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95 % OF Chronic Kidney Disease (CKD) are preventable | lecture no 539, part 1

क्रॉनिक किडनी डिजीज 95% तक रोकथाम योग्य है, कीटो डाइट और फास्टिंग से गुर्दे की बीमारी रिवर्स हो सकती है।

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Key Takeaways

  • क्रॉनिक किडनी डिजीज के शुरुआती स्टेज में रिवर्स संभव है।
  • कीटो डाइट और फास्टिंग से गुर्दे की बीमारी को नियंत्रित और सुधारना संभव है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई कार्ब डाइट मुख्य कारण हैं।
  • नेफ्रोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है, न कि सामान्य डॉक्टर या यूरोलॉजिस्ट।
  • माइक्रो एल्ब्यूमिन टेस्ट से बीमारी का जल्दी पता लगाया जा सकता है।

What the video covers

  • प्रोफेसर जसन फंग के अनुसार क्रॉनिक किडनी डिजीज के शुरुआती स्टेज 1 से 3 तक 100% रिवर्स हो सकती है।
  • कीटो डाइट, फास्टिंग और इंसुलिन नियंत्रण से गुर्दे की बीमारी को रोकना और सुधारना संभव है।
  • 95% क्रॉनिक किडनी डिजीज का मुख्य कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस है, जो हाई कार्बोहाइड्रेट डाइट से बढ़ता है।
  • ग्लोमेरुलोपैथीस, नफोटिक सिंड्रोम, और पॉलिस्टिक किडनी डिजीज जैसी कुछ बीमारियां जेनेटिक होती हैं, जिनमें रिवर्स की संभावना कम है।
  • डॉक्टरों में यह गलतफहमी है कि गुर्दे की बीमारी केवल लक्षणों का इलाज होती है, जबकि यह पूरी तरह रिवर्स हो सकती है।
  • गुर्दे के कार्यों में ब्लड फिल्ट्रेशन, पानी और टॉक्सिन्स निकालना, विटामिन डी कन्वर्जन और पीएच नियंत्रण शामिल हैं।
  • माइक्रो एल्ब्यूमिन यूरिन टेस्ट से शुरुआती किडनी डिजीज का पता लगाया जा सकता है।
  • डायलिसिस और ट्रांसप्लांट अंतिम उपचार विकल्प हैं, लेकिन सही डाइट और जीवनशैली से इनसे बचा जा सकता है।
  • कीटो डाइट से ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों नियंत्रित होते हैं, जिससे गुर्दे की बीमारी रुकती है।
  • गुर्दे की बीमारी के लिए नेफ्रोलॉजिस्ट से संपर्क करना जरूरी है, यूरोलॉजिस्ट नहीं।

Answers

Questions about this video

क्रॉनिक किडनी डिजीज को कैसे रोका जा सकता है?

कीटो डाइट, फास्टिंग और इंसुलिन नियंत्रण के माध्यम से 95% क्रॉनिक किडनी डिजीज को रोका और रिवर्स किया जा सकता है।

गुर्दे की बीमारी के शुरुआती लक्षण कैसे पहचाने?

माइक्रो एल्ब्यूमिन यूरिन टेस्ट से पेशाब में प्रोटीन की उपस्थिति के माध्यम से शुरुआती किडनी डिजीज का पता लगाया जा सकता है।

किस डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए जब गुर्दे की बीमारी हो?

गुर्दे की बीमारी के लिए नेफ्रोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए क्योंकि वे गुर्दे के विशेषज्ञ होते हैं, न कि यूरोलॉजिस्ट या जनरल फिजिशियन।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
बिस्मिल्लाह रहमान्रहीम। अस्सलाम वालेकुम। आज मैं गुर्दों की बीमारी क्रॉनिक डिजीज के बारे में लेटेस्ट अपडेट दूंगा आपको। इसमें सबसे ज्यादा जिस बंदे ने काम किया है, प्रोफेसर जसन फंग। यह नेफ्रोजिस्ट हैं टोरंटो यूनिवर्सिटी में, कनाडा में, और इन्होंने सबसे पहले यह बताया था कि अगर आप
00:22
Speaker A
यह डाइट करें, परहेज करें, फास्टिंग करें तो गुर्दे की बीमारियां वापस हो सकती हैं, रुक सकती हैं और आप डायलिसिस से बच सकते हैं। ये इतनी बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ थी कि किसी ने माना नहीं। ये इनकी किताबें थीं
00:33
Speaker A
सारी। अभी आज जो है, 15% टोटल पापुलेशन पूरी दुनिया की, जो तकरीबन एक अरब बनती है, वो क्रोनिक किडनी डिजीज में मुब्तला है। प्रोफेसर जसन फंग, जो के नेफ्रोलॉजिस्ट हैं, वो कहते हैं कि अर्ली स्टेज एक से तीन तक
00:50
Speaker A
100% ये रिवर्स हो सकती है। रुक सकती हैं। आप डायलिसिस से बच सकते हैं। उसके लिए कोई डाइट प्लान है, चीजें वो बताएंगे। डाइट प्लान में अगले लेक्चर में बताऊंगा। आज मैं बेसिक उनका बताता हूं कि वो क्या वो
01:02
Speaker A
यही कहते हैं कि अपने गुर्दों को बचा लो। यही उनके लेक्चर हैं सारे। आप डिटेल में सुनना चाहे तो सुन सकते हैं। वो कहते हैं तीन बीमारियां जो कि पैदाइशी होती हैं, जैसे ग्लोमेरुलोपैथीस होती है, आती है नफोटिक सिंड्रोम
01:15
Speaker A
है, आईजीपैथी है, काफी है। वो पॉलिस्टिक किडनी डिजीज है जो जेनेटिक है और ऑटोइम्यून डिजीज है, इनमें रोल कम है, अभी काम हो रहा है। लेकिन ये तीन ऐसी बीमारियां हैं जिनमें के वापसी या रिवर्स का चांस बहुत ज्यादा
01:29
Speaker A
है। पॉलिस्टिक डिजीज में अभी रुक गई है जो लेटेस्ट रिसर्च है, वो भी मैं आपको बताऊंगा। तो जो ग्लोमेरुलोपैथीस है, उसमें ब्लड आता है, खून आता है। पैथीस है, ऑटोइम्यून डिजीज है, ये बहुत डैमेजिंग है ये, लेकिन ये डैमेज करती है 25
01:41
Speaker A
20 साल में, फौरन नहीं करती। तो एहतियात कर ले। तो ये है कि पांच-10 साल और मिल जाएंगे, रिवर्स नहीं होंगी। ये इनकी स्टेजेस हैं। सो ये पॉलीसिस्टिक है, जेनेटिक पॉलिस्टिक होती है। ये जो होती है, ये एक्वायर्ड है। ये
01:52
Speaker A
एक गुर्दा नॉर्मल होता है। ये वो जेनेटिक नहीं है, ये जिसमें गुर्दा सिस्टो की वजह से या डायलिसिस करने से या कोई और वजह से भी एक-दो-चार सिस्ट बन जाती है, ये नहीं है। ये ये वो चीज नहीं है। तो इसमें सबसे
02:04
Speaker A
ज्यादा जो प्रॉब्लम आ रहा है, वो यही है कि जो हमारे नेफ्रोजिस्ट हैं, जो हमारे डॉक्टर हैं, वो चीज पे ईमान ही नहीं रखते कि हीलिंग या रिवर्स होती है। वो सिर्फ अलामत को कंट्रोल करते हैं। जो सिम्टम आ
02:16
Speaker A
रहे हैं, उसकी दवाई दे देते हैं। बीमारी रिवर्स हो सकती है। इसको मानते नहीं हैं, ना ब्लड प्रेशर, ना शुगर के बारे में। इसलिए बड़ा मसला ये आ रहा है। लेकिन इन्होने क्योंकि नेफ्रोजिस्ट हैं। इनकी स्टडीज हैं बेताशा और भी डॉक्टर आ गए हैं। अभी उनको
02:28
Speaker A
भी मैं बताऊंगा आपको। तो सबसे बेहतर ये है कि आप नेफ्रोलॉजिस्ट से राब्ता करें। जनरल फिजिशियन या आम डॉक्टर के पास ना जाएं। खासकर स्टेज थ्री बी के बाद आपको हर हाल में राब्ता करना चाहिए। पहले आप ट्राई कर
02:40
Speaker A
ले। अगर डाइट से हो जाए, परहेज से ठीक है। नहीं तो फिर भी कोई मसला हो तो आपको नेफ्रोजिस्ट से राब्ता करना चाहिए। यूरोलॉजिस्ट नहीं, नेफ्रोजिस्ट गुर्दे का फिजिशियन होता है। ये वो ट्रीट करता है बेसिकली। उसके बाद डॉक्टर थॉमस पे मैंने
02:51
Speaker A
एक लेक्चर भी बनाया था। इन्हीं यही कहते हैं कि 20 साल का तजुर्बा के बाद क्रोनिक सिस्टिक डिजीज जो है, क्रोनिक किडनी डिजीज जो है, वो कहते हैं रिवर्स हो सकती है। उन्होंने भी कीटो डाइट, न्यूट्रिशन, कीटोसिस को बेहतरीन इलाज करार दिया है। जो सीके है
03:07
Speaker A
बढ़ना रुक गई थी, रुक गई थी। रिवर्स हो गई थी। उसमें क्या चीज थी? बीटा हाइड्रोक्सी बीटा कीटोन होते हैं। ये सबसे ज्यादा हार्मोन की तरह इफेक्ट करते हैं। डिटेल है इनके, मैं अगले लेक्चर में बना दूंगा। तो
03:17
Speaker A
ये ये कहते हैं कि वो अलमिया यही है कि वो सिम्टम ट्रीट करते हैं। रिवर्स पे नहीं रखते। इनके 20 साल का तहकीक है कि रिवर्स हो सकती है। ये डिटेल में लेक्चर है। इनका इंटरव्यू है। पेपर बाद में आएगा, मैं बता
03:28
Speaker A
दूंगा। वो भी यही कहते हैं कि नंबर वन कॉज जो है, वो हाई प्रोटीन डाइट नहीं है। ये फिर सुन लें। हाई कार्बो डाइट है। उसकी वजह से डैमेज होते हैं गुर्दे ज्यादा। तो इसलिए इसका ट्रीटमेंट आसान है कि आप ये डाइट
03:42
Speaker A
छोड़ दें। तो कीटो डाइट करें। फास्टिंग और ये इससे बेहतरीन रिजल्ट आएंगे। हमारे जिला अस्पताल के प्रोफेसर चीमा साहब हैं। ये भी अभी इन्होंने पिछले हफ्ते ही वीडियो बनाई है। ये भी यही कह रहे हैं। शुक्र है कि आप
03:55
Speaker A
ये, इनसे नेफ्रोजिस्ट हैं। ये इस चीज को बिलीव करते हैं कि डाइट, कीटोनो, पेट्रोन वगैरह की कमी नहीं करनी चाहिए डाइट में, थोड़ा लेटेस्ट क्योंकि अमेरिकन बोर्ड है। तो ये इस चीज को रियलाइज कर रहे हैं। तो सबसे बड़ी वजह 95% क्रॉनिक किडनी डिजीज की
04:08
Speaker A
जो है, वो है इंसुलिन रेजिस्टेंस। यही सबसे बड़ा टॉपिक है। यही चलता रहे क्योंकि टाइप टू डायबिटीज 40 से 45% मरीज जो डायलिसिस पे हैं, जिनके गुर्दे फेल होते हैं, वो शुगर के होते हैं और 30 से 35% ब्लड प्रेशर के
04:22
Speaker A
ये दोनों बीमारियां 100% डाइट से, एक्सरसाइज और फास्टिंग से रिवर्स हो सकती हैं। तो ये आप हिसाब कर लें कि 75-80% तो यही ठीक हो जाएंगे अगर आप कर लेंगे कीटो डाइट। क्या करना है इसमें? सबसे बड़ी चीज
04:35
Speaker A
है कि इंसुलिन कम करनी है आपने। और कैसे कम होगी? आप कार्बोहाइड्रेट डाइट छोड़ देंगे। तमाम अनाज छोड़ देंगे, चीनी छोड़ देंगे, फास्ट फूड छोड़ देंगे। तो ये सारी बीमारियों से भी बच जाएंगे और ये दो से तो
04:46
Speaker A
आप बचेंगे, बचेंगे। ये कार्बोहाइड्रेट जिस शक्ल में आ रहे हैं, इनसे आपको छोड़ना पड़ेगा। जान, रोटी वगैरह सब से जान चढ़ानी पड़ेगी। तीसरा जो है मेडिकेशन है, दर्द की दवाइयां, ये मेदे के असर की दवाइयां, प्रोटोन पंप इनबिटर, ये जितनी काम कर रहे, हर
05:00
Speaker A
दवाई करती है, लेकिन ये दवाइयां ज्यादा करती हैं। तो ये सबसे ज्यादा जो केमिकल पोजिंग आजकल आ रहा है, प्रोसेस फूड आ रहे हैं, इनमें केमिकल डाल रहे हैं। पोल्यूशन बहुत ज्यादा हो चुकी है, फिर इंफेक्शन होते रहते
05:11
Speaker A
हैं, यूनिट इंफेक्शन है, किडनी स्टोन है, ये सारे कैंसर वगैरह ये मिलके 10 से 15% बनते हैं। केमिकल पॉइजनिंग तीन से पांच % है और मेडिकेशन पांच से सात परसेंट है। ये टोटल मिलके 100% गुर्दे फेल तो बड़े 70-80% वो
05:25
Speaker A
दो बीमारियां ही हैं। तो ये डिटेल है उसकी। तो ये डाइट है, कीटो डाइट है। सब कुछ आप कर लेंगे तो बेहतर रहेंगे। दो बीमारियां कंट्रोल कर लेंगे। दोनों हो जाएंगे। आप जो इंसुलिन लो करेंगे, कीटो डाइट पे आएंगे।
05:35
Speaker A
ब्लड प्रेशर भी कम हो जाएगा। शुगर भी कंट्रोल हो जाएगी। तो 70-80% आप जो है, इनसे बच जाएंगे। रुक जाएगी बीमारी। क्या करना है? फास्टिंग, इंसुलिन और फास्टिंग शुगर करानी। होमा यार लेक्चर नंबर चार आप सुन लेना। ये विल भी पढ़ ले। ये भी यही कहती
05:48
Speaker A
है कि सबसे बड़ी वजह ये गेंहू है, अनाज है। तो सबसे पहले गुर्दे के फंक्शन देखें। गुर्दा एक दिन में 200 लीटर ब्लड फिल्टर करता है। पानी, ब्लड फिल्टर करता है, पानी और यह सेंसर का काम करता है। ऑक्सीजन कम
06:02
Speaker A
हो जाए, डिहाइड्रेशन हो जाए। फौरन इसको पता लगता है, ये पेशाब रोक लेगा। करेगा, बनाता है। दो हार्मोन, विटामिन डी को कन्वर्ट करता है। इसके फंक्शन पीएच, पेशाब की पेजाबियत को कम करता है। क्योंकि पीएच जून फाइव होगा तो यूरिक एसिड क्रिस्टल
06:16
Speaker A
बनने शुरू हो जाएंगे। स्टोन बन जाते हैं। आठ से ऊपर जाएगा तो इंफेक्शन, स्टोन बनने शुरू हो जाते हैं। तो ये पीएच छ सात के दरमियान रखता है। दूसरा, 99% जो ये 200 हो रहा है फिल्टर, ये दोबारा रिअसॉर्ब करता
06:28
Speaker A
है। प्रोटीन वगैरह, शुगर, हर चीज को दोबारा जजब करता है। सिर्फ क्रिटिन वगैरह और पानी छोड़ देता है। डीटा यूरिया वगैरह को निकाल देता है। इसी तरह जो पॉइजन होंगे, टैक्सिन, ड्रग होंगी, वो भी ये गुर्दा निकाल देता है
06:39
Speaker A
जिस्म से। इसीलिए ये ज्यादा ड्रग से डैमेज भी गुर्दा होता है और लीवर होता है। तो ये बड़े-बड़े फंक्शन हैं। देख लें आप, क्रिटिनिन जो है, वो जीरो अब्सॉर्ब करेगा। 100% निकाल देगा वो। बाकी पोटैश वगैरह चीजें सारे
06:49
Speaker A
रिअसॉर्ब कर लेता है। जो इंपॉर्टेंट मिनरल है, प्रोटीन है, सब। तो ये गुर्दे का सबसे इंपॉर्टेंट फंक्शन है। येस है। इसी से फिल्ट्रेशन से जीएफआर ये सबसे डैमेज होती है आर्टरी। तो टेस्ट के लिए सबसे आसान पे और बहुत है। वो बाद में नेफ्राजिस
07:02
Speaker A
करवाता रहेगा। आपने पेशाब का सिंपल टेस्ट फॉर माइक्रो एल्ब्यूमिन। असूलन तो ये 24 घंटे का पेशाब जमा करके दिया जाता था। उसमें वो टेस्ट करते हैं। अगर 30 मिलीग्राम पर लीटर तो ये नॉर्मल है। इससे कम है। अगर 31 से 300 तक है तो इसको
07:18
Speaker A
अर्ली किडनी डिजीज के, उसमें पेशाब में प्रोटीन आ रही है। तो करा दूसरा, आजकल आ गया एल्ब्यूमिन के टिंट, ये एनी टाइम दे सकते हैं। उसके लिए आपको सारा रात 12 घंटे, कम से कम 24 घंटे का यूरिन देना पड़ता है। ये
07:32
Speaker A
आप किसी टाइम भी दे सकते हैं। एक-दो घंटे बाद पेशाब, पानी पीने के तो ये एनी टाइम भी दे सकते हैं। तो इसमें भी 30 मिलीग्राम पर ग्राम नॉर्मल है। 31 से 300 मिलीग्राम पर ग्राम अर्ली किडनी डिजीज है। तो यह आसान
07:44
Speaker A
टेस्ट है। यह आप हर लाइब्रेरी हो सकता है। किसी से भी करा सकते हैं। पता लग जाएगा। दूसरा रूटीन एग्जामिनेशन में जब आप कराएंगे तो माइक्रो एल्ब्यूमिन आएगा। अर्ली मॉर्निंग यूरिन सबसे इंपॉर्टेंट है। तो उसमें एल्बी ज्यादा हो गई है। तो जैसे टू प्लस, थ्री
07:57
Speaker A
प्लस आ रहा होता है। इसको हम मैक कहते हैं कि आंखों से नजर आनी शुरू हो गई है। तो ये 300 मिलीग्राम पर लीटर जब ज्यादा हो तो इसको मैक एल्ब्यूमिनरिया या प्लस यूरिन कहते या एसीआर जो है, एल्ब्यूमिन क्रिएटिन रेशो, वो भी
08:10
Speaker A
30 मिलीग्राम पर ग्राम से कम हो और यूरिन रूटीन में टू प्लस प्रोटीन आ जाएगी। तो ये आसान से टेस्ट है।
08:20
Speaker A
झाग बनती है सेहतमंद पेशाब में वो खत्म हो जाती है एक आध मिनट के बाद ये झाग दो से तीन मिनट तक रहती है तो ये इसकी पहचान है दूसरा सीरम क्रिटनिन विद जीएफआर ये सबसे बेहतरीन टेस्ट है इसमें मतलब नॉर्मल 90 से
08:33
Speaker A
120 के दरमियान होना चाहिए और उसके बाद एक अल्ट्रासाउंड करवा किडनी का पता लग गया स्टोन है पथरिया है कैंसर है सोली है सिस्ट है तो ये तीन टेस्ट है यूरिन माइक्रो एल्ब्यूमन सिरम किडनी अल्ट्रासाउंड ये बेसिक टेस्ट है ये आपने
08:45
Speaker A
जरूर करवाने एक दफा ये स्टेजेस है डिफरेंट लोगों ने बनाई है इसको ये चलती रहती है स्टेज वन टू थ्री को ए बी में कर दिया स्टेज फोर स्टेज फाइव ये रेस्टिकेशन की गई है डिफरेंट अच्छा ये स्टेज में आसानी के
08:57
Speaker A
लिए देखें स्टेज वन जीएफआर 90 से ज्यादा होगा और पेशाब में प्रोटीन आएगी ये इसकी पहचान है स्टेज टू में जीएफआर 60 से 89 तक आ जाएगा प्रोटीन आ रही होगी या सिस्ट कोई भी होगा स्टेज थ्री दो में स्ट्री ए में
09:11
Speaker A
45 से 59 होगा स्टेज बी में 30 से 45 5 ml जीएफआर हो जाएगा। स्टेज फोर में 15 से 29 पे आ जाएगा। यह स्टेज है जिसमें कि डाइट असर निकल। स्टेज थ्री तक डाइट सारा प्लानिंग चल रही है। स्टेज फोर फाइव में
09:26
Speaker A
आप नेफ्रोलॉजिस्ट से जरूर राबते में रहें। फिल बनाएं तैयारी करें डायलिसिस की या ट्रांसप्लांट। तो स्टेज फाइव में 15 एमएस नीचे आ जाएगा। तो ये एंड स्टेज भी कहते हैं और इसमें आपको डायलिसिस और ट्रांसप्लांट दो ही इलाज है। तो मैं सारा
09:38
Speaker A
जो बताऊंगा स्टेज थ्री तक बताऊंगा। इसमें फायदेमंद है। तो सबसे पहले जो अलामात है वो पेशाब में आती है। अर्ली साइन में बार-बार आना पड़ेगा या कम हो जाएगा पेशाब उसका कलर बढ़ जाएगा। स्मेल आनी शुरू हो जाएगी। जैसे फॉर्म बनना शुरू हो जाएगा।
09:51
Speaker A
झाग बनेगी। ये मोटी मोटी अलामात है। उसके बाद उसमें आपको प्रोटीन नजर आ जाएगी। ब्लड नजर आ जाएगा। आरबीसी आ जाएगा। टेस्ट कराएंगे तो उसमें सब कुछ पता लग जाएगा आपको। तो उसमें ब्लड इनफेक्शन रूल कर इनफेक्शन नहीं होना चाहिए। बैक्टीरिया अगर
10:04
Speaker A
आएंगे तब इनफेक्शन है। डब्ल्यूबीसी से इनफेक्शन नहीं होगा। पांच तक नॉर्मल होते हैं। आरबीसी भी तीन से पांच तक नॉर्मल लेते हैं। प्रोटीन नहीं होनी चाहिए। ग्लूकोज नहीं होना चाहिए। तो ये टेस्ट हो जाएगा। माइक्रो एल्ब्यूमिन जो है वो आपने
10:16
Speaker A
देखा है वो ऐसा मैन जब 300 मिलीग्राम से ज्यादा आ जाएगा तो मैक हो जाएगी। वन प्लस आना शुरू हो जाएगा। दूसरे नंबर पे जो है जीएफआर है। ये नॉर्मल 90 से 120 तक होता है। स्टेज वन और टू में ये बहुत कम होता
10:28
Speaker A
है। 60 तक नॉर्मल लेते हैं हम। ये ज्यादा परेशानी की बात नहीं है। वन प्लस टू प्लस आ रहा है। इसमें डाइट और इससे 99% रिकवरी हो जाती है। स्टेज थ्री ये है कि अलामा तीस का ब्लड प्रेशर हो जाता है आपका।
10:40
Speaker A
ज्यादातर ये टैप टू डायबिटीज होता है। ब्लड प्रेशर इक्ठी होती है। दोनों इंसुलिन स्ट्रेंथ की वजह से होती है। क्योंकि जब इंसुलिन हाई होती है तो सोडियम और पानी को रिटेन करेगी। रिटेन करेगी तो रिनल एंजोटेंसिन एल्डोस्टन सिस्टम एक्टिवेट हो
10:52
Speaker A
जाएगा। इससे बीपी बढ़ना शुरू हो जाएगा। फिर इंसुलिन सोश भी कॉज करती है। इनफ्लेमेशन बढ़ेगी। तो रे डाइटेशन नहीं होगी तो बीपी नीचे नहीं आएगा। इसीलिए ब्लड किडनी को कम जाएगा और वो डैमेज स्टार्ट हो जाएगी। ये इसका प्रोसेस है सारा इंसुलिन।
11:07
Speaker A
दूसरा थकावट ये स्टेज थ्री बी या फोर फाइव में होती है। क्योंकि अर्थोपाइट जैसे बताया था कि इससे आरबीसी बनते है। ये खून बनाता है। ये हार्मोन गुर्दे बनता है। जब गुर्दा थ्री फोर स्टेज में आ जाए तो फिर
11:17
Speaker A
ये अर्थ नहीं बनता। दूसरा ये विटामिन जैसे बताया था कि विटामिन डी थ्री भी कन्वर्ट करता है। तो आरबीसी नहीं बनेंगे। आरबीसी नहीं बनेंगे तो खून की कमी हो जाएगी। हिमोग्लोबिन कम हो जाएगी और जो टॉक्सिन है वो ब्लड में बढ़ना शुरू हो जाएंगे स्क्रीट
11:30
Speaker A
नहीं होंगे तो ये सारे मिल मिला के थकावट और ये बोरियत से पैदा हो जाती है दूसरा पांव वगैरह में सोच पड़ जाएगी ये भी लेट स्टेज में होता है वन टू में नहीं होता प्रोटीन को ज्यादा लॉस हो रही होती है
11:40
Speaker A
उसमें इस वजह से यूरिन में निकल जाता है डीमा हो जाता है तो ज्यादा ज्यादा नींद का मसला भी आ जाएगा आप हाथ दबाएंगे तो खड्डा पड़ जाएगा वो रहेगा जैसे ये है तो ये एक पाव में भी हो सकता है दोनों में भी हो
11:50
Speaker A
सकता है बहुत बड़ा पड़ जाएगा तो फिर सांस का मसल भी शुरू हो जाता है मसल में दर्द शुरू हो जाएगा इलेक्ट्रोलाइट की वजह से सोडियम टाइफस्टिंग की वजह से एनीमिया खून हीमोग्लोबिन कम हो जाती है। आप खा नहीं
12:00
Speaker A
सकते। मैदा अब्सॉर्ब नहीं कर सकता आपको। लोग प्रोटीन कम कर देते हैं। कैल्शियम कम हो जाता है। बोन डिजीज शुरू हो जाती है। उससे फिर बोन में पेन शुरू हो जाती है। तो ये सारी रेयर स्टेज फोर फाइव में होती है।
12:10
Speaker A
दूसरा टेस्ट आपके ऐसे लगेगा। किसी चीज खाने पे दिल नहीं करेगा। बिल्कुल जायका बदल जाएगा। ये एक तो टॉक्सिन बढ़ जाते हैं। यूरिया बढ़ जाता है। वो टेस्ट सेप्टर को खराब करता है। तो आपको मिट्टी की तरह सारा कोई चीज खाने पे दिल नहीं करता।
12:23
Speaker A
दूसरा मेंटल शार्पनेस खत्म हो जाएगी। सोचने की स्टाइल खत्म हो जाती है। कोई फैसले नहीं कर सकते। कंफ्यूज रहते हैं आप। तो टॉक्सिक प्रोडक्ट है। फोकस कम हो जाता है। कंसंट्रेशन ये सारे मसले स्टेज फोर फाइव में आते हैं। दूसरा अमोनिया जैसे
12:35
Speaker A
फ्रूट खराब हुआ तो उसकी स्मेल आती है। उस तरह की स्मेल मुंह से आती है। ये कीटोन होते हैं। अमोनिया होता है। बेसिकली यूरिया जब नहीं होता तो कन्वर्ट होता है। अमोनिया में स्मेल आती है। यूरिन में निकल
12:45
Speaker A
नहीं सकता। वो फिर सांस के लिए निकलता है। जैसे अल्कोहल आप पीते हैं वो भी सांस के लिए निकलती है। तो फेफड़ों में स्ट्रीट होती है अमोनिया स्मेल आती है। दूसरा जो है सांस चढ़ जाना है। जब फेफड़ों में पानी
12:53
Speaker A
भर जाएगा वाटर टेस्टिंग की वजह से हीमोग्लोबिन लो हो जाती है। एल्ब्यूुमिन लो हो जाती है तो फिर अडीमा बढ़ना शुरू हो जाता है। फेफड़ों में आ जाता है। ये वजह मेटाबॉलिक एस्ट्रोसिस हो जाता है। कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ जाती है। ये सारे प्रॉब्लम
13:05
Speaker A
स्टेज फोर फाइव में शुरू हो जाते हैं। बड़े-बड़े तो सबसे बेहतर ये है अगर इस स्टेज पे शुगर प्रेशर कंट्रोल ना आ रहा हो तो डॉक्टर जसन फंग कहते हैं कि दो दवाइयां सेफ है। एसीएस इनबिटर और एस एस जी एलटी टू
13:17
Speaker A
इनबिटर ये दो दवाइयां अपने नेफ्रोजिस आपको दे देगा। ये सेफ है। बाकी दवाइयां वो कहते हैं ना ले उसके नुकसान ज्यादा है। ये सारे रेफरेंस है। सुन लें। इंशा्लाह मैं अगले लेक्चर में आपको ट्रीटमेंट बताऊंगा। डाइट प्लान बताऊंगा कि इसमें कैसे डाइट प्लान
13:31
Speaker A
करें। इससे पहले मैंने लेक्चर नंबर 212, 214, 215, 216 भी बनाए थे। वो भी सुन ले। उनमें कोई एक आ चीज नहीं आई है तो वो आई है। बाकी वो भी ठीक है। सब कुछ डाइट के बारे में। ये सारे लेक्चर है। आप स्टडी
13:43
Speaker A
सुन लें। ये रेफरेंस हैं सारे अच्छा जी अल्लाह हाफिज।
Topics:क्रॉनिक किडनी डिजीजगुर्दे की बीमारीकीटो डाइटफास्टिंगइंसुलिन रेजिस्टेंसनेफ्रोलॉजिस्टमाइक्रो एल्ब्यूमिन टेस्टडायलिसिसब्लड प्रेशरशुगर कंट्रोल

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