भी होता है। जब कभी-कभी पूरी दुनिया फायर में डिस्ट्रॉय
36:34
Speaker A
हो जाती है। इसको एकोसिस कहते हैं। और फिर दोबारा बन जाती है। अगर दुनिया रियली ऑर्डरली है और लोगस सब कुछ कंट्रोल करता है तो उस ऑर्डर का प्रूफ हमें दुनिया के हर हिस्से में दिखना चाहिए। यही सोच ने स्टॉक्स को फिजिकल
36:53
Speaker A
वर्ल्ड के नेचर पर सोचने पर मजबूर किया और उन्हें लॉजिक और लैंग्वेज के स्ट्रक्चर में भी सेम रैशनलिटी ढूंढने पर फोर्स किया। मार्कस के मेडिटेशंस में कई जगह एथमोलॉजी यानी वर्ड्स के ओरिजिन का इंटरेस्ट भी दिखाई देता है। यह सिस्टमेटिक सोच
37:13
Speaker A
उन्होंने और भी सब्जेक्ट्स में लगाई। क्रिसिपस के काम का जो लिस्ट डयाजिस लशियस ने दिया है वह काफी लंबा है। उसमें सिर्फ फिलॉसफी नहीं बल्कि ऐसे भी काम हैं जैसे ऑन हाउ टू रीड पोएट्री और अगेंस्ट द टचिंग अप ऑफ
37:35
Speaker A
पेंटिंग्स। बाद के स्टइक्स ने हिस्ट्री, एंथ्रोपोलॉजी और और भी सब्जेक्ट्स में काम किया। सिर्फ फिलॉसोफी तक लिमिटेड नहीं रहे। हिस्टोइक सोच का फैलाव सिर्फ सोच या आइडियाज तक सीमित नहीं था बल्कि यह जगह-जगह भी फैला। यह मूवमेंट एथेंस में
37:54
Speaker A
स्टार्ट हुआ था। क्रिसिपस की डेथ के बाद के 150 सालों में यह हर जगह तक पहुंच गया। खासकर रोम तक। सेकंड सेंचुरी बीसी के रोमंस उस टाइम कॉन्क्वेस्ट के बीच में थे और सेंचुरी के एंड तक वह पूरा
38:09
Speaker A
मेडिटेरेनियन कंट्रोल कर रहे थे। जहां कॉन्क्वेस्ट होता वहां कल्चर भी आता। जब पोएट फोरियस ने देखा कि 200 बीसी से उनके अपने टाइम तक रोमन अरिस्टोक्रेट्स ग्रीक कल्चर अडॉप्ट कर रहे हैं तो उन्होंने कहा था कि जीती हुई ग्रीस ही असली जीतने वाली
38:31
Speaker A
निकली। फिलॉसफी में ग्रीस का इनफ्लुएंस सबसे ज्यादा क्लियरली दिखता है। ग्रीक फिलॉसफर्स जैसे पेनेटियस 185 से 119 बीसी और पोसिडोनियस 135 से 50 बीसी रोम आए लेक्चर्स देने। कई लोग वहां लंबी टाइम तक रहे भी। फर्स्ट सेंचुरी बीसी में यह फैशन
38:55
Speaker A
बन गया था कि रिच रोमन यूथ एथस जाकर पढ़े। जैसे 18 सेंचुरी का ग्रैंड टूर रोमन एरिस्टोक्रेट्स ने फिलॉसफर्स को सपोर्ट किया और बड़े-बड़े फिलॉसफी बुक्स के लाइब्रेरीज बनाए। जैसे हरकलेनियम के विला ऑफ दी पेपरी में रोमंस जैसे सिसरो और लकटियस ने ग्रीक
39:20
Speaker A
फिलॉसफी को लैटिन में समझने की कोशिश भी की। फिलॉसोफी के सबसे बड़े स्कूल्स में स्टोइससिज्म सबसे पॉपुलर बना। बाकी सेक्स के कंपैरिजन में स्टइक्स हमेशा पब्लिक लाइफ में एक्टिव रहने को सपोर्ट करते थे। और यह थिंकिंग रोमन अपर क्लास को बहुत
39:39
Speaker A
पसंद आई। उनके वैल्यूस में पॉलिटिक्स और मिलिट्री सर्विस काफी इंपॉर्टेंट थे। स्टोइससिज्म को कभी-कभी रियल रिलीजन ऑफ अपर क्लास रोमंस भी कहा गया। और यह कहना बिल्कुल गलत भी नहीं है। इस प्रोसेस में स्टसिज्म का फॉर्म बदल गया।
39:58
Speaker A
जेनो और क्रिसिपस वाली ओरिजिनल वर्जन से काफी अलग। सबसे इंपॉर्टेंट चेंज यह था कि फोकस नैरो हो गया। अर्ली और मिडिल स्टोइससिज्म एक प्योर सिस्टम था जो हर तरह के नॉलेज को कवर करता था और काफी थ्योरेटिकल और एब्स्ट्रैक्ट
40:15
Speaker A
था। लेकिन रोमन स्टोइससिज्म एक प्रैक्टिकल सिस्टम बन गया। सोचने का एक फॉर्मल सिस्टम नहीं बल्कि जीने का एक तरीका। हिस्टोरिकल रीजंस की वजह से यह रोमन स्टाइलिस्टिज्म ही बाद के जमाने को ज्यादा इन्फ्लुएंस करता रहा। आज जो हम
40:35
Speaker A
हिस्टोइक वर्ड यूज करते हैं, उन लोगों के लिए जो मुश्किल वक्त में भी स्ट्रांग रहते हैं। वह ज्यादातर रोमन वैल्यू से आई हैं ना कि ओरिजिनल ग्रीक फिलॉसफर से। बाद के स्टोरी सीिज्म में लोग सिर्फ बुक से नहीं बल्कि रियल इंसानों से इंस्पायर
40:52
Speaker A
होते थे। इसके सबसे फेमस फॉलोअर में एक थे मार्कस कैटो कैटो द यंगर। अपने ग्रेट ग्रैंडफादर से अलग दिखने के लिए। जब जूलियस सीजर ने 49 बीसी में रोम पे मार्च किया। कैटो एक ऑनेस्ट और स्ट्रिक्ट सेनेटर था।
41:12
Speaker A
उसने सीजर के राइवल पमपे का साथ दिया क्योंकि वह लीगल गवर्नमेंट को सपोर्ट करता था। जब उसे समझ आया कि सीज़र जीत जाएगा। कैटो ने डिसाइड किया कि वह रिपब्लिक के बाद नहीं जिएगा और 46 बीसी में मुंडा की
41:30
Speaker A
बैटल के बाद उसने सुसाइड कर लिया। सेंचुरी के अंदर ही कैटोस्टोइक रेजिस्टेंस का सिंबल बन गया। नेरो के टाइम उसके पोएट ल्यूकन ने इमोर्टलाइज कर दिया और सेनेटर थ्रेसिया पेटस ने उनके ऊपर एक प्रज़ फील्ड बायोग्राफी लिखी जिसका रिजल्ट यह हुआ कि
41:49
Speaker A
नेरो ने थेरेसियो को भी मार दिया। थ्रेसिया का दामाद हेलविडियस प्रिस्कस भी वैसे ही अपोज करता था और उनका एंड भी वैसे ही हुआ वेस्टेशियन के रूल में थसे और हेलविडियस बन गए रोल मॉडल सेकंड सेंचुरी के रिच लोगों के लिए
42:10
Speaker A
जैसे मार्कस के मेंटर्स रस्टिकस मैक्सिममस और सेवरेस मार्कस ने मेडिटेशंस 1.14 में इन सबको और कैटो को भी रिस्पेक्ट दिया है। कैटो थ्रासिया और हेलवीडियस एक्शन वाले लोग थे। लिखने वाले नहीं। उनकी लेजेंड्री ब्रेवरी की वजह से उनका इमेज थोड़ा सिंपल
42:34
Speaker A
और फ्लैट लगता है। एक और ज्यादा कॉम्प्लेक्स और इंटरेस्टिंग इंसान थे पोएट ल्यूकन के अंकल लुसियस एनएस सेननेका। 4 बीसी से एडी 65 जिसे यूजली सेनिका द यंगर कहते हैं ताकि उनके फेमस फादर से कंफ्यूज ना हो। पहले वह यंग नेरो के
42:55
Speaker A
एडवाइजर थे लेकिन बाद में एक फेल्ड कूप में इनवॉल्व होने के चक्कर में उन्हें सुसाइड करने को मजबूर किया गया। हर इंसान की जिंदगी उनके आइडियल्स के साथ मैच नहीं करती। और कुछ क्रिटिक्स को यह समझना मुश्किल लगा। किसी ने कहा इतना अमीर कैसे
43:11
Speaker A
था और नेरों की इतनी तारीफ कैसे करता था जबकि उसकी फिलॉसफी कुछ और कहती थी फिर भी उसके लिखे हुए काम स्पेशली लेटर्स टू लुसिलियस बाद में स्टोसिज्म के सबसे इंगेजिंग और इजीली समझने वाला वर्जन बन गए क्योंकि वह लैटिन में लिखे गए थे
43:30
Speaker A
इसलिए उनका इफेक्ट बाद की जनरेशंस पर बहुत ज्यादा हुआ लेकिन सबस्टइक्स रिच सेनेटर्स नहीं थे एक और टाइप का स्ट्राइक भी होता था। आउटसाइडर जिसका सिंपल और टफ जीवन स्टाइल उसे रिच लोगों की रिस्पेक्ट दिलाता था और जिसकी
43:46
Speaker A
वजह से वह अपर क्लास सोसाइटी को ओपनली क्रिटिसाइज कर सकता था। ऐसे ही अर्ली एग्जांपल थे गायस मजोनियस रूफस 30 से 100 जो रोमन एडमिनिस्ट्रेशन में नाइट यानी इक्व्वाइट्स क्लास के थे और जिसे नेरो और विस्पेशियन दोनों ने एकल भेज दिया
44:11
Speaker A
था और भी ज्यादा पावरफुल एग्जांपल था मोसोनियस का स्टूडेंट एपिक्टेटस जिन्होंने फिलॉसफी का प्रैक्टिस एक स्लेव के रूप में स्टार्ट किया था और जब फ्री हुए तब अपनी पूरी जिंदगी इसी में लगा दी। उसे डोमिटियन के रूल में
44:28
Speaker A
निकोपोलिस यानी नॉर्दन ग्रीस में एग्जाइल भेजा गया था और जब टरेंट की डेथ हुई तो उसने वहीं रहना चूज़ किया जहां वो लोगों को पढ़ाता और लेक्चर्स देता था। उन विजिटर्स को भी जो दूर-दूर से उसके पास सीखने आते
44:42
Speaker A
थे। उनमें से एक था एक अपर क्लास हिस्टोरियन और लीडर एरेन 86 से 160 जिसने एपिकेटस के लेक्चर्स का डिटेल रिकॉर्ड लिखा जिसे आज हम डिस्कोर्सेज ऑफ एपिकेटस के नाम से जानते हैं। बाद में उन्होंने एक शॉर्ट वर्जन भी
45:00
Speaker A
बनाया जिसका नाम था इंक्राडियन। इसका मतलब है मैनुअल या हैंडबुक। एबिकेटस मार्कस के लिए स्पेशली इंपॉर्टेंट फिगर रखते थे। मार्कस ने अपने फिलॉसोफिकल टीचर रुस्टिकस को थैंक्स बोला है इसलिए कि उन्होंने उसे एपिकेटस के लेक्चर से मिलवाया शायद डिस्कोर्सेज या
45:19
Speaker A
कोई प्राइवेट लेक्चर्स नोट्स मेडिटेशंस के बुक 11 में एपिकेटस के काफी कोर्स और पैराफ्रेसेस भी मिलते हैं। एरायन का छोटा एनक्राइडियन बुक मेडिटेशंस के कॉन्टेक्स्ट ही नहीं फॉर्म में भी मिलती जुलती है। दोनों में शॉर्ट और अलग-अलग एंट्रीज का फॉर्मेट है।
45:42
Speaker A
एपिकेटस का लेट स्टोसिज्म एक काफी सिंपल वर्जन था पुराने हेलिस्टिक स्टोसिज्म का। एक ऐसी फिलॉसफी जो अपने कॉम्पिटिट से काफी कुछ सीख चुकी थी और अपने ही कुछ पार्ट्स को लगभग भूल गई थी। यह दोनों चीजें सब्जेक्ट का नैरो हो जाना और नॉन हिस्टोइक
46:02
Speaker A
सोर्सेस से आइडियाज लेना मेडिटेशंस में भी क्लियरली दिखाई देता है। क्रेसिपस और उनके फॉलोअर्स ने नॉलेज को तीन पार्ट्स में डिवाइड किया था। लॉजिक, फिजिक्स और एथिक्स। लॉजिक मतलब नॉलेज का नेचर। फिजिक्स मतलब फिजिकल वर्ल्ड का स्ट्रक्चर और एथिक्स मतलब इंसान का उस वर्ल्ड में
46:24
Speaker A
क्या रोल है? मार्कस ने एक जगह बुक 8 सेक्शन 13 8.13 इस थ्री पार्ट सिस्टम का नाम तो लिया है लेकिन मेडिटेशंस के बाकी पार्ट से क्लियर है कि लॉजिक और फिजिक्स उनका फोकस नहीं था। एक जगह तो वह गॉड्स को थैंक्स करते
46:42
Speaker A
हैं कि वह लॉजिक के छोटे-छोटे झगड़ों में नहीं फंसे और फिजिक्स में ज्यादा उलझे नहीं। 1.17 में कभी-कभी कुछ एंट्रीज लैंग्वेज और हिस्टोरिक थॉट का लिंक दिखाती हैं। जैसे 8.57 यानी बुक एट सेक्शन 57 के वर्ल्ड प्ले में लेकिन यह रेयर है। कई बार
47:02
Speaker A
मार्कस की लॉजिक कमजोर लगती है। वो फिलॉसफर वाली लॉजिक नहीं बल्कि एक स्पीकर या राइटर वाली होती है। जैसे 4.4 में एक प्रॉपर लॉजिक चैन मिलता है। लेकिन वो अनकॉमन है। फिजिकल वर्ल्ड में उसकी इंटरेस्ट सिर्फ तब होती है जब वो ह्यूमन
47:21
Speaker A
लाइफ से जुड़ी हो। स्टोसिज्म का एक बेसिक आईडिया जैसे पूरी यूनिवर्स का एक टाइम के बाद फायर में डिस्ट्रॉय होना इस पर मार्कस काफी न्यूट्रल रहते हैं और वह अकेले ऐसा नहीं थे। उनके लिए सिस्टम का रियल बेस एथिक्स
47:37
Speaker A
था। सिर्फ इसलिए कि तुम ग्रेट थिंकर या साइंटिस्ट नहीं बन पाए। इसका मतलब यह नहीं कि तुम फ्रीडम पाना, हम्ल रहना और दूसरों की हेल्प करना छोड़ दो। 7.67 में लिखा है। मेडिटेशंस के जो क्वेश्चंस हैं वह मोस्टली मेटाफिजिकल और एथिकल होते हैं। हम
47:55
Speaker A
यहां क्यों हैं? हमें अपनी लाइफ कैसे जीनी चाहिए? हम कैसे श्योर करें कि हम सही काम कर रहे हैं? हम कैसे अपने डेली स्ट्रेस से बचें? दुख और पेन से कैसे डील करें? और कैसे जिए? जब हमें पता है कि एक दिन हम
48:12
Speaker A
रहेंगे ही नहीं। इन सवालों के जवाब को समराइज करना बेकार भी होगा और गलत भी। क्योंकि मेडिटेशंस का असली इंपैक्ट मार्कस के क्लियर और स्ट्रांग वे से इन चीजों को एड्रेस करने में है। लेकिन एक थॉट पैटर्न पे ध्यान देना यूज़फुल
48:29
Speaker A
होगा जो मेडिटेशंस के सेंटर में है और एपिकेटस के भी जिसे फिलॉसफर पियरे हेडर्ड ने क्लियरली एक्सप्लेन किया था। यह आईडिया था थ्री डिसिप्लिंस का। परसेप्शन, एक्शन और विल का डिसिप्लिन। परसेप्शन का डिसिप्लिन कहता है कि हमें अपनी थिंकिंग को बिल्कुल
48:50
Speaker A
ऑब्जेक्टिव रखना चाहिए। चीजों को जैसे हैं वैसे ही देखना बिना इमोशन के। इस पॉइंट को समझने के लिए स्टोइक थ्योरी ऑफ नॉलेज को थोड़ा समझना जरूरी है। जैसे हमने देखा। स्टक्स के लिए पूरी यूनिवर्स लोगस के थ्रू चलती है। यह लोगस हमारे अंदर
49:12
Speaker A
हेजमोनिकन के थ्रू काम करते हैं। इसका मतलब होता है जो लीड करता है। यह हमारी सोचने वाली पावर का हिस्सा है। अलग सिचुएशंस में इसका मतलब विल या कैरेक्टर भी हो सकता है। यह वही चीज है जो इंग्लिश
49:27
Speaker A
में कभी ब्रेन और कभी हार्ट के काम के बराबर होती है। इसका एक मेन काम होता है हमारे सेंसेस से आई इंफॉर्मेशन को समझना और जज करना। हर समय दुनिया से चीजें हमें हिट करती हैं। चीजें इवेंट्स इनसे हमें एक फेंटेसिया मिलती है।
49:47
Speaker A
एक मेंटल इंप्रेशन फिर माइंड उसे एक परसेप्शन बनाता है। एक हाइपोलेप््सिस जैसे एक फोटोनेगेटिव से इमेज बनती है। आइडियली वो इमेज बिल्कुल ओरिजिनल जैसी होनी चाहिए। लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता। कभी वह ब्लर होती है या उसमें ऐसी शैडोस आ जाती हैं जो असली इमेज
50:07
Speaker A
को डिस्टोर्ट कर देती हैं। सबसे कॉमन डिस्टॉर्शन होता है गलत वैल्यू जजमेंट। किसी चीज को गुड या बैड कह देना। जब वह असल में ना गुड होती है ना बैड। बिय्ड गुड और बैड। जैसे अगर मेरा घर जल गया तो वह सिर्फ एक इवेंट है। एक
50:25
Speaker A
आउटसाइड दुनिया का रिपोर्ट जो मेरे सेंसेस ने दिया। लेकिन अगर मैं सोचूं कि मेरा घर जल गया इसलिए मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई तो यह एक इंटरप्रिटेशन है जो मैंने खुद उस इवेंट पर इंपोज किया है। यह सिर्फ एक पॉसिबिलिटी है और मुझे
50:41
Speaker A
इसे मानना जरूरी नहीं है। शायद मैं इसे ना मानूं तो मेरे लिए बेटर हो। मतलब दिक्कत चीजों या इवेंट्स में नहीं होती। प्रॉब्लम उन मीनिंग्स में होती है जो हम उन पर चिपका देते हैं। इसलिए हमारा काम है कि हम अपने परसेप्शन
50:58
Speaker A
पर स्ट्रांग कंट्रोल रखें ताकि हमारे माइंड में गलत थिंकिंग ना घुसे। सेकंड डिसिप्लिन यानी एक्शन का डिसिप्लिन। दूसरे लोगों के साथ हमारे रिश्तों को लेकर है। मार्कस के लिए जैसे बाकी स्टइक्स के लिए भी इंसान एक सोशल बीइंग है। यह बात वो बार-बार बोलते हैं।
51:18
Speaker A
जैसे 5.16 8.59 9.1 में। हर इंसान के पास लोगस का एक हिस्सा होता है और उसे यूज करने की एबिलिटी भी और यही चीज हमें दूसरे जानवरों से अलग बनाती है। लेकिन शायद यह कहना ज्यादा सही होगा कि हम
51:37
Speaker A
लोगस के पार्टिसिपेंट हैं। जो एक प्रोसेस भी है और एक सब्सटेंस भी। मार्कस ने कई बार लोगस रूल्ड दुनिया को एक शहर से कंपेयर किया है जिसमें हर इंसान सिटीजन है और सिटीजन होने के साथ जो ड्यूटीज आती हैं वह सबको निभानी होती
51:56
Speaker A
हैं। इंसान नेचर का हिस्सा है और हमारा फर्ज है कि हम नेचर की डिमांड्स को एक्सेप्ट करें। लिव एस नेचर रिक्वायर्स। जैसे मार्कस हमेशा बोलते थे। ऐसा करने के लिए हमें अपने लोगस का सही यूज करना चाहिए और जो रोल हमें कॉस्मिक
52:16
Speaker A
प्लान में मिला है उसे बेस्ट वे में पूरा करना चाहिए। इसका मतलब सिर्फ चुपचाप एक्सेप्ट कर लेना नहीं बल्कि एक्टिवली दुनिया के साथ, अपनी किस्मत के साथ और सबसे ज्यादा दूसरे इंसानों के साथ कोपरेट करना है। मार्कस बार-बार कहते हैं, हम
52:35
Speaker A
अपने लिए नहीं दूसरों के लिए बनाए गए हैं। हमारा नेचर असल में सेल्फलेस है। दूसरों के साथ हमारे रिश्ते में हमें उनका कलेक्टिव भला सोचना चाहिए और उनके साथ फेयर और न्याय तरीके से बिहेव करना चाहिए। मार्कस कभी क्लियरली डिफाइन नहीं करते कि
52:56
Speaker A
वह जस्टिस से क्या मतलब लेते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि इस शब्द का मतलब क्या है इस न्याय का और क्या नहीं है। हर इंसान के पास लोगस का एक हिस्सा है। लोगस यानी रीत धर्म। हर इंसान के पास लोगस का एक हिस्सा है और
53:16
Speaker A
हर किसी का वर्ल्ड के इस बड़े डिजाइन में एक रोल है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सब इंसान इक्वल हैं या उनके रोल्स एक जैसे हैं। मार्कस जैसे उनके टाइम के ज्यादा लोग सोसाइटी को एक हायरार्की के रूप में देखते
53:31
Speaker A
थे। और उनकी लैंग्वेज में यह दिखाई भी देता है। ह्यूमन सोसाइटी एक ऑर्गेनिज्म जैसी है। जैसे एक बॉडी या एक ट्री। लेकिन ट्री का ट्रंक लीव्स जैसा नहीं होता और हैंड्स और फिट को हेड के साथ कंफ्यूज नहीं कर
53:46
Speaker A
सकते। जस्टली एक्ट करना यानी न्याय। इसका मतलब यह नहीं कि सबके साथ इक्वल ट्रीट करना। इसका मतलब है कि उनके अकॉर्डिंग ट्रीट करो जैसे वह डिर्व करते हैं। और यह डिर्व का आईडिया उनके पोजीशन से डिसाइड होता है। उनकी जगह उस हायरार्की में कहां
54:05
Speaker A
है? स्टोसिज्म का जो फोकस है यूनिवर्स के ऑर्डर और हार्मोनी पे उसी तरह सोसाइटी में भी एक ऑर्डर और सिस्टम होना चाहिए। यह आईडिया अपर क्लास रोमंस को काफी सूट करता था। क्योंकि इससे उन्हें अपनी सोसाइटी के स्ट्रक्चर पर अनकंफर्टेबल क्वेश्चंस नहीं
54:23
Speaker A
पूछने पड़ते थे। थर्ड डिसिप्लिन यानी विल का डिसिप्लिन। यह एक तरह से एक्शन वाले डिसिप्लिन का अपोजिट है। एक्शन का डिसिप्लिन उन चीजों के लिए होता है जो हमारे कंट्रोल में होती हैं। जो हम करते हैं। विल का डिसिप्लिन उन चीजों के लिए
54:42
Speaker A
होता है जो हमारे कंट्रोल में नहीं होती। जो हमारे साथ होती हैं। चाहे किसी और ने की हो या नेचर ने। हम अपने एकशंस को कंट्रोल करते हैं और उनके जिम्मेदार भी होते हैं। अगर हम कुछ गलत करते हैं तो हम
54:57
Speaker A
खुद को नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन दूसरों को नहीं और लोगस को भी नहीं। दूसरी तरफ जो चीजें हमारे कंट्रोल के बाहर होती हैं उनमें हमें नुकसान देने की पावर ही नहीं होती। अगर कोई इंसान कुछ बुरा करता है जैसे टॉर्चर, चोरी या और
55:14
Speaker A
क्राइम तो उससे वह इंसान खुद को हर्ट करता है। विक्टिम को नहीं। नेचर के एक्शनंस जैसे आग, बीमारी या मौत सिर्फ तभी हमें हर्ट करते हैं जब हम उन्हें हार्मफुल समझते हैं। जब हम ऐसा करते हैं तो हम लोगस
55:31
Speaker A
की गुडनेस और केयर पर डाउट करते हैं। और इस तरह हम अपने ही लोगस के नीचे दिखाते हैं। यह काम हमें बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इसकी जगह हमें चीजों को जैसे हैं, वैसे ही देखना चाहिए। यहां परसेप्शन का
55:45
Speaker A
डिसिप्लिन काम आता है और उन्हें एक्सेप्ट करना चाहिए। विल का डिसिप्लिन यूज करके या जैसे एपिकेटस कहते हैं और मार्कस कोट करते हैं। द आर्ट ऑफ एक्वसेंस। अगर हम समझ ले कि हर इवेंट लोगस ने पहले से सोच रखा है। धर्म ने, रीत ने,
56:04
Speaker A
नियम ने, प्रकृति ने और सब कुछ उनके प्लान का हिस्सा है और वह प्लान हमेशा अच्छा ही होता है क्योंकि ऐसा होना ही चाहिए। तो फिर हमें अपनी किस्मत में जो भी लिखा है चाहे वह कितना भी बुरा लगे उसे एक्सेप्ट
56:20
Speaker A
करना चाहिए। जैसे पोएट अलेक्जेंडर पोप ने कहा जो है वही ठीक है। यह हर ऑब्सकल और हर बैड लक जैसी चीज पर अप्लाई होता है। और खासकर डेथ पे एक ऐसा प्रोसेस जो हम रोक नहीं सकते जो हमें नुकसान नहीं
56:39
Speaker A
पहुंचाता और जिसे हमें नेचर का हिस्सा समझ के खुशी से एक्सेप्ट करना चाहिए। यह जो तीन डिसिप्लिन है परसेप्शन, एक्शन और विल मिलकर एक पूरा लाइफ का सिस्टम बनाते हैं। इनका मिक्स और फॉर्म हर जगह मेडिटेशंस में मिलता है। यह बहुत क्लियरली
56:57
Speaker A
लिखा गया है। मेडिटेशंस 7.54 में हर जगह हर मोमेंट तुम्हारे पास यह ऑप्शंस होते हैं। इस इवेंट को ह्यूमिलिटी के साथ एक्सेप्ट करो यानी विल। इस इंसान के साथ वैसा बिहेव करो जैसे उनके साथ करना चाहिए। यानी एक्शन। इस थॉट को ध्यान से अप्रोच करो
57:18
Speaker A
ताकि कुछ इररेशनल उसमें ना घुस जाए। यानी परसेप्शन। वही सेम तीन पॉइंट्स थोड़ा अलग ऑर्डर में मिलते हैं। मेडिटेशंस 9.6 में ऑब्जेक्टिव जजमेंट, अनसेल्फिश एक्शन, विलिंग एक्सेप्टेंस ऑफ ऑल एक्सटर्नल इवेंट्स। और एक सल वर्जन मिलता है मेडिटेशंस 8.7 में।
57:43
Speaker A
एकेशनल माइंड के लिए प्रोग्रेस का मतलब है अपनी परसेप्शन में झूठ या डाउट को एक्सेप्ट ना करना। अपने एकशंस में सेल्फलेसनेस को एम बनाना। सिर्फ उन चीजों को चाहो या ना चाहो जो तुम्हारे कंट्रोल में है और नेचर जो तुमसे चाहती है उसे
57:58
Speaker A
एक्सेप्ट करना। उसी नेचर का पार्ट बनके जैसे एक पत्ता ट्री का हिस्सा होता है। ऐसे और भी काफी एंट्रीज मिलती हैं। इन तीन पॉइंट्स का बार-बार आना यह दिखाता है कि यही मार्कस के थॉट का सेंटर है। और
58:16
Speaker A
मेडिटेशंस लिखने का मेन रीजन भी यही लगता है। मार्कस और एलियस को लोग अक्सर एक परफेक्ट स्टोइक के रूप में देखते हैं। लेकिन मेडिटेशंस में स्टोइससिज्म का सिर्फ एक ही क्लियर मेंशन है 5.10 में वो भी एक दूरी वाले टोन में जैसे यह सिर्फ एक और
58:38
Speaker A
स्कूल हो बाकी सब जैसे अर्ली स्टक्स के बड़े नाम यहां नहीं मिलते ना जेनो का नाम है ना क्लथस का क्रिसिपस का भी सिर्फ दो बार नाम आता है। एक बार छोटी सी कोट के रूप में 6.42 में और एक बार जब मार्कस उसे
58:55
Speaker A
सॉक्रेटीज़ और एपिकेटस के साथ उन लोगों की लिस्ट में रखते हैं जो मर चुके हैं 7.1 लाइन में। इसका मतलब यह नहीं कि मार्कस का थॉट स्टोइक नहीं था। या कि उन पे लेट स्टोइक स्पेशली एपेक्टेटस का असर नहीं था। अगर उन्हें
59:13
Speaker A
किसी एक स्कूल से जोड़ना हो तो स्टोइससिज्म ही सबसे सही फिट होता। लेकिन अगर उनसे पूछा जाता कि तुम क्या पढ़ रहे हो तो वह शायद कहते फिलॉसफी इसमें कोई सरप्राइज वाली बात नहीं। उस टाइम के रोमन पीरियड में फिलॉसफी
59:30
Speaker A
का स्टाइल ही ऐसा हो गया था। जब स्कूल्स जैसे प्लटोनिस्ट्स, पेरीपेटेटिक्स, सनिक्स और स्टोइ्स अपने डिफरेंसेस से ज्यादा अपने कॉमन पॉइंट्स पर ध्यान देते थे। मार्कस ने जिन लोगों को अपने थॉट में इंपॉर्टेंट माना वह सबस्टोइक नहीं थे। जैसे सेवरेरस
59:50
Speaker A
जो पेरिपेटेटिक थे। सेनका और एपिक्टेटस जैसे ऑथर्स ने भी स्टसिज्म के बेसिक आइडियाज को एक्सेप्ट किया। लेकिन बिना हेजिटेशन के दूसरे स्कूल्स से कोर्ट्स, कहानियां और आर्गुममेंट्स भी ले लिए। मेडिटेशंस भी यही करती है। हिस्टोइक बेस पर बनी हुई है।
60:10
Speaker A
लेकिन बाकी फिलॉसफी से भी काफी इनफ्लुएंस लिया है। मार्कस ने जिन पुराने थिंकर्स को कोट किया उनमें सबसे इंपॉर्टेंट थे सोक्रेटीस यानी सुकरात। एथेंस के बड़े थिंकर जिन्होंने फिलॉसफी का फोकस फिजिकल वर्ल्ड से हटा के इंसान की मोरलिटी और सोसाइटी
60:27
Speaker A
में उनके रूल पे शिफ्ट किया। सोक्रेटिस ने खुद कुछ नहीं लिखा। उनकी टीचिंग्स उनके स्टूडेंट प्लेटो के डायलॉग के थ्रू मिलती है। मार्कस ने प्लेटो को कई जगह कोट किया है स्पेशली बुक सेवन में और सोक्रेटिक या प्लेटोनिक
60:44
Speaker A
आइडियाज और जगह भी मिलते हैं। एक एग्जांपल है सोक्रेटिक पैराडॉक्स जिसमें कहा गया है कि कोई भी इंसान जानबूझ के गलत काम नहीं करता। और अगर किसी इंसान को सही और गलत का क्लियर ज्ञान हो तो वह हमेशा सही ही
61:00
Speaker A
करेगा। मार्कस दूसरे लोगों के बारे में कहते हैं कि वह ऐसे हैं क्योंकि उन्हें गुड और इविल का फर्क ही नहीं पता। 2.1 में और यह थॉट वो और भी जगह रिपीट करते हैं। सोक्रेटीस का कैरेक्टर उनकी टीचिंग्स
61:18
Speaker A
जितना ही इंपॉर्टेंट था। उनकी लेजेंडरी स्ट्रेंथ और सेल्फ कंट्रोल ने उन्हें एक परफेक्ट एग्जांपल बना दिया एस्टोइक फिलॉसफर के लिए या किसी भी फिलॉसफर के लिए। उन्होंने कभी अपने फिलोसोफिकल बिलीफ से कॉम्प्रोमाइज नहीं किया और जब 70 साल
61:35
Speaker A
की उम्र में उन पर गलत चार्जेस लगाकर ट्रायल हुआ तो उन्होंने अपनी जान दे दी। ट्रायल में उनकी ऑनेस्टी और एग्जीक्यूशन से पहले के दिनों में उनका बिहेवियर ऐसा था कि लोग उन्हें आसानी से फर्स्ट सेंचुरी स्टइक मार्टिस जैसे थरेस या पेटियस या हेलविडियस
61:58
Speaker A
प्रिस्कस का पहला वर्जन मान लेते। मार्कस ने भी उसी लाइट में सोक्रेटीस को याद किया है। मेडिटेशन 7.66 में सोक्रेटीस के पहले के थिंकर्स जिन्हें प्रीसोक्रेटिक कहते हैं। उनमें मार्कस और स्टोइक्स दोनों के लिए सबसे इंपॉर्टेंट थे। हराकलिटस। एक
62:20
Speaker A
मिस्टीरियस थिंकर जो एफिसस यानी आज के टर्की में थे। जिसके ज़न जैसे शॉर्ट सेंस फेमस थे। डीप भी और कंफ्यूजिंग भी। हराकलिटस के सिस्टम में लोगस और फायर्स दोनों को सेंट्रल रोल दिया गया था। यह दोनों चीजें स्टइक्स के लिए नेचुरल थी और
62:39
Speaker A
शायद उन पर हिराकिटस का इन्फ्लुएंस भी था। हराकलिटस का नाम मेडिटेशंस में कुछ जगह 4.46 6.47 आता है। लेकिन उनके आइडियाज और भी कई एंट्रीज में छिपे हुए हैं। उनका शॉर्ट और स्ट्राइकिंग स्टाइल मार्कस के कुछ लाइंस में भी दिखाई देता है। जैसे
62:59
Speaker A
बेस्ट रिवेंज यह है कि तुम वैसा मत बनो। 6.6 में। फेंसर का वेपन उठाया जाता है। फिर रख दिया जाता है। बॉक्सर का वेपन उनके अंदर होता है। 12.9 में। हराकलेटस से ही मार्कस का एक मोस्ट पावरफुल थीम आता है। टाइम और
63:18
Speaker A
मैटर का कांस्टेंट चेंज। हेराटस ने कहा था हम एक ही रिवर में दो बार नहीं उतर सकते। और मार्कस ने उस थॉट को और आगे बढ़ाया। टाइम एक रिवर है। इवेंट्स का तेजी से बहने वाला करंट एक बार दिखाई देता है और चला
63:35
Speaker A
जाता है। फिर दूसरा आता है और वह भी चला जाता है। 4.43 और 2.17 और 6.15 में। हराकलिटस मार्कस पे सबसे ज्यादा असर डालने वाले प्रीसोक्रेटिक थे। लेकिन कुछ और थिंकर्स का भी इनफ्लुएंस दिखाई देता है। मार्कस ने पोएट इमोडकल्स
63:57
Speaker A
का परफेक्ट राउंड सोल वाली इमेज को दो जगह यूज किया है। बुक एट सेक्शन 41 यानी 8.41 और 12.3 और एक बार पाइथागोरियन के मिस्टिकल आइडियाज का भी हिंट दिया है। 11.27 में। कुछ एंट्रीज डेमोक्रेटस के थॉट से भी इंस्पायर्ड लगती हैं। डेमोक्रेटस ने
64:19
Speaker A
एटम थ्यरी बनाई थी जो बाद में एपिक्वरस को इंस्पायर की। ना हेराटस ने कोई स्कूल बनाया ना सोक्रेटीस ने स्कूल बनाना प्लेटो का काम था और फिर उनके स्टूडेंट एरिस्टोटल ने अपने अलग आइडियाज के साथ पेरिपेटिक स्कूल बनाया।
64:37
Speaker A
मार्कस एरिस्टोटलल का नाम तो कभी नहीं लेते लेकिन उनके फॉलोअ थियोफस्टस का एक थॉट उन्होंने लाइक करके कोट किया है 2.10 में शायद और भी इंपॉर्टेंट था फोर्थ सेंचुरी बीसी का सिनेसिसिक्स जिसमें पहले और सबसे फेमस थे गुस्से वाले डायोजनीस ऑफ सिनोप एक प्रॉपर
65:01
Speaker A
डॉक्ट्रिन के बजाय एक एटीट्यूड शेयर करते थे उनका फोकस था सोसाइटी के रूल्स की बेइज्जती करना और नेचर के क्लोज जीवन जीना। डयाजनीस ने ही फिलॉसफर का एक इमेज सेट किया। एक गरीब और सिंपल इंसान। मार्कस ने मेडिटेशंस 4.30 में नंगा फिलॉसफर का
65:21
Speaker A
जिक्र किया है जो शायद एक सनिक ही हो। उनका फेमस क्लेम था कि वह पूरी दुनिया का सिटीजन है। यह बात स्टोइक्स के वर्ल्ड एज अ सिटी वाले आईडिया से मिलती जुलती है। मार्कस ने कई जगह डायोजनीस का नाम
65:36
Speaker A
लिया है उनके स्टूडेंट मोनमस का भी 2.15 में और एक और सनिक क्रेट्स को भी याद किया है। मेडिटेशन 6.13 में एक स्टोरी में जिसका मीनिंग अब क्लियर नहीं है। मार्कस का रिश्ता एपिक्यूरेनिज्म के साथ जो स्टोरसिज्म का सबसे बड़ा राइवल था।
65:56
Speaker A
एलिनिस्टिक फिलॉसफी में काफी कंफ्यूजिंग था। एपिक्यूरस जो 341 से 270 बीसी तक थे। इनके फॉलोवरर्स एक ऐसी यूनिवर्स में बिलीव करते थे जो जेनो और क्रिसपस के वर्ल्ड से बिल्कुल अलग थी। स्टइक्स का वर्ल्ड परफेक्टली ऑर्डर्ड होता है लेकिन एपिकरियंस के लिए यूनिवर्स रैंडम
66:20
Speaker A
होता है। एटम्स के रैंडम मिलने जुलने का रिजल्ट ऐसे वर्ल्ड में प्रोविडेंस की बात करना बेकार लगता है और एपिकरस ने भले ही गॉड्स की एकिस्टेंस को माना हो लेकिन वह कहते थे कि उनका इंसान की लाइफ में कोई
66:35
Speaker A
इंटरेस्ट नहीं है। ह्यूमंस के लिए एपिक्यूरियन गोल सिंपल था। जितना हो सके उतना अच्छा जीना। जितने प्लेजर्स मिल सके उन्हें एंजॉय करना और दर्द और टेंशन से जितना दूर हो सके उतना रहना। स्पेशली डेथ को ले कोई फियर नहीं होना चाहिए क्योंकि
66:52
Speaker A
डेथ सिर्फ एटम्स का टूटना है। यह प्रोसेस ना सिर्फ पक्का है बल्कि हार्मलेस भी। क्योंकि डेथ के बाद हम बचते ही नहीं जो दर्द महसूस करें। इस से एक्ट के कई इंपॉर्टेंट रोमन फॉलोअर्स थे। लेकिन फिर भी यह स्टोइससिज्म
67:08
Speaker A
जितना सक्सेसफुल नहीं हुआ। और मोस्टली लोग इसे थोड़ा लाइटली लेते थे। थोड़ा लाइटली इग्नोर भी करते थे। एपिक्वेरियंस का जो क्वाइट लाइफ का आईडिया था वो रोमन लोगों के एक्टिव पब्लिक लाइफ के वैल्यू से मैच नहीं करता था। और
67:25
Speaker A
प्लेजर को गुड के इक्वल बनाना कंजर्वेटिव रोमंस को ऑकवर्ड लगता था। खाओ पियो मजे करो। एपीक्यूरियंस का पॉपुलर इमेज लेकिन सच तो यह था कि एपिक्यूरस ने खुद क्लियरली बोला था कि प्लेजर का मतलब है डीप थिंकिंग ना कि सिर्फ खाना या सेक्स एंजॉय करना।
67:44
Speaker A
फिर भी एपिक्यूरियनिज्म एक छोटी व्यू होने के बाद भी स्टसिज्म का ओनली रियल राइवल था। क्योंकि उनके पास भी एक फुल सिस्टम था यूनिवर्स को समझने का। इसलिए मार्कस कई जगह प्रोविडेंस या एटम्स 4.3 10.6 11.18 और 12.14 यह बोल के यह कंट्रास्ट डायरेक्टली
68:08
Speaker A
दिखाते हैं। मार्कस यूजुअली एपिकरिनिज्म को पसंद नहीं करते थे। जैसे एक्सपेक्टेड भी है। मेडिटेशन 6.10 में वह एपिकरियन यूनिवर्स को डिस्क्राइब करते हैं मिक्सचर, इंटरेक्शन, डिस्पर्सल से और हिस्टोइक सिस्टम को यूनिटी, ऑर्डर, डिज़ से और क्लियरली स्टोइक साइड को बेटर बताते हैं।
68:32
Speaker A
एक और जगह वह पूछते हैं क्या हमें डेथ से डर लगना चाहिए? जब इवन एपिक्यूरियंस उसे लाइटली लेते हैं। 12.34 में। लेकिन कुछ एंट्रीज दिखाती हैं कि मार्कस का एटीट्यूड कभी-कभी इतना नेगेटिव नहीं था। मार्कस ने एक जगह एपिकरस का इलनेस का टाइम का
68:49
Speaker A
बिहेवियर कोट किया है और उसे अप्रिशिएट किया है 9.41 में और दो जगह उनके पेन एंड्यूरेंस वाले थॉट से कंफर्ट लिया है 7.33 और 7.64 में जैसे दूसरे लेट स्टइक्स जैसे सिनेका मार्कस भी सच को जहां मिला वहां से
69:07
Speaker A
एक्सेप्ट करने को रेडी थे। अब तक हम मेडिटेशंस के कंटेंट पर फोकस कर रहे थे। लेटिस्टिस्म का एथिकल सिस्टम जिसमें थोड़ा प्लेटोनिक और हराकिटस का इनफ्लुएंस भी मिक्स है और कभी-कभी दूसरे थिंकर्स और स्कूल्स के रेफरेंस भी आते
69:22
Speaker A
हैं। लेकिन अब सवाल है कि मेडिटेशंस खुद क्या चीज है? यह लिखी क्यों गई? इसका ऑडियंस कौन था? यह किस टाइप की बुक है? इन सवालों के जवाब के लिए हमें कंटेंट से निकल के अब उसकी फॉर्म और उनके ओरिजिन की
69:38
Speaker A
तरफ देखना पड़ेगा। मुझे लगता है मार्कस को काफी सरप्राइज होता। शायद थोड़ा शॉक भी अगर वह देख पाते कि उनका नाम मॉडर्न लाइब्रेरी ऑफ द वर्ल्ड्स बेस्ट बुक्स में आया है। उन्हें सबसे पहले तो उस बुक के टाइटल
69:58
Speaker A
पर हैरानी होती। इंग्लिश टाइटल मेडिटेशंस ना सिर्फ ओरिजिनल नहीं है बल्कि मिसलीडिंग भी है। इससे लगता है जैसे यह कोई सीरियस और अथॉरिटेटिव किताब है। जबकि असल में यह बस रैंडम नोट्स का एक कलेक्शन है जो ग्रीक मैनुस्क्रिप्ट पहली बार प्रिंट के लिए
70:16
Speaker A
यूज़ हुआ था जो मार्कस के ओरिजिनल लिखने से काफी दूर का वर्जन था। उनमें इस बुक का नाम था टू हिमसेल्फ। एस यह भी शायद ओरिजिनल टाइटल नहीं था। लेकिन कम से कम यह थोड़ा ज्यादा सही लगता है इस
70:34
Speaker A
बुक के नेचर के हिसाब से। असल बात तो यह है कि मार्कस ने शायद इस बुक को कभी कोई टाइटल दिया ही नहीं। सिंपल रीजन यह है कि उन्होंने इसे एक प्रॉपर पूरी बुक के जैसा कभी सोचा ही नहीं। यह पब्लिश होने के लिए
70:50
Speaker A
लिखी नहीं गई थी और मार्कस को क्लियरली यह उम्मीद भी नहीं थी कि इसे कोई और कभी पढ़ेगा। इसमें ऐसे लोगों और इवेंट्स का जिक्र है जो उस टाइम के रीडर्स के लिए भी अनक्लियर थे जैसे हमारे लिए हैं। मेडिटेशन 8.25 या
71:05
Speaker A
12.27 के कुछ लोग शायद उनके टाइम के लोग पहचान लेते लेकिन कोई भी नहीं मानता था कि रस्टिकस ने सुनसा से क्या लिखा? 1.7 या एंटोनिस ने टस्कुलम में कस्टम्स ऑफिसर्स को क्या बोला? 1.16 या मार्कस के साथ केटा
71:27
Speaker A
में क्या हुआ? 1.17 कुछ जगह मार्कस अपने एपरर होने का रोल पे भी डायरेक्टली सोचते हैं। ऐसे थॉट्स किसी और के काम के नहीं थे। वह सोचते हैं इंपीरियलाइज होने के डेंजर के बारे में 6.30 में सेनेट में सिंपल बोलने का
71:45
Speaker A
रिमाइंडर देते हैं 8.30 में और अपने यूनिक पोजीशन पर रिफ्लेक्ट करते हैं 11.7 में इन सब एंट्रीज से यह क्लियर होता है कि टेक्स्ट का यू कोई जनरल रीडर नहीं बल्कि मार्कस खुद हैं। जैसे उन्होंने लिखा। जब तुम खुद को देखो तो किसी एपरर को याद करो।
72:05
Speaker A
10.31 में। अब सवाल यह है कि मेडिटेशंस को हम क्या कैटेगरी में डालें? यह डायरी नहीं है। कम से कम नॉर्मल सेंस में नहीं। इसमें मार्कस के डेली लाइफ के बारे में कुछ खास नहीं लिखा गया। ना लोगों के नाम, ना डेट्स
72:23
Speaker A
और सिर्फ दो जगह लोकेशन का जिक्र। इसमें रीडर का भी कोई सेंस नहीं मिलता। जैसे यूजली डायरीज में होता है। कुछ स्कॉलर्स कहते हैं शायद यह एक बड़ी किताब का रफ ड्राफ्ट हो। जैसे पास्कल का पेनसीज या जोसेफ जोबर्ट के नोटबुक्स। लेकिन
72:41
Speaker A
मेडिटेशंस के नोट्स इतने रिपीिटेटिव और सिंपल है कि यह थ्योरी फिट नहीं बैठती। यह शायद थोड़ा ज्यादा मैच करते हैं एक वर्किंग फिलॉसफर के नोट से। जैसे विटगस्टाइन के जेटल या सिमोन वेल के कैियर से लेकिन यहां भी
73:00
Speaker A
एक बड़ा डिफरेंस है। मेडिटेशंस एक्सपेरिमेंटल या ओपन एंडेड नहीं लगती और इसमें कुछ भी ओरिजिनल नहीं लगता। यह ऐसे लगता है जैसे कोई इंसान बार-बार वही पुराने आइडियाज को दोहरा रहा हो क्योंकि वह उन्होंने पूरी तरह से अब्सॉर्ब नहीं
73:17
Speaker A
किया। शायद इन एंट्रीज का सबसे बेस्ट डिस्क्रिप्शन दिया था फ्रेंच स्कॉलर पियरे हेड ने। उनके अकॉर्डिंग यह स्पिरिचुअल एक्सरसाइजेस हैं जो मार्कस ने अपने डेली स्ट्रेस और कन्फ्यूजन को हैंडल करने के लिए लिखे थे। एक सेल्फ हेल्प बुक इन दी
73:36
Speaker A
रियलिस्ट सेंस। एक एंट्री से भी यह पॉइंट क्लियर होता है। मेडिटेशंस 5.9 में मार्कस खुद को याद दिलाते हैं। फिलॉसफी को टीचर की तरह मत देखो। उसे ऐसे देखो जैसे आंखों के लिए ठंडी पत्ती या कंफर्ट देने वाली क्रीम। इस व्यू
73:54
Speaker A
से देखा जाए तो यह एंट्रीज मार्कस के थॉट्स को रिकॉर्ड करने के लिए नहीं लिखी गई थी और ना ही दूसरों को एनलाइटन करने के लिए। यह सिर्फ उनके अपने यूज़ के लिए थी जिसमें वह अपने फिलॉसफी को प्रैक्टिस और
74:08
Speaker A
स्ट्रेंथन कर सकें। इस एंगल से देखने पर कई ऐसी चीजें समझ में आती हैं जो पहले कंफ्यूजिंग लगती थी। जैसे टेक्स्ट में इंपेरेटिव मूड का यूज़ करना चाहिए। मत भूल ऐसा सोच। यह सिर्फ डिस्क्राइब या रिफ्लेक्ट करने के लिए नहीं
74:26
Speaker A
बल्कि पुश करने के लिए है। और यह एक्सप्लेन करता है वो रिपीटीशन भी जो कोई भी रीडर पहले ही नोटिस कर लेता है। वही प्रॉब्लम्स पे बार-बार लौटना। यह एंट्रीज नए आंसर्स नहीं देती। सिर्फ पुराने आंसर्स को नए वे में रिपीट
74:42
Speaker A
करती है। मार्कस के लिए शायद यह रिपीट करना और नए तरीके से बोलना ही सबसे हेल्पफुल था। यह बात समझना कि मेडिटेशंस के एंट्रीज एक प्रोसेस भी हैं। सिर्फ प्रोडक्ट नहीं। यह एक्सप्लेन करता है कि यह बुक इतनी
74:59
Speaker A
रैंडम और डिसऑर्डर्ड क्यों लगती है। हमें नहीं पता कि मेडिटेशंस के अलग-अलग बुक्स किसने अरेंज किए या किस बेस पर किए। हो सकता है ऑर्डर क्रोनोलॉजिकल हो, थोड़ा बहुत हो या बिल्कुल ही रैंडम हो। इंडिविजुअल एंट्रीज का अरेंजमेंट
75:16
Speaker A
मार्कस का खुद का हो सकता है या नहीं भी। लेकिन जो रैंडमनेस दिख रही है उसे लगता है कि यह मार्कस ने ही ऐसे छोड़ा होगा। क्योंकि अगर कोई लेटर एडिटर होता बाद का तो शायद वह सिमिलर टॉपिक्स वाली एंट्रीज
75:30
Speaker A
को ग्रुप करता या लूज एंड्स को टाई करने की कोशिश करता। और हम हमेशा श्योर भी नहीं हो सकते कि एक एंट्री कहां शुरू होती है और कहां खत्म। कई जगह तो शायद मार्कस खुद भी क्लियर नहीं थे। बुक वन का एक स्पेशल प्लेस है क्योंकि
75:48
Speaker A
वह बाकी सब बुक से अलग लगती है। वह थोड़ी ऑटोबायोग्राफिकल है और उसमें प्रॉपर सोच समझ के स्ट्रक्चर दिखाई देता है। इसमें 17 एंट्रीज हैं। जहां मार्कस उन लोगों को याद करते हैं जिन जिनसे उन्होंने लाइफ में कुछ
76:03
Speaker A
सीखा। डायरेक्टली या उनके एग्जांपल से एंट्रीज मार्कस के अर्ली लाइफ के सीक्वेंस को फॉलो करती हैं। पहले उनके ओल्डर रिलेटिव्स, फिर टीचर्स, फिर उनका अडॉप्टिव फादर एंटोनिनस और एंड में गॉड्स। इस लॉजिक ऑर्डर और एंट्रीज के साइज के बढ़ने से लगता है कि यह अरेंजमेंट
76:28
Speaker A
डेलीबेटली मार्कस ने किया था। अगर यह सच है तो कम से कम बुक वन को मार्कस ने एक कंप्लीट यूनिट जैसे सोचा होगा। स्कॉलर्स मानते हैं और शायद सही भी है कि बुक 6.30 में एंटोनिनस पायस का छोटा
76:45
Speaker A
स्केच ही शायद बुक वन के लगर मेमोयर 1.16 का स्टार्टिंग पॉइंट था। इसलिए यह पार्ट बाद में लिखा गया हो सकता है। बाकी बुक्स में कोई क्लियर यूनिटी या डेवलपमेंट ढूंढना मुश्किल है। जहां भी आप मेडिटेशंस का पेज खोलिए बुक वन को छोड़ के वही सेम
77:03
Speaker A
वॉइस वही सेम टॉपिक मिलते हैं। मार्गस के थॉट्स एक बुक से दूसरी बुक तक चेंज नहीं होते। किसी इंडिविजुअल बुक के अंदर भी कोई स्पेशल स्ट्रक्चर नहीं दिखाई देता। सबसे ज्यादा पॉसिबल लगता है कि बुक्स के बीच का
77:18
Speaker A
डिवीजन सिर्फ फिजिकल हो। यानी मार्कस के ओरिजिनल स्क्रॉल्स या उनके किसी कॉपी का पेपरस रोल एक रोल भर गया तो नया रोल शुरू कर दिया गया। अगर बुक्स की टोन एक जैसी है तो इंडिविजुअल एंट्रीज का फॉर्म काफी डिफरेंट
77:36
Speaker A
होता है। कुछ एंट्रीज शॉर्ट एसएस जैसी लगती हैं जिसमें एक फिलॉसोफिकल पॉइंट बताया गया है। बुक टू और थ्री में ऐसे एग्जांपल्स ज्यादा हैं। कुछ सिंपल कमांड्स हैं जैसे टेक द शॉर्टेस्ट रूट या शॉर्ट सेइंग्स कि जैसे नो वन कैन कीप यू फ्रॉम
77:55
Speaker A
लिविंग इन हार्मोनी विथ योरसेल्फ। कभी मार्कस एक लिस्ट बनाते हैं। जैसे रिमेंबर दैट एंड दैट एंड दैट। कभी वह एक एनालॉजी देते हैं। लेकिन क्या कंपैरिजन है वह रीडर को समझना पड़ता है। जैसे ह्यूमन लाइफ अल्टर पर रखे बहुत सारे इंसेंस के
78:15
Speaker A
ढेर जैसी है। 4.15 या आसमान में फेंके गया पत्थर जैसी। 9.17 कभी वह क्लियरली एक्सप्लेन भी करते हैं। जैसे क्या तुमने कभी कटा हुआ हाथ या पैर देखा है? वैसे ही हम अपने आप के साथ करते हैं। जब हम जो हो रहा है उनके खिलाफ
78:36
Speaker A
लड़ते हैं। 8.34 में। कभी एंट्रीज एक मेडिटेटिव एक्सरसाइज जैसी लगती हैं। जैसे मार्कस अपने आप से कहते हैं कि वेप्पेशियन के टाइम को इमेजिन करो। 4.32 में या अगस्तस का कोट इमेजिन करो 8.31 में और फिर उस सीन को अपने टाइम से कंपेयर करो। बुक्स
78:56
Speaker A
से और 11 के कुछ पार्ट सिर्फ कोर्ट्स ही हैं। कुछ एंट्रीज लगता है रफ ड्राफ्ट हैं। जैसे बुक सेवन के ट्रेजडी कोड्स बाद में पॉलिश होके मेडिटेशंस 11.6 में आए। कुछ नोट्स का मतलब बिल्कुल अनक्लियर लगता है। जैसे कैरेक्टर डार्क वुमनिश ऑब्सनेट 4 28
79:17
Speaker A
या उन्हें पता ही नहीं कि स्टीलिंग, सोइंग, बाइंग में कितनी चीजें छुपी होती हैं। 3.15 में। इनका क्या मतलब है?
79:26
Speaker A
क्रिटिक्स भी नहीं समझ पाए। एंट्रीज का स्टाइल भी अलग-अलग होता है। कुछ एंट्रीज सिर्फ मार्कस के पर्सनल रिमाइंडर्स होते हैं। जैसे फिलॉसफी वर्जन ऑफ ट्यूसडे को डॉक्टर को फोन करना है। लेकिन कुछ एंट्रीज काफी लिटरली लगती हैं। मार्कस ने सेकंड
79:43
Speaker A
सेंचुरी के रेटोरिक टेक्निक्स में ट्रेनिंग ली इसलिए जब वो सिर्फ अपने लिए भी लिखते थे तब भी उनकी राइटिंग उसी स्टाइल में नेचुरली आ जाती थी। छोटी एंट्रीज में अक्सर वर्ड प्ले का इंटरेस्ट दिखाई देता है और एक शॉर्ट डीप लाइन लिखने
79:59
Speaker A
की कोशिश भी जो एक तरफ रेटोरिकल स्कूल्स की स्मार्टनेस याद दिलाता है और दूसरी तरफ हराकलिटस के डीप और कंप्रेस्ड स्टाइल को। क्या सूरज कभी बारिश का काम करता है या एस्पियस डिमीटर का?
80:16
Speaker A
बुराई वही पुरानी चीज नाचने वाला नहीं पहलवान बनना है। उसे बिना घमंड के एक्सेप्ट करो और जाने दो बिना फर्क पड़ने के। कभी-कभी मेडिटेशंस में थोड़ा डायलॉग टाइप फील भी मिलता है। जैसे छोटी-छोटी बातचीत। यह आईडिया फिलॉसफी के ट्रेडिशन से
80:36
Speaker A
आया हो सकता है। रियल डायलॉग्स का आईडिया प्लेटो से स्टार्ट हुआ था। और एरिस्टोटल अपने लॉस्ट वक्स में और सिसरो ने भी इसे फॉलो किया। मेडिटेशंस में तो कोई प्रॉपर सीन सेटिंग वाला डायलॉग नहीं मिलता। लेकिन कुछ एंट्रीज में ऐसा लगता है जैसे मार्कस
80:52
Speaker A
अपने ही दिमाग में दो आवाजों के बीच कन्वर्सेशन कर रहे हो। पहली आवाज थोड़ी कंफ्यूज्ड इमोशनल होती है। मार्कस का ह्यूमन साइड। दूसरी आवाज काम होती है। फिलॉसफी की आवाज जो पहले को करेक्ट करती है या समझाती है।
81:09
Speaker A
लॉन्ग एंट्रीज जो वैसे भी ज्यादा लॉन्ग नहीं होती। एक थोड़ा स्ट्रक्चरर्ड स्टाइल में लिखी होती हैं। लेकिन कभी-कभी थोड़ा फोर्सफुल लगती है। सब क्रिटिक्स मार्कस के लिखने के तरीके को पसंद नहीं करते। कुछ लोग कहते हैं कि उनकी ग्रीक लैंग्वेज
81:25
Speaker A
कमजोर थी। लेकिन शायद प्रॉब्लम लैंग्वेज की नहीं थी बल्कि लिखने का स्टाइल रॉ था। मार्कस आइडियाज को सोच रहे थे, स्ट्रगल कर रहे थे एक्सप्रेस करने में। इस वजह से मार्कस एक हैबिट डेवलप करते हैं। वह सेम मीनिंग के दो सिमिलर शब्दों का यूज
81:43
Speaker A
करते हैं। जैसे उन्हें यकीन नहीं होता कि पहला शब्द सही था। जब यह एब्स्ट्रैक्ट फिलॉसफी लैंग्वेज के साथ कंबाइन होती है तो इंग्लिश रीडर के लिए पढ़ना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि इंग्लिश में शॉर्ट और क्लियर वर्ड्स को प्रेफर किया जाता है।
81:59
Speaker A
लेकिन जब मार्कस का राइटिंग बेस्ट पे होता है तो वह बहुत पावरफुल बन जाती है। स्पेशली जब इमेज और आईडिया का बैलेंस बनता है। जैसे 5.23 के स्टार्ट में जब वह लिखते हैं याद रखो कि चीजें कितनी तेजी से गुजर
82:16
Speaker A
जाती हैं जो अभी हैं और जो आने वाली हैं। जिंदगी एक रिवर की तरह बह रही है। क्या बदलते रहता है? क्यों कि हजार वर्जन्स होते हैं। कुछ भी स्टेबल नहीं है। जो तुम्हारे सामने है वह भी नहीं। पास्ट और फ्यूचर का
82:33
Speaker A
इनफिनिट गैप तुम्हारे सामने है। एक डीप खाई जिसका अंत दिखाई नहीं देता। यह जो थीम है जिंदगी का टेंपरेरी होना दुनिया के कास्टेंटली बदलता रहना यह मेडिटेशन का एक मेन थीम है और आगे हम देखेंगे कि इस टॉपिक का ट्रीटमेंट सिर्फ
82:51
Speaker A
फिलॉसफी से नहीं बल्कि लिटरेचर और मार्कस के अपने नेचर से भी आया है। अगर कोई मेडिटेशन से एक फुल क्लियर आर्गुमेंट ढूंढने की कोशिश करे तो वह एफर्ट वेस्ट होगा। यह वैसे टाइप की बुक ही नहीं है। जैसे अगर कोई 9.42 को एडियस
83:12
Speaker A
केसियस के रिवोल्ट से लिंक करे या 10.4 को कमोडस पर कमेंट समझे तो वह भी फेल करेगा। क्योंकि इन एंट्रीज का एग्जैक्ट टाइम बताना मुश्किल है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मेडिटेशंस में कोई यूनिटी नहीं है या मार्कस की लाइफ से कोई लिंक नहीं है।
83:27
Speaker A
दोनों हैं। जो चीज इस बुक को कनेक्ट करती है, वह है कुछ सिलेक्टेड थीम्स जो बार-बार रिपीट होती हैं और वह मार्कस के अपने थॉट्स और स्ट्रगल्स को दिखाते हैं। जितनी बार मार्कस किसी टॉपिक पर वापस आते हैं,
83:41
Speaker A
उतने ही टाइम पता चलता है कि वह उनके लिए कितना इंपॉर्टेंट है। सबसे ऑब्वियस थीम जो हर रीडर नोटिस करेगा वो है डेथ और इंसानी जिंदगी का टेंपरेरी होना। मार्कस बार-बार खुद को याद दिलाते हैं कि डेथ से डरना नहीं
83:59
Speaker A
चाहिए। यह एक नेचुरल प्रोसेस है और यही दुनिया के कांस्टेंट चेंज का हिस्सा है। कभी-कभी तो वह डेथ को कंफर्ट के रूप में देखते हैं। जल्दी ही तुम मर जाओगे। मार्कोस खुद से कई बार कहते हैं और तब कुछ
84:16
Speaker A
भी मैटर नहीं करेगा। 4.6 में, 7.22 में और 8.2 में। जिंदगी के हर एस्पेक्ट की टेंपरेरी नेचर को वह लगातार हाईलाइट करते हैं। सब कुछ बदलता है, सब कुछ खत्म होता है। सब कुछ भूल जाया जाता है। यही रीजन है कई थॉट एक्सरसाइजेस का जो
84:38
Speaker A
मार्कस खुद को देते हैं। जैसे अगस्तस के कोड के बारे में सोचना। 8.31 में वेसियन या ट्रेजन के जमाने को इमेजिन करना। 4.32 में पुराने फिलॉसफर्स के बारे में सोचना 6.47 में और फिर कहना अब सब सिर्फ राख और
84:57
Speaker A
यादों में रह गया है। यह थीम सिर्फ स्टोसिज्म तक ही लिमिटेड नहीं है। पुराने लिटरेचर में यह हर जगह मिलती है। मार्कस खुद इलियड के बुक छह का वह फेमस पार्ट कोट करते हैं जिसमें इंसान की जिंदगी को पत्तों से कंपेयर किया गया
85:14
Speaker A
है। पत्ते जो स्प्रिंग में उगते हैं थोड़ा टाइम फ्लोरिश करते हैं फिर गिर जाते हैं मर जाते हैं और नए पत्तों से रिप्लेस हो जाते हैं 10.34 में मार्कस को यह सेम फीलिंग और राइटर्स में भी मिलती जैसे ग्रीक
85:32
Speaker A
पोएट मेमनेरमस जिसने होमवर्क के कंपैरिजन को और भी आगे बढ़ाया या रोमन लॉयर सर्वियस सुलपिसियस जिसने अपने दोस्त सिरो को उसकी बेटी की डे पर लिखा मैं तुम्हारे साथ एक ऐसी बात शेयर करना चाहता हूं जो मुझे थोड़ा कंफर्ट देने
85:55
Speaker A
वाली थी। शायद तुम्हें भी वैसे ही हेल्प करे जब मैं एशिया से लौट रहा था। एजीना से मिगारा जाते हुए मैंने उन जगहों को देखा जो हम क्रॉस कर रहे थे। एगना पीछे था मेगारा सामने। प्रीियस राइट साइड में कोरिंथ लेफ्ट साइड
86:14
Speaker A
में यह सब शेल्टर कभी बहुत फेमस थे और अब हमारे सामने गिर चुके हैं, टूट चुके हैं और मैंने सोचा अरे और तुम सर्वियस क्या अपने दुख को कंट्रोल भी नहीं कर सकते और याद नहीं रख सकते कि तुम इंसान हो
86:30
Speaker A
जो एक दिन मरने के लिए पैदा हुआ है। मान लो यह सोच मुझे काफी तसल्ली देने वाली थी। आज के ग्रेफ काउंसलर्स शायद ऐसे व्यू पर फोकस नहीं करते। लेकिन मार्कस इस बात को परफेक्टली समझते थे और उनके लिए यह काफी
86:47
Speaker A
मीनिंगफुल होता। मार्कस स्टोइक थे। लेकिन वह एक रोमन भी थे। सिर्फ जेनो और क्रिसपस से इनफ्लुएंस नहीं बल्कि होमर और वर्जिल से भी। वर्जिल का नाम मेडिटेशंस में नहीं आता। और ग्रीक लैंग्वेज में लिखी गई बुक्स में भी उन्हें कोट करना मुश्किल भी था।
87:08
Speaker A
लेकिन मेडिटेशंस में एक उदासी भरा टोन है जो क्लियरली वर्जिलियन है। कुछ और चीजें भी बार-बार सरफेस होती हैं। कई एंट्रीज दर्द, बॉडी की वीकनेस और उसे डील करने के तरीकों पर फोकस्ड है। जब तुम्हें बेड से उठने में दिक्कत हो और
87:28
Speaker A
शब्द से कई एंट्रीज शुरू होती हैं। 5.1 8.128 एक कास्टेंट थीम है दूसरे लोगों के प्रति गुस्सा या इरिटेशन को कंट्रोल करना। उनके बेकार या बुरे बिहेवियर को टोलरेट करना। और उन्हें उनकी गलतियां दिखाना। कई एंट्रीज कोर्ट लाइफ के फ्रस्टेशंस पे
87:52
Speaker A
फोकस्ड हैं। सबसे ज्यादा जब मार्कस खुद को कहते हैं कि कंप्लेंट करना बंद करो। 8.9 में। वह कोर्ट और फिलॉसफी का कंपैरिजन करते हैं। जैसे स्टेप मदर और रियल मदर का। स्टेप मदर से ड्यूटी के लिए मिलते हैं।
88:07
Speaker A
लेकिन प्यार उससे नहीं करते। 6.12 में। फिर भी कोर्ट कोई रुकावट नहीं है। वह एक चैलेंज हो सकता है एक चांस भी। अच्छी लाइफ कहीं भी जी जा सकती है। कोर्ट में भी जैसे एंटोनिनस ने दिखाया। यह इन्होंने लिखा
88:22
Speaker A
5.16 और 1.16 में। मार्कस खुद से कहते हैं कोई भी रोल इतना परफेक्ट नहीं होता। फिलॉसफी के लिए जितना वह रोल जिसमें तुम हो 11.7 में लिखा है। मार्कस के पर्सनालिटी का एक सल क्लू उनके इमेज से मिलता है। ध्यान से देखें तो
88:42
Speaker A
मेडिटेशंस में नेचर के इमेजेस बहुत बार आते हैं। कई रीडर्स मेडिटेशंस 3.2 से स्ट्रक होते हैं। जिसमें मार्कस नेचर के ब्रेड बेक होने या फिक्स, ऑलिव्स और वीट को पकने को डिस्क्राइब करते हैं। जैसे नेचर का काम बिना सोचे समझे होता है। और
89:01
Speaker A
कई एंट्रीज में नेचर और फार्मिंग के सींस मिलते हैं। जैसे शीप्स, हर्ट्स, ग्रेप्स, हार्वेस्टिंग और रेजिंस बनाने के प्रोसेससेस। शायद यह एग्जांपल्स कॉमन थे, लेकिन कॉमन एग्जांपल्स भी इंसान के अंदर काफी कुछ दिखाते हैं। प्लेटो की कोई भी बुक पढ़िए
89:21
Speaker A
तो उसमें हर पेज पर हेल्प्समैन, डॉक्टर्स, शू मेकर्स जैसे लोग मिलते हैं। यह लोग मार्कस के लिखने में बहुत कम मिलते हैं। एक स्ट्रांग इमेज है। जैसे सोसाइटी का एक ट्री जिसमें हर इंसान एक ब्रांच है। यह स्ट्रॉइ आईडिया तो है ही है लेकिन
89:39
Speaker A
मार्कस इस इमेज को और डीपली एक्सप्लोर करते हैं। वह लिखते हैं तुम देख सकते हो डिफरेंस एक ऐसे ब्रांच का जो ट्री के साथ ग्रो हुआ है और उस ब्रांच का जो कट करके वापस लगाई गई है। यह नेचर के लिए मार्कस
89:55
Speaker A
के प्यार को दिखाता है। लेकिन इसके ऑोजिट एक स्ट्रांग सेंस ऑफ डिसगस्ट भी है ह्यूमन लाइफ और दूसरे ह्यूमंस के लिए जो स्टोसिज्म से इजीली एक्सप्लेन नहीं होती। जैसे स्कॉलर पीए ब्रंट कहते हैं। मार्कस का रीजन कहता था कि दुनिया परफेक्ट है।
90:12
Speaker A
लेकिन उसे दुनिया लगती थी बिल्कुल होपलेसली बुरी। कोर्ट में जो लोग थे वह फेक और फ्लेटरिंग थे। और जो लोग मार्कस डेली डील करता था वह मेडलिंग, अनग्रेटफुल, एोगेंट, डिसऑनेस्ट, जेलस और रड। मेडिटेशन का एक रिपीटिंग पॉइंट है। इंसान
90:32
Speaker A
सोशल एनिमल है। जैसे मार्कस को बार-बार खुद को यह याद दिलाना पड़ता है। वो लिखते हैं गॉड्स ह्यूमंस की केयर करते हैं। और तुम जब तुम खुद डेथ के एज पर हो तुम अभी भी दूसरे ह्यूमंस की केयर नहीं करते।
90:49
Speaker A
इस पूरी किताब में एक स्ट्रांग पेसिमिज्म का फील रहता है। जो चीजें हम लाइफ में चाहते हैं, वह सब खाली है, बेकार है, छोटी है। डॉग्स एक दूसरे पर भौक रहे हैं। बच्चे लड़ रहे हैं। पहले हंस रहे हैं। फिर एक
91:06
Speaker A
सेकंड में रो रहे हैं। ट्रस्ट, शेम, जस्टिस, ट्रुथ। दुनिया से गायब हो चुके हैं। सिर्फ हेवन में बची है। तो फिर तुम अभी तक यहां क्यों हो? 5.33 में उन्होंने लिखा। फिर कई एंट्रीज में गंदे विजुअल्स दिखते हैं। दुनिया को मार्कस एक पब्लिक
91:27
Speaker A
बात की तरह डिस्क्राइब करते हैं। तेल, पसीना, गंदगी, पीला, पानी सब कुछ घिनौना। 8.24 में लिखते हैं यह। जब मार्कस स्टार्स को देखते हैं तो सिर्फ इसलिए कि वह नीचे की जिंदगी कीचड़ को धो सके। 7.47 में लिखा उन्होंने ऐसा।
91:46
Speaker A
जो ऑब्जेक्टिव थिंकिंग मार्कर्स इतना वैल्यू करते हैं, वह कभी-कभी मॉडर्न सेंस में सनिकल बन जाती है। डिस्कस्ड होता है जब सोचते हैं कि चीजें बनी किस चीज से हैं? लिक्विड, डस्ट, हड्डियां, गंदगी या मार्बल एक टाइप की जम चुकी गंदगी
92:06
Speaker A
है। गोल्ड और सिल्वर कुछ बचा हुआ कचरा है। कपड़े सिर्फ बालों से बने हैं। पर्पल डाई एक शेल फिश के खून से और बाकी सब भी वैसे ही हैं। 9.36 इंसान की बॉडी भी मार्कस के लिए सिर्फ एक बैग में सड़ी हुई मांस है।
92:27
Speaker A
8.38 में ऐसा लिखा उन्होंने अपने फ्लश से नफरत करो। एक मिक्सचर है खून का, हड्डियों का, टुकड़ों का और नर्व्स, वेंस, आर्टरीज के कलेक्शन। शायद सबसे सैड एंट्री वही है जहां मार्कस म्यूजिक के लिए भी इनडिफरेंट होने की सलाह देते हैं। 11.2 में।
92:49
Speaker A
एक स्कॉलर ने लिखा है मेडिटेशंस को लंबे टाइम तक पढ़ना उदासी ला सकता है। और जिन लोगों को यह किताब बहुत पसंद है वह भी यह डिनाई नहीं कर सकते कि मार्कस की फिलॉसफी इंसान की लाइफ को काफी ड्राई तरीके से
93:03
Speaker A
दिखाती है। मैथ्यू एरोनोल्ड जिन्होंने मार्कस पर लिखा और उनकी फिलॉसफी को डीपली रिस्पेक्ट किया। उन्होंने इस थॉट सिस्टम का मेन वीकनेस बताया। इसमें खुशी के लिए कोई जगह नहीं है और यह बात सही भी लगती है। मार्कस हमें खुशी पाने का रास्ता नहीं बताते।
93:22
Speaker A
सिर्फ पेन को कैसे टोलरेट करें वह बताते हैं। मेडिटेशंस का स्टोसिज्म एक डिफेंसिव फिलॉसफी है। प्रोटेक्ट करने वाली। इसमें मिलिट्री इमेज बार-बार आती हैं। सोल को पोस्टेड या स्टेशन कहा गया है। माइंड को एक इनविंसिबल फो्रेस बोला गया है। 8.48
93:41
Speaker A
में। यह इमेज सिर्फ मार्कस तक लिमिटेड नहीं है। लेकिन उनके लिए शायद और ज्यादा मीनिंग रखती थी। क्योंकि उनकी लास्ट लाइफ बैटल फील्ड और दूर के सफर में गुजरी। मार्कस के लिए लाइफ एक वॉर थी और अक्सर उन्हें लगता होगा जैसे वह वॉर जो हमेशा
94:00
Speaker A
हारने के लिए ही लड़ी जा रही हो। फिर भी कुछ जगह ऐसी हैं जहां मार्कस का एक थोड़ा अलग मूड भी दिखाई देता है। स्पेशली जब वह गॉड्स का जिक्र करते हैं। स्टोरी पॉइंट ऑफ व्यू से गॉड या गॉड्स एक ही बात
94:15
Speaker A
है। यह टर्म बस लोगस नेचर प्रोविडेंस या जैसे चीजें हैं उनको ही डिस्क्राइब करती हैं। मार्कस यह भी कहते हैं कि यह डिवाइन पावर गुड ही होगी क्योंकि डिवाइन है। लेकिन वह इस पावर की स्ट्रिक्टनेस को भी एक्सेप्ट करते हैं। जैसे हिस्टोइक थॉट का
94:34
Speaker A
रूल था। प्रेयर का क्या पॉइंट है? जब गॉड्स के डिसीजंस चेंज ही नहीं हो सकते। मार्कोस खुद भी कई जगह यह पॉसिबिलिटी एक्सेप्ट करते हैं कि शायद प्रे करना काम का नहीं है। 5.7 में, 6.44 में और 9.40 में।
94:52
Speaker A
इसलिए और भी सरप्राइजिंग लगता है जब मार्कस कुछ जगह गॉड्स के पर्सनल केयर का एग्जांपल देते हैं। बुक वन के एंड में सबसे क्लियर दिखाई देता है। मार्कस लिखते हैं कि गॉड्स ने उनकी हेल्प की अपने गिफ्ट्स, अपनी मदद, अपने
95:10
Speaker A
इंस्पिरेशंस के थ्रू। जैसे उन्होंने और लोगों की की। उनकी मदद काफी स्पेसिफिक लगती है। मार्कस उन्हें थैंक्स बोलते हैं ड्रीम्स के जरिए दिए गए इलाज के लिए। इंक्लूडिंग वो ड्रीम जो कैटा में आया था। वह याद दिलाते हैं कि गॉड्स दूसरे
95:30
Speaker A
लोगों की भी मदद करते हैं। जैसे तुम्हारी की ड्रीम साइन और हर पॉसिबल वे में। मार्कस के लिखने से लगता है कि वह जेनुइनली गॉड्स में बिलीव करते थे। सिर्फ मेटाफर नहीं बल्कि रियल फोर्स के रूप में। जब वह उन लोगों को जवाब देते हैं जो गॉड्स
95:50
Speaker A
के होने पर डाउट करते हैं तो कहते हैं कि मुझे पता है गॉड्स हैं क्योंकि मैंने उनकी पावर बार-बार महसूस की है। अब सवाल यह है यह पर्सनल कनेक्शन डिवाइन से कैसे फिट होता है? स्टक्स के इंपर्सनल लोगस के
96:05
Speaker A
कांसेप्ट में शायद इसका आंसर मेडिटेशंस 9.40 के एक डायलॉग में मिलता है। लेकिन यह तो वह चीजें हैं जो गॉड्स ने मेरे ऊपर छोड़ी हैं। एक आवाज कहती है और दूसरी आवाज जवाब देती है कि और तुम्हें क्या लगता है गॉड्स को फर्क नहीं पड़ता
96:26
Speaker A
तुम्हारे डिसीजन से? शायद मार्कस ने खुद भी इस कॉन्फ्लिक्ट को फुली समझा नहीं या कॉन्शियसली एक्सेप्ट नहीं किया। लेकिन इस कंट्राडिक्शन का होना दिखाता है कि उनके अंदर कहीं डीप में उन्हें भी लगता था कि स्टसिज्म का आंसर हर चीज के लिए
96:45
Speaker A
परफेक्ट नहीं था। मेडिटेशंस किसने या कैसे प्रिजर्व किया यह किसी को नहीं पता। फोर्थ सेंचुरी के एंड में लिखी गई हिस्टोरिया अगस्ता मार्कस का एक सीन दिखाती है। जहां वह मेडिटेशंस पर रूम में लेक्चर दे रहे हैं और ऑडियंस उनके जादों में खो गई है।
97:06
Speaker A
यह इस किताब के टिपिकल झूठों में से एक है। एक अच्छी सी कहानी लेकिन पूरी तरह बनाई गई। लेकिन यह पैसेज यह जरूर दिखाता है कि फोर्थ सेंचुरी तक मेडिटेशन सर्कुलेट हो रही थी। क्योंकि ओरेटर थेस्टियस ने भी
97:23
Speaker A
इसे मेंशन किया था। शायद यह थेस्टियस के एक कंटेंपरेरी जूलियन द अपोस्टेट नियोपगन एपरर को भी पता था। उनकी डायलॉग दी कजारार्स में मार्कस को एक आइडियल फिलॉसफर किंग के रूप में दिखाया गया है। जैसे जूलियन खुद बनना चाहते थे। थिमेस्टियस और
97:45
Speaker A
जूलियन के बाद वाले सेंचुरी में वेस्ट में सब कुछ गिरता गया। पॉलिटिकल सिस्टम भी और ग्रीक लैंग्वेज का नॉलेज भी। अगले हजार साल तक मार्कस की किताब जैसे होमर और यूरिपिडिस की वेस्ट के लोगों के लिए गायब हो गई।
98:03
Speaker A
ग्रीक बोलने वाले ईस्ट में मेडिटेशंस के कॉपीज सर्वाइव तो करती रही लेकिन वहां भी लोग इसे ज्यादा पढ़ते नहीं थे। कई सेंचुरीज तक इसका कोई ट्रेस नहीं मिलता। फिर 10th सेंचुरी के बिगिनिंग में एक लेटर मिलता है एक स्कॉलर और चर्चमैन अरेथस का
98:24
Speaker A
जिसमें वह लिखते हैं कि मेरे पास कुछ टाइम से एपरर मार्कस की एक बहुत ही वैल्यूुएबल किताब का एक कॉपी है। यह सिर्फ पुरानी नहीं बल्कि बिल्कुल टूटने वाली थी। मैंने इसे कॉपी करवा लिया है ताकि फ्यूचर जनरेशंस को एक अच्छा वर्जन मिल सके।
98:41
Speaker A
कि एरेथस की कॉपी ही आज हमारे पास मेडिटेशंस के बचने का रीजन है। यह कंफर्म नहीं है। लेकिन उनके बाद वाले सेंचुरीज में रीडर्स बढ़ने लगे। एक या दो जनरेशन बाद सुधा नाम की एक बड़ी बजेंसाइक्लोपीडिया इसे कोट करती है। शायद
98:59
Speaker A
उसी टाइम के आसपास एक अननोन बजेंटाइन पोएट ने इस पर एक छोटी सी पोएम लिखी जो टेक्स्ट के साथ कॉपी होती रही। ऑन द बुक ऑफ मार्कस। अगर तुम पेन पर कंट्रोल चाहते हो तो इस बुक को खोलो और ध्यान से पढ़ो और
99:15
Speaker A
इसमें मिलेगा तुम्हें भरभ के वक्त दुनिया और लाइफ का ज्ञान जो हो चुका है जो हो रहा है और जो आएगा और समझ लो कि खुशी और गम बस एक खाली धुआ है। 1453 में जब कॉनस्टेंटिनोपल टक्स के
99:34
Speaker A
हाथ चला गया तो बहुत सारे स्कॉलर्स वेस्ट की तरफ भाग गए। अपने साथ ग्रीक टेक्स्ट को लेकर जिनसे इटालियन रेनोस को एनर्जी मिली। मेडिटेशंस भी उनमें से एक रही होगी। लेकिन तब भी यह किताब मुश्किल से बची थी।
99:49
Speaker A
इसका सिर्फ एक कंप्लीट मैनुस्क्रिप्ट बचा है। 14th सेंचुरी का एक कोडक्स जो वेटिकन में रखा है जिसमें एरर्स ही एरर्स हैं। पहली बार यह प्रिंट में 1559 में आई जब विलहेलम हो्समैन जिसे जिलेंडर कहते हैं। उन्होंने एक बेटर
100:09
Speaker A
मैनुस्क्रिप्ट से टेक्स्ट पब्लिश किया। वो मैनुस्क्रिप्ट आज के टाइम तक सर्वाइव नहीं हुई। लेकिन तब भी वो वर्जन भी मार्कस के असली लिखे हुए से काफी इंपरफेक्ट था। जो मेडिटेशंस हम आज पढ़ते हैं उसमें कुछ पैसेजेस बैडली डिस्टोर्टेड हैं। या तो
100:27
Speaker A
उनमें इंपॉर्टेंट वर्ड्स मिसिंग है या लाइन सुलझी हुई हैं। कुछ मिस्टेक्स मार्कस के ओरिजिनल नोट्स में ही रही होंगी और कुछ गलतियां उस कॉपी करने वाले के प्रोसेस में आई होंगी जो हजार साल तक चलती रही। कुछ जगह स्कॉलर्स ने अपने नॉलेज और गेस से
100:43
Speaker A
ओरिजिनल वर्जन वापस बनाने की कोशिश की है और कई बार सफल भी हुए हैं। लेकिन अभी भी कुछ पार्ट्स ऐसे हैं जिनके मीनिंग्स पर डाउट बना हुआ है। मेडिटेशंस ने कभी भी क्लासिकल स्टडीज के एक्सपर्ट लोगों का ज्यादा इंटरेस्ट नहीं खींच पाए और इसका
101:00
Speaker A
रीजन समझना मुश्किल भी नहीं है। इसमें हिस्ट्री के इवेंट्स का डायरेक्ट मेंशन कम है और सोशल हिस्टोरियंस के लिए भी ज्यादा मटेरियल नहीं है। स्टोसिज्म के बारे में अगर प्रूफ की बात करें तो मेडिटेशंस एपिक्टेटस के डिस्कोर्सेज के सामने बिल्कुल हल्की लगती
101:18
Speaker A
है। लेकिन इसके बावजूद भी यह किताब उन लोगों को हमेशा अट्रैक्ट करती रही है जो क्लासिकल स्टडीज के छोटे सर्कल्स के बाहर हैं। शायद उनको और भी ज्यादा जो मार्कस के स्ट्रगल्स को अच्छी तरह समझ सकते हैं। मेडिटेशंस फ्रेडरिक द ग्रेट की फेवरेट
101:37
Speaker A
बुक्स में से एक थी। एक रिसेंट अमेरिकन प्रेसिडेंट ने भी बोला था कि वह हर कुछ सालों में इसे दोबारा पढ़ते हैं। इस किताब ने और भी कई लोगों को अट्रैक्ट किया। पोएट्स जैसे पोप, गोइथ, एर्नल्ड और एक
101:51
Speaker A
साउथर्न प्लांट और विलहमल अलेक्जेंडर पियर्स को भी। उन्होंने अपनी ऑटोबायोग्राफी में लिखा हर इंसान के पास चाहे हार कितनी भी गहरी क्यों ना हो। मार्कस और एलियस का एक ऐसा किंगडम होता है जो कभी टूट नहीं सकता। वह बाहर नहीं अंदर
102:08
Speaker A
होता है और जब सब कुछ चला जाता है वह तब भी बना रहता है। हम मार्कस की दुनिया में नहीं जीते लेकिन वह दुनिया उतनी अलग भी नहीं जितनी हमें कभी लगती है। इस बात का सबसे अच्छा प्रूफ है रशियन
102:25
Speaker A
पोएट जोसेफ ब्रॉडस्की का एस्स होमेश टू मार्कस और एलियस जिसमें वह रोम के कैपिटोलिन हिल पर लगी उनकी स्टचू से अपनी जर्नी शुरू करते हैं। मैं उसे लास्ट टाइम कुछ साल पहले देखा था। एक भीगे विंटर रात में एक
102:41
Speaker A
अकेली भटकती डेलमेशियन के साथ। मैं एक टैक्सी से अपने होटल जा रहा था। उस रात के बाद जो मेरी लाइफ की सबसे बुरी रातों में से एक थी। अगले दिन सुबह मुझे रोम से स्टेट्स जाना था। मैं नशे में
102:59
Speaker A
था। ट्रैफिक वैसे चल रहा था जैसे लोग अपने फ्यूनरल के लिए चाहते हैं। कैपिटल के नीचे मैंने ड्राइवर को गाड़ी रोकने को बोला। पैसे दिए और उतर गया। तभी मुझे लगा मैं अकेला नहीं हूं। एक मीडियम साइज की डलमेशियन कहीं से आई और
103:16
Speaker A
मेरे पास आकर चुपचाप बैठ गई। उनका आना इतना कंफर्टिंग था कि एक पल के लिए मुझे लगा मैं उसे एक सिगरेट ऑफर कर दूं। थोड़ी देर तक हम दोनों उस हॉर्समैन के स्टचू को देखते रहे और अचानक शायद बारिश और माइकल
103:34
Speaker A
एंजेलो के पिलर्स और आर्किस के रिदमम की वजह से सब कुछ ब्लर हो गया। उस ब्लर के बीच वो चमकदार स्टेचू जिसमें कोई परफेक्ट शेप नहीं थी। ऐसे लग रहा था जैसे वह मूव कर रही हो। बहुत तेजी से
103:50
Speaker A
नहीं। और किसी और जगह नहीं जा रही थी। लेकिन इतना जरूर था कि डलमेशियन मेरे पास से उठ गई और उस ब्रोंज स्टचू के मूवमेंट के पीछे चल पड़ी। आइए अब मार्कस और एलियस की इस बुक मेडिटेशंस को लाइन बाय लाइन पेज बाय पेज
104:10
Speaker A
समझने की कोशिश करते हैं। बुक वन मैंने सीखा मेरे दादाजी वेरस से अच्छा कैरेक्टर और सिर्फ कंट्रोल रखना। मेरे पिता जो मैंने या तो खुद देखे या लोगों से सुने। ईमानदारी और मर्दानगी। मेरी मां भगवान के लिए रिस्पेक्ट खुले दिल से देना ना सिर्फ बुरा
104:40
Speaker A
ना करना बल्कि बुरा सोचना भी नहीं और सिंपल लाइफ जीना बिल्कुल अमीरों जैसी नहीं। मैंने सीखा मेरे परदादा पब्लिक स्कूल से दूर रहना। अच्छे प्राइवेट टीचर्स रखना और उसमें लगने वाले पैसों को वेस्ट ना समझना। मैंने सीखा मेरे
105:01
Speaker A
पहले टीचर से ना किसी साइड का फैन बनना चैरियट रेस या फाइटर गेम्स में तकलीफ से भागना नहीं डिमांड्स ना करना अपना काम खुद करना दूसरों के मामले में ना घुसना और चुगली करने वालों से दूर रहना मैंने सीखा डायग्निटिस से फालतू
105:25
Speaker A
चीजों में टाइम वेस्ट ना करना जादू टोना मंत्र तंत्र ंत्र वालों के चक्कर में ना पड़ना। क्वेल फाइटिंग जैसी चीजों का शौक ना लगना। सच सुनना चाहे पसंद आए या ना आए। फिलॉसफी पढ़ना। बचस से सीखना। फिर टेंडसिस और
105:48
Speaker A
मारकिएनिस से स्टूडेंट के रूप में डायलॉग्स लिखना। ग्रीक स्टाइल चूज करना। कैंप बेड और एक चादर में रहना। मैंने सीखा रस्टिकस से यह समझना कि अपने कैरेक्टर को ट्रेन और डिसिप्लिन करना जरूरी है। रेटोरिक में इंटरेस्ट ले भटकना नहीं।
106:09
Speaker A
फालतू अब्स्ट्रैक्ट टॉपिक्स पे लिखना नहीं या दूसरों को मोरल लेसंस देना नहीं या कुछ ऐसा लिखना नहीं जो फेक सिंपलीसिटी या दूसरों के लिए जीने वाले इंसान को शो करे। स्पीच, पोएट्री और फैंसी राइटिंग से दूर रहना। सिर्फ घर के अंदर घूमने के लिए फैंसी
106:29
Speaker A
कपड़े पहनना नहीं सिंपल और सीधे लेटर लिखना। जैसे उसने मेरी मां को शवेशा से लिखा था। और अगर कोई गुस्सा दिखा के बाद में पैचअप करना चाहे तो उनके साथ काल बिहेव करना। किताब ध्यान से पढ़ना सिर्फ ऊपर ऊपर
106:49
Speaker A
से समझ लेना काफी नहीं। हर स्मूथ टॉक करने वालों पर भरोसा नहीं करना। और मुझे एपिक्टेटस के लेक्चर से इंट्रोड्यूस करवाना और अपना पर्सनल कॉपी मुझे देना। मैंने सीखा ओपोलीनस से अपनी मर्जी से जीना और हर वक्त रिलायबल
107:08
Speaker A
रहना। सिर्फ लोगस पर ध्यान देना। चाहे मोमेंट छोटा हो या बड़ा। हर सिचुएशन में सेम रहना। चाहे बहुत दर्द हो। अपने बच्चे की डेथ हो या कोई बीमारी हो। उनके एग्जांपल से यह क्लियरली समझ आया कि एक आदमी स्ट्रांग और फ्लेक्सिबल दोनों हो
107:29
Speaker A
सकता है। उनकी टीचिंग्स में पेशेंस देखना और यह देखना कि उन्होंने अपने ज्ञान और स्किल को टीचर के रूप में एक हमंब्ल वर्चू माना। और यह सीखना कि दोस्तों से हेल्प लेना कैसे करें। बिना सेल्फ रिस्पेक्ट खोए या अनग्रेटफुल लगे।
107:49
Speaker A
मैंने सीखा सेक्सस से दयालु रहना। घर में एक पिता जैसे अथॉरिटी का जीता जागता एग्जांपल बनना। नेचर के अकॉर्डिंग कैसे जीना चाहिए वह दिखाया। गंभीर रहना बिना ईगो दिखाए। दोस्तों के लिए नेचुरली सिंपैथी रखना। बिगिनर्स और कमजोर सोच वाले
108:12
Speaker A
लोगों के लिए टॉलरेंस दिखाना। हर किसी के साथ अच्छे से एडजस्ट कर लेना। उनका साथ मिलना एक बड़ा कॉम्प्लीमेंट होता था और उनके आसपास रहना लोगों के लिए एक ऑनर होता था। जिन प्रिंसिपल्स के अकॉर्डिंग जीना चाहिए उन्हें लॉजिकली और समझदारी से समझना
108:32
Speaker A
और एनालाइज करना। गुस्सा या दूसरे इमोशंस ओपनली ना दिखाना। पैशन से फ्री रहना लेकिन प्यार से भरे हुए होना। बिना शोर मचाए तारीफ करना। बिना दिखावे के अपना ज्ञान शेयर करना। मैंने सीखा लिटरेरी क्रिटिकल एलेक्जेंडर से। हर वक्त लोगों की गलतियां
108:54
Speaker A
सुधारते रहना गलत है। स्पेशली जब वह ग्रामर या प्रोनाउंसिएशन में छोटी-मोटी गलती करें। बस उनका सवाल का जवाब देना या एक और एग्जांपल देना या मुद्दे पर बात करना ना कि उनकी वर्डिंग पे या कुछ ऐसा बोलो जो
109:12
Speaker A
डिस्कशन को आगे बढ़ाए और सही वर्ड क्वाइटली बीच में डाल दो। मैंने सीखा फ्रंटो से समझना कि पावर के साथ कैसे जेलसी, चालाकियां और दिखावा आता है और अच्छे खानदान के लोग कैसे कभी-कभी बहुत ही रूथलेस बन जाते हैं।
109:31
Speaker A
मैंने सीखा एलेक्जेंडर द प्लेटनिस्ट से। हर वक्त लोगों से यह कहना या लिखना कि मैं बिजी हूं जब तक वैसे सच में बिजी ना हूं। ऐसी बात अवॉइड करनी चाहिए। वैसे ही काम में बिजी हूं बोल के अपने आसपास के
109:50
Speaker A
लोगों से रिस्पांसिबिलिटी से भागना सही नहीं। मैंने सीखा कैटुलस से। अगर कोई दोस्त नाराज हो गया हो, चाहे वह नाराजगी गलत ही क्यों ना हो, उसे इग्नोर मत करो बल्कि चीजें ठीक करने की कोशिश करो। मैंने सीखा उनसे अपने टीचर्स को बिना जलन के
110:09
Speaker A
रिस्पेक्ट देना। जैसे डोमिटियस और एथेनोडोटस की कहानी में दिखाया और अपने बच्चों को सच्चे दिल से प्यार करना। मैंने सीखा अपने भाई सेवरेरस से अपने परिवार से प्यार करना। सच्चाई और इंसाफ को वैल्यू देना। उनके थ्रू मुझे थ्रासिया, हेलविडियस, कैटो, डियन और
110:33
Speaker A
ब्रूटस के बारे में पता चला। और एक ऐसी सोसाइटी की कल्पना आई जहां सबके लिए सेम लॉ हो। सबको बोलने का बराबर हक हो। और जहां के रूलर्स अपने लोगों की फ्रीडम को सबसे ज्यादाेंस दें। और उनसे यह भी सीखा कि फिलॉसफी को
110:51
Speaker A
वैल्यू देना है कंसिस्टेंटली और ऑनेस्टली। दूसरों की हेल्प करना, खुशी से शेयर करना, हमेशा नेगेटिव सोच से दूर रहना, अपने दोस्तों के प्यार पर कभी डाउट नहीं करना। और जब भी उसे कोई चीज पसंद नहीं होती थी, सामने वाले को क्लियर होता था। उनके
111:11
Speaker A
दोस्तों को कभी यह गेस नहीं करना पड़ता था कि वह किसी बात पर क्या सोचते हैं। सब कुछ हमेशा क्लियर होता था। मैंने सीखा मैक्सिमस सेल्फ कंट्रोल और डिस्ट्रैक्शन से बचने की एबिलिटी। मुश्किल वक्त में भी होपफुल रहना
111:28
Speaker A
स्पेशली जब बीमार हो जाए बैलेंस्ड पर्सनालिटी डिग्निटी और ग्रेस दोनों एक साथ। अपना काम करना बिना शिकायत के। दूसरे लोगों का यह भरोसा कि जो कुछ वह कहते थे वही सोचते थे और जो करते थे बिना किसी दुश्मनी के करते थे।
111:48
Speaker A
कभी शॉक नहीं हुआ ना कभी डर लगता था ना कभी जल्दी में ना ही कंफ्यूजन में ना चापलूसी करते और ना ही किसी से अननेसेसरीली लड़ते बड़ा दिल दया और ईमानदारी ऐसा लगता था कि वह खुद अपने रास्ते पर चलते हैं। कोई उन्हें फोर्स
112:08
Speaker A
नहीं करता। किसी को कभी उन्होंने छोटा महसूस नहीं करवाया और ना ही कभी ऐसा फील दिया कि कोई उनसे बड़ा है। थोड़ा सेंस ऑफ ह्यूमर भी था उनमें। मैंने सीखा मेरे गोद लिए हुए पिता से दयालु रहना। जब किसी फैसले तक पहुंच
112:28
Speaker A
जाए तो उसे पक्के तरीके से फॉलो करना। शो ऑफ वाले ऑनर्स को इग्नोर करना। मेहनत और लगातार काम करते रहना। जो भी पब्लिक गुड के लिए कुछ वैल्यूुएबल बोलते थे उसे ध्यान से सुनना। हर इंसान को उनके लायक ट्रीट करना बिना थके। कब किस
112:49
Speaker A
चीज पर प्रेशर देना है और कब पीछे हटना है यह समझना। यंग बॉयज के पीछे भागने वाली बातों को बंद करना। निस्वार्थ सोच। अपने दोस्तों से यह एक्सपेक्ट नहीं करना कि वह डिनर पे उन्हें एंटरटेन करें या उनके साथ ट्रैवल करें। जब
113:07
Speaker A
तक वह खुद ना चाहे और जो कोई पीछे रह जाता था किसी काम के लिए जब वह वापस आता तो उनके लिए सब वैसे का वैसा होता मीटिंग्स में टफ क्वेश्चंस पूछना फोकस्ड रहना कभी भी पहले इंप्रेशन से सेटिस्फाई नहीं होना
113:24
Speaker A
ना ही बातचीत को जल्दी खत्म करना अपने दोस्तों के साथ लॉयलिटी कभी उनसे बोर नहीं होना ना ही किसी को स्पेशल ट्रीट करना हमेशा खुद पर भरोसा रखना और चेयरफुल रहना। पहले से प्लानिंग कर लेना और छोटी-छोटी चीजों का भी क्वाइटली ध्यान रखना। अपनी
113:47
Speaker A
तारीफ या तालियों लेने के अटेमप्ट को कंट्रोल करना। हमेशा एंपायर के फायदे कोेंस देना। पब्लिक पैसे का सही यूज करना। रिस्पांसिबिलिटी लेना और अगर गलती हो जाए तो ब्लेम भी लेना। गॉड्स के लिए रिस्पेक्ट लेकिन अंधविश्वास नहीं। इंसानों के साथ सीधा बिहेवियर ना तो
114:09
Speaker A
पब्लिक का हीरो बनने की एक्टिंग ना उनका अटेंशन लेने की कोशिश। हमेशा सीरियस स्टेबल और कभी भी चीप या फैशन के पीछे भागने वाला नहीं। जो कंफर्ट लाइफ ने दिया था उसे बिना घमंड और बिना माफी के एंजॉय करना। अगर
114:28
Speaker A
मिला तो उसे किया। अगर नहीं मिला तो उसकी कमी महसूस नहीं की। किसी ने कभी नहीं कहा कि वह फेक है। वो बेशर्म है या बोरिंग टीचर जैसा है। हर किसी ने उसे ऐसे देखा जैसे वह एक ऐसा आदमी
114:43
Speaker A
हो जो लाइफ के टेस्ट से निकला है। जिसमें दिखावा नहीं लेकिन लीडरशिप और सेल्फ कंट्रोल है। जो लोग फिलॉसफी को सीरियसली फॉलो करते हैं उनके लिए उनके दिल में रिस्पेक्ट था। पर जो फेक थे उनको इग्नोर करते थे। वह हर
115:00
Speaker A
किसी के साथ आराम से रह सकते थे और सामने वाले को भी कंफर्टेबल फील करवाते थे बिना फोर्स किए। अपना ख्याल रखना जानते थे। ना तो हेल्थ को ले ओवरवीवरीड ना ही अपने लुक्स को लेके ऑब्सेस्ड। लेकिन पूरा इग्नोर भी नहीं करते थे। इस
115:18
Speaker A
वजह से उन्हें कभी डॉक्टर, दवाई या लोशन की जरूरत नहीं पड़ती थी। सबसे खास बात जो किसी सब्जेक्ट के एक्सपर्ट होते थे चाहे वह लॉ हो बोलना हो या माइंड का मैटर हो उस एक्सपर्ट को आगे रखना और पूरी एनर्जी से सपोर्ट करना ताकि
115:35
Speaker A
वह अपना बेस्ट दे सके। ट्रेडिशन का रिस्पेक्ट करते थे लेकिन हर वक्त यह बोलते नहीं रहते थे कि मैं वैल्यूस बचा रहा हूं। ना इधर-उधर भटकते थे ना हर नई चीज के पीछे भागते थे। सेम जगह, सेम काम में स्टिक करते
115:54
Speaker A
थे। माइग्रेन होने के बाद भी वापस अपना काम करते थे। फ्रेश और फोकस्ड। उनके पास सीक्रेट्स बहुत कम थे। सिर्फ स्टेट सीक्रेट्स थे और उनमें भी ज्यादा नहीं। उन्होंने पब्लिक काम हमेशा कंट्रोल में रखे। गेम्स, बिल्डिंग्स, पैसा बांटना
116:14
Speaker A
सब कुछ सिर्फ जरूरत के हिसाब से ना कि नाम कमाने के लिए। ना कभी अजीब टाइम पर नहाना ना ही अपने लिए फैंसी बिल्डिंग्स बनाना ना खाने की चिंता ना कपड़ों के रंग और डिजाइन की ना ही सुंदर स्लेव्स की डिमांड जैसे
116:30
Speaker A
लोरियम की फर्म की चादर लेनोवियम की सिंपल चीजें टस्कुलम में एक कस्टम ऑफिसर के अपोलॉजी को एक्सेप्ट कर लेना वैसे सब एग्जांपल्स उन्होंने कभी बदतमीजी नहीं की। कभी अपने ऊपर कंट्रोल नहीं खोया। कभी वायलेंट नहीं हुए। किसी ने उन्हें कभी
116:50
Speaker A
पसीने तक आते नहीं देखा। हर कामली, लॉजिकली और अटेंशन के साथ करते थे। लेकिन स्ट्रांग डिसीजन के साथ और बिना किसी कंफ्यूजन के। उनके बारे में यह कहा जा सकता है जैसे सोक्रेटीस के लिए कहते हैं कि वह एंजॉय करना भी जानते थे और जरूरत
117:09
Speaker A
पड़े तो छोड़ भी देते थे। वह चीजें जिसे लोग छोड़ नहीं पाते या जिसमें लोग अटक जाते हैं उन्हें भी। उनकी स्ट्रेंथ, पेशेंस और कंट्रोल दोनों चीजों में इक्वल थी। यह दिखाता है कि उनकी सोल रेडी थी। कभी ना हार मानने वाली।
117:32
Speaker A
मैंने सीखा देवी देवताओं से कि मुझे अच्छे दादा-दादी मिले, अच्छे मां-बाप मिले, एक अच्छी बहन मिली, अच्छे टीचर्स मिले, अच्छे सर्वेंट्स, रिश्तेदार, दोस्तों का साथ मिला। लगभग सभी अच्छे थे। और मैंने कभी उनके साथ अपने ऊपर से कंट्रोल नहीं खोया।
117:51
Speaker A
जबकि अंदर से ऐसा कर सकता था और आसानी से हो भी सकता था। पर भगवान का शुक्र है। मुझे कभी उस सिचुएशन में डाला ही नहीं गया। इसलिए उस टेस्ट से बच गया कि मुझे दादाजी की गर्लफ्रेंड ने
118:07
Speaker A
ज्यादा टाइम तक नहीं पाला कि मैंने अपनी वर्जिनिटी जल्दी नहीं खोई और एडल्टहुड तक आया जब आना चाहिए था उसे भी थोड़ा डिले करके कि मुझे ऐसा कोई मिला रूलर के रूप में और पिता के रूप में जिसने मुझे एोगेंट
118:24
Speaker A
होने से रोका और यह समझाया कि कोर्ट में रहकर भी तुम बॉडीगार्ड्स के झुंड महंगे कपड़े बड़े चमकते दिए या मूर्तियों के बिना जी सकते हो कि एक रूलर होते हुए भी अपने ऑफिशियल ड्यूटीज करते हुए भी तुम सिंपल इंसान की
118:41
Speaker A
तरह बिहेव कर सकते हो बिना केयरलेस दिखाए कि मेरा भाई वैसे था जैसे था। उनके कैरेक्टर ने मुझे इंस्पायर किया कि मैं अपना बेटर वर्जन बनूं। उनका प्यार और अफेक्शन ने मेरी लाइफ को और रिच बनाया कि मेरे बच्चे ना तो बेवकूफ पैदा
119:01
Speaker A
हुए और ना ही उनका शरीर बिगड़ा हुआ था कि मैं रिटोरिक या पोएट्री या दूसरे फील्ड्स में ज्यादा टैलेंटेड नहीं था। अगर मुझे लगता कि मैं उनमें अच्छे से प्रोग्रेस कर रहा हूं तो शायद मैंने उन्हें कभी छोड़ा
119:16
Speaker A
ही नहीं होता। कि जिन लोगों ने मुझे बड़ा किया उन्हें मैंने वही रिस्पेक्ट दिया जो वह शायद जल्दी चाहते थे और उन्हें यह कहकर डिले नहीं किया कि बाद में दूंगा क्योंकि वह तब तक यंग ही थे कि मुझे अपोलिनस, रस्टिकस और मैक्सिममस
119:37
Speaker A
जैसे लोग मिले कि मुझे बार-बार और क्लियरली दिखाया गया कि नेचर के अकॉर्डिंग जीना कैसा होता है। भगवान ने पूरी कोशिश की अपने गिफ्ट्स, मदद और इंस्पिरेशन के थ्रू कि मैं वैसे जी सकूं जैसे नेचर चाहती है। और अगर मैं फेल हुआ हूं तो उसमें किसी
119:58
Speaker A
और की नहीं मेरी ही गलती है। क्योंकि मैंने उनकी बात ढंग से नहीं सुनी जो उन्होंने प्रैक्टिकली स्टेप बाय स्टेप सिखाया कि मेरी बॉडी इतना टाइम तक सही काम करती रहे। स्पेशली जो जिंदगी मैंने जी है उसे देखते हुए कि मैंने बेनेडिक्टा या
120:16
Speaker A
थियोडोटस को कभी हाथ तक नहीं लगाया और बाद में भी जब लस्ट ने मुझे ले लिया था तब भी मैंने अपने आप को वापस कंट्रोल किया कि रस्टिकास से मैंने कई बार गुस्सा होने के बाद भी कभी कोई ऐसा काम नहीं किया जिसका
120:31
Speaker A
मुझे बाद में पछतावा होता कि मेरी मां ने जबकि वह जल्दी चली गई। अपनी आखिरी जिंदगी मेरे साथ बिताई। कि जब भी मुझे किसी की मदद करने का मन हुआ किसी गरीब की या किसी जरूरतमंद की कभी किसी ने मुझे यह नहीं कहा कि तुम्हारे पास
120:49
Speaker A
पैसा नहीं है और मैं खुद भी कभी ऐसे सिचुएशन में नहीं आया कि मुझे किसी और से कुछ लेना पड़े कि मेरी पत्नी वैसे है जैसे है ओबिडिएंट लविंग और हंबल कि मेरे बच्चों के पास अच्छे टीचर्स थे सपनों के जरिए मिला
121:08
Speaker A
इलाज आज जैसे तब जब मैं खून वाली खांसी से गुजर रहा था या जब मुझे चक्कर आते थे और एक सपना सटा में आया था कि जब मैंने फिलॉसफी में इंटरेस्ट लेना शुरू किया तब मैंने गलत लोगों के हाथ नहीं लग गया ना ही मैं
121:26
Speaker A
ट्रीटीज लिखने में अटक गया ना ही लॉजिक की बारीकियों में खो गया ना ही फिजिक्स के चक्कर में पड़ गया यह सब चीजें ऐसी हैं जिनके लिए हमें फॉर्च्यून और भगवान दोनों दोनों की मदद चाहिए होती है। बुक
121:49
Speaker A
टू जब सुबह उठते हो तो खुद से कहना आज जिन लोगों से मैं मिलूंगा वह तंग करने वाले घमंडी, झूठे, जलन से भरे हुए और रूढ़ होंगे। ऐसे इसलिए है क्योंकि उन्हें अच्छाई और बुराई का फर्क ही नहीं पता।
122:10
Speaker A
लेकिन मैं अच्छाई की खूबसूरती देखता हूं और बुराई की बदसूरती के चेहरे भी। और समझा है कि जो गलत करता है उनका नेचर मेरे जैसा ही है। ना तो सेम खून ना सेम फैमिली लेकिन सेम माइंड और उसमें भी
122:27
Speaker A
डिवाइन का एक हिस्सा है। इसलिए कोई भी मुझे चोट नहीं पहुंचा सकता। कोई भी मुझे बदसूरती में खींच नहीं सकता। मैं ना तो उस इंसान से गुस्सा हो सकता हूं ना ही उससे नफरत कर सकता हूं। हम सब मिलकर काम करने के लिए पैदा
122:45
Speaker A
हुए हैं। जैसे पैर, हाथ, आंखें, दांत के दोनों हिस्से। एक दूसरे को रोकना नेचर के अगेंस्ट है। किसी से गुस्सा होना, उसे मुंह मोड़ लेना यह सब रुकावट है। जो कुछ भी मैं हूं वह है एक शरीर, थोड़ा सा सांस और एक
123:08
Speaker A
दिमाग। अपनी किताबें हटा दो। डिस्ट्रैक्शंस में उलझने बंद करो। यह अलाउड नहीं है। सोचो जैसे तुम अभी मरने वाले हो और अपने शरीर से नफरत करो। एक खून का गोला, हड्डी के टुकड़े, नर्व्स, वेंस, आर्टरीज का जोड़ा हुआ
123:28
Speaker A
जाल। सोचो स्पिरिट क्या है? हवा और हर पल बदलती हवा जो बार-बार अंदर जा रही है, बाहर आ रही है। और अकल ऐसे सोचो तुम बूढ़े हो गए हो। अब दिमाग को और स्लेव मत बनाओ। सेल्फिश थॉट्स के पीछे मत भागो। डेस्टिनी
123:48
Speaker A
से लड़ना बंद करो। प्रेजेंट को नफरत से मत देखो और फ्यूचर पे शक करना बंद करो। जो डिवाइन है वह पूरा प्रोविडेंस से भरा हुआ है। किस्मत भी नेचर से अलग नहीं है। सब कुछ एक ही जाले में जुड़ा हुआ है।
124:05
Speaker A
प्रोविडेंस के दायरे में सब कुछ वहीं से आता है। और उनके बाद है नेसेसिटी पूरी दुनिया की जरूरत जिसका तुम एक हिस्सा हो। जो कुछ भी नेचर करती है या जिससे पूरी नेचर बची रहती है, वह हर एक पार्ट के लिए
124:25
Speaker A
अच्छा होता है। यह दुनिया बदलाव से चली जा रही है एलिमेंट्स में और उन चीजों में जो उनसे बनती हैं। इतना सोचना ही काफी है। इसे एक रूल समझ लो। बुक्स की प्यास छोड़ दो ताकि जब तुम मरो
124:41
Speaker A
तो बिटरनेस नहीं हो बल्कि खुशी और सच के साथ दिल से भगवान का शुक्र अदा कर सको। याद करो तुमने कितनी बार इस काम को टाल दिया है। कितनी बार भगवान ने तुम्हें और टाइम दिया पर तुमने उसे नहीं किया। एक
124:59
Speaker A
वक्त आएगा जब तुम्हें पहचानना पड़ेगा कि तुम किस दुनिया का हिस्सा हो। कौन इसे चला रहा है और तुम कहां से आए हो? और यह समय जो तुम्हें मिला है वह लिमिटेड है। अगर तुमने इसे यूज नहीं किया खुद को आजाद करने
125:15
Speaker A
के लिए तो यह चला जाएगा और कभी वापस नहीं आएगा। हर एक पल पर फोकस करो। जैसे एक रोमन करता है। जैसे एक सच्चा आदमी जो काम सामने है उसे पूरी ईमानदारी, प्यार, खुशी और इंसाफ के साथ करो। बाकी सब डिस्ट्रैक्शंस
125:36
Speaker A
से अपने आप को फ्री करो। हां, तुम कर सकते हो। अगर हर काम ऐसे करो जैसे यह तुम्हारी जिंदगी का आखिरी काम हो। भटको मत। इमोशंस को दिमाग पे हावी मत होने दो। दिखावा, सेल्फिशनेस, गुस्सा सब छोड़ दो। देखो
125:56
Speaker A
कितनी कम चीजें चाहिए एक मीनिंगफुल और रिस्पेक्टफुल जिंदगी जीने के लिए। अगर तुम यह कर पाए तो भगवान भी तुमसे और कुछ नहीं मांगेगा। हां, चलते रहो अपने आप को नीचा दिखाते हुए। ए सोल लेकिन जल्दी ही तुम्हारा सेल्फ रिस्पेक्ट
126:17
Speaker A
का मौका चला जाएगा। हर किसी को एक ही जिंदगी मिलती है। तुम्हारी जिंदगी लगभग खत्म हो गई है। और तुम अब तक अपने आप से इज्जत से पेश नहीं आए हो। अपनी खुशी दूसरों की मर्जी पर छोड़ दी। क्या बाहर की चीजें तुम्हारा ध्यान
126:36
Speaker A
भटकाती हैं। तो थोड़ा टाइम निकालो खुद के लिए कुछ वैल्यूुएबल सीखने के लिए। हर तरफ खींचे मत जाओ। लेकिन एक और कंफ्यूजन से बचो। वह लोग जो पूरा जीवन मेहनत करते हैं। लेकिन किसी पर्पस के बिना जिसका हर थॉट और
126:54
Speaker A
एक्शन एक गोल की तरफ ना जाए। वह अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। चाहे वह कितनी भी मेहनत क्यों ना कर रहे हो। दूसरों के मन में क्या चल रहा है उस पर ध्यान ना देना। इससे कभी किसी को
127:09
Speaker A
नुकसान नहीं हुआ। लेकिन अगर तुम अपने ही मन में क्या चल रहा है उनका ध्यान नहीं रखोगे तो कैसे खुश रह सकते हो? कभी इन बातों को भूलना मत। दुनिया का नेचर क्या है? मेरा खुद का नेचर क्या है?
127:25
Speaker A
मैं दुनिया से कैसे जुड़ा हूं? मेरा उसमें कितना हिस्सा है? और यह कि तुम नेचर का एक हिस्सा हो। और तुम्हें कोई नहीं रोक सकता कि तुम हमेशा उनके साथ मिलकर बोलो और काम करो। लोग जब पापों के कंपैरिजन करते हैं तो
127:45
Speaker A
थियोफस्टस कहते हैं कि डिजायर से किए गए पाप गुस्से से किए गए पापों से ज्यादा बुरे होते हैं और यह सही फिलॉसफी है। गुस्से में आदमी दर्द और अंदर के तूफान की वजह से रीजन से मुंह मोड़ लेता है। लेकिन
128:01
Speaker A
जो आदमी डिजायर से चल रहा होता है, प्लेजर के पीछे भाग रहा होता है, वह और ज्यादा अपने आप में डूबा हुआ, कमजोर और कम मर्द लगता है। थियो फ्रिस्टस बिल्कुल सही कहते हैं कि प्लेजर से हुआ पाप, पेन से हुए पाप से
128:18
Speaker A
ज्यादा डांट के लायक है। गुस्से वाला आदमी एक विक्टिम जैसा लगता है जो दर्द से उभर के रिएक्ट करता है। और दूसरा आदमी अपने मर्जी से गलत काम में कूदता है। डिजायर के चलते। तुम अभी तुरंत जिंदगी छोड़ सकते हो।
128:37
Speaker A
यह सोच के ही तुम्हें डिसाइड करना चाहिए कि क्या सोचना है, क्या कहना है, क्या करना है। अगर भगवान हैं तो इंसानों को छोड़ना कोई डर वाली बात नहीं है। क्योंकि भगवान कभी तुम्हें नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। और अगर भगवान है ही नहीं या
128:56
Speaker A
उन्हें हमसे कोई लेना देना नहीं तो फिर ऐसे दुनिया में जीने का क्या मतलब जहां ना भगवान हो ना प्रोविडेंस पर भगवान हैं उन्हें फर्क पड़ता है हम पर क्या गुजरती है और जो कुछ भी हमारी असली भलाई के लिए चाहिए वह सब
129:13
Speaker A
उन्होंने हमारे अंदर ही दिया है। अगर डेथ के बाद कुछ बुरा होता तो भगवान ने उसे बचाने का तरीका भी दिया होता। अगर वह तुम्हारे कैरेक्टर को नुकसान नहीं पहुंचाता तो वह तुम्हारी जिंदगी को कैसे पहुंचा सकता है? नेचर कभी ऐसी गलती नहीं करती। ना तो
129:33
Speaker A
अनजान होकर और ना ही मजबूरी में। वो कभी ऐसा नहीं करेगी कि अच्छे और बुरे लोगों के साथ एक ही तरह की चीजें रैंडमली हो जाए। लेकिन डेथ और लाइफ, सक्सेस और फेलियर, दर्द और सुख, अमीरी और गरीबी यह सब अच्छे
129:51
Speaker A
और बुरे दोनों के साथ होती हैं। और इनमें कुछ भी ना तो नोबल है, ना शेमफुल। इसलिए ना यह अच्छे हैं, ना बुरे। कितनी तेजी से सब कुछ चला जाता है। दुनिया की चीजें और उनकी यादें भी। और जो चीजें हमारे सेंसेस फील करते हैं
130:12
Speaker A
स्पेशली वह जो हमें सुख दिखाती हैं या दर्द से डराती हैं या जिन पर लोग गर्व से चिल्लाते हैं उनका असली नेचर क्या है?
130:22
Speaker A
उन चीजों को समझना कितनी बेकार, गंदी, सड़ी हुई और मर चुकी सी लगती है। यही तो तुम्हारे हमारे दिमाग की असली ताकत है। और उन लोगों को भी समझना जरूरी है जिनके ओपिनियंस और आवाज को हम फेम कह के
130:40
Speaker A
मान लेते हैं। और डेथ क्या है? अगर तुम इसे लॉजिकली ब्रेक डाउन करो। अपने दिमाग में बनाए हुए फॉल्स आइडियाज को हटा दो। तो समझते हो कि डेथ सिर्फ नेचर का एक प्रोसेस है जिससे सिर्फ बच्चे ही डरते हैं। यह सिर्फ नेचर
131:00
Speaker A
का प्रोसेस नहीं बल्कि एक जरूरी प्रोसेस है। और इंसान भगवान को कैसे समझता है?
131:06
Speaker A
अपने किस पार्ट से उसे महसूस करता है? और जब करता है तो उस पार्ट का क्या हाल होता है? यह भी सोचने लायक है। सबसे ज्यादा बेचारे वह लोग लगते हैं जो इधर-उधर भागते रहते हैं। अंदर की चीजें
131:21
Speaker A
खोजने में लगे रहते हैं। दूसरों के मन के पीछे रिसर्च करते हैं और कभी समझते ही नहीं कि तुम्हें सिर्फ अपने अंदर के पावर पर ध्यान देना है और उसे पूरे मन से पूजना है। उसकी पूजा का मतलब है कि उसे डिस्टर्ब
131:37
Speaker A
मत होने दो। ना बेचारा बनाओ ना एमलेस होने दो ना ही ह्यूमन और डिवाइन नेचर से नफरत करने दो जो डिवाइन है उनका रिस्पेक्ट इसलिए क्योंकि वह अच्छा है जो ह्यूमन है उससे प्यार इसलिए क्योंकि वह हम जैसा है
131:56
Speaker A
और कभी-कभी उनके लिए दुख भी क्योंकि उसे पता ही नहीं चलता अच्छा क्या है बुरा क्या और यह अंधापन वैसे ही खतरनाक है जैसे काला और सफेद का फर्क ना पहचानना। चाहे तुम 3000 साल और जी लो या
132:16
Speaker A
उनका 10 गुना। एक बात याद रखना। तुम सिर्फ वही जिंदगी खोने वाले हो जो तुम अब जी रहे हो। और सिर्फ वही जिंदगी जी सकते हो जो तुम खोने वाले हो। लंबी जिंदगी और छोटी जिंदगी दोनों का रिजल्ट एक ही है। जो वक्त अभी है वह सबके
132:35
Speaker A
लिए सेम है और उनका खोना भी सबके लिए सेम ही है। और यह बात बिल्कुल क्लियर होनी चाहिए कि तुम सिर्फ एक छोटी सी पल खो रहे हो। ना तुम पास्ट खो सकते हो ना फ्यूचर। क्योंकि जो तुम्हारे पास है ही नहीं वह
132:51
Speaker A
तुम कैसे खो सकते हो? दो बातें याद रखना। पहली हर चीज हमेशा से वैसे ही चल रही है और बार-बार वैसे ही होती रहेगी। चाहे तुम उन्हें 100 साल में देखो 200 साल में या अनंत काल तक फर्क कोई नहीं पड़ता। दूसरी
133:12
Speaker A
बात जो सबसे लंबा जीता है और जो सबसे जल्दी मरने वाला है। दोनों एक ही चीज खोते हैं प्रेजेंट। क्योंकि सिर्फ वही उनके पास है। जो पास नहीं वह तुम नहीं खो सकते। सब कुछ सिर्फ एक इंप्रेशन है। मोनिमस द
133:32
Speaker A
सनिक ने कहा और इसका जवाब भी ऑब्वियस है। लेकिन अगर इस बात को सही तरीके से लो तो यह काफी यूज़फुल है। इंसान की सोल अपने आप को खराब करती है। पहला सबसे ज्यादा तब जब वह अपने आप को
133:52
Speaker A
दुनिया से अलग समझने लगती है। जैसे एक फोड़ा बन गई हो। किसी भी चीज से नाराज रहना यह नेचर से अलग हो जाना है और नेचर ही तो सब कुछ है। दूसरा जब वह किसी दूसरे इंसान से मुंह
134:05
Speaker A
मोड़ लेती है या उससे चोट पहुंचाने का प्लान बनाती है जैसे गुस्से में भरे हुए लोगों की सोल करती हैं। तीसरा इंसान की सोल अपने आप को खराब तब करती है जब वह सुख या दर्द के आगे हार
134:23
Speaker A
जाती है। चौथा जब वह झूठ का चेहरा पहनती है और कुछ नकली बोलती या करती है। पांचवा जब उनके एक्शंस और थॉट्स का कोई पर्पस ही नहीं होता। वह बस रैंडमली हो रहे होते हैं। हर छोटी चीज भी किसी गोल के लिए होनी
134:41
Speaker A
चाहिए। और एक समझदार बीइंग का गोल क्या है? वो है सबसे पुराने और सबसे सच्चे लॉ और रूल को फॉलो करना। इंसान की जिंदगी इसमें वक्त एक पल भर की है। नेचर हर वक्त बदलने वाली परसेप्शन धुंधली बॉडी का हाल गल रहा है। सोल घूमती
135:06
Speaker A
रहती है। किस्मत कब क्या हो जाए पता नहीं। नाम और शहरत कब तक चले पता नहीं। अगर सब कुछ मिला के देखें तो बॉडी और उनके पार्ट्स एक बहती हुई नदी हैं। सोल एक सपना और धुआ है। जिंदगी एक जंग है और एक सफर है
135:25
Speaker A
घर से दूर और जो परमानेंट फेम है वह तो सिर्फ भूल जाना है। तो फिर क्या चीज है जो हमें गाइड कर सकती है? सिर्फ फिलॉसफी और इसका मतलब है अपने अंदर के पावर को सेफ रखना। उसे किसी भी अटैक से
135:43
Speaker A
बचाना। उसे प्लेजर या पेन के नीचे ना आने देना। कभी भी कुछ ऐसे ना करना जो रैंडम या झूठा हो। और किसी और की मर्जी पर डिपेंडेंट ना होना। ना किसी के करने पे ना करने पे। और जो भी होता है उसे वैसे ही
136:01
Speaker A
एक्सेप्ट करना जैसे तुम खुद आए हो। और सबसे इंपॉर्टेंट डेथ को खुशी के साथ एक्सेप्ट करना। एक ऐसी चीज के रूप में जो सिर्फ उन एलिमेंट्स का तोड़ना है जिससे जीव बनते हैं। अगर उन एलिमेंट्स को एक दूसरे में
136:19
Speaker A
बदलते रहना दर्द नहीं देता तो सबके अलग हो जाने का डर क्यों? यह बिल्कुल नेचुरल है। और जो चीज नेचुरल है वो कभी बुरी नहीं हो सकती। बुक थ्री सिर्फ यही नहीं कि हर दिन हमारी जिंदगी का कुछ हिस्सा खत्म हो रहा है और
136:46
Speaker A
कम बचा है बल्कि यह भी सोचना चाहिए मान लो कि हम लंबी जिंदगी जीते हैं तो क्या हमारा दिमाग तब भी समझने लायक रहेगा? क्या वह डिवाइन और ह्यूमन चीजों को समझने लायक बचा रहेगा? अगर दिमाग भटकने लग गया तो हम तो
137:04
Speaker A
फिर भी सांस लेंगे, खाएंगे, कुछ सोचेंगे, कुछ महसूस करेंगे। लेकिन जो असली काम दिमाग करता है, जैसे अपने आप को पूरा यूज़ लेना, यह समझना कि क्या करना चाहिए। जो देख रहे हैं और सुन रहे हैं, उनका एनालिसिस करना या यह डिसाइड करना कि अब
137:24
Speaker A
रुकना चाहिए या नहीं। यह सब कुछ दिमाग से होता है और अगर वह चला गया तो सब चला जाएगा। इसलिए हमें जल्दी करनी चाहिए। सिर्फ इसलिए नहीं कि हम हर दिन डेथ के पास जा रहे हैं। बल्कि इसलिए भी कि कहीं हमारा समझने का
137:41
Speaker A
ताकत डेथ से पहले ही चली ना जाए। हमें याद रखना चाहिए कि नेचर की जो चीजें एक्सीडेंटली हो जाती हैं, उनमें भी एक अलग ही ब्यूटी होती है। जैसे जब ओवन में रोटी फूलती है और उसकी टोप फट जाती है।
138:01
Speaker A
यह एक साइड इफेक्ट होता है बेकिंग का। लेकिन फिर भी वह देखने में अच्छा लगता है और हमें भूख लग जाती है बिना किसी वजह के। या जब पके हुए अंजीर फटने लगते हैं या जैतून गिरने से पहले जो हल्का सा सड़ जाते
138:20
Speaker A
हैं उसमें भी एक अजीब सी खूबसूरती होती है। गेहूं के दाने जब अपने वेट से झुक जाते हैं। शेर के माथे की सिलवटें, सूअर के मुंह से निकली झाग और भी बहुत कुछ। अगर इन्हें अलग से देखो तो कुछ खास नहीं लगते।
138:36
Speaker A
लेकिन जब नेचर के काम में इन्हें जोड़ते हो तो वह सब और भी रिच लगते हैं और खींचते हैं। जो लोग नेचर को महसूस करते हैं उनकी आंखों को यह सब अच्छा लगता है। चाहे वह जानबूझ के हुआ हो या गलती से। वह जीवित
138:53
Speaker A
जानवरों के दांत भी उतने ही खूबसूरत देखेंगे जितने किसी पेंटिंग या मूर्ति में। वह शांति से बुढ़ापे की ब्यूटी देखेंगे। आदमियों में भी और औरतों में भी, बच्चों की मासूमियत में भी। और ऐसे और भी चीजें उन्हें रोज दिखेंग जो दूसरों को
139:12
Speaker A
दिखाई भी नहीं देती। सिर्फ उन्हें जो नेचर के साथ जीते हैं और उनके काम से प्यार करते हैं। हिपोक्रेटस ने बहुत सी बीमारियों का इलाज किया। फिर खुद बीमार पड़ गए और मर गए। क्लेडियन लोगों ने दूसरों की मौत का
139:30
Speaker A
अंदाजा लगाया। फिर उनकी अपनी मौत भी आ गई। एलेक्जेंडर, पमपे, सीजर जिन्होंने इतने सारे शहरों को मिटा दिया, हजारों लोगों को जंग में मार दिया, वह भी चले गए। हराकलिटस कहते थे कि दुनिया आग में खत्म हो गई।
139:46
Speaker A
लेकिन वह खुद गीलेपन से मर गए। गोबर में लिपटे हुए। डेमोक्रेटस को छोटी-छोटी कीड़े खा गए और सोक्रेटीस को इंसानों ने मार डाला और तुमने शिप में सवारी ली, सफर किया, अब समुंदर पार कर लिया। अब निकलने का वक्त
140:05
Speaker A
है। अगर अगली जिंदगी है तो वहां भी भगवान है। अगर कुछ भी नहीं है तो अब तुम्हें ना दर्द सहना पड़ेगा ना सुख का पीछा करना पड़ेगा। ना ही इस पुरानी झोपड़ी जैसे बॉडी की सेवा करनी पड़ेगी। जो खुद उस दिमाग से
140:21
Speaker A
काफी कमजोर है जो इसे चला रहा है। एक तरफ दिमाग और सोल है। दूसरी तरफ मिट्टी और कचरा। अपना बचा हुआ वक्त दूसरों के बारे में सोचकर बर्बाद मत करो। जब तक वह किसी बड़े भले काम के लिए जरूरी ना हो। वरना
140:41
Speaker A
तुम कुछ भी यूज़फुल नहीं कर पाओगे। तुम बिजी रहोगे सोचने में। यह आदमी क्या कर रहा है? क्यों कर रहा है? क्या बोल रहा है? क्या सोच रहा है? क्या प्लान बना रहा है? और यह सब चीजें तुम्हें तुम्हारे खुद
140:55
Speaker A
के दिमाग से हटा देंगी। अपनी सोच में कुछ चीजें अवॉइड करनी चाहिए जो रैंडम हो, जो बेकार हो और बिल्कुल भी घमंड या दुश्मनी वाली सोच तो बिल्कुल नहीं। अपने थॉट्स को फिल्टर करना सीखो ताकि अगर कोई पूछे क्या सोच रहे हो तो तुम
141:14
Speaker A
तुरंत और सच में बोल सको। मैं यह सोच रहा हूं या वह सोच रहा हूं। और तुम्हारे जवाब से ही दिख जाए कि तुम्हारी सोच सिंपल और समझदारी वाली है। एक ऐसे इंसान की सोच जो ना सेल्फिश है ना प्लेजर के पीछे भागती
141:30
Speaker A
है। ना लड़ाई झगड़े में पड़ती है, ना दूसरों को बुराई करती है, ना जलती है और ना ही वह कोई ऐसी सोच रखती है जिसके लिए उसे शर्मिंदगीगी महसूस हो। ऐसे लोग जो ऐसे जीना स्टार्ट कर दें बिना
141:45
Speaker A
और देर किए। एक तरह के पुजारी होते हैं प्रीस्ट भगवान के एक नौकर जो अपने अंदर से जुड़ते हैं जो खुद को प्लेजर से साफ रखते हैं। पेन से डरते नहीं ना घमंड करते हैं ना छोटी सोच रखते हैं। जो सबसे बड़ी फाइट
142:02
Speaker A
लड़ रहा है कि जो कुछ भी हो उसे कभी हारा ना जाए। उनके अंदर जस्टिस से भरा होता है और जो कुछ भी लाइफ में आता है उसे पूरी तरह एक्सेप्ट करता है। वह दूसरों के बोलने करने सोचने की चिंता नहीं करता ना ही
142:20
Speaker A
सेल्फिश रीजन से। वह सिर्फ वही करता है जो उनका काम है और हमेशा सोचता है कि दुनिया उनके लिए क्या लेकर आई है। वह अपना बेस्ट करता है और भरोसा रखता है कि सब कुछ बेस्ट के लिए हो
142:35
Speaker A
रहा है क्योंकि हम अपनी डेस्टिनी को ले चलते हैं और वह हमें ले चलती है। उसे पता है कि हर समझदार चीज कनेक्टेड है और सब इंसानों की केयर करना इंसानियत का हिस्सा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि
142:51
Speaker A
तुम उनकी हर बात मानो। सिर्फ उनकी सुनो जिनकी लाइफ नेचर के हिसाब से चलती हो। बाकी लोग उनके बारे में यह याद रखो कि वह कैसे लोग हैं। घर में, बाहर, दिन में, रात में और किस टाइप के लोगों के साथ वह टाइम
143:07
Speaker A
बिताते हैं। उनकी तारीफ का उनके लिए कोई मतलब नहीं होता। वह लोग जो खुद अपने स्टैंडर्ड्स तक नहीं पहुंचते। कैसे एक्ट करें कभी किसी प्रेशर में नहीं ना ही अपने फायदे के लिए ना बिना सोच समझे ना कंफ्यूजन में अपने थॉट्स को सजाना
143:30
Speaker A
सवारना नहीं जरूरत से ज्यादा शब्दों का यूज ना करना ना ही ऐसे एकशंस जो बेकार हो जो स्पिरिट तुम्हारे अंदर है वह एक इंसान एक मैच्योर आदमी एक नागरिक एक रोमन एक लीडर की तरह दिखनी चाहिए चाहिए। जैसे एक सोल्जर
143:49
Speaker A
अपनी ड्यूटी पर होता है और शांति से अपनी मौत का इंतजार करता है। ना किसी कसम की जरूरत ना किसी गवाह की। हमेशा चेयरफुल रहो। दूसरों के सपोर्ट की जरूरत नहीं। अपनी खुशी दूसरों से मत मांगो। सीधे खड़े
144:06
Speaker A
रहो ना कि किसी ने खड़ा किया हो। अगर जिंदगी में कभी तुम्हें जस्टिस, ऑनेस्टी, सेल्फ कंट्रोल, करेज से बेहतर कुछ मिलता है या एक ऐसा माइंड जो खुश है इस बात से कि उसने तुम्हें समझदारी से काम करने दिया और जो उन चीजों को एक्सेप्ट
144:27
Speaker A
करता है जो उनके कंट्रोल में नहीं है। अगर इस सबसे बेहतर कुछ मिलता है तो बिना किसी हेजिटेशन के उसे गले लगा लेना। वह चीज बहुत ही स्पेशल होगी और उसे पूरी तरह एंजॉय करो। लेकिन अगर तुम्हें लगता है कि
144:43
Speaker A
तुम्हारे अंदर जो स्पिरिट है जो तुम्हारे डिजायर्स को कंट्रोल में रखती है जो हर इंप्रेशन को समझती है जो फिजिकल डिजायर से फ्री है जिसे सोक्रेटीस कहते थे जो भगवान को समर्पित है और दूसरों की भलाई की सोच
144:59
Speaker A
रखती है अगर तुम्हें लगता है कि इससे बेहतर कुछ नहीं है तो फिर कुछ और को उनके बीच मत आने दो कुछ भी जो तुम्हें डिस्ट्रैक्ट करे तुम्हें रास्ते से हटाए और तुम्हें तुम्हारी असली अच्छाई से दूर ले जाए। कुछ भी क्राउड का क्लपिंग, हाई
145:17
Speaker A
पोजीशन, पैसे या अपने कंफर्ट में डूबना। अगर वह बीच में आए तो समझ लो वह तुम्हारा रास्ता चुरा रहे हैं। शायद वह कुछ टाइम तक ठीक लगे। लेकिन फिर वही हमें कंट्रोल करने लगते हैं और हमें ले जाते हैं जहां वह
145:34
Speaker A
चाहे। इसलिए एक बार डिसीजन लो सीधा और सिंपल और उस पर टिक जाओ। जो बेस्ट है उसी को चुनो। बेस्ट मतलब क्या? जो मुझे फायदा दे। अगर इंसान के रूप में तो फिर पूरा फॉलो करो या सिर्फ एक जानवर की तरह तो फिर
145:51
Speaker A
वह भी ठीक। लेकिन दिखावा मत करो। पर पहले होमवर्क तो पूरा कर लेना। कभी भी किसी चीज को अपने लिए अच्छा मत समझना। अगर उसकी वजह से तुम्हें किसी का भरोसा तोड़ना पड़े या शर्म का एहसास खोना पड़े या तुम्हारे अंदर नफरत, शक,
146:13
Speaker A
दुश्मनी, दिखावा या ऐसी चीजें जाग जाए जो सिर्फ छुप कर ही जाननी चाहिए। अगर तुम अपने दिमाग, अपनी गाइडिंग स्पिरिट और उसकी पावर की इज्जत करना सीख जाओ तो तुम ड्रामा से चिल्लाने, रोने से दूर रहोगे। ना तुम्हें अकेलापन चाहिए होगा
146:32
Speaker A
ना भीड़। सबसे बड़ी बात तुम फियर और डिजायर से आजाद रहोगे और तुम्हारा सोल कितनी देर तक तुम्हारी बॉडी में रहेगा इसका टेंशन भी नहीं रहेगा। जब जाने का समय आएगा तो जाने के लिए रेडी रहोगे। वैसे जैसे कोई इज्जत के
146:50
Speaker A
साथ कोई काम पूरा करता है। और अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ एक बात पर ध्यान दो। तुम्हारा माइंड सही स्टेट में हो। एक समझदार इंसानियत भरा माइंड जैसा होना चाहिए। एक ऐसे दिमाग का सोचना जो सीधा हो गया हो
147:09
Speaker A
और पूरी तरह साफ हो चुका हो। ना कोई अंदर का गंदा मैल हो ना कोई घाव। और जिंदगी ऐसे ना हो जैसे एक एक्टर जो प्ले के बीच में है स्टेज से उतर जाए। बिना उनका अंजाम हुआ हो। ना डर के मारे झुकना ना किसी को नीचा
147:28
Speaker A
दिखाना। ना बहाने ना बचने की कोशिश। तुम्हारे सोच पर तुम्हारा जो कंट्रोल है उसकी इज्जत करो। यही तुम्हारे दिमाग को गलत सोच से बचाता है। ऐसी सोच जो तुम्हारे नेचर से और सभी समझदार जीवों की नेचर से नहीं मिलती। यही
147:48
Speaker A
तुम्हें थॉटफुल बनाती है। लोगों के लिए प्यार जगाती है और भगवान के आगे सर झुकाना सिखाती है। बाकी सब कुछ भूल जाओ। सिर्फ एक चीज याद रखो। हम सब सिर्फ अभी जी रहे हैं। यह छोटे से एक पल में जो हो चुका वह हो चुका। जो
148:13
Speaker A
आने वाला है वह अभी दिखता भी नहीं। जो हम जी रहे हैं वह समय छोटा है। उतना ही छोटा जितनी छोटी जगह है जहां हम जी रहे हैं। और जितना बड़ा भी नाम हो वह भी बस कुछ लोगों
148:27
Speaker A
के जरिए दूसरों तक जाता है। और वह लोग खुद ना अपने को जानते हैं ना उन्हें याद है जो मर चुके हैं। ऊपर वाली बातों के साथ यह भी याद रखो। हमेशा हर चीज को डिफाइन करो जो तुम महसूस
148:46
Speaker A
करते हो उसकी शेप समझो ताकि तुम जान सको कि वह असल में है क्या? उनका एक्चुअल सब्सटेंस बिना मेकअप के पूरे रूप में उनका सच्चा नाम लो। वह चीज क्या है? किस चीज से बनी है? और आखिर में किस में बदल
149:05
Speaker A
जाएगी। कुछ भी तुम्हारे अंदर की ग्रोथ के लिए उससे ज्यादा पावरफुल नहीं होता। हर चीज को लॉजिकली समझना। देखो उस चीज की जरूरत क्या पूरी हो रही है। कैसे दुनिया के सिस्टम में फिट हो रही है और इंसान के लिए क्या वैल्यू है उसकी?
149:23
Speaker A
सोचो यह चीज क्या है जो अब मेरी अटेंशन ले रही है? यह किस चीज से बनी है? कितने टाइम के लिए बनी है? और मुझे इसके सामने कौन सी क्वालिटीज दिखानी चाहिए? शांति, हिम्मत, ईमानदारी, विश्वास, सीधापन या खुद पर
149:40
Speaker A
निर्भर रहना। हर केस में तुम्हें कहना चाहिए यह भगवान की वजह से हुआ या यह डेस्टिनी के वेब और चांस से हुआ या यह किसी इंसान की वजह से हुआ। मेरी जात का ही मेरा ही समाज। लेकिन जिसे यह नहीं पता कि नेचर उससे क्या
149:59
Speaker A
चाहती है। पर मुझे पता है इसलिए मैं उनके साथ इंसाफ और प्यार से पेश आऊंगा। वैसे जैसे नेचर का कानून कहता है और छोटी-मोटी चीजों के केस में भी मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा कि वह जैसे डिर्व करते हैं
150:16
Speaker A
वैसे ही मैं उनका रिस्पांस दूं। अगर तुम अपना काम ईमानदारी से करो। पूरी मेहनत, एनर्जी और पेशेंस के साथ और डिस्ट्रैक्शन से दूर रहो। और अपने अंदर के स्पिरिट को ऐसे रखो जैसे तुम्हें उसे कभी भी वापस देना पड़ सकता है। अगर तुम इस बात
150:38
Speaker A
को बिना डर या उम्मीद के एक्सेप्ट कर सको। और उस काम में खुशी ढूंढ सको जो तुम अभी कर रहे हो जैसे नेचर चाहती है और एक डिवाइन सच्चाई के साथ हर बात हर लफ्ज में तो तुम्हारी लाइफ खुश रहेगी। और कोई भी
150:54
Speaker A
तुमसे यह खुशी छीन नहीं सकता। जैसे डॉक्टर्स अपने टूल्स रेडी रखते हैं इमरजेंसी के लिए वैसे ही अपनी फिलॉसफी भी हमेशा रेडी रखो ताकि तुम हेवन और अर्थ दोनों को समझ सको। जो भी काम करो छोटा हो या बड़ा याद रखो कि
151:14
Speaker A
सब कुछ एक चैन से जुड़ा हुआ है। जमीन का कुछ भी हेवन को इग्नोर करके काम नहीं करता और हेवन का कुछ भी जमीन को इग्नोर करके [संगीत] नहीं। अब बस भटकना बंद करो। तुम फिर से नहीं पढ़ने वाले अपने ब्रीफ कमेंट्स या
151:35
Speaker A
एंशिएंट ग्रीक्स और रोमंस के काम। यह जो नोटबुक्स तुमने बुढ़ापे के लिए संभाल के रखी थी, अब अंत की तरफ भाग जाओ। उम्मीद को छोड़ो और अगर तुम्हें अपनी भलाई चाहिए, तो खुद ही अपने सेवियर बनो। जब तक समय है।
151:56
Speaker A
लोग समझते ही नहीं कि चोरी करना, बीज बोना, खरीदना, आराम करना, काम देखना यह सब कितनी गहरी चीजें हैं। यह आंखों से नहीं एक अलग तरह की नजर से समझना पड़ता है। बॉडी, सोल, माइंड। महसूस करना बॉडी का काम, चाहना सोल का
152:19
Speaker A
काम, सोचना माइंड का काम। महसूस तो घास खाने वाले जानवर भी कर लेते हैं। चाह के पीछे भागना जंगली जानवर भी करते हैं और हवस में डूबे हुए लोग और तानाशाह भी। फैलेरिस से ले ने तक। लेकिन जब तुम अपने माइंड से फैसला लेते हो
152:39
Speaker A
कि क्या सही है। यह तो वह लोग भी कर लेते हैं जो भगवान को नहीं मानते। जो अपने देश से गद्दारी करते हैं। जो छुप के बुरे काम करते हैं। अगर यह सब चीजें आम है तो फिर एक
152:55
Speaker A
अच्छे इंसान की असली पहचान क्या है? वह जो जो कुछ भी किस्मत भेजती है उसे प्यार से एक्सेप्ट करता है। अपने अंदर के स्पिरिट को झूठी सोच से गंदा नहीं होने देता। उसे साफ और सच्चा रखता है। भगवान की
153:11
Speaker A
मर्जी को शांति से मानता है। कुछ भी झूठा नहीं बोलता। कुछ भी गलत नहीं करता। और अगर दूसरे लोग उनके जीने के तरीके को नहीं समझते। उसके सीधापन, नम्रता और खुशी भरी जिंदगी को तो भी वह उनसे नफरत नहीं करता
153:29
Speaker A
ना ही रुकता है। वह अपनी राह पर चलता रहता है। जिंदगी के अंतिम पड़ाव तक जहां वह पवित्रता, शांति एक्सेप्ट करने वाली सोच और पूरी तरह से नेचर के साथ एक होकर पहुंचता है। बुक फोर हमारे अंदर जो शक्ति है जब वह नेचर का
154:01
Speaker A
पालन करती है तो वह हर सिचुएशन को समझ के उनके हिसाब से खुद को ढाल लेती है। उसे किसी खास चीज की जरूरत नहीं होती। वह हर हाल में अपना काम कर लेती है। जो रुकावट आती है, उसी को वह फ्यूल बना लेती
154:19
Speaker A
है। जैसे एक बड़ी आग उस चीज को भी जला देती है जो सिर्फ एक छोटी लैंप की रोशनी बुझा देती। जो कुछ उस आग में डाला जाता है वह सब जल जाता है और आग को और तेज बना देता
154:36
Speaker A
है। कोई भी काम बिना सोच समझ के ना करो और कोई भी काम बिना किसी स्ट्रांग बेस के ना हो। लोग अक्सर भाग जाते हैं सब कुछ छोड़ के गांव, बीच या पहाड़ों की तरफ। और तुम भी सोचते हो काश तुम भी भाग जाते। पर यह
154:59
Speaker A
सोचना ही बेकार है। तुम कभी भी भाग सकते हो अंदर की तरफ जाके। तुम्हारे अपने सोल से ज्यादा शांत जगह कहीं नहीं है। और अगर तुम्हारे पास कुछ सॉलिड चीजें हैं जिनके ऊपर भरोसा कर सको तो एक पल में ही तुम्हें
155:16
Speaker A
वह इनर शांति मिल सकती है। और शांति का मतलब है एक हार्मोनी। इसलिए बार-बार अपने अंदर वापस जाओ। इस तरह से अपने आप को रिफ्रेश करो। लेकिन यह छोटा और सिंपल होना चाहिए। एक छोटी विजिट ही काफी है तुम्हें
155:36
Speaker A
वापस तैयार करने के लिए। जो भी सामने आने वाला है उसे फेस करने के लिए। तुम्हें क्या कंप्लेन करना है लोगों के बुरे बर्ताव के बारे में? तो सोचो कि सब लोग एक दूसरे के लिए बने हैं कि सही काम करने के लिए कभी-कभी पेशेंस
155:56
Speaker A
चाहिए कि कोई भी जानबूझ के गलत नहीं करता और कितने लोग झगड़ चुके हैं, नफरत कर चुके हैं, मरे हैं और जमीन के नीचे चले गए हैं और चुप हो जाओ। या तुम दुनिया के दिए हुए हालत से परेशान
156:14
Speaker A
हो तो दो ऑप्शन सोचो। या तो सब कुछ एक डिवाइन सिस्टम के तहत हो रहा है या सब कुछ एटम से हो रहा है और दोनों तरह से सोचने के लिए स्ट्रांग रीज़ंस हैं। या तुम्हारे बॉडी से प्रॉब्लम है। तो
156:30
Speaker A
याद रखो जब माइंड अपने आप को नेचर के हिसाब से अलग कर लेता है तो फिर उनका रफ या स्मूथ लाइफ से कोई लेना देना नहीं रहता। और याद करो पेन और प्लेजर के बारे में जो तुम्हें सिखाया गया
156:45
Speaker A
था या तुम्हें अपनी रेपुटेशन की चिंता हो रही है तो सोचो कितनी जल्दी सब कुछ भूल जाता है। कितना बड़ा समय का गड्ढा है जो सब कुछ निगल जाता है। उन ताली बजाने वाले हाथों का क्या मतलब है? जो तुम्हारी तारीफ कर रहे हैं,
157:06
Speaker A
वह लोग कैसे हैं? और कहां तक तुम्हारी फेम जाएगी? पूरी दुनिया सिर्फ एक बिंदु है स्पेस में और उनका भी आधा हिस्सा रहने लायक नहीं है। कितने लोग तुम्हें याद रखेंगे और कौन होंगे वह लोग? इसलिए याद रखो अपना असली सुकून कहां है? अपने अंदर
157:25
Speaker A
के वह रास्ते और सबसे इंपॉर्टेंट बिना स्ट्रेस, बिना टेंशन के सीधा रहो। हर चीज को देखो एक आदमी की तरह, एक इंसान की तरह, एक नागरिक की तरह। एक इंसान जो मरने वाला है उसकी तरह। और जब भी किसी
157:44
Speaker A
बात पर लौटना हो, इन दो बातों पर लौटना। पहला कि चीजें तुम्हारे सोल को छू नहीं सकती। वो बाहर खड़ी हैं। डिस्टरबेंस सिर्फ तुम्हारे अंदर से आती है तुम्हारी सोच से। और दूसरा जो कुछ तुम देख रहे हो वह जल्दी
158:00
Speaker A
बदल जाएगा और खत्म हो जाएगा। सोचो अब तक तुमने कितनी चीजें बदलते देखी हैं। दुनिया सिर्फ बदलाव है और जिंदगी सिर्फ परसेप्शन है। अगर सोचने की एबिलिटी इस सब में कॉमन है तो रीजन भी सबके बीच कॉमन है। वह जो
158:22
Speaker A
हमें बताता है कि क्या करना है और क्या नहीं। अगर ऐसा है तो वह रीजन जो हमें सही और गलत बताता है वह भी शेयरर्ड है। अगर वह शेयरर्ड है तो हम सब एक ही कानून के अंडर हैं। तो इसका मतलब यह भी है कि हम सब एक
158:39
Speaker A
ही शहर के नागरिक हैं। और वह शहर कौन सा है? यह दुनिया। क्योंकि और क्या हो सकता है जो पूरी इंसानियत को जोड़ता हो और उस शहर से ही आती है हमारी सोच, हमारी रीजन, हमारा लॉ। कहां से और आ सकती
158:59
Speaker A
है। जैसे मेरी बॉडी उसकी मिट्टी धरती से। पानी किसी और एलिमेंट से, हवा अपने सोर्स से और हीट अपने सोर्स से आई है। क्योंकि कुछ भी बिना सोर्स के नहीं आता और वापस भी उसी में जाता है। तो सोच भी किसी सोर्स से ही आई
159:17
Speaker A
होगी। मौत भी कुछ वैसे ही है जैसे जन्म। एक प्राकृतिक राज जिसमें एलिमेंट्स अलग होते हैं और फिर से जुड़ जाते हैं। यह ना तो कोई शर्म की बात है ना ही रीजन या हमारे नेचर के खिलाफ। वैसा इंसान तो वैसे ही करेगा जैसे
159:39
Speaker A
तुम एक अंजीर के पेड़ से रस निकालने पर गुस्सा नहीं होते। फैसला लो कि तुम्हें चोट नहीं लगी तो तुम्हें चोट महसूस ही नहीं होगी। अगर तुम महसूस ही नहीं करते कि चोट लगी है तो असलियत में कुछ हुआ ही
160:00
Speaker A
नहीं। किसी भी चीज से जिंदगी तभी बर्बाद होती है जब तुम्हारा कैरेक्टर बर्बाद होता है। वरना वह तुम्हें ना बाहर से छू सकती है ना अंदर से। जो हुआ वह बेस्ट था। इसलिए नेचर के पास कोई और ऑप्शन ही नहीं
160:21
Speaker A
था। हर घटना सही होती है। ध्यान से देखो समझ आ जाएगा। सिर्फ ओवरऑल सही नहीं बल्कि एग्जैक्ट सही। जैसे किसी ने उसे तराजू में तोल के तय किया हो। ऐसे ही ध्यान से देखते रहो और अपने एकशंस में उसे जीवित करो।
160:40
Speaker A
अच्छाई एक अच्छे इंसान की पहचान हर काम में इसे पकड़ के [संगीत] रखो। वही देखो जो असल में है ना कि वो जो तुम्हारा दुश्मन चाहता है तुम देखो। दो तरह की तैयारी हमेशा जरूरी होती है। पहला सिर्फ वही करना जो रीजन और लॉ तुमसे
161:08
Speaker A
कहता है। वह भी दूसरों के भले के लिए और दूसरा अपना व्यू पॉइंट तभी बदलना जब कोई तुम्हें सच में सही बता सके। लेकिन सिर्फ तब जब तुम्हें यकीन हो कि वह सच है या किसी के भले के लिए है। कभी भी
161:26
Speaker A
सिर्फ इसलिए नहीं क्योंकि वह अच्छा लग रहा है या पॉपुलर है। क्या तुम्हारे पास दिमाग है? हां। तो फिर उसे क्यों नहीं करते? क्या तुम यही नहीं चाहते कि वो अपना काम करें?
161:47
Speaker A
तुम हमेशा किसी बड़े सिस्टम का एक हिस्सा रहे हो। अब तुम उसी में वापस चले जाओगे या कह लो वापस मिल जाओगे उस लोगस से, उस रीति से, उस धर्म से जहां से सब कुछ शुरू हुआ था बदल के।
162:07
Speaker A
एक ही अल्तर पर बहुत सारी लोबन की गोलियां जल रही हैं। एक अभी गिर जाती है एक बाद में। लेकिन फर्क क्या पड़ता है? आज लोग तुम्हें जानवर या बंदर समझ रहे हैं। लेकिन एक हफ्ते में अगर तुम अपनी सोच
162:26
Speaker A
वापस पा लो और लोगस का सम्मान करो तो वह तुम्हें भगवान बोलेंगे। ऐसे मत जियो जैसे तुम्हारे पास अनंत साल बचे हैं। मौत हमेशा तुम्हारे सिर पर छाई हुई है। जब तक जिंदा हो और करने लायक हो। अच्छा बनो।
162:52
Speaker A
वह शांति जो तब मिलती है जब तुम यह सोचना बंद कर दो कि लोग क्या कह रहे हैं, क्या सोच रहे हैं, क्या कर रहे हैं। सिर्फ यह सोचो क्या मैं सही कर रहा हूं? क्या यह ठीक है? और उनकी अंधकार भरी सोच से ना
163:08
Speaker A
भटकना। सीधा भागो अनंत तक बिना हिले। जो लोग मौत के बाद मिलने वाली फेम के लिए एक्साइटेड रहते हैं, वह भूल जाते हैं कि जो लोग उन्हें याद रखेंगे, वह भी जल्द ही मर जाएंगे और उनके बाद के भी। जब तक यादों
163:31
Speaker A
का दीपक बुझ नहीं जाता और मान लो कि वह लोग अमर हैं और तुम्हारी याद भी तो भी तुम्हारा क्या?
163:41
Speaker A
और सिर्फ बाद में नहीं तुम्हारे जिंदा होने के दौरान भी तारीफ का क्या काम है सिवाय थोड़े कंफर्ट देने के। तुम नेचर के दिए हुए गिफ्ट्स को इग्नोर करके सिर्फ किसी और के फ्यूचर में बोलने के लिए जी रहे हो।
164:02
Speaker A
कोई भी खूबसूरत चीज अपने आप में ही खूबसूरत होती है। उसे किसी प्रज़ की जरूरत नहीं होती। वो प्रज़ वो तारीफ से ना बेहतर होती है ना बेकार। यह बात उन चीजों पर भी लागू होती है जो हमें नॉर्मल जिंदगी में
164:18
Speaker A
खूबसूरत लगती हैं। जैसे कोई ऑब्जेक्ट या पेंटिंग। क्या किसी असली खूबसूरती को बढ़ावा देने के लिए किसी और चीज की जरूरत होती है?
164:29
Speaker A
जैसे जस्टिस, ट्रुथ, काइंडनेस, ह्यूमिलिटी। क्या प्रज़ उन्हें बेटर बनाती है? या उनकी बेइज्जती से वह कम हो जाते हैं। क्या एक एमरल्ड तभी बेकार हो जाता है जब कोई उसे एडमायर ना करें? गोल्ड, आइवरी, पर्पल लायर नाइफ फूल
164:49
Speaker A
पौधे नहीं। [संगीत] अगर हमारी सोल्स बची रहती हैं तो हवा सबको कैसे जगह देती है? शुरू से लेकर अब तक सबको जैसे जमीन सब बॉडीज को जगा देती है जो कब से दबाई जा चुकी हैं। वह कुछ समय तक
165:10
Speaker A
रहती हैं फिर बदल जाती हैं। बिखर जाती हैं और नए लोगों के लिए जगह बन जाती हैं। वैसे ही सोल्स भी हवा में कुछ वक्त रहती हैं। फिर बदल जाती हैं। फायर में घुल जाती हैं या लोगस में वापस मिल जाती हैं। जहां से
165:27
Speaker A
सब कुछ आता है। फिर नए आने वालों के लिए जगह बन जाती हैं। एक संभव जवाब। लेकिन हम सिर्फ दबाई गई बॉडीज के बारे में ही क्यों सोें? रोज हम और जानवर कितनी बॉडीज को खा जाते हैं। कितने लोग इस तरह
165:44
Speaker A
दूसरों के शरीरों में समा जाते हैं। फिर भी सबके लिए जगह होती है। वह सब फ्लश, ब्लड, हवा और आग में बदल जाते हैं। इस बात का सच कैसे पता चले? एनालिसिस से किस चीज से बना है और क्यों
166:05
Speaker A
बना? इधर-उधर भटकने की जगह हमेशा इंसाफ से काम करो और चीजों को जैसा है वैसा ही देखो। दुनिया से तुम्हारा हार्मोनी मेरा हार्मोनी है। जो टाइम तूने चुना वही परफेक्ट टाइम है। ना देर से ना जल्दी। नेचर से तेरे सीजन जो लाते हैं, वह मेरे
166:30
Speaker A
लिए पका हुआ फल है। सब कुछ तुझसे ही पैदा हुआ, तुझ में ही जिंदा है और तुझ में ही वापस जाता है। एक कवि कहता है सेक्रोप्स की प्यारी नगरी क्या तुम जियोस्सकी नहीं कह सकते?
166:49
Speaker A
[संगीत] अगर शांति चाहिए तो कम करो या फिर और सही कहना हो तो सिर्फ वही करो जो जरूरी हो। जो एक सोशल बीइंग के रूप में लोगस चाहता है और सही तरीके से करो। इससे दो फायदे मिलते हैं। कम करना और बेहतर करना। क्योंकि जो
167:12
Speaker A
कुछ हम बोलते और करते हैं उसमें से अधिकांश बेकार होता है। अगर तुम उसे हटा दो तो तुम्हारे पास ज्यादा समय होगा और ज्यादा शांति। हर वक्त अपने आप से पूछो क्या यह जरूरी है? और सिर्फ एक्शंस नहीं
167:28
Speaker A
सोचने की आदत भी साफ करो। अननेसेसरी एजम्पशनंस हटाओ। क्योंकि वही अननेसेसरी एक्शंस पैदा करते हैं। और तब तुम देख पाओगे एक अच्छे इंसान की जिंदगी कैसी होती है। जो नेचर जो भी देता है उसमें खुश है। और खुद भी सिर्फ
167:49
Speaker A
इंसान और दया में जीता है। वो तुमने देख लिया। अब यह देखो परेशान मत हो। खुद को हल्का करो। किसी ने गलत किया। उसने खुद के साथ किया। कुछ तुम्हारे साथ हुआ। अच्छा वह तुम्हारे लिए ही था। नेचर ने तुम्हारे लिए बनाया था। पहले से
168:10
Speaker A
पैटर्न में बुना हुआ। जिंदगी छोटी है। यही कहने लायक है। जो प्रेजेंट में है उसे सोच समझ के लो। इंसाफ से लो और मॉडरेशन बिना रोक-टोक के। या तो दुनिया एक सीक्वेंस में बनी है या एक बिखरा हुआ जोड़ है। फिर भी एक ऑर्डर
168:33
Speaker A
है। क्या तुम्हारे अंदर ऑर्डर हो सकता है और बाकी सब में नहीं। इतने अलग इतने बिखरे इतने जुड़े हुए चीजों में कैरेक्टर अंधेरा औरतों जैसे जिद्दी भेड़िया भेड़ बच्चा बेवकूफ धोखेबाज नौटंकी बेचने वाला तानाशाह एलियन वो जो नहीं जानता दुनिया
169:02
Speaker A
में क्या है या वह कैसे चलती है फ्यूजिटिव वो जो अपने फर्ज से भागता है ब्लाइंड जिसका दिमाग खुला नहीं है। गरीब जिसे दूसरों की जरूरत नहीं और उनके पास अपनी जरूरत की चीजें नहीं है। रेबेल जो प्रकृति के लोगस से अलग हो गया
169:22
Speaker A
हो क्योंकि उसे उनका काम पसंद नहीं आया। उसने तुम्हें बनाया अब उसी ने यह भी बनाया। स्किस्मेटिक जो अपने आप को दूसरों से तोड़ लेता है। जबकि सबका सोल लोगस से जुड़ा है। वह एक होना चाहिए। एक फिलॉसफर बिना कपड़ों के और एक
169:46
Speaker A
बिना किताबों के खाने को कुछ नहीं है। वह कहता है आधा नंगा खड़ा होके पर मैं लोगस पर जीता हूं। और मेरे पास पढ़ने को कुछ नहीं तो मैं भी लोगस से जीता हूं। जिस डिसिप्लिन को तुम जानते हो उसे प्यार
170:04
Speaker A
करो और उसे अपना सहारा बनाओ। सब कुछ खुशी-खुशी भगवान के हवाले करो और फिर जिंदगी जियो ना किसी के मास्टर बनके ना किसी के स्लेव। वेसियन के टाइम की बात ले लो। लोग वही सब कर रहे थे। शादी, बच्चे पालना,
170:23
Speaker A
बीमार पड़ना, मरना, जंग लड़ना, पार्टी करना, धंधा करना, खेती करना चापलूसी करना, घमंड दिखाना, शक करना, साजिश रचना, दुआ करना कि दूसरे मर जाए। अपने जिंदगी से शिकायत करना, प्यार में पड़ना, पैसा जोड़ना, बड़ा पद और ताकत चाहना और वह
170:46
Speaker A
जिंदगी कहीं नहीं मिलती। अब या ट्रेजन के टाइम का सोच लो। वही सब और वह भी गया। बाकी पुराने टाइम के रिकॉर्ड देख लो। कितने लोग आए सब कुछ दे दिया और फिर मर गए मिट्टी में मिल गए लेकिन सबसे इंपॉर्टेंट
171:04
Speaker A
बात तुम जिस चीज पर ध्यान दोगे उसकी वैल्यू भी उतनी होनी चाहिए छोटी-छोटी बातों पर ज्यादा वक्त देना बेवकूफी है जो शब्द पहले आम थे आज अजीब लगते हैं और जो लोग मशहूर थे उनके नाम भी कैमिलियोस केसो वलेस
171:30
Speaker A
दंतुतस स्किपियो और कैटो अगस्तस हेड्रियन और एंटोनिनस और बहुत कुछ सब कुछ इतनी जल्दी धुंधला जाता है कहानी बन जाता है और फिर भुला दिया जाता है और यह तो वह लोग हैं जो चमके थे बाकी लोग मरने के एक मिनट
171:51
Speaker A
बाद ही नाम गुम काम खत्म अमर नाम खाली खोखला तो फिर किस चीज के लिए जीना चाहिए? सिर्फ इसके लिए सही समझ बिना मतलब के स्वार्थ के काम सच बोलना और हर चीज को ऐसे लेना जैसे वह जरूरी थी। जैसे वह वही सोर्स से आई है
172:11
Speaker A
जहां से सब कुछ आता है। खुद को खुशी से क्लोथों के हवाले कर दो और उसे जो बनाना है तुमसे बनाने दो। हर चीज जो बदल रही है, जो जान रहा है और जो जाने जा रहा है, सब कुछ सिर्फ एक पल का
172:36
Speaker A
मेहमान है। हमेशा याद रखो सब कुछ बदलने से ही पैदा होता है। और नेचर को सबसे ज्यादा बदलने में ही मजा आता है। जो चीज अभी है वह किसी नई चीज का बीज है। तुम सोच रहे हो कि सिर्फ पेड़ या बच्चे पैदा करने वाले
172:55
Speaker A
बीज होते हैं और गहरा सोचो। मरने के बिल्कुल करीब हो। फिर भी बोझ से दबे हो। अंदर ही अंदर हिले जा रहे हो। अभी भी समझते हो कि बाहर की चीजें तुम्हें चोट पहुंचा सकती हैं। अभी भी लोगों से रडली बात करते हो। और अभी भी यह
173:19
Speaker A
नहीं मानते कि विडम का मतलब ही जस्टिस है। उनके दिमाग में झांको जो समझदार हैं, क्या करते हैं, क्या नहीं करते। किसी और के दिमाग में क्या चल रहा है, यह तुम्हें चोट नहीं पहुंचा सकता। ना ही दुनिया में हो रहे बदलाव तो चोट कहां
173:42
Speaker A
होती है? तुम्हारे दिमाग के अंदर जहां तुम सोच लेते हो कि तुम्हें चोट पहुंची वह सोचना छोड़ो सब ठीक हो जाएगा। तुम्हारे अंदर का हिस्सा जो फैसला करता है अगर वह चुप हो जाए चाहे बॉडी को छुरी लग गई हो, जल गया हो, गंदी हो गई हो
174:02
Speaker A
या कैंसर ने खा लिया हो, फिर भी तुम ठीक हो। दूसरे शब्दों में जो सबके साथ होता है अच्छे और बुरे दोनों के साथ वह ना अच्छा है ना बुरा और जिंदगी में जो होता है वह ना अननेचुरल है ना
174:18
Speaker A
अननेचुरल बस होता है दुनिया एक जिंदा चीज है। एक ही प्रकृति, एक ही सोल यह याद रखो। सब कुछ एक ही एक्सपीरियंस में मिलता जाता है। एक ही गति में चलता है और सब एक दूसरे को पैदा करने में मदद करता है। सब कुछ बुनता है,
174:42
Speaker A
जुड़ता है एक साथ। एक छोटी सी रूह जो एक लाश को उठाए हुए है। एपिक्टेटस ने यह कहा था। बदलना कोई बुरी बात नहीं है और बदलने के बाद निकला हुआ कोई बड़ी चीज नहीं है। वक्त एक नदी है। घटनाओं का तेज बहता हुआ
175:06
Speaker A
पानी जो एक बार नजर आता है और तुरंत बह जाता है। फिर अगला आता है और वह भी चला जाता है। जो कुछ भी होता है वह उतना ही सिंपल और पहचान वाला है। जैसे बसंत में गुलाब, गर्मी में फल, बीमारी, मौत, गाली गलौज
175:30
Speaker A
साजिश सब कुछ जिसमें बेवकूफ लोग या तो खुश होते हैं या गुस्सा। जो चीज पहले थी उसे बाद वाली जुड़ी होती है। कोई रैंडम चीजों की लिस्ट नहीं जिसमें सीक्वेंस जबरदस्ती चिपका दिया गया हो। बल्कि एक नेचुरल कनेक्शन होता
175:50
Speaker A
है। जैसे दुनिया में चीजें एक सीक्वेंस में बनती है, वैसे ही हर घटना भी एक तरीके से बनी होती है। रैंडम नहीं बल्कि एक अजीब सी हार्मोनी में जुड़ी हुई। हराटस को याद करो। जब मिट्टी खत्म होती है तो वह पानी बनती है। पानी हवा
176:14
Speaker A
बनता है। हवा आग बनती है और फिर सब वापस वहीं पर लौट जाता है। जो भूल गए हैं कि रास्ता कहां ले जा रहा है। वह हर उस चीज से लड़ रहे हैं जो उनके चारों तरफ है। जो
176:28
Speaker A
सब कुछ चलाता है उस लोगस से। और जो हर दिन सामने आता है, वह उनके लिए अजनबी बन गया है। हमारे वर्ड्स और काम सपनों जैसे नहीं होने चाहिए क्योंकि सपनों में भी हम बोलते और करते हैं और ना ही बच्चों की तरह जो बस
176:49
Speaker A
मांबाप की कॉपी करते हैं। जो सिर्फ वही बोलते और करते हैं जो सिखाया गया हो। मानो कोई भगवान आकर कह दे कि तुम कल मरोगे या परसों। अगर तुम पूरे डरपोक नहीं हो तो तुम यह नहीं बोलोगे कि कल या परसों
177:10
Speaker A
में क्या फर्क है? क्योंकि असली में फर्क ही क्या है। अब सोचो सालों बाद मरना या कल मरना उसमें भी उतना ही कम फर्क है। मत भूलो कि कितने डॉक्टर मर गए जो कभी दूसरों के डेथ बेड पर बैठ के घूरते थे।
177:31
Speaker A
कितने ज्योतिषी जो बड़े घमंड से लोगों की मौत फ्यूचर में देखते थे और खुद चले गए। कितने फिलॉसफर जो मौत और अमर होने पर डिबेट करते रहे और फिर खुद मर गए। कितने योद्धा जिन्होंने हजारों को मारा और खुद
177:46
Speaker A
चले गए। कितने जालिम जिन्होंने जान लेने और बचाने का पावर गलत यूज़ किया। जैसे खुद कभी नहीं मरेंगे और वह भी चले गए। और कितने शहर हेली की पमपई हरकुलेनियम सब खत्म और तुम्हारे जाने पहचाने लोग एक ने
178:08
Speaker A
दूसरे को दफनाया फिर खुद दफनाया गया फिर उसे भी कोई और दफनाया गया एक ही छोटी से वक्त की लहर में सब कुछ तो समझ लो इंसान जिंदगी छोटी है और बस एक छोटी सी बात कि कल तक सिर्फ एक बूंद था और
178:26
Speaker A
कल ही रख दिया जाएगा या जला दिया जाएगा। जिंदगी को नेचर के हिसाब से जियो और जब जाने का टाइम आए तो बिना शिकायत के जाओ। जैसे एक जैतून का फल जो पक कर गिरता है अपने पेड़ का शुक्रिया करते हुए।
178:49
Speaker A
पत्थर की तरह बन जाओ जिसके ऊपर समुंदर की लहरें बार-बार टकराती हैं। मगर वह हिला तक नहीं और समुंदर अपने आप शांत हो जाता है। यह बहुत बुरा हुआ। नहीं, यह हुआ और फिर भी मैं बचा रहा। ना प्रेजेंट ने तोड़
179:11
Speaker A
दिया, ना फ्यूचर के डर बना। यह किसी के साथ भी हो सकता था, लेकिन हर कोई इसे बचा नहीं रह सकता। तो फिर क्यों तुम इस घटना को बदनसीबी समझते हो? जबकि तुम्हारा इसे बचा रहना तो अच्छी किस्मत है। क्या कोई भी चीज
179:31
Speaker A
बदनसीबी हो सकती है जो इंसानी फितरत के खिलाफ नहीं जाती। अगर नेचर के खिलाफ नहीं है तो वह बुरे कैसी हो सकती है? और तुम जानते हो नेचर का विल क्या है? क्या जो हुआ उसने तुम्हें रोका?
179:47
Speaker A
इंसाफ, दया, सेल्फ कंट्रोल, बुद्धि, ईमानदारी, विनम्रता, साफ दिल और इंसानियत दिखाने से। अगर नहीं तो याद रखो। जो पेन दे रहा है, वह बदनसीबी नहीं। उस पेन को झेल के जीत जाना यह सच में गुड लक है। डेथ का डर भगाने का एक सिंपल ट्रिक है। उन
180:13
Speaker A
लोगों की लिस्ट सोचो जो जिंदगी से चिपक गए थे। उन्होंने ज्यादा जीकर क्या पा लिया?
180:21
Speaker A
सभी आखिर में एक ही जगह गए मिट्टी के नीचे। उन्होंने अपने दोस्तों को दफनाया। फिर खुद दफनाए गए। हमारी लाइफ इतनी छोटी है और इस जैसी दुनिया में जीना कोई बड़ी बात नहीं। पीछे का समय एक खाली गुफा जैसे
180:38
Speaker A
है। आने वाला वक्त अनंत है। तीन दिन की जिंदगी हो या तीन नस्लों की फर्क क्या है? सीधा रास्ता चुनो। वह जो नेचर ने तुम्हारे लिए बनाया है। बातें करो और काम करो। वैसे जैसे एक हेल्दी इंसान करता है।
180:57
Speaker A
अगर ऐसा किया तो ना दर्द रहेगा ना स्ट्रेस ना ही एक्टिंग करने की जरूरत। बुक फाइव सुबह जब उठने का मन ना करे तो खुद से बोलो मुझे काम पर जाना है एक इंसान के रूप में। मुझे शिकायत किस बात की है? अगर मैं
181:24
Speaker A
वही करने जा रहा हूं जिसके लिए मैं पैदा हुआ हूं। क्या मैं इसलिए बना हूं कि कंबल में लपेट कर बस गर्मी महसूस करता रहूं। लेकिन यहां रहना ज्यादा अच्छा लगता है। तो क्या तुम सिर्फ अच्छा महसूस करने के लिए
181:40
Speaker A
पैदा हुए थे? कुछ करने और महसूस करने के बजाय तुमने पौधे, परिंदे, चींटियां, मकड़ी, मधुमक्खियां नहीं देखी जो अपना काम करती रहती हैं। दुनिया को अपने तरीके से संभालती हैं। और तुम होके इंसान होकर भी अपना फर्ज नहीं निभा रहे।
182:04
Speaker A
तुम अपने नेचर के कहने पर काम करने से भाग क्यों रहे हो? लेकिन नींद भी तो जरूरी है। हां, जरूरी है। लेकिन नेचर ने उनका भी लिमिट रखा है। जैसे खानेपीने की रखी है। तुम उस लिमिट से ज्यादा सो चुके हो। लेकिन काम में अभी भी
182:23
Speaker A
पीछे हो। तुम खुद से प्यार नहीं करते। अगर करते तो अपने नेचर से भी प्यार करते और उनके कहने पर चलना चाहते। जो लोग अपने काम से प्यार करते हैं वह उसमें इतना खो जाते हैं कि खाना पीना भी भूल जाते हैं। क्या
182:41
Speaker A
तुम्हें इनग्रेविंग करने वाले, डांस करने वाले, पैसे जोड़ने वाले या स्टेटस के पीछे भागने वाले से कम अपना नेचर समझ में आता है? वह लोग तो सब कुछ छोड़ सकते हैं। सिर्फ अपना काम करने के लिए। क्या दूसरों
182:56
Speaker A
की मदद करना तुम्हारे लिए कम इंपॉर्टेंट है? क्या यह तुम्हारे लिए कोशिश के लायक भी नहीं? सब कुछ साइड में रख दो। साफ करो हर परेशानी और दिक्कत को और एकदम शांति तक पहुंच जाओ। बचपन का खेल लगता
183:19
Speaker A
है। अगर कोई काम या बात सही है तो वह तुम्हारे लिए भी सही है। दूसरे लोग क्या बोलेंगे या सोचेंगे उससे मत घबराओ। अगर सही है तो बस करो या बोलो। वो लोग अपने इमोशंस के पीछे चलते हैं। तुम अपने रास्ते पर चलो। अपने नेचर
183:36
Speaker A
का पालन करो। नेचर के साथ चलो। वह दोनों एक ही रास्ता है। मैं नेचर के बीच चलता हूं जब तक कि वह वक्त ना आ जाए जब मैं सो जाऊं। अपनी आखिरी सांस उसी को दे दूं जो हर दिन की सांस
183:53
Speaker A
देता था। उसी सोर्स को जहां से मेरे पिता का बीज, मेरी मां का खून, मेरी दाई का दूध, मेरा हर दिन का खाना, पानी आया था। जो मुझे चलने की ताकत देता था और जिसे मैंने कैसे-कैसे काम में
184:10
Speaker A
लिया। किसी ने कभी तुम पर यह इल्जाम नहीं लगाया कि तुम बहुत तेज हो। ठीक है? लेकिन तुम्हारे पास और भी क्वालिटीज हैं जो तुम में है। उन वर्चूस की प्रैक्टिस करो जो तुम दिखा सकते हो। ईमानदारी, गरिमा, हिम्मत,
184:27
Speaker A
सादगी बर्दाश्त संयम पेशेंस सच्चाई संतुलन, गंभीरता, बड़े मन का होना। क्या तुम्हें दिखाई नहीं देता तुम्हारे पास कितना कुछ है। नहीं हो सकते। बोलने के अलावा भी। और तुम फिर भी कम पर ही खुश हो जाते हो। या कोई जन्मजात कमी है जो तुम्हें शिकायत
184:54
Speaker A
करने वाला लालची चापलूसी करने वाला बनाती है। अपने शरीर की बुराई करता है। लोगों की तारीफ के पीछे भागता है। अंदर से घबराए रहता है। नहीं तुम कब का इस सबसे छुटकारा पा लेते अगर चाहते तो फिर तुम सिर्फ थोड़े
185:16
Speaker A
धीमे होते। ज्यादा स्मार्ट नहीं हो। और तुम्हें इस धीमेपन पर भी काम करना चाहिए। इग्नोर मत करो और उनका घमंड भी मत करो। कुछ लोग जब किसी पर एहसान करते हैं तो बार-बार उसका जिक्र करने का मौका ढूंढते हैं। कुछ लोग ऐसा नहीं करते लेकिन
185:40
Speaker A
अंदर ही अंदर याद रखते हैं जैसे उधार हो। लेकिन कुछ लोग तो ऐसे होते हैं जैसे बेल से अंगूर लगते हैं। बिना किसी बदले की उम्मीद के। रेस के एंड पर घोड़ा, शिकार के बाद कुत्ता, मधुमक्खी अपना शहद जमा करके और
185:58
Speaker A
इंसान जब दूसरों की मदद करता है। वह इस बात को हाईलाइट नहीं करता। बस आगे बढ़ जाता है। जैसे बेल फिर से मौसम आने पर फल देने के लिए तैयार हो जाती है। हमें भी वैसा ही होना चाहिए। लगभग बिना सोचे समझे
186:14
Speaker A
के काम करते हुए हां लेकिन थोड़ा सा कॉन्शियस रहना जरूरी है क्योंकि इंसान सोशल बीइंग है तो वह सोचता है कि उनका काम दूसरे भी देखें। सही है लेकिन तुम मेरी बात गलत समझ रहे हो। तुम उन लोगों जैसे हो जाओ जो अच्छे
186:33
Speaker A
लगने वाले लॉजिक से कंफ्यूज हो जाते हैं। लेकिन अगर तुम मेरी बात को ध्यान से समझो तो तुम्हें कभी यह चिंता नहीं होगी कि तुम अपने सोशल फर्ज को भूल रहे हो। एथेनियंस की प्रार्थना जोस बारिश बरसा दे बारिश बरसा
186:54
Speaker A
दे एथेंस के जमीन और खेत पे या तो बिल्कुल प्रार्थना मत करो या फिर बस ऐसी सिंपल प्रार्थना करो। जैसे लोग कहते हैं डॉक्टर ने यह दवाई दी। जैसे घूमना, ठंडे पानी से नहाना, नंगे पैर चलना। वैसे ही सोचो नेचर ने बीमारी
187:17
Speaker A
प्रिस्राइब की या अंधापन या किसी अंग का चले जाना जो भी हो यहां प्रिस्राइब का मतलब है ऐसे हुक्म दिए गए जो उसकी रिकवरी में मदद करें। यह सब कुछ हमारे लिए तय किए गए होते हैं। यह हमारे रास्ते में लिखे
187:33
Speaker A
होते हैं। और जब हम कहते हैं कि कोई चीज हो गई तो हम वैसे ही बोल रहे होते हैं जैसे मिस्त्री कहते हैं कि ब्रिक्स ने अपनी जगह ले ली। वॉल में या पिरामिड में सब कुछ एक परफेक्ट पैटर्न में फिट होता
187:52
Speaker A
है। एक ही हार्मोनी होती है। जैसे दुनिया में सब बॉडीज मिलके एक बॉडी बनाती हैं। वैसे ही सब फेट मिलके एक पर्पस बनाती हैं। जो लोग बिल्कुल पढ़े लिखे नहीं हैं। वह भी कहते हैं यह उसकी वजह से हुआ। हां, उस वजह
188:09
Speaker A
से या फिर प्रिस्राइब किया गया था। और अगर प्रिस्राइब हुआ था तो एक्सेप्ट करो। वैसे ही जैसे डॉक्टर की दवा को एक्सेप्ट करते हो। शायद वह अच्छी ना लगे लेकिन हम उसे लेते हैं क्योंकि हम ठीक होना चाहते हैं। वैसे ही नेचर का जो प्लान
188:30
Speaker A
है उसे भी उसी नजर से देखो। जैसे अपनी सेहत को देखते हो और जो हो रहा है उसे एक्सेप्ट करो। चाहे वह मुश्किल हो एक्सेप्ट करो। क्योंकि उनका रिजल्ट दुनिया की सेहत है और खुद जस की भलाई। जो कुछ वह करते हैं वह दुनिया के
188:50
Speaker A
लिए ही होता है। कोई भी नेचर ऐसा नहीं करती जो अपने दायरे के खिलाफ हो। तो दो रीजन है चीजें एक्सेप्ट करने के। एक यह तुम्हारे साथ हो रहा है। तुम्हारे लिए बनाया गया है। दूसरा यह पूरी दुनिया के
189:06
Speaker A
चलने के लिए जरूरी है। अगर तुम कंप्लेन करते हो तो तुम उस पूरे डिजाइन को तोड़ रहे हो। इस बात से थक मत जाओ कि हर दिन तुमसे वाइज और मोरल काम नहीं हो रहे। गलती हो जाए तो उठ जाओ। इंसान जैसे बिहेव करना भी
189:26
Speaker A
एक रीजन है खुश होने का। चाहे परफेक्ट ना हो। फिलॉसफी को टीचर मत समझो। उस स्पंज और अंडे के सफेद हिस्से की तरह समझो जो आंखों की जलन को कम करता है। एक सॉफ्ट लोशन जैसे। दिखावा मत करो कि तुम लोगस को फॉलोअ
189:46
Speaker A
हो। बस उसमें चैन महसूस करो। याद रखो। फिलॉसफी वही चाहती है जो तुम्हारा नेचर चाहता है। तुम किसी और चीज के पीछे भाग रहे थे। कुछ अननेचुरल के लेकिन और क्या हो सकता है जो इससे बेहतर हो? यही तो प्लेजर
190:04
Speaker A
का ट्रैप है। है ना? क्या मैग्नेनिमिटी यानी बड़े दिल वाला होना बेहतर नहीं है? या फ्रीडम या ऑनेस्टी प्रूडेंस पीटी और सबसे ज्यादा कुछ सोचने का पावर लॉजिक समझ उनकी क्लेरिटी सोचो। उनका शांत बिहेव चीजें इतनी कंफ्यूजन से भरी हुई है कि
190:34
Speaker A
अच्छे-अच्छे फिलॉसफर्स कंफ्यूज हो जाते हैं। स्टोइक्स भी कभी-कभी उलझ जाते हैं। हम जो ओपिनियन बनाते हैं वह भी बदल सकती हैं। वैसे ही जैसे हम खुद बदलते हैं। ध्यान से देखो सब कुछ कितना टेंपरेरी है। कितना बेकार वो चीजें जिसे कोई भी रख
190:55
Speaker A
सकता है। एक बिगड़ा हुआ आदमी एक वैश्या एक चोर और फिर देखो लोग कैसे बिहेव करते हैं। जो सबसे अच्छे हैं उनके साथ भी रहना मुश्किल है। खुद को झेलना तो और भी मुश्किल है। इतने अंधेर राज में, इतने गंदे पानी
191:13
Speaker A
जैसे हालत में इस मटेरियल वर्ल्ड वक्त मूवमेंट के बीच पता नहीं किस चीज को वैल्यू दूं। किस चीज के लिए काम करूं। लेकिन हां, हमें खुद को संभालना चाहिए और एंड का इंतजार करना चाहिए। बिना जल्दबाजी के और दो चीजों में आसरा लेना चाहिए। पहला
191:35
Speaker A
मेरे साथ कुछ भी हो वह अननेचुरल नहीं है। दूसरा मैं कुछ भी ऐसा नहीं करने दूंगा जो भगवान और मेरी आत्मा को पसंद नहीं। कोई मुझे मजबूर नहीं कर सकता। मैं अपनी आत्मा के साथ क्या कर रहा हूं? खुद से पूछो। तुम्हारे सो कॉल्ड
191:58
Speaker A
माइंड में क्या है? अभी तुम्हारी आत्मा का नेचर क्या है? एक बच्चे जैसी, किशोर जैसी, एक औरत जैसी, एक जालिम राजा जैसी, शिकार करने वाले की या शिकार बनने वाले की। अच्छी चीजें लोग क्या समझते हैं? इसको समझने का एक और तरीका है। सोचो अगर तुम
192:23
Speaker A
कुछ चीजों को अच्छाई क्या असली स्केल मान लो जैसे समझदारी, सेल्फ कंट्रोल, इंसाफ और हिम्मत। अगर तुम्हारे लिए अच्छी चीजें सिर्फ यह होती तो तुम कभी नहीं समझ पाते उस लाइन का मतलब जिसमें बोला जाता है इतनी ज्यादा
192:40
Speaker A
अच्छी चीजें हो गई कि वह तुम्हारे लिए बेकार सी लगेंगी। लेकिन अगर तुमने दुनिया का टिपिकल मतलब अपना लिया होता जैसे पैसा, शोष, नाव, फेम तो तुम आसानी से समझ जाते कि राइटर क्या कह रहा है और क्यों वह लाइन फनी लगती है।
193:01
Speaker A
इसका मतलब लोग अंदर ही अंदर यह फर्क मानते हैं। तभी तो जब गुड्स का मतलब वर्चूस होता है तो वह अजीब लगता है। और जब मतलब पैसा वगैरह होता है तो वह फनी लगता है, सही लगता है। अब थोड़ा और आगे जाओ।
193:19
Speaker A
सोचो क्या हमें वैसे गुड्स को सही में वैल्यू देनी चाहिए जो लाइन को समझने के लिए दिमाग में आती हैं। जैसे कि इतनी ज्यादा चीजें हो गई कि बाथरूम तक जगह नहीं बची। मैं दो चीजों से बना हूं। एक मेरी
193:40
Speaker A
बॉडी, एक वह जो मुझे जिंदा रखता है और दोनों कभी खत्म नहीं होंगे जैसे कभी शुरू नहीं हुए थे। मेरा हर हिस्सा फिर से दुनिया का किसी और हिस्सा बन जाएगा। और वह फिर किसी और चीज में बदलेगा। यह प्रोसेस
193:57
Speaker A
हमेशा चलता रहेगा। मैं भी एक ऐसे ही बदलाव से बना हूं। मेरे मां-बाप भी और उनके मां-बाप भी। और ऐसे ही पीछे जाते कभी खत्म नहीं होगा। यह बात तब भी सही है अगर दुनिया बार-बार एक ही साइकिल से गुजरती हो।
194:19
Speaker A
लोगस यानी रीजन और उनके काम दोनों अपने लिए काफी हैं। वह अपने आप से शुरू होते हैं और खुद ही अपने गोल तक पहुंच जाते हैं। इसीलिए हम कहते हैं इन एकशंस को डायरेक्टेड क्योंकि उनका रास्ता सीधा होता
194:37
Speaker A
है। इंसान के लिए वही चीजें मायने रखती हैं जो उसे इंसान बनाती हैं। बाकी सब चीजें हमसे मांगी नहीं जा सकती। वह इंसानी नेचर का हिस्सा नहीं है और ना ही उनके बिना हम अधूरे होते हैं। इसका मतलब वह हमारा गोल नहीं हो सकती। वह अच्छी
194:59
Speaker A
चीजें नहीं है जो हमें बेहतर बनाएं। अगर वह चीजें वाकई हमारे लिए जरूरी होती तो उन्हें इग्नोर करना गलत होता। लेकिन हम उन लोगों को एडमायर करते हैं जो उन चीजों से ऊपर उठ जाते हैं। अगर वह चीजें अच्छी होती तो उनसे दूर रहना कैसे
195:19
Speaker A
अच्छा होता? लेकिन असली में जितना हम उन चीजों को छोड़ते हैं या खुद से छुट्टी जाते हैं उतना ही हम बेहतर बनते हैं। तुम जो सोच रहे हो वही तुम्हारे माइंड का लेवल डिसाइड करता है। तुम्हारी सोल तुम्हारे थॉट्स का कलर
195:45
Speaker A
ले लेती है। अपनी सोच को ऐसे कलर्स दो। पहला जहां भी जिंदगी गुजारी जा सकती है, वहां अच्छी जिंदगी भी गुजारी जा सकती है। लोग कोर्ट में भी रहते हैं तो वहां भी अच्छी जिंदगी हो सकती है। दूसरा हर चीज उस तरफ खींचती है जहां
196:05
Speaker A
उसका पर्पस है। उनका गोल वही होता है जो उनके लिए अच्छा है। उनका गुड। रैशन बीइंग का गुड क्या है? अनसेल्फिशनेस। हम इसी के लिए पैदा हुए हैं। यह कोई नई बात नहीं है। जो चीजें लोअर लेवल पर हैं,
196:23
Speaker A
वह हायर चीजों के लिए होती हैं। और हायर चीजें एक दूसरे के लिए। जिनमें कॉन्शियसनेस है वह उनसे ऊपर हैं। जिनमें नहीं है और जिनमें लोगस है वह सबसे ऊपर हैं। जो इंपॉसिबल है उसे चाहना ही पागलपन है और बुरी आदत वाले लोग इंपॉसिबल चीजें
196:48
Speaker A
ही चाहते हैं। किसी भी इंसान के साथ ऐसा कुछ नहीं होता जो वह बर्दाश्त ना कर सके। जो चीज तुम्हारे साथ हो रही है वह औरों के साथ भी हो चुकी है और उन्होंने टोलरेट किया है या तो बिना रियलाइज किए या फिर बस दिखाने के
197:09
Speaker A
लिए कि देख मेरी हिम्मत। तो क्या ज्ञान, विडम, इग्नोरेंस और दिखावा से कमजोर है। चीजें सोल पर कभी काबू नहीं पाती। उनका उस तक कोई पहुंच नहीं होता। वह उसे हिला नहीं सकती, चला नहीं सकती। सोल सिर्फ अपने आप से चलती है। वह
197:38
Speaker A
जो चीजें उसके सामने आती हैं। उनका मतलब वह खुद डिसाइड करता है जैसे उसे सही लगे। एक तरह से लोग ही हमारा असली काम है। हमें उनका भला करना है और उन्हें झेलना भी है। लेकिन जब लोग हमें हमारे काम से रोकते हैं
197:58
Speaker A
तो वह हमारे लिए वैसे ही हो जाते हैं जैसे धूप हवा जानवर। वह हमारे एकशंस को रोक सकते हैं। लेकिन हमारी सोच को नहीं। हमारी नियत और माइंडसेट कभी नहीं रुकता। क्योंकि दिमाग हर हालत में एडजस्ट कर सकता है। जो रुकावट
198:16
Speaker A
होती है वही एक्शन का रास्ता बन जाती है। जो रास्ते में आता है वही रास्ता बन जाता है। उस चीज का सम्मान करो जो दुनिया में सबसे बड़ा है। जो सब कुछ चला रहा है और जिसके लिए सब कुछ काम में लगा है। और अपने
198:40
Speaker A
अंदर भी उसी चीज का सम्मान करो। वह हिस्सा जो उससे मिलता जुलता है। तुम्हारे अंदर जो भी है वह भी उनके लिए काम कर रहा है। तुम्हारी जिंदगी भी उसी के रूल से चल रही है। अगर किसी चीज से समाज को नुकसान नहीं
199:01
Speaker A
हो रहा तो किसी एक इंसान को भी नुकसान नहीं हो रहा। जब लगता है कि किसी ने तुम्हें हर्ट किया तो यह रूल लगाओ। अगर सोसाइटी को नुकसान नहीं हुआ तो मुझे भी नहीं हुआ। और अगर हुआ भी तो गुस्सा सशन
199:16
Speaker A
नहीं है। उस इंसान को समझाओ। बताओ उसने गलत किया है। हमेशा याद रखो कैसे सब कुछ कितनी जल्दी गुजर जाता है। जो अब है जो आने वाला है। जिंदगी एक नदी की तरह बह रही है। हर चीज बदल रही है। कारण हजार
199:36
Speaker A
हैं। कुछ भी परमानेंट नहीं है। जो भी है वह भी ठीक नहीं टिकता। पास्ट और फ्यूचर का समुंदर हमारे सामने है। इतना गहरा कि देख भी नहीं सकते। तो कोई बेवकूफ ही होगा जो अपने ईगो या दुख में अटके
199:54
Speaker A
रहे। जिसे लगता है कि तकलीफ वाली चीजें हमेशा चलेंगी। याद रख मैटर कितना छोटा हिस्सा मिला है तुझे। टाइम कितना कम और चंचल सी जिंदगी मिली है। फेट कितना छोटा रोल है तेरा इस कहानी में। दूसरे लोग मुझे हर्ट करते हैं तो वो
200:23
Speaker A
उनका प्रॉब्लम है। उनका कैरेक्टर और उनके एक्शंस मेरे नहीं है। जो मेरे साथ हो रहा है, वह नेचर का हिस्सा है। लेकिन मैं क्या करता हूं? यह सिर्फ मेरा फैसला है। दिमाग सोल का राजा है। उसे बॉडी की हलचल से हिला देना नहीं
200:46
Speaker A
चाहिए। चाहे वह हल्की हो या तेज वो उन फीलिंग्स को बाहर रखना चाहिए और उन्हें उनकी जगह पर रहने देना चाहिए। अगर वह फीलिंग्स तुम्हारे थॉट्स तक पहुंच जाए तो डरना नहीं चाहिए। फीलिंग नेचुरल है। लेकिन दिमाग को यह जजमेंट नहीं
201:05
Speaker A
करना चाहिए कि यह अच्छा है या बुरा। भगवान के साथ जीना इसका मतलब है यह दिखाना कि तुम्हारे सोल जो मिल रहा है उसे एक्सेप्ट करती है और जो स्पिरिट चाहिए वह काम करती है। वही स्पिरिट भगवान ने
201:24
Speaker A
तुम्हें दी है। वही तुम्हारा माइंड है। तुम्हारा लोगस है। लोगों की स्मेल या बैड ब्रेथ से इरिटेट होने का क्या फायदा? अरे भाई ऐसे माउथ से ऐसे अंडर आर्म से तो स्मेल आएगी ही लेकिन उनके पास दिमाग है ना समझ क्यों नहीं पाते
201:47
Speaker A
तो तुम्हारे पास भी तो दिमाग है तो यूज करो अपने लॉजिक से उनका लॉजिक जगाओ उन्हें दिखाना समझाना अगर वह सुनेंगे तो प्रॉब्लम सॉल्व हो जाएगी गुस्से के बिना ना तो कोई नाटक करने वाला राजा बनो ना ना ही कोई बिकने वाली
202:10
Speaker A
चीज। तुम यहां भी वैसे ही जी सकते हो जैसे तुम वहां जीने की उम्मीद रखते हो। और अगर लोग तुम्हें जीने नहीं देना चाहते तो तुम लाइफ छोड़ सकते हो और कुछ नहीं खोवेगा। अगर धुआं से खांसी हो रही है तो
202:27
Speaker A
बाहर जा सकते हो। इसमें मुश्किल क्या है? जब तक वह पॉइंट नहीं आता तब तक तुम आजाद हो। कोई तुम्हें वह करने से नहीं रोक सकता जो तुम्हें करना चाहिए और तुम्हें वही करना है जो एक रशनल इंसान को करना चाहिए
202:43
Speaker A
यानी मिलके जीना। दुनिया का जो इंटेलिजेंस है वह सेल्फिश नहीं है। उसने नीचे वाली चीजें ऊपर वालों के लिए बनाई और ऊपर वालों को एक दूसरे से जोड़ दिया। देखो कैसे वह हर चीज को उनका हक देता है। कैसे सब कुछ कनेक्ट
203:03
Speaker A
करता है और कैसे बेहतर चीजें एक लाइन में सेट करता है। तुमने कैसे बिहेव किया है भगवान से, मां-बाप से, भाई-बहन से, पत्नी से, बच्चों से, टीचर्स से, नर्स से, दोस्तों से, रिश्तेदारों से, नौकरों से। क्या तुमने कभी किसी के साथ कुछ गलत, कुछ
203:30
Speaker A
बेेजज्जती वाली बात या काम किया है? सोचो तुमने कितना कुछ झेला है। कितनी मुश्किलें पार की हैं। तुम्हारी लाइफ की कहानी अब लगभग पूरी हो चुकी है। जो काम मिला था वह पूरा हुआ। कितनी अच्छी चीजें देखी तुमने। कितना दुख और सुख
203:50
Speaker A
सह लिया। कितने अवार्ड्स तुमने ठुकरा दिए। कितने रड लोगों को साथ भी अच्छा बिहेव किया और क्यों बे पढ़े लिखे और अनाड़ी सोल्स के एक ट्रेंड और समझदारी सोल को परेशान करती हैं और वह कौन सी है वो जो जानती हैं सब कुछ का स्टार्टिंग
204:12
Speaker A
पॉइंट और एंडिंग पॉइंट जो समझती हैं वह लोगस जो सब कुछ में चलता है और हर चीज को अपनी जगह देता है पूरे टाइम के दायरे [संगीत] में जल्दी ही तुम या तो राख बन जाओगे या हड्डी और ज्यादा से ज्यादा एक नाम वो भी
204:33
Speaker A
सिर्फ एक आवाज एक गूंज जो चीजें हम लाइफ में चाहते हैं वह खाली है। बेमजा हैं बेकार सी हैं। कुत्ते एक दूसरे पर भौंक रहे हैं। बच्चे झगड़ा कर रहे हैं। एक पल हंसी अगले ही पल रो रहे
204:50
Speaker A
हैं। ट्रस्ट, शर्म, न्याय, सच सब मिट चुका है। जमीन से सिर्फ ऊपर बचा है। तो तुम अभी तक यहां क्यों हो?
205:01
Speaker A
जो चीजें हम देखते हैं वह बदलती रहती हैं। हमारे सेंसेस कमजोर और धोखेबाज हैं। सोल बस खून का एक मिक्स है। और इस दुनिया में जो फेम है वह बेकार है। तो इंतजार करो शांति से या तो सब कुछ खत्म होगा या तुम
205:20
Speaker A
किसी और रूप में बदल जाओगे। और तब तक तब तक भगवान का सम्मान करो। लोगों के साथ वैसे बिहेव करो जैसे उनका हक है। दूसरों के लिए सॉफ्ट रहो और अपने लिए स्ट्रिक्ट। याद रखो तुम्हारा असली कब्जा सिर्फ तुम्हारे बॉडी पे है और कुछ नहीं।
205:40
Speaker A
बाकी किसी चीज पर तुम्हारा कंट्रोल नहीं है। तुम एक शांत जिंदगी जी सकते हो। अगर तुम ग्रो कर सको। सोच सको और काम सिस्टमेटिकली कर सको। दो क्वालिटीज भगवान और इंसान और हर समझदार चीज में कॉमन है। पहला किसी और को अपने
206:04
Speaker A
रास्ते का रुकावट मत बनने दो। और दूसरा अच्छाई को सिर्फ सही सोच और सही काम में ही ढूंढो और अपनी इच्छाओं को वहीं तक सीमित रखो। अगर यह गलती मेरी वजह से नहीं है ना ही इसका रिजल्ट मेरी वजह से है और समाज को
206:26
Speaker A
कोई नुकसान नहीं हो रहा तो मुझे क्यों फर्क पड़ना चाहिए समाज के लिए डेंजर कहां है जो तुम्हारे दिमाग में ख्याल घूम रहे हैं उनसे दमने की जरूरत नहीं बस जो कर सकते हो वह करो और अगर तुम्हें छोटी मोटी
206:44
Speaker A
चीजें झेलनी पड़ती है तो उसे हार जाना मत समझना। बुरी आदत है। जैसे एक बूढ़े आदमी ने जाते-जाते एक अनाथ का खिलौना मांग लिया। जानते हुए भी कि वह सिर्फ एक खिलौना ही है। बस वैसे ही। स्टेज पर चढ़ गए हो तो क्या भूल गए हो
207:07
Speaker A
असली चीज क्या थी? पता है लेकिन उनके लिए इंपॉर्टेंट था। तो तुम्हें भी बेवकूफ बनना पड़ेगा। पहले मेरी किस्मत अच्छी थी। फिर किसी पॉइंट पर किस्मत ने साथ छोड़ दिया। लेकिन असली किस्मत वही होती है जो तुम खुद
207:26
Speaker A
के लिए बनाते हो। अच्छी किस्मत का मतलब है अच्छा कैरेक्टर, अच्छी सोच और अच्छे एक्शंस। बुक सिक्स नेचर नरम है कहने में आती है और जो लोगस उसको चलाते हैं उनके पास बुरा करने की कोई वजह नहीं होती। वह ना बुरा जानते हैं ना
207:55
Speaker A
करते हैं ना किसी को नुकसान पहुंचाते हैं। सब कुछ उसी के कहने से शुरू होता है और वही खत्म करता है। बस यह जरूरी है कि तुम सही काम करो। बाकी सब मैटर नहीं करता। ठंड हो या गर्मी
208:13
Speaker A
थके हुए हो या फ्रेश लोग तुमसे नफरत करते हो या इज्जत देते हो मर रहे हो या किसी काम में बिजी हो क्योंकि मरना भी लाइफ का एक काम ही है। वहां भी जो करना है वह करो। अपने अंदर देखो किसी चीज की असली
208:33
Speaker A
वैल्यू या नेचर को मिस मत होने दो। थोड़े ही टाइम बाद सब कुछ बदल जाएगा। या तो सब एक बनकर ऊपर धुआ की तरह उठ जाएगा या टुकड़ों में टूट के बिखर जाएगा। लोगस को पता होता है उसकी जगह क्या है?
208:51
Speaker A
क्या करना है और कैसे करना है। सबसे अच्छा बदला क्या है? उस जैसे मत बनाओ। एक निष्कपट काम से दूसरे तक जाओ भगवान को याद करके उसी में सुकून है। उसी में खुशी है। दिमाग वही है जो खुद से उठता है और
209:18
Speaker A
खुद को चलाता है। वह अपने तजुर्बे से, अपने हिसाब से खुद को बनाता है। हर चीज प्रकृति से होती है। ना तो उनके बाहर से ना अंदर से ना अलग से मिलनाजुलना मिक्स होना बिखरना या एकता ऑर्डर और
209:41
Speaker A
डिजाइन अगर मिलनाजुलना मिक्स होना बिखरना है तो क्यों मैं कंफ्यूजन में जीना चाहूंगा हर हाल में सब कुछ मिट्टी बनेगा ही तो किस बात का टेंशन और अगर एकता ऑर्डर डिजाइन है तो फिर श्रद्धा रह शांति लाइए और और उस पावर पर
210:00
Speaker A
विश्वास रखो जो सब चला रही है। जब भी जिंदगी के हालत हिलाएं तुरंत वापस अपने आप में लौट आओ। अपना रिदमम छोड़ने मत दो। जितना बार वापस जाओगे उतना ज्यादा समझोगे कि असली हार्मोनी क्या है। अगर तुम्हारे पास एक सौतेली मां होती
210:26
Speaker A
और एक असली मां तो इज्जत दोनों को देते लेकिन तुम वापस जाते अपनी मां के पास ही। कोर्ट और फिलॉसफी भी वैसे ही है। कोर्ट को झेल लो लेकिन फिलॉसफी को अपना घर बनाओ। वही है जो तुम्हें और कोर्ट को झेलने लायक
210:43
Speaker A
बनाता है। जैसे रोस्टेड मीट को देखकर या किसी डिश को और अचानक तुम्हें याद आए यह एक मरा हुआ मछली है या मुर्गी या सूअर या कोई अच्छी वाइन बस अंगूर का रस है या जो पर्पल कपड़े हैं वह बस भीड़ के खून के रंगीन ऊन के
211:05
Speaker A
कपड़े हैं और सेक्स सिर्फ एक छोटी सी हलचल कुछ रगड़ कुछ वाइट लिक्विड ऐसी नजर चाहिए जो चीजों को सीधा देख ले। उनकी असली सच्चाई तक पहुंच जाए। हमेशा ऐसा ही करना है। जब भी कोई चीज तुम्हारा भरोसा
211:27
Speaker A
छूने की कोशिश करे उसे तोड़ दो। जो चश्मा चढ़ा है उस पे वह हटा दो। घमंड सबसे बड़ा धोखा है। जब तुम सोचते हो कि तुम कुछ इंपॉर्टेंट कर रहे हो, तभी वह तुम्हें अपने जाल में ले लेता है। कंपेयर
211:49
Speaker A
करो क्रेट्स और जेनोक्रेट्स को। जो चीजें आम लोग पसंद करते हैं, वह या तो फिजिक्स से जुड़ी होती हैं जैसे पत्थर, लकड़ी या नेचर से जैसे अंजीर, बेल और जैतून। थोड़े अच्छे लोग उन चीजों को पसंद करते हैं जो जान रखती हैं। जैसे भेड़, गाय और
212:14
Speaker A
थोड़े और डीप लोग उस माइंड को एडमायर करते हैं जो कोई कला जानता है या स्किलफुल है। या बस इसलिए क्योंकि उनके पास कई नौकर हैं। लेकिन जो सच में समझदार हैं, वह उस कॉमन माइंड को मानते हैं जो हम सब में है।
212:29
Speaker A
इंसानों में, नागरिकों में। उनका फोकस होता है अपने खुद के माइंड पर कि वह सेल्फिश ना हो और लॉजिक से चलता रहे और दूसरों के साथ मिलकर सही रास्ते पर चले। कुछ चीजें अभी बन रही हैं। कुछ जा
212:49
Speaker A
रही हैं। कुछ जो अभी हैं वह जा चुकी हैं। बदलाव और गति हर वक्त दुनिया को नए से बना रहे हैं। जैसे वक्त का फ्लो एटरर्निटी को नए से लिख रहा हो। हम एक नदी में हैं। जो चीजें हमारे आसपास
213:05
Speaker A
हैं उनकी क्या वैल्यू है? जब कोई भी चीज हमारे कदम जमाने लायक नहीं जैसे एक चिड़िया एक पल दिखी दूसरे पल गायब और जिंदगी भी बस खून का घोल एक सांस अंदर लेना जिसे हमने जन्म के वक्त लिया था। कल
213:25
Speaker A
या परसों ही अब उसी को हर वक्त बाहर निकाल रहे हैं। [संगीत] अपने अंदर क्या चीज है जो हमें सबसे ज्यादा वैल्यू देनी चाहिए। सिर्फ पसीना छोड़ना यह तो पौधे भी करते हैं या सांस लेना। यह तो जानवर और
213:46
Speaker A
जंगली प्राणी भी करते हैं। या दिमाग में बस सोच का आना या अपने इंप्ससेस से पपेट की तरह हिलते रहना या भीड़ में चलना या खाना खा के बाद में बाथरूम जाना तो फिर क्या वैल्यूुएबल है? क्या दूसरे लोग ताली बजाएं? नहीं वह
214:08
Speaker A
भी बस आवाज है। पब्लिक की तारीफ भी वही है। तो दूसरों को प्रज़ को साइड करो। फिर क्या बचा जिसे वैल्यू देनी चाहिए। मुझे लगता है यह कि हम वही करें या ना करें जिसके लिए हम बने हैं। यही हर काम का गोल
214:28
Speaker A
होता है। नर्सरी में जो पौधे लगते हैं, घोड़ों का ट्रेनर, कुत्तों का ब्रीडर सब इसी चीज का पीछा करते हैं। पढ़ाई शिक्षा वह भी इसीलिए होती है। तो बस उसी को वैल्यू दो। अगर तुम उसी पर टिक जाते हो तो तुम्हें किसी और चीज का लालच
214:47
Speaker A
नहीं रहेगा। और अगर तुम बहुत सारी और चीजों को वैल्यू देना बंद नहीं कर पाते तो तुम कभी फ्री नहीं बन सकते। नाजुक, डिपेंडेंट और डिस्टर्ब होने वाले रहोगे। हमेशा किसी और से जलन डर रहेगा कि कोई चीज
215:06
Speaker A
छीन ना ले। जिनके पास वह चीजें हैं उनके खिलाफ चालाकी करोगे। ऐसे लोग हमेशा उलझे हुए रहते हैं और अपने गुस्से का निशाना भगवान को बना लेते हैं। लेकिन अगर तुम अपने दिमाग का सम्मान करते हो, उसे वैल्यू देते हो तो
215:25
Speaker A
तुम अपने आप में खुश रहोगे। समाज में अच्छे से सेट रहोगे और भगवान के साथ भी हार्मोनी में रहोगे। जो कुछ मिला है उसे मान लोगे। तत्वों की मूवमेंट ऊपर नीचे हर तरफ होती है। लेकिन वर्षों की मूवमेंट अलग
215:49
Speaker A
होती है। गहरी वह एक सीधी लाइन में चलती है। धीरे-धीरे और हमेशा आगे बढ़ती है। लोग कैसे बिहेव करते हैं? वह अपने आसपास के लोगों को वैल्यू नहीं देते। जिनके साथ वह जीते हैं, उनकी तारीफ नहीं करते। लेकिन फ्यूचर के लोग जो कभी उनसे मिलेंगे
216:10
Speaker A
भी नहीं, उनके लिए फेमस होना चाहते हैं। यह तो ऐसा ही है जैसे अपने ग्रेट ग्रैंडफादर को इंप्रेस करने के लिए परेशान होना। सिर्फ इसलिए मत सोचो कि यह मुश्किल है तो इंपॉसिबल है। अगर वह काम इंसानी तौर पर हो
216:30
Speaker A
सकता है तो तुम भी कर सकते हो। रेसलिंग रिंग में हमारा ओपोनेंट हमें नाखून से छील दे या सर से मार दे, चोट लग जाए तो हम उसको गुस्सा नहीं करते। ना उसे वायलेंट बोलते हैं। बस ध्यान रखते हैं।
216:46
Speaker A
नफरत से नहीं, शक से भी नहीं। बस एक थोड़ा डिस्टेंस रखते हैं। बाकी जिंदगी में भी ऐसा ही करना चाहिए। जो लोग टकराते हैं उन्हें माफ करो। बस दूरी बना लो बिना नफरत बिना शक के। अगर कोई मुझे प्रूफ कर दे कि मैं गलत
217:07
Speaker A
हूं तो मैं खुशी से बदल जाऊंगा। मुझे सच चाहिए और सच कभी किसी का नुकसान नहीं करता। जो हमें हर्ट करता है वह है अपने झूठ पर टिक जाना और अंधेरे में रहना। मैं वह करता हूं जो मेरा काम है।
217:24
Speaker A
बाकी चीजें मुझे डिस्टर्ब नहीं करती। वह या तो बेजान है या उनमें लॉजिक नहीं है या वह बस इधर-उधर भटक रही हैं। रास्ते से भटक चुकी हैं। जब तुम जानवरों से डील करो या चीजों या हालात से तो खुले दिल से और सीधे तरीके
217:44
Speaker A
से करो। तुम रैशन हो वह नहीं है। लेकिन जब तुम दूसरे इंसानों से बात करो तो इंसान बनकर बात करो। वह भी तुम्हारे जैसे ही रीजन रखते हैं। और भगवान को याद करो चाहे कुछ भी हो। कितने दिन और यह करोगे इसका
218:02
Speaker A
टेंशन मत लो। एक शाम भी काफी है। एलेक्जेंडर द ग्रेट और उनका खच्चर चलाने वाला दोनों मर गए और दोनों के साथ एक ही बात हुई। दोनों दुनिया की लाइफ फोर्स में मिल गए या फिर एटम्स में टूट कर
218:19
Speaker A
बिखर गए। सोचो तुम्हारे अंदर हर सेकंड कितना कुछ हो रहा है तुम्हारी सोल में, तुम्हारी बॉडी में। तो फिर इस बात पर हैरानी क्यों कि दुनिया के इस एक साथ सबको जोड़ने वाले सिस्टम में और भी ज्यादा हो रहा होगा एक
218:42
Speaker A
साथ। अगर कोई तुमसे पूछे कि तुम अपना नाम कैसे लिखते हो? तो क्या तुम डांट के कहोगे और हर लेटर गुस्से में चिल्ला के बोलोगे अगर वह गुस्सा करे तो क्या तुम भी गुस्सा हो जाओगे या तुम बस हर लेटर शांति
218:58
Speaker A
से बता दोगे याद रखो तुम्हारे काम भी छोटी-छोटी पार्ट्स में डिवाइड होते हैं। उन पर ध्यान दो। एक-एक करके पूरा करो। बिना घबराए, बिना गुस्सा के गुस्से में जवाब दिए। कितना कठोर है यह कि किसी को मना करना कि
219:19
Speaker A
वह उस चीज की चाह ना करें जो उसे लगता है कि उनके लिए अच्छी है। और तुम वही करते हो जब किसी के गलत काम पर गुस्सा हो जाते हो। वह उस चीज की तरफ खींचते हैं जो उन्हें
219:32
Speaker A
सही लगती है। लेकिन वह उनके लिए सही नहीं है। तो उन्हें यह समझाओ कि उनके लिए सही नहीं है। सबूत दो गुस्सा होने की जगह पर। मौत मतलब सेंसेस का बंद हो जाना, इमोशंस का कंट्रोल खत्म, दिमाग का रुक जाना और
219:51
Speaker A
बॉडी की गुलामी से छुटकारा। शर्म की बात है जब बॉडी अभी भी चल रही हो और सोल पहले ही हार मान ले। उस राजसी बीमारी से बचना जो एक बार लग जाए तो कभी छूटती नहीं। हो सकता है वह हो
220:11
Speaker A
जाए पर तुम वैसे ही बने रहो जैसे फिलॉसफी ने तुम्हें बनाना चाहा है। सीधे सिंपल ईमानदार भगवान को मानने वाले सीरियस प्लेन इंसाफ के साथी दयालु प्यार भरे और जिम्मेदारी से भरे इंसानों का ध्यान रखो। भगवान को मान
220:32
Speaker A
के चलो। जिंदगी छोटी है। इस दुनिया का असली इनाम है एक साफ कैरेक्टर और निष्काम काम। हमेशा एंटोनस को याद करो। उनका लॉजिक से काम लेना, किसी भी हालत में शांत रहना, भगवान के लिए उनका रिस्पेक्ट, उनका शांत
220:52
Speaker A
चेहरा, उनकी नरम सोच, उनकी सिंपलीसिटी में जीना और हर बात को पूरी तरह समझने के बाद ही फैसला लेना। उस पर जब नाइंसाफी होती थी तो वह भी चिल्लाते नहीं थे। उनका पेशेंस, उनका इनफॉर्मर्स को इग्नोर करना, लोगों के कैरेक्टर को पहचानने की उनकी
221:16
Speaker A
समझ ना किसी की बुराई, ना डरपोक, ना जलन, ना हवा में बातें करने वाले, बेसिक लाइफ में खुश, नॉर्मल घर, सिंपल कपड़े, बेसिक खाना, नॉर्मल नौकर कितना काम करता था बिना रोके। शाम तक काम बिना ब्रेक लिए सिर्फ सिंपल
221:36
Speaker A
डाइट की वजह से। उनकी दोस्ती में विश्वास अगर कोई उनकी बात का विरोध करें तो भी उनका सम्मान करते थे। और जब उनकी बात सुधारी जाती थी तो वह खुशी होती थी। उनका भक्ति भाव बिना अंधविश्वास के ताकि जब
221:53
Speaker A
तुम्हारा टाइम आए तुम्हारा कॉन्शियंस भी उनकी तरह साफ हो। [संगीत] जागो वापस आओ अपने पास। अब तुम सोए हुए नहीं हो। तुम्हें पता है वह सिर्फ सपने थे। अब दिमाग साफ है तो अब इस दुनिया को भी एक सपने की तरह
222:18
Speaker A
लो। मैं एक बॉडी और एक सोल से बना हूं। जो चीजें बॉडी के साथ होती हैं उनका कोई मतलब नहीं होता। बॉडी उनमें फर्क ही नहीं कर सकती। मेरे माइंड के लिए सिर्फ उनके खुद के एकशंस का मतलब होता है जो उनके कंट्रोल
222:34
Speaker A
में होते हैं और सिर्फ वही एकशंस मैटर करते हैं जो अभी हो रहे हैं। उनके पुराने या फ्यूचर एकशंस का भी कोई मतलब नहीं होता। अगर तुम अपने हाथों को हाथ की तरह और पैरों को पैर की तरह यूज करते हो तो दर्द
222:53
Speaker A
होना नॉर्मल है। वैसे ही एक इंसान के लिए स्ट्रेस फील करना भी नॉर्मल है। जब वह एक इंसानी जिंदगी जी रहा हो। और अगर यह नॉर्मल है तो फिर यह बुरा कैसे हो सकता है? चोर बिगड़े हुए लोग अपने बाप को मारने
223:11
Speaker A
वाले तानाशाह राजा जो सुख उन्हें मिलते हैं वह कैसे सुख [संगीत] हैं? तुमने देखा होगा कैसे एक प्रोफेशनल आदमी आम आदमी से आधा रास्ते मिलता है। लेकिन अपने काम के प्रिंसिपल से कभी कॉम्प्रोमाइज नहीं करता। तो क्या हमें इंसान होते हुए अपने
223:37
Speaker A
रीजन से कम जिम्मेदारी फील करनी चाहिए जो हमें भगवान के साथ जोड़ती है? एशिया और यूरोप बस दुनिया के किसी कोने में छुपी जगह जैसे हैं। समुंदर एक बूंद पानी माउंट एथोस एक छोटी सी मिट्टी का ढेर प्रेजेंट मूवमेंट एक पल भर का टुकड़ा पूरी
224:00
Speaker A
एटरर्निटी में बहुत छोटा चंचल बेकार सा कुछ उसी एक यूनिवर्सल माइंड से आता है। या तो असर के रूप में या रिजल्ट के शेर के दांत जहरीली चीजें और हर नुकसानदाई चीज कांटों से लेकर कीचड़ तक। यह सब उस अच्छे
224:24
Speaker A
और सुंदर सोर्स का साइड इफेक्ट है। तो इन्हें अलग मत समझो उस चीज से जिसे तुम पूजते हो। ध्यान सोर्स पर दो जहां से सब कुछ निकलता है। अगर तुमने आज को देख लिया तो सब कुछ देख लिया जैसा हमेशा था जैसा हमेशा रहेगा।
224:47
Speaker A
वही मैटर, वही फॉर्म सब एक जैसे। हमेशा याद दिलाते रहो अपने आप को कि कैसे चीजें एक दूसरे से जुड़ी हैं। एक दूसरे से संवेदनशील है। सब कुछ एक दूसरे के साथ जुड़ता है। एक दूसरे पर असर डालता है। एक
225:08
Speaker A
साथ सांस लेता है। सब एक ही हैं। जो चीजें तुम्हारे लिए तय की गई हैं उनसे एक हो जाओ। और जो लोग उन चीजों में तुम्हारे साथ हैं उनसे प्यार करो असली प्यार से। टूल्स, हथियार, सामान अगर वह अपने काम
225:32
Speaker A
करते हैं जैसे बनाए गए थे तो वह सही काम कर रहे हैं। चाहे जिसने बनाया हो, वह कहीं दूर हो। लेकिन नेचर की चीजें जिन्हें बनाया गया है उनमें वह पावर अभी भी रहती है। इसीलिए उनका रिस्पेक्ट अलग होना चाहिए। अगर तुम
225:50
Speaker A
उसी के हिसाब से जीते हो तो सब कुछ तुम्हारे अंदर भी वैसे ही वाइजली अरेंज्ड है जैसे पूरी दुनिया में है। तुम उन चीजों को अच्छा या बुरा बोलने लगते हो जो तुम्हारे कंट्रोल में ही नहीं है। और जब वह बुरी चीजें होती हैं या
226:10
Speaker A
अच्छी नहीं होती तो तुम भगवान को दोष देते हो या दूसरे लोगों से नफरत करते हो या उन्हें दोषी बना देते हो। हमारा अधिकतर बुरा बिहेवियर इसी वजह से होता है। अगर हम सिर्फ अपने एक्शनंस को अच्छा या बुरा
226:26
Speaker A
समझते तो कभी भगवान को चैलेंज नहीं करते या लोगों से दुश्मनी नहीं करते। हम सब एक ही काम कर रहे हैं। कुछ जानकर समझकर कुछ बिना जाने भी। शायद यही हराकलिटस कह रहे थे जब उन्होंने कहा जो लोग सो रहे होते हैं वह भी काम कर
226:49
Speaker A
रहे होते हैं। वह भी इस प्रोसेस का हिस्सा हैं। कुछ एक तरीके से काम करते हैं कुछ दूसरे तरीके से। और जो लोग कंप्लेन करते हैं, रुकावट डालते हैं, वह भी हेल्प करते हैं। दुनिया को उनकी भी जरूरत होती है। तो
227:06
Speaker A
डिसाइड कर लो तुम किसके साथ काम करोगे। जो शक्ति सब कुछ चला रही है, वह तुम्हारा यूज वैसे भी करेगी। वह तुम्हें अपनी लिस्ट में डाल देगी और काम दे देगी। पर देख लो वो काम वो ना हो जैसा क्रिसिपस ने कहा था।
227:23
Speaker A
ड्रामा का वह बुरा सा डायलॉग जो सिर्फ लोगों को हंसाने के लिए लिखा गया हो। क्या सूरज कभी बारिश का काम करने की कोशिश करता है?
227:39
Speaker A
या एक्लिपियस डिमीटर का काम करते हैं और हर एक तारा अलग है फिर भी एक साथ काम करते हैं। अगर भगवान ने मेरे बारे में और मेरी जिंदगी में जो कुछ होता है उनके बारे में फैसले किए हैं तो वह अच्छे ही होंगे। क्या
228:00
Speaker A
तुम एक ऐसे भगवान का सोच सकते हो जो गलत फैसले करता हो? और वह मुझे तकलीफ देकर क्या पाएंगे? उन्हें क्या फायदा मिलेगा यह दुनिया को जो उनका असली कंसर्न है और अगर उन्होंने मेरे पर्सनल लेवल पर कुछ डिसाइड
228:17
Speaker A
नहीं किया तो पूरे समाज के भले के लिए तो किया ही होगा और जो भी उससे निकलता है उसे मुझे एक्सेप्ट करना चाहिए और अगर वह कुछ भी डिसाइड नहीं करते जो सोचना भी पाप है क्योंकि अगर वैसा होता
228:35
Speaker A
तो फिर हम पूजा दुआ दुआ कसम खाना सब कुछ छोड़ देते क्योंकि तब तो भगवान को हमारे आसपास होना मानना ही गलत होता तो भी मैं तो फैसले ले सकता हूं मैं तो सोच सकता हूं कि मेरे लिए क्या सही है और जो किसी भी
228:53
Speaker A
इंसान के लिए सही होता है वह होता है अपने नेचर के हिसाब से जीना और मेरा नेचर है सोचना और समझ से जीना मेरी सिटी और राज्य रोम है एंटोनिस के रूप में पर इंसान होने के नाते पूरी
229:10
Speaker A
दुनिया तो मेरे लिए अच्छाई का मतलब सिर्फ वही हो सकता है जो दोनों जगहों के लिए अच्छा हो। जो कुछ भी तुम्हारे साथ होता है वह दुनिया के भले के लिए होता है। बस यही काफी है। पर अगर तुम ध्यान से देखो तो और
229:29
Speaker A
भी एक बात समझ आएगी। हर एक व्यक्ति के साथ जो होता है वह दूसरों के भले के लिए भी होता है। उसी सेंस में जैसे दुनिया अच्छाई को डिफाइन करती है। जैसे सर्कस और तमाशों से तुम बोर हो
229:47
Speaker A
जाते हो। सब कुछ पहले ही देख चुके हो। वैसे ही जिंदगी भी लगने लगती है। वही चीजें, वही वजह हर तरफ से। और कितना देर और हमेशा याद रखना हर तरह के लोग मर चुके हैं। हर पेशे के हर देश
230:11
Speaker A
के इस सोच को ले जाओ फिलिस्तियों, फीबस और ओरेगियों तक। अब इसे और स्पीशीज तक ले जाओ। हमें भी वहीं जाना है जहां यह सब जा चुके हैं। बोलने वाले और समझदार लोग हराकलिटस, पाइथागस, सोक्रेटीस, पुराने हीरोज़, सैनिक और राजा
230:36
Speaker A
जो उनके बाद आए यूडोक्सस हिपेरकस आर्कमडीज, इंटेलिजेंट, उदार, मेहनती और चतुर और स्वार्थी लोग भी। और मेनीिपस जैसे लोग जो इस छोटी नाजुक जिंदगी पर हंसी करते थे। सब के सब अब जमाने के नीचे काफी देर से हैं। और इससे
230:59
Speaker A
उनका क्या बिगड़ा या उनका भी क्या जिनके नाम तक हमें नहीं पता। सिर्फ एक चीज जो बेकार नहीं है इस जिंदगी को सच्चाई और ईमानदारी से जीना। और उन लोगों के साथ सब्र रखना जो ऐसे नहीं जीते। जब तुम्हें हिम्मत चाहिए हो तो अपने
231:25
Speaker A
आसपास के लोगों की क्वालिटीज याद करो। किसी की मेहनत, किसी की शर्म, किसी की उदारता और ऐसे ही और भी। कुछ भी इतना हिम्मत देने वाला नहीं होता जितना कि जब तुम्हारे आसपास के लोगों में अच्छाई दिखती है। जब वह तुम पर बरस रही
231:44
Speaker A
होती है। इस बात को याद रखना अच्छा होता है। तुम्हें यह तो चिंता नहीं होती कि तुम्हारा वजन सिर्फ x या y किलो है। 300 नहीं। तो फिर तुम्हें यह क्यों चिंता करें कि तुम्हारी जिंदगी सिर्फ x या y साल की
232:05
Speaker A
है। उससे ज्यादा नहीं। जैसे तुम अपने शरीर की लिमिट मान लेते हो वैसे ही अपने समय की लिमिट भी मान लो। अपनी पूरी कोशिश करो उन्हें समझाने की। लेकिन अगर न्याय का कहना है तो अपने आप पर अमल करो। अगर सामने से
232:28
Speaker A
जोर मिला तो उसे शांति से और स्वीकार से लो। उस रुकावट का इस्तेमाल करो दूसरी अच्छाइयों को प्रैक्टिस करने के लिए। याद रखो हमारी कोशिशें हालात पर भी निर्भर करती हैं। तुमने असंभव करने का इरादा नहीं किया था। तो फिर किस चीज का इरादा किया
232:48
Speaker A
था? कोशिश करने का और तुमने कोशिश की जो तुमने ठान लिया था वह तुमने पूरा किया। यानी एंबिशन का मतलब होता है अपनी खुशी को दूसरे लोग क्या कहते या करते हैं उसे जोड़ देना। अपने मन की चलने देना मतलब है कि जो
233:11
Speaker A
तुम्हारे साथ हो रहा है। तुम्हारी खुशी उस पर निर्भर है। अकलमंदी का मतलब है अपनी खुशी को अपने ही कर्मों से जोड़ना। तुम्हें हर चीज को बड़ा बनाने की जरूरत नहीं है। हर बात से परेशान होने की जरूरत
233:30
Speaker A
नहीं। चीजें अपने आप तुम्हारे फैसले नहीं बना सकती। सच्चाई सुनने की आदत डालो। कोशिश करो कि तुम समझ सको सामने वाला क्या सोच रहा [संगीत] है। अगर छत्ते को चोट पहुंची तो हर मधुमक्खी को चोट पहुंची। अगर जहाज का क्यू अब कैप्टन की
233:59
Speaker A
बात ना माने या मरीज डॉक्टर की ना सुने तो फिर वह किसकी बात मानेंगे? कैसे मुसाफिर सुरक्षित रहेंगे या पेशेंट ठीक होंगे?
234:12
Speaker A
वह सब लोग जो मेरे साथ दुनिया में आए थे अब तक इस दुनिया से जा चुके हैं। ज्डिस वाले को शहद कड़वा लगता है। जिनको रेबीज होता है उन्हें पानी से डर लगता है। और एक छोटे बच्चे को बॉल सुंदरता
234:32
Speaker A
लगती है। तो फिर तुम्हें यह क्यों परेशान करता है? क्या तुम्हें लगता है कि झूठ या पागल कुत्ते से कम पावरफुल होता है? कोई भी तुम्हें रोक नहीं सकता वैसे जीने से जैसे तुम्हारा नेचर चाहता है। तुम्हारे साथ ऐसा कुछ नहीं हो सकता जो
234:56
Speaker A
नेचर की मर्जी के खिलाफ हो। जिन लोगों को खुश करने के लिए लोग सब कुछ करते हैं, उनका अंजाम और जो हरकतें वह करते हैं, सब कुछ कितनी जल्दी वक्त के साथ गायब हो जाता है। कितना कुछ पहले ही मिट
235:13
Speaker A
चुका [संगीत] है। बुक सेवन बुराई वही पुरानी बात चाहे कुछ भी हो याद रखना। यह सब वही पुरानी चीजें हैं। दुनिया के एक छोर से दूसरे छोर तक। पूरी हिस्ट्री बुक्स भरी पड़ी है इन्हीं से। पुरानी भी नई भी शहरों में, घरों में हर
235:40
Speaker A
जगह कुछ भी नया नहीं। जाना पहचाना छोटा सा पल। समझ को बुझा नहीं सकते। जब तक तुम उस रोशनी को खत्म ना करो जो उसे बनाती है। लेकिन तुम उस रोशनी को फिर से जगा सकते हो जैसे अंगारे। मैं अपने विचारों को कंट्रोल कर
236:05
Speaker A
सकता हूं जब चाहूं तो फिर परेशान क्यों हूं? जो कुछ मेरे दिमाग के बाहर है उनका मेरे दिमाग पर कोई असर नहीं। यह सीख लो और तुम मजबूती से खड़े रहोगे। तुम जिंदगी में वापस लौट सकते हो। वैसे ही देखो जैसे पहले
236:23
Speaker A
देखते थे और जिंदगी वापस आ जाएगी। बेवजह भागदौड़ झूलू सोपेरा के गीत बकरियों और गायों के झुंड सेना की प्रैक्टिस कुत्तों के लिए हड्डी मछली के टैंक में कुछ खाना छोटी-छोटी चिंताओं में घिरी चींटी जैसी जिंदगी डर से भागती हुई
236:51
Speaker A
चुहिया डोरियों से हिलते पुतले जब हम इन सब से घिरे हुए हैं तो हमें हमें स्वीकार करना सीखना होगा बिना नफरत के। लेकिन याद रखना कि हमारी असली कीमत उस चीज से होती है जिसमें हम अपना बल लगाते
237:10
Speaker A
हैं। जब बोलो तो ध्यान दो तुम क्या कह रहे हो और जो कुछ करो तो सोचो उसका नतीजा क्या होगा। समझो कि कहने का मकसद क्या है और काम का मतलब क्या?
237:28
Speaker A
क्या मेरा दिमाग इस काम के लायक है? अगर हां तो उसे काम में लो। जैसे प्रकृति ने दिया एक औजार। और अगर नहीं है तो किसी और को दे दो जो बेहतर कर सके। अगर कोई और चारा ना हो
237:44
Speaker A
तो। या फिर जितना हो सके उतना खुद करो। और जो इसका इस्तेमाल कर सकता है उनके साथ मिलकर काम करो ताकि समुदाय का काम पूरा हो। क्योंकि जो कुछ भी मैं करूं अकेला या मिलकर सिर्फ एक ही कारण से होना चाहिए जो
238:03
Speaker A
उस जरूरत से मिलता हो। बहुत सारे लोग जिन्हें याद रखा गया आज भुला दिए गए हैं। और जिन लोगों ने उन्हें याद रखा वह भी अब चले गए। मदद मांगने में शर्म कैसी? जैसे एक फौज का सिपाही दीवार पर चढ़ रहा हो। उनका
238:29
Speaker A
एक मिशन हो। अगर घायल हो गया और किसी साथी की जरूरत हो उठाने के लिए तो क्या बुरा है इसमें? भविष्य को भूल जाओ। जब आएगा अगर आएगा तब भी वही रिसोर्सेज होंगे। वही लोगस। सब कुछ एक दूसरे से जुड़ा हुआ है और यह
238:54
Speaker A
जोड़ पवित्र है। कोई भी हिस्सा अलग नहीं है। सब कुछ एक सुर में है और मिलके एक संसार बनाता है। एक ही संसार सब चीजों से मिलके एक ही देवता सब में छुपे हुए। एक ही तत्व और एक ही कानून लोगस जो सब बुद्धिमान
239:15
Speaker A
प्राणियों में है और एक ही सच। अगर यह एक ही प्रक्रिया का अंजाम है तो हम सब एक जैसे जन्मे एक ही लोगस के साथ हर पदार्थ जल्दी ही प्रकृति में समा जाता है और जो उसे चलाता है वह भी लोगस
239:35
Speaker A
में लौट जाता है और इन दोनों का निशान समय ढक लेता है। एक समझदार जीव के लिए कोई भी काम जो लोगस के खिलाफ हो वह अस्वाभाविक होता है। सीधा रहो किसी के धक्के से सीधा मत हो। हर समझदार जीव के अंदर जो रीजन है वह
240:00
Speaker A
एक जैसे ही जुड़े हुए होते हैं। जैसे एक शरीर के अलग-अलग हाथ पैर पर सब एक साथ काम करने के लिए बने हो। यह बात और क्लियर हो जाएगी जब तुम खुद से याद दिलाओ। मैं एक बड़ा शरीर का एक हिस्सा हूं और वह
240:16
Speaker A
शरीर समझदार है। या तुम कह सकते हो मैं एक हिस्सा हूं। एक पार्ट बस एक अक्षर का फर्क। लेकिन अगर तुम यह कह रहे हो तो अभी तुम दूसरों को अपना नहीं मानते। उनकी मदद करना अभी तक तुम्हारे लिए सिर्फ एक अच्छा
240:33
Speaker A
काम है। तुम्हें अभी तक यह समझ नहीं आया कि तुम असल में किसकी मदद कर रहे हो। जो कुछ होना है होने दो। जिस पर हो सकता है उस पर हो जाने दो। और जो उससे परेशान हो वह शिकायत करे अगर चाहे मुझे तब तकलीफ
240:56
Speaker A
नहीं होती जब तक मैं उस बात को अपने लिए नुकसान ना समझूं। मैं चाहे तो ऐसा सोचने से इंकार कर सकता हूं। कोई कुछ भी बोले, कुछ भी करे मेरा काम सिर्फ एक ही है अच्छा इंसान बनना। जैसे सोना या एमरल्ड
241:17
Speaker A
या बैंगनी रंग खुद से कहता है। चाहे कोई कुछ भी कहे मेरा काम एमरल्ड बनना है। अपना रंग बनाए रखना है। दिमाग कभी खुद अपने रास्ते में नहीं आता। वह खुद से खौफ में आके इच्छा नहीं बनाता। अगर कोई और चीज उसे डरा सकती है या चोट
241:39
Speaker A
पहुंचा सकती है तो ठीक है। लेकिन वह अपने विचार से उस रास्ते पर नहीं जाता। शरीर अगर तकलीफ से बच सकता है तो बचा ले। अगर महसूस करें तो महसूस करें। लेकिन दर्द या डर सब दिमाग में पैदा होता है और
241:57
Speaker A
दिमाग ही उसे असलियत देता है या नहीं देता। दिमाग को किसी चीज की जरूरत नहीं होती। जब तक वह खुद ना समझे। वह सिर्फ तब हिलता है जब खुद को हिला लेता है। उनके लिए कोई रुकावट नहीं होती जब तक वह खुद को
242:13
Speaker A
ना रोके। अच्छी जिंदगी या तो अच्छी किस्मत है या अच्छा चरित्र। लेकिन तुम यहां क्या कर रहे हो? धोखेबाज सोच। जहां से आए हो वापस चले जाओ। मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं। हां हां आदत से चले आए हो गुस्सा नहीं हो बस
242:38
Speaker A
जाओ बदलाव से डरते हो लेकिन कोई भी चीज उनके बिना रह सकती है क्या नेचर की सबसे करीब चीज बदलाव नहीं है क्या तुम गर्म पानी से नहा सकते हो बिना लकड़ी जलाए क्या खाना खाए बिना उसे बदले उसे हजम
242:57
Speaker A
कर सकते हो क्या जिंदा रहना पॉसिबल है बिना कुछ बदले समझो तुम भी वैसे ही हो और तुम्हारा बदलाव भी नेचर के लिए उतना ही जरूरी है। जिंदगी से जैसे एक तेज नदी में बह रहे हो। हर शारीरिक चीज जो प्रकृति से पैदा
243:19
Speaker A
हुआ है और उनके साथ मिलकर काम करता है वैसे ही जैसे तुम्हारे हाथ पैर एक दूसरे के साथ समय ने क्रिसिपस सोक्रेटीज एपिकेटस सबको निगल लिया बार-बार एपिकेटस की जगह कोई भी नाम डाल लो किसी भी चीज का नाम डाल
243:42
Speaker A
लो मेरा सिर्फ एक डर मैं ऐसा कुछ ना कर बैठूं जो इंसानी फितरत के खिलाफ हो। गलत काम, गलत तरीके से या गलत वक्त पे। सब कुछ भूलने के करीब हूं। खुद भूल जाने के भी। जो लोग गलती करते हैं, उनके लिए प्यार
244:07
Speaker A
महसूस करना सिर्फ इंसानों का काम है। तुम भी कर सकते हो अगर तुम समझो। वह भी इंसान है। वह भी अनजाने में करते हैं अपने कंट्रोल के बाहर और तुम दोनों कुछ समय बाद मरने वाले हो। सबसे जरूरी बात उन्होंने
244:23
Speaker A
तुम्हें असलियत में चोट नहीं पहुंचाई। तुम्हारी चॉइस करने की ताकत कम नहीं की। प्रकृति किसी वस्तु को लेती है और उसे घोड़ा बना देती है। जैसे मूर्तिकार मोम से मूर्ति बनाता है। फिर उसे पिघला के वही वस्तु एक पेड़ बन जाती है। फिर एक इंसान
244:46
Speaker A
फिर कुछ और सब कुछ बस थोड़े वक्त के लिए। उस बर्तन को कोई तकलीफ नहीं होती जब उसे जोड़ा जाता है और कोई तकलीफ नहीं होती जब उसे तोड़ दिया जाता है। गुस्से वाला चेहरा नेचर के खिलाफ होता है।
245:07
Speaker A
अगर आखिर में वह चेहरा हमेशा के लिए ठंडा पड़ जाता है। फिर से जलता नहीं तो सोचो कि वह पहले से ही अननेचुरल था। अगर इंसान को यह भी महसूस नहीं होता कि उसने बुरा किया है तो जीने का मतलब ही क्या रह गया?
245:26
Speaker A
जल्दी ही नेचर जो सब कुछ कंट्रोल करती है हर चीज को बदल देगी जो तुम देखते हो उन्हीं चीजों का यूज करेगी कुछ और बनाने के लिए बार-बार इस तरह दुनिया बार-बार नई होती रहेगी जब कोई तुम्हें चोट पहुंचाता है खुद
245:47
Speaker A
से पूछो उसने सोचा क्या था उसे क्या फायदा या नुकसान होगा अगर तुम यह समझ पाए तो गुस्सा या नाराजगी नहीं बल्कि दया महसूस करोगे। हो सकता है तुम्हारा और उनका भला बुरा समझना एक जैसा हो या मिलताजुलता हो
246:04
Speaker A
तो माफ कर दो। और अगर अलग है तो वह बेवकूफ है और उसकी गलती पर तुम्हें दया आनी चाहिए। क्या यह मुश्किल है?
246:19
Speaker A
जो चीजें तुम्हारे पास नहीं है उनके बारे में सोचो ही मत। जो चीजें तुम्हारे पास हैं जिन्हें तुम सबसे ज्यादा पसंद करते हो। सोचो अगर यह ना होती तो तुम कितना तरस करते। लेकिन ध्यान रखो इतने खुश मत हो जाओ
246:37
Speaker A
कि उन्हें खो जाने का डर तुम्हें तोड़ दे। अपने अंदर सिमट जाना। दिमाग की जरूरतें सिर्फ इतनी होती हैं कि जो सही है वह करो और जो सुकून मिलता है उसी में शांति पाओ। गलत सोच छोड़ दो। किसी की डोरी से
247:00
Speaker A
खींची हुई गुड़िया मत बनो। सिर्फ अभी के वक्त तक सीमित रहो। समझो क्या हो रहा है तुम्हारे साथ और दूसरों के साथ। हर चीज का एनालिसिस करो। उनका मैटर और उनका कारण अपने आखिरी वक्त का भी अंदाजा रखो। दूसरों
247:17
Speaker A
की गलती उन्हीं पर छोड़ [संगीत] दो। ध्यान से सुनो जो बोला जा रहा है। दिमाग का ध्यान उस पर रखो जो हो रहा है और क्यों हो रहा है। अपने आप को साफ करो सिंपलीसिटी से, नम्रता से और सिर्फ सही और गलत की परवाह
247:40
Speaker A
के साथ। दूसरों की केयर करो। भगवान के रास्ते पर चलो। सब कुछ रिलेटिव है। कहा गया है और असल में सब एटम्स हैं। सिर्फ पहला हिस्सा याद रखना काफी है। सब कुछ रिलेटिव है। बस इतना ही काफी है। अगर एटम्स हैं तो बिखर जाएंगे। अगर एक
248:08
Speaker A
ही जिस्म है तो या तो बुझ जाएगा या बदल जाएगा। जो दर्द सहने लायक नहीं होता वह खुद ही खत्म हो जाता है। जो लंबा चलता है वह हमेशा सहने लायक होता है। दिमाग अपने आप को शरीर से अलग करके शांत बना लेता है
248:28
Speaker A
और सोच कमजोर नहीं होती। जो हिस्सा दर्द में है अगर बोल सकता है तो बोलने दो। जो लोग सोचते हैं क्या चाहते हैं और किससे डरते हैं। घटनाएं जैसे रेत के ढेर एक के बाद एक आती हैं और छुप जाती
248:55
Speaker A
हैं। अगर किसी का दिमाग इतना बड़ा हो, समय और दुनिया की समझ रखता हो तो क्या इंसानी जिंदगी उनके लिए कुछ मायने रखती है?
249:05
Speaker A
बिल्कुल नहीं। उसने कहा यह मौत उसे डरा सकती है जरा सा भी नहीं। राजा बनना मतलब अच्छे काम करने के बावजूद बदनाम हो जाना। शर्म की बात है कि दिमाग चेहरे को कंट्रोल कर सकता है। उनका शेप बदल सकता है
249:30
Speaker A
लेकिन खुद को नहीं। और हम दुनिया से नाराज क्यों हो जाते हैं? जैसे दुनिया को फर्क पड़ता हो। उम्मीद है कि तुम हमें भी खुशी दो और उन्हें भी जो ऊपर हैं। जिंदगी को काटो। जैसे खेत में खड़ी
249:54
Speaker A
बालियां जो उगी थी वह कट गई। अगर मैं और मेरे दो बच्चे भगवान को नहीं हिला सकते तो भगवान के पास कोई वजह जरूर होगी। क्योंकि जो सही और अच्छा है वह मेरे साथ है। ना कोई रोना धोना ना कोई
250:21
Speaker A
ड्रामा। तो मेरी तरफ से एक ही जवाब ठीक रहेगा। तुम गलत हो। दोस्त अगर तुम सोच रहे हो कि कोई भी इंसान जो थोड़ा भी लायक है, वह मौत के खतरे की परवाह करता है। उसे सिर्फ एक चीज की परवाह होती है जो वह कर
250:37
Speaker A
रहा है, वह सही है या गलत। और क्या उनका बर्ताव एक अच्छे इंसान जैसा है या नहीं?
250:48
Speaker A
बात सिंपल है जरी के दोस्तों जहां कोई आदमी खुद खड़ा होने का फैसला करता है या जहां उनका कमांडर उसे खड़ा होने को कहता है मुझे लगता है उसे वहीं खड़ा रहना चाहिए और दुश्मन का सामना करना चाहिए बिना किसी
251:06
Speaker A
चिंता किए कि वह मरेगा या नहीं सिर्फ अपना फर्ज निभाना चाहिए पर मेरे अच्छे दोस्त दोस्त सोचो तो सही कि शायद नोबिलिटी और वर्चू का मतलब यह नहीं होता कि तुम जिंदा रहो या मर जाओ। क्या यह मुमकिन नहीं कि एक असली आदमी
251:25
Speaker A
को अपने जीने की गिनती छोड़ देनी चाहिए और जिंदगी से चिपकने के बजाय सब कुछ भगवान पर छोड़ देना चाहिए। जैसे औरतें कहती हैं कि किसी का भी भाग्य उसे बचा नहीं सकता। और अपना ध्यान सिर्फ इस पर लगाना चाहिए कि जो जिंदगी
251:42
Speaker A
मिली है उसे कैसे अच्छे से जिया जाए। सितारों की चाल को इस तरह देखो जैसे तुम भी उनके साथ घूम रहे हो। हमेशा याद रखो कि कैसे एलिमेंट्स एक दूसरे में बदलते रहते हैं। ऐसे विचार जिंदगी की गंदगी को
252:02
Speaker A
धोते [संगीत] हैं। प्लेटो बिल्कुल सही कहते थे। अगर तुम्हें लोगों के बारे में बात करनी है तो जमीन को ऊपर से देखकर बात करो। जानवरों के झुंड फौज खेतीबाड़ी शादी तलाक जन्म मौत कोर्ट की चीख पुकार, सुनसान जगह, अलग-अलग देश के
252:27
Speaker A
लोग, त्यौहार, शोक के दिन, बाजार के दिन, सब कुछ एक साथ मिला हुआ। एक दूसरे के अपोजिट पर एक सुर में। पास्ट को देखो। एक एंपायर के बाद दूसरा और उससे फ्यूचर को समझो। वही साइकिल चलेगा। कोई भाग नहीं
252:52
Speaker A
सकता इस पैटर्न से। इसलिए जिंदगी के 40 साल तक देख लेना भी उतना ही है जितना हजार साल तक। क्या वैसे भी कुछ नया दिखेगा?
253:05
Speaker A
जमीन के बच्चे वापस जमीन में और जो आसमान से आए वह वापस आसमान में या तो यह होगा या आइटम्स टूट जाएंगे और अपनेप रास्ते से बिखर जाएंगे। खानेपीने और जादू टोना से मौत को किसी नए तरीके से टालने की
253:27
Speaker A
कोशिश। खुशी से मेहनत करना और ऊपर से आई हवा को बर्दाश्त करना। शायद वह तुमसे बेहतर कुश्ती लड़ा हो लेकिन वह बेहतर नागरिक नहीं, बेहतर इंसान नहीं, मुश्किल वक्त में बेहतर साथी नहीं, गलती माफ करने वाला नहीं। जहां में कुछ इस तरह हो जाए जैसे भगवान और
253:56
Speaker A
इंसान के कॉमन सेंस ने कहा है। वहां सब कुछ ठीक है। जहां हमारी कोशिश का फायदा हो, जहां वह हमारे नेचर के साथ चले, वहां डरने की कोई बात नहीं। हर जगह हर पल तुम्हारे पास ऑप्शन होता है। इस घटना को नम्रता से एक्सेप्ट
254:18
Speaker A
करो। इस इंसान के साथ वैसा बिहेव करो जैसा करना चाहिए। इस सोच को ध्यान से देखो ताकि कोई इरेशनल चीज अंदर ना आ जाए। दूसरों के दिमाग की फिक्र मत करो। सीधा आगे देखो। जहां नेचर तुम्हें ले जा
254:38
Speaker A
रही है। दुनिया की नेचर के जरिए। जो कुछ तुम्हारे साथ हो रहा है और तुम्हारे खुद की नेचर जो कुछ तुम कर रहे हो। हर चीज को वही करना है इसके लिए वह बनी है और बाकी चीजें उनके लिए बनी है जिनके पास
254:55
Speaker A
सोचने की ताकत है। इसमें भी जैसे और चीजों में नीचे वाली चीजें ऊपर वाली के लिए होती हैं और ऊपर वाली एक दूसरे के लिए। अब सबसे बड़ा काम जिसके लिए हम बने हैं मिलकर काम करना। दूसरा अपने बॉडी के जज्बात को
255:14
Speaker A
कंट्रोल करना। क्योंकि सोचने वाली चीजें अपने जज्बात को रोक सकती हैं। चाहे वह डिजायर हो या फीलिंग। सोच का काम है उन्हें कंट्रोल करना। उनका गुलाम बनना नहीं। और होना भी चाहिए। वह उनके लिए बनी है। और तीसरा काम
255:33
Speaker A
जल्दबाजी और अंधविश्वास से बचना। जो दिमाग यह सब समझ जाए और सीधे रास्ते पर चले वह अपना रास्ता खुद बना लेगा। सोचो कि तुम मर चुके हो। तुमने अपनी पूरी जिंदगी जी ली। अब जो बचा है उसे सही तरीके
255:55
Speaker A
से जियो। सिर्फ उसी चीज से प्यार करो जो हो रहा है जो लिखा गया है। इससे बड़ा हार्मोनी कुछ नहीं। जो कुछ भी हो रहा है उसमें उन लोगों को याद रखो जिन्होंने तुमसे पहले यह सब देखा था। जिन्होंने गुस्सा किया, शॉक फील किया,
256:18
Speaker A
नाराजगी जताई। और अब वह लोग कहां है? कहीं भी नहीं। क्या तुम वैसे ही बनना चाहते हो?
256:25
Speaker A
इसके बजाय इन सब दिक्कत भरी चीजों से बचना बेटर नहीं। घबराहट और भागना दूसरों के लिए छोड़ दो। तुम सिर्फ इस पर ध्यान दो कि इन सब का तुम क्या यूज कर सकते हो। क्योंकि तुम इन्हें एक रॉ मटेरियल की
256:44
Speaker A
तरह ले सकते हो। बस ध्यान दो और तय करो कि तुम अपने स्टैंडर्ड्स पे खरे उतरो हर काम में। और जब भी कोई चॉइस आए याद रखो हमारा काम सिर्फ उन चीजों से है जो सच में मैटर करती
257:01
Speaker A
हैं। अंदर तक खोदो। पानी अच्छाई वहां नीचे है। और जब तक तुम खोदते रहोगे वो उबलता रहेगा। बॉडी को चाहिए होता है एक बैलेंस। हर काम में हर स्टेट में स्टेबल रहना। जैसे दिमाग चेहरे को एक सुकून और खूबसूरती
257:22
Speaker A
देता है, वैसे ही बॉडी को भी चाहिए। पर यह बिना मेहनत के आना चाहिए। नाचने वाला नहीं लेकिन पहलवान बनो। रेडी रहो, जमे रहो ताकि अचानक से आए अटैक का सामना कर सको। देखो असली में कौन है वह लोग जिनकी
257:46
Speaker A
अप्रूवल तुम चाहते हो उनका दिमाग कैसा है फिर तुम उन लोगों को ब्लेम नहीं करोगे जो गलती करते हैं बिना जाने और तुम्हें उनकी अप्रूवल की जरूरत भी महसूस नहीं होगी तुमने देख लिया होगा दोनों के सोर्स उनका
258:03
Speaker A
सोचना और उनका एक्शन हमारी मर्जी के बिना ही हमारी सोल को सच से अलग कर दिया गया है। सच से हां और जस्टिस सेल्फ कंट्रोल से दया से भी। जब दर्द हो देखो कि यह तुम्हें बेइज्जत ना करे। तुम्हारे दिमाग को नीचा
258:32
Speaker A
ना दिखाए या उसे रेशनल और सेल्फलेस रहने से ना रोके। और ज्यादातर केसेस में एपिकुरस का कहना याद रखना काफी होगा। दर्द ना तो बर्दाश्त के बाहर होता है ना ही कभी खत्म ना होने वाला। जब तक तुम उसकी लिमिट याद रखते हो
258:52
Speaker A
और उसे अपने दिमाग में बड़ा नहीं मना लेते। और यह भी याद रखो कि दर्द अक्सर भेष बदल कर आता है। नींद, बुखार, भूख का ना लगना। जब ऐसी चीजें परेशान करें तो खुद से कहो मैं दर्द के सामने हार रहा
259:13
Speaker A
हूं। ध्यान रहे तुम इन ह्यूमैनिटी के साथ वैसे ही बर्ताव ना करो जैसे वह इंसानों के साथ करती हैं। हमें कैसे पता कि टेलुगस सोक्रेटीस से बेहतर आदमी नहीं था। सोक्रेटीस की मौत ज्यादा नोबल थी या नहीं? उसने सोफिस्ट को
259:40
Speaker A
ज्यादा अच्छे से जवाब दिया या नहीं या उसने ठंड में रात काट दी यह सब मैटर नहीं करता। जो मैटर करता है वह यह है कि उसकी सोल कैसी थी। क्या वह इंसानों के साथ जस्टिस से पेश आता
259:55
Speaker A
था? भगवान का सम्मान करता था। दूसरों की बुराई देखकर गुस्से में नहीं आता था। दूसरों की इग्नोरेंस का गुलाम नहीं बनता था। नेचर की किसी भी चीज को एबनॉर्मल नहीं मानता था। क्या उसने अपने दिमाग को अपनी बॉडी के
260:13
Speaker A
हवाले नहीं किया था? नेचर ने चीजें इतनी उलझा के नहीं बनाई कि तुम अपनी बाउंड्रीज ही फिक्स ना कर सको। अपनी खुशी अपने हाथ में ना ले सको। तुम अच्छे आदमी बन सकते हो। बिना किसी को दिखाए याद रखना
260:35
Speaker A
यह। और यह भी खुश रहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं चाहिए। और सिर्फ इसलिए क्योंकि तुमने बड़ा थिंकर या साइंटिस्ट बनने की उम्मीद छोड़ दी। इसका मतलब यह नहीं कि तुम फ्रीडम नहीं पा सकते या विनम्रता, सेवा और भगवान के हुक्म
260:54
Speaker A
में जीना नहीं सीख सकते। शांति से जीने का मतलब है बिना किसी जबरदस्ती के जीना। लोग जो चाहे चिल्लाएं जानवर अगर तुम्हारे शरीर के नरम हिस्सों को चीर भी दे तो भी यह तुम्हें रोक नहीं सकता कि तुम्हारा दिमाग शांत
261:20
Speaker A
रहे। जो तुम्हारे आसपास हो रहा है उनका सही अंदाजा लगाते रहो। और हर सिचुएशन का अच्छे से फायदा उठा सके ताकि तुम्हारा समझ कह सके। तू सच में क्या है? मैं तुझे समझ गया चाहे तू कैसे भी दिखता हो और तुम्हारा बदलाव से भरा हुआ मन
261:42
Speaker A
कहे तू ही तो था जिसे मैं ढूंढ रहा था क्योंकि मेरे लिए हर पल एक मौका है समझदारी के साथ जीने का समझदारी जो इंसान और भगवान दोनों में होती है दोनों जो कुछ भी होता है उसे पूरी तरह नेचुरल मानते हैं
262:02
Speaker A
ना वह कुछ नया लगता है ना मुश्किल सब कुछ जाने पहचाने और संभालने लायक। अपना कैरेक्टर को परफेक्ट बनाना मतलब है हर दिन ऐसे जीना जैसे वह तुम्हारा आखिरी दिन हो। ना तो पागलपन में ना सुस्ती में ना दिखावा में।
262:30
Speaker A
भगवान हमेशा के लिए जीते हैं। पर उन्हें कभी बुरा नहीं लगता कि उन्हें हमेशा इंसानों और उनके रवय को बर्दाश्त करना पड़ता है। बल्कि वह उनकी केयर भी करते हैं। और तुम जो खुद मरने के बिल्कुल करीब हो। अभी तक इंसानों की केयर करने से कतरा
262:53
Speaker A
रहे हो। जबकि तुम खुद भी एक इंसान हो। दूसरों की गलतियों से बचने की कोशिश करना बेकार है। उनसे तो बच ही नहीं सकते। सिर्फ अपनी गलतियों से बचने की कोशिश करो। जब कभी वह पावर जो हमें समझदार और
263:16
Speaker A
सोशल बनाती है, किसी ऐसी चीज से टकराती है जो ना समझदार है ना सोशल। तो वह सही तरीके से उसे कम मानती है। तुमने किसी की मदद की उसने ले ली। पर तुम बेवकूफ की तरह अभी भी चाहते हो कि
263:35
Speaker A
तुम्हारा एहसान माना जाए। तुम्हें कुछ वापस मिले। क्यों? कोई भी उस चीज से मना नहीं करता जो उनके काम की होती है। और दूसरों के काम आना एक नेचुरल बात है। तो फिर जो तुम्हारे काम आए उसे मना क्यों करते हो? दूसरों के
263:56
Speaker A
काम आना भी तो तुम्हारे लिए नेचुरल है। नेचर ने इस दुनिया को बनाने का इरादा किया था। या तो सब कुछ एक लॉजिक से चल रहा है या फिर वही चीजें जिन पर इस दुनिया की समझ सबसे ज्यादा काम करती है वह भी बस
264:18
Speaker A
रैंडम है। यह सोच काफी बार शांति देती है। बुक एट एक और याद दिलाने वाली बात जो तुम्हें हंबल बनाती है। तुम यह क्लेम नहीं कर सकते कि तुमने अपनी जिंदगी एक फिलॉसफर की तरह जी है। पूरा एडल्टहुड भी नहीं।
264:46
Speaker A
तुम खुद देख सकते हो कितने दूर हो फिलॉसफी से और दूसरे लोग भी देख सकते हैं। तुम खुद में थोड़े खराब हो। अब सिंपल नहीं है फिलॉसफर की रेपुटेशन बनाना और तुम्हारी पोजीशन भी एक रुकावट है। तो अब तुम्हें पता है हाल क्या है। अब
265:08
Speaker A
दूसरों की सोच छोड़ो। बस खुश रहो अगर बाकी की छोटी सी जिंदगी भी तुम अपने नेचर के मुताबिक जी पाओ। बस उसी पर ध्यान दो। कुछ और तुम्हें भटकाने ना दे। तुम हर जगह घूम आए हो और अब समझ आए हो कि तुम्हें कभी
265:28
Speaker A
नहीं मिला जो तुम ढूंढ रहे थे। कैसे जीना है? ना तो सिलोगिज्म से ना पैसा, ना नाम, ना मजा कहीं नहीं। तो फिर मिलता कहां है? इंसान की नेचर के हिसाब से जीने में मिलता है। कैसे? बेसिक प्रिंसिपल्स के थ्रू जो तुम्हारे इरादों
265:49
Speaker A
और कामों को गाइड करते हैं। कौन से प्रिंसिपल्स? जो गुड और बैड से रिलेटेड है कि सिर्फ वही चीज गुड है जो इंसाफ, कंट्रोल, हिम्मत और आजादी की तरफ ले जाए। और सिर्फ वही चीज बैड है जो इसका उल्टा
266:14
Speaker A
करे। हर एक्शन पे यह पूछो इसका मुझ पर क्या असर होगा? क्या मैं अपना माइंड बदल सकता हूं? पर जल्दी ही मैं मर जाऊंगा। सब ब्लैंक हो जाएगा। तो सिर्फ एक सवाल बचा। क्या एक जिम्मेदार इंसान का एक्शन है जो
266:32
Speaker A
सोसाइटी का पार्ट है और जो भगवान के रूलर के अंदर है। एलेक्जेंडर सीजर और पमपे अगर उनका कंपैरिजन डायोजनीस हिराकलिटस और सोक्रेटीस से करें। फिलॉसफर्स को पता था क्यों क्या कैसे उनका दिमाग उनका अपना था और बाकी सिर्फ चिंता और
267:04
Speaker A
गुलामी। तुम सांस रोको जब तक चेहरा नीला ना हो जाए। पर लोग अपना काम करते रहेंगे। पहला स्टेप चिंता मत करो। नेचर सब कंट्रोल करती है और जल्दी ही तुम कुछ भी नहीं रहोगे ना जगह रहोगे एड्रियन जैसे
267:27
Speaker A
अगस्तस जैसे दूसरा स्टेप जो तुम्हें करना है उस पर ध्यान दो अपनी नजर उसी पर रखो याद दिलाते रहो कि तुम्हारा काम एक अच्छा इंसान बनना है। याद दिलाओ कि इंसान से नेचर क्या मांगती है। फिर वही करो बिना डरे और सच
267:47
Speaker A
बोलो जैसे तुम्हें दिखता है पर प्यार से विनम्रता के साथ बिना दिखावे के नेचर का काम है चीजें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना बदलना उठा के इधर-उधर रखना लगातार बदलाव पर टेंशन मत लो इसमें कुछ नया नहीं
268:11
Speaker A
है सब कुछ पहले से जानना पहचाना है। प्रपोशनंस भी वही है। हर प्रकार की नेचर आगे बढ़ने में ही ग्रो करती है। और एक समझदार दिमाग के लिए आगे बढ़ना मतलब है गलत या अनशोर चीजों को एक्सेप्ट ना
268:33
Speaker A
करना। सिर्फ उन एक्शंस का पीछा करना जो सेल्फलेस हो। सिर्फ उन्हीं चीजों को चाहना या अवॉइड करना जो उनके कंट्रोल में हो। जो नेचर उससे मांगती है या उसे अपनाना। जैसे पत्ता अपने पेड़ से जुड़ा होता है। पर फर्क यह
268:52
Speaker A
है कि पत्ता बिना सोचे समझ के नेचर में जुड़ा होता है और रुकावट में फंस सकता है। लेकिन इंसान की नेचर बिना रुकावट के समझदार और फेयर होती है। क्योंकि यह सब चीजों का बराबर का वक्त वजूद, पर्पस और
269:09
Speaker A
चांस देती है। ध्यान से देखना। पॉइंट टू पॉइंट नहीं पर टोटिटी में एक का वजन दूसरे के साथ तोल के देखना। पढ़ने का टाइम नहीं है पर अपनी ईगो कंट्रोल करने का टाइम है। दर्द और सुख से ऊपर उठने का टाइम है। लालच को पीछे छोड़ने
269:34
Speaker A
का टाइम है। बेवकूफ और रड लोगों से नाराज ना होने का टाइम है। बल्कि उनकी केयर करने का टाइम है। हां, इसके लिए टाइम है। कोर्ट की जिंदगी से परेशान होने की बात किसी को मत सुनाओ। अपने आप को भी
270:00
Speaker A
नहीं। पछतावा मतलब होता है खुद पर गुस्सा होना। क्योंकि तुमने कुछ ऐसा छोड़ दिया जो तुम्हारे लिए अच्छा था। पर अगर वह तुम्हारे लिए अच्छा था तो वह अच्छा ही होना चाहिए। ऐसा जो एक सच्चे अच्छे इंसान के लिए
270:18
Speaker A
इंपॉर्टेंट हो। और कोई भी सच्चा और अच्छा इंसान कभी पछतावा नहीं करता। अगर उसने कोई सुख का मोमेंट मिस कर दिया हो। तो इसका मतलब वह सुख तुम्हारे लिए ना तो अच्छा था ना ही फायदेमंद। यह चीज असल में क्या है? इसका
270:40
Speaker A
नेचर क्या है? इसकी बुनियाद क्या है? यह क्यों बनी है? यह दुनिया में क्या कर रही है? कितने टाइम तक यहां [संगीत] रहेगी? जब सुबह उठने में दिक्कत हो, याद रखना कि तुम्हारी असली पहचान क्या है? एक इंसान होने का मतलब है दूसरों के साथ
271:01
Speaker A
मिलकर काम करना। सोना तो जानवर भी जानते हैं। और जो काम तुम्हारे नेचर का हिस्सा है, वही सबसे नेचुरल और सुकून देने वाला होता है। हर सिचुएशन में अप्लाई करो फिजिक्स, एथिक्स और लॉजिक। जब किसी से डील करनी हो, खुद से
271:26
Speaker A
पूछो इसके लिए अच्छा और बुरा का मतलब क्या है? अगर वह प्लेजर और पेन और जो चीजें उन्हें लाती हैं फेम और शेम मौत और जिंदगी के बारे में कुछ अलग सोचता है तो उनका एक्स या व करना तुम्हें शॉक नहीं करना
271:42
Speaker A
चाहिए। असल में मुझे याद दिलाना चाहिए कि उनके पास असली में कोई चॉइस नहीं है। याद रखना जैसे तुम फिक ट्री से एक्सपेक्ट करते हो कि वह फिक्स ही उगाएगा। वैसे ही दुनिया भी वही देगी जो उनका नेचर
272:04
Speaker A
है। एक अच्छा डॉक्टर हैरान नहीं होता जब उनके पेशेंट को बुखार होता है और एक सेलर परेशान नहीं होता जब हवा उनके अपोजिट चलती है। याद रखना कि अपना ओपिनियन बदल लेना और करेक्शन लेना यह भी फ्री एक्ट्स हैं। यह
272:27
Speaker A
एक्शन तुम्हारे हैं। तुम्हारी मर्जी, तुम्हारा डिसीजन और तुम्हारा ही माइंड। अगर वह तुम्हारे कंट्रोल में है तो फिर तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? और अगर किसी और के कंट्रोल में है तो किसी पर ब्लेम डाल रहे हो। एटम्स पे, भगवान
272:50
Speaker A
पे। दोनों ही केस में बेवकूफी है। किसी पर ब्लेम मत डालो। अगर हो सके तो उन्हें सुधारो नहीं तो जो डैमेज हुआ है उसे ठीक करो और अगर वह भी नहीं हो सकता तो ब्लेम करके क्या मिलेगा बिना मतलब के एक्शंस मत
273:13
Speaker A
करो जो चीज मर जाती है वह गायब नहीं होती वह इसी दुनिया में रहती है बदल जाती है घुल जाती है इस दुनिया के पार्ट्स बन जाती है और तुम्हारी भी और यह सब फिर से बदलते रहते हैं बिना शिकायत
273:33
Speaker A
के। हर चीज किसी पर्पस के लिए बनी है। घोड़ा हो या बेल का पौधा। इसमें हैरानी कैसी? सूरज भी बोलेगा मेरा भी यह काम है और दूसरे देवता भी और तुम किस लिए पैदा हुए थे? सिर्फ सुख के लिए। सोच लो। क्या
273:52
Speaker A
यह जवाब टिक पाएगा? नेचर एक ऐसे इंसान की तरह है जो बॉल को हवा में फेंकता है। उनका ऊपर जाना, कर्व लेना और नीचे गिरना सब मिश्र करता है। और जब बॉल ऊपर जाती है तो उसे क्या मिलता है या नीचे गिरने पर क्या चला जाता
274:18
Speaker A
है? एक बबल को क्या मिलता है जिंदा रहकर? और बस्ट होते ही क्या चला जाता है? एक कैंडल भी वैसे ही है। उसे उल्टा करो। वह चीज अंदर से कैसे दिखती है जब वह बूढ़ी हो जाए या बीमार या
274:40
Speaker A
बाजार में अपने आप को बेचती हो। वह सब लोग जल्दी मर जाते हैं जो तारीफ करते हैं और जिनकी तारीफ होती है। दोनों याद करने वाले और जिनको याद किया जाता है सब चाहे यहां या इसके एक कोने
274:56
Speaker A
में और वहां भी लोग एक दूसरे से एग्री नहीं करते कभी खुद से भी नहीं और पूरी धरती तो सिर्फ एक पॉइंट है स्पेस में। सिर्फ जो तुम्हारे सामने है उसी पर ध्यान दो। आईडिया, काम, बोलना। यही तुम डिजर्व करते हो। तुम आज भी अच्छे
275:22
Speaker A
बन सकते हो। पर तुमने कल चुना। जो मैं करता हूं, वह मैं इंसानियत के लिए करता हूं। जो मेरे साथ होता है, मैं उसे एक्सेप्ट करता हूं और उसे भगवान को समर्पित करता हूं। उस सोर्स को जहां से
275:42
Speaker A
सब कुछ निकलता है। जैसे कि बात्स, तेल, पसीना, गंदगी, ग्रेश, पानी सब कुछ घटिया लगता है। जिंदगी का पूरा सफर पूरी जो दिखाई देने वाली दुनिया है। वेरस लुसिला को छोड़कर गया। फिर लुसिला मैक्सिममस स्कंडा को छोड़कर गया और
276:11
Speaker A
फिर स्कंडा। डोटिमस एपिटकेनस को छोड़कर गया। फिर एपिकेनस फस्तना एंटोनस को छोड़कर गई और फिर एंटोनिनस तो सबके साथ ऐसा ही हुआ। हेड्रियन सेलर को छोड़कर गया और सेलर कहां गए वो लोग जो ब्रिलियंट थे जो इंसाइडफुल थे जो घमंड से भरे थे।
276:37
Speaker A
ब्रिलियंट जैसे चेरेक्स, डिमिट्रियस, द प्लेटनिस्ट, यूमोन और बाकी सब। छोटी जिंदगी वाले क्रिएचर्स जो अब काफी टाइम पहले मर चुके हैं। कुछ को याद नहीं रखा गया। कुछ कहानी बन गए। कुछ लेजेंड में भी खो गए। तो याद रखना तुम्हारे पार्ट्स भी
277:01
Speaker A
टूटेंगे। तुम्हारे अंदर की जिंदगी भी बुझ जाएगी या तुम्हारे लिए नए ऑर्डर्स आएंगे और एक और पोस्टिंग इंसानों के लिए खुशी इंसान के कामों में होती है। इंसान के काम है दूसरों के लिए दयालु होना। इंद्रियों का अपमान करना।
277:24
Speaker A
चीजों की तस्वीर को समझना। प्रकृति और प्रकृति के घटनाओं को देखना। तीन रिश्ते तुम्हारे शरीर से जिसमें तुम हो डिवाइन से जो हर चीज का कारण है तुम्हारे आसपास के लोगों से या तो दर्द शरीर को अफेक्ट करता है जो
277:52
Speaker A
शरीर का प्रॉब्लम है या यह आत्मा को अफेक्ट करता है। पर आत्मा चूज कर सकती है कि वह अफेक्ट ना हो। अपनी शांति, अपने सुकून को बनाए रखें। हमारे सब डिसीजंस, अर्जस, डिजायर्स, अवर्जंस हमारे अंदर ही होते हैं। कोई भी बुराई उन्हें टच नहीं कर
278:15
Speaker A
सकती। गलत परसेप्शन को हटाने के लिए अपने आप से कहना मुझ में यह एबिलिटी है कि मैं अपनी आत्मा को बुराई, लालच और सब कंफ्यूजन से दूर रखूं। चीजों को वैसे ही देखूं जैसी वह हैं और उन्हें वैसे ही ट्रीट करूं जैसे वह
278:38
Speaker A
डिर्व करती हैं। इस इनेटबिलिटी को कभी नजरअंदाज मत करो। सेनेट से या किसी से बात करते वक्त सही टोन में बात करना। बिना ज्यादा घमंड किए सही शब्दों का चुनाव करना। अगस्तस का कोट उसकी वाइफ उसकी बेटी उसके
279:05
Speaker A
पोते स्टेप्स बहन एग्रीपा रिलेटिव्स सर्वेंट्स फ्रेंड्स एरियर्स डॉक्टर्स सैक्रिफिशियल प्रिस्ट पूरा कोर्ट मर चुका और बाकी लोगों के बारे में सोचना सिर्फ इंडिविजुअल डेथ्स का नहीं जैसे पमपे के परिवार की डेथ वो जो लाइन होती है टॉम्स लास्ट
279:29
Speaker A
सर्वाइविंग डिसेंडेंट उनके एनसेेस्टर्स की चिंता कि कोई सक्सेसर हो पर किसी को तो लास्ट बनना ही पड़ता है। वहां भी एक पूरे घर की डेथ तुम्हें अपनी जिंदगी खुद असेंबल करनी है। एक्शन बाय एक्शन और खुश रहना अगर हर
279:49
Speaker A
एक काम अपने गोल को अचीव कर रहा है। जितना हो सकता है कोई भी तुम्हें इसे रोक नहीं सकता। पर कुछ एक्सटर्नल ऑब्सकल्स हैं। कोई बात नहीं। वह तुम्हारे जस्टिस, सेल्फ कंट्रोल और अच्छे सेंस को बिहेव करने में रुकावट
280:06
Speaker A
नहीं डाल सकते। पर हो सकता है कुछ और कंक्रीट एकशंस में रुकावट हो। लेकिन अगर तुम ऑब्सकल को एक्सेप्ट कर लो और जो तुम्हें दिया गया है उसे काम करो। एक अल्टरनेटिव जरूर मिलेगा। एक और पीस तुम्हारे काम का एक्शन बाय
280:31
Speaker A
एक्शन उसे बिना घमंड के एक्सेप्ट करो बिना कोई इमोशन के उसे छोड़ दो। क्या तुमने कभी देखा है एक काटा गया हाथ या पैर या एक काटा गया सर जो अपने बॉडी से दूर कहीं पड़ा हो। हम अपने आप को ऐसे कर रहे हैं या करने की
280:53
Speaker A
कोशिश कर रहे हैं। जब हम जो हमें हो रहा है उसे रिबल करते हैं। जब हम अपने आप को सेग्रगेट करते हैं या जब हम सेल्फिश होते हैं। तुम अपने आप को यूनिटी से अलग कर रहे हो। तुम्हारे नेचुरल स्टेट से जो तुम्हारे
281:10
Speaker A
लिए बनाया गया था। अब तुम उससे अलग हो गए हो। लेकिन तुम्हारे पास एक एडवांटेज है यहां। तुम अपने आप को वापस जोड़ सकते हो। यह एक ऐसा प्रिविलेज है जो भगवान ने किसी और पार्ट को नहीं दिया। अलग होना,
281:27
Speaker A
कटना और फिर वापस जुड़ना। लेकिन देखो कैसे भगवान ने हमें यह अलऊ किया है। उन्होंने हमें पहले से टूटने नहीं दिया और जब हम टूट जाते हैं तो हमें वापस आने का मौका दिया है। अपने पुराने पोजीशन को वापस लेना एक पूरे का हिस्सा।
281:51
Speaker A
हमारे पास अलग-अलग तरह की एबिलिटीज होती हैं जो हर समझदार इंसान में होती हैं। यह उनमें से एक है। जैसे नेचर हर रुकावट, हर प्रॉब्लम को ले काम करती है। उसे अपने काम का हिस्सा बना लेती है। वैसे ही एक समझदार
282:10
Speaker A
इंसान हर सेटबक को रॉ मटेरियल की तरह यूज करके अपने गोल तक पहुंच सकता है। अपनी सोच को पूरी जिंदगी के बोझ से मत कुचल दो। हर बुरी चीज जो हो सकती है उसकी तस्वीर मत बनाओ। सिर्फ जो अब हो रहा है
282:28
Speaker A
उसी पर ध्यान दो और पूछो। यह इतना अनबियरेबल क्यों लगता है? मैं इसे क्यों नहीं झेल सकता? तुम्हें जवाब देते हुए शर्म आएगी। फिर याद दिलाओ अपने आप को कि पास्ट और फ्यूचर का तुम पर कोई पावर नहीं। सिर्फ
282:47
Speaker A
प्रेजेंट है और वह भी छोटा सा है। उसकी बाउंड्रीज सेट करो और अगर तुम्हारा दिमाग कहे कि वो इसे झेल नहीं सकता तो उसे शर्म का एहसास दिलाओ। क्या पैंथिया या पैरगमोस अभी वेरस की कब्र पे पहरा दे रहे हैं?
283:09
Speaker A
चबेरियाज या डटिमस हेड्रियन के कब्र पर हैं। बिल्कुल नहीं। क्या एपरर्स को पता होता अगर वह होते? और अगर पता होता तो क्या उन्हें खुशी होती? और अगर होती भी तो क्या वो मोर्नर्स हमेशा जिंदा रहते? क्या उनका भी
283:27
Speaker A
बूढ़ा होकर मरना लिखा नहीं था? और जब वह मर गए तब एपररर्स क्या करते?
283:39
Speaker A
सड़ने की बदबू एक बैग में सड़ता हुआ मांस सीधे देखना सीखो अगर देख सकते हो तो मेरे हिसाब से जब मैं इंसान के कैरेक्टर को देखता हूं तो मुझे ऐसा कोई वर्चू नहीं दिखता जो जस्टिस का विरोध करता
283:58
Speaker A
हो। लेकिन प्लेजर के विरोध में एक चीज जरूर है सेल्फ कंट्रोल। जो दर्द तुम सिर्फ सोच रहे हो उसे सोचना बंद करो और तुम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। तुम तुम्हारा लोगस पर मैं सिर्फ लोगस तो नहीं हूं। ठीक है? पर कम से कम लोगस को
284:22
Speaker A
चोट ना पहुंचने दो। अगर कुछ और होता तो वह खुद डिसाइड करें कि उसे फर्क पड़ता है या नहीं। लिविंग बीइंग्स के लिए हार्मफुल वह होता है जो उनके सेंसेस को रोकता है या उनके इंटेंशन को पूरा करने से रोकता है।
284:45
Speaker A
प्लांट्स के लिए भी ऐसे ही रोके जाने वाले काम हार्मफुल होते हैं। समझदार इंसान के लिए भी जो उनके माइंड के काम में रुकावट डाले वह हार्मफुल होता है। इस रूल को अपने ऊपर अप्लाई करो। क्या दर्द और सुख तुम पर हावी हो रहे हैं?
285:03
Speaker A
तो उसे सेंसेस को हैंडल करने दो। क्या तुम्हारे एक्शनंस में रुकावट आई? अगर तुमने पहले से तैयारी नहीं की थी तो वह तुम्हारे लिए हार्मफुल है। एज अ रेशनल बीइंग। लेकिन अगर तुमने समझदारी से काम किया तो तुम्हें ना नुकसान हुआ ना
285:24
Speaker A
रुकावट। किसी भी चीज से तुम्हारे माइंड के काम को रोका नहीं जा सकता। आग से नहीं, तलवार से नहीं, ना टरेंट से, ना गाली से, किसी भी चीज से नहीं। जब तक वह एक स्फीयर है जो परफेक्ट शांति में
285:44
Speaker A
है। मुझे खुद को चोट पहुंचाने का कोई हक नहीं। क्या मैंने कभी किसी और को चोट पहुंचाई है? अगर मैं उसे रोक सकता था। लोग अलग-अलग चीजों में सुख ढूंढते हैं। मैं सुख ढूंढता हूं अपने माइंड को क्लियर
286:04
Speaker A
रखने में। लोगों से या उनकी मुश्किलें देख के मैं मुंह नहीं मोड़ता। जो कुछ भी देखता हूं उसे एक्सेप्ट करता हूं। वेलकम करता हूं। हर चीज के साथ वैसे ही बिहेव करता हूं जैसा वह डिर्व करती है। अपने आप को एक गिफ्ट दो। प्रेजेंट मोमेंट।
286:27
Speaker A
जो लोग मरने के बाद की फेम के पीछे भागते हैं, वह भूल जाते हैं कि फ्यूचर के लोग भी वही इरिटेटिंग लोग होंगे जैसे अब हैं। और वह भी मरने वाले हैं। तो क्या फर्क पड़ता है? अगर वह तुम्हारे बारे में कुछ एक्स
286:42
Speaker A
कहेंगे या व सोचेंगे। उठाओ मुझे और जहां चाहो वहां फेंक दो। मेरा स्पिरिट वहीं खुश रहेगा। शांत और सेटिस्फाइड। जब तक वह अपने नेचर के हिसाब से जीता रहेगा और काम करता रहेगा। क्या कोई वजह है कि मेरी सोल दुखी
287:06
Speaker A
हो, टूट जाए, दब जाए, घबरा जाए? नहीं, कोई वजह नहीं। जो इंसान फील करता है वह इंसान के एक्सपीरियंस का हिस्सा है। बैल का अनुभव बैलों के एक्सपीरियंस का बेल के लिए वह बेल का पत्थर के लिए पत्थर
287:28
Speaker A
का। कुछ भी जो हो सकता है वह ना अजीब है ना अननेचुरल। और कंप्लेन करने का कोई मतलब नहीं। नेचर कभी ऐसी चीज बनाते ही नहीं जो बर्दाश्त से बाहर हो। बाहर की चीजें प्रॉब्लम नहीं है। प्रॉब्लम है तुम्हारा उनके बारे में
287:53
Speaker A
सोचना। और उस सोच को तुम अभी तुरंत मिटा सकते हो। अगर प्रॉब्लम तुम्हारे अपने कैरेक्टर में है तो कौन रोक रहा है तुम्हें अपने दिमाग को सीधा करने से? और अगर प्रॉब्लम यह है कि तुम वह नहीं कर रहे जो तुम्हें
288:10
Speaker A
लगता है करना चाहिए तो बस जाकर करो ना लेकिन रुकावट इतनी बड़ी है कि कर ही नहीं सकते तो फिर यह प्रॉब्लम ही नहीं है। तुम्हारा कुछ ना कर पाना तुम्हारे बाहर की वजह से है। पर अगर वह काम अधूरा रह गया तो
288:28
Speaker A
मैं कैसे जी सकता हूं? तो फिर शांति के साथ चले जाओ। जैसे कि तुमने वह काम पूरा किया हो। रुकावटों को भी गले लगाते हुए याद रखो जब दिमाग अपने अंदर लौट जाता है और वहां खुशी से रहता है तब वह किसी भी
288:48
Speaker A
चोट से बच जाता है वह कभी कुछ जबरदस्ती नहीं करता चाहे उनका विरोध बेकार ही क्यों ना हो और अगर उनका फैसला सोच समझ के और रीजन पर हो तो फिर वह दिमाग एक किला बन जाता है एक फोर्ट सबसे सुरक्ष सुरक्षित
289:04
Speaker A
जगह जब हम वहां चले जाते हैं, हम हमेशा के लिए सेफ हो जाते हैं। अगर तुम्हें यह समझ नहीं आता, तो यह इग्नोरेंस है और अगर समझ के भी उसमें पनाह नहीं लेते तो यह दुख है। बस वही माना करो जो तुम्हारे सामने
289:24
Speaker A
दिखता है। जैसे किसी ने तुम्हें इंसल्ट किया। यह तो दिखता है। लेकिन यह नहीं कि उसने तुम्हें नुकसान पहुंचाया। मेरा बेटा बीमार है। यह मैं देख सकता हूं। लेकिन वह मर भी सकता है। यह नहीं। बस जो सामने है उसी तक रहो। आगे मत सोचो। तब
289:43
Speaker A
तुम्हारे साथ कुछ बुरा नहीं हो सकता। यह अगर आगे सोचना ही है तो फिर उस नजरिए से सोचो जो दुनिया के हर मुमकिन चीज को समझता हो। खीरा कड़वा है तो फेंक दो। रास्ते में कांटे हैं तो घूम
290:05
Speaker A
जाओ। बस यही जानना काफी है। इससे ज्यादा कुछ जानने की जरूरत नहीं। यह मत पूछो ऐसा क्यों होता है? जो इंसान दुनिया को समझता है, वह तुम पर हंसेगा। जैसे एक कारपेंटर हंसेगा अगर तुम उनके वर्कशॉप में शॉर्ट
290:22
Speaker A
डस्ट देखकर हैरान हो जाओ या एक मोची लेदर के टुकड़ों पर। हां, उनके पास तो बचा हुआ माल फेंकने की जगह होती है। पर नेचर के पास ऐसा कोई डोर नहीं है जहां से वह चीजें बाहर फेंक सके।
290:39
Speaker A
पर सबसे अच्छी बात यह है कि नेचर अपने उस लिमिटेशन के साथ भी हर पुरानी टूटी बेकार चीज को ले कुछ नया बनाती है। उसे किसी बाहर की मदद नहीं चाहिए होती। ना स्पेस ना मटेरियल ना लेबर। वह
290:56
Speaker A
अपने आप ही सब कुछ बना लेती है। अपने काम में कोई लापरवाही नहीं। अपनी बातों में कोई उलझन नहीं। अपने सोचने में कोई धुंध नहीं। अपने अंदर भागने की कोशिश भी नहीं और ज्यादा करने की चाहत भी नहीं।
291:17
Speaker A
वह तुम्हें मारते हैं, छोरी से काट देते हैं, गालियां देते हैं। क्या इससे तुम्हारा दिमाग अपनी क्लेरिटी, समझदारी, पेशेंस और इंसाफ से कट जाता है? सोचो। एक आदमी एक साफ मीठा पानी देने वाले स्प्रिंग के पास खड़ा हो और खड़े होकर उसे
291:39
Speaker A
गाली दे रहा है। लेकिन वह स्प्रिंग तो फ्रेश पानी देता ही जा रहा है। वह चाहे उसमें कीचड़ डाले या गंदगी पानी उसे बहा के ले जाता है। अपने आप को साफ कर लेता है। गंदा नहीं होता। ऐसा बनना है। तालाब नहीं बल्कि एक
291:56
Speaker A
कभी ना रुकने वाला स्प्रिंग। कैसे? अपनी आजादी जीतने के लिए मेहनत करके हर घंटे पेशेंस, ईमानदारी और विनम्रता के साथ। अगर तुम नहीं जानते दुनिया क्या है तो तुम यह भी नहीं जानते कि तुम कहां हो। अगर तुम नहीं जानते यह क्यों है तो तुम यह
292:20
Speaker A
भी नहीं जान सकते कि तुम कौन हो और यह क्या है। और अगर तुम यह सब नहीं जानते तो तुम यह भी नहीं जानते कि तुम यहां क्यों हो। तो सोचो उन लोगों के बारे में जो ऐसे लोगों की तालियों के लिए तरस रहे हैं जो
292:40
Speaker A
खुद नहीं जानते कि वह कौन है और कहां है। तुम उन लोगों से तारीफ चाहते हो जो हर 15 मिनट में खुद से नाराज हो जाते हैं। उनकी अप्रूवल चाहते हो जो खुद से नफरत करते हैं। क्या हर काम के बाद पछताना अपने आप
293:01
Speaker A
से इज्जत का निशान है? हमें सिर्फ हवा से नहीं जो हम सांस लेते हैं बल्कि रीजन से भी जुड़ना चाहिए जो हर चीज को अपने अंदर समेट के रखता है। सोच के जरिए जैसे हवा हर जगह है सांस लेने
293:18
Speaker A
वालों के लिए वैसे ही रीजन भी हर जगह है उनके लिए जो उसे अपनाते हैं। बुराई का होना दुनिया को नुकसान नहीं पहुंचाता और किसी एक बुरा काम से विक्टिम को भी नुकसान नहीं होता। सिर्फ वही इंसान नुकसान उठाता है जो उसे
293:41
Speaker A
करता है और वह तुरंत इससे बच सकता है अगर वह चाहे। दूसरे लोगों की इच्छाएं मेरी इच्छाओं से अलग हैं। जैसे उनकी सांस और उनका शरीर। हम एक दूसरे के लिए हैं। पर हर किसी की मर्जी अपने एरिया में रखने वाली होती है। वरना
294:01
Speaker A
उनका किया हुआ नुकसान मुझे भी दुख दे सकता है। लेकिन भगवान ने ऐसा नहीं चाहा। मेरी खुशी किसी और के हाथों में ना हो। हम कहते हैं कि सूरज की रोशनी हम पर गिर रही है। चारों तरफ से आ रही है। पर वह कभी
294:21
Speaker A
खत्म नहीं होती क्योंकि वह असल में गिरती नहीं वह फैलती है। उसकी रेस का मतलब ही है फैलना। अगर तुम सूरज की रोशनी देखना चाहते हो तो देखो कैसे एक पतले रास्ते से अंधेरे रूम में घुस रही है। सीधी लाइन में फैलती है।
294:38
Speaker A
किसी चीज से टकराती है तो वहीं रुक जाती है। उनके आगे नहीं जाती पर वह रोशनी खत्म नहीं होती। गिरती नहीं। वैसे ही होनी चाहिए। सोच का फैलाव खाली नहीं होना चाहिए। फैलना चाहिए। रुकावट से टकराकर गुस्सा नहीं करना चाहिए।
294:57
Speaker A
ना ही हार माननी चाहिए। बस वही रहो जहां हो और जो सामने है उसे रोशन करो। जो रोशनी को आगे नहीं बढ़ने देता वह अपने आप अंधेरा पैदा करता है। मौत का डर असल में इस बात का डर है कि
295:19
Speaker A
हमें क्या महसूस होगा या तो कुछ नहीं या कुछ नया। अगर कुछ भी महसूस नहीं होगा तो बुरा भी कुछ महसूस नहीं होगा और अगर कुछ नया महसूस होता है तो हमारा जीवन बदलेगा खत्म नहीं होगा बस बदलेगा
295:40
Speaker A
लोग एक दूसरे के लिए होते हैं तो उन्हें या तो समझा सकते हो या बर्दाश्त कर सकते हो तीर एक तरफ चलता है और दिमाग दूसरी तरफ जब सोचता है, जब डिसाइड करता है, तब भी दिमाग आगे ही बढ़ रहा होता है। अपने
296:02
Speaker A
गोल की [संगीत] तरफ। दूसरों के दिमाग में उतरो और उन्हें अपने दिमाग में आने दो। बुक न अन्याय करना एक तरह की भगवान की निंदा है। नेचर ने सोचने वाले इंसानों को एक दूसरे के लिए बनाया है। मदद करने के लिए
296:31
Speaker A
नुकसान देने के लिए नहीं। तो अगर कोई इस नियम के खिलाफ जाता है तो वह सबसे पुराने देवता के खिलाफ जा रहा है और झूठ बोलना भी नेचर के खिलाफ है। क्योंकि नेचर का मतलब होता है वही जो
296:48
Speaker A
सच है और जो सच है वही नेचर का हिस्सा है। तो झूठ बोलना मतलब नेचर के खिलाफ जाना। चाहे जानबूझ के झूठ बोलो या बिना समझे। दोनों ही तरीके से नेचर का बैलेंस बिगड़ता है। ऐसा इंसान दुनिया के नेचुरल ऑर्डर के
297:08
Speaker A
अगेंस्ट जा रहा होता है। नेचर ने उसे सच और झूठ को समझने का दिमाग दिया था। पर उसने उनका इस्तेमाल नहीं किया। और अगर तुम प्लेजर को अच्छा समझते हो और दर्द से डरते हो तो वह भी नेचर के
297:24
Speaker A
खिलाफ है। क्योंकि ऐसे इंसान नेचर से हमेशा शिकायत करेगा। कि अच्छों को दर्द मिलता है और बुरे लोग मजे ले रहे हैं। दर्द से डरना भी एक प्रकार का भगवान का अपमान है क्योंकि दर्द तो कभी ना कभी सबको
297:41
Speaker A
मिलता ही है और प्लेजर के पीछे भागना अक्सर गलत काम करवाता है जो कि बिल्कुल ही नेचर के खिलाफ होता है। कुछ चीजों के लिए नेचर बिल्कुल न्यूट्रल है। अगर वह प्लेजर को पेन से बेटर मानता तो दोनों चीजें बनाता ही
298:00
Speaker A
क्यों? अगर हमें नेचर का साथ देना है तो उसकी तरह हमें भी न्यूट्रल रहना होगा। अगर हम प्लेजर को पेन से जिंदगी को मौत से फेम को नाम गुम होने से बेटर समझते हैं तो हम नेचर का अपमान कर रहे हैं।
298:18
Speaker A
क्योंकि नेचर तो ऐसा नहीं करती। और जब मैं कहता हूं कि नेचर न्यूट्रल है तो मेरा मतलब यह है कि यह सब चीजें रैंडमली होती हैं। एक एंशिएंट डिवाइन प्लान के तहत जहां से सब कुछ शुरू हुआ वहीं से यह रूल्स बने। जिनके बेस पर हर
298:37
Speaker A
चीज बनती है, बदलती है और आगे बढ़ती है। सबसे बड़ी किस्मत यह होती कि इंसान बिना कभी झूठ, दिखावा, नफरत या घमंड देखे ही दुनिया से चला जाए। लेकिन उससे कम किस्मत यह है कि तुम तब जाओ जब तुम्हें सब कुछ देख के अब और जीने का
299:02
Speaker A
मन ना हो। या तुम अब भी गलत के साथ जीना चाहते हो क्या अब तक तुम्हें यह समझ नहीं आया कि बुराई से दूर रहना चाहिए क्योंकि बुराई एक बीमारी है। एक जहरीला रोग जो तुम्हारी इंसानियत को खा जाता है। वह किसी
299:18
Speaker A
वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है। मौत से डरो मत। उसे अपनाओ। मौत भी नेचर का एक हिस्सा है। जैसे जवानी और बुढ़ापा जैसे दांत का आना, दाढ़ी का उगना, सफेद बाल जैसे सेक्स, प्रेगनेंसी और बच्चा पैदा होना। हर स्टेज की बॉडी चेंज करती
299:43
Speaker A
है। वैसे ही मौत भी एक चेंज है। तो एक समझदार इंसान को मौत का इंतजार कैसे करना चाहिए? ना बेपरवाह होकर, ना घबरा के, ना नफरत से। बल्कि सिंपल तरीके से जैसे किसी और नॉर्मल चीज का जैसे तुम मां के पेट से बच्चे के
300:03
Speaker A
बाहर आने का इंतजार करते हो वैसे ही तुम्हें अपने सोल के बॉडी से निकलने का इंतजार करना चाहिए। अगर तुम्हें कोई छोटी सी लाइन चाहिए जो दिमाग में रहे तो यह दो बातें सोचो जो मौत को आसान बना सकती हैं।
300:19
Speaker A
तुम्हारे जीने के बाद जो चीजें छूटी जाएंगी उनकी नेचर क्या है? और जो लोग तुमसे अलग हो जाएंगे उनका असली चेहरा क्या है? उनसे नफरत मत करो। तुम्हें उनके भले की चिंता करनी चाहिए। प्यार दिखाना चाहिए। लेकिन याद रखो जो तुम मानते हो वह उनके
300:40
Speaker A
लिए बेकार है। बस यही एक वजह हो सकती है यहां रुकने की कि तुम उन लोगों के साथ जी पाते जो तुम्हारी सोच समझते हैं। लेकिन अब देखो इस दुनिया का शोर कितना थकाने वाला है। ऐसा लगता है कह दो मौत से। जल्दी आजा।
300:59
Speaker A
इससे पहले कि मैं भी अपने आप को उन जैसा भूल जाऊं। किसी को नुकसान पहुंचाना मतलब खुद को नुकसान पहुंचाना। गलत काम करना मतलब खुद के साथ गलती करना। यह तुम्हें नीचा दिखाता है। कभी-कभी कुछ ना करना भी गलत काम होता है।
301:21
Speaker A
बिल्कुल अभी के अभी सही तरीके से सोचना। बिल्कुल अभी के अभी बिना स्वार्थ के काम करना। बिल्कुल अभी के अभी जो भी बाहर से हो रहा है उसे खुशी से मान लेना। बस यही काफी है। कल्पना को मिटा दो। अपने चाह को पत्थर
301:42
Speaker A
बना दो। अपने इच्छाओं को बुझा दो। अपना ध्यान सिर्फ अपने मन पर रखो। जिन जानवरों के पास सोचने की शक्ति नहीं होती। उनमें एक ही प्रकार की सोल होती है। और जिनमें सोचने की शक्ति होती है उनमें भी एक ही सोल होती है। सोचने
302:01
Speaker A
वाली। जैसे सब पृथ्वी पर रहने वाले एक ही जमीन पर हैं। वैसे सब लोग एक ही रोशनी से देखते हैं और एक ही हवा से सांस लेते हैं। हर चीज अपनी जैसी चीज की तरफ खींचती है अगर वह एक्सिस्ट करती है। जमीन की
302:23
Speaker A
चीजें जमीन की तरफ गिरती हैं। गीली चीजें एक साथ बहती हैं और जो चीजें हवा से बनी हैं उन्हें अलग रखना पड़ता है क्योंकि वह मिल जाने के लिए तैयार रहती हैं। आग ऊपर उठती है और जरा सी चिंगारी से जल उठती है।
302:39
Speaker A
इसलिए जो चीजें ज्यादा सुखी होती हैं, वह अच्छा ईंधन बनती है क्योंकि उनमें रुकावट कम होती है। और जो चीजें सोचने वाली होती हैं, वह भी एक दूसरे के पास जाना चाहती हैं। शायद और भी ज्यादा क्योंकि जैसे वह बाकी चीजों में
302:58
Speaker A
बेहतर होती हैं, वैसे ही मिलने के लिए भी ज्यादा तैयार रहती हैं। बेवकूफ जानवरों में भी तुम देखते हो कि वह झुंड में रहते हैं। अपने लिए जगह बनाते हैं और एक दूसरे से प्यार करते हैं। क्योंकि उनमें भी सोल होती है और एक
303:16
Speaker A
प्राकृतिक बॉन्डिंग होती है जो पौधों, पत्थरों और पेड़ों में नहीं होती। और यह बॉन्डिंग इंसानों में और भी ज्यादा होती है उनके रिश्ते, दोस्ती, परिवार, समुदाय, समझौते और शांति समझौतों के थ्रू। और जो इंसान और भी ज्यादा डेवलप
303:39
Speaker A
होते हैं उनमें एक अलग तरह की एकता होती है। जैसे तारे आसमान में होते हैं। उनमें दूर रहकर भी एक समन्वय होता है। पर अब देखो क्या हो रहा है। सिर्फ सोचने वाले ही लोग आपस के अट्रैक्शन भूल गए हैं। सिर्फ वही
303:56
Speaker A
यह नेचुरल कनेक्शन नहीं दिख रहा। लेकिन जितना भी वह अलग रहना चाहे वह कभी बच नहीं सकते। नेचर उनसे ज्यादा पावरफुल है। अगर ध्यान से देखो तो तुम्हें समझ आएगा। चीजें जमीन से अलग हो सकती हैं। पर इंसान
304:13
Speaker A
इंसानियत से नहीं बच सकता। [संगीत] इंसान, भगवान और दुनिया तीनों का अपना फल होता है। हर चीज अपने समय पर फल देती है। हम यूजुअली जो शब्द सिर्फ अंगूरों या पौधों के लिए यूज करते हैं, जरूरत नहीं है। लोगस का फल हमको भी पोषण देता है और
304:35
Speaker A
उसको भी और भी चीजें उससे निकलती हैं। उसी की जैसी उन्हें मना लो अगर कर सको और अगर ना कर सको तो याद रखो सब्र इसलिए दिया गया है भगवान भी उन लोगों पर दया करते हैं उन्हें सेहत पैसा नाम सब देते हैं यह उनकी दया है
305:00
Speaker A
और तुम भी ऐसा कर सकते हो अगर चाहो तुम्हें किसने रोका है कहा ना इसलिए कि लोग तुमसे दुख दुख महसूस करें ना इसलिए कि तारीफ मिले सिर्फ इसलिए कार्य हो शांति हो जैसे एक सामाजिक इंसान से उम्मीद की जाती
305:22
Speaker A
है आज मैं चिंता से बच गया नहीं सच तो यह है कि मैंने उसे छोड़ दिया क्योंकि वह मेरे अंदर थी मेरे सोचने के तरीके में बाहर नहीं बहुत सालों का तजुर्बा छोटी सी जिंदगी और सब कुछ जो अंदर से कमजोर सब वही
305:41
Speaker A
है। आज भी वही जैसे उन दिनों में था जब हमने उन लोगों को दफना दिया था। चीजें हमेशा हमारे बाहर होती हैं। दरवाजे के पास खड़ी रहती हैं। वह खुद के बारे में कुछ नहीं कहती। उनसे पूछो कि तुम कौन हो?
306:01
Speaker A
तो वह जवाब नहीं दे सकती। उनका मतलब समझाता कौन है? मन समझाता है। बाकी चीजें हमारे साथ होती हैं। लेकिन असली चीज है हम क्या करते हैं? यही अच्छाई और बुराई का सोर्स है। सोचने वाले और सामाजिक जीव के लिए
306:23
Speaker A
सबसे इंपॉर्टेंट चीज यही है। अच्छाई या बुराई इसमें नहीं कि हमें क्या मिला बल्कि इसमें है कि हमने क्या किया। पत्थर अगर हवा में उछलता है तो ऊपर जाकर कुछ नहीं जीतता। नीचे गिर के कुछ नहीं हारता। उनके दिमाग में जाओ जिनके तुम इतने
306:44
Speaker A
डरे हुए हो। और देखो वह खुद को कैसे जज करते हैं। सब कुछ बदल रहा है। तुम भी इस चक्कर में बदलोगे और खत्म हो जाओगे। दुनिया भी। दूसरों की गलतियां वहीं छोड़ दो जहां वह हैं। जब हम कोई काम बंद कर देते हैं या
307:03
Speaker A
किसी सोच को पूरा कर लेते हैं तो वह भी एक तरह का मरना ही होता है और उससे हमें कोई नुकसान नहीं होता। अपनी जिंदगी के बारे में सोचो। बचपन, जवानी, बुढ़ापा, हर बदलाव एक तरह का छोटा मरना ही तो है। क्या वह इतना बुरा
307:23
Speaker A
था? दादाजी के साथ जिंदगी मां के साथ जो पिता जैसे थे उनके साथ सब कुछ सोचो। कितने मरने जैसे पल गुजरे और पूछो अपने आप से क्या वह इतना बुरा था? तो तुम्हारी जिंदगी का अंतिम मोड़ भी वैसे ही
307:41
Speaker A
होगा। एक और बदलाव। सीधा अपने मन के सेंटर तक जाओ। अपने दुनिया के और सामने वाले के अपने ताकि इंसाफ पर टिक जाओ दुनिया के ताकि याद रहे कि तुम किस चीज का हिस्सा हो सामने वाले के ताकि समझ सको कि वह जानता नहीं है या
308:10
Speaker A
जानबूझकर करता है और समझ जाओ कि वह भी तुम्हारे जैसा ही है। तुम जब जिंदा हो तब समाज का हिस्सा हो तो अपने काम से भी समाज में हिस्सा लो हर काम से जो भी काम समाज के लिए नहीं
308:32
Speaker A
है वह तुम्हारी जिंदगी में दिक्कत लाता है टूटफूट लाता है जैसे कोई आदमी सभा में हो पर अपने ही रास्ते पर हो सबसे अलग बच्चों की जिद बच्चों का खेल खेल आत्माएं लाश ले जा रही हैं। ओसियस ने नीची
308:52
Speaker A
दुनियाओं में ज्यादा असली जिंदगी देखी। हर चीज का मकसद समझो। क्यों वो है जो है उनके फॉर्म को भूल जाओ। फिर अंदाजा लगाओ कि वह चीज कितनी देर तक रहनी थी। इतना दर्द सिर्फ इसलिए है क्योंकि हम अपने मन को अपने काम नहीं करने देते। अब
309:16
Speaker A
और नहीं। जो कोई तुमसे नफरत करे या बुरा बोले तो उनके अंदर जाओ। उनका सोल देखो। समझो वो कैसा इंसान है। तुम्हें उसे इंप्रेस करने की जरूरत महसूस नहीं होगी। लेकिन तुम्हें उनके लिए अच्छा सोचना चाहिए। वह तुम्हारा सबसे करीबी है। भगवान
309:42
Speaker A
उसकी भी मदद करते हैं जैसे तुम्हारी सपनों से, संकेत से, हर तरीके से ताकि उसे भी वह मिले जो वह चाहता है। दुनिया हमेशा एक जैसी घूमती है ऊपर नीचे हर दौर में। या तो दुनिया का बुद्धि सब कुछ डिसाइड
310:04
Speaker A
करता है। अगर हां तो उसकी मर्जी मान लो या फिर उसने एक बार सब फिक्स कर दिया था। और बाकी सब उसी का रिजल्ट है। अगर हां तो चिंता क्यों? किसी भी तरीके से चाहे एटम हो या एकता। अगर भगवान है तो सब सही है। अगर सब
310:21
Speaker A
रैंडम है तो तुम उस जैसे मत बनो। जमीन सबको ढग लेगी फिर बदलेगी। फिर फिर से बदलेगी बिना रुके। सोचो इन सबके बारे में बदलाव के लहरों जैसे और समझो कि तुम्हारी छोटी सी जिंदगी क्या है। दुनिया का जो डिजाइन है वह एक बाढ़ की
310:44
Speaker A
तरह है। सब कुछ बहा ले जाता है और लोग कितने बेवकूफ हैं। छोटी सोच वाले लोग जो राजनीति में बिजी हैं या फिलॉसफी में या जो वह सोचते हैं कि फिलॉसफी है सब कुछ सिर्फ थूक और बलगम जैसा है। तो अब
311:02
Speaker A
क्या जो नेचर चाहता है वह करो आगे बढ़ो अगर तुम में दम है और यह सोचने में वक्त मत बर्बाद करो कि कोई तुम्हारी तारीफ करेगा या नहीं और प्लेटो जैसा परफेक्ट देश चाहना छोड़ो छोटी सी प्रोग्रेस से भी खुश
311:19
Speaker A
हो जाओ और जो रिजल्ट आएगा उसकी फिक्र मत करो कौन अपनी सोच बदल सकता है और अगर सोच ही नहीं बदलेगी तो सिर्फ कराना गुलामी और झूठी हां में हां मिलाना बचा क्या? चलो एलेक्जेंडर फिलिप डेमेट्रियस का एग्जांपल ले लो। क्या
311:42
Speaker A
उन्होंने नेचर के रूल समझे और उनका पालन किया? वो तो सिर्फ वही जाने। अगर उन्होंने राजा बनना ही चाहा तो मुझे किसी ने जबरदस्ती उनका नकल करने को तो नहीं कहा। फिलॉसफी का काम सिंपल है, नॉर्मल है। मुझे
311:59
Speaker A
ओवर स्मार्ट बनने का लालच मत दो। ऊपर से देखो हजारों जानवरों के झुंड, पूजा पाठ, समुंदर के सफर, कभी शांत, कभी तूफानी, अलग-अलग तरीके से जन्म लेना, दुनिया को साथ जीना और फिर उससे चले जाना। सोचो उन लोगों की जिंदगी जो पहले जी चुके
312:25
Speaker A
हैं, जो तुम्हारे बाद जिएंगे और जो अभी कहीं दूर के देशों में जी रहे हैं। कितने लोग हैं जो तुम्हारा नाम भी नहीं जानते और कितने हैं जो जल्द ही तुम्हें भूल जाएंगे। जो तुम्हारी तारीफ करते हैं वही कल
312:44
Speaker A
तुम्हें नीचा भी दिखा सकते हैं। इसलिए याद रखना याद रह जाना बेकार है। जैसे फेम बेकार है जैसे सब कुछ। बाहर के हालात को लेकर बेपरवाह रहना। और अपने कामों में इंसाफदारी का वचन लेना। इसका मतलब है सोच और काम ऐसे जो सबके भले
313:08
Speaker A
के लिए हो। जो काम तुम पैदा हुए हो करने के लिए अपने दिमाग से वह सब बेकार चीजें हटा दो जो सिर्फ वही एकिस्ट करती हैं और अपने लिए थोड़ा स्पेस खाली करो। दुनिया कितनी बड़ी है यह सोच के। वक्त कितना अनंत है यह
313:27
Speaker A
सोच के। हर चीज कितनी तेजी से बदलती है यह सोच के। हर चीज का हर पार्ट हमारा जन्म और मौत के बीच का छोटा सा वक्त। उससे पहले का अनंत समय और उनके बाद का भी वही अनंत समय। जो कुछ तुम देख रहे हो वह सब जल्दी
313:50
Speaker A
ही गायब हो जाएगा और जो लोग इसे देख रहे हैं वह भी चले जाएंगे और जो लंबे समय तक जिंदा रहे उन्हें भी कोई फायदा नहीं है उन लोगों के मुकाबले जो जल्दी चले गए। लोगों का दिमाग कैसा है? वह किस काम में
314:07
Speaker A
लगे हैं? उन्हें क्या चीजें प्यार और तारीफ करने लायक लगती हैं? उनकी रूह को नंगा सोच के देखो और उनका घमंड भी यह सोचना कि उनकी नफरत तुम्हें नुकसान पहुंचा सकती है या उनकी तारीफ तुम्हें सुधार सकती है। कितनी बेकार बात
314:31
Speaker A
है। बिखरना मतलब दोबारा जुड़ जाना। यही तो नेचर करती है। नेचर के थ्रू ही सब कुछ वैसे ही होता है जैसे होना चाहिए और हमेशा से वैसे ही होता आया है और आगे भी वैसे ही होता रहेगा। किसी ना किसी रूप में
314:49
Speaker A
हमेशा अगर तुम यह कहते हो कि सब कुछ हमेशा बुरा ही होता है और भगवान के पास इसे ठीक करने की ताकत नहीं है और दुनिया हमेशा बुरा ही रहेगी तो ऐसा तुम कैसे कह सकते हो?
315:08
Speaker A
उन चीजों से घिन करना जैसे लिक्विड, मिट्टी, हड्डियां, गंदगी या मार्बल जो सिर्फ जम चुकी मिट्टी है। सोना चांदी जो कुछ बचा हुआ कचरा है। कपड़े जो बालों से बने हैं। पर्पल कलर जो एक शेलफिश के खून से आता है और बाकी सब कुछ भी।
315:28
Speaker A
और हमारी सांस भी वैसे ही एक चीज से दूसरी चीज में बदलने वाली बस अब इस रोती बिलखती बंदर जैसी जिंदगी से क्या हुआ? इसमें नया क्या है? किस बात पर हैरानी हो रही है?
315:48
Speaker A
मकसद देख लो उससे। चीज किससे बनी है? उस पर भी नजर डाल लो। बस वही है सब कुछ। और भगवान तुम थोड़ा और सिंपल थोड़ा और नरम भी बन सकते हो अभी भी। चाहे 100 साल हो या तीन कोई फर्क नहीं
316:10
Speaker A
पड़ता। अगर उन्होंने तुम्हें नुकसान दिया है तो नुकसान उनका ही है। लेकिन क्या दिया है? या तो सब कुछ एक समझदार सोर्स से निकलता है और सब कुछ एक जिस्म का हिस्सा है। और हर पार्ट को होल के एक्शन को एक्सेप्ट
316:30
Speaker A
करना चाहिए। यह सिर्फ एटम्स हैं जो बस जुड़ते और टूटते रहते हैं और कुछ नहीं। तो फिर घबराहट क्यों? अपने दिमाग से पूछो। क्या तू मर गया है, टूटा है, जंगली बन गया है, झूठ बोलता है? क्या तू भीड़ का
316:49
Speaker A
हिस्सा है? या घास चरता एक जानवर है? या तो भगवान के पास पावर है या नहीं। अगर नहीं है तो दुआ क्यों? और अगर है तो फिर कुछ और मांगो। ऐसा नहीं कि यह हो या यह ना हो। मांगो कि डर ना लगे या चाहत ना हो या
317:11
Speaker A
गम ना हो। अगर भगवान सब कुछ कर सकते हैं तो यह भी कर सकते हैं। पर उन्होंने यह काम हमें छोड़ दिया। तो फिर क्या यह बेहतर नहीं कि जो तुम्हारे हाथ में है वह करो एक आजाद इंसान की तरह
317:28
Speaker A
ना कि उस चीज पर डिपेंड करो जो तुम्हारे हाथ में ही नहीं एक गुलाम या भिखारी की तरह और किसने कहा कि भगवान को फर्क नहीं पड़ता जो तुम्हारे हाथ में है। ऐसे प्रे करना शुरू करो और देखो क्या होता
317:42
Speaker A
है। कैसे उस लड़की के साथ सोया जाए नहीं बल्कि कैसे उसकी चाहत ही छोड़ दी जाए। मांगो। कैसे उस आदमी को हटा दूं नहीं कैसे उनके पीछे भागना बंद करूं मांगो कैसे मेरे बच्चे बच जाए नहीं कैसे उसकी चिंता छोड़ दो मांगो अपने प्रेयर्स
318:03
Speaker A
का रुख बदलो और देखो क्या होता है एपिकरस ने कहा जब मैं बीमार था मैंने अपने हाल पर बात नहीं की अपने मिलने वालों का वक्त बर्बाद नहीं किया फिलॉसफी पर बात करता रहा और एक चीज पर ध्यान दिया। कैसे
318:23
Speaker A
दिमाग शरीर के दर्द के बावजूद भी शांत रह सकता है और अपने भले पर फोकस कर सकता है। मैंने डॉक्टर्स को भी भगवान जैसा ट्रीट नहीं किया। जिंदगी जैसी जीनी चाहिए वैसी जीता रहा। ऐसे ही बीमारी में भी या किसी और
318:42
Speaker A
सिचुएशन में। फिलॉसफी को कभी छोड़ना नहीं। कुछ भी हो जाए बेवकूफों के साथ बकवास में पड़ना नहीं। यह किसी भी फिलॉसफर के लिए अच्छे रूल्स हैं। जो कर रहे हो उस पर ध्यान दो और किससे कर रहे हो उस पर
319:02
Speaker A
भी। जब किसी की बदतमीजी से टकराव हो तो खुद से पूछो। क्या दुनिया में बिना बदतमीजी वाले लोग हो सकते हैं? नहीं। तो फिर इंपॉसिबल चीज क्यों मांगते हो?
319:16
Speaker A
दुनिया में बदतमीज लोग होने ही हैं। यह उनमें से एक है। ऐसे ही किसी खराब, झूठे या किसी और कमी वाले आदमी के लिए भी सोचो। जब तुम याद रखोगे कि ऐसे लोगों का होना जरूरी है। तो उन्हें झेलना आसान हो जाएगा।
319:35
Speaker A
एक और बात याद रखने लायक है कि नेचर ने हमें उन कमियों का जवाब भी दिया है। बुराई का जवाब दया और बाकी फ्लॉस के जवाब भी कुछ ना कुछ। और जब लोग गलती करते हैं, तुम हमेशा कोशिश कर सकते हो उन्हें सही रास्ता
319:52
Speaker A
दिखाने की। क्योंकि हर गलत काम गलत तरीके से किया गया काम ही होता है। और वैसे भी उनका किया तुम्हें किस तरह चोट पहुंचाता है। तुम देखोगे कि जिनके लिए तुम परेशान हो उनमें से किसी ने तुम्हारे दिमाग को
320:07
Speaker A
कोई नुकसान नहीं पहुंचाया और वही तो नुकसान या चोट का मतलब होता है। हां। गवार लोग गवार काम करते हैं। इसमें नया क्या है? अजीब क्या है? क्या तुम खुद से नाराज नहीं हो कि तुमने यह पहले से
320:24
Speaker A
सोचा ही नहीं था। लोगस ने तुम्हें यह देखने की एबिलिटीज दी थी कि कोई व्यक्ति कैसे रिएक्ट करेगा पर तुमने ध्यान ही नहीं दिया और अब तुम चौंक गए हो कि उसने वैसा ही किया। तो जब तुम किसी को बेवफा या नाशुक्र
320:41
Speaker A
कहते हो तो गुस्सा खुद पर करो। तुमने ही गलती की। तुमने समझा कि वह तुम्हारे भरोसे के लायक है। या तुमने उनकी मदद की और बदले की उम्मीद रखी। जबकि तुम्हें बस उस मदद में ही खुशी मिलनी चाहिए
320:58
Speaker A
थी। और क्या चाहिए होता किसी की मदद करने से? क्या इतना काफी नहीं कि तुमने वह किया जो तुम्हारी फितरत चाहती थी। तुम उनके लिए सैलरी भी चाहते हो। जैसे तुम्हारी आंखें देखती हैं और उनके लिए इनाम चाहे।
321:16
Speaker A
या तुम्हारे पैर चलते हैं और उनके बदले कुछ मांगे। यह सब इसी काम के लिए बनाए गए हैं। जो काम उनके डिजाइन के मुताबिक है वही उनका काम है। वैसे ही इंसान दूसरों की मदद के लिए बनाया गया है। और जब हम मदद
321:33
Speaker A
करते हैं या किसी को कुछ करने में मदद करते हैं तो हम वही कर रहे होते हैं जो हम बनाए गए थे। अपना काम बुक 10 मेरी सोल से क्या तू कभी अच्छा बनेगा कभी सिंपल पूरा और सीधा जैसे तेरी बॉडी
321:59
Speaker A
दिख रही है वैसे ही अंदर का तू भी दिख सके क्या तू कभी प्यार भरी और केयरिंग फीलिंग को महसूस करेगा कभी तू पूरा फील करेगा कभी चाहत और लालच से आगे बढ़ेगा ना लोगों के लिए ना चीजों के लिए ना मजे के लिए ना और
322:17
Speaker A
ज्यादा टाइम चाहिए होगा मजे के लिए ना किसी और जगह या कंट्री की तमन्ना होगी जहां मौसम ठंडा अच्छा हो ना ऐसे लोग चाहिए होंगे जो आसान हो जिनके साथ रहना और उसकी वजह तू खुश होगा जो तेरे पास
322:36
Speaker A
है और जो अभी है उसे पूरी तरह एक्सेप्ट करेगा और तू खुद को यह मान लेगा कि सब कुछ भगवान का गिफ्ट है कि जो कुछ भी हो रहा है वह अच्छा है और हमेशा अच्छा ही रहेगा। चाहे भगवान जो डिसाइड
322:52
Speaker A
करें क्योंकि वह सब कुछ बनाते हैं। सब कुछ जोड़ते हैं और जो बिखरा हुआ है उसे एक साथ लाके फिर से कुछ बनाते हैं। क्या तू कभी अपना मन बना लेगा कि तू भी भगवान और इंसान का एक नागरिक है। बिना किसी को ब्लेम किए,
323:10
Speaker A
बिना किसी की बुराई किए? [संगीत] सिर्फ उस चीज पर ध्यान दे जो नेचर तुझसे चाहती है। जैसे सिर्फ वही तुझे चला रही हो। फिर वही कर और उसे एक्सेप्ट कर जब तक कि वह तेरी लिविंग बीइंग वाली नेचर को
323:29
Speaker A
गिरा ना दे। फिर ध्यान दे कि तेरी रेशनल नेचर क्या चाहती है और उसे भी एक्सेप्ट कर जब तक वह तुझे एक समझदार इंसान के रूप में नीचा ना करें। और हां रैशन का मतलब है सामाजिक भी। इन रूल्स को फॉलो कर और किसी
323:48
Speaker A
और चीज में वक्त बर्बाद मत कर। जो कुछ भी हो रहा है या तो बर्दाश्त हो सकता है या नहीं। अगर बर्दाश्त हो सकता है तो बर्दाश्त कर। शिकायत बंद कर। अगर नहीं बर्दाश्त हो सकता तो भी शिकायत बंद
324:07
Speaker A
कर। तेरा खत्म हो जाना उनका भी एंड ले आएगा। बस याद रख जो भी तेरे दिमाग बर्दाश्त कर सकता है वह तू भी कर सकता है। बस उसे अपने फायदे वाली चीज समझ के सोच। तेरे फायदे के लिए या तेरी नेचर के हिसाब
324:27
Speaker A
से। अगर किसी ने गलती की है तो उसे आराम से समझा और दिखा दे कि उसने गलती कहां की। अगर तू यह नहीं कर सकता तो या तो गलती तेरी है या किसी की नहीं। जो कुछ भी तेरे साथ हो रहा है वह
324:44
Speaker A
शुरू से ही होने को था। किस्मत के धागे ने तेरे होने और इन हालातों को एक साथ बुना था। चाहे सब कुछ एटम से हो या नेचर से। सबसे पहली बात तो यह है कि मैं एक ऐसी दुनिया का हिस्सा हूं जो नेचर के कंट्रोल
325:01
Speaker A
में है। दूसरी बात मेरा रिश्ता उन सब चीजों से है जो मेरे जैसे हैं। और इस बात को समझ के मुझे कोई हक नहीं कि मैं कंप्लेन करूं उस चीज से जो पूरे सिस्टम ने मुझे दिया है। क्योंकि जो पूरे सिस्टम के
325:18
Speaker A
लिए अच्छा है, वह उनके पार्ट्स के लिए भी बुरा नहीं हो सकता। और सिस्टम कभी भी कुछ ऐसा नहीं करता जो उनके लिए खुद हार्मफुल हो। हर नेचर में यह क्वालिटी होती है। लेकिन दुनिया की नेचर में एक और खास बात
325:34
Speaker A
है। कोई बाहर की पावर उसे फोर्स नहीं कर सकती कि वह अपने आप को नुकसान दे। तो जब मैं याद रखूंगा कि मैं किस पूरे का एक पार्ट हूं। तब मैं जो कुछ भी मेरे साथ हो रहा है उसे
325:49
Speaker A
एक्सेप्ट करूंगा और दूसरे पार्ट्स के साथ अपना रिश्ता याद रख के मैं कुछ भी सेल्फिश नहीं करूंगा। मैं हर काम इस डायरेक्शन में करूंगा जो सबके भले के लिए हो और उन चीजों से बचूंगा जो सबको नुकसान पहुंचाए। अगर मैंने यह सब किया तो मेरी
326:08
Speaker A
जिंदगी आसान चलेगी। जैसे एक अच्छे नागरिक की चलती है जो अपने लोगों के लिए काम करता है और समाज के रूल्स को गले लगाता है। यह पूरा जो कुछ है वह छोटी-छोटी चीजों से बना है और उनका टूटना या बदलना नेचुरल
326:28
Speaker A
है। टूटना का मतलब यहां बदलना है। अगर यह प्रोसेस उन छोटी चीजों के लिए हार्मफुल हो और रोका भी ना जाए तो फिर कैसे पूरा सिस्टम सही चलेगा? सब कुछ एक से दूसरे स्टेट में जा रहा है और सब बस अलग-अलग
326:47
Speaker A
तरीके से टूटने के लिए ही बने हैं। क्या नेचर खुद अपनी चीजों को नुकसान देने के लिए डिजाइन करती है या फिर वह बस इग्नोर करती है? दोनों ही बातें सही नहीं लगती। चलो मान लो कि हम नेचर को हटा देते हैं और
327:04
Speaker A
कहते हैं कि सब कुछ अपनी प्रॉपर्टीज के कारण हो रहा है। तब भी यह कहना बेकार होगा कि दुनिया की हर चीज बदलने वाली है। पर फिर भी हम उसी बदलाव पर हैरान हो जाए या कंप्लेन करें कि यह नेचर के अगेंस्ट हो
327:20
Speaker A
रहा है। और सबसे बेकार तब जब चीजें वापस उसी स्टेट में लौटती हैं जहां से आई थी। क्योंकि हमारे जो एलिमेंट्स हैं, वह या तो बस अलग-अलग हो जाते हैं या फिर किसी फोर्स से खींच के अपनी जगह चले जाते हैं। सॉलिड
327:39
Speaker A
चीजें जमीन की तरफ और हल्का सा जैसी चीजें हवा में। फिर वह सब वापस उस यूनिवर्सल सिस्टम में मिल जाती हैं जो या तो कभी फायर में बदल जाता है या फिर कांस्टेंट बदलाव के थ्रू नया होता रहता
327:55
Speaker A
है। और यह भी मत सोचना कि यह जो एलिमेंट्स हैं सॉलिड और हवा वाले यह हमारे साथ जन्म से हैं। वह कल या परसों आए हैं। जो खाना हमने खाया, जो हवा हमने ली और वही चीजें बदल रही हैं ना कि वह जो
328:15
Speaker A
तू अपनी मां से जन्मा था लेकिन अगर तू अपने अस्तित्व को इनसे जुड़ा हुआ माने तो तो फिर हम यहां उसकी बात ही नहीं कर रहे। अपने लिए कुछ सिंपल नाम सोच सीधा शरीफ आसान समझदार मिलनसार लालच से
328:37
Speaker A
दूर कोशिश कर कि इनको किसी और नाम से ना बदले और अगर कभी छोड़ भी दिए तो दोबारा जीतने की कोशिश कर याद रख समझदारी का मतलब होता है हर चीज को जैसे वह है वैसे समझना और मिलनसार का मतलब है जो नेचर तुझे
328:56
Speaker A
उसे खुशी से एक्सेप्ट करना। और लालच से दूर का मतलब है कि तेरा दिमाग बॉडी के हाईज या लोस से ऊपर उठे। फेम से ऊपर, मौत से ऊपर और ऐसी ही सब चीजों से। अगर तूने इन नामों पे अपना हक
329:13
Speaker A
बना के रखा। चाहे कोई और तुझे यह नाम दे या ना दे। तब तू एक नया इंसान बन जाएगा। एक नई जिंदगी जिएगा। जो अब तक तू था वैसे ही रहना। और हर रोज उसे जिंदगी से चीर फाड़
329:29
Speaker A
खाना वह बेवकूफी है। जिंदगी से चिपक के रहने का नशा है। जैसे कुछ जानवर फाइट करते हैं गेम्स में। आधा चीर चुके होते हैं। खून में लथपथ होते हैं। फिर भी अगले दिन के लिए स्टेज पर लौटना चाहते हैं फिर से
329:46
Speaker A
काटे जाने के लिए। तो अब निकल पड़ इन थोड़े से नामों को अपने डायरेक्शन बना के। और अगर संभव हो तो एक सीधी लाइन में चलते रहे। जैसे कोई आदमी निकल रहा हो किसी ब्लेस्ड जगह की तरफ। और
330:02
Speaker A
अगर कभी लगा कि तू भटक गया है जैसे कंट्रोल चला गया तो उम्मीद रख और किसी ऐसी जगह रुक जा जहां तू खुद को वापस पा सके। या फिर जिंदगी को छोड़ दे बिना गुस्से के, बिना नाटक के सीधे तरीके से। सिर्फ इतना
330:19
Speaker A
जान के कि तू कम से कम इतना तो सही किया। और जब तू इन नामों को याद रखने की कोशिश करें तो तुझे भगवान को याद रखना भी मदद करेगा। उन्हें तेरे से चापलूसी नहीं चाहिए। उन्हें चाहिए कि समझदार चीजें उनके
330:36
Speaker A
जैसी बन जाए। जैसे अंजीर वही करें जो अंजीर करता है। कुत्ता, मक्खी सब अपना काम करें और इंसान भी। नाच गाना, लड़ाई और कंफ्यूजन, आलसी सोच और गुलामी। रोज यह सब तेरी उन सीक्रेट बातों को धुंधला कर देती हैं जिन पर तू या
330:58
Speaker A
तो सपने लेता है या सिर्फ इग्नोर करता है। तेरे एक्शंस और सोच का गोल होना चाहिए। कुछ प्रैक्टिकल काम पूरा करना। सोच का सही यूज करना। एक ऐसी कॉन्फिडेंस बनाना जो समझ पर बेस्ड हो। सिंपल और चुपचाप वाली
331:19
Speaker A
कॉन्फिडेंस जो दिखे भी पर चिल्लाए ना कब तू खुद को सिंपल जीने देगा सीरियस बनने देगा या किसी भी चीज को सही से समझने देगा उसकी नेचर उनका सब्सटेंस दुनिया में उसकी जगह कितनी देर चलेगी किस चीज से बनी
331:40
Speaker A
है कौन उनका मालिक हो सकता है कौन दे सकता है कौन ले सकता है मकड़ी खुद पर गर्व करती है क्योंकि वह मक्खी पकड़ती है। आदमी इस पर कि वह खरगोश पकड़ लेता है। जाल में मछलियां, जंगली सूअर,
332:00
Speaker A
भालू यह सब भी एक तरह का क्रिमिनल माइंड ही है। हर चीज का एक दूसरी चीज में बदल जाना, यह देखने की आदत डाल। रोज इसे अपने अंदर फिट कर। इसी में असली रूहानी ग्रोथ छुपी है। उसने अपना शरीर पीछे छोड़ दिया है और
332:23
Speaker A
समझ लिया है कि अब थोड़ी ही देर में उसे सब कुछ छोड़ना पड़ेगा। अब वह सिर्फ जस्टिस को पूरा करना चाहता है हर काम में। और नेचर के साथ चलना चाहता है हर हाल में। लोग क्या सोच रहे हैं या क्या बोल रहे हैं
332:40
Speaker A
इसकी उसे चिंता नहीं। सिर्फ दो सवाल मायने रखते हैं। क्या जो वह अभी कर रहा है, वह सही है और क्या वह उस चीज को एक्सेप्ट कर रहा है जो उनके हिस्से में आई है। उसने हर दूसरे काम को साइड में कर दिया है। अब वह
332:57
Speaker A
सिर्फ सीधे रास्ते पर चलना चाहता है भगवान की तरफ कानून के थ्रू। इतना सोचसच के क्यों थक रहा है? जो करना है वह क्लियरली समझ आ रहा है। रास्ता दिख रहा है तो चल पड़। खुशी से बिना पीछे
333:14
Speaker A
देखे। अगर दिख नहीं रहा तो रुक जा और बेस्ट एडवाइस ले। अगर कोई रुकावट आए तो जो कुछ तेरे पास है उसका अच्छा यूज़ कर। बस वही कर जो सही लगता है। यही बेस्ट गोल है और इसी में हम फेल होते हैं जब हम उसे छूट
333:32
Speaker A
जाते हैं। हर काम में लॉजिक का पालन करना मतलब होता है रिलैक्स्ड भी रहना और एक्टिव भी। खुश भी रहना और सीरियस भी। जब सुबह उठ तो खुद से पूछ। क्या फर्क पड़ता है अगर लोग तुझे ब्लेम करते हैं? जब
333:50
Speaker A
तू सही काम करता है कोई फर्क नहीं पड़ता। क्या तू भूल गया है कि जो लोग प्रज़ या ब्लेम में चिल्लाते हैं वह कैसे सोते हैं? कैसे खाते हैं? भूल गया उनका बिहेवियर, उनके डर, उनकी चिंताएं, उनकी चोरियां वह भी फिजिकल नहीं दिमाग से की गई
334:10
Speaker A
चोरियां। उस पार्ट से जो सबसे ऊंचा होना चाहिए जो लॉयलिटी, सिंपलीसिटी, सच, डिसिप्लिन और वेल बीइंग क्रिएट करता है। जब वह सही से काम करता है। नेचर देती है और नेचर ले लेती है। जो समझदार है वह उसे बस इतना ही बोलेगा।
334:32
Speaker A
ले लो या दे दो। जैसा तुम्हारा मन हो। ना गुस्से में बल्कि शांति और मन के साथ। बस थोड़ा ही वक्त बचा है। ऐसे जियो जैसे तुम जंगल में अकेले हो। यहां हो या वहां क्या फर्क पड़ता है। जिस सिटी में तू जीता
334:51
Speaker A
है वही पूरी दुनिया है। लोग देखें एक इंसान को नेचुरल तरीके से जीते हुए और समझे कि इसका मतलब क्या है। अगर उनसे बर्दाश्त ना हो तो मार डालें। वैसे जीने से तो बेहतर ही होगा। यह बोलना बंद कर कि अच्छा इंसान कैसा होता
335:10
Speaker A
है। बस खुद एक बन जा। हमेशा याद रख दुनिया और समय का साइज। हर चीज का जीवन कितना छोटा है। एक अंगूर का बीज और उनके आसपास अनंत स्पेस, एक छोटी सी घूमती सुई और उनके सामने पूरा एटरर्निटी।
335:28
Speaker A
[संगीत] हमेशा याद रख कि हर चीज अपनी जगह से छूट रही है, टूट रही है, बिखर रही है और गल रही है। या फिर यह समझ ले कि हर चीज बनी ही है मरने के लिए। देख वो लोग कैसे बिहेव करते हैं जब
335:48
Speaker A
वह खाते हैं, सोते हैं, सेक्स करते हैं या टॉयलेट जाते हैं और बाकी सब कुछ। फिर देखो कैसे वह हुकुम चलाते हैं या गुस्से में चिल्लाते हैं जैसे उनका सब पर राज हो। लेकिन जरा सोच अभी थोड़ी देर पहले वह किस
336:05
Speaker A
चीज के सामने झुक गए थे और किस वजह से और देख आगे फिर वैसे ही किसी चीज के आगे झुकेंगे। हर किसी को वही चाहिए जो नेचर देती है जब नेचर देती है। जमीन बारिश को तरसती है। आसमान भी
336:25
Speaker A
तरसता है और दुनिया भी तरसती है नए चीजों को पैदा करने के लिए। मैं कहता हूं मैं भी तेरे साथ तरसता हूं। शायद इसी को हम कहते हैं यह होने को ही था। तीन पॉसिबिलिटीज हैं। पहला जीवित रहना। अब
336:44
Speaker A
तक तो आदत पड़ गई होगी। दूसरा खत्म करना। तेरे अपना चॉइस था। तीसरा मर जाना। अपना फर्ज निभा चुका है। बस यही तीन रास्ते हैं। इसमें भी उम्मीद छुपी है। हमेशा याद रख यह जगह भी एक खाली खेत
337:02
Speaker A
जैसी ही है। और जो चीजें यहां हैं वही हर जगह होती हैं। पहाड़ों में, समुंदर के पास कहीं भी। मेरा दिमाग यह क्या है? मैं इसे क्या बना रहा हूं?
337:18
Speaker A
मैं इसे किस काम के लिए यूज कर रहा हूं? क्या यह सोच से खाली है? क्या यह सबसे अलग हो गया है? क्या यह शरीर में घुल गया है?
337:28
Speaker A
उनके जैसे सोचने लगा है? जब कोई गुलाम अपने मालिक से भागता है तो उसे भगोड़ा कहते हैं। लेकिन नेचर का भी एक कानून है और उनका तोड़ना भी भागना ही है। दुख, गुस्सा या डर महसूस करना मतलब उस
337:47
Speaker A
हुक्म से भागना जो सब कुछ चलाता है। आज, कल या फ्यूचर में। यह हुकुम ही कानून है। और अगर तू दुख या गुस्सा महसूस करता है तो तू न्याय से भाग रहा है। आदमी अपना बीज छोड़ता है और चला जाता
338:09
Speaker A
है। फिर कोई और शक्ति जो उसकी नहीं है। काम शुरू करती है और एक बच्चा बना लेती है। यह उससे या फिर वह आदमी अपने गले से खाना निगल जाता है। फिर एक और शक्ति जो उसकी नहीं है, काम करती है और महसूस होने
338:27
Speaker A
वाली चीजें, इच्छाएं, जिंदगी, ताकत और बहुत कुछ बना देती हैं। इन सबको चुपचाप होता देख और उस ताकत को महसूस कर जो इन्हें चला रही है। जैसे हम देखते हैं किसी चीज को धक्का मिलता है या खींच लिया जाता है। आंखों से नहीं
338:47
Speaker A
लेकिन उतनी ही क्लियरली। हमेशा याद रख कि यह सब पहले भी हो चुका है और फिर होगा। वही पुरानी कहानी वही सीनंस अपने दिमाग में ला उन कोट्स को जो तूने देखे हैं या सुने हैं। हेड्रियन एंटोनिनस फिलिप
339:08
Speaker A
एलेक्जेंडर, क्रोएस सब एक जैसे ही थे। बस लोग बदलते रहे। जो लोग हर्ट फील करते हैं या गुस्सा होते हैं उन्हें सोच एक बलि का सूअर है जो लात मारता है और चीखता है या फिर एक आदमी अपने बिस्तर में अकेले
339:34
Speaker A
रोता है उस जंजीर के बारे में जो सबको बांध के रखती है सब कुछ झुकता ही है बस रेशनल लोग ही खुशी से झुकने का ऑप्शन रखते हैं जो भी कर रहा है एक सेकंड के लिए रुक और
339:53
Speaker A
खुद से पूछ। क्या मैं मौत से इसलिए डर रहा हूं क्योंकि मैं यह काम फिर नहीं कर पाऊंगा। जब लोग कुछ गलत करें तब पलट के देख। क्या कभी तू भी वैसा ही नहीं था जब तूने पैसा एक अच्छी चीज समझा था या प्लेजर
340:16
Speaker A
को या स्टेटस को तेरा गुस्सा तुरंत कम हो जाएगा जब तू समझेगा कि उन्होंने भी मजबूरी में किया और क्या करते और अगर तू उनकी मजबूरी हटा सकता है तो हटा दे जब तुम सैटरन को देखो तो सोक्रेटिकस या
340:40
Speaker A
यूटिकस या हमेन को याद करो। जब यूफेरेटस को देखो तो यूटीचयन या सिल्वेनस को याद करो। एल्किफोन के साथ थ्रोफेयोफोरस को याद करो। जेनोफोन को देखो तो क्रिटो या सेवरस दिखना चाहिए। और जब तुम खुद को देखो तो किसी भी
341:01
Speaker A
पुराने एपरर को याद करो और सबके साथ भी यही करो। फिर सोचो अब वह सब कहां है? कहीं भी नहीं या कहीं भी हो सकते हैं। तभी तुम्हें समझ आएगा कि इंसानी जिंदगी असल में है क्या? धुआ कुछ भी नहीं। खासकर जब
341:19
Speaker A
तुम याद करो कि चीजें जब बदल जाती हैं तो वह हमेशा के लिए खत्म हो जाती हैं। तो फिर इतना हंगामा क्यों? अपनी छोटी सी जिंदगी को सही तरीके से जीना क्या इतना काफी नहीं है? जो रॉ मटेरियल तुम मिस कर रहे हो, जो मौके तुम
341:37
Speaker A
छोड़ रहे हो, यह सब सिर्फ ट्रेनिंग है तुम्हारे लोगस के लिए, एक ऐसी जिंदगी के लिए जो साफ नजर से देखी जा रही हो, साइंटिफिक नजरिए से। तो इस प्रैक्टिस को जारी रखो जब तक यह तुम्हारे अंदर घुल ना
341:53
Speaker A
जाए। जैसे एक मजबूत पेट कुछ भी खाकर उसे पचा लेता है या एक तेज आग जो कुछ भी उसमें डाली जाए उसे रोशनी और शोला बना देती है। कोई भी सच कहकर यह नहीं बोल सकता कि तुम सीधे या ईमानदार इंसान नहीं हो। अगर
342:17
Speaker A
कोई ऐसा मानता है तो वह गलत है। यह जिम्मेदारी सिर्फ तुम्हारी है। कोई भी तुम्हें ईमानदार और साफ दिल होने से नहीं रोक सकता। बस यह तय कर लो कि अगर तुम ऐसे नहीं रह सकते तो फिर तुम्हें जीना भी नहीं
342:32
Speaker A
चाहिए क्योंकि यह लोगस के खिलाफ होगा। जिस मैटर से हम बने हैं उस हिसाब से सबसे समझदारी वाली बात क्या हो सकती है जो हम बोल सकते हैं या कर सकते हैं जो भी हो तुम उसे बोल सकते हो कर सकते हो ऐसा मत दिखाओ
342:55
Speaker A
कि कोई तुम्हें रोक रहा है तुम कब तक शिकायत करते रहोगे जब तक तुम्हें वही मजा नहीं मिलता जो एक हिडोनिस्ट को अपने शौक में मिलता है लेकिन तुम्हें वह मजा मिलता है जब तुम वह काम करते हो जो इंसान की नेचर के मुताबिक
343:13
Speaker A
होता है। जितना भी तुम कर सको अपने हालत के हिसाब से। एंजॉयमेंट का मतलब है जितना ज्यादा हो सके उतना वह काम करना जो तुम्हारे नेचर का हिस्सा है और तुम यह कहीं भी कर सकते हो। यह एक ऐसी छुट्टी है जो सिलेंडर को
343:32
Speaker A
नहीं मिली। जो अपनी मर्जी से कुछ नहीं कर सकता। ना पानी ना आग ना कोई और चीज जो सिर्फ नेचर के हुक्म में हो या जो बस ही रशनल माइंड से चली हो इन सबको तो हर वक्त कुछ ना कुछ रोकता है
343:50
Speaker A
लेकिन दिमाग और लोगस पर रुकावट को पार कर सकता है या तो अपनी पहचान के बल पे या अपनी हिम्मत के दम पे हमेशा याद रखो कि यह कितनी आसानी से काम करता है जैसे आग ऊपर उठती या पत्थर
344:06
Speaker A
नीचे गिरता है या सिलेंडर सीधे स्लोप पर रोल करता है। बस इतना ही काफी है। बाकी सब रुकावट या तो लाइफलेस बॉडी को अफेक्ट करती है या तुम्हारे दिमाग को तब तक नहीं हिला सकती जब तक तुम्हारा दिमाग खुद नहीं मानता या
344:25
Speaker A
तुम्हारा लोगस को छोड़ नहीं देता। अगर ऐसा नहीं होता तो वह चीजें तुम्हें तुरंत गिराती। लेकिन इंसान ऐसे कामों से और भी स्ट्रांग हो जाता है और हम उस इंसान की तारीफ करते हैं जो हर हालत में इंसानियत से रिएक्ट
344:42
Speaker A
करता है। और याद रखो किसी भी नेचर के सिटीजन को तब तक कुछ भी नुकसान नहीं पहुंच सकता जब तक उनके शहर को नुकसान ना हो। और शहर को सिर्फ उनके लॉ को नुकसान पहुंचने से ही नुकसान होता है। और कोई भी मुसीबत
345:00
Speaker A
ऐसी नहीं होती जो लॉ को तोड़ दे। जब तक लॉ सेफ है, शहर सेफ है और उनके सिटीजन [संगीत] भी। अगर तुमने सच के रूल्स को अंदर तक समझ लिया है तो एक छोटी सी याद भी तुम्हारा डर
345:20
Speaker A
और दर्द मिटा सकती है। पत्ते जिसे हवा गिरा देती है जमीन पर वैसे ही हैं इंसान की नस्लें। तुम्हारे बच्चे भी पत्ते हैं। पत्ते जो तुम्हारी तारीफ में ताली बजाते हैं या फिर पीछे से तुम पर थूकते हैं,
345:36
Speaker A
मजाक उड़ाते हैं। एक बड़ी सी शोहरत भी एक पत्तों की विरासत है। यह सब बहार में उगते हैं और फिर हवा इन्हें उड़ा ले जाती है। और पेड़ पर नए पत्ते आ जाते हैं। किसी के पास ज्यादा वक्त नहीं होता। लेकिन तुम
345:55
Speaker A
ऐसे जीते हो जैसे सब कुछ हमेशा के लिए है। तुम्हारा डर और लालच इसी बात का सबूत है। थोड़ी ही देर में अंधेरा होगा और जो तुम्हें दफन करेगा उनके लिए भी रो दिया जाएगा। आंखें अगर ठीक हैं तो जो भी चीज दिख रही
346:15
Speaker A
हो उसे देखना चाहिए और यह नहीं कहना चाहिए नहीं बहुत तेज है यानी रोशनी से परेशान होना वह आंखों की बीमारी होती है। कान और नाक भी अगर ठीक है तो हर आवाज और हर स्मेल को बर्दाश्त करते हैं। एक सेहतमंद पेट हर
346:32
Speaker A
खाने को पचा सकता है। जैसे एक चक्की किसी भी अनाज को पीस लेती है। वैसे ही एक सेहतमंद दिमाग हर हालत के लिए तैयार होता है। जो हर वक्त कहता रहता है मेरे बच्चे ठीक है ना या सब लोग मुझे पसंद करें वैसे
346:49
Speaker A
हैं जैसे आंखें सिर्फ हल्के रंग ही देख सकती हैं या दांत सिर्फ सॉफ्ट चीजें ही चबा सकते हैं। फर्क नहीं पड़ता तुमने जिंदगी कितनी अच्छी जी है। फिर भी कुछ लोग तुम्हारे बिस्तर के पास खड़े होंगे जो तुम्हारी मौत
347:08
Speaker A
को एक सुकून समझेंगे। ऐसे लोग भी जो समझदार हैं, अच्छे हैं। क्या कोई नहीं सोचेगा? चलो अब छुटकारा मिला उस बूढ़े टीचर से। कुछ बोलता नहीं था। पर उसकी आंखों से लगता था जैसे हर वक्त तुम्हें जज कर रहा हो। और वह भी एक अच्छे आदमी के
347:27
Speaker A
बारे में। तो सोचो तुम्हारे अंदर कितनी ऐसी बातें हैं जो लोगों को तुमसे छुटकारा चाहने पर मजबूर कर देती हैं। जब वक्त आए तो यह याद रखना तुम्हारा दुनिया छोड़ना आसान हो जाएगा अगर तुम खुद से कह सको। ऐसी जिंदगी छोड़ रहा हूं मैं।
347:46
Speaker A
वह लोग जिनके लिए मैंने इतना कुछ किया, जिनके लिए दुआ की, जिनके लिए चिंता की, वह भी चाहते हैं मैं चला जाऊं। ताकि उनकी जिंदगी थोड़ी आसान हो सके। ऐसे में कोई कैसे और देर तक यहां रहना चाहेगा। लेकिन जब जाओ तो गुस्से में
348:05
Speaker A
मत जाओ। वैसे ही रहना जैसे हो। दयालु नरम दिल प्यार से भरे हुए। ऐसे मत जाओ जैसे जिंदगी तुमसे छीनी जा रही हो। जैसे कोई शांति से मर रहा हो और उसकी रूह शरीर से निकल रही हो। वैसे ही अलविदा कहना।
348:23
Speaker A
नेचर ने ही तुम्हें इनसे जोड़ा था और अब वही नेचर तुम्हें अलग कर रही है। मैं अब इनसे आजाद हो गया हूं। जबरदस्ती नहीं बिना किसी विरोध के। यह नेचर की जरूरत है और यह भी उसी में आता
348:40
Speaker A
है। हर काम को देखकर यह पूछना सीखो। वह ऐसा क्यों कर रहे हैं? अपने खुद के कामों से शुरू करो। याद रखो जो सब कुछ चला रहा है वह अंदर होता है छुपा हुआ वही बोलता है वही जीता
348:58
Speaker A
है वही असल में इंसान है बाकी सब उनका हिस्सा नहीं जो सिर्फ उनके बाहर की कवरिंग है जैसे स्किन और बॉडी के पार्ट्स यह सब सिर्फ टूल्स हैं जैसे एक कारपेंटर का हथौड़ा फर्क सिर्फ इतना है कि यह टूल्स हमारे साथ पैदा होते हैं और बिना
349:18
Speaker A
उस चीज के जो इन्हें चलाती है यह बेकार है। जैसे एक व्यूअर के शटल या राइटर का पेंसिल या ड्राइवर का चाबुक अगर वह हाथ ना हो जिसे चलाया जाए तो यह सब बेकार है। बुक 11 सोचने समझने वाली सोल की खास बातें
349:47
Speaker A
हैं। अपने आप को देख सकती है, समझ सकती है और जैसा बनना चाहे बन सकती है। यह अपना फल खुद काट लेती है जैसे पौधे या जानवर नहीं कर सकते। जिनका फल कोई और ले जाता है। यह अपने गोल तक पहुंच जाती है। चाहे जिंदगी
350:05
Speaker A
कहीं भी खत्म हो। नाच, ड्रामा वगैरह जैसे नहीं जिसमें बीच में रोका गया तो अधूरा लगता है। इसका हर पल पूरा होता है। यह कह सकती है मैं जिस काम के लिए आई थी वह हो गया। यह दुनिया को और उनके खाली स्पेस को देखती
350:23
Speaker A
है। उनका स्ट्रक्चर समझती है। यह समय की लंबाइयों तक घुस जाती है और समझती है कि दुनिया बार-बार पैदा होती है। बिखर जाती है। फिर से बन जाती है। इससे पता होता है कि जो लोग बाद में आएंगे वह भी वही देखेंगे जो हम देख रहे
350:41
Speaker A
हैं। जो लोग हमसे पहले गए उन्होंने भी कुछ ज्यादा नहीं देखा। और जिसके पास 40 साल का तजुर्बा और आंखें हैं, उसने पास्ट और फ्यूचर दोनों देख लिया है। दोनों एक जैसे ही हैं। और भी कुछ खास बातें।
350:59
Speaker A
लोगों के लिए प्यार, सच बोलना, नम्रता, अपने आप से ऊपर कुछ ना रखना यह भी कानून की तरह होता है। यहां रीजन और इंसाफ का एक ही रूल है। गाने, नाच और लड़ाई के खेलों से उदासीन होने का तरीका। एक और सुर को अलग
351:21
Speaker A
करो। सोचो क्या तुम उनके असर के सामने बेकार हो? नहीं ना? बस इतना सोचना काफी है। नाच के अलग-अलग स्टेप्स देख लो। लड़ाई के मूव्स भी ऐसे ही। जिंदगी के हर चीज के साथ भी यही करो। टुकड़े करो, एनालिसिस करो
351:38
Speaker A
और फिर बेपरवाह बन जाओ। सिवाय वर्चू के और जो भी उससे आता है। बाकी सब चीजों के टुकड़े करो और छोड़ो। जिंदगी पर भी यही अप्लाई करो। पक्का मन अपने शरीर से अलग होने में पक्का बिखरने टूटने या फिर चले जाने में भी
352:03
Speaker A
पक्का पर यह डिसीजन खुद का हो किसी बाहर के प्रेशर से नहीं जैसे कुछ लोग जैसे क्रिश्चियंस यह सोच समझ कर हो दूसरों को समझाने लायक हो बिना ड्रामा के क्या मैंने कुछ पब्लिक के भले के लिए किया तो मुझे भी उनका फायदा मिलता है। बस
352:26
Speaker A
इसी पर फोकस बनाए रखना है। कभी गिव अप मत करना। और तुम्हारा काम क्या है?
352:35
Speaker A
अच्छाई और यह कैसे मिलेगी अगर हम सोचे नहीं दुनिया के बारे में, लोगों की फितरत के बारे में। [संगीत] सबसे पहले ट्रेजडीज यह याद दिलाती हैं कि क्या हो सकता है और कि कुछ चीजें तो होनी ही होती हैं। अगर स्टेज पर कुछ तुम्हें
352:56
Speaker A
अच्छा लगता है तो असली जिंदगी में वही चीज तुम्हें गुस्सा क्यों दिलाए। तुम समझते हो कि यह सब चीजें सबको झेलनी पड़ती है। और जो लोग स्टेज पर चिल्लाते हैं ओ माउंट किथेरन उन्हें भी वही सहना पड़ता है। और
353:13
Speaker A
कुछ लाइंस भी बढ़िया होती हैं। जैसे अगर मैं और मेरे दो बच्चे भी भगवान को नहीं पिघला सके तो शायद भगवान के पास कोई वजह है या दुनिया पर गुस्सा क्यों हो और जिंदगी को काट लेना जैसे खेतों में गेहूं
353:29
Speaker A
काटते हैं। और भी कई अच्छी लाइंस मिलती हैं। फिर आती है पुरानी कॉमेडी खुल के बोलती थी। दिखावा तोड़ती थी। डजनीस भी यही करता था। सीधा बोलता था। लोगों की ईगो को तोड़ता था। फिर मिडिल और न्यू कॉमेडी आई जिसमें सिर्फ
353:49
Speaker A
एक्टिंग बची थी। असल बात गई। हां, उनमें भी कुछ अच्छे टुकड़े मिल जाते हैं। पर असली सवाल है पूरा ड्रामा और उसकी सेटिंग इस सब का मतलब क्या था?
354:04
Speaker A
यह चीज तो सीधा मुंह पर लिखी है। तुम जिस रोल में हो वही फिलॉसफी के लिए सबसे सही जगह है। जब कोई शाख दूसरी शाख से काटी जाती है तो वह पूरे पेड़ से अलग हो जाती है। वैसे
354:20
Speaker A
ही जब इंसान दूसरे इंसान से अलग हो जाता है तो वह भी समाज से अलग हो जाता है। साख को तो कोई और काट देता है। लेकिन इंसान खुद को ही खुद से अलग करता है नफरत से दूरी बनाकर और समझता भी नहीं कि वह खुद को
354:38
Speaker A
पूरे समाज से तोड़ रहा है। लेकिन हमारे पास एक गिफ्ट है जस का दिया हुआ जिसने यह समाज बनाया। हम फिर से जुड़ सकते हैं। फिर से एक हिस्सा बन सकते हैं। पर अगर बार-बार यह तोड़ना होता रहे तो
354:54
Speaker A
दोबारा जुड़ना मुश्किल हो जाता है। फिर फर्क दिखता है उस शाख में जो हमेशा पेड़ के साथ रहे और उसमें जो काट के दोबारा लगाई गई हो। एक तना दो सोच जिसे माली कहते हैं। जब तुम रीजन और सच्चाई के रास्ते पर
355:15
Speaker A
चल रहे होते हो लोग तुम्हारा रास्ता रोकेंगे। वह तुम्हें अच्छा काम करने से तो नहीं रोक सकते लेकिन उनके साथ बर्दाश्त से पेश आना भी एक काम है। दोनों चीजें जरूरी है। सही फैसले, अच्छे काम और टॉलरेंस उन
355:33
Speaker A
लोगों के लिए जो तंग करते हैं। गुस्सा भी कमजोरी ही है। जैसे हार मान लेना या भाग जाना होता है। जो टूटा है और जो लोगों से अलग हो जाता है। दोनों ही बैटल फील्ड छोड़ने वाले हैं। जो नेचुरल होता है वह कभी भी बनावटी चीजों
355:54
Speaker A
से कम नहीं होता। आर्ट नेचर की नकल करती है ना कि उल्टा। अगर हर आर्ट नीचे से ऊपर जाती है तो नेचर भी तो वही करेगी। नहीं। और इसलिए जस्टिस है क्योंकि वही बाकी सारी वर्चूस का सोर्स है। जस्टिस
356:12
Speaker A
कैसे पॉसिबल है? अगर हम छोटी-मोटी चीजों में उलझे हो या अगर हम बेवकूफ भोला या पल-पल बदलने वाले हो। तुम इन चीजों के पीछे भाग रहे हो और उनसे बचने की भी कोशिश कर रहे हो। इसी वजह से तुम इतने परेशान रहते हो। पर वह चीजें
356:34
Speaker A
खुद तुम्हारे पीछे नहीं आई हैं। तुम ही उनके पीछे भाग रहे हो। बस इनका जजमेंट सस्पेंड कर दो और तुरंत सब शांत हो जाएगा। तुम फ्री हो जाओगे। ना भागने की जरूरत ना पकड़ने की। सोल एक गोल गेंद की तरह हो जो बैलेंस
356:54
Speaker A
में हो। ना कुछ छीन रही हो ना अपने अंदर सिमट रही हो। ना बाहर बिखर रही हो ना अंदर गिर रही हो। बल्कि एक रोशनी से चमक रही हो। सच्चाई को देख रही हो। बाहर भी अंदर भी कोई मुझे घिन से देखता है उसकी
357:14
Speaker A
प्रॉब्लम है। मेरी जिम्मेदारी है कि मैं कोई घिन वाली बात ना करूं ना कहूं। कोई मुझसे नफरत करता है उसकी प्रॉब्लम है। मेरी जिम्मेदारी है सबके साथ पेशेंस और मुस्कुराहट के साथ रहना। उस आदमी को भी समझना। लेकिन ना तो
357:32
Speaker A
बदले के लिए ना दिखावा करने के लिए बल्कि एक सीधे ईमानदार तरीके से जैसे फशियों अगर वह सच था बस अंदर से वैसे ही बने रहो कभी भी भगवान तुम्हें गुस्से या नफरत में पकड़े नहीं जब तक तुम अपनी नेचर के हिसाब से काम
357:52
Speaker A
कर रहे हो और दुनिया की नेचर को एक्सेप्ट कर रहे हो जब तक तुम दूसरों के भले के लिए मेहनत कर रहे हो क्या चीज तुम्हें नुकसान पहुंचा जा सकती है। लोग एक दूसरे की झूठी तारीफ करते हैं।
358:07
Speaker A
सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्हें उन पर यकीन नहीं होता और दूसरों पर हुकूमत करने की ख्वाहिश के चक्कर में वह एक दूसरे के आगे झुकते हैं। कितनी घटिया लगती है वह नकली ईमानदारी। जब कोई कहता है सुन मैं तुझे सच
358:24
Speaker A
बता रहा हूं। अरे यह तो बोलना ही नहीं चाहिए। यह तो तुम्हारे चेहरे पर लिखा होना चाहिए। तुम्हारी आवाज में सुनाई देना चाहिए। जैसे कोई आशिक आंखों में सब कुछ पढ़ लेता है। एक सच्चा इंसान वैसा होना चाहिए जैसे कोई बहुत तेज बदबू करता है। एक
358:42
Speaker A
कमरे में हो तो सबको पता चल जाए। और नकली सच्चाई वह तो पीठ में छुरा होती है। झूठी दोस्ती सबसे गंदी होती है। इससे जितना हो सके दूर रहो। अगर तुम सच्चे हो, सीधे हो और दिल से अच्छा सोच रहे हो तो वह
358:58
Speaker A
तुम्हारी आंखों में दिखना चाहिए। उसमें कोई कंफ्यूजन नहीं होनी चाहिए। अच्छी जिंदगी जीने का तरीका है कि हम में वह पोटेंशियल है। बस इतना सीखना है कि जो चीजें फर्क नहीं पड़ती उनके लिए कम बेपरवाह हो जाए। यह कैसे सीखना है? हर चीज को ध्यान
359:20
Speaker A
से देख के। उनके टुकड़े और उनके पूरे रूप को देख के यह याद रखना कि कोई भी चीज हमसे यह डिसाइड नहीं करवा सकती कि हम उसे कैसे देखें। वह चीजें तो बस सामने रहती हैं। हिलती भी नहीं। जजमेंट तो हम लगाते हैं और
359:36
Speaker A
खुद पे लिख देते हैं। और हम चाहे तो पेश खाली भी छोड़ सकते हैं। और अगर कुछ लिख भी गया हो तो तुरंत मिटा सकते हैं। याद रख थोड़ी देर के लिए ही तो ध्यान देना है। उनके बाद तो जिंदगी
359:51
Speaker A
खत्म ही हो जाएगी। और जब कुछ गलत हो जाता है तो इतना बुरा क्यों लगता है? अगर यह सब नेचर ने दिया है तो खुशी से एक्सेप्ट करो। लड़ाई मत करो। और अगर नहीं दिया तो सोचो कि तुम्हारी अपनी नेचर क्या चाहती है? बस
360:07
Speaker A
वही करो। चाहे उसमें तुम्हें फेम मिले या ना मिले। अपने भले के पीछे भागना किसी ने मना नहीं किया। हर चीज का सोर्स और असल में वह क्या है?
360:21
Speaker A
वह बदल के क्या बन जाती है? और बदल के भी वह कैसे सेफ रहती है? मेरा रिश्ता उनसे क्या है? हम एक दूसरे के लिए ही तो इस दुनिया में आए हैं। या फिर दूसरे नजरिए से देखो तो मैं उनका
360:40
Speaker A
रखवाला हूं। जैसे भेड़ का रखवाला एक होता है या झुंड का एक बैल। शुरू यहां से करो। अगर सब कुछ एटम से नहीं बना तो फिर नेचर ने बनाया है और सब कुछ उसी के अंडर है। अगर ऐसा है तो जो
360:58
Speaker A
नीचे है वह ऊपर वालों के लिए है। और ऊपर वाले एक दूसरे के लिए। वो लोग कैसे हैं? खाते वक्त बिस्तर पर हर जगह कितने पक्के विश्वास के पीछे भागते हैं। कितने गर्व से अपने काम पर फोकस करते
361:15
Speaker A
हैं। अगर वह सही हैं जो कर रहे हैं तो तुम्हें कंप्लेन करने का कोई हक नहीं और अगर वह गलत हैं तो वह अनजाने में कर रहे हैं उन्हें पता ही नहीं। क्योंकि हर सोल को दूसरे के साथ सही तरीके से पेश आना
361:29
Speaker A
सिखाया नहीं गया। जैसे कि सच को समझना नहीं सिखाया गया। इसी वजह से जब तुम उन्हें नाइंसाफ या अहंकारी या लालची कहते हो तो वह बुरा मान जाते हैं। तुमने भी तो कितनी गलतियां की हैं। तुम भी उन जैसे ही हो। अगर कुछ गलतियों से
361:47
Speaker A
बच गए हो तो इसका मतलब यह नहीं कि तुम परफेक्ट हो। बस डर ने रोका होगा या लोग क्या कहेंगे इसलिए रोका होगा। शायद तुम यह भी नहीं जानते कि वह गलती थी या नहीं। कई बार कोई चीज किसी
362:03
Speaker A
बड़े पर्पस के लिए होती है। किसी और के एक्शन को समझने के लिए बहुत कुछ जानना पड़ता है। जब तुम गुस्सा हो जाते हो या इरिटेट हो जाते हो तो याद करो जिंदगी छोटी है। थोड़े ही टाइम में हम सब एक साथ मिट्टी
362:22
Speaker A
में मिल जाएंगे। तुम्हें एक्चुअली परेशानी उनके एक्शन से नहीं हो रही। वह तो उनके माइंड की प्रॉब्लम है। तुम्हारी नहीं। तुम्हारा परसेप्शन ही प्रॉब्लम है। उसे हटा दो। बस इस सोच को छोड़ दो कि यह तो बहुत बुरा हो गया और गुस्सा चला जाएगा।
362:43
Speaker A
कैसे? यह समझ के कि तुम्हें कोई बेइज्जती नहीं हुई। और अगर तुम्हें लगता है बेइज्जती ही सबसे बुरी चीज है तो तुम हजारों गलतियां करने वाले हो। गुस्सा और दुख इन दोनों से ज्यादा डैमेज तो यही करते हैं जिन चीजों पर तुम्हें
363:00
Speaker A
गुस्सा आता है। दयालुता कभी हारती नहीं जब तक वह असली है। नफरत जैसी एक्टिंग नहीं। अगर कोई तुम्हारे साथ बुरा कर रहा हो और तुम उसे प्यार से मुस्कुराते हुए सीधा करो। बिना ईगो दिखाए तो क्या वह तुम्हारा क्या बिगाड़ लेगा?
363:22
Speaker A
उसे शांत और सीधे तरीके से समझाओ। दोस्त, हम इसलिए जिंदा नहीं है। यह जो तुम कर रहे हो मुझे नहीं तुम्हें ही नुकसान दे रहा है। मधुमक्खियां भी तो ऐसे नहीं करती और बाकी सोशल एनिमल्स भी नहीं। मत करो यह सब
363:40
Speaker A
घमंड में या किसी को इंप्रेस करने के लिए। प्यार से एक इंसान के जैसे समझाओ। चाहे दूसरे लोग आसपास हो कोई फर्क नहीं पड़ता। इन सब बातों को याद रखना जैसे नौ म्यूज के गिफ्ट हो और अब से इंसान बनना शुरू करो
363:58
Speaker A
अभी से जिंदगी भर के लिए और जैसे तुम गुस्सा मत हो वैसे दूसरों को खुश करने के लिए भी मत झुको दोनों ही सेल्फिशनेस है और दोनों तुम्हें बर्बाद करेंगे जब गुस्सा आए याद रखना गुस्से में कुछ भी मर्दानगी नहीं
364:17
Speaker A
होती एक मर्द वही है जो शांत रहता है, प्यार से बात करता है, वह स्ट्रांग है, वह गट्स रखता है। गुस्सा और दर्द दोनों कमजोरी की निशानी है। और एक बात और अपोलो की तरफ से। अगर तुम यह एक्सपेक्ट करते हो कि बुरे
364:36
Speaker A
लोग किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, तो तुम पागल हो। यह तो इंपॉसिबल मांग रहे हो। और अगर तुम यह चाहते हो कि वह दूसरे को तो तकलीफ दें लेकिन तुम्हें छोड़ दें तो यह घमंड है। यह टेंट की सोच
364:52
Speaker A
है। सोचने के चार तरीके जो तुम्हें पहचान के हटा देने चाहिए। अपने आप से कहना यह सोच जरूरी नहीं है। यह सोच दूसरों के लिए नुकसान का कारण बन सकती है। यह सोच तुम्हारी असली सोच नहीं है। जो बात तुम
365:09
Speaker A
सोचते नहीं उसे कहना सबसे बेकार हरकत है। और चौथा रीजन कि तुम अपने अंदर की डिवाइन हिस्सों को हरा चुके हो। और कमजोर और स्टूपिड शारीरिक पार्ट जो बस मजा चाहता है उनके सामने हार गए हो। तुम्हारा स्पिरिट और जो आग तुम्हारे अंदर
365:32
Speaker A
है वह नेचुरली ऊपर उठती है। लेकिन यह दुनिया के सिस्टम के अकॉर्डिंग नीचे आ जाती है और मिक्स हो जाती है। जो मिट्टी और पानी तुम्हारे अंदर है वह नेचुरली नीचे जाना चाहता है। लेकिन उन्हें ऊपर उठना पड़ता है अपनी असली जगह छोड़कर।
365:50
Speaker A
तो एलिमेंट्स भी दुनिया के हुकुम को फॉलो करते हैं। जब उन्हें फोर्स किया जाए और अपना पोजीशन बनाए रखते हैं जब तक सिग्नल ना मिले कि अब छोड़ना है। तो फिर तुम्हारा दिमाग ही क्यों कंप्लेन करें? उसे कुछ फोर्स नहीं किया जा
366:07
Speaker A
रहा। सिर्फ वह चीज की जा रही है जो उसकी अपनी नेचर चाहती है और फिर भी वह मना करता है। उल्टा डायरेक्शन पकड़ता है। अगर तुम गलत चीजों की तरफ जा रहे हो जैसे गुस्सा, डर या दर्द तो तुम अपने नेचर के खिलाफ जा
366:23
Speaker A
रहे हो। और जब तुम्हारा माइंड किसी भी चीज से कंप्लेन करता है तो वह अपनी ड्यूटी छोड़ रहा है। तुम्हारा माइंड बना ही इसीलिए है कि वह डिवाइन का रिस्पेक्ट करें और इंसाफ करें। यह दोनों चीजें एक दूसरे
366:38
Speaker A
के साथ जीने के लिए जरूरी हैं। अगर तुम्हारे पास जिंदगी का एक कंसिस्टेंट गोल नहीं है तो तुम कंसिस्टेंट तरीके से जी नहीं सकते। यह बात तब तक हेल्प नहीं करेगी जब तक तुम अपना गोल क्लियर नहीं करते। जो चीजें लोग अच्छी
366:59
Speaker A
समझते हैं उनका कोई कॉमन स्टैंडर्ड नहीं होता। बस कुछ ही हैं जो सबको अफेक्ट करती हैं। तो तुम्हारा गोल भी सबके लिए यूजफुल होना चाहिए। एक सोशल सिविक गोल। अगर तुम सारी एनर्जी उसी में लगाते हो तो तुम्हारे
367:14
Speaker A
एक्शंस भी कंसिस्टेंट होंगे और तुम खुद भी। शहर वाला चूहा और गांव वाला चूहा। शहर वाले चूहे की परेशानी और टेंशन। सोक्रेटीज आम लोगों के बिलीव्स को बिस्तर के नीचे के भूत बोलते थे जो सिर्फ बच्चों को डराने के काम आते
367:40
Speaker A
हैं। जब फेस्टिवल होता था तो स्पार्टन लोग अपने गेस्ट के लिए छाया में सीट लगवाते थे लेकिन खुद कहीं भी बैठ जाते थे। सोक्रेटीज ने पैराडिकस का बुलावा मना कर दिया क्योंकि वह हजार बार मरने से बचना चाहते थे क्योंकि अगर किसी का एहसान लेते
368:01
Speaker A
जिसे चुका ना पाए तो वह मरने जैसा लगता है। एपिच्यूरियन लिखने वाले कहते हैं कि हमेशा किसी पुराने नेक आदमी के बारे में सोचो जो ईमानदारी से जीता था। पाइथागोरियन लोग कहते हैं कि सुबह-सुबह तारे देखो। याद रखने के लिए कि वह हमेशा
368:23
Speaker A
अपने काम एक ही तरीके से करते हैं। उनका आर्डर, उनकी सफाई, उनका नंगा सच, तारे कभी कुछ छुपाते नहीं। एक बार सोक्रेटी सिर्फ एक टॉवल में थे। जब जेंथीपी उनका चोगा ले गई थी। जब दोस्तों ने उन्हें ऐसे देखा तो शर्मा के
368:45
Speaker A
उनसे दूर हो गए और सोक्रेटीज ने उनसे क्या कहा उस बात का मतलब सब कुछ कहता है। पढ़ना और लिखना सीखने के लिए टीचर चाहिए। जिंदगी जीना तो उससे भी ज्यादा टीचर मांगती है। तुम सिर्फ एक स्लेव हो और तुम्हारा
369:07
Speaker A
कोई हक नहीं है लोगस पर। लेकिन मेरा दिल खुश हो गया और लोग वर्चू का मजाक उड़ाते हैं अपने तानों और हंसी में बेवकूफी होती है जब कोई विंटर में अंजीर चाहता है या बूढ़ी उम्र में [संगीत] बच्चे जब अपने बेटे को गुड नाइट किस करो
369:36
Speaker A
एपिक्टेटस कहते हैं खुद से कहना हो सकता है सुबह तक यह मर चुका हो। तुम कहते हो यह तो फेट को चैलेंज करना हुआ। एक न्यूट्रल बात बोलने से जब हम कहते हैं कि गेहूं काटने का समय आ गया तो क्या हम फेट को
369:52
Speaker A
छेड़ते हैं? अंगूर कच्चे फिर पक्के फिर किशमिश। हमेशा बदलाव। अभी नहीं का मतलब कभी नहीं होता है। एपिकेटस कहते हैं फ्री विल का कोई चोरी का केस नहीं मिला। हमें एक्वसेंस का आर्ट सीखना है। अपने इंपल्ससेस पर ध्यान देना है। एनश्योर
370:24
Speaker A
करो कि वह कंट्रोल के बाहर ना जाए। दूसरों के काम आए और हमारे लायक हो। हमें हर तरह के डिजायर से दूर रहना है और जो चीजें हमारे कंट्रोल में नहीं है उनसे बचने की कोशिश नहीं करनी। यह किसी भी रैंडम चीज पर डिबेट नहीं
370:43
Speaker A
है। उसने कहा यह तो सेनिटी के बारे में है। सोक्रेटीस तुम्हें क्या चाहिए? लॉजिकल माइंड्स या इलॉजिकल? लॉजिकल माइंड्स हेल्दी या बीमार हेल्दी? तो इन्हें हासिल करो। हमारे पास तो हैं तो फिर यह झगड़े क्यों? बुक 12 जो कुछ तुम पाना चाहते हो वह सब तुम
371:15
Speaker A
अभी इसी वक्त पा सकते हो। बस तुम खुद ही अपने रास्ते में मत आओ। बस पास्ट को छोड़ दो। फ्यूचर को प्रोविडेंस पर छोड़ दो और प्रेजेंट को रेवरेंस और जस्टिस की तरफ ले जाओ। रेवरेंस ताकि तुम जो मिला है उसे एक्सेप्ट
371:32
Speaker A
कर सको। नेचर ने उसे तुम्हारे लिए बनाया है और तुम उनके लिए जस्टिस ताकि तुम सच बोलो सीधा और बिना छुपाए और वैसे एक्ट करो जैसे तुम्हें करना चाहिए और जैसे दूसरे डिर्व करते हैं। कुछ भी तुम्हें रोकने ना दें। दूसरों
371:51
Speaker A
का बुरा बिहेवियर, तुम्हारी खुद की गलत सोच, लोग क्या कहेंगे या तुम्हारे बॉडी के फीलिंग्स जो पार्ट हर्ट है उसे हैंडल करने दो। और अगर जब मरने का टाइम आए तुम सब कुछ साइड में रख दो। सिर्फ अपने माइंड और अंदर
372:08
Speaker A
के डिवाइन को छोड़ के। अगर तुम्हें मरने का डर नहीं है बल्कि कभी ठीक से जीने का मौका ना मिलने का डर है तब तुम इस दुनिया के लायक हो। जिसने तुम्हें बनाया। फिर तुम अपने ही घर में अजनबी नहीं
372:25
Speaker A
रहोगे। रोज की चीजें देखकर हैरान नहीं रहोगे जैसे कुछ अजीब हो गया हो। और तुम किसी भी चीज के रहमोकरम पर नहीं रहोगे। गॉड सबकी सोल को देखता है। फ्लश के कवर से निकालकर बिल्कुल साफ बिल्कुल प्योर। वह अपनी अकल से समझता है। कि उसने
372:49
Speaker A
क्या अपने आप से उनमें डाला था। अगर तुम भी यह सीख जाओ तो काफी तकलीफों से बच जाओगे। जब तुम अपने बॉडी के कवर के पार देख लोगे तो क्या तुम कपड़ों, बड़े घरों, फेम यह सब फेक सेटअप और कॉस्ट्यूम से
373:05
Speaker A
डिस्टर्ब होगे। तुम्हारे तीन पार्ट्स हैं। बॉडी, ब्रेथ और माइंड। दो तुम्हारे पास सिर्फ ट्रस्ट में है। एक पर तुम्हारे माइंड पर पूरा हक है। अगर तुम अपने माइंड को फ्री कर पाओ दूसरों के एक्शंस और बातों से, अपने पास्ट के वर्ड्स और कामों से, उस
373:26
Speaker A
फ्यूचर से जिसका डर है बॉडी और ब्रेथ के प्रेशर से और बाहर के को केस से और माइंड को क्लियर, फ्री और अपने फैसलों पर जीने दो। जो सही है वह करें। जो होता है उसे एक्सेप्ट करें और सच बोले।
373:43
Speaker A
अगर तुम माइंड से उन सब इंपेशंस को हटा पाओ जो चिपक जाते हैं पास्ट और फ्यूचर से फ्री हो जाओ। एमडोकल्स कहते हैं जैसे एक गोला जो अपनी पूरी शांति में खुश है और सिर्फ प्रेजेंट पर ध्यान दो क्योंकि वही
373:58
Speaker A
जी सकते हो। तो जो टाइम बचा है उसे तुम शांति में जी सकते हो काइंडनेस के साथ और अपने अंदर के स्पिरिट के साथ पीस में। यह मुझे हमेशा हैरान करता है। हम सब खुद से ज्यादा प्यार करते हैं, लेकिन दूसरों
374:14
Speaker A
की ओपिनियन को अपनी ओपिनियन से ज्यादाेंस देते हैं। अगर कोई गॉड या एक वाइज इंसान भी हमें यह कह दे कि हम अपने थॉट्स छुपा नहीं सकते। कुछ भी सोचा तो तुरंत जोर से बोलना पड़ेगा तो हम एक दिन भी नहीं निकाल
374:31
Speaker A
पाएंगे। इतना ज्यादा हम दूसरों की सोच को वैल्यू देते हैं अपनी सोच से ज्यादा। भगवान ने सब कुछ इतनी समझदारी से इतनी केयर के साथ अरेंज किया हमारी भलाई के लिए। पर एक चीज छूट कैसे गई कि कुछ लोग
374:49
Speaker A
एक्चुअली सबसे अच्छे लोग भगवान के अपने साथी जो भगवान के सबसे करीब थे अपनी श्रद्धा और अच्छे कामों के वजह से कि उनका जब डेथ हो तो वह हमेशा के लिए खत्म हो जाए। बिल्कुल गायब। अगर यह सच है तो पक्का
375:05
Speaker A
उन्होंने कुछ और ही किया होता। अगर यह सही होता अगर यह सही होता तो वह जरूर करते और अगर यह नेचुरल होता तो नेचर भी वही चाहती तो जब उन्होंने ऐसा नहीं किया अगर मान लो वैसे ही हुआ तो इसका मतलब यह था कि ऐसा
375:22
Speaker A
करना सही नहीं था। तू खुद ही तो देख सकता है। ऐसे सवाल पूछना मतलब भगवान की फेयरनेस पर डाउट करना है। और तू फेयरनेस की बात तभी करेगा ना जब तू मान रहा है कि भगवान सच में फेयर हैं।
375:36
Speaker A
बिल्कुल फेयर। और अगर वह हैं तो इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकते हैं? इतनी अनफेयर, इतनी इलॉजिकल बात जो वह दुनिया बना रहे थे। जो मुश्किल लगता है उसकी भी प्रैक्टिस करो। लेफ्ट हैंड कुछ काम का नहीं होता
375:55
Speaker A
क्योंकि उसकी प्रैक्टिस नहीं होती। लेकिन घोड़े की लगाम वह राइट हैंड से अच्छे से संभालती है। सिर्फ प्रैक्टिस की वजह से। जब डेथ आती है तब सोल और बॉडी का हाल कि जिंदगी छोटी है। टाइम पहले और बाद में
376:12
Speaker A
बहुत बड़ा है। मैटर बहुत ही नाजुक है। चीजों के असली कारण को सीधा देखना। एक्शंस का ऐ क्या है? पेन, प्लेजर, डेथ, फेम। हमारी रेस्टलेसनेस के पीछे कौन है?
376:30
Speaker A
कोई हमें रोकने वाला नहीं है। सब कुछ बस इस बात पर है कि तू कैसे देख रहा है। स्टूडेंट को फेंसर नहीं बॉक्सर बनना चाहिए। फेंसर का वेपन उठाया जाता है और फिर रखा जाता है। बॉक्सर का वेपन उनका
376:47
Speaker A
अपना हिस्सा होता है। उसे सिर्फ अपने हाथ बंद करने होते हैं। चीजें जैसी हैं वैसे ही देखना। उनका सब्सटेंस, उनका रीजन और उनका परपस। सिर्फ वही करने की फ्रीडम जो भगवान चाहते हैं और जो वह भेजते हैं उसे
377:08
Speaker A
एक्सेप्ट कर लेना। यह चीज किस चीज से बनी है? भगवान की गलती नहीं होती। वह ना जान के कुछ गलत करते हैं ना गलती से और ना ही इंसान। वह भी जान के नहीं करते। किसी की भी गलती नहीं है।
377:27
Speaker A
लोग जो हर छोटी बड़ी चीज पर हैरान हो जाते हैं, वह कितने बेवकूफ होते हैं। जैसे कोई ट्रैवलर किसी और देश के रिवाजों पर सरप्राइज हो जाता है। या तो सब कुछ तकदीर का खेल है जिसमें कोई छूट नहीं। या एक
377:41
Speaker A
काइंड भगवान सब कुछ चला रहे हैं या फिर सब कुछ रैंडम है बिना किसी डायरेक्शन के। अगर सब कुछ तकदीर है तो उससे लड़ने का क्या मतलब? अगर भगवान सब कुछ चला रहे हैं और उनकी पूजा हो सकती है तो उनके लायक बनने
377:56
Speaker A
की कोशिश कर। और अगर सब कुछ रैंडम और कटिक है तो तू थैंकफुल हो कि इस तूफानी समुंदर में तेरे पास एक माइंड है जो तुझे गाइड कर रहा है। और अगर तूफान तुझे ले भी जाए तो सिर्फ तेरे शरीर, सांस सब कुछ ले जाए।
378:13
Speaker A
लेकिन तेरा माइंड नहीं उसे कोई उड़ा नहीं सकता। [संगीत] लैंप तब तक चमकता है जब तक बुझाया ना जाए बिना अपनी रोशनी खोए पर तू तेरे अंदर सब कुछ इतनी जल्दी क्यों बुझ जाता है सच न्याय और अपने ऊपर
378:32
Speaker A
कंट्रोल जब लगता है किसी ने तुझे हर्ट किया लेकिन तू शोर कैसे हो सकता है और वैसे भी याद रख उसने खुद ही अपने आप को दोषी मान लिया है जैसे कोई अपनी ही आंखों को नोच ले बुरे इंसान इंसान से यह उम्मीद
378:49
Speaker A
करना कि वह किसी को हर्ट नहीं करेगा। यह वैसे ही है जैसे अंजीर के पेड़ से जूस ना निकले। बच्चे ना रोएं घोड़ा ना ही नाए। जो होना ही है वह ना हो। वो और क्या ही कर सकता है उस जैसे नेचर के साथ। अगर अब भी
379:06
Speaker A
गुस्सा है तो उस पर काम कर। अगर सही नहीं है तो मत कर। अगर सच नहीं है तो मत बोल। हर वक्त चीज को उसकी असल रूप में देख। जो दिखता है उनके पीछे क्या है? उसे तोड़ के
379:26
Speaker A
समझ। वजह क्या है? उनका असली मैटर क्या है? मकसद क्या है? और कितनी देर तक रहेगा। अब वक्त आ गया है समझने का कि तेरे अंदर कुछ ऐसा है जो उन चीजों से ज्यादा पावरफुल और मिरेकुलस है जो तुझे अफेक्ट करती हैं
379:44
Speaker A
और एक पपेट की तरह नचाती हैं। इस वक्त मेरे दिमाग में क्या चल रहा है? डर, जलन, इच्छा, ऐसे इमोशंस कुछ भी ना कर बिना रीजन के या बस यूं ही सिर्फ अपने लिए नहीं सबके भले के लिए।
380:03
Speaker A
जल्दी ही तू कुछ नहीं बन जाएगा और कहीं भी नहीं होगा। जैसे अब तू जो कुछ देख रहा है या अब जो लोग जिंदा है। सब कुछ का एक ही डेस्टिनी है। बदलना, रूप बदलना, खत्म होना ताकि नई चीजें पैदा
380:20
Speaker A
हो सके। सब कुछ इस पार्ट पर डिपेंड करता है कि तू कैसे देखता है। कंट्रोल तेरे हाथ में है। तू चाहे तो गलत सोच को तुरंत हटा सकता है। जैसे किसी कोने से घूम जाए। शांति पूरी शांति सेफ और आराम का
380:41
Speaker A
एंकरेज। कोई भी काम अगर टाइम पर रुक जाए तो उसमें कोई बुराई नहीं। ना ही उस आदमी में जो वह काम कर रहा था। वैसे ही एक्शंस का जो सिलसिला है जिसे हम जिंदगी कहते हैं। अगर यह खत्म हो जाए अपने समय पर तो
380:56
Speaker A
उसमें भी कुछ गलत नहीं। और जो इंसान उस मोड़ तक पहुंचता है उसके पास कंप्लेन करने का कोई रीजन नहीं। टाइम और एंड पॉइंट नेचर डिसाइड करती है। कभी हमारी अपनी जैसे बुढ़ापे में मौत या कभी पूरी नेचर मिलके जो हमेशा बदलती रहती
381:17
Speaker A
है। नए-नए चीजें बनाती है और दुनिया को टाइम पर रखती है। जो चीज सबका भला करती है, वह कभी बदसूरत या बेजगह नहीं हो सकती। जिंदगी का अंत कोई बुरी चीज नहीं है। यह हमें शर्मिंदा नहीं करता। और हम क्यों
381:35
Speaker A
शर्माएं किसी ऐसे एक्ट से जो हमने खुद चूज भी नहीं किया और जिसमें किसी और को नुकसान भी नहीं। यह एक अच्छी चीज है दुनिया के प्लान का हिस्सा और उसी से आगे बढ़ने वाली। यही तरीका है डिवाइन बनने का। गॉड के
381:52
Speaker A
रास्ते पर चलना और रीजन के गोल के पीछे जाना। तीन चीजें हमेशा याद रखने लायक है। पहला तेरे एकशंस कि वह बिना मतलब के ना हो और जस्टिस के हिसाब से हो। बाहरी चीजें या तो रैंडम है या किसी
382:14
Speaker A
डिजाइन का हिस्सा। चांस पर कंप्लेन नहीं कर सकते। प्रोविडेंस से झगड़ा नहीं कर सकते। दूसरा हर चीज का नेचर बीज लगने से लेकर जिंदगी के जागने तक और वहां से उनका छोड़ने तक कहां से आई कहां जाएगी?
382:33
Speaker A
तीसरा अगर तू अचानक ऊपर उठ जाए और जिंदगी को एक बड़ी हाइट से देखे सारी चीजें जो आसपास हो रही हैं आसमान तक और उनके पार भी तो तुझे दिख जाएगा कि सब कितना बेकार है और चाहे तू जितनी बार भी देखे हमेशा वही
382:50
Speaker A
दिखाई देगा वही लाइफ फॉर्म्स वही लाइफ स्पैन इस पर घमंड किस बात का अपनी गलत सोच हटा दे और सब ठीक हो जाएगा और तुझे कौन रोक रहा है हटाने से। किसी चीज पर गुस्सा होना मतलब तू भूल
383:10
Speaker A
गया। सब कुछ जो होता है वह नेचुरल है। जिम्मेदारी उनकी है तेरी नहीं और भी जो कुछ होता है वह पहले भी होता आया है। आगे भी होता रहेगा। और अभी मूवमेंट हर जगह हो रहा है। बिल्कुल ऐसे ही जो एक इंसान को सब
383:29
Speaker A
इंसानों से जोड़ता है, वह ना तो खून है ना जन्म वो है दिमाग। और एक इंसान का दिमाग ही गॉड है और गॉड का हिस्सा है। किसी चीज पर किसी का हक नहीं है। बच्चे, बॉडी, जिंदगी यह सब एक ही सोर्स से
383:46
Speaker A
आए हैं। सब कुछ इस पर डिपेंड करता है तू चीजें कैसे देखता है। अभी का जो टाइम है वही है जिसमें हम जी सकते हैं या खो सकते हैं। हमेशा याद कर उन लोगों को जो किसी बात पर बहुत गुस्से में थे। सबसे मशहूर,
384:06
Speaker A
सबसे दुखी, सबसे नफरत किए गए या जो भी और पूछ अब वह सब कहां है? धुआ, धूल, कहानी या कहानी भी नहीं। सोच उन सब एग्जांपल्स के बारे में। फेबियस कैटुलिनस गांव में लुसियस लपस बगीचे में सेट्रिनियस बे में
384:30
Speaker A
टबेरियस कैप्री पे वेलियस रूफस बस ऑब्सेशन और ईगो और जिन चीजों को हम इतनी शिद्दत से चाहते हैं वह कितनी छोटी लगती हैं और कितना बेटर होता अगर हम जो मिला उसे ही लेते और दिखाते सीधापन अपने ऊपर कंट्रोल
384:49
Speaker A
और गॉड के लिए सबमिशन बिना शो ऑफ किए। सबसे ज्यादा अनबियरेबल लोग वह होते हैं जो अपनी ही ह्यूमिलिटी का ढोंग रचते हैं। लोग पूछते हैं क्या तू कभी उन भगवानों को देखा है जिन्हें तू पूछता है? कैसे शोर है
385:09
Speaker A
कि वह एक्सिस्ट करते हैं? जवाब है पहला बस आसपास देख ले। दूसरा मैंने अपनी सोल भी कभी नहीं देखी। फिर भी उसकी इज्जत करता हूं। इसी तरह मुझे पता है कि भगवान है और मैं उनकी इज्जत क्यों करता हूं? क्योंकि
385:26
Speaker A
उनकी पावर को बार-बार महसूस किया है। बचाव का मतलब है हर चीज को उसकी असली फॉर्म में देखना। उनका नेचर और उनका पपस। सिर्फ वही करना जो सही हो। सिर्फ वही बोलना जो सच हो बिना डरे, बिना रोके। और क्या हो सकता है लाइफ जीने का
385:46
Speaker A
मतलब? अगर यह नहीं अच्छाई को ऐसे बांटना जैसे चैन के रिंग एक के बाद एक जुड़ते जाते हैं। बिना किसी गैप के। एक ही चीज अलग-अलग नहीं। सूरज की रोशनी चाहे दीवारों, पहाड़ों और हजार और चीजों से टूट
386:05
Speaker A
जाए। सब्सटेंस चाहे वह हजार रूप में बनता हो। अलग-अलग शेप में। जिंदगी चाहे वह अलग-अलग नेचर वाले हजार लोगों में बंटी हो। सबके अपनेप लिमिट्स के साथ बुद्धि चाहे अलग-अलग लगे बाकी पार्ट्स जैसे सांस मैटर इनके पास ना अवेयरनेस है ना एक दूसरे
386:27
Speaker A
से कनेक्शन फिर भी यूनिटी का पुल उन्हें भी जोड़ता है लेकिन बुद्धि अलग होती है। वह सिर्फ अपने जैसे को ढूंढती है और उसे जुड़ी रहती है एक शेयरर्ड अवेयरनेस के साथ। तुझे क्या चाहिए? सिर्फ सांस लेना या फील
386:49
Speaker A
करना, चाहना, बढ़ना, बढ़ना बंद करना, बोली का यूज़ करना, सोचना। इनमें से क्या लगता है कि सच में जरूरी है? अगर तू इन सबके बिना जी सकता है तो बस लोगस और गॉड को फॉलो करता रहे। एंड तक। अगर तू इन
387:08
Speaker A
बाकी चीजों को पकड़ के बैठा है और डेथ से इसलिए दुखी है क्योंकि वह तुझे इनसे दूर कर देती है तो यह एक रुकावट है। वो इनफिनिट टाइम का छोटा सा हिस्सा जो हमें मिला है एक सेकंड में एटरर्निटी में
387:26
Speaker A
समा जाता है। वह सब मैटर का छोटा हिस्सा और सब स्पिरिट का छोटा हिस्सा। वह पूरी धरती का छोटा सा टुकड़ा जहां तू रहता है। यह सब याद रख और किसी भी चीज को इंपॉर्टेंट ना समझ सिवाय इसके कि तू अपने
387:42
Speaker A
नेचर के हिसाब से काम करें और नेचर जो भेजे उसे एक्सेप्ट करें। दिमाग कैसे बिहेव करता है? बस सब कुछ इसी पर डिपेंड करता है। बाकी सब या तो दिमाग के कंट्रोल में है या बिल्कुल ही बाहर। मुर्दे और धुआ जैसे।
388:02
Speaker A
डेथ को छोटी बात समझने के लिए एक रीजन जो लोग सिर्फ दर्द और सुख को मोरालिटी मानते हैं, वह भी इतना तो मैनेज कर लेते हैं। अगर तू सिर्फ पकने को ही अच्छाई माने। अगर कुछ एक्शनंस ज्यादा या कम सिर्फ
388:20
Speaker A
लोगस के हिसाब से चले हो। अगर यह मैटर ही नहीं करता कि तू दुनिया को ज्यादा टाइम देखता है या कम तो फिर डेथ से डरना क्यों?
388:32
Speaker A
तू एक बड़े शहर का नागरिक बनकर जिया है। 5 साल या 100 साल क्या फर्क पड़ता है? कानून दोनों में कोई भेद नहीं करता। और जब तू शहर से भेजा जा रहा है किसी टरेंट या बेईमान जज के थ्रू नहीं
388:50
Speaker A
बल्कि नेचर के थ्रू जिसने तुझे पहले अंदर बुलाया था तो उसमें डर कैसा? जैसे कोई शो का डायरेक्टर कर्टन गिरा देता है किसी एक्टर के लिए। फिर मैंने तो अभी सिर्फ तीन एक्ट ही किए हैं। हां, यह एक तीन एक्ट का ड्रामा ही होगा
389:10
Speaker A
जिसका लेंथ उस पावर ने फिक्स किया था जिसने तुझे बनाया। और अब तोड़ रहा है। दोनों तू डिसाइड नहीं कर सकता था। तो जैसे तुझे ग्रेस के साथ अंदर लाया गया था वैसे ही ग्रेस के साथ बाहर निकल
389:35
Speaker A
जा। इसके साथ यह बुक यहीं पर कंप्लीट होती है। मेरा नाम है रोहित और आप सुन रहे थे सिलेबस वि रोहित। धन्यवाद। ओम [संगीत]
Topics: मार्कस ऑरेलियस मेडिटेशंस फिलॉसफर किंग रोमन सम्राट ग्रीक फिलॉसफी लेटिन रेटोरिक रोमन इतिहास एंटोनिनस पयस रोमन शिक्षा प्लेटो

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