यह वीडियो हिरशिमा और नागासाकी पर अमेरिका द्वारा गिराए गए एटॉमिक बम के कारणों और द्वितीय विश्व युद्ध के संदर्भ में जापान के इतिहास को समझाता है।
Key Takeaways
- हिरशिमा और नागासाकी पर बम गिराने का मुख्य कारण जापान को जल्दी और बिना लंबी लड़ाई के हार मानने पर मजबूर करना था।
- जापान का साम्राज्यवाद और विस्तारवादी नीतियां द्वितीय विश्व युद्ध के बड़े कारण थे।
- अमेरिका ने जापान को आर्थिक रूप से दबाने के लिए आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति बंद की।
- पर्ल हार्बर पर जापान के हमले ने अमेरिका को युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर किया।
- एटॉमिक बम गिराने के बाद भी जापान की हार और युद्ध समाप्ति में कई राजनीतिक और सैन्य कारण शामिल थे।
What the video covers
- 6 अगस्त 1945 को हिरशिमा पर गिराए गए एटॉमिक बम का वर्णन और उसके विनाशकारी प्रभाव।
- द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत और एक्सिस पावर्स व एलाइड पावर्स की भूमिका।
- जापान का साम्राज्यवाद और एशिया के कई देशों पर कब्जा।
- अमेरिका द्वारा जापान पर आर्थिक प्रतिबंध और तेल की आपूर्ति बंद करना।
- जापान का पर्ल हार्बर पर सरप्राइज अटैक और अमेरिका का युद्ध में प्रवेश।
- जापानी जनता का ब्रेनवाशिंग और क़ामिकाज़ी हमलों की रणनीति।
- अमेरिका की अनकंडीशनल सरेंडर की मांग और जापान का इनकार।
- हिरशिमा और नागासाकी पर दो एटॉमिक बम गिराए जाने का निर्णय।
- बम गिराने के बाद के विनाश और रेडिएशन के प्रभाव।
- युद्ध समाप्ति और जापान की हार के कारणों पर चर्चा।
Chapters
- 00:00हिरशिमा पर एटॉमिक बम का हमला और उसका प्रभाव
- 02:12द्वितीय विश्व युद्ध में एक्सिस और एलाइड पावर्स
- 04:00जापान का साम्राज्यवाद और एशिया में विस्तार
- 05:29अमेरिका द्वारा जापान पर आर्थिक प्रतिबंध
- 07:11पर्ल हार्बर पर जापान का सरप्राइज अटैक
- 09:05जापानी जनता का ब्रेनवाश और क़ामिकाज़ी हमले
- 14:18अमेरिका की अनकंडीशनल सरेंडर की मांग और जापान का इनकार
- 17:10हिरशिमा और नागासाकी पर एटॉमिक बम गिराने का निर्णय
- 19:05बम गिराने के बाद के विनाश और रेडिएशन प्रभाव
- 21:40युद्ध समाप्ति और जापान की हार के कारण
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Speaker A
नमस्कार दोस्तों, 6th अगस्त 1945 जापान के हिरशिमा शहर में गर्मियों का मौसम चल रहा था। सुहाना दिन निकला था। नीला आसमान था, अच्छी धूप थी और मंडे मॉर्निंग का समय था। सुबह के करीब 8:00 बजे लोग अपने ऑफिस जस्ट
Speaker A
पहुंचे थे काम करने के लिए। छोटे बच्चे स्कूल पहुंचे थे और पहला पीरियड स्कूल का शुरू होने वाला था। इसी बीच कुछ लोगों को आसमान में एक अमेरिकन बोइंग B29 विमान गुजरता हुआ दिखता है। ठीक 8:15 पर इस
Speaker A
एरोप्लेन से कुछ नीचे टपकता है। दूर से लोग इतना क्लियरली नहीं देख सकते थे कि क्या यह छोटी सी चीज है जो नीचे गिर रही है इस एरोप्लेन से। उन्होंने अपने सपनों में भी नहीं सोचा होगा कि यह एक एटॉमिक बम
Speaker A
था। 43 सेकंड्स एग्जैक्टली 43 सेकंड के लिए यह नीचे गिरता रहता है और उसके बाद एक पलक झपकते ही सब खत्म। शहर में मौजूद हजारों लोगों को अपने जिंदगी के आखिरी पल में बहुत तेज रोशनी चमकती हुई दिखती है।
Speaker A
बम धमाके की वजह से इंस्टेंटली एक फायर बॉल बन जाती है। मानो एक छोटा सा सूरज बन गया हो। जमीन पर तापमान 4000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। एक चुटकी में ही 80 हजार लोग मारे जाते हैं। यह सुनकर
Speaker A
सबसे बड़ा सवाल आपके मन में उठेगा। क्यों? क्यों गिराया गया यह बम? क्या कारण था इसके पीछे? आइए आज के वीडियो में समझते हैं दोस्तों हिरशिमा और नागासाकी पर गिरे एटॉमिक बॉम्ब्स की कहानी। स्पर्नियस मैन न्यू एज बोर्न इन द रोल ऑफ़ थंडर एंड द
Speaker A
फायर ऑफ द सन 8:15 इन द मॉर्निंग अगस्त सिक्स द फर्स्ट एटॉमिक बम स्ट्रक [संगीत] [प्रशंसा] इन दिस इंस्टेंट रॉबर्ट पैसेज सीक्रेट बुक ऑफ़ द हिंदू नाउ आई एम बिकम द डिस्ट्र [संगीत] हमारी कहानी की शुरुआत होती है सेकंड
Speaker A
वर्ल्ड वॉर से। यह युद्ध शुरू हुआ साल 1939 में जब हिटलर ने पोलैंड देश को इनवेड किया और एक-एक करके बाकी कई देश इस युद्ध में धकेले गए। वर्ल्ड वॉर टू दो बड़ी अलायंसेस के बीच में लड़ा जा रहा था। एक
Speaker A
तरफ थे नासी, जर्मनी, इटली और जापान जिन्हें एक्सिस पावर्स करके बुलाया जाता है और दूसरी तरफ थे ग्रेट ब्रिटेन, सोवियत यूनियन और यूएसए। इन्हें एलाइड पावर्स या एलाइस करके बुलाया जाता है। एलाइस में फ्रांस और चाइना जैसे देश भी जुड़े हुए
Speaker A
थे। लेकिन शुरुआत में अमेरिका पूरी कोशिश कर रहा था कि वह इस युद्ध का एक हिस्सा ना बने। फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के बेकार एक्सपीरियंस के बाद अमेरिका ने सोच रखा था कि यूरोप और एशिया में अब कुछ भी हो मुझे
Speaker A
इंटरफेयर नहीं करना है। मुझे अपने हाथ दूर रखने हैं। लेकिन साल 1941 में जब जापान ने पर्ल हारबर पर हमला किया उसके बाद यूएस को भी मजबूरन इस वॉर में इनवॉल्वड होना पड़ा। बट सिंस द अनप्रव अटैक बाय जापान ऑन संडे
Speaker A
ए स्टेट ऑफ वॉर हैज़ एकिस्टेड बिटवीन द यूनाइटेड स्टेट्स एंड द जापानीज एंपायर। यहां पर जापान के कॉन्टेक्स्ट से चीजों को समझना बहुत जरूरी है। क्योंकि जब भी वर्ल्ड वॉर टू की बात करी जाती है तो अक्सर हम जर्मनी और हिटलर पर ही सबसे
Speaker A
ज्यादा फोकस करते हैं। जापान की ज्यादा बात नहीं करते। असल में बात क्या है?
Speaker A
अर्ली 1900 में जापान में भी इंपीरियलिज्म देखा जा रहा था। ठीक उसी तरीके से जैसे ब्रिटेन, फ्रांस और कई और यूरोपियन देश बाकी देशों पर कब्जा करने लग रहे थे। उन्हें कॉलोनाइज करने लग रहे थे। यही चीज जापान भी कर रहा था। इंडिया जैसे ब्रिटिश
Speaker A
एंपायर का हिस्सा था। ऐसे ही 1940 तक जापान के अंडर इंडोनेशिया, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस, वियतनाम, चाइना के कई ईस्टर्न एरियाज, नॉर्थ कोरिया, साउथ कोरिया इन सारे देशों पर जापानीज एंपायर का कब्जा था। यह जैपनीज कॉलोनाइजर्स बात करते थे ग्रेटर एशिया की कि हम एक ऐसा
Speaker A
एशिया बनाएंगे जो यूनाइटेड हो। लेकिन यह सब कहने की बातें थी। रियलिटी में बाकी और कॉलोनाइजर्स की तरह ये जमीन पर कब्जा करते थे रिसोर्सेज एक्सप्लइट करने के लिए ताकि इन्हें खुद मुनाफा मिल सके। सबसे पहला बड़ा एक्सपेंशन इन्होंने किया था साल 1931
Speaker A
में। नॉर्दर्न चाइना में एक एरिया था मंचूरिया करके। वहां पर इन्होंने कब्जा जमाया। नॉर्थ में इनका प्लान था। वहां से आगे जाकर ये मंगोलिया देश पर सोवियत यूनियन के कुछ एरियाज पर कब्जा करेंगे। साउथ में इनका प्लान था कि वियतनाम, लाओस
Speaker A
और कंबोडिया के जो एरियाज हैं उन एरियाज पर कब्जा करेंगे। साउथ में बात क्या थी?
Speaker A
ये जो देश हैं आज के दिन वियतनाम, कंबोडिया के यह उस वक्त एक्चुअली में फ्रेंच एंपायर का हिस्सा थे। इन्हें फ्रेंच इंडो चाइना करके बुलाया जाता था। तो जापान अगर इन पर कब्जा करना चाहता था तो उन्हें पहले फ्रेंच एंपायर को हराना
Speaker A
होता यहां पर। साल 1940 में यही हुआ। उन्होंने फ्रांस के खिलाफ जंग छेड़ी और इन एरियाज पर अपना कब्जा बना लिया। लेकिन यह करने से जापान अब वर्ल्ड वॉर टू का एक पार्टिसिपेंट बन गया। अमेरिका ने देखा कि
Speaker A
एक तरफ हिटलर है जो यूरोप में एक के बाद एक देश के खिलाफ जंग छेड़े जा रहा है। उन पर कब्जा किए जा रहा है। दूसरी तरफ एशिया में जापान है जो यही चीज करने लग रहा है। हम यहां पर वॉर में इंटरफेयर तो नहीं करना
Speaker A
चाहते अपनी मिलिट्री का इस्तेमाल करके लेकिन कुछ तो करना पड़ेगा यहां पर इन्हें रोकने के लिए। क्यों ना इकोनॉमिकली कुछ एक्शन लिया जाए। तो अमेरिका एक्चुअली में कॉपर, आयरन और स्टील बड़े एसेंशियल रिसोर्सेज हैं। इन्हें जापान को एक्सपोर्ट
Speaker A
करना बंद कर देता है। इस पर रोक लगा देता है। उम्मीद यह थी कि जापान यह देखकर एक्सपेंशन बंद कर देगा, शांत बैठेगा। लेकिन ऐसा होता नहीं है। रिस्पांस में फिर अमेरिका एक्चुअली में तेल बेचना बंद कर देता है जापान का। उस जमाने में ऑयल
Speaker A
एक्चुअली में बहुत ही इंपॉर्टेंट रिसोर्स था जापानीज लोगों के लिए और 80% ऑयल जो जापान में आता था वो अमेरिका से ही आता था। अमेरिका ने कहा कि हम एक ही शर्त पे तेल वापस शुरू करेंगे तुम्हें देना कि तुम
Speaker A
पहले चाइना के जो एरियाज को तुमने ऑक्यूपाई किया है वहां से वापस निकलो और जर्मनी और इटली के साथ अपनी अलायंस को तोड़ो। लेकिन ये करने का मतलब था कि अपने जो सपने थे ग्रेटर एशिया बनाने के जैपनीज
Speaker A
लोगों के वो खत्म करने पड़ते जैपनीज एपरर को। तो उन्होंने मन-मन में सोचा भाई तुम बाढ़ में जाओ अमेरिका। हम कोई और रास्ता अपनाते हैं। इन्होंने देखा कि ये जो मलेशिया और इंडोनेशिया के एरियाज है यहां पर तेल और बाकी रिसोर्सेज अच्छे मिलते
Speaker A
हैं। क्यों ना इन एरियाज पर अपना कब्जा जमाएं और खुद ही अपना तेल निकाल लें। फिर अमेरिका पर डिपेंडेंट होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन बस एक प्रॉब्लम थी। इंडोनेशिया उस वक्त डच ईस्ट इंडीज था। तो डच के कंट्रोल में था और मलेशिया उस वक्त
Speaker A
ब्रिटिश मलाय था। ब्रिटिश के कंट्रोल में था। ब्रिटिश और डच दोनों अमेरिका के एलाइस थे। अगर इन देशों पर भी हमला कर दिया तो इसका मतलब था कि अमेरिका हम पर हमला कर सकता है क्योंकि अमेरिका के दोस्तों पर
Speaker A
हमला किया जा रहा है यहां पे। अच्छा हो सकता है कि अमेरिका हम पर हमला ना करे लेकिन उसके बाद जब हम फिलीपींस के देश पर कब्जा करने जाएंगे जो कि एक्चुअली में अमेरिका की टेरिटरी थी उस वक्त। अमेरिका
Speaker A
ने फिलीपींस को ऑक्युपाई कर रखा था, कॉलोनाइज कर रखा था। तब तो अमेरिका हम पर पक्का वापस हमला कर देगा क्योंकि वो हम फिर अमेरिका की टेरिटरी छीन रहे होंगे। और ग्रेटर एशिया का सपना फिलीपींस के बिना कैसे पूरा हो सकता है? तो अब एक ही ऑप्शन
Speaker A
बचता है हमारे पास। हम इन सारे एरियाज को ऑक्यूपाई करेंगे, कॉलोनाइज करेंगे। लेकिन अगर इन केस अमेरिका हम पर हमला कर दे तो उन्हें चुप कराना पड़ेगा पहले ही। अमेरिका हमसे ज्यादा ताकतवर है। अगर एक लंबी लड़ाई चलेगी हम तो हम हार जाएंगे। लेकिन अगर हम
Speaker A
चुपके से सीक्रेटली जाकर अमेरिका के मिलिट्री बेसिस पर हमला कर देंगे, उड़ा डालेंगे उनके सारे फाइटर विमानों को, सारे जहाजों को तो क्या होगा? तो कैसे वो हम पर हमला करेंगे? इसी सोच के साथ सेवंथ दिसंबर 1941 को जापान यूएसए के पर्ल हारबर बेस पर
Speaker A
एक सरप्राइज अटैक करता है। दिसंबर 7th, 1941, ओवरहेड जैप राइडर्स अराउंड द लूस विदाउट वार्निंग सर्कल पर्ल हार्बर द सिटी ऑफ़ हनी सरप्राइज अटैक। 350 से ज्यादा जापानीज नेवी के एयरक्राफ्ट्स हमला करते हैं, बम गिराते हैं और 2 घंटे के अंदर-अंदर 19 यूएस नेवी
Speaker A
के शिप्स, 118 मिलिट्री एयरक्राफ्ट्स और 2000 से ज्यादा यूएस मिलिट्री के लोग मारे जाते हैं। कुछ ही घंटों बाद जापान इसके बाद जाकर एकदम से फिलीपींस पर कब्जा जमा लेता है। लेकिन रियलिस्टिकली देखा जाए तो यह बड़ी बेवकूफी वाली चीज थी जो जापान ने
Speaker A
करी। बच्चे ऐसी सोच रखते हैं कि देखो मैं उन्हें जाकर पहले मार देता हूं ताकि वो मुझे ना मार पाए और फिर उनकी टेरिटरी पर जाकर कब्जा कर लेता हूं। और क्योंकि उन्होंने कहा है कि वो वॉर में इंटरफेयर
Speaker A
नहीं करेंगे तो इसलिए मैं सेफ हूं। लेकिन ऑब्वियसली अगर आप यूएसए जैसे बड़े देश की टेरिटरी पर कब्जा करोगे। उनके मिलिट्री बेस पर हमला करोगे और फिर एक्सपेक्ट करोगे कि वो चुप बैठे रहे। ऐसा तो होगा नहीं। ऑब्वियसली इसके रिस्पांस में अमेरिका
Speaker A
ऑफिशियली डिक्लेअर कर देता है कि अब वह भी वॉर में आ रहा है और जापान के खिलाफ अमेरिका जंग छेड़ देता है। यही वो पॉइंट था जब अमेरिका ऑफिशियली वर्ल्ड वॉर टू में इनवॉल्व हुआ। इसके बाद ब्रिटेन और चाइना
Speaker A
भी जापान के खिलाफ जंग छेड़ देते हैं। और ऐसा होते देख ना, जर्मनी और इटली भी यूएसए के खिलाफ वॉर डिक्लेअ कर देते हैं 3 दिन बाद। तो 1941 के एंड तक वर्ल्ड वॉर टू अपनी फुल स्विंग में थी। इन सारे बड़े
Speaker A
देशों ने एक दूसरे के खिलाफ वॉर डिक्लेअ कर दी थी। इसके बाद एक्चुअल वॉर की ज्यादा डिटेल में ना जाते हुए साल 1943 तक इटली
Speaker A
मार्क और उसके बाद जर्मनी भी सरेंडर कर जाता है। तो एक्सिस पावर्स में सिर्फ जापान बचता है जिसने सरेंडर नहीं किया है। लगातार हुए लॉसेस के बावजूद भी जापानीज एपरर सरेंडर करने को राजी नहीं है। इस पॉइंट पर जापानीज फैशिम की थोड़ी डिटेल्स
Speaker A
में जाना काफी इंटरेस्टिंग होगा। असल में बात क्या थी दोस्तों? जापानीज आम जनता को भारी तरीके से ब्रेन वाश किया जा रहा था। जापान में एक महाराजा थे जापानीज एपरर जो थे उनके हीरो हीरो थे वो उस वक्त लोगों को
Speaker A
बताया जाता था कि ये जो एपरर है यह भगवान की देन है। लिटरली लोग उन्हें भगवान से कंपेयर करते थे। तो जो भी वो कहते अंधाधुंध उसमें विश्वास करो। अगर नहीं करोगे तो तुम हमारे देश के अगेंस्ट हो।
Speaker A
अगर हमारे जैपनीज एपरर ने कहा है कि हम इन देशों को जाकर इन पर कब्जा करेंगे। इन्हें कॉलोनाइज करेंगे। इनके अच्छे के लिए करेंगे हम। तो वो सही कह रहे हैं। हम जंग पर जा रहे हैं। एक अच्छे पर्पस के लिए जंग
Speaker A
पर जा रहे हैं। जो भी जंग को अपोज करता था एक्चुअली में जापान में उन्हें हंट डाउन करके मार दिया जाता था। इसके अलावा कुछ जैपनीज कल्चर और ट्रेडिशंस जो थे उन्हें बड़े गंदे तरीके से मॉडिफाई किया जाता था
Speaker A
लोगों को मैनपुलेट करने के लिए। फॉर एग्जांपल इनका बुशीडो समुराय ट्रेडिशन। इस बुशीदो ट्रेडिशन के अकॉर्डिंग समुरायस को हमेशा मौत के बारे में अवेयर रहना चाहिए। उसे द एंड की तरह नहीं देखना चाहिए और मौत से इतना डरना नहीं चाहिए। लेकिन इन्होंने
Speaker A
इस ट्रेडिशन को मॉडिफाई करके लोगों को क्या सुनाया? इन्होंने कहा कि एक समुराय वह होता है जो एपरर के लिए जान देने को तैयार है। जो समझता है कि एपरर के लिए जान देना मेरे लिए ग्रेटेस्ट ऑनर है और
Speaker A
दुश्मनों के सामने सरेंडर करना मेरे लिए बेइज्जती वाली बात है। इस तरीके से अगर लोगों को ब्रेन वाश किया जाएगा तो लोग अपनी जान देने को तैयार हो जाएंगे। और यही हुआ दोस्त। जापनीज लोगों को ब्रेन वाश किया गया ऑर्गेनाइज्ड सुसाइड अटैक्स करने
Speaker A
के लिए। की एयरफोर्स में एक स्पेशल मिलिट्री यूनिट बनाई गई जिसे कामी काज़ कहा गया। यह वो पायलट्स थे जिनका मकसद था कि वो अपने फाइटर जेट्स में बैठेंगे और उस फाइटर जेट को ले जाकर दुश्मनों की वॉरशिप्स में क्रैश कर देंगे और खुद अपने
Speaker A
आप को सैक्रिफाइस कर देंगे। सिंपल शब्दों में कहा जाए तो सुसाइड बॉम्बिंग। इतना ही नहीं बच्चों को ट्रेनिंग दी जाती थी कि वह अपने साथ एक एक्सप्लोसिव लेकर चलें और नीचे लेट जाएं टैंक के सामने ताकि खुद अपनी जान दे दे और टैंक को भी फोड़ दें।
Speaker A
इमेजिन कर सकते हो इस हद तक ब्रेन वाश किया गया लोगों को वहां। ऑब्वियसली हर कोई ब्रेन वाश नहीं होता था। कुछ बड़ी दर्दनाक कहानियां हैं जो कामी काजे पायलट्स की सुनने को मिली कि कैसे वो रात भर अपने
Speaker A
मिशन से पिछली रात को रोते थे और चिट्ठियां लिखते थे अपने परिवार को और अपने आप से सवाल करते थे कि क्या यह जो करने जा रहे हैं वो सही में अच्छा है उनके देश के लिए उनके खुद के लिए। अमेरिका और
Speaker A
बाकी एलआई देश उम्मीद लगाए बैठे थे कि वॉर की वजह से जापान में अनइंप्लॉयमेंट इतनी बढ़ चुकी है। लोगों के पास खाने के लिए खाना नहीं है। भुखमरी बहुत ज्यादा है। शायद आम जनता जापान की अब अपने एपरर के
Speaker A
खिलाफ खड़ी होएगी और उस प्रेशर में आकर एपरर सरेंडर कर देंगे। लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं इन कारणों की वजह से। अमेरिका ने देखा अब एक ही रास्ता बचता है। फुल स्केल इन्वजन किया जाए जापान का। मतलब अपनी
Speaker A
मिलिट्री को भेजें और वहां पर ऑन ग्राउंड वो जाकर जापानीज एपरर को ओवर थ्रो करें। इसलिए अमेरिका प्लान करता है ऑपरेशन डाउनफॉल। अमेरिका और जापान के बीच में आखिरी बड़ी लड़ाई लड़ी जाती है द बैटल ऑफ ओकिनावा। फर्स्ट अप्रैल 1945 और 2 जून
Speaker A
1945 के बीच में। नक्शे में देखोगे तो जापान के काफी साउथ में एक आइलैंड है ओकिनावा करके। अमेरिका अपनी मिलिट्री भेजता है कि ऑन ग्राउंड जाकर फिजिकली इस आइलैंड पर कब्जा किया जाए और कोई भी ऑब्सकल बीच में आए तो उसे हटा दिया जाए।
Speaker A
इसके बाद हम अपना फुल स्केल इन्व करेंगे ऑपरेशन डाउनफॉल। लेकिन यह ओकीनावा की लड़ाई अमेरिका को चौंका कर रख देती है। जैपनीज लोग हार मानने को तैयार ही नहीं थे। हर इंसान अपनी आखिरी सांस तक लड़ने को तैयार था। आखिरी बचा हुआ अकेला इंसान भी
Speaker A
एंड तक लड़ने लग रहा था। लगातार कामीकाजी अटैक्स देखने को मिले। एक के बाद एक सुसाइड बम। सरेंडर का कोई सवाल ही नहीं था। इसका मतलब था कि अमेरिकन फोर्सेस के लिए जैपनीज फोर्सेस को हराना बहुत ही मुश्किल काम हुआ। इसी कारण से बैटल ऑफ
Speaker A
ओकिनावा को ब्लडिएस्ट बैटल कहा जाता है। पैसिफिक में जो हुई। इवेंचुअली अमेरिका ने यह लड़ाई जीत ली, लेकिन इसकी कीमत बहुत भारी थी। 12,000 अमेरिकन सोल्जर्स मारे गए। 500 से ज्यादा इंजर्ड हो गए। दूसरी तरफ 1 लाख 10,000 जैपनीज सोल्जर्स मारे
Speaker A
गए। ओकिनावा आइलैंड पर रहने वाले जो लोग थे उन्हें ओकिनावंस बुलाते हैं। इस एक लड़ाई में 1 लाख से ज्यादा ओकिनावंस मारे गए। इसका मतलब था 1/4 पपुलेशन पूरे आइलैंड की। 25% लोगों ने अपनी जान दे दी पूरे
Speaker A
आइलैंड पर। यह स्टैटिस्टिक्स सुनकर अमेरिका के मिलिट्री हेड्स ने सोचा कि इस तरीके से तो हमारा ऑपरेशन डाउनफॉल काम नहीं करेगा। मतलब शायद अगर हम अपनी सारी आर्मी को सारे लोगों को वहां भेज देंगे काम कर जाएगा। हम जीत जाएंगे। लेकिन किस
Speaker A
कीमत पर इस छोटे से आइलैंड में ही 12,000 लोग हमारी आर्मी के मारे गए। अगर हम बाकी आइलैंड्स पर कब्जा करने की कोशिश करेंगे जापान के अगर उन्हें इस तरीके से ऑन ग्राउंड हराने की कोशिश करेंगे तो कितने
Speaker A
और लोग हमारे मारे जाएंगे। ऊपर से उनके भी कितने लोग मारे जाएंगे? अनइमेजिनेबल होगा यह सोचना और यह लड़ाई तो इतने सालों तक खींचती चली जाएगी क्योंकि जापानीज जो जनता है वो इतनी ब्रेन वाश हो चुकी है कि वो
Speaker A
सरेंडर करने को राजी ही नहीं है। अमेरिका और एलआयस ने सोचा कि कुछ और तरीका यहां पर अपनाना पड़ेगा जापान को सरेंडर करवाने के लिए। 12th अप्रैल 1945 यूएस के प्रेसिडेंट फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट जो कई समय से यूएस
Speaker A
के प्रेसिडेंट रहे थे। पूरे वर्ल्ड वॉर टू के समय से वह गुजर जाते हैं और वाइस प्रेसिडेंट हैरी ट्रूमेन बन जाते हैं अमेरिका के नए प्रेसिडेंट। जापान के इस युद्ध में एक सॉल्यूशन ढूंढने की सारी रिस्पांसिबिलिटी अब इनके कंधे पर है।
Speaker A
अलग-अलग ऑप्शंस यहां पर कंसीडर करते हैं। अगर हम जैपनीज एपरर हीरो हीटो के साथ शायद नेगोशिएट करके देख लें। वो चीज काम कर जाए लेकिन नहीं काम करेगी इन्हें लगता है क्योंकि एपरर किसी भी हालत में सरेंडर नहीं करेंगे। उन्होंने यह चीज पहले ही
Speaker A
क्लियर कर दी है। इसी समय इन्हें पता चलता है एक टॉप सीक्रेट यूएस मिलिट्री प्रोजेक्ट के बारे में। द मैनहटन प्रोजेक्ट जहां पर बहुत सारे साइंटिस्ट सीक्रेटली काम करने लग रहे हैं दुनिया का पहला एटम बम बनाने के लिए। 16 जुलाई 1945
Speaker A
को इस एटम बम को टेस्ट किया जाता है न्यू मेक्सिको में एक बॉम्बिंग रेंज में और यह टेस्ट सक्सेसफुल निकलता है। ट्रू मैन को लगता है कि उन्हें अपना सॉल्यूशन मिल चुका है। [संगीत] अपने बाकी और टॉप मिलिट्री ऑफिशियल्स और
Speaker A
गवर्नमेंट हेड्स के साथ यह डिस्कस करते हैं कि किस तरीके से बॉम्ब गिराया जाएगा। यह डिसाइड करते हैं गिराने से पहले एक लास्ट वार्निंग दे दी जाए जापान को। 26 जुलाई 1945 पोस्ट डैम डिक्लेरेशन यूएस के प्रेसिडेंट, चाइना के प्रेसिडेंट, ग्रेट
Speaker A
ब्रिटेन के प्राइम मिनिस्टर साथ में आते हैं और अनकंडीशनल सरेंडर डिमांड करते हैं जापान से। यह वार्निंग देते हैं कि अगर जापान सरेंडर नहीं करेगा तो इसका नतीजा होगा प्र्प एंड अटर डिस्ट्रक्शन। पूरी तरीके से तबाही। बिना स्पेसिफाई किए कि
Speaker A
एक्जेक्टली क्या मतलब है इनका तबाही से। जापानीज लोगों ने सपनों में भी नहीं सोचा था कि एटम बम जैसा कोई हथियार है। एकिस्ट भी करता है दुनिया में। इस पॉइंट ऑफ टाइम तक जुलाई 1945 में कहा जाता है कि जो एंटी
Speaker A
वॉर सेंटीमेंट्स थे आम जनता के अंदर जापान में वो काफी बढ़ चुके थे। लोग परेशान होने लगे थे इस कास्टेंट लड़ाई से। भूख से मर रहे थे। जॉब्स की कमी थी, इकोनॉमिक हालत खराब थी। लेकिन वो खड़े होकर अपनी खुद की
Speaker A
मिलिट्री और एपरर के अगेंस्ट लड़ नहीं सकते थे। जब तक मिलिट्री उन्हें सपोर्ट ना करती। जैपनीज एपरर एक्चुअली में सरेंडर करने को तब राजी हो जाते जब यह कहा जाता कि वो अपनी पावर बनाए रख सकें और कुछ
Speaker A
ऑक्यूपाइड टेरिटरीज एक्चुअली में उनके अंडर ही रहने दी जाए। लेकिन अमेरिका अनकंडीशनल सरेंडर चाहता था। तो 29 जुलाई 1945 को जापान ने इस स्पोर्ट्स डैम डिक्लेरेशन को रिजेक्ट कर दिए। इसके बाद थर्ड अगस्त को यूएस प्रेसिडेंट हैरी ट्रूमैन ने ऑथराइज किया कि एटम बम गिराया
Speaker A
जाएगा जापान के ऊपर। 6th अगस्त 1945 बोइंग B29 विमान हिरोशिमा शहर के ऊपर से गुजरता है। इस विमान में रखा है लिटिल बॉय एटम बम। बड़ा आयरोनिक नाम है दुनिया के पहले एटॉमिक बम के लिए जो वॉरफेयर में यूज़ किया
Speaker A
गया। एक छोटा बच्चा 8:15 यह बम हिरशिमा पर गिराया जाता है और अमेरिका दुनिया के इतिहास में पहला और इकलौता देश बन जाता है न्यूक्लियर हथियारों को इस्तेमाल करने वाला। उस दिन हिरशिमा में जो लोग मौजूद थे और सर्वाइव
Speaker A
कर गए इस बम धमाके को। वो बड़ी ही दर्दनाक कहानी सुनाते हैं। वो कहते हैं कि उन्हें पहले इतनी तेज रोशनी चमकती हुई दिखाई दी कि बहुत से लोग टेंपरेरीली अंधे हो गए। उसके एकदम बाद एक भयानक आवाज जो इतनी तेज
Speaker A
थी कि कई सर्वाइवर्स को परमानेंट हियरिंग लॉस हो गई। फिर 4000 डिग्री सेल्सियस का जो टेंपरेचर जमीन पर था उससे लोग इंस्टेंटली वेपराइज हो गए जो वहां पर मौजूद थी। ये चीज इतनी जल्दी हुई कि लोगों की परछाई वहां पर जमीन पर रह गई एक तरीके
Speaker A
से। वो काली सी परछाई पत्थरों के अंदर जमी रह गई वहीं पर परमानेंटली जो कि आज के दिन तक हम देख सकते हैं। जो लोग इंस्टेंटली नहीं मारे गए इसमें वो समझ नहीं पाए कि एक्चुअली में हुआ क्या है यहां पर। इससे
Speaker A
पहले कि वह समझने की कोशिश करते शॉक वेव्स आई ब्लास्ट। टेंपरेचर चेंजेस की वजह से इतनी तेज हवाएं चलने लगी कि ऑलमोस्ट एक हरीिकन बन गया। फिर घरों के जो टूटे हुए टुकड़े थे, बाकी डेबरी ग्लास के पीसेस सब
Speaker A
कुछ हवा में उड़ने लगे। कुछ मिनटों बाद जब हवाएं शांत हुई, लोगों ने आसमान की तरफ देखा और उन्हें सिर्फ काला टॉक्सिक डस्ट दिखाई दिया। अनबिलीवेबल था यह कि सिर्फ 15 मिनट पहले सुनहरा नीला आसमान दिखाई दे रहा
Speaker A
था। धूप निकली हुई थी और अब अचानक से सब कुछ काला-काला टॉक्सिक फ्यूम्स में भर चुका है। 70% बिल्डिंग्स हिरशिमा में कंप्लीटली खत्म हो गई। शहर अब शहर बचा ही नहीं था। ये सेटेलाइट इमेजेस देखिए बम के पहले की और बम के गिरने के बाद की। बचे
Speaker A
हुए सर्वाइवर्स की बॉडीज की क्या हालत हुई। मैं इसके ज्यादा डिटेल में नहीं जाऊंगा क्योंकि बहुत ही डिसगस्टिंग और डिस्टर्बिंग डिटेल्स है। बस इतना कहूंगा लोगों की खाल उतरने लग गई थी। लोग प्यास के मारे तड़प रहे ब्लास्ट के करीब आधे
Speaker A
घंटे बाद बारिश आने लगती है। प्यासे लोगों को लगा कि अच्छी खबर है यहां पर। लेकिन एक्चुअली में जो टॉक्सिक डस्ट हवा में था वो मॉइस्चर के साथ मिक्स हो गया था जिससे बादल बन गए थे। यह कोई आम बारिश नहीं थी।
Speaker A
बारिश की एक-एक बूंद ब्लैक कलर की थी। ग्रीस टपक रहा था आसमान से और यह बहुत जहरीली थी। आमतौर पर जब भी कोई डिजास्टर होता है किसी शहर में एंबुलेंसेस पहुंच जाती हैं। डॉक्टर्स पहुंच जाते हैं लोगों की मदद करने। लेकिन यहां पर 90% हेल्थ
Speaker A
केयर वर्कर्स एक्चुअली में बम धमाके में मारे गए। कितने ही हॉस्पिटल्स तबाह हो गए तो लोगों की मदद करता कौन? जो लोग इंस्टेंटली नहीं मारे गए उनमें से कई लोगों की मौत एक्चुअली में कुछ दिनों बाद कुछ महीने बाद जाकर हुई रेडिएशन सिकनेस की
Speaker A
वजह से। इसकी बात मैंने डिटेल में करी है चैरनोबल वाले वीडियो में। आप जाकर उसे देख सकते हैं अगर और डिटेल में समझना चाहे तो। इस बम धमाके के बाद कहा जाता है जैपनीज मिलिट्री के जो कट्टर लोग थे उन्होंने
Speaker A
मिलने तक से मना कर दिया। एक मीटिंग तक नहीं करी। उन्होंने कहा कि कौन सी बड़ी चीज हुई है? एक और बम ही तो गिरा है। थोड़ा सा बड़ा बम है। सरेंडर का तो कोई सवाल ही नहीं उठता। जैपनीज एपरर ने अभी भी
Speaker A
सरेंडर करने से मना कर दिया। इसके रिस्पांस में 3 दिन बाद 9th अगस्त 1945 को अमेरिका एक और एटम बम गिरा देता है। इस बार नागासाकी के ऊपर। सुबह के करीब 11:00 बजे एक और बोइंग B29 विमान जाता है। इस बारी और भी ज्यादा
Speaker A
पावरफुल बम था यह। जिसका नाम था फैट मैन। इस बम धमाके से आसमान में जो मशरूम क्लाउड बनता है वो और भी ज्यादा बड़ा बनता है। इमीडिएटली 4000 लोग मारे जाते हैं और 6.7 स्क्वायर किलोमीटर शहर डिस्ट्रॉय हो जाता
Speaker A
है। हालांकि ये नागासाकी पर गिराया गया एटम बम और भी ज्यादा पावरफुल था। लेकिन इस बार कम कैजुअल्टीज होती है। कई कारण है इसके पीछे। पहला तो यह कि जब हिरशिमा की खबर बाकी शहरों तक फैली तो लोगों तक
Speaker A
ऑलरेडी पैंफेट्स पहुंच चुके थे कि ऐसा कुछ आपके भी शहर में हो सकता है इसलिए वर्न रहो तो लोग ज्यादा बेटर प्रिपयर्ड थे। लोग शहर के सेंटर से दूर आउटस्कर्ट्स पर चले गए थे। इसके अलावा शहर के आसपास इस बारी
Speaker A
पहाड़ियां थी, हिल्स थी। पहाड़ियों की वजह से एक्सप्लोजन का जो इंपैक्ट पड़ा वो कम पड़ा। हिरशिमा फ्लैट था। कोई पहाड़ियां नहीं थी, कोई हिल्स नहीं थी। तो ज्यादा इंपैक्ट वहां दिखा। इन टोटल इन दो बॉम्बिंग्स में दो लाख लोग मारे गए। 95%
Speaker A
लोग एक्चुअली में सिविलियंस थे। आम जनता थी ना कि मिलिट्री वाले लोग। इसके बाद फाइनली जैपनीज सुप्रीम काउंसिल मिलता है सरेंडर को डिस्कस करने के लिए। कुछ लोगों को डर बैठता है अब फाइनली कि अगर हम सरेंडर नहीं करेंगे तो अमेरिका एक-एक करके
Speaker A
हमारे सारे शहरों पर बम गिराता जाएगा। लेकिन काउंसिल में बैठे कई लोग अभी भी कंप्लीटली अगेंस्ट हैं सरेंडर के। जब काउंसिल के अंदर वोटिंग करी जाती है सरेंडर को लेकर तो वोटिंग का रिजल्ट थ्री थ्री निकलता है। तीन लोग इसके फेवर में
Speaker A
है। तीन लोग इसके अगेंस्ट हैं। अब क्या किया जाए? इस टाय ब्रेकर को तोड़ने के लिए जैपनीज एपरर से पूछा जाता है उनकी क्या राय है? और फाइनली जाकर अब इनके एपरर मान जाते हैं सरेंडर करने को। सरेंडर करने के
Speaker A
पीछे ये एटम बम्स इकलौते रीजन नहीं थे। असल में बात क्या थी? नागासाकी पर गिराए गए बम से सिर्फ कुछ घंटे पहले सोवियत यूनियन ने भी हमला बोल दिया था जापान के ऊपर। नॉर्थ चाइना में जो मंचूरिया का
Speaker A
एरिया था जिसकी बात मैंने वीडियो में पहले करी थी। जापान ने इस पर कब्जा कर रखा था। सोवियत यूनियन यहां पर हमला बोल देता है और इस एरिया पर अपना कब्जा जमा लेता है। तो एक तरफ से यूएसए बम गिराया जा रहा था
Speaker A
इनके शहरों पर दूसरी तरफ से सोवियत यूनियन हमला करने लग रहा था। ऊपर से जो इनकी ऑक्युपाइड टेरिटरीज थी जापान और साउथ ईस्ट एशिया में, वहां पर लोगों का गुस्सा जागने लग रहा था। यही सारे कारण थे कि एपरर हीरो
Speaker A
हिटो फाइनली सरेंडर करने का फैसला लेते हैं। द टाइम इज 9:5 am जापानीज हैव बीन ऑन बोर्ड एक्जेक्टली 10 मिनट्स। जापान में कुछ मिलिट्री के लोग इससे काफी नाराज थे। वो बिल्कुल नहीं चाहते थे कि यह सरेंडर हो। तो एपरर के खिलाफ एक कू करने
Speaker A
की कोशिश करी जाती है। लेकिन यह कू अनसक्सेसफुल रहता है। और 15th अगस्त 1945 को इस सरेंडर के बाद सेकंड वर्ल्ड वॉर खत्म हो जाती है फाइनली। इसके करीब 7 सालों बाद तक एलआई ऑक्यूुपाई करते हैं जापान को। 1952 तक उनका ऑक्यूपेशन बने
Speaker A
रहता है। जिसके बीच डिस्कशंस करी जाती हैं कि क्या कंडीशंस होंगी यहां पर सरेंडर की। जापान में एक नया कॉन्स्टिट्यूशन लाया जाता है। डेमोक्रेसी एस्टैब्लिश करी जाती है और जो एपरर का स्टेटस था जापान में वह कंटिन्यू रहता है लेकिन उसे सिर्फ एक फिगर
Speaker A
हेड बना दिया जाता है। मतलब जापान में अब एपरर है आज के दिन भी लेकिन बस कहने के लिए है। पावर नहीं है उनके पास कोई। हिरोशिमा और नागासाकी में टोटल डिस्ट्रक्शन की कॉस्ट पड़ती है 970 मिलियन यूएस डॉलर्स। लेकिन उनकी रिबिल्डिंग और
Speaker A
रिस्टोरेशन ऑलमोस्ट इमीडिएटली शुरू हो जाती है। अलग-अलग शहरों से वालंटियर्स आते हैं शहरों को दोबारा बनाने के लिए। यह अपनी एक और कहानी है कि कैसे यह शहर वापस से रिस्टोर होते हैं इतने बढ़िया तरीके से कि आज के दिन आप वहां पर जाओगे पता भी
Speaker A
नहीं लगेगा कि इस इन शहरों पर कभी न्यूक्लियर बम गिराया गया था। जिन लोगों पर रेडिएशन का असर पड़ा था, ऑब्वियसली उन लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाती हैं। वो डिसेबल्ड रहते हैं। उनके बच्चों में डिसेबिलिटीज दिखती हैं। कैंसर होने के
Speaker A
चांसेस ज्यादा बढ़ जाते हैं। लेकिन थैंकफुली एक अच्छी खबर यहां पर यह होती है कि रेडिएशन लेवल्स लॉन्ग टर्म में इतने हानिकारक नहीं होते। एटलीस्ट उतने हानिकारक नहीं होते जितने चेरनोबल में है। कुछ टाइम बाद शहर पर एक टाइफून आता है और
Speaker A
उस टाइफून के बाद से रेडिएशन लेवल्स काफी नीचे गिर जाते हैं। इसके पीछे एक और कारण यह है कि एक न्यूक्लियर बम न्यूक्लियर पावर प्लांट से काफी अलग तरीके से काम करता है। इसकी बात भी मैंने चेरनोबल वाले
Speaker A
वीडियो में करी थी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यहां पर यह उठता है कि क्या यूएसए के पर्सपेक्टिव से जस्टिफाइड था यह एटॉमिक बॉम्ब गिराना और 2 लाख लोगों को मारना?
Speaker A
क्या यूएस के प्रेसिडेंट का यह डिसीजन सही था या गलत? आज के दिन इस सवाल की मोरालिटी का जवाब देना इतना आसान नहीं है जितना आपको लगता है। अमेरिकन प्रेसिडेंट हैरी ट्रू ने कभी भी माफी नहीं मांगी इन
Speaker A
बॉम्बिंग्स को लेकर। ना ही कभी कोई रिग्रेट शो किया। आई थॉट वाले आई थॉट इट कुड बी यूज्ड एंड मेड अ ब्लेसिंग। आई नेवर वर अबाउट दिस बीइंग करपन द वॉर एंड इट्स व्हाट आई वास क्योंकि उनका और कई यूएस डिप्लोमेट्स और
Speaker A
मिलिट्री के लोगों का मानना था कि ये जो बॉम्बिंग्स हमने करी यह जरूरी थी और कोई ऑप्शन नहीं था हमारे पास। इनका आर्गुमेंट है कि अमेरिका के पास सिर्फ दो ऑप्शंस बचे थे वॉर खत्म करने के लिए। पहला था ऑपरेशन
Speaker A
डाउनफॉल और दूसरा था यह न्यूक्लियर बॉम्ब्स फेंकना। ज्यादातर मिलिट्री ऑफिशियल्स का ओरिजिनल प्लान तो यही था कि ऑपरेशन डाउनफॉल करी जाएगी यहां पर। लेकिन फिर बैटल ऑफ ओकिनावा हुई और पता चला कि कितने लोग मारे जा रहे हैं इस बैटल में।
Speaker A
जैपनीज लोग सरेंडर करने को बिल्कुल राजी नहीं है। वह अपने आखिरी आदमी तक लड़ने को तैयार हैं। उस लड़ाई के बाद अमेरिका ने एस्टिमेट किया कि कम से कम 10 साल लग जाएंगे और 1 मिलियन यूएस सोल्जर्स मारे
Speaker A
जाएंगे अगर हम इसी तरीके से ग्राउंड पर कोशिश करते गए जैपनीज आर्मी से फाइट करने की। उनके पर्सेक्टिव से उनका कहना है कि एटम बम से 2 लाख लोग मारे गए। 2 लाख लोग कम नहीं होता लेकिन 2 लाख लोग 1 मिलियन
Speaker A
यूएस सोल्जर से कम होता है। और रेडिएशन की जहां तक बात आती है उनका आर्गुमेंट यह है कि उन्हें पता नहीं था कि इसके लॉन्ग लास्टिंग इफेक्ट्स देखने को मिलेंगे न्यूक्लियर बम के। बाद में भी लोगों को इसकी वजह से डिजीजसेस होंगे। बाद में भी
Speaker A
लोगों को रेडिएशन सिकनेस के सिम्टम्स देखने को मिलेंगे। मैनहटन प्रोजेक्ट के जो साइंटिस्ट थे उन्हें पता था कि कितनी रेडिएशन रिलीज होगी। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि एक्चुअली में ह्यूमन बॉडी का इस पर क्या इंपैक्ट होता है। इससे पहले कभी
Speaker A
इतनी डिटेल में टेस्ट नहीं किया गया था। तो अमेरिका का आर्गुमेंट यहां पर सिंपली था कि 2 लाख लोगों की जान जाए या 1 मिलियन लोग मारे जाए। हमने 2 लाख लोगों को चूज़ किया। लेकिन बहुत से क्रिटिक्स आर्ग्यू
Speaker A
करते हैं कि एक्चुअली में अमेरिका के पास और भी ऑप्शंस मौजूद थे। सबसे पहला तो यही कहा जाता है कि अगर जापानीज मिलिट्री को सरेंडर करवाना ही पर्पस था तो ऐसी जगह बम क्यों गिराया जहां पर 95% सिविलियन लोग
Speaker A
मारे गए। आम जनता मारी गई। किसी ऐसे जैपनीज आइलैंड पर भी बम गिराया जा सकता था जहां पर सिर्फ मिलिट्री फैसिलिटीज थी। और उससे फिर उन्हें देखने को मिल जाता कि यह चीज हो सकती है हमारे साथ और फिर वो शायद
Speaker A
सरेंडर कर देते। पर यूएस मिलिट्री का काउंटर आर्गुमेंट यह है कि जापानीज लीडरशिप इस तरीके से ब्रेन वाश थी कि वो किसी भी हालत में सरेंडर नहीं करती। उन्होंने हिरशिमा के बाद सरेंडर नहीं किया तो वो किसी छोटे-मोटे आइलैंड पर
Speaker A
न्यूक्लियर बॉम्ब गिराए जाने से क्यों सरेंडर करती? एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि एक्चुअली में यूएस ज्यादा न्यूक्लियर बॉम्ब्स को टेस्ट आउट नहीं कर सकता था अलग-अलग जगहों पर क्योंकि उनके पास सिर्फ दो ही बॉम्ब्स रेडीली अवेलेबल थे और दो
Speaker A
तैयार किए जा रहे थे। तो उन्हें ऐसी जगह चुननी थी जहां से मिलिट्री वालों को लगे कि एक्चुअली में कुछ नतीजा निकलेगा इसका। दूसरा आर्गुमेंट जो बॉम्ब गिराने के खिलाफ बताया जाता है वो यह है कि एक्चुअली में
Speaker A
नागासाकी पर बम गिरने से कुछ घंटे पहले सोवियत यूनियन इनवेट कर चुका था जापान को और जापान वैसे भी सरेंडर कर देता जब देखता है कि यहां पर एक तरफ यूएसए है वहां पर दूसरी तरफ से सोवियत यूनियन हमला करने लगा
Speaker A
तो एट लीस्ट नागासाकी पर जो बम गिराया गया जो दूसरा एटम बम गिराया गया वो बिल्कुल ही पॉइंटलेस था उसे गिराने की जरूरत नहीं थी अमेरिका को बस कुछ टाइम इंतजार करना था कुछ एक्सपर्ट्स ये भी आर्ग्यू करते हैं कि
Speaker A
एटम बम गिराना असली रीज़ रीज़न नहीं था जापान के सरेंडर करने के पीछे। असली रीज़न था सोवियत यूनियन का इनवेट करना। इसके बाद एक तीसरी और फाइनल आर्गुमेंट जो उठाई जाती है यहां पर वो एक मोरल डलेमा है। सवाल यह
Speaker A
है कि यूएस प्रेसिडेंट को किसने हक दिया चुनने का कि यहां पर ये 2 लाख लोग मारे जाएंगे या फिर वहां पर पोटेंशियली 1 मिलियन यूएस सोल्जर्स मारे जाएंगे। अपने ऑफिस में मीलों दूर बैठकर यह डिसीजन लेना बड़ा आसान है कि अच्छा ऑब्वियसली हम यह
Speaker A
वाला डिसीजन चूज़ करते हैं क्योंकि यहां पर कम लोग मारे जाएंगे। लेकिन क्या वह यही डिसीजन तब लेते जब उनका खुद का परिवार हिरशिमा या नागासाकी में मौजूद होता। क्या तब भी वह कहते कि मैं हिरशिमा और नागासाकी
Speaker A
पर बम गिराऊंगा। इवन दो मेरा परिवार वहां मौजूद है लेकिन 2 लाख लोग ही मरेंगे यहां पर। वहां पर 1 मिलियन लोगों की जान बच रही है। एक यूएस साइकोलॉजिस्ट है जो कहते हैं इस डलेमा को अवॉइड करने के लिए। एक्चुअली
Speaker A
में एक वॉलंटियर होना चाहिए। जिस इंसान के ऊपर न्यूक्लियर कोड्स रखे हो। जब यूएस प्रेसिडेंट को लगे कि मुझे न्यूक्लियर बम चलाने हैं किसी के ऊपर तो वह वालंटियर उनके सामने आएगा और उस यूएस प्रेसिडेंट को अपने हाथों से उस एक इंसान का मर्डर करना
Speaker A
पड़ेगा न्यूक्लियर कोर्ट्स निकालने के लिए। क्योंकि पॉलिटिशियंस अक्सर ये आर्गुमेंट देते हैं कि देखो यहां तो एक ही इंसान मारा जा रहा है। वहां पर इतने सारे मारे जाएंगे। इसलिए ये करना जरूरी है। तो अगर एक यूएस प्रेसिडेंट को लगता है कि
Speaker A
न्यूक्लियर बॉम्ब गिराया जाना जरूरी है ताकि ज्यादा लोगों की जाने बचें तो क्यों ना वो खुद से चाकू उठाएं और एक इंसान को वहां पर मारे क्योंकि क्योंकि उस एक इंसान का सैक्रिफाइस क्या है वहां पर 1 लाख
Speaker A
लोगों की जान अगर बच सकती है। ये सोचने वाली बातें हैं काफी। इस चीज को वैसे बड़ा अच्छा दिखलाया गया है एक फिल्म में। 2015 की एक हॉलीवुड फिल्म है आई इन द स्काई। यह इसी मोरल डलेमा को बहुत ही अच्छे तरीके से
Speaker A
दर्शाती है। यहां पर आपकी क्या राय है दोस्तों? पूरी कहानी सुनने के बाद क्या लगता है आपको? क्या जस्टिफाइड था अमेरिका के पर्सपेक्टिव से एटम बम गिराना हिरोशिमा और नागासाकी पर? क्या यह सही डिसीजन था या गलत डिसीजन था? नीचे कमेंट्स में लिखकर
Speaker A
बताओ। ये आज के दिन भी एक बड़ा डिबेट का मुद्दा है। साल 1991 में एक सर्वे किया गया था। यही चीज अमेरिकनंस से पूछी गई तो 63% अमेरिकनंस मानते हैं कि यह बॉम्बिंग्स जस्टिफाइड है। लेकिन जब यही चीज जैपनीज
Speaker A
लोगों से पूछी गई तो सिर्फ 29% जैपनीज़ लोग मानते हैं कि ये जस्टिफाइड था बम गिराना। लेकिन फिर भी आप देख सकते हो कि जापान में यह नंबर 0% नहीं है और अमेरिका में यह नंबर 100% नहीं है। क्योंकि यह सवाल इतना
Speaker A
आसान नहीं है। एक अच्छी चीज यह है कि दुनिया को सबक मिल पाया इस इंसिडेंट के बाद कि न्यूक्लियर बम हमें नहीं इस्तेमाल करने हैं। इनसे जो इतना खतरनाक इंपैक्ट देखने को मिलता है। कोई भी देश नहीं चाहेगा कि किन्ही भी लोगों को यह सब सहना
Speaker A
पड़े और थैंकफुली आज के दिन तक किसी और देश ने उसके बाद से न्यूक्लियर बम्स का इस्तेमाल नहीं किया है। होपफुली आने वाले फ्यूचर में भी यह चीज़ ऐसे ही कंटिन्यू रहे। उम्मीद करता हूं आपको हमेशा की तरह
Speaker A
यह वीडियो इनफेटिव लगा होगा। पसंद आया तो चेरनोबेल वाला वीडियो देख सकते हो। फ्रेंच रेवोल्यूशन वाला वीडियो देख सकते हो और क्यूबा मिसाइल क्राइसिस भी आप डिटेल में समझ सकते हो। बहुत से ऐसे वीडियोस हैं जो मैंने डिटेल्ड बनाए हैं हिस्टोरिकल
Speaker A
इवेंट्स पर। बहुत-बहुत धन्यवाद। [संगीत] [संगीत]
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