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Why No One Can Climb Mount Kailash? | The Mystery Revealed | Dhruv Rathee

माउंट कैलाश क्यों चढ़ा नहीं जा सकता? इस वीडियो में कैलाश पर्वत के रहस्यों, धार्मिक महत्व और वैज्ञानिक तथ्यों की जांच की गई है।

Key Takeaways

  • कैलाश पर्वत धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे पवित्र माना जाता है।
  • कैलाश पर्वत पर चढ़ाई पर कानूनी प्रतिबंध है, इसलिए कोई आधिकारिक आरोहण नहीं हुआ।
  • डॉक्टर मूलदा शेफ के दावे मिथक हैं और उनका कोई वैज्ञानिक समर्थन नहीं है।
  • कैलाश पर्वत की अनोखी भौगोलिक और प्राकृतिक विशेषताएं इसे रहस्यमय बनाती हैं।
  • यह पर्वत चार बड़ी नदियों का स्रोत है, जो एशिया के लिए महत्वपूर्ण हैं।

What the video covers

  • साल 1999 में रशिया के डॉक्टर एंस मूलदा शेफ ने कैलाश पर्वत पर एक्सपिडिशन की और कई विवादित दावे किए।
  • कैलाश पर्वत को चार प्रमुख धर्मों—हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन—के लिए पवित्र माना जाता है।
  • कैलाश पर्वत की पिरामिड जैसी अनोखी आकृति और इसकी भौगोलिक विशेषताएं इसे अद्वितीय बनाती हैं।
  • कैलाश के पास दो लेक—मानसरोवर (मीठा पानी) और राक्षस ताल (खारा पानी)—एक साथ मौजूद हैं, जो एक प्राकृतिक चमत्कार है।
  • कैलाश पर्वत पर चढ़ाई पर 2001 के बाद से कानूनी प्रतिबंध है, इसलिए कोई भी आधिकारिक रूप से चढ़ नहीं पाया।
  • डॉक्टर मूलदा शेफ के दावों में टाइम डिले और उम्र बढ़ने की तेज़ी जैसे मिथक शामिल हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
  • कैलाश पर्वत के आसपास से चार बड़ी नदियां निकलती हैं, जो करोड़ों लोगों के लिए जीवनदायिनी हैं।
  • कई महान पर्वतारोहियों ने भी कैलाश पर्वत पर चढ़ने से मना किया है, इसे असाधारण और चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
  • कुछ लोग कैलाश को एंशिएंट सिविलाइजेशन द्वारा निर्मित पिरामिड मानते हैं, लेकिन यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से असत्य है।
  • इस वीडियो में कैलाश पर्वत के रहस्यों, मिथकों और वैज्ञानिक तथ्यों को विस्तार से समझाया गया है।

Answers

Questions about this video

माउंट कैलाश पर चढ़ाई क्यों प्रतिबंधित है?

साल 2001 के बाद से माउंट कैलाश पर चढ़ाई पर कानूनी प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि इसे धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से संरक्षित किया जा सके। इसलिए कोई आधिकारिक आरोहण नहीं हुआ है।

क्या कैलाश पर्वत पर समय अलग तरीके से चलता है?

डॉक्टर मूलदा शेफ जैसे कुछ लोगों ने यह दावा किया है कि कैलाश पर्वत पर समय अलग चलता है और उम्र तेजी से बढ़ती है, लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। यह एक मिथक ही माना जाता है।

कैलाश पर्वत का धार्मिक महत्व क्या है?

कैलाश पर्वत हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्मों के लिए पवित्र स्थल है। इसे देवताओं का निवास स्थान माना जाता है और हजारों सालों से लोग इसकी परिक्रमा करते आ रहे हैं।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

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Speaker A
नमस्कार दोस्तों। साल 1999 रशिया के डॉक्टर एंस मूलदा शेफ अपनी टीम के साथ डिबेट पहुंचते हैं। यहां यह आए थे एक एक्सपिडिशन पर, दुनिया के सबसे मिस्टीरियस पहाड़ की खोज में, कैलाश पर्वत। कई हफ्तों की एक्सपिडिशन के बाद जब यह
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Speaker A
रशिया वापस लौटे तो इन्होंने कुछ ऐसे दावे किए जिन्होंने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। मुलदा शेव ने कहा, कुछ साल पहले चार साइबेरियन क्लाइबर्स ने कैलाश पर चढ़ने की कोशिश की थी और एक डेढ़ साल के अंदर वो
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Speaker A
चारों बूढ़े होकर मर गए। इन्हीं के एक टीम मेंबर सर जी सेलवर स्टोफ ने कहा कैलाश पर्वत एक टाइम मशीन है। यहां समय अलग तरीके से चलता है और उम्र ज्यादा जल्दी बढ़ती है। यह क्लेम बहुत से लोगों ने बाद में
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Speaker A
दोहराया भी कि कैलाश पर्वत के पास नाखून और बाल ज्यादा तेजी से ग्रो करते हैं। डॉक्टर मुलदा शेफ ने तो यह तक कहा कि कैलाश असल में अंदर से खोखला है और इसके अंदर बहुत सारी गुफाएं हैं। जिनमें
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Speaker A
एंशिएंट मिथिकल सिविलाइजेशन के लोग समाधि में हैं। यह क्लेम्स इतने वायरल हुए कि आज भी इंटरनेट पर अगर आप माउंट कैलाश सर्च करोगे तो यह कहानियां सबसे पहले आगे आती हैं। लेकिन आखिर कितनी सच्चाई है इन दावों में? क्या कैलाश के पास सही में समय अलग
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Speaker A
तरीके से बिहेव करता है? आखिर क्या कारण है जब माउंट एवरेस्ट जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ पर हजारों लोग चढ़ चुके हैं। तो कैलाश पर्वत पर आज तक भी कोई इंसान क्यों नहीं चढ़ पाया है? आइए समझते हैं
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Speaker A
कैलाश पर्वत के इस रहस्य को। आज के इस वीडियो में। वीडियो शुरू करने से पहले बताना चाहूंगा दोस्तों अगर आप आज भी रिपोर्ट्स, प्रेजेंटेशंस या कंटेंट मैनुअली बना रहे हो। अपने रिसर्च वर्क में या किसी भी ऑफिस के काम में एआई का यूज नहीं कर रहे हो तो
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Speaker A
ऑनेस्टली बताऊं आप काफी पीछे रह जाओगे। दोस्तों आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी लाइफटाइम का सबसे बड़ा टेक्नोलॉजिकल शिफ्ट है। ये कोई फ्यूचर की बात नहीं है। ये अभी हो रहा है और इससे फर्क नहीं पड़ता आपने एआई के बारे में कितना सुना है और कितना
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Speaker A
नहीं। फर्क इससे पड़ता है कि आप अपनी लाइफ में अपने कामों में एआई का कितना इस्तेमाल कर रहे हो। आज 2026 में लोग जानते तो हैं कि एआई कितनी पावरफुल चीज है लेकिन इसे ढंग से यूज़ नहीं कर पाते। बात बड़ी सिंपल
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Speaker A
है। जो लोग एआई को प्रैक्टिकली यूज़ करना सीख जाएंगे वो फ्यूचर में ज्यादा प्रोडक्टिव होंगे। ज्यादा वैल्यूएबल होंगे और ओपोरचुनिटीज ऑटोमेटिकली अट्रैक्ट करेंगे। इसीलिए मैंने बनाई है यह एआई मास्टर क्लास। खासतौर पर उन लोगों के लिए जो नॉन टेक्निकल हैं। स्टूडेंट्स,
02:29
Speaker A
वर्किंग प्रोफेशनल्स, क्रिएटर्स या बिजनेस ओनर्स। ये 3 घंटे की लाइव वर्कशॉप है जो कंडक्ट करूंगा मैं 15 फरवरी को शाम के 7:00 बजे। पर्सनली लाइव आकर आपको 25 पावरफुल एआई टूल्स सिखाऊंगा। इस क्लास के बाद आप प्रेजेंटेशंस बिना डिजाइन स्किल्स
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Speaker A
के बनाना सीख जाएंगे। रिपोर्ट्स और असाइनमेंट्स मिनटों में बन जाएंगे। हाइपर रियलिस्टिक क्वालिटी में एआई इमेज, एआई वीडियोस और एआई से गाने बनाना भी सीखेंगे और जो काम आप पहले कई घंटों में करते थे अब वो कुछ ही मिनटों में हो जाएगा। अभी तक
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Speaker A
पिछले सेशंस में 500 से ज्यादा लोग इस वर्कशॉप को ज्वाइन कर चुके हैं और उनका फीडबैक ऑनेस्टली बहुत सॉलिड रहा है। स्क्रीन पर देख सकते हो। पिछले सेशन में 76% लोगों ने कहा कि ये वर्कशॉप उनकी एक्सपेक्टेशन से अबव एंड बिय्ड। [संगीत]
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Speaker A
तो अगर आप 2026 में पीछे नहीं रहना चाहते और एआई को अपने काम का डेली असिस्टेंट बनाना चाहते हो तो लिंक नीचे दिया है या फिर आप इस क्यूआर कोड को भी स्कैन कर सकते हो इस मास्टर क्लास को ज्वाइन करने के
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Speaker A
लिए। जल्दी से कर लेना क्योंकि सीटें लिमिटेड हैं। अब अपने टॉपिक पर वापस आते हैं। नक्शे में अगर हम देखें तो माउंट कैलाश इंडिया चाइना के बॉर्डर से लगभग 100 कि.मी. दूर तिब्बेट के वेस्टर्न रीजन में स्थित है। इसकी ऊंचाई करीब 6,638 मीटर जो
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Speaker A
कि माउंट एवरेस्ट की हाइट से करीब 2,200 मीटर कम है। लेकिन अनोखी बात है इसकी शेप जो कि बिल्कुल एक पिरामिड जैसी है। इसकी ढलान इतनी ज्यादा है कि पहाड़ के एक बड़े हिस्से पर तो बर्फ भी नहीं [संगीत] टिक
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Speaker A
पाती। लेकिन सबसे स्पेशल बात है इसकी रिलीजियस सिग्निफिकेंस। चार अलग-अलग रिलीजंस हिंदूज़्म, बुद्धिज्म, जैनिज्म और बोन कैलाश पर्वत को पवित्र मानते हैं। और इनमें से कुछ का कहना है कि यह यूनिवर्स का सेंटर है। [संगीत] इन चारों धर्मों के लोग हजारों सालों से
04:01
Speaker A
कैलाश पर्वत की परिक्रमा करते आ रहे हैं। जो सेक्रेड रास्ता है इस पर्वत के [संगीत] चारों तरफ घूमने का वो करीब 52 कि.मी. का है। हिंदूज और बुद्धिस्ट क्लॉकवाइज डायरेक्शन में परिक्रमा करते हैं और जैन और बोर्न फॉलोअर्स एंटीक्लॉकवाइज करते
04:14
Speaker A
हैं। हिंदू धर्म में कैलाश वो पर्वत है जिस पर भगवान शिव अपनी पत्नी पार्वती के साथ रहते हैं और सबसे फेमस हिंदू लेजेंड है रावण की कहानी। अपनी शक्ति के अहंकार में चूर रावण ने एक बार कैलाश पर्वत को
04:26
Speaker A
भगवान शिव और माता पार्वती समेत उठाकर लंका ले जाने की सोची। जब रावण कैलाश को उठाने लगा तो भगवान शिव ने बस अपने पैर का एक अंगूठा दबाया और रावण हजार साल के लिए पहाड़ के नीचे फंस गया।
04:40
Speaker A
हिंदुओं की तरह ही बुद्धिस्ट मानते हैं कि कैलाश पर्वत पर बुद्धिस्ट देवता चक्र [संगीत] संवर अपनी पत्नी वज्रारी के साथ मेडिटेशन करते हैं। इसी तरह जैन धर्म में कैलाश को अष्टापद कहा जाता है। जहां पर पहले तीर्थंकर [संगीत]
04:55
Speaker A
ऋषभदेव ने लाखों साल तपस्या की और मोक्ष प्राप्त किया। इसी तरह है बोन धर्म जिसके बारे में आप में से ज्यादातर लोग शायद नहीं जानते होंगे क्योंकि यह तिब्बेट का प्री बुद्धिस्ट इंडीजीनियस रिलीजन है। यानी कि बुद्धिज्म के आने से पहले तिब्बेट
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Speaker A
में इस धर्म में ज्यादातर लोग माना करते थे। इसमें माना जाता है कि कैलाश वो एक्सिस है जहां स्वर्ग और धरती [संगीत] मिलते हैं। तो सोच कर देखिए चार अलग-अलग धर्म लेकिन सभी की कैलाश को लेकर एक ही
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Speaker A
सोच है कि यह पवित्र है और यहां पर देवी देवता रहते हैं। कैलाश के अलावा पूरी दुनिया में सिर्फ एक ही और ऐसा पहाड़ है जो चार धर्मों में पूजा जाता है। और यह है श्रीलंका का श्रीपादा यानी एडमम्स पीक। यह
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Speaker A
एडमम्स पीक भी बहुत अनोखी है। इसकी फोटोज देखिए जरा। इसकी रिलीजियस सिग्निफिकेंस हिंदूइज़्म, बुद्धिज्म, इस्लाम और क्रिश्चियनिटी में देखी जाती है। इस पहाड़ के ऊपर एक बड़ी फुटप्रिंट जैसी फॉरमेशन बनी है पत्थरों की जिसका चारों अलग-अलग धर्मों के लोगों का अलग-अलग इंटरप्रिटेशन
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Speaker A
है। लेकिन कैलाश पर आए तो कैलाश पर्वत को हिमालय का सबसे पुराना पहाड़ भी बताया जाता है। लेकिन यह बात सच नहीं है। हिमालय की पहाड़ियां जैसा कि आप जानते ही होंगे इंडियन और यूरेशियन प्लेट के कोजन से लगभग
06:01
Speaker A
5 करोड़ साल पहले बननी शुरू हुई थी। जबकि कैलाश पर्वत इसके लगभग 3 करोड़ साल बाद सिर्फ 1.7 करोड़ साल पहले ही बनना शुरू हुआ था। इस पहाड़ को अगर आप सेटेलाइट व्यू से देखोगे तो आपको इसके पास दो लेकक्स भी
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Speaker A
दिखाई देंगी। एक है मानसरोवर लेक और दूसरी है राक्षस ताल। यह दोनों लेक साइड बाय साइड हैं। दोनों में बस 2 से 3 कि.मी. की दूरी है और आसपास का एनवायरमेंट भी बिल्कुल सेम है। लेकिन कमाल की बात यह है
06:26
Speaker A
कि मानसरोवर लेक का पानी मीठा है जिसे पिया जा सकता है। इसमें मछलियां और प्लांट्स भी हैं। और दूसरी तरफ राक्षस ताल का पानी खारा है। इसमें बहुत ज्यादा नमक है। इसे पिया नहीं जा सकता और इसके आसपास
06:37
Speaker A
कुछ उगता भी नहीं है। यह सही में एक नेचुरल वंडर है दोस्तों। दो लेकक्स एक दूसरे के बगल में एक ही जगह पर लेकिन एक का पानी सॉल्ट वाटर और दूसरे का पानी फ्रेश वाटर। ऐसा कैसे हो सकता है? इसकी
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Speaker A
बात आगे वीडियो में करते हैं। लेकिन लोगों का मानना है कि मानसरोवर लेक देवताओं का बाथिंग प्लेस है और राक्षस ताल राक्षसों का। कहा जाता है कि रावण ने राक्षस ताल पर ही भगवान शिव को खुश करने के लिए तपस्या
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Speaker A
की थी। लेकिन सबसे इंपॉर्टेंट बात यह है कि चार मेजर एशियन रिवर्स इंडस, सतलुज, ब्रह्मपुत्र और करनाली जो गंगा में जाकर मिलती हैं। यह सब माउंट कैलाश के आसपास से ओरिजनेट होती हैं। यह नदियां करोड़ों लोगों को पानी देती हैं। एक साइंटिफिक
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Speaker A
पर्सपेक्टिव से यह बात भी बहुत एक्स्ट्राऑर्डिनरी है कि एक माउंटेन रेंज के पास सिर्फ इस एक पहाड़ी के पास इतनी सारी बड़ी नदियां निकलती हैं। लेकिन बात यहां खत्म नहीं होती। मैंने कहा था इस पहाड़ की शेप भी बहुत स्पेशल है। कैलाश
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Speaker A
पर्वत ऑलमोस्ट एक परफेक्ट पिरामिड शेप में है। इसके चार फेसेस हैं नॉर्थ, साउथ, ईस्ट, वेस्ट [संगीत] जो चार दिशाओं की तरफ एलाइन हैं। ऐसा एक नेचुरल माउंटेन में होना बहुत बहुत रेयर बात है। इतना रेयर होने की वजह से ही कैलाश को लेकर बहुत सी बातें
07:44
Speaker A
कही जाती हैं। इसी पिरामिड जैसी शेप को लेकर डॉक्टर मुलदा शेव ने कहा था कि यह आर्टिफिशियली कंस्ट्रक्टेड पिरामिड है। यानी कि इसे किसी एंशिएंट सिविलाइजेशन ने बनाया था जो बहुत एडवांस थी और बाकी दुनिया के पिरामिड से यह सीधा कनेक्टेड
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Speaker A
है। कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि कैलाश पर्वत के नीचे शंभाला जैसी मिथिकल सिटीज [संगीत] हैं और कैलाश इन्हें छिपा कर रखता है। हालांकि सबसे पॉपुलर क्लेम जो किया जाता है वो है टाइम डिले को लेकर जिसकी
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Speaker A
बात मैंने वीडियो के शुरू में भी करी थी। कहा जाता है कि कैलाश के पास समय बहुत डिफरेंटली बिहेव करता है और जिन चीजों को होने में हफ्तों लगते हैं वो कुछ घंटे में ही होने लगती हैं। 12 घंटे में ही बाल और
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Speaker A
नाखून इतने बड़े हो जाते हैं जितने नॉर्मली दो हफ्तों में बढ़ते हैं। और सुनिए जग्गी वासुदेव ने तक कहा था।
08:35
Speaker A
स्ट्रैंड ऑफ़ व्हाट इज देयर ऑन दैट माउंटेन। यू वोंट बिलीव इन 2 एंड हाफ आवर्स। आई वास ऑलमोस्ट 10 टू 15 इयर्स यंगर। अब जब आप किसी से इन क्लेम्स के पीछे साइंटिफिक एक्सप्लेनेशन मांगते हो तो वो लोग रीजन देते हैं कि इसमें कॉस्मिक
08:47
Speaker A
एनर्जी है। कैलाश कॉस्मिक एनर्जी का सेंटर है जहां टाइम और स्पेस के रूल्स अप्लाई ही नहीं होते। कुछ लोग तो यह भी कह देते हैं कि कैलाश असल में एक दूसरी दुनिया और डायमेंशन में जाने का गुप्त द्वार है और
08:59
Speaker A
इसी कारण से टाइम यहां बड़े डिफरेंटली बिहेव करता है। इंटरनेट पर आज के दिन ऐसे क्लेम्स बहुत ज्यादा सर्कुलेट होते हैं और कुछ लोग सबूत के तौर पर यह भी कह देते हैं कि देखो कैलाश की पोजीशन धरती के नक्शे
09:10
Speaker A
में मैथमेटिकली परफेक्ट है। दावा किया जाता है कि कैलाश पर्वत नॉर्थ पोल से एग्जैक्टली 666 कि.मी. दूर है। ब्रिटेन के स्टोनहेंच से भी यह एग्जैक्टली 666 कि.मी. दूर है और साउथ पोल से एग्जैक्टली इसका डबल 13,332 कि.मी. दूर है। ये नंबर्स देखकर लोगों को
09:31
Speaker A
लगता है कि कुछ तो अलग है इस पर्वत के बारे में। तो ये ना ये इत्तेफाक नहीं लगता। ऐसा लगता है कि इसीलिए कैलाश पर्वत को एक्सेस मुंडी भी कहते हैं। कहा जाता है कि ये पूरा जो जो पूरा अर्थ है ना
09:45
Speaker A
वो ऐसा एक बराबर घूम रहा है सोलर सिस्टम में। इधर या उधर लुढ़क क्यों नहीं रहा है?
09:49
Speaker A
माना जाता है कि कैलाश पर्वत वो एक्सेस है जो इसको बैलेंस जो बैलेंस कर रहा है। ओके और यह मिस्ट्री और भी ज्यादा गहरी हो जाती है जब आप इस बात को देखो कि इस पर्वत पर आज तक कोई नहीं चढ़ पाया है। माउंट
10:02
Speaker A
एवरेस्ट की हाइट से कैलाश पर्वत 2,200 मीटर छोटा है। इससे ऊंचे 100 से ज्यादा पहाड़ हैं जिन पर लोग चढ़ चुके हैं। लेकिन इस एक पहाड़ पर कोई नहीं चढ़ा आज तक। आखिर क्या कारण है इसके पीछे?
10:16
Speaker A
दावा किया जाता है कि कैलाश पर जो भी चढ़ने की कोशिश करता है वह किसी ना किसी कारण से रोक दिया जाता है। लोगों के सिर में अचानक से तेज दर्द होने लगता है। डिसओरिएंटेशन होती है या अचानक से मौसम
10:28
Speaker A
खराब हो जाता है। तेज बर्फ गिरने लगती है। बर्फीले तूफान आ जाते हैं। लोगों का कहना है कि यहां कोई इनविज़िबल फोर्स है जो एक सर्टेन पॉइंट के बाद किसी को भी ऊपर नहीं जाने देती। आइए इसके पीछे की असलियत जानते
10:41
Speaker A
हैं। सन 1926 में ब्रिटिश एक्सप्लोरर ह्यूज रटल्स ने कैलाश पर चढ़ने की कोशिश की थी। उन्होंने तब इसे देखकर कहा था कि यह अटरली अनक्लाइमेबल है। उन्होंने लिखा कि इसका नॉर्थ फेस लगभग 90° के एंगल पर है और इतना ज्यादा ढलान है कि इस पर बर्फ भी
10:57
Speaker A
नहीं टिक पाती। जब इन्होंने चढ़ने की कोशिश करी तो यह कैलाश पर 5486 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने में कामयाब रहे थे। लेकिन उसके आगे नहीं बढ़ पाए। कारण था कि कैलाश बादलों में घिरा हुआ था। ह्यूज के साथ एक ब्रिटिश इंडियन आर्मी के कर्नल
11:12
Speaker A
आर सी विल्सन आए हुए थे। जिन्होंने साउथ की तरफ से चढ़ने की कोशिश की और एक ऐसा रास्ता ढूंढ लिया जिससे माउंट कैलाश की चोटी पर चढ़ा जा सकता था। इस रास्ते को देखकर उनके शेरपा सेन ने उनसे कहा साहब हम
11:26
Speaker A
यहां [संगीत] चढ़ सकते हैं। लेकिन जब विल्सन ने चढ़ने की कोशिश करी तो वह भी यहां नहीं चढ़ पाए। उनके कदम रखते ही पत्थर हिल गए और अचानक से मौसम खराब हो गया। अचानक से बर्फबारी होने लगी और
11:36
Speaker A
विल्सन के सर के ऊपर तेजी से बिजली पड़ गई। लेकिन इसके पीछे कोई सुपर नेचुरल फोर्स नहीं थी। बस नेचर था। यह बात सच है कि फिजिकल चैलेंजेस की वजह से इस पहाड़ को चढ़ पाना बहुत मुश्किल है। लेकिन इंपॉसिबल
11:50
Speaker A
नहीं। असली कारण किसी के भी इस पहाड़ के ऊपर ना चढ़ पाने के पीछे है इसकी रिलीजियसेंस। सन 1985 में इटली के राइनहोल्ड मेसनर को चाइनीस सरकार ने कैलाश पर्वत पर चढ़ने का ऑफर दिया था। राइन होल्ड को दुनिया का
12:07
Speaker A
ग्रेटेस्ट माउंटेनियर माना जाता है। वो 8000 मीटर से ऊंचे दुनिया के सभी 14 पहाड़ों पर चढ़ने वाले पहले व्यक्ति हैं। माउंट एवरेस्ट पर भी वो उस जमाने में बिना ऑक्सीजन के चढ़ गए थे। जब ऐसा करना इंपॉसिबल माना जाता था।
12:24
Speaker A
वंस थॉट इमॉसिबल एक्चुअली डिस्ट्र तो अगर कोई कैलाश पर्वत पर चढ़ने के लिए सबसे ज्यादा क्वालिफाइड था तो वो यही इंसान थे। लेकिन जब चाइनीस सरकार का ऑफर इनके पास आया तो इनके साथी माउंटेनियर्स ने इनसे कहा [संगीत] वन शुड नॉट ट्रेंपल
12:41
Speaker A
इन माउंटेन बूट्स ऑन गॉड्स टर्न टू स्टोन। किसी को भी पत्थर बन चुके देवताओं को अपने जूते के नीचे नहीं कुचलना चाहिए। राइन होल्ट समझ गए और उन्होंने इस पहाड़ पर चढ़ने से मना कर दिया। बाद में उन्होंने
12:53
Speaker A
कहा कि इस पर चढ़ना लोगों की आत्मा को जीतने जैसा होगा और वह सजेस्ट करेंगे कि अगर किसी को पहाड़ ही चढ़ना है तो किसी और ज्यादा कठिन पहाड़ पर चढ़ा जाए। इसी तरह ब्रिटिश एल्पाइन क्लब के प्रेसिडेंट रहे
13:05
Speaker A
डूक स्कॉट का भी कैलाश पर्वत को लेकर कहना था कि यह कोई बहुत डिफिकल्ट पहाड़ नहीं है। लेकिन कैलाश पर चढ़ने के बारे में सोचना भी उस चीज को नीचा दिखाना होगा जिसे लोग पवित्र मानते हैं। साल 2001 में
13:18
Speaker A
स्पेनिश क्लाइबर जीसस मार्टिनस नोवास को चाइना से कैलाश क्लाइम करने की परमिशन मिल गई थी। लेकिन इस बात को लेकर इतना भारी प्रोटेस्ट हुआ कि नोवास ने अपनी एक्सपिडिशन कैंसिल कर दी और चाइनीस सरकार ने इंटरनेशनल प्रेशर के चलते कैलाश में
13:32
Speaker A
क्लाइंबिंग पर परमानेंट बैन लगा दिया। सही सुना आपने। साल 2001 के बाद से इस पहाड़ पर क्लाइम करना वैसे भी अलाउड नहीं है लीगली। इतिहास में सिर्फ एक ही इंसान है जो कैलाश पर्वत पर चढ़ पाए हैं और वह भी
13:45
Speaker A
बुद्धिस्ट लेजेंड। कहा जाता है कि मीला रेपा की बोन धर्म के गुरु नरोवान से कैलाश पर्वत पर अधिकार को लेकर बहस हो गई। तय हुआ कि दोनों में से जो पहले कैलाश पर पहुंचेगा कैलाश उसी का होगा। जब रेस शुरू हुई तो नरोवान तेजी से पर्वत
14:02
Speaker A
पर चढ़ने लगे और इसकी चोटी के करीब थे। लेकिन मीला रेपा ध्यान में ही बैठे रहे। लेकिन फिर एक सुबह सूरज की एक किरण पर बैठकर मीला रेपा कैलाश पर्वत की चोटी पर पहुंच गए और रेस जीत गए। यह कोई एक्चुअल
14:15
Speaker A
हिस्ट्री नहीं है। बस एक लेजेंडरी कहानी है। सेक्रेड माने जाने वाले बाकी पहाड़ों को लेकर भी माउंटेनियर्स की [संगीत] यही सोच रही है। कैलाश पर्वत की तरह ही तिबेट के खावा कार्पो पर्वत पर भी नहीं चढ़ा जा सकता। यह 6740
14:28
Speaker A
मीटर्स [संगीत] ऊंचा है। इसके पीछे कारण है कि खावा कार्पो को बुद्धिज्म में बहुत पवित्र माना जाता है और इस पर चढ़ना तिबेटन कम्युनिटीज की नजर में सेलेज के बराबर है। इसी तरह भूटान में 7600 मीटर ऊंचा यह वाला पहाड़ है। गंखार पुनसंग ये
14:43
Speaker A
दुनिया का सबसे ऊंचा पहाड़ है जिस पर कोई नहीं चढ़ पाया है और इसके पीछे भी कारण लोकल रिलीजियस बिलीव्स की रिस्पेक्ट है। साल 1994 के बाद से भूटान ने इस पहाड़ पर चढ़ने पर एक ऑफिशियल बैन लगा दिया था।
14:55
Speaker A
दूसरे दावे पर आते हैं कैलाश की पिरामिड जैसी शेप। यह बात सच है कि नेचर में ऐसी शेप बनना बहुत रेयर है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि एलियंस ने इसे आकर बनाया हो। माउंट कैलाश की पिरामिड शेप क्वार्टनरी
15:07
Speaker A
पीरियड की आइस एजेस के दौरान बननी शुरू हुई थी जो लगभग 25 लाख साल पहले शुरू हुआ था। इन आइस एजेस के दौरान ग्लेशियर्स की बर्फ ने वैलीज क्रिएट की और पहाड़ की चट्टानों को काटकर इन्हें स्मूथ बना दिया।
15:19
Speaker A
इसी की वजह से हमें एक शार्प पीक देखने को मिलती है। यह एक कंप्लीटली नेचुरल प्रोसेस है और दुनिया में और भी ऐसे पहाड़ हैं जहां पर ऐसा हुआ है। जैसे कि यूरोप की आल्प्स माउंटेन रेंज में मैटर हॉर्न की
15:30
Speaker A
पहाड़ी। यह भी कैलाश की तरह एक पिरामिड की शेप में है और बहुत से लोग स्विट्जरलैंड में जब घूमने जाते हैं इसे देखने जाते हैं। इसी तरीके से कैलाश पर्वत के पास एक फ्रेश वाटर लेक होना और एक सॉल्ट वाटर लेक
15:41
Speaker A
होना कोई सुपर नेचुरल चीज नहीं है। रीजन इसके पीछे भी कंप्लीटली साइंटिफिक है। एक तो दुनिया में और भी ऐसी लेकक्स हैं जिनमें दो अलग-अलग लेकक्स होना तो छोड़िए। एक ही लेक में दो तरह के पानी हैं। जैसे
15:54
Speaker A
कि कजाकिस्तान की बालखाश लेक। इसके वेस्टर्न हिस्से में पानी लगभग फ्रेश है जिसे पिया जा सकता है लेकिन ईस्टर्न हिस्से में पानी बहुत सॉल्टी है। फिलीपींस की बाराकूड़ा लेक को देखिए। इसमें ऊपर का पानी तो मीठा और फ्रेश है लेकिन नीचे का
16:07
Speaker A
पानी सॉल्टी है। कैलाश पर्वत के पास राक्षस ताल लेखक साइंटिफिक भाषा में कहें तो एक एंडोर हेक लेक है। इसका मतलब होता है एक ऐसी लेक जिसमें पानी के बाहर निकलने का कोई रास्ता ना हो। एक लैंड लॉक लेक।
16:19
Speaker A
इससे होता क्या है कि इवापोरेशन से पानी तो वेपराइज हो जाता है लेकिन पानी के अंदर जो सॉल्ट और मिनरल्स मौजूद हैं वो राक्षस ताल लेक में ही रह जाते हैं। धीरे-धीरे ओवर द इयर्स ओवर द सेंचुरीज ये मिनरल्स
16:31
Speaker A
पानी के अंदर ही जमा होते रहे। इनकी कंसंट्रेशन बढ़ती रही और यहां का पानी बहुत ज्यादा सॉल्टी बन गया। और क्योंकि इतने सॉल्टी पानी में कुछ उगता नहीं। कोई मछलियां नहीं रहती इसलिए यहां पर कोई जीवन भी नहीं देखने को मिलता। लेकिन दूसरी तरफ
16:44
Speaker A
मानसरोवर लेक का पानी ओवरफ्लो होकर राक्षस ताल आता रहता है। इससे पानी के साथ-साथ मिनरल्स भी आते हैं और मानसरोवर के पानी में मिनरल्स का कंसंट्रेशन [संगीत] नहीं बढ़ता और यहां सिर्फ एक ऑल्टीट्यूड डिफरेंस है इन दोनों के बीच में। पानी
16:56
Speaker A
हमेशा एक दिशा में ही बहकर आता है। इससे राक्षस ताल में और भी ज्यादा मिनरल्स इकट्ठे होते रहते हैं [संगीत] और पानी और ज्यादा खारा बनता रहता है। अब आते हैं टाइम डाइलेशन पर। दोस्तों, क्या कैलाश पर्वत पर समय अलग तरीके से चलता है? आप
17:10
Speaker A
गेस कर ही चुके होंगे। इसका जवाब है ऑब्वियसली नहीं। अल्बर्ट आइंस्टाइन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी के मुताबिक टाइम को केवल दो चीजें इफेक्ट कर सकती हैं। स्पीड और ग्रेविटी। लेकिन कैलाश पर्वत के पास ना तो स्पीड ज्यादा है और ना ही ग्रेविटी में
17:24
Speaker A
कोई ज्यादा फर्क है। लोग दावा करते हैं कि इस पर्वत के पास नाखून और बाल तेजी से बढ़ने [संगीत] के पीछे एक स्ट्रांग मैग्नेटिक फोर्स होगी। लेकिन आज तक इसका कोई भी सबूत नहीं मिला है कि कैलाश पर कोई
17:35
Speaker A
भी यूनिक मैग्नेटिक फोर्स मौजूद है। एक्चुअली में इसका भी कोई सबूत नहीं है कि इस पर्वत के पास नाखून और बाल तेजी से बड़े होते हैं। असल में ये सारे टाइम डायलेशन के दावे एक ही सोर्स तक ट्रेस किए
17:46
Speaker A
जा सकते हैं। डॉक्टर मूलदा शेव वही इंसान जिनकी कहानी मैंने आपको वीडियो के शुरू में बताई थी। जानते हो यह कौन थे? यह कोई फिजिसिस्ट या जियोलॉजिस्ट नहीं थे बल्कि [संगीत] एक आई सर्जन थे। आंखों के डॉक्टर कैलाश को लेकर इन्होंने जो भी दावे किए थे
18:00
Speaker A
उन्हें किसी भी पीियर रिव्यूड साइंटिफिक जर्नल में पब्लिश नहीं किया गया है। यहां तक कि किसी भी साइंटिस्ट ने उनके दावों को सही नहीं पाया है आज तक। मूलदा शेफ किस टाइप के इंसान थे। आप इस बात से अंदाजा
18:11
Speaker A
लगा सकते हो कि वो मानते थे कि मरमेड्स और वैंपायर्स सच में एक्सिस्ट करते हैं। उन्होंने रोमेनिया के देश में वैंपायर ड्रैकुला का असली महल ढूंढने का दावा भी किया था जो उनके मुताबिक अंडर ग्राउंड था। इसके अलावा वह चार्ल्स डार्विन की थ्योरी
18:24
Speaker A
ऑफ एवोल्यूशन को भी बकवास बता चुके हैं और यह भी दावा कर चुके हैं कि इंडिया में ऐसे सुपर ह्यूमंस रहते हैं जो टेलीपैथिकली कम्युनिकेट कर सकते हैं। जो इंसान इस तरीके के साइंस फिक्शन वाले दावे करता हो
18:36
Speaker A
जो बच्चों की कहानियों में होते हैं उस इंसान पर आखिर कैसे यकीन किया जा सकता है। मूदा शेफ के दावे इतने कॉमेडी है कि रशिया में उनकी थ्योरीज को डिबंग करने के लिए एक पूरी किताब एंटी मूदा शेफ पब्लिश हुई थी।
18:48
Speaker A
लेकिन अनफॉर्चूनेट बात यह है दोस्तों की हमारे इंडिया में खुद ऐसे बहुत सारे मूलदा शेव्स घूम रहे हैं जो पडकास्ट में आकर ऐसी अजीबोगरीब बातें करते हैं और बच्चों की कहानियों को सच बताते हैं। तो बोलते रहते हैं हम चले जाएंगे। तो बोला
19:01
Speaker A
कि आधे रास्ते में ऐसा लगा कि कोई कोई है कोई शक्ति [संगीत] जो इशारे से बोल रही है कि वापस कैलाश पर्वत के ऊपर एक सीढ़ी है जहां से उतर के आ रहा है वो। कैलाश इस नाइदर इन द अर्थ नाइदर इन द इवन।
19:11
Speaker A
कैलाश इज द ओनली प्लेस वेयर शिवजी लिव्स वेयर यू कैन गो इन द फिजिकल फॉर्म एंड कम बैक। बहुत सारे लोगों ने पिछले कुछ सालों में अलग-अलग पॉडकास्ट पर जाकर यह बकवास फैलाई है। मूलदा शेफ की अनप्रवन थ्योरीज
19:22
Speaker A
को फैक्ट्स की तरह दिखाया है सिर्फ और सिर्फ YouTube पर व्यूज के लिए। इन 2 एंड हाफ आवर्स आई वाज ऑलमोस्ट 10 टू 15 इयर्स यंगर। वो कहानी जो मैंने आपको वीडियो के शुरू में बताई थी साइबेरियन क्लाइमेर्स की। वो
19:34
Speaker A
एकद साल में बूढ़े होकर मर गए। यह भी कंप्लीटली फिक्शनल कहानी है। कौन ये साइबेरियन क्लाइबर्स थे? क्या इनकी एज थी?
19:40
Speaker A
क्या इनके नाम थे? कौन सी एक्सपिडिशन पर यह गए थे? कब गए थे? इनका कोई डेथ सर्टिफिकेट तक अवेलेबल नहीं है। असल में यह कहानी भी मूलदा शेफ के कैलाश एक्सपिडिशन के बाद एक रशियन टैब मीडिया में फैलाई गई थी। वहां से इसे इंडियन
19:53
Speaker A
मीडिया ने उठा लिया और इंडिया में यही बकवास फैलानी शुरू कर दी। रशियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन ने तो ऑफिशियली यह भी कहा है कि ऐसा कोई भी एक्सपिडिशन हुआ ही नहीं था। सोच कर देखो दोस्तों, एक रशियन के फैलाए गए झूठों पर लाखों इंडियंस
20:07
Speaker A
को बेवकूफ बनाया जा रहा है और लोग बेवकूफ बन भी रहे हैं इंडिया में। ऐसा ही झूठा दावा है माउंट कैलाश की मैथमेटिकली परफेक्ट पोजीशन का। कैलाश पर्वत का जो प्लेसमेंट है इस पृथ्वी पे वो नॉर्थ पोल से 666
20:20
Speaker A
कि.मी. दूर है। जबकि साउथ पोल से 666 * बाय 2 कि.मी. दूर है। यह दावा एप्रोक्समेटली क्लोज जरूर है लेकिन एग्जैक्टली एक्यूरेट नहीं है। नॉर्थ पोल से कैलाश का क्लेम्ड डिस्टेंस [संगीत] 666 कि.मी. लेकिन एक्चुअली में ये है 650
20:37
Speaker A
कि.मी. इसी तरीके से स्टोन हेंच का एक्चुअल डिस्टेंस है 6,900 कि.मी. और साउथ पोल से जो 13,332 कि.मी. का डिस्टेंस बताया जा रहा है वो एक्चुअली में 13,400 कि.मी. का डिस्टेंस है। तो ये जो 666 नंबर्स रिपीट करके
20:53
Speaker A
परफेक्ट मैथमेटिकल पोजीशन दिखाने की कोशिश की जा रही है। ऐसा असली में है नहीं। और पहाड़ को चढ़ने पर जो सिर दर्द, कंफ्यूजन और डिसओरिएंटेशन देखने को मिलता है, उसके पीछे कोई सुपर नेचुरल फोर्स नहीं है। उसके पीछे रीजन है ऑल्टीट्यूड। 4000 मीटर से
21:08
Speaker A
ऊपर जाने पर कई लोगों को ऐसा फील होता है क्योंकि ऑक्सीजन एक्चुअली में कम हो जाती है। ऑक्सीजन की कमी के कारण दिमाग में सूजन आ जाती है जिसकी वजह से तेज सिर दर्द होना, कंफ्यूजन, हेलुसिनेशंस जैसी दिक्कतें आ जाती हैं। इंटरनेट पर एक यह भी
21:22
Speaker A
क्लेम सर्कुलेट किया जाता है कि नासा ने माउंट कैलाश में स्ट्रेंज एनर्जी फील्ड्स डिटेक्ट करी। इसके अलावा जब नासा रिसर्च करती है तो उन्हें यह पता चलता है कि माउंट कैलाश के अंदर कुछ तो मैग्नेटिक फील्ड है और वो मैग्नेटिक फील्ड नॉर्मल
21:34
Speaker A
नहीं है। वो मैग्नेटिक फील्ड बहुत ज्यादा है। अगर मैं आपको वैल्यूज़ में बताऊं तो उस मैग्नेटिक फील्ड की वैल्यू आई 3000 से 8000 नैनो टेस्ला ज्यादा एज़ कंपेयर टू अदर। नासा की टेरा स्पेसक्राफ्ट ने 20 जनवरी साल 2003 को कैलाश की एस्टर इमेजेस
21:48
Speaker A
ली थी। एस्टर का फुल फॉर्म एडवांस्ड स्पेस बोर्न थर्मल एमिशन एंड रिफ्लेक्शन रेडियो मीटर। इमेजेस में 14 स्पेक्ट्रल बैंड्स यूज़ हुए। विज़िबल से थर्मल इंफ्रारेड तक। लेकिन नासा की वेबसाइट पर यहां कोई भी एनोमली मिलने का दावा नहीं किया गया है।
22:02
Speaker A
कैलाश की फोटो भी ऐसी ली गई है जैसे जनरली पहाड़ों की फोटो ली जाती है। नासा को यहां एक्चुअली में कोई भी अनयूजुअल एनर्जी होने का कोई एविडेंस नहीं मिला है। लेकिन इन सब चीजों का मतलब यह नहीं दोस्तों कि कैलाश
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Speaker A
पर्वत एक एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी पहाड़ नहीं है। सोच कर देखिए इंसानों ने कहां पहाड़ों से लेकर समुद्र तक स्पेस से लेकर चांद तक हर चीज को कॉनकर किया है। लेकिन कैलाश जैसे पहाड़ को देखकर पूरी इंसानियत ने कहा कि यह सीक्रेड है। इस पर हम नहीं चढ़ेंगे।
22:31
Speaker A
इससे अद्भुत चीज क्या हो सकती है? दुनिया के सबसे महान माउंटेनियर जिन्होंने माना कि कैलाश पर्वत पर चढ़ना ज्यादा मुश्किल नहीं है। उन्होंने खुद चढ़ने से मना कर दिया। यह है असली मिरेकल। यह पर्वत हमें सिखाती है कि कुछ चीजें कॉनकर करने के लिए
22:45
Speaker A
नहीं होती। कुछ चीजें रिस्पेक्ट करने के लिए होती हैं। अगर यह वीडियो पसंद आया दोस्तों, तो एआई मास्टर क्लास को ज्वाइन करने का लिंक नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। और अब अगर आप टाइम डाइलेशन के कांसेप्ट को और गहराई से
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Speaker A
जानना चाहते हो। एक्चुअल वाला टाइम डलेशन कैसे काम करता है? तो इसके लिए आपको ब्लैक होल्स और वार्म होल्स को गहराई से समझना होगा और उसे मैंने समझाया है इस वाले वीडियो में। यहां क्लिक करके देख सकते हो।
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Speaker A
बहुत-बहुत धन्यवाद।
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