LEADER क्या होता है? Why ईरान Didn’t Collapse | Sameer … — Transcript

ईरान की नेतृत्व क्षमता और जियोपॉलिटिक्स में उसकी मजबूती का विश्लेषण, जिसने युद्ध के बावजूद अस्तित्व बनाए रखा।

Key Takeaways

  • लीडरशिप कठिन परिस्थितियों में परखी जाती है और ईरान ने इसे साबित किया।
  • संस्थागत मजबूती किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं होती, बल्कि एक प्रणाली पर आधारित होती है।
  • ईरान की सफलता उसकी फिलॉसफी और नेतृत्व के संयोजन में निहित है।
  • संकट के समय में एकजुटता और धैर्य ही असली नेतृत्व की पहचान है।
  • आधुनिक युद्ध और जियोपॉलिटिक्स में रणनीतिक सोच और संस्थागत स्थिरता महत्वपूर्ण हैं।

Summary

  • ईरान ने युद्ध और बमबारी के बावजूद अपने अस्तित्व को बचाकर जियोपॉलिटिक्स में एक मिसाल कायम की।
  • सुप्रीम लीडर और टॉप कमांडर के मारे जाने के बाद भी ईरान की नेतृत्व व्यवस्था ने मजबूती से काम किया।
  • ईरान की नेतृत्व शैली को हीरे के बनने की प्रक्रिया से जोड़ा गया है, जो कठिन परिस्थितियों में मजबूत होती है।
  • लीडरशिप की 16-20 क्वालिटीज का उल्लेख, जो हर व्यक्ति और संस्था में होनी चाहिए।
  • ईरान ने संस्थागत मजबूती (Institutional Fortitude) के जरिए किसी एक व्यक्ति पर निर्भर न रहकर सिस्टम बनाया।
  • सुप्रीम लीडर की हत्या के बाद भी तीन सदस्यों की काउंसिल ने सरकार चलाना जारी रखा।
  • ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक की फिलॉसफी और संस्थान उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं।
  • इजराइल और अमेरिका की उम्मीदों के विपरीत ईरान ने अपनी लीडरशिप और संस्थानों की मजबूती से विरोध का सामना किया।
  • ईरान ने युद्ध के दौरान अपनी राजधानी और संस्थानों को डीसेंट्रलाइज्ड कर रखा था, जिससे कमांड स्ट्रक्चर सुरक्षित रहा।
  • लीडरशिप में धैर्य, साहस, और आत्मसम्मान की अहमियत को वीडियो में विस्तार से समझाया गया।

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Speaker A
देखिए, जियोलॉजी का एक लेक्चर है जिससे वह जियोपॉलिटिक्स में वह सच हो गया है। आप जियोलॉजी के किसी भी लेक्चर से पूछिएगा कि व्हेन द कार्बन इज सब्जेक्टेड टू इंटेंस हीट एंड प्रेशर, दुनिया की किसी भी चीज को
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Speaker A
तोड़ दे ऐसा, ऐसी हीट, ऐसा टेंपरेचर जब कार्बन को दिया जाता है तो वो हीरे में कन्वर्ट होता है। और वो कार्बन जो टूटने से इंकार कर दे, वह ऐसा हीरा बनता है। फिर उसे दुनिया की कोई चीज नहीं तोड़ सकती। इट
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Speaker A
बिकम्स द हार्डेस्ट सब्सटेंस ऑन अर्थ। ईरान ने अपने अस्तित्व को, ईरान ने अपने वजूद को बरकरार रखकर इस जियोलॉजी के पूरे के पूरे लेक्चर को जियोपॉलिटिक्स में सच करके दिखा दिया। तारीख कभी-कभी ऐसे देश को पैदा करती है। आप सोच कर देखिए व्हेन द
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Speaker A
बॉम्ब्स आर फॉलिंग ऑन योर कैपिटल। आपकी राजधानी पर रात दिन बड़ी-बड़ी मिसाइल और बम गिर रहे हो। लड़ाई के पहले घंटे में आपके सुप्रीम लीडर को मार दिया गया और अगले 9 दिन में 48 में से 36 टॉप कमांड
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Speaker A
पूरा का पूरा कमांड स्ट्रक्चर खत्म कर दिया गया। जब दुनिया की सबसे पावरफुल मिलिट्री ने इतने सारे मिलिट्री मराइंस, नेवी और एयरफोर्स, जिसका कोई मुकाबला नहीं, उनको मोबिलाइज किया हो। और किस कदर मोबिलाइज किया था इस बात का अंदाजा लगाया
01:18
Speaker A
जा सकता है कि प्लेन्स तो गिने ही नहीं जा सकते थे। लड़ने वाले जो पानी के जहाज हैं, वह तो गिने ही नहीं जा सकते थे। उनको रिफिल करने वाले, यानी उनको बार-बार फ्यूल रिफिल करके देने वाले, उन प्लेन्स की गिनती
01:34
Speaker A
भी नहीं हो सकती थी। इतने सारे उन्होंने लड़ाई के लिए मोबिलाइजेशन किया था। तो मोस्ट पावरफुल मिलिट्री ऑन अर्थ और उसके साथ एक ऐसा जिसने आरएडी तबाह करने में, डिस्ट्रॉय करने में दुनिया की सबसे ऊंची आरएडी की हो, जिसने लोगों को मारने के लिए
01:55
Speaker A
जो आधुनिक हथियार बनते हैं, उसमें हर रिकॉर्ड को ब्रेक कर दिया हो। और उस वक्त जब आपके रहनुमा कत्ल हो गए हो और आपकी बच्चियों के स्कूल पर बम फेंक दिया गया हो और कई लोग सड़कों पर निकले हो, ऐसे वक्त
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Speaker A
में मोस्ट इंस्टिट्यूशन दे क्रैक एंड मोस्ट मैन दे नेगोशिएट फ्रॉम फियर। बड़े-बड़े ज्यादातर इदारे टूट जाते हैं। ज्यादातर लोग इसके बाद डर के पोजीशन से बातचीत में उतरते हैं। लेकिन ईरान जब वो उतरा है तो एक उर्दू का फ्रेज यूज़ करने का
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Speaker A
मन करता है कि जैसे तवक्कल वेडेड टू अक्ल। तवक्कल मतलब भरोसा अपने रब पर। उसने अक्ल से जब शादी कर दी, मतलब उन्हें अपनी सच्चाई पर, अपने मकसद की सच्चाई पर यकीन हो और हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकता चाहे कितने भी हमारे टॉप
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Speaker A
कमांडर मर जाएं, उनके रणनीतिकार, उनके स्ट्रेटजिस्ट इतनी ठंडी साफगोई से बात करते, यानी एक पूरा कैटलॉग बनाया जा सकता है इनक्रेडिबल वर्च्यूस ऑफ ईरानियन लीडरशिप पर। यह होती है वो लीडरशिप जिसे पैदा करना पड़ता है जैसे से हीरा कार्बन
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Speaker A
के इंटेंस हीट और प्रेशर में तप कर बनता है। सोशल मीडिया पर कोई लीडर पैदा नहीं होता साहब। उसे उतने इंटेंस हीट और प्रेशर से निकलना पड़ता है। जब उसके वर्च्यूस, जब उसकी क्वालिटी, जब उसकी खूबियां कंसंट्रेट होती हैं। जब वो इम्तिहानों से गुजरती है।
03:25
Speaker A
जब वो बार-बार परखता जाता है तब जाकर वो इतना खुलकर अपनी लीडरशिप की अदायगी करता है जिसका मुजायरा ईरान ने करवाया। आइए, मैं आपको कुछ दिखाऊं जिओपॉलिटिक्स की नजर से नहीं बल्कि अखलाकी नजर से भी कि हमें चाहे
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Speaker A
आप एनजीओ चलाते हो या आप स्टूडेंट हो, आपके अंदर यह 16 से 20 क्वालिटीज आना चाहिए। मन तो मेरा यह है, यह कहना का कि काश हमारे देश की कयादत इन लीडरशिप क्वालिटीज को अपने अंदर उतारे। हमारे देश की लीडरशिप
03:56
Speaker A
इसको हुआ तो फरवरी 28, 2026, अभी एक घंटा भी लड़ाई शुरू हुए नहीं था, खबर आई के सुप्रीम लीडर, जिनको आप इंग्लिश में कह सकते हैं द ग्रेविटेशनल सेंटर ऑफ इस्लामिक रिपब्लिक, मतलब इस्लामिक रिपब्लिक का मरकज सेंटर आया।
04:16
Speaker A
अली खुमैनी शहीद, ये 37 इयर्स से जिसने कयादत दी हो, जो मरकज हो, जो सेंटर माइंड हो, जिन्होंने इस दिन की तैयारी की हो, वो पहले घंटे में उन्हें शहीद कर दिया गया। लेकिन बात वही नहीं ठहरती, उसके बाद आईआरजी सी कमांडर को भी
04:35
Speaker A
मार दिया गया। मिनिस्टर ऑफ डिफेंस को भी मार दिया गया। और 48 में से टॉप 36 कमांड स्ट्रक्चर को पूरी तरह दरहम बरहम करके रौंद दिया गया। लेकिन इसके बाद जो हुआ वो इतिहास याद रखेगा। तारीख याद रखेगी। कई
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Speaker A
बार ऐसा होता है ना कि और आप इतिहास की किताबों को पढ़ना, खासकर एंशिएंट और मेरी एजेस की किताबों को कि अगर हम सेंट्रल राजा को मार दें तो फिर उसकी सेना तितर-बितर भागती है। लेकिन यहां कुछ और
05:04
Speaker A
हुआ। जैसे ही आया अली खमैनी साहब को शहीद किया गया। हिंदी का एक वर्ड है निरंतरता। कंटिन्यूटी का वादा, द वर्ल्ड कंटिन्यूटी। उसके लीडर सारे एकजुट हो गए। और जैसे हर कोई तैयारी में बैठा था। इस सीन को उसने
05:21
Speaker A
कई बार रिहर्स किया था। एक ऐसे सिलसिले की शुरुआत, अभी इस बात को पूरी तरह से डेड बॉडी को हटाया भी नहीं गया था। वहां से उसे बरामद भी नहीं किया गया था। एक नई कयादती काउंसिल ने अपना काम शुरू कर दिया।
05:38
Speaker A
और उनके जो विदेश मंत्री थे, फॉरेन मिनिस्टर, उन्होंने आकर कहा कि यह सिलसिला कुछ ही दिनों में मुकम्मल हो जाएगा। तीन मेंबर्स की जो रुकनी काउंसिल है, वह हुकूमत चलाएगी जब तक, जब तक एक नए सुप्रीम लीडर का
05:52
Speaker A
इंतखाब ना हो जाए। उसे चुन ना लिया जाए। होना तो यहां यह चाहिए था। एक पैनिक ब्रॉडकास्ट होना चाहिए था। कैपिटल राजधानी से एक फ्लाइट में कुछ नेता उड़कर भागते हुए दिखने चाहिए थे। या फिर जो छोटे-छोटे फ्लेक्शंस और ग्रुप्स होते हैं, उन्हें
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Speaker A
सत्ता के लिए एक दूसरे को धकेलना और अफरातफरी का माहौल शुरू होना चाहिए था। लेकिन फिर यहां पर एक वर्ड यूज करने का मन करता है जो लीडरशिप को बहुत शोभा देता है। इसे कहते हैं रिमार्केबल रेजिलियंस। रिमार्केबल रेजिलियंस यानी काबिल जिक्र
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Speaker A
लचीलापन। जब यह सब हो रहा था और रोज खबर आ रही थी आज चार कमांडर मारे गए। आज नौ कमांडर मारे गए। जो बची हुई उनके कमांडरों की फौज थी, वो डिफाइंड स्टेटमेंट, यानी एक बयान देती थी। बयान देते वक्त उनके
06:40
Speaker A
एटीट्यूड में कोई कमी नहीं होती थी। मार्कस ऑलियस की एक किताब है मेडिटेशन, उसको पढ़ना चाहिए। द रैशन सोल्स दे फाइंड इट्स हाईएस्ट एक्सप्रेशन नॉट इन ईज़ बट इन रेजिस्टेंस। जो जहीन रूहें होती हैं, वो अपनी बुलंदी का इजहार आसानी में नहीं
06:59
Speaker A
करती। साहब, जो जहीन रूहें होती हैं, वो अपनी बुलंदी का इजहार आसानी में नहीं करती। मुकाबले में करती है। मुकाबले में करती। और जो इंस्टिट्यूशंस थे, सोचिए तीन लोगों के काउंसिल ने अगले लीडर को चुनने का प्रोसेस शुरू भी कर दिया। बिकॉज दिस
07:18
Speaker A
इंस्टीट्यूट्स वर बिल्ट अराउंड एन आईडिया रादर देन अराउंड अ मैन। एंड व्हेन यू बिल्ड इंस्टीट्यूशंस। किसी फिलॉसफी, किसी फिक्र के इर्दगिर्द जब आप संस्थानों को बनाते हैं तो फिर किसी इंसान के मरने के साथ वो संस्थान नहीं ड।
07:35
Speaker A
इंसान के मरने के साथ वह संस्थान, वह इंस्टिट्यूशंस नहीं मरते। आपको मालूम है पहली शिकस्त अमेरिका और इजराइल को कब मिली? जब उन्हें यह रियलाइजेशन हुआ ईरान बल्जिम के टॉप लीडरशिप को पूरा कोलैप्स कर देने के बावजूद उनके सुप्रीम लीडर को मार देने के
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Speaker A
बावजूद ईरान को बाल भी बांका नहीं हुआ। उसके बावजूद वो लोगों का जो रेजिलियंस है, उनके बर्दाश्त करने का और झटके झेलने की जो काबिलियत है, इस चीज ने उनको हैरान और सरप्राइज करके रख दिया। वो हैरान थे
08:13
Speaker A
क्योंकि उनको लगता था कि पूरी की पूरी इस्लामिक डेमोक्रेसी एक शख्स पर टिकी है। यही तो हमारा प्रोपोगेंडा है जो हमने पूरी दुनिया से कहा है कि यहां पर एक डिक्टेटर है जो रूल करता है। अब आप सोचिए साहब, वो
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Speaker A
डिक्टेटर ने अपने इर्दगिर्द नहीं बल्कि एक फिलॉसफी के इर्द-गिर्द कितने इंस्टिट्यूशंस और कितने संस्थान, मतलब ईरान ने 47 इयर्स अपने प्रोपोगेंडा को उल्टा साबित करने में लगा दिए। और तारीख अब गवाह है कि कौन जीता लास्ट में। वो अजमशन की एक इंसान है जो
08:49
Speaker A
तानाशाह है, जो पट्टी हमें पढ़ाई जाती है, उसे उन्होंने गलत साबित कर दिया। इसे कहते हैं इंस्टीट्यूशनल फर्टिट्यूड, संस्थागत मजबूती, इदारों की मजबूती। इंस्टिट्यूशनल फर्टिट्यूड द करेज टू हैव बिल्ड अ सिस्टम दैट डज नॉट नीड यू टू सर्
09:08
Speaker A
एक ऐसा इदारा कायम करना जिसके बचे रहने के लिए आपके बचे रहने की जरूरत नहीं है। हमारे यहां भी बहुत लोग इदारे चलाने का। अब मैं क्या बोलूं, इसके आगे छोड़ देते हैं। लेकिन वो सब लोग सारे इदारे को एक
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Speaker A
इंसान के इर्दगिर्द, उसकी शख्सियत के इर्दगिर्द कायम करते। लेकिन ईरान के लीडरशिप की जो दूसरी बात थी, वो तो और दिल में उतरने वाली थी। इसे कहते हैं द डिग्निटी ऑफ डिफाइन नोइंग वंस वर्थ अंडर द बूट। इंकार करने की गैरत, जूते के तले भी
09:45
Speaker A
अपनी कदर को पहचानने की यह खास चीज। जूते के तलवे के नीचे जब आपको रगड़ा जाए तब भी आप अपनी कदर जानते हो। मार्च 9, 2026, 9 दिन हो चुके थे इस तबाहकुन जंग को शुरू हुए। तेहरान हैवीली बम्ब था और आपको पता
10:07
Speaker A
है डबल टैपिंग मेथड से इजराइल ने पहले स्कूलों को उड़ाया। हॉस्पिटल्स को उड़ाया। म्युनिसिपल कॉरपोरेशंस ऑफ ईरान के जितने छोटे-छोटे सेंटर्स थे, उनको उड़ाया। उसके बाद पुलिस स्टेशंस को उड़ाया। उसके बाद एक अपील की कि रोड पर निकलो। पैरामिलिट्री
10:24
Speaker A
फोर्सेस के बराक्स को उड़ा दिया। यह उम्मीद में कि लोग अब जब निकलेंगे तख्ता पलटने तो उनको रोकने वाला कोई नहीं होगा। हॉस्पिटल्स और स्कूल्स को उड़ा दिया। मतलब यह इंस्टिट्यूशंस उड़ाने के बाद जो नजदीकी हॉस्पिटल था जहां घायलों को लेकर भागने
10:41
Speaker A
वाले थे, जख्मियों को लेकर लोग उस जगहों को भी उड़ा दिया ताकि कोई उम्मीद ही बाकी ना रहे। लेकिन 9 दिन बाद इनके फॉरेन मिनिस्टर राक्षी साहब आते हैं पीबीएस न्यूज़ आर पर और महसूस तो यह हो रहा था कि अब ये यहां
10:58
Speaker A
रोएंगे य
11:14
Speaker A
मुस्तहकम हैं। हम काफी मजबूत हैं। हम पर जुल्म हुआ है। और इस जुल्म से हम अपने लोगों की हिफाजत कर रहे हैं। और हमें कोई वजह नजर नहीं आती कि हम अमेरिकियों से बात क्यों करें। हमें कोई वजह नजर नहीं आती कि
11:32
Speaker A
हम अमेरिकियों से बात क्यों करें। वी डोंट सी एनी रीज़ व्हाई वी शुड टॉक टू अमेरिकनंस। यह डिफाइन एटीट्यूड यह डिफाइन एटीट्यूड यह शेख ही बघारना नहीं है। मैं यह लेक्चर उस कम्युनिटी को सुना रहा हूं जो हर बात में सिर्फ शेख ही बगा।
11:52
Speaker A
हर बात पे सिर्फ शेख ही बगा। मैं कितने प्रोग्राम्स में कह चुका हूं कि जहां मुझे बोलने के लिए बुलाया जाता है, मुझे गुलदस्ता मोमेंटो मत दीजिए। मुझे 100 कोड़े मारिए और मेरे जैसे हर इंसान को 100 कोड़े मारिए। क्यों? क्योंकि अगर आप इतना
12:09
Speaker A
अच्छा बोलते हैं जिससे दुनिया बदल सकती है तो फिर आपकी खुद की कम्युनिटी का यह हाल क्यों है? सिवाय 100 करोड़ों के इस वक्त कोई और इज्जत बख्शी नहीं जानी चाहिए इस कौम के थिंकर्स को। है ना? तो उन्होंने
12:25
Speaker A
शेख ही नहीं बगाड़ी साहब। यह गैरत थी। दिस वास डिग्निटी। दिस वाज़ असशन ऑफ सेल्फ वर्थ। और अपनी कदर का ऐलान था। और पता है किस वक्त? उस वक्त जब इस कदर को छीनने के लिए हालात बनाए गए थे। जब यह एक्सपेक्टेशन
12:43
Speaker A
की जा रही थी कि अब आप रोओगे, गिड़गिड़ाओगे। आप एक ऐसा रिस्पांस चुन रहे हैं जिसने बड़े-बड़े स्ट्रेटजिस्ट को हिला के रख दिया। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने ट्वीट किया होल सिविलाइजेशन विल डाई टू नाइट। एक
13:01
Speaker A
ऐसा सेंटेंस जिसने ना सिर्फ ईरान बल्कि दुनिया के हर उस पुराने सिविलाइजेशन जैसे हम हैं इंडिया के लोग उन सबको बहुत छोटा महसूस करवाया। वो चाहते थे कि ईरान साइकोलॉजिकल प्रेशर में आए। वो अपने आप को छोटा महसूस करें। डिफिटेड डेस्पिरेट स्मॉल
13:20
Speaker A
यह फीलिंग ऑफ बीइंग स्मॉल छोटा मगलू बेबस महसूस करना। लेकिन उनके स्पोक्सपर्सन ने अपने आप को कैसे समेटा और इंकार किस गैरत के साथ किया। वह भी अमेरिकन टेलीविजन पर बमबारी के बीच। यह बात ईरान के सिविलाइजेशन के लोग ही जानते हैं। वो
13:40
Speaker A
बार-बार यह कहते हैं कि हमारी ताकत किसी न्यूक्लियर वेपन में नहीं है। हमारी ताकत इंकार में है। हमारी ताकत किसी न्यूक्लियर वेपन में नहीं है। हमारी ताकत इंकार में है। यहां पर ना एक सेकंड लेकर एक फिलॉसफी समझाना चाहता हूं। ए बड़े-बड़े शादियों
13:57
Speaker A
में खर्चा करने वालों, महंगी कारों और महंगे मोबाइल फस लेकर विदेश यात्राओं पर जाने वालों, यह तुम्हारी कोई तारीफ नहीं है। तुम्हारी तारीफ यह है। क्या तुमने उस दिन के लिए कुछ पैसा बचा के रखा है? जब तुम्हारी गैरत को ललकार कर तुम्हें झुकाया
14:14
Speaker A
जाए और तुम झुकने से इंकार करो। इसे अमीरी कहते हैं। यह फ्लेक्सिंग ऑफ योर वेल्थ। यह कोई और शय है साहब। और गैरत के साथ उस वक्त खड़े होना उन कंडीशंस में खड़े होना यह कोई और शहर है जैसे इंडिया उसकी अपनी
14:32
Speaker A
5000 साल का ट्रेडिशन और हिस्ट्री है साहब हमारे कंधों पर हड़प्पा मोहनजोदड़ो से लेकर हर वो जो बाहर से आया और सबसे पहले आर्यंस बाहर से आए और उसी ईरान के रास्ते आए ये जो कहते हैं ना बाहर से आए बाहर से
14:47
Speaker A
आए जी साहब बाहर से नहीं आए बेस्ट ऑफ द बेस्ट आए और इसके डस्ट में असिमिलेट हुए। इसकी हवाओं में से हवा बने। इसकी मिट्टी में से मिट्टी बने। इसके पानी में उनका खून और पसीना बहा। तब जाकर वो कल्चर आया
15:02
Speaker A
जिसे हम मुगलिया सल्तनत कहते हैं। और जिसका मुकाबला हॉवर्ड यूनिवर्सिटी से लेकर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोई भी कैंब्रिज शॉर्टर हिस्ट्री ऑफ इंडिया कुछ भी खरीद लीजिए। दुनिया के किसी कल्चर में यह ताकत नहीं है कि मुगलिया कल्चर से वो मुकाबला
15:16
Speaker A
कर सके। एंगुस मेडिसन ले लीजिए या शशि थरूर की किताब ले लीजिए। दुनिया की कोई किताब उठा लीजिए। अब यहां पर जो सुनने वाली बात है वो यह है जब आप किसी सिविलाइजेशन से आते हो आपके कंधे पर एक
15:29
Speaker A
इज्जत का भार होता है। एंड दिस इज अनट्रांसलेटेबल अरेबिक पर्शियन कांसेप्ट ऑफ ऑनर और डिग्निटी है। मतलब आप आप अगर झुक गए तो सिर्फ आप नहीं झुकोगे। एक 5000 साल की सभ्यता सिविलाइजेशन को आप झुका दो। तो उन्होंने क्या किया साहब? बहुत सुनने वाली
15:50
Speaker A
बात है। यह चीज यह चीज कुरान से ले इमाम हुसैन से ले इकबाल के शिकवे तक है। और वह बहुत सुनने वाली बात है। आपकी सिविलाइजेशन और आपके हिस्ट्री को जब सरमन बनाकर इबादतगाहों में गूंजा जाए। आपके हिस्ट्री
16:07
Speaker A
और आपके सिविलाइजेशन को जब उस ऑनर और उस प्राइड के साथ अपने बच्चों और आने वाली नस्लों के दिलों में बिठाया जाए। आपके सिविलाइजेशन का वह स्वाभिमान वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा अमेरिका और इजराइल इस उम्मीद से बम बरसा
16:25
Speaker A
रहे हैं कि यह उनकी हिम्मतें तोड़ देगा। सरेंडर करने पर मजबूर कर देगा। अरे जिस इबादतगाहों में जिन मस्जिदों में जहां इबादत करने लोग जाते हैं, वहां शहादत ही उनका फेस्टिवल है। शहादत ही उनकी इबादत। तो जहां पर शहादत को सेलिब्रेट करने के
16:47
Speaker A
लिए 10-10 दिन साल में रखे जाते हैं, वहां आसमान से जब आप बम गिराए इस उम्मीद के साथ कि यह हिम्मत तोड़ देगी। उल्टा है। यह हिम्मतों को और पवित्र कर देती है। ये क्या बम हिम्मत तोड़ेंगे जिसका जज्बे
17:03
Speaker A
जुनून और जमीर तैयार बचपन से हुआ है। शहादत को सेलिब्रेट करके। उल्टा है। जब आयतुल्ला अली साहब से कहा गया कि आपको यह घर छोड़ देना चाहिए। हो सकता है यह पहला निशाना बन जाए। ऐसा हमारे पास इंटेलिजेंस
17:18
Speaker A
है। उन्होंने कहा मैंने इंस्टीटशंस कायम कर दिए। मैंने लीडर्स की चेन ऑफ कमांड कायम कर दी। अब मैंने अपने लिए सिर्फ और सिर्फ शहादत को चुना है। मेजर ऑफ वंस ओन वर्थ दुश्मन नहीं बताएगा कि आपकी हैसियत क्या है। आपका अपना गैरतमंद इंकार
17:38
Speaker A
डिग्निफाइड रिफायंस बताएगा कि आपकी हैसियत क्या है और जितना एकिस्टेंशियल प्रेशर हो उतना वो रिफ्यूजल बड़ा और महान हो। ये हमें राष्ट्रपिता गांधी जी ने भी सिखाया। ये नेल्सन मंडेला की भी हिस्ट्री है। जितना जितना प्रेशर हो एक्सिस्टेंशियल
17:54
Speaker A
प्रेशर हो 27 साल रॉबिन आइलैंड में हम आपको रखेंगे। आपके चेहरे पर रोज सवेरे कोई पेशाब करे। हम आपको घर से निकलने नहीं देंगे। हम आपको करवट नहीं लेने देंगे। उसके बाद आप डिग्निफाइड डिफाइन करें तो महानता इस लफज़ का सिनोनिम आपको कहा जाएगा।
18:12
Speaker A
उसके बाद उन्होंने एक और चीज की जो बहुत सीखने लायक है। उन्होंने तैयारी की जहानत के साथ। उनके उनके कमांडर ने कहा कि वी हैव टेकन सम टू डिकेड्स आउट। वी हैव स्टडीड यूएस डिफीट्स। द डिफीट्स दैट यूएस
18:28
Speaker A
हैज़ इनफ्लिक्टेड। हमने हर अमेरिका की फौज ने दुनिया को जो शिकस्त दी है उसको पिछले 20 साल से पढ़ा है। उसके लेसंस और विज़डम्स को जमा किया है। और हमने वो लेसंस को अपने अंदर जज्ब किया है। वो सबसे पहले अमेरिका
18:44
Speaker A
का जो मॉडल है बॉम्बिंग ऑफ कैपिटल। हमने अपने कैपिटल हेड क्वार्टर्स को इतना डिसेंट्रलाइज्ड डिस्ट्रीब्यूटेड किया है कि आप अगर हमारे तेहरान को जर्रे में भी बिखर देंगे तो हमारे कमांड स्ट्रक्चर पे इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला। आप सोचिए
19:01
Speaker A
ईरान में एक टाइल्स आती है जिसमें ना चेकर्स बने होते हैं। छोटे-छोटे खाने बने होते हैं। इसको मोजाइक टाइल्स कहते हैं। ये ईरान की खास चीज और बड़ी खूबसूरत होती है। ये ईरानियन आर्किटेक्चर इंडिया ने अपने अंदर जजब किया था। हमारे
19:17
Speaker A
यहां मुगलिया काल की बहुत सारी इमारतें हैं जिसमें ये मोजाइयक टाइल्स मिल जाएगी। एक बड़ी टाइल्स में छोटे-छोटे खाने हुआ करते हैं। इसी तरह एक ईरान में उन्होंने छोटे-छोटे खाने में डिवाइड कर दिया। और प्रैक्टिकल विडम यानी अमली दानाई के चलते
19:34
Speaker A
उन्होंने हर हर एक पार्ट का अपना एक कमांडर और उसके नीचे पांच कमांडर और शुरुआत के चार को यह बताया कि तुम मरने वाले हो तो पांचवें को क्या करना है। मैं पांच तो सिर्फ इस लेक्चर के लिए बोल रहा
19:51
Speaker A
हूं। पता नहीं एक के नीचे एक के नीचे एक कितने डिसेंट्रलाइज्ड कमांड थे और उनको क्या पता था। उन्हें यह बताया गया कि एक वक्त आएगा जब कम्युनिकेशन फ्रॉम द सेंटर बिल्कुल भी पॉसिबल नहीं होगा। उस वक्त हम
20:04
Speaker A
तुम्हें नहीं बता पाएंगे कि तुम्हें क्या करना है। तो सुन लो आज कि तुम्हें उस वक्त क्या करना है। आप सोचिए कि एक-एक छोटा ड्रोन जो यूएई और दुबई पे गिरा है। 500 बिलियन का इन्वेस्टमेंट वहां से विड्रॉ
20:16
Speaker A
हुआ है। आप सोचिए कि ट्रंप ने यह कहा कि हमने इस हमले को कम से कम 100्स ऑफ टाइम्स रिहर्स किया। किसी ने मुझसे यह नहीं कहा कि यह पलट कर ईरान, इजराइल या अमेरिका को नहीं मारेगा। पलट कर यह अमेरिकन मिलिट्री
20:31
Speaker A
बेससेस को जो अरब एलयंस के यहां है जिससे हमारा पेट्रो डॉलर हम पेट्रोल डॉलर में तेल बिकवाते हैं। उन सारे यूएस के मिलिट्री हेड क्वार्टर्स को पलट-पलट कर ईरान मारे। और ईरान ने यह तैयारी फरवरी 2026 से सऊदी अरब, कतर, बहरेन, कुवैत वहां
20:50
Speaker A
जाकर उनको बता दी थी कि जब हमला होगा ना साहब तो हम आपके यहां हमला करेंगे लेकिन आपके यहां हमला नहीं हम अमेरिकन मिलिट्री बेससेस पर हमला करेंगे। अब आप सोचिए कि मोजाइक डॉक्ट्राइन के चलते और कम से कम 36
21:06
Speaker A
आईआरजीसी के सब कमांड्स थे जो कि अब सारे ऑटोनॉमस थे। इन्हें पता था कि इन्हें क्या करना है। इन्होंने अपना खुद का निजाम तैयार किया हुआ था। इसमें डिस्ट्रीब्यूटेड कमांड थी। इनका अपना आर्सेनल और हथियारों का जखीरा था और हर आईआरजीसी यानी मोजाइक
21:24
Speaker A
टाइल्स के हर एक खाने के पास अपनी ड्रोन और मिसाइल सिटी थी जो अंडर ग्राउंड थी। वो ड्रोन और मिसाइल सिटी में से एक भी खराब नहीं कर पाया इजराइल। इस वजह से भी वह चुपचाप और आईआरजीसी का ऐसा नहीं था कि
21:40
Speaker A
बड़ी गिनीचुनी हर 36 कमांड के पास कुछ रिडंडेंट हेड क्वटर्स थे दिखाने के लिए हेड क्वटर्स थे ताकि वहां हमला हो और वहां उनकी मिसाइलें बर्बाद ये प्लानिंग ये स्ट्रेटजी लेसंस लर्न नॉलेज गेन ईरान बार-बार कहता था कि इस बार दोबारा
21:59
Speaker A
वार पर लौटने पर वी विल फीचर मेनी मोर सरप्राइजेस एक बार और जंग में वापसी करिए। दुनिया हैरान और हक्का बक्का रह जाएगी। इस बार हम ऐसी चीजें दिखाएं। 2024 में द पावर ऑफ नेगोशिएशन ये एक किताब है जो हमें पढ़नी चाहिए।
22:18
Speaker A
लेक्चर लंबा हो गया है। चलिए मैं अगले लेक्चर में ले चलूं। और मैं आपको एक बात बताऊं। यह स्कूलें, इसका सिलेबस जो लोग तय कर रहे हैं, वह मुट्ठी भर लोग अपने बच्चों को बाहर पढ़ा रहे हैं। आपको अपने बच्चे को
22:31
Speaker A
वो पढ़ाना चाहिए जो वाकई एआई के इस जमाने में उसके काम आए। कान खोल के सुनिए मेरी बात। और अब वो वक्त आ गया है कि आपको किसी के अंडर नौकरी करके अपनी जान देकर सारा प्रॉफिट की मलाई वो ले जाए। इससे अच्छा है
22:46
Speaker A
हमें एआई का इस्तेमाल करके अपने बिजनेसेस खोलना चाहिए। एक दिन आपकी आंख खुलेगी या पता नहीं उम्मीद है कि नहीं कि कभी खुलेगी कि नहीं खुलेगी मैं नहीं जानता। पर एक मेरा काम है आपके ज़हनो गुमान पे दस्तक
22:59
Speaker A
देना वो मैं दे रहा हूं। अपने बच्चे को अलिफ्स एकेडमी में भेजिए। द पावर ऑफ नेगोशिएशन में इनके फॉरेन मिनिस्टर अराची साहब लिखते हैं बाजार की बारगेनिंग। यह पर्शियन सिविलाइजेशन और पर्शियन कल्चर का एक जबरदस्त हिस्सा है। बाजार बारगेनिंग के
23:15
Speaker A
बारे में वह बताते हैं कि साहब यह कोई कनिंग चीज नहीं है। यह सच खोजने का सबसे सही तरीका है। बाजार की कीमतों का ऐलान ऊपर से नहीं होता बल्कि सस्टेंड पेशेंट आइटरेटिव एक्सचेंज से बार-बार मुसलसल कड़े अंदाज में सवाल पूछ-पूछ कर मुसलसल
23:37
Speaker A
सब्रमंद दोहराव वाले तबादले के जरिए किसी चीज की असली कीमत मिलती है। यही काम उन्होंने अपने नेगोशिएशंस में किया। सस्टेंड पेशेंट अल्टरटिव एक्सचेंजेस में और वह लिखते हैं अपनी किताब में नेवर एक्सेप्ट द फर्स्ट ऑफर द ट्रू प्राइस ऑफ
23:56
Speaker A
एनीथिंग इंक्लूडिंग द पीस एंड सोवनिटी। आपको शांति और आपको संप्रभुता यह अमन नहीं मिलेगा। जब तक कि आप लगातार मुसलसल सब्रमंद दोहराव वाले तबादले के जरिए सच्चाई और असलियत की तह तक जाने तक चीजों को दरियाफ्त नहीं करेंगे। अमेरिका ने सोचा
24:18
Speaker A
कि जिस्म का सर काट देने भर से ईरान थोड़ी देर में तड़प कर ठंडा हो जाएगा। उन्हें क्या पता था? आइए नेक्स्ट लेक्चर में दिखाता हूं कि पिछले 47 सालों में ईरान ने एक ऐसा जिस्म तैयार किया है जो बिना सर के
24:37
Speaker A
जिंदा रह सकता अपने बच्चों को गैरत लाइए। अमीरी की शेख ही मत बघारिए। गैरतमंद इंकार के दिन के लिए तैयारी करिए। एक एक रुपया अपने और अपने देश और अपने समाज की कामयाबी में झोंकिए। थोड़े दिन बाद ही आपके यह पैसे किसी काम नहीं आएंगे।
Topics:ईरानलीडरशिपजियोपॉलिटिक्ससंस्थागत मजबूतीसुप्रीम लीडररणनीतियुद्धइजराइलआत्मसम्मानधैर्य

Frequently Asked Questions

ईरान ने युद्ध के दौरान अपनी लीडरशिप को कैसे मजबूत रखा?

ईरान ने अपने नेतृत्व को संस्थागत मजबूती पर आधारित रखा, जहां तीन सदस्यों की काउंसिल ने सुप्रीम लीडर की हत्या के बाद भी सरकार चलाना जारी रखा। उन्होंने एक फिलॉसफी के इर्दगिर्द संस्थान बनाए जिससे नेतृत्व निरंतर बना रहा।

ईरान की लीडरशिप की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

ईरान की लीडरशिप में धैर्य, साहस, आत्मसम्मान, रणनीतिक सोच और कठिन परिस्थितियों में एकजुटता प्रमुख हैं। इसे हीरे के बनने की प्रक्रिया से जोड़ा गया है जो कठिन दबाव में मजबूत होती है।

ईरान ने अपने कमांड स्ट्रक्चर को युद्ध में कैसे सुरक्षित रखा?

ईरान ने अपने कमांड स्ट्रक्चर को डीसेंट्रलाइज्ड और डिस्ट्रीब्यूटेड रखा ताकि राजधानी पर बमबारी के बावजूद इसका कोई असर न पड़े। इस रणनीति ने कमांड संरचना को सुरक्षित रखा और युद्ध में उनकी मजबूती बनी रही।

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