भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 31-36 के सामान्य अपवादों पर चर्चा। सेक्शन 31 (गुड फेथ में संचार), केस लॉ और सेक्शन 32 की व्याख्या के साथ।
Key Takeaways
- सेक्शन 31 गुड फेथ में मरीज या व्यक्ति के हित में दी गई सूचना को अपराध नहीं बनाता, भले ही उसका परिणाम दुखद हो।
- गुड फेथ का अर्थ है उचित सत्यापन के बाद, बिना लापरवाही और बुरे इरादे के कार्य करना।
- सेक्शन 32 के तहत डर या धमकी का बचाव तभी मिलता है जब धमकी तात्कालिक और जान के खतरे जैसी गंभीर हो।
- स्वयं जानबूझकर खतरनाक परिस्थिति में जाने वाला व्यक्ति सेक्शन 32 का लाभ नहीं पा सकता।
- मामूली चोट या सामान्य झगड़े सेक्शन 32 के दायरे में गंभीर अपराध के रूप में नहीं आते।
What the video covers
- वीडियो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के जनरल एक्सेप्शन्स (सेक्शन 31-36) पर केंद्रित है।
- पिछले सेक्शन 30 तक के विषय जैसे डोली इनकेपेसिटी, इनटॉक्सिकेशन, अनसाउंडनेस ऑफ माइंड, मिस्टेक ऑफ फैक्ट और मिस्टेक ऑफ लॉ पहले ही कवर किए जा चुके हैं।
- सेक्शन 31 गुड फेथ में किए गए संचार (communication) से संबंधित है, जिसमें डॉक्टर द्वारा मरीज को गंभीर सूचना देने का उदाहरण दिया गया है।
- मुन्ना भाई एमबीबीएस फिल्म के उदाहरण से समझाया गया कि गंभीर रिपोर्ट बताने पर भी डॉक्टर की जिम्मेदारी नहीं बनती यदि उसका इरादा नुकसान पहुंचाना न हो।
- गुड फेथ का अर्थ समझाया गया: उचित जांच और सत्यापन के बाद, मरीज के हित में सूचना देना, लापरवाही नहीं।
- सेक्शन 31 के समर्थन में एक केस लॉ (एक्स बनाम हॉस्पिटल, एचआईवी-एड्स मामला) का उल्लेख किया गया, जिसमें गोपनीयता के कारण पक्षों के नाम छिपाए गए।
- केस में मंगेतर को एचआईवी की सूचना देने के डॉक्टर के दायित्व और सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेक्शन 31 के लाभ देने की चर्चा है।
- सेक्शन 32 को एक महत्वपूर्ण सामान्य अपवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो डर या धमकी (थ्रेट) के तहत किए गए कार्यों से संबंधित है।
- सेक्शन 32 में धमकी का तात्कालिक और जान से मारने जैसा गंभीर होना आवश्यक बताया गया।
- उदाहरण दिए गए कि यदि कोई स्वयं जानबूझकर खतरनाक स्थिति में जाता है, तो वह इस बचाव का लाभ नहीं ले सकता।
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Speaker A
हेलो एवरीवन, वेलकम बैक टू आवर चैनल जुडिशरी बाय पीडब्ल्यू। दिस इज मी अर्जिता, एंड वेलकम टू अनदर सेशन, अनदर लेक्चर ऑफ भारतीय न्याय संहिता। सो कल हमने सेक्शन नंबर 30 तक कवर कर लिया था। आज की क्लास में हम सेक्शन नंबर 31 से लेकर आगे के जो सेक्शंस हैं उनको कवर करने वाले हैं, ठीक है? सो अभी फिलहाल जो आपका जनरल एक्सेप्शन वाला पार्ट है वो हम डिस्कस कर रहे हैं। जिसमें जो आपके बेसिक जनरल एक्सेप्शंस हैं, कई सारे हमने कवर कर लिए हैं।
Speaker A
के जो सेक्शंस हैं उनको कवर करने वाले हैं। ठीक है? सो अभी फिलहाल जो आपका जनरल एक्सेप्शन वाला पार्ट है वो हम डिस्कस कर रहे हैं। अ जिसमें जो आपके बेसिक जनरल एक्सेप्शनंस हैं कई सारे हमने कवर कर लिए
Speaker A
जैसे कि डोली इनकेपेसिटी होती है, इनटॉक्सिकेशन होता है। उसके साथ-साथ अनसाउंडनेस ऑफ़ माइंड होता है, मिस्टेक ऑफ़ फैक्ट, मिस्टेक ऑफ़ लॉ। ये सारे एरियाज़ हमने अभी तक कवर कर लिए हैं। कल हमने कंसेंट के जो प्रोविजंस दिए हैं, कंसेंट के रिस्पेक्ट में जो सेक्शंस दिए हैं, उनको भी डिस्कस किया था।
Speaker A
के रिस्पेक्ट में जो सेशंस दिए हैं, उनको भी डिस्कस किया था। आज हम बात करने वाले हैं सेक्शन नंबर 31 की। ठीक है? अब देखिए स्टूडेंट्स, सेक्शन नंबर 31 में आपको समझने की जरूरत है कि यहां पे बात की जा
Speaker A
आज हम बात करने वाले हैं सेक्शन नंबर 31 की, ठीक है? अब देखिए स्टूडेंट्स, सेक्शन नंबर 31 में आपको समझने की ज़रूरत है कि यहां पे बात की जा रही है एक कम्युनिकेशन की। कम्युनिकेशन का मतलब क्या होता है? जैसे कोई चीज़ आपको बताई जाती है, कोई बात आपको कम्युनिकेट की जाती है।
Speaker A
एग्जांपल है। अगर आप सबने मुन्ना भाई एमबीबीएस देखी हो तो। है ना? मुन्ना भाई जो पहली वाली एमबीबीएस वाली मूवी थी। उस मूवी में एक सीन दिखाया है कि एक डॉक्टर सुमन है। एक आपके मुन्ना भाई तो हैं ही।
Speaker A
अब सेक्शन नंबर 31 को समझने के लिए मेरे पास एक बहुत ही बढ़िया मूवी एग्ज़ाम्पल है। अगर आप सबने मुन्ना भाई एमबीबीएस देखी हो तो? है ना? मुन्ना भाई जो पहली वाली एमबीबीएस वाली मूवी थी, उस मूवी में एक सीन दिखाया है कि एक डॉक्टर सुमन है, एक आपके मुन्ना भाई तो हैं ही, और एक ज़हीर नाम का पेशेंट होता है, टेस्ट वगैरह करवाता है। एंड डॉक्टर सुमन एक दिन उसको ज़हीर को बुला के कहती हैं कि ज़हीर, आपके पास ज़्यादा समय जो है वो नहीं बचा हुआ है, है ना? आपकी जो रिपोर्ट्स आई हैं वो बहुत ही ज़्यादा खराब आई हैं।
Speaker A
हैं वो बहुत ही ज्यादा खराब हुई आई हैं। अब नो डाउट उस मूवी में दिखाया है कि ज़हीर उस बात को सुनके काफी ज्यादा डिस्टर्ब सा हो जाता है। है ना? मतलब वो काफी कह लो बौखला सा जाता है कि अरे मेरे पास इतना कम
Speaker A
अब नो डाउट उस मूवी में दिखाया है कि ज़हीर उस बात को सुन के काफी ज़्यादा डिस्टर्ब सा हो जाता है, है ना? मतलब वो काफी, कह लो बौखला सा जाता है कि अरे मेरे पास इतना कम टाइम बचा है और मुझे इतना कुछ करना था लाइफ में। घर बनाना था, मम्मी को हज ले जाना था, बहन की शादी करवानी थी, एंड एक्स वाई ज़ेड चीज़ें। तो नो डाउट, जब इस तरीके की इंफॉर्मेशन या इस तरीके का कम्युनिकेशन आप किसी भी पर्सन के साथ अगर करेंगे कि उसके पास ज़्यादा समय नहीं बचा है जीने के लिए, तो कोई भी पर्सन इस इंफॉर्मेशन को कभी अच्छी तरीके से नहीं ले पाएगा। हर पर्सन गुस्से में आ जाएगा, घबरा जाएगा, डर जाएगा।
Speaker A
किसी भी पर्सन के साथ अगर करेंगे कि उसके पास ज्यादा समय नहीं बचा है जीने के लिए तो कोई भी पर्सन इस इंफॉर्मेशन को कभी अच्छी तरीके से नहीं ले पाएगा। हर पर्सन जो है गुस्से में आ जाएगा, घबरा जाएगा। डर
Speaker A
बट दैट डज़ नॉट मीन कि डॉक्टर अपना काम ना करें या डॉक्टर आपको वो बात कम्युनिकेट ना करें। तो सेक्शन नंबर 31 देखो इसी चीज़ के बारे में बात करता है कि अगर डॉक्टर ने गुड फेथ में, गुड फेथ का देखिए मतलब क्या है? ऐसा नहीं है कि लापरवाही करी है डॉक्टर ने, गलत-सलत टेस्ट कर दिए, गलत-सलत कोई मेडिकल चेकअप कर दिया, गलत-सलत कोई इंफॉर्मेशन निकाल के कुछ भी तुमको बता दिया। डॉक्टर ने अपने पार्ट पे मान लो सारी चीज़ें चेक कर ली हैं, सारी चीज़ें वेरिफाई कर ली हैं, है ना? सब कुछ कन्फर्म करने के बाद हम कोई बात आपको कम्युनिकेट कर रहे हैं, और हमारा उस बात को कम्युनिकेट करने के पीछे कोई बुरा इरादा नहीं है। हम ये नहीं चाहते हैं कि सामने वाला पर्सन हमारी बात को सुन के सदमे से, हार्ट अटैक से मर जाए। नहीं, हमारा गुड फेथ है, है ना? और आपके फायदे के लिए, आपके बेनिफिट के लिए हम आपको वो चीज़ बता रहे हैं।
Speaker A
फेथ का देखिए मतलब क्या है? ऐसा नहीं है कि लापरवाही करी है डॉक्टर ने। गलतसलत टेस्ट कर दिए, गलत-सलत कोई मेडिकल चेकअप कर दिया, गलतसलत कोई इंफॉर्मेशन निकाल के कुछ भी तुमको बता दिया। डॉक्टर ने अपने पार्ट पे मान लो सारी चीजें चेक कर ली है।
Speaker A
अब आप ये नहीं कह सकते ना कि यार डॉक्टर्स को पेशेंट्स को यह बात नहीं बतानी चाहिए। डॉक्टर पेशेंट को उसके फायदे, उसके बेनिफिट के लिए ही बता रहा है ताकि पेशेंट अकॉर्डिंगली यहां पर इंतज़ाम वगैरह कर सके। तो यहां पर अगर उस कम्युनिकेशन को सुन के सामने वाले पर्सन को कोई भी नुकसान होता है, कोई भी हार्म वगैरह होता है, तो इसके लिए कम्युनिकेट करने वाला जो पर्सन है उसकी कोई लायबिलिटी नहीं है।
Speaker A
वाला पर्सन हमारी बात को सुन के सदमे से हार्ट अटैक से मर जाए। नहीं हमारा गुड फेथ है। है ना? और आपके फायदे के लिए आपके बेनिफिट के लिए हम आपको वो चीज बता रहे हैं। अब आप ये नहीं कह सकते ना कि यार
Speaker A
मान लो कि एक डॉक्टर ने किसी पेशेंट को कोई ऐसी बहुत ही डरावनी सी खबर दे दी, डरावनी सी न्यूज़ वगैरह दे दी। पेशेंट उस न्यूज़ को सुन के डर गया, घबरा गया, गिर गया, उसका हार्ट फेल हो गया, समथिंग लाइक दैट। तो इन चीज़ों के लिए आप यहां पे डॉक्टर को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते, है ना? भले ही डॉक्टर को यहां पे पता होगा। डॉक्टर को यहां पे पता होगा कि इस कम्युनिकेशन से सामने वाले पर्सन को कोई अच्छी खुशी नहीं होने वाली है, सामने वाला पर्सन जो है वो डरेगा ही, घबराएगा ही। बट अगेन देखो, वही बात है कि कुछ सिचुएशंस ऐसी होती हैं जहां पे आपको कम्युनिकेट करना ज़रूरी होता है, है ना? आप डॉक्टर से ये नहीं एक्सपेक्ट कर सकते कि आप मत बताइए पेशेंट को यहां पे। वो अपने आप में एक मेडिकल नेग्लिजेंस वाला पॉइंट हो जाएगा कि आपने पेशेंट को यहां पे क्यों नहीं बताया।
Speaker A
को कोई भी नुकसान होता है, कोई भी हार्म वगैरह होता है तो इसके लिए कम्युनिकेट करने वाला जो पर्सन है उसकी कोई लायबिलिटी नहीं है। मान लो कि अ डॉक्टर ने किसी पेशेंट को कोई ऐसी बहुत ही डरावनी सी खबर
Speaker A
अब सेक्शन नंबर 31 में अगर हम बात करते हैं तो एक बहुत ही इंपॉर्टेंट केस लॉ भी है, ठीक है? जैसे आप इस केस लॉ को देखोगे तो आपको और क्लैरिटी हो जाएगी कि सेक्शन नंबर 31 एग्ज़ैक्टली क्या कहता है? केस का नाम है एक्स वर्सेस हॉस्पिटल एबीसी। अब यह केस का नाम इतना अजीब इसलिए है क्योंकि यह एक पर्सन के एचआईवी-एड्स का मामला था। तो इसलिए दोनों पार्टीज़ का नाम नहीं रिवील किया गया है, ना पेशेंट का नाम रिवील किया है, ना हॉस्पिटल का नाम यहां पे रिवील किया गया है, ठीक है?
Speaker A
सकते। है ना? भले ही डॉक्टर को यहां पे पता होगा। डॉक्टर को यहां पे पता होगा कि इस कम्युनिकेशन से सामने वाले पर्सन को कोई अच्छी खुशी नहीं होने वाली है। सामने वाला पर्सन जो है वो डरेगा ही, घबराएगा
Speaker A
अब देखो इस केस में होता क्या है? बेसिकली एक पेशेंट था, एक पर्सन था। मान लेते हैं उसका नाम एक्स था, है ना? इस पर्सन को एचआईवी-एड्स की बीमारी निकली थी, राइट? अब आज के समय में हमारा समाज थोड़ा जागरूक हो गया है, थोड़ा अवेयर टाइप का हो गया है, वरना आज से कई साल पहले तो एचआईवी-एड्स को एक बुरी बीमारी ही माना जाता था, है ना? मतलब सरकार इवन टीवी वगैरह पे भी एड्स का प्रचार चलाया करती थी, जागरूकता के लिए कि एचआईवी-एड्स पेशेंट्स के साथ बुरा व्यवहार मत किया करो, उनके साथ ऐसा छुआछूत टाइप का व्यवहार मत करो, यह बीमारी छूने से नहीं फैलती है। इस तरीके की चीज़ें।
Speaker A
अपने आप में एक मेडिकल नेग्लिजेंस वाला पॉइंट हो जाएगा कि भ आपने पेशेंट को यहां पे क्यों नहीं बताया। अब सेक्शन नंबर 31 में अगर हम बात करते हैं तो एक बहुत ही आपका इंपॉर्टेंट यहां पे केस लॉ भी है।
Speaker A
तो यहां पे क्या था कि ये जो पेशेंट एक्स था, इसको एचआईवी-एड्स हो गया था। अच्छा, इनकी सगाई हो चुकी थी, इनकी इंगेजमेंट हो चुकी थी, इनकी शादी होने वाली थी। तो यहां पे जो डॉक्टर्स थे, जो हॉस्पिटल की टीम थी जहां पे एक्स का इलाज चल रहा था, उनको ऐसा लगता है कि ये जो पेशेंट है एक्स, ये अपनी मंगेतर को, यानी कि अपने फियांसे को ये बात नहीं बताएगा कि उसको एचआईवी-एड्स है, ठीक है? अब अगर ये नहीं बताएगा तो ये थोड़ी दिक्कत की बात है। दिक्कत की बात क्यों है? क्योंकि शादी कर लोगे, शादी करने के बाद आपके बीच में क्या डेवलप होगा? कंजुगल रिलेशन, यानी कि फिजिकल रिलेशन डेवलप होगा। अब फिजिकल रिलेशन है तो सिंपल सी बात है कि इस पर्सन की जो एचआईवी-एड्स की बीमारी है, वो इस लड़की को चली जाएगी। मतलब एक लड
Speaker A
एक पर्सन के एचआईवी एड्स का मामला था। तो इसलिए दोनों पार्टीज का नाम नहीं रिवील किया गया है। ना पेशेंट का नाम रिवील किया है ना हॉस्पिटल का नाम यहां पे रिवील किया गया है। ठीक है? अब देखो इस केस में होता
Speaker A
क्या है? बेसिकली एक पेशेंट था, एक पर्सन था। मान लेते हैं उसका नाम एक्स था। है ना? इस पर्सन को एचआईवी एड्स की बीमारी निकली थी। राइट? अब आज के समय में हमारा समाज जो है थोड़ा जागरूक हो गया है। थोड़ा
Speaker A
अवेयर टाइप का हो गया है। वरना आज से कई साल पहले तो एचआईवी एड्स को एक बुरी बीमारी ही मानी जाती थी। है ना? मतलब सरकार इवन टीवी वगैरह पे जो है एड्स भी चलाया करती थी। जागरूकता के लिए कि एचआईवी
Speaker A
एड्स पेशेंट्स के साथ बुरा व्यवहार मत किया करो। उनके साथ ऐसा छुआछूत टाइप का व्यवहार मत करो। यह बीमारी फैले जो है छूने से नहीं फैलती है। इस तरीके की चीजें। तो यहां पे क्या था कि ये जो
Speaker A
पेशेंट एक्स था इसको एचआईवी एड्स हो गया था। अच्छा इनकी जो है सगाई हो चुकी थी। इनका इनकी इंगेजमेंट हो चुकी थी। इनकी शादी होने वाली थी। तो यहां पे जो डॉक्टर्स थे जो ये हॉस्पिटल की टीम थी
Speaker A
जहां पे एक्स का इलाज चल रहा था उनको ऐसा लगता है कि ये जो पेशेंट है एक्स ये अपनी मंगेतर को यानी कि अपने फियांसे व को ये बात नहीं बताएगा कि उसको एचआईवी एड्स है। ठीक है? अब अगर ये नहीं बताएगा तो ये
Speaker A
थोड़ी दिक्कत की बात है। दिक्कत की बात क्यों है? आप क्योंकि शादी कर लोगे शादी करने के बाद आपके बीच में क्या डेवलप होगा? कंजुनल रिलेशन यानी कि फिजिकल रिलेशन डेवलप होगा। अब फिजिकल रिलेशन है तो सिंपल सी बात है कि इस पर्सन की जो
Speaker A
एचआईवी एड्स की बीमारी है वो इस लड़की को चली जाएगी। मतलब एक लड़की को एचआईवी एड्स का रिस्क है वो सीधा-सीधा डॉक्टर्स को यहां पे दिख रहा है। तो हॉस्पिटल की टीम यहां पे क्या करती है? इस लड़की को जाकर
Speaker A
बता देती है कि देखिए हमको नहीं पता आपके मंगेतर ने आपको बताया कि नहीं बताया लेकिन आपके होने वाले पति को एचआईवी एड्स की बीमारी है और हमारे हिसाब से शादी करने से पहले ये बात आपको पता होनी चाहिए। अब सीधी
Speaker A
सी बात है कि ये खबर सुनके शायद ही कोई होगा जो शादी करेगा। तो लड़की ने भी वही किया। लड़की ने शादी तोड़ दी। तो एक तो इस पेशेंट की बदनामी हुई शादी टूटने की वजह से। दूसरा समाज में यह और फैल गया कि इनको
Speaker A
एचआईवी एड्स है। तो कई तरीके से इस पर्सन की रेपुटेशन को इसकी इमेज को नुकसान पहुंचा। शादी टूटने की वजह से भी और जो बीमारी का ढिंढोरा पिट गया वो अलग यहां पे। तो यहां पे जो है इनको इस पर्सन को है
Speaker A
ना इस पर्सन को यहां पे जो है इन्होंने कहा कि हॉस्पिटल वालों ने मुझे यहां पे नुकसान पहुंचाया है। मुझे हार्म पहुंचाया है यह कम्युनिकेशन करके। ठीक है? अब कैसे हार्म पहुंचाया है कम्युनिकेशन करके? तो यहां पे इनका कहना था पेशेंट एक्स का यहां
Speaker A
पे यह कहना था कि आपने क्योंकि ये बात मुझसे बिना पूछे मेरी मंगेतर को बता दी तो एक तो आपने मेरी राइट टू प्राइवेसी का यहां पे वायलेशन किया है और दूसरा आपके उसको बता देने से मेरी शादी टूट गई। मेरी
Speaker A
इतनी ज्यादा जो है बदनामी हो गई यहां पे सोसाइटी में। तो ये चाहते थे कि ये डॉक्टर्स के खिलाफ एक्शन लें। पेशेंट्स के खिलाफ ही एक्शन लें। लेकिन जब ये केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने हॉस्पिटल वालों के फेवर में डिसीजन दिया।
Speaker A
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देखो माना ये आपकी पर्सनल लाइफ का एक मैटर था। आपकी राइट टू प्राइवेसी से रिलेटेड एक मैटर था। लेकिन डॉक्टर्स ने वो बात उस लड़की को क्यों बताई? उसके फायदे के लिए बताई ना।
Speaker A
उसके बेनिफिट के लिए बताई। अदरवाइज़ शी वाज़ आल्सो एट अ रिस्क। अगर वो लड़की को नहीं बताते, आप शादी कर लेते, शादी के बाद फिजिकल रिलेशन डेवलप होता, लड़की को भी रिस्क हो सकता था किसी भी तरीके के हेल्थ
Speaker A
इशू का यहां पे। तो कुल मिला के अगर हम यहां पे देखें तो डॉक्टर्स का उस लड़की को बताने का कारण क्या था? उन्होंने एक कम्युनिकेशन किया। उन्होंने लड़की को एक बात बताई। लड़की को बात उन्होंने गुड फेथ
Speaker A
में बताई है। लड़की के फायदे के लिए बताई है। लड़की के बेनिफिट के लिए बताई है। ठीक है? हालांकि डॉक्टर्स को पता होगा पहले से कि ऐसा सुनने के बाद शायद लड़की शादी तोड़ देगी या लड़की जो है वो शादी नहीं करेगी
Speaker A
आगे। सोसाइटी में इस पर्सन की बदनामी हो सकती है। डॉक्टर्स को पता था कि नुकसान हो सकता है। लेकिन अगेन मतलब नुकसान हो सकता है। यह सोच के आप किसी पर्सन को इंपॉर्टेंट बात कम्युनिकेट करने से नहीं रुक जाएंगे ना। तो इसलिए यहां पे हॉस्पिटल
Speaker A
और डॉक्टर्स की टीम को जो है सुप्रीम कोर्ट ने बेनिफिट दे दिया था सेक्शन नंबर 31 का। ठीक है? अब आ जाते हैं हम सेक्शन नंबर 32 के ऊपर। अब देखिए सेक्शन नंबर 32 स्टूडेंट्स एक बहुत ही इंपॉर्टेंट जनरल
Speaker A
एक्सेप्शन है। यहां से आप देख देखोगे कई बार एग्जाम्स के अंदर में क्वेश्चन पूछा जाता है खास करके प्रीलिम्स पेपर के अंदर में। ठीक है? देखो सेक्शन नंबर 32 आपको एक सिंपल सी बात ये बताता है कि अगर आपसे कोई
Speaker A
भी अपराध करवाया जाए। है ना? अगर आपसे यहां पे कोई भी ऑफेंस करवाया जाए और वह देखो कोई भी ऑफेंस हो सकता है। लेकिन अगर वह ऑफेंस आपने अपनी खुद की मर्जी से नहीं किया है। आपने अपनी स्वयं इच्छा से नहीं
Speaker A
किया है। तुमने खुद चोरी चकारी नहीं की है। तुमने खुद रॉबरी नहीं की है। तुमने खुद डकैती नहीं की है। तुमने खुद से जाके अपराध नहीं किया है। तुमसे अपराध करवाया गया है। यू वर मेड टू डू एन ऑफेंस। अब
Speaker A
किसी पर्सन से तुम अपराध कैसे करवा सकते हो? उसको डरा के है ना उसके मन में डर पैदा करके उसके मन में खौफ पैदा करके उसको डरा के धमका के ये एक तरीका होता है किसी से अपराध करवाने का तो तुमसे भी डरा के
Speaker A
धमका के यहां पे क्या करवा दिया गया आपको जो है यहां पे अपराध करवा दिया गया ठीक है अब ये जो डर आपको दिखाया गया ये जो फियर आपको यहां पे दिखाया गया कि अपराध करने के लिए ये जो फियर था ये कौन सा फियर था ये
Speaker A
था इंस्टेंट डेथ का इंस्टेंट डेथ का मतलब क्या होता है? कोई पर्सन 2 कि.मी. या 10 कि.मी.
Speaker A
जस्ट अ सेकंड। ठीक है? तो कोई जो पर्सन है वो 2 कि.मी. या 10 कि.मी. दूर नहीं बैठा हुआ है। है ना? कि ऐसा नहीं है कि कोई पर्सन बहुत ज्यादा दूर बैठ के तुमको डरा धमका रहा है।
Speaker A
है ना? कोई पर्सन तुम्हारे इमीडिएटली सर पर खड़ा हुआ है और सर पर खड़े हो के वो तुमसे ये कह रहा है कि ये वाला अपराध करो नहीं तो मैं आपकी डेथ कॉस्ट कर दूंगा। तो ध्यान रखना कि सेक्शन नंबर 32 में जो आपको
Speaker A
डराया धमकाया गया जो आपको थ्रेट जो आपको थ्रेट दिया गया है वो इंस्टेंट डेथ का थ्रेट होना चाहिए। उससे कम कुछ भी नहीं चलेगा कि अरे सर मुझे डराया गया था कि मेरी प्रॉपर्टी छीन ली जाएगी। मेरे साथ
Speaker A
ऐसा हो जाएगा वैसा हो जाएगा। तो लॉ आपकी मदद नहीं कर पाएगा। लॉ आपकी मदद सिर्फ तब करेगा अगर आपको इंस्टेंटली अभी के अभी तुमको जान से मार देंगे। इस तरीके का डर दिखा के अगर आपसे कोई अपराध करवाया जाता
Speaker A
है तो। तो अगर ऐसा कोई अपराध आपसे करवाया गया आप उस अपराध को करने के लिए लायबल नहीं है। लेकिन कल को मान लो कि तुमको जान से मारने का डर दिखा के तुमसे देश के खिलाफ कोई अपराध करवा दिया जाए। तुमसे देश
Speaker A
के खिलाफ टेररिज्म करवा दिया जाए। तो क्या यह अलाउड है? तो नहीं। अब यहां पर एक और बात ध्यान रखना कि दो तरीके के अपराध होते हैं जिनमें आप नहीं बच पाओगे। भले ही आपको जान से मारने का डर दिखा के आपसे वो अपराध
Speaker A
करवाए गए होंगे। एक हो जाता है, ठीक है? एक हो जाता है आपका मर्डर और एक हो जाता है देश के खिलाफ किए गए अपराध। ठीक है? आप यह नहीं कह सकते कि सर मुझे जान से मारने का डर दिखाया गया था। मुझे जान से मारने
Speaker A
की कोशिश की गई थी। तो इसलिए मैंने किसी दूसरे पर्सन की जान ले ली। ये अलाउड नहीं है। जैसे कि हमने नेसेसिटी के टाइम पर पढ़ा था। है ना? कि आप अपनी जान बचाने के लिए किसी दूसरे पर्सन की इंटेंशनल डेथ
Speaker A
नहीं कॉज कर सकते हैं। आप किसी दूसरे पर्सन का मर्डर नहीं कॉज कर सकते हैं। ठीक है? तो आपसे अगर ये कहा जाए कि एक्स पर्सन को मार दो नहीं तो तुमको मार देंगे। और तुमने ये धमकी सुन के ये डर से तुमने एक्स
Speaker A
पर्सन की डेथ कॉज कर दी तो यहां पे आप इस सेक्शन का बेनिफिट लेके नहीं बच पाओगे। दूसरा आपको डरा के धमका के आपसे टेररिज्म करवा दिया गया या आपसे देश के खिलाफ कोई और अपराध करवा दिया गया। वहां पर भी आप ये
Speaker A
नहीं कह सकते कि अरे सर हमको जान से मारने का खतरा था। सो व्हाट जान से मारने का खतरा था। मतलब आप देश के खिलाफ चले जाएंगे। तो दो अपराधों को छोड़ के सेक्शन नंबर 32 क्या कहता है कि इन दो अपराधों को
Speaker A
छोड़ दो। इन दोनों अपराधों के अलावा अगर आपसे कोई भी अपराध करवाया जाता है। मतलब यू वर कंपेल्ड टू डू इट। और वो अपराध कैसे करवाया गया? आपको इंस्टेंट डेथ का खतरा दिखा के करवाया गया। तो ऐसे में आप जो है
Speaker A
सेक्शन नंबर 32 के अंदर में बेनिफिट लेके बच सकते हैं। ठीक है? तो सेक्शन 32 के स्टूडेंट्स एसेंशियल्स क्या हैं? जरूरी रिक रिक्वायरमेंट क्या है? पहली रिक्वायरमेंट तो क्या है कि आपको मिली होनी चाहिए कोई धमकी। आपको मिली होनी
Speaker A
चाहिए कोई थ्रेट। ठीक है? थ्रेट कौन सा होना चाहिए? थ्रेट होना चाहिए जान से मारने का। कि आपको यहां पर जान से मारने की धमकी दी गई थी और वह जान से मारने की धमकी भी इमीडिएट थी कि मतलब जो सामने वाला
Speaker A
पर्सन होगा वो आपके सामने खड़ा होगा और सामने खड़े हो के वो आपको डराधमका रहा होगा और ऐसे में जान के जान से मारने की धमकी देके आपसे बेसिकली क्या करवा लिया गया कोई अपराध करवा लिया गया ठीक है तो आप
Speaker A
उस अपराध को करने के लिए लायबल नहीं है लेकिन ध्यान रखना कि वो जो अपराध है मर्डर नहीं होना चाहिए और स्टेट के अगेंस्ट किया गया कोई ऑफेंस नहीं होना चाहिए। ठीक है?
Speaker A
ये दो अपराधों में आप नहीं बच पाओगे। इनके अलावा अगर आपसे कोई भी अपराध करवाया जाता है आपको डरा के धमका के तो आपकी कोई लायबिलिटी नहीं है। अच्छा एग्जाम में एक और सवाल यहां पे इस तरीके से भी बनता है
Speaker A
कि जैसे मान लो ए पर्सन है। ए पर्सन को यहां पे कहा गया कि हम तेरी हड्डियां तोड़ देंगे। अगर तूने ये ये अपराध नहीं किया तो। ठीक है? हम तेरे को बुरी तरीके से मारेंगे, पीटेंगे। हम कल परसों आके तेरी
Speaker A
डेथ कॉज कर देंगे। अगर ये सारे डर दिखाए जाते हैं तो आप इस सेक्शन का बेनिफिट नहीं ले सकते हो। ध्यान रखिएगा। ठीक है? जो आपको इस सेक्शन का बेनिफिट सिर्फ तब मिलेगा जब आपको जान से मारने की और
Speaker A
इंस्टेंट जान से मारने की धमकी मिली हो। कि सामने वाला जो पर्सन है वो कहां पे हो?
Speaker A
एकदम आपकी इमीडिएट प्रेजेंस में खड़ा हो। नहीं। इंस्टेंट डेथ टुवर्ड्स फैमिली मेंबर आल्सो इज़ नॉट अलाउड। इंस्टेंट डेथ का खतरा आपको खुद को होना चाहिए। उस पर्सन को होना चाहिए जिससे अपराध करवाया जा रहा है। तभी सेक्शन नंबर 32 का बेनिफिट आपको यहां पे
Speaker A
मिलता है। अच्छा अब ये जो सेक्शन है इसके जो एक्सप्लेनेशन है दे आर आल्सो वेरी मचेंट। यहां से मुझे याद है कि एमपी जुडिशरी और कई और सारे आपके पेपर्स हैं उनमें सीधा-सीधा जो एक्सप्लेनेशन में दिया हुआ है वो सीधा-सीधा एग्जाम में सवाल उठा
Speaker A
के ये पूछ लेते हैं। अब यहां पे देखो एक्सप्लेनेशन नंबर वन आपको सिंपल भाषा में क्या बताता है?
Speaker A
मान लेते हैं आपका एक दोस्त है। आपका दोस्त क्या करता है? डकैतियां करता है। वह उसका प्रोफेशन है। उसका उसका उसका उसका पेशा ही वही है। वो डकैतियां करते हैं। उनका पूरा गैंग है। उनका पूरा ग्रुप है। अब आपने आज तक कभी लाइफ में डकैती होती
Speaker A
हुई देखी नहीं थी। आपने कभी डकैती कैसे होती है? क्या प्लानिंग व्लानिंग करते हैं। ये सब आपने कभी होता हुआ देखा नहीं था। तो आप एक दिन अपने फ्रेंड को फोन घुमाते हैं। आप उससे पूछते हैं कि कोई अभी
Speaker A
लेटेस्ट में है क्या डकैती वकैती करने का प्लान? आपका दोस्त आपसे कहता है कि हां आज ही जा रहे हैं हम डकैती करने के लिए। एंड यू टेल योर फ्रेंड कि ठीक है आज मैं भी आपके साथ चलूंगा। मुझे भी जरा देखनी है कि
Speaker A
तुम लोग डकैती वगैरह करते कैसे हो। मतलब क्या-क्या किया जाता है वो सारी चीजें। मतलब मैं बस देखने चलूंगा। मुझे कुछ करनी नहीं है डकैती वगैरह। तो तुम बेसिकली अपने दोस्त के उस गैंग के साथ चले गए। डकैतों
Speaker A
के गैंग के साथ। अब जब आपका फ्रेंड और फ्रेंड का ग्रुप और आप वहां पहुंचे जहां डकैती मारनी थी। तो वहां पर आपसे कहा गया कि चलो बेटा आप एक काम करो ये घर है इसमें डकैती मारनी है और इस घर में ये ताला लगा
Speaker A
हुआ है। ताले को तुरंत तोड़ो। अब आप बोलो कि अरे अरे मैं कैसे ताला तोडूंगा? मैं तो डकैती करने थोड़ी ना आया था। मैं तो बस देखने के लिए आया था कि डकैती किस तरीके से होती है। अब वो डकैतों का ग्रुप जो
Speaker A
तुम्हारा फ्रेंड और फ्रेंड का डकैतों का ग्रुप है वो तुम्हारे सर पे यहां कनपटी पे गन लगा दें, पिस्तल लगा दें और तुमसे कहे कि देखो ऐसा है या तो ताला तोड़ो दरवाजा तोड़ो नहीं तो अभी तुमको जान से खत्म कर
Speaker A
देंगे। और तुमने जान का डर देख के क्या करा? तुमने जान का डर देख के ताला तोड़ दिया। अब ताला तोड़ना क्या है? अपने आप में एक अपराध है भारतीय न्याय संहिता का। तो मान लो बाद में पुलिस ने तुमको पकड़ा।
Speaker A
अब तुम पुलिस के सामने ये कहो कि सर मेरे पास तो कोई ऑप्शन ही नहीं था डकैती करने के। मेरे पास तो कोई ऑप्शन ही नहीं था ताला ना तोड़ने के अलावा। उन्होंने मेरे यहां पे गन लगाई हुई थी। मुझे इंस्टेंट
Speaker A
मारने का खतरा था। मैं और क्या करता? पुलिस कहेगी एक बात बताओ तुम उस सिचुएशन में पहुंचे कैसे? कि वो डकैत तुम्हारे यहां पे गन लगा पाए, पिस्टल लगा पाए। हाउ डिड यू लैंड अप इन दैट सिचुएशन? यू लैंडेड
Speaker A
अप योरसेल्फ। तुमने खुद अपने आप को क्या करा? उस सिचुएशन में डाला। क्यों गए थे डकैतों के साथ वहां पर देखने के लिए कि डकैती वगैरह कैसी होती है? तो जो पर्सन खुद अपने आप को इस सिचुएशन में डालता है
Speaker A
कि कोई पर्सन उसको जान से मारने का डर दिखा के इंस्टेंट डेथ का खतरा दिखा के उससे कोई अपराध करवा जाए वो पर्सन भी ये सेक्शन का बेनिफिट लेके नहीं बच पाएगा। यही बात आपको यहां पे बताई गई है कि देखो
Speaker A
तुम्हें पता है कि तुम डकैतों के साथ जा रहे हो। वो क्रिमिनल्स हैं। ये जानने के बावजूद आप उनके गैंग को आप उनके ग्रुप को जॉइ करते हो और बाद में वो डकैत अगर आपसे कोई अपराध करवाते हैं आपको जान से मारने
Speaker A
का डर दिखा के तो आप ये नहीं कह सकते कि सर मुझे सेक्शन नंबर 32 का बेनिफिट दे दो। क्योंकि आपने क्या करा है? आपने खुद अपने आप को सिचुएशन के अंदर में प्लेस किया है। तुमने खुद अपने आप को डाला ना। कौन पागल
Speaker A
होता है जो जाता है डकैतों के साथ देखने के लिए कि डकैती कैसे की जाती है। ठीक है?
Speaker A
तो यहां पे आपको बेनिफिट नहीं मिलेगा। एक्सप्लेनेशन नंबर टू। अब यहां पे जैसे आपको ये एक एक्सप्लेनेशन तो क्या ही है। ये बेसिकली एग्जांपल टाइप का आपको दिया है। अब यहां पे जैसे बताया है कि मान लो डकैतों का जो एक गैंग है वो एक स्मिथ को
Speaker A
पकड़ ले। स्मिथ का मतलब चाबी बनाने वाला। है ना? जो जब हमारी चाबी वगैरह खो जाती है तो आप जिसके पास जाते हो डुप्लीकेट चाबी बनवाने के लिए उसको स्मिथ कहते हैं। तो मान लो डकैतों के गैंग ने क्या करा? एक
Speaker A
स्मिथ को यहां पे उठा लिया। ठीक है? उठा के ले गए उसको अपने साथ। जहां डकैती करनी थी वहां जाके उसको उतारा और बोला कि अब एक काम करो ये जो घर है इसका ताला तोड़ो वहां पे। अब चाबी बनाने वाला जो है वो बोला कि
Speaker A
सर मतलब मैं मैं क्यों तोड़ूं? मुझे नहीं तोड़ना ताला वाला। तो ये डकैतों का ग्रुप उससे कहता है कि या तो ताला तोड़ो नहीं तो तुम्हारी जान ले लेंगे। तो बेचारे ने जान का खतरा देख के क्या करा? औजार, अपने
Speaker A
टूल्स वगैरह निकाले और घर का जो ताला है वो उसने यहां पे तोड़ दिया। उसके बाद डकैतों ने अंदर घर में घुस के क्या करी?
Speaker A
डकैती जो है वो यहां पर कर ली। तो अब ये जो चाबी बनाने वाला है यह सेक्शन 32 का बेनिफिट लेके बच जाएगा। ये क्या कहेगा कि सर मैंने जानबूझ के ताला नहीं तोड़ा। मुझे कोई अपराध नहीं करना था लेकिन जान का खतरा
Speaker A
था मेरे को। मेरे मुझे मारने पे तुले हुए थे ये लोग। है ना? तो मैं और क्या करता?
Speaker A
आई डिड नॉट हैव एनी अदर ऑप्शन। ठीक है? तो दैट इज़ योर सेक्शन नंबर 32। 33 के ऊपर आ जाइए। अब सेक्शन नंबर 33 जो है यह देखो। [गला साफ़ करने की आवाज़] आपको एक सिंपल सी बात ही बताता है कि
Speaker A
सुप्रीम कोर्ट के पास, हाई कोर्ट के पास, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के पास ना देश की पुलिस के पास बहुत बड़े-बड़े मुद्दे हैं। दे हैव मच बिगगर कंसर्न्स, मच बिगर इशूज़ टू वरी अबाउट। है ना? सीजेपी प्रोटेस्ट चल रहा है। जंतरमंतर पे इतना कुछ चल रहा है। बहुत
Speaker A
चीजें हैं देश के कोर्ट और जजेस और लॉ के पास वरी करने के लिए। ऐसे में तुम छोटी-छोटी चीजों के लिए पुलिस या कोर्ट को जाकर परेशान नहीं कर सकते और तुम परेशान करोगे भी तो वह परेशान होना नहीं चाहेंगे
Speaker A
उसमें। राइट? इसमें आप एक सिंपल सा एग्जांपल ले सकते हैं। अगर कभी मंदिर के बाहर से आपकी चप्पल चोरी हो जाए। कोई पर्सन जो है आप ऑफिस में काम करते हैं। कोई पर्सन आपका पेन उठा के लेके चला जाए।
Speaker A
कोई पर्सन आपकी पानी की बोतल से पानी पी ले। है ना? आप ट्रेन में ट्रैवल कर रहे हो। कोई पर्सन आपकी रेलवे की सीट पर बैठ जाए। आप कहीं बाहर निकले हो, किसी से आपकी थोड़ी बहुत झड़प हो जाए। गाली गलौज हो
Speaker A
जाए, तू तू मैं टाइप की हो जाए। ये सारी चीजें ये हमारी एवरीडे लाइफ का पार्ट हैं। रोज आए दिन किसी ना किसी के साथ ये चीजें होंगी। आपकी गाड़ी घर के बाहर कोई कचरा डाल के चला जाएगा। घर के बाहर कोई गाड़ी
Speaker A
पार्क करके चला जाएगा। इस तरीके की चीजें होती रहती हैं। इसका मतलब ये नहीं है ना कि छोटी-छोटी बातों के लिए। ठीक है?
Speaker A
हां मैंने Instagram पर रील भी बना के डाली है मिलाना है ना तो मैंने सुबह ही देख लिया था मैंने वीडियो भी बना के डाला है उसके ऊपर आप देख सकते हैं उसको मैंने मतलब उसमें वही अपना रिएक्शन दिया है ओवर
Speaker A
व्हाट सीजीआई हैज़ सेड ठीक है तो ये छोटी-छोटी चीजें हैं स्लाइट हार्म है इनके लिए आप परेशान नहीं कर सकते यहां पे कोर्ट को या लॉ को या पुलिस वालों को कि अरे सर मेरी चप्पल चोरी हो गई अरे सर देखिए मेरा
Speaker A
जो पड़ोसी है ये मेरे घर के बाहर रोज गाड़ी खड़ी करके चला जाता ये छोटे-मोटे मामले हैं। इनसे कोई बहुत बड़ा आपका नुकसान नहीं हो रहा है कि इसके लिए पुलिस एफआईआर की जाए। कोर्ट में केस वगैरह जो है
Speaker A
वो यहां पे फाइल की जाए। है ना? ये सब ये सब नहीं किया जा सकता। राइट? तो यहां पे सेक्शन नंबर 33 इसी चीज के बारे में बात करता है। सेक्शन 33 कहता है कि देखो हम यह नहीं कह रहे कि आपके साथ अपराध नहीं हुआ
Speaker A
है। मंदिर के बाहर से आपकी चप्पल चोरी हो जाए वो भी चोरी का अपराध है। वो भी थफ्ट का अपराध है। हम यह नहीं कह रहे कि वो चोरी नहीं है। लेकिन चप्पल चुरा के तुमको कितना ही नुकसान हुआ होगा। कितना ही हार्म
Speaker A
तुमको पहुंचा होगा। ₹200, ₹500 ₹1000 ज्यादा से ज्यादा और कितनी महंगी चप्पल होगी तुम्हारी। तो यहां पे अपराध हुआ है। ठीक है? लेकिन उस अपराध से जो नुकसान हुआ है तुमको वो इतना ज्यादा छोटा है। इतना ज्यादा हार्म है कि कोई जो सही बुद्धि का
Speaker A
आदमी होगा ना वो उस चीज के लिए कंप्लेन नहीं करेगा कि यार मेरी चप्पल चोरी हो गई। मेरे साथ ऐसा हो गया। मेरे साथ वैसा हो गया। कोई समझदार पढ़ा लिखा आदमी होगा। दे विल इग्नोर दैट कि चलो यार ठीक है होता
Speaker A
रहता है। है ना? इसमें कोई बहुत ज्यादा बखेड़ा खड़े करने वाली बात नहीं है। तो यहां से एग्जाम में एक लीगल मैगज़िम पूछा जाता है। दैट इज़ डीमिनिमस नॉन क्यूरेट लेक्स। डीमिनिमस नॉन क्यूरेट लेक्स का मतलब कि आपके साथ जो अपराध हुआ है, आपके साथ जो
Speaker A
ऑफेंस हुआ है, उससे जो नुकसान आपको पहुंचा है, दैट इज वेरी ट्रिवियल। ठीक है? दैट इज़ वेरी ट्रिवियल। वो बहुत ही छोटा है। ठीक है? और छोटे नुकसान में लॉ को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ठीक है? लॉ को कोई फर्क यहां पर नहीं
Speaker A
पड़ने वाला है। ठीक है? तो यहां पर सेक्शन नंबर 33 आपको यही बताता है कि अगर अपराध हुआ है, अपराध करके देखो बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। कोई बहुत बड़ा इंपैक्ट पड़ा है। बिल्कुल कानून आपकी मदद करेगा। बिल्कुल लॉ
Speaker A
जो है वो आपकी मदद करेगा। लेकिन छोटा-मोटा नुकसान हुआ है तो छोटी-मोटी चीजों के लिए यू कांट गो ऑन कंप्लेनिंग ना। आपकी आपके हस्बैंड वाइफ से थोड़ी सी घर में तू तू मैंम हो गई तो तुम जाके डोमेस्टिक वायलेंस
Speaker A
का केस फाइल कर दोगे या तुम जाके क्रुल्टी का केस फाइल कर दोगे। अरे नॉर्मल झड़प तो होती रहती है। सुप्रीम कोर्ट भी यही कहता है कि यार नॉर्मल लड़ाई झगड़े तो आर पार्ट एंड पार्सल ऑफ़ हस्बैंड वाइफ रिलेशन। इसका
Speaker A
मतलब यह नहीं है ना बात-बात पे सासससुर के ऊपर जाके पतिप के ऊपर जाके तुम क्रुएल्टी लगाते रहोगे। ठीक है? क्रुअल्टी हो गई। ऐसा हो गया, वैसा हो गया यहां पे। तो छोटी-मोटी चीजों में ना तो लॉ पड़ता है और
Speaker A
लॉ ऐसा मान के चलता है। लॉ ऐसा मान के चलता है। ठीक है? कि अगर छोटी-मोटी चीजें हैं तो उसमें इंसान को भी नहीं पढ़ना चाहिए। है ना? ऐसे कोई फिक्स्ड पैरामीटर नहीं है। अ चंदन राज बहार चंद ठीक है। ऐसा कोई
Speaker A
फिक्स्ड पैरामीटर नहीं है। अ अगेन डिपेंड्स मतलब दैट्स अ क्वेश्चन ऑफ़ फैक्ट केस टू केस डिफर करेगा। ऐसे तो मंदिर के बाहर एक बार एक मंत्री जी के लड़के के जूते चप्पल हो गए। जूते जो है चोरी हो गए
Speaker A
थे। लेकिन उस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। क्योंकि वो जो जूते थे वो 25 300 के थे। है ना? तो इट्स अ क्वेश्चन ऑफ़ फैक्ट। मतलब सिचुएशन टू सिचुएशन वेरीरी करेगा, डिफर करेगा। ठीक है? चलिए, अब आ जाते हैं
Speaker A
जनरल एक्सेप्शन के एक बहुत ही इंपॉर्टेंट पार्ट के ऊपर जो है आपका प्राइवेट डिफेंस। अब प्राइवेट डिफेंस में देखिए हमें केस लॉज़ भी कवर करने हैं। तो केस लॉज़ हम इकट्ठा एक बार एंड में कवर करेंगे। जब हम
Speaker A
प्राइवेट डिफेंस वाला पार्ट पूरा पढ़ लेंगे। पूरा अच्छी तरीके से डिस्कस कर लेंगे। पहले जो प्रोविजंस हैं आपके प्राइवेट डिफेंस के पहले उनको हम यहां पे पूरा पढ़ के समझ लेते हैं। इसमें जो सबसे पहला सेक्शन है स्टूडेंट्स दैट इज़ सेक्शन
Speaker A
नंबर 34। अब देखो बेसिकली यहां से जो आपका पार्ट है दैट इज राइट ऑफ प्राइवेट डिफेंस। ठीक है? अब प्राइवेट डिफेंस बेसिकली क्या है? एक बात सिंपल है। हमारे देश की आबादी बहुत ज्यादा है। देश में जो तादाद है वो
Speaker A
बहुत ज्यादा है। ठीक है? थैंक यू प्रीति। तो देश में जो तादाद है वो बहुत ज्यादा है। आप हमेशा एक्सपेक्ट नहीं कर सकते कि एक पुलिस वाला या कोई सिक्योरिटी वाला या कोई तुम्हारा ध्यान रखने वाला पूरा टाइम
Speaker A
जो है वो तुम्हारे पीछे पीछे पीछे पीछे पीछे पीछे जो है वो लगा रहेगा। तो कभी कबभार सिचुएशन ऐसी होती है कि आप पुलिस वाले की मदद ले सकते हैं। आपको कोई डर होता है, आपको कोई खतरा होता है, आपको कोई
Speaker A
डेंजर होता है। ठीक है? आपके पास अगर मौका है, सिचुएशन ऐसी है, आप बिल्कुल पुलिस वालों की मदद लीजिए। बट इट इज़ नॉट ऑलवेज पॉसिबल कि पुलिस वालों की मदद ली जा सके या किसी पब्लिक सर्वेंट की मदद ली जा सके।
Speaker A
कभी कबभार आदमी को अपनी जो यहां पे क्या कहते हैं? रक्षा है, आत्मरक्षा है, स्वयं रक्षा है वो खुद ही करनी पड़ती है। कभी कबभार चीजों को आपको खुद हाथ में लेना पड़ेगा। फॉर एग्जांपल कोई आदमी अगर नाइफ
Speaker A
लेके या कोई शार्प ऑब्जेक्ट लेके तुम्हारे ऊपर चढ़ के आ जाए। अब वहां पे आप थोड़ी ना वेट करेंगे कि कोई पुलिस वाला आएगा या तुमको आके बचा के जाएगा। ये तो इस सिचुएशन में तो आपको जो करना पड़ेगा खुद ही करना
Speaker A
पड़ेगा अपने को बचाने के लिए। तो इसलिए आपको प्राइवेट डिफेंस का जो राइट है वो यहां पे प्रोवाइड किया गया है। है ना?
Speaker A
जैसे अभी थोड़े दिन पहले वो मुंबई के लोकल में एक इंसिडेंट हुआ था। एक पागल सर पर आदमी उससे कहा मुंबई का लोकल का गेट बंद कर दो। तो पागल ने जो है वो चाकू लेकर स्टैप करके मार ही दिया अगले बेचारे लड़के
Speaker A
को 22-23 साल के लड़के को। ठीक है? अब वो 22- 23 साल के लड़के के पॉइंट ऑफ व्यू से देखो। उसको तो जान से मारने का खतरा आ गया था ना एक टाइम पे। अगला तुम्हारे ऊपर नाइफ लेके चढ़ के आ गया। तो वो 22- 23 साल के
Speaker A
लड़के को जो करना था उस समय खुद ही करना था। आपने देखा उस उस इंसिडेंट का जो वीडियो वगैरह है पूरा वायरल हुआ था। कोई मदद नहीं करता आपकी। सारे भाग जाते हैं अपनी-अपनी जान बचाने में। तो तुम्हें जो
Speaker A
अपनी आत्मरक्षा करनी है, प्राइ वो करना है, अपने आप को बचाना है, वो खुद ही करना पड़ेगा। यू कांट एक्सपेक्ट ऑलवेज कि लॉ एंड ऑर्डर हमेशा तुम्हारी मदद करने को रहे। सिक्योरिटी वाले हमेशा रहे। पुलिस हमेशा तुमको बचाने के लिए आए। दैट इज नॉट
Speaker A
पॉसिबल। तो इसलिए कुछ सिचुएशंस होती हैं जहां पे आपको प्राइवेट डिफेंस का राइट अलाउ किया जाता है। है ना? कि आप अपने आप को बचाने के लिए, किसी और पर्सन को बचाने के लिए ऐसा भी नहीं है कि आप सिर्फ अपने
Speaker A
आप को बचाओ। आपको दिख रहा है कि कोई और पर्सन खतरे में है, कोई और पर्सन डेंजर में है तुम उसको भी बचाओ। करो अपने प्राइवेट डिफेंस का राइट का इस्तेमाल। इतना सेल्फिश नहीं बनना है जिंदगी में कि
Speaker A
अपने पे आएगी तो ही करेंगे। वो सामने वाला दिक्कत में है तो भी जाओ बचाने के लिए उसको। तो यहां पे सेक्शन नंबर 34 आपको बेसिक सी बात ये बताता है कि देखो देश में सबके पास राइट ऑफ प्राइवेट डिफेंस है। आप
Speaker A
अपने बचाव में अपने आप को बचाने के लिए जो करना चाहे वो कर सकते हैं और अपने बचाव में अगर कोई भी चीज की जाती है तो वो एक अपराध नहीं है। वो एक ऑफेंस नहीं माना जाएगा। जैसे एक सिंपल सा एग्जांपल वही तुम
Speaker A
मुंबई लोकल वाला ही एग्जांपल ले लो कि अगर वो आदमी आपके ऊपर चढ़ आया है चाकू लेके नाइफ लेके आपको मारने के लिए आ रहा है तो अब आदमी अपने आप को बचाने के लिए कोशिश करेगा ना तो आपने भी पलट के क्या करा अब
Speaker A
मान लो कि वो लड़का 22 23 साल का लड़का क्या करता वो उस आदमी को जिसके हाथ में चाकू था उसको लेके ट्रेन के बाहर ही धक्का मार देता अब ट्रेन फास्ट जाती है सीधी सी बात है वो आदमी ट्रेन के बाहर गिरते ही मर
Speaker A
जाता उसकी डेथ वहां पे कॉज हो जाती। लेकिन आप उस 22-23 साल के लड़के को ब्लेम नहीं कर सकते थे कि तुमने ये क्या कर दिया?
Speaker A
देखो किसी को मार दिया। उसके पास कोई और ऑप्शन नहीं था। उसकी जान खतरे में थी। तो जान बचाने के लिए उसको जो सही लगा उसने वो वहां पे किया। और जो भी उसने किया चलो किसी को नीचे धक्का मार के गिरा दिया।
Speaker A
उसकी डेथ कॉज कर दी। तो नॉर्मल सिचुएशन में वो एक मर्डर का अपराध हो जाता। वो एक ऑफेंस हो जाता। बट यहां पे क्योंकि अपराध प्राइवेट डिफेंस के राइट को एक्सरसाइज करते हुए किया गया है तो उसे हम अपराध
Speaker A
नहीं मान के चलेंगे। दैट विल नॉट बी कंसीडर्ड एज एन ऑफेंस। नॉर्मल सिचुएशन में वो अपराध होता लेकिन यहां पर ऑफेंस नहीं है क्योंकि वो प्राइवेट डिफेंस में जो है वो ऑफेंस का इस्तेमाल यहां पर किया गया है। तो यहां पे सेक्शन नंबर 34 आपको सिंपल
Speaker A
सा प्रिंसिपल यही बताता है कि कभी कबभार आप कुछ चीजें ऐसी करोगे जो अदरवाइज अपराध मानी जाएंगी ऑफेंस मानी जाएंगी लेकिन अगर वो प्राइवेट डिफेंस के राइट को एक्सरसाइज करते हुए की गई हैं देन वो ऑफेंस नहीं है
Speaker A
देन वो अपराध नहीं माना जाएगा। ठीक है? अब सेक्शन नंबर 35 आपको आपके प्राइवेट डिफेंस के राइट का एंबिट बताता है कि हमारे पास प्राइवेट डिफेंस क्या है? किस तरीके का है? कहां-कहां अवेलेबल है? कब-कब अवेलेबल है? कैसे-कैसे अवेलेबल है? तो यहां पर
Speaker A
लिखा है कि एव्री पर्सन एव्री पर्सन मतलब चाहे आप इस देश के नागरिक हैं, चाहे आप इस देश के नागरिक नहीं हैं। चाहे आप एक फॉरेन सिटीजन हैं। इस देश में जितने लोग हैं हर पर्सन के पास अपनी खुद की बॉडी और अपनी प्रॉपर्टी और
Speaker A
किसी दूसरे की बॉडी और किसी दूसरे की प्रॉपर्टी को बचाने का प्राइवेट डिफेंस का राइट रहता है। जैसे यहां पे एक एग्जांपल मैं आपको दूंगी। आई एम श्योर ये मूवी आप सब लोगों ने देखी होगी। दैट इज मतलब उसमें
Speaker A
कुछ-कुछ चीजें तो बहुत ही सही दिखाई हैं। लॉ के प्रिंसिपल्स बढ़िया दिखाए हुए हैं। कुछ-कुछ बहुत ही एक्सचुरेटेड दिखाया है। क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता। इट्स अ वेरी ओल्ड मूवी ऑफ़ गोविंदा। उस मूवी में दिखाया है कि अनुपम खेर एक पर्सन का केस लड़ रहा
Speaker A
होता है। एक लड़का होता है 19-20 साल का और चश्मा लगा के। उस बच्चे का केस लड़ रहा होता है अनुपम खेर। उस 1920 साल के लड़के के ऊपर इल्जाम यह होता है कि उसने क्या करा है? उसने एक गुंडे एक गुंडे का एक
Speaker A
गैंगस्टर का मर्डर कर दिया है यहां पे। तो मर्डर का केस चल रहा होता है उस लड़के के ऊपर। अब अनुपम खेर उस लड़के का वकील होता है। तो अनुपम खेर जो है जज साहब को बताता है कि आप यह समझो कि मर्डर किस
Speaker A
परिस्थितियों में हुआ है। मतलब अनुपम खेर उस लड़के का वकील होने के नाते प्राइवेट डिफेंस का राइट यूज़ कर रहा होता है। अनुपम खेर कहता है कि सर उस लड़के की बहन डेंजर में थी। उसकी बहन खतरे में थी। वो
Speaker A
गुंडा वो गैंगस्टर एक दिन इनके घर में घुस के आ गया और फिर उसने उस लड़की के साथ जो है जबरदस्ती सेक्सुअल असॉल्ट करने की कोशिश की और फिर अनुपम खेर एक बहुत ही बढ़िया लाइन जज की तरफ जो है वो दे देते
Speaker A
हैं कि आप बताइए आपकी बहन अगर ऐसे दिक्कत में होती मेरी बहन ऐसे दिक्कत में होती तो देश का हर भाई वही करेगा जो उस लड़के ने किया है। अपनी बहन की इज्जत बचाने के लिए वो सामने वाले पर्सन को मार देगा। और सर
Speaker A
जज साहब उसने इसलिए एंथनी ब्रू क्या एंथनी कुछ नाम होता है उसका गुंडे का उस मूवी में तो उसने एंथनी का जो है मर्डर कर दिया। तो अब उस इस एग्जांपल से बेसिकली हमको क्या समझ में आया? हमको ये समझ में
Speaker A
आया कि लड़का जिसने मर्डर किया है। जिसने गुंडे की जान ली है। लड़के की जान खतरे में नहीं थी। लड़के को कोई खतरा डेंजर नहीं था। लड़का अपना मस्त था। लेकिन लड़के की बहन डेंजर में थी। लड़के की बहन के ऊपर
Speaker A
सेक्सुअल असॉल्ट होने वाला था। तो सेक्शन 35 आपको यही कहता है कि आप खुला अपना प्राइवेट डिफेंस का राइट यूज करो। कोई दिक्कत की बात नहीं है। चाहे आप खतरे में है, चाहे कोई दूसरा पर्सन खतरे में है।
Speaker A
एंड सिमिलरली चाहे आपकी प्रॉपर्टी को कोई नुकसान होने वाला हो, चाहे किसी दूसरे की प्रॉपर्टी को नुकसान होने वाला हो। कोई पर्सन अगर पेट्रोल लेके पेट्रोल तो छोड़ो। ठीक है? उसमें तो एथेनॉल है। कोई और चीज लेके ठीक है? अगर
Speaker A
कोई सामने वाला पर्सन तुम्हारी गाड़ी की तरफ दौड़ा चला आए उसको आग लगाने के लिए तुम्हारी तुम्हारी कार को भस्म करने के लिए। ठीक है? अब तुम्हारी प्रॉपर्टी यहां पे डेंजर में है। तो प्रॉपर्टी आपकी डेंजर में है तो आप करिए जो आपसे करते बनता है।
Speaker A
बचाइए अपनी कार को कैसे बचा सकते हैं? लेकिन अगर किसी दूसरे की कार भी डेंजर में है। मान लो आपकी पड़ोसी की कार है। उसकी कार को कोई जलाने के लिए आ रहा है। तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपने प्राइवेट
Speaker A
डिफेंस के राइट को यूज़ नहीं करेंगे। क्योंकि हमारी प्रॉपर्टी नहीं है। भाई आपको दिख रहा है ना कि किसी और की प्रॉपर्टी यहां पे डेंजर में है। तो उसकी प्रॉपर्टी को बचाने के लिए भी आपको जो करते बने करिए बचाइए उसकी प्रॉपर्टी को
Speaker A
वहां पे। तो प्राइवेट डिफेंस का राइट आपको दोनों सिचुएशंस में अवेलेबल होता है। ठीक है? चाहे आपकी बॉडी डेंजर में हो, चाहे किसी और पर्सन की बॉडी डेंजर में हो। मतलब चाहे आपके शरीर के साथ कोई अपराध हो रहा
Speaker A
हो या किसी दूसरे के साथ कोई अपराध हो रहा हो। चाहे आपकी प्रॉपर्टी के साथ कोई अपराध हो, चाहे किसी दूसरे की प्रॉपर्टी के साथ कोई अपराध हो। और प्रॉपर्टी में ये नहीं देखा जाएगा कि प्रॉपर्टी चल है या अचल है।
Speaker A
मूवेबल है या फिर इमूवेबल है। प्रॉपर्टी जो है वो आपकी किसी भी तरीके की हो। चाहे मूवेबल प्रॉपर्टी हो चाहे इमूवेबल हो। किसी का घर हो, कोई जमीन हो, किसी की कोई गाड़ी हो, किसी का लैपटॉप हो। ठीक है?
Speaker A
किसी भी तरीके की अगर आपकी प्रॉपर्टी है या आपकी या किसी दूसरे पर्सन की उसको अगर खतरा है उसको अगर डेंजर है तो बचाने के लिए आपको जो करते बन सकता है वो आप यहां पे करिए। ठीक है? तो बेसिकली ये हमारा आज
Speaker A
की क्लास का जो है वो पार्ट था। नाउ बिफोर आई एंड एक इंपॉर्टेंट चीज कि स्टूडेंट्स अगर आप किसी भी एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं क्योंकि अभी काफी सारे एग्जाम्स हैं आपके। वी हैव जुडिशरी के पेपर हैं आपके।
Speaker A
इसके साथ-साथ अभी एमपी एडीपीओ का एग्जाम होने वाला है। एआईबी 22 की जो डेट है वो भी अनाउंस की जा चुकी है। इसके साथ-साथ अगर आप एसबीआई और आईबीपीएस का एग्जाम होने वाला है लॉ ऑफिसर का उसकी तैयारी अगर आप
Speaker A
कर रहे हैं एंड अलोंग विद दैट अगर आप यहां पे वकालत करने के लिए ड्राफ्टिंग सीखना चाहते हैं, प्लीडिंग सीखना चाहते हैं तो इन सब एग्जाम्स की तैयारी ये सभी कोर्सेज जिसमें आप तैयारी कर सकते हैं। अपनी लीगल
Speaker A
स्किल्स को बेटर कर सकते हैं। यह सब कुछ आपको जुडिशरी बाय PW की वेबसाइट पे अवेलेबल करवाया जा रहा है। तो इदर आप हमारी वेबसाइट पे जा सकते हो। आप हमारी मोबाइल एप्लीकेशन पे जा सकते हो। है ना?
Speaker A
या फिर इसी वीडियो के डिस्क्रिप्शन बॉक्स में नंबर दिया है। उस नंबर पे भी आप कांटेक्ट कर सकते हैं बैचेस या कोर्सेज के बारे में जानने के लिए। ऑलराइट। सो थैंक यू सो मच
Topics:भारतीय न्याय संहिताBNSसामान्य अपवादसेक्शन 31सेक्शन 32गुड फेथकानूनी शिक्षाजुडिशरीकानून परीक्षाकेस लॉ











