कश्मीर की पुरानी मान्यता और जोया की रहस्यमयी रात की कहानी, जिसमें अखरोट के पेड़ और अजीब घटनाएं शामिल हैं।
Key Takeaways
- कश्मीर की लोककथाओं और मान्यताओं का प्रभाव आज भी लोगों की जिंदगी पर है।
- मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक विश्वास के बीच जटिल संबंध को कहानी में दिखाया गया है।
- हॉरर और रहस्य के तत्वों के साथ वास्तविक जीवन की समस्याओं को जोड़ा गया है।
- जोया की कहानी यह दर्शाती है कि अकेलेपन और मानसिक बीमारी में व्यक्ति को किस तरह का संघर्ष करना पड़ता है।
- परंपरागत चेतावनियां और आधुनिक विज्ञान के बीच टकराव को उजागर किया गया है।
What the video covers
- कश्मीर में दूनकल (अखरोट का पेड़) को लेकर पुरानी मान्यता है कि रात को उसके पास नहीं जाना चाहिए।
- जोया मीर, 23 वर्षीय रेडियो शो होस्ट, श्रीनगर में रात के समय अपने शो के दौरान अजीब कॉल प्राप्त करती है।
- एक अनजान कॉल पर एक बच्ची की आवाज आती है और स्टूडियो में एक सफेद आंखों वाली बच्ची दिखाई देती है।
- श्रीनगर के ठंडे मौसम और दल लेक के बर्फीले माहौल का विस्तृत वर्णन।
- जोया को एंजायटी डिसऑर्डर है, जो उसकी मां की मौत के बाद शुरू हुआ।
- जोया को बर्फ के नीचे से एक हाथ पकड़ता है, जिससे उसके कलाई पर नीले निशान बन जाते हैं।
- डॉक्टर सानिया के अनुसार जोया के अनुभव हाइपनागिक हेलुसिनेशन और पैनिक अटैक के कारण हो सकते हैं।
- जोया की दादी हजरा बेगम उसे परंपरागत कश्मीरी नियमों और चेतावनियों के बारे में बताती हैं।
- कहानी में जोया का अकेलापन और उसकी मानसिक स्थिति पर भी प्रकाश डाला गया है।
- कहानी का असली डर यह है कि जोया की बातों पर कोई विश्वास नहीं करेगा क्योंकि उसे मानसिक बीमारी का लेबल लगा हुआ है।
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Speaker A
कश्मीर में एक मान्यता है, बहुत पुरानी। आज भी श्रीनगर के घरों में बुजुर्ग इसे बचपन से ही बच्चों को सिखा देते हैं। मान्यता यह है कि अखरोट के पेड़ जिसे कश्मीर में दूनकल कहते हैं, उस पर रात को कोई नहीं चढ़ता। रात को उसके नजदीक भी नहीं जाना चाहिए। क्योंकि उस पेड़ की शाखों में कुछ रहता है और वो चीज आपको नुकसान तब तक नहीं पहुंचाती जब तक आप उसे जवाब ना दो। और इस कहानी की लड़की का नाम था जोया, उम्र 23 साल, और वो श्रीनगर के एक छोटे से रेडियो स्टेशन पे रात 11:00 बजे से 1:00 बजे तक एक शो चलाती थी जिसमें लोग कॉल करते थे और वो हर कॉल उठा के कहती थी जी मैं सुन रही हूं। गाइस, आज की कहानी मौसम से शुरू होती है और खत्म एक सवाल पर होती है जिसका जवाब मैं आपसे मांगूंगा इस वीडियो के अंत में। लेकिन अब यह वीडियो शुरू करने से पहले ऐसे ही और हॉरर और मिस्टीरियस वीडियोस देखने के लिए सब्सक्राइब कर दीजिए इस चैनल को। मेरी ये जो भी आप कहानियां सुन रहे हो, अगर आपको बंद करके सुननी है, यह जो स्क्रीन है, गाड़ी चलाते हुए सुननी है, सोते वक्त सुननी है, तो आप स्पॉटिफाई पे भी सुन सकते हो बाय द नेम ऑफ स्टोरीज बाय अममान पारकर। तो अब यह कहानी शुरू होती है। कश्मीर में 21 दिसंबर से 31 जनवरी तक जो वक्त होता है उसे चिलाई कलान कहते हैं। 40 दिन साल की सबसे कड़ी सर्दी उस दौरान दल लेक के ऊपरी सतह जम जाती है। नलकों में पानी बर्फ बन जाता है और रात का तापमान -8, -10 तक चला जाता है। और उस वक्त श्रीनगर की जो शक्ल होती है वो किसी भी फिल्म मेकर का सपना हो सकता है। जो वहां का जो डाउन है उसका जो रेनवारी मोहल्ला, तंगी गलियां, दोनों तरफ तीन मंजिला पुराने लकड़ी और महाराजी ईंट के घर थे। जिनके छतों पर तीन का पानी जमा हुआ होता था। उस पे बर्फ की 2 फीट मोटी चादर होती थी। आसपास चिनार के पेड़ों की नंगी शाखें आसमान में लकीरों की तरह फैलती हुई दिखती थी। दूर हरी पर्वत के किले की पीली बत्ती कोहरे में से जुगनू की तरह चमक रही होती है। और इस पूरे मंजर पर एक ऐसी खामोशी है जो सिर्फ बर्फ ही बना सकती है क्योंकि बर्फ आवाज को सोख कर लेती है। आप अपने खुद के कदमों की आवाज सुन सकते हो बस। और उससे दूर कुछ भी नहीं। और इसी मोहल्ले की एक गली के आखिर में एक घर है। आंगन के बीचोंबीच एक बहुत बड़ा पुराना अखरोट का पेड़ और उस घर में दो लोग रहते हैं। जो पहली शख्स थी वो थी 23 साल की जोया मीर, श्रीनगर में ही पैदा हुई। यहीं पड़ी। दिन में पेपर मशे का काम करती थी। कश्मीरी कागज की कलाकारी और रात को एक लोकल एफएम स्टेशन में अपना शो शबे कश्मीर चलाती थी। आवाज उसकी सबसे बड़ी ताकत थी और उसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह है पिछले 2 साल से उसे एंजायटी डिसऑर्डर है। 2 साल पहले उसकी अम्मी की मौत के बाद से वो दवाई लेती है। वो थेरेपी लेती है और वो हर रात सोने से पहले अपने कमरे का हर कोना चेक करती है तीन बार। और यहीं पे इसी घर में उसकी दादी हजरा बेगम रहा करती थी। कश्मीरी में बोबे मतलब दादी कहा जाता है। पूरे दिन अपने पहरान पहने खंगरी सीने से लगा के बैठी रहती है। बहुत कम बोलती है लेकिन जो बोलती है वह याद रह जाता है। इसी घर में इसने अपनी पूरी जिंदगी गुजारी है और इस घर का हर सच सिर्फ इसे पता है। और गाइस इस कहानी में एक और एक किरदार है। उसका नाम आपको कहानी के बीच में पता चलेगा। और जब पता चलेगा तब आप वापस जाकर यह पूरी कहानी दोबारा सुनना चाहोगे। कहानी शुरू होती है 9 जनवरी की रात को। जोया स्टेशन पहुंचती है रेडियो स्टेशन। स्टूडियो एक छोटी सी बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पे है। एक रिकॉर्डिंग बूथ है। उसके आगे कांच की एक बड़ी सी खिड़की है और उस कांच के उस पार इरफान का कंसोल था। इरफान जोया का खास दोस्त था जो कि हर बार उसे मोटिवेट किया करता था और इरफान वहां का साउंड इंजीनियर भी था। और उसी समय वहीं बाहर बर्फ गिर रही है। इतनी धीरे कि दिखती कम है, महसूस ज्यादा होती है। 11:00 बजे शो शुरू होता है। जोया हेडफोन लगाती है, माइक ऑन करती है और वो लाइन बोलती है जो पूरी वैली पहचानती है। अस्सलाम वालेकुम श्रीनगर, मैं जोया और अगर आज रात आपको नींद नहीं आ रही है तो चलिए साथ में जागते हैं। कॉल आने लगते हैं। कोई बारामुल्ला से, कोई अनंतनाग से, तो कोई सपोरे से, कोई गाना रिक्वेस्ट करता है। कोई अपनी मां के लिए दुआ मांगता है। कोई बस बातचीत करना चाहता है। और अब रात के ठीक 12:40 पे एक कॉल आता है जिस पे कोई नंबर डिस्प्ले नहीं होता। जोया कॉल उठाती है। जी मैं सुन रही हूं। आप कहां से बोल रहे हैं? दूसरी तरफ से सिर्फ सांस है। बहुत धीमी लेकिन बहुत लंबी सांस। और उसके पीछे बर्फ गिरने की आवाजें आ रही हैं जो फोन पर कभी रिकॉर्ड नहीं होती। और फिर एक बच्ची की आवाज आती है, लगभग 4 साल की, कश्मीरी में बिल्कुल धीरे से कहती है जोया दरवाजा खुला छोड़ देना। जोया जम जाती है। वो कांच के उस पार इरफान की तरफ देखती है। इरफान हेडफोन पहने हुए अपने फोन पे हंसता हुआ कुछ स्क्रोल कर रहा था। उसने कुछ भी नहीं सुना। जोया वापस माइक की तरफ मुड़ती है और बूथ के अंदर उसके बिल्कुल सामने वाली खाली गेस्ट चेयर पे एक छोटी सी बच्ची बैठी हुई है। सर झुका हुआ, लंबे काले बाल, चेहरे पे स्टूडियो की लाल ऑन एयर लाइट उसके ऊपर पड़ती है। और वो एक झटके में अपना सर उठा के जोया की तरफ देखती है और उसकी आंखें पूरी तरह सफेद हैं। पूरे स्टेशन की बिजली चली जाती है एक सेकंड के लिए। और जब वापस आती है, चेयर खाली है। इरफान दरवाजा खोलता है, यार जनरेटर का इशू है यार। सब ठीक। जोया के हाथ कांप रहे थे। वो बस इतना कहती है कॉल लॉग चेक कर। 12:40 वाला इरफान चेक करता है। 12:40 पे कोई कॉल आया ही नहीं था जोया। यह उसने कहा। उस रात शो के बाद जोया घर जाने के लिए दल लेक का शॉर्टकट लेती है। सुबह के लगभग 2:00 बजे। घाट पर एक शिकारा वाला बैठा है। मोहल्ले का ही पुराना आदमी गुलजार चाचा। अब यहां का मंजर इमेजिन कीजिए। दल लेक का पानी आधा जमा हुआ है। किनारे-कनारे बर्फ की पतली परत है। जिस पे चांद की रोशनी ऐसी चमक रही है जैसे किसी ने पूरे लेक पे कांच बिछा दी हो। चारों तरफ कोहरा है। इतना घना कि जबरवन के पहाड़ियां बिल्कुल गायब हैं। शिकारा चलती है तो पानी नहीं, बर्फ टूटने की आवाज आती है। और बीच लेक में कोहरे में जोया को कुछ दिखता है। एक बच्ची जमे हुए पानी पर खड़ी है। बिल्कुल उस जगह जहां बर्फ इतनी पतली है जहां किसी इंसान का वजन संभाला नहीं जा सकता। जोया गुलजार चाचा को रोकती है। चाचा वहां देखो। गुलजार चाचा कोहरे में दिखते हैं और कहते हैं बेटी वहां कुछ नहीं है। तुम्हें ठंड लग गई है शायद से। जोया वापस उधर दिखती है। बच्ची गायब है। वो एकदम राहत की सांस लेती है। अपना जो पहरान था जो उसने पहना हुआ था वो ठीक करती है। शिकारा के किनारे पे अपना हाथ रखती है। ऐसे ही और बर्फ के नीचे से एक छोटा सा हाथ निकल के उसकी कलाई पकड़ लेता है। पूरी बर्फ एक साथ छर्र करके आवाज के साथ छटकती है। शिकारा जोर से हिलता है। गुलजार चाचा चीखते हैं और जोया पीछे गिर जाती है। जब वो उठती है, पानी बिल्कुल शांत। बर्फ जैसी थी वैसे ही है। कहीं कोई दरार नहीं लेकिन उसके कलाई पे पांच नीले निशान हैं। और वो निशान दो दिन तक नहीं जाते। अगले दिन जोया डॉक्टर सानिया कादरी के पास जाती है जो कि पहले से ही जोया का एंजायटी का इलाज कर रही थी। और डॉक्टर सानिया जो कहती है वह पूरी तरह हमेशा सही ही होता है। वह समझती है कि एंजायटी डिसऑर्डर में नींद की कमी से हाइपनागिक हेलुसिनेशन हो सकते हैं। यानी जागने और सोने के बीच वाली हालत में इंसान ऐसी हरकतें देख और सुन सकता है। और वो भी कुछ ऐसी चीजें जो कि है ही नहीं। वह समझती है कि पैनिक अटैक के वक्त शरीर में इतना एड्रिनलिन आता है कि खुद का हाथ भी किसी और का लगने लगता है। और वो यह भी कहती है कि 23 साल की उम्र में मां की मौत के 2 साल बाद तुम सर्दियों में रात की शिफ्ट कर रहे हो। यह सब बिल्कुल एक्सपेक्टेड है। और घर पे भी यही होता है। इरफान कहता है सोया, तू बस थोड़ी सी ब्रेक ले ले यार। जो पड़ोसी हैं, वह कहते हैं कि बेचारी लड़की मां के जाने के बाद बिल्कुल ऐसी ही हो गई है। और यही इस कहानी का असली डर है। गाइस, जोया को सबसे ज्यादा डर उस बच्ची से नहीं लग रहा था। उसे डर इस बात का लग रहा था कि अगर यह सच में है भी तो फिर उससे कोई कभी भी यकीन नहीं करेगा क्योंकि उसकी फाइल पे पहले से ही एक लेबल चिपका हुआ है और उस लेबल के बाद उसकी हर एक चीख एक सिम्टम बन जाती है। यहां पे सिर्फ एक इंसान था जिसने उसे यह नहीं कहा था कि तुम ठीक हो जाओगी। बोबे, उसकी बोबे मतलब दादी, जैसे मैंने आपको कहा, उसकी बोबे ने उसका हाथ पकड़ा, उसकी कलाई के नीले निशान देखे और बहुत धीरे से पूछा। जोया तूने जवाब दिया था उस रात। जोया की दादी उसे बताती है कि मेरी पूरी जिंदगी इसी घर के अंदर बीती है। मैं कई चीजों को जानती हूं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। जैसे कि दूनकल पर रात को नहीं रुकना, मतलब अखरोट के पेड़ पर। और अगर जा भी रहे हो तो सलाम बोल के गुजरना। जो बाथरूम में नाली है उसमें खौलता हुआ पानी नहीं डालना होता, खौलता हुआ पानी मतलब गर्म पानी। क्योंकि बेटा जो हमारे नीचे रहता है वो नाराज हो जाता है। और जब भी रात को कोई तुम्हारा नाम पुकारता है तो कभी भी उसे जवाब मत देना। जो यह हंसने की कोशिश करती है बोबे, मेरा काम ही जवाब देना है। मैं रात भर लोगों का नाम ले ही जी में सुन रही हूं। बोलती हूं। बोबे का चेहरा बिल्कुल सफेद पड़ जाता है। उस रात जोया नहाने जाती है। पुराने घर का हमाम पत्थर का फर्श, नीचे से लकड़ी जलती है। पूरा कमरा भाप से भरा।
Speaker A
चढ़ता। रात को उसके नजदीक भी नहीं जाना चाहिए। क्योंकि उस पेड़ की शाखों में कुछ रहता है और वो चीज आपको नुकसान तब तक नहीं पहुंचाती जब तक आप उसे जवाब ना दो। और इस कहानी की लड़की का नाम था जोया उम्र 23
Speaker A
साल और वो श्रीनगर के एक छोटे से रेडियो स्टेशन पे रात 11:00 बजे से 1:00 बजे तक एक शो चलाती थी जिसमें लोग कॉल करते थे और वो हर कॉल उठा के कहती थी जी मैं सुन रही हूं। गाइस आज की कहानी मौसम से शुरू होती
Speaker A
है और खत्म एक सवाल पर होती है जिसका जवाब मैं आपसे मांगूंगा इस वीडियो के अंत में। लेकिन अब यह वीडियो शुरू करने से पहले ऐसे ही और हॉरर और मिस्टीरियस वीडियोस देखने के लिए सब्सक्राइब कर दीजिए इस चैनल को।
Speaker A
मेरी ये जो भी आप कहानियां सुन रहे हो, अगर आपको बंद करके सुननी है, यह जो स्क्रीन है, गाड़ी चलाते हुए सुननी है, सोते वक्त सुननी है, तो आप स्पॉटिफाई पे भी सुन सकते हो बाय द नेम ऑफ स्टोरीज बाय
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अममान पारकर। तो अब यह कहानी शुरू होती है। कश्मीर में 21 दिसंबर से 31 जनवरी तक जो वक्त होता है उसे चिलाई कलान कहते हैं। 40 दिन साल की सबसे कड़ी सर्दी उस दौरान दल लेक के ऊपरी सतह जम जाती है। नलकों में
Speaker A
पानी बर्फ बन जाता है और रात का तापमान -8, -10 तक चला जाता है। और उस वक्त श्रीनगर की जो शक्ल होती है वो किसी भी फिल्म मेकर का सपना हो सकता है। जो वहां का जो डाउन है उसका जो रेनवारी मोहल्ला
Speaker A
तंगी गलियां दोनों तरफ तीन मंजिला पुराने लकड़ी और महाराजी ईंट के घर थे। जिनके छतों पर तीन का पानी जमा हुआ होता था। उस पे बर्फ की 2 फीट मोटी चादर होती थी। आसपास चिनार के पेड़ों की नंगी शांखें
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आसमान में लकीरों की तरह फैलती हुई दिखती थी। दूर हरी पर्वत के किले की पीली बत्ती कोहरे में से जुगनू की तरह चमक रही होती है। और इस पूरे मंजर पर एक ऐसी खामोशी है जो सिर्फ बर्फ ही बना सकती है क्योंकि
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बर्फ आवाज को सोक कर लेती है। आप अपने खुद के कदमों की आवाज सुन सकते हो बस। और उससे दूर कुछ भी नहीं। और इसी मोहल्ले की एक गली के आखिर में एक घर है। आंगन के बीचोंबीच एक बहुत बड़ा पुराना अखरोड़ का
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पेड़ और उस घर में दो लोग रहते हैं। जो पहली शख्स थी वो थी 23 साल की जोया मीर श्रीनगर में ही पैदा हुई। यहीं पड़ी। दिन में पेपर मशे का काम करती थी। कश्मीरी कागज की कलाकारी और रात को एक लोकल एफएम
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स्टेशन में अपना शो शबे कश्मीर चलाती थी। आवाज उसकी सबसे बड़ी ताकत थी और उसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह है पिछले 2 साल से उसे एंजायटी डिसऑर्डर है। 2 साल पहले उसकी अम्मी की मौत के बाद से वो दवाई लेती है।
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वो थेरेपी लेती है और वो हर रात सोने से पहले अपने कमरे का हर कोना चेक करती है तीन बार। और यहीं पे इसी घर में उसकी दादी हजरा बेगम रहा करती थी। कश्मीरी में बोबे मतलब दादी कहा जाता है। पूरे दिन अपने
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पहरान पहने खंगरी सीने से लगा के बैठी रहती है। बहुत कम बोलती है लेकिन जो बोलती है वह याद रह जाता है। इसी घर में इसने अपनी पूरी जिंदगी गुजारी है और इस घर का हर सच सिर्फ इसे पता है। और गाइस इस कहानी
Speaker A
में एक और एक किरदार है। उसका नाम आपको कहानी के बीच में पता चलेगा। और जब पता चलेगा तब आप वापस जाकर यह पूरी कहानी दोबारा सुनना चाहोगे। कहानी शुरू होती है 9 जनवरी की रात को। जोया स्टेशन पहुंचती
Speaker A
है रेडियो स्टेशन। स्टूडियो एक छोटी सी बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पे है। एक रिकॉर्डिंग बूथ है। उसके आगे कांच की एक बड़ी सी खिड़की है और उस कांच के उस पार इरफान का कंसोल था। इरफान जोया का खास
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दोस्त था जो कि हर बार उसे मोटिवेट किया करता था और इरफान वहां का साउंड इंजीनियर भी था। और उसी समय वहीं बाहर बर्फ गिर रही है। इतनी धीरे कि दिखती कम है, महसूस ज्यादा होती है। 11:00 बजे शो शुरू होता
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है। जोया हेडफोन लगाती है, माइक ऑन करती है और वो लाइन बोलती है जो पूरी वैली पहचानती है। अस्सलाम वालेकुम श्रीनगर मैं जोया और अगर आज रात आपको नींद नहीं आ रही है तो चलिए साथ में जागते हैं। कॉल आने
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लगते हैं। कोई बारामुल्ला से कोई अनतनाक से तो कोई सपोरे से कोई गाना रिक्वेस्ट करता है। कोई अपनी मां के लिए दुआ मांगता है। कोई बस बातचीत करना चाहता है। और अब रात के ठीक 12:40 पे एक कॉल आता है जिस पे
Speaker A
कोई नंबर डिस्प्ले नहीं होता। जोया कॉल उठाती है। जी मैं सुन रही हूं। आप कहां से बोल रहे हैं? दूसरी तरफ से सिर्फ सांस है। बहुत धीमी लेकिन बहुत लंबी सांस। और उसके पीछे बर्फ गिरने की आवाजें आ रही
Speaker A
है जो फोन पर कभी रिकॉर्ड नहीं होती। और फिर एक बच्ची की आवाज आती है लगभग 4 साल की कश्मीरी में बिल्कुल धीरे से कहती है जोया दरवाजा खुला छोड़ देना। जोया जम जाती है। वो कांच के उस पार इरफान
Speaker A
की तरफ देखती है। इरफान हेडफोन पहने हुए अपने फोन पे हंसता हुआ कुछ स्क्रोल कर रहा था। उसने कुछ भी नहीं सुना। ज़ोया वापस माइक की तरफ मुड़ती है और बूथ के अंदर उसके बिल्कुल सामने वाली खाली गेस्ट चेयर पे एक
Speaker A
छोटी सी बच्ची बैठी हुई है। सर झुका हुआ लंबे काले बाल चेहरे पे स्टूडियो की लाल ऑन एयर लाइट उसके ऊपर पड़ती है। और वो एक झटके में अपना सर उठा के जोया की तरफ देखती है और उसकी आंखें पूरी तरह सफेद है।
Speaker A
पूरे स्टेशन की बिजली चली जाती है एक सेकंड के लिए। और जब वापस आती है चेयर खाली है। इरफान दरवाजा खोलता है यार जनरेटर का इशू है यार। सब ठीक जोया के हाथ कांप रहे थे। वो बस इतना कहती है कॉल लॉक
Speaker A
चेक कर। 12:40 वाला इरफान चेक करता है। 12:40 पे कोई कॉल आया ही नहीं था जोया। यह उसने कहा। उस रात शो के बाद जोया घर जाने के लिए दल लेक का शॉर्टकट लेती है। सुबह के लगभग 2:00 बजे। घाट पर एक शिकारा वाला
Speaker A
बैठा है। मोहल्ले का ही पुराना आदमी गुलजार चाचा। अब यहां का मंजर इमेजिन कीजिए। दल लेक का पानी आधा जमा हुआ है। किनारे-कनारे बर्फ की पतली परत है। जिस पे चांद की रोशनी ऐसी चमक रही है जैसे किसी
Speaker A
ने पूरे लेक पे कांच बिछा दी हो। चारों तरफ कोहरा है। इतना घना कि जबरवन के पहाड़ियां बिल्कुल गायब है। शिकारा चलती है तो पानी नहीं बर्फ टूटने की आवाज आती है। और बीच लेक में कोहरे में जोया को कुछ
Speaker A
दिखता है। एक बच्ची जमे हुए पानी पर खड़ी है। बिल्कुल उस जगह जहां बर्फ इतनी पतली है जहां किसी इंसान का वजन संभाला नहीं जा सकता। जोया गुलजार चाचा को रोकती है। चाचा वहां देखो। गुलजार चाचा कोहरे में दिखते
Speaker A
हैं और कहते हैं बेटी वहां कुछ नहीं है। तुम्हें ठंड लग गई है शायद से। जोया वापस उधर दिखती है। बच्ची गायब है। वो एकदम राहत की सांस लेती है। अपना जो पहरान था जो उसने पहना हुआ था वो ठीक करती
Speaker A
है। शिकारा के किनारे पे अपना हाथ रखती है। ऐसे ही और बर्फ के नीचे से एक छोटा सा हाथ निकल के उसकी कलाई पकड़ लेता है। पूरी बर्फ एक साथ छर्र करके आवाज के साथ छटकती है। शिकारा जोर से हिलता है। गुलजार चाचा
Speaker A
चीखते हैं और जोया पीछे गिर जाती है जब वो उठती है। पानी बिल्कुल शांत। बर्फ जैसी थी वैसे ही है। कहीं कोई दरार नहीं लेकिन उसके कलाई पे पांच नीले निशान है। और वो निशान दो दिन तक नहीं जाते। अगले दिन जोया
Speaker A
डॉक्टर सानिया कादरी के पास जाती है जो कि पहले से ही जोया का एंजायटी का इलाज कर रही थी। और डॉक्टर सानिया जो कहती है वह पूरी तरह हमेशा सही ही होता है। वह समझती है कि एंजाइटटी डिसऑर्डर में नींद की कमी
Speaker A
से हाइपनागिक हेलुसिनेशन हो सकते हैं। यानी जागने और सोने के बीच वाली हालत में इंसान ऐसी हरकतें देख और सुन सकता है। और वो भी कुछ ऐसी चीजें जो कि है ही नहीं। वह समझती है कि पैनिकिक अटैक के वक्त शरीर
Speaker A
में इतना एड्रिनलिन आता है कि खुद का हाथ भी किसी और का लगने लगता है। और वो यह भी कहती है कि 23 साल की उम्र में मां की मौत के 2 साल बाद तुम सर्दियों में रात की
Speaker A
शिफ्ट कर रहे हो। यह सब बिल्कुल एक्सपेक्टेड है। और घर पे भी यही होता है। इरफान कहता है सोया तू बस थोड़ी सी ब्रेक ले ले यार। जो पड़ोसी है वह कहते हैं कि बेचारी लड़की मां के जाने के बाद बिल्कुल
Speaker A
ऐसी ही हो गई है। और यही इस कहानी का असली डर है। गाइस जोया को सबसे ज्यादा डर उस बच्ची से नहीं लग रहा था। उसे डर इस बात का लग रहा था कि अगर यह सच में है भी तो
Speaker A
फिर उससे कोई कभी भी यकीन नहीं करेगा क्योंकि उसकी फाइल पे पहले से ही एक लेबल चिपका हुआ है और उस लेबल के बाद उसकी हर एक चीख एक सिम्टम बन जाती है। यहां पे सिर्फ एक इंसान था जिसने उसे यह नहीं कहा
Speaker A
था कि तुम ठीक हो जाओगी। बोबे उसकी बोबे मतलब दादी जैसे मैंने आपको कहा उसकी बॉबे ने उसका हाथ पकड़ा उसकी कलाई के नीले निशान देखे और बहुत धीरे से पूछा जोया तूने जवाब दिया था उस रात जोया की दादी
Speaker A
उसे बताती है कि मेरी पूरी जिंदगी इसी घर के अंदर बीती है। मैं कई चीजों को जानती हूं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। जैसे कि दून कुल पर रात को नहीं रुकना मतलब अकरोड के पेड़ पर और अगर जा भी रहे
Speaker A
हो तो सलाम बोल के गुजरना जो बाथरूम में नाली है उसमें खौलता हुआ पानी नहीं डालना होता खौलता हुआ पानी मतलब गर्म पानी क्योंकि बेटा जो हमारे नीचे रहता है वो नाराज हो जाता है और जब भी रात
Speaker A
को कोई तुम्हारा नाम पुकारता है तो कभी भी उसे जवाब मत देना जो यह हंसने की कोशिश करती है बोबे मेरा काम ही जवाब देना है। मैं रात भर लोग का नाम ले ही जी में सुन रही हूं। बोलती हूं। बोबे का चेहरा
Speaker A
बिल्कुल सफेद पड़ जाता है। उस रात जोया नहाने जाती है। पुराने घर का हमाम पत्थर का फर्श नीचे से लकड़ी जलती है। पूरा कमरा भाप से भरा हुआ है। वो बाल्टी में गर्म पानी लेती है। ठंड इतनी है कि भाप दीवारों
Speaker A
पे पानी बनके बह रही है। वो बाल्टी का बचा हुआ खौलता पानी नाली में डाल देती है। बिना सोचे आदत से उन नाली में से एक आवाज आती है एक लंबी धीमी जलने वाली चीख सोया पीछे हटती है भाप से ढके हुए आईने की तरफ
Speaker A
देखती है और आईने की भाप पे अंदर की तरफ से एक छोटी सी हाथ की छाप बन जाती है फिर दूसरी फिर तीसरी और फिर भाप पे कश्मीरी में एक नाम लिखा जाता है उल्टा जैसे आईने के उस पार से किसी ने लिखा हो
Speaker A
और उसी वक्त हमम की आग एकदम से भड़कती है और बुझ जाती है। अंधेरे में जोया से बिल्कुल कान के पास आके एक बच्ची कुछ तो फुसफुसाती है। वो बच्ची कहती है जोया मैं ठंड में हूं। अगली सुबह जोया की जो बूबे जो दादी थी वह
Speaker A
उसको मौलवी गुलाम रसूल के पास ले जाती है और वहां वो सच सामने आता है जो इस घर में 22 साल से दबाया गया था। जोया की मां का नाम रुसाना था और जोया उनकी पहली बेटी नहीं थी। जोया से 2 साल पहले उनकी एक और
Speaker A
एक बेटी थी। आलिया 4 साल की और 22 साल पहले के चिलाई कलान की रात में एक बहुत कड़ी सर्दी के दौरान आलिया निमोनिया से चल बसी थी। रुसाना टूट चुकी थी और उस वक्त लोगों ने उन्हें कहा था रात को मरहूम का
Speaker A
नाम मत पुकारा करो खासकर उस पेड़ के नीचे लेकिन एक मां यह बात कैसे माने रुसाना ने 40 रात उस अखरोट के पेड़ के नीचे खड़े होकर अपनी बच्ची का नाम पुकारा था हर रात आलिया आलिया आलिया और 40वीं रात को किसी
Speaker A
ने जवाब दे दिया मौलवी साहब बहुत धीरे से कहते हैं बेटी जिन कोई भूत नहीं होता वो अलग मखलूक है वो हमेशा बुरी नहीं होती लेकिन वह आवाज और नाम पर आती है और अगर आप उसे एक बच्ची की जगह दे दो तो वह बच्ची
Speaker A
बनके रह सकती है हमेशा के लिए। उस दिन के बाद घर में कुछ बदल गया था। रुसाना कहती थी कि आलिया वापस आ गई है। वो हमेशा हर रात को दो थाली लगाती थी। वो जोया को बचपन में कहती थी जोया तुम मेरी दूसरी बेटी हो।
Speaker A
पहली अभी भी इसी घर में है और 2 साल पहले एक बर्फ वाली रात रुसाना तीसरी मंजिल की खिड़की से नीचे गिरकर मर गई। रिपोर्ट में लिखा गया था बर्फ पर पैर फिसला और उनका इंतकाल हो गया। भूबे पहली बार रोने लगती
Speaker A
है और कहती है वो फिसली नहीं थी। वो खिड़की पर खड़ी होकर नीचे कुछ तो देख रही थी और उसने किसी का तो नाम लिया था। उस रात जोया शो पर नहीं जाना चाहती थी। लेकिन इरफान ने कहा था कि घर पे अकेली मत बैठ
Speaker A
यार। स्टेशन पे आजा मैं हूं। रात के 12:40 पे वही कॉल आता है बिना नंबर का। इरफान इस बार हेडफोन पहने हुए और इस बार वो भी सुनता है। दूसरी तरफ से सिर्फ सांस फिर वही बच्ची की आवाज सोया।
Speaker A
इरफान कंसोल पे भागता है। कॉल ट्रेस करने की कोशिश करता है। लाइन किसी टावर से नहीं आ रही थी। जोया दूसरी बार इरफान कांच पे हाथ मार के चिल्लाता है। मत बोल कुछ भी मत बोल। और फिर तीसरी बार। और इस बार वो आवाज
Speaker A
बच्ची की नहीं है। वो आवाज जोया की मां की है। रुसाना की। बिल्कुल वैसी जैसे 2 साल पहले थी। जोया बेटा जवाब दे दे। और एक इंसान जो 2 साल से अपनी मां की आवाज सुनने के लिए तरस रहा हो जिसे एंजायटी ने हर रात
Speaker A
यह सोचने पर मजबूर किया हो कि काश एक बार और बात हो जाती मेरी अम्मी से वो इंसान क्या करेगा? जोया का हाथ माइक की तरफ बढ़ता है और उसी वक्त स्टूडियो का दरवाजा खुलता है। जोया की दादी भूबे वहां पर खड़ी
Speaker A
थी। बर्फ से भीगी हुई। बहरान पे सफेद परत सांस उखड़ी हुई। एक बहुत बुजुर्ग औरत जो कि आधी रात को पैदल चल के स्टेशन तक आई है। उसके घर से ले यहां तक वो जोया के हाथ से माइक खींच लेती है। अपने मुंह के पास
Speaker A
रखती है और पूरी ताकत से बोलती है, मैं जोया हूं और मैं सुन रही हूं। पूरे स्टेशन की हर लाइट एक साथ फट जाती है। कंसोल में से चिंगारियां निकलती है। हेडफोन में से एक चीख निकलती है इतनी तेज कि इरफान के
Speaker A
कान से खून आ जाता है और अंधेरे में स्टूडियो की उस खाली गेस्ट चेयर पे कोई बिल्कुल जोर से आकर बैठ जाता है। और फिर सब कुछ शांत हो जाता है। अगली सुबह भूबे अपने घर के आंगन में अखरोट के पेड़ के
Speaker A
नीचे बैठी हुई है। सीधी बैठी हुई है। आंखें बंद है। चेहरे पर सुकून है और उसके आसपास की जो बर्फ थी बिल्कुल साफ थी। एक भी निशान नहीं था। ना आने का ना जाने का। डॉक्टर्स ने लिखा कार्डियक अरेस्ट ड्यू टू
Speaker A
एक्सट्रीम कोल्ड प्रेशर। एक इतनी बूढ़ी औरत जो कि रात को बर्फ में बाहर निकल गई। इसके लिए बस कार्डियक अरेस्ट आ गया। बस इतना ही लिखा गया। जोया ने वो घर बेच दिया। नया मालिक आया। उसने सबसे पहला काम यह किया कि उसने वह पुराना
Speaker A
अखरोड़ का पेड़ कटवा दिया क्योंकि उसकी जो जड़े थी वो नीव को नुकसान पहुंचा रही थी। सोया अब श्रीनगर में नहीं रहती। वो अभी भी वही रेडियो स्टेशन का ही काम करती है लेकिन थोड़ा अलग। रिकॉर्डिंग घर पे ही
Speaker A
करती है कभी-कभी। जोया के पास ना हर महीने कुछ ना कुछ लिसनर्स आते हैं, मैसेज करते हैं। मैसेज हमेशा एक जैसा ही होता है। मैम आपके एपिसोड में एक और एक आवाज आती है बहुत धीमी। किसी छोटी बच्ची की आती है।
Speaker A
क्या वो आपकी बेटी है? लेकिन गाइस आप सबको पता है। जोया की कोई बेटी ही नहीं थी। तो गाइस अब मैं आपसे वो सवाल पूछूंगा जो मैंने शुरू में कहा था। जोया के साथ जो हुआ वो एक जिन था या एक ऐसी लड़की थी जो 2
Speaker A
साल से अपनी मां को ढूंढ रही थी और जिसका दिमाग उसे वह आवाज लौट के दे रहा था जो वो सबसे ज्यादा सुनना चाहती थी। कमेंट्स में ना जरूर बताइए कि यह जिन था या एंजाइटटी और हां आप मेरी ऐसी कहानियां स्पॉटिफाई पे
Speaker A
भी सुन सकते हो बाय द नेम ऑफ स्टोरीज बाय अममान बारका नाम से। शुक्रिया।
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