साईं बाबा के दिल टूटने की कथा और उनके प्रति विश्वास बनाए रखने का संदेश।
Key Takeaways
- साईं बाबा का दिल उनके भक्तों के दुख से भी टूटता है।
- बाबा की ममता और करुणा माता-पिता जैसी है।
- हमारे प्रश्न और शिकायतें बाबा को दुख नहीं पहुंचातीं।
- विश्वास और धैर्य से ही बाबा की कृपा प्राप्त होती है।
- उदासी छोड़कर बाबा पर भरोसा रखना चाहिए।
What the video covers
- साईं बाबा कहते हैं कि उनका सबसे ज्यादा दिल उनके अपने बच्चे तोड़ते हैं।
- एक कथा में सपत नेकर जी ने बाबा से अपने बच्चे को वापस पाने की प्रार्थना की।
- बाबा ने आशीर्वाद देकर बच्चे को वापस दे दिया।
- जब हम बाबा से सवाल करते हैं कि दुख क्यों दिया, तो उन्हें दुख नहीं होता।
- बाबा को मां-बाप की तरह समझना चाहिए जिनका भी दिल दुखता है।
- हमें बाबा पर विश्वास रखना चाहिए कि वे हमेशा हमारे लिए अच्छा चाहते हैं।
- उदास होने की बजाय बाबा के प्रति भरोसा बनाए रखना चाहिए।
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Speaker A
बाबा मुझसे अक्सर कहते हैं कि मेरा सबसे ज्यादा दिल मेरे अपने बच्चे तोड़ते हैं। यह आपको मैं समझाती हूं एक कथा से। हमारे साइंस चक्र में लिखा है कि सपत नेकर जी एक बार बाबा के पास गए और बहुत रोए और बाबा से
Speaker A
कहा, "बाबा, आपने मेरा बच्चा क्यों छीन लिया?" बाबा बिलख उठे, परेशान हो गए, बोले, "मैं क्या लोगों के बच्चे छीन हूं?" उन्होंने आशीर्वाद दिया और शपथ नेकर जी को वापस वही बच्चा दे दिया। अब जब हम अपने बाबा के पास जाते हैं
Speaker A
और कहते हैं, "बाबा, आपने मुझसे यह चीज क्यों छीन ली? बाबा, आप तो थे फिर मेरे ऊपर ये दुख क्यों आया?" जब हम सवाल करते हैं, तब उनको दुख नहीं होता होगा। मैं समझती हूं, वो मां-बाप हैं। हम उनसे नहीं लड़ेंगे तो किनसे
Speaker A
लड़ेंगे। पर कभी तो सोचना चाहिए कि उनका भी तो दिल है, डूबता होगा, दर्द करता होगा। उन पर विश्वास तो करो, वो हैं तो सब अच्छा ही अच्छा होगा। उदास मत हो।
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