Speaker A
समुद्र किनारे की काली चट्टानों पर एक बूढ़ा कौआ मरा पड़ा था और उसके दोनों पंजे अब भी एक बड़े सीप के अंदर जकड़े हुए थे। कुछ घंटे पहले कौआ समुद्र के ऊपर उड़ रहा था। तभी उसकी नजर एक खुले हुए बड़े सीप पर पड़ी। उसे लगा कि उसे शानदार भोजन मिल गया है। वह तेजी से नीचे झपटा और अपने पंजे सीप के अंदर गड़ा दिए। खतरा महसूस होते ही सीप ने अपनी दोनों परतें जोर से बंद कर ली और कौएं के पंजे फंस गए। कौवा पूरी ताकत से छूटने की कोशिश करता रहा लेकिन खुद को आजाद नहीं कर पाया। इसी दौरान ज्वार आने लगा। समुद्र का पानी धीरे-धीरे उसके पैरों तक पहुंचा। फिर सीने तक और आखिरकार सिर तक। वह चाहता तो उस मांस के टुकड़े को छोड़कर खुद को बचा सकता था। लेकिन उसने अपनी पकड़ नहीं छोड़ी। आखिरी पल तक वह उसी शिकार को पकड़े रहा और वहीं उसकी मौत का कारण बन गया। मनोविज्ञान में इसे टारगेट टर्नल विजन इफेक्ट कहा जाता है। जब इंसान किसी एक चीज को पाने की ज़िद में अंधा हो जाता है, तो वह अपने आसपास पड़ते खतरों को देखना बंद कर देता है। जिंदगी में भी कई लोग मामूली फायदे या खुद को सही साबित करने की ज़िद में दूसरों से उलझे रहते हैं। इस चक्कर में वे अपना समय, ऊर्जा और मन की शांति तक खो देते हैं। उन्हें लगता है कि वे लड़ाई जीत रहे हैं। जबकि असल में वे खुद को ही नुकसान पहुंचा रहे होते हैं। एक समझदार इंसान की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि वह सही समय पर अपनी पकड़ ढीली करना और नुकसानदेह चीजों को छोड़ना जानता है। कई बार जिस चीज को आप पकड़ कर बैठे होते हैं वही आपको डुबो रही होती है।











