राजकुमार और धोबिन की अनोखी प्रेम कहानी, जिसमें जिद, शर्तें और योगी से मिलने का सफर है।
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Key Takeaways
- प्यार में जिद और समझदारी दोनों जरूरी हैं।
- संबंधों में सम्मान और शर्तों की अहमियत होती है।
- परिवार और समाज की सोच रिश्तों को प्रभावित करती है।
- आत्मिक शांति के लिए कभी-कभी अलगाव जरूरी होता है।
- सच्चा प्रेम परिस्थिति और बाधाओं से परे होता है।
What the video covers
- राजपूताना के एक दयालु राजा का बेटा राजकुमार था जो जिद्दी था।
- राजकुमार धोबियों के मोहल्ले में एक खूबसूरत धोबी की लड़की को देख प्यार में पड़ गया।
- राजकुमार ने धोबी की लड़की से शादी करने की ठानी और राजा ने अनुमति दी।
- धोबी की लड़की ने शादी के लिए चार अजीब शर्तें रखीं, जिन्हें राजकुमार ने मंजूर किया।
- लड़की रोज महल में रात नहीं बिताती, राजकुमार से बात या छूने से मना करती थी।
- राजकुमार को लड़की की शर्तें और व्यवहार समझ नहीं आए और वह परेशान हो गया।
- धोबी ने बताया कि लड़की उनकी बेटी नहीं है, वे उसे अपनी बेटी मानते हैं।
- राजकुमार मानसिक उलझन में मल्या पर्वत की ओर चला गया।
- वह एक योगी महाराज की गुफा में जाकर सेवा करने लगा और शांति पाई।
- योगी महाराज ने राजकुमार को पहचान कर उसकी चिंता समझी।
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Speaker A
बहुत पुराने समय की बात है। राजपूताना के एक शहर में एक राजा रहता था, जो बहुत दयालु और न्यायप्रिय था।
Speaker A
उसके राज में लोग बहुत खुश थे। शेर और बकरी एक साथ पानी पीते थे। हर तरफ शांति थी।
Speaker A
राजा का एक ही बेटा था, जिसका नाम राजकुमार था। वो बहुत समझदार, नेक और हर काम में माहिर था।
Speaker A
पर बहुत ज्यादा लाड़ प्यार ने उसे जिद्दी बना दिया था। जिस चीज को पाने की ठान लेता, उसे पाकर ही दम लेता।
Speaker A
एक दिन राजकुमार शिकार से लौट रहा था। सैनिक और दूसरे शिकारी पीछे रह गए थे।
Speaker A
राजकुमार घोड़े पर सवार होकर बहुत आगे निकल आया। उसे बहुत प्यास लगी थी।
Speaker A
उसने चारों तरफ देखा तो पता चला कि ये धोबियों का मोहल्ला था। हर जगह कपड़े धोए और सुखाए जा रहे थे।
Speaker A
अचानक राजकुमार की नजर एक घर पर पड़ी। छत पर एक लड़की अपने बाल सुखा रही थी।
Speaker A
राजकुमार उसे देखता ही रह गया। उसने इतनी खूबसूरत लड़की पहले कभी नहीं देखी थी।
Speaker A
ऐसा लग रहा था मानो उसके काले, लंबे बालों के बीच चांद जैसा चेहरा चमक रहा हो।
Speaker A
लड़की की नजर भी राजकुमार पर पड़ी और वो तुरंत दुपट्टे से खुद को ढककर नीचे उतर गई।
Speaker A
राजकुमार जैसे होश में आया, इतने में उसके साथी और नौकर भी वहां आ गए और राजकुमार को मजबूरन महल वापस आना पड़ा।
Speaker A
उसकी आंखों से वो सुंदर सूरत हट नहीं रही थी।
Speaker A
उसने अपने खास नौकरों को भेजकर पता करवाया तो मालूम हुआ कि वो एक धोबी का घर था और वो धोबी की लड़की थी।
Speaker A
राजकुमार जिद और गुस्से से बिस्तर पर पड़ गया कि वो उसी लड़की से शादी करेगा, वरना अपनी जान दे देगा।
Speaker A
तीन हफ्ते बीत गए। राजा को ये बात पता चली तो वो सोच में पड़ गया।
Speaker A
वो राजकुमार की जिद से वाकिफ था। उसने गांव के मुखिया को बुलाकर सलाह ली।
Speaker A
मुखिया बहुत अक्लमंद, वफादार और अनुभवी आदमी था। उसने सलाह दी, इस समय उसे रोकना ठीक नहीं।
Speaker A
आप राजकुमार को मनमानी करने दीजिए। जवानी की जिद है। दो दिन धोबी की बेटी के साथ रहेंगे तो अक्ल ठिकाने आ जाएगी।
Speaker A
फिर आप शौक से किसी राजकुमारी से शादी करवाइएगा। वैसे भी राजाओं की तो कई रानियां होती हैं। ये भी एक कोने में पड़ी रहेगी।
Speaker A
राजा को ये बात समझ आ गई। उसने राजकुमार को बुलाया और कहा, हम तुम्हारी जिद और इच्छा को देखते हुए तुम्हें इजाजत देते हैं। तुम उस लड़की से शादी कर सकते हो।
Speaker A
राजा ने धोबी और उसकी पत्नी को बुलवाया। वे डरते कांपते आए, सोच रहे थे कि न जाने क्या गलती हो गई है कि राजकुमार ने उन्हें बुलाया है।
Speaker A
राजकुमार ने उनसे कहा, हम तुम्हारी बेटी से शादी करना चाहते हैं। तुरंत तैयारी करो।
Speaker A
राजकुमार ने सोचा था कि धोबी और धोबिन खुशी से समा नहीं पाएंगे और राजकुमार के पैर पकड़ लेंगे कि उन्होंने उन्हें इतना सम्मान दिया, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
Speaker A
इसके बजाय वे दोनों सोच में पड़ गए। फिर बोले, राजकुमार, ये तो हमारी खुशनसीबी है कि आपने ऐसा इरादा किया। लेकिन हम अपनी बेटी से पूछकर जवाब देंगे।
Speaker A
राजकुमार ने ये सुना तो उसे बड़ा गुस्सा आया कि एक तो वो इस धोबी का सम्मान कर रहा है। इस गरीब की बेटी से शादी कर रहा है। और ये उसके राज्य का मामूली धोबी कह रहा है कि बेटी से पूछकर बताएगा।
Speaker A
लेकिन उसके दिल का मामला था। उसे उस लड़की से प्यार हो गया था। इसलिए धोबी की बात बर्दाश्त कर गया।
Speaker A
उसने धोबी से साफ कह दिया, हमें इनकार सुनने की आदत नहीं है। इनकार करने पर मैं तुम्हारे पूरे खानदान को जेल में डाल दूंगा।
Speaker A
वे दोनों धोबी और उसकी पत्नी जैसे डरते कांपते आए थे, वैसे ही चले गए।
Speaker A
घर पहुंचकर उन्होंने अपनी लड़की से कहा, राजकुमार तुमसे शादी करना चाहते हैं। अगर तुमने मना किया तो हम जान से हाथ धो बैठेंगे।
Speaker A
लड़की कहने लगी, ठीक है, मैं राजी हूं। लेकिन राजकुमार से कहिएगा कि मेरी चार शर्तें हैं।
Speaker A
खुद आकर सुन ले। अगर मंजूर हों तो बारात लेकर आ जाएं।
Speaker A
अगले दिन धोबी राजकुमार के महल गया और लड़की का संदेश पहुंचा दिया।
Speaker A
उसके मन में डर था कि कहीं राजकुमार गुस्से में आकर उसका सिर धड़ से अलग न कर दे। धोबी की बेटी और इतनी हिम्मत कि राजकुमार के सामने शर्तें रखे।
Speaker A
राजकुमार पहले तो ये सुनकर बहुत गुस्सा आया।
Speaker A
उसका दिल चाहा कि तलवार से धोबी को खत्म कर दे। लेकिन फिर एक तो उसे प्यार था। दूसरा उसे जिज्ञासा हुई कि देखें ये धोबी की लड़की क्या-क्या शर्तें रखती है।
Speaker A
राजकुमार उसी वक्त धोबी के साथ उसके घर पहुंचा।
Speaker A
दो कमरों का मकान था। नीचे धोबी और उसकी मां और पत्नी रहते थे। और ऊपर की मंजिल पर लड़की रहती थी।
Speaker A
राजकुमार पहुंचे तो नीचे कमरे में एक तरफ पर्दा डालकर लड़की बैठ गई और कहने लगी, मेरी चारों शर्तें अगर आपको मंजूर हैं तो मैं आपसे शादी करने को तैयार हूं।
Speaker A
पहली शर्त ये है कि मैं आपके महल में रात नहीं गुजारूंगी। सुबह जाऊंगी और शाम को वापस अपने घर आ जाया करूंगी।
Speaker A
राजकुमार ने सोचा, ये क्या बात हुई? ये कैसी अजीब शर्त है?
Speaker A
लेकिन फिर ख्याल आया कि ये सब कहने की बातें हैं। एक बार शादी हो गई तो महल छोड़कर झोपड़ी में वापस कौन आता है?
Speaker A
राजकुमार कहने लगा, मंजूर है।
Speaker A
तुम दूसरी शर्त बताओ। लड़की ने कहा, दूसरी शर्त ये कि आप मुझे छूने या बात करने की कोशिश नहीं करेंगे।
Speaker A
राजकुमार को ये सुनकर हंसी आ गई। शादी है कि मजाक है। उसने सोचा, सब कुछ हो जाए, बाद में देख लूंगा।
Speaker A
कहने लगा, चलो ये भी मंजूर है।
Speaker A
लड़की ने कहा, मैं आपके महल का पानी तक नहीं पियूंगी।
Speaker A
राजकुमार ने सोचा, ये भी बकवास है। जब दिन भर रहेगी तो कैसे मुमकिन है कि खाए और न पिए।
Speaker A
उसने जवाब दिया, मुझे ये भी मंजूर है।
Speaker A
लड़की फिर कहने लगी, मेरी चौथी, अगर आपने मुझे उंगली से भी छूने की कोशिश की तो हमारा रिश्ता खत्म। फिर मैं कभी वापस नहीं आऊंगी।
Speaker A
राजकुमार ने सोचा, ये बड़ी अजीब लड़की है। कैसी बदतमीज है। एक बार शादी हो जाए तो सारी शर्तें धरी की धरी रह जाएंगी।
Speaker A
उसने कहा, मुझे तुम्हारी सारी शर्तें मंजूर हैं।
Speaker A
लड़की ने कहा, अगर आपको शर्तें मंजूर हैं तो फिर आप बारात ले आइए।
Speaker A
लड़की नहीं चाहती थी कि उसकी वजह से धोबी किसी मुसीबत में पड़े।
Speaker A
राजकुमार दो-चार दोस्तों को साथ लेकर उसे बहाने चला गया और फेरे पड़वाकर दुल्हन को महल में ले आया।
Speaker A
बहू ने साड़ी पहन रखी थी और बड़ा सा घूंघट निकाल रखा था, जिसमें उसका चेहरा पूरी तरह छुप गया।
Speaker A
पता ही नहीं चल रहा था कि नई बहू बनकर महल में आई है।
Speaker A
राजा-रानी तो वैसे भी शामिल नहीं हुए थे।
Speaker A
बस एक राजकुमार की खास दासी थी। वही हाथ बांधे खड़ी रही कि कोई हुक्म हो तो पूरा कर दे।
Speaker A
शाम हुई तो दासी ने आकर बताया कि गाड़ी लग गई है।
Speaker A
बहू उठी और सीधी गाड़ी में जाकर बैठ गई।
Speaker A
अगले दिन सुबह उन्हीं कपड़ों में इसी तरह लिपटी हुई आई और उसी कुर्सी पर बैठ गई।
Speaker A
दिन भर न कुछ खाया, न पिया, न हिली-जुली। पत्थर की मूर्ति की तरह बैठी रही और शाम को वापस चली गई।
Speaker A
एक दिन, दो दिन, तीन दिन, पूरे छह महीने हो गए।
Speaker A
उसके रोज के काम में कोई फर्क नहीं आया।
Speaker A
जैसा राजकुमार ने सोचा था, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और राजकुमार अपनी शर्तों से बंधा हुआ था।
Speaker A
जिस चेहरे को देखकर उसने अपनी नींद और चैन त्याग दिया था, उस चेहरे की एक झलक तक देखने को नहीं मिली।
Speaker A
दरबार में लोग अलग-अलग बातें बनाने लगे। राजा-रानी सब परेशान हो गए।
Speaker A
एक दिन उसने धोबी को बुलाया और कहा, तुम अपनी बेटी को समझाते क्यों नहीं। अब वो हमारी रानी है। उसे महल में रहना चाहिए। इस तरह रोज रात को चले जाना अच्छा नहीं लगता।
Speaker A
लोग बातें बनाते हैं।
Speaker A
धोबी हाथ जोड़कर बोला, राजकुमारी की जय हो। सच बात ये है कि वो हमारी बेटी है ही नहीं। एक दिन हमारे घर पर आई और बोली, इस दुनिया में मेरा कोई नहीं।
Speaker A
मुझे अपनी बेटी बनाकर अपने घर में रख लो। हमारी कोई औलाद नहीं थी।
Speaker A
मेरी पत्नी को उसकी सुंदर सूरत भाग गई। हमने उसे घर में रखा।
Speaker A
हमारे घर में ऊपर रहने लगी। हमसे उसने उसके बाद कोई वास्ता ही नहीं रखा।
Speaker A
कहां खाती-पीती है, क्या करती है, हम कुछ नहीं जानते।
Speaker A
कभी-कभी मेरी पत्नी के पास आकर बैठ जाती है। उसे मां कहती है।
Speaker A
वो बेचारी इसी में खुश रहती है।
Speaker A
उसने हमें कसम दे रखी थी तो हम चुप रह गए। जैसा उसने कहा, वैसा ही हमने किया।
Speaker A
राजकुमार उस पर हमारा कोई जोर नहीं।
Speaker A
आप हमारी जान बख्श दें।
Speaker A
धोबी चला गया और राजकुमार अजीब सोच-विचार में पड़ गया।
Speaker A
करे तो क्या करे?
Speaker A
उसका मन हर तरफ से उचट चुका था।
Speaker A
वो माल्या पर्वत की तरफ निकल गया।
Speaker A
महीनों इधर-उधर भटकता रहा।
Speaker A
एक रात बर्फ से ढकी पहाड़ी पर रात गुजारने के लिए एक गुफा तलाश कर रहा था कि एक गुफा में कुछ रोशनी दिखाई दी।
Speaker A
डरते-डरते अंदर पहुंचा तो देखा, एक बहुत बूढ़ा आदमी पूजा कर रहा है।
Speaker A
उसकी आंखें बंद हैं। दाढ़ी और सिर के बाल बहुत ज्यादा बड़े हुए हैं।
Speaker A
पूरे शरीर और पलकों तक पर धूल जमी है।
Speaker A
एक चिराग जल रहा है जिसमें एक गज लंबी बत्ती जल चुकी है और एक गज अभी बाकी है।
Speaker A
उन्हें देखकर राजकुमार के दिल को बड़ा सुकून मिला।
Speaker A
वो भी उनके कदमों के पास बैठ गया। लेकिन उन्होंने आंखें नहीं खोली।
Speaker A
उन्होंने समाधि लगा रखी थी। उन्हें कुछ खबर नहीं थी।
Speaker A
वे ईश्वर के ध्यान में डूबे हुए थे।
Speaker A
राजकुमार वहीं रहने लगा।
Speaker A
रोज सुबह उठकर झरने से पानी लाता। योगी महाराज के हाथ-पांव धोता, बाल धोता, बालों में कंघी करता, गुफा की सफाई करता।
Speaker A
नीचे घाटी से जंगली फल-फूल तोड़कर लाता और उनसे अपना पेट भर लेता।
Speaker A
एक महीने के बाद उस योगी महाराज ने आंखें खोली तो राजकुमार को सामने हाथ जोड़े बैठे पाया।
Speaker A
राजकुमार ने उन्हें पानी पिलाया, जंगली फल-फूल खिलाए, उनके हाथ-पांव दबाए।
Speaker A
योगी महाराज बोले, बच्चा, तू राजकुमार है।
Speaker A
इस योगी की कुटिया में तेरा क्या काम है?
Speaker A
राजकुमार ये सुनकर बोला, महाराज, आप जानते हैं कि मैं राजा का बेटा हूं तो ये भी जानते होंगे कि मैं क्यों और किसलिए मारा-मारा फिर रहा हूं।
Speaker A
मेरे माता-पिता मेरे लिए परेशान होंगे पर मेरा वापस जाने का मन नहीं चाहता है।
Speaker A
वो महाराज बोले, बच्चा, योगियों से कुछ छुपा नहीं। तूने बड़ी गलती की जो उस लड़की से शादी की पर तूने हमारी इतने दिन सेवा की है तो हम तुझे खाली हाथ नहीं भेजेंगे।
Speaker A
ले, ये रख ले तू सबको देख सकेगा।
Speaker A
लेकिन तुझे कोई नहीं देख पाएगा।
Speaker A
घर जा, घर जाए तो तू ये राख माथे पर लगाकर उसके साथ चले जाना।
Speaker A
तुझे आप ये पता चल जाएगा कि वो कौन है और उसकी क्या मजबूरी है।
Speaker A
हमारी दुआएं तेरे साथ हैं। तेरे मन की मुराद जरूर पूरी होगी।
Speaker A
उस योगी महाराज ने अपने चिराग की जली हुई बत्ती की राख उसे दी, जिसे राजकुमार ने संभालकर कपड़े में बांधकर रख लिया।
Speaker A
और योगी को अलविदा कहकर चल दिया।
Speaker A
कई दिन का सफर तय करने के बाद वापस महल में पहुंचा तो इस हाल में कि कपड़े फट गए थे।
Speaker A
पांव में छाले पड़ गए थे और बहुत दुबला और कमजोर हो गया था।
Speaker A
कमरे में धोबी की लड़की उसी तरह उन्हीं कपड़ों में कुर्सी पर बैठी थी।
Speaker A
दासी राजकुमार को देखकर बहुत खुश हुई। कहने लगी, राजकुमार कहां चले गए थे और ये क्या हाल बना लिया है?
Speaker A
राजा और रानी भी लगातार आपके बारे में पूछते रहते हैं। मैं यही कह देती कि आप यात्रा पर गए हैं और ठीक है।
Speaker A
आज राजकुमार बहुत खुश था।
Speaker A
उसने गरम पानी से स्नान किया, बाल कटवाए और पेट भरकर खाना खाया।
Speaker A
उसने दासी से पूछा, क्या ये मेरे पीछे भी रोज इसी तरह आती थी?
Speaker A
दासी ने बताया कि उसके नियम में कोई फर्क नहीं आया था। वो रोज उसी तरह आती थी।
Speaker A
राजकुमार ने कहा, मैं बहुत थका हुआ हूं।
Speaker A
अब सोऊंगा। लेकिन शाम को जब ये घर जाने लगे तो मुझे जगा देना।
Speaker A
शाम को जब धोबी की लड़की के जाने का वक्त हुआ तो उस दासी ने राजकुमार को जगा दिया।
Speaker A
राजकुमार ने झट माथे पर साधु महाराज की दी हुई राख लगा ली और उसके साथ हो लिया।
Speaker A
अगले दिन सुबह-सुबह राजकुमार वापस आए और दासी से बोला, आज मैं उसी कमरे में सोऊंगा।
Speaker A
जब वो धोबी की लड़की आकर बैठ जाए तो तुम आकर मुझे जगाना और मुझसे पूछना कि दिन चढ़ गया है।
Speaker A
मैं उठता क्यों नहीं हूं। मैं जो न बताना चाहूं उसे भी जिद करके पूछना।
Speaker A
दासी समझदार थी। समझ गई कि राजकुमार का क्या मतलब है।
Speaker A
जब धोबी की लड़की आकर अपनी कुर्सी पर बैठ गई तो दासी ने आकर राजकुमार को जगाना शुरू किया।
Speaker A
राजकुमार पहले तो जागा नहीं। जब जागा तो दासी को डांटने लगा, क्या मुसीबत आ गई है? क्यों जगा दिया मुझे?
Speaker A
मैं इतना अच्छा ख्वाब देख रहा था। मेरा ख्वाब तोड़ दिया तुमने।
Speaker A
दासी खुशामद करने लगी, राजकुमार बताइए।
Speaker A
पहले तो राजकुमार उसे टालता रहा। फिर बोला, अच्छा, अब तू इतनी जिद कर रही है तो बता देता हूं।
Speaker A
मैंने सपने में देखा कि कल रात जब ये धोबी की लड़की उठकर यहां से गई तो मैं भी इसके साथ-साथ चला।
Speaker A
ये गाड़ी में बैठी तो मैं भी साथ बैठ गया।
Speaker A
सच थोड़ी ख्वाब में।
Speaker A
मैं तो ख्वाब में इसके साथ गया था।
Speaker A
दासी ने फिर पूछा, अच्छा तो फिर क्या हुआ?
Speaker A
राजकुमार कहने लगा, होना क्या था?
Speaker A
मैं जोर-जोर से घोड़ा गाड़ी हिला रहा था और ये गाड़ीवान को डांट रही थी कि आज ये कैसे गाड़ी चला रहे हो?
Speaker A
गाड़ीवान बेचारा बोला, राजकुमारी मैं तो रोज ऐसे ही चलाता हूं।
Speaker A
खैर, जैसे धोबी का घर आ गया।
Speaker A
ये धोबी की लड़की धोबी-धोबन के पास तो नहीं, सीधे चढ़कर ऊपर पहुंच गई।
Speaker A
मैं इसके साथ कमरे में आ गया।
Speaker A
क्या सजा हुआ कमरा था।
Speaker A
लगता ही नहीं था कि ये धोबी का घर है।
Speaker A
सोने-चांदी का कालीन बिछा हुआ था।
Speaker A
सोने-चांदी की कुर्सी रखी थी।
Speaker A
राजा के महल से भी ज्यादा खूबसूरती से सजा वो कमरा था। मैं भी कुर्सी पर बैठ गया।
Speaker A
दासी पूछने लगी, आप और इनके कमरे में बैठकर कैसी बातें करते हैं?
Speaker A
राजकुमार बोला, अरे सच थोड़ी।
Speaker A
ये तो सपने में था।
Speaker A
दासी ने फिर पूछा, अच्छा बताइए फिर क्या हुआ आपके सपने में?
Speaker A
राजकुमार बोला, होना क्या था?
Speaker A
इस धोबी की लड़की ने ये साड़ी जो साल भर से पहनकर आ रही है।
Speaker A
ऐसे उतारकर फेंकी जैसे किसी भिखारी की साड़ी हो और अपनी नौकरानी को देने लगी कि हमाम तैयार है।
Speaker A
दासी ने जवाब दिया, हां राजकुमारी।
Speaker A
गरम पानी तैयार है।
Speaker A
ये हमाम में घुस गई तो मैं भी इसके साथ ही उसके।
Speaker A
दासी फिर बोली, आप राजकुमार, आप इनके साथ हमाम में घुस गए।
Speaker A
क्यों बेवकूफ बनाते हैं?
Speaker A
राजकुमार बोला, ऐसा कहीं हो सकता है।
Speaker A
तू तो सब कुछ सच समझ जाती है।
Speaker A
मैं तो ख्वाब की बात कर रहा था।
Speaker A
चल, अब नहीं सुनाता तुझे ख्वाब।
Speaker A
राजकुमार रोकने लगा तो दासी ने कान पकड़े और बोली, राजकुमार सुनाइए।
Speaker A
अब नहीं बोलूंगी बीच में।
Speaker A
राजकुमार ने कहना शुरू किया, बस फिर क्या था?
Speaker A
इसने नहाना शुरू किया।
Speaker A
मैंने सोचा चलो बहुत दिन से अच्छा स्नान नहीं किया। मैं भी नहा लूं।
Speaker A
ये एक कटोरा भरकर पानी डालती।
Speaker A
मैं चार कटोरे डाल लेता। इसके शरीर का साबुन भी नहीं छूटा था कि पानी खत्म हो गया।
Speaker A
फिर तीसरी बार इसने पानी मंगवाया।
Speaker A
जैसे-तैसे ये हमाम से निकली।
Speaker A
इसी समय नौकरानी को आवाज लगाई, तुरंत खाना लगाओ।
Speaker A
बहुत भूख लगी है।
Speaker A
सारा दिन भूखा-प्यासा बैठना पड़ता है।
Speaker A
नौकरानी छत पर गई और आसमान की तरफ हाथ करके खड़ी हो गई।
Speaker A
आसमान से एक थाल उतरा, जिसमें सोने-चांदी के बर्तनों में दुनिया भर के मजेदार पकवान रखे थे।
Speaker A
नौकरानी ने अपने लिए थोड़ा खाना निकाला और बाकी थाल लाकर इसके सामने रख दिया।
Speaker A
मैंने सोचा लाओ, आज मैं भी इसके साथ खाना खा लूं।
Speaker A
कितने दिनों से जंगल-जंगल घूमते अच्छा खाना नहीं मिला था।
Speaker A
ऐसा मजेदार खाना कि क्या बताऊं।
Speaker A
एक निवाला ये खाती और चार निवाले मैं खा जाता।
Speaker A
इसका पेट भी नहीं भरा और खाना खत्म हो गया।
Speaker A
इसने फिर नौकरानी को डांट पिलाई कि दासी क्या बात है? आज तू कर क्या रही है?
Speaker A
इतना सारा खाना रखा है। मैं भूखी रह गई।
Speaker A
नौकरानी बेचारी हैरान थी। बोली, राजकुमारी मैंने उतना ही खाना आपके लिए निकाला था जितना रोज निकालती हूं।
Speaker A
लीजिए आप मेरे हिस्से का भी ले लें।
Speaker A
लेकिन आज कुछ गड़बड़ जरूर लगती है।
Speaker A
क्या राजकुमार ने आपसे बातचीत तो नहीं की?
Speaker A
इस पर ये धोबी की लड़की अपनी नौकरानी को डांटने लगी कि तेरी हिम्मत कैसे हुई ऐसी बात कहने की?
Speaker A
वो तो मुझे कभी छू भी नहीं सकता।
Speaker A
सुनो, तूने इस धोबी की लड़की ने मेरे बारे में ऐसा कहा।
Speaker A
मुझे भी गुस्सा आ गया।
Speaker A
बाकी खाना भी ये थोड़ा सा ही खा पाई और मैं सब खा गया।
Speaker A
ये भूखी रह गई। लेकिन मन ही मन हैरान हो रही थी कि मामला क्या है?
Speaker A
फिर आसमान से इसके लिए कपड़े आए।
Speaker A
इसने कपड़े बदले।
Speaker A
नौकरानी ने इसका मेकअप किया। बाल-बाल मोती गूंथे।
Speaker A
बस क्या था?
Speaker A
क्या बताओ क्या लग रही थी।
Speaker A
ये धोबी की लड़की जो यहां इस गंदी-मैली साड़ी में आकर बैठ जाती है। संवरकर ये आकर छत पर खड़ी हो गई।
Speaker A
रात के करीब आसमान से तख्ता कर उड़ने वाला सिंहासन उतरा और ये उस पर बैठ गई।
Speaker A
मैंने सोचा ये तो कुछ भी नहीं हुआ।
Speaker A
मैं भी तख्त का पाया पकड़कर लटक गया।
Speaker A
इतना कहकर राजकुमार रुक गया।
Speaker A
दासी ने इशारा किया कि धोबी की लड़की ने थोड़ा सा मुंह उनकी तरफ फेर लिया।
Speaker A
दासी पूछने लगी, राजकुमार फिर क्या हुआ?
Speaker A
राजकुमार बोला, बस ख्वाब खत्म हो गया।
Speaker A
दासी जिद करने लगी, राजकुमार सुनाइए। ऐसा अधूरा ख्वाब थोड़ी हो सकता है। बताइए फिर क्या हुआ आपके सपने में?
Speaker A
राजकुमार पहले तो टालमटोल करता रहा।
Speaker A
फिर बोला, फिर वो तख्त ऊपर ही ऊपर उठता हुआ चांद-तारों से भी ऊपर उड़ते-उड़ते परियों की दुनिया में पहुंच गया।
Speaker A
वहां राजा इंद्र की दरबार सजी हुई थी।
Speaker A
एक से बढ़कर एक खूबसूरत परियां बैठी थी।
Speaker A
ये पहुंची तो सबने उठकर जैसे ये कही कि राजकुमारी हो। ये धोबी की लड़की वहां परियों की रानी।
Speaker A
सबसे आखिर में इसके नाचने की बारी आई। ये नाचने खड़ी हुई तो मैंने सोचा अगर आज मैंने इसके नाच पर थाप नहीं दी तो कुछ नहीं किया।
Speaker A
मैंने तबला वादक से कहा, लाओ भैया तुम थक गए होंगे। थोड़ा आराम कर लो, मैं तबला बजाता हूं।
Speaker A
तबला बजाने वाले बेचारे को कोई नजर नहीं आया। लेकिन वो वाकई थक गया था। तबला छोड़कर बैठकर घूमने लगा।
Speaker A
मैंने वो तबला बजाया और मेरी थाप पर ये ऐसा नाची कि समां बंध गया।
Speaker A
राजा इंद्र ने खुश होकर अपना रेशमी रुमाल इसे इनाम में दिया। इसने झुककर रुमाल लिया।
Speaker A
सबको दिखाया और तबला बजाने वाले की तरफ चल दिया।
Speaker A
मैंने जल्दी से लेकर जेब में रख लिया।
Speaker A
कहीं यही तो रुमाल नहीं है।
Speaker A
राजकुमार बनावटी गुस्से से बोला, तू बहुत जिद्दी है। मानती नहीं ना।
Speaker A
हां, यही तो था।
Speaker A
पता नहीं मेरी जेब में कहां से आ गया।
Speaker A
धोबी की लड़की का दुपट्टा छोटा हो गया।
Speaker A
वो पूरी तरह उनकी तरफ मुड़ चुकी थी।
Speaker A
दासी ने फिर से कहा, सुनाइए राजकुमार।
Speaker A
फिर क्या हुआ?
Speaker A
राजकुमार कहने लगा, होना क्या था?
Speaker A
राजा इंद्र ने इससे दोबारा नाच करने की फरमाइश की। मैंने फिर ढोल संभाला।
Speaker A
जितना अच्छा मैंने ढोल बजाया, ये उतना ही अच्छा नाचती रही।
Speaker A
राजा इंद्र ने खुश होकर अपनी अंगूठी इनाम में दी। इसने झुककर उनके पांव छुए।
Speaker A
सबको अंगूठी दिखाई और फिर तबला बजाने वाले के पास डाल दी।
Speaker A
वो भी मैंने उठाकर जेब में रख ली।
Speaker A
फिर जिद करने लगी।
Speaker A
दिखाइए राजकुमार हमें भी दिखाइए वो कैसी अंगूठी थी।
Speaker A
राजकुमार, दासी तो बेवकूफ है।
Speaker A
अब एक चीज सही हो गई तो इत्तेफाक से इसका ये मतलब नहीं कि सब बातें निकल ही ली और पूछने लगी, राजकुमार क्या यही अंगूठी है?
Speaker A
राजकुमार बोला, अरे हां, यही तो थी।
Speaker A
लेकिन मेरी जेब में कहां से आ गई?
Speaker A
दासी ने इशारा किया।
Speaker A
धोबिन की लड़की का घूंघट ऊपर उठ चुका था। लेकिन राजकुमार और दासी ऐसे दिखा रहे थे जैसे उन्होंने देखा ही नहीं।
Speaker A
दासी ने पूछा, फिर क्या हुआ राजकुमार?
Speaker A
राजकुमार, राजकुमार मैंने भी ऐसा तबला बजाया कि जान लड़ा दी।
Speaker A
और ये भी ऐसा नाची कि जिसका जवाब पूरे परियों की दुनिया में नहीं था।
Speaker A
नाच खत्म हुआ तो राजा इंद्र उठ खड़े। राजा इंद्र दरबार से उठकर गए और ये भी भागकर उड़ान खटोली पर बैठी।
Speaker A
जल्दी में अपना ही इनाम तबला बजाने वाले से नहीं सोचा होगा कि कल ले लेगी।
Speaker A
इसे क्या पता था कि वो सब तो मेरे पास था। इसका तख्त उड़ा और मैं फिर इसके पंख से लटककर नीचे आ गया।
Speaker A
बस यहीं तक देखा था कि तूने आकर जगा दिया।
Speaker A
दासी कहने लगी, राजकुमार अब वो हार भी दिखाइए।
Speaker A
राजकुमार ने कहा, अरे दासी वो ख्वाब था।
Speaker A
हार मेरे पास कहां से आया?
Speaker A
लेकिन दासी नहीं मानी और राजकुमार की दूसरी जेब से मोतियों का हार निकालते हुए पूछा, क्या यही हार था?
Speaker A
अब तो धोबी की लड़की कुर्सी से उठकर राजकुमार के पास आ गई और बोली, राजकुमार अब तो आप जान ही गए होंगे कि मैं धोबी की लड़की नहीं हूं।
Speaker A
मैं परियों की दुनिया की एक परी हूं।
Speaker A
अब मेरी कहानी भी सुन लीजिए।
Speaker A
परियों की दुनिया में मुझसे ज्यादा अच्छी नाचने वाली और कोई नहीं थी।
Speaker A
राजा इंद्र रोज मेरा नाच देखकर ही दरबार करते थे।
Speaker A
एक रात मेरी तबीयत खराब थी। सिर में बहुत दर्द था।
Speaker A
दरबार से बुलावा आया तो मैंने मना कर दिया। लेकिन राजा को मेरे बिना चैन कहां।
Speaker A
दोबारा बुलावा आया तो मुझे गुस्सा आ गया। मैंने कह दिया, राजा से कहना इज्जत नाम की भी कोई चीज है उनके पास या नहीं।
Speaker A
यहां मैं दर्द से तड़प रही हूं और उनको अपने नाच की पड़ी है।
Speaker A
संदेश लाने वाले ने जाकर उसी तरह राजा से कहा।
Speaker A
राजा इंद्र तो गुस्से में आग बबूला हो गए। तुरंत मुझे बुलाया। मैं डरती कांपती पहुंची तो उन्होंने कहा, बड़ा नखरा हो गया है तुझे अपने आप पर।
Speaker A
जा, मैं तुझे बद्दुआ देता हूं।
Speaker A
तुझे साल भर धरती पर लड़की बनकर रहना पड़ेगा और अपनी पहचान छुपानी होगी।
Speaker A
अगर किसी को पता चल गया कि तू परी है या किसी मर्द ने तुझे छू लिया तो कभी परियों की दुनिया में वापस नहीं आ सकेगी।
Speaker A
मैं बहुत रोई, गिड़गिड़ाई, माफी मांगी।
Speaker A
राजा ने कहा, मैं अपनी बद्दुआ वापस तो नहीं ले सकता।
Speaker A
हां, इतना जरूर है।
Speaker A
तुझे रोज रात को तख्त भेजकर परियों की दुनिया में वापस बुला लिया करूंगा। लेकिन साल तुझे धरती पर ही काटना पड़ेगा।
Speaker A
मेरे पंख नोच लिए गए और मुझे धरती पर फेंक दिया गया।
Speaker A
मेरे साथ मेरी दासी को भी धरती पर आना पड़ा।
Speaker A
मैंने अपने लिए धोबी का घर पसंद किया और धोबी की लड़की बनकर रहने लगी ताकि किसी को मुझ पर शक न हो।
Speaker A
लेकिन मेरी किस्मत में आपकी सेवा करना लिखा था।
Speaker A
कल मेरी सजा का एक साल पूरा होने वाला था।
Speaker A
मुझे मेरे पंख वापस मिल जाते और मैं वापस परियों की दुनिया में चली जाती। आपको मेरी असलियत कभी पता न चलती।
Speaker A
आप यही समझते कि मैंने बेवफाई की और भाग गई।
Speaker A
लेकिन सब खत्म हो गया।
Speaker A
अब आप ही मेरे मालिक हैं और मैं आपकी नौकरानी।
Speaker A
राजकुमार ने उस लड़की की ये हैरान कर देने वाली कहानी सुनी।
Speaker A
और फिर अपनी दुल्हन को लेकर राजा और रानी के पास गया और सारी कहानी सुनाई।
Speaker A
राजा को जब पता चला कि उनकी बहू धोबी की लड़की नहीं बल्कि इंद्रलोक की अप्सरा है तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।
Speaker A
उन्होंने धूमधाम से बेटे की शादी फिर से की और खूब खुशियां मनाई।
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