यह वीडियो 9 मिनट में आत्मविश्वास बढ़ाने के साइकोलॉजिकल और न्यूरोसाइंटिफिक तरीकों को समझाता है।
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Key Takeaways
- आत्मविश्वास एक भावना नहीं, बल्कि एक व्यवहार और आदत है।
- शारीरिक भाषा और सही पोश्चर से मानसिक स्थिति सुधरती है।
- बार-बार नकारात्मक सोचने से डर बढ़ता है, इसलिए सकारात्मक रिहर्सल जरूरी है।
- डर का सामना करने से ब्रेन उसे खतरा नहीं समझता और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- छोटे कदमों से लगातार प्रयास करना आत्मविश्वास की कुंजी है।
What the video covers
- आत्मविश्वास एक व्यक्तित्व नहीं बल्कि ट्रेनिंग का परिणाम है।
- कॉन्फिडेंस महसूस करने से पहले एक्शन लेना जरूरी है, क्योंकि एक्शन से ही कॉन्फिडेंस आता है।
- शारीरिक भाषा और पोश्चर हमारे हार्मोनल और मानसिक स्टेट को प्रभावित करते हैं।
- ब्रेन एक प्रेडिक्शन मशीन है जो बार-बार की गई नकारात्मक कल्पनाओं को सच मान लेता है।
- बेहतर रिहर्सल और एक्सपोजर से डर और एंग्जायटी को कम किया जा सकता है।
- 90 सेकंड तक की इमोशनल प्रतिक्रिया होती है, जिसे बढ़ावा देना या कम करना हमारे कंट्रोल में है।
- छोटे-छोटे कमिटमेंट्स और लगातार प्रयास से आत्मविश्वास बढ़ता है।
- अपने आप से किए गए वादों को पूरा करना आत्मविश्वास का मूल मंत्र है।
- डर को टालने की बजाय उसका सामना करना जरूरी है, जिससे ब्रेन सीखता है कि खतरा नहीं है।
- व्यक्तिगत अनुभव और स्टोरी के माध्यम से आत्मविश्वास की यात्रा को समझाया गया है।
Chapters
- 00:00परिचय और आत्मविश्वास की परिभाषा
- 00:49व्यक्तिगत कहानी और आत्मविश्वास की कमी
- 01:46कॉन्फिडेंस का विज्ञान और व्यवहार
- 03:37शारीरिक भाषा और पोश्चर का प्रभाव
- 04:30ब्रेन की प्रतिक्रिया और नकारात्मक सोच
- 06:14बेहतर रिहर्सल और एक्सपोजर थेरेपी
- 07:32डर का सामना और मानसिक तैयारी
- 09:22छोटे कदम और निरंतर प्रयास से आत्मविश्वास
- 10:12अंतिम प्रेरणा और अभ्यास के लिए सुझाव
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Speaker A
ध्यान से देखिए मेरी तरफ और बातों को सुनिए। इफ यू आर इनसिक्योर, इट्स नॉट योर पर्सनालिटी, इट्स योर ट्रेनिंग। ओके? रैप दिस अराउंड योर हेड। और देखो अगर तुम इस वीडियो में 9 मिनट्स तक रुक गए, आई कैन
Speaker A
प्रॉमिस यू कि आपके ब्रेन का जो ऑपरेटिंग सिस्टम है, मैं उसको पूरी तरह चेंज कर दूंगी। एंड नो, नो मोटिवेशन, नो फेक अमेशंस। दिस वन इज प्रोबब्ली बैक बाय साइकोलॉजी। प्रोबब्ली हाउ न्यूरोसाइंस वर्क्स। देखिए मेरे क्लासेस लाखों लोगों
Speaker A
ने देखे हैं। मैंने हजारों बार स्टेज पर लोगों को फेस किया है। डरते हुए भी फेस किया है। कई 100 लोगों को मैंने ट्रेन किया है। एंड टुडे आई वांट टू टॉक अबाउट इट। लेट्स स्टार्ट विद अ स्टोरी। एक लड़की
Speaker A
थी। स्मार्ट, केपेबल, आइडियाज, क्रेजी गुड। दोस्तों के सामने बहुत ही फन, कूल, एक्सट्रोवर्टेड, बट ऑफिस में या कोई भी ऐसी जगह जहां मैटर करता था उसका प्रेजेंस चुप, शाई, फेक पोलाइटनेस। YouTube और Facebook पर घंटों स्क्रोलिंग करती थी। पोस्ट कभी नहीं
Speaker A
करती थी। ओपोरर्चुनिटी को देखती थी। अप्रोच कभी नहीं करती थी। दोस्तों की, घर वालों की, अक्वेइंटेंसेस की बहुत सारी बातें गलत लगती थी। रोती भी थी, फ्रस्ट्रेट हो जाती थी। बट कभी क्वेश्चन नहीं कर सकती थी। और इन सारी चीजों का
Speaker A
रिजल्ट क्या था? सब कुछ ऐसे पाइल अप करता चला गया। लो सेल्फ एस्टीम, जीरो हैप्पीनेस एंड ऑफ कोर्स नो आईडिया कि लाइफ में चल क्या रहा है। अपने आप को ही डिसलाइक करने लग गई थी। दूसरों से तो ऑफ
Speaker A
कोर्स इरिटेशन होने लग गई थी। पता है लड़की कौन थी? में 2014 में एग्जजेक्टली ऐसी थी। मैं सिंपल सा क्वेश्चन है। व्हाई कॉन्फिडेंस नहीं था। यह कहानी काफी फिमिलियर लगी होगी भी। द ब्रूटल ट्रुथ, कॉन्फिडेंस कोई ऐसा ऑब्जेक्ट नहीं है जो तुम कहते हो ना
Speaker A
कि मेरे पास कॉन्फिडेंस नहीं है। सब कुछ है बट वो सप्रेस्ड है और आप खुद से अपने आप को दबा रहे हैं। क्योंकि आपको बचपन से सिखाया गया है। बेटा जब कॉन्फिडेंट फील करोगे ना तब अच्छा परफॉर्म करोगे। यह
Speaker A
प्रॉब्लम है। बिकॉज़ इट डजंट वर्क लाइक दिस। इसका बिल्कुल उल्टा है। विलियम जेम्स सर्च करिएगा Google पर इनके बारे में। एंड इन्होंने ऑलमोस्ट शायद 100 साल से भी पहले बोला था। वी डोंट एक्ट कॉन्फिडेंट बिकॉज़ वी फील कॉन्फिडेंट। वी
Speaker A
फील कॉन्फिडेंट बिकॉज़ वी एक्ट कॉन्फिडेंट। मतलब समझ में आया? मतलब यह कि यू हैव बीन वेटिंग फॉर अ फीलिंग दैट ओनली कम्स आफ्टर एक्शन। समझ रहे हो? तुम्हें ऐसा लग रहा है कि पहले कॉन्फिडेंस आ जाएगा फिर तुम एक्शन
Speaker A
करोगे। ऐसा है के मैं आई विल स्टार्ट जिम जब मैं फिट हो जाऊंगी। फुलिश है ना? है भी है भी। एक्चुअली फुलिश है। कॉन्फिडेंस कोई मूड की जैसी चीज नहीं है। यह बेसिकली आपकी मसल मेमोरी है। तुम्हारा ब्रेन तुम्हारी बॉडी
Speaker A
को रीड करता है। पूरे टाइम वो फोकस करता है तुम्हारे ऊपर। क्योंकि तुम्हारा ब्रेन है। तुम्हारा वो जो स्लाउच्ड पोश्चर है, शैलो ब्रीथिंग है, ऐसे हल्का-हल्का ऊपर से सांस आ रही है। कोई डीप ब्रेथ है ही नहीं। आंखें तुम्हारी नीचे हैं।
Speaker A
ब्रेन को क्या समझ में आता है? थ्रेट, खतरा, कुछ दिक्कत चल रही है। हावर्ड यूनिवर्सिटी की बिहेवियरल रिसर्च ने दिखाया कि पोश्चर जो है वो आपके हार्मोनल स्टेट को इन्फ्लुएंस करता है और उसकी वजह से जो एक पर्सव्ड अथॉरिटी होती है, जो तुम्हारा
Speaker A
हॉर्मोन जो है वो अथॉरिटी को महसूस करता है, वो भी इंपैक्ट हो जाएगा क्लियरली। देखिए जब एक डिबेट होती है लेट्स से एग्जैक्ट नंबर्स को लेकर के तो उसका इफेक्ट काफी क्लियर है। बॉडी लैंग्वेज आपके इंटरनल स्टेट को चेंज करती
Speaker A
है। ये तुम अभी ही ट्राई कर लो। अभी तुम पड़े हुए हो तिरछे, मिरर टेढ़े। ठीक से बैठो। आराम से बैठो। स्पाइन स्ट्रेट करो। कॉन्फिडेंटली बैठो। कंधा ऐसे ओपन करके बैठो। तुम्हारा जो नर्वस सिस्टम है ना यह स्टूपिड नहीं है। यह ओबिडिएंट है। मतलब कि
Speaker A
ये क्या बोलते हैं यार उसको? आज्ञाकारी, बातें मानता है। अगर बॉडी वीक सिग्नल भेजती है, ब्रेन वीक स्टेट को एक्टिवेट कर देता है। अभी ट्राई करो। मेरी बात मानो। वाकई ट्राई करो। देखो तुम कैसे बैठे हो?
Speaker A
ऐसे बैठे होगे ना अभी। चेस्ट को ओपन करो। एक गहरी सांस लो। और धीरे से सांस को बाहर छोड़ो। फील करो इसे। यही है ना बायोलॉजी। ये मोटिवेशन नहीं है। तुम सोचते हो कि तुम फ्यूचर से डरते हो कि कल को क्या हो
Speaker A
जाएगा, ऐसा हो जाएगा। अरे गलत है भाई। तुम रेपेटीशन से डरते हो। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी न्यूरो साइंस फ्रॉम स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी शोज़ ब्रेन इज अ प्रेडिक्शन मशीन। ब्रेन प्रिडिक्ट करता है। और किस बेसिस पर वो चीजों को प्रिडिक्ट करता है? तुम किस चीज को रिपीट
Speaker A
कर रहे हो? अगर तुम रोज इमेजिन करते हो, मेरी तबीयत खराब हो जाएगी, मेरे साथ कुछ गलत हो जाएगा। लोग मुझे जज करेंगे। मैं एम्बैरस हो जाऊंगी। आप एक तरीके से फेलियर को प्रैक्टिस कर रहे हैं। कर रहे हैं ना?
Speaker A
मेरा तो यह खराब हो जाएगा, मेरा तो वो खराब हो जाएगा। प्रैक्टिस कर रहे हो। देखिए ओलंपिक एथलीट्स मेंटल रिहर्सल करते हैं और यह फैक्ट है। आप क्या रिहर्सल करते हो? वर्स्ट केस सिनेरियो, सबसे खराब क्या हो सकता है? और फिर बोलते हो कॉन्फिडेंस
Speaker A
ही नहीं आ रहा है। राइट? ऐसे हर वक्त तुम नेगेटिव फीड कर रहे हो और अचानक से सोचते हो कि तुम बस झंडा फहरा दो खड़े होके। डोंट डू दिस। इट्स नॉट गोइंग टू वर्क लाइक दिस। एंड प्लीज रिमेंबर यू डोंट लैक
Speaker A
कॉन्फिडेंस। यू जस्ट लैक बेटर रिहर्सल। बस दो मिनट यार। सिर्फ 2 मिनट रूम में एंटर करते हुए इमेजिन करो। काम कंट्रोल्ड एंड क्लियर वॉइस। इसको प्रैक्टिस करो। जो कुछ भी बोल रहे हो शांत हो के बोलो। ब्रेन तुम्हारे रिहर्सल को
Speaker A
रियल मान लेता है। एंड यू नो व्हाट? कॉन्फिडेंस का एक बहुत सिंपल फार्मूला होता है। एक्सपोज़र। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अकॉर्डिंग, एक्सपोज़र थेरेपी इज द गोल स्टैंडर्ड फॉर एंग्जायटी रिडक्शन। इसका ट्रांसलेशन चाहिए। अ एक्सपोज़र समझते हो ना। खुद को वनरेबल करना, खुद को ओपन
Speaker A
करना। तो तुम अपने आपको जो चीजों से डरते हो ना, ओपन कर दो अपने आपको। डर को महसूस कर लो। डू द स्केरी थिंग। बार-बार कर लो। ब्रेन सीख जाता है कि ओह यह तो मैं सर्वाइव कर गया। इससे तो कुछ भी इतना बुरा
Speaker A
नहीं हुआ। तुम देखा करो यार, तुम स्टेज पर जाने से पहले ऐसेसे कांप रहे होते हो। बट जब तुम 5 मिनट स्टेज पे विदा लेते हो, लोग थोड़ा सा इंटरेक्ट कर लेते हैं तुम्हारे साथ, फिर तुम्हें स्टेज पे मजा आने लगता
Speaker A
है। सो द पॉइंट इज़ अवॉइड मत करो। अवॉयडेंस तुम्हारे ब्रेन को क्या कहता है कि डैमेट यह तो मेरी जिंदगी के लिए खतरनाक हो सकता है। दिस इज़ लाइफ थ्रेटनिंग। हर बार जब तुम कन्वर्सेशन अवॉइड करते हो, तुम अपने फियर
Speaker A
को प्रमोट कर रहे हो। लोग अरे यार सबसे सिंपल एग्जांपल ले लो। लोगों के मन में एक चीज का डर होता है कि मेरी जान चली जाएगी। अपनी जान के लिए तो सब डरते हैं ना। मैं मर जाऊंगा। मुझे कुछ हो जाएगा। और ऐसे डम
Speaker A
लोग होते हैं। किसी की बीमारी कहीं सुन के आ जाएंगे और फिर उसको अपने दिमाग में चलाते रहेंगे। ये तो मुझे भी हो सकता है। ये तो मुझे भी हो सकता है। ये तो मुझे। एंड इट लिटरली वर्क्स लाइक दैट। वो हो भी जाता
Speaker A
है। अच्छा खासा फिट इंसान अपने आप को खत्म कर लेता है। तुम ब्रेन को बोल रहे हो कि यह है मेरे अंदर प्रॉब्लम। तुम्हारा रेपटीशन बहुत ज्यादा खतरनाक, पावरफुल है। भाई लोगों को कुछ अच्छी चीजें इग्नोर करने की आदत है। देखो मैं बताती हूं तुम्हें।
Speaker A
न्यूरोसाइंटिस्ट जेलबॉल टेलर ने एक्सप्लेन किया। एक इमोशनल केमिकल रिएक्शन जो होता है वो लगभग 90 सेकंड तक तुम्हारे दिमाग में रहता है। सिर्फ 90 सेकंड। 90 सेकंड्स स्टेज पर तुम्हारा दिल धड़कता है। हाथ कपकपाएंगे। एंड इफ यू डोंट ऐड स्टोरी। अब
Speaker A
अगर तुम इसमें कुछ और ऐड नहीं करोगे। चिल करोगे थोड़ा सा। इसको मतलब लंबा मत खींचो। बॉडी सेटल कर जाएगी। बट तुम क्या करते हो?
Speaker A
तुम उसको स्टोरी देते रहते हो। सब देख रहे हैं। मैं कैसी लग रही हूं? मैं कैसा लग रहा हूं? और भैया तुम एन्जायटी को रीलोड कर देते हो। अपने आप को और परेशान करते रहते हो। उसको एंगल दे रहे हो बार-बार अलग-अलग।
Speaker A
ये करना आपको बंद करना पड़ेगा। सो द नेक्स्ट टाइम 90 सेकंड्स को शायद तो काउंट कर लो। कोई स्टोरी नहीं। बस तुम 90 तक काउंट करो। लेट केमिकल वेव्स पास। कॉन्फिडेंस एंड इमोशनल स्टैमिना। बराबर चीजें हैं। अल्बर्ट बैंडुरा की रिसर्च जो
Speaker A
उन्होंने सेल्फ एफिकसी के ऊपर की थी। काफी क्लियर बात बताता है कि कॉन्फिडेंस ग्रोस फ्रॉम स्ट्रिस्ट ऑफ एक्सपीरियंसेस। अ बहुत बड़ी-बड़ी विक्ट्रीज नहीं तुम्हें ढूंढनी है। माइक्रोवेव्स रोज एक छोटा सा कमिटमेंट उसको पूरा कर लो। मैं एक पेज पढ़ूंगी किताब का, पढ़ लो। ठीक
Speaker A
है? सिंपल है बट तुम्हें खुशी मिलनी चाहिए। अलार्म अगर तुम भाई तुम कहते हो मैं 6:00 बजे उठूंगा, नहीं उठ पाते हो, तुम अपना अलार्म 8:00 बजे का लगाओ पर उठो उस अलार्म पे। तुम्हें लगता है कि मैं किसी से
Speaker A
नेटवर्किंग करना चाहती हूं, कर नहीं पा रही हूं, एक मैसेज भेज दो। तुम्हें लगता है मेरे को यूट्यूबर बनना है, एक कंटेंट पोस्ट कर दो। कंसिस्टेंट रहो, एव्री कंप्लीटेड प्रॉमिस, दैट कमिटमेंट, दैट इज मोर लाइक क्रिएटिंग दैट आइडेंटिटी
Speaker A
इन योर हेड। यू आर रिपीटिंग इट। कॉन्फिडेंस इज़ व्हाट हैपेंस व्हेन यू स्टॉप ब्रेकिंग योर प्रॉमिसेस टू योरसेल्फ। ठीक है? अभी तुरंत स्टैंड अप, फिक्स योर पोश्चर। आराम से ब्रीथ करो। विजुअलाइज एनी अपकमिंग चैलेंज। राइट वन थिंग यू हैव बीन
Speaker A
अवॉयडिंग। कोई एक चीज जिसको तुम कतरा रही हो, कतरा रहे हो। ठीक है? एंड देन द नेक्स्ट मिनट 5, 4, 3, 2, 1 मूव। दिस इज वन टेक्निक दैट वाज़ एक्चुअली पॉपु
Speaker A
वगैरह भी देखा करिए। टेक दैट फर्स्ट एक्शन। कल करूंगा, परसों करूंगा, 10 मिनट बाद कर लूंगा। नहीं नाउ। ठीक है? ये याद रखना। कॉन्फिडेंट लोग फियरलेस नहीं होते हैं। वो बस अपने नर्वस सिस्टम को ट्रेन कर चुके होते हैं। तुम्हारी प्रॉब्लम
Speaker A
कॉन्फिडेंस नहीं है। ये बोलना बंद कर दो। मेरे में तो कॉन्फिडेंस ही नहीं है। बकवास। तुम अपने को बार-बार बोल रहे हो मेरे में यह नहीं है तो तुम्हारे ब्रेन ने उसी को मान लिया है। तुम्हारी प्रॉब्लम आई
Speaker A
थिंक कंफर्ट एडिक्शन ज्यादा है। और अगर तुम ये वीडियो देख के भी एक्शन नहीं लेते तुम इनसिक्योर नहीं हो। तुम सेफ रहने की फीलिंग से ना एडिक्टेड हो। डेंजरस कॉन्फिडेंस का मतलब लाउड होना नहीं है। इट मींस यू मूव इवन व्हेन यू आर स्केर्ड। और
Speaker A
जब तुम यह फीलिंग को मास्टर कर लेते हो ना कि डर लग रहा है तो क्या हो गया? करना तो है ही। द पीपल स्टार्ट नोटिसिंग यू नॉट बिकॉज़ यू डिमांडेड अटेंशन बट बिकॉज़ योर नर्वस सिस्टम स्टॉप्ड आस्किंग फॉर परमिशन।
Speaker A
एंड आई विल जस्ट टेल यू वन वेरी सिंपल स्टोरी जब पहली बार जिंदगी में मेरे दिल ने मुझसे कहा यार मैं अच्छी टीचर बन सकती हूं। जब मैंने पहली बार ये डिसाइड किया था कि यार मुझे टीचिंग करनी है। मैं टीचिंग
Speaker A
अच्छी कर सकती हूं। आई एम गुड एट दिस। सब कुछ पता था मुझे। एंड आई वेंट टू दिस रियली बिग स्टार्टअप। एंड ना उस टाइम ये बड़ी कंपनी थी वो अच्छी बड़ी कंपनी के पैसे लगे थे उसमें और मुझे पता था कि मेरा यह
Speaker A
पहला सेशन है YouTube पर मुझे लोग देखेंगे यार यू विल नॉट बिलीव क्या चल रहा था गला सूख रहा था मेरा मेरे को ऐसे शिवरी शिवरी फीलिंग आ रही थी मेरे अंदर शिवरिंग हो रही थी ऐसे अपने आप हाथवात कांप रहे थे मेरे
Speaker A
और लग रहा था कि जैसे पूरा ऑफिस सिर्फ मुझे ही देख रहा है जबकि वहां पर मेरे जाने से पहले शायद 100 लोग पढ़ा रहे थे। नोबडी केयर्ड अबाउट मी बट मेरे दिमाग को यह चल रहा था सबको मेरी ही पड़ी हुई है।
Speaker A
आज तो पूरा YouTube बैठ के हम ही को जज कर लेगा। भाई इतना मतलब टेंशन था मुझे कि मैं भागते हुए वाशरूम में गई। मुझे लगा मैं चक्कर खाके गिर जाऊंगी। बट मैं भागते हुए वॉशरूम गई। मैं भागते हुए उस बिल्डिंग से
Speaker A
नहीं निकल गई। डरते कांपते हिचकिचाते और इनफैक्ट नर्वसनेस में मैंने पहला जो शायद अपना सेशन लिया था उसमें एक आंसर मैंने गलत भी बता दिया था। सब कुछ के बाद भी जब वो वीडियो आया मेरे दोस्तों ने मेरी
Speaker A
फैमिली ने वो कंपनी के लोगों ने मेरी इतनी तारीफ करी और रैंडम बच्चों ने जिन्होंने पहली बार देखा था कमेंट कर कर के कि हां ये टीचर अच्छी है शी इज़ वेरी गुड अच्छा बोलती है अच्छा प्रोनंसिएशन है फिर मुझे
Speaker A
लगा कि ओ ये तो मैं कर सकती हूं उसके बाद भी डर तो लगता ही था नर्वसनेस होती ही थी बट वो पहली बार जब मैंने किया तो मुझे डर लगा और आज यह हालत है चौराहे पे खड़े करके
Speaker A
भी कोई बोल देता है कि चलो अंग्रेजी पढ़ाने लगो तो मैं पढ़ा लेती हूं। सो इट्स नॉट अबाउट कि मुझे कभी डर नहीं लगेगा। मुझे पता है मुझे क्या करना है। मुझे क्या पसंद है? मैं किस चीज के लिए बिल्कुल
Speaker A
क्रेजी हूं। फिर भी मुझे डर लगा। बट मैंने क्या किया? डर के बाद भी वो काम किया। 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 1/2 साल से वही कर रही हूं। एंड आई थिंक दैट्स व्हाई आई एम
Speaker A
गुड एट इट। सो आप कॉन्फिडेंट हैं। यू जस्ट नीड टू टेक दैट फर्स्ट स्टेप। स्टार्ट टुडे। थैंक यू फॉर वाचिंग।
Topics:आत्मविश्वासकॉन्फिडेंसन्यूरोसाइंसपोश्चरमोटिवेशनरिहर्सलडर से मुकाबलाब्रेन साइंसएक्शन और फीलिंगएक्सपोजर थेरेपी











