सही और गलत की परिभाषा ताकतवर और कमजोर के नजरिए से बदलती है, इसे साइकोलॉजी में सेल्फ सर्विंग बायस कहते हैं।
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Key Takeaways
- सही और गलत की परिभाषा सामाजिक और शक्ति संबंधी होती है।
- सेल्फ सर्विंग बायस हमारे नियमों और न्याय की समझ को प्रभावित करता है।
- ताकतवर और कमजोर की भूमिका नैतिकता की व्याख्या में महत्वपूर्ण है।
- दिमाग अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए नियमों को बदल सकता है।
- समाज में न्याय का अनुभव व्यक्तिगत शक्ति पर निर्भर करता है।
What the video covers
- एक चूहा गेहूं का दाना लेकर भाग रहा था, जिसे इंसान और गांव वाले चोर समझते थे।
- कुछ दिन बाद वही इंसान मधुमक्खियों का छत्ता तोड़कर शहद लाया, जिसे मेहनत माना गया।
- एक ही काम करने वाले की स्थिति बदलने से सही और गलत की परिभाषा भी बदल जाती है।
- साइकोलॉजी में इसे सेल्फ सर्विंग बायस कहा जाता है।
- जब बात अपनी होती है तो दिमाग नियम भी अपने हिसाब से बदल लेता है।
- सही और गलत जैसी कोई वस्तुनिष्ठ चीज नहीं होती।
- यहां केवल दो कैटेगरी होती हैं: स्ट्रांग (ताकतवर) और वीक (कमजोर)।
- ताकतवर व्यक्ति का काम नियम माना जाता है, जबकि कमजोर का जुर्म।
- ताकतवर बनने पर दुनिया की कठोरता भी आपके लिए दयालु लगने लगती है।
- यह वीडियो मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से सामाजिक न्याय और नैतिकता की व्याख्या करता है।
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Speaker A
एक चूहा अपनी जान बचाकर भाग रहा था। उसके मुंह में गेहूं का एक दाना था। इंसान ने उसे देखा और चिल्लाया। चोर पूरा गांव उसके पीछे पड़ गया। चूहे को तो यह भी नहीं पता था कि जो खाना उसे मिला है, इंसान उसे चोरी कहता है। कुछ दिन बाद वही इंसान मधुमक्खियों का पूरा छत्ता तोड़कर शहद उठा लाया। इस बार किसी ने उसे चोर नहीं कहा। सब बोले, वाह कितना मेहनती आदमी है। एक ही काम बस करने वाला बदल गया और उसके साथ सही और गलत की पूरी परिभाषा भी बदल गई। साइकोलॉजी में इसे सेल्फ सर्विंग बायस कहा जाता है। जब बात अपनी होती है तो हमारा दिमाग नियम भी अपने हिसाब से बदल लेता है। इसलिए याद रखना, सही और गलत जैसी कोई चीज नहीं होती। यहां बस दो ही कैटेगरी होती हैं। स्ट्रांग और वीक। ताकतवर वही काम करे तो लोग उसे नियम कहते हैं। वही काम अगर कमजोर करे तो लोग उसे जुर्म कह देते हैं। जिस दिन तुम ताकतवर बन गए ना, उसी दिन तुम्हें महसूस होगा कि यह जालिम दुनिया तुम्हारे लिए कितनी काइंड हो सकती है।
Speaker A
कहता है। कुछ दिन बाद वही इंसान मधुमक्खियों का पूरा छत्ता तोड़कर शहद उठा लाया। इस बार किसी ने उसे चोर नहीं कहा। सब बोले वाह कितना मेहनती आदमी [संगीत] है। एक ही काम बस करने वाला बदल गया और
Speaker A
उसके साथ सही और गलत की पूरी परिभाषा भी बदल गई। साइकोलॉजी में इसे सेल्फ सर्विंग बायस कहा जाता है। जब बात अपनी होती है तो हमारा दिमाग नियम भी अपने हिसाब से बदल लेता है। इसलिए याद रखना सही और गलत जैसी
Speaker A
कोई चीज नहीं होती। यहां बस दो ही कैटेगरी होती है। स्ट्रांग और वीक। ताकतवर वही काम करे तो लोग उसे नियम कहते हैं। वही काम अगर कमजोर करे तो लोग उसे जुर्म कह देते हैं। जिस दिन तुम ताकतवर बन गए ना, उसी
Speaker A
दिन तुम्हें महसूस होगा कि यह जालिम दुनिया तुम्हारे लिए कितनी काइंड हो सकती
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