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वरना दुनिया तुम्हें इस्तेमाल करती रहेगी | Machiavelli Brutal Rules

मैक्यावेली के सिद्धांतों से इंसानी स्वभाव और सत्ता के खेल को समझें, जो कॉर्पोरेट और जीवन की सच्चाइयों को उजागर करता है।

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Key Takeaways

  • दुनिया एक फेयर जगह नहीं, बल्कि एक रूथलेस सिस्टम है जो केवल पावर और एवोल्यूशन को समझता है।
  • इंसानी स्वभाव में सत्ता संघर्ष और विश्वासघात के पैटर्न छिपे होते हैं जो बार-बार दोहराए जाते हैं।
  • मैक्यावेली के सिद्धांत सत्ता में टिकने के लिए जरूरी रणनीतियों को समझने में मदद करते हैं।
  • मोरालिटी से ज्यादा जरूरी है अपनी पब्लिक इमेज और मास्किंग की कला।
  • सत्ता के खेल को समझना और उसके अनुसार व्यवहार करना जीवन में सफलता के लिए आवश्यक है।

What the video covers

  • मनीष की कहानी से शुरू होकर कॉर्पोरेट दुनिया में विश्वासघात और सत्ता संघर्ष की वास्तविकता को समझाया गया।
  • इंसानी स्वभाव और सत्ता के खेल को 500 साल पहले निकोलो मैक्यावेली के नजरिए से देखा गया।
  • दुनिया को एक फेयर प्लेग्राउंड नहीं बल्कि एक रूथलेस सिस्टम बताया गया जो केवल पावर और एवोल्यूशन की भाषा समझता है।
  • मैक्यावेली की किताब 'द प्रिंस' के सिद्धांतों के माध्यम से सत्ता में टिके रहने के नियमों को समझाया गया।
  • इंसानी व्यवहार और इतिहास के पीछे छिपे पैटर्न को उजागर किया गया जो हर क्षेत्र में दोहराए जाते हैं।
  • मोरालिटी और नैतिकता की अपेक्षा सत्ता के खेल में चालाकी और रणनीति की जरूरत पर जोर दिया गया।
  • वीडियो में 10 रूथलेसली पावरफुल रूल्स का उल्लेख है जो इंसान को सत्ता में टिकने में मदद करते हैं।
  • सत्ता के खेल में मास्किंग, पब्लिक इमेज, और रणनीतिक चालाकी की महत्ता को समझाया गया।
  • इंसानी स्वभाव की नंगी सच्चाई और इतिहास की असली दिशा को स्वीकार करने की जरूरत बताई गई।
  • यह वीडियो केवल कहानी नहीं, बल्कि सत्ता और इंसानी स्वभाव की गहरी इन्वेस्टिगेशन है।

Answers

Questions about this video

मनीष की कहानी से क्या सिखने को मिलता है?

मनीष की कहानी से पता चलता है कि कॉर्पोरेट दुनिया में भरोसा और मदद करने के बावजूद भी सत्ता संघर्ष और विश्वासघात हो सकता है, जो इंसानी स्वभाव का हिस्सा है।

मैक्यावेली की किताब 'द प्रिंस' क्यों महत्वपूर्ण है?

'द प्रिंस' सत्ता के खेल और इंसानी स्वभाव की सच्चाइयों को उजागर करती है, जो बताती है कि सत्ता में टिकने के लिए नैतिकता से ज्यादा रणनीति और चालाकी जरूरी है।

वीडियो में दुनिया को किस तरह का सिस्टम बताया गया है?

वीडियो में दुनिया को एक रूथलेस सिस्टम बताया गया है जो मोरालिटी नहीं बल्कि पावर और एवोल्यूशन की भाषा समझता है, जहां केवल मजबूत ही जीवित रहता है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:06
Speaker A
अभी कुछ ही दिन पहले की बात है। शाम के वक्त मेरा पड़ोसी मनीष, जो एक बहुत बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है, एक 27 साल का वेल एजुकेटेड, ढंग का पढ़ा लिखा बंदा, मुझे ऑफिस के बाद मार्केट में मिलता है।
00:21
Speaker A
शुरू में तो हमारी नॉर्मल हाय हेलो हुई। थोड़ी बहुत यहां वहां की बातें चलनी शुरू हुई। लेकिन फिर मैंने नोटिस किया कि वो थोड़ा परेशान दिख रहा था। जो इंसान हमेशा मुस्कुराता रहता था, आज बिल्कुल टूटा हुआ लग रहा था। यह देखकर मैंने उससे
00:36
Speaker A
पूछ लिया, क्या हुआ भाई? बड़े परेशान लग रहे हो। सब ठीक-ठाक? उसने एक लंबी सांस ली, थोड़ा हिचकिचाया और फिर बोला, यार समझ नहीं आ रहा किस पर भरोसा करो। कल तक जो बंदा मेरे नीचे, मेरे अंडर काम करता था, आज
00:52
Speaker A
वो मेरा बॉस बनकर बैठ गया है। मैंने पूछा, क्यों ऐसा कैसे हो गया? और फिर मनीष ने इसके जवाब में मुझे जो कहानी सुनाई, उसने मुझे सिर्फ कॉर्पोरेट वर्ल्ड के बारे में ही नहीं बल्कि इंसानी स्वभाव के बारे में भी सोचने पर मजबूर कर
01:06
Speaker A
दिया। खैर, मनीष ने बताया कि वह एक शाम ऑफिस के कॉरिडोर से गुजर रहा था और तभी अचानक उसके कान में एक जानी-पहचानी आवाज पड़ती है। उसके कदम वहीं रुक जाते हैं। वो मुड़कर देखता है कि ग्लास कैबिन के
01:21
Speaker A
अंदर जो इंसान कल तक उसका जूनियर था, जिसे धंधे की बेसिक चीजें तक ढंग से नहीं आती थीं, जिसे हर छोटी फाइल बनाने के लिए मनीष की जरूरत पड़ती थी, आज वही
01:33
Speaker A
इंसान बंद कैबिन में बॉस के सामने बैठकर मनीष के ही खिलाफ जहर उगल रहा था। वो मनीष की बुराई कर रहा था। उसने बताया कि जब उसका जूनियर उसकी बुराई कर रहा था, तभी अचानक उसकी नजर मनीष
01:48
Speaker A
पर पड़ती है और मनीष की नजर उस पर। लेकिन मनीष ने
02:01
Speaker A
देखा कि उस जूनियर की आंखों में रत्ती भर भी शर्म नहीं थी। उल्टा वो मनीष को देखकर एक शातिर मुस्कान
02:17
Speaker A
देता है। मनीष ने बताया कि उस वक्त उसका दिमाग सुन्न हो गया। क्योंकि उस लड़के को सिखाने के लिए
02:31
Speaker A
उसने अपनी नौकरी पर रिस्क लिया था। अपने खुद के टारगेट्स और हेक्टिक वर्किंग आवर्स के बीच से बड़ी मुश्किल से थोड़ा-थोड़ा टाइम निकालकर मनीष ने उसे
02:47
Speaker A
हर वो राज सिखाया था जो उसने खुद सालों की मेहनत से सीखा था। मनीष ने सोचा था जूनियर है।
03:04
Speaker A
अभी नया-नया जॉइन हुआ है। मदद करनी चाहिए। भला हो जाएगा इसका। और फिर अगले ही हफ्ते ऑफिस में एक मेल आता है। पता चलता है कि जिस प्रमोशन और जिस पोस्ट पर मनीष का हक था, जिस गद्दी पर मनीष को बैठना चाहिए था,
03:19
Speaker A
आज वही पोस्ट उसके जूनियर को मिल गई और मनीष वहीं का वहीं रह गया। वो इंसान जो कल तक एक जूनियर था, आज वही इंसान मनीष की पीठ पर पैर रखकर उसका बॉस बन बैठा था। कहानी खत्म करने के बाद उसने मेरी तरफ
03:34
Speaker A
देखा और सिर्फ एक बात कही। यार मैं समझ ही नहीं पाया कि गलती
03:51
Speaker A
कहां हुई। अब दोस्त वही सवाल मैं तुमसे पूछता हूं। आखिर यहां गलती किसकी थी? मनीष की या फिर उस जूनियर की? जिसने मनीष को सीढ़ी बनाया और
04:08
Speaker A
उसकी पीठ पर पैर रखकर आगे निकल गया। जरा ईमानदारी से सोचना इस बात को। और हां दोस्त जवाब
04:23
Speaker A
देने की बिल्कुल भी जल्दी मत करना। क्योंकि शायद इस सवाल का जवाब ही हमारी पूरी सोच बदल सकता है। अब
04:37
Speaker A
दोस्त अगर तुम्हारा जवाब है कि गलती उस जूनियर की थी तो मैं तुम्हें अभी नहीं रोकूंगा क्योंकि पहली बार यह कहानी सुनने के बाद मेरा जवाब भी बिल्कुल यही था। मुझे भी यह लगा था कि वो लड़का धोखेबाज था। नमक
04:55
Speaker A
हराम था। और मनीष तो बस एक
05:12
Speaker A
अच्छा इंसान था जिसके साथ गलत हो गया। और फिर उस रात घर आकर मैं इस पूरी घटना के बारे में बार-बार सोचता रहा। लेकिन एक सवाल बार-बार मेरे दिमाग में आए जा रहा था
05:27
Speaker A
कि अगर उस जूनियर की जगह कोई दूसरा
05:44
Speaker A
इंसान होता तो क्या नतीजा अलग होता या फिर किसी ना किसी दिन यह होना ही था। यहीं से मुझे एहसास हुआ
06:04
Speaker A
कि शायद हम सवाल ही गलत पूछ रहे हैं। सवाल यह नहीं
06:20
Speaker A
है कि उस लड़के ने गलत किया या सही। असली सवाल यह है ऐसी परिस्थितियां बार-बार पैदा ही क्यों होती हैं? क्यों हर ऑफिस में, क्यों हर बिजनेस में, क्यों हर राजनीति में, क्यों हर सत्ता के खेल में ऐसी
06:37
Speaker A
कहानियां बार-बार सुनाई देती हैं? क्या यह सिर्फ कुछ बुरे लोगों की वजह से होता है या फिर इंसानी स्वभाव में ही कोई ऐसा नियम छिपा है जिसे ज्यादातर लोग देख ही नहीं पाते। बचपन से
06:52
Speaker A
हमें एक सीधी सी
07:09
Speaker A
कहानी सुनाई जाती है। अच्छे बनो, ईमानदार बनो, सबकी मदद करो और एक दिन दुनिया तुम्हें उसका इनाम जरूर देगी। सुनने में यह बात बहुत खूबसूरत लगती है। लेकिन जब यही सोच असली दुनिया से टकराती है तो बहुत से लोगों के साथ वही होता है जो मनीष के
07:24
Speaker A
साथ हुआ। और फिर शायद तुम्हारे साथ भी कभी ना कभी हुआ होगा। किसी दोस्त ने तुम्हारा इस्तेमाल किया होगा। किसी रिश्तेदार ने तुम्हारी भल मन साहत का फायदा उठाया होगा। ऑफिस में किसी ने तुम्हारे काम का क्रेडिट ले लिया होगा या फिर तुमने किसी ऐसे इंसान
07:40
Speaker A
को आगे निकलते देखा होगा जिसके बारे में तुमने सोचा था यह मुझसे कम काबिल है। फिर भी यह मुझसे आगे कैसे निकल गया? अगर ऐसा कभी तुम्हारे साथ हुआ है तो यह वीडियो सिर्फ एक कहानी नहीं है। यह एक
07:55
Speaker A
इन्वेस्टिगेशन है। आज इस वीडियो में हम किसी इंसान को अच्छा या बुरा साबित नहीं कर रहे बल्कि हम एक पैटर्न को समझ रहे हैं। एक ऐसा पैटर्न जो इतिहास में बार-बार दिखाई देता है। कॉर्पोरेट दुनिया में भी, राजनीति में भी और शायद हमारी अपनी जिंदगी
08:11
Speaker A
में भी। लेकिन उस पैटर्न को समझने से पहले हमें लगभग 500 साल पीछे
08:24
Speaker A
जाना होगा। एक ऐसे आदमी के पास जिसने इंसानी स्वभाव को बाकी लोगों से बिल्कुल अलग नजर से देखा। साल था 1498। आज से लगभग 500 साल पहले यूरोप का एक छोटा
08:37
Speaker A
सा देश इटली। लेकिन उस समय का इटली आज के इटली जैसा बिल्कुल नहीं था। वो एक देश नहीं बल्कि दर्जनों छोटे-छोटे राज्यों में बटा हुआ था। हर राज्य का अपना राजा, अपनी सेना, अपनी राजनीति और अपनी साजिशें। आज
08:55
Speaker A
दोस्ती, कल विश्वासघात,
09:08
Speaker A
आज गठबंधन, कल युद्ध, आज ताज, कल फांसी। उस दौर में सत्ता सिर्फ तलवार
09:21
Speaker A
से नहीं जीती जाती थी, दिमाग से जीती जाती थी। जो इंसान सिर्फ ईमानदारी के भरोसे खेलता था, वह अक्सर इतिहास से मिटा दिया
09:38
Speaker A
जाता था। और जो इंसानी स्वभाव को समझ लेता था, वही खेल के नियम लिखता था। और इसी दौर में एक आदमी था
09:52
Speaker A
जिसका नाम था निकोलो मैक्यावेली। वो कोई राजा नहीं था, ना ही कोई महान योद्धा। वो था एक
10:10
Speaker A
डिप्लोमेट। एक पॉलिटिकल एडवाइजर। एक ऐसा आदमी जिसने अपनी पूरी जिंदगी, राजाओं, सेनापतियों, षड्यंत्रों और सत्ता के खेल
10:25
Speaker A
को बहुत करीब से देखा। उसने देखा कैसे एक राजा अपने सबसे भरोसेमंद मंत्री के हाथों मारा गया। कैसे एक दोस्त सिर्फ
10:43
Speaker A
ताज के लिए दुश्मन बन गया। कैसे लोग चेहरे
11:01
Speaker A
पर मुस्कान रखकर पीठ पीछे साम्राज्य गिरा देते थे। धीरे-धीरे मैक्यावेली को एक बात समझ आने लगी। इतिहास वैसे नहीं चलता जैसा लोगों को किताबों में पढ़ाया जाता है। इतिहास वैसे चलता है जैसा
11:16
Speaker A
इंसान वास्तव में व्यवहार
11:33
Speaker A
करता है। और यहीं से उसने इंसानी स्वभाव को पढ़ना शुरू किया। उसने कोई धार्मिक किताब नहीं लिखी। उसने कोई मोटिवेशनल स्पीच नहीं दी। उसने बस एक सवाल पूछा। अगर दुनिया आदर्श नहीं है तो सत्ता में टिके रहने के
11:49
Speaker A
लिए इंसान को दुनिया जैसी है वैसी समझनी चाहिए या फिर जैसी होनी चाहिए वैसी। और इसी सवाल का जवाब खोजते-खोजते उसने एक किताब लिखी, द प्रिंस। 500 साल बाद भी यह किताब जितनी
12:01
Speaker A
पसंद की जाती है उतनी ही नफरत भी झेलती है। कुछ लोग इसे राजनीति की सबसे ईमानदार
12:17
Speaker A
किताब कहते हैं। कुछ लोग इसे शैतान की हैंडबुक कहते हैं। लेकिन एक बात से दोनों सहमत हैं। मैक्यावेली ने इंसानी स्वभाव का एक ऐसा चेहरा दिखाया जिसे ज्यादातर लोग देखना ही नहीं चाहते।
12:29
Speaker A
और इसी किताब में एक
12:44
Speaker A
ऐसा सिद्धांत छिपा है जो मनीष की कहानी को भी समझाता है और शायद तुम्हारी जिंदगी की कई हारों को भी। लेकिन दोस्त उस सिद्धांत तक पहुंचने से पहले तुम्हें एक बहुत बड़ी गलतफहमी
13:02
Speaker A
छोड़नी होगी क्योंकि असली खेल यहीं से शुरू होता है। तो अब
13:19
Speaker A
यहां सवाल आता है कि वो कौन सी गलतफहमी है जिसे छोड़े बिना
13:36
Speaker A
तुम इस खेल को कभी समझ ही नहीं पाओगे। तो दोस्त जरा ध्यान से
13:50
Speaker A
सुनना। वो गलतफहमी है यह सोचना कि यह दुनिया एक फेयर प्लेग्राउंड है। एक ऐसी जगह जहां न्याय होता है। जहां हर अच्छे काम का नतीजा
14:04
Speaker A
अच्छा ही होता है। लेकिन असलियत यह है कि यह दुनिया कोई फेयर प्लेग्राउंड नहीं है। यह एक
14:21
Speaker A
रूथलेस इकोसिस्टम
14:36
Speaker A
है। एक ऐसा सिस्टम जो मोरालिटी या नैतिकता की भाषा
14:54
Speaker A
नहीं समझता। यह सिस्टम सिर्फ दो ही भाषाएं समझता है। एवोल्यूशन और पावर। जंगल का नियम याद है ना?
15:09
Speaker A
सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट। जंगल में शेर जब
15:24
Speaker A
हिरण का शिकार करता है तो वह बुरा नहीं होता। वो तो बस अपनी प्रजाति को जिंदा रख रहा होता है और हिरण जब मारा जाता है तो वह बेचारा हो सकता है। लेकिन
15:40
Speaker A
प्रकृति उसे कमजोर मानकर सिस्टम से बाहर कर देती है। अब दोस्त तुम कहोगे यार हम इंसान हैं। जानवर नहीं, हम जंगली कानून पर कैसे चल सकते हैं? यहीं पर तुम सबसे बड़ी मात खा जाते हो। देखो इंसानों
15:54
Speaker A
ने जंगल छोड़ दिया, गुफाएं छोड़ दीं। लेकिन लाखों सालों का वो एवोल्यूशनरी
16:08
Speaker A
साइकोलॉजी का सॉफ्टवेयर आज भी हमारे दिमाग के अंदर चल रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इंसानी समाज में शेर और हिरण का रूप बदल
16:22
Speaker A
गया है। आज का जंगल है तुम्हारा ऑफिस, तुम्हारा बिजनेस, पॉलिटिक्स और यह पूरी इकॉनमी। और यहां जो शिकार होता है उसका खून नहीं बहता।
16:37
Speaker A
उसकी गद्
16:51
Speaker A
पूरा इतिहास और यह पूरी दुनिया इसी शातिर नियम पर चलती है। जब दुनिया के सबसे बड़े महान और आइकॉनिक लोगों ने भी [संगीत] अपने फायदे के लिए इसका जब चाहे बिना किसी गिल्ट के रूथलेसली इस्तेमाल किया है। तो
17:05
Speaker A
अब सवाल यह आता है कि तुम किस दुनिया में जी रहे हो दोस्त? क्या तुम अभी भी वही रोना रोते रहोगे कि दुनिया बहुत बुरी है। लोग बड़े मतलबी हैं या फिर इस सिस्टम को हराने के लिए इसके खुद के [संगीत] रूल्स
17:18
Speaker A
सीखोगे। देखो दोस्त अगर तुम इस दलदल से बाहर निकलना चाहते हो। और अगर तुम चाहते हो कि मनीष की तरह कोई तुम्हारी पीठ पर पैर रखकर आगे ना निकल सके तो तुम्हें भी अपने अंदर स्ट्रेटेजिक कमीनापन नाम के इस
17:33
Speaker A
नए ऑपरेटिंग सिस्टम को इंस्टॉल करना ही होगा। क्योंकि सच तो यह है कि बिना इस सिस्टम के तुम इस रूथलेस दुनिया में सिर्फ एक प्यादा बनकर रह जाओगे। लेकिन एक प्लेयर प्लेयर कभी नहीं बन पाओगे। देखो मैं यहां
17:47
Speaker A
तुम्हें कोई घटिया इंसान बनने को नहीं कह रहा हूं जो दोस्तों को धोखा दे। वो सस्ता कमीनापन होता है जो इंसान को बर्बाद करता है। स्ट्रेटेजिक कमीनापन एक ढाल है। एक बुलेट प्रूफ जैकेट है जो तुम्हें इस रूथलेस दुनिया के डार्क रूल्स को समझना
18:03
Speaker A
सिखाती है ताकि तुम्हारा इस्तेमाल कोई ना कर सके। और इस ढाल को मजबूत करने के लिए मैकेवली की उस 500 साल पुरानी किताब द प्रिंस से निकल कर आते हैं 10 सबसे रूथलेसली पावरफुल रूल्स। यह सिर्फ रूल्स नहीं है। यह वो शातिर चाले हैं जो अगर
18:22
Speaker A
तुमने सीख ली तो तुम अपने ऑफिस, अपने बिजनेस और इस पूरे समाज के खेल के सबसे बड़े शिकारी बन जाओगे। यह रूल्स तुम्हें एक असहाय शरीफ इंसान [संगीत] से बदलकर एक ऐसा शातिर खिलाड़ी बना देंगे जिसे हराना नामुमकिन होगा। लेकिन दोस्त जरा रुको। इन
18:40
Speaker A
रूल्स को समझने से पहले तुम्हें अपने उस पुराने वर्जन को जड़ से खत्म करना होगा। जिसके दिमाग में बचपन से मोरल साइंस की उन सस्ती किताबों का कचरा भरा हुआ है जो कहती हैं सबकी मदद करो सबका भला करो ईमानदारी
18:55
Speaker A
और सच्चाई की हमेशा जीत होती है। ईमानदारी से मेहनत करके एक इंसान दुनिया को बदल सकता है और पता नहीं क्या-क्या। देखो दोस्त ये रूल्स ना तो पोलाइट है और ना ही फेयर। लेकिन एक बात पक्की है यह रूल्स काम
19:09
Speaker A
करते हैं। और सबसे बड़ी बात पता है क्या है? अगर तुमने यह 10 रूल्स सिर्फ सुने नहीं बल्कि अपनी जिंदगी में उतार लिए तो तुम वो इंसान तो बिल्कुल नहीं रहोगे जिसने इस वीडियो को प्ले किया था। तुम्हारा
19:21
Speaker A
चेहरा वही रहेगा। तुम्हारा नाम भी वही रहेगा। लेकिन तुम्हारे फैसले, तुम्हारी सोच और इस दुनिया को देखने का नजरिया हमेशा के लिए बदल चुका होगा। और उसके बाद लोग शायद तुम्हें पहले जैसा शरीफ भले ही ना कहें, लेकिन तुम्हारा इस्तेमाल करने की
19:37
Speaker A
हिम्मत करने से पहले 10 बार जरूर सोचेंगे। तो दोस्त क्या तुम तैयार हो उस प्लेबुक को खोलने के लिए? क्या तुम तैयार हो हर एक [संगीत] नियम को ध्यान से समझने के लिए?
19:48
Speaker A
तो जरा ध्यान से सुनना क्योंकि हर नियम के पीछे इंसानी [संगीत] दिमाग की सबसे नंगी साइकोलॉजी छिपी है। तो चलो दोस्त शुरू करते हैं इस प्लेबुक के सबसे [संगीत] पहले पन्ने से रूल नंबर वन से। रूल नंबर वन मास्क योर ट्रू इंटेंशंस।
20:07
Speaker A
[संगीत] यानी अपने असली मकसद को छुपाओ। इस रूल का सीधा सा मतलब है दिखाओ कुछ और करो कुछ। देखो दोस्त अगर तुम किसी मछली को पकड़ना चाहते हो तो तुम पानी में खाली कांटा नहीं फेंकते। तुम उस कांटे के ऊपर एक छोटा सा
20:24
Speaker A
चारा लगाते हो ताकि मछली को सिर्फ खाना दिखे। उसके पीछे छिपा हुआ मौत का कांटा नहीं। इस रूथलेस दुनिया का सबसे पहला और सुनहरा नियम यही है। अपने असली मकसद को हमेशा पर्दे के पीछे रखो। जो इंसान एक
20:40
Speaker A
खुली किताब होता है जिसके दिमाग की हर एक चाल उसके चेहरे पर दिख जाती है। उसे बेवकूफ बनाना इस दुनिया के लिए 2 मिनट का काम है। एक स्ट्रेटेजिक कमीना इंसान कभी अपनी असली चाल सामने वाले को रियलाइज नहीं
20:54
Speaker A
होने देता। जब तक उसका काम पूरा नहीं हो जाता तब तक सामने वाले को लगता है कि सब कुछ उसी के फायदे के लिए हो रहा है। अगर किसी शातिर इंसान से अपना काम निकलवाना है तो उसके सामने थोड़ा बेवकूफ या सीधा बन
21:08
Speaker A
जाओ। उसके सामने अपनी इंटेलिजेंस का ढिंढोरा मत पीटो। जब तुम सामने वाले के सामने हंबल या थोड़े मासूम बनते हो तो सामने वाली की ईगो आसमान पर चली जाती है। वो रिलैक्स हो जाता है। उसका गार्ड ड्रॉप हो जाता है। उसे लगता है कि तुम तो उसके
21:24
Speaker A
सामने [संगीत] कुछ भी नहीं हो और इसी झूठे नैरेटिव में उलझकर वो दुश्मन से दोस्त बनने का नाटक करने लगते हैं। और जैसे ही उसका गार्ड ड्रॉप होता है, तुम चुपचाप [संगीत] बैकग्राउंड से अपना काम निकलवा कर निकल जाते हो। अब इस रूल को समझने के लिए
21:38
Speaker A
इतिहास से इसका एक बहुत ही बेहतरीन एग्जांपल देखते हैं। 19 सेंचुरी के यूरोप में एक बड़ा ही शातिर डिप्लोमेट था टैलेंट। वो हर एक राजा हर एक सरकार के साथ काम [संगीत] कर लेता था और अपना मकसद पूरा
21:51
Speaker A
करवा लेता था। लोग उस पर कभी शक नहीं कर पाते थे क्योंकि वह जब भी किसी बड़े नेता या राजा से मिलता तो सामने वाले की इतनी तारीफ करता। उनके दुख में इतना दुख जताता कि लोगों को लगता यह तो उनका सबसे बड़ा
22:04
Speaker A
शुभचिंतक है। वो सामने वाली की ईगो को इतना बढ़ा देता था कि लोग उसे अपना सबसे लॉयल साथी समझने की गलती कर बैठते थे। लेकिन पर्दे के पीछे पर्दे के पीछे टैलरेंड उन्हीं लोगों के रिसोर्सेज और उन्हीं की गुप्त इंफॉर्मेशन का इस्तेमाल
22:19
Speaker A
करके अपनी पोजीशन को हर दिन मजबूत कर रहा होता था। वो दुश्मन के दिमाग में चल रही कहानी को ऐसे कंट्रोल करता था कि उन्हें लगता था गेम वो खेल रहे हैं। पर असलियत में मोहरा वो खुद बन चुके होते थे। जब तक
22:33
Speaker A
लोगों को समझ आता कि उनका यूज़ हो चुका है तब तक टैलरैंड गेम जीत चुका होता था। लोग पीठ पीछे रोते थे कि साला बड़ा कमीना है। बेवकूफ बना गया। पर सामने बोलने की औकात किसी की नहीं थी। क्योंकि तब तक वो सबसे
22:47
Speaker A
पावरफुल बन चुका होता था। याद रखो दोस्त जब तक तुम्हारे दिमाग के अंदर क्या चल रहा है यह सिर्फ तुम जानते हो तब तक ताकत तुम्हारे हाथ में है और जब तक तुम सामने वाले को वही सोचने पर मजबूर कर सकते हो जो
23:04
Speaker A
तुम चाहते हो तब तक तुम इस खेल के असली राजकुमार हो। अपने प्लांस को इतना सीक्रेट रखो, इतना टाइट कंट्रोल करो कि जब तुम्हारा नतीजा सामने आए तो दुनिया सिर्फ आंख मलती रह जाए। लेकिन दोस्त सिर्फ अपने अंदर के असली मकसद को पर्दे के पीछे
23:23
Speaker A
छुपाना काफी नहीं है। एक बार जब तुम अपने अंदर के गेम को छुपाना सीख जाते हो तो तुम्हारा अगला कदम होता है बाहर की दुनिया के सामने अपनी एक ऐसी ढाल तैयार करना जिसे देखकर दुश्मन कभी तुम्हारी असली ताकत का
23:39
Speaker A
अंदाजा ना लगा सके। क्योंकि इस रूथलेस जंगल में तुम्हारी असली पहचान से ज्यादा मायने रखती है तुम्हारी वो पहचान [संगीत] जो तुम लोगों को दिखाना चाहते हो। और यहीं से आता है इस खेल का अगला नियम। तो चलो
23:55
Speaker A
दोस्त आगे बढ़ते हैं और प्लेबुक का दूसरा सबसे धारदार [संगीत] पन्ना खोलते हैं। रूल नंबर दो कंट्रोल योर पब्लिक इमेज। यानी अपनी पब्लिक इमेज के डायरेक्टर खुद बनो। देखो दोस्त इस दुनिया का एक बहुत ही अजीब नियम है और शायद यही इस खेल का सबसे
24:16
Speaker A
बड़ा सच भी है। लोग तुम्हें वैसे नहीं देखते जैसे तुम सच [संगीत] में हो। वो तुम्हें वैसा देखते हैं जैसा तुम उन्हें दिखाते हो। अब एक शरीफ और सीधा इंसान गलती क्या करता है? वो सोचता है कि जैसे वह घर
24:30
Speaker A
पर है जैसे वह अपने दोस्तों [संगीत] के साथ है। वैसे ही उसे ऑफिस में या बाहर की दुनिया में भी रहना चाहिए। वो अपनी कमजोरियां, अपने डर और अपना भोलापन सबके सामने खोल कर रख देता है। उसे लगता है कि
24:44
Speaker A
लोग उसे जेन्युइन समझेंगे। लेकिन इस रूथलेस जंगल में [संगीत] अगर तुम्हारी इमेज जरूरत से ज्यादा पोलाइट, हेल्पफुल और ऑलवेज अवेलेबल बंदे की बन गई तो लोग तुमको एक अच्छा इंसान नहीं बल्कि एक इजी टारगेट समझने लगते हैं। लोग तुमको काम पकड़ा कर
25:02
Speaker A
चले जाएंगे। तुम्हारा क्रेडिट लूट लेंगे और तुमको नाइस गाय का ठप्पा लगाकर वहीं छोड़ देंगे जहां तुम हो। मैक्यावली ने इस पर एक बहुत ही कड़वी बात कही थी। एक राजा के लिए यह जरूरी नहीं [संगीत] कि उसके
25:15
Speaker A
अंदर सारी अच्छाइयां हो। लेकिन यह बहुत जरूरी है कि दुनिया के सामने वो उन अच्छाइयों का दिखावा इतने बेहतरीन ढंग से करें कि सबको उस पर यकीन हो जाए। पॉलिटिक्स हो, बिजनेस हो या कॉर्पोरेट ऑफिस। तुम्हारी पब्लिक इमेज तुम्हारा सबसे
25:31
Speaker A
बड़ा हथियार है। अगर तुमने अपनी इमेज को खुद कंट्रोल नहीं किया तो तुम्हारे दुश्मन और तुम्हारे कंपिटिटर्स तुम्हारी एक घटिया इमेज मार्केट में बना देंगे। अब देखो दोस्त इस रूल को समझने के लिए जरा हमारे इंडियन कॉर्पोरेट ऑफिस के सबसे बड़े खेल
25:48
Speaker A
प्रोजेक्ट अप्रेजल्स और प्रमोशन की जंग को जरा ध्यान से देखते हैं। अब मान लो तुम्हारे ऑफिस में एक बहुत बड़ा इंटरनेशनल क्लाइंट या फिर एक नया प्रोजेक्ट आने वाला है जिस पर सबकी नजर है क्योंकि उससे प्रमोशन मिलना तय है। ऑफिस के बाकी लोग हर
26:06
Speaker A
वक्त मैनेजर के आगे पीछे घूम रहे हैं। बटरिंग कर रहे हैं और चिल्ला-चिल्ला के बोल रहे हैं सर यह प्रोजेक्ट तो मैं ही [संगीत] करूंगा। उन्होंने अपनी इमेज एक अग्रेसिव गोगेटर की बनाई हुई है। लेकिन अब यहां एक स्ट्रेटेजिक [संगीत] कमीना अपनी
26:20
Speaker A
पब्लिक इमेज से एक बिल्कुल अलग खेल खेलेगा। वो शोर नहीं मचाएगा। वो मैनेजर के कैबिन में चुपचाप जाएगा और बहुत ही हम्ल ठंडा और प्रोफेशनल चेहरा लेकर कहेगा सर बाकी लोग इस प्रोजेक्ट के लिए बहुत एक्साइटेड है और वो आगे रहते हैं। आप
26:38
Speaker A
उन्हें ही लीड दे दीजिए तब तक बैक एंड पर जो सबसे मुश्किल क्रिटिकल और बोरिंग टेक्निकल कंट्रोल्स हैं वो [संगीत] मैं चुपचाप पीछे से संभाल लेता हूं ताकि कंपनी का प्रोजेक्ट फेल ना हो। मैनेजर के दिमाग में तुम्हारी पब्लिक इमेज क्या बनी? एक
26:52
Speaker A
एकदम डिपेंडेबल, महान और ईगोलेस टीम प्लेयर की जो कंपनी के हित के लिए अपनी ईगो साइड में रख देता है। मैनेजर पूरे प्रोजेक्ट की चाबी और सारे क्रिटिकल बैकअप कंट्रोल्स तुम्हारे हाथ में दे देगा और तुम पर अंधा विश्वास करने लगेगा। तुमने
27:09
Speaker A
अपनी इमेज [संगीत] को ऐसी ढाल बनाया कि दुश्मनों को लगा तुम उनके रास्ते से हट गए हो। इसलिए उनका गार्ड एकदम ड्रॉप हो गया। लेकिन अब आता है असली क्लाइमेक्स। जब प्रोजेक्ट फाइनल स्टेज पर पहुंचता है और क्लाइंट के सामने प्रेजेंटेशन होनी होती
27:24
Speaker A
है तब उन बटरिंग करने वाले अग्रेसिव भेड़ियों का डिब्बा गुल हो [संगीत] जाता है क्योंकि उन्हें बैक एंड के असली कंट्रोल्स और प्रॉब्लम सॉल्विंग का पी भी नहीं पता होता। उस क्रूशियल हाईस्ट मीटिंग में तुम अचानक पीछे से निकलते हो। अपनी हंबल इमेज
27:39
Speaker A
को साइड में करके तुम शेर की तरह आगे आते हो और ऐसी रूथलेस फ्लोलेस डिलीवरी देते हो कि क्लाइंट सिर्फ तुमसे इंप्रेस होता है। मैनेजर के सामने एक झटके में तुम्हारी इमेज बदल जाती है कि इस पूरी कंपनी को
27:53
Speaker A
डूबने से बचाने वाला असली हीरो तुम हो। बाकी के बटरिंग करने वाले छोटे खिलाड़ी देखते रह जाते हैं। जब तक उन्हें समझ आता है कि उनका गार्ड ड्रॉप करके तुमने उनके पैरों के नीचे से जमीन खींच ली है तब तक
28:05
Speaker A
प्रमोशन का लेटर तुम्हारे हाथ में होता है। अब यहां लोग तुम्हारी पीठ पीछे कहेंगे अरे यह तो बड़ा चालू निकला। यह तो सामने कुछ और अंदर कुछ और निकला। एड़ा बनके पेड़ा खा गया यह तो। और पता नहीं
28:18
Speaker A
क्या-क्या है। लेकिन मैनेजर और क्लाइंट के सामने तुम्हारी इज्जत लोहे जैसी मजबूत हो चुकी होगी। याद रखो दोस्त अपनी इमेज को कभी हल्के में मत छोड़ो। दुनिया को सिर्फ वही पन्ना दिखाओ जो तुम दिखाना चाहते हो। पूरी किताब खोल दोगे तो लोग रद्दी के भाव
28:34
Speaker A
बेच देंगे। लेकिन दोस्त यह खेल यहां खत्म नहीं होता। एक बार जब तुम अपनी पब्लिक इमेज को कंट्रोल करके सामने वाले का गार्ड ड्रॉप कर देते हो तो तुम्हारा अगला कदम होता है उनके दिमाग पर पूरा कब्जा करना।
28:48
Speaker A
एक कमजोर और शरीफ इंसान लोगों पर अपनी मर्जी थोपने की कोशिश करता है। जिससे लोग उसके खिलाफ हो जाते हैं। लेकिन एक स्ट्रेटेजिक कमीना लोगों को उनकी आजादी का भ्रम देता है। वो उन्हें ऐसी जगह लाकर खड़ा कर देता है जहां सामने वाले को लगता
29:04
Speaker A
है कि फैसला उसका अपना है। पर असलियत में उसका हर एक कदम पहले से तुमने प्लान किया होता है। और इसी शानदार दिमागी चाल को कहते हैं हमारा अगला नियम रूल नंबर थ्री। रूल नंबर तीन क्रिएट द इल्ल्यूजन ऑफ चॉइस।
29:23
Speaker A
इस दुनिया के जितने भी बड़े बिलियनर्स, महान लीडर्स और सदियों से चले आ रहे शातिर पॉलिटिशियंस हैं ना इन सब ने चाहे खुलकर माना हो या नहीं। लेकिन अपनी रोजमर्राह की जिंदगी में इस रूल का इस्तेमाल बार-बार किया है [संगीत] क्योंकि उन्हें अच्छे से
29:40
Speaker A
पता है कि अगर तुम किसी पर अपनी मर्जी थोपोगे या सीधा आर्डर दोगे तो सामने वाला बगावत करेगा या फिर डिफेंसिव हो जाएगा। इसीलिए यह लोग सामने वाले को कंट्रोल करने के लिए उन्हें चॉइससेस देते हैं। लेकिन उन
29:56
Speaker A
सारी चॉइससेस का एंड रिजल्ट वही होता है जो यह शातिर लोग पहले से चाहते हैं। इस रूल कीेंस यही है। यह सामने वाले को उसकी आजादी का भ्रम देता है। जबकि असल में वो उनकी चलाई हुई चाल का एक मोहरा बन चुका
30:11
Speaker A
होता है। एक स्ट्रेटेजिक कमीना कभी किसी से भीख नहीं मांगता। वह बस ऐसा माहौल बना देता है जहां सामने वाले को लगता है कि फैसला उसने अपनी मर्जी से लिया है। लेकिन अंजाम हमेशा वही होता है जो यह
30:24
Speaker A
स्ट्रेटेजिक कमीना पहले से चाहता था। इसका सबसे वेल डॉक्यूमेंटेड और बेहतरीन एग्जांपल मॉडर्न मार्केटिंग में देखा जाता है। जिसे बड़े-बड़े बिजनेस हाउसेस आपको लूटने के लिए रोज यूज़ करते हैं। द इकोनॉमिस्ट मैगजीन ने एक बार अपने सब्सक्रिप्शन प्लांस निकाले जो कुछ इस तरह
30:42
Speaker A
थे। पहला वेब सब्सक्रिप्शन यानी ऑनलाइन सिर्फ $59 में। दूसरा प्रिंट सब्सक्रिप्शन यानी सिर्फ फिजिकल मैगजीन $125 में। और तीसरा प्रिंट प्लस वेब सब्सक्रिप्शन यानी दोनों साथ में फिर भी $125 में। अब ध्यान से देखो। जब लोगों के सामने यह चॉइससेस
31:03
Speaker A
रखी गई तो उन्हें लगा कि दूसरा ऑप्शन यानी $125 में सिर्फ प्रिंट तो बिल्कुल बेकार है। और तीसरा ऑप्शन यानी $125 में प्रिंट और वेब दोनों एकदम जैकपॉट है। नतीजा 84% लोगों ने तीसरा ऑप्शन चुना। लेकिन यहां पर
31:21
Speaker A
असली खेल पता है क्या था? वो जो दूसरा बेकार ऑप्शन था ना वो सिर्फ एक डीकॉय यानी चारा था। जिसे एक शातिर [संगीत] इंसान ने वहां सिर्फ इसलिए बिठाया था ताकि आप तीसरे ऑप्शन को चुनो और उन्हें सबसे ज्यादा पैसा
31:35
Speaker A
यानी [संगीत] $125 देकर आओ। अगर वह दूसरा ऑप्शन हटा देते और सिर्फ $59 का वेब और [संगीत] $125 का कॉम्बो रखते तो मैक्सिमम लोग सस्ता वाला यानी $59 चुनते। उस एक बेकार चॉइस ने लोगों के दिमाग में इल्लुजन
31:52
Speaker A
पैदा कर दिया और उन्हें लगने लगा कि फायदा उनका ही हो रहा है। जबकि सच यह था कि [संगीत] उनसे वही फैसला करवाया जा रहा था जो कंपनी पहले से चाहती थी और उनकी जेब से [संगीत] भी वही पैसा निकलवाया जा रहा था
32:04
Speaker A
जो कंपनी ने पहले से प्लान किया हुआ था। अब दोस्त अगर तुमको लगता है कि यह तो सिर्फ मार्केटिंग तक मौजूद है तो जरा इतिहास के पन्नों को थोड़ा पीछे पलट कर देख लो। 19 सेंचुरी के फ्रांस में जब
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Speaker A
नेपोलियन बोनापार्ट को पूरी सत्ता अपने हाथ में लेनी थी। जब उसे लीगली फ्रांस का एब्सोल्यूट डिक्टेटर बनना था तो उसने जनता पर कोई हथौड़ा नहीं चलाया। उसने जनता के सामने एक नया कॉन्स्टिट्यूशन रखा और पूरे देश में वोटिंग करवाई। उसने जनता के सामने
32:36
Speaker A
दो चॉइससेस रखी। पहली चॉइस आप इस नए नियम को एक्सेप्ट करो जिसमें सारी पावर नेपोलियन के हाथ में जा रही थी। दूसरी चॉइस या फिर इसे रिजेक्ट कर दो [संगीत] और वापस उसी कत्लेआम, दंगों और अराजकता में जियो जहां पूरा देश तबाह हो रहा था। जनता
32:53
Speaker A
को लगा कि उन्हें वोट करने [संगीत] का यानी अपनी मर्जी से चुनने का बहुत बड़ा अधिकार मिला है। वह सब खुश थे कि हम आजाद हैं। लेकिन उन्हें क्या पता था कि स्क्रिप्ट पहले से ही एक स्ट्रेटेजिक कमीना लिख चुका था। दोनों ही रास्तों में
33:08
Speaker A
जीत सिर्फ नेपोलियन की थी। नतीजा यह हुआ कि फ्रांस की 99% जनता ने डर के मारे खुद अपने हाथों से नेपोलियन को अपना डिक्टेटर चुन लिया। उन्हें लग रहा था कि जीत उनकी हुई है। पर सच तो यह था कि उन्हें वही
33:22
Speaker A
चुनने पर मजबूर किया गया जो नेपोलियन पहले से चाहता था। एक स्ट्रेटेजिक कमीना रोजमर्रा की जिंदगी में भी यही करता है। अगर तुमको किसी से कोई काम निकलवाना है या कोई डील क्रैक करनी है [संगीत] तो उनके सामने हां या ना का ऑप्शन मत रखो। उन्हें
33:36
Speaker A
दो ऐसे ऑप्शंस दो जिनमें दोनों में आपका ही फायदा हो। मसलन अगर तुमको किसी से मिलने जाना है और तुम चाहते हो कि वह मना ना करें तो यह मत पूछो कि क्या हम कल मिले? यहां उसके पास ना कहने का ऑप्शन है।
33:50
Speaker A
इसकी जगह पूछो हम कल सुबह 11:00 बजे मिले या परसों शाम को 4:00 बजे। अब तुमने उसके दिमाग को दो चॉइससेस में बांध दिया है। अब वो इन दोनों में से जो भी चुनेगा जीत तुम्हारी ही होगी। लेकिन दोस्त यहां पर एक
34:04
Speaker A
बहुत छोटी सी और सबसे जरूरी टिप है जिसे लोग अक्सर भूल जाते हैं और उनका पूरा गेम उल्टा-पुल्टा हो जाता है। इस रूल को प्रॉपर्ली अप्लाई करने के लिए तुम्हें उन ऑप्शंस को ऐसे डिजाइन करना होगा जिनमें [संगीत] सामने वाले को अपना फायदा साफ-साफ
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Speaker A
दिखे। अगर तुमने दोनों ऑप्शंस ऐसे रख दिए जहां सामने वाले का सिर्फ नुकसान हो रहा है तो उसका दिमाग तुरंत अलर्ट हो जाएगा। वो तुम्हारा जाल समझ जाएगा और वहां से भाग निकलेगा। अनाटमी बहुत सिंपल है। एक ऑप्शन
34:32
Speaker A
में सामने [संगीत] वाले का फायदा यानी ग्रीड होना चाहिए और दूसरे ऑप्शन में किसी बड़े नुकसान से बचने का रास्ता यानी फियर होना चाहिए। द इकोनॉमिस्ट के एग्जांपल [संगीत] में लोगों को तीसरे ऑप्शन में अपना फायदा यानी ग्रीड दिखा। और नेपोलियन
34:45
Speaker A
के एग्जांपल में जनता को पहले ऑप्शन में दंगों से बचने का रास्ता यानी फियर दिखा। जब तक तुम सामने वाले के दिमाग को [संगीत] उसके फायदे का चश्मा नहीं पहनाओगे तब तक यह रूल काम नहीं करेगा। एक शातिर इंसान
34:59
Speaker A
हमेशा जाल के ऊपर इतना मीठा चारा लगाता है कि सामने वाले की पूरी नजर सिर्फ उस फायदे पर टिकी रहे और उसके नीचे छिपी हुई असली चाल उन्हें कभी दिखे ही नहीं। सामने वाले को लगने दो कि कमांडर वो है पर स्क्रिप्ट
35:13
Speaker A
हमेशा तुम्हारे हाथ में होनी चाहिए। अब दोस्त जब इस वीडियो में तुम यहां तक आ गए हो तो अब जो बात मैं कहने वाला हूं उसे जरा ध्यान से सुनना। देखो दोस्त स्ट्रेटेजिक कमीनापन का असली खेल तो अभी
35:28
Speaker A
बस शुरू हुआ है। यह तो सिर्फ इस शातिर प्लेबुक के पहले तीन पन्ने थे। इसके सबसे डेंजरस, सबसे रूथलेस और सबसे गेम चेंजिंग रूल्स तो अभी बाकी हैं। और सच कहूं उन सबको इसी वीडियो में समझाना उन रूल्स के
35:45
Speaker A
साथ नाइंसाफी होगी। क्योंकि हर एक रूल इतना गहरा है कि उसे सिर्फ 2 से 3 मिनट में समझा देना नामुमकिन है। इसलिए अगले पार्ट में हम स्ट्रेटेजिक कमीनापन के उन [संगीत] बाकी रूल्स को डिकोड करेंगे जो तुम्हारी सोच को हमेशा के लिए बदल देंगे।
36:02
Speaker A
हम बात करेंगे लेवरेज, रिस्पेक्ट, स्केसिटी, टाइम और आइडेंटिटी के उन ब्रूटल प्रिंसिपल्स की जो एक शरीफ और सीधे इंसान को ऐसी ताकतवर शख्सियत में बदल देते हैं जिससे टकराने से [संगीत] पहले दुश्मन भी 100 बार सोचता है। हम जानेंगे कि इस
36:20
Speaker A
दुनिया के सबसे बड़े स्ट्रैटेजिक कमीने लोग कैसे बिना खुद ज्यादा मेहनत किए दूसरों की ताकत, उनकी साइकोलॉजी और उनकी [संगीत] कमजोरियों को लेवरेज करके उनसे अपना काम निकलवा लेते हैं। कैसे वो लोगों को सालों [संगीत] तक अपने ऊपर डिपेंडेंट
36:36
Speaker A
बनाए रखते हैं? और सबसे जरूरी बात आखिर क्यों तुम्हें भी अपने अंदर के उस [संगीत] पुराने, कमजोर और अप्रूवल के भूखे इंसान को हमेशा के लिए मारना होगा। और दुनिया के दिए हुए विलेन के टैग को बिना किसी गिल्ट
36:51
Speaker A
के एक्सेप्ट करना होगा। क्योंकि कभी-कभी [संगीत] दुनिया जिस इंसान को कमीना कहती है, वही इंसान असली गेम को [संगीत] सबसे अच्छे तरीके से समझ चुका होता है। और दोस्त स्ट्रेटेजिक कमीनापन मास्टर क्लास का पार्ट टू पहले से ही तैयार है और बहुत
37:08
Speaker A
जल्द तुम्हारी स्क्रीन [संगीत] पर आने वाला है। अगर तुम नहीं चाहते कि इस प्लेबुक का एक भी डेंजरस रूल तुमसे मिस हो जाए [संगीत] तो अभी के अभी नीचे सब्सक्राइब का बटन दबा दो और बेल आइकन को भी ऑन कर लो क्योंकि अगला पार्ट सिर्फ इस
37:22
Speaker A
प्लेबुक को कंप्लीट ही नहीं करेगा बल्कि तुम्हारे दिमाग का पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम ही बदल देगा और हां दोस्त अगर आज की इस वीडियो ने तुम्हारे दिमाग के ताले खोले हैं तुम्हारी सालों पुरानी [संगीत] कंडीशनिंग को चैलेंज किया है तो इस वीडियो
37:36
Speaker A
पर एक लाइक तो बनता है और इसे उन लोगों के साथ जरूर शेयर करो जिन्हें तुम इस रूथलेस दुनिया में हमेशा [संगीत] इस्तेमाल होते हुए नहीं देखना चाहते और अगर तुम बाकी लोगों से दो कदम नहीं बल्कि 10 कदम आगे
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Speaker A
[संगीत] चलना चाहते हो। और अगर तुम इस हिडन नॉलेज को सिर्फ ऊपर ऊपर से नहीं बल्कि अपनी लाइफ में इंप्लीमेंट करना चाहते हो और मेरे साथ डायरेक्टली जुड़कर इन डार्क और डीप कांसेप्ट्स को और गहराई से समझना चाहते हो जो हम पब्लिकली शेयर
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Speaker A
नहीं कर सकते तो नीचे जॉइ का बटन है। आज ही ज्वाइन बटन पर क्लिक करके हमारी चैनल मेंबरशिप को ज्वाइन कर लो और उस एलट कम्युनिटी का हिस्सा बन जाओ जहां तुम्हें ऐसी ही हार्ड कोर साइकोलॉजिकल स्ट्रेटजीस, एक्सक्लूसिव डीप ड्राइव्स और बिहाइंड द
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Speaker A
सीन्स इनसाइट्स सबसे पहले मिलेंगे। और अब तुम्हारे लिए एक छोटा सा मिशन। अगर तुम सच में चाहते हो कि इस मास्टर क्लास का पार्ट टू सबसे पहले आए तो कमेंट सेक्शन में सिर्फ एक ही चीज लिखो। पार्ट टू। मैं
38:33
Speaker A
देखना चाहता हूं कि कितने [संगीत] लोग इस प्लेबुक का अगला पन्ना खोलने के लिए वाकई तैयार हैं। और जाते-जाते एक बात हमेशा याद रखना दोस्त सीधे पेड़ सबसे पहले काटे जाते हैं। इसलिए सिर्फ अच्छा इंसान बनने की कोशिश मत करो। इतने समझदार बनो कि कोई
38:51
Speaker A
तुम्हारा इस्तेमाल ना कर सके। खिलाड़ी बनना है तो स्ट्रेटेजिक कमीना बनना ही [संगीत] पड़ेगा। तो चलो दोस्त मिलते हैं इस वीडियो के पार्ट टू में। तब तक के लिए सीखते रहो और आगे बढ़ते रहो।
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