Log Aapko Sun Nahi Rahe, “Measure” Kar Rahe Hain! (6 Hi… — Transcript

यह वीडियो बताता है कि लोग अनजाने में कैसे आपकी सामाजिक स्थिति और आत्म-सम्मान को मापते हैं और इन टेस्ट को पास करने के तरीके क्या हैं।

Key Takeaways

  • लोग आपकी सेल्फ वर्थ और इमोशनल स्टेबिलिटी को लगातार टेस्ट करते हैं।
  • हर बार रिएक्ट न करना ही असली स्ट्रेंथ होती है।
  • बाहर से अप्रूवल की जरूरत कम करने से आत्म-विश्वास बढ़ता है।
  • अपने व्यवहार के रिपीट पैटर्न को पहचानना और बदलना जरूरी है।
  • पावरफुल लोग हर चैलेंज का जवाब देने की कोशिश नहीं करते।

Summary

  • लोग बिना बताए आपकी इमोशनल स्टेबिलिटी, सेल्फ वर्थ और कॉन्फिडेंस को टेस्ट करते हैं।
  • ये टेस्ट आमतौर पर ओपनली नहीं होते, बल्कि सिचुएशन्स के जरिए होते हैं।
  • लोग आपकी वैल्यू को देखकर निर्णय लेते हैं कि आपको कितना रिस्पेक्ट देना है।
  • आपकी प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि आप कितनी आसानी से दूसरों के प्रभाव में आते हैं।
  • जो लोग हर टेस्ट का जवाब देने की कोशिश नहीं करते, वे अधिक पावरफुल माने जाते हैं।
  • प्रूफ करने और अप्रूवल कलेक्ट करने की आदत छोड़ना आत्म-सम्मान बढ़ाने में मदद करता है।
  • अपने व्यवहार और प्रतिक्रियाओं को समझना जरूरी है ताकि बार-बार रिपीट होने वाले पैटर्न को बदला जा सके।
  • वीडियो में व्यक्तिगत सेशन और पीडीएफ बुक के माध्यम से समाधान भी प्रस्तुत किए गए हैं।
  • सामाजिक इंटरैक्शन में आपकी आत्म-प्रस्तुति और आत्म-सम्मान का बड़ा प्रभाव होता है।
  • लोग आपकी बातों को कैसे रिस्पॉन्ड करते हैं, यह आपकी सेल्फ वैल्यू पर निर्भर करता है।

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00:00
Speaker A
कभी आपने नोटिस किया है कि कुछ लोग आपके साथ वही करते हैं जो वह हर किसी के साथ करने की हिम्मत नहीं करते। और सबसे अजीब बात यह है कि ज्यादातर बार आपको उस वक्त पता भी नहीं चलता कि असल में हो क्या रहा है।
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Speaker A
सोचिए ऐसा क्यों होता है कि दो लोग एक ही रूम में बैठे होते हैं लेकिन एक इंसान को लोग चैलेंज करने से पहले दो बार सोचते हैं और दूसरे इंसान को हर कोई कैजुअली चैलेंज कर देता है। ऐसा क्यों होता है कि
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Speaker A
कुछ लोगों की बाउंड्रीज नेचुरली रिस्पेक्ट की जाती है जबकि कुछ लोगों को हर बार अपनी वैल्यू प्रूव करनी पड़ती है। क्या यह कॉन्फिडेंस का गेम है? क्या यह पर्सनालिटी का गेम है? या फिर कोई और चीज है जो लोगों
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Speaker A
को सिग्नल देती है कि आपके साथ कितनी दूर तक जाया जा सकता है? सच यह है कि ज्यादातर लोग रिस्पेक्ट देने या ना देने का डिसीजन एक दिन में नहीं लेते। वो पहले ऑब्जर्व करते हैं। फिर कंपेयर करते हैं और फिर
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Speaker A
टेस्ट करते हैं। और सबसे डेंजरस बात यह है कि यह टेस्ट ओपनली नहीं होते। कोई आकर आपसे नहीं कहेगा कि आज मैं तुम्हारा टेस्ट लेने वाला हूं। वो बस सिचुएशन क्रिएट करेंगे, कुछ बोलेंगे, कुछ रिएक्शन देखेंगे और फिर अपने दिमाग में आपके बारे में
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Speaker A
कंक्लूजन बना लेंगे। और यह कंक्लूजन फाइनल होता है। इसीलिए बहुत लोग सालों तक यह समझ ही नहीं पाते कि उनके साथ बार-बार सेम पैटर्न क्यों रिपीट हो रहा है। तो दोस्तों, आज की इस वीडियो में हम इस हिडन
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Speaker A
गेम को समझेंगे। हम बात करेंगे उन टेस्ट की जो लोग बिना बताए लेते हैं और उन सिग्नल्स [संगीत] की जो अनजाने में डिसाइड कर देते हैं कि लोग आपको कितनी वैल्यू देंगे, कितनी रिस्पेक्ट देंगे और कितना सीरियसली लेंगे। चलो सबसे पहले मैं आपको
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Speaker A
एक सिचुएशन से समझाने की कोशिश करती हूं। मान लीजिए आप किसी फैमिली गैदरिंग में हो। सब नॉर्मल बात कर रहे हैं। फिर अचानक कोई आपसे पूछता है और बताओ लाइफ में क्या नया चल रहा है? आप अपने किसी अचीवमेंट या
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Speaker A
प्लान के बारे में बताते हो। और तुरंत सामने से जवाब आता है कि अच्छा है लेकिन आजकल तो सभी यह कर रहे हैं। ध्यान दीजिए। उसने आपकी अचीवमेंट को गलत नहीं कहा। उसने आपकी मेहनत को रिजेक्ट भी नहीं किया लेकिन
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Speaker A
उसने एक काम जरूर किया। उसने देखा कि आप अपनी वैल्यू को कितनी आसानी से डाउट करने लगते हो। अगर उसकी एक लाइन सुनते ही आप जस्टिफाई करना शुरू कर दो। अपनी अचीवमेंट को प्रूफ करने लगो या कंपैरिजन में फंस
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Speaker A
जाओ। तो सामने वाले को एक सिग्नल मिल जाता है कि इसकी वैल्यू बाहर की अप्रूवल पर टिकी हुई है और जिस इंसान की वैल्यू बाहर से चलती है उसका कॉन्फिडेंस भी बाहर से कंट्रोल किया जा सकता है। [संगीत] अब एक
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Speaker A
दूसरा सीन देखिए। आप किसी डिस्कशन में अपनी ओपिनियन रखते हो। सब कुछ नॉर्मल चल रहा होता है। फिर अचानक कोई कहता है कि मुझे नहीं लगता कि तुम सही हो। बस यह इतनी सी बात। लेकिन उसके बाद जो होता है वही
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Speaker A
इंटरेस्टिंग है। कुछ लोग तुरंत डिफेंड करना शुरू कर देते हैं। कुछ लोग प्रूव करने लग जाते हैं और कुछ लोग इमोशनली रिएक्ट कर देते हैं। और कुछ लोग तो शांति से अपनी बात रखकर आगे बढ़ जाते हैं। यहां
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Speaker A
लोग आपकी ओपिनियन को टेस्ट नहीं कर रहे होते। वो देख रहे होते हैं कि डिसएग्रीमेंट से आप कितना हिलते हो। कि जिस इंसान को हर डिसएग्रीमेंट पर्सनल अटैक लगता है, वह धीरे-धीरे अपनी ओरिजिनलिटी खो देता है। वो वही बोलना शुरू कर देता है जो लोग सुनना
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Speaker A
चाहते हैं और दुनिया को ऐसे लोग पसंद जरूर आते हैं लेकिन रिस्पेक्ट बिल्कुल नहीं मिलती उनको। अब एक तीसरा सीन सोचिए। आपने कोई नया गोल सेट किया। शायद बिजनेस, YouTube, फिटनेस या लाइफ का कोई भी बड़ा डिसीजन। आप एक्साइटमेंट में किसी को बताते
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Speaker A
हो और सामने से जवाब आता है। देखते हैं कितने दिन चलता है। यह एक लाइन शायद आपने कभी ना कभी जरूर सुनी होगी और उस मूवमेंट में दो चीजें हो [संगीत] सकती हैं। या तो आप तुरंत डाउट में चले जाओ या फिर आप
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Speaker A
शांति से अपने काम पर फोकस रखो। क्योंकि बहुत बार लोग आपके प्लांस को जज नहीं कर रहे होते। वो आपकी सर्टेनिटी को मेजर कर रहे होते हैं। [संगीत] वो देख रहे होते हैं कि एक छोटी सी ओपिनियन आपका डायरेक्शन
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Speaker A
बदल सकती है या नहीं। जो कमजोर होते हैं, वह डायरेक्शन बदलकर अपनी जिंदगी में फंस जाते हैं। लेकिन जो मजबूती से खड़ा रहता [संगीत] है, जिसे पता होता है कि यह ओपिनियन उसकी लाइफ के लिए इंपॉर्टेंट नहीं है, वही आगे बढ़कर एक
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Speaker A
इतिहास रच देता है। तो दोस्तों, अब तक हमने उन टेस्ट की बात की जहां लोग आपकी इमोशनल स्टेबिलिटी को मेजर करते हैं। लेकिन अब मैं आपको उन टेस्ट के बारे में बताने वाली हूं जो सीधे आपके सेल्फ रिस्पेक्ट और सेल्फ वर्थ को मेजर करते
04:07
Speaker A
हैं। [संगीत] और यहीं से असली गेम शुरू होता है। मान लीजिए आप किसी ग्रुप में बैठकर बात कर रहे हो। आप कुछ इंपॉर्टेंट बोलते हो सब सुन भी लेते हैं लेकिन तुरंत कोई टॉपिक चेंज कर देता है। कोई फॉलो अप
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Speaker A
नहीं, कोई इंटरेस्ट नहीं और थोड़ी देर बाद जब कोई दूसरा बोलता है तब उसकी बात पर डिस्कशन करने लगते हैं। बहुत लोग उस मोमेंट में सिर्फ इतना देखते हैं कि मेरी बात कोेंस नहीं मिली। [संगीत] लेकिन सामने वाले लोग एक और चीज देख रहे होते हैं। वो
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Speaker A
देख रहे होते हैं कि आप अपनी बात की वैल्यू खुद कितनी मानते हो? क्या आप तुरंत चुप हो जाते हो? क्या आपको लगने लगता है कि शायद मेरी बात इंपॉर्टेंट नहीं है? या फिर आप बिना इनसिक्योर हुए अपनी प्रेजेंस
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Speaker A
मेंटेन रखते हो क्योंकि दुनिया अक्सर आपकी बात की वैल्यू उस हिसाब से करती है जिस हिसाब से आप खुद करते हो। अब एक और सिचुएशन देखिए। आपने कोई अचीवमेंट हासिल की। शायद प्रमोशन मिला, शायद बिजनेस में रिजल्ट आ गया। शायद YouTube पर ग्रोथ हो
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Speaker A
गई। आप किसी के साथ शेयर करते हो और सामने वाला बस इतना बोलता है अच्छा है। बस नो एक्साइटमेंट, नो एप्रिसिएशन, नो इंटरेस्ट। और उसके बाद टॉपिक बदल देता है। उस वक्त ज्यादातर लोगों के अंदर तुरंत डिसपॉइंटमेंट आती है। लेकिन ध्यान दीजिए
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Speaker A
[संगीत] बहुत बार सामने वाला आपकी अचीवमेंट को इग्नोर नहीं कर रहा होता। वो देख रहा होता है कि आपकी सेल्फ वर्थ एप्रिसिएशन पर चलती है या नहीं। क्योंकि जिस इंसान को हर वक्त बाहर से वैलिडेशन चाहिए होता है। उसके इमोशंस का रिमोट
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Speaker A
कंट्रोल दूसरों के हाथों में होता है। फिर आता है एक और टेस्ट जो बहुत सल होता है। मान लीजिए आप किसी नए आईडिया या डिस्कशन के बारे में बात करते हो। सामने वाला सीधा मना नहीं करता। वो बस थोड़ा सा डाउट
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Speaker A
क्रिएट करता है। पक्का ये प्लान रिस्की तो नहीं है? तुमसे हो पाएगा? यह क्वेश्चन हमेशा बुरे इंटेंशन से नहीं पूछे जाते। लेकिन बहुत बार लोग देखते हैं कि आप डिस्कशन पर कितना ट्रस्ट करते हो? क्या एक सवाल सुनते ही आप अपनी डायरेक्शन बदल देते
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Speaker A
हो या फिर आप दूसरों की बात सुनकर भी अपने दिमाग को यूज करते हो। अब तक की बात सुनकर शायद आपको अपनी लाइफ के कुछ सिचुएशन याद आ रहे होंगे। शायद कुछ लोग याद आ रहे होंगे। शायद कुछ ऐसे मोमेंट्स भी याद आ रहे होंगे
06:03
Speaker A
जहां आपको लगा था कि प्रॉब्लम सामने वाले में है। लेकिन आज समझ आ रहा होगा कि कहीं ना कहीं कुछ सिग्नल्स ऐसे भी जा रहे थे जो लोगों को यह कॉन्फिडेंस दे रहे थे कि वो आपको टेस्ट कर सकते हैं। और बहुत बार सबसे
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Speaker A
मुश्किल काम चेंज करना नहीं होता। सबसे मुश्किल काम होता है यह समझना कि एग्जैक्ट प्रॉब्लम कहां है? कौन सा बिहेवियर रिपीट हो रहा है, कौन सी प्रॉब्लम या कौन सा पैटर्न बार-बार सेम रिजल्ट क्रिएट कर रहा है। इसीलिए अगर आपको भी लग रहा है कि आपकी
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Speaker A
लाइफ में भी यह चीजें रिपीट हो रही हैं, लोग आपको लाइटली लेते हैं। आपकी बाउंड्रीज को सीरियसली नहीं लेते या फिर आपको समझ ही नहीं पाते। तो इसी के लिए मैंने डिजाइन की है अपनी आइडेंटिटी क्लेरिटी टॉक यानी वन
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Speaker A
टू वन पर्सनल सेशन। या अगर आप चाहे अपने बिहेवियर को खुद आइडेंटिफाई करना, एक पैटर्न के साथ चलना, तो आप मेरी द आइडेंटिटी शिफ्ट पीडीएफ बुक भी परचेस कर सकते हैं। इन दोनों की प्रोसेस मैं आपको लास्ट में समझाऊंगी। लेकिन अब बात करते
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Speaker A
हैं सबसे इंपॉर्टेंट चीज की। अब तक हमने यह समझ लिया कि लोग आपको बिना बताए टेस्ट करते हैं। वो आपकी सेल्फ वर्थ, इमोशन, स्टेबिलिटी और कॉन्फिडेंस को मेजर करते हैं। लेकिन अब सबसे इंपॉर्टेंट सवाल यह है कि आखिर कुछ लोग इन टेस्ट को पास कैसे
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Speaker A
करते हैं? ऐसा क्या है जो उनके अंदर अलग होता है? सबसे पहली बात समझिए। पावरफुल लोग हर टेस्ट का जवाब देने की कोशिश नहीं करते। वो हर चैलेंज एक्सेप्ट नहीं करते। वो हर ओपिनियन को करेक्ट करने नहीं निकल
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Speaker A
पड़ते। क्योंकि उन्हें पता होता है कि हर बार रिएक्ट करना स्ट्रेंथ नहीं होता। बार रिएक्ट ना करना स्ट्रेंथ होती है। मान लीजिए कोई आपकी अचीवमेंट को छोटा दिखाने की कोशिश करता है। पहले आप तुरंत एक्सप्लेन करने लग जाते थे। बताते थे कि
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Speaker A
कितनी मेहनत लगी है, कितना स्ट्रगल हुआ है, कितना डिफिकल्ट था। लेकिन धीरे-धीरे आप समझने लगते हो। इंसान आपकी वैल्यू को समझना ही नहीं चाहता। उसे कन्वेंस करने में अपनी एनर्जी बर्बाद करना बेकार है। और यहीं से पहला शिफ्ट आता है। आप प्रूव करना
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Speaker A
कम कर देते हो। दूसरा शिफ्ट और भी इंपॉर्टेंट है। आप अप्रूवल कलेक्ट करना बंद कर देते हो। ज्यादातर लोग हर दिन अनजाने में अप्रूवल कलेक्ट कर रहे होते हैं। किसी ने तारीफ कर दी तो मूड अच्छा हो गया। किसी ने इग्नोर कर दिया तो मूड खराब
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Speaker A
हो गया। किसी ने एप्रिशिएट कर दिया तो कॉन्फिडेंस हाई हो गया और किसी ने क्रिटिसाइज कर दिया तो कॉन्फिडेंस लो हो गया। यानी रिमोट कंट्रोल दूसरों के हाथों में। लेकिन जो लोग इन टेस्ट को पास कर
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Speaker A
नहीं चल रहा होता। वो अपने स्टैंडर्ड्स पर चल रहा होता है। उन्हें पता होता है कि आज मुझे जो करना था मैंने वह किया है या नहीं। और यह क्लेरिटी उन्हें इमोशनली स्टेबल बना देती है। तीसरा शिख सबसे
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Speaker A
पावरफुल है। वो लोग अपनी आइडेंटिटी को रिएक्शन से डिफाइन करना बंद कर देते हैं। अगर किसी ने उनकी बात को इग्नोर कर दिया तो वो तुरंत ये कंक्लूजन नहीं निकालते कि मेरी वैल्यू कम है। अगर किसी ने डिसए्री
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Speaker A
कर दिया तो वो यह नहीं सोचते कि शायद मैं ही गलत हूं। अगर किसी ने एप्रिसिएशन नहीं दिया तो वो अपनी अचीवमेंट को छोटा नहीं मानने लगते। क्योंकि उन्हें पता होता है कि दूसरों का बिहेवियर हमेशा उनकी वैल्यू
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Speaker A
का एक्यूरेट मेजर नहीं करता है। उन्हें पता होता है कि किसी भी काम के लिए उन्होंने कितनी मेहनत की है और यहीं से गेम बदलना शुरू होता है। क्योंकि जिस दिन आप हर टेस्ट का जवाब देना बंद कर देते हो,
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Speaker A
उस दिन लोगों को भी आंसर मिलना बंद हो जाता है। [संगीत] जिस दिन आप हर क्रिटिसिज्म पर डिफेंड होना बंद कर देते हो, उस दिन लोग समझने लगते हैं कि यह इंसान इतनी आसानी से इन्फ्लुएंस नहीं होने वाला। जिस दिन आप अप्रूवल के बिना भी अपनी
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Speaker A
डायरेक्शन मेंटेन रखते हो उस दिन लोग आपको अलग नजर से देखना शुरू कर देते हैं। तो दोस्तों अब समझो हर जगह अपने आपको परोसने की जरूरत नहीं है। और अब बारी है उस प्रोसेस की। तो अगर आप भी मेरे साथ वन टू
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Speaker A
वन आइडेंटिटी क्लेरिटी टॉक लेना चाहते हैं या आप चाहते हैं आपकी वो पहली सीडी यानी द आइडेंटिटी पीडीएफ बुक। तो इन दोनों की प्रोसेस बहुत सिंपल है। मैंने नीचे कमेंट में भी और डिस्क्रिप्शन में भी। अपना Instagram आईडी पिन कर दी है। वहां जाइए।
09:24
Speaker A
अगर आपको क्लेरिटी कॉल चाहिए तो आप मुझे क्लेरिटी मैसेज करना और अगर आपको पीडीएफ बुक चाहिए तो आप मुझे वहां पीडीएफ मैसेज करना और अपना WhatsApp नंबर छोड़ना मत भूलना क्योंकि वहीं पर सारी पेमेंट प्रोसेस कंप्लीट की जाती है। तो दोस्तों
09:35
Speaker A
अब मिलती हूं आपसे एक ऐसे ही दमदार वीडियो में जो आपको बताएगी कि आपके बिहेवियर पैटर्न कहां आपको वीक दिखा रहे हैं और कैसे उसे रिवर्स करके बेस्ट बनना है। तब तक के लिए खुश रहिए, आबाद रहिए, जिंदाबाद
09:46
Speaker A
रहिए। धन्यवाद।
Topics:सोशल स्टेटससेल्फ वर्थइमोशनल स्टेबिलिटीकॉन्फिडेंससामाजिक टेस्टआत्मसम्मानबिहेवियर पैटर्नरिस्पेक्टअपप्रूवललेट्स लर्न विद शिवानी शर्मा

Frequently Asked Questions

लोग बिना बताए हमारे साथ कौन-कौन से टेस्ट करते हैं?

लोग आपकी इमोशनल स्टेबिलिटी, सेल्फ वर्थ, कॉन्फिडेंस और व्यवहार को टेस्ट करते हैं ताकि यह जान सकें कि आपकी बाउंड्रीज कितनी मजबूत हैं और आपको कितना रिस्पेक्ट देना चाहिए।

इन सोशल टेस्ट को पास करने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका क्या है?

हर टेस्ट का जवाब देने की कोशिश न करना और हर चैलेंज को स्वीकार न करना सबसे महत्वपूर्ण है। साथ ही, बाहर से अप्रूवल की जरूरत कम करना और अपने आत्मसम्मान को मजबूत बनाना जरूरी है।

अगर मुझे बार-बार लोग लाइटली लेते हैं तो मैं क्या कर सकता हूँ?

आपको अपने व्यवहार के रिपीट पैटर्न को पहचानना होगा और अपनी सेल्फ वर्थ को बढ़ाने के लिए प्रूव करने की आदत छोड़नी होगी। इसके लिए वीडियो में सुझाए गए व्यक्तिगत सेशन या पीडीएफ बुक मददगार हो सकते हैं।

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