यह वीडियो हिंदू धर्म में बीफ खाने की धार्मिक और सांस्कृतिक सच्चाइयों को स्क्रिप्चर्स और इतिहास के आधार पर समझाता है।
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Key Takeaways
- हिंदू धर्म में मांसाहार की प्रथा और शाकाहार दोनों का ऐतिहासिक और धार्मिक आधार है।
- मांस खाने को पाप नहीं माना जाता, बशर्ते धार्मिक अनुष्ठान के साथ किया जाए।
- कई मंदिरों में आज भी मांस का भोग चढ़ाया जाता है और भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।
- महाभारत और रामायण में मांस खाने के स्पष्ट उदाहरण मिलते हैं, जो परंपरागत मान्यताओं को चुनौती देते हैं।
- वेजिटेरियनिज्म को हिंदू धर्म का अनिवार्य हिस्सा मानना गलत है, धर्म में विविधता मौजूद है।
What the video covers
- केरला स्टोरी 2 फिल्म में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के प्रति नकारात्मक नैरेटिव पर चर्चा।
- प्यू रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के अनुसार आधे से अधिक हिंदू नॉन-वेजिटेरियन हैं।
- हिंदू धर्मग्रंथों में मांस खाने के संदर्भ और धार्मिक नियमों में विरोधाभास।
- ब्राह्मणों और अन्य जातियों में मांस खाने की प्रथा और धार्मिक अनुष्ठानों में मांस का उपयोग।
- मंदिरों में मांस का भोग चढ़ाने और प्रसाद के रूप में वितरण की ऐतिहासिक और वर्तमान प्रथाएं।
- महाभारत और रामायण में पांडवों और श्री राम के मांस खाने के उदाहरण।
- स्वामी विवेकानंद के उद्धरण जो रामायण और महाभारत में मांस और मदिरा के सेवन को दर्शाते हैं।
- मांस खाने के लिए धार्मिक अनुष्ठान और देवताओं को भोग चढ़ाने की आवश्यकता।
- शाकाहार और मांसाहार के बीच हिंदू धर्म में विविधता और सांस्कृतिक मतभेद।
- वीडियो का उद्देश्य वेजिटेरियनिज्म या नॉन-वेजिटेरियनिज्म को प्रमोट करना नहीं, बल्कि स्क्रिप्चर्स की सच्चाई दिखाना है।
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Speaker A
नमस्कार दोस्तों, हाल ही में एक और नफरती प्रोपेगेंडा फिल्म मार्केट में आई थी।
Speaker A
नहीं, मैं अभी वाली की बात नहीं कर रहा, मैं इससे पिछली वाली की बात कर रहा हूं।
Speaker A
केरला स्टोरी 2, इसमें वही घिसा-पिटा नैरेटिव था, हर मुस्लिम को विलेन दिखा दो और हर हिंदू लड़की को बेवकूफ भेड़ की तरह दिखाओ।
Speaker A
लेकिन एक सीन बड़ा खास था, जो बड़ा वायरल भी हुआ।
Speaker A
फिल्म के ट्रेलर में एक हिंदू लड़की को जबरदस्ती बीफ खिलाते हुए दिखाया जाता है।
Speaker A
इंटरेस्टिंगली, कमेंट्स में भी यही डिस्कशन चल रही थी, किसी को परोटा के बिना बीफ देना क्राइम है।
Speaker A
यह केरला स्टोरी नहीं, नॉर्थ इंडियन स्टोरी है, हमें परोटा बीफ कॉम्बो पसंद है।
Speaker A
अब इमेजिन करो, 100 हिंदू लोग एक कमरे में बैठे हैं, उनमें से कितने मांस खाते होंगे?
Speaker A
गेस करके बताओ, 20, 30?
Speaker A
वेल, प्यू रिसर्च सेंटर का डेटा कहता है 56।
Speaker A
आधे से ज्यादा हिंदू नॉन-वेजिटेरियन हैं और 45% ब्राह्मण भी नॉन-वेजिटेरियन हैं।
Speaker A
तो सवाल यह उठता है कि यह आइडिया कहां से आया कि असली हिंदू सिर्फ शाकाहारी होता है?
Speaker A
कुछ हिंदुओं के लिए आखिर बीफ इतना सेंसिटिव इशू कैसे बन गया?
Speaker A
इसका जवाब हजारों साल पुराने स्क्रिप्चर्स और हमारे इतिहास में छिपा है।
Speaker A
आइए समझते हैं आज के इस वीडियो में।
Speaker A
देश में आज के दिन करोड़ों हिंदू ऐसे हैं जो धार्मिक कारणों की वजह से मीट नहीं खाते।
Speaker A
और यह स्क्रिप्चर्स के हिसाब से सही है, जैसे कि महाभारत में अनुशासन पर्व के चैप्टर 116 में।
Speaker A
युधिष्ठिर भीष्म से पूछते हैं, मांस खाने से क्या नुकसान होता है?
Speaker A
इस पर भीष्म कहते हैं कि राजन, जो जीवन भर किसी भी प्राणी का मांस नहीं खाता, वह स्वर्ग में श्रेष्ठ और विशाल स्थान पाता है, मांस खाने वाले कुंभीपाक नरक में पकाए जाते हैं।
Speaker A
अहिंसा परम धर्म है, परम संयम है, परम दान है, परम तपस्या है।
Speaker A
अब यह सुनकर आपको लगेगा दोस्तों कि बात क्लियर है, लेकिन रुको जरा, वही भीष्म उसी कन्वर्सेशन में थोड़ी देर बाद कुछ और भी कहते हैं।
Speaker A
मनु को कोट करते हुए वह कहते हैं, जो मांस वेदों के नियमों के अनुसार मंत्रों द्वारा सैंक्टिफाई किया गया है।
Speaker A
पित्रों के लिए होने वाले अनुष्ठान में बना है।
Speaker A
वह मांस शुद्ध है।
Speaker A
मतलब एक ही कन्वर्सेशन में दोनों बातें कही जा रही हैं और यह कॉन्ट्रडिक्शन सिर्फ भीष्म तक सीमित नहीं है।
Speaker A
व्यास संहिता जो हिंदू धर्म की एक प्रमुख टेक्स्ट है, उसमें साफ लिखा है।
Speaker A
कि ब्राह्मण को किसी भी ऐसे जानवर का मांस नहीं खाना चाहिए जो रिलीजियस सैक्रिफाइस के अलावा किसी दूसरे पर्पस से मारा गया हो।
Speaker A
और जब वह किसी धार्मिक समारोह में पुजारी के रूप में कार्य कर रहा हो, तब ब्राह्मण को मांस खाना चाहिए।
Speaker A
क्षत्रिय को देवताओं को और अपने पित्रों को प्रसन्न करने के बाद मांस खाना चाहिए और वैश्य अपने पित्रों की पूजा करने के बाद खरीदा हुआ मांस खा सकते हैं।
Speaker A
अब मनुस्मृति को देखो।
Speaker A
मनुस्मृति के चैप्टर 5 वर्स 27 में कहा गया है कि आप मांस खा सकते हैं।
Speaker A
जिसे मंत्र से पवित्र किया गया हो, पानी से स्प्रिंकल किया गया हो।
Speaker A
अब आप सोच रहे होंगे कि ठीक है, स्क्रिप्चर्स में थोड़े बहुत रेफरेंसेस मिल जाते हैं।
Speaker A
लेकिन प्रैक्टिकली कौन खाता है?
Speaker A
आज का जमाना अलग है, परंपराएं बदल चुकी हैं।
Speaker A
यह बात डाइजेस्ट होनी काफी मुश्किल लगती है, लेकिन बात सच है।
Speaker A
आज के समय में भी मांस खाना बहुत से ब्राह्मणों के कल्चर का हिस्सा है।
Speaker A
और यह कोई छुपी हुई बात नहीं है, कोंकण क्षेत्र के कई सरस्वती ब्राह्मण मछली को समुद्र पुष्प कहते हुए मछली खाते हैं।
Speaker A
उनका कहना है कि एक समय सरस्वती नदी सूख गई थी, जिससे अकाल पड़ गया था और केवल मछली ही उनके जीने का सहारा थी।
Speaker A
बंगाली ब्राह्मणों में भी मछली खाना आम बात है और मछली सिर्फ खाना ही नहीं, बल्कि उनके रिचुअल्स का भी हिस्सा है।
Speaker A
बंगाली शादियों में एक रिचुअल है, तत्व रसम, जिसमें दूल्हे का परिवार सजी हुई रोहू मछली दुल्हन के परिवार को उपहार में देता है।
Speaker A
मृत्यु की रस्मों में भी 13वें दिन मत्स्यमुखी अनुष्ठान में मछली खाई जाती है।
Speaker A
और सिर्फ मछली ही नहीं, तारापीठ मंदिर में मछली और मटन, कालीघाट मंदिर में मटन।
Speaker A
आसाम के कामाख्या मंदिर में मछली और मटन, उत्तर प्रदेश के तरकुल्हा देवी मंदिर में मटन।
Speaker A
ओडिशा के विमला मंदिर में मछली और मटन और तमिलनाडु के मुनियांडी स्वामी मंदिर में तो चिकन और मटन बिरयानी का भोग लगता है।
Speaker A
सही सुना आपने दोस्तों।
Speaker A
मंदिर में बिरयानी।
Speaker A
ऐसे बहुत से मंदिर हैं जहां पर देवी और देवताओं को मांस का भोग चढ़ाया जाता है।
Speaker A
और भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।
Speaker A
कई लोग कहते हैं कि स्क्रिप्चर्स में पशु बलि का जो मेंशन किया गया है, वह सिर्फ एक मेटाफर है।
Speaker A
जिसका मतलब है आपके अंदर के पशु की बलि देना।
Speaker A
लेकिन असलियत में दोस्तों, स्क्रिप्चर्स के बाहर भी हम हिस्ट्री में मंदिरों में लिटरली ऐसा होते हुए देख रहे हैं।
Speaker A
मांस और धर्म साथ-साथ चलते रहे हैं।
Speaker A
अब यहां पर एक ऐसा सवाल आता है जो बहुत से लोगों के मन में उठता है।
Speaker A
कि क्या पांडवों ने और श्री राम ने भी मांस खाया होगा?
Speaker A
अब कॉमन सेंस लगाई जाए तो जंगल में कौन 12 साल तक उनके लिए पनीर बटर मसाला बना रहा होगा?
Speaker A
क्या केवल पेड़ों से फल तोड़कर खाते हुए पांडवों ने 12 साल निकाल दिए?
Speaker A
हमें यहां पर गेस करने की जरूरत नहीं है।
Speaker A
महाभारत में वन पर्व के अध्याय 256 पर जरा नजर डालिए।
Speaker A
युधिष्ठिर को एक सपना आता है जिसमें कुछ हिरण उनके पास आते हैं और कहते हैं कि उनके भाइयों ने इतने सारे हिरणों को मार डाला है।
Speaker A
और अब केवल विशेष बचे हैं।
Speaker A
वे युधिष्ठिर से अनुरोध करते हैं कि उन्हें बीज की तरह रहने दें ताकि वे फिर से बढ़ सकें।
Speaker A
युधिष्ठिर को दुख होता है और फिर वह अपने भाइयों से कहते हैं कि हम 1 साल और 8 महीने से उन पर निर्भर होकर खा रहे हैं।
Speaker A
अब हम काम्यक वन में चलते हैं।
Speaker A
1 साल और 8 महीने, इमेजिन करो, पांडव इतने लंबे समय तक हिरण का मांस खा रहे थे।
Speaker A
कि जंगल में हिरण ही खत्म होने लग गए।
Speaker A
अब यही सवाल रामायण में श्री राम को लेकर उठता है।
Speaker A
क्या राम ने भी मांस खाया?
Speaker A
सच बात यह है दोस्तों कि वेदों और वाल्मीकि रामायण में भी मीट खाने के उदाहरण मिलते हैं।
Speaker A
स्वामी विवेकानंद ने भी अपनी किताब द ईस्ट एंड द वेस्ट में लिखा है।
Speaker A
आधुनिक वैष्णव एक दुविधापूर्ण स्थिति में खुद को पाते हैं।
Speaker A
रामायण और महाभारत में ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहां राम और कृष्ण को मांस का सेवन करते हुए और मदिरा पीते हुए दिखाया गया है।
Speaker A
सीता देवी रिवर गॉडेस गंगा को कसम देती हैं कि वे मांस, चावल और वाइन के हजार मर्तबान ऑफर करेंगी।
Speaker A
सीता जी गंगा को मीट ऑफर कर रही हैं।
Speaker A
यह वाल्मीकि रामायण का अयोध्या कांड अध्याय 52 श्लोक 89 है।
Speaker A
स्वामी विवेकानंद इसी श्लोक का उल्लेख कर रहे हैं।
Speaker A
और महाभारत के उद्योग पर्व अध्याय 58 श्लोक 5 का, जहां संजय कहते हैं कि उन्होंने कृष्ण और अर्जुन को चंदन का लेप लगाए हुए।
Speaker A
फूलों की माला पहने हुए और मधवासव पीते हुए देखा।
Speaker A
और अर्जुन की अपनी कसम देखिए, द्रोण पर्व चैप्टर 73।
Speaker A
जब अर्जुन जयद्रथ से लड़ने जाते हैं तो वह कहते हैं कि अगर मैं कल तक जयद्रथ का वध नहीं कर पाता तो मेरा भी वही हश्र हो जो उनका होता है।
Speaker A
जो अपने मां या बाप की हत्या करते हैं या किसी ब्राह्मण की हत्या करते हैं या किसी के बारे में गलत बोलते हैं।
Speaker A
या खीर अथवा मांस खाते हैं देवताओं को भोग लगाए बिना।
Speaker A
समझ रहे हो दोस्तों, अर्जुन यह नहीं कह रहे कि मांस खाना पाप है, वह यह कह रहे हैं कि देवताओं को भोग लगाए बिना मांस खाना गलत है।
Speaker A
मतलब मीट खाना नॉर्मल था, बस एक रिचुअल प्रोटोकॉल फॉलो करना था।
Speaker A
अब आप में से जो लोग हिमाचल, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा जैसी स्टेट्स में रहने वाले हिंदू हैं।
Speaker A
उन्हें यह सब सुनकर बहुत अजीब लग रहा होगा।
Speaker A
क्योंकि इन सभी स्टेट्स में मांस को छूने से भी हमारा धर्म भ्रष्ट हो जाता है।
Speaker A
और अर्जुन देवताओं को मांस का भोग चढ़ाने की बात कर रहे हैं।
Speaker A
लेकिन बात यह है दोस्तों कि बहुत से मंदिरों में आज भी ऐसा होता है।
Speaker A
वेस्ट बंगाल के दक्षिणेश्वर काली मंदिर और थनथनिया कालीबाड़ी मंदिर और केरल के प्रासिनिक कड़ावू मंदिर में मछली का भोग चढ़ाया जाता है।
Speaker A
और इसके अलावा रामायण के मैं कुछ और श्लोक भी बता देता हूं जहां मांस खाने के रेफरेंसेस हैं।
Speaker A
कहीं आपको लग रहा हो वह पुराने एक-दो श्लोक चेरी पिक किए गए हों तो।
Speaker A
अयोध्या कांड में अध्याय 52 श्लोक 102, जहां राम और लक्ष्मण के एक बोर, एंटीलोप और हिरण का शिकार कर उनका मांस खाने की बात कही गई है।
Speaker A
अध्याय 96 के श्लोक 1 और 2 में रोस्टेड मीट की बात की गई है।
Speaker A
सुंदरकांड के अध्याय 36 में जब हनुमान सीता जी के पास संदेश लेकर जाते हैं तो कहते हैं कि राम ना तो मांस खाते हैं ना ही मदिरा का सेवन करते हैं।
Speaker A
यानी सुंदरकांड में राम का मांस नहीं खाना एक ऐसी बात है जो स्पेसिफिकली मेंशन की गई है।
Speaker A
जब कोई चीज स्पेसिफिकली मेंशन होती है तो इसका मतलब यह है कि वह नॉर्मली होती थी।
Speaker A
और अब नहीं हो रही है, उसका ना होना अनयूजुअल है।
Speaker A
अब कुछ शाकाहारी लोग हैं जो हर जगह मदिरा को शहद कहते हैं और मांस को कंदमूल और फल।
Speaker A
इनका एजेंडा वेजिटेरियनिज्म को प्रमोट करना है।
Speaker A
और मैं इनकी इंटेंशन की रिस्पेक्ट करता हूं।
Speaker A
इनफैक्ट मैं खुद वेजिटेरियन हूं, मैं कभी मांस नहीं खाता और इस वीडियो के जरिए ना ही मैं नॉन-वेजिटेरियनिज्म को प्रमोट कर रहा हूं।
Speaker A
मैं यहां आपको स्क्रिप्चर्स की सच्चाई दिखा रहा हूं।
Speaker A
यह कहना कि हमारे हिंदू स्क्रिप्चर्स सिर्फ और सिर्फ 100% प्योर वेजिटेरियनिज्म को प्रमोट करते हैं, यह गलत है।
Speaker A
बृहद अरण्यक उपनिषद के चैप्टर 6 सेक्शन 4 में श्लोक 18 को भी देख लीजिए, बताया गया है कि अगर कोई विद्वान पुत्र चाहता है।
Speaker A
तो उसे एक विगरस बैल के मांस के साथ पके हुए चावल खाने चाहिए।
Speaker A
उसे और उसकी पत्नी को यह घी के साथ खाना चाहिए।
Speaker A
और बात केवल स्क्रिप्चर्स की नहीं है।
Speaker A
हमें यहां पर एक्चुअल हिस्ट्री में भी इसके एविडेंस मिलते हैं कि प्राचीन भारत में मांस खाना आम बात थी।
Speaker A
चरक संहिता में कई बीमारियों के इलाज के लिए मांस खाना रेकमेंड किया गया है।
Speaker A
लेकिन सबसे बड़ा सवाल जो यहां पर उठता है वह यह कि यह सब बदला कैसे?
Speaker A
कब से और क्यों वेजिटेरियनिज्म को शुद्ध माना जाने लगा?
Speaker A
और मांस को अशुद्ध माना जाने लगा।
Speaker A
इसकी कहानी आगे आएगी वीडियो में।
Speaker A
लेकिन इससे पहले क्या आपने नोटिस किया दोस्तों?
Speaker A
कैसे इस वीडियो में इतने सारे अलग-अलग रेफरेंसेस का इस्तेमाल किया गया है?
Speaker A
कहीं पर कोई सर्वे है तो कहीं पर कोई हिस्टोरिकल टेक्स्ट।
Speaker A
इतने सारे डेटा को कंपेयर करने में काफी वक्त लगता है।
Speaker A
लेकिन आज एआई से इस तरीके की रिसर्च, डेटा एनालिसिस और रिपोर्ट्स यह सब काफी तेजी से हो सकता है।
Speaker A
एआई से आज लोग घंटों की रिसर्च मिनटों में कर रहे हैं, प्रोफेशनल प्रेजेंटेशंस तैयार कर रहे हैं।
Speaker A
बिना कोड लिखे अपनी पूरी वेबसाइट्स और प्रोजेक्ट्स बना रहे हैं।
Speaker A
यहां तक कि इस वीडियो में जो आपने विजुअल्स देखे, उनमें भी एआई ने बहुत मदद करी है।
Speaker A
यह सारी चीजें मैं आपको सिखाता हूं।
Speaker A
अपनी एआई मास्टरक्लास में।
Speaker A
यह 3 घंटे की वर्कशॉप है जहां मैं पर्सनली लाइव आकर आपको 25 सबसे इंपॉर्टेंट एआई टूल सिखाता हूं।
Speaker A
अगला सेशन इसी संडे को हो रहा है और यह आपके लिए आखिरी ऑपर्चुनिटी है जॉइन करने के लिए।
Speaker A
जॉइन करने का लिंक नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा या फिर आप इस क्यूआर कोड को स्कैन कर सकते हो।
Speaker A
अभी तक 1 लाख से ज्यादा लोग इस एआई रेवोल्यूशन का हिस्सा बन चुके हैं और यह आपके लिए सबसे अफोर्डेबल और फास्टेस्ट ऑपर्चुनिटी है अपने आप को एआई में अपस्किल करने की।
Speaker A
जल्दी से जाकर जॉइन कर सकते हो।
Speaker A
अब आते हैं अपनी इस शिफ्ट की कहानी पर।
Speaker A
इसकी कहानी शुरू होती है लगभग फिफ्थ सेंचुरी बीसी में।
Speaker A
महावीर जैन ने स्ट्रिक्टली वेजिटेरियन डाइट की वकालत की।
Speaker A
जियो और जीने दो।
Speaker A
गौतम बुद्ध ने वैसे तो एक बार कहा था कि अगर कोई भिक्षा में भिक्षु को मांस ऑफर करता है तो भिक्षु को खा लेना चाहिए।
Speaker A
क्योंकि एक भिक्षु को कुछ मांगना नहीं चाहिए।
Speaker A
लेकिन इसके अलावा आमतौर पर उन्होंने भी हमेशा वेजिटेरियनिज्म को ही प्रमोट किया है।
Speaker A
अब यहां की हिस्ट्री बड़ी इंटरेस्टिंग है।
Speaker A
इसी रीजन से जैन धर्म और बौद्ध धर्म के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए हिंदू धर्म में शाकाहार को शामिल किया गया।
Speaker A
कई हिंदू, स्पेशली जो मुख्य रूप से ब्राह्मण और व्यापारी थे, वह शाकाहारी बन गए।
Speaker A
ब्राह्मणों को इससे एक मोरल अथॉरिटी मिली कि हम मांस नहीं खाते।
Speaker A
इसलिए हम शुद्ध हैं।
Speaker A
तुमसे ऊपर हैं।
Speaker A
और व्यापारी भी शाकाहारी बन गए क्योंकि वह पूर्ण शाकाहारी आहार का खर्च उठा सकते थे।
Speaker A
पैटर्न समझे यहां पर आप दोस्तों।
Speaker A
वेजिटेरियन होना एक इकोनॉमिक प्रिविलेज थी।
Speaker A
जो अफोर्ड कर सकते थे।
Speaker A
वह शुद्ध बन गए।
Speaker A
और जो अफोर्ड नहीं कर सकते थे।
Speaker A
उन्हें अशुद्ध घोषित कर दिया।
Speaker A
डॉक्टर बी आर अंबेडकर ने नोट किया था कि फूड रिस्ट्रिक्शंस ने दो डिवाइडिंग लाइंस बनाई।
Speaker A
एक शाकाहारी और मांसाहारियों के बीच और दूसरी।
Speaker A
वह जो बीफ खाते हैं और जो बीफ नहीं खाते हैं उनके बीच।
Speaker A
उन्होंने कहा यह दूसरी लाइन वह थी जिसने अछूतों को दूसरों से अलग किया।
Speaker A
डॉक्टर अंबेडकर की यह राइटिंग दोस्तों आपको विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर मिल जाएगी।
Speaker A
इसका भी लिंक आपको रिसोर्स डॉक्यूमेंट में मिलेगा।
Speaker A
डॉक्टर अंबेडकर ने जिस डिवाइडिंग लाइन की यहां पर बात की है वह कोई थ्योरेटिकल चीज नहीं है।
Speaker A
बल्कि एक्चुअल नंबर्स में भी दिखती है।
Speaker A
तीन लार्ज स्केल गवर्नमेंट सर्वेस ने अनुमान लगाया है कि ज्यादातर भारतीय नॉन-वेजिटेरियंस हैं।
Speaker A
इन्होंने नॉन-वेजिटेरियंस की परसेंटेज एस्टीमेट की है 63% से 77% के बीच।
Speaker A
अब कम्युनिटीज की बात करें तो और भी इंटरेस्टिंग डेटा देखने को मिलता है।
Speaker A
भारत के समुदायों में सबसे एक्सटेंसिव सर्वे एंथ्रोपोलॉजीकल सर्वे ऑफ इंडिया 1993 में किया गया।
Speaker A
इसका नाम था पीपल ऑफ इंडिया।
Speaker A
500 सोशियोलॉजिस्ट को उनके लोकल कम्युनिटीज की नॉलेज के आधार पर चुना गया और 3000 रिसर्चर्स की टीम के साथ फील्ड पर भेजा गया।
Speaker A
उन्होंने देश की 4635 कम्युनिटीज में 736 ट्रेड्स पर रिसर्च की।
Speaker A
8 साल तक यह काम चला और उन्होंने 46000 पेजेस की रिपोर्ट तैयार की।
Speaker A
46000 पेजेस की एक रिपोर्ट।
Speaker A
इस रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग रिलीजंस में लगभग 88% इंडियन कम्युनिटीज मीट ईटर्स हैं।
Speaker A
प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे से एक रिलीजियस डिवाइड भी देखने को मिलता है।
Speaker A
पता चलता है कि हिंदू समुदाय में सिर्फ 44% लोग वेजिटेरियन हैं।
Speaker A
जबकि जैन समुदाय में 92% लोग वेजिटेरियन हैं।
Speaker A
और यह कोई कोइंसिडेंस नहीं है।
Speaker A
जो पूरी हिस्ट्री मैंने आपको बताई वही बात यहां पर साफ-साफ दिखती है।
Speaker A
जो लोग स्ट्रिक्टली वेजिटेरियन डाइट अफोर्ड कर सकते थे, वही लोग जैनिज्म में आए हैं।
Speaker A
इनमें केवल 3% एससी और 1% एसटी हैं।
Speaker A
यहां तक कि आज भी जैंस इंडिया की वेल्दिएस्ट कम्युनिटी है।
Speaker A
अब सवाल यहां पर यह उठेगा कि क्या बाकी 56% हिंदुओं को धर्म से कुछ लेना-देना नहीं था?
Speaker A
ऐसा नहीं है।
Speaker A
39% हिंदू ऐसे हैं जो नॉन-वेजिटेरियन हैं, लेकिन कंडीशंस अप्लाई करते हैं।
Speaker A
पहली उनकी धार्मिकता उन्हें कुछ ही स्पेसिफिक टाइप की मीट खाने से रोकती है।
Speaker A
और दूसरी कि वह कुछ स्पेसिफिक दिनों में मांस खाने से रुक जाते हैं।
Speaker A
जैसे कि मंगलवार को मीट नहीं खाएंगे, नवरात्रि में नहीं खाएंगे।
Speaker A
कुछ हिंदू पूरे सावन में मांस खाने से परहेज करते हैं।
Speaker A
इस सर्वे के अनुसार सिर्फ 16% हिंदू ऐसे नॉन-वेजिटेरियन हैं जिनके लिए कोई रिस्ट्रिक्शन नहीं है।
Speaker A
और सबसे इंपॉर्टेंट बात।
Speaker A
कास्ट अफेक्ट्स चॉइस।
Speaker A
सर्वे यह भी दिखाता है कि एससी, एसटी और ओबीसी में नॉन-वेजिटेरियंस की परसेंटेज ज्यादा है।
Speaker A
इन कम्युनिटीज में 60% नॉन-वेजिटेरियंस थे, जबकि जनरल कैटेगरी में 47% नॉन-वेजिटेरियंस थे।
Speaker A
साल 2006 में हुए द हिंदू और सीएनएन आईबीएन के स्टेट ऑफ द नेशन सर्वे में भी यह फर्क दिखता है।
Speaker A
करीबन 15000 रेस्पोंडेंट्स के इस सर्वे में दिखा कि 88% ट्राइबल्स मीट खाते हैं।
Speaker A
जबकि ब्राह्मणों में से 45% मांसाहारी थे।
Speaker A
ध्यान से सुनो इस नंबर को।
Speaker A
45% ब्राह्मण नॉन-वेजिटेरियन हैं।
Speaker A
भारत सरकार के एनएसएसओ सर्वे में एक और इंटरेस्टिंग चीज पता लगी, यह सर्वे 101000 हाउसहोल्ड्स पर किया गया।
Speaker A
और पता चला कि हिंदुओं के बीच जो बीफ खाने वाले थे, उनमें से 70% एससी, एसटी थे।
Speaker A
एक बार फिर से जिस डिवाइडिंग लाइन की बात डॉक्टर अंबेडकर ने की थी।
Speaker A
वह यहां एक्चुअल नंबर्स में भी देखी जा सकती है।
Speaker A
इस पूरे डेटा को देखकर अब आप इंडियन पॉलिटिक्स को भी बेहतर समझ सकते हो।
Speaker A
इसे देखकर आप समझ सकते हो कि क्यों कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरजेडी नेता लालू यादव के साथ ओपनली मटन पकाकर खाया।
Speaker A
क्योंकि उन्हें पता था कि ज्यादातर हिंदू इससे ऑफेंड होने वाले नहीं हैं।
Speaker A
खासकर एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग।
Speaker A
जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव के दौरान मटन मछली पर हंगामा किया, क्योंकि उनकी पार्टी बीजेपी को।
Speaker A
कई लोग ब्राह्मण बनिया की पार्टी कहते हैं।
Speaker A
सावन के महीने में मटन बनाने का मौज ले रहे हैं।
Speaker A
इतना ही नहीं, उसका वीडियो बनाकर के देश के लोगों को चिढ़ाने का काम करते हैं।
Speaker A
बहुत से जनरल कैटेगरी के लोग, अपर कास्ट ब्राह्मण लोग बीजेपी को इसलिए सपोर्ट करते हैं।
Speaker A
क्योंकि बीजेपी अपर कास्ट को ज्यादा फेवर करती है।
Speaker A
या कह लीजिए कि ऐसा दिखाया जाता है।
Speaker A
क्योंकि बीजेपी का डबल स्टैंडर्ड केरला और नॉर्थ ईस्ट में क्लियरली दिखता है।
Speaker A
केरला में एएसआई स्टडी में पता चला कि 72 कम्युनिटीज महंगे मटन की तुलना में बीफ प्रेफर करती हैं।
Speaker A
एएसआई सर्वे के 20 साल बाद भी हमें टाइम्स ऑफ इंडिया, ट्रिब्यून और द प्रिंट से रिपोर्ट मिलती है।
Speaker A
कि आज भी केरला में हिंदू या तो शाकाहारी होते हैं और अगर वह नॉन-वेजिटेरियन हैं।
Speaker A
तो वह बीफ को किसी भी दूसरे मांस की तरह ही खाते हैं।
Speaker A
बीफ खाना केरला में किसी भी तरीके का सोशल स्टिग्मा नहीं है।
Speaker A
पर एक बार फिर से आप इसका असर पॉलिटिक्स पर देख सकते हो।
Speaker A
2017 में मलपुरम में बाय इलेक्शंस हुए।
Speaker A
बीजेपी के उम्मीदवार एन श्री प्रकाश ने वादा किया कि अगर लोग उन्हें वोट देंगे तो वह अच्छी क्वालिटी की बीफ सुनिश्चित करेंगे।
Speaker A
सही सुना आपने।
Speaker A
बीजेपी के कैंडिडेट ने बीफ की क्वालिटी का वादा किया।
Speaker A
ऐसे ही 2021 में बीजेपी ने तमिलनाडु में गाय की हत्या पर रोक लगाने का वादा किया।
Speaker A
लेकिन केरला स्टेट इलेक्शंस के लिए बीजेपी मेनिफेस्टो में यह वादा कहीं नहीं था।
Speaker A
त्रिपुरा में 83% हिंदू हैं।
Speaker A
फिर भी 2023 की त्रिपुरा स्टेट इलेक्शंस के दौरान भारतीय जनता पार्टी के मेनिफेस्टो में गाय या बीफ का कोई मेंशन नहीं मिला।
Speaker A
आरएसएस के प्रचारक और त्रिपुरा में बीजेपी के इलेक्शन मैनेजर सुनील देवधर ने 2018 में कहा था।
Speaker A
कि नॉर्थ ईस्ट में क्रिश्चियंस और मुस्लिम्स की अच्छी खासी संख्या है।
Speaker A
और लोगों को यह बात पचाने में मुश्किल हो सकती है, लेकिन यहां के बहुत से हिंदू भी बीफ खाते हैं।
Speaker A
और अगर वह बीफ बैन नहीं चाहते तो ऐसा नहीं होना चाहिए।
Speaker A
लेकिन कई ऐसे हिंदू भी हैं नॉर्थ ईस्ट में यह हजम होने के लिए थोड़ा डिफिकल्ट है लोगों को।
Speaker A
लेकिन मालूम रहना चाहिए कि फैक्ट इज फैक्ट।
Speaker A
कुछ जनजातियों में हिंदूज है जो गौमांस खाते हैं।
Speaker A
अगर वह लोग नहीं चाहते हैं तो उनके ऊपर बैन नहीं लगाना चाहिए।
Speaker A
इसलिए वहां पर नहीं लगाया है।
Speaker A
और फिर यह वीडियो भी देखो, बीजेपी स्पोक्सपर्सन सुधांशु त्रिवेदी का वायरल वीडियो।
Speaker A
जो नॉर्थ ईस्ट में खाया जाता है वह गाय है क्या?
Speaker A
नहीं जी।
Speaker A
उसका नाम है मिथुन।
Speaker A
तो यह जो पूरी पॉलिटिक्स बीजेपी नॉर्थ इंडियन स्टेट्स में खेल रही है।
Speaker A
बीफ के नाम पर लोगों से हिंसा करवाओ।
Speaker A
बीफ के नाम पर लोगों को डराओ।
Speaker A
और इनकी यह प्रोपेगेंडा फिल्में आती हैं जो एक बार फिर से बीफ का डर देखकर लोगों को पोलराइज करती हैं।
Speaker A
यह सब का सब एक नाटक है।
Speaker A
जब वोट्स चाहिए होते हैं तो इनके लिए बीफ ओके हो जाता है और जब हिंदी बेल्ट में पोलराइजेशन चाहिए।
Speaker A
तो बीफ पाप बन जाता है।
Speaker A
इसका धर्म से कुछ लेना-देना नहीं है।
Speaker A
यह बात सिर्फ और सिर्फ पॉलिटिक्स की है।
Speaker A
जियोग्राफी भी यहां पर एक बहुत बड़ा रोल प्ले करती है।
Speaker A
सीएसडीएस द्वारा कंडक्ट किए गए स्टेट ऑफ द नेशन सर्वे में देखने को मिलता है कि रीजनल वेरिएशंस हैं।
Speaker A
कोस्टल स्टेट्स में वेजिटेरियंस की पॉपुलेशन बहुत कम है।
Speaker A
जैसे कि केरला में सिर्फ 2% लोग वेजिटेरियन हैं, आंध्र प्रदेश में सिर्फ 4%।
Speaker A
ओडिशा में 8% और पश्चिम बंगाल में सिर्फ 3%।
Speaker A
जबकि वेस्ट और नॉर्थ में जो लैंड लॉक्ड स्टेट्स हैं, जहां पर मछलियां आसानी से नहीं मिल पाती हैं।
Speaker A
जहां पर गेहूं उगाना ज्यादा आसान है।
Speaker A
वहां वेजिटेरियंस की परसेंटेज सबसे ज्यादा है।
Speaker A
राजस्थान में 63% और हरियाणा में 62% लोग वेजिटेरियन हैं।
Speaker A
यहां पर कास्ट और जियोग्राफी के अलावा एक जेंडर डिवाइड भी देखने को मिलता है।
Speaker A
क्या आप गेस कर सकते हो दोस्तों, मेल्स और फीमेल्स में वेजिटेरियंस की ज्यादा परसेंटेज किसके बीच है?
Speaker A
वीडियो को पॉज करके 2 सेकंड सोच सकते हो।
Speaker A
शायद आप गेस करोगे कि फीमेल्स की ज्यादा परसेंटेज वेजिटेरियन है।
Speaker A
और यह गेस बिल्कुल सही होगी।
Speaker A
बहुत से सर्वेस में बार-बार यह देखा गया है जैसे कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 में।
Speaker A
जो औरतें ओकेजनली नॉन-वेज खाती हैं उनकी परसेंटेज 70.6% पर है।
Speaker A
और जबकि इंडियन मेन में यही परसेंटेज 83.4% पर है।
Speaker A
यह ट्रेंड सिर्फ हिंदुओं में नहीं, बल्कि दूसरे रिलीजंस में भी देखने को मिलता है।
Speaker A
कि औरतों के मुकाबले आदमी ज्यादा मीट खाते हैं।
Speaker A
हैरानी की बात यह है दोस्तों कि इस सब के बाद भी ज्यादातर लोग शाकाहारी होने को लेकर कहते हैं।
Speaker A
कि यह तो मेरा विश्वास है।
Speaker A
यह मेरा धर्म है।
Speaker A
लेकिन इन सारे सर्वे से हमें पता चलता है कि शाकाहारी होना अपनी पर्सनल बिलीफ पर इतना निर्भर नहीं करता।
Speaker A
जितना कि विरासत में मिली हुई कल्चरल प्रैक्टिस पर।
Speaker A
आपके परिवार के वेजिटेरियन या नॉन-वेजिटेरियन होने के पीछे।
Speaker A
जियोग्राफी, इकोनॉमिक वेल बीइंग और कास्ट इससे कहीं ज्यादा बड़ा रोल प्ले करते हैं।
Speaker A
और यही हिंदुइज्म की सच्चाई है।
Speaker A
इंडिया वैसे तो एक डाइवर्स देश है, लेकिन हिंदुओं में भी बहुत से अलग-अलग तरह के लोग देखने को मिलते हैं।
Speaker A
एक तरफ अघोरी सन्यासी हैं जो इंसानी मुर्दे का मांस भी खा लेते हैं।
Speaker A
और दूसरी तरफ सुधा मूर्ति जैसे लोग हैं।
Speaker A
जो देश से बाहर जाते हुए अपने चम्मच प्लेट भी साथ लेकर जाते हैं।
Speaker A
क्योंकि यह लोग इतने प्योर वेजिटेरियंस हैं कि साफ-सुथरे बर्तनों में भी इन्हें मीट की स्मेल आ जाती है।
Speaker A
प्योर वेज वाले।
Speaker A
किधर भी ले जाओ इनको।
Speaker A
प्लेट्स सूंघते रहेंगे।
Speaker A
मेरे को ना इसमें मटन का स्मेल आ रहा है।
Speaker A
अगर आपको वेजिटेरियन बनना है तो जरूर बनिए।
Speaker A
क्योंकि यह पर्यावरण के लिए बेहतर है।
Speaker A
एनिमल क्रुएल्टी के पर्सपेक्टिव से यह मोरली और एथिकली सही चीज है।
Speaker A
क्लाइमेट चेंज के नजरिए से भी एक वेजिटेरियन डाइट का क्लाइमेट को खराब करने में कम कॉन्ट्रिब्यूशन रहता है।
Speaker A
और हेल्थ के पर्सपेक्टिव से भी ढेरों साइंटिफिक स्टडीज में यह पाया गया है कि जो लोग कम मीट खाते हैं।
Speaker A
वह ज्यादा उम्र तक जीते हैं, ज्यादा हेल्दी रहते हैं।
Speaker A
इन सब पॉइंट्स को कंसीडर करके बाय चॉइस वेजिटेरियन बनिए।
Speaker A
मेरी तरह।
Speaker A
लेकिन इसलिए मत वेजिटेरियन बने कि मेरा मीट खाने से धर्म भ्रष्ट हो जाएगा।
Speaker A
मीट अशुद्ध होती है।
Speaker A
मैं मंगलवार को नहीं खा सकता।
Speaker A
ऑनेस्टली अहिंसा की फिलॉसफी जेन्युइनली पावरफुल है।
Speaker A
जैनिज्म और बुद्धिज्म ने कंपैशन को सेंटर में रखा और बहुत से हिंदुओं ने बाय चॉइस उस पाथ को अपनाया।
Speaker A
यह एक बहुत सुंदर फिलोसॉफिकल ट्रेडिशन है, लेकिन प्रॉब्लम तब शुरू होती है।
Speaker A
जब इसे मोरल सुपीरियरिटी और कास्ट हायरार्की का टूल बना दिया जाता है।
Speaker A
हिंदू धर्म की डाइवर्सिटी इसके स्क्रिप्चर्स और हिस्ट्री में दिखती है।
Speaker A
और यह एक ऐसी चीज है जो आपको इन नफरतखोर प्रोपेगेंडा फिल्मों में कभी जानने को नहीं मिलेगी।
Speaker A
ऐसी फिल्मों में ऐसे ढेर सारे झूठ भरे होते हैं जिनका इकलौता मकसद होता है।
Speaker A
लोगों के अंदर नफरत घोलना।
Speaker A
कभी यह इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं।
Speaker A
तो कभी अपने ही धर्म के खिलाफ झूठ फैलाते हैं।
Speaker A
लव जिहाद जैसे झूठों के बारे में और डिटेल में जानना है तो उसे मैंने इस वाले वीडियो में एक्सपोज किया है।
Speaker A
यहां क्लिक करके देख सकते हो।
Speaker A
और यहां क्लिक करके एआई मास्टरक्लास को जॉइन करना मत भूलना, आखिरी ऑपर्चुनिटी है आपके लिए।
Speaker A
बहुत-बहुत धन्यवाद।
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