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The Art of Manipulation by R.B. Sparkman | Full Audiobook Summary in Hindi

द आर्ट ऑफ मैनिपुलेशन किताब का हिंदी सारांश, जो सिखाता है कैसे मनोवैज्ञानिक चालाकी से लोगों को समझें और प्रभावी ढंग से प्रभावित करें।

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Key Takeaways

  • मैनिपुलेशन एक कला है जो इंसानी दिमाग को समझने पर आधारित है।
  • सिर्फ 5% लोग ही दूसरों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर पाते हैं।
  • भरोसे और शब्दों से ज्यादा महत्वपूर्ण है व्यवहार और क्रियाएं।
  • झूठ और धोखे के संकेतों को पहचानना जरूरी है।
  • अपनी वैल्यू बढ़ाएं और अपनी प्रतिक्रिया पर नियंत्रण रखें।

What the video covers

  • दुनिया में केवल 5% लोग ही दूसरों को अपने इशारों पर नचाते हैं, बाकी 95% लोग बस चलते रहते हैं।
  • मैनिपुलेशन कोई जादू नहीं बल्कि इंसानी दिमाग को समझने की कला है।
  • लेखक आरबी स्पार्कमैन ने धोखेबाजों, चालाक सेल्समैन और ठगों से सीखकर मैनिपुलेशन की असली चालें सीखी हैं।
  • हर चैप्टर में मनोवैज्ञानिक हथियार और चालें मिलती हैं जो बिना जबरदस्ती दूसरों को प्रभावित करना सिखाती हैं।
  • मैनिपुलेटर सामने वाले की जरूरतें पहचानकर उसे अपनी मंशा के अनुसार मोहरा बनाते हैं।
  • जरूरत से ज्यादा भरोसा जताना नुकसानदेह होता है, और जो बार-बार भरोसा जताते हैं वे अक्सर भरोसे लायक नहीं होते।
  • झूठ बोलने वाले लोग दूसरों के साथ-साथ आपको भी धोखा दे सकते हैं।
  • पिछला अमीर होना या बड़ी बातें बार-बार कहना अक्सर धोखा देने वालों की चाल होती है।
  • मैनिपुलेशन में सबसे जरूरी है अपनी प्रतिक्रिया को नियंत्रित करना और सामने वाले की चाल को पढ़ना।
  • यह ऑडियोबुक आपको सिखाती है कैसे बिना जोर लगाए अपनी पावर बढ़ाएं और स्मार्ट बनें।

Answers

Questions about this video

मैनिपुलेशन क्या है और यह कैसे काम करता है?

मैनिपुलेशन इंसानी दिमाग और व्यवहार को समझकर दूसरों को बिना जबरदस्ती अपनी बात मानवाने की कला है। यह मनोवैज्ञानिक चालाकी पर आधारित होता है।

किताब में मैनिपुलेटर बनने के लिए क्या मुख्य बातें बताई गई हैं?

किताब में बताया गया है कि कैसे लोगों की जरूरतें पहचानें, उनकी कमजोरियों का फायदा उठाएं, अपनी प्रतिक्रिया नियंत्रित करें और बिना जोर लगाए अपनी पावर बढ़ाएं।

कैसे पहचानें कि कोई व्यक्ति आपको धोखा देने वाला है?

अगर कोई बार-बार भरोसा जताता है, झूठ बोलता है, अपनी पिछली अमीरी की बातें करता है या छोटी बातों पर ओवर रिएक्ट करता है तो वह धोखा देने वाला हो सकता है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
दोस्तों, सोचिए अगर आपके पास वह कला हो जाए जिससे आप किसी भी इंसान से वही करवा सकें जो आप चाहते हैं। चाहे वह आपका बॉस हो, पार्टनर हो, ग्राहक हो या कोई अजनबी। यह कोई जादू नहीं है। यह है मन को समझने की चालाकी जिसे इस किताब में कहा गया है द आर्ट ऑफ मैनिपुलेशन। शुरुआत करते हैं एक कड़वी, लेकिन सच्ची बात से। दुनिया में 5% लोग ऐसे होते हैं जो 95% लोगों को अपने इशारों पर नचाते हैं। यह लोग खास नहीं होते। बस इन्हें पता होता है कि इंसानी दिमाग कैसे काम करता है और बाकी के 95% लोग वह बस हर दिन सोचते रहते हैं। मैं इतना अच्छा हूं। फिर भी मुझे वह कामयाबी क्यों नहीं मिलती? मैं सबके लिए अच्छा करता हूं। फिर भी मुझे धोखा क्यों मिलता है? यह किताब क्यों खास है? क्योंकि यह कोई मोटिवेशनल ज्ञान नहीं देती। यह उन लोगों की बातें बताती है जो सड़क की जिंदगी से, धोखेबाजी से, चालाकी से सीखे हैं कि लोगों को कैसे कंट्रोल किया जाता है। लेखक आरबी स्पार्कमैन खुद एक ऐसे दौर से गुजरे जब लोग उन्हें ठगते रहे, धोखा देते रहे। लेकिन फिर उन्होंने तय किया अब वह खुद सीखेंगे कि यह मैनपुलेटर्स करते क्या हैं। उन्होंने धोखेबाजों, शराबियों, चालाक सेल्समैन और शातिर लोगों के बीच रहकर उनकी असली चालों को नोट किया और वही सब इस किताब में लिखा गया है। कच्चा, कड़वा और 100% काम का सच। इस किताब में आपको क्या मिलेगा? हर चैप्टर में एक नई चाल, एक नया मनोवैज्ञानिक हथियार। कैसे लोगों को बिना जबरदस्ती अपनी बात मनवाई जाए? कैसे सामने वाले की कमजोरी पहचान कर उसे मोहरा बनाया जाए। कैसे किसी को हां बोलने के लिए तैयार किया जाए। बिना बोले मना मत करना। और कैसे बिना जालिम बने आप लोगों से वही करवाएं जो आप चाहते हैं। शायद आप भी किसी ऐसे इंसान से ठगे गए हो जिसने आपके दिल से खेला हो या फिर ऑफिस में किसी ने आपकी मेहनत का क्रेडिट ले लिया हो या प्यार में किसी ने आपको यूज किया हो। तो अब वक्त है खुद को समझने का, दूसरों की मंशा पकड़ने का और जिंदगी में हर रिश्ते, हर डील और हर इंटरेक्शन में स्मार्ट बनने का। यह ऑडियो बुक क्यों सुननी चाहिए? क्योंकि यह आपको सिखाएगी कैसे अपने वर्ड्स को हथियार बनाओ। कैसे चाम से कंट्रोल करो और कैसे बिना जोर लगाए आप अपनी पावर बढ़ाओ। मैनिपुलेशन एक कला है और इस कला में माहिर बनना आपकी जिंदगी बदल सकता है। चलिए शुरू करते हैं द आर्ट ऑफ मैनपुलेशन के उस पहले चैप्टर से जहां खुलती है एक कड़वी सच्चाई। सिर्फ 5% लोग ही दूसरों को चलाना जानते हैं और बाकी 95% बस चलते रहते हैं। इस ऑडियो बुक को शुरू करने से पहले अगर आपने अभी तक हमारे चैनल 7 PM पीm ऑडियो बुक को सब्सक्राइब नहीं किया है तो अभी कर लीजिए। आपका एक सब्सक्राइब हमें मोटिवेट करता है। अगली ऑडियो बुक के लिए। चैप्टर वन 5% ऑफ द पीपल मैनपुलेट दी अदर 95%। दुनिया दो तरह के लोगों से बनी है। वो जो लोगों को अपने हिसाब से घुमाते हैं और वो जो हर दिन किसी ना किसी के हिसाब से घूमते हैं। आप किस तरफ हैं? एक सवाल जो हमारे अंदर कहीं गूंजता है। यार, वो बंदा हर बार अपनी बात कैसे मनवा लेता है? वह डील भी उसी को मिलती है, तारीफ भी, पैसा भी और लोग भी उसी की सुनते हैं। क्या वह किस्मत वाला है? क्या वह अमीर घर में पैदा हुआ? क्या उसके पास कोई गुप्त शक्ति है? नहीं। उसके पास है एक कला। मैनपुलेशन की कला। 95% लोग क्यों हार जाते हैं? लेखक आरबी स्पार्कमैन कहते हैं, मैंने सालों तक देखा कि कुछ लोग बार-बार जीतते हैं और कुछ बार-बार हारते हैं। चाहे मेहनत एक जैसी ही क्यों ना हो। वह खुद भी हारते रहे। धोखे खाते रहे और फिर उन्होंने फैसला लिया कि अब वह खुद समझेंगे कि असली खिलाड़ी कौन है और कैसे खेलते हैं। लेखक किसी बिजनेस स्कूल के स्टूडेंट नहीं थे। उन्होंने कोई मोटिवेशनल सेमिनार नहीं किया था बल्कि वह सीधे पहुंचे शातिर, ठगों, चालाक, सेल्समैन और धोखेबाजों के बीच हस्टन की गलियों में जहां पैसा आता तो था लेकिन उसे पकड़ने वाले हाथ और भी तेज होते थे। वहां उनका मिलना हुआ एक ऐसे इंसान से जिसे वह अपना सबसे बड़ा टीचर मानते हैं। हडी एक शराबी लेकिन एक मास्टर मैनपुलेटर। हडी दिन में तीन बार नौकरी बदल सकता था लेकिन जब भी किसी को मनाना होता वो सामने वाले को अपने इशारों पर नचा देता। हडी की एक बात ने मेरी सोच बदल दी। हडी ने कहा दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक जो कहते हैं प्लीज मेरी बात मान लो और एक जो कहते हैं तुम्हारी मर्जी है लेकिन बिना मेरे तुम अधूरे हो। बस वहीं से खेल पलटता है। मैनपुलेटर्स क्या जानते हैं जो बाकी नहीं जानते। मैनिपुलेटर्स को पता है इंसान कब ना कहता है और कब हां, कब चुप रहना है और कब बोलना है, किसकी तारीफ करनी है और किसे इग्नोर और कैसे सामने वाले के दिमाग में खुद की जरूरत पैदा करनी है। मैनिपुलेटर्स किसी तिलिस्मी विद्या से नहीं आते। वह आप ही जैसे होते हैं। बस उन्हें इंसानी फितरत को समझने की कला आ जाती है। और 95% लोग वह लोग जो हर बार इमोशनली रिएक्ट करते हैं। हर बार सही बनने की कोशिश करते हैं। हर बार दूसरे क्या सोचेंगे? सोचते रहते हैं। और नतीजा हर बार कोई दूसरा बाजी मार ले जाता है। एक कड़वा सच। लोग अकल की बात नहीं मानते। लोग उसी की मानते हैं जो उन्हें उनकी जरूरत का एहसास दिला दे। चाहे वह दोस्ती हो, प्यार हो या बिजनेस। तुम्हें मेरी जरूरत है। अगर सामने वाले को लग जाए तो आप जीत गए। यह चैप्टर हमें सिखाता है। अगर आप किसी को जरूरत से ज्यादा जताते हो कि मैं तुम्हारे बिना अधूरा हूं। आप हार जाओगे। लेकिन अगर आप सर्टली यह दिखा दो कि तुम्हें मेरी जरूरत है। तो सामने वाला खुद झुकता है। क्या करें? अब लोगों को समझो। उनके वर्ड्स नहीं। उनके बिहेवियर पढ़ो। कभी डेस्पेरेट मत दिखो। चाहे आप अंदर से टूट रहे हो। अपनी वैल्यू बढ़ाओ और दूसरों को सबटली यह फील कराओ और सबसे जरूरी अपना रिएक्शन कंट्रोल करो क्योंकि असली मैनिपुलेटर वही होता है जो सामने वाले की चाल को पढ़ सके और अपनी चाल को छुपा सके। अब वक्त है सीखने का कि कैसे आप भी उन 5% लोगों में शामिल हो सकते हैं जो दुनिया चलाते हैं ना कि उन 50% में जो हर दिन चले जाते हैं। चैप्टर दो कैसे पहचाने कि सामने वाला आपको ठगने वाला है। कभी आपको किसी ने ऐसे धोखा दिया जिसके लिए आपने सब कुछ किया था या फिर कोई ऐसा इंसान जिसने पहले तो आपको भरोसे का लड्डू खिलाया और बाद में आपकी जेब से सब कुछ निकाल लिया। अगर हां तो अब वक्त है उन लोगों को पहचानने का जो चालाकी से आपको अपने जाल में फंसाते हैं। लेखक आरबी स्पार्कमैन का एक रूममेट था हडी शराबी। मगर इतना चालाक कि लोगों को अपनी बातों से फंसा ले और उन्हें पता तक ना चले। एक रात हडी जेल चला गया। नशे में पकड़ा गया था। जेल से उसने स्पार्कमैन को फोन किया। भाई तू ही मेरा असली दोस्त है। बस एक बार मुझे छुड़ा ले। तू कभी पछताएगा नहीं। मैं तुझे पूरा पैसा लौटा दूंगा। तू बहुत अच्छा इंसान है। लेखक पसीज गया। हड़ी को छुड़ा लिया और पैसा कभी वापस नहीं आया। पहली वार्निंग साइन जो जरूरत से ज्यादा भरोसा जताए वो भरोसे लायक नहीं होता। हड़ी बार-बार यही बोलता रहा। तू मेरा सच्चा दोस्त है। तुझसे अच्छा कोई नहीं। मैं हमेशा पैसा लौटाता हूं। लेकिन असली दुनिया में जो सच्चा होता है उसे बार-बार बोलने की जरूरत नहीं होती। मेथिंग्स थाऊ डोस्ट प्रोटेस्ट टू मच। यह शेक्सपियर की लाइन है। जब कोई बार-बार कहे कि वह ईमानदार है तब समझो कि कुछ गड़बड़ है। और यह सिर्फ पैसा नहीं रिश्तों में भी होता है। अगर कोई बार-बार कहता है मैं तुझसे बहुत प्यार करता हूं। तू मुझ पर भरोसा कर सकता है। मैं तुझे कभी धोखा नहीं दूंगा। तो ध्यान से देखो। क्या वह बोल रहा है या निभा रहा है? क्योंकि जो निभाता है उसे बोलने की जरूरत नहीं पड़ती। दूसरा रेड फ्लैग जो दूसरों से झूठ बोलता है वह आपसे भी बोलेगा। हडी ने लेखक से एक और सीख दी। अगर कोई किसी और से झूठ बोलता है तो कल आपसे भी बोलेगा। फर्क सिर्फ इतना है कि कब उसका फायदा होगा। कई लोग कहते हैं वो दूसरों को तो धोखा देता है लेकिन मेरे साथ कभी नहीं करेगा। भाई मतलब साफ है जो झूठ का आदि है वो देर सवेरे आपको भी उसी फंदे में लपेटेगा। तीसरा क्लू जो कहे मैं पहले बहुत अमीर था। फिर सब खो दिया। लेखक जिन पांच ठगों के साथ रहा उनमें से हर कोई कहता था मैं कभी करोड़पति था लेकिन आज हालत यह थी कि रेंट भरने के लिए भी पैसे नहीं थे। यह मैं पहले बहुत बड़ा आदमी था लाइन। असल में सिंपैथी और क्रेडिबिलिटी कमाने की चाल होती है। क्योंकि हम सोचने लगते हैं अगर वो पहले पैसे वाला था तो उसे पैसे कमाने आते होंगे। शायद यह डील भी सही हो। सच अगर किसी को पैसे संभालने नहीं आते तो उसका पिछला रिच स्टेटस भी बेकार है। एक ठग ने लेखक से बोला रिक मैं कभी दोस्त को धोखा नहीं देता। लेखक ने हंसते हुए जवाब दिया तू पहले ही दोस्ती खत्म कर चुका है। अब धोखा देना भी आसान होगा। और एक मास्टर ट्रिक हडी हमेशा एक बात करता था। जब भी कोई इंसान दो बार एक ही कहानी सुनाए तो उसके शब्दों का मिलान करो। अगर पहली और दूसरी बार में कहानी अलग लगे तो समझो आदमी झूठा है और तुम्हें भी कभी ना कभी बेवकूफ बनाएगा। इस चैप्टर हमें सिखाता है जो बार-बार ट्रस्ट मी बोले उस पर ट्रस्ट ना करो। जो दूसरों से झूठ बोले वो आपसे भी बोलेगा। मैं पहले अमीर था। कहने वाले अक्सर आज सबसे ज्यादा टूटे होते हैं। और जो छोटी-छोटी चीजों पर ओवर रिएक्ट करें जैसे कपड़ों पर, समय पर लेकिन बड़ी बातों को इग्नोर करें वह लीडर नहीं फेलियर होता है। हर बार धोखा खाकर सीखना समझदारी नहीं होती। कभी-कभी पहले से पहचानना ही सबसे बड़
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Speaker A
चालाकी जिसे इस किताब में कहा गया है द आर्ट ऑफ मैनिपुलेशन। शुरुआत करते हैं एक कड़वी, लेकिन सच्ची बात से। दुनिया में 5% लोग ऐसे होते हैं जो 95% लोगों को अपने इशारों पर नचाते हैं। यह लोग खास नहीं
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Speaker A
होते। बस इन्हें पता होता है कि इंसानी दिमाग कैसे काम करता है और बाकी के 95% लोग वह बस हर दिन सोचते रहते हैं। मैं इतना अच्छा हूं। फिर भी मुझे वह कामयाबी क्यों नहीं मिलती? मैं सबके लिए अच्छा
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Speaker A
करता हूं। फिर भी मुझे धोखा क्यों मिलता है? यह किताब क्यों खास है? क्योंकि यह कोई मोटिवेशनल ज्ञान नहीं देती। यह उन लोगों की बातें बताती है जो सड़क की जिंदगी से, धोखेबाजी से, चालाकी से सीखे हैं कि लोगों को कैसे कंट्रोल किया जाता
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Speaker A
है। लेखक आरबी स्पार्कमैन खुद एक ऐसे दौर से गुजरे जब लोग उन्हें ठगते रहे, धोखा देते रहे। लेकिन फिर उन्होंने तय किया अब वह खुद सीखेंगे कि यह मैनपुलेटर्स करते क्या हैं। उन्होंने धोखेबाजों, शराबियों, चालाक सेल्समैन और शातिर लोगों के बीच
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Speaker A
रहकर उनकी असली चालों को नोट किया और वही सब इस किताब में लिखा गया है। कच्चा, कड़वा और 100% काम का सच। इस किताब में आपको क्या मिलेगा? हर चैप्टर में एक नई चाल, एक नया मनोवैज्ञानिक हथियार। कैसे
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Speaker A
लोगों को बिना जबरदस्ती अपनी बात मनवाई जाए? कैसे सामने वाले की कमजोरी पहचान कर उसे मोहरा बनाया जाए। कैसे किसी को हां बोलने के लिए तैयार किया जाए। बिना बोले मना मत करना। और कैसे बिना जालिम बने आप
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Speaker A
लोगों से वही करवाएं जो आप चाहते हैं। शायद आप भी किसी ऐसे इंसान से ठगे गए हो जिसने आपके दिल से खेला हो या फिर ऑफिस में किसी ने आपकी मेहनत का क्रेडिट ले लिया हो या प्यार में किसी ने आपको यूज
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Speaker A
किया हो। तो अब वक्त है खुद को समझने का, दूसरों की मंशा पकड़ने का और जिंदगी में हर रिश्ते, हर डील और हर इंटरेक्शन में स्मार्ट बनने का। यह ऑडियो बुक क्यों सुननी चाहिए? क्योंकि यह आपको सिखाएगी कैसे अपने वर्ड्स को हथियार बनाओ। कैसे
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Speaker A
चाम से कंट्रोल करो और कैसे बिना जोर लगाए आप अपनी पावर बढ़ाओ। मैनिपुलेशन एक कला है और इस कला में माहिर बनना आपकी जिंदगी बदल सकता है। चलिए शुरू करते हैं द आर्ट ऑफ मैनपुलेशन के उस पहले चैप्टर से जहां
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Speaker A
खुलती है एक कड़वी सच्चाई। सिर्फ 5% लोग ही दूसरों को चलाना जानते हैं और बाकी 95% बस चलते रहते हैं। इस ऑडियो बुक को शुरू करने से पहले अगर आपने अभी तक हमारे चैनल 7 PM पीm ऑडियो बुक को सब्सक्राइब नहीं
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Speaker A
किया है तो अभी कर लीजिए। आपका एक सब्सक्राइब हमें मोटिवेट करता है। अगली ऑडियो बुक के लिए। चैप्टर वन 5% ऑफ द पीपल मैनपुलेट दी अदर 95%। दुनिया दो तरह के लोगों से बनी है। वो जो लोगों को अपने
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Speaker A
हिसाब से घुमाते हैं और वो जो हर दिन किसी ना किसी के हिसाब से घूमते हैं। आप किस तरफ हैं? एक सवाल जो हमारे अंदर कहीं गूंजता है। यार, वो बंदा हर बार अपनी बात कैसे मनवा लेता है? वह डील भी उसी को
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Speaker A
मिलती है, तारीफ भी, पैसा भी और लोग भी उसी की सुनते हैं। क्या वह किस्मत वाला है? क्या वह अमीर घर में पैदा हुआ? क्या उसके पास कोई गुप्त शक्ति है? नहीं। उसके पास है एक कला। मैनपुलेशन की कला। 95% लोग
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Speaker A
क्यों हार जाते हैं? लेखक आरबी स्पार्कमैन कहते हैं, मैंने सालों तक देखा कि कुछ लोग बार-बार जीतते हैं और कुछ बार-बार हारते हैं। चाहे मेहनत एक जैसी ही क्यों ना हो। वह खुद भी हारते रहे। धोखे खाते रहे और
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Speaker A
फिर उन्होंने फैसला लिया कि अब वह खुद समझेंगे कि असली खिलाड़ी कौन है और कैसे खेलते हैं। लेखक किसी बिजनेस स्कूल के स्टूडेंट नहीं थे। उन्होंने कोई मोटिवेशनल सेमिनार नहीं किया था बल्कि वह सीधे पहुंचे शातिर, ठगों, चालाक, सेल्समैन और
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Speaker A
धोखेबाजों के बीच हस्टन की गलियों में जहां पैसा आता तो था लेकिन उसे पकड़ने वाले हाथ और भी तेज होते थे। वहां उनका मिलना हुआ एक ऐसे इंसान से जिसे वह अपना सबसे बड़ा टीचर मानते हैं। हडी एक शराबी
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Speaker A
लेकिन एक मास्टर मैनपुलेटर। हडी दिन में तीन बार नौकरी बदल सकता था लेकिन जब भी किसी को मनाना होता वो सामने वाले को अपने इशारों पर नचा देता। हडी की एक बात ने मेरी सोच बदल दी। हडी ने कहा दुनिया में
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Speaker A
दो तरह के लोग होते हैं। एक जो कहते हैं प्लीज मेरी बात मान लो और एक जो कहते हैं तुम्हारी मर्जी है लेकिन बिना मेरे तुम अधूरे हो। बस वहीं से खेल पलटता है। मैनपुलेटर्स क्या जानते हैं जो बाकी नहीं
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Speaker A
जानते। मैनिपुलेटर्स को पता है इंसान कब ना कहता है और कब हां, कब चुप रहना है और कब बोलना है, किसकी तारीफ करनी है और किसे इग्नोर और कैसे सामने वाले के दिमाग में खुद की जरूरत पैदा करनी है। मैनिपुलेटर्स
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Speaker A
किसी तिलिस्मी विद्या से नहीं आते। वह आप ही जैसे होते हैं। बस उन्हें इंसानी फितरत को समझने की कला आ जाती है। और 95% लोग वह लोग जो हर बार इमोशनली रिएक्ट करते हैं। हर बार सही बनने की कोशिश करते हैं। हर
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Speaker A
बार दूसरे क्या सोचेंगे? सोचते रहते हैं। और नतीजा हर बार कोई दूसरा बाजी मार ले जाता है। एक कड़वा सच। लोग अकल की बात नहीं मानते। लोग उसी की मानते हैं जो उन्हें उनकी जरूरत का एहसास दिला दे। चाहे
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Speaker A
वह दोस्ती हो, प्यार हो या बिजनेस। तुम्हें मेरी जरूरत है। अगर सामने वाले को लग जाए तो आप जीत गए। यह चैप्टर हमें सिखाता है। अगर आप किसी को जरूरत से ज्यादा जताते हो कि मैं तुम्हारे बिना अधूरा हूं। आप हार जाओगे। लेकिन अगर आप
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Speaker A
सर्टली यह दिखा दो कि तुम्हें मेरी जरूरत है। तो सामने वाला खुद झुकता है। क्या करें? अब लोगों को समझो। उनके वर्ड्स नहीं। उनके बिहेवियर पढ़ो। कभी डेस्पेरेट मत दिखो। चाहे आप अंदर से टूट रहे हो। अपनी वैल्यू बढ़ाओ और दूसरों को सबटली यह
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Speaker A
फील कराओ और सबसे जरूरी अपना रिएक्शन कंट्रोल करो क्योंकि असली मैनिपुलेटर वही होता है जो सामने वाले की चाल को पढ़ सके और अपनी चाल को छुपा सके। अब वक्त है सीखने का कि कैसे आप भी उन 5% लोगों में
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Speaker A
शामिल हो सकते हैं जो दुनिया चलाते हैं ना कि उन 50% में जो हर दिन चले जाते हैं। चैप्टर दो कैसे पहचाने कि सामने वाला आपको ठगने वाला है। कभी आपको किसी ने ऐसे धोखा दिया जिसके लिए आपने सब कुछ किया था या
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Speaker A
फिर कोई ऐसा इंसान जिसने पहले तो आपको भरोसे का लड्डू खिलाया और बाद में आपकी जेब से सब कुछ निकाल लिया। अगर हां तो अब वक्त है उन लोगों को पहचानने का जो चालाकी से आपको अपने जाल में फंसाते हैं। लेखक
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Speaker A
आरबी स्पार्कमैन का एक रूममेट था हडी शराबी। मगर इतना चालाक कि लोगों को अपनी बातों से फंसा ले और उन्हें पता तक ना चले। एक रात हडी जेल चला गया। नशे में पकड़ा गया था। जेल से उसने स्पार्कमैन को
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Speaker A
फोन किया। भाई तू ही मेरा असली दोस्त है। बस एक बार मुझे छुड़ा ले। तू कभी पछताएगा नहीं। मैं तुझे पूरा पैसा लौटा दूंगा। तू बहुत अच्छा इंसान है। लेखक पसीज गया। हड़ी को छुड़ा लिया और पैसा कभी वापस नहीं आया।
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Speaker A
पहली वार्निंग साइन जो जरूरत से ज्यादा भरोसा जताए वो भरोसे लायक नहीं होता। हड़ी बार-बार यही बोलता रहा। तू मेरा सच्चा दोस्त है। तुझसे अच्छा कोई नहीं। मैं हमेशा पैसा लौटाता हूं। लेकिन असली दुनिया में जो सच्चा होता है उसे बार-बार बोलने
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Speaker A
की जरूरत नहीं होती। मेथिंग्स थाऊ डोस्ट प्रोटेस्ट टू मच। यह शेक्सपियर की लाइन है। जब कोई बार-बार कहे कि वह ईमानदार है तब समझो कि कुछ गड़बड़ है। और यह सिर्फ पैसा नहीं रिश्तों में भी होता है। अगर
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Speaker A
कोई बार-बार कहता है मैं तुझसे बहुत प्यार करता हूं। तू मुझ पर भरोसा कर सकता है। मैं तुझे कभी धोखा नहीं दूंगा। तो ध्यान से देखो। क्या वह बोल रहा है या निभा रहा है? क्योंकि जो निभाता है उसे बोलने की
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Speaker A
जरूरत नहीं पड़ती। दूसरा रेड फ्लैग जो दूसरों से झूठ बोलता है वह आपसे भी बोलेगा। हडी ने लेखक से एक और सीख दी। अगर कोई किसी और से झूठ बोलता है तो कल आपसे भी बोलेगा। फर्क सिर्फ इतना है कि कब उसका
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Speaker A
फायदा होगा। कई लोग कहते हैं वो दूसरों को तो धोखा देता है लेकिन मेरे साथ कभी नहीं करेगा। भाई मतलब साफ है जो झूठ का आदि है वो देर सवेेर आपको भी उसी फंदे में लपेटेगा। तीसरा क्लू जो कहे मैं पहले बहुत
08:27
Speaker A
अमीर था। फिर सब खो दिया। लेखक जिन पांच ठगों के साथ रहा उनमें से हर कोई कहता था मैं कभी करोड़पति था लेकिन आज हालत यह थी कि रेंट भरने के लिए भी पैसे नहीं थे। यह मैं पहले बहुत बड़ा आदमी था लाइन। असल में
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Speaker A
सिंपैथी और क्रेडिबिलिटी कमाने की चाल होती है। क्योंकि हम सोचने लगते हैं अगर वो पहले पैसे वाला था तो उसे पैसे कमाने आते होंगे। शायद यह डील भी सही हो। सच अगर किसी को पैसे संभालने नहीं आते तो उसका
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Speaker A
पिछला रिच स्टेटस भी बेकार है। एक ठग ने लेखक से बोला रिक मैं कभी दोस्त को धोखा नहीं देता। लेखक ने हंसते हुए जवाब दिया तू पहले ही दोस्ती खत्म कर चुका है। अब धोखा देना भी आसान होगा। और एक मास्टर
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Speaker A
ट्रिक हडी हमेशा एक बात करता था। जब भी कोई इंसान दो बार एक ही कहानी सुनाए तो उसके शब्दों का मिलान करो। अगर पहली और दूसरी बार में कहानी अलग लगे तो समझो आदमी झूठा है और तुम्हें भी कभी ना कभी बेवकूफ
09:27
Speaker A
बनाएगा। इस चैप्टर हमें सिखाता है जो बार-बार ट्रस्ट मी बोले उस पर ट्रस्ट ना करो। जो दूसरों से झूठ बोले वो आपसे भी बोलेगा। मैं पहले अमीर था। कहने वाले अक्सर आज सबसे ज्यादा टूटे होते हैं। और जो छोटी-छोटी चीजों पर ओवर रिएक्ट करें
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Speaker A
जैसे कपड़ों पर, समय पर लेकिन बड़ी बातों को इग्नोर करें वह लीडर नहीं फेलियर होता है। हर बार धोखा खाकर सीखना समझदारी नहीं होती। कभी-कभी पहले से पहचानना ही सबसे बड़ी समझदारी होती है। अगला चैप्टर आपको सिखाएगा कि कैसे आप किसी इंसान को अपना
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Speaker A
गुलाम बना सकते हैं बिना गुस्से, बिना जोर, सिर्फ उसकी फितरत को समझकर। चैप्टर थ्री स्लो इमोशनल बिल्ड अप विद बैकग्राउंड टोन। कभी किसी से इतना प्यार किया कि उसकी एक मुस्कान के लिए आपने अपनी सारी इज्जत, समय और आत्मसम्मान तक दांव पर लगा दिया।
10:19
Speaker A
और वह इंसान कभी आपको जमीन से उठाता तो कभी वहीं गिरा देता। फिर भी आप उसके पीछे भागते रहे। क्यों? लेखक आर बी स्पार्क मैन की जिंदगी में एक दिन एक लड़की से मुलाकात हुई। खूबसूरत आत्मविश्वासी और पूरी दुनिया
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Speaker A
से अलग। लेकिन जैसे ही वह उसके पास बैठी स्पार्क मैन ने देखा उसकी बाई आंख पर हल्का सा नीला निशान था। जब उन्होंने पूछा क्या हुआ? तो लड़की ने बड़ी सादगी से कहा, "यह मेरे बॉयफ्रेंड बिल ने मारा था, पर
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Speaker A
मैं उससे दूर नहीं जा पाती।" शॉकिंग बात यह थी, बिल उसे प्यार करता था, फिर मारता था। कभी उसको अपनी बाहों में भरता, फिर अगले दिन इग्नोर कर देता। और यह सब सहने के बाद भी वो लड़की उसी के पीछे भागती
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Speaker A
रही। लेकिन क्यों? क्यों कोई किसी ऐसे इंसान से जुड़ा रहता है जो उसे चोट पहुंचाता है। इसका जवाब मिला एक कबूतर के पिंजरे में। एक साइकोलॉजिकल एक्सपेरिमेंट जिसने इंसान की असलियत उजागर कर दी। एक कबूतर को एक पिंजरे में रखा गया जिसमें एक
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Speaker A
बटन था। जब वो उस बटन को चोंच से दबाता तो उसे खाने की एक गोली मिलती थी। तीन स्थितियां बनाई गई। हर बार बटन दबाने पर खाना मिला तो कबूतर धीरे-धीरे इंटरेस्ट खो बैठा। कभी भी खाना नहीं मिला तो कबूतर ने
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Speaker A
कोशिश करना ही छोड़ दिया। कभी-कभी बटन दबाने पर खाना मिला। तो कबूतर पागलों की तरह बार-बार बटन दबाने लगा। रीइंफोर्समेंट यानी कभी हां, कभी ना। बिल वहीं कर रहा था। कभी लड़की को प्यार की सबसे ऊंची उड़ान पर ले जाता और फिर धड़ाम से गिरा
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Speaker A
देता। वह लड़की बिल्कुल उस कबूतर की तरह कभी हां, कभी ना के चक्कर में उलझ गई थी। और यही सबसे खतरनाक खेल है। कभी अटेंशन देना, कभी छीन लेना। जब इंसान नहीं जानता कि अगली बार क्या होगा तो वह और भी ज्यादा
12:05
Speaker A
जुड़ जाता है। उसे उस इंसान की लत लग जाती है जो उसे बार-बार कंफ्यूज करता है। हमेशा प्यार करने वाला इंसान टेकन फॉर ग्रांटेड हो जाता है। लेकिन कभी प्यार कभी बेरुखी देने वाला इंसान एडिक्टिव बन जाता है।
12:20
Speaker A
आपकी जिंदगी में भी ऐसा हुआ होगा। एक ऐसा रिश्ता जो आपको बार-बार तोड़ता रहा। फिर भी आप वहीं रुके रहे क्योंकि कभी-कभी वह इंसान आपको वहीं देता था जिसकी आपको सबसे ज्यादा जरूरत थी। अटेंशन, प्यार, वैलिडेशन। इस साइकोलॉजी को कैसे मैनपुलेट
12:37
Speaker A
करें? अगर आप किसी को सूक्ष्म रूप से नियंत्रित करना चाहते हैं, तो यह दो स्टेप्स अपनाइए। स्टेप वन, सामने वाले को कोई प्रोत्साहन दीजिए। प्यार, तारीफ, सपोर्ट या कोई फायदा। उसे आदत डालिए आपकी पॉजिटिविटी की। स्टेप दो। फिर अचानक वो
12:53
Speaker A
रिइंफोर्समेंट हटा लीजिए। थोड़ी दूरी बना लीजिए। कोल्ड हो जाइए। अब सामने वाला वही अटेंशन पाने के लिए बार-बार कोशिश करेगा। मान लीजिए आप किसी को डेली मैसेज करते हैं। वो रिप्लाई करता है। बातें होती हैं। फिर एक दिन आप रिप्लाई करना बंद कर देते
13:08
Speaker A
हैं। सामने वाला बेचैन हो जाएगा। क्या हुआ? मैंने कुछ गलत कहा और वह खुद आपको चस करने लगेगा। अगर आप किसी एंप्लई को रोज अप्रिशिएट करते हैं, तो वह धीरे-धीरे आपका वैल्यू कम समझेगा। लेकिन अगर आप कभी-कभी उसकी तारीफ करें, कभी सरप्राइज बोनस दें,
13:27
Speaker A
कभी थोड़ा टफ बने तो वह एंप्लई आपको इंप्रेस करने की और कोशिश करेगा। लेकिन ध्यान रहे इंटरमिटेंट रीइंफोर्समेंट तभी काम करेगा जब सामने वाला आपके रीइंफोर्समेंट को चाहता हो। मतलब आपकी तारीफ, प्यार या पैसा उसके लिए वैलुएबल होना चाहिए। अगर आप किसी को खुश कर भी
13:47
Speaker A
नहीं पा रहे तो हटाना बेकार होगा क्योंकि उसने कभी लिया ही नहीं। बिल शायद साइकोलॉजी नहीं पढ़ा था। लेकिन उसे फार्मूला पता था थोड़ा प्यार, थोड़ा डर और थोड़ा कंफ्यूजन। बस लड़की अपनी। यह चैप्टर हमें सिखाता है। लोग हमेशा अवेलेबल चीजों
14:04
Speaker A
को वैल्यू नहीं देते। जो उन्हें अनशोर रखता है, वह उन्हें पीछे भागने पर मजबूर करता है। इंटरमिटेंट रिइंफोर्समेंट एक साइकोलॉजिकल हथियार है जो लोगों को इमोशनली एडिक्टेड कर सकता है। कभी-कभी प्यार नहीं बल्कि आदत होती है जो हमें एक
14:20
Speaker A
इंसान का गुलाम बना देती है। अब आप यह आदत क्रिएट कर सकते हैं अपमफे बिना जोर डाले बिना जिल्लत के सिर्फ ह्यूमन बिहेवियर को समझकर। अब अगला चैप्टर सिखाएगा कि दुनिया में कैसे फेवरेटिज्म चलता है और आप उसे
14:35
Speaker A
अपने लिए कैसे इस्तेमाल करें। चैप्टर फोर द वर्ल्ड इज राइफ विद फेवरेटिज्म। कभी सोचा है आपसे ज्यादा मेहनत करने वाला नहीं। फिर भी प्रमोशन किसी और को क्यों मिला? कभी देखा है आप सच बोलते हो। लेकिन सामने वाले की मीठी बातों वाले लोग ही
14:51
Speaker A
सबका दिल जीत लेते हैं। अगर ऐसा हुआ है तो आप उस दुनिया में जी रहे हैं। जहां काबिलियत नहीं कनेक्शन चलता है। आरबी स्पार्कमैन ने एक बार एक सर्वे देखा जहां कई बड़े-बड़े सफल लोग थे। सीईओ, मैनेजर, एंटरप्रेन्यर्स उनसे पूछा गया आपकी सफलता
15:07
Speaker A
का सबसे बड़ा कारण क्या है? लोगों ने क्या कहा? मेरी मेहनत नहीं, मेरी स्किल नहीं। सबसे ज्यादा जवाब था मैं सही लोगों से सही रिश्ता बना पाया। यानी सीधे शब्दों में फेवरेटिज्म। क्या यह गलत है? नहीं। यह इंसानी फितरत है। हम सब उन्हीं लोगों की
15:25
Speaker A
तरफ झुकते हैं जो मच जो हमें पसंद आते हैं। बॉस उसी को प्रमोशन देता है जिससे वह इमोशनली कनेक्टेड फील करता है। क्लाइंट उसी से डील करता है जिससे उसकी हंसीज़ाक की ट्यूनिंग बैठती है। अब समझिए खेल फेवरेटिज्म यानी पसंद का खेल। अब यहां दो
15:42
Speaker A
ऑप्शन है। या तो आप बैठे-बैठे रोते रहो कि दुनिया पक्षपाती है या फिर आप इस पक्षपात को अपनी ताकत बना लो। स्पार्कम एक क्लासिकल म्यूजिक रेडियो स्टेशन में सेल्स का काम करते थे। उनका एक क्लाइंट था स्टीव। एक युवा बिजनेसमैन जिसने खुद की
15:57
Speaker A
रिकॉर्ड शॉप बनाई थी। स्टीव पुराने बड़े-बड़े ब्रांड से कमपीट करता था बिना किसी फैंसी डिग्री के। लेकिन स्पार्कमैन को उससे डील करनी थी और कनेक्शन जीरो था। तो उन्होंने क्या किया? बस एक सीधा ईमानदार सवाल पूछा। स्टीव आपने यह रिकॉर्ड
16:14
Speaker A
शॉप शुरू कैसे की? और बस स्टीव खुल गया। उसने घंटों अपनी स्ट्रगल की कहानी सुनाई। कैसे वह बिना पैसे के अकेले सिर्फ पैशन से अपने सपने को जिंदा रखा। क्या सीखा? लोगों को सबसे ज्यादा क्या पसंद है? खुद के बारे
16:27
Speaker A
में बात करना। स्टीव को स्पार्कमैन पसंद आने लगा क्योंकि उसने उसका इनर हीरो बाहर निकाला। उस दिन स्टीव ने ना सिर्फ ऐड कॉन्ट्रैक्ट साइन किया बल्कि स्पार्कमैन को खाना भी खिलाया। फेवरेटिज्म को कैसे अपने फेवर में करें? स्माइल। लेकिन असली
16:42
Speaker A
वाला कृत्रिम हंसी सबको पता लगती है। लेकिन जब आप सच्चे दिल से सही टाइम पर आंखों में देखकर मुस्कुराते हो सामने वाला सबकॉन्शियसली जुड़ जाता है। स्माइलिंग इज द शॉर्टकट टू फेवरेटिज्म। दूसरी सौम्य तारीफ। तारीफ ऐसी जो लगे असली सर वो बात
17:02
Speaker A
जो आपने पिछली मीटिंग में कही थी। मैंने अप्लाई किया और काम बन गया। बस अब आप उस इंसान के लिए सुनने लायक इंसान बन गए हो। तीन सवाल पूछो जिससे सामने वाला शाइन करे। आपने यह बिजनेस शुरू कैसे किया? आपको सबसे
17:15
Speaker A
मुश्किल दौर कब लगा? आपने इतना कॉन्फिडेंस कैसे डेवलप किया? लोग अपनी कहानी सुनाने को तरसते हैं। आप वह मौका दीजिए। राइटर कहते हैं जब कोई और बॉस का चहेता बने तो हम उसे कहते हैं चपलूस। और जब हम बने तो
17:30
Speaker A
कहते हैं स्मार्ट नेटवर्कर। सच यही है दृष्टिकोण बदलो। खेल आपका हो जाएगा। इस चैप्टर की सबसे बड़ी सीख आप जितने भी अच्छे हो अगर सामने वाले को आप पसंद नहीं आए तो आप पीछे रहेंगे। लेकिन अगर आप सही
17:45
Speaker A
तरीके से उसका फेवरेट बन गए तो आपके लिए दरवाजे अपने आप खुलते हैं। दुनिया पक्षपाती है। लेकिन वही पक्षपात आपका सबसे बड़ा हथियार बन सकता है। अगर आप लोगों के दिलों तक पहुंचना सीख जाएं। चैप्टर फाइव द एसेंस ऑफ मैनपुलेशन। शाम के 7:00 बजे
18:01
Speaker A
हस्टन टेक्सस एक छोटा सा ट्रेलर ऑफिस। एक आदमी गंदी सी टीशर्ट आधा बियर का कैन और होठों पर एक शैतानी मुस्कान नाम था हडी काम मन के खेल खेलने वाला उस्ताद वो नौकरी करता नहीं था शराब पीता था लोगों को बातों
18:18
Speaker A
में फंसा के कार जमीन शेयर्स बेच देता था चाहे सामने वाले को जरूरत हो या नहीं और मजे की बात हर बार लोग उसे थैंक यू बोलते थे जैसे उसने उन पर कोई एहसान किया हो एक दिन लेखक ने पूछा हडी तू ऐसा क्या करता है
18:34
Speaker A
जो जो लोग तुझे ना कह ही नहीं पाते। हडी ने बियर का आखिरी घूंट लिया और मुस्कुराते हुए बोला, सिंपल है भाई। मैं उन्हें यह एहसास कराता हूं कि मुझे उनकी जरूरत नहीं बल्कि उन्हें मेरी जरूरत है। और बस वहीं
18:47
Speaker A
से शुरू होता है असली खेल। मैनपुलेशन की जड़। आई डोंट नीड यू। यू नीड मी। अब समझिए माइंड ट्रिक। जब आप किसी से कुछ चाहते हैं जैसे अटेंशन, अप्रूवल, लव या डील तो आप डेस्पेरेट दिखते हो। और इंसानी फितरत क्या
19:02
Speaker A
कहती है? जो खुद को कम समझता है, दुनिया भी उसे कम समझती है। लेकिन जब आप सामने वाले को सबटली यह फील कराते हो कि मैं चाहूं तो डील कर लूं। नहीं तो मेरा क्या जाता है। तुमसे बात कर रहा हूं। लेकिन
19:17
Speaker A
जरूरत नहीं है। तो वही इंसान जो पहले ना कहने वाला था। अब हां की तरफ झुकने लगता है। हडी का लव हैक। हडी रात में एक सस्ता मोटल बुक कर लेता था। फिर जाता था बार में लड़कियों से मिलने। राइटर ने पूछा, पहले
19:32
Speaker A
से रूम क्यों बुक करता है? अगर कोई मिली ही नहीं तो हड़ी हंसते हुए बोला, मिलेगी ही क्योंकि मैं ऐसा वाइब देता हूं जैसे मुझे फर्क ही नहीं पड़ता और लड़कियां उसी के पीछे भागती हैं जो उन्हें जरूरत का
19:45
Speaker A
एहसास नहीं कराता। क्यों काम करता है यह गेम? क्योंकि इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी है। वह उसी चीज को चाहता है जो उसके पास नहीं है। जब आप किसी को यह फील कराते हो कि आप उसकी लाइफ का बोनस हो। जरूरत नहीं
20:00
Speaker A
तो आप पावरफुल बन जाते हो। बिजनेस में कैसे इस्तेमाल करें? मान लीजिए आप किसी क्लाइंट से डील कर रहे हो। अगर आप बोलोगे प्लीज सर हमारी कंपनी को यह डील चाहिए तो आप कमजोर हो। लेकिन अगर आप सर्टली कहो अगर
20:15
Speaker A
आपको लगे कि हम सही हैं तो जरूर काम करें वरना कोई बात नहीं। हमारे पास दूसरी लाइनें भी चल रही हैं। तो सामने वाला खुद सोचता है अगर यह इतना कॉन्फिडेंट है तो कुछ तो बात होगी। अब यह रिश्तों में कैसे
20:29
Speaker A
काम करता है? कभी देखा है जो इंसान हर वक्त मैसेज करता है, कॉल करता है, सामने वाले को चस करता है, उसे नहीं मिलती। लेकिन जो अपने काम में बिजी रहता है, सर्टली कनेक्ट करता है, वह हमेशा इंटरेस्टिंग और मिस्ट्री वाला बन जाता है।
20:47
Speaker A
डेस्पिरेशन रिपल्शन इंडिपेंडेंस अट्रैक्शन, साइकोलॉजी बिहाइंड इट। जब इंसान को लगता है कि सामने वाले को उसकी जरूरत नहीं है तो उसका ईगो हर्ट होता है। और ईगो हर्ट होते ही इंसान वैलिडेट करना चाहता है कि मैं इंपॉर्टेंट हूं। यहीं से
21:03
Speaker A
आप उसका ध्यान अपनी तरफ खींच लेते हो। बिना एक शब्द बोले इस चैप्टर की सीख। जब तक आप खुद को जरूरी नहीं समझोगे दुनिया भी नहीं समझेगी। आई डोंट नीड यू। यू नीड मी इमोशनल पावर इक्वेशन। कंट्रोल उस इंसान के
21:17
Speaker A
पास होता है जिसे फर्क नहीं पड़ता। हडी कहता था जब लड़की कहे तू तो मुझे चाहता ही नहीं। तो समझ जा तीर सही जगह लगा है। मैनपुलेशन का असली मतलब जोर से नहीं जरूरत से कंट्रोल करना है। और जब आप सामने वाले
21:32
Speaker A
को अपनी वैल्यू का एहसास करवा देते हो तो आपकी आवाज सुनी नहीं जाती मानी जाती है। अब अगला चैप्टर आपको सिखाएगा कैसे अज्ञानी दिखकर भी आप सामने वाले को कंट्रोल कर सकते हैं। बिना बोले, बिना लड़े चैप्टर सिक्स एंड द मीक शैल मैनपुलेट द अर्थ। एक
21:49
Speaker A
मीटिंग में पांच लोग बैठे थे। सबके हाथ में डिग्रियां थी। टाईकोट, मोटे शब्दों की बौछार और एक कोना था। जहां बैठा था एक सीधा साधा आदमी, शांत, कम बोलने वाला, थोड़ा डरपोक सा दिखने वाला। लेकिन मीटिंग खत्म होते-होते डील उसी सीधे-साधे आदमी के
22:09
Speaker A
पास थी। क्यों? क्योंकि उसने शोर नहीं मचाया। लेकिन सबकी नसें पकड़ ली थी। लोग अक्सर धोखा खा जाते हैं। हम सोचते हैं जो तेज बोलता है, जो चालाक दिखता है, जो तगड़ी पर्सनालिटी वाला है, वही दुनिया चलाता है। लेकिन असलियत दुनिया में सबसे
22:27
Speaker A
खतरनाक खिलाड़ी वही होता है जो मासूम दिखता है। क्योंकि वह अंडरएस्टीमेट हो जाता है और वहीं से उसकी ताकत शुरू होती है। हडी और स्पार्कमैन एक दिन एक कैफे में बैठे थे। जहां एक आदमी आया। छोटे कपड़े, स्लीपर पहने, बाल उलझे हुए। हडी ने लेखक
22:44
Speaker A
से कहा, देख इसको ऐसा लगेगा इसे कुछ नहीं आता। लेकिन अगले 5 मिनट में यह कैफे वाले को उधारी पर सिगरेट भी दिलवा देगा और शाम तक किसी लड़की को अपना बना लेगा। लेखक हंसा, ऐसा कैसे? हडी बोला, क्योंकि यह
22:59
Speaker A
बंदा कभी सामने वाले को अलर्ट नहीं करता। यह लो प्रोफाइल में अंदर घुसता है और फिर धीरे-धीरे लोगों की कमजोरियां पकड़ के उन्हें अपनी मुट्ठी में कर लेता है। उन्हें लोग लाइटली लेते हैं। इसलिए वह चुपचाप गेम सेट कर लेते हैं। वह कम बोलते
23:14
Speaker A
हैं। इसलिए जब बोलते हैं असर छोड़ते हैं। वह सामने वाले की ईगो नहीं टच करते। इसलिए कोई उन्हें रोकता नहीं। यह साइकोलॉजी का गेम है। जब कोई इंसान हंबल, शर्मीला या सीधा साधा दिखता है तो सामने वाला उससे
23:28
Speaker A
गार्ड डाउन कर देता है। वह सोचता है यह क्या करेगा और बस यहीं से उसका गेम शुरू हो जाता है। कितनी बार ऐसा हुआ है। क्लास का सबसे चुप रहने वाला लड़का बोर्ड टॉप कर जाता है या ऑफिस में जो सबसे कम शो ऑफ
23:42
Speaker A
करता है, वह एक दिन क्वाइटली प्रमोशन ले जाता है। क्योंकि वह चाल नहीं चालाकी से काम करता है। मैनपुलेशन ट्रिक अज्ञानी बनो ज्ञानी रहो। हडी हमेशा कहता था हमेशा ऐसा दिखाओ जैसे तुम्हें कम आता है। और फिर सामने वाले को बोलने दो खुद को खोलने दो।
23:59
Speaker A
बस वहीं से तू उसकी नस पकड़ लेता है। बिजनेस में कैसे यूज करें? मीटिंग में सबसे लाउड मत बनो। पहले सबको बोलने दो। उनके ईगो को चमकने दो। फिर जब साइलेंस आए तब अपनी बात रखो। कॉलमली कॉन्फिडेंटली। तब
24:14
Speaker A
लोग आपकी बात ज्यादा सुनेंगे क्योंकि आपने उनकी सुन ली। रिश्तों में कैसे काम करता है? हर बात पर जंग ना करो। सामने वाले को लगे कि आप नाइव हो। लेकिन आप जानते हो कि कब चुप रहना है, कब मिरर दिखाना है।
24:27
Speaker A
शब्दों से नहीं साइलेंस से जीतना सीखो। हडी एक बार स्पार्कमैन से बोला, अरे भाई, तू जितना सीधा दिखेगा ना, लड़कियां उतना ही तुझ में सेफ जोन ढूंढेंगी। और फिर तू आराम से किंग बन जाएगा उनके दिल में। बिना
24:40
Speaker A
चालाकी किए कमजोर दिखना हमेशा हार नहीं होता। वह स्ट्रेटजी होती है जो इंसान शो ऑफ नहीं करता वह क्वाइटली दुनिया अपने हिसाब से मोड़ता है। अंडरएस्टिमेशन सबसे बड़ा एडवांटेज होता है अगर आपको अपना असली ताकत पता हो। मासूम दिखने का मतलब यह नहीं
24:57
Speaker A
कि आप मासूम हैं बल्कि यह है कि आप समझदार हैं और दूसरों की चाल में फंसने के बजाय अपनी चाले बिना दिखाए चलना जानते हैं। अगला चैप्टर है कैसे किसी इंसान के दिल दिमाग को पढ़ा जाए और पता लगाया जाए कि वह
25:11
Speaker A
असल में क्या चाहता है। चैप्टर सेवन हाउ टू पिक अ पर्सन अप पार्ट एंड डिस्कवर हिज रियल मोटिव्स एंड फीलिंग्स। एक शाम लेखक स्पार्कमैन एक बिजनेस पार्टी में गए। चारों ओर लोग बड़े नाम, बड़ी बातें, बड़ा दिखावा। सब एक दूसरे से हाथ मिला रहे थे,
25:29
Speaker A
हंस रहे थे। लेकिन स्पार्कमैन ने एक आदमी को देखा जो मुस्कुरा तो रहा था, लेकिन उसकी आंखें ठंडी थी बिल्कुल बिना भाव की। स्पार्कमैन ने हडी से पूछा, "यह आदमी इतना अच्छा दिख रहा है। सब उसे पसंद कर रहे
25:43
Speaker A
हैं। फिर भी मेरे अंदर अजीब सा डर क्यों लग रहा है?" हडी ने बिना देखे जवाब दिया क्योंकि तू उसकी बातों को नहीं उसकी भावनाओं को पढ़ रहा है और सच्चाई हमेशा चेहरे से नहीं नजरों से निकलती है। असली
25:56
Speaker A
खेल लोग क्या कहते हैं उस पर नहीं। वो क्यों कह रहे हैं उस पर ध्यान दो। सामने वाला क्या बोल रहा है? यह सुनना आसान है। लेकिन वो क्यों बोल रहा है? यह समझना असली मैनपुलेशन की कला है। कैसे पकड़े सामने
26:11
Speaker A
वाले का असली मोटिव? हड़ी के कुछ सिंपल लेकिन जबरदस्त टूल्स थे। एक वॉच द पॉज। रुकने के बाद क्या आता है? जब कोई बोलते बोलते अचानक रुकता है और फिर लाइन बदलता है। समझ जाओ कि रुकावट में सच्चाई थी जो
26:25
Speaker A
वो छुपा गया। उदाहरण मैंने उससे पैसे आई मीन मैंने उससे हेल्प ली थी। यहां पैसे असली मोटिव था। हेल्प तो सिर्फ शब्दों की चादर है। दो सामने वाले से सीधा मत पूछो। घुमा कर सवाल करो। सीधे पूछोगे। क्या तुम
26:40
Speaker A
मुझे इस्तेमाल कर रहे हो? सामने वाला झूठ बोलेगा। लेकिन अगर पूछोगे अगर कोई तुम्हें मदद करे क्या तुम उसे जवाब में कुछ लौटाओगे? यहां जवाब में उसका मूल स्वभाव बाहर आएगा। हडी कहता था लोग सीधे सवालों से डिफेंसिव हो जाते हैं। लेकिन
26:55
Speaker A
इनडायरेक्ट सवालों में अपनी असलियत खुद ही निकाल देते हैं। थ्री उसकी बातचीत में क्या बार-बार आता है? ध्यान दो। हर इंसान की बातों में कोई ना कोई रिकरिंग पैटर्न होता है। कुछ बार-बार रिपीट होता है जो उसके दिमाग में सबसे स्ट्रांग है। अगर कोई
27:12
Speaker A
बार-बार पैसे की तंगी की बात करता है तो उसका मोटिव पैसे से जुड़ा है। अगर कोई बार-बार ट्रस्ट इश्यूज की बात करता है तो वह इमोशनली अनस्टेबल है। अगर कोई बार-बार इनजस्टिस की बात करता है तो उसके अंदर
27:27
Speaker A
गुस्सा है और शायद रिवेंज मोटिव भी। स्पार्कमैन की एक लाइव केस एक आदमी था जो हर दिन बड़ी-बड़ी बातें करता था। मैं तो किसी को धोखा नहीं देता। मैं तो सबके लिए कुछ करता हूं। लेकिन स्पार्कमैन ने एक दिन
27:41
Speaker A
हल्के से पूछ लिया। अगर किसी को बेवकूफ बनाकर तुम $500 कमा लो तो क्या तुम वह मौका छोड़ दोगे? उसने हंसते हुए कहा यार यह दुनिया वैसे ही चलती है। बस वहीं से असली चेहरा सामने आ गया। लोग खुद को प्रकट करते हैं।
28:00
Speaker A
अगर आप ध्यान से देखें तो हर इंसान अपने वर्ड्स में छिपा होता है। आपको सिर्फ सुनना नहीं स्कैन करना है। मैनपुलेशन टेक्निक उसकी दुनिया में उतर जाओ। हडी कहता था अगर तू सामने वाले की दुनिया में घुस जाएगा। उसकी भाषा बोलेगा। उसके
28:17
Speaker A
रेफरेंस समझेगा तो वह तुझ पर ट्रस्ट करने लगेगा और वही ट्रस्ट के नाम पर वह खुद को खोल देगा। यानी सामने वाले को अपनी कहानी सुनाने दो। वहीं से उसकी कमजोरियां, डर, चाहतें और इरादे बाहर निकलेंगे। कभी किसी
28:32
Speaker A
रिश्ते में आप कंफ्यूज्ड रहे हो कि वह इंसान आपको सच में चाहता है या सिर्फ टाइम पास कर रहा है? ऐसे में बजाय सीधे पूछने के क्या तुम मुझसे प्यार करते हो? ऐसे बोलिए। अगर हम कुछ वक्त अलग रहे, क्या
28:46
Speaker A
तुम्हें फर्क पड़ेगा? उसका चेहरा ही सब बता देगा। शब्द नहीं, एक्सप्रेशन पढ़ो। यह चैप्टर हमें सिखाता है। लोगों की बात नहीं, उनकी भावना सुनो। उनके पैटर्न, पॉज और रिपीट होने वाले शब्द पकड़ो। सीधा सवाल मत करो। सवालों को ऐसी शक्ल दो कि सामने
29:03
Speaker A
वाला सोच ना सके कि वह टेस्ट में है। हडी कहता था कभी कोई अगर जरूरत से ज्यादा मुस्कुराए तो या तो उसके पास झूठ छिपा है या दांत दिखाने की आदत। लोग चेहरे बदल सकते हैं, आवाज बदल सकते हैं। लेकिन उनकी
29:17
Speaker A
सोच, उनकी असली जरूरतें और उनका लालच कहीं ना कहीं लीक हो ही जाता है। तुम बस ध्यान से देखना सीखो। चैप्टर एट द गर्मसी वर्स द ड्रामा दिखना जरूरी है या डराना। दुनिया में सबसे ज्यादा फायदा उसी को मिलता है जो
29:33
Speaker A
भरोसे लायक लगता है ना कि जो सबसे ज्यादा ताकतवर है। जी हां, यह दुनिया बहुत बार दिखावे की ताकत से नहीं बल्कि शांत विश्वास से चलती है। और यही इस चैप्टर की असली सीख है। कहानी दो गायों की जो
29:47
Speaker A
इंसानों की तरह है। एक दिन लेखक स्पार्कमैन हडी के साथ खेतों में गया। हडी ने दो गायों की ओर इशारा किया। गणसी एक भूरी सीधी साधी शांत गाय जिसे देखकर भरोसा आता था। ब्रह्मा एक बड़ी मसलदार सींगों वाली गाय जो हमेशा गुस्से में दिखती थी।
30:06
Speaker A
हडी ने पूछा अगर तुझे दूध निकालना हो तो तू किसके पास जाएगा? स्पार्कमैन ने जवाब दिया गर्सी के पास। क्योंकि वह सीधी और सेफ लगती है। हडी मुस्कुराया। और यही मैनपुलेशन की असली ट्रिक है। असली पॉइंट क्या है? दिखना डरावना या तगड़ा जरूरी
30:22
Speaker A
नहीं। भरोसेमंद दिखना ज्यादा जरूरी है। ब्रामा गाय ताकतवर थी लेकिन कोई उसके पास नहीं जाता था। क्यों? क्योंकि वह डराती थी। गर्सी दूध कम देती थी लेकिन हर कोई उसी के पास जाता था क्योंकि वह भरोसेमंद लगती थी। ह्यूमन साइकोलॉजी भी यही कहता
30:39
Speaker A
है। लोग तगड़े लोगों से इंस्पायर होते हैं। लेकिन भरोसेमंद लोगों पर ही भरोसा करते हैं। मैनपुलेशन हैक। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपके पास आ, आपकी सुने, आपसे इन्फ्लुएंस हो तो खुद को अप्रोचेबल बनाइए। ओवरपावरिंग नहीं। लोग आपकी तरफ तभी आएंगे
30:55
Speaker A
जब उन्हें लगने लगे कि आप उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। हडी ने स्पार्कमैन से कहा जब मैं ज्यादा स्मार्ट बनने की कोशिश करता था। लोग मुझसे दूर हो जाते थे। लेकिन जब मैंने खुद को नॉर्मल दिखाया। बस थोड़ा सच्चा थोड़ा शांत। लोग मेरे पास आकर खुद
31:13
Speaker A
अपना राज खोलने लगे। प्रोफेशनल सेटिंग में इसका मतलब आप बॉस हैं, लीडर हैं या सेल्समैन। अगर आप हर वक्त अथॉरिटी दिखाएंगे लोग डरेंगे लेकिन दूर रहेंगे लेकिन अगर आप अप्रोचेबल वार्म और काम दिखेंगे लोग आपके आसपास रहना चाहेंगे और
31:32
Speaker A
वहीं से इन्फ्लुएंस शुरू होता है। जो लड़का या लड़की हर वक्त घमंड से बात करता है वो क्लासी लगता है लेकिन हार्ट कनेक्शन नहीं बनता लेकिन जो मुस्कुराकर ध्यान से बिना ईगो के बात करता है उसी से दिल
31:46
Speaker A
जुड़ता है। हडी एक बार बोला अगर तू ब्राह्मा बनकर लोगों पर चढ़ जाएगा तो लोग तुझे फैंस के पीछे ही रखेंगे। लेकिन अगर तू गर्सी की तरह दिखेगा तो लोग खुद तुझे घास खिलाएंगे। लोग उन पर भरोसा करते हैं
32:01
Speaker A
जो सेफ दिखते हैं ना कि स्मार्ट या पावरफुल। अगर इन्फ्लुएंस चाहिए तो सॉफ्टन हो जाओ। लोगों को लगे कि तुम अप्रोचेबल हो। मैनपुलेशन का सबसे बड़ा ट्रिक है। तुम जीतोगे तभी जब सामने वाला तुम्हें खतरा ना समझे। पावर दिखाने से ज्यादा जरूरी है खुद
32:20
Speaker A
को भरोसे लायक साबित करना। क्योंकि डराकर लोग पल भर झुकते हैं। लेकिन भरोसा जीतकर लोग उम्र भर साथ देते हैं। चैप्टर नौ पैसे के खेल में खुद को ठगे जाने से कैसे बचाएं? हाउ टू अवॉयड बीइंग टेकन इन
32:37
Speaker A
फाइनेंसियल डीलिंग्स? दुनिया में सबसे ज्यादा धोखे प्यार में नहीं पैसों में मिलते हैं। और सबसे दुखद बात धोखा देने वाला अक्सर कोई अनजान नहीं बल्कि अपना ही होता है। कभी पार्टनर, कभी रिश्तेदार, कभी वह दोस्त जिसे आपने बिना सोचे पैसा दिया
32:53
Speaker A
था और उसने बिना सोचे मुंह मोड़ लिया। लेखक स्पार्कमैन ने एक बार अपने एक पुराने दोस्त को पैसे उधार दिए। करीब $200 दोस्ती सालों की थी। यकीन पूरा था। दोस्त ने वादा किया एक हफ्ते में लौटा दूंगा कसम से। एक
33:08
Speaker A
हफ्ता, फिर दो, फिर महीना और फिर दोस्त का मोबाइल ही बंद हो गया। स्पार्कमैन को एक और चीज खोनी पड़ी। पैसे के साथ-साथ दोस्ती भी। अब सवाल, गलती स्पार्कमैन की थी या उस दोस्त की? हाड़ी ने जवाब दिया, गलती तेरी
33:23
Speaker A
नहीं, तेरी समझ की कमी थी। तू यह समझ ही नहीं पाया कि लोग पैसे मांगते वक्त कौन से नकाब पहनते हैं। टैक्टिक मंडबड़ा वन। कभी किसी की फिलॉसफी मत सुनो। उसका ट्रैक रिकॉर्ड देखो। जब कोई कहता है मैं हमेशा
33:37
Speaker A
ईमानदारी से पैसा लौट आता हूं या मैं पैसों को बहुत सीरियसली लेता हूं। तो एक बात याद रखो जो सही होता है उसे बार-बार सही साबित करने की जरूरत नहीं पड़ती। सवाल यह नहीं कि वह क्या बोल रहा है? सवाल यह
33:52
Speaker A
है कि उसने अब तक क्या किया है? प्रैक्टिकल रूल अगर कोई इंसान अपनी जिंदगी में तीन लोगों को पैसे नहीं लौटा पाया है तो आप चौथे हो। टैक्टिक नंबर दो अगर पैसा देना ही है तो उसे उधार मत मानो। गिफ्ट
34:05
Speaker A
मानो। हडी कहता था अगर किसी को पैसा दे रहे हो और उसके लौटने की उम्मीद लगा रहे हो तो तुम नुकसान में हो। लेकिन अगर पहले से मान लो कि वह पैसा गया तो तुम हर्ट नहीं होगे और सामने वाला गिल्ट में जिंदा
34:17
Speaker A
रहेगा। टैक्टिक नंबर थ्री पैसा देते वक्त शर्त लगाओ ताकि सामने वाले को गिल्ट लगे। स्पार्कमैन ने एक बार एक दोस्त को $100 दिए और बोला, "भाई, जब तुझे लगे कि तू फाइनेंशियली थोड़ा बेटर फील कर रहा है, तब
34:31
Speaker A
मुझे यह पैसे वापस दे देना क्योंकि मैं भी इन्हीं से बिल भरने वाला था। उस दोस्त ने पैसे कुछ दिन बाद लौटा दिए। क्यों?
34:39
Speaker A
क्योंकि अब वह सिर्फ पैसे नहीं लौटा रहा था। वो स्पार्क मैन की इंसानियत का कर्ज चुका रहा था। बिजनेस डीलिंग्स में कैसे बचें? सामने वाला अगर बहुत ज्यादा मीठा बन जाए, चौकन्ना हो जाओ। अगर कोई फिर कभी देख
34:52
Speaker A
लेंगे वाली बात करे मतलब उसे देने का इरादा नहीं और अगर कोई कहे तू अपना भाई है पैसे की क्या बात तो यही वह लाइन है जो आगे चलकर सबसे ज्यादा चुभेगी अगर रिशेदारी में पैसा देना हो तो या तो लिखित में दो
35:06
Speaker A
या मनोवैज्ञानिक रूप से खुद को पहले से प्रिपेयर करो कि पैसा गया रिश्ता बिगाड़ने से अच्छा है कम पैसे दो लेकिन साफ शर्तों के साथ दो हडी कहता था कभी अगर कोई बोले कि तू मुझे नहीं समझेगा तो समझ जाना कि वह
35:22
Speaker A
तुझसे उधार मांगने वाला है। यह चैप्टर हमें सिखाता है पैसा देने से पहले सामने वाले का पास्ट देखो। उसके प्रॉमिससेस नहीं। इमोशंस में आकर पैसे देने से ज्यादा महंगा सौदा और कोई नहीं होता। पैसा तभी दो जब खुद को मानसिक नुकसान के लिए तैयार बना
35:39
Speaker A
सको। पैसा इंसान का टेस्ट नहीं करता बल्कि यह दिखाता है कि सामने वाला असल में क्या है। दूसरों को बदलने की कोशिश मत करो। बस इतना तय करो कि खुद को दोबारा मत ठगने दो। अब अगला चैप्टर है मैनपुलेटिंग अ पर्सन
35:54
Speaker A
थिंकिंग यानी सामने वाले के दिमाग में अपनी बात कैसे बैठाई जाए बिना जोर बिना बहस कभी आपने किसी को कुछ समझाने की पूरी कोशिश की लेकिन वह आपकी एक भी बात नहीं मानता और फिर कोई और आता है। वही बात आराम
36:09
Speaker A
से कहता है और सामने वाला उसी वक्त मान जाता है। आप सोचते रह जाते हो। मैंने भी तो यही कहा था। फिर मेरी बात क्यों नहीं मानी? इसका जवाब है कब, कैसे और किस अंदाज में कहा गया। वही सबसे बड़ा फर्क था।
36:22
Speaker A
माइंड कंट्रोल। कोई जादू नहीं यह साइंस है। हडी कहता था लोग दिमाग से नहीं ईगो से सुनते हैं। अगर तुम उनके ईगो को बाईपास कर पाओ तो तुम उनके सोचने का तरीका बदल सकते हो। बिना लड़ाई, बिना बहस। एक बार
36:38
Speaker A
स्पार्कमैन ने अपने दोस्त को समझाने की कोशिश की कि वह जिस बिजनेस में पैसा डाल रहा है, वह धोखाधड़ी है। वह दोस्त भड़क गया। तू जल रहा है। तू चाहता है मैं आगे ना बढूं। कुछ दिन बाद वही दोस्त किसी और
36:51
Speaker A
आदमी से वही बात सुनकर मान गया और स्पार्कमैन के पास आकर बोला, भाई तू सही था। स्पार्कमैन गुस्से में नहीं आया। हडी ने मुस्कुराते हुए कहा, "अभी-कभी सच कहने वाला भी गलत लगता है। अगर वह सामने वाले के ईगो को छू दे।"
37:06
Speaker A
टैक्टिक वन डोंट आर्ग्यू गाइड। अगर आप किसी को मैनपुलेट करना चाहते हैं तो उससे बहस मत करो। बस उसके सोचने का डायरेक्शन धीरे-धीरे बदलो। लोगों को लगे कि वह खुद सोच रहे हैं तब असल में आप ही उनके दिमाग
37:19
Speaker A
में बैठ रहे होते हो। एग्जांपल मत कहो तू गलत सोच रहा है बल्कि कहो अगर एक और एंगल से सोचे तो शायद नजरिया थोड़ा बदल सकता है। इसमें आदमी अपना ईगो नहीं खोता और सोच बदलने को तैयार हो जाता है। टैक्टिक टू
37:34
Speaker A
टाइमिंग इज एवरीथिंग। हड़ी का सीधा रूल तब मत समझाओ जब सामने वाला गुस्से में हो। तब समझाओ जब वह थका हो, शांत हो या थोड़ा फ्रजाइल हो। क्योंकि इंसान तर्क नहीं भावना से चलता है। जब दिल टूटता है तब
37:48
Speaker A
दिमाग खुलता है। मान लीजिए कोई क्लाइंट आपकी बात नहीं मान रहा। मत कहो हमारी सर्विस सबसे बेस्ट है। कहो अगर आपको लगे कि हमारा सॉल्यूशन आपके टाइम और पैसे दोनों बचा सकता है तो हम इसे स्टेप बाय स्टेप इंप्लीमेंट कर सकते हैं। कोई हंसी
38:05
Speaker A
नहीं। अब वह सोचेगा फैसला उसका है। लेकिन असल में रास्ता आपने दिया है। अगर पार्टनर बार-बार रिएक्ट करता है तो सीधे मत कहो। तू हर बार बात को घुमा देता है। बल्कि कहो मुझे लगता है हम दोनों में कहीं ना कहीं
38:19
Speaker A
मिसअंडरस्टैंडिंग हो जाती है। तू क्या सोचता है इस बारे में? अब सामने वाला डिफेंसिव नहीं होगा बल्कि ओपन होगा। टैक्टिक नंबर तीन साइलेंस इज लाउडर देन आर्गुमेंट। कभी-कभी खामोशी से जवाब देना बहस में जीतने से ज्यादा असरदार होता है।
38:34
Speaker A
जब आप चुप रह जाते हो तो सामने वाला खुद ही सोचने लगता है और यही समय होता है जब उसकी सोच में बदलाव आता है। मैनिपुलेशन मास्टर टिप हडी ने कहा तू किसी को जीत कर नहीं बदल सकता। लेकिन अगर तू उसे खुद का
38:48
Speaker A
हीरो फील करा दे तो वह तेरी बात अपने दिल से मानेगा। हडी कहता था अगर तू बहस में जीत गया तो सामने वाला तुझसे चिढ़ेगा। लेकिन अगर तू उसे जीता हुआ फील करा दे तो वह तुझे अपना गुरु मानेगा। यह चैप्टर हमें
39:04
Speaker A
सिखाता है। लोगों को मत समझाओ कि वह गलत है। उन्हें एहसास कराओ कि सोचने का और भी तरीका हो सकता है। ईगो को टच मत करो। उस पर हाथ फेर दो। टाइमिंग, टोन और ट्रस्ट। यही तीन टी है जिससे आप किसी का दिमाग बदल
39:19
Speaker A
सकते हैं। मैनिपुलेशन का मतलब किसी को फोर्स करना नहीं बल्कि इतनी नरमी से रास्ता दिखाना है कि उसे लगे वह खुद चल रहा है। जब आप बहस से ऊपर उठकर समझदारी से सोचते हो तब आप लोगों के दिल और दिमाग
39:33
Speaker A
दोनों जीत लेते हो। चैप्टर 11 99% बहसों में जीतना है तो यह गेम खेलना सीखो। विन 95% ऑफ योर आर्गुमेंट्स। बहस वह जंग है जो दिल से शुरू होती है और अक्सर ईगो पर खत्म होती है और इस जंग में जीतने वाला वह नहीं
39:50
Speaker A
होता जो ज्यादा चीखता है बल्कि वह होता है जो सामने वाले के दिमाग में चुपचाप घुसकर उसकी ही जुबान में उसे हरा देता है। एक दिन स्पार्कमैन और हडी एक कैफे में थे। पास की टेबल पर दो लोग बहस कर रहे थे। एक
40:03
Speaker A
आदमी चिल्ला रहा था। दूसरा शांत था। सिर्फ मुस्कुरा रहा था। लेकिन हर बात का जवाब तर्क और फैक्ट्स से दे रहा था। 10 मिनट बाद जो चिल्ला रहा था वह खुद ही चुप हो गया। हडी मुस्कुराया और बोला देख लिया
40:19
Speaker A
जीतने के लिए जोर की नहीं जहन की जरूरत होती है। तो सवाल यह है आप कैसे बहस में जीत सकते हैं? बिना अपना आपा खोए। हडी ने इसके लिए कुछ किलर टैक्टिक्स बताए। टैक्टिक नंबर वन अवॉइड स्टार्टिंग वि योर
40:32
Speaker A
रॉन्ग। जैसे ही आप सामने वाले को यह कहते हैं तुम गलत हो। वह डिफेंसिव हो जाता है। उसके कान बंद हो जाते हैं। अब वह समझने नहीं बस जवाब देने की सोचता है। इंस्टेड से मुझे एक बात अलग एंगल से समझ आई। शायद
40:47
Speaker A
आप भी रिलेट कर पाओ। अब आप उसकी ईगो नहीं मार रहे बल्कि उसे एक रिस्पेक्टफुल डिसए्रीमेंट दे रहे हो जो ज्यादा असरदार है। टैक्टिक डम्राडू पहले उसे थोड़ी सहमति दिखाओ फिर अपनी बात रखो। हडी कहता था पहले सामने वाले को फील कराओ कि तुम उसकी बात
41:04
Speaker A
को समझते हो। फिर धीरे से अपना व्यू पॉइंट डालो। उदाहरण आपकी बात सही है कि लोग समय के साथ बदलते हैं। बस मेरा मानना है कि कुछ चीजें वक्त के साथ और भी गहरी हो जाती हैं। अब बहस नहीं होगी बल्कि बातचीत
41:18
Speaker A
बनेगी। टैक्टिक नंबर थ्री यूज क्वेश्चंस नॉट स्टेटमेंट्स। डायरेक्ट बोलोगे यह तरीका गलत है। बहस होगी। लेकिन अगर पूछोगे क्या आपने कभी सोचा है कि अगर इसे उल्टे तरीके से देखें तो क्या नतीजा आएगा? अब सामने वाला सोचने पर मजबूर हो गया। लोगों
41:35
Speaker A
को सिखाओ मत। सोचने पर मजबूर करो। यही असली जीत है। एक क्लाइंट मीटिंग में स्पार्कमैन ने एक बार एक सीनियर मैनेजर को पोलाइटली डिसए्री किया। सामने वाला भड़क गया। लेकिन स्पार्कमैन ने जवाब दिया, "सर, आपकी बात में दम है। पर अगर हम इस ऑप्शन
41:52
Speaker A
को 2% भी कंसीडर करें, तो शायद रिजल्ट डबल आ जाए।" सामने वाला शांत हो गया और बोला, "अच्छा, यह एंगल मैंने नहीं सोचा था। बात बनी, बहस टली, स्पार्क मैन जीता। रिलेशनशिप्स में कैसे अप्लाई करें?
42:06
Speaker A
पार्टनर से बहस में कभी भी तू हमेशा ऐसा करता है जैसी लाइंस मत बोलो। इंस्टेड बोलो। जब ऐसा होता है तब मुझे थोड़ा हर्ट फील होता है। तू क्या सोचता है? अब बात ब्लेमिंग से निकल कर शेयरिंग में बदल गई।
42:20
Speaker A
वर्क प्लेस में। जब टीम में बहस हो तो अपनी बात ठोकने की बजाय लेट्स एक्सप्लोर बोथ आइडियाज एंड देन डिसाइड जैसी लाइन बोलो। अब आप लीडर लगोगे ईगोइस्ट नहीं। हडी कहता था अगर बहस में सामने वाला चुप हो
42:35
Speaker A
जाए तो समझो या तो तुम जीते हो या वह अब चाय में झड़ डालने की सोच रहा है। यह चैप्टर हमें सिखाता है। बहस जीतनी है तो सामने वाले की ईगो मत तोड़ो। उसे इंटैक्ट रखते हुए सोच बदलो। क्वेश्चन से सोच बदलती
42:49
Speaker A
है। स्टेटमेंट से दीवार खड़ी होती है। शांति से जीती गई बहस। जिंदगी में रिश्ते भी बचाती है और इज्जत भी। बहस वह कला है जिसमें जीतने वाला वह है जो सामने वाले को हारा हुआ नहीं सुना हुआ महसूस कराए और जब
43:04
Speaker A
आप किसी को उनकी ही सोच में आईना दिखाते हैं तो वह खुद ही आपकी बात मान जाते हैं। चैप्टर 12 मैनपुलेट अ पर्सन अगेंस्ट ह विल एंड मेक हिम लाइक इट। एक ऐसी शक्ति जो दिखती नहीं पर चलती सब पर है। दिमाग को
43:17
Speaker A
हराया जा सकता है। लेकिन अगर आप किसी इंसान का फैसला खुद उसकी सोच लगवा दें तो वह आपकी बात मानेगा और सोचेगा कि यह उसकी खुद की सोच थी। यही मैनपुलेशन का सबसे रिफाइंड फॉर्म है। स्पार्टमैन एक बार एक
43:32
Speaker A
पार्टी में था। वहां एक आदमी बहस कर रहा था कि टीवी पर आ रहे एड्स बेवकूफ बनाते हैं। कोई उन पर यकीन नहीं करता। स्पार्टमैन ने कुछ नहीं कहा। बस मुस्कुराया। फिर उसी आदमी ने स्पार्क मैन से पूछा तू क्या करता है? स्पार्कम बोला
43:47
Speaker A
मैं एड्स बनाता हूं और उन्हीं के दम पर मिलियन डॉलर सेल्स होती हैं। सामने वाला चौंका। फिर थोड़ा डिफेंसिव हुआ। स्पार्कमैन ने धीरे से कहा, "मैं तुम्हारी बात से सहमत हूं। बहुत एड्स बेवकूफी से भरे होते हैं। पर शायद तुमने नोटिस किया
44:01
Speaker A
होगा। कुछ एड्स ऐसे भी होते हैं जो दिल को छू जाते हैं। जैसे वह एक चाय वाला ऐड था जिसमें मां और बेटा। आदमी ने बीच में कहा, हां, वह वाला ऐड तो मैं खुद भी सबको दिखाता हूं। बहुत बढ़िया था। बस बात वहीं
44:15
Speaker A
खत्म। अब वो स्पार्कमैन से डिबेट नहीं कर रहा था। वो सेम साइड में खड़ा था। मैनपुलेशन का मास्टर रूल। लोग अपनी मर्जी के खिलाफ कुछ नहीं मानते। लेकिन अगर आप उनकी मर्जी को थोड़ा मोड़ दें, तो वह आपकी
44:27
Speaker A
बात को अपनी सोच मान लेते हैं। टैक्टिक मबरा वन अनआर्ग्यू यानी बहस के बिना बहस जीतो। हडी कहता था बहस जीतना है तो सामने वाले की बात को मत काटो। उसे थोड़ा-थोड़ा मोड़ो। मत कहो। तुम गलत हो। बल्कि कहो तुम
44:42
Speaker A
जो कह रहे हो वह वैलिड है। पर एक बात और सोचने लायक है। अब सामने वाला डिफेंसिव नहीं रहेगा। बल्कि वह खुद सोचने लगेगा कि हां शायद इसमें कुछ बात हो। टैक्टिक टू। सामने वाले की सोच को यूज़ करो। बदलो
44:56
Speaker A
नहीं। लोग जो सोचते हैं उसी से जोड़कर अपनी बात कहो। उदाहरण कोई बोलता है मुझे तो मोटिवेशन की कोई जरूरत नहीं। आप जवाब दो। बिल्कुल सही। और शायद इसलिए आप बाकी लोगों से अलग हो क्योंकि आप खुद को खींच
45:10
Speaker A
पाते हो। पर क्या आपने कभी सोचा है कि वही क्वालिटी औरों में कैसे डाली जाए? अब आपने उसकी ईगो को स्ट्रोक किया और अपनी बात को उसके नजरिए से जोड़ दिया। टैक्टिक नंबर तीन यूज़ यस सेट टेक्निक। हडी ने सिखाया।
45:27
Speaker A
अगर किसी से तीन बार हां बुलवा लिया तो चौथी बार वह खुद ब खुद आपकी बात मानने लगता है। उदाहरण आपको लोग ट्रस्ट करते हैं। है ना? हां, आप जब कुछ कहते हैं, लोग सीरियस लेते हैं। हां, और आप लॉजिकल सोच
45:41
Speaker A
रखते हैं। हां, तो बस एक आईडिया रख रहा हूं। शायद यह भी आपको अच्छा लगे। अब चौथी बात पर भी वो सबकॉन्शियसली हां की माइंड सेट में रहेगा। हडी को एक बार किसी क्लाइंट से उधार वापस लेना था। वो आदमी छह
45:54
Speaker A
हफ्तों से टाल रहा था। हडी ने जाकर सीधे पैसे की बात नहीं की। उसने बोला, "भाई तू स्मार्ट आदमी है इसलिए मैंने तुझसे उधार लिया ना कि किसी से भी। मुझे पता है तू कमिटमेंट निभाने वालों में से है। बस
46:07
Speaker A
इसलिए आया हूं। अब वह आदमी अगर ना भी चाहता तो भी उसे पैसे देने पड़े। क्योंकि अब उसका इमेज दांव पर था और उसे ऐसा लग रहा था कि पैसे देना उसकी खुद की मर्जी है। अगर पार्टनर या दोस्त आपकी बात नहीं
46:20
Speaker A
मानता तो डायरेक्ट मत कहो। तुम ऐसा करो बल्कि कहो। अगर तू करता तो कैसा फील होता?
46:26
Speaker A
या मुझे लगता है तेरे तरीके से यह और भी अच्छे से हो सकता है। क्या तू इसे अपने अंदाज में करना चाहेगा? अब उसने आपकी बात मानी लेकिन उसे लगा कि वह अपने डिसीजन से चला है। हडी कहता था लोग अपनी सोच बदल
46:40
Speaker A
सकते हैं। बस उन्हें ऐसा फील कराओ कि वह सोच उन्होंने खुद बदली है। यह चैप्टर हमें सिखाता है लोगों को हुक्म पसंद नहीं। लेकिन राय को वह सम्मान देते हैं। अगर आप चाहते हैं कि कोई आपकी बात माने तो उसे
46:53
Speaker A
लगना चाहिए कि वह उसकी खुद की सोच थी। मैनपुलेशन का सबसे रिफाइंड रूप है अनआर्ग्यू करना। यानी बिना लड़ाई के सोच बदल देना। सामने वाले को हराना आसान है। लेकिन उसे उसकी ही सोच से जिताना वही असली चाल है। और जब आप किसी को उसकी लैंग्वेज
47:10
Speaker A
में उसकी ईगो को इंटैक्ट रखते हुए गाइड करते हैं तब वह आपकी बात को अपनी सोच समझकर फॉलो करता है। अब अगला चैप्टर है अ लिटिल प्रेशर हैज़ इट्स प्लेस। बट सेडम यानी थोड़ा दबाव काम करता है। लेकिन
47:25
Speaker A
ज्यादा दबाव से लोग टूटते नहीं। बगावत करते हैं। इंसान रबर की तरह होता है। थोड़ा खींचोगे तो आगे बढ़ेगा। लेकिन ज्यादा खींचोगे तो या तो टूटेगा या फिर पलट कर मार देगा। यही होता है जब हम किसी पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालते हैं और फिर
47:42
Speaker A
सोचते हैं कि वह हमारी बात क्यों नहीं मान रहा। स्पार्कम एक बार एक कस्टमर को इंश्योरेंस प्लान बेचने की कोशिश कर रहा था। कस्टमर सुन रहा था। थोड़ा इंटरेस्टेड भी लग रहा था। पर स्पार्कमैन थोड़ा ज्यादा एक्साइटेड हो गया। उसने एक के बाद एक फीचर
47:58
Speaker A
गिनाने शुरू कर दिए। डील के फायदे बताए और फिर आखिर में बोला सर अभी साइन कर दीजिए वरना बाद में रिग्रेट होगा। बस वहीं खेल बिगड़ गया। कस्टमर की बॉडी लैंग्वेज बदल गई। वो पीछे हटा और बोला मुझे सोचने का
48:14
Speaker A
टाइम चाहिए और वो चला गया। फिर कभी वापस नहीं आया। हडी ने मुस्कुराकर कहा तू जीत सकता था पर तूने उसे दबा दिया और याद रख दबाव इंसान को पीछे हटने पर मजबूर करता है। इंसानी दिमाग की गेम जब आप किसी इंसान
48:30
Speaker A
को ज्यादा प्रेशराइज करते हैं। वह अपना कंट्रोल खोने लगता है। उसे लगता है कि आप उसका फैसला छीन रहे हो और फिर वह खुद को बचाने के लिए ना बोलता है। भले ही अंदर से मानने को तैयार हो। टैक्टिक नंबर वन
48:43
Speaker A
प्रेशर नहीं पॉसिबिलिटी दिखाओ मत कहो। तुम्हें अभी फैसला करना होगा। बल्कि कहो अगर आप चाहें तो हम इसे आज शुरू कर सकते हैं। नहीं तो जब भी आप कंफर्टेबल हो अब सामने वाला कंट्रोल में फील करता है और
48:57
Speaker A
जहां कंट्रोल होता है वहां ट्रस्ट बनता है। रिश्तों में कैसे? कभी किसी से जबरदस्ती प्यार या अटेंशन मांगने की कोशिश की। तू मुझसे बात क्यों नहीं करता? तू बदल गया है। तू मेरी फीलिंग्स नहीं समझता। यह प्रेशर है और इंसान इससे और दूर भागता है।
49:14
Speaker A
इंस्टेड बोलो मैं समझता हूं तू बिजी है। मैं बस इतना चाहता हूं कि जब तू रेडी हो हम बात कर सकें। अब आपने दरवाजा खोला धक्का नहीं दिया। टैक्टिक टाइगर दो दबाव का सही टाइम इमोशनल पीक हडी कहता था। अगर
49:29
Speaker A
किसी पर थोड़ा दबाव डालना है तो तब डालो जब वह इमोशन में हो ना कि तब जब वह लॉजिक में हो। क्योंकि जब कोई इंसान इमोशन में होता है तब वह डिसीजंस दिल से लेता है और दिल पर हल्का टच भी असर करता है। एक बार
49:42
Speaker A
हडी ने एक लड़की को सिनेमा में मूवी दिखाने के लिए मनाना चाहा। वो मना कर रही थी। अभी नहीं जा सकती। हडी बोला कूल कोई बात नहीं। बस जानना था कि अगर तू किसी दिन एक बोरिंग सा दिन फील करे तो क्या मुझे
49:56
Speaker A
याद करेगी? लड़की मुस्कुराई और बोली अच्छा सुन आज चल ही लेते हैं। दैट्स कॉल्ड जेंटल प्रेशर जो दिल तक जाता है। हडी कहता था दबाव अगर सॉफ्ट सर्व आइसक्रीम जैसा हो तो लोग छक लेते हैं। लेकिन अगर हथौड़े जैसा
50:10
Speaker A
हो तो सिर फूटता है। यह चैप्टर हमें सिखाता है ज्यादा जोर, ज्यादा दूरी। जबरदस्ती कभी असरदार नहीं होती। सामने वाले को कंट्रोल दो। ताकत नहीं छीनो। थोड़ा प्रेशर तभी काम आता है जब आप टाइमिंग, टोन और टच सही रखें। मैनपुलेशन
50:27
Speaker A
कोई दबाव डालने का खेल नहीं है बल्कि वह सटल कला है जहां आप सामने वाले को खुद चलने देते हो। लेकिन रास्ता आपने बनाया होता है। जब आप जेंटल रहते हो तो सामने वाला ज्यादा ओपन होता है और वहीं से
50:41
Speaker A
कनेक्शन की असली शुरुआत होती है। चैप्टर 14 है यदि सभी दूसरे तरीके काम ना आए तो चालाकी की वह काली गली जिसमें लोग या तो जीतते हैं या सब कुछ हार जाते हैं। एक ऐसी लाइन जो चुभती है। मगर सच है ईमानदारी से
50:57
Speaker A
खेलो। जब तक सामने वाला भी वैसा ही कर रहा हो। लेकिन अगर सामने वाला गंदा खेल शुरू कर दे तो या तो तुम हार मान लो या उसकी ही भाषा में उसे हराओ। एक बार स्पार्कम को एक बिजनेस डील में शामिल किया गया जहां तीन
51:11
Speaker A
पार्टनर्स थे। धोने पार्टनर सामने से मीठा बोलते लेकिन पीछे से स्पार्कमैन को आउट करने की पूरी प्लानिंग कर रहे थे। स्पार्कमैन ने बार-बार कोशिश की। बैठकें, बातें, मेल्स, मीटिंग्स हर बार उसने समझदारी और विनम्रता दिखाई। लेकिन एक दिन
51:28
Speaker A
हडी ने उसे कहा, "भाई, यह लोग तुझे सीधा देखकर ही खेल रहे हैं। अब वक्त है उन्हें उनके ही हथियार से हराने का। डर्टी वे का मतलब धोखा नहीं। समझदारी से चुपचाप चाल चलना है। हडी ने स्पार्कमैन को सिखाया,
51:42
Speaker A
इनकी बातें सीक्रेटली रिकॉर्ड करो। उनके ईमेल प्रूफ रखो। और जब सही वक्त आए इन सबको बोर्ड के सामने रख दो। स्पार्कमैन ने वैसा ही किया। और नतीजा दोनों चालबाज पार्टनर्स बाहर निकाले गए और स्पार्कम अकेला मालिक बन गया। टैक्टिक नंबर वन जब
51:59
Speaker A
सामने वाला खेल बिगाड़ दे तो रूल बुक बंद कर दो। डोंट बी इविल बट डोंट बी अ फूल ईदर। अगर कोई बार-बार आपकी अच्छाई का फायदा उठा रहा है तो अब टाइम है। चुप रहकर चाल चलने का। हडी कहता था माफ करना अच्छी
52:13
Speaker A
बात है पर जब कोई बार-बार काटे तो उसके दांत तोड़ना भी जरूरी है। टैक्टिकान नंबर टू इनडायरेक्ट अटैक सीधा नहीं स्मार्ट वॉर। कभी-कभी किसी को हराने के लिए उसे पब्लिकली एंबरेस करने की जरूरत नहीं होती। बल्कि बस इतना करो। उसके सामने सही लोगों
52:30
Speaker A
से कनेक्शन बना लो। उसकी बातें उस तक पहुंचने से पहले खुद कंट्रोल करो। और सबसे जरूरी उसके अगला कदम पहले से सोच कर बैठो। यही है असली स्मार्ट रिवेंज जिसमें आप शोर नहीं मचाते सिर्फ जीतते हो। बिजनेस में
52:47
Speaker A
डर्टी वे का इस्तेमाल कैसे? कोई कॉम्पिटिट आपकी प्रोडक्ट की बैड मार्केटिंग कर रहा है? आप सीधा जवाब मत दो। बल्कि उसके ही पुराने कस्टमर को अप्रोच करो। उन्हें अच्छी डील दो। और फिर वही लोग उसके ब्रांड को एक्सपोज कर देंगे। साइलेंट अटैक,
53:03
Speaker A
स्ट्रांग इफेक्ट। रिश्तों में क्या करें जब सामने वाला चाल चलता है। अगर कोई रिश्ते में बार-बार झूठ बोल रहा है, मैनिपुलेट कर रहा है तो बार-बार इमोशनल टॉक से कुछ नहीं होगा। उसके झूठ पकड़ो। उसके कंट्राडिकशंस लिखो और फिर एक दिन
53:20
Speaker A
मिरर दिखा दो। सब कुछ सामने रखकर ताकि उसे उसकी ही गेम में हराया जा सके। हडी कहता था अगर कोई बार-बार तुम्हें चाल में फंसा रहा है तो अब उसकी चेस बोर्ड उठा लो और उसे लूडो खेलने भेज दो। यह चैप्टर हमें
53:35
Speaker A
सिखाता है। हर बार सज्जन बनना समझदारी नहीं। कभी-कभी चुपचाप चालाक बनना जरूरी होता है। सामने वाला अगर रूल तोड़े तो तुम स्मार्ट बनो। सेम कीचड़ में मत गिरो। लेकिन उसे उसमें गिरा जरूर दो। डर्टी वे का मतलब है बिना शोर किए ऐसा वार करना कि
53:53
Speaker A
सामने वाला फिर कभी खेलने की हिम्मत ना करे। दुनिया में अच्छाई जरूरी है लेकिन आंख मूंद कर नहीं। जो आपको बार-बार नुकसान दे रहा है उसे माफ करना पुण्य नहीं। खुद से गद्दारी है। सीधे रहो। पर इतने भी नहीं
54:06
Speaker A
कि लोग आपको पायदान समझे। अगर कोई आपको गिराने पर तुल जाए तो उठकर ऐसा पलटवार करो कि वह दोबारा कोशिश ना कर सके। रेडी फॉर फाइनल चैप्टर। अब अगला और आखिरी चैप्टर है कैसे एहसान फरामोश लोगों को शुरुआत में ही
54:21
Speaker A
पहचाने और रोके। हाउ टू स्क्वेच ग्रेटट्यूड बिफोर इट स्टार्ट्स? एक कड़वा लेकिन सच्चा सच सबसे गहरा जख्म वही देता है जिसे आपने सबसे ज्यादा दिया होता है। आपने वक्त दिया, पैसा दिया, इज्जत दी, भरोसा दिया और बदले में क्या मिला? भुला
54:39
Speaker A
दिया गया या धोखा मिल गया। जब मदद जरूरत थी तब मैं भगवान था और जब काम निकल गया तब मैं गैर हो गया। स्पार्कमैन ने एक पुराने दोस्त को बिजनेस शुरू करने में मदद की। $00 का रॉ मटेरियल दिलवाया। अपने
54:53
Speaker A
कांटेक्ट्स से उसे मार्केट दिया और साथ बैठकर प्लानिंग तक की। वो दोस्त बार-बार कहता था भाई तूने मेरा सपना पूरा कर दिया। मैं जिंदगी भर तेरा एहसानमंद रहूंगा। लेकिन कुछ महीनों बाद उसी दोस्त ने स्पार्कमैन की पीठ पीछे दूसरे इन्वेस्टर
55:08
Speaker A
से हाथ मिला लिया। स्पार्कमैन का नाम तक मिटा दिया गया। हडी ने सिर हिलाया और कहा, गलती तेरी नहीं कि तू मददगार था। गलती यह थी कि तूने उसे एहसान को आदत बनने दिया। समझो इंसानी फितरत। जब आप बार-बार किसी की
55:22
Speaker A
मदद करते हो तो एक टाइम बाद वह इंसान उसे मूल अधिकार समझने लगता है। मुझे तो मिलना ही चाहिए। रिपीटेड फेवर्स कन्वर्ट ग्रेटट्यूड इनू एंटाइटलमेंट। और जब एक दिन आप मदद करना बंद कर दो तो वह इंसान कहता
55:36
Speaker A
है बदल गया है तू। टैक्टिक नंबर एक फेवर को कभी भी फ्री मत दिखाओ। अगर आप किसी की हेल्प कर रहे हैं तो उसे फेवर की तरह दिखाओ। गिफ्ट की तरह नहीं। मत कहो। कोई बात नहीं यार। मेरे लिए तो कुछ भी बल्कि
55:49
Speaker A
कहो। मैं कर रहा हूं क्योंकि तू मेरे लिए मैटर करता है। उम्मीद है तू इसे समझेगा। अब सामने वाला उसे एहसान मानेगा ना कि हक। टैक्टिक ट्रू। पहली बार में ही लिमिट सेट करो। हडी कहता था जिस दिन तुमने बिना शर्त
56:04
Speaker A
मदद देना शुरू कर दी उसी दिन से सामने वाला तुम्हें ऑलवेज अवेलेबल मान लेता है। इसीलिए चाहे वह दोस्त हो, रिश्तेदार हो या क्लाइंट। पहली बार हेल्प करने के बाद क्लियर कर दो। मैंने किया क्योंकि जरूरत थी। पर यह रोज का नहीं है ताकि आगे चलकर
56:20
Speaker A
आपकी साइलेंस बिटियल ना मानी जाए। रिश्तों में क्या करें? पार्टनर, दोस्त या भाई अगर बार-बार आपकी गुडनेस का फायदा उठाए तो उसे बोलो मैं तेरे लिए हमेशा हूं। लेकिन मैं रोबोट नहीं हूं। मैं भी फील करता हूं। आपकी ह्यूमैनिटी उसे गिल्ट में डालेगी और
56:40
Speaker A
वह आपकी वैल्यू फिर से समझेगा। एक बार एक कॉलीग हर मीटिंग में स्पार्कमैन से नोट्स मांगता था। स्पार्कम हर बार देता रहा। फिर एक दिन उसने स्पार्कमैन के आइडियाज को खुद का बताकर प्रमोशन ले लिया। हडी ने कहा जब
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Speaker A
तुम खुद को बार-बार देना शुरू कर दो तो लोग तुम्हें क्रेडिट देना बंद कर देते हैं और तब जरूरत होती है बाउंड्रीज की। हडी कहता था किसी को बार-बार दूध दो तो वह गाय समझने लगता है। इंसान नहीं। यह चैप्टर
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Speaker A
हमें सिखाता है। मदद करो लेकिन उसे आदत मत बनने दो। फेवर का एहसास जरूरी है। नहीं तो लोग हक समझ बैठते हैं। लिमिट सेट करना बुरा नहीं। समझदारी है क्योंकि बिना लिमिट के लोग आपकी कीमत भूल जाते हैं। कभी-कभी
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Speaker A
आप किसी के लिए पूरी दुनिया बन जाते हैं और फिर वह आपको अपनी जेब में रखा सामान समझने लगता है। लोगों को देने में कोई बुराई नहीं। पर याद रखो खुद को खोकर किसी को जिताने से बेहतर है खुद को बचाकर थोड़ा
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Speaker A
कम देना। यही था द आर्ट ऑफ मैनिपुलेशन का आखिरी टैक्टिक। एक ऐसी कला जो इंसानों को समझने से शुरू होती है और खुद को संभालने पर खत्म होती है। दुनिया में जीत उसी की होती है जो दूसरों की नहीं। पहले अपनी सोच
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Speaker A
को समझता है और फिर लोगों के दिल दिमाग में चुपचाप उतरना सीख जाता है। अगर आप आज तक सिर्फ अच्छा बनने की कोशिश कर रहे थे तो अब वक्त है असली गेम समझने का क्योंकि यह जिंदगी किसी स्कूल की तरह नहीं चलती
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Speaker A
जहां ईमानदारी के नंबर मिलते हैं। यह जिंदगी एक मैदान है। जहां चालाकी, समझदारी और इंसान को पढ़ने की कला ही असली हथियार है। आपने इस पूरी ऑडियो बुक में सीखा कैसे लोगों को बिना बोले कंट्रोल किया जाए। कैसे किसी के दिमाग में अपनी बात बिठाई
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Speaker A
जाए। कैसे गलत लोगों से खुद को बचाया जाए और कैसे हर रिश्ता, हर डील और हर इंटरेक्शन को अपने फेवर में मोड़ा जाए। लेकिन सबसे जरूरी बात मैनिपुलेशन का मतलब धोखा नहीं होता बल्कि खुद को इतना समझदार बना लेना होता है कि कोई भी आपको धोखा ना
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Speaker A
दे पाए। अब आपकी बारी है। अगर आपको इस किताब ने इंस्पायर किया, कुछ नया सिखाया तो इस वीडियो को जरूर लाइक करें, शेयर करें और ऐसे ही दमदार ऑडियो बुक समरीज के लिए अभी सब्सक्राइब करें हमारे चैनल 7 PM
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Speaker A
ऑन DO बुक को जहां आपको मिलेंगी ऐसी किताबें जो आपकी सोच, आपकी स्ट्रेटजी और आपकी जिंदगी को लेवल अप कर देंगी। याद रखिए दूसरों को बदलना मुश्किल है। लेकिन अगर आप खुद की सोच बदल लें तो दुनिया अपने
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Speaker A
आप आपकी चाल पर चलने लगती है। धन्यवाद। आपका समय, आपका ध्यान और आपका विश्वास हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है। मिलते हैं अगली किताब में एक नई सीख, एक नई कहानी और एक नए नजरिया के साथ। तब तक के लिए सोचिए
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Speaker A
समझदारी से और जियो चालाकी से। दिस इज 7 पी.m. ऑडियो बुक। साइनिंग ऑफ। टेक केयर एंड कीप लिसनिंग। [संगीत]
Topics:मैनिपुलेशनआरबी स्पार्कमैनमनोरोग विज्ञानचालाकीधोखासंबंध प्रबंधनप्रभावी संवादऑडियोबुक सारांश7pm ऑडियोबुकहिंदी सारांश

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