माखियावेली की रणनीतियों से सीखें सेल्स, पैसे और मनोविज्ञान की कला, जो आपको सफल और प्रभावशाली बनाएगी।
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Key Takeaways
- सेल्स में सफलता के लिए आत्मविश्वास और अभिनय दोनों जरूरी हैं।
- खुद पर विश्वास और अनुशासन से ही दूसरों को प्रभावित किया जा सकता है।
- ग्राहकों की जरूरतों और दर्द को समझना और उसका समाधान देना सबसे महत्वपूर्ण है।
- संबंध और नेटवर्किंग सेल्स की नींव हैं, जो लंबे समय तक सफलता दिलाते हैं।
- भारत में विनम्रता के साथ दृढ़ता और रणनीति से काम लेना जरूरी है।
What the video covers
- भारत में अमीर बनने के असली नियमों की व्याख्या, जिसमें विनम्रता और लोहे जैसा इरादा शामिल है।
- सेल्स और मनोविज्ञान के आठ महत्वपूर्ण हथियार जो सामान्य शिक्षा में नहीं सिखाए जाते।
- पहला नियम: बिलीव और बिकम एक्टर - अपने प्रोडक्ट या सेवा पर विश्वास या अभिनय करना सीखें।
- दूसरा नियम: खुद को पहले बेचो - आत्मविश्वास और खुद पर विश्वास के बिना दूसरों को प्रभावित नहीं कर सकते।
- तीसरा नियम: पेन टू एस्केप - ग्राहक के दर्द और समस्याओं को समझकर समाधान पेश करें।
- सेल्स में परसेप्शन मैनेजमेंट और रेसिप्रोसिटी मैनपुलेशन की भूमिका।
- भारत और अमेरिका में आत्मविश्वास दिखाने के अलग-अलग सांस्कृतिक दृष्टिकोण।
- जिराड जैसे महान सेल्समैन की रणनीतियाँ और मानसिक रियल स्टेट की अवधारणा।
- सेल्स में नैतिकता और वास्तविकता के बीच संतुलन की चुनौती।
- माखियावेली की शक्ति और मनोविज्ञान आधारित रणनीतियों का आधुनिक व्यापार में उपयोग।
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Speaker A
भारत में अमीर बनने का सिर्फ एक ही असली नियम है। पैर छूना और जेब काटना। अगर तुम्हें यह सुनना बुरा लगा तो शायद तुम गलत जगह आ गए हो। लेकिन अगर तुम्हें यह समझना है कि यह दुनिया असल में कैसे काम करती है तो अगले कुछ मिनट तुम्हारी जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण मिनट होने वाले हैं। आज से पहले हर कोई तुम्हें बेच रहा था। तुम्हारा इंश्योरेंस एजेंट तुम्हें डर बेच रहा था। तुम्हारा बॉस तुम्हें उम्मीद बेच रहा था। कंपनियां तुम्हें गिल्ट और प्लेजर बेच रही थीं और सरकार तुम्हें सपने बेच रही थी। तुम सिर्फ खरीद रहे थे। तुम सिर्फ एक कंज्यूमर थे। एक शिकार थे। लेकिन आज के बाद यह बदलने वाला है। आज के बाद तुम बेचोगे। तुम शिकारी बनोगे। मैं तुम्हें वो आठ हथियार देने वाला हूं जो किसी एमबीए कॉलेज में नहीं पढ़ाए जाते। जो किसी स्कूल में नहीं सिखाए जाते। यह वो डार्क साइकोलॉजी है जिसे दुनिया के टॉप 1% लोग इस्तेमाल करते हैं लेकिन कभी स्वीकार नहीं करते। यह वीडियो अनकंफर्टेबल होगी। कुछ बातें सुनकर शायद तुम्हें अच्छा ना लगे। लेकिन अगर तुम अंत तक टिके रहे तो तुम वो इंसान नहीं रहोगे जो तुम अभी हो। शायद तुम्हारे परिवार में भी वह एक चाचा या मामा होंगे। वो रिश्तेदार जो हर शादी में मिलते हैं और अपने बेटे की तुलना तुमसे करते हैं कि हमारा बेटा तो कनाडा में है। उसका 50 लाख का पैकेज है और तुम क्या कर रहे हो? आज जो मैं तुम्हें सिखाने वाला हूं, वह तुम्हें उस चाचा को जवाब देने की ताकत देगा। शब्दों से नहीं, अपनी हैसियत से। हम बात करेंगे उन रूल्स की। कैसे एक ज्योतिषी ₹200 का पत्थर 5000 में बेचता है। 500 साल पहले निकोलो माखियावेली ने कहा था कि दुनिया नैतिकता से नहीं, दुनिया शक्ति से चलती है। और आज हम उसी शक्ति को हासिल करना सीखेंगे। चलो शुरू करते हैं। पहला नियम और शायद सबसे विवादित नियम बिलीव और बिकम एक्टर। यानी या तो यकीन करो या सबसे बड़े अभिनेता बन जाओ। हर सेल्स ट्रेनिंग में एक झूठ बोला जाता है। कहा जाता है कि जिस चीज पर तुम्हें खुद भरोसा नहीं, उसे कभी मत बेचो। सुनने में यह बहुत अच्छा लगता है। नैतिक लगता है। लेकिन यह सिर्फ आधा सच है। असली दुनिया में खासकर जब तुम करियर की शुरुआत कर रहे हो, तुम्हें हमेशा ऐसा प्रोडक्ट नहीं मिलता जिस पर तुम्हें 100% भरोसा हो। कभी-कभी नौकरी ऐसी होती है जहां प्रोडक्ट औसत होता है। कंपनी की सर्विस में कमी होती है। लेकिन तुम्हें पेट पालना है, ईएमआई भरनी है तो क्या करोगे? भूखे मरोगे? नहीं। यहां एक शब्द समझो। इंटरनल फ्रैक्चर। हिंदी में कहें तो अंदरूनी दरार। जब तुम्हारा मुंह कुछ और बोल रहा होता है और तुम्हारा दिमाग कुछ और सोच रहा होता है तो तुम्हारे शरीर में एक दरार आ जाती है। तुम्हारी आवाज कांपती है। तुम्हारी आंखें चुराती हैं और सामने वाला इंसान जिसका दिमाग लाखों सालों में झूठ पकड़ने के लिए विकसित हुआ है, वो समझ जाता है कि कुछ गड़बड़ है। वो प्रोडक्ट को रिजेक्ट नहीं करता। वो तुम्हें रिजेक्ट करता है। तो तुम्हारे पास दो रास्ते हैं। पहला रास्ता यह है कि ऐसा काम ढूंढो, ऐसा प्रोडक्ट ढूंढो जिस पर तुम्हें सच में भरोसा हो। यह सबसे अच्छा रास्ता है। लेकिन अगर अभी मजबूरी है, अगर अभी वह ड्रीम जॉब नहीं मिल रही, तो दूसरा रास्ता यह है कि इतने बड़े अभिनेता बन जाओ कि तुम्हें अपने झूठ पर भी यकीन हो जाए। मार्च का महीना याद करो। जब तुम बैंक जाते हो, वहां बैठा रिलेशनशिप मैनेजर तुम्हें इन्वेस्टमेंट प्लान बेचता है। उसे पता है कि यह प्लान तुम्हारे लिए बेस्ट नहीं है। लेकिन उसके सिर पर टारगेट की तलवार लटकी है। अगर टारगेट पूरा नहीं हुआ तो नौकरी जाएगी। उस वक्त वो इंसान इंसान नहीं रहता। वो एक एक्टर बन जाता है। इसे कमीशन का गणित कहते हैं। LIC एजेंट को पहले साल के प्रीमियम पर 20 से 40% कमीशन मिलता है। म्यूचुअल फंड में 1%, एफडी में लगभग जीरो लेकिन यूलिप में यूलिप यानी आसान भाषा में इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट की खिचड़ी। इसमें 15 से 35% इसीलिए तुम्हें वो प्रोडक्ट पुश होता है जिसमें उसका कमीशन ज्यादा है। तुम्हारा फायदा नहीं। दुनिया सच नहीं खरीदती। दुनिया कन्विक्शन खरीदती है। अगर तुम झूठ भी पूरे विश्वास के साथ बोलोगे तो लोग उसे सच मान लेंगे। लेकिन अगर तुम सच भी डरते-डरते बोलोगे तो लोग उसे झूठ मान लेंगे। लेकिन यहां एक बड़ी चेतावनी है। पहला नियम सर्वाइवल के लिए है। जब तुम संघर्ष कर रहे हो। लेकिन जो इंसान सिर्फ एक्टिंग के भरोसे रहता है, वह अंदर से खोखला हो जाता है और खोखलापन लंबे समय तक नहीं छुपता। इसीलिए आता है दूसरा नियम जो तुम्हारा फाउंडेशन है। दूसरा नियम है खुद को बेचो पहले। बहुत लोग पूछते हैं कि मेरे पास प्रोडक्ट अच्छा है, मेरी इंग्लिश भी ठीक है फिर भी लोग मुझे सीरियसली क्यों नहीं लेते? जवाब कड़वा है। लोग तुम्हें सीरियसली इसलिए नहीं लेते क्योंकि तुम खुद को सीरियसली नहीं लेते। जब तुम किसी को कहते हो कि सर यह इंश्योरेंस ले लो, फ्यूचर सिक्योर हो जाएगा। लेकिन तुम्हें खुद नहीं पता कि तुम्हारा कल क्या होगा। जब तुम किसी को डिसिप्लिन की बात करते हो लेकिन तुम खुद सुबह अलार्म बजने पर स्नूज बटन दबाते हो तो तुम्हारे सबकॉन्शियस माइंड को पता चल जाता है कि तुम भरोसे के लायक नहीं हो। कॉन्फिडेंस शीशे के सामने खड़े होकर चिल्लाने से नहीं आता। कॉन्फिडेंस आता है खुद से किए हुए छोटे-छोटे वादे पूरे करने से। जब तुम सोचते हो कि आज मैं यह काम खत्म करूंगा और तुम उसे सच में खत्म करते हो तो तुम्हारी रीड की हड्डी सीधी हो जाती है। तुम्हारी आंखों में एक अलग चमक आ जाती है। इसे ओरा कहते हैं और लोग प्रोडक्ट बाद में खरीदते हैं। पहले वह तुम्हारी ओरा खरीदते हैं। सोचो उस चाचा के बारे में। क्या वह तुम पर पैसा लगाएंगे? नहीं। क्योंकि वह तुम्हें बचपन से देख रहे हैं। वो जानते हैं कि तुम बातें बड़ी करते हो लेकिन काम छोटे करते हो। जिस दिन तुम खुद पर जीत हासिल कर लोगे, दुनिया पर जीत हासिल करना आसान हो जाएगा। लेकिन भारत में इसका एक अलग एंगल है। यहां अगर तुम ज्यादा कॉन्फिडेंस दिखाओगे, तो लोग तुम्हें घमंडी बोलेंगे। अमेरिका में सीना तान कर चलना कॉन्फिडेंस है। भारत में इसे एटीट्यूड कहा जाता है। इसीलिए यहां का गेम अलग है। पैर छूना और जेब काटना। इसका मतलब है बाहर से विनम्रता लेकिन अंदर से लोहे जैसा इरादा। तुम्हें सर सर बोलना है, झुकना है, इज्जत देनी है, लेकिन अपनी बात मनवानी है। जो इंसान सिर्फ झुकता है, वह कमजोर है। जो सिर्फ अकड़ता है, वह मूर्ख है। लेकिन जो झुक कर अपना काम निकाल लेता है, वह खिलाड़ी है। अब इससे पहले कि हम तीसरे नियम पर आएं, हमें कनेक्शन के खेल को समझना होगा। अमेरिका में एक आदमी था जो जिराड। 35 साल की उम्र तक वो एक लूजर था। 40 नौकरियां बदल चुका था। लेकिन फिर वो कार सेल्समैन बना और उसने 13,000 गाड़ियां बेचीं। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स खोलो। दुनिया का सबसे महान सेल्समैन यह टाइटल किसके नाम है? जो जिराड। उसका सीक्रेट क्या था? उसने एक चीज नोटिस की। हर इंसान की शादी या अंतिम संस्कार में औसत 100-200 लोग आते हैं। यानी हर इंसान 100-200 लोगों को जानता है। अगर तुमने एक आदमी को खुश किया तो तुमने 100-200 लोगों के दिमाग में जगह बना ली। इसे कहते हैं मेंटल रियल स्टेट यानी दिमाग में जगह बनाना। जो जिराड अपने हर कस्टमर को हर महीने एक कार्ड भेजता था। क्रिसमस पर, न्यू ईयर पर, जन्मदिन पर। उस पर सिर्फ एक लाइन लिखी होती थी। आई लाइक यू। वो उनसे प्यार नहीं करता था। लेकिन वो प्यार का नाटक इतना अच्छा करता था कि लोग उसे अपना भाई मानने लगे थे। इसे कहते हैं रेसिप्रोसिटी मैनपुलेशन यानी एहसान का फंदा। हमारे भारत में देखो तुम्हारे मोहल्ले का वो पुराना बनिया, वो दुकानदार जो 25 साल से वहीं बैठा है। उसके पास बड़ी-बड़ी डिग्री नहीं है। लेकिन वो जो जिराड से बड़ा सेल्समैन है। वो तुम्हारे बच्चे का नाम जानता है। वो तुम्हारी बीवी को भाभी जी बोलता है। वो तुम्हें याद दिलाता है कि शर्मा जी आपके घर में चीनी खत्म होने वाली होगी। भिजवा दूं क्या? वो सामान नहीं बेच रहा। वो रिश्ता बेच रहा है। और इसी तरह भारत का सबसे बड़ा सेल्समैन वो है जो शादियां करवाता है। रिश्ते वाला। वो लड़के वालों को जाकर बोलता है कि लड़की बहुत सीधी है, गाय है। लड़की वालों को बोलता है कि लड़का हीरा है, सरकारी नौकरी है। वो झूठ नहीं बोल रहा। वो बस सच को सही एंगल से दिखा रहा है। इसे कहते हैं परसेप्शन मैनेजमेंट। यानी सच को ऐसे परोसो कि वो तुम्हारे फायदे में काम करें। याद रखो सेम फैक्ट्स, डिफरेंट फ्रेमिंग, डिफरेंट रिजल्ट्स। तीसरा नियम पेन टू एस्केप यानी दर्द से छुटकारा। यहां से असली खेल शुरू होता है। ज्यादातर लोग गलती यह करते हैं कि वह फीचर्स गिनाते हैं। सर इस फोन में यह कैमरा है। सर, मैं बहुत मेहनती हूं। सर, हमारी कंपनी 20 साल पुरानी है। कस्टमर को रत्ती भर फर्क नहीं पड़ता। कस्टमर को सिर्फ एक चीज से मतलब है। उसे किस दर्द से छुटकारा मिलेगा। इस बात को अपने दिमाग में छाप लो। लोग खुशी के लिए नहीं खरीदते। लोग अपने दुख को खत्म करने के लिए खरीदते हैं। लोग फायदे के लिए नहीं खरीदते। लोग नुकसान के डर से खरीदते हैं। Scorpio गाड़ी का उदाहरण लो। भारत के गांवों में, छोटे शहरों में Scorpio का एक अलग रुतबा है। सोचो एक आदमी है जिसने जीवन भर ताने सुने। जिसके पास पैसे नहीं थे, जिसे रिश्तेदारों ने हमेशा नीचा दिखाया। वो मेहनत करता है, पैसे जोड़ता है और 20 लाख की काली स्कर्पियो खरीदता है। जब वह उस गाड़ी को लेकर अपने गांव की धूल भरी सड़क से गुजरता है। जब
Speaker A
करती है तो अगले कुछ मिनट तुम्हारी जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण मिनट होने वाले हैं। आज से पहले हर कोई तुम्हें बेच रहा था। तुम्हारा इंश्योरेंस एजेंट तुम्हें डर बेच रहा था। तुम्हारा बॉस तुम्हें उम्मीद बेच रहा था। कंपनियां तुम्हें गिल्ट और प्लेजर
Speaker A
बेच रही थी और सरकार तुम्हें सपने बेच रही थी। तुम सिर्फ खरीद रहे थे। तुम सिर्फ एक कंज्यूमर थे। एक शिकार थे। लेकिन आज के बाद यह बदलने वाला है। आज के बाद तुम बेचोगे। तुम शिकारी बनोगे। मैं तुम्हें वो
Speaker A
आठ हथियार देने वाला हूं जो किसी एमबीए कॉलेज में नहीं पढ़ाए जाते। जो किसी स्कूल में नहीं सिखाए जाते। यह वो डार्क साइकोलॉजी है जिसे दुनिया के टॉप 1% लोग इस्तेमाल करते हैं लेकिन कभी स्वीकार नहीं करते। यह वीडियो अनकंफर्टेबल होगी। कुछ
Speaker A
बातें सुनकर शायद तुम्हें अच्छा ना लगे। लेकिन अगर तुम अंत तक टिके रहे तो तुम वो इंसान नहीं रहोगे जो तुम अभी हो। शायद तुम्हारे परिवार में भी वह एक चाचा या मामा होंगे। वो रिश्तेदार जो हर शादी में
Speaker A
मिलते हैं और अपने बेटे की तुलना तुमसे करते हैं कि हमारा बेटा तो कनाडा में है। उसका 50 लाख का पैकेज है और तुम क्या कर रहे हो? आज जो मैं तुम्हें सिखाने वाला हूं, वह तुम्हें उस चाचा [संगीत] को जवाब
Speaker A
देने की ताकत देगा। शब्दों से नहीं, अपनी हैसियत से। हम बात करेंगे उन रूल्स की। कैसे एक ज्योतिषी ₹200 का पत्थर 5000 में बेचता है। 500 साल पहले निकोलो माखियावेली ने कहा था कि दुनिया नैतिकता से नहीं दुनिया शक्ति से चलती है। और आज हम उसी
Speaker A
शक्ति को हासिल करना सीखेंगे। चलो शुरू करते हैं। पहला नियम और शायद सबसे विवादित नियम बिलीव और बिकम एक्टर। यानी या तो यकीन करो या सबसे बड़े अभिनेता बन जाओ। हर सेल्स ट्रेनिंग में एक झूठ बोला जाता है।
Speaker A
कहा जाता है कि जिस चीज पर तुम्हें खुद भरोसा नहीं उसे कभी मत बेचो। सुनने में यह बहुत अच्छा लगता है। नैतिक लगता है। लेकिन यह सिर्फ आधा सच है। असली दुनिया में खासकर जब तुम करियर की शुरुआत कर रहे हो,
Speaker A
तुम्हें हमेशा ऐसा प्रोडक्ट नहीं मिलता जिस पर तुम्हें 100% भरोसा हो। कभी-कभी नौकरी ऐसी होती है जहां प्रोडक्ट औसत होता है। कंपनी की सर्विस में कमी होती है। लेकिन तुम्हें पेट पालना है, ईएमआई भरनी है तो क्या करोगे? भूखे मरोगे? नहीं। यहां
Speaker A
एक शब्द समझो। इंटरनल फ्रैक्चर। हिंदी में कहें तो अंदरूनी दरार। जब तुम्हारा मुंह कुछ और बोल रहा होता है और तुम्हारा दिमाग कुछ और सोच रहा होता है तो तुम्हारे शरीर में एक दरार आ जाती है। तुम्हारी आवाज
Speaker A
कांपती है। तुम्हारी आंखें चुराती हैं और सामने वाला इंसान जिसका दिमाग लाखों सालों में झूठ पकड़ने के लिए विकसित हुआ है वो समझ जाता है कि कुछ गड़बड़ है। वो प्रोडक्ट को रिजेक्ट नहीं करता। वो तुम्हें रिजेक्ट करता है। तो तुम्हारे पास
Speaker A
दो रास्ते हैं। पहला रास्ता यह है कि ऐसा काम ढूंढो, ऐसा प्रोडक्ट ढूंढो जिस पर तुम्हें सच में भरोसा हो। यह सबसे अच्छा रास्ता है। लेकिन अगर अभी मजबूरी है, अगर अभी वह ड्रीम जॉब नहीं मिल रही, तो दूसरा
Speaker A
रास्ता यह है कि इतने बड़े अभिनेता बन जाओ कि तुम्हें अपने झूठ पर भी यकीन हो जाए। मार्च का महीना याद करो। जब तुम बैंक जाते हो, वहां बैठा रिलेशनशिप मैनेजर तुम्हें इन्वेस्टमेंट प्लान बेचता है। उसे पता है
Speaker A
कि यह प्लान तुम्हारे लिए बेस्ट नहीं है। लेकिन उसके सिर पर टारगेट की तलवार लटकी है। अगर टारगेट पूरा नहीं हुआ तो नौकरी जाएगी। उस वक्त वो इंसान इंसान नहीं रहता। वो एक एक्टर बन जाता है। इसे कमीशन का
Speaker A
गणित कहते हैं। LIC एजेंट को पहले साल के प्रीमियम पर 20 से 40% कमीशन मिलता है। म्यूच्यूल फंड में 1% एफडी में लगभग जीरो लेकिन यूलिप में यूलिप यानी आसान भाषा में इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट की खिचड़ी। इसमें 15 से 35% इसीलिए तुम्हें वो
Speaker A
प्रोडक्ट पुश होता है जिसमें उसका कमीशन ज्यादा है। तुम्हारा फायदा नहीं। दुनिया सच नहीं खरीदती। दुनिया कन्विक्शन खरीदती है। अगर तुम झूठ भी पूरे विश्वास के साथ बोलोगे तो लोग उसे सच मान लेंगे। लेकिन अगर तुम सच भी डरते-डरते बोलोगे तो लोग
Speaker A
उसे झूठ मान लेंगे। लेकिन यहां एक बड़ी चेतावनी है। पहला नियम सर्वाइवल के लिए है। जब तुम संघर्ष कर रहे हो। लेकिन जो इंसान सिर्फ एक्टिंग के भरोसे रहता है, वह अंदर से खोखला हो जाता है और खोखलापन लंबे
Speaker A
समय तक नहीं छुपता। इसीलिए आता है दूसरा नियम जो तुम्हारा फाउंडेशन है। दूसरा नियम है खुद को बेचो पहले। बहुत लोग पूछते हैं कि मेरे पास प्रोडक्ट अच्छा है, मेरी इंग्लिश भी ठीक है फिर भी लोग मुझे सीरियसली क्यों नहीं लेते? जवाब कड़वा है।
Speaker A
लोग तुम्हें सीरियसली इसलिए नहीं लेते क्योंकि तुम खुद को सीरियसली नहीं लेते। जब तुम किसी को कहते हो कि सर यह इंश्योरेंस ले लो, फ्यूचर सिक्योर हो जाएगा। लेकिन तुम्हें खुद नहीं पता कि तुम्हारा कल क्या होगा। जब तुम किसी को
Speaker A
डिसिप्लिन की बात करते हो लेकिन तुम खुद सुबह अलार्म बजने पर स्नूज बटन दबाते हो तो तुम्हारे सबकॉन्शियस माइंड को पता चल जाता है कि तुम भरोसे के लायक नहीं हो। कॉन्फिडेंस शीशे के सामने खड़े होकर चिल्लाने से नहीं आता। कॉन्फिडेंस आता है
Speaker A
खुद से किए हुए छोटे-छोटे वादे पूरे करने से। जब तुम सोचते हो कि आज मैं यह काम खत्म करूंगा और तुम उसे सच में खत्म करते हो तो तुम्हारी रीड की हड्डी सीधी हो जाती है। तुम्हारी आंखों में एक अलग चमक आ जाती
Speaker A
है। इसे ओरा कहते हैं और लोग प्रोडक्ट बाद में खरीदते हैं। पहले वह तुम्हारी ओरा खरीदते हैं। सोचो उस चाचा के बारे में। क्या वह तुम पर पैसा लगाएंगे? नहीं। क्योंकि वह तुम्हें बचपन से देख रहे हैं। वो जानते हैं कि तुम बातें बड़ी करते हो
Speaker A
लेकिन काम छोटे करते हो। जिस दिन तुम खुद पर जीत हासिल कर लोगे, दुनिया पर जीत हासिल करना आसान हो जाएगा। लेकिन भारत में इसका एक अलग एंगल है। यहां अगर तुम ज्यादा कॉन्फिडेंस दिखाओगे, तो लोग तुम्हें घमंडी
Speaker A
बोलेंगे। अमेरिका में सीना तान कर चलना कॉन्फिडेंस है। भारत में इसे एटीट्यूड कहा जाता है। इसीलिए यहां का गेम अलग है। पैर छूना और जेब काटना। इसका मतलब है बाहर से विनम्रता लेकिन अंदर से लोहे जैसा इरादा। तुम्हें सर सर बोलना है, झुकना है, इज्जत
Speaker A
देनी है, लेकिन अपनी बात मनवानी है। जो इंसान सिर्फ झुकता है, वह कमजोर है। जो सिर्फ अकड़ता है, वह मूर्ख है। लेकिन जो झुक कर अपना काम निकाल लेता है, वह खिलाड़ी है। अब इससे पहले कि हम तीसरे
Speaker A
नियम पर आए, हमें कनेक्शन के खेल को समझना होगा। अमेरिका में एक आदमी था जो जिराड 35 साल की उम्र तक वो एक लूजर था। 40 नौकरियां बदल चुका था। लेकिन फिर वो कार सेल्समैन बना और उसने 13,000 गाड़ियां
Speaker A
बेचीं। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स [संगीत] खोलो। दुनिया का सबसे महान सेल्समैन यह टाइटल किसके नाम है? जो जिराड उसका सीक्रेट क्या था? उसने एक चीज नोटिस की। हर इंसान की शादी या अंतिम संस्कार में औसत 100 200 लोग आते हैं। यानी हर
Speaker A
इंसान 100 200 लोगों को जानता है। अगर तुमने एक आदमी को खुश किया तो तुमने 100 200 लोगों के दिमाग में जगह बना ली। इसे कहते हैं मेंटल रियल स्टेट यानी दिमाग में जगह बनाना। जो जिराड अपने हर कस्टमर को हर
Speaker A
महीने एक कार्ड भेजता था। क्रिसमस पर, न्यू ईयर पर, जन्मदिन पर। उस पर सिर्फ एक लाइन लिखी होती थी। आई लाइक यू। वो उनसे प्यार नहीं करता था। लेकिन वो प्यार का नाटक इतना अच्छा करता था कि लोग उसे अपना
Speaker A
भाई मानने लगे थे। इसे कहते हैं रेसिप्रोसिटी मैनपुलेशन यानी एहसान का फंदा। हमारे भारत में देखो तुम्हारे मोहल्ले का वो पुराना बनिया वो दुकानदार जो 25 साल से वहीं बैठा है। उसके पास बड़ी-बड़ी डिग्री नहीं है। लेकिन वो जो
Speaker A
जिराड से बड़ा सेल्समैन है। वो तुम्हारे बच्चे का नाम जानता है। वो तुम्हारी बीवी को भाभी जी बोलता है। वो तुम्हें याद दिलाता है कि शर्मा जी आपके घर में चीनी खत्म होने वाली होगी। भिजवा दूं क्या? वो
Speaker A
सामान नहीं बेच रहा। वो रिश्ता बेच रहा है। और इसी तरह भारत का सबसे बड़ा सेल्समैन वो है जो शादियां करवाता है। रिश्ते वाला। वो लड़के वालों को जाकर बोलता है कि लड़की बहुत सीधी है, गाय है। लड़की वालों को बोलता है कि लड़का हीरा
Speaker A
है, सरकारी नौकरी है। वो झूठ नहीं बोल रहा। वो बस सच को सही एंगल से दिखा रहा है। इसे कहते हैं परसेप्शन मैनेजमेंट। यानी सच को ऐसे परोसो कि वो तुम्हारे फायदे में काम करें। याद रखो सेम फैक्ट्स
Speaker A
डिफरेंट फ्रेमिंग डिफरेंट रिजल्ट्स। तीसरा नियम पेन टू एस्केप यानी दर्द से छुटकारा। यहां से असली खेल शुरू होता है। ज्यादातर लोग गलती यह करते हैं कि वह फीचर्स गिनाते हैं। सर इस फोन में यह कैमरा है। सर, मैं
Speaker A
बहुत मेहनती हूं। सर, हमारी कंपनी 20 साल पुरानी है। कस्टमर को रत्ती भर फर्क नहीं पड़ता। कस्टमर को सिर्फ एक चीज से मतलब है। उसे किस दर्द से छुटकारा मिलेगा। इस बात को अपने दिमाग में छाप लो। लोग खुशी
Speaker A
के लिए नहीं खरीदते। लोग अपने दुख को खत्म करने के लिए खरीदते हैं। लोग फायदे के लिए नहीं खरीदते। लोग नुकसान के डर से खरीदते हैं। Scorpio गाड़ी का उदाहरण लो। भारत के गांवों में, छोटे शहरों में Scorpio का एक
Speaker A
अलग रुतबा है। सोचो एक आदमी है जिसने जीवन भर ताने सुने। जिसके पास पैसे नहीं थे जिसे रिश्तेदारों ने हमेशा नीचा दिखाया। वो मेहनत करता है, पैसे जोड़ता है और 20 लाख की काली स्कर्पियो खरीदता है। जब वह
Speaker A
उस गाड़ी को लेकर अपने गांव की धूल भरी सड़क से गुजरता है। जब वो हॉर्न बजाता है और जब वो उन्हीं रिश्तेदारों के घर के सामने से निकलता है जिन्होंने उसे नकारा बोला था और उनके चेहरों पर दो जलन देखता
Speaker A
है। उसे वो ठंडक मिलती है जो ईसी की हवा में नहीं है। उसने गाड़ी नहीं खरीदी। उसने इज्जत खरीदी है। उसने बदला खरीदा है। उसने अपनी हीन भावना से छुटकारा खरीदा है। यही लॉजिक जिम पर लागू होता है। जिम जाने वाला
Speaker A
लड़का हेल्थ नहीं खरीद रहा। वो उस अपमान का बदला खरीद रहा है जो उसे किसी लड़की से मिला था। वो उन दोस्तों को जवाब देना चाहता है जो उसे मोटू बुलाते थे। और इसका सबसे खतरनाक उदाहरण है भारत के ज्योतिषी।
Speaker A
उनके पास क्या प्रोडक्ट है? एक पत्थर की अंगूठी जिसकी कीमत शायद ₹200 होगी। लेकिन वो उसे 5000, 10,000 या 500 में बेचते हैं। कैसे? जब तुम उनके पास जाते हो, तुम परेशान होते हो। वो तुम्हारी कुंडली देखते हैं। माथे पर बल डालते हैं और सिर्फ तीन
Speaker A
शब्द बोलते हैं। शनि भारी है बस। तुम्हारे अंदर का सारा डर जाग जाता है। और फिर वह कहते हैं, घबराओ मत। यह नीलम पहन लो, सब ठीक हो जाएगा। उस वक्त तुम यह नहीं पूछते कि पत्थर असली है या नकली। तुम चुपचाप
Speaker A
[संगीत] पैसे देते हो। उन्होंने तुम्हें पत्थर नहीं बेचा। उन्होंने तुम्हें तुम्हारे डर से एस्केप बेचा। एक और उदाहरण। ज्वेलर्स की दुकान पर लिखा होता है 0% मेकिंग चार्ज। तुम खुश हो जाते हो कि वाह फ्री में बन रहा है। लेकिन असल में
Speaker A
क्या होता है? वो गोल्ड रेट पर ग्राम बढ़ा देता है। मार्केट में 6000 है तो वो 6500 बोलता है। प्योरिटी कम कर देता है। स्टोन सेटिंग चार्जेस अलग से लगाता है। एंड में तुम 0% मेकिंग चार्ज के चक्कर में ज्यादा
Speaker A
पैसे देकर आते हो। तुम्हें फ्री सुनना था। उसने फ्री सुना दिया। निर्मा का उदाहरण लो। कर्सन भाई पटेल एक सरकारी कर्मचारी ₹300 महीना साइकिल पर पाउडर बेचते थे। उन्होंने क्या बेचा? लोग कहते हैं उन्होंने सस्ता पाउडर बेचा? नहीं।
Speaker A
उन्होंने मिडिल क्लास औरतों को इज्जत बेची, डिग्निटी बेची। उस जमाने में सिर्फ अमीर लोग महंगा सर्फ इस्तेमाल करते थे। गरीब औरतें सस्ता साबुन घिसती थी जिससे हाथ फट जाते थे। कर्सन भाई ने उन्हें वह एहसास बेचा कि अब तुम भी वही सफेदी ला
Speaker A
सकती हो जो अमीर घरों में आती है और तुम्हारे हाथ भी खराब नहीं होंगे। उन्होंने उनके फटे हुए हाथों के दर्द का इलाज बेचा और आज वह 5000 करोड़ के मालिक हैं। तो अगली बार जब तुम कुछ बेचने जाओ
Speaker A
चाहे वह कोई प्रोडक्ट हो या इंटरव्यू में खुद को बेचना हो। यह मत बताओ कि तुम कितने अच्छे हो। यह ढूंढो कि सामने वाले का दर्द क्या है? उसका डर क्या है? वो रात को किस टेंशन की वजह से सो नहीं पाता और फिर अपने
Speaker A
प्रोडक्ट को उस दर्द की एकमात्र दवा बनाकर पेश करो। चौथा नियम रिस्पेक्टफुल मैनपुलेशन यानी सम्मान के साथ अपना काम निकलवाना। यह नियम खासतौर पर भारत के लिए है। पश्चिमी देशों की किताबों में सेल्स की वीडियो में तुम्हें सिखाया जाता है कि
Speaker A
डोमिनेंस दिखाओ। आंखों में आंखें डालकर बात करो। पावर पोजीशन में बैठो। अगर तुमने यह गलती भारत में की तो तुम्हारा गेम ओवर है। भारत में हायरार्की यानी ओदे का बहुत महत्व है। बॉस बड़ा है, क्लाइंट बड़ा है, कस्टमर भगवान है। अगर तुम उनके सामने अकड़
Speaker A
दिखाओगे, तो वह तुम्हें एटीट्यूड वाला समझेंगे, घमंडी समझेंगे और तुम्हें बाहर का रास्ता दिखा देंगे। तो भारत का फार्मूला क्या है? सामने वाले को राजा महसूस कराओ लेकिन राज तुम करो। डॉक्टर को देखो जब तुम डॉक्टर के पास जाते हो वो तुम
Speaker A
पर चिल्लाता नहीं है। वो शांति से बात करता है। लेकिन जब वह पर्चा लिख देता है तो तुम सवाल नहीं करते। तुम चुपचाप दवाई लेते हो। इसे कहते हैं अथॉरिटी। अकड़ में अहंकार होता है। अथॉरिटी में ज्ञान होता
Speaker A
है। तुम्हें अकड़ नहीं दिखानी अथॉरिटी बनानी है। एक तकनीक बताता हूं जिसे कहते हैं फोर्सिंग क्वेश्चन यानी फंसाने वाला सवाल। मान लो तुम्हें अपने बॉस से कोई बात मनवानी है। अगर तुम सीधा बोलोगे कि सर यह करना चाहिए तो उसकी ईगो हर्ट हो जाएगी। वो
Speaker A
सोचेगा कि कल का आया लड़का मुझे सिखाएगा। इसके बजाय यह बोलो सर आपकी बात 100% सही है। लेकिन अगर हम यह नहीं करेंगे तो यह नुकसान हो सकता है। अब आप ही बताइए सर कि हमें क्या करना चाहिए? ध्यान से देखो
Speaker A
तुमने क्या किया। तुमने पहले उसकी ईगो को मसाज किया। फिर डर घुसाया और फिर फैसला उस पर छोड़ दिया। अब वह वही फैसला लेगा जो तुम चाहते हो। लेकिन उसे लगेगा कि फैसला उसका है। इसी तरह जब तुम कार खरीदने जाते
Speaker A
हो, डीलर तुम्हें कॉफी पिलाता है, सर सर बोलता है, टेस्ट ड्राइव कराता है, तुम्हें राजा जैसा फील कराता है। लेकिन जब डील क्लोज करने की बारी आती है, तो वह तुम्हें इंश्योरेंस चिपका देता है। तुम्हें पता है कार डीलर को कार बेचने पर सिर्फ 4 से 7%
Speaker A
प्रॉफिट मिलता है। लेकिन इंश्योरेंस बेचने पर उसे 19 से 22% प्रॉफिट मिलता है। एक्सटेंडेड वारंटी पर 50% तक। उसका असली इंटरेस्ट कार बेचना नहीं है। उसका असली इंटरेस्ट तुम्हें इंश्योरेंस बेचना है। और वो यह इतनी मिठास से करता है कि तुम्हें
Speaker A
पता भी नहीं चलता। एक और ट्रिक है फैमिली प्राइस गिल्ट ट्रैप। तुम किसी दुकान पर गए बारगेन कर रहे हो। दुकानदार बोलता है भाई तुम तो फैमिली जैसे हो। तुम्हें वो रेट थोड़ी दूंगा जो बाहर वालों को देता हूं।
Speaker A
यह तो स्पेशल प्राइस है। अब तुम क्या सोचते हो? अरे यह तो बहुत अच्छा आदमी है और तुम बारगेनिंग करना बंद कर देते हो क्योंकि अब ज्यादा मोलभाव करोगे तो बेशर्म लगोगे। यही गिल्ट ट्रैप है। वो तुम्हारी बारगेनिंग पावर खत्म कर रहा है। यही गेम
Speaker A
प्रॉपर्टी डीलिंग में चलता है। यही गेम सरकारी दफ्तरों में चलता है। सामने वाले को इज्जत दो। उसे बड़ा महसूस कराओ और फिर धीरे से अपनी बात मनवा लो। पांचवा नियम नो इज इक्वल टू इंफॉर्मेशन। यानी ना का मतलब
Speaker A
रिजेक्शन नहीं है। ना का मतलब जानकारी है। यह उस शब्द के बारे में है जिससे हर कोई डरता है। ना तुमने सब कुछ सही किया। फिर भी कस्टमर्स ने कहा नहीं चाहिए महंगा है। सोच कर बताऊंगा। 90% लोग यहां टूट जाते
Speaker A
हैं। वह घर जाकर सोचते हैं कि शायद मेरी किस्मत ही खराब है। लेकिन एक प्रोफेशनल सेल्समैन के लिए ना सुनना सिर्फ प्रोसेस का एक हिस्सा है। जैसे डॉक्टर को मरीज के घाव देखकर उल्टी नहीं आती वैसे ही मास्टरमाइंड को ना सुनकर गुस्सा नहीं आता।
Speaker A
जब कोई कहता है महंगा है तो वह यह नहीं कह रहा कि उसके पास पैसे नहीं है। वह बस यह कह रहा है कि मुझे अभी तक यकीन नहीं हुआ कि यह चीज इतने पैसे के लायक है। जब कोई
Speaker A
कहता है पापा से पूछ कर बताऊंगा या सीए से पूछना पड़ेगा तो यह सिर्फ बहाने हैं। तुम्हारा काम है इन बहानों को चीर कर असली वजह बाहर निकालना। उससे पूछो सर बिल्कुल सही बात है। पापा से पूछना जरूरी है।
Speaker A
लेकिन अगर पापा हां बोल दें तो क्या आपको और कोई दिक्कत तो नहीं है? अब वह फंस गया। अब या तो वह असली वजह बताएगा या वह हां बोलेगा। छठा नियम बेशर्म नहीं बेखौफ। यह वो दीवार है जहां 99% भारतीय फेल हो
Speaker A
जाते हैं। पैसा मांगना हमारी परवरिश में हमें सिखाया जाता है कि पैसे की बात करना गंदी [संगीत] बात है। अपनी तारीफ करना घमंड है। इसी शर्म की वजह से दुकानदार डील क्लोज करते-करते रुक जाता है। एंप्लई साल भर मेहनत करता है लेकिन प्रमोशन के वक्त
Speaker A
उसका गला सूख जाता है। और नतीजा क्या होता है? जो मांगते नहीं उन्हें मिलता नहीं। दुनिया तुम्हें वो नहीं देती जिसके तुम लायक हो। दुनिया तुम्हें वो देती है जो तुम नेगोशिएट करते हो। जो तुम डिमांड करते हो। तुम्हें बेशर्म नहीं बनना है। तुम्हें
Speaker A
बेखौफ बनना है। बेशर्म वो है जिसे गलत काम करने में शर्म नहीं आती। बेखौफ वो है जिसे सही चीज मांगने में डर नहीं लगता। क्लोजिंग करते वक्त इस तकनीक का इस्तेमाल करो। सीधा मत बोलो कि खरीद लो। बोलो सर
Speaker A
आगे कैसे बढ़ें? या बोलो सर अगर सब ठीक लगा हो तो कब से शुरू करें? तुमने यह नहीं पूछा कि लोगे या नहीं। तुमने पूछा कब से शुरू करें? इसे कहते हैं अस्यूम्ड क्लोज। यानी मान लेना कि डील हो गई है। और एक
Speaker A
गोल्डन रूल जब तुम अपना प्राइस बता दो या अपनी डिमांड रख दो उसके बाद चुप हो जाओ। एक शब्द मत बोलो। बहुत लोग प्राइस बताने के बाद घबरा जाते हैं और सफाई देने लगते हैं। सर 500 है लेकिन इसमें यह भी है वो
Speaker A
भी है। डिस्काउंट भी दे दूंगा। तुम जितनी सफाई देते हो, उतनी [संगीत] अपनी वैल्यू गिराते हो। प्राइस बोलो और चुप हो जाओ। खामोशी को काम करने दो। सातवां नियम प्रैक्टिस इज ग्रेटर दन टैलेंट। यानी अभ्यास टैलेंट से बड़ा है। ज्यादातर लोग
Speaker A
बड़ी मीटिंग में राम भरोसे जाते हैं। सोचते हैं कि वहां जाऊंगा, माहौल देखूंगा और बात कर लूंगा, इंप्रोवाइज कर लूंगा। यह बेवकूफी है। विराट कोहली मैच वाले दिन सीधे बैट उठाकर स्टेडियम में नहीं घुस जाता। वो नेट प्रैक्टिस में पसीना बहाता
Speaker A
है। तब जाकर मैदान पर चौके लगते हैं। एक उदाहरण देता हूं जो तुम रोज देखते हो लेकिन ध्यान नहीं देते। उस लड़के को देखो जो लोकल ट्रेन में सामान बेचता है [संगीत] या वो जो बस में चिप्स, कुरकुरे, जूस
Speaker A
बेचता है या मेट्रो में चार्जर। उसे देखो ध्यान से। वो सेम लाइन बोलता है। सेम रिदमम में, सेम टोन में, दिन में 500 बार, वर्ड बाय वर्ड सेम, हर बार, हर कोच में, हर ट्रेन में। अब सोचो वो उस ट्रेन में
Speaker A
बैठा आदमी जो WhatsApp पे अपने बॉस को सफाई दे रहा है, उनमें ज्यादा कौन कमाता है? बहुत बार वो सामान बेचने वाला। क्यों?
Speaker A
क्योंकि उसकी स्क्रिप्ट रटी हुई है। उसे सोचना नहीं पड़ता। रिफ्लेक्स बन गया है। कोई भी रिएक्शन आए उसके पास जवाब रेडी है। कस्टमर बोले महंगा है। वो बोले भाई ₹10 में तो चाय नहीं मिलती। यह तो ब्रांडेड जूस है। कस्टमर इग्नोर करे वो अगले के पास
Speaker A
चला जाए। कोई इमोशन नहीं, कोई हर्ट नहीं। यही है प्रोफेशनल सेलिंग। [संगीत] तुम्हारे मोहल्ले का वो सबसे सफल दुकानदार देखो। वो रोज नया नहीं बोलता। वो रटी रटाई बातें बोलता है। शर्मा जी, यह तो आपके लिए ही रखा था। मैडम, इसमें तो आज तक कोई
Speaker A
कंप्लेंट नहीं आई। भाई, यह तो बेस्ट क्वालिटी है। मैं खुद यही यूज करता हूं। सेम लाइंस, सेम टोन हर कस्टमर के साथ। क्योंकि यह लाइनें काम करती हैं। आज के डिजिटल जमाने में भी यही नियम है। अगर तुम
Speaker A
Instagram पर डीएम कर रहे हो या Lindin पर किसी को अप्रोच कर रहे हो तो हाय हेलो लिखकर टाइम वेस्ट मत करो। हुक, पेन और सॉल्यूशन। सर, मैंने आपकी प्रोफाइल देखी। मुझे लगता है आप इस प्रॉब्लम से जूझ रहे
Speaker A
हैं। मेरे पास इसका यह सॉल्यूशन है। क्या हम बात कर सकते हैं? पहले मैसेज में सेलिंग मत करो। क्यूरियोसिटी पैदा करो। कनेक्शन बनाओ। सेलिंग बाद में होगी। तो विंग इट करना बंद करो। तुक्का मारना बंद करो। अपनी स्क्रिप्ट लिखो। हर ऑब्जेक्शन
Speaker A
की लिस्ट बनाओ कि अगर क्लाइंट ने यह बोला तो मैं क्या बोलूंगा? अगर बॉस ने यह पूछा तो मैं क्या जवाब दूंगा। उसे शीशे के सामने प्रैक्टिस करो। इतना रटो कि वो तुम्हारे सबकॉन्शियस में चला जाए। आठवां और आखिरी नियम, स्ट्रेटेजिक साइलेंस यानी
Speaker A
खामोशी का हथियार। पश्चिमी देशों में कहते हैं कि चुप रहो और घूरते रहो, डोमिनेट करो। लेकिन अपने देश में ऐसा मत करना वरना लोग समझेंगे कि तुम में एटीट्यूड है। इंडिया में फार्मूला है चुप्पी प्लस विनम्रता इज इक्वल टू पावर। मतलब तुम शांत
Speaker A
हो, कॉम हो। बहुत ज्यादा नहीं बोल रहे लेकिन जब बोल रहे हो रिस्पेक्टफुल हो। सर बोल रहे हो, जी बोल रहे हो। बॉडी लैंग्वेज में एोगेंस नहीं है, लेकिन आंखों में कॉन्फिडेंस है, क्लेरिटी है, थोड़ी सी आग है। यह कॉम्बिनेशन डेडली है। जब तुम अपना
Speaker A
प्राइस बता दो या जब तुम अपनी डिमांड रख दो, उसके बाद बकबक मत करो। सही तरीका यह है। सर, इसका प्राइस 5,00 है। उसके बाद चुप हो जाओ। एक शब्द मत बोलो। सिर्फ आंखों में कॉन्फिडेंस रखो और चेहरे पर हल्की सी
Speaker A
मुस्कान। इंसान के दिमाग को खामोशी बर्दाश्त नहीं होती। वो उस खामोशी को भरने के लिए कुछ ना कुछ बोलेगा और अक्सर वो हां बोलेगा या वो अपनी असली ऑब्जेक्शन बताएगा जो तुम्हारे लिए यूज़फुल इंफॉर्मेशन है। लेकिन अगर तुम उस साइलेंस से डर गए अगर 5
Speaker A
सेकंड की चुप्पी तुम्हें अनकंफर्टेबल लगी और तुम खुद ही बोल पड़े सर अगर 500 ज्यादा लग रहे हैं तो 45,000 में कर दूंगा तो गेम ओवर। तुमने खुद ही बता दिया कि तुम्हारे प्राइस में दम नहीं था। तुमने खुद ही अपने
Speaker A
पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। एक और बात जो ज्यादा बोलता है उसकी वैल्यू कम होती है। जो कम बोलता है और सोच समझ कर बोलता है लोग उसे सुनने के लिए तरसते हैं। यह नेटवर्क बनाने का भी सीक्रेट है। जो हर
Speaker A
मीटिंग में सबसे ज्यादा बोलता है उसकी बात कितनी सीरियसली ली जाती है कम। लेकिन जो चुप रहता है और जब बोलता है तो सब सुनते हैं उसकी वैल्यू ज्यादा है। साइलेंस क्रिएट्स मिस्ट्री और मिस्ट्री अट्रैक्ट्स फॉलोअर्स। एक मिस्ट्री क्रिएट करो। सब कुछ
Speaker A
मत बता दो। थोड़ा सस्पेंस रहने दो। जो हमेशा अवेलेबल है उसकी वैल्यू कम। जो थोड़ा हार्ड टू रीड है उसके पीछे लोग भागते हैं। तो यह थे वो आठ नियम, वो आठ हथियार। अगली बार जब वो चाचा तुमसे पूछे
Speaker A
कि बेटा सैलरी कितनी है? तो तुम्हारे पास जवाब होगा, या तो शब्दों में या तुम्हारी आंखों में। जिसे देखकर वह समझ जाएंगे कि यह अब वो बच्चा नहीं रहा जिसे हम नीचा दिखा सकते थे। अगर तुम छोटे शहर से हो,
Speaker A
हिंदी मीडियम से हो, गांव से हो तो इसे अपनी कमजोरी मत बनाओ। इसे अपनी ताकत बनाओ। तुम्हारे पास खोने को कुछ नहीं है। और जिसके पास खोने को कुछ नहीं होता, वो सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। एक भूखा भेड़िया
Speaker A
भरे पेट वाले शेर से ज्यादा खतरनाक होता है। तुम वो भेड़िया हो। अब शिकार पर निकलो। अपनी शक्ल भोली रखो लेकिन अपना दिमाग खतरनाक रखो। अब तुम्हारी बारी है। हम्म
Topics:माखियावेलीसेल्स टिप्सडार्क साइकोलॉजीपैसे कमाने के नियममनोरंजन और मनोविज्ञानभारत में सेल्सआत्मविश्वासपरसेप्शन मैनेजमेंटरिश्ते और नेटवर्किंगव्यापार रणनीति











