Speaker A
दोस्तों, सोचिए अगर आपके पास वह कला हो जाए जिससे आप किसी भी इंसान से वही करवा सकें जो आप चाहते हैं। चाहे वह आपका बॉस हो, पार्टनर हो, ग्राहक हो या कोई अजनबी। यह कोई जादू नहीं है। यह है मन को समझने की चालाकी जिसे इस किताब में कहा गया है द आर्ट ऑफ मैनिपुलेशन। शुरुआत करते हैं एक कड़वी, लेकिन सच्ची बात से। दुनिया में 5% लोग ऐसे होते हैं जो 95% लोगों को अपने इशारों पर नचाते हैं। यह लोग खास नहीं होते। बस इन्हें पता होता है कि इंसानी दिमाग कैसे काम करता है और बाकी के 95% लोग वह बस हर दिन सोचते रहते हैं। मैं इतना अच्छा हूं। फिर भी मुझे वह कामयाबी क्यों नहीं मिलती? मैं सबके लिए अच्छा करता हूं। फिर भी मुझे धोखा क्यों मिलता है? यह किताब क्यों खास है? क्योंकि यह कोई मोटिवेशनल ज्ञान नहीं देती। यह उन लोगों की बातें बताती है जो सड़क की जिंदगी से, धोखेबाजी से, चालाकी से सीखे हैं कि लोगों को कैसे कंट्रोल किया जाता है। लेखक आरबी स्पार्कमैन खुद एक ऐसे दौर से गुजरे जब लोग उन्हें ठगते रहे, धोखा देते रहे। लेकिन फिर उन्होंने तय किया अब वह खुद सीखेंगे कि यह मैनपुलेटर्स करते क्या हैं। उन्होंने धोखेबाजों, शराबियों, चालाक सेल्समैन और शातिर लोगों के बीच रहकर उनकी असली चालों को नोट किया और वही सब इस किताब में लिखा गया है। कच्चा, कड़वा और 100% काम का सच। इस किताब में आपको क्या मिलेगा? हर चैप्टर में एक नई चाल, एक नया मनोवैज्ञानिक हथियार। कैसे लोगों को बिना जबरदस्ती अपनी बात मनवाई जाए? कैसे सामने वाले की कमजोरी पहचान कर उसे मोहरा बनाया जाए। कैसे किसी को हां बोलने के लिए तैयार किया जाए। बिना बोले मना मत करना। और कैसे बिना जालिम बने आप लोगों से वही करवाएं जो आप चाहते हैं। शायद आप भी किसी ऐसे इंसान से ठगे गए हो जिसने आपके दिल से खेला हो या फिर ऑफिस में किसी ने आपकी मेहनत का क्रेडिट ले लिया हो या प्यार में किसी ने आपको यूज किया हो। तो अब वक्त है खुद को समझने का, दूसरों की मंशा पकड़ने का और जिंदगी में हर रिश्ते, हर डील और हर इंटरेक्शन में स्मार्ट बनने का। यह ऑडियो बुक क्यों सुननी चाहिए? क्योंकि यह आपको सिखाएगी कैसे अपने वर्ड्स को हथियार बनाओ। कैसे चाम से कंट्रोल करो और कैसे बिना जोर लगाए आप अपनी पावर बढ़ाओ। मैनिपुलेशन एक कला है और इस कला में माहिर बनना आपकी जिंदगी बदल सकता है। चलिए शुरू करते हैं द आर्ट ऑफ मैनपुलेशन के उस पहले चैप्टर से जहां खुलती है एक कड़वी सच्चाई। सिर्फ 5% लोग ही दूसरों को चलाना जानते हैं और बाकी 95% बस चलते रहते हैं। इस ऑडियो बुक को शुरू करने से पहले अगर आपने अभी तक हमारे चैनल 7 PM पीm ऑडियो बुक को सब्सक्राइब नहीं किया है तो अभी कर लीजिए। आपका एक सब्सक्राइब हमें मोटिवेट करता है। अगली ऑडियो बुक के लिए। चैप्टर वन 5% ऑफ द पीपल मैनपुलेट दी अदर 95%। दुनिया दो तरह के लोगों से बनी है। वो जो लोगों को अपने हिसाब से घुमाते हैं और वो जो हर दिन किसी ना किसी के हिसाब से घूमते हैं। आप किस तरफ हैं? एक सवाल जो हमारे अंदर कहीं गूंजता है। यार, वो बंदा हर बार अपनी बात कैसे मनवा लेता है? वह डील भी उसी को मिलती है, तारीफ भी, पैसा भी और लोग भी उसी की सुनते हैं। क्या वह किस्मत वाला है? क्या वह अमीर घर में पैदा हुआ? क्या उसके पास कोई गुप्त शक्ति है? नहीं। उसके पास है एक कला। मैनपुलेशन की कला। 95% लोग क्यों हार जाते हैं? लेखक आरबी स्पार्कमैन कहते हैं, मैंने सालों तक देखा कि कुछ लोग बार-बार जीतते हैं और कुछ बार-बार हारते हैं। चाहे मेहनत एक जैसी ही क्यों ना हो। वह खुद भी हारते रहे। धोखे खाते रहे और फिर उन्होंने फैसला लिया कि अब वह खुद समझेंगे कि असली खिलाड़ी कौन है और कैसे खेलते हैं। लेखक किसी बिजनेस स्कूल के स्टूडेंट नहीं थे। उन्होंने कोई मोटिवेशनल सेमिनार नहीं किया था बल्कि वह सीधे पहुंचे शातिर, ठगों, चालाक, सेल्समैन और धोखेबाजों के बीच हस्टन की गलियों में जहां पैसा आता तो था लेकिन उसे पकड़ने वाले हाथ और भी तेज होते थे। वहां उनका मिलना हुआ एक ऐसे इंसान से जिसे वह अपना सबसे बड़ा टीचर मानते हैं। हडी एक शराबी लेकिन एक मास्टर मैनपुलेटर। हडी दिन में तीन बार नौकरी बदल सकता था लेकिन जब भी किसी को मनाना होता वो सामने वाले को अपने इशारों पर नचा देता। हडी की एक बात ने मेरी सोच बदल दी। हडी ने कहा दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक जो कहते हैं प्लीज मेरी बात मान लो और एक जो कहते हैं तुम्हारी मर्जी है लेकिन बिना मेरे तुम अधूरे हो। बस वहीं से खेल पलटता है। मैनपुलेटर्स क्या जानते हैं जो बाकी नहीं जानते। मैनिपुलेटर्स को पता है इंसान कब ना कहता है और कब हां, कब चुप रहना है और कब बोलना है, किसकी तारीफ करनी है और किसे इग्नोर और कैसे सामने वाले के दिमाग में खुद की जरूरत पैदा करनी है। मैनिपुलेटर्स किसी तिलिस्मी विद्या से नहीं आते। वह आप ही जैसे होते हैं। बस उन्हें इंसानी फितरत को समझने की कला आ जाती है। और 95% लोग वह लोग जो हर बार इमोशनली रिएक्ट करते हैं। हर बार सही बनने की कोशिश करते हैं। हर बार दूसरे क्या सोचेंगे? सोचते रहते हैं। और नतीजा हर बार कोई दूसरा बाजी मार ले जाता है। एक कड़वा सच। लोग अकल की बात नहीं मानते। लोग उसी की मानते हैं जो उन्हें उनकी जरूरत का एहसास दिला दे। चाहे वह दोस्ती हो, प्यार हो या बिजनेस। तुम्हें मेरी जरूरत है। अगर सामने वाले को लग जाए तो आप जीत गए। यह चैप्टर हमें सिखाता है। अगर आप किसी को जरूरत से ज्यादा जताते हो कि मैं तुम्हारे बिना अधूरा हूं। आप हार जाओगे। लेकिन अगर आप सर्टली यह दिखा दो कि तुम्हें मेरी जरूरत है। तो सामने वाला खुद झुकता है। क्या करें? अब लोगों को समझो। उनके वर्ड्स नहीं। उनके बिहेवियर पढ़ो। कभी डेस्पेरेट मत दिखो। चाहे आप अंदर से टूट रहे हो। अपनी वैल्यू बढ़ाओ और दूसरों को सबटली यह फील कराओ और सबसे जरूरी अपना रिएक्शन कंट्रोल करो क्योंकि असली मैनिपुलेटर वही होता है जो सामने वाले की चाल को पढ़ सके और अपनी चाल को छुपा सके। अब वक्त है सीखने का कि कैसे आप भी उन 5% लोगों में शामिल हो सकते हैं जो दुनिया चलाते हैं ना कि उन 50% में जो हर दिन चले जाते हैं। चैप्टर दो कैसे पहचाने कि सामने वाला आपको ठगने वाला है। कभी आपको किसी ने ऐसे धोखा दिया जिसके लिए आपने सब कुछ किया था या फिर कोई ऐसा इंसान जिसने पहले तो आपको भरोसे का लड्डू खिलाया और बाद में आपकी जेब से सब कुछ निकाल लिया। अगर हां तो अब वक्त है उन लोगों को पहचानने का जो चालाकी से आपको अपने जाल में फंसाते हैं। लेखक आरबी स्पार्कमैन का एक रूममेट था हडी शराबी। मगर इतना चालाक कि लोगों को अपनी बातों से फंसा ले और उन्हें पता तक ना चले। एक रात हडी जेल चला गया। नशे में पकड़ा गया था। जेल से उसने स्पार्कमैन को फोन किया। भाई तू ही मेरा असली दोस्त है। बस एक बार मुझे छुड़ा ले। तू कभी पछताएगा नहीं। मैं तुझे पूरा पैसा लौटा दूंगा। तू बहुत अच्छा इंसान है। लेखक पसीज गया। हड़ी को छुड़ा लिया और पैसा कभी वापस नहीं आया। पहली वार्निंग साइन जो जरूरत से ज्यादा भरोसा जताए वो भरोसे लायक नहीं होता। हड़ी बार-बार यही बोलता रहा। तू मेरा सच्चा दोस्त है। तुझसे अच्छा कोई नहीं। मैं हमेशा पैसा लौटाता हूं। लेकिन असली दुनिया में जो सच्चा होता है उसे बार-बार बोलने की जरूरत नहीं होती। मेथिंग्स थाऊ डोस्ट प्रोटेस्ट टू मच। यह शेक्सपियर की लाइन है। जब कोई बार-बार कहे कि वह ईमानदार है तब समझो कि कुछ गड़बड़ है। और यह सिर्फ पैसा नहीं रिश्तों में भी होता है। अगर कोई बार-बार कहता है मैं तुझसे बहुत प्यार करता हूं। तू मुझ पर भरोसा कर सकता है। मैं तुझे कभी धोखा नहीं दूंगा। तो ध्यान से देखो। क्या वह बोल रहा है या निभा रहा है? क्योंकि जो निभाता है उसे बोलने की जरूरत नहीं पड़ती। दूसरा रेड फ्लैग जो दूसरों से झूठ बोलता है वह आपसे भी बोलेगा। हडी ने लेखक से एक और सीख दी। अगर कोई किसी और से झूठ बोलता है तो कल आपसे भी बोलेगा। फर्क सिर्फ इतना है कि कब उसका फायदा होगा। कई लोग कहते हैं वो दूसरों को तो धोखा देता है लेकिन मेरे साथ कभी नहीं करेगा। भाई मतलब साफ है जो झूठ का आदि है वो देर सवेरे आपको भी उसी फंदे में लपेटेगा। तीसरा क्लू जो कहे मैं पहले बहुत अमीर था। फिर सब खो दिया। लेखक जिन पांच ठगों के साथ रहा उनमें से हर कोई कहता था मैं कभी करोड़पति था लेकिन आज हालत यह थी कि रेंट भरने के लिए भी पैसे नहीं थे। यह मैं पहले बहुत बड़ा आदमी था लाइन। असल में सिंपैथी और क्रेडिबिलिटी कमाने की चाल होती है। क्योंकि हम सोचने लगते हैं अगर वो पहले पैसे वाला था तो उसे पैसे कमाने आते होंगे। शायद यह डील भी सही हो। सच अगर किसी को पैसे संभालने नहीं आते तो उसका पिछला रिच स्टेटस भी बेकार है। एक ठग ने लेखक से बोला रिक मैं कभी दोस्त को धोखा नहीं देता। लेखक ने हंसते हुए जवाब दिया तू पहले ही दोस्ती खत्म कर चुका है। अब धोखा देना भी आसान होगा। और एक मास्टर ट्रिक हडी हमेशा एक बात करता था। जब भी कोई इंसान दो बार एक ही कहानी सुनाए तो उसके शब्दों का मिलान करो। अगर पहली और दूसरी बार में कहानी अलग लगे तो समझो आदमी झूठा है और तुम्हें भी कभी ना कभी बेवकूफ बनाएगा। इस चैप्टर हमें सिखाता है जो बार-बार ट्रस्ट मी बोले उस पर ट्रस्ट ना करो। जो दूसरों से झूठ बोले वो आपसे भी बोलेगा। मैं पहले अमीर था। कहने वाले अक्सर आज सबसे ज्यादा टूटे होते हैं। और जो छोटी-छोटी चीजों पर ओवर रिएक्ट करें जैसे कपड़ों पर, समय पर लेकिन बड़ी बातों को इग्नोर करें वह लीडर नहीं फेलियर होता है। हर बार धोखा खाकर सीखना समझदारी नहीं होती। कभी-कभी पहले से पहचानना ही सबसे बड़