प्रशांत किराड के साथ 30 सेकंड में फोकस बढ़ाने के 5 वैज्ञानिक तरीके और फोकस की महत्ता समझें।
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Key Takeaways
- फोकस की कमी आज की बड़ी समस्या है जिसे बढ़ाया जा सकता है।
- सही बॉडी पोस्चर और नियंत्रित सांस लेने से फोकस में सुधार होता है।
- डोपामिन रिवॉर्ड सिस्टम को समझकर फोकस बढ़ाने के तरीके अपनाए जा सकते हैं।
- स्क्रीन टाइम कम करना फोकस सुधारने के लिए जरूरी है।
- फोकस सही दिशा में लगाना जीवन की समस्याओं का समाधान है।
What the video covers
- फोकस पावर आज के समय में बहुत कम हो गई है, जिसकी वजह से ध्यान केंद्रित करना मुश्किल होता है।
- डोपामिन रिवॉर्ड सिस्टम और DMN (डिफॉल्ट मोड नेटवर्क) की भूमिका फोकस में बाधा डालती है।
- फोकस बढ़ाने के लिए पांच वैज्ञानिक स्टेप्स बताए गए हैं, जिनमें पहला स्टेप है सही बॉडी पोस्चर।
- सीधा बैठने से फोकस 40-50% तक बढ़ सकता है क्योंकि इससे स्ट्रेस हार्मोन कम रिलीज होते हैं।
- धीरे-धीरे सांस लेने की तकनीक (कंट्रोल्ड ब्रीथिंग) फोकस बढ़ाने में मदद करती है।
- स्क्रीन टाइम की अधिकता फोकस को कम करती है, इसलिए इसे नियंत्रित करना जरूरी है।
- फोकस की कमी से जीवन की कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं, लेकिन सही दिशा में फोकस से ये समस्याएं हल हो सकती हैं।
- एक प्रेरणादायक कहानी के माध्यम से बताया गया कि फोकस से कैसे जीवन की चुनौतियां पार की जा सकती हैं।
- फोकस बढ़ाने के लिए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों फेस में काम करना आवश्यक है।
- साइंटिफिक रिसर्च के आधार पर फोकस बढ़ाने के उपाय और उनके फायदे समझाए गए हैं।
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Speaker A
चलो, अगले कुछ सेकंड्स के अंदर आपके फोकस को टेस्ट करते हैं।
Speaker A
अभी आपके स्क्रीन के ऊपर मैं एक-एक करके सात डिफरेंट-डिफरेंट चीजों के नाम लूंगा।
Speaker A
और आपको इन सातों चीजों को याद करना होगा, चलो देखते हैं कितने लोगों की फोकस पावर कितनी स्ट्रांग है।
Speaker A
सबसे पहले, Apple।
Speaker A
सेकंड, Train।
Speaker A
थर्ड, Market।
Speaker A
फोर्थ, Banana।
Speaker A
फिफ्थ, School।
Speaker A
सिक्स्थ, Camera।
Speaker A
एंड सेवंथ, Garden।
Speaker A
टाइम आपका होता है समाप्त।
Speaker A
अब ना मेरा एक सवाल है आपसे, आपको ये बताना है कि गार्डन से पहले मैंने क्या वर्ड बताया था?
Speaker A
अब ये जो वर्ड है ना, आप में से 70-80% लोगों ने इजीली बता दिया होगा, क्योंकि इतनी बेसिक फोकस पावर तो सबकी होती है।
Speaker A
लेकिन अगर मैं तुमसे ये बोलूं कि आपको जितने भी मैंने वर्ड्स बताए उन वर्ड्स को उल्टे ऑर्डर में दोहराना है, सात के सात वर्ड्स, तो क्या आप ये आंसर दे पाओगे?
Speaker A
आप में से सिर्फ 10% लोग इसका जवाब दे पाएंगे।
Speaker A
पता है क्यों? क्योंकि आज के समय पर हमारी फोकस पावर बहुत कम हो चुकी है।
Speaker A
एक रिसर्च के हिसाब से तो हमारी जो फोकस स्पैन है वो 8 सेकंड से भी कम हो चुका है।
Speaker A
यानी अगर आप 8 सेकंड कोई काम करोगे ना,
Speaker A
उसके बाद आपका जो मन है उस काम से हटने लगेगा और आप अपने मोबाइल की तरफ भागने लगोगे।
Speaker A
और यही बन गई है आज के समय की रियलिटी।
Speaker A
जो कि है लो फोकस।
Speaker A
अब सवाल ये आता है क्या सच में इस लो फोकस को इनक्रीस किया जा सकता है?
Speaker A
तो आंसर है हां।
Speaker A
मैं आपको पांच ऐसे स्टेप्स बताऊंगा जिसकी मदद से आप कम समय के अंदर अपने फोकस को बहुत हद तक इनक्रीस कर सकते हो।
Speaker B
First thing I do is I'll ask बच्चों के साथ कि भई अपना स्क्रीन टाइम दिखाओ।
Speaker B
तो स्क्रीन टाइम देखते ही आपको समझ में आ जाएगा।
Speaker B
बच्चों को रियलाइजेशन ही नहीं होता जैसे कई बार होता है कि 8 घंटे, 8 घंटे का स्क्रीन टाइम।
Speaker B
7 घंटे का, 10 घंटे का स्क्रीन टाइम।
Speaker B
तो पहले तो ये रियलाइज हो जाए ना कि हमारा कितना समय हम फोन पे हैं।
Speaker C
तुम लोग कैसे बैठ लेते हो यार इतनी देर?
Speaker C
मैं तो थोड़ी देर में थक जाता हूं।
Speaker A
हाय एवरीवन, मेरा नाम है प्रशांत।
Speaker A
फोकस, ये एक ऐसा सीक्रेट है ना जिसकी मदद से आप अपने लाइफ की 99 प्रॉब्लम्स का सलूशन निकाल सकते हो।
Speaker A
तुमको शौक लग रहा होगा ना कि आखिर फोकस से हमारी लाइफ की प्रॉब्लम का क्या रिलेशन है?
Speaker A
तो इसी रिलेशन को समझाने के लिए मैं आपको एक छोटी सी स्टोरी समझाता हूं।
Speaker A
एक बार एक बहुत इंटेलिजेंट लड़का था, लेकिन उस लड़के के साथ ना लाइफ में बहुत सारी प्रॉब्लम्स थी।
Speaker A
क्योंकि उसके पापा नहीं थे।
Speaker A
उसके साथ ही सिर्फ उसकी मम्मी।
Speaker A
अब उसकी मम्मी काम करती थी तो वो जो लड़का था वो था तो छोटी क्लास के अंदर लेकिन फिर भी वो अपनी मम्मी की मदद किया करता था।
Speaker A
सुबह उठता था, मम्मी की मदद करता था, उसके बाद जाता था वो स्कूल, स्कूल से घर आता था और उसके बाद घर के भी काम किया करता था।
Speaker A
और फिर रात को थोड़ा बहुत उसे टाइम मिलता था तो वो पढ़ लेता था।
Speaker A
एक बार क्या होता है ना, क्योंकि उसे समय नहीं मिल पाता पढ़ने का,
Speaker A
तो वो एक सब्जेक्ट में फेल हो जाता है।
Speaker A
और जब वो फेल होता है ना तो उसके आसपास के उसके जितने भी दोस्त थे ना वो सब दोस्त उसका मजाक उड़ाने लगते हैं।
Speaker A
उससे बोलने लगते हैं कि अरे तू तो फेल हो गया तू तो डफर है।
Speaker A
वो ना बहुत परेशान हो जाता है, वो अपने टीचर के पास भागा-भागा जाता है और अपने टीचर से ये बोलता है।
Speaker A
कि सर ना मैं हार चुका हूं।
Speaker A
मुझे स्कूल नहीं आना।
Speaker A
मैं कल से स्कूल आना बंद कर दूंगा।
Speaker A
उसके टीचर पता है क्या जवाब देते हैं?
Speaker A
ठीक है, तू कल से स्कूल मत आना लेकिन बस कल मेरा एक काम कर देना।
Speaker A
तो वो बच्चा पूछता है कि आखिर क्या काम है?
Speaker A
तो टीचर ये बोलते हैं कि तुझे ना एक ग्लास के अंदर जो दूध है वो दूध पूरा फुल करना है उस ग्लास को और उसको स्कूल तक लेके आना है बस एक शर्त है।
Speaker A
कि उस दूध की एक बूंद भी नीचे नहीं गिरनी चाहिए मतलब रास्ते में ना एक बूंद नहीं गिरनी चाहिए ध्यान से लाना उसको और पूरे का पूरा दूध स्कूल तक लेके आना।
Speaker A
वो कहता है ठीक है मैं ऐसा कर दूंगा।
Speaker A
अगले दिन वो एकदम कंसंट्रेशन के साथ धीरे-धीरे-धीरे चलता आता है दूध की तरफ उसका फोकस होता है और वो अपने सर को वो दूध पकड़ा देता है।
Speaker A
फिर उसके सर पता है उससे क्या पूछते हैं?
Speaker A
कि आज जब तू रास्ते में आ रहा था तुझे तेरे दोस्त मिले थे?
Speaker A
तो वो बोलता है हां सर मिले तो थे।
Speaker A
तो उन्होंने आज तेरे बारे में तुझसे कुछ नहीं बोला?
Speaker A
तो वो लड़का मुस्कुराता है और बोलता है सर बोला होगा बट मेरा ध्यान तो आज इस दूध को लाने में था ना।
Speaker A
मेरा सारा फोकस यहां पर था ना।
Speaker A
और तभी उसके सर मुस्कुराते हैं और बोलते हैं।
Speaker A
कि जब आपका फोकस सही डायरेक्शन में होता है ना तो लाइफ की सारी प्रॉब्लम्स खत्म हो जाती हैं यानी गायब हो जाती हैं।
Speaker A
और यही चीज मैं आपको बताना चाहता हूं।
Speaker A
अगर आपने फोकस की पावर को समझ लिया, फोकस लगाना सीख लिया तो अभी आपकी लाइफ की कितनी भी प्रॉब्लम्स है वो खत्म हो जाएगी।
Speaker A
आपका सिर्फ और सिर्फ फोकस होगा आपकी गोल की तरफ आपके लक्ष्य की तरफ।
Speaker A
बट रियलिटी ये है कि फोकस इनक्रीस कैसे करें?
Speaker A
पांच स्टेप हैं।
Speaker A
लेकिन पांच स्टेप को समझाने से पहले साइंटिफिकली ये समझते हैं।
Speaker A
कि आखिर हम चीजों पे फोकस क्यों नहीं कर पाते?
Speaker A
हम इतना डिस्ट्रैक्टेड क्यों हो जाते हैं?
Speaker A
तो देखो इसके लिए आपको सबसे पहले एक साइंस का कांसेप्ट समझना पड़ेगा।
Speaker A
डोपामिन रिवॉर्ड सिस्टम।
Speaker A
हमारे दिमाग के अंदर एक केमिकल होता है डोपामिन।
Speaker A
और ये जो केमिकल होता है ना ये तब रिलीज होता है।
Speaker A
जब हमें कोई रिवॉर्ड मिल रहा होता है।
Speaker A
फॉर एग्जांपल हमने एक Instagram की रील चलाई।
Speaker A
उस रील में 15-20 सेकंड बाद हमें एक रिवॉर्ड मिला क्योंकि वो रील खत्म हो गई।
Speaker A
तो हमारे ब्रेन में वो डोपामिन का केमिकल रिलीज हो गया।
Speaker A
और जैसे ही हमारे ब्रेन में वो केमिकल रिलीज हुआ तो हमें हैप्पीनेस मिली।
Speaker A
यानी हमें खुशी मिली।
Speaker A
और हम खुश हो गए।
Speaker A
अब ये जो डोपामिन रिवॉर्ड सिस्टम है ना ये पढ़ाई में और काम में बहुत कम होता है।
Speaker A
क्योंकि पढ़ाई में कोई रिवॉर्ड तो मिलता नहीं है, काम में कोई रिवॉर्ड तो मिलता नहीं है।
Speaker A
जिस वजह से हमारे ब्रेन से डोपामिन रिलीज नहीं होता।
Speaker A
और जब हमारे ब्रेन से डोपामिन रिलीज नहीं होता ना तो हमारा ब्रेन एक डिफरेंट स्टेट में पहुंच जाता है।
Speaker A
जिस स्टेट को हम बोलते हैं DMN यानी डिफॉल्ट मोड नेटवर्क।
Speaker A
ये क्या होता है?
Speaker A
अगर मैं आपको आसान भाषा में समझाऊं तो ये होती है स्टेट ऑफ ओवरथिंकिंग।
Speaker A
जो हम पढ़ रहे होते हैं हमारा फोकस पढ़ाई से हटता है और हम दुनियादारी के बारे में सोचने लगते हैं।
Speaker A
कि पास्ट में क्या हुआ था फ्यूचर में क्या होगा।
Speaker A
हम ओवरथिंक करने लगते हैं।
Speaker A
क्या आपके साथ ऐसा हुआ है? क्या आपने सारी चीजें फील करी है तो एक बार मुझे कमेंट में यस भी जरूर लिख के बताना।
Speaker A
अब ये जो सारी प्रॉब्लम्स है ना इससे हमें निकलना पड़ेगा यानी हमें ये जो डोपामिन और रिवॉर्ड सिस्टम है ना।
Speaker A
इसको तोड़ना पड़ेगा।
Speaker A
तोड़ेंगे हम कैसे?
Speaker A
दो फेजेस हैं।
Speaker A
एक है शॉर्ट टर्म फेस और एक है लॉन्ग टर्म फेस।
Speaker A
सबसे पहले समझते हैं शॉर्ट टर्म फेस के चार सिंपल स्टेप्स।
Speaker A
स्टेप नंबर वन बॉडी पोस्चर।
Speaker A
अगर मैं आपसे बोलूं कि अगर आप सीधा होकर बैठते हो तो इसकी मदद से आपकी फोकस पावर 40-50% इनक्रीस हो जाएगी।
Speaker A
तुमको लग रहा होगा कि मैं मजाक कर रहा हूं।
Speaker A
लेकिन नहीं मैं मजाक नहीं कर रहा हूं।
Speaker A
क्योंकि एक रिसर्च करी गई थी एमी क्यूडी के द्वारा जो कि एक साइकोलॉजिस्ट हैं।
Speaker A
और उस रिसर्च से उन्होंने प्रूव कर दिया था कि बॉडी पोस्चर का रिलेशन होता है आपके फोकस से।
Speaker A
उन्होंने ना दो ग्रुप ऑफ स्टूडेंट्स को पढ़ने के लिए बोला, एक ग्रुप ऑफ स्टूडेंट को ये बोला कि आप एकदम सीधे बैठो।
Speaker A
ढंग से बैठो, स्ट्रेट पोस्चर में रहो अपनी गर्दन को स्ट्रेट रखो और आप पढ़ाई करो।
Speaker A
और दूसरे लोगों को बोला कि आप लेट के पढ़ाई करो आप टेढ़े-मेढ़े होकर पढ़ाई करो आपका बस पोस्चर सही नहीं होना चाहिए।
Speaker A
और जब उनके ब्रेन के टेस्ट किए गए, जब उनके फोकस लेवल्स को टेस्ट किया गया।
Speaker A
तो ये साफ पता चला कि वो जो पहले लोग थे जिनको बॉडी पोस्चर एकदम सही था ना उनकी बॉडी में स्ट्रेस हार्मोन्स कम रिलीज हो रहे थे।
Speaker A
यानी उन्हें स्ट्रेस नहीं हो रही थी।
Speaker A
जबकि वो लोग जिनका बॉडी पोस्चर खराब था उनको स्ट्रेस थोड़ी ज्यादा हो रही थी।
Speaker A
यानी साइंटिफिकली ये प्रूव हो गया था कि बॉडी पोस्चर और फोकस का एक बहुत बड़ा रोल है।
Speaker A
तो इसके पीछे की भी मैं साइंस तुम्हें समझा देता हूं।
Speaker A
देखो होता क्या है जब हम सीधा बैठते हैं तो हमारी जो चेस्ट कैविटी है ये एकदम स्ट्रेट होती है।
Speaker A
ये कहीं से भी दब नहीं रही होती।
Speaker A
जब आप टेढ़े-मेढ़े बैठते हो तो आपकी जो चेस्ट है ये दबती है जिसकी वजह से जब आप ऑक्सीजन लेते हो अपने लंग्स के अंदर।
Speaker A
तो ऑक्सीजन पूरी तरीके से नहीं आ पाता।
Speaker A
और जब ऑक्सीजन पूरी तरीके से नहीं आ पाएगा तो क्या होगा?
Speaker A
स्ट्रेस लेवल आपकी बॉडी का इनक्रीस होगा।
Speaker A
इसलिए बोलते हैं सीधे बैठो, चेस्ट कैविटी आपकी सीधी होनी चाहिए जिसकी वजह से आप ज्यादा ऑक्सीजन लोगे।
Speaker A
और आपकी बॉडी एकदम सही चलेगी।
Speaker A
तो ये था हमारा सिंपल सा स्टेप नंबर वन जो कि आप आज से फॉलो कर सकते हो।
Speaker A
फिर आता है हमारा स्टेप नंबर टू ब्रीथिंग।
Speaker A
अगर मैं तुमसे ये बोलूं कि जो ब्रीथिंग है अगर आप थोड़ा धीरे-धीरे सांस लेते हो।
Speaker A
तो उससे आपकी फोकस पावर इनक्रीस हो सकती है।
Speaker A
अब आपको इस चीज पे भी शायद बिलीव नहीं हो रहा होगा।
Speaker A
लेकिन ये जो प्रिंसिपल है ना ये आज से कई साल पहले गुरुकुल टाइम से फॉलो होता आ रहा है।
Speaker A
और उस समय पर इसको बोला जाता था कंट्रोल्ड ब्रीथिंग पैटर्न।
Speaker A
यानी अगर हम धीरे-धीरे सांस लेंगे तो हमारा फोकस बढ़ेगा।
Speaker A
अब इसी चीज को प्रूव करने के लिए 2018 में एक न्यूरोलॉजिस्ट ने स्टडी करी।
Speaker A
उन्होंने कुछ ग्रुप ऑफ लोगों को ये बोला कि आप एकदम स्लो ब्रीथिंग करो।
Speaker A
यानी एक मिनट में सिर्फ पांच से छह बार सांस लो।
Speaker A
धीरे-धीरे ब्रीथ करो।
Speaker A
और कुछ लोगों को ये बोला कि आप थोड़ा फास्ट ब्रीथ करो।
Speaker A
तो पता है क्या देखने को मिला?
Speaker A
कि वो लोग जो कि धीरे सांस ले रहे हैं और अच्छी तरीके से सांस ले रहे हैं उनके जो ब्रेन सेल्स हैं वो ज्यादा एक्टिव हैं।
Speaker A
उनके स्ट्रेस हार्मोन्स बहुत कम रिलीज हो रहे हैं।
Speaker A
और एक और टेस्ट लिया गया उनका।
Speaker A
जिस टेस्ट को हम बोलते हैं एचआरवी।
Speaker A
यानी हार्ट रेट वेरिएबिलिटी।
Speaker A
और ये साफ-साफ देखने को मिला कि उन लोगों की जो ग्रुप नंबर वन था उनका एचआरवी हार्ट रेट वेरिएबिलिटी ज्यादा आई।
Speaker A
और जितनी ज्यादा हार्ट रेट वेरिएबिलिटी आती है उतना ही ज्यादा स्ट्रेस कम होती है और फोकस ज्यादा होता है।
Speaker A
इस चीज से ये प्रूव हो गया कि ब्रीथिंग अगर आप स्लो करते हो।
Speaker A
तो आपका फोकस बढ़ेगा।
Speaker A
तो आपको क्या करना है एक सिंपल सा मैं प्रिंसिपल आज आपको मैं बता देता हूं जो कि आपको फॉलो करना है।
Speaker A
4 सेकंड आपको इन्हेल करना है।
Speaker A
यानी धीरे-धीरे सांस लो 4 सेकंड इन्हेल करो फिर थोड़ी देर सांस रोको।
Speaker A
और 6 सेकंड तक आप एक्सहेल करो।
Speaker A
ऐसा आपको क्या करना है रात को सोने से पहले या फिर आप सुबह जब जग रहे हो तब आप कर सकते हो।
Speaker A
इससे क्या होगा बॉडी आपकी एक्टिव होती है, ज्यादा ऑक्सीजन आता है और अच्छी तरीके से वो काम करती है।
Speaker A
और स्ट्रेस भी आपकी बॉडी से कम हो रहा होता है।
Speaker A
ये था हमारा स्टेप नंबर टू।
Speaker A
फिर आता है हमारा स्टेप नंबर थ्री 60 सेकंड आई लॉक।
Speaker A
अब देखो ये जो 60 सेकंड आई लॉक है ना ये भी पुराने जमाने से जो गुरुकुल का टाइम था तब से चलता आ रहा है।
Speaker A
गुरुकुल के टाइम पे इसी रूल को बोला जाता था त्राटक।
Speaker A
आज के समय में योगा साइंस के अंदर भी त्राटक का यूज किया जाता है।
Speaker A
उसमें क्या होता है एक जलती हुई कैंडल पे 60 सेकंड तक कंसंट्रेट करना होता है।
Speaker A
लेकिन सवाल ये आता है आखिर 60 सेकंड कंसंट्रेट करने से होगा क्या?
Speaker A
तो देखो इसी चीज को मैं रिलेट करके बताता हूं तुम्हारे बचपन से।
Speaker A
बचपन में जब आपके मम्मी पापा आपको पढ़ाया करते थे आपने नोट करा।
Speaker A
कि वो आपको ये बोलते थे कि जो भी वर्ड पढ़ रहे हो उसके ऊपर फिंगर रखो और फिंगर रख के रीड करो जिसको हम फिंगर रीडिंग बोलते थे।
Speaker A
ऐसा वो क्यों कराते थे?
Speaker A
क्योंकि ना हमारी आंख जिस चीज को देखती है हमारा दिमाग वहीं पे ही फोकस लगाता है।
Speaker A
इस वजह से बोला जाता था कि अपनी फिंगर्स को उस वर्ड पे रखो जिस वर्ड को आपको रीड करना है।
Speaker A
ताकि आपका सारा का सारा फोकस वहां पे पहुंचे और आपका दिमाग उस वर्ड को रीड कर पाए।
Speaker A
और यही तो साइंस है।
Speaker A
इसी को तो बोल रहे हैं 60 सेकंड आई लॉक।
Speaker A
तो अब से आपको क्या करना है?
Speaker A
आपको ये करना है आपका जो एनवायरनमेंट है ना वो देखो।
Speaker A
क्या आपका एनवायरनमेंट वो क्लीन है या फिर वो खराब है?
Speaker A
अगर आपकी स्टडी स्पेस जहां पर आप पढ़ रहे हो वो क्लीन नहीं है उसमें बहुत सारे डिस्ट्रैक्शन है आपका मोबाइल फोन पड़ा हुआ है लैपटॉप पड़ा हुआ है 100 चीजें पड़ी हुई हैं।
Speaker A
तो आपकी आंखों में वो सारी चीजें कैप्चर होंगी।
Speaker A
और जब आपकी आंखों में वो सारी चीजें कैप्चर होंगी तो आपके दिमाग में भी वो सारी चीजें आएंगी।
Speaker A
इसी वजह से जब आपका मोबाइल सामने रखा होता है ना तो आपका बार-बार फोन चलाने का मन करता है।
Speaker A
क्यों?
Speaker A
क्योंकि आपकी आंखें उस चीज को देख पा रही है।
Speaker A
और जब आंखें चीजों को देखती है तो दिमाग भी उस चीज को देखता है।
Speaker A
इस वजह से जब भी आप पढ़ रहे हो टेबल पे सिर्फ आपकी कॉपी किताब अगर आप कोई काम कर रहे हो तो सिर्फ वो रखो।
Speaker A
बाकी सारी चीजें हटा दो।
Speaker A
और इसी चीज का जीता जागता एक एग्जांपल है।
Speaker A
हैरी पॉटर एक बहुत फेमस बुक है सबको पता है।
Speaker A
उनकी जो राइटर है ना उन्होंने अपने इंटरव्यूज के अंदर बताया कि वो जो हैरी पॉटर की बुक है ना।
Speaker A
वो उन्होंने घर में नहीं लिखी।
Speaker A
क्योंकि उनके घर का एनवायरनमेंट उतना अच्छा नहीं था।
Speaker A
उन्होंने कैफे में जाके लिखी जहां पर कोई भी डिस्ट्रैक्शन नहीं था और उनका फोकस 101% लग पाता था।
Speaker D
So I used to let me.
Speaker D
Sit here for two hours at a time when my daughter was in a seat next to me in the push chair.
Speaker D
The only way I could get her up to have her nap was to keep her moving.
Speaker D
So I used to walk around town normally this part of town because I wanted to come here until she fell asleep.
Speaker D
Then I'd run in here.
Speaker D
And sit here with a one cold coffee for two hours at a time and write just write like fury.
Speaker D
So um a lot of the book in fact the whole of chapter 10 was written in here.
Speaker D
Of the first book.
Speaker A
ये था हमारा स्टेप नंबर थ्री।
Speaker A
फिर आता है स्टेप नंबर फोर 10 मिनट मोर रूल।
Speaker A
देखो जब भी आप कुछ काम कर रहे हो और आपका मन नहीं कर रहा अब आप सोच रहे हो कि यार और नहीं हो रहा मुझसे।
Speaker A
अब ना बंद कर देते हैं इस काम को।
Speaker A
तो आपको ना अपने दिमाग से ये बोलना है सिर्फ 5 से 10 मिनट और।
Speaker A
अगर आप अपने दिमाग को ये बोलोगे एक घंटा और, दो घंटा और।
Speaker A
तो आप उस चीज को कभी नहीं कर पाओगे।
Speaker A
ये चीज भी साइंटिफिकली प्रूवन है।
Speaker A
कई रिसर्च, कई केस स्टडीज ये बताती हैं अगर हम अपने दिमाग को ये बोलते हैं ना कि बस थोड़ी देर और।
Speaker A
तो थोड़ी देर कब आधे घंटे में बदल जाती है हमें पता भी नहीं चलेगा।
Speaker A
इस वजह से थोड़ा सा आपको अपने दिमाग को पागल बनाना पड़ेगा और खुद से ये बोलना पड़ेगा 5 मिनट और।
Speaker A
और 5 मिनट के नाम पे 10-15 मिनट भी आप इजीली पढ़ पाओगे।
Speaker A
ये कुछ चार ऐसे स्टेप्स थे ना जिसकी मदद से आप शॉर्ट टर्म के अंदर अपने फोकस को बहुत इनक्रीस कर सकते हो।
Speaker A
लेकिन एक फाइनल मैं स्टेप बताना चाहता हूं जो कि लॉन्ग टर्म फोकस के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है।
Speaker A
और वो है फेज नंबर टू 90-20 रूल।
Speaker A
90-20 रूल जो है ना वो साइंटिफिकली हमारी स्लीप साइकिल से ओरिएंटेड है।
Speaker A
समझाता हूं आसान भाषा के अंदर।
Speaker A
जब भी हम सोते हैं ना तो हमारी ये जो स्लीप साइकिल है।
Speaker A
ये 90 मिनट्स की होती है।
Speaker A
पहले हम लो स्लीप में होते हैं।
Speaker A
फिर उसके बाद हम डीप स्लीप में जाने लगते हैं।
Speaker A
और उसके बाद हम जाते हैं आरईएम साइकिल के अंदर।
Speaker A
और ये जो पूरा टाइम होता है एक साइकिल को कंप्लीट करने में वो लगता है 90 मिनट।
Speaker A
अब कुछ रिसर्चस ये बताती हैं कि 90 मिनट हमारी स्लीप साइकिल होती है।
Speaker A
और 90 मिनट ही हमारा फोकस होता है।
Speaker A
मैं आपको एक ग्राफ दिखाता हूं आपकी स्क्रीन के ऊपर।
Speaker A
इस ग्राफ को अगर आप ध्यान से देखोगे।
Speaker A
इमेजिन करो आप पढ़ने जा रहे हो।
Speaker A
तो आप जब पढ़ने बैठोगे ना शुरू में तो आपको फोकस करने में थोड़ा सा टाइम लगता है।
Speaker A
बट 10-15 मिनट जैसे ग्राफ ऊपर जा रहा है तो आपको फोकस भी इनक्रीस होता जा रहा है होता जा रहा है होता जा रहा है।
Speaker A
बट एक पॉइंट ऐसा आता है जो कि अराउंड 60 मिनट्स पे आता है जब आपकी फोकस पावर कम होने लगती है।
Speaker A
और 90 मिनट्स के बाद आपकी फोकस पावर पूरी तरीके से खत्म हो जाती है।
Speaker A
यानी अगर आप 90 मिनट्स के बाद भी पढ़ाई कर रहे हो ना।
Speaker A
तो शायद आप पढ़ नहीं रहे हो बस आप पढ़ने का नाटक कर रहे हो।
Speaker A
इसी वजह से बोला जाता है 90 मिनट्स की पढ़ाई करो।
Speaker A
और उसके बाद 20 मिनट का ब्रेक लो।
Speaker A
20 या 15 मिनट का ब्रेक अगर आप लेते हो आपका दिमाग जो है वापस से रिचार्ज होगा।
Speaker A
और आप फिर वापस से आप 90 मिनट्स के कंटीन्यूअस स्टडी कर सकते हो।
Speaker A
और इसी को हम बोलते हैं 90-20 रूल।
Speaker A
ये कुछ ऐसी रिसर्चस थी ये कुछ ऐसी स्टडीज थी ना जिसकी मदद से आप लोग भी अपनी फोकस पावर को इनक्रीस कर सकते हो।
Speaker A
आपकी कौन सी इनमें से फेवरेट टेक्नीक है जो कि आपने अप्लाई कभी करी हुई है या फिर आप करने वाले हो मुझे कमेंट्स में जरूर बताना।
Speaker A
शुक्रिया एवरीवन मेरा नाम है प्रशांत मिलते हैं किसी नेक्स्ट वीडियो के अंदर।
Topics:फोकस बढ़ाने के तरीकेप्रशांत किराडडोपामिन रिवॉर्ड सिस्टमबॉडी पोस्चर और फोकसकंट्रोल्ड ब्रीथिंगस्क्रीन टाइम नियंत्रणध्यान केंद्रित करनाफोकस पावरDMNवैज्ञानिक तरीके फोकस के लिए











