यह कक्षा ज्योतिष, गणित और हनुमान चालीसा के महत्व पर चर्चा करती है, साथ ही समय और लोंगिट्यूड की गणना सिखाती है।
Key Takeaways
- ज्ञान सूर्य देव से प्राप्त होता है और गुरु के साथ सतत संपर्क आवश्यक है।
- हनुमान चालीसा अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है, जो मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाती है।
- ज्योतिष और गणित की समझ समय और स्थान के निर्धारण में सहायक होती है।
- 2026 में ग्रहों की दुर्लभ स्थिति विश्व में बड़े बदलावों का संकेत देती है।
- लोंगिट्यूड और डिग्री के माध्यम से समय की गणना करना आवश्यक और संभव है।
Summary
- कक्षा की शुरुआत में गुरु-शिष्य परंपरा और सूर्य देव के ज्ञान के महत्व पर चर्चा की गई।
- हनुमान जी के गुरु सूर्य भगवान हैं और उन्होंने 12 वर्षों तक सूर्य देव के साथ ज्ञान अर्जित किया।
- हनुमान चालीसा की महत्ता और रोजाना सात बार पढ़ने का सुझाव दिया गया।
- 2026 में सूर्य और शनि की दुर्लभ साइकिल के संयोग और विश्व में होने वाली घटनाओं का उल्लेख।
- शनि मकर राशि में आने से तकनीकी क्रांति और कोविड जैसी घटनाओं का संबंध बताया गया।
- लोंगिट्यूड और डिग्री सिस्टम की गणना और समय निर्धारण की विधि विस्तार से समझाई गई।
- एक डिग्री में 4 मिनट और 60 मिनट्स के बीच के संबंध को समझाया गया।
- लोंगिट्यूड के आधार पर समय का निर्धारण करने के लिए उदाहरण और अभ्यास दिया गया।
- होरा शास्त्र और दिन-रात्रि के अध्ययन का परिचय दिया गया।
- ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक और विवाद रहित होने पर जोर दिया गया।
Chapters
- 00:00परिचय और गुरु-शिष्य परंपरा
- 02:33हनुमान जी और सूर्य देव का ज्ञान
- 05:272026 में ग्रहों की दुर्लभ स्थिति और वैश्विक घटनाएं
- 10:34लोंगिट्यूड और समय की गणना परिचय
- 14:03लोंगिट्यूड के आधार पर समय निर्धारण अभ्यास
- 21:58लोंगिट्यूड, लैटीट्यूड और ज्योतिष का विज्ञान
- 35:58होरा शास्त्र और दिन-रात्रि का अध्ययन
- 47:48ज्योतिष शास्त्र का महत्व और समापन











