स्त्री को पाना है? उसके पीछे भागना छोड़ दो जीवन बदल देन… — Transcript

पुरुषों के लिए जीवन बदलने वाला ओशो का संदेश: स्त्री को पाने के लिए पीछा छोड़ो, स्वयं को खोजो और पूर्ण बनो।

Key Takeaways

  • स्त्री को पाने के लिए पीछा करना छोड़ो, स्वयं को खोजो और पूर्ण बनो।
  • आकर्षण पूर्णता, आत्मविश्वास और आंतरिक शांति से आता है, न कि मांगने या दिखावे से।
  • सच्चा प्रेम आवश्यकता नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और संतुलन से जन्मता है।
  • अपने भीतर की ऊर्जा और चेतना को विकसित करो, यही सबसे बड़ा आकर्षण है।
  • जो अपने भीतर स्थिर होता है, वह बिना प्रयास के दूसरों को आकर्षित करता है।

Summary

  • मनुष्य जीवन का नियम है कि जो चीज पीछा करता है, वह दूर भागती है और जो छोड़ देता है, वह पास आती है।
  • पुरुष स्त्री को पाने की चाह में अपनी गरिमा और केंद्र खो देते हैं, जबकि आकर्षण पूर्णता से उत्पन्न होता है।
  • जो पुरुष स्वयं में आनंदित और संतुष्ट होता है, उसकी ऊर्जा स्त्रियों को आकर्षित करती है।
  • स्त्री चेहरे से नहीं, बल्कि व्यक्ति की ऊर्जा और अस्तित्व से प्रभावित होती है।
  • आवश्यकता और प्रेम में अंतर है; आवश्यकता में भय और पकड़ होती है, जो प्रेम को खत्म कर देती है।
  • सच्चा प्रेम तब आता है जब व्यक्ति पूर्ण होता है और बांटने के लिए प्रेम करता है।
  • आत्मिक संतुलन, आत्मविश्वास और स्वयं की स्वीकार्यता सबसे बड़ा आकर्षण है।
  • जो व्यक्ति स्वयं को सिद्ध करने में लगा रहता है, वह स्वयं को नहीं जानता।
  • प्रेम कोई युद्ध नहीं है, इसलिए स्त्री को जीतने की कोशिश न करें।
  • अपने जीवन का केंद्र स्वयं बनाएं, तभी संसार आपके पीछे आएगा।

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Speaker A
मित्रों, मनुष्य का जीवन बड़ा विचित्र है। जिस चीज के पीछे हम भागते हैं, वह हमसे दूर भागती चली जाती है और जिस चीज के पीछे भागना छोड़ देते हैं, वही एक दिन हमारे द्वार पर दस्तक देने लगती है। यही नियम
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Speaker A
संबंधों का भी है। बहुत से पुरुष अपना पूरा जीवन स्त्री को पाने की चिंता में लगा देते हैं। वे सोचते हैं कि यदि कोई स्त्री उन्हें स्वीकार कर ले, प्रेम कर ले, उनके साथ चलने लगे, तो उनका जीवन
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Speaker A
पूर्ण हो जाएगा। लेकिन इसी चाहत में वे अपनी गरिमा खो देते हैं। अपना केंद्र खो देते हैं। याद रखो, आकर्षण कभी मांगने से पैदा नहीं होता। आकर्षण पैदा होता है पूर्णता से। जब कोई पुरुष भीतर से खाली होता है, तब वह प्रेम नहीं खोज रहा होता।
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Speaker A
वह सहारा खोज रहा होता है और जो सहारा खोजता है, वह दूसरे के लिए बोझ बन जाता है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] कोई भी बोझ को अपने कंधों पर उठाना नहीं चाहता। लेकिन जिस दिन पुरुष स्वयं में आनंदित
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Speaker A
होना सीख लेता है, स्वयं के साथ प्रसन्न रहना सीख लेता है, उसी दिन उसके व्यक्तित्व में एक चुंबकत्व पैदा हो जाता है। स्त्री केवल चेहरे से प्रभावित नहीं होती। वह ऊर्जा को पढ़ती है। वह शब्दों से पहले तुम्हारे अस्तित्व को महसूस करती है।
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Speaker A
यदि तुम बेचैन हो तो तुम्हारी बेचैनी दिखाई देगी। यदि तुम भयभीत हो तो तुम्हारा भय दिखाई देगा। यदि तुम हर समय किसी को पाने की कोशिश में हो तो तुम्हारी यह कोशिश भी दिखाई देगी। और तब आकर्षण समाप्त
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Speaker A
हो जाता है। लेकिन जब तुम अपने काम में डूबे होते हो, अपने विकास में लगे होते हो, अपने जीवन को सुंदर बनाने में व्यस्त होते हो, तब तुम्हारे चारों ओर एक अलग ही आभा निर्मित होने लगती है। ऐसा व्यक्ति
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Speaker A
किसी से कुछ मांगता नहीं। उसकी आंखों में याचना नहीं होती। उसके शब्दों में मजबूरी नहीं होती। उसके व्यवहार में चिपकाव नहीं होता और यही बात उसे आकर्षक बनाती है। इसलिए स्त्री को पाने का प्रयास मत करो। स्वयं को पाने का प्रयास करो। अपने भीतर
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Speaker A
की शक्तियों को जगाओ। अपने व्यक्तित्व को निखारो। अपने जीवन में उद्देश्य पैदा करो। जब कोई पुरुष अपने मार्ग पर दृढ़ता से चलने लगता है तब लोग उसकी ओर आकर्षित होने लगते हैं। उसका आत्मविश्वास, उसका संतुलन, उसकी शांति दूसरों को खींचने लगती है। तब
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Speaker A
प्रेम भी आता है, संबंध भी आते हैं, लोग भी आते हैं। लेकिन तब वे आवश्यकता के कारण नहीं आते बल्कि तुम्हारी पूर्णता के कारण आते हैं। याद रखो जो स्वयं के पीछे चलना सीख जाता है, उसके पीछे संसार चलने लगता
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Speaker A
है और जो संसार के पीछे भागता है, संसार उससे दूर भागता रहता है। इसलिए अपने भीतर लौटो। स्वयं को जानो। स्वयं को विकसित करो। फिर तुम्हें किसी के पीछे भागने की आवश्यकता नहीं रहेगी। जो तुम्हारे योग्य होगा, वह स्वयं तुम्हारे जीवन में आने
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Speaker A
लगेगा। तुमने कभी ध्यान दिया है जब कोई व्यक्ति किसी को प्रभावित करने की बहुत कोशिश करता है तो उसका प्रभाव समाप्त हो जाता है और जो व्यक्ति किसी को प्रभावित करने की चिंता ही नहीं करता वही सबसे अधिक
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Speaker A
प्रभावशाली दिखाई देता है। यह जीवन का एक गहरा रहस्य है। पुरुष सदियों से स्त्री को समझने की कोशिश करता रहा है। लेकिन समझने से पहले वह एक भूल कर देता है। वह स्वयं को भूल जाता है। वह सोचता है कि यदि वह
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Speaker A
अधिक सुंदर बन जाए, [नाक से की जाने वाली आवाज़] अधिक धनवान बन जाए, अधिक बातें करना सीख जाए, तो स्त्री उसकी ओर आकर्षित हो जाएगी। लेकिन आकर्षण का जन्म इन चीजों से नहीं होता। आकर्षण का जन्म तुम्हारी चेतना से होता
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Speaker A
है। जब तुम स्वयं को स्वीकार कर लेते हो, तब तुम्हारे भीतर एक स्थिरता पैदा होती है और स्थिर व्यक्ति के पास एक अदृश्य शक्ति होती है। स्त्री उस शक्ति को महसूस करती है। जिस पुरुष का सुख किसी स्त्री पर
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Speaker A
निर्भर है, वह भीतर से कमजोर है, और कमजोरी कभी आकर्षण पैदा नहीं करती। लेकिन जो व्यक्ति अकेले भी प्रसन्न रह सकता है, जो बिना किसी सहारे के भी संतुष्ट है, उसके भीतर स्वतंत्रता की सुगंध होती है और स्वतंत्रता हमेशा आकर्षक होती है। ध्यान
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Speaker A
रखना प्रेम और आवश्यकता में बहुत अंतर है। अधिकांश लोग प्रेम नहीं करते। वे आवश्यकता को प्रेम का नाम दे देते हैं। उन्हें किसी की जरूरत होती है इसलिए वे कहते हैं कि वे प्रेम करते हैं। लेकिन जहां जरूरत है वहां
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Speaker A
भय होगा। जहां भय है वहां पकड़ होगी और जहां पकड़ है वहां प्रेम मर जाता है। सच्चा प्रेम तब जन्म लेता है जब तुम पूर्ण होते हो। जब तुम किसी को पाने के लिए नहीं बल्कि बांटने के लिए उसके पास जाते हो। जब
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Speaker A
तुम्हारे पास इतना आनंद हो कि वह छलकने लगे तब तुम्हारी उपस्थिति ही आकर्षण बन जाती है। फिर तुम्हें किसी के पीछे भागना नहीं पड़ता। फूल कभी तितलियों के पीछे नहीं भागता। फूल केवल खिलता है। और जब वह खिल जाता है, तितलियां स्वयं चली आती हैं।
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Speaker A
यही जीवन का नियम है। तुम भी खिलो। अपने ज्ञान में खिलो। अपने ध्यान में खिलो। अपने कार्य में खिलो। अपने व्यक्तित्व में खिलो और फिर देखना जिन लोगों का तुम पीछा करते थे वे स्वयं तुम्हारी ओर आकर्षित होने लगेंगे क्योंकि संसार को उन लोगों की
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Speaker A
तलाश है जो पूर्ण हैं। उन लोगों की नहीं जो भीख मांग रहे हैं। इसलिए स्वयं को इतना समृद्ध बनाओ कि तुम्हारी उपस्थिति ही निमंत्रण बन जाए। तब किसी को बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। जो तुम्हारे योग्य होगा, वह स्वयं तुम्हारे जीवन में प्रवेश
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Speaker A
कर जाएगा। मित्रों, एक और बात समझ लो। स्त्री को जीतने की कोशिश मत करो। क्योंकि प्रेम कोई युद्ध नहीं है। जहां जीतने की इच्छा है, वहां हार का भय भी होगा। और जो [नाक से की जाने वाली आवाज़] भय में जी
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Speaker A
रहा है, वह कभी प्रेम के योग्य नहीं बन सकता। लोग पूछते हैं ऐसा क्या करें कि लोग हमारी ओर आकर्षित हो। मैं कहता हूं आकर्षित होने की चिंता ही छोड़ दो। जिस दिन यह चिंता समाप्त हो जाती है, उसी दिन
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Speaker A
तुम्हारे व्यक्तित्व में एक नई चमक पैदा होती है। क्योंकि चिंता तुम्हें कृत्रिम बना देती है। तुम वैसे नहीं रहते जैसे हो। तुम अभिनय करने लगते हो। तुम मुस्कुराते हो जबकि भीतर मुस्कान नहीं होती। तुम आत्मविश्वास दिखाते हो। जबकि भीतर डर छिपा
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Speaker A
होता है। तुम प्रेम दिखाते हो जबकि भीतर केवल अकेलेपन का भय होता है और जीवन में सबसे पहले झूठ पकड़ा जाता है। शब्दों से नहीं ऊर्जा से। स्त्री तुम्हारे शब्दों से पहले तुम्हारी ऊर्जा को पढ़ती है। यदि भीतर बेचैनी है तो वह महसूस कर लेगी। यदि
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Speaker A
भीतर लालच है तो वह महसूस कर लेगी। यदि भीतर स्वार्थ है तो वह भी छिप नहीं सकता। लेकिन यदि भीतर शांति है तो वह भी दिखाई देगी। यदि भीतर सम्मान है तो वह भी अनुभव होगा। यदि भीतर आत्मविश्वास है तो उसकी
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Speaker A
सुगंध भी फैल जाएगी। याद रखो आकर्षण का सबसे बड़ा रहस्य सुंदर चेहरा नहीं सुंदर चेतना है। चेहरे समय के साथ बदल जाते हैं। शरीर बूढ़ा हो जाता है। लेकिन चेतना की सुंदरता उम्र के साथ और गहरी होती जाती
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Speaker A
है। इसलिए अपना ध्यान बाहर से अधिक भीतर पर दो। हर दिन स्वयं को बेहतर बनाओ। कुछ नया सीखो। अपने मन को शांत करो। अपने क्रोध को समझो। अपने भय को पहचानो। अपने भीतर छिपे अंधकार में उतरने का साहस करो।
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Speaker A
जो व्यक्ति स्वयं को जान लेता है उसके भीतर एक ऐसी गरिमा पैदा हो जाती है जिसे कोई छीन नहीं सकता। और गरिमा हमेशा आकर्षित करती है। तब तुम किसी के पीछे नहीं भागते। तुम्हारा जीवन ही इतना अर्थपूर्ण हो जाता है कि लोग तुम्हारे पास
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Speaker A
आना चाहते हैं। जैसे पर्वत कहीं नहीं जाता लेकिन यात्री स्वयं उसकी ओर आते हैं। जैसे सागर किसी को बुलाता नहीं लेकिन नदियां स्वयं उसकी ओर बहती हैं। वैसे ही जो व्यक्ति अपने भीतर स्थापित हो जाता है उसके पीछे लोगों का आना स्वाभाविक हो जाता
09:00
Speaker A
है। इसलिए अपने जीवन का केंद्र किसी दूसरे को मत बनाओ। अपने जीवन का केंद्र स्वयं बनो। और जिस दिन तुम अपने केंद्र पर खड़े हो जाओगे। उसी दिन तुम्हें पता चलेगा कि आकर्षण का रहस्य किसी को पाने में नहीं।
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Speaker A
स्वयं को पाने में छिपा है। दुनिया का सबसे बड़ा आकर्षण सुंदरता नहीं है। शक्ति भी नहीं है, धन भी नहीं है। दुनिया का सबसे बड़ा आकर्षण है आत्मिक संतुलन। जो व्यक्ति अपने भीतर संतुलित है। वह बिना कुछ किए भी लोगों को प्रभावित करता है।
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Speaker A
क्योंकि उसके भीतर कोई संघर्ष नहीं चल रहा होता। वह स्वयं से लड़ नहीं रहा होता। वह स्वयं को साबित करने की कोशिश नहीं कर रहा होता। अधिकांश पुरुषों की समस्या यह है कि वे स्वयं को कम समझते हैं। भीतर कहीं ना
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Speaker A
कहीं उन्हें लगता है कि वे पर्याप्त नहीं हैं और इसी कमी को भरने के लिए वे दूसरों की स्वीकृति मांगते रहते हैं। वे चाहते हैं कि कोई उनकी प्रशंसा करें। कोई उन्हें चाहे, कोई उन्हें महत्वपूर्ण महसूस कराए। लेकिन जो महत्व दूसरों से मिलता है, वह
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Speaker A
हमेशा अस्थाई होता है। आज मिलेगा कल छीन जाएगा। सच्चा आत्मविश्वास तब पैदा होता है जब तुम स्वयं को स्वीकार कर लेते हो। जब तुम अपनी कमजोरियों को भी स्वीकार कर लेते हो और अपनी शक्तियों को भी तब तुम्हें
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Speaker A
किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं रहती। तब तुम किसी के सामने स्वयं को सिद्ध करने नहीं जाते। याद रखो जो व्यक्ति स्वयं को सिद्ध करने में लगा है, वह अभी स्वयं को जानता नहीं है। और जो स्वयं को जान लेता
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Speaker A
है, उसे कुछ सिद्ध करने की जरूरत नहीं रहती। उसकी आंखों में एक शांति होती है। उसके चलने में एक सहजता होती है। उसके शब्दों में एक गहराई होती है। यही बातें लोगों को आकर्षित करती हैं। स्त्री भी अंततः उसी पुरुष की ओर आकर्षित होती है जो
11:09
Speaker A
अपने भीतर स्थिर है। जो हर परिस्थिति में संतुलित रह सकता है। जो छोटी-छोटी बातों पर टूटता नहीं, जो हर समय ध्यान मांगता नहीं, जो प्रेम को बंधन नहीं बनाता बल्कि स्वतं
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Speaker A
इतना मूल्यवान बना लो कि तुम्हारा हर दिन विकास की दिशा में बढ़े। अपने शरीर को स्वस्थ बनाओ। अपने मन को शांत बनाओ। अपनी बुद्धि को प्रखर बनाओ। अपनी चेतना को जागृत करो। जब तुम्हारा जीवन भीतर से समृद्ध होने लगेगा तब तुम्हें महसूस होगा
11:48
Speaker A
कि आकर्षण पैदा करने की कोई तकनीक नहीं होती। आकर्षण तो तुम्हारे अस्तित्व की सुगंध है और सुगंध को फैलाने के लिए प्रयास नहीं करना पड़ता। फूल केवल खिलता है। सुगंध अपने आप फैल जाती है। ठीक वैसे ही जब तुम अपने वास्तविक स्वरूप में खिल
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Speaker A
जाओगे तब लोगों का तुम्हारी ओर आकर्षित होना स्वाभाविक हो जाएगा। क्योंकि संसार हमेशा उसी की ओर खींचता है जो स्वयं में पूर्ण है। जो स्वयं में शांत है और जो स्वयं में आनंदित है यही जीवन का रहस्य है। यही आकर्षण का सबसे गहरा नियम है।
Topics:ओशोप्रेरणादायक भाषणस्त्री को पानाआत्मविश्वासआकर्षण का रहस्यस्वयं को जानोप्रेम और आवश्यकताजीवन बदलने वाला संदेशहिंदी मोटिवेशनल स्पीचआत्मिक संतुलन

Frequently Asked Questions

स्त्री को पाने के लिए पुरुषों को क्या करना चाहिए?

पुरुषों को स्त्री के पीछे भागना छोड़कर स्वयं को खोजने और अपने भीतर की शक्तियों को जगाने पर ध्यान देना चाहिए। पूर्णता और आत्मविश्वास से ही आकर्षण उत्पन्न होता है।

आकर्षण का असली रहस्य क्या है?

आकर्षण का असली रहस्य सुंदरता या धन नहीं, बल्कि आत्मिक संतुलन, आंतरिक शांति और स्वयं की स्वीकार्यता है। जब व्यक्ति अपने भीतर स्थिर होता है, तभी वह दूसरों को आकर्षित करता है।

प्रेम और आवश्यकता में क्या अंतर है?

प्रेम स्वतंत्रता और पूर्णता से उत्पन्न होता है जबकि आवश्यकता में भय, पकड़ और कमजोरी होती है, जो प्रेम को समाप्त कर देती है। सच्चा प्रेम बांटने और बिना शर्त स्वीकार करने में होता है।

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