2026 06 21 Class 2 — Transcript

यह कक्षा ज्योतिष, गणित और हनुमान चालीसा के महत्व पर चर्चा करती है, साथ ही समय और लोंगिट्यूड की गणना सिखाती है।

Key Takeaways

  • ज्ञान सूर्य देव से प्राप्त होता है और गुरु के साथ सतत संपर्क आवश्यक है।
  • हनुमान चालीसा अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है, जो मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाती है।
  • ज्योतिष और गणित की समझ समय और स्थान के निर्धारण में सहायक होती है।
  • 2026 में ग्रहों की दुर्लभ स्थिति विश्व में बड़े बदलावों का संकेत देती है।
  • लोंगिट्यूड और डिग्री के माध्यम से समय की गणना करना आवश्यक और संभव है।

Summary

  • कक्षा की शुरुआत में गुरु-शिष्य परंपरा और सूर्य देव के ज्ञान के महत्व पर चर्चा की गई।
  • हनुमान जी के गुरु सूर्य भगवान हैं और उन्होंने 12 वर्षों तक सूर्य देव के साथ ज्ञान अर्जित किया।
  • हनुमान चालीसा की महत्ता और रोजाना सात बार पढ़ने का सुझाव दिया गया।
  • 2026 में सूर्य और शनि की दुर्लभ साइकिल के संयोग और विश्व में होने वाली घटनाओं का उल्लेख।
  • शनि मकर राशि में आने से तकनीकी क्रांति और कोविड जैसी घटनाओं का संबंध बताया गया।
  • लोंगिट्यूड और डिग्री सिस्टम की गणना और समय निर्धारण की विधि विस्तार से समझाई गई।
  • एक डिग्री में 4 मिनट और 60 मिनट्स के बीच के संबंध को समझाया गया।
  • लोंगिट्यूड के आधार पर समय का निर्धारण करने के लिए उदाहरण और अभ्यास दिया गया।
  • होरा शास्त्र और दिन-रात्रि के अध्ययन का परिचय दिया गया।
  • ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक और विवाद रहित होने पर जोर दिया गया।

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00:08
Speaker A
तो कैसे हैं आप लोग? बढ़िया राम जी, आप कैसे हैं? हम भी सही हैं। तो कुछ सीखा [हंसी] है इस हफ्ते [नाक से की जाने वाली आवाज़] बीते दो-तीन दिन में?
00:20
Speaker A
मेरे को नंबर नंबर्स क्रंच करने में थोड़ा टाइम चला गया। नंबर्स में थोड़ा वीक हूं मैं। तो रिकॉर्डिंग बहुत यूज़फुल थी। बट हां, इसके अलावा बुक जो आपने रेफर किया था तो उस बुक पे भी थोड़ा बहुत शुरू किया है।
00:34
Speaker A
फर्स्ट सेशन [गला साफ़ करने की आवाज़] अ बट हां, बाकी रिवाइज किया जो भी हमने पिछले क्लास में बात की थी तो थोड़ा सा क्या रिवीजन करेंगे जी मैथ्स का। देखिए, घबराइए नहीं, गणेश जी का ध्यान करेंगे हम लोग सबसे पहले।
00:54
Speaker A
और हम लोग मैथ्स स्टार्ट करेंगे [खांसने की आवाज़] क्योंकि ये क्या है ना, सूर्य देव से स्टार्ट हुई है ये ज्ञान। ये जो ज्योतिष का जो ज्ञान है, ये कहां से आया है हमारे पास में? भगवान सूर्य से आया है।
01:09
Speaker A
और जितना भी ज्ञान है, सब भगवान सूर्य से ही आता है। है ना? इसीलिए बोलते हैं ना कि मतलब व्यक्ति को ज्ञान ही हो जाए। तमसो मा ज्योतिर गम्या। अंधकार से प्रकाश की ओर। प्रकाश का मतलब क्या है? ज्ञान। ज्ञान और
01:25
Speaker A
प्रकाश को एक ही अर्थ में लिया जाता है। और हमारे भी गुरु कौन हैं? मतलब देखा जाए अगर हनुमान जी के गुरु कौन हैं?
01:36
Speaker A
तो वो भी कौन आते हैं? सूर्य भगवान ही, सूर्य भगवान [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो हनुमान जी के पास में सारी विद्या है। विद्यावान, गुनी, अति चातुर है ना, जितना ज्ञान है, जितनी विद्याएं हैं सारी की सारी
01:51
Speaker A
सूर्य देव की दी हुई हैं। सूर्य देव ने उनको दीक्षा दी है। और कैसे दीक्षा दी?
01:58
Speaker A
कोई था ही नहीं जिसको सूर्यदेव दीक्षा देते तो बोले ठीक है, हम मैं तुमको सिखाऊंगा लेकिन कैसे सिखा पाएंगे? मैं तो रुकता नहीं। सूर्य भगवान ने बोला कि मैं तो रुकता नहीं हूं, मैं बैठ तो सकता नहीं तो
02:15
Speaker A
अगर तुम मेरे गति से साथ-साथ में चल सको तो सारा ज्ञान ले लो हमसे। तो यदि आप गुरु को फॉलो कर सकते हैं किसी को भी तो आपको ज्ञान मिलेगा है ना? तो 12 वर्ष तक हनुमान जी उल्टा
02:33
Speaker A
उड़ते रहे। मतलब अगर सूर्य भगवान ऐसे चलते हैं तो क्योंकि गुरु के सम्मुख रहा जाता है ना, ज्ञान जब अर्जन किया जाता है तो गुरु के फेस टू फेस रहना पड़ेगा। तो हनुमान जी उल्टा उड़ते रहे 12 वर्ष तक
02:49
Speaker A
और 12 वर्षों तक सूर्य भगवान उनको ज्ञान देते रहे। तो हनुमान जी के भी गुरु जी कौन हैं? सूर्य भगवान। ठीक है? और इसी से प्रसन्न होकर के सूर्य भगवान जी ने अपनी पुत्री का विवाह जो है प्रस्ताव रखा हनुमान जी के सामने कि
03:06
Speaker A
आपके बराबर योग्य तो मुझे कोई मिला ही नहीं। आप ऐसा करिए कि मेरी पुत्री से विवाह कर लीजिए। तो एक दो मंदिर ऐसे हैं शायद भारत में जहां पर हनुमान जी की सपत की पूजा होती है। वैसे तो वो ब्रह्मचारी
03:21
Speaker A
ही हैं। तो हनुमान जी की तरह हम लोगों को बनना है। है ना? हनुमान चालीसा तो आती होगी ना आप लोगों को?
03:28
Speaker A
जी आती है ना? दर्शना, आपको आती है हनुमान चालीसा? जी। अब ये देखिए, ये एक ऐसी स्तुति है, ये एक ऐसा स्तत्र है जो सबसे अधिक सिद्ध है। उसका रीजन क्यों है? उसका रीजन क्या है?
03:46
Speaker A
कि पिछले 500 वर्षों में जब से तुलसीदास जी ने इसकी रचना करी है तब से करोड़ों अरबों व्यक्तियों ने इसको करोड़ों अरबों बार जपा है। इतनी एनर्जी है इस एक चालीसा में कि इतना आपको बढ़िया इफेक्ट देगी, सबसे जल्दी
04:07
Speaker A
इफेक्ट करेगी। तो यह हनुमान चालीसा बहुत जागृत है और वर्तमान जो समय चल रहा है, एक मेरा पर्सनल ओपिनियन, एक मेरा पर्सनल सजेशन है आप लोगों को कि सात बार हनुमान चालीसा पढ़ा करिए डेली। आपने देखा ना वेनेजुएला में क्या हुआ है।
04:28
Speaker A
तो एक्चुअली व्हाट वी आर गोइंग इज इट्स अ वेरी टिपिकल टाइम। मतलब एक तो शनि देव हमारे 30 वर्ष में एक पूरी साइकिल कंप्लीट करते हैं। सूर्य भगवान 100 वर्षों में एक साइकिल कंप्लीट करते हैं। सोलर साइकिल एंड बोथ आर कोइंडिंग।
04:50
Speaker A
ये बहुत रेयर केस में होता है कि जब सूर्य की साइकिल और शनि की साइकिल एक साथ कोइंसाइड करती है। एंड दिस इस द ईयर 2026, इस द ईयर इन व्हाट इट इस कोइंसाइडिंग। सो ऐसी घटनाएं तो मान के चलिए होंगी।
05:06
Speaker A
और मतलब बहुत ही दुखद घटना है वेनेजुएला की जो हुई है लेकिन हम लोग ऐसे समय में हैं कि पूरे विश्व में ऐसी घटनाएं घटेंगी और अभी से आप दो इट है ऑलरेडी स्टार्टेड। व्हाट इज द स्टार्टिंग पॉइंट? कोविड
05:27
Speaker A
है ना? जैसे ही शनि मकर राशि में आए हैं उन्होंने अपना काम स्टार्ट किया है। द लास्ट टाइम इट वास इन द कैप्रीकॉर्न। क्या हुआ था? एक टेक रिवोल्यूशन आया था। 1991 के आसपास हमारे
05:41
Speaker A
फस आए। हमारा कंप्यूटर आया, कंप्यूटर युग शुरू हुआ। तो अभी आपने देखा एआई का जमाना शुरू हो गया है। सैटर्न इज रिलेटेड टू व्हाट टेक्नोलॉजी। है ना? ये दोबारा से आया। लेकिन [नाक से की जाने वाली आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़]
05:57
Speaker A
एक मतलब एक अच्छी चीज लाते हैं तो कुछ ना कुछ बुरा भी करते हैं। मतलब सफाई भी करते हैं। बैलेंस भी बनाते हैं। सो नो प्रॉब्लम। वि दैट गणेश जी का एक बार ध्यान करेंगे हम लोग। अपने मन में गणेश गणेश बोल लीजिए सात से
06:12
Speaker A
आठ बार। तो हमने पिछली क्लास में सीखा था लोंगिट्यूड एंड डिग्री सिस्टम। ठीक है?
06:45
Speaker A
याद है? कुछ कुछ याद है? तो बताएंगे एक घंटे में कितने डिग्री बनेंगे? एक घंटे में 15। गुड। एक घंटे में कितना डिग्री बनेंगे?
06:59
Speaker A
15। आपको स्क्रीन शेयर होगी, आप बताएंगे। ठीक है। जी सो व्हाट वी हैव लर्न इज एक घंटे में कितने डिग्री थे?
07:40
Speaker A
15। चलिए हम आपको एक सीधा क्वेश्चन दे देते हैं। ठीक है और एक मिनट में याद है 1/4। यस, यह हमारा है 0 डिग्री। ठीक है? और ये हमारा है पॉइंट A और ये हमारा है पॉइंट B।
08:21
Speaker A
ठीक है? ये जो हमारा पॉइंट है, ये कहां पे लाई कर रहा है? 92° 35 मिनट्स पे लाई कर रहा है। दिस इज द लोंगिट्यूड। एंड पॉइंट B इज लाइंग एट 113° 13 मिनट एंड द डायरेक्शन, क्योंकि इट इज द
08:43
Speaker A
फ्रॉम 0°, इट इज इन द राइट साइड, ईस्ट साइड। सो इट इज ईस्ट डायरेक्शन। गॉट इट? तो अगर हमारा टाइम यहां पे है 12 बज 7 [गला साफ़ करने की आवाज़] तो यहां पर आप बता पाएंगे टाइम कितना होगा?
09:17
Speaker A
यहां का टाइम हमारा क्या है? 12 आवर 17 मिनट्स। तो आपको बताना है कि इस लोंगिट्यूड पर टाइम कितना होगा? 113 डिग्री 30 मिनट्स पर। कोशिश करेंगे। ट्राई करेंगे अपने आप से। वेट अ सेकंड। क्या हुआ दर्शनादि करिए?
10:34
Speaker A
सर 11 बजर नहीं, नहीं, प्रोसेस फॉलो, प्रोसेस फॉलो करिए। देखिए, 92° 35 मिनट्स दिया हुआ है हमारा लोंगिट्यूड, उसका टाइम भी गिवन है। हमको 103 डिग्री 13 मिनट्स तक ले जाना है तो हमें क्या करना पड़ेगा? डिफरेंस निकालना
10:53
Speaker A
पड़ेगा ना दोनों लोंगिट्यूड्स के बीच में कितने डिग्री एंड मिनट का डिफरेंस है और हम ये जानते हैं कि एक डिग्री में कितना घंटा होता है, एक मिनट में कितना घंटा होता है? कितना मिनट्स होता है। ठीक है? तो उसी
11:06
Speaker A
के अकॉर्डिंग हमको वैल्यूस पुट कर देनी है। चलिए कोई बात नहीं करते हैं। देखते हैं क्या आता है आंसर। अगर हम 92 डिग्री को [नाक से की जाने वाली आवाज़] इसको हम अगर बदले घंटा और मिनट में तो
11:21
Speaker A
क्या आंसर आएगा? [नाक से की जाने वाली आवाज़] बताइए क्या आंसर आएगा? वन आर। 1 डिग्री इक्वल टू फोर मिनट्स। 4 मिनट्स यही तो है। तो 92 डिग्री इक्व टू कितना हो जाएगा?
12:11
Speaker A
92 डिग्री इक्वल टू कितना हो जाएगा? 92 * 4, 368 है ना? एनी इशू?
12:24
Speaker A
व्हाट विल बी द आंसर? 92 * 4, 368 [नाक से की जाने वाली आवाज़] 368 मिनट्स। हम आवर में कन्वर्ट कर सकते हैं इसको। इली एक काम और करते हैं। पहले हम क्या करते हैं? 35 मिनट्स को भी कर लेते हैं। है ना?
12:41
Speaker A
तो 1 मिनट में हमारे पास में हमारे पास में कितने मिनट्स होते हैं? एक मिनट में कुछ आईडिया है?
12:48
Speaker A
एक मिनट में वन बाय एक मिनट में कितना होता है? 1/4। 1/4 डिग्री नहीं, हमें यहां से देखो, यहां पे हमारा ये वाला मिनट है। ये है रेडियन वाला। और अब हमें घंटा और मिनट और सेकंड वाले में चलना है।
13:13
Speaker A
पीछे पलटिए। पीछे पलट लीजिए। पीछे पलटिए पेजेस अपने। 1/2 हां, कितना? 1/2। 1/2 अगर वो एक सेकंड। सुनिए सुनिए आप घबराइए नहीं। डिग्री हमें पता है, 1 डिग्री इक्व 4 मिनट, ये हमें पता है। कोई कन्फ्यूजन तो
13:44
Speaker A
1 डिग्री को हम 60 मिनट्स लिख सकते हैं।
14:03
Speaker A
कोई कन्फ्यूजन सर नहीं? कोई कन्फ्यूजन नहीं ना? अब हम क्या कर दे अगर हमें 1 मिनट चाहिए हो तो कितना हो जाएगा? 4 अप 60 मिनट हो जाएगा। कोई कन्फ्यूजन? एनी कन्फ्यूजन? देखिए एक डिग्री [गला साफ़ करने की आवाज़]
14:19
Speaker A
4 मिनट के बराबर है। यह तो हमें याद हो गया है। एक डिग्री जब अर्थ घूमेगी तो उसमें उसको घूमने में चार मिनट का समय लगेगा। ठीक है? 1 डिग्री में कितना होता है? 60 मिनट्स होता है। यह जो मिनट्स है, यह रेडियन वाला
14:33
Speaker A
मिनट्स चल रहा है। डिग्री और रेडियन वाला चल रहा है। 1 डिग्री में 60 मिनट्स होते हैं। तो 60 मिनट्स लिख सकते हैं। यहां पे फोर का हमने फोर एज इट इज कॉपी कर दिया है। अब हमको चाहिए 1 मिनट की वैल्यू।
14:59
Speaker A
है ना? तो 1 मिनट क्या हो जाएगा? 4/60। एनी कन्फ्यूजन? कोई कन्फ्यूजन है? नहीं कौशिक, एनी कन्फ्यूजन? [गला साफ़ करने की आवाज़] नहीं। तो अब हमें कितना चाहिए? 35 मिनट्स की वैल्यू चाहिए तो 35 मिनट्स की वैल्यू
15:39
Speaker A
चाहिए तो उसको मल्टीप्लाई कर देंगे 35 * 4/60। मिनट्स गुड। कंफ्यूजन है तो व्हाट विल बी द आंसर? 35 * 4 करेंगे कितना आएगा? 140 अप 60 मिनट्स। ठीक है? और इसमें क्या अगर हम इसको यह भी हमारा मिनट में आ गया आंसर और यह भी
16:05
Speaker A
हमारा मिनट में आ गया आंसर। दोनों को ऐड कर देंगे तो हमें क्या पता चल जाएगा? 92 डिग्री 35 मिनट की वैल्यू पता चल जाएगी। 92 डिग्री 35 मिनट्स विल बी इक्वल 368 प्लस 140 अप 60। ठीक है? 140/60 को अगर आप कैंसिल आउट
16:24
Speaker A
करेंगे तो ये लगभग आएगा 6 * 2 = 12, 2 6 * 2 = 20, 20 3 18 2.33 आता रहेगा। ये ठीक है, ये सिंपल डिवीजन है हमारा हमारा तो अगर इसको 368 में जोड़ देंगे तो कित...
16:40
Speaker A
नहीं। आई एम ट्राइंग टू कैच अप। [हंसी] नहीं। क्या क्या इशू आ रहा है बताएं? कोई इशू नहीं। हमें भागना नहीं है। हम आराम से समझेंगे। पूरा जीवन पड़ा है। कोई जल्दी कोई जल्दबाजी नहीं है। देखिए हमने क्या समझा था?
17:00
Speaker A
1 डिग्री इक्व 4 मिनट्स। ठीक है? तो 1 डिग्री को हम क्या लिख सकते हैं? 60 मिनट्स लिख सकते हैं। इसमें कोई इशू है?
17:16
Speaker A
यह बिल्कुल आप इसको रट मतलब इसको आप ऐसे याद कर लीजिए जैसे एक घंटे में हमारे 60 मिनट होते हैं। 60 मिनट्स होते हैं। जैसे हमारे एक घंटे में 60 मिनट्स होते हैं। वैसे ही एक डिग्री में हमारे कितने
17:33
Speaker A
कितने मिनट्स होते [हंसी] हैं? 60 मिनट्स होते हैं। ठीक है? 1 डिग्री में कितना होता है? 60 मिनट्स। हमको ये तो पता ही है कि एक घंटे में 60 मिनट होता है। एक डिग्री में भी कितने होते हैं? 60 मिनट्स हो गया। अब एक डिग्री
17:58
Speaker A
में हमारी जो अर्थ है वो चार मतलब चार मिनट लेती है। 1 डिग्री टर्न करने में हमारी अर्थ 4 मिनट का समय लेती है। तो हम ये कह सकते हैं जैसे पहले एक कोई पॉइंट यहां पे था। ये सेंटर है
18:19
Speaker A
अर्थ का। एक पॉइंट यहां पे था। ठीक है? अब 4 मिनट के बाद में अर्थ घूमेगी तो वह पॉइंट कहां पर आ जाएगा? यहां पर आ जाएगा। ऐसा हो जाएगा। है ना? तो ये जो एक ये जो दूरी आएगी ये कितनी आएगी? 1 डिग्री। कितनी
18:38
Speaker A
आएगी? 1 डिग्री। ठीक है? ऐसे ही जब पूरी समय पूरा कर लेगी तो यह 360 डिग्री बन जाएगा। है ना?
18:51
Speaker A
ठीक है? कोई कंफ्यूजन? तो अब हम यह कह सकते हैं कि एक डिग्री कह ले इसको या हम इसको कह ले 60 मिनट्स। ये जो दूरी है ये 60 मिनट्स की दूरी है। ये जो मिनट है ये बेसिकली आर्क मिनट है। क्या
19:06
Speaker A
मिनट है? आर्क मिनट है। ठीक है? ये क्या है? आर्क मिनट तो ये जो 60 आर्क मिनट के बराबर है इसको हम कहेंगे अंश कला डिग्री को अंश बोल लेंगे आर्क मिनट को कला बोल लेंगे और सेकंड्स जब आते
19:26
Speaker A
हैं आर्क सेकंड्स तो उसको हम बोल लेंगे विकला इसको हम बोल लेंगे कला और इसको हम बोल लेंगे विकला ठीक है कला एंड विकला और डिग्री को हम क्या बोल देंगे? [गला साफ़ करने की आवाज़] अंश। अंश। अंश, कला और विकला। घंटा, मिनट और
19:55
Speaker A
सेकंड होता है। ऐसे हमारे पास अंश, कला और विकला होते हैं। ठीक है? 60 डिग्री को भी लिख सकते हैं। एक एक डिग्री के बराबर मतलब एक डिग्री को 60 मिनट्स लिख सकते हैं। चार मिनट्स कोई कन्फ्यूजन ये भी फोर मिनट के बराबर होगा।
20:40
Speaker A
किसके बराबर होगा? 4 मिनट्स। 4 मिनट्स के बराबर। ठीक है? अब हमें जो चाहिए होगा हमें उसके हिसाब से आगे प्रोसीड करना होगा। अब हमें यहां पर चाहिए था 92 डिग्री। हमें इसकी वैल्यू चाहिए थी। ठीक है? अब
21:02
Speaker A
हमें इसकी वैल्यू फाइंड आउट करनी थी। तो 1 डिग्री = 4 मिनट्स 92 डिग्री विल बी इक्वल टू 92 * 4 मिनट्स। ठीक है? हमारा आंसर कितना आ गया था? 36 8 मिनट्स। ठीक है?
21:33
Speaker A
कोई कन्फ्यूजन अब हमारे पास क्या थे? 35 मिनट्स थे। 35 मिनट्स इसकी वैल्यू हमको निकालनी थी क्योंकि तभी तो 92 डिग्री 35 मिनट पे पहुंचेंगे ना हम जब हमें दोनों की वैल्यू पता चल जाएगी। तो अब हम क्या करेंगे?
21:56
Speaker A
हमें यह पता है कि 60 मिनट इक्व 4 मिनट्स 60 आर मिनट इक्व 4 मिनट्स। अभी हमने देखा था। तो अब हम इसको अगर वन करेंगे तो हमें थोड़ा इजी हो जाएगा आगे जाने के लिए। तो हम इसको वन कर लेते हैं।
22:14
Speaker A
अगर 60 आर्क मिनट्स की वैल्यू 4 मिनट के बराबर है तो एक आर्क मिनट की वैल्यू कितनी होगी? तो हम जानते हैं इसको 60 को यहां पर लाना पड़ेगा नीचे लाना पड़ेगा है ना तो ये क्या आ जाएगा 4/ 60 मिनट्स
22:35
Speaker A
है ना [गला साफ़ करने की आवाज़] जैसे आपसे कहा जाए कि ₹ में हमने चार बॉल्स खरीदी है ना ₹ में हमने चार बॉल्स खरीदी या चलिए ऐसे सोच ले ₹ में हमने चार बॉल खरीदी तो ₹1 में कितनी बॉल आएगी?
23:00
Speaker A
4/6 बॉल आएगी। है ना? या इसको अपोजिट ठीक है। तो एक आर्क मिनट में कितना हो गया? 4/6 मिनट्स। ठीक है? अब हमें पहुंचना है 35 मिनट्स तक। हमारा क्वेश्चन क्या है? 35 मिनट्स की वैल्यू निकालनी है। तो 35
24:21
Speaker A
मिनट्स विल बी इक्वल टू 1 मिनट की वैल्यू पता है। ठीक है? तो 35 मिनट्स की वैल्यू पता करने के लिए क्या करेंगे? 35 को उसमें मल्टीप्लाई कर देंगे। 35 * 4/ 60 मिनट्स। आंसर क्या आ जाएगा यहां से? अभी हमने इसका
24:43
Speaker A
आंसर निकाला था। कितना है? 2.33 इसको सॉल्व करेंगे तो 2.33 मिनट्स आंसर आ जाएगा। ठीक है?
24:55
Speaker A
कंफ्यूजन है अभी भी। देखिए कंफ्यूजन है तो बता दीजिएगा। कोई इशू नहीं है। हम दोबारा से बताएंगे आपको। शर्माना नहीं है। अभी शर्माएंगे तो फिर बाद में प्रॉब्लम होगा। अभी तो हमें सीखना है। 35 * 4 करेंगे तो कितना आएगा?
25:22
Speaker A
करिए। 5 * 4 = 20 टू विल बी द कैरी। 4 * 3 = 12 12 + 2 140 ठीक है? अपॉन में क्या है? 60 है। जीरो से जीरो कैंसिल आउट हो जाएगा। अब हम 14 को सिक्स से डिवाइड करेंगे। तो आंसर क्या
25:40
Speaker A
आएगा? 14 को सिक्स से डिवाइड करिए। 6 * 2 = 12 6 * 2 = 12 हो गया। ठीक है? यहां पे बचा टू। अब टू तो डिवाइड होगा नहीं। सिक्स से हमारा तो हमें पॉइंट लगाना पड़ेगा। पॉइंट
25:57
Speaker A
लगेगा तो जीरो बढ़ेगा। है ना? जैसे होता है 14 को सिक्स से डिवाइड करेंगे तो 6 2 = 12 2 यहां पे आएगा पॉइंट लगाएंगे जीरो बढ़ाएंगे 6 * 3 = 18 फिर से दो आएगा फिर थ्री लगाएंगे फिर 18 आएगा
26:17
Speaker A
2.33 आता रहेगा आता रहेगा आता रहेगा ये रिकरिंग वैल्यू हो जाएगी सो आंसर विल बी 2.33 मिनट्स और यहां से कितना आया था हमारा 368 मिनट्स। तो दोनों को ऐड कर दें 2.33 और 368 तो हम इसको और इसको कंबाइन वाली वैल्यू पर पहुंच
26:39
Speaker A
जाएंगे। तो 92 डिग्री 35 मिनट्स ये इसमें टाइम हमारा क्या आएगा? 368 + 2.33 मिनट्स। व्हाट विल बी द आंसर? 368 में टू जोड़ देंगे। 370.33 मिनट्स आ गया। ठीक है?
27:12
Speaker A
एनी कन्फ्यूजन? चलिए अब हमारे पास क्वेश्चन क्या था? दूसरा क्वेश्चन क्या था हमारा? कि हमें चाहिए वैल्यू किस पे? 103° 13 मिनट पे चाहिए। हमें किस पे चाहिए थी? 103 डिग्री 13 मिनट्स पे चाहिए थी। तो अब हम क्या करते हैं? 103
27:33
Speaker A
[गला साफ़ करने की आवाज़] डिग्री पे वैल्यू निकालते हैं। 103 डिग्री तो हमें पता है 1 डिग्री इक्व 4 मिनट्स। तो 103 डिग्री विल बी इक्वल टू 412 हां 412 103 * 4 आंसर विल बी 412 मिनट्स ठीक है और हमारा कितना था 13 मिनट्स 13
28:09
Speaker A
आर्क मिनट्स है यस सर 13 आर्क मिनट्स है तो 13 आर मिनट्स में हमें क्या पता है कि 61 मिनट विल बी इक्व 4/ 60 मिनट्स वन आर्क मिनट इक्वल टू 4/6 मिनट्स। ठीक है? तो अब हमें क्या चाहिए? 13 आर्क
28:35
Speaker A
मिनट की वैल्यू चाहिए। 13 आर्क मिनट की वैल्यू 13 से मल्टीप्लाई कर देना है। सिंपल 4/6 52 बाय 16 52 अपन [नाक से की जाने वाली आवाज़] इसको हम डिवाइड कर लेंगे तो आंसर कितना आ जाएगा?
28:55
Speaker A
में आंसर आएगा पॉइंट में कितना आएगा पॉइंट 0.86 0.86 तो हमारे पास 103 डिग्री 13 आर्क मिनट की वैल्यू कितनी आ गई?
29:13
Speaker A
412 प्लस 0.86 प्लस86 मिनट्स। व्हाट विल द टोटल आंसर 412.86 ठीक है। यह जो दूरी आई है, यह दूरी कहां से निकाली हमने? ये जो इसने निकाला है ये अच्छा बताइए 0 डिग्री से ईस्ट में है तो प्लस
29:55
Speaker A
में होगा कि माइनस में होगा? प्लस इट विल बी इन प्लस इतने मिनट टाइम प्लस में चल रहा होगा कि नहीं चल रहा होगा?
30:06
Speaker A
मतलब कि 103 डिग्री 13 मिनट पर 0 डिग्री से 412 मिनट86 मिनट पहले सूर सूर्योदय हो जाएगा क्योंकि ईस्ट में है। है ना? ईस्ट में सनराइज पहले होगा, वेस्ट में बाद में होगा। तो 103 डिग्री 13 मिनट पे जो सनराइज हमारा होगा वो 412 मिनट पहले
30:31
Speaker A
होगा लंदन की अपेक्षा। जीरो डिग्री हमने कहां से लिया है? ग्रीनविच मेरीडियन टाइम से है। ग्रीनविच हमारा लंदन से गुजरती है। क्योंकि जब अंग्रेज लोग भारत आए तब उनको ये समझ में आया कि अच्छा ऐसा भी कुछ होता
30:46
Speaker A
है। मेरीडियन मेरीडियन का भी कुछ होता है। मतलब समय में भी इतनी मतलब बारीकी है। पहले इन लोगों को नहीं पता था। तो अपना यहां पे क्या था कि पूरे विश्व का जो धुरी है उसको हम लेते थे महाकाल के टेंपल से।
31:04
Speaker A
आज जो हम जीएमटी लंदन से ले रहे हैं ग्रीनच से पहले पूरे विश्व में उसकी गणना कहां से होती थी? महाकाल के टेंपल से जो लोंगिट्यूड निकलता था हमारा रेखांश उसी को ही हम स्टैंडर्ड मानते थे और इसीलिए
31:18
Speaker A
उज्जैन से जो पंचांग प्रकाशित होता था उसको हम बहुत स्टैंडर्ड पंचांग लेकर के चलते थे। कई कई जगह से अभी काशी से भी हमारा आता है। हमारा दिल्ली से भी निकलता है। हमारा उज्जैन का भी आता है। है ना? तो हमारा जो
31:35
Speaker A
ये महाकाल का एक्सक्यूज मी सर। जैसे आपने अभी बोला जैसे ग्रीनविच मेरीडियन तो वो इलाहाबाद के पास कहीं पास होता है ना। वो तो कर्क रेखा पास होती है ना हमारी उज्जैन से। नहीं नहीं नहीं कर्क रेखा इस ट्रॉपिक ऑफ कैंसर।
31:51
Speaker A
हां हां इट इज अ लैटीट्यूड। वो लैटीट्यूड है। लोंगिट्यूड हमेशा नॉर्थ साउथ जाएगा। वो जो जैसे वो ग्रीनविच मेरीडियन है जिसके बारे में आप बात करो तो इलाहाबाद के पास कहीं पास होती है ना?
32:04
Speaker A
नहीं नहीं इट इज इन लंदन यूके ग्रीन हां नहीं नहीं जो इंडिया जिससे लोग लेते हैं जैसे हमने स्कूल बुक्स में पढ़ा हुआ है जो इलाहाबाद से जो पास होती है लुक व्हाट यू आर टॉकिंग इज इट इज अ
32:17
Speaker A
लैटीट्यूड जो ट्रॉपिक ऑफ कैंसर जिसको [गला साफ़ करने की आवाज़] कर्क रेखा बोलते हैं वो एक लैटीट्यूड है। लैटीट्यूड कैसे होती है? ऐसे ऐसे होती है। यह हमारी पृथ्वी है। तो लैटीट्यूड हमारा 0 डिग्री इक्वेटर है। और फिर हमारे ऐसे ऐसे
32:35
Speaker A
हैं। ये ट्रॉपिक ऑफ कैंसर, ट्रॉपिक ऑफ कैप्रीिकॉर्न और ये पोल्स है। है ना? तो ये हमारी निकलती है 23.5 डिग्री। है ना? तो ये एक लैटीट्यूड है। वी आर अ ट्रॉपिकल नेशन। हम एक ट्रॉपिकल देश है और हम जो बात कर रहे हैं वो
32:58
Speaker A
लोंगिट्यूड की बात कर रहे हैं जो नॉर्थ साउथ जाते हैं। लैटीट्यूड हमेशा ईस्ट वेस्ट जाएगा। ठीक है?
33:12
Speaker A
तो यह जो हमारे हमारे यहां पर क्या था कि जो महाकाल टेंपल है उज्जैन का जो उज्जैन का महाकाल टेंपल है वहां से जो निकलती थी हमारी रेखांश जो हमारा लोंगिट्यूड पास होता था वही स्टैंडर्ड लोंगिट्यूड था। हम लोग मतलब हम लोग क्या करते हैं कि
33:35
Speaker A
जनरली एक आदत है कि बहुत बुराई करते हैं लोग लोगों की। अंग्रेजों की बहुत बुराई करते हैं कि अंग्रेजों ने गुलाम बनाया, ये किया वो किया। ठीक है?
33:48
Speaker A
व्हेन दे एंटर्ड इंडिया 1700 1700 में वो भारत आए। उसके बाद में उन्होंने जानते हैं क्या किया है। रिसर्च किया है। रिसर्च किया है उन्होंने। क्योंकि वो ऐसे देश में आए थे जिसका ना कल्चर उनको समझ में आ रहा था। ना यहां के लोग समझ में आ
34:14
Speaker A
रहे थे ना यहां का सिस्टम समझ में आ रहा था। एंड हाउ मच टाइम वुड हैव दे स्पेंड? कितना समय लगा होगा उनको ये सब समझने में? एनी गेस वाइल्ड गेस?
34:28
Speaker A
कोई भी समझ ही रहे हैं। अभी भी समझ ही रहे हैं। सही एकदम सही है। अभी भी समझ ही रहे हैं। लेकिन उनको लगे 30 साल लगभग। अभी भी वो स्टडी कंटिन्यू है। 30 साल उन्होंने क्या किया कि संस्कृत के
34:46
Speaker A
विद्वानों को ढूंढा। उन्होंने उसकी उन्होंने टीम बनाई और जितने स्क्रिप्चर थे इंडिया के सबको उन्होंने खंगालने की कोशिश करी। ठीक है? और 30 साल उन्होंने समझा कि यह है क्या देश?
35:05
Speaker A
तब जाकर के जो आप सुनते हैं ना लॉर्ड मैकले को आप गाली देते हम और आप सब लोग गाली देते हैं। लॉर्ड मैकोले ने बहुत नुकसान किया है भारत का। तो इंडिया एक ऐसा सिस्टम है। इंडिया एक ऐसा सिस्टम है। भारत एक ऐसा
35:22
Speaker A
व्यवस्था है भारत कि जिसको बर्बाद करने के लिए भी रिसर्च करनी पड़ी है। और अभी भी नहीं हो पाया है। अभी भी बचा है। मतलब आप किसी भी देश को मतलब आप किसी भी चीज को बिगाड़ देंगे तो कितना समय लगेगा?
35:39
Speaker A
दो चार बम मार दीजिए देश खत्म हो जाएगा। है ना? बहुत सारे ऐसे हम देखते हैं अपने हिस्ट्री में कि बहुत सारे सिविलाइजेशन एंड हो गए। ईरान जिसकी हम देख रहे हैं वॉर चल रहा है। ये तो पारसियों का देश था ना। पारसी देश
35:58
Speaker A
था। पर्शियन खत्म हो गया। देश ये पूरा पूरी सिविलाइजेशन ही खत्म हो गई। बहुत सी सिविलाइजेशन थी जो खत्म हो गए। क्योंकि अगर हम क्रिश्चियनिटी की बात करें तो वो तो 2000 साल पहले आया हुआ एक धर्म है। है ना? उससे पहले यूरोप में क्या था?
36:21
Speaker A
कुछ तो रहा होगा ना यूरोप में। है ना? तो बहुत बड़ा एक्सटेंशन था। अलग-अलग डिफरेंट टाइप्स ऑफ सेट्स थे। डिफरेंट टाइप्स ऑफ रिलीजियस ग्रुप्स थे जो अलग-अलग रिलीजियस प्रैक्टिससेस करते थे। और सबसे बड़ा एक धर्म था पैगनिज्म। आप इसको सर्च करिएगा पैग्स जिसको बोलते
36:45
Speaker A
हैं। ठीक है? तो ऐसे ऐसे धर्म थे अब गायब हो गया। अब नहीं मिलेगा आपको। तो इट इंडिया इट टूक 30 इयर्स ऑफ रिसर्च एंड स्टिल दे आर मतलब स्टिल दे आर रिसर्चिंग एंड दे आर डिस्ट्रइंग इंडिया। तो हमें क्या करना है? हमें भी बनाना है
37:05
Speaker A
ना तो हमें भी रिसर्च करनी पड़ेगी। हमें भी मेहनत करनी पड़ेगी। अब अगर आप भविष्य पुराण में जाएंगे देन व्हाट यू विल फाइंड इज जितने भी वॉइस रॉय और ये जितने भी भारत में आए अंग्रेज वो जानते हैं कौन थे?
37:29
Speaker A
यह सब हमारे वानर सेना के अवतार थे या जिसको हम एक चीज और भी बोलते हैं उनका एक पुनर्जन्म और हुआ था अकबर के नवरत्न के रूप में जो जो अकबर के नवरत्न थे उन्हीं का पुनर्जन्म मतलब हुआ और वो वॉइस रॉय कोई बन
37:52
Speaker A
के आया कोई कुछ बन के आया और उन्होंने भारत पर शासन किया बिकॉज अगर भारत पर शासन करने आए हैं तो कोई तो पूर्व जन्म का काम है ना भारत में भारत की भूमि पर शासन कर रहे हैं।
38:08
Speaker A
कहीं ना कहीं से तो रिलेशन आएगा। ऐसे कोई भी आकर के भारत का राजा थोड़ी ना बन जाएगा। तो जब आप भविष्य पुराण पढ़ेंगे तो आप देखेंगे कि जो जो अकबर के नवरत्न थे वो पुनर्जन्म लेकर के आए और कोई वॉयसराय
38:26
Speaker A
बना कोई हमारा [गला साफ़ करने की आवाज़] वही मतलब सारे के सारे किंग विंग सब आते रहे भाई एक तरीके से चांसलर क्या था जो वॉइसराय थे वो क्या थे भारत के राजा तो इट इज और जो नवरत्न थे अकबर के वो
38:43
Speaker A
किसका पुनर्जन्म ये हम आपके लिए होमवर्क छोड़ रहे हैं। जो अकबर के नवरत्न थे तो वो क्या थे? वो भी पुनर्जन्म थे। वो किसका पुनर्जन्म थे? ये आपको सर्च करके आना है। ठीक है?
39:09
Speaker A
[नाक से की जाने वाली आवाज़] चलिए थोड़ा सा ये मतलब इंफॉर्मेशन बेस हो गया। अब हम लोग वापस आते हैं कहां पे?
39:16
Speaker A
लोंगिट्यूड और लैटीट्यूड पे थे। तो थोड़ा सा हमारा टॉपिक और हमने सीख लिया। अब हम कहां पे आ गए हैं? + 42.86 मिनट्स पे आ गए। ये जो दूरी है हमारी ये हमारी जीरो से दूरी है। यहीं पे तो दूरी है B पॉइंट की और A पॉइंट
39:39
Speaker A
हमारा यहां पे था। तो अब हमें A पॉइंट की वैल्यू क्या पता थी? कितनी आई थी?
39:49
Speaker A
370 है ना? 370.33 [नाक से की जाने वाली आवाज़] और यहां पर कितनी आई है? 42.86 मिनट्स। ठीक है? एनी कन्फ्यूजन?
40:17
Speaker A
तो आप इन दोनों का गैप निकाल सकते हैं आराम से। कितना टाइम डिफरेंस आ रहा है दोनों प्लेसेस के बीच में?
40:26
Speaker A
बताइए कितना आ रहा है? टाइम डिफरेंस बताइए कितना आ रहा है? 42 मिनट्स हां कोई दिक्कत नहीं आप बताएं दर्शना जी बताएं कितना आ रहा है 412 86 - 3703 42.53 मिनट्स यस यस सर इतना ही आ रहा है। तो अब हमें क्या
41:10
Speaker A
क्वेश्चन था हमारा? व्हाट वास आवर क्वेश्चन? कि अगर ए पॉइंट पे 12:17 हुए [गला साफ़ करने की आवाज़] हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] ए पॉइंट पे कितना बजा है? 12 बज के 17 तो यहां का टाइम अब बता दीजिए कितना होगा।
41:40
Speaker A
टाइम डिफरेंस आपको पता चल गया है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] सर ये तो मिनट आया तो ये मिनट में ही ऐड ऑन होगा। मिनट में ऐड ऑन कर दीजिए। आप सबको मिनट में कन्वर्ट कर इसको आप आवर मिनट में
42:09
Speaker A
कन्वर्ट कर लीजिए। [नाक से की जाने वाली आवाज़] मिनट में ऐड कर दीजिए। सिंपल 42 मिनट ऐड कर दीजिए। तो 12 ये 12 बज59 मिनट्स हां 40 127 में कितना ऐड कर देंगे ऐड कर देंगे कितना आ जाएगा सात दो पांच चार 12:59
42:34
Speaker A
लगभग लगभग एक घंटा मतलब एक बज जाएगा है ना ठीक है एनी कन्फ्यूजन नहीं कन्फजन हो तो बताइए। जैसे ये 92 डिग्री वाला हमने अलग निकाला 103 वाला अलग निकाला तो यही पर अगर अगर माइनस करके हम लोग फिर
43:01
Speaker A
नहीं निकाल सकते क्या? निकाल सकते है। 103 माइनस 92 बिल्कुल निकाल सकते है। हां जैसे ये लेंदी हो गया। लेंदी हो गया। मैंने इसीलिए लेंदी कराया क्योंकि प्रैक्टिस हो जाएगी आपकी। ठीक है। ठीक है। जब हमें कोई चीज सीखनी है ना तो
43:17
Speaker A
हमें शॉर्टकट पे नहीं चलना है। जब हमें कोई चीज आ जाएगी तो हम सब ओरली करेंगे फिर। ठीक है? अब आप एक होमवर्क के लिए नोट कर लीजिए। फिर हम दूसरी चीज पे चलते हैं। होमवर्क के लिए क्वेश्चन नोट कर लीजिए।
43:37
Speaker A
अगर यह हमारा 0 डिग्री है और हम चल रहे हैं वेस्ट की तरफ। ठीक है? हम चल रहे हैं वेस्ट की तरफ। ए पॉइंट हमारा है 13 डिग्री 10 मिनट्स। और बी पॉइंट हमारा है 175 डिग्री 15 मिनट्स।
44:05
Speaker A
ठीक है? तो आपका क्वेश्चन नंबर ए क्या है? फाइंड द टाइम जोन। दोनों के टाइम जोन निकालने हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] ठीक है? A और B दोनों के आपको क्या निकालने है? टाइम जोन निकालना है।
44:26
Speaker A
उसके बाद में क्या करना है आपको? फाइंड द टाइम डिफरेंस। दोनों के टाइम जोन आ जाएंगे तो टाइम डिफरेंस भी आ जाएगा। फाइंड द टाइम डिफरेंस बिटवीन एंड बी। [खांसने की आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है?
44:49
Speaker A
आप क्वेश्चन नोट डाउन कर लीजिए। एक दो क्वेश्चन हम लोग सॉल्व करते रहेंगे स्टार्टिंग में हर क्लासेस में इससे क्या रहेगा ना हम मैथ्स के टच में रहेंगे मैथ्स के टच में आप जितना रहेंगे आप उतना कॉन्फिडेंस महसूस करेंगे
45:24
Speaker A
है नो मैटर हाउ हार्ड इट सीम्स इट विल बी इजी एंड द मोर यू विल बी इन टच वि द मैथ्स द मोर कॉन्फिडेंट यू विल फील क्वेश्चन नोट डाउन हो गया आपका चलिए अब हम थोड़ा सा चलते हैं थ्योरी की तरफ
45:50
Speaker A
तो बहुत ध्यान से सुनिएगा कुछ मैं यहां पर श्लोक बोलूंगा। आप ध्यान से सुनिएगा। विफला विफलान अन्या शास्त्राण विवादस्ते केवलम प्रत्यक्षम ज्योतिषम शास्त्रम चंद्रारको यत्र साक्षणो इससे तात्पर्य निकला इस श्लोक से बहुत सारे शास्त्र है हमारे धर्म में
46:43
Speaker A
अन्य अनन्य शास्त्र है ना विफला विफला का अर्थ क्या हुआ विफल [गला साफ़ करने की आवाज़] क्योंकि कभी-कभी क्या होता है ना कि इतने सारे शास्त्र हम पढ़ते हैं समझ में आता नहीं कुछ विवादस्तेशु केवलम और विवाद भी बहुत पैदा
47:02
Speaker A
होता है। आपने देखा होगा भाई विवाद है कि नहीं है? कोई राम को मानेगा कि कोई विष्णु को मानेगा कि कोई शिव को मानेगा। कितना मतलब ऐसी ऐसी दार्शनिक विवाद रहते हैं। शास्त्रार्थ होता है। है ना? प्रत्यक्षम ज्योतिषम शास्त्रम।
47:23
Speaker A
प्रत्यक्षम का मतलब क्या होता है? जैसे हम आपके प्रत्यक्ष हैं। आप हमारे सामने हैं। तो यह जो ज्योतिष शास्त्र है यह प्रत्यक्ष शास्त्र है। प्रत्यक्षम ज्योतिषम शास्त्रम चंद्र अर्को यत्र साक्षण जैसे चंद्र और अर्क अर्क अर्थात भगवान सूर्य है।
47:48
Speaker A
जैसे चंद्रमा और भगवान सूर्य साक्षात प्रत्यक्ष हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] ऐसे ही यही शास्त्र हमारा जो ज्योतिष शास्त्र है यह भी साक्षात विद्यमान है। इसमें कोई भी विवाद नहीं है। कोई भी इसमें डिबेट का स्कोप ही नहीं है।
48:10
Speaker A
ठीक है? प्योर साइंस है। जैसे सूर्य और चंद्र सत्य है, वैसे ही यह शास्त्र सत्य है और सम्मुख है। जैसे सूर्य चंद्र हमारे सामने है, ऐसे ही यह शास्त्र हमारे सामने है। है ना? तो ज्योतिष शास्त्र की प्रशंसा में
48:26
Speaker A
लिखा गया एक श्लोक है। ये ज्योतिष शास्त्र इसका जो नाम पड़ा वो ज्योति का मतलब प्रकाश। तो बेसिकली हम इसमें क्या करते हैं कि सूर्य की, चंद्रमा की और नक्षत्रों की या तारा जिसको हम बोल सकते हैं। ये सभी
48:43
Speaker A
के सभी क्या है कि हमको प्रकाश के रूप में ही दिखाई पड़ते हैं। चाहे सूर्य हो, चाहे चंद्रमा हो और चाहे ही कोई तारा ही क्यों ना हो। यह सभी के सभी एक प्रकाश के पुंज के रूप में ही तो दिखाई पड़ते हैं और हम
48:58
Speaker A
इनहीं की गणना करते हैं। अलग-अलग काल में किस पॉइंट पे ये हैं उसी की गणना करते हैं। इसीलिए इस शास्त्र का नाम क्या पड़ा?
49:07
Speaker A
ज्योतिष। क्योंकि हम ज्योतियों की गणना करते हैं। हमारे आसमान में जो भी ज्योति रश्म दिखाई पड़ती है, हम उनकी गणना करते हैं। इसीलिए इसका शास्त्र का नाम क्या पड़ा? ज्योतिष शास्त्र। यहां पर एक चीज और नोट करने की है कि यहां
49:24
Speaker A
पर हम चंद्रमा को उपग्रह नहीं मानेंगे। जैसे साइंस में माना जाता है ना उपग्रह। तो हम यहां पर चंद्रमा को एक पूर्ण ग्रह के रूप में ही देखते हैं। ठीक है? चंद्रमा को हम एक पूर्ण ग्रह के रूप में ही देखते हैं। और हम इसको
49:45
Speaker A
हम इसको उप मतलब उपग्रह नहीं मानते। जैसे मॉडर्न साइंस मानती है। ठीक है? और प्लूटो को हम कंसीडर नहीं करते। यूरेनस नेप्च्यून प्लूटो इनको क्यों नहीं कंसीडर करते? ये पता चला आपका जीवन है 100 वर्ष का, 120 वर्ष का
50:05
Speaker A
और आपके जीवन भर एक ही राशि में रहेंगे। इतना स्लो मूवमेंट है। तो इनका क्या असर तो बदलेगा नहीं। तो इनके बारे में हम बात नहीं करते। तो ज्योतिष की जो स्टार्टिंग है बेसिकली अगर आप समझे तो यह सबसे प्राचीन है।
50:25
Speaker A
अगर साइंस को हम समझे तो साइंस का स्टार्टिंग होता है मैथ से और मैथ्स हमारी कैसे प्राप्त होती है?
50:33
Speaker A
अंकों से प्राप्त होती है। है ना? और अंक कितने हैं हमारे पास में? हमारे पास कितने अंक है मैथ्स में?
50:47
Speaker A
इनफनाइट नो वन टू थ्री फोर फाइव सिक्स से 8 न उसके बाद पुनरावती है। रिपीटीशन है। फिर अनंत है। है ना? उसके बाद तो अनंत तक ही जाएगा वो अंक। तो ये जो नौ अंक है ये नौ ही क्यों है?
51:13
Speaker A
आठ क्यों नहीं है? सात क्यों नहीं है? 10 क्यों नहीं है? नौ ही क्यों है?
51:23
Speaker A
तो इसके पीछे क्या है कि ग्रह हमारे कारण है क्योंकि हमारा जो सौरमंडल है हम जो ज्योतिष विज्ञान का अध्ययन करते हैं इसमें हम नव ग्रहों का ही अध्ययन करते हैं। कितने ग्रहों का अध्ययन करते हैं?
51:40
Speaker A
नौ ग्रहों का। इसीलिए हमारे पास नौ अंक है। और इनहीं नौ अंकों से ही अनंत संख्या बन जाती है। है ना?
51:53
Speaker A
एनी कन्फ्यूजन [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो आप समझिए कि आप एक ऐसे शास्त्र को अध्ययन करने जा रहे हैं जो सभी शास्त्रों के मूल में है। है ना?
52:06
Speaker A
इसके बाद में एक शब्द आता है होरा शास्त्र। है ना? तो हमारी जो सबसे एक प्रामाणिक ग्रंथ है ज्योतिष में बहत पराशर होरा शास्त्र जिसको हम बोलते हैं बीपीएचएस है ना बहत पराशर होरा शास्त्र बेसिकली क्या है होरा शास्त्र है
52:32
Speaker A
ये जो ज्योतिष विद्या [हंसी] है यह होरा शास्त्र कहा गया ऋषि पराशर जी ने कहा कि यह होरा शास्त्र है कोरा शास्त्र का अर्थ क्या हुआ एक दिन और एक रात्रि इतना जो समय होता है एक दिन और एक रात्रि
52:54
Speaker A
का जो समय होता है उसको हम बोलते हैं अहो रात्र क्या बोलते हैं अहो रात्र अहो अहो रात्र तो अहो का हो ले लिया गया है और रात्र का रा ले लिया गया है तो हो रा बन गया
53:15
Speaker A
अहो शब्द का आखरी शब्द क्या है? आखरी अक्षर क्या है? हो। और रात्र का पहला अक्षर क्या है? र तो हम उन्होंने क्या किया कि अहो रात्र से एक शब्द बनाया होरा। है ना? अहो रात्र से ही एक शब्द बना है
53:37
Speaker A
होरा। तो इसको हम बोलते हैं होरा शास्त्र। हम क्या करते हैं? दिन और रात्रि की अध्ययन करते हैं। इसमें दिन और रात का अध्ययन है हमारा होरा शास्त्र में। ठीक है? काल का अध्ययन है। अब हम समझते हैं
54:02
Speaker A
कि यह जो हमारा ज्योतिष शास्त्र है [नाक से की जाने वाली आवाज़] यह एक्चुअल में इसके ऋषि कौन-कौन है?
54:11
Speaker A
यह समझना बहुत जरूरी है। जैसे आपके कोई भी मंत्र होता है तो उसके कोई ना कोई ऋषि होते हैं। उनहीं ऋषि के द्वारा उस मंत्र का प्रवर्तन किया गया होता है। या ऐसे कह लीजिए कि उनहीं ऋषि के द्वारा
54:30
Speaker A
आपके मंत्रों को वो आपको प्रोवाइड करते हैं। है ना? अगर ऋषि नहीं होंगे तो मंत्र नहीं हो सकता। ठीक है? तो कोई ऋषि तपस्या कर रहे हैं। उनको तपस्या करते करते कोई मंत्र उनके ध्यान में उतरा और उन्होंने उस मंत्र को
54:49
Speaker A
लिख दिया या किसी दूसरे को बता दिया अपने शिष्य को। तो जब पहली बार उस मंत्र को अंतर् ध्यान ध्यान अवस्था से जब ऋषि मुख से अपने उसको अपने मुख से उच्चारण करते हैं या उसका प्रतिपादन करते हैं तो ऐसे ऋषि उस मंत्र
55:09
Speaker A
के ऋषि कहलाते हैं। ठीक है? जैसे हनुमान चालीसा किसने लिखी? तुलसीदास जी ने। तो क्योंकि वह चालीसा है क्योंकि वह चालीसा है इसलिए मतलब मंत्र की बात नहीं हो रही है वहां पर लेकिन अगर जैसे वही मंत्र होता तो उसके लिए ऋषि होते
55:28
Speaker A
हैं। ठीक है? तो हर चीज के प्रतिपादन करने वाले ऋषि हमारे पास मतलब प्रमाणिक रूप से परंपरा में प्राप्त होते हैं। जैसे आपने ये देखा होगा ना कि शल्य चिकित्सा में सुश्रुत ऋषि का नाम या चरक ऋषि का नाम तो शल्य चिकित्सा सबसे पहले
55:49
Speaker A
करने वाले ऋषि ऐसे थे। इन्होंने यह सूत्र दिया। ऐसे ही हर मंत्र को देने वाले ऋषि होते हैं। ठीक है? अब हम समझते हैं कि ज्योतिष शास्त्र को देने वाले ऋषि कौन-कौन है? हमारी क्या परंपरा है? हम किस परंपरा
56:04
Speaker A
में आगे बढ़ रहे हैं। ठीक है? तो मैं एक श्लोक के माध्यम से सारे ऋषियों का नाम उसमें समाहित है। सूर्य पितामहो व्यासो वशिष्ठो अत्रि पराशरा। तो सबसे स्टार्टिंग कहां से है? सूर्य से भगवान सूर्य से अब हमें क्या करना है कि हमें भाई सूर्य
56:28
Speaker A
भगवान से तो प्रार्थना करनी है कि सूर्य भगवान हमको आप ज्योतिष की विद्या का दान दीजिए प्रार्थना करनी है ना और आप जितने मन से प्रार्थना करेंगे जितनी तल्लीनता से प्रार्थना करेंगे उतना आपके ऊपर सूर्य भगवान की कृपा होगी
56:47
Speaker A
सूर्य सूर्य पितामहो व्यासो सूर्य सूर्य के बाद किसका नंबर है? व्यास जी का। वेदव्यास वशिष्ठो अत्री पराशरा फिर ऋषि वशिष्ठ और ऋषि पराशर कश्यपो नारदो गर्को मरीचर मुनि मुनर अंगिरा कश्यपो ऋषि कश्यप नारदो नारद ऋषि गर्गो गर्ग ऋषि
57:18
Speaker A
गर्गाचार्य जी मरीच मरीच ऋषि मरी मरीज और अंगिरा ऋषि इसके बाद में लोमशा पिशसव चवनो य मनो शष्टादशो अश्वत ज्योति शास्त्र प्रवर्तका इसके बाद कौन है लोमस ऋषि हैं पिश ऋषि हैं चवन ऋषि हैं यवन ऋषि हैं मनु ऋषि हैं शौनक जी हैं
57:50
Speaker A
ऐसे मिलाकर के कितने हो गए? अष्टादश। अष्टादश। अष्टादश का अर्थ क्या हुआ? 18 ऋषि। ज्योतिष शास्त्र प्रवर्तका ये 18 ऋषि है जिन्होंने ज्योतिष शास्त्र के प्रवर्तन किया है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] ठीक है? तो जब नारद जी का नाम यहां पर आया
58:16
Speaker A
है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] जैसे ही राजा हिमाचल जी के यहां पार्वती जी का जन्म हुआ। तुरंत पहुंच गए नारद जी और फिर राजा हिमाचल जी ने पूछा कि आप बताएं भविष्य हमारी कन्या का कैसा क्या रहेगा
58:32
Speaker A
तो उन्होंने कहा ये तो बहुत सब बढ़िया ही बढ़िया है बस एक दिक्कत दिख रही है हमको कि इनका जो पति होगा वो समझ में नहीं आ रहा है हमारे इनका पति बड़ा विचित्र होगा ना तो वो समाज से कोई लेना देना होगा उसका
58:47
Speaker A
ना तो वो कपड़े वपड़े पहनेगा पागलों की तरह रहेगा नशावशा करेगा है ना? मतलब बहुत सारी विचित्र सी बातें उन्होंने नारद जी ने राजा हिमाचल को और उनकी पत्नी मैनावती जी को बताई। तो अब [नाक से की जाने वाली आवाज़]
59:02
Speaker A
मैनावती तो मतलब माता वो तो परेशान हो गई कि अरे ये क्या मतलब ऐसे तो पति से शादी नहीं करेंगे। भले हमारी बेटी कुंवारी क्यों ना रह जाए। है ना?
59:18
Speaker A
तो कहा कि सारे लक्षण अगर मतलब ये जितने भी दुर्गुण है एक व्यक्ति से अगर विवाह हो जाए तो ये सारे दुर्गुण क्या हो जाएंगे?
59:29
Speaker A
सगुण हो जाएंगे। [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये जितने कुलक्षण है सब सुलक्षण बन जाएंगे। तो कहा ये कैसे हो पाएगा?
59:38
Speaker A
तो नारद जी ने क्या बोला? जो जप करे कुमार तुम्हारी भावी मेट सके त्रिपुरारी। अगर आपकी बेटी भगवान शंकर जी का भजन तपस्या करती है तो भगवान शिव में वो शक्ति है वो ताकत है कि वो आने वाली भावी जो है
59:57
Speaker A
उसको भी मिटा सकते हैं। तो ये सारे ही जितने ही कुल लक्षण बताए वो कहा कि सारे शंकर जी में विद्यमान है। लेकिन यदि शिव जी से विवाह हो जाए तो ये सारे कुल लक्षण सुलक्षण बन जाएंगे। तो मैनावती को तब भी बात समझ में नहीं आई।
60:18
Speaker A
उनको तो शादी तक बात समझ में नहीं आई। जब शंकर जी का उन्होंने बारात तक देखी। चक्कर वक्कर भी आया वो मतलब हो ही जाता है। है ना? तो नारद जी क्या है? ज्योतिषी है। परम ज्योतिषी है। है ना? इसीलिए क्या है वो मतलब कहीं भी
60:36
Speaker A
पहुंच जाएंगे नारायण नारायण करते हुए। है ना? नारायण नारायण करते हुए कहीं भी पहुंच सकते हैं और कहीं की भी खबर उनको पता रहती है। क्यों? क्योंकि वो ज्योतिषी है। त्रिकालज्ञ है। ऋषि पराशर ऋषि वशिष्ठ ऋषि अत्री सब
60:55
Speaker A
ज्योतिषी है। कहीं की घटना को भी देख के बता सकते हैं। है ना? तो ऐसे आठ 18 ऋषियों की ये जो बात कही गई जिनका नमन किया गया। इनहीं की परंपरा में हम लोग आगे ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन करेंगे।
61:14
Speaker A
ठीक है? अब इसमें एक चीज और ज्योतिष शास्त्र में [नाक से की जाने वाली आवाज़] इसको तीन भागों में विभाजित किया गया है। बेसिकली ज्योतिष शास्त्र को हम तीन तरीके से समझते पढ़ते हैं। तो तीन तरीके क्या है ज्योतिष के? एक तो
61:39
Speaker A
है गणित सिद्धांत सिद्धांत ज्योतिष जिसको हम बोलते हैं खगोलीय ज्योतिष। है ना जो एस्ट्रोनॉमी जिसको आप समझते हैं जो आजकल की एस्ट्रोनॉमी है [नाक से की जाने वाली आवाज़] एस्ट्रोफिजिक्स या एस्ट्रोनॉमी वो क्या है सिद्धांत ज्योतिष है गणित ज्योतिष है
62:02
Speaker A
इसके बाद में एक पार्ट ज्योतिष का है जिसको हम बोलते हैं फलित ज्योतिष जो आप YouTube पे देखते हैं या जो आप सोशल मीडिया के माध्यम से देखते हैं है फलित ज्योतिष फलित ज्योतिष में क्या-क्या चीजें हैं? दो
62:21
Speaker A
चीजें इंपॉर्टेंट है। एक तो जो हम कोई भी जातक हमारे पास आएगा तो प्रश्न करेगा हमसे। है ना? तो प्रश्न का विचार होता है। दूसरा शगुन या अपशकुन का विचार होता है। ये भी है फलित ज्योतिष में। है ना? तो
62:42
Speaker A
प्रश्न विचार है और शगुन अपशकुन विचार है। शगुन विचार है जिसको हम बोलेंगे। मुहूर्त विचार है। यह सारी जो विवेचना है यह सब फल ज्योतिष के अंतर्गत ही आती है। जितना भी पंचांग है जो हम डेली लाइफ में
62:57
Speaker A
यूज़ करते हैं ज्योतिष राशि [गला साफ़ करने की आवाज़] चक्र ये जो भी फलित हम यूज़ करते हैं ये सब हमारा फलित ज्योतिष के अंतर्गत ही है। इसके बाद हमारा एक पार्ट और है इसका मेदनी ज्योतिष। मेदनी मेदनी अर्थात जो पृथ्वी को रिप्रेजेंट
63:16
Speaker A
करती है। पृथ्वी पर कब क्या होने वाला है? है ना? जैसे इस साल के शुरुआत से ही पता है कि इस वर्ष भूकंप की तो दिक्कत आएगी। तो ये मेदनी ज्योतिष जिसको हम एक नाम और जानते हैं संिता।
63:39
Speaker A
है ना संगीिता के नाम से जानते हैं। मेदनी ज्योतिष अर्थात संगीिता। अच्छा ज्योतिष जो है वो वेदों का एक अंग है। वेदों के छह अंग बताए गए हैं। उनमें से एक अंग क्या है? ज्योतिष भी है। ठीक है? तो वेदों के छह अंग क्या हैं? एक
64:06
Speaker A
तो है हमारा शिक्षा, छंद, व्याकरण, [नाक से की जाने वाली आवाज़] निरुक्त, कल्प और ज्योतिष। तो ज्योतिष क्या है? वेदों के नेत्र है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] सूर्य और चंद्र हमारे नेत्र होते हैं। सूर्य हमारे दाहिने नेत्र हैं और चंद्रमा
64:25
Speaker A
हमारे बाएं नेत्र हैं। है ना? सूर्य हमारे दाहिने नेत्र हैं और चंद्रमा हमारे बाएं नेत्र हैं। भगवान का जो भी विराट स्वरूप है उसमें भी ऐसा ही है। सूर्य मतलब उनके दाहिने नेत्र है और चंद्रमा उनके बाया नेत्र है।
64:45
Speaker A
है ना? ठीक है? तो ज्योतिष शास्त्र क्या है? वेदों का नेत्र है। और वेद क्या है?
64:55
Speaker A
वेद जो है विद धातु से बना है। विद विद धातु से बना है एक शब्द वेद। विद का अर्थ क्या होता है? ज्ञान। तो ज्ञान को जो देखना का तरीका है वही ज्योतिष शास्त्र है। ज्योतिष शास्त्र क्या है? कि हमें क्या है? वेदों को देखना है।
65:15
Speaker A
हमें ज्ञान को देखना है। जो भी ज्ञान इस धरती पर मौजूद है, वह सब वेद ही है। वह सारा का सारा वेद ही है। उसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। ठीक है?
65:38
Speaker A
तो कुछ कुछ समझ में बात आई? थोड़ा सा आज है थोड़ा सा आप इसको रिकॉल करेंगे। थोड़ी मेमोरी अपनी शार्प करने की आदत डालेंगे। है ना? क्योंकि ज्योतिष में क्या है कि मेमोरी शार्प होनी चाहिए। पिछले क्लास में भी बात यह वाली हुई थी कि
65:59
Speaker A
अपनी मेमोरी को शार्प करिए थोड़ा सा। उसकी टेक्निक है। उसकी कई सारी टेक्निक्स है। आप उसको सर्च कर सकते हैं। मैं तो एक ही टेक्निक सजेस्ट करता हूं। सरस्वती सरस्वती जी की आराधना है ना? उनसे प्रार्थना करिए। सरस्वती जी
66:18
Speaker A
की कृपा हो जाएगी तो आप की मेधा शक्ति बहुत अच्छी हो जाएगी। है ना?
66:27
Speaker A
तो सरस्वती जी वाला जो श्लोक था वो आप अपने मन में कर लिया करिए। है ना? पिछली बार में बोला था ना जैसे गणेश जी का हम लोग ने ध्यान किया तो उसको भी ध्यान कर लिया करिए। ठीक है? फिर कल मुलाकात होती है। टाइम इज
66:42
Speaker A
आल्सो अप। ऑलाइट। उम्मीद है कि आप लोग होमवर्क कर लेंगे। एक क्वेश्चन हमने दिया है आपको। एक क्वेश्चन हमने और दिया था। आपको रिसर्च करनी है। अकबर जो थे नवरत्न थे वो किसका पुनर्जन्म थे और जो हमारे माउंटबेटन वगैरह जो वॉइस
67:01
Speaker A
आए इंडिया में वो किसका पुनर्जन्म थे तो ये थोड़ा सा आप लोग रिसर्च करके लाएंगे ठीक है चले शुभ रात्रि सीताराम शुभ रात्रि सीतारामाराम
Topics:ज्योतिषहनुमान चालीसासूर्य देवलोंगिट्यूडडिग्री गणनाशनि मकर राशिहोरा शास्त्रगुरु-शिष्य परंपरातकनीकी क्रांतिसूर्य और शनि साइकिल

Frequently Asked Questions

हनुमान जी के गुरु कौन हैं और उन्होंने ज्ञान कैसे प्राप्त किया?

हनुमान जी के गुरु सूर्य भगवान हैं। उन्होंने 12 वर्षों तक सूर्य देव के साथ उल्टा उड़ते हुए ज्ञान प्राप्त किया क्योंकि गुरु के सामने रहकर ही ज्ञान अर्जित किया जा सकता है।

हनुमान चालीसा क्यों महत्वपूर्ण है और इसे रोजाना पढ़ने का सुझाव क्यों दिया गया?

हनुमान चालीसा तुलसीदास जी द्वारा रचित एक अत्यंत सिद्ध स्तुति है, जिसे करोड़ों बार जपा गया है। इसमें इतनी ऊर्जा है कि यह जल्दी प्रभाव दिखाती है, इसलिए रोजाना सात बार पढ़ने की सलाह दी जाती है।

लोंगिट्यूड के आधार पर समय की गणना कैसे की जाती है?

लोंगिट्यूड के डिग्री और मिनट के अंतर को समझकर, एक डिग्री में 4 मिनट और 60 मिनट्स के आधार पर समय निकाला जाता है। डिग्री और मिनट को घंटों और मिनटों में परिवर्तित कर समय निर्धारित किया जाता है।

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