Speaker A
मैकियावेली कहते थे दुनिया में हर इंसान वो देखता है जो तुम बाहर से नजर आते हो। बहुत कम लोग वह महसूस कर पाते हैं जो तुम असल में हो। जिस व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास यानी कॉन्फिडेंस नहीं होता, उसके पास दुनिया कुछ देर बैठ तो सकती है, लेकिन वहां ठहरती कभी नहीं है। तुम जहां भी जाओ वहां तुम्हारी चाल, तुम्हारा खड़े होने का तरीका, तुम्हारी आंखों का सीधा संपर्क और तुम्हारी आवाज का उतार-चढ़ाव यही सब मिलकर तुम्हारे ओरे का निर्माण करते हैं। लोग सबसे पहले तुम्हारी शक्ल या तुम्हारे कपड़े नहीं देखते। वह सबसे पहले यह देखते हैं कि तुम खुद को किस नजर से देखते हो। इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लो एक ऑफिस की मीटिंग चल रही है। एक इंसान है जो कुर्सी पर सिकुड़ कर बैठा है। बोलते हुए बार-बार अपने हाथ मल रहा है और उसकी नजरें नीचे झुकी हैं। वहीं दूसरा इंसान है जो अपनी कुर्सी पर पूरी तरह रिलैक्स होकर कंधे चौड़े करके बैठा है। वो जब बोलता है तो उसकी आंखों में एक ठहराव होता है और आवाज में एक वजन होता है। अब तुम खुद बताओ, कमरे में मौजूद बॉस और बाकी लोग किसकी बात को गंभीरता से लेंगे? जाहिर सी बात है दूसरे इंसान की। अगर तुम खुद को कमजोर, हिचकिचाहट से भरा हुआ या डरे हुए अंदाज में दुनिया के सामने पेश करोगे तो यह दुनिया बहुत जालिम है। वो तुम्हें सच में कमजोर ही समझेगी और तुम्हें कुचल कर आगे बढ़ जाएगी। लेकिन उसी जगह पर अगर तुम सीधे खड़े रहो, तुम्हारे कंधे पीछे की तरफ खुले हो, गर्दन हल्की सी उठी हो, आंखों में एक शिकारियों जैसी स्थिरता हो और चेहरे पर एक शांत ठहराव भरा आत्मविश्वास हो, तो मैं गारंटी देता हूं। लोग तुम्हें हल्के में लेने की हिम्मत तो दूर सोचेंगे भी नहीं। ध्यान रखो, एक पावरफुल ओरा का आधा हिस्सा तुम्हारे शब्दों से नहीं बल्कि तुम्हारी खामोश उपस्थिति से बनता है। मैकियावेली स्पष्ट कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने माइंड पर स्वयं पर विजय पा लेता है, उस पर कोई बाहरी शक्ति विजय नहीं पा सकती और यह आत्मविजय, यह अंदर की जीत तुम्हारे चेहरे और तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज से बाहर साफ दिखाई देती है। इसलिए आज के बाद जब तुम किसी कमरे में प्रवेश करो तो ऐसे चलो कि वहां बैठे लोगों को लगे कि इस कमरे में जो सबसे स्थिर और मजबूत ऊर्जा आई है वह तुम्हारी है। किसी कुर्सी पर ऐसे बैठो कि लोगों को तुरंत महसूस हो जाए कि यह व्यक्ति खुद को बहुत अच्छी तरह जानता है। यह अपने फैसलों पर अडिग रहता है और दूसरों की फालतू राय पर डोलता नहीं है। और जब तुम अपना मुंह खोलो, जब तुम बोलो तो तुम्हारी आवाज में ऐसा गजब का संतुलन और दृढ़ता होनी चाहिए कि सामने वाला सिर्फ तुम्हारी बात ना सुने बल्कि तुम्हारी उस भारी ऊर्जा को अपने सीने में महसूस करें। याद रखो दोस्त, कॉन्फिडेंस का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि तुम दूसरों को नीचा दिखाओ या उनसे ऊंचे दिखने का नाटक करो। कॉन्फिडेंस का असली मतलब यह है कि तुम किसी भी हालत में खुद को दूसरों से नीचे ना महसूस करो। जब तुम अपने भीतर यह डार्क और पावरफुल भावना विकसित कर लेते हो कि मुझे कोई नहीं तोड़ सकता, दुनिया की कोई भी चीज मुझे हिला नहीं सकती, तब तुम्हारी मौजूदगी ही लोगों के लिए एक चुंबक बन जाती है। लोग तुम्हारी तरफ सिर्फ इसलिए आकर्षित नहीं होते कि तुम अच्छे दिखते हो। वह इसलिए खींचे चले आते हैं क्योंकि तुम मानसिक रूप से मजबूत दिखते हो। एकदम अडिग दिखते हो। और सबसे बड़ी बात तुम्हें खुद पर अंधा भरोसा होता है। जब यह स्थिर, शांत और मजबूत कॉन्फिडेंस तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज के रोम रोम में उतर जाएगा तो तुम्हारा ओरा इतना शक्तिशाली हो जाएगा कि किसी भी महफिल में तुम्हें नजरअंदाज करना किसी के बाप के लिए भी नामुमकिन हो जाएगा। लोग तुम्हारी ओर खींचेंगे, तुम्हें समझने की कोशिश करेंगे और तुम्हारी एनर्जी उनके दिमाग में एक ऐसी गहरी छाप छोड़ देगी जो कभी नहीं मिटेगी। यही है वह पावरफुल कॉन्फिडेंट अपीयरेंस जो शब्दों से नहीं बल्कि आपकी मौजूदगी से दुनिया को जीत लेती है। नंबर दो, वॉक विद कॉन्फिडेंस। मजबूत चाल बिना बोले दुनिया को जीतने का तरीका। मैकियावेली का मानना था कि मनुष्य का सबसे पहला परिचय उसकी जुबान या उसकी वाणी नहीं होती बल्कि उसकी चाल होती है। कोई व्यक्ति अपने दिमाग में क्या सोच रहा है? वह अंदर से कैसा महसूस कर रहा है? यह सब उसके शब्दों से नहीं बल्कि उसके चलने के अंदाज से पूरी दुनिया एक सेकंड में समझ लेती है।