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अवचेतन मन को कैसे प्रोग्राम करें | इच्छाओं की पूर्ति का रहस्य | Dr. Sweta Adatia

डॉ. श्वेता आतिया अवचेतन मन की शक्ति और माइंड पावर से जीवन में बदलाव लाने के रहस्य साझा करती हैं।

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Key Takeaways

  • अवचेतन मन (सबकॉन्शियस माइंड) में हमारी मानसिक शक्ति का 90% होता है।
  • माइंड पावर का सही उपयोग जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।
  • मन को हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर के रूप में समझना जरूरी है।
  • सही ज्ञान और प्रशिक्षण से संघर्ष खत्म किया जा सकता है।
  • माइंड पावर की शिक्षा सभी के लिए आवश्यक और लाभकारी है।

What the video covers

  • डॉ. श्वेता आतिया ने माइंड पावर में रुचि कैसे ली और जोसेफ मर्फी की किताब से प्रेरणा मिली।
  • अलादीन की कहानी के माध्यम से कॉन्शियस और सबकॉन्शियस माइंड की व्याख्या।
  • डॉ. जितेंद्र अडिया के मन के प्रशिक्षण कार्यक्रम और उनकी उपलब्धियां।
  • माइंड को हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर के रूप में समझना: दिमाग हार्डवेयर और मन सॉफ्टवेयर है।
  • कॉन्शियस और सबकॉन्शियस माइंड की भूमिका और 90% शक्ति सबकॉन्शियस माइंड में होती है।
  • माइंड पावर के उपयोग से जीवन में सकारात्मक बदलाव और सफलता के उदाहरण।
  • डॉ. श्वेता का उद्देश्य करोड़ों लोगों तक माइंड पावर की शिक्षा पहुंचाना।
  • मन की ऊर्जा को समझना और उसका सही उपयोग जीवन को बदल सकता है।
  • माइंड पावर से जुड़े विभिन्न तकनीकें जैसे सिल्वा माइंड कंट्रोल मेथड।
  • मन की शक्तियों का सही उपयोग कर जीवन में संघर्ष कम करना और सफलता प्राप्त करना।

Answers

Questions about this video

अवचेतन मन क्या है और यह कैसे काम करता है?

अवचेतन मन वह मानसिक शक्ति है जो हमारी सोच और व्यवहार के 90% हिस्से को नियंत्रित करता है। यह हमारी गहरी इच्छाओं, विश्वासों और यादों को संग्रहित करता है और हमारे जीवन में बड़े बदलाव लाने में सक्षम होता है।

माइंड पावर का उपयोग करके जीवन में कैसे बदलाव लाया जा सकता है?

माइंड पावर का सही उपयोग करने से हम अपने अवचेतन मन को प्रोग्राम कर सकते हैं, जिससे नकारात्मक विश्वास हटते हैं और सकारात्मक सोच विकसित होती है। इससे जीवन में सफलता, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।

डॉ. श्वेता आतिया ने माइंड पावर में रुचि कैसे ली?

डॉ. श्वेता आतिया को माइंड पावर में रुचि तब हुई जब उन्होंने जोसेफ मर्फी की 'पावर ऑफ सबकॉन्शियस माइंड' पढ़ी। इस किताब ने उनके सोचने का तरीका बदल दिया और उन्होंने माइंड पावर का अभ्यास शुरू किया।

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00:00
Speaker A
आपको माइंड पावर में इंटरेस्ट कैसे आया? मुझे पढ़ने का शौक था। और एक किताब मेरे हाथ में आई, पावर ऑफ सबकॉन्शियस माइंड बाय जोसेफ मर्फी। आज से 40 साल पहले, वो किताब पढ़ के मेरा दिमाग हिल गया। वाओ।
00:12
Speaker A
उसके बाद मैंने सिलवा माइंड कंट्रोल मेथड वाली किताब पढ़ी। उसके बाद मैंने उसके प्रोग्राम अटेंड किया। मेरे खुद के ऊपर मैंने माइंड पावर का इस्तेमाल किया। मेरा जीवन में बदलाव आया। सिंपल मेटाफोर शख है। तो अलादीन के जादुई चिराग की कहानी सबने
00:25
Speaker A
सुनी। अलादीन नाम का एक आदमी था। उसके पास एक चिराग था। घिसने से जीनी प्रकट होता था और जीनी बाहर निकल के क्या कहता था? हुक्म में रहकर। एक्चुअली लोगों को पता नहीं कि वह हमारे मन की कहानी है। उसमें जो चिराग
00:37
Speaker A
है वो हमारा दिमाग है, ब्रेन है और अलादीन है वो कॉन्शियस माइंड है और जीनी है वो सबकॉन्शियस माइंड है। संघर्ष जीवन में है ही नहीं। हमें संघर्ष क्रिएट किए अज्ञानता की वजह से। एक बार राइट ज्ञान मिल गया,
00:49
Speaker A
नॉलेज मिल गया तो फिर संघर्ष है ही नहीं। नमस्कार, मैं हूं डॉ. श्वेता आत्या लिमिटलेस ब्रेन लैब से। आज का जो एपिसोड है वह आपकी जिंदगी 100% मैं कभी भी 100% गारंटी से किसी भी एपिसोड में नहीं बात
01:04
Speaker A
करती हूं लेकिन आज का यह एपिसोड आपकी जिंदगी बदल देगा। अगर आप कोई भी चीज का ड्रीम कर रहे हो। आपकी ड्रीम जॉब, आपकी ड्रीम कार, आपका कोई भी ऐसा मैनिफेस्टेशन का जो पूरा नहीं हुआ है। ऐसा सपना, ऐसा
01:19
Speaker A
ड्रीम। क्योंकि आज हम बात करने वाले हैं अवचेतन मन के जादूगर से। द सबकॉन्शियस माइंड्स मैजिशियन, अ फेलो डॉक्टर एन अमेजिंग जेंटलमैन जो मैंने जिसका सेमिनार अटेंड किया था कई साल पहले। मैं नाइंथ ग्रेड में थी जब मैंने यह सेमिनार अटेंड
01:36
Speaker A
किया। आज भी ऐसे के ऐसे चित्रवत वो सारी मेमोरीज मुझे अभी भी आई। कैन जस्ट रिप्रोड्यूस दैट। और वो इसलिए क्योंकि वो जब सबकॉन्शियस माइंड के बारे में बात कर रहे थे कई सालों पहले जामनगर में हाउसफुल था। वहां पे मैं एक नाइंथ ग्रेड की छोटी सी
01:52
Speaker A
बच्ची जब यह देख रही थी तब से मैंने ठान लिया था कि इस मन के बारे में मुझे भी जानना है और मेरी जिंदगी मुझे मन को समझ के मन को जीत के जीतनी है और आगे बढ़ना है। तो ऐसे ही एक डॉक्टर जो पहले एमडी के
02:07
Speaker A
कम्युनिटी मेडिसिन में प्रैक्टिस करते थे जो प्रोफेसर भी रहे हैं। डॉक्टर जितेंद्र अडिया सर से आज हम बात करेंगे। वो एक केवल पीक परफॉर्मर नहीं है। लेकिन सुनिए उन्होंने क्या किया है। आप और मैं शायद कई जन्म लगा लेंगे। इतनी सारी खूबियां पाने
02:23
Speaker A
में सबसे पहला उनका जो मन का ट्रेनिंग प्रोग्राम है वो 45 कंट्रीज में हो चुका है। इवन टू दैट एक्सटेंट स्टगर्ड यूनिवर्सिटी जर्मनी में भी उनके प्रोफेसरों को भी उन्होंने सिखाया है। काफी सारे ऐसे प्रोग्राम्स, काफी सारे ऐसे
02:39
Speaker A
अलग-अलग सेमिनार्स वो मन के बारे में कई सालों से रह रहे हैं। और पिछले लास्ट उसमें उन्होंने एक बहुत ही सुंदर एजलेस बॉडी का प्रोग्राम किया। अब वो क्यों किया? क्योंकि उन्होंने खुद एट द एज ऑफ 70 इयर्स स्काई ड्राइविंग करा। एट द एज ऑफ 70
02:57
Speaker A
इयर्स एक पायलट का फ्लाइंग का लाइसेंस लिया। अब हम समझते हैं एज इज अ लिमिटेशन, बट फॉर हिम उनके लिए कोई लिमिट्स नहीं है। उन्होंने काफी साल एक बॉडी के ठीक करने में लगाए। उसके बाद उन्होंने दिल को समझा।
03:13
Speaker A
बाद में उन्होंने आत्मा को भी समझा और फिलहाल जो वो काम कर रहे हैं वो पातांजलि सूत्र पर काम कर रहे हैं। तो आज के एपिसोड में हम कहीं नहीं जाना क्योंकि मन से शुरू करेंगे। मन कहां होता है? उन्होंने अपने
03:27
Speaker A
मन को कैसे ट्रेन किया। उन्होंने कई सारे ऐसे बिजनेसमैन को भी ट्रेन किया है जहां पर उन्होंने हजारों करोड़ कमाए हुए हैं। तो आपको भी अगर यह सब कुछ करना है तो आपके मन को समझना जरूरी है। तो मैं हूं डॉक्टर
03:40
Speaker A
श्वेता आतिया, एक न्यूरोलॉजिस्ट और लिमिटलेस ब्रेन लैब जो है वो पूरे ऐसे पीक परफॉर्मर्स को स्टडी करता है। उनके जो सीक्रेट्स हैं वो आप तक पहुंचाता है। क्योंकि वो सीक्रेट अब हमें सीक्रेट नहीं रखना है। सबसे शेयर करना है क्योंकि सबका
03:57
Speaker A
अधिकार है कि इस पूरे इंस्ट्रूमेंट को जैसे ही अगर हम समझ लेंगे तो उस पे हम जीत भी पाएंगे। तो बहुत-बहुत धन्यवाद। थैंक यू श्वेता जी। मजा आ गया आपकी बातें सुन के। जी। तो बहुत वेलकम और ऑडियंस आज हमारे साथ
04:09
Speaker A
जुड़ी हुई है इस पूरे कन्वर्सेशन में। आई एम डैम कॉन्फिडेंट कि सबके मन को आप पूरा बदल देंगे। तो शुरू करते हैं आपकी इस जर्नी से। थोड़ा सा अपने बारे में बताइए कि आपको माइंड पावर में इंटरेस्ट कैसे आया? पहली बात तो यह है
04:25
Speaker A
कि मैं जैसे मेडिकल डॉक्टर का काम करता था तो आई वाज़ नॉट हैप्पी। लगता था क्या रूटीन जिंदगी है। कोई जिंदगी है क्या? वैसे लोग डॉक्टर बनने के लिए अभी भी कितने सपने देखते हैं, मेहनत करते हैं। मैं बनने के
04:36
Speaker A
लिए वैसा किया था। बनने के बाद लगा यह ऑर्डिनरी लाइफ है। फिर मुझे पढ़ने का शौक था। और एक किताब मेरे हाथ में आई, पावर ऑफ सबकॉन्शियस माइंड बाय जोसेफ मर्फी। आज से 40 साल पहले। वो किताब पढ़ के मेरा दिमाग
04:49
Speaker A
हिल गया। वाओ, मजा आ गया। उसके बाद मैंने सिलवा माइंड कंट्रोल मेथड वाली किताब पढ़ी। उसके बाद मैंने उसके प्रोग्राम अटेंड किए। मेरे खुद के ऊपर मैंने माइंड पावर का इस्तेमाल किया। मेरा जीवन में बदलाव आया। मेरी फैमिली को सिखाया। उनके
05:03
Speaker A
जीवन में बदलाव आया। तो सीखता गया, एक्साइट होता गया, रिजल्ट पाता गया। एक बार मुझे मौका मिला एक यूथ कैंप में ऐसे पावर ऑफ सबकॉन्शियस माइंड को सिखाने के लिए। यह 35 साल पहले की बात है। जैसे मैंने सिखाया तब टेक्नोलॉजी नहीं, बोर्ड
05:16
Speaker A
में लिख के कॉन्शियस माइंड, सबकॉन्शियस माइंड ऐसा लिख के। तब के जमाने की बात है। और जैसे ही प्रोग्राम खत्म हुआ पूरा ऑडियंस मेरे मेरे पीछे ऑटोग्राफ और फोटोग्राफ के लिए। मैं तो हैरान हो गया कि क्या हो गया? मैंने क्या जादू कर दिया। एक
05:28
Speaker A
घंटा तक मैंने ऑटोग्राफ और फोटोग्राफ दिया। तब से मुझे दो चीज समझ में आई कि ये सब्जेक्ट सबको पसंद आता है और सबको जरूरत है। दूसरी बात है कि मैं इसको आसानी से सिखा सकता हूं। हम तब से मैंने मेरा पर्पस ऑफ लाइफ बना लिया
05:41
Speaker A
कि मुझे करोड़ लोगों तक यह माइंड पावर सिखाना है। बाद में तो मुझे ओपर्चुनिटी मिलती गई। पूरा गुजरात, बाद में पूरा देश, फिर पूरी दुनिया। फिर लोग मुझसे मांगते गए कि सर, आप जो भाषा में सिखाते हो वो भाषा में कोई
05:53
Speaker A
पुस्तक मिल नहीं रहा है। आप एक किताब लिखो। तो नियरली 8-10 साल की ट्रेनिंग के बाद मैंने पहली किताब लिखी। प्रेरणा का झरना है। पहले ही दिन से आज तक वो बैच सेलर बनी रही जो 10 लैंग्वेज में अवेलेबल
06:05
Speaker A
है और गुजरात में 100 साल का रिकॉर्ड है कि 15 लाख कॉपी गुजराती भाषा में कोई नहीं बिकी है। मेरी बिकी है। तो कहने का मतलब है कि ऐसा सब्जेक्ट मैंने दुनिया को दिया जो सबको जरूरत थी। मगर
06:16
Speaker A
किसी के पास था नहीं। और मेरी सिंपल लैंग्वेज की वजह से लोगों को पसंद आया और मुझे भी फायदा हुआ। लोगों को फायदा हुआ और एक ऑर्डिनरी डॉक्टर में से मैं एक वर्ल्ड क्लास माइंड ट्रेनर बन गया। और फिर तो
06:28
Speaker A
मंजिलें और भी स्टार्ट हो गया। बहुत सारी मंजिलें मैंने देखी। क्या मजा आया। बहुत-बहुत बढ़िया। तो आपने 130 किताबें रख ली। वो तो जाहिर सी बात है माइंड पावर से ही होगी क्योंकि बिना माइंड के पावर। माइंड पावर के अलावा भी मैंने लिखी है।
06:42
Speaker A
चक्र बैलेंसिंग है, मनी के ऊपर लिखी है, हेल्थ के ऊपर लिखी है। बहुत सारे सब्जेक्ट के ऊपर लिखी है। ट्रांजैक्शनल एनालिसिस के ऊपर लिखी है। बहुत सारे सब्जेक्ट। तो सर, मन क्या है? तो जैसे हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर की भाषा में बात करें तो दिमाग
06:55
Speaker A
है वह हमारा हार्डवेयर है। मन हमारा सॉफ्टवेयर है। दिमाग स्ट्रक्चरल पार्ट है। मन है वो फंक्शनल पार्ट है। जो हम सोचते हैं वो मन सोचता है। मगर ये सोचने के लिए हमें हार्डवेयर की जरूरत होती है। जिसको हम दिमाग कहते हैं। ब्रेन कहते हैं। तो मन
07:08
Speaker A
एक एनर्जी है। और ये एनर्जी को अच्छी तरह से समझे और उसका इस्तेमाल करें तो हमारा जीवन बदल जाता है। तो मन की कोई सीमा लेंथ ब्रेड्थ ऐसा होता है कि मन को कैसे साइंटिस्ट एनर्जी दिखती नहीं है। देखिए एनर्जी और
07:23
Speaker A
पदार्थ में क्या फर्क है? एनर्जी जैसे बिजली एनर्जी है और वायर है वह पदार्थ है। वायर दिखता है मगर उसमें से पास होने वाली बिजली दिखती नहीं है। एनर्जी को नहीं देख सकते, नहीं छू सकते हैं, नहीं टच कर सकते
07:35
Speaker A
हैं, नहीं फोटो निकाल सकते हैं। नहीं काट सकते, नहीं ऑपरेशन कर सकते, नहीं नाश कर सकते हैं। हमें साइंस में सिखाया गया है कि एनर्जी के साथ यह कुछ नहीं होता है। सिर्फ एक एनर्जी का दूसरे में रूपांतर
07:46
Speaker A
होता है। यानी ट्रांसफर होता है। तो मन को नहीं देख सकते, नहीं छू सकते हैं। जबकि दिमाग एक पदार्थ है तो उसको देख सकते हैं, छू सकते हैं, काट सकते हैं। ऑपरेशन कर सकते हैं। सब कुछ कर सकते हैं। हमें दोनों
07:56
Speaker A
की जरूरत पड़ती है, हार्डवेयर एंड सॉफ्टवेयर की। ऊपर वाले ने हमको दोनों दिया है। मगर जो हम यूज़ करते हैं ज्यादातर वो मन होता है। जो हमारे दो मन होते हैं। कॉन्शियस एंड सबकॉन्शियस। वही तो थोड़ा सा बता दीजिए कॉन्शियस माइंड
08:08
Speaker A
कैसे काम करता है? सबकॉन्शियस। हमारे दो मन होते हैं। वैसे प्रोफेसर विलियम जेम्स ने कहा है कि दुनिया के सफल से सफल इंसान ने भी अपनी मन की शक्तियों का 10% से ज्यादा कभी इस्तेमाल नहीं किया। जब मैंने यह सुना तो मुझे लगा ऐसा क्यों?
08:22
Speaker A
10% से ज्यादा क्यों नहीं? फिर जब मैंने पावर ऑफ सबकॉन्शियस माइंड जोसेफ मर्फी की किताब पढ़ी तब मुझे समझ में आया कि 90% पावर तो सबकॉन्शियस माइंड के पास है। जिसके बारे में लोग जानते नहीं हैं। हम सिर्फ कॉन्शियस माइंड के बारे में जानते
08:35
Speaker A
हैं और कॉन्शि...
08:48
Speaker A
सकता है? स्काई दिल मीट फिर मैंने सीखा लोगों को सिखाया तो दोस्तों अगर आपके बहुत बड़े-बड़े सपने हैं आपको पूरे करना है तो 10% वाला जो कॉन्शियस माइंड है उसे बाहर निकाल के सबकॉन्शियस माइंड के पावर को भी इस्तेमाल
09:01
Speaker A
करना सीख लीजिए आपका जीवन बदल जाएगा तो आप हमें कुछ ऐसी सीक्रेट टिप्स बता दीजिए अब वो सबस माइंड को हम हैक कैसे करें आज की जैसे जिंदगी चल रही है सब लोग स्ट्रेस में बिताते हैं और अगर हम ब्रेन
09:12
Speaker A
की बात करें तो फास्ट ब्रेन रिदमम जो होता है बीटा मोस्टली लोग बीटा बीटा बीटा में रहते हैं तो वो तो जाहिर सी बात है मतलब उनका जो कांटेक्ट है सबकॉन्शियस से या अवचेतन मन से वो काफी दूर हो रखा है। तो
09:24
Speaker A
उनको क्या अपने रोजमर्रा की डेली प्रैक्टिस में लाना चाहिए या कोई ऐसी सीक्रेट टिप्स जो आप इतने सालों से पढ़ा रहे हैं जो हमारी ऑडियंस तक आज आप पहुंचा सके। सिंपल मेटाफोर्स कहे तो अलादीन के जादुई चिराग की कहानी सबने सुनी है। अलादीन नाम
09:38
Speaker A
का एक आदमी था। उसके पास एक चिराग था। घिसने से जीनी प्रकट होता था और जीनी बाहर निकल के क्या कहता था? हुक्म मेरा आका। तो अलादीन की जो भी इच्छाएं थी वह पूरी करने के लिए उनके पास जी नहीं था। उसकी तो तीन
09:49
Speaker A
इच्छाएं थी मगर हमारी तो 300 इच्छाएं होती है। मगर हम ढूंढते रहते हैं वो चिराग को। एक्चुअली लोगों को पता नहीं कि वह हमारे मन की कहानी है। उसमें जो चिराग है वो हमारा दिमाग है, ब्रेन है और अलादीन है वो
10:01
Speaker A
कॉन्शियस माइंड है और जीनी है वो सबकॉन्शियस माइंड है। सबकॉन्शियस माइंड इज़ लाइक अ स्लीपिंग जॉइंट विद इन यू। करना क्या है कि वो स्लीपिंग जॉइंट को जगाना है और ऑर्डर देना है। जगाने के लिए क्या करना है? कॉन्शियस माइंड पे काम करना है।
10:15
Speaker A
कॉन्शियस माइंड को शांत करना है। बीटा स्टेट से हमें अल्फा स्टेट तक जाना है। बीटा स्टेट पे हमारी फ्रीक्वेंसी हाई रहती है। जैसे ही उसको शांत करेंगे मेडिटेशन या रिलैक्सेशन के जरिए तो हम अल्फा स्टेट में जाएंगे जहां यह जीनी जाग जाएगा। और जैसे
10:30
Speaker A
ही जीनी जाग जाएगा आपको ऑर्डर करना है। ऑर्डर करने की बहुत सारी भाषा है। उसमें दो मेन भाषा है जो सबको इजीली पता है और इस्तेमाल कर सकते हैं। एक है चित्र की भाषा दूसरी है शब्दों की भाषा। चित्र की
10:44
Speaker A
भाषा यानी हमें कल्पना करनी है। विजुलाइजेशन करना है। यहां पे भगवान ने हमें मेंटल स्क्रीन दिया है। इसके ऊपर हमें चित्र देखना है। कल्पना चित्र यानी विजुलाइजेशन। यह चित्र की भाषा है। जो भी चित्र आप देखोगे वो आपके जीवन में हकीकत
10:57
Speaker A
बनेगा। यानी जो भी विजुअलाइज करोगे आपके जीवन में हकीकत होगा। दूसरा आपके भाषा शब्दों की जो भी बोलते हैं वह भी सबकॉन्शियस माइंड सुनता है। तो अफमेशन डेली जो भी भाषा हम बोलते हैं वो हमारे सबकॉन्शियस माइंड में चली जाती है और वो
11:11
Speaker A
हकीकत बन जाती है। तो दोस्तों आपको जो भी चाहिए डिसाइड कर लीजिए क्या चाहिए। उसके अनुरूप आप विजुअलाइजेशन यानी कल्पना शक्ति को काम पे लगाइए और एफमेशन यानी स्वचन देना शुरू करिए अपने आपको। एक बार जीनी के पास यह ऑर्डर चला गया। फिर जिन्नी की
11:27
Speaker A
जिम्मेदारी है कि वो आपके लिए प्लानिंग करें। आपके लिए एनवायरमेंट क्रिएट करें। आपको हिंट भी दे कि क्या करना है आगे। बस आपको उसके बाद सिर्फ एक्शन लेना है। राइट एक्शन और आपको रिजल्ट मिलेगा मिलेगा मिलेगा। मैं छोटा था। गरीबी में रहता था।
11:41
Speaker A
पत्रे के घर में रहता था। एक रूम में हम नौ लोग रहते थे। मेरी शादी हुई तब मैं पत्रे के घर में मेरी वाइफ को लेके गया था। सोच लो। और मेरा भाई आईएएस हुआ तब तक वो पत्रे के
11:50
Speaker A
घर में रहते थे। तो वहां से लेके आज मैंने इतनी सारी लग्जरी एंजॉय किया। सब नाम कमाया मोदी साहब से लेकर सभी वीआईपी मुझे जानते हैं। इतने लाखों लोगों के जीवन में मैंने परिवर्तन लाया। यह सब कुछ यह
12:03
Speaker A
सबकॉन्शियस माइंड के पावर से किया है। मेरे भी सपने पूरे हुए। मेरी वजह से लोगों के भी सपने पूरे हुए। अगर आप इसको समझ लोगे कि ये जीनी को जगा के कैसे इस्तेमाल करना है तो आपको जरूर रिजल्ट मिलेगा। बस
12:16
Speaker A
यही कहता हूं। संघर्ष जीवन में है ही नहीं। हमें संघर्ष क्रिएट किए अज्ञानता की वजह से। एक बार राइट ज्ञान मिल गया, नॉलेज मिल गया तो फिर संघर्ष है ही नहीं। जब तक मैं सबकॉन्शियस माइंड के बारे में जाना
12:27
Speaker A
नहीं था तब तक मेरे जीवन में संघर्ष था। जैसे मैंने वह किताब पढ़ी और इस्तेमाल करना शुरू किया। अब संघर्ष नहीं है। मेहनत करता हूं मगर मुझे कोई टेंशन नहीं है। ज्यादा और मेहनत नहीं करनी पड़ती है। नॉर्मल मेहनत से मुझे जो चाहिए वो पा लेता
12:40
Speaker A
हूं। बस हमें लोगों को यही सिखाना है कि संघर्ष से निकल जाओ बाहर। अपनी शक्तियों को जानो। सही इस्तेमाल करो। आपको भी रिजल्ट मिलेगा। मुझे जैसे ही आप बता रहे हैं तो डॉक्टर डेविड हॉकिंस का स्टडी याद आ रहा है। उन्होंने जो
12:52
Speaker A
फ्रीक्वेंसी ऑफ़ मैप दिखाया है कि देयर इज़ समथिंग कॉल्ड फोर्स एंड देयर इज़ समथिंग कॉल्ड पावर। तो ज्यादातर लोग जो है वो और ज्यादा काम और ज्यादा स्ट्रेस और ज्यादा फोर्स कर रहे हैं। हालांकि जो आप बात कर
13:05
Speaker A
रहे हैं कि सबकॉन्शियस माइंड के पास तो जीनी जितना पावर है। तो आई एम गना बैक ट्रैक। मैं आपको अफमेशन के बारे में थोड़ा सा और पूछती हूं कि राइट तरीका क्या होता है अफमेशन करने का। और उसके पहले लोगों को
13:16
Speaker A
आपने जो बखूबी बताया कि क्लियर होना कि मुझे लाइफ में क्या चाहिए। क्या चाहिए? गोल क्लियर होना चाहिए। कंफ्यूज नहीं होना चाहिए। कंफ्यूज नहीं होना चाहिए। क्योंकि वरना आप कंफ्यूजिंग चीजें दोगे। मुझे तो ऐसा लग रहा है कि मान लो अगर आपके पास कोई
13:28
Speaker A
पासवर्ड है। उस पासवर्ड में आप यहां से वहां भी कर देते हो तो आपकी वो फाइल नहीं खुलती है। वैसे क्लेरिटी रखना कि मुझे क्या चाहिए। तो ये जो चाहिए उसमें कोई नापतोल होता है कि मुझे इतने टाइम तक का
13:40
Speaker A
सोचना है या और लंबा सोचना है? तो थोड़ा सा बता दीजिए। वैरी गुड। पहली बात है कि गोल सेटिंग के बारे में बताते हैं। व्हाट इज गोल? मुझे क्या चाहिए? कब तक चाहिए और क्यों चाहिए?
13:49
Speaker A
ये तीन सवाल का जवाब यह गोल होता है। जितना आपके पास क्लेरिटी होगा उतना अच्छा है। ज्यादातर लोग गोल डिसाइड करते हैं मगर टाइम लिमिट नहीं देते हैं। सबकॉन्शियस माइंड को टाइम लिमिट देना है। दूसरी बात है कि टाइम लिमिट बिलीवेबल होनी चाहिए
14:03
Speaker A
आपको। फॉर एग्जांपल आज आपने मेरा प्रोग्राम देख लिया। आपके घर में साइकिल या स्कूटर है और सोच लिया कि Mercedes लेनी है और एक साल का गोल रखा तो साइकिल से Mercedes में एक साल तो कम पड़ेगा। 10
14:16
Speaker A
साल 20 साल हो सकता है। एक चाय वाला प्राइम मिनिस्टर बन सकता है। मगर वो 50 60 साल के बाद बन सकता है। ऐसा नहीं कि अभी जितने भी चाय वाले हैं सोचे कि मैं एक साल के बाद प्राइम मिनिस्टर बन जाऊं। देयर इज़
14:26
Speaker A
नेवर अ इलॉजिकल गोल। इट इज़ ऑलवेज अ इलॉजिकल टाइम लिमिट। ज्यादातर लोग यही गलती करते हैं। टाइम एक्साइटमेंट में टाइम लिमिट शॉर्ट रख देते हैं। फिर रिजल्ट नहीं मिलता है। तो फिर फ्रस्टेट होता है। बोलते हैं सब बकवास है। मैंने सब कुछ कर लिया।
14:38
Speaker A
कुछ नहीं होता है। बट टाइम लिमिट शुड बी बिलीवेबल। मान लो आपके पास अभी महीने का लाख रुपए की इनकम है। आपको करोड़ों रुपए कमाना है। हो सकता है बट कल नहीं होगा। 5 साल के बाद 10 साल के बाद होगा। तो जब भी
14:50
Speaker A
कोई गोल रखो तो अपने बिलीफ सिस्टम के साथ चेक करो कि क्या मेरी बिलीफ सिस्टम क्या बोल रही है कि यह इतने टाइम में होगा कि नहीं होगा। अगर बिलीफ सिस्टम बोलता है नहीं यह समय में नहीं होगा तो आइदर यू
15:01
Speaker A
चेंज योर बिलीफ सिस्टम या चेंज योर पीरियड के ये होगा। मगर प्रूव किया है कि एक माछीमार का लड़का एक मिसाइल में बन के प्रेसिडेंट बन सकता है। एक पकोड़े बेचने वाला अंबानी बन सकता है। कहने का मतलब कि
15:12
Speaker A
कोई भी कहीं भी पहुंच सकता है। सिर्फ उसको परफेक्ट ज्ञान होना चाहिए। सिस्टम से चलना चाहिए। रिजल्ट सबको मिलता है। बहुत बढ़िया। ये बहुत अच्छी बात बताई आपने कि लोग इर लॉजिकल गोल की बात वो नहीं है। इट इज़ अबाउट द इलॉजिकल टाइम लाइन। टाइम
15:26
Speaker A
तो टाइमलाइन को भी अच्छे से सेट करना है। सेट करना चाहिए और सबकॉन्शियस माइंड को टाइम के साथ ही कहना है। मैंने एक फिल्म देखी थी ओम शांति ओम उसमें शाहरुख खान विजुअलाइज करता है हाथ में वो मेडल लेके
15:37
Speaker A
के फिल्म फेयर अवार्ड मगर उसने टाइम लिमिट नहीं दिया था। अगले जन्म में मिलता है। ये विजुलाइजेशन अगले जन्म तक भी जाता है। क्योंकि वो जो हमारा सबकॉन्शियस माइंड इज़ लाइक आत्मा। मेमोरी की हार्ड डिस्क वहां रहती है तो मरने के बाद हमारा आत्मा दूसरे
15:50
Speaker A
शरीर में चला जाता है तो मेमोरी साथ में लेके जाता है तो मेमोरी अंदर आपके विजुअलाइजेशन के पिक्चर भी पड़े हैं तो कभी-कभी अगले जन्म में मैनिफेस्ट होगा तो ये बहुत जरूरी है कि आप ये कहो कि 5 साल
16:00
Speaker A
में 10 साल में एटलीस्ट ये कहो कि ये जन्म में चाहिए नहीं तो शाहरुख खान को ऐसा हुआ अगले जन्म में मिलेगा नहीं सही बात है लोग क्लियरली ये डिफाइन नहीं करते हैं और फिर विजुअलाइजेशन का भी फिर उतना वो नहीं रिजल्ट्स नहीं आते तो
16:13
Speaker A
अभी हम थोड़ी सी बात करते हैं आपने कहा कि हमें बीटा स्टेट स्टेट से बाहर निकल के अल्फा में जाना होगा। थोड़ा सा और डीपर थीटा में जाना होगा। तो रोजमर्रा की लाइफ में इतनी भगदड़ मची है। इतना स्ट्रेसफुल
16:24
Speaker A
काम है। सब लोग काम काम करे जा रहे हैं। तो और सोशल मीडिया उसके ऊपर जहां पे एक सिंगल सिंगल फ्रीक्वेंसी आ रहा है। सो ऐसे उसमें जिसको रियली जो ये एपिसोड देख के बोल रहा है कि नहीं आज से मेरी लाइफ तो
16:37
Speaker A
बदलने ही वाली है। तो उनको स्टार्ट में क्या करना होगा? व्हाट इज द एग्जैक्ट स्टेप? मुझे एक दो तीन आप पूरे स्टेप्स बता दीजिए। सबसे पहले बात तो है कि जितना भागदौड़ करोगे, संघर्ष करोगे, स्ट्रेस में रहोगे, स्ट्रेस वाले काम करोगे, उतना
16:50
Speaker A
फ्रीक्वेंसी हाई रहेगा। और सिंपल सिद्धांत है। जितना हाई फ्रीक्वेंसी इतना सबकॉन्शियस माइंड शांत। जितना लो फ्रीक्वेंसी उतना सबकॉन्शियस माइंड ज्यादा एक्टिव। अगर आप यह 90% पावर यूज़ करना चाहते हो, तो फ्रीक्वेंसी को लो करो। उसके लिए सबसे पहले कि अननेसेसरी गोल नहीं रखो।
17:09
Speaker A
मैंने ऐसे लोग देखे मेरे प्रोग्राम में आते हैं। मैं पूछता हूं गोल क्या बोले 5000 करोड़ कमाना है। अच्छा अच्छी बात है। मिलेगा तुम्हें। मगर मुझे पहले बताओ कि तू यह 5000 करोड़ कहां यूज़ करेगा? कैसे करेगा? तू तेरे पास यूज़ करने का कोई
17:21
Speaker A
प्लान है? नहीं है तो तू 5000 करोड़ के पीछे भाग के गलत काम में ही चला जाएगा। तुम्हें जितना जरूरत है उतना लिखना तुम। तो पहली बात है कि अननेसेसरी गोल मत लिखो। अननेसेसरी शॉर्ट टाइम लिमिट मत रखो कि
17:32
Speaker A
मुझे एक साल में करोड़पति बनना है। जब आप 10,000 में 20,000 में नौकरी कर रहे हैं। उसकी वजह से स्ट्रेस आएगा ऐसा। तो, यह बहुत चीज जरूरी है कि आप यह मत करिए। तो आपका गोल सही होना चाहिए। दूसरी
17:44
Speaker A
बात यह है कि कितने लोग हैं जो मोस्ट इंपॉर्टेंट स्टेप नहीं करते वह है अपना विज़न बोर्ड बनाने का। विज़न बोर्ड होता तो एक डेफिनेट पिक्चर सबकॉन्शियस माइंड में बार-बार जाता है। विज़न बोर्ड नहीं बनाया तो फिर क्या होता है कि हर टाइम अलग-अलग
17:57
Speaker A
पिक्चर जाता है। सबकॉन्शियस माइंड कंफ्यूज हो जाता है। विजुअलाइज़ करते हो तो आपको यह देखना है कि अभी ऑलरेडी आपको रिजल्ट मिल चुका है। ऐसा विजुअलाइज़ करना है। फील करना है। वैसे मैं लैंग्वेज बताऊं तो तीन टाइप की लैंग्वेज लोगों को समझनी है। मैं धनवान
18:12
Speaker A
बन चुका हूं। यह विजुअलाइज़ करना है आपको। और डेली अमेशन लिखना है। मैं धनवान बन रहा हूं। डे बाय डे मैं रिच बन रहा हूं। यह अमेशन होगा। लोग यहां पे कंफ्यूज करते हैं। और बिलीफ चेंज के लिए जो अमेशन होता
18:24
Speaker A
है, वह धनवान बन सकता हूं। ये तीनों में फर्क है। लिखना जरूरी है कि मन में भी नहीं बोलो मगर लिखोगे तो अच्छा रहता है। क्योंकि सिर्फ बोलते रहोगे तो माइंड भटक जाता है। लिखोगे तो ऑडियो विजुअल इंप्रेशन
18:37
Speaker A
पे जाती है। लिखते हो तो दिखता है। तो आप ज्यादा एंगेज रहते हो। लिख के बोलोगे तो वो अच्छा है। डेली एक पेज भर के लिखो तो जबरदस्त मिलेगा। मैंने एक थोड़ा सा सूत्र बनाया है इसके लिए। मैंने अभी किसी से
18:50
Speaker A
शेयर किया था। मैंने कहा थिंक इट, इंक इट, लिंक इट एंड सिंक इट। तो सारा सारा अपने आप अपने आप लिंक हो जाता है उसके साथ। नहीं लिखना तो अच्छा ही है। बताया और विज़न बोर्ड नहीं बनाते वो गलती करते
19:01
Speaker A
हैं। मैं तो बोलता हूं अगर विज़न बोर्ड बनाएंगे और विजुलाइज़ करेंगे तो 90% चांस है कि आपका सपना पूरा होगा। और अगर विज़न बोर्ड नहीं बनाएंगे सिर्फ विजुलाइज़ करोगे तो 10% चांस है कि आपका सपना पूरा होगा। ये स्टडी हुआ है। इतना फर्क होता है।
19:15
Speaker A
अच्छा। इसलिए विज़न बोर्ड बनाना बहुत जरूरी है। ओके। तो विज़न बोर्ड मैंने बना लिया। मैंने थोड़ी सी अपनी फ्रीक्वेंसी को काम में कन्वर्ट कर दी। रोज कितना मुझे मेडिटेशन या एटलीस्ट अपने आप के साथ बैठना पड़ेगा थोड़ा सा स्लोइंग करने के लिए।
19:29
Speaker A
और बिलीफ के साथ बैठना पड़ेगा। और बिलीफ के साथ बिलीफ हमारा सबसे बड़ा ब्लॉक है। और एक बार आपने गोल सेट कर लिया। सब कुछ कर लिया। पावर ऑफ़ सबकॉन्शियस माइंड समझ लिया और विजुअलाइज में बैठे फिर लॉजिक को
19:40
Speaker A
बीच में मत लाओ। लॉजिक है ना वो ऑब्सकल है विजुअलाइजेशन में। चित्र को एज अ डिस्टर्ब कर देता है। एक बार डिसाइड करने के बाद नो लॉजिक कि अब Mercedes मिलेगी कि नहीं। डिसाइड कर लिया गोल्ड या फिर Mercedes
19:51
Speaker A
आपके हो चुकी है। ऐसा फील करना शुरू करो। हम्म। अच्छा और डॉक्टर साहब क्या होता है कि काफी लोग जो होते हैं वो बचपन से ब्लॉक से गुजरते हैं। अब जैसे सबकॉन्शियस माइंड हमारा जीरो टू सेवन इयर्स में सबसे
20:03
Speaker A
पावरफुल रहता है। जब हम थीटा स्टेट में रहते हैं। जब बच्चे होते हैं। की तरफ से टीचर की तरफ से डाल दिया जाता है। बहुत ज्यादा डाल दिया। सोसाइटी की तरफ से डाल दिया। ऐसे नहीं कर सकते हो तुम और
20:12
Speaker A
पैसे थोड़ी ट्रीज पे उगते हैं। ये सारा यू नो जनरल उसमें रहता है। तो हम वो ब्लॉक्स के साथ ही हमारी जर्नी कंटिन्यू करते हैं। सो कोई ऐसी चीज है जहां पे हमें उस ब्लॉक्स को पहले इरेस करना है बिफोर वी गो
20:24
Speaker A
इंटू द नेक्स्ट स्टेप। पहली बात तो ये ब्लॉक क्या है? ये बिलीफ है। एक कहानी आपने सुनी होगी। बहुत लोगों ने सुनी है कि हाथी का बच्चा जब सर्कस में आता है तो उसको बड़ी चैन से बांध के रखते
20:33
Speaker A
हैं। वो छुड़ाने की कोशिश करता है। निकलता नहीं है। फिर वो अपनी कोशिश बंद कर देता है। फिर पतली रस्सी से बांध देता है। वो कोशिश करता है नहीं पता है कि ये बंधन मेरे से टूटेगा नहीं। तो हमारे साथ भी
20:43
Speaker A
कभी-कभी ऐसा होता है। बचपन में हमें यही कहते हैं तू छोटा है। रहने दे तेरे से नहीं होगा। तेरे से नहीं होगा। इतनी बार हम सुन चुके हैं कि हमारी वो बिलीफ बन जाती है। रिपीटेड एमेशन से हमारी बिलीफ बनती है। 50
20:56
Speaker A
बार हमने सुन लिया तू गधा है। तू गधा है। तू गधा है। तो फिर हमने मान लिया कि हम गधे हैं। तो ये बिलीफ हमें बाद में बड़े होने के बाद बताया जा तू जो करना है कर। मगर तब तक
21:06
Speaker A
वो बंधन हमने यहां रख दिया है। तो फिर नहीं कर सकते। तो सबसे पहले तो अपनी बिलीफ सिस्टम को चेक करना है कि जो गोल के ऊपर काम कर रहे हैं उसके लिए आपकी बिलीफ सिस्टम कैसी है? जैसे मुझे धनवान बनने का
21:18
Speaker A
शौक था। मगर बचपन में मेरी बिलीफ हो गई थी कि मैं धनवान नहीं बन सकता हूं। मैं बिजनेस नहीं कर सकता हूं। मेरे फादर ने जिंदगी भर नौकरी किया। मेरे ब्रदर ने किया। मैंने भी 30 साल नौकरी किया। मेरी
21:28
Speaker A
बिलीफ की वजह से कि मैं बिजनेस नहीं कर सकता हूं। और दूसरा कि मैं धनवान नहीं बन सकता हूं। एक ज्योतिष ने मुझे बोला था तुम्हारी उंगली के बीच में जगह है ना पैसा आएगा नीचे से निकल जाएगा। और मैंने मान
21:37
Speaker A
लिया था। तो पैसा आते थे। मैं सऊदी अरेबिया में कमा रहा था। मेरी बढ़िया तनख्वाह थी। मगर बचत नहीं होती थी। वैसा के वैसा रहा मैं। बाद में मैं सबकॉन्शियस माइंड के बारे में समझा। तब पता चला कि मेरी बिलीफ मुझे
21:49
Speaker A
धनवान बनने से रोक रही है। फिर मैंने अपने बिलीफ को चेंज किया तो फिर मैं धनवान बन गया। कैसे चेंज करते हैं? वह क्या हमें डिलीट करना पड़ता है पास्ट की सब?
21:57
Speaker A
पहले तो बिलीफ को चैलेंज करनी पड़ती है। उसको वीक करना पड़ता है। कोई दुश्मन हमारे घर में आता है उसको भगाना है तो मार के उसको थोड़ा सा अपंग बना देना है। तोड़ देना है। बाद में धक्का मार के उसको फेंक
22:07
Speaker A
दो। तो वैसा ही है। तो बिलीफ क्या होती है कि इट इज़ अ परमानेंट ट्रुथ फॉर अस। कि यही सही है। जैसे रिलीजन इज़ अ बिलीफ। हमें बचपन में कहा जाता है यही हमारे भगवान है। यही हमारे भगवान है। यही हमारे भगवान है।
22:19
Speaker A
फिर एक बार हमारे अंदर घुस गया बाद में हम चैलेंज नहीं करते कि यह रियल में हमारे भगवान है कि नहीं। मेरा भगवान ये है तो उनका वो क्यों है? सबका एक क्यों नहीं है?
22:27
Speaker A
क्योंकि वो बिलीफ में चला जाता है। वी डोंट चैलेंज इट। तो सबसे पहले बिलीफ को वीक बनाने के लिए चैलेंज करो कि यही भगवान है और दुनिया में कोई भगवान नहीं है। बाकी अलग रिलीजन वाले का वो भगवान नहीं है। तो
22:38
Speaker A
इतने सारे भगवान कैसे हैं? तो यह भगवान मेरे कैसे हुए? ये तो धर्म की बात कर रहा हूं। वैसे हर चीज की है। जैसे धनवान बनने की बात है कि मैं धनवान नहीं बन सकता। तो फिर मैं अपने आप को पूछता गया क्यों नहीं
22:48
Speaker A
बन सकता? मैं तो इंटेलिजेंट हूं। पढ़ा लिखा हूं। मैं क्यों नहीं बन सकता हूं?
22:52
Speaker A
अनपढ़ लोग बन सकते हैं। मैं क्यों नहीं बन सकता हूं? तो ऐसे-सा करके बिलीफ को वीक बनानी है। बिलीफ को क्वेश्चन डालने हैं। उससे वीक हो जाएंगे। बाद में हमें उससे ऑपोजिट एमेशन देना है कि मैं धनवान बन सकता हूं। मैं धनवान बन
23:05
Speaker A
सकता हूं। क्योंकि मेरी पहले की बिलीफ क्या थी कि मैं धनवान नहीं बन सकता हूं। तो मैंने उसका डाउट क्रिएट करके बिलीफ को वीक बना दिया। उनके जड़ को हिला दिया। अंदर बैठी थी उसको। बाद में अफमेशन देना
23:16
Speaker A
शुरू करता हूं। ऐसी रिसर्च हुई है 21 डेज तक डेली 21 एमेशन देने से वो आपकी बिलीफ चेंज हो जाती है। तो अलग-अलग एमेशन होते सेम एमेशन जैसे धनवान का एक अमेशन है। मेरी एक बिलीफ ऐसी थी कि मैं धनवान नहीं
23:29
Speaker A
बन सकता हूं। तो मैं डेली लिखता था मैं धनवान बन सकता हूं। धनवान बन सकता हूं। 21 अफमेशन डेली फॉर 21 डेज। तो क्या होता है हमारे ब्रेन में न्यूरोलॉजिकल ट्रैक बन जाते हैं। पहले नई धनवान वाले ट्रैक थे वो
23:42
Speaker A
डिलीट हो जाते हैं। न्यूरोप्लास्टिसिटी में जैसे हम सिखाते हैं तो नए ट्रैक बन जाते हैं धनवान बनने का। एक बार वो ट्रैक बन गया बाद में वही दिशा में हम सोचने लगते हैं और जो दिशा में सोचने लगते हैं
23:52
Speaker A
वो विजुअलाइज होने लगता है। बेसिकली क्या होता है? वी नेवर थिंक इन ओनली वर्ड्स वी थिंक इन पिक्चर। फॉर एग्जांपल मैं आपको बोलूं कि नरेंद्र मोदी के बारे में सोचो। तो आपके कपाल के ऊपर आपको नरेंद्र मोदी का चित्र दिखेगा।
24:05
Speaker A
हम तो जो भी हम सोचते हैं ऑटोमेटिक चित्र बनता है और जो चित्र बनता है वह विजुअलाइज हो जाता है। सबकॉन्शियस माइंड में स्टोर हो जाता है। तो वैसा ही है जब आप सोचने लगते हैं कि मैं धनवान बन सकता हूं तो हम
24:16
Speaker A
धनवान बनने के चित्र भी बनते हैं तो हमारे पूरे न्यूरॉन चार्ज हो जाते हैं और फिर वही दिशा में हमें लेके जाते हैं जहां हम अच्छा काम करके धनवान बन सकते हैं। तो यही रास्ता है। सो काफी लोगों को हमारा जो वायरिंग होता
24:28
Speaker A
है वो नेगेटिव होता है। कुछ है तो यू नो नेगेटिव एक वेलकोर की तरह होता है। वो नेगेटिव तो अंदर चिपक ही जाता है और पॉजिटिव होता है वो टेफलॉन की तरह होता है तो एक बिल्ट इन मैकेनिज्म जल्दी चिपकता है
24:38
Speaker A
पॉजिटिव जल्दी नहीं चिपकता उसको कैसे निकाला जाए वही पॉजिटिव एशन एमेशन से ही तो जैसे-जैसे वो जैसे आता गया हमने उसको चैलेंज करते गए हम अफमेशन लिखते गए हम उसका चित्र अपने उसमें रखते गए विजुअलाइज करते गए फील भी
24:52
Speaker A
करते रहे कि मैं वो बन रहा हूं एंड दैट्स हाउ इट हैपेंस एव्री बिलीफ के लिए 21 डेज कम से कम दो ओके कम से कम 21 डेज का खास करके जहां आपको रोक रहा है मैंने मैंने कोई किताब में लिखा है कि अगर
25:03
Speaker A
आप जो पाना चाहते थे वो अभी तक नहीं पाया तो सोच लो आपके अंदर ही उसे कुछ रोक रहा है और वो है आपकी बिलीफ सिस्टम बहुत पाना चाहते हो मेहनत करते हो गोल रखा है विजुअलाइज करते हो नहीं पा रहे हो अंदर की
25:15
Speaker A
बिलीफ सिस्टम आपको रोक रही है बहुत बढ़िया बहुत बहुत सारे लोगों को लगता है कि यार डॉक्टर Mercedes की बात कर रहा है मैं तो सरकारी नौकरी कर रहा हूं मेरी Mercedes कैसे आएगी मैं सरकारी नौकरी में Mercedes लिया था
25:26
Speaker A
मैं सऊदी अरेबिया में था मेरा एक स्टूडेंट कानपुर में कॉलेज में प्रोफेसर है उसने Mercedes खरीदी है बेईमानी करके नहीं ईमानदारी से कमाई है। हम तो कहने का मतलब है कि यह भी एक ब्लॉक रहता है कि सरकारी नौकरी वाले Mercedes
25:37
Speaker A
कैसे ले सकते हैं? यह सारे आई थिंक कंफर्म सोसाइटी ब्लॉक्स जो हम पाल के रखते हैं और उस पे कभी ध्यान ही नहीं देते। ध्यान ही नहीं दिया। अभी तक एंड देन वी फील कि अरे मुझे और काम करना है। तभी और
25:46
Speaker A
होगा। तभी बचपन से यही सिखाया जाता है। खूब पढ़ो, डिग्री लो, बड़ी नौकरी लो, बड़ा पैकेट लो, फिर खूब काम करो, प्रमोशन लो। जिंदगी उसमें चली जाती है। तो यही सीक्रेट है। आपके हेल्थ के लिए भी, हेल्थ पे आ जाते हैं।
25:58
Speaker A
हेल्थ के लिए। खास है कि हमारा ब्रेन जब हाई फ्रीक्वेंसी पे काम करता है ना तो हमारे शरीर में रिपेयरिंग स्लो हो जाती है। जब स्लो फ्रीक्वेंसी पे आ जाता है ना अल्फा थीटा तो रिपेयरिंग फास्ट हो जाता
26:09
Speaker A
है। तो बेसिकली हमें ये थर्मोस्टेट जैसे होता है ना ऐसा हमें मेडिटेशन या रिलैक्सेशन करके ये फ्रीक्वेंसी को परमानेंटली डाउन कर देना है ताकि हमारे बॉडी में रिपेयरिंग चलता रहे और हेल्दी रहे। कितने पूरे 24 आवर्स में कितना टाइम
26:23
Speaker A
मेडिटेशन जरूरी है साइंटिफिकली कि यह रिपेयर बनता रहे क्योंकि आप 75 तो बिल्कुल लगते नहीं है और योर बायोलॉजिकल एज इज मच यंगर 30 या 40 10 इयर्स यंगर देन व्हाट यू आर तो ये आपने इसी सबकॉन्शियस माइंड के
26:38
Speaker A
पावर से किया बिल्कुल देखिए मैंने कहीं पढ़ा था कि जितने साल की आपकी उम्र है इतना मिनट आपका मेडिटेशन मिनिमम होना चाहिए अरे वाह जैसे मैं 75 इयर्स का हूं तो मुझे 75 मिनट डेली मेडिटेशन करना चाहिए चाहिए। 20 साल
26:51
Speaker A
के है तो 20 मिनट, 30 साल के है तो 30 मिनट। यह आई थिंक दीपक चोपड़ा की कोई किताब है। मैंने पढ़ा था। वंडरफुल थंब रूल कहते हैं इसको। बहुत ज्यादा करो तो अच्छा ही है। मैं तो अभी
27:01
Speaker A
उससे ज्यादा कर रहा हूं और ज्यादा करने वाला हूं। मेरा एक दोस्त है निशित शाह करके वो भी 90 डेज मेडिटेशन करके। 90 डेज नॉनस्टॉप मेडिटेशन कमरे में अकेला बैठ के। ओ हो हो हो और बहुत बढ़ता जा रहा है और मेडिटेशन
27:14
Speaker A
बढ़ता जा रहा है। हां यही यही जो लोग समझते नहीं है कि उनको लगता है कि मेडिटेशन में टाइम वेस्ट वेस्ट होता है। मैं लोगों को पूछता हूं वैसे कि मान लो आप 12 घंटा काम करते हो और
27:24
Speaker A
आपको एक्स अमाउंट कमा रहे हो और आप 1 घंटा मेडिटेशन करो 11 घंटा मेहनत करो तो आपकी इनकम का क्या होगा? सब लोग बोलेंगे बढ़ेगी। मैं बोला ठीक है 2 घंटा मेडिटेशन करो 10 घंटा काम करो। क्या होगा? बढ़ेगी।
27:36
Speaker A
फिर मैं पूछता हूं कैसे बढ़ेगी? तो उसके पास आंसर नहीं है। मगर मेरे पास आंसर है उसका। ये तो पता है कि मेडिटेशन करने से रिजल्ट मिलेगा। आपको जो भी चाहिए ना सब कुछ वहां से मिलेगा। क्योंकि आपकी सबकॉन्शियस माइंड से दोस्ती
27:49
Speaker A
हो जाती है। जितना मेडिटेशन ज्यादा करोगे उससे दोस्ती हो जाती है। और मेरा तो एक मानना है कि बाद में आपको बताना भी नहीं पड़ेगा सबकॉन्शियस माइंड को कि आपकी इच्छा क्या है। वो अपने आप खींच लेगा और आपको वो
28:03
Speaker A
दिला देगा। हां क्योंकि कोई-कोई समझता है ना अरे मैंने अभी सोचा और वह वहां पे प्रकट हो गया। जैसे अभी तो मैंने यहां सोचा भी नहीं और ऐसा हो गया। यू नो मेरे लाइफ में तो बियड विजुअलाइज़ेशन होता
28:12
Speaker A
है। सबकॉन्शियस माइंड से इतनी दोस्ती हो गई है। मैंने तो कभी विजुअलाइज भी नहीं किया था। सोचा भी नहीं था कोई मुझे कार गिफ्ट करे। मेरे एक स्टूडेंट ने मुझे 20 लाख का कार अचानक गेम दे दिया। सोचो ये
28:22
Speaker A
होता है कि मेरे जीवन में इतना ये हुआ था। मुझे एक बार फॉरेन जाना था। मैं 50 बार गया। हम और छोटी-छोटी चीजें हमें समझ में भी नहीं आती। अब जैसे इस बार मैं एयरपोर्ट पे आ रही थी तो मेरा काफी बड़ा बैग था। उसके
28:33
Speaker A
अंदर ब्रेन स्कैनर था। तो मैं उसको लेके जा रही थी। मैंने कहा अरे मेरे शोल्डर में इंजरी हो रखी है। मैं ऊपर कैसे लगाऊंगी?
28:39
Speaker A
बिल्कुल मेरे पीछे और मैंने यह जस्ट सोचा मेरे बिल्कुल पीछे खड़ा बंदा मुझे पूछ रहा है क्या मैडम मैं उठा लूं बैग को? तो मैंने कहा देखो ये दिस इज हाउ द कोहेरेंस एंड फ्रीक्वेंसी है मेरे साथ तो एवरीडे
28:50
Speaker A
अब थोड़ा सा मैं इस पे बात करूंगी क्योंकि ऑडियंस ये भी पूछना चाहेगी कि अगर मेरे आसपास बहुत सारे नेगेटिव लोग हैं और कंटीन्यूअसली मुझे नेगेटिविटी का सामना करना पड़ रहा है। बॉस खराब है। एंप्लई का इशू है। स्पाउस का प्रॉब्लम है, फैमिली
29:04
Speaker A
में इश्यूज है। तो क्या मैं नेगेटिविटी से घिरी हूं? तो मेरा सबकॉन्शियस वो नेगेटिविटी को ही वो इंप्रेशन बनाते रहेगा। मुझे क्या करना होगा? इट ऑल डिपेंड्स आप कितना मानते हो। देखिए मेरा तो मानना है कि 90% लोग आपको नेगेटिव
29:17
Speaker A
मिलेंगे। जिसके साथ हमें रहना है घर में भी हो सकते हैं। तो इसके लिए तो मैं हमेशा कभी-कभी जोक करता हूं कि एक आदमी डॉक्टर के पास गया कि मुझे 100 साल जीना है मैं क्या करूं? डॉक्टर बोलता है शादी कर ले।
29:28
Speaker A
तो सोचने लगा डॉक्टर शादी करने से मैं 100 साल कैसे जिऊंगा? बोला नहीं तू 100 साल जिएगा नहीं। 100 साल जीने की तेरी इच्छा ही खत्म हो जाएगी। [हंसी] दैट्स अ गुड वन। सही बात है। ब्यूटीफुली सही। तो घर में ही कभी-कभी स्ट्रेस होता
29:41
Speaker A
है, स्पाउस का स्ट्रेस होता है, तो इसको तो हम दूर नहीं कर सकते। मगर हमारा पॉजिटिविटी का सर्कल ऐसा बनाओ, आपका ओरा इतना पॉजिटिव बनाओ कि उनकी नेगेटिविटी की इफेक्ट नहीं होती। सो ये बहुत अच्छा बताया आपने कि एप्पल अगर
29:54
Speaker A
एक खराब एप्पल होता है और आसपास के एप्पल को भी बिगाड़ देते तो आप उस एप्पल को निकाल देते हो। तो आपको वहां से डिस्कनेक्ट होना होगा। तो आपको आपका जो सर्कल ऑफ इन्फ्लुएंस है वो पॉजिटिव रखना होगा।
30:05
Speaker A
बातें भी पॉजिटिव आपको सुननी होगी। जैसे पडकास्ट भी अच्छे वाले सुन लिए। अब कई लोग होते हैं कि जी ये अपना क्राइम और ऐसे वाले सीन्स देख लिए। क्राइम के चैनल वो कर लिए और फिर बोलते हैं कि ऐसे नाइट मेयर्स
30:19
Speaker A
आ गए। यू नो तो जाहिर सी बात है बिकॉज़ योर सबकॉन्शियस इज़ कंटीन्यूअसली टेकिंग दोज़ इंपेशंस। कुछ ऐसा बोलते हैं कि 11 मिलियन बिट्स पर सेकंड इज़ व्हाट द सबकॉन्शियस टेक्स इन। बट कॉन्शियस ओनली ऑपरेट्स एट 50 बिट्स पर सेकंड। ये सही है?
30:33
Speaker A
वो फ़िल्टर कर देता है ना। अननेसेसरी इंफॉर्मेशन को फिल्टर आउट कर देता है। सबकॉन्शियस माइंड के पास पहुंचने नहीं देता है। दूसरी बात है कि आपको किसके साथ बात करनी है, किसके साथ काम करना है, यह आपकी चॉइस है। मान लो आपके घर में ही कोई
30:45
Speaker A
नेगेटिव हो उसको नहीं बदल सकते। मगर बाहर किसके साथ काम करना है, यह तो आप सोच सकते हैं ना। पॉजिटिव लोगों के साथ रहिए, पॉजिटिव बातें करिए, पॉजिटिव फिल्में देखिए, पॉजिटिव किताब पढ़िए। तो आपके कंट्रोल में है ही। बहुत सारे रेकी वाले
30:58
Speaker A
मुझे बोलते हैं कि नहीं आपको सभी को मिलना नहीं चाहिए। हाथ नहीं मिलाना चाहिए। कुछ नेगेटिव लोग रहते हैं। मैं तो 35 साल से सबको गले भी मिलता हूं। हाथ भी मिलाता हूं। पब्लिक में घूमता रहता हूं। मुझे
31:09
Speaker A
किसी की नेगेटिविटी की इफेक्ट आई नहीं। क्योंकि मैंने मेरा पॉजिटिव ओरा इतना बना लिया है कि मुझे किसी की नेगेटिविटी इफेक्ट करती नहीं है कभी भी। बहुत तो मुझे तो अजीब लगता है कि क्यों लोग नहीं जाते। लोग डरते हैं सबको मिलने के
31:21
Speaker A
लिए। राइट? मैं तो सबको मिलता हूं। बिंदास मिलता हूं। और ये कॉन्शियस माइंड पे लोग कैसे काम करें? ये आपने बता दिया सबकॉन्शियस माइंड पे। कॉन्शियस माइंड भी डाउट्स क्रिएट करे जा रहा है। बिलीफ को चैलेंज करने में भी
31:33
Speaker A
इशू करता है। तो कॉन्शियस माइंड पे क्या करना है? कॉन्शियस माइंड में दो इंपॉर्टेंट चीज़ है। थिंकिंग एंड लॉजिक। हम दोनों भगवान ने हमें काम के लिए दिया है। ये दोनों कॉन्शियस माइंड के प्लान है। तो हमें थिंकिंग पॉजिटिव करना है, नेगेटिव
31:44
Speaker A
करना है, यह हमारी एक आदत होती है। थिंकिंग इज़ अ हैबिट। कोई लोग बचपन से नेगेटिव थिंकर होते हैं या बचपन से ही पॉजिटिव थिंकर होते हैं। डिपेंडिंग ऑन उनको बचपन में क्या एनवायरमेंट मिला है उसके ऊपर। मान लो नेगेटिव थिंकर है तो
31:57
Speaker A
उसको पॉजिटिव थिंकर बनने का चॉइस है उसके पास। उसके लिए मैंने मन की प्रार्थना करके किताब लिखी थी जो YouTube के ऊपर है। लाखों लोग देख रहे हैं, डाउनलोड कर रहे हैं। हिंदी में है मन की प्रार्थना। हम जरूर इन सारी लिंक्स को यहां रख देंगे।
32:10
Speaker A
तो डोंट वरी। प्लीज गो थ्रू एव्री सिंगल थिंग। इफ यू आर वेरी सीरियस। तो यह जरूर हमें नेक्स्ट स्टेप अपने लिए लेना है। तो मन की प्रार्थना बार-बार अगर सुनोगे या बोलोगे तो आपका पॉजिटिव प्रोग्रामिंग हो जाएगा और नेगेटिव थिंकर है तो पॉजिटिव
32:22
Speaker A
थिंकर बन जाएंगे। ऐसे मेरे पास लाखों बड़े-बड़े लोगों का एग्जांपल है जिन्होंने ये प्रार्थना सुन के अपने जीवन को पॉजिटिव बनाया। तो जो कॉन्शियस माइंड का पावर है उसको पॉजिटिव बनाइए। पहली बात यह है। दूसरी बात है कि बिग थिंकिंग करना शुरू
32:35
Speaker A
करिए। कभी-कभी क्या होता है? हमने छोटे एनवायरमेंट में बड़े हुए तो बिग थिंकिंग करने में मुश्किल होती है। मैंने डेविड फड की वो किताब पढ़ी थी थिंकिंगस मैजिक ऑफ़ थिंकिंग ऑफ़ थिंकिंग तब से मेरा बिग थिंकिंग स्टार्ट हो गया
32:46
Speaker A
था। तो बिग थिंकिंग करिए। पॉजिटिव थिंकिंग करिए। दूसरी बात लॉजिक बहुत जरूरी है मगर लॉजिक नुकसान भी करता है। लॉजिक कभी-कभी हमें रोक देता है। लॉजिक भगवान ने इसलिए दिया कि हम कोई गलत डिसीजन नहीं लें। इसलिए दिया है सेफ्टी के लिए दिया है कि
33:01
Speaker A
कोई गलत डिसीजन। तो कोई भी डिसीजन लेने के पहले अपना लॉजिक को अच्छी तरह से इस्तेमाल कर लीजिए। और बाद में डिसीजन लेने के बाद लॉजिक को बाजू में रख दीजिए। लोग क्या कर रहे थे? डिसीजन लेने के टाइम पे लॉजिक यूज़
33:12
Speaker A
नहीं करते। बाद में सोचते हैं यार मेरा डिसीजन सही था, गलत था। ऐसा होगा, वैसा होगा। बाद में लॉजिक स्टार्ट करते हैं। फिर उसका डिसीजन वीक पड़ता है। बाद में एक्शन भी वीक पड़ता है और जिंदगी में कुछ
33:23
Speaker A
नहीं कर पाते। तो मैं सबको कहता हूं कि लॉजिक का जितना इस्तेमाल करना है कर लीजिए बिफोर डिसीजन नॉट आफ्टर डिसीजन। ब्यूटीफुल एक सफल इंसान और निष्फल इंसान में क्या फर्क होता है? सफल इंसान डिसीजन लेने के पहले लॉजिक यूज़ कर लेता है। जैसे डिसीजन
33:38
Speaker A
लिया वो डिसीजन सही था। वो साबित करने के लिए मेहनत करना शुरू कर देता है। बी ब्यूटीफुल। निष्फल इंसान क्या करता है? डिसीजन लेता है बाद में डिसीजन सही था या गलत था उसके ऊपर सोचना शुरू कर देता है तो फिर एक्शन
33:50
Speaker A
नहीं ले सकता है। यह दोनों में फर्क होता है। राइट? बहुत तो ये देखना है। दूसरी बात यह है कि मेडिटेशन की बात आती है। बिजनेसमैन की बात करें तो बिजनेस में दो टाइप के लोग लीड करते हैं। एक होता है मैनेजर और एक होता
34:01
Speaker A
है लीडर। हम्। लीडर का काम क्या रहता है कि व्हाट टू डू डिसाइड करता है। मुकेश अंबानी लीडर है और बाद में मैनेजर होते हैं। व्हाट टू डू डिसाइड हो गया कि मुकेश अंबानी ने डिसाइड कर लिया कि हमें Jio बनाना है। बस डिसीजन
34:15
Speaker A
लेने का काम उसका है। बाद में वो मैनेजर को पकड़ा देता है कि Jio तुम्हें ऐसे बनाना है। बाद में वो मैनेजर का रोल शुरू होता है। ज्यादातर लोग क्या करते हैं? दोनों रोल करते हैं। व्हाट टू डू एंड हाउ टू डू।
34:24
Speaker A
डिसीजन भी खुद लेते हैं। बाद में उसको इंप्लीमेंट करने का, आदमी को बोलने का, सिखाने का सब कुछ वही करते हैं। तो जीवन में एक लेवल से आगे नहीं बढ़ते हैं। मैं सभी बिजनेसमैन को कहता हूं आप डिसाइड करिए
34:34
Speaker A
आपको मैनेजर बन के रहना है या लीडर बनके। अगर मल्टीपल बिजनेस करना है तो सिर्फ लीडर का रोल करिए। मैनेजर किराए पे मिल जाएगा या एमबीए कॉलेज हमारे लिए ही बनाई हुई है। वहां से डिग्री वाले आपको बस पैसा फेंको,
34:47
Speaker A
तमाशा देखो। वो आ जाएगा। आईएम के लोग भी आपकी नौकरी करने को आ जाएगा। और ये बहुत अच्छा बताया आपने। बिकॉज़ दोनों चीजों में फिर आप काफी कंफ्यूज्ड रहते हो और आगे आप कुछ कर नहीं पाते हो बिकॉज़ यू
34:57
Speaker A
आर डूइंग बोथ थिंग्स ऑल बोथ थिंग दूसरी बात क्या है कि सफल आदमी कौन होता है जो राइट टाइम पे राइट डिसीजन लेता है वोट सफल आदमी होता है और कौन ले सकता है जिनका मन शांत है वो
35:08
Speaker A
समझे ना जब हमारा माइंड डिस्टर्ब होता है तो हम गलत डिसीजन लेते हैं और एक गलत डिसीजन से बिजनेस को क्या नुकसान हो सकता है वो Tata का Nano एक एग्जांपल है और एक सही डिसीजन से फिर से आगे कैसे बढ़ सकते
35:20
Speaker A
हैं उनका Rang Rover और इसका Jaguar का डिसीजन है। तो बिजनेसमैन को तो एक-एक डिसीजन कितना फर्क कर सकता है?
35:28
Speaker A
तो बिजनेसमैन को तो मेडिटेशन बहुत करना चाहिए क्योंकि जितना कॉन्शियस माइंड शांत होगा ना उतना क्लियर कट डिसीजन ले पाएंगे। सर ब्रीथिंग पे आपका क्या विचार है? ब्रेथ वर्क पे?
35:38
Speaker A
ब्रीथिंग इज ब्रीज बिटवीन योर बॉडी एंड माइंड। हम अगर बॉडी से माइंड तक पहुंचना है तो यह ब्रीथिंग आपको काम आता है। और आपको पता है जैसे मेडिकल डॉक्टर में सिखाया जाता है कि हमारी ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम होती है दो टाइप की होती है
35:51
Speaker A
सिंपैथेटिक एंड पैरासिंैथेटिक। जब हम हाई फ्रीक्वेंसी पे रहते हैं तो सिंपैथेटिक जिसमें फाइट एंड फ्लाइट रिस्पांस होता है और पैरासिंैथेटिक जो शांत होता है। तो हमें ज्यादातर पैरासिंैथेटिक एक्टिवेटेड रहनी चाहिए और उसके लिए बेस्ट है वो डीप ब्रीथिंग। जितना डीप ब्रीदीिंग करोगे इतना
36:09
Speaker A
आपका मन शांत होगा। पैरासिंैथेटिक ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम काम करेगी। बॉडी में हीलिंग होगा। आपको मन की शांति का अनुभव होगा। आप एजलेस रहोगे। ये सब कुछ पैरासिंैथेटिक को एक्टिवेट करने के लिए। इसलिए प्राणायाम का बहुत ज्यादा रोल है।
36:25
Speaker A
मैं अभी-अभी एक दो साल से स्टार्ट किया। मुझे पहले इतनाेंस पता नहीं था। मगर अब मैं देखता हूं मेरी लाइफ में कितना चेंज है। सर हमने एक सूत्र बनाया है कि जो पीक परफॉर्मर्स है जैसे आप भी बोल रहे हो। हम
36:36
Speaker A
जितने भी इंटरव्यूज लेते हैं सब में यह लागू पड़ा है वो है मूवर्स मेडिटेशन ऑक्सीजनेशन विजुअलाइजेशन एक्सरसाइज रीडिंग समथिंग पॉजिटिव एंड स्क्राइबिंग नेगेटिव तो ये सब लोग जैसे आपने बताया वो करते ही है व्हाट अ वंडरफुल कॉम्बिनेशन तो एजलेस पे आते हैं हमारी और
36:55
Speaker A
आपकी मेरे भी एक चैप्टर है एजलेस ब्रेन और सर और डॉक्टर किन्नरी ने यह लिखी है एजलेस बॉडी तो व्हाट वास द विज़न कि क्यों आपको सबको एजलेस बनाना है या क्या ऐसा आपको प्रेरणा दी आपको इस किताब पे काम करने के
37:11
Speaker A
लिए? पहली बात तो यह है कि मुझे अभी तक जो भी कॉम्प्लीमेंट मिले ये फील्ड में आने के बाद दो चीजों के लिए के साहब कितने सालों से मैं देख रहा हूं आप ऐसे के वैसे ही हो। आप बूढ़े हो ही नहीं रहे हो।
37:21
Speaker A
हम यानी एजलेस नहीं हो रहे हो। दूसरा मुझे मिलता है कि आपकी लैंग्वेज बहुत सरल है। आप ऐसी भाषा में बात करते हो कि सब कुछ समझ में आ जाती है। अभी मुझे इंग्लैंड से एक आदमी का रिकॉर्डेड मैसेज आया है कि मैं
37:33
Speaker A
दुनिया के हर बड़े ट्रेनर को अटेंड कर चुका हूं। टोनी रोबिनंस की मैंने मास्टर यूनिवर्सिटी लेके रखी है। मगर मैंने आपका पडकास्ट देखा उसमें जो सिंपलीसिटी है ना आई एम इंप्रेस। मुझे आपको पास्ट ट्रेनिंग लेनी है, पर्सनल मेंटरिंग लेना है। इतने
37:46
Speaker A
के बाद भी तो मेरी मुझे जो कॉम्प्लीमेंट मिलती है सिंपल लैंग्वेज और ये फिर मैंने किताब पढ़ी थी दीपक चोपड़ा की इयरलेस बॉडी टाइमलेस माइंड। सर मैं इस पे एक बार यह बताना चाहूंगी कि हम सारे लोग इतनी किताबें पढ़ते हैं। देयर
37:59
Speaker A
आर मिलियंस ऑफ कॉपी सोल्ड वर्ल्ड वाइड। लेकिन डॉक्टर जितेंद्र आडिया जैसे कुछ ही निकलते हैं। तो ऐसा क्या होता है कि आप एक किताब पढ़ लेते हैं एंड यू गेट सो मच इंस्पायर्ड। कुछ किताबों ने मुझे बहुत जादू किया। जैसे
38:09
Speaker A
सेवन हैबिट्स ऑफ हाईली इफेक्टिव पीपल इगा ये सभी ने मुझे हाईली इंप्रेस किया है। सबसे पहले इंप्रेस किया मुझे डेल कारकी की किताब हाउ टू विन फ्रेंड एंड इनफ्लुएंस पीपल जो मैंने 10थ स्टैंडर्ड में पढ़ी थी। ओह वाओ
38:20
Speaker A
तब से मुझे लगा कि किताबें पढ़नी चाहिए और उससे फायदा होता है ऐसा। दीपक चोपड़ा ने अच्छा नाम कमाया उसकी वजह से और उसकी मैंने किताब पढ़ी मुझे अच्छी लगी। मगर उसकी लैंग्वेज बहुत डिफिकल्ट है। तो मुझे समझने में एज अ मेडिकल डॉक्टर मुझे तकलीफ
38:32
Speaker A
हुई तो आम आदमी को कितनी तकलीफ होती होगी। और जब मुझे मेरा यूएसपी पता चला कि मेरी लैंग्वेज बहुत सिंपल है। मैं सोचा यही सब्जेक्ट को मेरे हिसाब से मैं लिखूंगा। और ये एडलेस बॉडी का कांसेप्ट लाया। फिर
38:44
Speaker A
किन्नरी मेरा ट्रेनर बनने का आई थ्री ट्रेनर प्रोग्राम है। मुझे बोलती है सर मुझे आपके साथ एक किताब लिखनी है। वो भी सेम क्वालिफिकेशन वाली। मतलब मेरा एक ही सब्जेक्ट है जिसमें मैं तुम्हारे साथ लिख सकता हूं। एयरलेस बॉडी बोलती है मैं रेडी
38:56
Speaker A
हूं। वंडरफुल। तो फिर मैंने उसको प्रोजेक्ट दिया, काम दिया। 80% मेहनत उसकी है। मैं गाइड करता रहा। 200 से ज्यादा रिसर्च पेपर पढ़े हमने एजलेस के ऊपर और फिर हमने किताब लिखना शुरू किया। आप लोगों को इतना पढ़ने की जरूरत नहीं
39:09
Speaker A
होगी। आप हमें बस तीन टिप्स दे दीजिए कि ये एजलेस बॉडी हम कैसे कर सकते हैं। पहली बात तो यह है कि इंटेंशन क्रिएट करिए कि मुझे यंग रहना है। तो सबकॉन्शियस माइंड को एक कमांड चला जाएगा। दूसरी है
39:20
Speaker A
डिसिप्लिन लाइफ। इरेगुलर लाइफ नहीं होनी चाहिए। और तीसरा है मेडिटेशन, रिलैक्सेशन। बस मन को शांत करते जाइए। ये तीन चीजें ऐसी है जो आपको लाइफ में एडलेस बना देगी। वैसे बहुत सारी चीज हमने डिटेल में लिखी है। क्योंकि हम काफी बार इंटेंशन बाय एरर ऐसा
39:38
Speaker A
बनाते हैं। जैसे कि अरे मैं इतना थोड़ी चढ़ सकती हूं। मैं बूढ़ी हो गई हूं। यू नो हम बार-बार ऐसा बोल देते हैं। अरे मैं अब थक गई। मेरी तो उम्र हो गई है। तो ये भी तो एक सबकॉन्शियस पे कमांड ही तो जा रहा
39:48
Speaker A
है। रॉन्ग कमांड कमांड जा रहा है। पॉजिटिव कमेंट दीजिए। मुझे याद है रमेश ओजा भाई श्री जो पोरबंदर में रहते हैं संदीपनी आश्रम लाखों चाहकों है और वो अच्छे स्पीकर भी है उन्होंने मेरा प्रोग्राम रखा था उनके आश्रम में संदीपनी आश्रम में 3 घंटा
40:01
Speaker A
तक मुझे ऐसे बैठ के सुनते रहे ब्रेक भी नहीं देने दिया मैं 1ढ़ घंटे के बाद बोला भाई सिर्फ ब्रेक बोले क्या जरूरत है बोलो मैं चालू रहा फिर वो खड़े हुए वोट ऑफ थैंक्स के लिए वहीं पे उनके प्लेटफार्म पे और उन्होंने
40:13
Speaker A
क्या कॉम्प्लीमेंट दिया कि मैं विजुअलाइज कर रहा हूं कि मैं जब 65 इयर्स का होगा ना तब मैं डॉक्टर अडिया जितना यंग दिखूंगा उन्होंने अपना गोल रखा पब्लिक डिक्लेअ किया कि मैं अपने को यंग देखना चाहता हूं। तब मेरी 65 थी आज से 10 साल पहले की बात
40:27
Speaker A
है। तो बात ये है कि इतने बड़े आदमी ने ऐसा बड़ा कंप्लीमेंट भी दिया और उसने भी ये सोचा कि मुझे भी एनलेस बनना चाहिए। वाओ सर आप तो 100 साल तो वैसे ही जीने वाले हैं। तो अगले 25 साल की बात करते
40:37
Speaker A
हैं। 25 साल तक क्या मैंने प्लान कर लिया है मुझे। जी जी बिल्कुल। तो अगले 25 साल का आपका प्लान बता दीजिए। एक और पतंजलि सूत्र पे आप मुझे ऑफ स्टूडियो बता रहे थे। तो जो आपका बहुत ही बखूबी सुंदर प्लान है कि
40:48
Speaker A
विदाउट चार्ज यू आर गोइंग टू सर्व द नेशन बाय टीचिंग पीपल पतंजलि योगसूत्र तो थोड़ा सा उस पे बता दीजिए। पहली बात तो है कि मैं 25 साल का था तब डॉक्टर बन गया था तो पढ़ने में लगा है।
41:00
Speaker A
उसके 25 साल तक मैं मेडिकल डॉक्टर का काम किया यानी कि बॉडी का काम किया बॉडी डॉक्टर का। फिर मेरे पास माइंड पावर आया जोसेफ मर्फी की वजह से 25 साल तक मैं दुनिया को माइंड पावर सिखाता रहा। यानी मन
41:10
Speaker A
का डॉक्टर का रोल किया। बाद में मुझे रियलाइज हुआ कि समथिंग इज बिय्ड माइंड पावर। और वह कैसे पता चला कि मेरे मन में बहुत सवाल थे जिसके मुझे जवाब इतने सालों से नहीं मिले थे। कितनी सारी किताबें
41:22
Speaker A
पढ़ी। भगवान कहां पे है? भगवान कौन है? ईश्वर क्या है? भगवान और ईश्वर में क्या फर्क है? मेरा कंफ्यूजन चल रहा था। सब लोग मोक्ष की बात करते थे। मेरे प्रोग्राम में बहुत सारे लोग आते थे। बोलते थे मेरा गोल
41:34
Speaker A
है मोक्ष पाने का। तो मुझे पता नहीं था मोक्ष क्या होता है। तीसरा होता है कि चमत्कार सब लोग करते हैं। जैसे मैंने महेश योगी का देखा था। योगी फ्लाइंग करते हैं। बाद में मैंने ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ योगी में
41:44
Speaker A
पढ़ा कि आदमी दो जगह पे एक साथ रह सकता है। हाजिर हो सकता है। दीवाल के आरपार हो सकते हैं। ये सब चमत्कार रियल में होते हैं कि नहीं होते? कहां होते हैं और कैसे होते हैं? मुझे जवाब नहीं मिल रहा था।
41:57
Speaker A
दूसरी बात था कि हम सुनते हैं कि कर्म के रिकॉर्ड होते हैं। अच्छे कर्म किया तो चित्रगुप्त लिखता है। बाद में हमें उसका फल मिलता है। बुरा किया तो पनिशमेंट मिलती है। तो ये कार्मिक रिकॉर्ड कौन से फॉर्मेट
42:08
Speaker A
में होता है और कौन रखता है? रियल में चित्रगुप्त है या नहीं है? अगर यह सिस्टम सही है तो कहीं ना कहीं तो रिकॉर्ड होगा ना। तो रिकॉर्ड कहां पे है? कैन आई गो देयर एंड हैक इट? मैं वहां जाके हैक कर
42:20
Speaker A
सकता हूं। मेरा रिकॉर्ड पढ़ सकता हूं और उसको हैक करके बदल सकता हूं? यह मेरे मन में सवाल आते थे। फिर मैं सोचा मैं जो ज्ञान दे रहा हूं तो बाहर से पढ़ा लिखा ज्ञान दे रहा हूं। महावीर स्वामी ने बुद्ध
42:31
Speaker A
भगवान ने ज्ञान दिया। कृष्ण भगवान ने गीता का ज्ञान दिया। वो तो अपने अंदर से दिया था। तो ये अंदर से यानी कहां से आता है?
42:39
Speaker A
क्या मेरे अंदर भी वो ज्ञान है? क्या मैं उसको निकाल सकता हूं? और मैंने कहीं पढ़ा था कि कॉन्शियस सबकॉन्शियस के बीच में एक ढक्कन रहता है जिसको क्रिटिकल फिल्टर कहते हैं। वो क्रिटिकल फिल्टर खुल गया तो अंदर
42:49
Speaker A
का डीप नॉलेज बाहर आता है जो अभी तक दुनिया में है ही नहीं। तो मैं सोचा कि यह ढक्कन खोलने वाली टेक्नोलॉजी क्या मुझे मिल सकती है कि मेरा भी ढक्कन खुल जाए। अभी तो मैं सिखाया हुआ सीख रहा हूं।
43:00
Speaker A
पहले मैं ढक्कन था अब मेरा ढक्कन खुल जाए। खुल जाए तो मेरे अंदर से कुछ आ जाए तो ऐसा बहुत सारे मेरे मन में सवाल आते थे और लोग एक 200 300 500 साल जीते तो वो सही है कि
43:11
Speaker A
नहीं है। तो बहुत सारे मेरे मन में सवाल था जिसका जवाब नहीं मिला था और अचानक मुझे पता चला कि ये पता नहीं एक सूत्र में ये जवाब मिल सकता है और मैंने पढ़ा और मेरे सभी सवाल का जवाब मिल गया मुझे। यह सभी
43:23
Speaker A
सवाल का जवाब। बोला वाओ यह तो जबरदस्त चीज है। फिर मैंने भगवत गीता के साथ कंपेयर किया। मैं सोचा कि इक्वली इंपॉर्टेंट शास्त्र हमारा पढ़ा है जो भगवत गीता जितना इंपॉर्टेंट है। वाओ मगर दुख की बात यह है कि भगवत गीता हर घर
43:35
Speaker A
में है। पतलज योग क्षेत्र किसी के घर में नहीं है। यस घर में नहीं है। छोड़ो किसी ने सुना भी नहीं है। और मैंने सिखाने का शुरू किया तो मैं एक साल पहले दिल्ली गया था। मुझे लोकसभा देखना था। तो मेरे एक आईएएस ऑफिसर फ्रेंड
43:47
Speaker A
है राजेश गोयल करके। वो लोकसभा में उनकी ऑफिस है और ओम बिरला स्पीकर के पीआरओ है। तो मैंने उसको फोन किया कि गोयल साहब मुझे लोकसभा देखने को आना है लाइव देखनी है। बोला आ जाओ कल। तो मैं चला गया। फिर उसने
44:00
Speaker A
मुझे लोकसभा अटेंड करवाई। बाद में ऑफिस में लंच मंगवाया। फिर बोले डॉक्टर आजकल क्या चल रहा है? उसको पता है मैं कुछ नया-नया सोचता हूं। मैं बोला मैं पता नहीं योग के ऊपर काम कर रहा हूं। वो बोलता है
44:11
Speaker A
वो क्या है? अब आईएएस ऑफिसर ऑफ 30 इयर्स ऑफ एक्सपीरियंस लोकसभा में बैठे हैं हिंदुस्तान की गवर्नमेंट के गोद में और उनको यह पता नहीं कि पतली योग क्या है। बोला यार यू आर माय मोटिवेशन। आप जैसे लोगों को पता नहीं है पता नहीं युत्र क्या
44:25
Speaker A
है कि आम आदमी को क्या पता होगा। मैंने 50 लोगों को बोला उसमें से 45 लोगों ने यही पूछा कि ये क्या है? पता नहीं सूत्र। हमारा इतना इंपॉर्टेंट ग्रंथ हमारा हिंदू संस्कृति का भगवत गीता जितना इंपॉर्टेंट एंड यूज़फुल और लोग बोलते हैं वो क्या है?
44:40
Speaker A
मतलब अब यह मैं चैलेंज लूंगा। अब कोई यह नहीं पूछेगा क्या है? यह हर घर में पतली योग में घुसाऊंगा। जैसे प्रेरणा का जन हर गुजराती घर में मिलेगा ऐसा। तो हर गुजराती घर में अभी तो हर हिंदुस्तानी के घर में
44:54
Speaker A
मेरी ये पतंजलि योग रहेगी। थोड़ा सा पांच मिनट में बता दीजिए कि होता क्या है? मतलब पतंजलि योगूत्र का बेस क्या है और उसमें से आपने क्या सीखा और हम क्या अप्लाई कर सकते हैं उसमें से? सबसे पहले
45:05
Speaker A
बात के योग के लिए लोगों को कंफ्यूजन है। योग का मतलब जो रामदेव बाबा दिखाते हैं आसन मुझको योग समझते हैं। योग का लिटरली मीनिंग होता है यूनियन। जोड़ान किसका यूनियन? आत्मा का परमात्मा के साथ। जीव का शिव के साथ। ये जोड़ान को योग कहते हैं।
45:20
Speaker A
योग ये आसन को नहीं कहते हैं। सबसे पहली बात यह है लोगों को यही गलतफहमी है। लोग योगासन करते हैं। बोले मैं योग करता हूं। नो वो योगासन कर रहे हैं। योग इज अ जर्नी। अब यहां हम जो है हमारी आत्मा
45:33
Speaker A
है उसकी जर्नी है भगवान तक पहुंचने की उसको योग कहते हैं और वहां जो जोड़ा होता है समाधि होती है उसको योग कहते हैं। योग इज अ वे ऑफ़ लाइफ। योग इज नॉट ओनली आसन। हां आसन इज अ पार्ट ऑफ दैट। बट ओनली आसन
45:47
Speaker A
इज नॉट अ योग। और हम ज्यादातर जो योग टीवी में देखते हैं, लोगों से सीखते हैं, वो योग और ये योग में फर्क है। वो मत्स्य ऋषि ने हठ योगा करके जो एक पुस्तक लिखा है, उन्होंने वो स्टार्ट किया वो हठ योगा जो
46:02
Speaker A
रामदेव बाबा दिखा रहे टीवी पे वो है। वो भी अच्छा है आसन। मगर पतंजलि योग सूत्र जो सिखाते हैं वह अलग है। पतंजलि योग सूत्र ने एक ही आसान की बात की है। उसके 196 सूत्र है। एक्चुअली 5000 साल पहले से योग
46:16
Speaker A
हमारे देश में सिखाया जाता था मगर कोई सिस्टमाइज नहीं था। 2000 साल पहले पतंजलि ऋषि इस दुनिया में आए पृथ्वी पे आए। उन्होंने उसको सिस्टमाइज किया और उन्होंने एक पुस्तक लिखा जिसका नाम है पतंजलि योग सूत्र जिसमें 196 सूत्र है। सूत्र यानी वन
46:34
Speaker A
लाइन कमांड। तो 196 सूत्र है जो चार पार्ट में डिवाइड किए गए हैं और इसका पहला पाद है समाधि पाद। समाधि पाद में पूरा थ्यरी है कि समाधि क्या होती है? हम क्यों दुखी हैं? यह सब चीजें सिखाई है। उसके बाद है
46:48
Speaker A
साधन पाद। साधन पाद में ये अष्टांग योग की बात की है। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एंड समाधि। तो उन्होंने बताया कि परमात्मा तक पहुंचने के लिए यह सब चीजों से आपको पास होना पड़ेगा। ये उन्होंने रास्ता बता दिया और माइलस्टोन
47:05
Speaker A
बता दिया और सीक्वेंस में बताया है कि यम जब तक आप फॉलो नहीं करोगे तब तक नियम फॉलो नहीं होगा। क्या होता है सर?
47:11
Speaker A
यम यानी कोड ऑफ कंडक्ट टू अदर्स। हमें दूसरे के साथ यानी सोशल डिसिप्लिन क्या होनी चाहिए?
47:17
Speaker A
हमने लोगों के साथ कैसा बिहेवियर करना चाहिए ये यम। उसके बाद आता है नियम। खुद के साथ कैसा बिहेवियर करना चाहिए? पर्सनल डिसिप्लिन की बात आई है। वो है नियम। यम और नियम जब आपस्ट कर लोगे तभी आपको आसन पे
47:31
Speaker A
जाना है जो हम करते हैं योगासन योगासन तो इट इज अ कंट्रोल ऑफ बॉडी उसके बाद आता है प्राणायाम कंट्रोल ऑफ प्राण ब्रीथ उसके बाद कंट्रोल ऑफ सेंसेस इंद्रिय प्रत्याहार आप यह पांचों स्टेज करोगे बाद में आपको धारणा स्टार्ट करना है और धारणा
47:48
Speaker A
यानी ट्राइंग टू फोकस समवेयर इसको धारणा कहते हैं एकाग्र करने की कोशिश करना उसके बाद आता है ध्यान जब एकाग्र हो जाते बहुत देर तक एक ही जगह पे आपका मन टिका रहता है तो उसको ध्यान कहते हैं और यह ध्यान डीप
48:03
Speaker A
हो जाता है तब समाधि आती है तो यह उन्होंने बहुत अच्छी सीक्वेंस बनाई है। लोग सिर्फ यही समझते हैं कि बस हमने योग के आसन कर लिए तो हमारा काम हो गया। कुछ करने की जरूरत नहीं है। ज्यादा प्राणायाम
48:15
Speaker A
पतंजली ऋषि ने सिर्फ एक ही आसन की बात की है। 84 आसन जो बाहर हम सीखते हैं वो मत्स्य ऋषि का है। हठ योगा का पार्ट है। उन्होंने सुखासन कहा है। आप पलोठी वाड़ी ने बेज जिसमें आप आराम से बिना हिले बैठ सकते
48:29
Speaker A
हैं। वो आसन सर्व बेस्ट आसन है। अच्छा। हां और प्राणायाम 10 टाइप के करते हैं। उन्होंने एक ही प्राणायाम की बात की है वो बाह्य कुंभक यानी सांस को अंदर लेना, बाहर निकालना और बाहर रोक के रखना बाह्य कुंभक की बात की
48:42
Speaker A
है। एक ही प्राणायाम और एक ही आसन योग क्योंकि इसका गोल है भगवान तक पहुंचना मोक्ष पाना है। यानी योग के आसन करके सिर्फ बॉडी को कंट्रोल कर सकते हैं। ब्रेथ को कंट्रोल करके प्राणायाम करके अपने प्राण को कंट्रोल कर सकते हैं। बस यहां
48:57
Speaker A
है। भगवान तक पहुंचना है तो ये आठ स्टेप से गुजरना पड़ेगा। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एंड समाधि ये है। तो उन्होंने सेकंड है जो चैप्टर है जिसको साधन पाद कहते हैं या साधना पाद कहते हैं। उसमें उसने अष्टांग
49:12
Speaker A
योग की बात की और पांच अंश में बताया है और उसके बाद आता है विभूति पाद जिसमें बाकी के पाठ बताया धारणा ध्यान और समाधि जिसमें उसने विभूति के बात की है। भवति यानी एक्स्ट्रा पावर कि आप यह रास्तों पे
49:24
Speaker A
चलोगे तो आपके अंदर क्या-क्या पावर होगा एज अ साइड इफेक्ट जिसमें योगिक फ्लाइंग आएगा लेविटेशन आएगा बाद में आप यहां बैठे-बैठे गुम हो सकते हैं। अब मैं आपसे बात कर रहा हूं और मैं दिखना बंद हो जाऊंगा आपको।
49:37
Speaker A
हम मैं यहां दो जगह पे यहां भी मैं पोर्टकास्ट शूट कर रहा हूं। दिल्ली में भी कर रहा हूं। यह भी पॉसिबल हो सकता है। हम यह है। बहुत सारी 30 टाइप के ऐसी सिद्धियां बताई है जो आप कर सकते हैं। आप
49:47
Speaker A
पूरे ब्रह्मांड में घूम सकते हैं। एक्स्ट्रा सेंसरी कर सकते हैं। तो सर जो ये आम इंसान है उसको पतंजलि योग सूत्र पढ़ के क्या मिलेगा? व्हाट वुड बी द आउटकम फॉर अ नॉर्मल ऑर्डिनरी पर्सन?
50:01
Speaker A
मैं बताता हूं। तो पहले ये बता दूं तो ये विभूति आप प्रगट करोगे। मगर पतंजलि ने बोला है कि इसमें आप लालच में मत आ जाना। यह आपका आखिरी मुकाम नहीं है। यह तो बीच में आने वाले फूल है।
50:13
Speaker A
साइड बेनिफिट जिससे हां साइड बेनिफिट है जिससे आप लालच में आ सकते हैं। यहां रुकना नहीं है। आपका गोल है आत्मा का कल्याण यानी भगवान तक पहुंचने का। समाधि तक पहुंचना है। हम यहां रुक गए तो फिर आप समाधि तक नहीं
50:24
Speaker A
पहुंच सकते हैं। समाधि तक पहुंच गए यानी आपने कार्मिक रिकॉर्ड डिलीट कर दिया। जन्मजन्म के फेरे से छूट गए हैं और परमानेंट शांति में रह सकते हैं। तो यह हमारा गोल है। अब आम आदमी को क्या बेनिफिट है? उनका अगर मोक्ष का गोल नहीं है फिर भी
50:40
Speaker A
यह रास्ते पर चलेगा और वह एटलीस्ट ध्यान तक पहुंचेगा समाधि तक नहीं पहुंचे धारणा और ध्यान तक तो ध्यान में बैठ के ये जितने भी फूल है मैंने बताया बेनिफिट है ये ऑटोमेटिकली आ जाएगा फिर आपको गाड़ी बंगले
50:54
Speaker A
के लिए विजुअलाइज नहीं करना पड़ेगा ऑटोमेटिकली आपके पास आ जाएगा धन आ जाएगा मान सम्मान आ जाएगा सब कुछ आ जाएगा तो आई थिंक भगवत गीता का एक सूत्र है ना योगक्षेम वहामहम बाद में तो फिर मैं ही सब
51:06
Speaker A
कुछ प्रकट कर दूंगा दूंगा। भगवान कहते हैं कि इफ यू आर इन माय शरण सो इन्होंने यह भी बात किया है। ईश्वर प्राणिद की बात की है उसने। पता नहीं योग ने भी एक सूत्र में कहा है। तो यह है योग
51:16
Speaker A
का जो पहला सूत्र है अथ योग अनुशासनम करके पहला सूत्र है। तो जब आदमी इसके लिए तैयार होता है जब अपने आप को समझने लगता है जब उनको दुखों में से बाहर आता है तब वह सीखना शुरू करता है। यूजली पतली योग सूत्र
51:30
Speaker A
सब नहीं सीखते। तो अब योग की शुरुआत होती है अनुशासन के साथ। दूसरा है योग चित्त वृत्ति निरोध योग का मतलब होता है चित्त की वृत्ति चित्त यानी एक्चुअली मन बुद्धि एंड अहंकार चित्त में से जब वृत्ति निकलती
51:45
Speaker A
है विचार निकलते रहते हैं ये कर डालो वो कर डालो इस इसको निरोध करना यानी इसको रोकना इससे ऊपर उठना इसको निरोध कहते हैं। तो योग की वन लाइन में डेफिनेशन दी है। योग चित्तवृत्ति निरोध तो पूरे इतने सारे
52:01
Speaker A
सूत्र हैं। चित्त की वृत्ति को कैसे निरोध करना है उसके ऊपर ये पूरी गाइडलाइंस है। तो जो आदमी अपनी चित्त की वृत्ति को निरोध कर लेगा वो परम सत्य को पामेगा, परम शांति को पामेगा, भगवान तक पहुंचेगा और रास्ते
52:14
Speaker A
में आने वाले जितने भी बेनिफिट है इवन विभूतियां प्रकट होगी। यह सब कुछ होगा तो यह होगा। तो आम आदमी के लिए यह सीखना जरूरी है। दूसरी बात है कि हमारे जीवन के प्रॉब्लम है उसको उन्होंने बताया क्लेश।
52:27
Speaker A
यह वृत्ति दो टाइप की होती है। क्लेश एंड अक्लेश। क्लेश यानी जो हमें दुख में लेकर जाने वाली और अक्लेश यानी जो हमें सुख देने वाली। तो हमारी वृत्ति दो टाइप की होती है। तो जब तक ये वृत्ति चलती रहेगी
52:38
Speaker A
उसका हम निरोध नहीं करेंगे तो दुख दूर होंगे ही नहीं। अब दुनिया में इतने सारे दुख हैं। हर जगह सॉल्व करवाने को जाते हैं। मगर दुख तो बढ़ते ही जा रहे हैं। यह मेरा अनुभव है। 50 साल से मैं पब्लिक
52:49
Speaker A
फील्ड में हूं। पहले एज अ मेडिकल डॉक्टर था। अब ट्रेनर बन के हूं। तो मैंने देखा है लोगों के दुख दूर होते ही नहीं जा रहे। बढ़ते जा रहे हैं। पैसे का दुख, स्वास्थ्य का दुख, रिलेशनशिप का। उसका जो मूल कारण
53:00
Speaker A
है उनकी चित की वृत्ति है। यह जब तक चित की वृत्ति को नहीं समझेंगे तब तक ये दुख दूर होने वाले ही नहीं है। तो आपके जीवन में जो भी समस्या है उसका 100% जो आपको सॉल्यूशन है वो ये देता है।
53:13
Speaker A
पतनाली योग सूत्र देते हैं। बाकी कोई नहीं देता है। मैंने देख लिया। कॉमन आदमी ने भी इसलिए सीखना चाहिए कि उनका प्रॉब्लम का सॉल्यूशन वहां पे है। चित्ति निरोध और उसमें सबसे पहला एक है कि अज्ञानता यह सबसे बड़ा रूट कॉज है।
53:27
Speaker A
अज्ञानता क्या है कि हमें सत्य क्या है? असत्य क्या है? यह नहीं पता। हम सुख को दुख समझते हैं। दुख को सुख समझते हैं। ये अज्ञानता ही हमारे हर दुख का कारण है। क्लेश का कारण है। जबरदस्त बात की है
53:37
Speaker A
उसने। बहुत सुंदर। बहुत सुंदर। तो इसमें कुछ ध्यान वगैरह की कोई स्पेशल प्रैक्टिस रहती है। या ध्यान एक ही रास्ता है। उसका ध्यान का रास्ता ही और कुछ नहीं करना। अब वैसे ये योगासन तो आएगा ही। मगर उसमें तो एक ही
53:50
Speaker A
आसन की बात की आसन जो एक ही प्राणायाम की बात की है। बाकी ध्यान ध्यान ध्यान बस धारणा ध्यान समाधि उसको संयम कहते हैं। जब आप तीनों की प्रैक्टिस कर लेते हैं तो आप संयम करना सीख जाते हैं। फिर जिसके ऊपर
54:02
Speaker A
संयम करो उसके ऊपर आप इन्फ्लुएंस करते हैं। मान लो मैं संयम मास्टर बन गया। मैं आपके ब्रेन को हैक कर सकता हूं। हम मैं आपको कैसा सोचना है वो मैं आपको हैंडल कर सकता हूं। इतना तक पॉसिबल है। कुछ भी
54:15
Speaker A
पॉसिबल है। संयम करना है इसको करके। ये जो मेंटलिस्ट होते हैं अभी भी मैंने एक मेंटलिस्ट का प्रोग्राम अटेंड किया था फिलहाल लखनऊ में और मेंटलिस्ट काफी जो आप माइंड पावर वगैरह है आई थिंक हमारे कंट्री में भी एक दो
54:28
Speaker A
बहुत ही पॉपुलर सुहानी शाह वगैरह है तो आपका क्या कहना है वो कैसे करते हैं वो कैसे करते हैं मुझे तो पता नहीं है मगर ये पतनाली योग के रास्ते से होगा मैं अभी नया नया हूं इसके अंदर मैं तो एक साल से
54:39
Speaker A
इसके ऊपर गया हूं तो मेरी तो अभी प्रैक्टिस चल रही है मुझे अभी स्वयं की प्रैक्टिस करनी है यानी धारणा ध्यान और समाधि की अभी तो तो मैं धारणा के लेवल पे हूं। तो धारणा क्या होता है?
54:49
Speaker A
धारणा यानी ट्राइंग टू फोकस ऑन समबडी। अभी जैसे मैं आंख बंद करके बैठता हूं थोड़ी देर मेरे सांस के ऊपर ध्यान देता हूं। अनुलोम-विलंब और ध्यान देता हूं। हानापान कहते हैं जिसमें विपासना में तो थोड़ी देर में एक विचार आ जाता है। फिर वो विचार आ
55:02
Speaker A
जाता है। जैसे बंदर कूदता रहता है। उसको पकड़ के पास में लेके आओ। फिर उधर भागेगा पकड़ के। तो जैसे मैं बैठता हूं इधर के विचार आते हैं। फिर मैं बोलता हूं यार मैं तो ये सांस के ऊपर मुझे फोकस करना है। फिर करता
55:12
Speaker A
हूं। फिर उधर जाता है। तो अभी तो वो लेवल पे मैं हूं। राइट राइट। अभी मैं कंटीन्यूअसली प्रैक्टिस करके मुझे फिर ध्यान के लेवल पर जाना है कि मैं 10 मिनट तक एक ही चीज़ के बारे में सोचता रहूं।
55:22
Speaker A
सांस के ऊपर ध्यान यानी 10 मिनट तक 15 मिनट तक सांस के अलावा मेरे में कुछ विचार नहीं आए। हम्म सेकंड लेवल है। हम्म फिर इतना घुस जाऊं उसमें कि मैं अपने आप को ही भूल जाऊं। उसको समाधि कहते हैं।
55:33
Speaker A
धारणा ध्यान एंड समाधि। तो इट मे टेक वन ईयर टू 10 इयर्स मे बी। मुझे पता नहीं मैं कब तक पहुंचूंगा। अगर मैंने मैं तो कन्विंस हो गया हूं। मैंने प्रैक्टिस करना शुरू किया है। अभी तक विभूति वाला लेवल
55:44
Speaker A
नहीं आया। मुझे विभूति का इंटरेस्ट भी नहीं है। मुझे तो मुझे आपका ना वो क्लेरिटी ऑफ जो है वो बहुत पसंद है। बिकॉज़ यही हमें करना है कि मुझे ये चाहिए। ये मैंने आई हैव रिटन इट इन स्टोन। अब मैंने मेरे विजुअलाइजेशन में
55:57
Speaker A
वो इमेज डाल दी एंड आई एम डूइंग टुवर्ड्स इट। ऑल द बस लाखों लोगों तक मेरा तो अभी यही है कि लाखों लोगों तक ये पतंग युगत्र के ज्ञान पहुंचाना है ताकि सभी के प्रॉब्लम सॉल्व करने की चाबी वहां पे है।
56:08
Speaker A
वाओ। तो हमारी ऑडियंस ये कैसे एक्सेस करेगी? पतंजलि। पहली बात तो मेरी किताब अगले महीने तक आ जाएगी। तीनों भाषा में फिर मैं ऑनलाइन प्रोग्राम शुरू करूंगा। सब पडकास्टर रेडी है इसके ऊपर पूरा एपिसोड देने को। तो एक-एक के ऊपर मैं एक-एक एपिसोड दे सकता
56:23
Speaker A
हूं। जैसे समाधि पाद के ऊपर एक दे सकता हूं। बाद में साधन पाद के ऊपर दे सकता हूं। विभूति पाद के ऊपर दे सकता हूं। लास्ट का है केवल ये पाद। हम तो ये चार के ऊपर चार एक-ए घंटे के एपिसोड
56:34
Speaker A
करेंगे तो दुनिया को पता चलने लगेगा। खास बात तो यह है मैं इसका कोई चार्ज नहीं लेने वाला हूं। मैं प्रोफेशनलली नहीं करूंगा। माइंड पावर तो मैं पैसा लेके किया है अभी तक। मुझे धन चाहिए था इसलिए अब धन
56:45
Speaker A
कमा लिया है अच्छी तरह से। अब मुझे सिर्फ सेवा के भाव से करना है और टेक्नोलॉजी का ज्यादा यूज़ करना है क्योंकि मैं कितना घूम सकता हूं और मेरा हजार का ऑडियंस है तो मैं 10 प्रोग्राम करूंगा तो लाख लोग
56:56
Speaker A
आएंगे। ये तो हमारा एक पडकास्ट लाखों लोग देख सकते हैं। तो ज्यादातर मैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से करूंगा। तो मेरे जितने भी पडकास्टर फ्रेंड है सभी ने बोला है हम पता नहीं योग के ऊपर एक-एक के ऊपर एक-एक एपिसोड करेंगे।
57:07
Speaker A
अमेजिंग अमेजिंग ताकि लोगों को फ्री में मिले। तो बने रहिएगा। हम डिटेल्स भी डाल देंगे क्योंकि यह सीखना मैं काफी एंशिएंट विज़डम के बारे में बात करती हूं और आज भी मुझे लगता है कि मुझे जितना भी प्राप्त हुआ है
57:19
Speaker A
वो शायद मेरी गायत्री की साधना के हिसाब से प्राप्त हुआ है। तो कहीं ना कहीं इन सारी एंशिएंट विज़डम में बहुत कुछ छुपा हुआ है जो साइंटिफिक है। द ब्यूटी इज़ कि यह सब कुछ जो आपने कहा अभी मन का संयम, चित्त की
57:31
Speaker A
वृत्ति को समझना, ध्यान क्यों रखना, अगर 10 से 15 मिनट एक चीज पे ध्यान करते हो, तो कैसे वो अपनी लाइफ में आप सक्सेसफुल की तरफ सारी चीजें अपने आप बन जाती है। तो दिस इज़ ऑल वेरी साइंटिफिक। दिस इज़ नॉट
57:43
Speaker A
समथिंग व्हिच इज़ अब इतने सालों पहले मतलब साइंस बिय्ड साइंस ही है ये कि हमारे ऋषि मुनियों को इन सबके बारे में पता था। तो हम काफी हद तक आईक्यू आईक्यू आईक्यू करते रहते हैं। और ज्यादा पढ़ाई और डिग्री।
57:57
Speaker A
लेकिन यह कहीं ना कहीं एक इंट्यूटिव कोशेंट है। एक अलग टाइप का आईक्यू है व्हिच कम्स आउट। बहुत ही बढ़िया। अब दूसरी बात यह है कि जैसे हम विश्वुरु बनना चाहते हैं तो हम अमेरिकन या वेस्टर्न को हम रॉकेट कैसे बनाना है ये तो सिखा नहीं
58:11
Speaker A
सकते। वो तो हम वो हमें सिखाएंगे। तो हमें विश्व गुरु बनना है तो हमारा जो विरासत में हमें मिला है जो आध्यात्मिक ज्ञान और पता नहीं सूत्र तो मैं कहता हूं गजब की चीज है। अगर इसको हम वेस्टर्न तक लेके जाए तो
58:24
Speaker A
कितना अच्छा ये हो सकता है ऐसा वेस्टर्न जितने भी शोध हो रही है रिसर्च इज मोर आउटसाइड बट हमारी जो ये है वो इट्स मोर इनसाइड तो इन टू आउट एंड आउट टू इन बोथ आर रिक्वायर्ड तो बहुत अच्छा हो
58:36
Speaker A
जाएगा। दूसरी बात है मैं टोनी रबिंस को अटेंड करने को गया था। डे ट्वीट डेस्टिनी बाल गया था। उन्होंने वहां चक्र बैलेंसिंग सिखाया। तब मुझे पता चला कि इंडियन कल्चर का कितना वैल्यू है। वहां डेट डेस्टिनी में चक्र बैलेंसिंग करवा रहा है। तब उसके
58:50
Speaker A
बाद मैंने चक्र बैलेंसिंग के बारे में सीखना चालू किया। डेट ट्वीट डेस्टिनी अटेंड करके कि वेस्टर्न लोग ही हमारा शास्त्र सिखा रहे हैं और हम क्यों यहां बैठे-बैठे उनकी बातें सिखा रहे हैं। अब्सोलुटली। और हमारी जो यंग जनरेशन है वो
59:01
Speaker A
इससे काफी वंचित होते जा रही है। तो हमारा लिमिटलेस ब्रेन लैब का भी यही प्राण है कि हम ऐसे सारी चीजों को एक्सपेरिमेंट करके साइंटिफिकली ला पाए। जैसे हमने कुछ-कुछ होमा पे स्टडी किया था। कुछ हमने मेडिटेशन पे करे थे। तो इन सब में जो एक पूरा देयर
59:17
Speaker A
इज़ अ रनसेंस दैट यस ये तो साइंस में बखूबी हो रहा है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो मैं आपको अब कुछ चंद मिनट बचे हैं हमारे पास। एक ऐसा सवाल पूछूंगी। कोई ऐसी चीज है जो आपकी लाइफ में अभी तक मैनिफेस्ट
59:29
Speaker A
नहीं हुई। आपके माइंड के पावर को यूज़ करने के बावजूद। ऐसा तो है नहीं। अभी जितना किया उससे ज्यादा ही हुआ। मैं कहता हूं ना बियों्ड विजुअलाइजेशन। मुझे एक बार फॉरेन जाना था 50 बार गया। मेरा एक छोटा सा घर चाहिए था।
59:41
Speaker A
मैं लग्जरियस घर में रहता हूं। मेरा एक न्यूयॉर्क में घर है। एक अहमदाबाद में है। दुनिया के हर लग्जरी मैंने एंजॉय कर लिया है। दुबई पहली बार आया तो अटलांटिस में रुका था मैं। तो और क्या चाहिए मुझे? तो
59:51
Speaker A
मेरा सभी कुछ मैनिफेस्ट हुआ है। और आई एम वेरी श्योर कि जो मेरा ये अभी आखिरी सपना है कि मुझे आत्मा का डॉक्टर बनके अभी काम करना है। यानी पतान योग घरघर तक पहुंचाना है। आप जैसे लोगों की हेल्प से मिल जाएगा।
60:03
Speaker A
यह तो हमारा देश का भला होने वाला है और इन सबकी हेल्प से भी प्लीज डू लाइक सब्सक्राइब एंड शेयर दिस क्योंकि हमारी जितनी भी यंग जनरेशन है सारे जितने भी हमने बात करी मन के कंट्रोल पे मन के
60:14
Speaker A
नियंत्रण पे मन को समझना अवचेतन मन के स्टेप्स को करना और सबसे सबसे मोस्टेंट अगर सर बोल रहे हैं कि पतंजलि योग सूत्र में सारे बाकी का सब कवर हो जाएगा। बिना माइंड पावर बियों्ड माइंड माइंड पावर छोड़
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Speaker A
दिया। अरे वाह बियों्ड माइंड पावर है तो जरूर इसको देखिएगा और अभी कुछ सवाल हम रैपिड फायर के तौर पे पूछेंगे आपको। सो तैयार है?
60:37
Speaker A
बिल्कुल। आपका सबसे फेवरेट खाना? रोटला बाजराना। [हंसी] बाजराना रोटला बैक टू बैक टू द बेसिक सर गुजरात से। रोटला भगत कहते हैं मुझे लोग। अच्छा ओके वंडरफुल। आपका सबसे सुंदर शहर जो आज आप तक गए हैं। इतने सारे कंट्रीज
60:49
Speaker A
में सांडिया को। ओह व्हाई इज दैट। क्यों? बिकॉज़ वेदर इज़ वैरी नाइस। स्पेसिफिक ओसन इज देयर एंड हिली एरिया ओसन एवरीथिंग। थ्रूआउट द ईयर इट इज़ द सेम वेदर। सबसे फेवरेट बुक। इतनी सारी बुकों में से एक ही बुक अगर आप
61:01
Speaker A
सेवन हैबिट्स ऑफ हाईली इफेक्टिव पीपल स्टीफन कवे की उसमें से सबसे एक चीज जो आपको अभी भी चित्रवत याद हो फ्रॉम द सेवन हैबिट्स एवरीथिंग एव्री सेंटेंस आई रिमेंबर आई हैव रेड इट मोर देन 10 टाइम्स अमेजिंग एंड आई बिकम प्रोएक्टिव फ्रॉम द फर्स्ट
61:16
Speaker A
हैबिट यू नो बाय इंप्लीमेंटिंग ऑन मसेल्फ आई वाज़ वैरी रिएक्टिव पर्सन आई वाज़ वेरी एंग्री यंग मैन अच्छा यस यस अमेजिंग अमेजिंग मुझे तो लगता है इट इज़ अ अनदर रिलीजन सेवन हैबिट्स शुड बी टॉट एवरीवेयर और मालूम है
61:29
Speaker A
मैंने तो बहुत 40 साल की उम्र में पढ़ी। मगर मुझे लगा इंडिया में स्कूल और कॉलेज में क्यों नहीं सिखाते? अगर मुझे अभी पता चला मेरा ग्रैंड चाइल्ड है वो फर्स्ट स्टैंडर्ड में पढ़ता है। वहां सेवन हैबिट सिखा रहे हैं उनको।
61:40
Speaker A
अहमदाबाद में। ओह वंडरफुल। फर्स्ट स्टैंडर्ड में सेवन हैबिट सिखाते हैं उनको यहां। वही सेम जो स्टीफन सेम सेम सेम स्टीफन जो ओह वंडरफुल वंडरफुल। तो आई वाज सो इम्प्रेस्ड के जो मेरा सपना था वो ऑटोमेटिक हो गया। स्कूल में सिखाना।
61:52
Speaker A
वंडरफुल। ये तो जबरदस्त है। सेवन आई एम यू आर। इम्प्रेस्ड बाय एंड आई हैव यूज्ड इट इन माय लाइफ। अमेजिंग। साथ के साथ अमेजिंग कॉफी या चाय क्या पीते हैं आप?
62:01
Speaker A
चाय पीता हूं। ओके। और सबसे आखिरी सवाल एक्सरसाइज के बारे में आपका क्या कहना है?
62:07
Speaker A
तीन घंटा मेरा हेल्थ के लिए होता है मॉर्निंग में। प्लीज 6:00 बजे उठता हूं। 9:00 बजे तक चलता है। उठ के सबसे पहले कपालभाति करता हूं। थोड़ी सी चाय और खाखरा खा लेता हूं। बाद में मेरा फिर ये प्राणायाम और यह मेडिटेशन
62:19
Speaker A
स्टार्ट होता है। बैठता हूं। मैं प्राणायाम ये करता हूं। उसके बाद मैं मॉर्निंग वॉक में जाता हूं। सन गेजिंग करता हूं। नंगे पांव लोन में घूमता हूं। आधा घंटा घर पे आता हूं। फिर मेरा घर में जिम की फैसिलिटी है। मेरी सोसाइटी में भी
62:34
Speaker A
जिम है। जिमिंग करता हूं। उसके बाद फिर मेरे टीचर आते हैं। गुरु आते हैं जो मुझे एक घंटा योगासन करवाते हैं। ऐसे करते-करते मेरे 9:00 बज जाते हैं। 3 आवर्स आई स्पेंड फॉर माय हेल्थ एवरीडे मॉर्निंग। अगेन मूवर्स हर वो पीक परफॉर्मर हर वो
62:49
Speaker A
सक्सेसफुल बंदा हर वो सक्सेसफुल इंसान करता है सर तीन घंटा देते हैं हमें कम से कम 30 मिनट तो जरूर देने चाहिए इस पूरी चीज को लेके तो बहुत-बहुत धन्यवाद और शुक्रिया श्वेता जी मजा आ गया अब्सोलुटली बहुत
63:02
Speaker A
सीखने को मिला आप लोग इस एपिसोड को जरूर शेयर करिएगा बिकॉज़ बहुत सारी ऐसी छोटी-छोटी चीजें हैं वापस से रिपीट सुनना उसको अप्लाई करना बिकॉज़ नोइंग इज नोइंग डूइंग इज डूइंग और हमारी तरफ से सबको शुभकामनाएं क्योंकि लिमिटलेस ब्रेन लैब को
63:18
Speaker A
हेल्थ, वेल्थ एंड हैप्पीनेस यही एक सपना देखा है। आपको और हमें मिलके इस सपने को पूरा करना है। अगर आपके कोई एपिसोड्स है, आपको कोई इंडिकेटर्स है कि आपको कोई स्पेशल हेल्प चाहिए तो प्लीज डू कमेंट में लिखना और यह कमेंट में जरूर लिखना कि
63:33
Speaker A
मूवर्स को आप कितनी देर प्रॉमिस के साथ इस एपिसोड के बाद आप करेंगे। तो बहुत-बहुत धन्यवाद और शुक्रिया आप सबका। थैंक यू।
Topics:अवचेतन मनमाइंड पावरडॉ. श्वेता आतियासबकॉन्शियस माइंडकॉन्शियस माइंडमन की शक्तिसफलता के रहस्यमाइंड कंट्रोलमाइंड ट्रेनिंगजीवन में बदलाव

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