यह वीडियो विष्णु सहस्रनाम के 1000 पवित्र नामों का पहला भाग है, जो भक्ति और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।
Key Takeaways
- विष्णु सहस्रनाम भगवान विष्णु के 1000 पवित्र नामों का संग्रह है।
- हर नाम भगवान के एक विशेष गुण या स्वरूप को दर्शाता है।
- यह पाठ भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत लाभकारी है।
- भगवान विष्णु को सर्वशक्तिमान और ब्रह्मांड के पालनहार के रूप में पूजा जाता है।
- यह वीडियो हिंदी भाषा में भक्ति संगीत और श्लोक पाठ का सुंदर संयोजन है।
What the video covers
- विष्णु सहस्रनाम के 1000 पवित्र नामों का पाठ और अर्थ प्रस्तुत करता है।
- यह भाग भगवान विष्णु के विभिन्न नामों और उनके गुणों का वर्णन करता है।
- नामों में भगवान विष्णु के स्वरूप, शक्ति, और उनके ब्रह्मांडीय कार्यों का उल्लेख है।
- भक्ति संचार चैनल द्वारा हिंदी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
- श्लोकों में भगवान विष्णु को सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञानी और परमात्मा बताया गया है।
- यह वीडियो आध्यात्मिक ध्यान और पूजा के लिए उपयुक्त है।
- नामों में भगवान विष्णु के अवतारों जैसे नरसिंह, केशव, पुरुषोत्तम का उल्लेख है।
- भगवान विष्णु की महिमा, उनके योग, और ब्रह्मांडीय नियंत्रण को दर्शाया गया है।
- श्लोकों में भगवान के अनंत गुणों और उनके द्वारा सृष्टि के संचालन का वर्णन है।
- यह वीडियो धार्मिक और आध्यात्मिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण सामग्री प्रदान करता है।
Full Transcript — Download SRT & Markdown
Speaker A
ओम विश्वं विष्णु वशत करो। भूत भव्य भवत प्रभु। भूत कृत भूत भव। भूत भूत भवना। भूत्म परमात्मा मुक्त परमगति। अव्यय पुरुष साक्षी। क्षेत्रजो अक्षर वाचा योगो। योग विदं नेता प्रधान पुरुषेश्वरा। नरसिंह श्रीमन केशव पुरुषोत्तमा। सर्व शिव तनुर भूतदि निधिर।
Speaker A
अव्यया संभव भवन। भरता प्रभव प्रभुश्वरा। स्वयंभू शंभूदित्य पुष्करक्षो। महाना अनद धनो धाता। विधाता धातुत्तमा अप्रमेयो। ऋषिकेश पद्मनाभर प्रभु। विश्व कर्म मानुष्ट स्थवि धुवा। अग्र शशता कृष्णो लोहित तक्ष। प्रत प्रभुतस्तिक कुधा। पवित्रम मंगलम परम इशाना। प्राणद प्राण जेष्ठ श्रेष्ठ।
Speaker A
प्रजापति हिरण्य गर्भो भूगर्भो। माधवो मधुना ईश्वरो। विक्रम धनवी मेधवी। विक्रमा क्रमा अनुत्तम। दूर धजना कृतवन सुरेश। शरणम शर्मा विश्व रेता। प्रजा भवा अहा संवत। सरो्याला प्रत्यय सर्व दर्शन। अज सर्वेश्वर सिद्ध सिद्धि। सर्वदुता विषपत्मा। सर्व योग विनता वासुर वासुमन। सत्य समत समिता समा।
Speaker A
अमोघ पुंदरी कक्ष विष रुद्रो। बाहु शिरा बबुर विश्व यो। सुच श्रव अमृत शशत। स्थुर वरो महाकपा। सर्वदा सर्ववि जनारदना। वेदो वेद अव्यंगो गोविदा। लोक सुरध्यक्ष धर्मध्यक्षा। कृता कृता चतुरत्मा। चतुरहो चतुर दशो। चतुर भुजा भजनुर भोजनम। भोक्ता सहिष्णुर जगद।
Speaker A
अनो विजयो विश्व योनि पुनर्वसो। उपेंद्र वमन रमश। अमोघा सुचिता अ्द्र संग्रह। सर्गो धतमा नियम। नमो यमा विद्यु सदा योगी। विरह माधवो मधु। अतियो महा मायो। महत्सा महाबला महा बुद्धि। महावीर महा शक्ति महागी। अनिदेश श्रीमन हमें महाधि महेश विश्वासमह।
Speaker A
भरता श्रीनिवास सतम गति। अन सुर नंदो गोविंदो। गोविमति मर चमनो। हमसा सुपर्णो भुजगमा। हिरण्य नभ सुताप पद्म नभ। प्रजापति अमृत्यु सर्वद संधता। संधि मन स्थिरा। अजो दुर्म शस्त विशु। तत्व सुरह गुरुर गुरु तमो धाम। सत्य सत्य पर्रमा निमशो।
Speaker A
निमशा श्रग वचस्पति उदधी। अग्र निरग्रमण श्रीमन्यायो। नित समीन सहस्र मुरधा। विश्वत सहसक्षा सहस्र अवत। संप्रद आहा संवर को। अनिलो धनी धरा सुप्रसादा। प्रसन्नत्मा विश्व धुक। विश्वभ विभु सत्कर्ता। सतता सधुर जनु नारायणो। नारा असं प्रायत्मा। विशिष्टता शिष्ट कृत् सिद्धार्थ।
Speaker A
सिद्ध संकल्प सिद्धि सिद्धि साधना। वृषह ही वृषभ विष्णु। वृष पर्व विशोधरा। वर्धो वर्धमान विविक। श्रुति सर्ग सुभजो। दुरधारो वगमी महेंद्रो। वासुदो वासु निका। रूप रूप शिप विष् प्रकाशना। जय ओम।
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