दशहरा के पावन अवसर पर प्रस्तुत यह गीत 'हुआ शंखनाद' न्याय की विजय, अधर्म पर धर्म की जीत और शौर्य का आह्वान करता है। नील नितिन मुकेश और टीना देसाई अभिनीत, कैलाश खेर का स्वर।
Key Takeaways
- दशहरा न्याय और धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक पर्व है।
- साहस और शौर्य के साथ अन्याय का सामना करना आवश्यक है।
- अंधकार के बाद विजय और प्रकाश का आगमन निश्चित है।
What the video covers
- गीत का शीर्षक 'हुआ शंखनाद' है, जो दशहरा पर्व का शीर्षक गीत है।
- गीत में शस्त्र उठाकर रणक्षेत्र में उतरने का आह्वान किया गया है।
- दुष्ट और शत्रु के विरुद्ध साहस और शौर्य दिखाने पर बल दिया गया है।
- कर्म में अधर्म के पहरे को हटाने और शत्रुओं को पराजित करने की बात कही गई है।
- अंधकार के बीच प्रकाश और विजय की भावना को रेखांकित किया गया है।
- दशहरा को न्याय, लक्ष्य और विजय के पर्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- गीत में क्रोध और उन्माद को अन्याय के विरुद्ध ऊर्जा के रूप में दिखाया गया है।
- प्रस्तुति में वीर रस और उत्साहवर्धक भाव प्रमुख हैं।
- गीत टी-सीरीज़ द्वारा प्रस्तुत एक पूर्ण ऑडियो ट्रैक है।
- नील नितिन मुकेश और टीना देसाई इसमें मुख्य कलाकार के रूप में दिखाई देते हैं।
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Speaker A
[संगीत]
Speaker A
नागद है शस्त्र उठाकर आवा रण क्षेत्र तेरा और व्यू में तू है गिरा बना लाल धरा तू शौर्य दिखा।
Speaker A
यहां दुष्ट साड़ रहा है कील हृदय में गाड़ रहा।
Speaker A
अंधकार में छटा बनी वे सजी गति रोध हटा चल श्व ने स्वांग भरा।
Speaker A
कर्म अधर्म का है पहरा, हर शत्रु हन नर मुंड गिरा।
Speaker A
आज अपनी विजय का तू लहरा का सा दशहरा, उन्माद क्रोध का दशहरा।
Speaker A
यही पर्व न्याय का दशहरा है, लक्ष्य विजय का दशहरा।
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